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HindiCBSE Class 10 · Chapter 1

सूरदास – पद Class 10: भावार्थ, विषय और काव्य-सौंदर्य

Updated 14 October 2026 · Fact-checked

सूरदास के पद क्षितिज भाग 2 का पहला पाठ है। इसमें सूरसागर के भ्रमरगीत से चार पद हैं। कृष्ण के मथुरा जाने के बाद उद्धव योग का संदेश लेकर आते हैं। गोपियाँ व्यंग्य से उसे ठुकराती हैं और प्रेम को ऊपर रखती हैं। बोर्ड इन पर काव्यांश के पाँच MCQ और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न पूछता है।

What सूरदास – पद is about

सूरदास – पद NCERT की पुस्तक क्षितिज भाग 2 के काव्य खंड का पहला पाठ है। ये चार पद सूरदास के ग्रंथ सूरसागर के 'भ्रमरगीत' से लिए गए हैं। भाषा ब्रजभाषा है और पद गाए जा सकते हैं। एक पंक्ति में कहें तो, गोपियाँ कृष्ण के भेजे योग-संदेश को व्यंग्य और तर्क से ठुकराकर अपने अटल प्रेम को सबसे ऊपर रखती हैं।

बोर्ड परीक्षा के खंड ग (काव्य खंड) में यह पाठ दो तरह से आता है। पहला, प्रश्न 9 में किसी पद का काव्यांश देकर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) पूछे जाते हैं, जिनमें एक कथन-कारण प्रश्न भी होता है। दूसरा, प्रश्न 10 में 25-30 शब्दों वाले 2 अंक के प्रश्न आते हैं, जैसे गोपियों का व्यंग्य, उनकी मनोदशा, 'गुर चाँटी ज्यौं पागी' का भाव या राजधर्म।

In real board papers: Course A, asked in 17 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 4.1 marks per paper; Course B, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026). See the questions

सूरदास – पद: explanation

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

पृष्ठभूमि: कृष्ण मथुरा चले गए और खुद लौटने के बजाय उद्धव के हाथ संदेश भेजा। उद्धव ने निर्गुण ब्रह्म और योग का उपदेश देकर गोपियों का विरह शांत करना चाहा। तभी एक भौंरा आ गया और गोपियों ने भौंरे के बहाने उद्धव पर व्यंग्य किए। यहीं से भ्रमरगीत शुरू होता है।

पहला पद: गोपियाँ उद्धव को 'बड़भागी' कहती हैं, पर यह व्यंग्य है। वे कहती हैं कि उद्धव कृष्ण के पास रहकर भी प्रेम के धागे से अछूते रहे। वे वैसे ही हैं जैसे कमल का पत्ता पानी में रहकर भी गीला नहीं होता, या तेल लगी गगरी पानी में डूबकर भी बूँद से बची रहती है। उद्धव ने प्रेम की नदी में कभी पैर नहीं डुबोया। अंत में गोपियाँ खुद को भोली अबला कहती हैं, जो कृष्ण के प्रेम में ऐसे लिपटी हैं जैसे चींटी गुड़ से चिपट जाती है।

दूसरा पद: गोपियों के मन की बात मन में ही रह गई। वे यह बात किससे कहें? अब तक कृष्ण के लौटने की आशा के सहारे उन्होंने तन-मन का दुख सहा। अब योग के संदेश सुन-सुनकर उनकी विरह की आग और भड़क उठी। जहाँ से वे रक्षा की पुकार की आशा रखती थीं, वहीं से योग की धारा बह आई। जब कृष्ण ने ही मर्यादा नहीं रखी, तो वे धैर्य क्यों रखें?

तीसरा पद: कृष्ण गोपियों के लिए हारिल पक्षी की लकड़ी जैसे हैं, जिसे वे कभी नहीं छोड़तीं। उन्होंने मन, कर्म और वचन से कृष्ण को हृदय में कसकर पकड़ रखा है। जागते, सोते, सपने में, दिन-रात वे 'कान्ह-कान्ह' रटती हैं। योग उन्हें कड़वी ककड़ी जैसा लगता है, एक ऐसा रोग जो न कभी देखा, न सुना, न भोगा। वे कहती हैं कि यह योग उन्हें दो जिनका मन चकरी की तरह अस्थिर है।

चौथा पद: गोपियाँ ताना मारती हैं कि कृष्ण अब राजनीति पढ़ आए हैं। वे पहले ही चतुर थे, अब बड़े ग्रंथ पढ़कर और चतुर हो गए, तभी योग-संदेश भेजा। पहले के भले लोग दूसरों के हित के लिए दौड़ते थे। अब गोपियाँ अपना वह मन वापस पा लेंगी जो कृष्ण जाते समय चुरा ले गए थे। जो दूसरों को अन्याय से छुड़ाते थे, वे खुद अन्याय क्यों करें? राजा का धर्म यही है कि प्रजा को सताया न जाए।

केंद्रीय भाव: इन पदों में ज्ञान और योग की तुलना में सच्चे, एकनिष्ठ प्रेम को ऊँचा बताया गया है। गोपियों का भोलापन, विरह की पीड़ा और तीखा वाक्चातुर्य साथ-साथ दिखते हैं। अंत में राजधर्म की बात सूर की लोकधर्मिता को दर्शाती है।

Themes and message

ज्ञान और योग पर प्रेम की जीत

उद्धव निर्गुण ब्रह्म और योग का उपदेश लेकर आते हैं, पर गोपियाँ प्रेम मार्ग को ही अपनाती हैं। उनके लिए योग जीवन से दूर, सूखी और कड़वी चीज़ है। वे उसे ऐसा रोग बताती हैं जिसे उन्होंने न देखा, न सुना, न भोगा। इससे पता चलता है कि सूर की दृष्टि में किताबी ज्ञान से बड़ा सहज मानवीय प्रेम है। यही भाव पूरे भ्रमरगीत की रीढ़ है।

From the text: तीसरे पद में योग को "ज्यौं करुई ककरी" कहा गया है और "सु तौ ब्याधि हमकौं लै आए" कहकर उसे रोग बताया गया है।

विरह की पीड़ा

कृष्ण के जाने के बाद गोपियाँ केवल उनके लौटने की आशा के सहारे जी रही थीं। उद्धव का योग-संदेश उस आशा को तोड़ देता है। इसलिए संदेश उनकी पीड़ा घटाने के बजाय बढ़ा देता है, जैसे आग में घी पड़ जाए। उनके मन की बातें मन में ही रह जाती हैं क्योंकि कहने के लिए कोई अपना पास नहीं है। उनका धैर्य भी टूटने लगता है।

From the text: दूसरा पद: "अवधि अधार आस आवन की, तन मन बिथा सही।" और "अब इन जोग सँदेसनि सुनि-सुनि, बिरहिनि बिरह दही।"

एकनिष्ठ और अटल प्रेम

गोपियों का प्रेम किसी एक पल का भाव नहीं, बल्कि मन, कर्म और वचन तीनों से जुड़ा है। हारिल पक्षी जैसे लकड़ी को कभी नहीं छोड़ता, वैसे ही वे कृष्ण को नहीं छोड़तीं। जागते-सोते, दिन-रात उनका ध्यान कृष्ण पर ही रहता है। चींटी और गुड़ की उपमा बताती है कि वे इस प्रेम से अलग होना ही नहीं चाहतीं। इसी दृढ़ता के कारण योग उनके मन में जगह नहीं बना पाता।

From the text: "हमारैं हरि हारिल की लकरी।" और "मन क्रम बचन नंद-नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी।"

व्यंग्य और वाक्चातुर्य

गोपियाँ भोली होकर भी बात कहने में बहुत चतुर हैं। वे सीधे गुस्सा नहीं करतीं, बल्कि प्रशंसा के शब्दों में ताना देती हैं। उद्धव को 'बड़भागी' कहकर वास्तव में उन्हें प्रेम से वंचित, यानी अभागा बताती हैं। कृष्ण के लिए 'राजनीति पढ़ि आए' कहकर उनकी चालाकी पर चोट करती हैं। इससे पता चलता है कि सच्चे अनुभव से निकले तर्क ज्ञानी उद्धव के उपदेश पर भारी पड़ते हैं।

From the text: "ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी।" (पहला पद) और "हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।" (चौथा पद)

राजधर्म और लोकधर्मिता

चौथे पद के अंत में गोपियाँ एक बड़ी बात कहती हैं। जो व्यक्ति दूसरों को अन्याय से छुड़ाता था, उसे स्वयं अन्याय नहीं करना चाहिए। राजा का सच्चा धर्म यह है कि उसकी प्रजा को कष्ट न हो। यहाँ गोपियाँ स्वयं को कृष्ण की प्रजा मानकर उन्हें उनका कर्तव्य याद दिलाती हैं। NCERT के अनुसार यह सूरदास की लोकधर्मिता को दर्शाता है, यानी प्रेम-काव्य में भी समाज और न्याय की चिंता है।

From the text: "ते क्यौं अनीति करैं आपुन, जे और अनीति छुड़ाए।" और "राज धरम तौ यहै" वाली अंतिम पंक्ति।

The speaker and the people in the poem

गोपियाँ (वक्ता)

चारों पदों की वक्ता; कृष्ण के वियोग में दुखी ब्रज की स्त्रियाँ, जो उद्धव के योग-संदेश का उत्तर देती हैं।

  • कृष्ण के प्रति एकनिष्ठ प्रेम: मन, कर्म, वचन से कृष्ण को हृदय में पकड़े हुए हैं।
  • भोली और सरल: स्वयं को "अबला हम भोरी" कहती हैं।
  • व्यंग्य-कुशल और वाक्चतुर: 'बड़भागी' और 'राजनीति पढ़ि आए' जैसे तानों से बात कहती हैं।
  • विरह से व्याकुल पर तर्कशील: योग-संदेश से उनकी विरह-अग्नि भड़कती है, फिर भी वे तर्क से उत्तर देती हैं।
  • न्याय की समझ रखने वाली: राजा के धर्म की बात कहकर कृष्ण को कर्तव्य याद दिलाती हैं।

"जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, कान्ह-कान्ह जक री।" उनके निरंतर प्रेम को और "बिरहिनि बिरह दही" उनकी पीड़ा को दिखाता है।

उद्धव (संबोधित)

कृष्ण के सखा और संदेशवाहक, जो मथुरा से गोपियों को निर्गुण ब्रह्म और योग का उपदेश देने आते हैं। गोपियाँ उन्हें 'मधुकर' भी कहती हैं।

  • ज्ञानी और योग के समर्थक: निर्गुण ब्रह्म और योग का उपदेश देते हैं।
  • प्रेम से अछूते: कृष्ण के पास रहकर भी प्रेम के धागे में नहीं बँधे।
  • भावनाओं को न समझने वाले: विरहिणी गोपियों को सूखा योग-संदेश सुनाते हैं।

"अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।" और "प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोर्यौ" से पता चलता है कि उन्होंने प्रेम का अनुभव ही नहीं किया।

कृष्ण (वर्णित)

गोपियों के प्रिय, जो मथुरा चले गए और स्वयं न आकर उद्धव के हाथ योग-संदेश भेजा; पदों में उनका वर्णन गोपियों की दृष्टि से होता है।

  • गोपियों के जीवन का आधार: हारिल की लकड़ी की तरह उनका सहारा।
  • गोपियों की दृष्टि में चतुर: "इक अति चतुर हुते पहिलैं ही"।
  • कर्तव्य से हटे हुए (गोपियों का आरोप): योग-संदेश भेजकर प्रेम की मर्यादा नहीं रखी और प्रजा को सताया।

"हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।" और "चलत जु हुते चुराए" (जाते समय मन चुरा ले गए) से गोपियों का उलाहना दिखता है।

Poetic devices

DeviceExampleEffect
दृष्टांत/उदाहरण (उपमा जैसी तुलना)"पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।"कमल के पत्ते के उदाहरण से समझाया गया है कि उद्धव प्रेम के बीच रहकर भी उससे अछूते रहे। रोज़मर्रा का चित्र गहरी बात को आसान बना देता है।
उपमा अलंकार"सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यौं करुई ककरी।"योग की तुलना कड़वी ककड़ी से की गई है। 'ज्यौं' वाचक शब्द है। इससे योग के प्रति गोपियों की अरुचि बहुत साफ़ और तीखी लगती है।
रूपक अलंकार"प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोर्यौ"प्रेम को नदी मान लिया गया है (उपमेय पर उपमान का आरोप)। इससे प्रेम की गहराई और उसमें डूबने का भाव उभरता है। 'सनेह तगा' (स्नेह का धागा) भी रूपक है।
पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार"कान्ह-कान्ह जक री" और "सुनि-सुनि"एक ही शब्द के दोहराव से निरंतरता का भाव आता है। गोपियाँ लगातार कृष्ण का नाम रटती हैं और बार-बार योग-संदेश सुनकर जलती हैं।
अनुप्रास अलंकार"बिरहिनि बिरह दही" और "कहिए जाइ कौन पै"'ब' और 'क' वर्णों की आवृत्ति से पंक्तियों में लय और संगीत आता है, जो पदों को गेय बनाता है।
व्यंग्य (वक्रोक्ति का भाव)"ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी।"शब्द प्रशंसा के हैं पर अर्थ उलटा है। गोपियाँ उद्धव को भाग्यवान कहकर वास्तव में प्रेम से वंचित, अभागा बताती हैं। इससे कटाक्ष और तीखा हो जाता है।
भाषा और गेयता"हमारैं हरि हारिल की लकरी।"ब्रजभाषा की मिठास, तुकांत पंक्तियाँ और 'ह' वर्ण की आवृत्ति पद को गाने योग्य बनाती है। लोक-जीवन के चित्र (हारिल, गुड़-चींटी, ककड़ी) भाव को सहज बनाते हैं।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी।

    गोपियाँ: पहले पद की पहली पंक्ति, जिसमें गोपियाँ उद्धव को संबोधित करती हैं।

    पूरे पद का व्यंग्य यहीं से शुरू होता है। 'बड़भागी' कहकर वे उद्धव को प्रेम से वंचित बताती हैं; बोर्ड इस व्यंग्य पर प्रश्न पूछता है।

  • अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यौं पागी

    गोपियाँ: पहले पद का अंत, जहाँ गोपियाँ उद्धव से अपनी तुलना करती हैं।

    गोपियाँ अपने भोलेपन और कृष्ण-प्रेम में पूरी तरह डूबे होने को चींटी और गुड़ की उपमा से दिखाती हैं।

  • अब इन जोग सँदेसनि सुनि-सुनि, बिरहिनि बिरह दही।

    गोपियाँ: दूसरे पद में, योग-संदेश सुनने के बाद की दशा।

    दिखाता है कि योग-संदेश ने विरह शांत करने के बजाय विरह की आग और भड़का दी।

  • मरजादा न लही

    गोपियाँ: दूसरे पद की अंतिम पंक्ति, जहाँ वे पूछती हैं कि अब धैर्य क्यों रखें।

    इससे संकेत मिलता है कि कृष्ण ने प्रेम की मर्यादा नहीं निभाई, इसलिए गोपियों का धैर्य भी टूट गया।

  • हमारैं हरि हारिल की लकरी।

    गोपियाँ: तीसरे पद की पहली पंक्ति।

    कृष्ण गोपियों के जीवन का एकमात्र सहारा हैं, जैसे हारिल पक्षी की लकड़ी। यह उनके अटल प्रेम का सबसे बड़ा प्रतीक है।

  • जिनके मन चकरी

    गोपियाँ: तीसरे पद का अंत, जहाँ वे बताती हैं कि योग किसे देना चाहिए।

    योग उन्हें दिया जाए जिनका मन अस्थिर है; गोपियों का मन तो कृष्ण पर स्थिर है।

  • हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।

    गोपियाँ: चौथे पद की पहली पंक्ति, कृष्ण के योग-संदेश भेजने पर ताना।

    कृष्ण की चालाकी पर व्यंग्य है; गोपियों के अनुसार वे अब प्रेम छोड़कर चालें चलने लगे हैं।

  • राज धरम तौ यहै

    गोपियाँ: चौथे पद की अंतिम पंक्ति, जहाँ वे राजा का धर्म बताती हैं।

    प्रजा को न सताना ही राजधर्म है; यह सूरदास की लोकधर्मिता का प्रमाण है।

सूरदास – पद in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

एकनिष्ठ और अटल प्रेम (हारिल की लकड़ी)

मान लीजिए आप रोज़ सुबह क्रिकेट की नेट-प्रैक्टिस करते हैं क्योंकि आपका सपना जिले की टीम में खेलना है। मोहल्ले के दोस्त रोज़ कहते हैं कि मोबाइल पर गेम खेलो, प्रैक्टिस छोड़ो। फिर भी आप अपने लक्ष्य से नहीं हटते।

'हमारैं हरि हारिल की लकरी' पंक्ति के आधार पर समझाइए कि आपकी लगन और गोपियों के प्रेम में क्या समानता है।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. हारिल पक्षी सदा लकड़ी पकड़े रहता है, उसे छोड़ता नहीं।
  2. गोपियाँ कृष्ण-प्रेम को 'मन क्रम बचन' से दृढ़ता से पकड़े हैं; योग का उपदेश भी उन्हें नहीं डिगाता।
  3. आप भी दोस्तों के बहकावे के बीच अपना लक्ष्य नहीं छोड़ते।
  4. समानता: एक ही लक्ष्य के प्रति अटल निष्ठा।

Answer: जैसे हारिल पक्षी लकड़ी कभी नहीं छोड़ता और गोपियाँ योग-संदेश सुनकर भी कृष्ण-प्रेम नहीं छोड़तीं, वैसे ही मैं दोस्तों के बहकाने पर भी प्रैक्टिस नहीं छोड़ता। दोनों में एक लक्ष्य के प्रति अटल निष्ठा है।

Memory hook: लक्ष्य को हारिल की लकड़ी बना लो, कोई भी 'गेम' उसे छुड़ा न पाए।

अनुभव के बिना दिया गया सूखा उपदेश (अपरस उद्धव)

कल्पना कीजिए आपकी सहेली का सबसे पक्का दोस्त परिवार के साथ दूसरे शहर चला गया है और वह बहुत उदास है। एक सहपाठी, जिसका कभी कोई पक्का दोस्त नहीं रहा, उससे कहता है, 'इसमें रोने की क्या बात है, नए दोस्त बना लो।'

इस सहपाठी की तुलना पहले पद के उद्धव से कीजिए। गोपियाँ ऐसे व्यक्ति को क्या उत्तर देतीं?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. उद्धव 'अपरस रहत सनेह तगा तैं', प्रेम के धागे से अछूते थे।
  2. कमल के पत्ते और तेल की गगरी की तरह उन पर प्रेम की एक बूँद नहीं ठहरी।
  3. जो प्रेम में डूबा नहीं, वह विरह की पीड़ा नहीं समझ सकता; उसका उपदेश सूखा लगता है।
  4. गोपियाँ व्यंग्य से कहतीं: तुम 'बड़भागी' हो, तुम्हें कभी किसी से लगाव ही नहीं हुआ।

Answer: वह सहपाठी उद्धव जैसा है, जो प्रेम से अछूते रहे। गोपियाँ व्यंग्य से कहतीं, 'तुम बड़भागी हो, तुमने कभी लगाव जाना ही नहीं।' जिसने बिछड़ने का दुख नहीं झेला, उसकी सलाह सूखी लगती है।

Memory hook: सलाह देने से पहले सोचो: कहीं मैं कमल का पत्ता तो नहीं, जिसे पानी छुआ ही नहीं?

आशा का टूटना और मर्यादा (मन की मन ही माँझ रही)

मान लीजिए आपके बड़े भैया दूसरे शहर में नौकरी करते हैं और उन्होंने वादा किया था कि दीवाली पर ज़रूर घर आएँगे। आप पूरे महीने इसी आशा में दिन गिनते रहे। दीवाली से एक दिन पहले उनका संदेश आता है: 'नहीं आ पाऊँगा, तुम लोग मन लगाकर पढ़ाई करना।'

दूसरे पद की गोपियों की मनोदशा से अपनी मनोदशा की तुलना कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. गोपियाँ कृष्ण के लौटने की अवधि की आशा में व्यथा सह रही थीं ('अवधि अधार आस आवन की')।
  2. कृष्ण स्वयं न आकर योग-संदेश भेजते हैं; इससे विरह की आग और भड़कती है।
  3. जहाँ से सहारा चाहा, वहीं से दुख आया; धैर्य टूट गया।
  4. आपकी भी आशा संदेश से टूटी; उपदेश ने दुख बढ़ाया।

Answer: गोपियाँ कृष्ण के आने की आशा में दुख सह रही थीं, पर आया केवल योग-संदेश, जिसने विरह बढ़ा दिया। मेरी भी आशा भैया के संदेश से टूटी और 'पढ़ाई करना' वाली सीख ने उदासी और बढ़ा दी।

Memory hook: वादा करके संदेश भेजना = उद्धव का योग-संदेश; आशा टूटे तो धैर्य भी टूटता है।

राजधर्म: प्रजा को न सताना

कल्पना कीजिए आपकी कक्षा का मॉनिटर बनने से पहले राहुल सबकी मदद करता था। मॉनिटर बनते ही वह छोटी-छोटी बातों पर नाम लिखकर शिकायत करने लगा और किसी की परेशानी नहीं सुनता।

चौथे पद में गोपियों द्वारा बताए राजधर्म के आधार पर राहुल के व्यवहार का मूल्यांकन कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. गोपियाँ कहती हैं: भले लोग 'पर हित डोलत धाए', दूसरों की भलाई के लिए काम करते थे।
  2. जो दूसरों को अन्याय से छुड़ाते हैं, उन्हें स्वयं अन्याय नहीं करना चाहिए।
  3. राजधर्म: 'जो प्रजा न जाहिं सताए'।
  4. राहुल पद पाकर सहपाठियों को सता रहा है; यह राजधर्म के विरुद्ध है।

Answer: गोपियों के अनुसार पद वाले का धर्म है कि जिनकी ज़िम्मेदारी उसे मिली है, उन्हें सताया न जाए। राहुल पद पाकर सहपाठियों की परेशानी अनसुनी करता है और उन्हें तंग करता है, इसलिए वह इस धर्म का पालन नहीं कर रहा।

Memory hook: पद मिला तो याद रखो: 'प्रजा न जाहिं सताए', मॉनिटर हो या राजा।

Topics in this chapter

How the board asks सूरदास – पद

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (प्रश्न 9, 1×5)किसी पूरे पद को देकर पाँच MCQ पूछे जाते हैं, जैसे किसी पंक्ति का भाव, किसकी तुलना किससे की गई, गोपियों की दशा क्या हुई, या पद से सूर के काव्य की कौन-सी विशेषता दिखती है।पहले पूरा पद पढ़कर हर पंक्ति का अर्थ मन में बिठाएँ। कठिन शब्दों (अपरस, गुहारि, जक री, चकरी) के अर्थ याद रखें। विकल्पों में वही चुनें जो पद के शब्दों से सीधे सिद्ध हो, अपनी कल्पना से नहीं।
कथन-कारण प्रश्नएक कथन (A) और एक कारण (R) दिया जाता है, जैसे 'गोपियाँ उद्धव को बड़भागी कहकर भाग्यहीन बता रही हैं' और उसका कारण। चार मानक विकल्पों में से चुनना होता है।दोनों को अलग-अलग जाँचें कि क्या पद के अनुसार सही हैं। फिर देखें कि क्या कारण सचमुच कथन को समझाता है। केवल दोनों सही होना काफी नहीं, संबंध भी जाँचें।
व्यंग्य और वाक्चातुर्य पर 2 अंक का प्रश्न (25-30 शब्द)जैसे 'बड़भागी' कहने में छिपा व्यंग्य, 'हरि हैं राजनीति पढ़ि आए' का ताना, या गोपियों के वाक्चातुर्य की विशेषताएँ।पहले शब्द का ऊपरी अर्थ बताएँ, फिर छिपा हुआ उलटा अर्थ। एक छोटी पंक्ति प्रमाण में लिखें। दो स्पष्ट बिंदु 25-30 शब्दों में दें।
गोपियों की मनोदशा/विरह-व्यथा पर प्रश्नजैसे योग-संदेश पाकर गोपियों की मनोदशा, 'धीर धरहिं क्यौं' में छिपी व्यथा, या 'गुर चाँटी ज्यौं पागी' से प्रकट भाव।कारण और परिणाम दोनों लिखें: कृष्ण के लौटने की आशा टूटी, इसलिए विरह बढ़ा और धैर्य टूटा। दो बिंदु माँगे जाएँ तो दो अलग वाक्य बनाएँ।
राजधर्म और प्रतीकों पर प्रश्नजैसे गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या है, हारिल की लकड़ी का अर्थ, या योग किन्हें देना चाहिए।प्रतीक का अर्थ (हारिल लकड़ी कभी नहीं छोड़ता) बताकर उसे गोपियों के प्रेम से जोड़ें। राजधर्म के प्रश्न में 'प्रजा को न सताना' और 'अन्याय न करना' दोनों बिंदु लिखें।

Tricks to remember सूरदास – पद

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • चारों पदों का क्रम

    वाक्य याद कीजिए: 'बड़भागी के मन में हारिल ने राज किया।' बड़भागी = पद 1 (ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी), मन = पद 2 (मन की मन ही माँझ रही), हारिल = पद 3 (हमारैं हरि हारिल की लकरी), राज = पद 4 (हरि हैं राजनीति पढ़ि आए)।

    Use it when: काव्यांश देखते ही पहचानिए कि वह किस पद का है और उसका मुख्य भाव क्या है।

  • किस पद में कौन-सी उपमा

    पद 1 = पानी की चीज़ें और गुड़ (कमल का पत्ता, तेल की गगरी, प्रेम की नदी, गुड़ से लिपटी चींटी); पद 2 = धार (योग की प्रबल धारा); पद 3 = बाग़ और खेल (हारिल की लकड़ी, कड़वी ककड़ी, चकरी); पद 4 = भौंरा (मधुकर)।

    Use it when: बहुविकल्पी प्रश्नों में 'किसकी तुलना किससे' वाले विकल्प तुरंत छाँटिए।

  • तुलना किसके लिए: उद्धव या गोपियाँ?

    'जो भीगा नहीं, वह उद्धव; जो चिपक गई, वह गोपी।' कमल का पत्ता और तेल की गगरी (भीगते नहीं) = उद्धव। गुड़ से लिपटी चींटी (चिपक गई) = गोपियाँ।

    Use it when: 'गुर चाँटी ज्यौं पागी' को उद्धव से जोड़ने की गलती से बचने के लिए।

  • तीन पात्र, तीन भूमिकाएँ

    'गोपी बोलें, ऊधौ सुनें, कान्ह दूर रहें।' गोपियाँ वक्ता हैं, उद्धव सामने सुनने वाले हैं, कृष्ण मथुरा में हैं और केवल उनकी चर्चा होती है।

    Use it when: 'यह किसने किससे कहा' वाले प्रश्नों में सही पात्र लिखने के लिए।

  • पाँच विषय, एक-एक पंक्ति

    प्रेम की जीत = करुई ककरी; विरह = बिरहिनि बिरह दही; अटल प्रेम = हारिल की लकरी; व्यंग्य = अति बड़भागी; राजधर्म = प्रजा न जाहिं सताए।

    Use it when: हर उत्तर में विषय के साथ एक छोटा प्रमाण जोड़ने के लिए।

सूरदास – पद: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: पद 1: बड़भागी उद्धव और गुड़ से लिपटी चींटी

ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी।
अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।
पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।
ज्यौं जल माहँ तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी।
प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोर्यौ, दृष्टि न रूप परागी।
‘सूरदास’ अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यौं पागी॥

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    'ज्यौं जल माहँ तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी' पंक्ति उद्धव के स्वभाव के बारे में क्या बताती है?
    (क) उद्धव कृष्ण के पास रहकर भी प्रेम के प्रभाव से अछूते रहे।
    (ख) उद्धव कृष्ण-प्रेम में पूरी तरह भीग चुके हैं।
    (ग) उद्धव का मन योग-साधना से अछूता रह गया है।
    (घ) उद्धव गोपियों के दुख से बहुत दुखी हैं।

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    'गुर चाँटी ज्यौं पागी' में किसकी तुलना किससे की गई है?
    (क) उद्धव की, गुड़ से दूर रहने वाली चींटी से
    (ख) गोपियों की, गुड़ से लिपटी चींटी से
    (ग) कृष्ण की, गुड़ खाने वाली चींटी से
    (घ) योग-संदेश की, चींटी के डंक से

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    गोपियाँ स्वयं को 'अबला हम भोरी' कहती हैं। इस कथन के पीछे कौन-सा भाव सबसे उपयुक्त है?
    (क) वे सचमुच निर्बल हैं और उद्धव से डरती हैं।
    (ख) वे स्वीकार करती हैं कि वे उद्धव जैसी चतुराई से प्रेम से बच नहीं सकीं और उसमें पूरी तरह डूब गईं।
    (ग) वे उद्धव से अपने व्यंग्य के लिए क्षमा माँग रही हैं।
    (घ) वे अब योग सीखने के लिए तैयार हैं।

  4. (4) · 1 mark · Assertion-reason

    कथन (A): 'अति बड़भागी' संबोधन वास्तव में उद्धव की प्रशंसा नहीं, बल्कि उलाहना है।
    कारण (R): कृष्ण के पास रहकर भी उद्धव का मन प्रेम में अनुरागी नहीं हुआ।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    इस पद के आधार पर सूरदास के काव्य के बारे में कौन-सा कथन सबसे उपयुक्त है?
    (क) इसमें उद्धव के ज्ञान की खुली प्रशंसा की गई है।
    (ख) इसमें रोज़मर्रा के जीवन की सहज उपमाओं से गहरा भाव व्यक्त हुआ है।
    (ग) इसमें गोपियाँ सीधे शब्दों में क्रोध प्रकट करती हैं।
    (घ) इसमें कठिन दार्शनिक शब्दों से योग का समर्थन किया गया है।

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  1. (क) उद्धव कृष्ण के पास रहकर भी प्रेम के प्रभाव से अछूते रहे।
  2. (ख) गोपियों की, गुड़ से लिपटी चींटी से
  3. (ख) वे स्वीकार करती हैं कि वे उद्धव जैसी चतुराई से प्रेम से बच नहीं सकीं और उसमें पूरी तरह डूब गईं।
  4. (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है। 'नाहिन मन अनुरागी' के कारण ही उद्धव प्रेम से वंचित हैं, इसलिए 'बड़भागी' कहना व्यंग्य है।
  5. (ख) इसमें रोज़मर्रा के जीवन की सहज उपमाओं से गहरा भाव व्यक्त हुआ है।

Extract 2: पद 2: मन की मन ही माँझ रही

मन की मन ही माँझ रही।
कहिए जाइ कौन पै ऊधौ, नाहीं परत कही।
अवधि अधार आस आवन की, तन मन बिथा सही।
अब इन जोग सँदेसनि सुनि-सुनि, बिरहिनि बिरह दही।
चाहति हुतीं गुहारि जितहिं तैं, उत तैं धार बही।
‘सूरदास’ अब धीर धरहिं क्यौं, मरजादा न लही॥

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    गोपियाँ अब तक किसके सहारे तन-मन की व्यथा सहती आ रही थीं?
    (क) उद्धव के योग-उपदेश के सहारे
    (ख) कृष्ण के तय अवधि पर लौट आने की आशा के सहारे
    (ग) एक-दूसरे से मन की बात कहकर
    (घ) प्रेम की मर्यादा भूलकर

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    'चाहति हुतीं गुहारि जितहिं तैं, उत तैं धार बही' का आशय क्या है?
    (क) जिन कृष्ण से रक्षा की पुकार करना चाहती थीं, उन्हीं की ओर से योग-संदेश की प्रबल धारा आ गई।
    (ख) गोपियाँ नदी की धारा में बहकर मथुरा पहुँचना चाहती थीं।
    (ग) गोपियों ने उद्धव से रक्षा चाही, पर वे मथुरा लौट गए।
    (घ) कृष्ण को याद करके गोपियों की आँखों से आँसुओं की धारा बह निकली।

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    'मन की मन ही माँझ रही' — गोपियों की अभिलाषाएँ मन में ही क्यों रह गईं?
    (क) गोपियाँ अपनी बात किसी से कहना ही नहीं चाहती थीं।
    (ख) जिनसे कहनी थी वे कृष्ण आए नहीं, और योग सुनाने वाले उद्धव से वह बात कही नहीं जा सकती थी।
    (ग) उद्धव ने गोपियों को बोलने से रोक दिया था।
    (घ) गोपियाँ कृष्ण को भूल चुकी थीं।

  4. (4) · 1 mark · Assertion-reason

    कथन (A): गोपियाँ प्रश्न करती हैं कि अब वे धैर्य क्यों धारण करें।
    कारण (R): योग-संदेश सुनकर गोपियों का कृष्ण के प्रति प्रेम कम हो गया है।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    'मरजादा न लही' के आधार पर गोपियाँ मर्यादा न रहने का दोष किसे देती हैं और क्यों?
    (क) स्वयं को, क्योंकि उन्होंने धैर्य छोड़ दिया
    (ख) उद्धव को, क्योंकि वे भौंरे के साथ ब्रज आए
    (ग) कृष्ण को, क्योंकि उन्होंने लौटने के बजाय योग-संदेश भेजकर प्रेम की मर्यादा नहीं रखी
    (घ) ब्रज के लोगों को, क्योंकि उन्होंने गोपियों का साथ नहीं दिया

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  1. (ख) कृष्ण के तय अवधि पर लौट आने की आशा के सहारे
  2. (क) जिन कृष्ण से रक्षा की पुकार करना चाहती थीं, उन्हीं की ओर से योग-संदेश की प्रबल धारा आ गई।
  3. (ख) जिनसे कहनी थी वे कृष्ण आए नहीं, और योग सुनाने वाले उद्धव से वह बात कही नहीं जा सकती थी।
  4. (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है। योग-संदेश से प्रेम कम नहीं हुआ, बल्कि 'बिरहिनि बिरह दही', विरह की आग और भड़की; धैर्य इसलिए टूटा कि मर्यादा नहीं रही।
  5. (ग) कृष्ण को, क्योंकि उन्होंने लौटने के बजाय योग-संदेश भेजकर प्रेम की मर्यादा नहीं रखी

Extract 3: पद 3: हारिल की लकड़ी और कड़वी ककड़ी

हमारैं हरि हारिल की लकरी।
मन क्रम बचन नंद-नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी।
जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, कान्ह-कान्ह जक री।
सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यौं करुई ककरी।
सु तौ ब्याधि हमकौं लै आए, देखी सुनी न करी।
यह तौ ‘सूर’ तिनहिं लै सौंपौ, जिनके मन चकरी॥

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    गोपियों ने योग के संदेश की तुलना किससे की है?
    (क) मीठे गुड़ से
    (ख) कड़वी ककड़ी से
    (ग) हारिल की लकड़ी से
    (घ) घूमती चकरी से

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    गोपियाँ योग की शिक्षा किन लोगों को सौंपने की बात कहती हैं?
    (क) जो कृष्ण से प्रेम करते हैं
    (ख) जो योग-साधना में पहले से निपुण हैं
    (ग) जिनका मन चकरी की तरह अस्थिर रहता है
    (घ) जिनका मन कृष्ण पर टिका हुआ है

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    गोपियाँ कृष्ण को 'हारिल की लकरी' कहकर क्या स्पष्ट करना चाहती हैं?
    (क) कृष्ण हारिल पक्षी की तरह दूर उड़ गए हैं।
    (ख) वे कृष्ण-प्रेम को उसी तरह दृढ़ता से पकड़े हैं, जैसे हारिल लकड़ी को कभी नहीं छोड़ता।
    (ग) कृष्ण लकड़ी की तरह कठोर हो गए हैं।
    (घ) वे कृष्ण को भूलना चाहती हैं, पर भूल नहीं पातीं।

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    इस पद के आधार पर गोपियों के योग-विरोध के बारे में कौन-सा निष्कर्ष सबसे उचित है?
    (क) वे योग को केवल इसलिए ठुकराती हैं क्योंकि वह करने में कठिन है।
    (ख) उनका मन कृष्ण पर स्थिर है, इसलिए अस्थिर मन वालों के लिए बताया गया योग उनके लिए व्यर्थ और पीड़ादायक है।
    (ग) वे उद्धव से ईर्ष्या के कारण योग का विरोध करती हैं।
    (घ) वे योग को हर व्यक्ति के लिए पूरी तरह व्यर्थ मानती हैं।

  5. (5) · 1 mark · Assertion-reason

    कथन (A): गोपियाँ योग को 'ब्याधि' अर्थात् रोग कहती हैं।
    कारण (R): ऐसा रोग उन्होंने न कभी देखा, न सुना और न ही भोगा था।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

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  1. (ख) कड़वी ककड़ी से
  2. (ग) जिनका मन चकरी की तरह अस्थिर रहता है
  3. (ख) वे कृष्ण-प्रेम को उसी तरह दृढ़ता से पकड़े हैं, जैसे हारिल लकड़ी को कभी नहीं छोड़ता।
  4. (ख) उनका मन कृष्ण पर स्थिर है, इसलिए अस्थिर मन वालों के लिए बताया गया योग उनके लिए व्यर्थ और पीड़ादायक है।
  5. (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है। पंक्ति 'देखी सुनी न करी' बताती है कि योग उनके लिए अनजानी पीड़ा है, इसलिए वे उसे ब्याधि कहती हैं।

Extract 4: पद 4 (आरंभ): हरि हैं राजनीति पढ़ि आए

हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।
समुझी बात कहत मधुकर के, समाचार सब पाए।
इक अति चतुर हुते पहिलैं ही, अब गुरु ग्रंथ पढ़ाए।
बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी, जोग-सँदेस पठाए।

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    गोपियों को कृष्ण के सारे समाचार किससे मिले?
    (क) कृष्ण के भेजे पत्र से
    (ख) मधुकर अर्थात् उद्धव की बातें समझकर
    (ग) मथुरा से लौटे ग्वालों से
    (घ) फूलों पर गूँजते भौंरे के गुंजन से

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    गोपियाँ कृष्ण की 'बढ़ी बुद्धि' का प्रमाण किसे मानती हैं?
    (क) मथुरा जाकर राजा बन जाना
    (ख) प्रेम के बदले योग-संदेश भेजना
    (ग) उद्धव को अपना सखा बनाना
    (घ) स्वयं गुरु बनकर ग्रंथ पढ़ाना

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    'इक अति चतुर हुते पहिलैं ही, अब गुरु ग्रंथ पढ़ाए' में गोपियों का आशय क्या है?
    (क) वे कृष्ण की विद्वत्ता की सच्चे मन से प्रशंसा कर रही हैं।
    (ख) पहले से चतुर कृष्ण ग्रंथ पढ़कर और चालाक हो गए हैं; यह प्रशंसा के रूप में ताना है।
    (ग) कृष्ण के गुरु ने उन्हें गलत ग्रंथ पढ़ा दिए हैं।
    (घ) उद्धव ने कृष्ण को बड़े ग्रंथ पढ़ाए हैं।

  4. (4) · 1 mark · Assertion-reason

    कथन (A): गोपियाँ कृष्ण की बुद्धि को 'बढ़ी बुद्धि' कहकर ताना देती हैं।
    कारण (R): कृष्ण ने स्वयं आने या प्रेम-संदेश भेजने के बजाय योग-संदेश भेजा।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    इस काव्यांश में गोपियों के कहने की शैली के बारे में सबसे उचित कथन कौन-सा है?
    (क) वे क्रोध में कृष्ण को सीधे कठोर शब्द कहती हैं।
    (ख) वे प्रशंसा जैसे लगने वाले शब्दों में तीखा व्यंग्य करती हैं, जो उनके वाक्चातुर्य को दिखाता है।
    (ग) वे कृष्ण की नई विद्या से सचमुच प्रसन्न हैं।
    (घ) वे उद्धव से विनती करके कृष्ण को बुलाना चाहती हैं।

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  1. (ख) मधुकर अर्थात् उद्धव की बातें समझकर
  2. (ख) प्रेम के बदले योग-संदेश भेजना
  3. (ख) पहले से चतुर कृष्ण ग्रंथ पढ़कर और चालाक हो गए हैं; यह प्रशंसा के रूप में ताना है।
  4. (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है। 'बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी, जोग-सँदेस पठाए' से स्पष्ट है कि योग-संदेश भेजना ही ताने का कारण है।
  5. (ख) वे प्रशंसा जैसे लगने वाले शब्दों में तीखा व्यंग्य करती हैं, जो उनके वाक्चातुर्य को दिखाता है।

Extract 5: पद 4: राजधर्म की याद

ऊधौ भले लोग आगे के, पर हित डोलत धाए।
अब अपनै मन फेर पाइहैं, चलत जु हुते चुराए।
ते क्यौं अनीति करैं आपुन, जे और अनीति छुड़ाए।
राज धरम तौ यहै ‘सूर’, जो प्रजा न जाहिं सताए॥

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    गोपियों के अनुसार सच्चा राजधर्म क्या है?
    (क) प्रजा को योग और ज्ञान की शिक्षा देना
    (ख) अन्याय करने वालों को कठोर दंड देना
    (ग) प्रजा को किसी भी प्रकार सताया न जाए
    (घ) राजा का चतुर और विद्वान होना

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    'ते क्यौं अनीति करैं आपुन, जे और अनीति छुड़ाए' में गोपियों का व्यंग्य किस पर है?
    (क) कृष्ण पर, जो दूसरों को अन्याय से छुड़ाते थे पर अब स्वयं गोपियों के साथ अन्याय कर रहे हैं
    (ख) उद्धव पर, जो योग-संदेश लाकर अन्याय कर रहे हैं
    (ग) पहले के भले लोगों पर, जो दूसरों के हित में घूमते थे
    (घ) मथुरा की प्रजा पर, जो राजा के साथ अन्याय करती है

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    गोपियाँ 'अब अपनै मन फेर पाइहैं' क्यों कहती हैं?
    (क) कृष्ण बदल गए हैं और प्रेम छोड़कर चालें चलने लगे हैं, इसलिए वे जाते समय चुराया अपना मन वापस पा लेंगी।
    (ख) उद्धव ने उनका मन लौटाने का वचन दिया है।
    (ग) योग-साधना से उनका मन शांत हो गया है।
    (घ) कृष्ण ब्रज लौट आए हैं।

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    प्रेम-प्रसंग के बीच राजधर्म की बात कहने से सूरदास की कविता के बारे में क्या कहा जा सकता है?
    (क) सूरदास केवल प्रेम और शृंगार के कवि हैं।
    (ख) सूरदास प्रेम-काव्य में भी प्रजा-हित और न्याय की चिंता प्रकट करते हैं, जो उनकी लोकधर्मिता है।
    (ग) सूरदास राजाओं की प्रशंसा के कवि हैं।
    (घ) सूरदास योग को ही सच्चा राजधर्म मानते हैं।

  5. (5) · 1 mark · Assertion-reason

    कथन (A): गोपियों के अनुसार भले लोग दूसरों के हित के लिए दौड़े-दौड़े फिरते थे।
    कारण (R): गोपियाँ कहती हैं कि अब वे अपना मन फिर से पा लेंगी।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

Show the answersAnswers
  1. (ग) प्रजा को किसी भी प्रकार सताया न जाए
  2. (क) कृष्ण पर, जो दूसरों को अन्याय से छुड़ाते थे पर अब स्वयं गोपियों के साथ अन्याय कर रहे हैं
  3. (क) कृष्ण बदल गए हैं और प्रेम छोड़कर चालें चलने लगे हैं, इसलिए वे जाते समय चुराया अपना मन वापस पा लेंगी।
  4. (ख) सूरदास प्रेम-काव्य में भी प्रजा-हित और न्याय की चिंता प्रकट करते हैं, जो उनकी लोकधर्मिता है।
  5. (ख) दोनों कथन काव्यांश में हैं ('पर हित डोलत धाए' और 'अब अपनै मन फेर पाइहैं'), पर मन वापस पाने की बात पुराने भले लोगों के परोपकार की व्याख्या नहीं करती।

सूरदास – पद: board-level solved questions

Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: उद्धव की तुलना · 2 marks · Short answerBoard level

पहले पद में गोपियों ने उद्धव की तुलना किन दो वस्तुओं से की है? इन तुलनाओं से उद्धव के बारे में क्या पता चलता है?

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  1. पहली तुलना: कमल का पत्ता (पुरइनि पात), जो जल में रहकर भी उससे नहीं भीगता।
  2. दूसरी तुलना: जल में पड़ी तेल की गगरी, जिस पर एक बूँद भी नहीं ठहरती।
  3. निष्कर्ष: उद्धव कृष्ण के पास रहकर भी प्रेम से अछूते हैं।

Answer: गोपियों ने उद्धव की तुलना कमल के पत्ते और जल में पड़ी तेल की गगरी से की है। दोनों जल से अछूते रहते हैं, वैसे उद्धव प्रेम से अछूते रहे।

Example 2: 'बड़भागी' में छिपा व्यंग्य · 2 marks · Short answerBoard level

'ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी।' गोपियाँ उद्धव को बड़भागी कहकर वास्तव में क्या कहना चाहती हैं?

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  1. शब्द का सीधा अर्थ: भाग्यवान।
  2. छिपा अर्थ (व्यंग्य): उद्धव प्रेम से वंचित होने के कारण वास्तव में अभागे हैं।
  3. कारण: कृष्ण के निकट रहकर भी उनका मन अनुरागी नहीं हुआ, 'प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोर्यौ'।

Answer: ऊपर से गोपियाँ उद्धव को भाग्यवान कहती हैं, पर व्यंग्य यह है कि वे अभागे हैं। कृष्ण के पास रहकर भी वे प्रेम की नदी में नहीं उतरे।

Example 3: जहाँ से रक्षा चाही, वहीं से धार · 2 marks · Short answerBoard level

'चाहति हुतीं गुहारि जितहिं तैं, उत तैं धार बही।' इस पंक्ति में गोपियों की कौन-सी पीड़ा व्यक्त हुई है?

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  1. गोपियाँ कृष्ण से ही अपनी रक्षा की पुकार लगाना चाहती थीं।
  2. उसी ओर (कृष्ण की ओर) से योग की प्रबल धारा आ गई।
  3. पीड़ा: जिससे सहारा चाहा, उसी ने दुख बढ़ा दिया; आशा टूट गई।

Answer: जिन कृष्ण से गोपियाँ रक्षा की पुकार करना चाहती थीं, उन्हीं ने योग-संदेश की धारा भेज दी। सहारे की जगह दुख मिला, इसलिए विरह-पीड़ा बढ़ गई।

Example 4: कृष्ण की 'बढ़ी बुद्धि' पर व्यंग्य · 2 marks · Short answerBoard level

'इक अति चतुर हुते पहिलैं ही, अब गुरु ग्रंथ पढ़ाए।' गोपियाँ कृष्ण की चतुराई पर क्या व्यंग्य करती हैं?

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  1. कृष्ण पहले से ही बहुत चतुर थे।
  2. अब उन्होंने बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ लिए हैं, यानी राजनीति सीख ली है।
  3. इसी 'बढ़ी बुद्धि' का प्रमाण है कि प्रेम के बदले योग-संदेश भेजा; यह प्रशंसा नहीं, ताना है।

Answer: गोपियाँ कहती हैं कि कृष्ण पहले ही चतुर थे, अब ग्रंथ पढ़कर और चतुर हो गए। इसी बुद्धि ने प्रेम के बदले योग-संदेश भेजा; यह गहरा ताना है।

Example 5: 'अबला' गोपियों का वाक्चातुर्य · 2 marks · Short answerHOTS / competency

गोपियाँ स्वयं को 'अबला हम भोरी' कहती हैं, फिर भी ज्ञानी उद्धव पर भारी पड़ती हैं। इससे आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?

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  1. गोपियाँ स्वयं को भोली और अबला कहती हैं।
  2. पर उनके तर्क, उपमाएँ और व्यंग्य (बड़भागी, करुई ककरी, राजनीति) बहुत तीखे हैं।
  3. निष्कर्ष: सच्चे प्रेम और अनुभव से उपजी बात किताबी ज्ञान से अधिक प्रभावी होती है।

Answer: गोपियाँ स्वयं को भोली कहती हैं, पर 'बड़भागी', 'करुई ककरी' जैसे व्यंग्यों से ज्ञानी उद्धव पर भारी पड़ती हैं। अनुभव से उपजा प्रेम किताबी ज्ञान से अधिक असरदार है।

Example 6: गोपियों की कसौटी पर शासक · 2 marks · Short answerHOTS / competency

मान लीजिए किसी नगर का नया शासक बड़े-बड़े भाषण देता है, पर जनता की शिकायतें अनसुनी करता है। गोपियों द्वारा बताए राजधर्म के आधार पर उसका मूल्यांकन कीजिए।

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  1. गोपियों के अनुसार राजधर्म: 'जो प्रजा न जाहिं सताए'।
  2. भाषण देना 'राजनीति पढ़ि आए' जैसी चतुराई है, प्रजा-हित नहीं।
  3. निष्कर्ष: जनता की पीड़ा अनसुनी करने वाला शासक राजधर्म से चूक रहा है।

Answer: गोपियों के अनुसार प्रजा को न सताना ही राजधर्म है। जो शासक भाषण देकर भी जनता की शिकायतें अनसुनी करता है, वह प्रजा को सताकर राजधर्म से चूक रहा है।

Example 7: पद 1 और पद 3: प्रेम की दो अभिव्यक्तियाँ · 2 marks · Short answerHarder board level

पहले और तीसरे पद में गोपियों ने कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को अलग-अलग ढंग से व्यक्त किया है। दोनों अभिव्यक्तियों का अंतर स्पष्ट कीजिए।

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  1. पहला पद: 'गुर चाँटी ज्यौं पागी', गुड़ से लिपटी चींटी की तरह प्रेम में पूरी तरह डूब जाना (लीनता); यह उद्धव के अछूतेपन के विपरीत रखा गया है।
  2. तीसरा पद: 'हारिल की लकरी', हारिल जैसे लकड़ी नहीं छोड़ता, वैसे प्रेम को कसकर पकड़े रहना (दृढ़ता)।
  3. अंतर: पहले पद में प्रेम की लीनता, तीसरे में योग के सामने प्रेम की अटल दृढ़ता।

Answer: पहले पद में गोपियाँ गुड़ से लिपटी चींटी की उपमा से प्रेम में डूबे होने का भाव दिखाती हैं। तीसरे पद में हारिल की लकड़ी से अटल दृढ़ता बताती हैं।

Example 8: योग-संदेश से विरह क्यों भड़का · 2 marks · Short answerHarder board level

उद्धव का योग-संदेश गोपियों का विरह शांत करने आया था, पर उसने विरह और बढ़ा दिया। दूसरे पद के आधार पर इसके कारणों का विश्लेषण कीजिए।

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  1. गोपियाँ कृष्ण के लौटने की अवधि की आशा पर टिकी थीं: 'अवधि अधार आस आवन की'।
  2. योग-संदेश ने यह आशा तोड़ दी, क्योंकि कृष्ण स्वयं नहीं आए।
  3. जिनसे रक्षा की पुकार करनी थी, उन्हीं की ओर से योग की धारा आई; इसलिए 'बिरहिनि बिरह दही'।

Answer: गोपियाँ कृष्ण के लौटने की आशा के सहारे व्यथा सह रही थीं। योग-संदेश ने वह आशा तोड़ दी और जिनसे रक्षा चाही, वहीं से दुख आया; इसलिए विरह भड़क उठा।

Example 9: 'मरजादा न लही' और 'अनीति': कृष्ण पर आरोप · 2 marks · Short answerHarder board level

दूसरे पद के 'मरजादा न लही' और चौथे पद के 'ते क्यौं अनीति करैं आपुन' में गोपियाँ कृष्ण पर कौन-सा समान आरोप लगाती हैं? तुलना कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. समानता: दोनों में कृष्ण पर अपने कर्तव्य से हटने का आरोप है।
  2. दूसरा पद: लौटने के बजाय योग-संदेश भेजकर कृष्ण ने प्रेम की मर्यादा नहीं रखी।
  3. चौथा पद: अन्याय छुड़ाने वाले कृष्ण स्वयं गोपियों को सताकर अनीति कर रहे हैं, जो राजधर्म के विरुद्ध है।

Answer: दोनों पदों में कृष्ण पर कर्तव्य से हटने का आरोप है। दूसरे पद में वे प्रेम की मर्यादा नहीं निभाते, चौथे में राजा होकर प्रजा-रूपी गोपियों से अन्याय करते हैं।

Example 10: गुड़ की मिठास बनाम ककड़ी की कड़वाहट · 2 marks · Short answerHarder board level

पहले पद की उपमा 'गुर चाँटी ज्यौं पागी' और तीसरे पद की 'ज्यौं करुई ककरी' दोनों स्वाद से जुड़ी हैं। इन दोनों उपमाओं के विरोध से कौन-सा भाव उभरता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. गुड़ की मिठास कृष्ण-प्रेम से जुड़ी है; गोपियाँ उसमें चींटी की तरह लिपटी हैं।
  2. कड़वी ककड़ी योग-संदेश से जुड़ी है।
  3. विरोध का भाव: प्रेम मधुर और प्रिय, योग अरुचिकर और त्यागने योग्य।

Answer: गुड़ की मिठास कृष्ण-प्रेम का और ककड़ी की कड़वाहट योग का प्रतीक है। स्वाद के विरोध से पता चलता है कि गोपियों को प्रेम मधुर और योग अरुचिकर लगता है।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

'सु तौ ब्याधि हमकौं लै आए, देखी सुनी न करी।' गोपियाँ योग-साधना को ब्याधि क्यों कहती हैं? (25-30 शब्द) (2 marks)

StepMarks
योग गोपियों के लिए अनजाना है: उन्होंने ऐसा रोग न देखा, न सुना, न भोगा।1
कारण का संबंध प्रेम से: उनका मन कृष्ण-प्रेम में रमा है, इसलिए योग उन्हें कड़वी ककड़ी जैसा कष्टदायक लगता है; उचित भाषा और शब्द-सीमा।1

पठित काव्यांश (पद 4 की अंतिम चार पंक्तियाँ, 'ऊधौ भले लोग आगे के...' से 'जो प्रजा न जाहिं सताए' तक) पर आधारित पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (5 marks)

StepMarks
प्रश्न (i): राजधर्म = प्रजा को किसी भी प्रकार न सताना, सही विकल्प चुनना।1
प्रश्न (ii): 'ते क्यौं अनीति करैं आपुन' का व्यंग्य समझना: अन्याय छुड़ाने वाले कृष्ण स्वयं अन्याय कर रहे हैं।1
प्रश्न (iii): मन फिर पा लेने की बात का कारण पहचानना: कृष्ण का बदल जाना और जाते समय मन चुरा ले जाना।1
प्रश्न (iv): प्रेम-काव्य में राजधर्म की बात से सूरदास की लोकधर्मिता की पहचान।1
प्रश्न (v): कथन-कारण में दोनों कथनों को सही मानकर यह पहचानना कि कारण, कथन की व्याख्या नहीं करता; हर प्रश्न में केवल सही विकल्प का अक्षर और पाठ लिखने पर ही अंक, आंशिक अंक नहीं।1

Where students lose marks in सूरदास – पद

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: 'बड़भागी' को सचमुच की प्रशंसा समझ लेना

    विद्यार्थी शब्दार्थ (भाग्यवान) लिखकर रुक जाता है और व्यंग्य नहीं पहचानता।

    Wrong working

    गोपियाँ उद्धव की प्रशंसा करती हैं कि वे बहुत भाग्यशाली हैं क्योंकि वे कृष्ण के पास रहते हैं।

    Right working

    गोपियाँ उद्धव को बड़भागी कहकर व्यंग्य करती हैं; प्रेम से अछूते रहने के कारण वे वास्तव में अभागे हैं।

    Do this: इस पद पर हर उत्तर में 'व्यंग्य' शब्द और उसका छिपा अर्थ ज़रूर लिखिए।

    Usually costs: 2 अंक के प्रश्न में 1-2 अंक; बहुविकल्पी में पूरा 1 अंक।

  • Mistake: उपमा को गलत पात्र से जोड़ना

    पहले पद में उद्धव और गोपियाँ दोनों की उपमाएँ एक साथ आती हैं, इसलिए उलझन होती है।

    Wrong working

    गोपियाँ कमल के पत्ते की तरह कृष्ण-प्रेम से अछूती हैं।

    Right working

    कमल का पत्ता और तेल की गगरी उद्धव के लिए हैं; गोपियाँ स्वयं को गुड़ से लिपटी चींटी जैसा बताती हैं।

    Do this: याद रखिए: जो भीगे नहीं वह उद्धव, जो चिपक जाए वह गोपी।

    Usually costs: पूरा उत्तर गलत हो जाने से 2 में से 2 अंक।

  • Mistake: कथा का गलत तथ्य लिखना

    विद्यार्थी सोच लेता है कि कृष्ण स्वयं ब्रज आए या उद्धव प्रेम का संदेश लाए।

    Wrong working

    कृष्ण ने गोपियों को प्रेम-संदेश भेजा, जिसे सुनकर वे दुखी हो गईं।

    Right working

    कृष्ण ने स्वयं न आकर उद्धव के द्वारा निर्गुण ब्रह्म और योग का संदेश भेजा, जो गोपियों को शुष्क लगा।

    Do this: प्रसंग एक वाक्य में पक्का कीजिए: कृष्ण मथुरा में, उद्धव ब्रज में, संदेश योग का।

    Usually costs: 1 अंक (प्रसंग वाला मूल्य-बिंदु कट जाता है)।

  • Mistake: हारिल की लकड़ी का अर्थ उलटा समझना

    विद्यार्थी यह नहीं बताता कि हारिल लकड़ी कभी नहीं छोड़ता; केवल 'कृष्ण लकड़ी हैं' लिख देता है।

    Wrong working

    गोपियाँ कहती हैं कि कृष्ण हारिल की लकड़ी की तरह सूखे और कठोर हैं।

    Right working

    जैसे हारिल पक्षी लकड़ी को सदा पकड़े रहता है, वैसे ही गोपियों ने कृष्ण को हृदय में दृढ़ता से पकड़ रखा है।

    Do this: उपमा के तीनों अंग लिखिए: हारिल क्या करता है, गोपियाँ क्या करती हैं, समानता क्या है।

    Usually costs: 2 अंक के प्रश्न में 1-2 अंक।

  • Mistake: प्रश्न का उत्तर देने के बजाय पूरा भावार्थ लिख देना

    विद्यार्थी को लगता है कि ज़्यादा लिखने से ज़्यादा अंक मिलेंगे, जबकि सीमा 25-30 शब्दों की है।

    Wrong working

    (राजधर्म के प्रश्न पर) पूरे चौथे पद का पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ, 80-90 शब्दों में, अंत तक राजधर्म का सीधा उल्लेख नहीं।

    Right working

    गोपियों के अनुसार राजा का धर्म है कि प्रजा को किसी प्रकार सताया न जाए और उसका हित हो; कृष्ण स्वयं गोपियों को दुख देकर इस धर्म से चूक रहे हैं।

    Do this: पहले वाक्य में सीधा उत्तर, दूसरे में प्रमाण या कारण; बस।

    Usually costs: समय की बर्बादी और मुख्य बिंदु छूटने से प्रायः 1 अंक।

  • Mistake: 'मरजादा न लही' में मर्यादा किसकी, यह न बताना

    विद्यार्थी केवल 'मर्यादा टूट गई' लिखता है; किसने नहीं रखी, यह स्पष्ट नहीं करता।

    Wrong working

    गोपियों ने अपनी मर्यादा तोड़ दी।

    Right working

    इससे पता चलता है कि कृष्ण ने प्रेम निभाने की मर्यादा नहीं रखी; लौटने के बजाय योग-संदेश भेजा, इसलिए गोपियाँ अब धैर्य नहीं रख पा रहीं।

    Do this: 'किसकी मर्यादा' और 'इसलिए धैर्य क्यों टूटा', दोनों बिंदु लिखिए।

    Usually costs: 1 अंक।

सूरदास – पद: previous year questions

  • Course A: Asked in 17 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 4.1 marks per paper; 18 questions in all, counting OR alternatives. In 3 of 4 sample papers.
  • Course B: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).

Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.

Solved board questions from सूरदास – पद

Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.

2026 Course A, set 3/1/1, Q9 · 5 marks · MCQCompetency-based

निम्नलिखित पठित काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : 5 × 1 = 5

ऊधो! तुम हौ अति बड़भागी।
अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।
पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।
ज्यौं जल माहँ तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी।
प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी।
'सूरदास' अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यौं पागी।।

  1. (i)

    'ज्यौं जल माहँ तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी।' पंक्ति के द्वारा क्या स्पष्ट होता है?

    1. (A)श्रीकृष्ण का मन प्रेम से अछूता रहा।
    2. (B)उद्धव का मन प्रेम से अछूता रहा।
    3. (C)गोपियाँ प्रेम रूपी रस से अछूती रहीं।
    4. (D)तेल से युक्त मटकी पर जल का प्रभाव नहीं होता।
    1 mark
  2. (ii)

    कृष्ण-प्रेम में डूबी गोपियों की तुलना किससे की गई है?
    उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :
    I. कमल के पत्ते से
    II. जल में पड़े तेल चुपड़े घड़े से
    III. गुड़ से चिपटी चींटियों से
    विकल्प :

    1. (A)केवल III सही है।
    2. (B)केवल I सही है।
    3. (C)I और III दोनों सही हैं।
    4. (D)II और III दोनों सही हैं।
    1 mark
  3. (iii)

    प्रस्तुत पद के आधार पर सूरदास के काव्य के बारे में कहा जा सकता है।
    उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :
    I. सहज उपमाओं द्वारा गूढ़ भाव व्यक्त किए गए हैं।
    II. उनके काव्य में केवल दार्शनिक चिंतन है।
    III. उनका काव्य बहुत अधिक अलंकृत और सजावटी है।
    IV. योग साधना से अधिक कृष्ण-प्रेम को महत्त्व दिया गया है।
    विकल्प :

    1. (A)I और II सही हैं।
    2. (B)III और IV सही हैं।
    3. (C)II और III सही हैं।
    4. (D)I और IV सही हैं।
    1 mark
  4. (iv)

    निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए :
    कथन : गोपियाँ उद्धव को 'बड़भागी' कहते हुए वास्तव में 'भाग्यहीन' बता रही हैं।
    कारण : वे योग का संदेश लेकर आए हैं।

    1. (A)कथन सही है परंतु कारण गलत है।
    2. (B)कथन और कारण दोनों गलत हैं।
    3. (C)कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की उचित व्याख्या है।
    4. (D)कारण और कथन दोनों सही हैं परंतु कारण कथन की उचित व्याख्या नहीं है।
    1 mark
  5. (v)

    गोपियों के अनुसार 'कृष्ण' किसके समान हैं?

    1. (A)प्रेम-भाव से भरी नदी के समान
    2. (B)स्नेह के स्पर्श से भी दूर
    3. (C)कमल के पत्तों सरीखे
    4. (D)अनुरागी मन वाले 'बड़भागी'
    1 mark
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (i) जल में तेल की गागर पर जल की बूँद नहीं टिकती। यह उद्धव के प्रेम से अछूते मन का दृष्टांत है। सही विकल्प (B) है।

    1 mark
  2. (ii) गोपियाँ स्वयं को गुड़ से चिपटी चींटियों जैसी बताती हैं (केवल III)। कमल का पत्ता और तेल की गागर उद्धव के उदाहरण हैं। सही विकल्प (A) है।

    1 mark
  3. (iii) सहज उपमाओं से गूढ़ भाव व्यक्त हुए हैं (I) और योग से अधिक कृष्ण-प्रेम को महत्त्व दिया गया है (IV)। सही विकल्प (D) है।

    1 mark
  4. (iv) 'बड़भागी' कहना व्यंग्य है, इसलिए कथन सही है। कारण भी सही है, क्योंकि उद्धव योग-संदेश लाए हैं। पर यह कथन की पूरी व्याख्या नहीं है; व्यंग्य का मुख्य आधार उनका प्रेम से अछूता रहना है। सही विकल्प (D) है।

    1 mark
  5. (v) गोपियों के लिए कृष्ण प्रेम-भाव से भरी नदी के समान हैं, जिसमें उद्धव ने पाँव नहीं डुबोए। सही विकल्प (A) है।

    1 mark

Answer: (i) B; (ii) A; (iii) D; (iv) D; (v) A

Where the marks are

  • (i) सही विकल्प B (1 अंक)
  • (ii) सही विकल्प A (1 अंक)
  • (iii) सही विकल्प D (1 अंक)
  • (iv) सही विकल्प D (1 अंक)
  • (v) सही विकल्प A (1 अंक)

See it in the full 2026 board paper, set 3/1/1

2026 Course A, set 3/3/1, Q8 · 6 marks · Short answer

निर्धारित कविताओं के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25 – 30 शब्दों में लिखिए : 3×2=6

  1. (i)

    योग-संदेश पाकर गोपियों की क्या मनोदशा हुई ? उनकी भावनाओं को दो बिंदुओं में लिखिए।

    2 marks
  2. (ii)

    बच्चे की मुस्कान और छवियों को कवि ने किन-किन बिंबों में व्यक्त किया है ? किन्हीं दो बिंबों का वर्णन कीजिए।

    2 marks
  3. (iii)

    'संगतकार' कविता के संदर्भ में लिखिए की संगतकार जैसे व्यक्तियों के व्यक्तित्व से युवाओं को क्या प्रेरणा मिलती है। किन्हीं दो का वर्णन कीजिए।

    2 marks
  4. (iv)

    फागुन की मनोहारिता मनुष्य के मन पर क्या प्रभाव डालती है ? 'अट नहीं रही है' कविता के आधार पर लिखिए।

    2 marks
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (i) योग-संदेश से गोपियों की विरह-व्यथा और बढ़ गई। उनकी कृष्ण के मिलन की आशा टूट गई और उन्होंने कृष्ण तथा उद्धव से शिकायत की।

    2 marks
  2. (ii) बिंब: धूल से सना बच्चा झोंपड़ी में खिले कमल जैसा लगता है। उसके स्पर्श से पत्थर-हृदय में शेफालिका के फूलों जैसे कोमल भाव जग उठते हैं।

    2 marks
  3. (iii) संगतकार से युवा (1) निष्ठापूर्वक समर्पण और सहयोग की प्रेरणा लेते हैं, (2) बिना अहंकार के धैर्य, विनम्रता तथा दूसरों को आगे बढ़ाने की भावना सीखते हैं।

    2 marks
  4. (iv) फागुन की सुंदरता से मन में उत्साह, उमंग और उल्लास भर जाता है। प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत मन प्रसन्न और कल्पनाशील हो उठता है।

    2 marks

Answer: कोई तीन उपभाग: (i) विरह-व्यथा बढ़ना, आशा टूटना; (ii) कमल और शेफालिका के बिंब; (iii) समर्पण, विनम्रता; (iv) उत्साह, उमंग, प्रसन्नता

Where the marks are

  • प्रत्येक उपभाग के दो बिंदु (1+1 अंक), कुल तीन उपभाग

See it in the full 2026 board paper, set 3/3/1

2024 Course A, set 3/3/1, Q10 · 2 marks · MCQ

पाठ्यपुस्तक में निर्धारित कविताओं के आधार पर निम्नलिखित दो प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए : (2 × 1 = 2)

  1. (i)

    सूरदास के पदों में उद्धव की तुलना किसने नहीं की गई है ?

    1. (A)तेल की गगरी
    2. (B)हारिल पक्षी की लकड़ी
    3. (C)मधुकर
    4. (D)कमलपात (कमल-पात)
    1 mark
  2. (ii)

    'यह दंतुरित मुसकान' में बच्चे के धूल-धूसरित शरीर को देखकर पिता को कैसे लगता है ?

    1. (A)जैसे झोपड़ी कमल के फूल में रूपांतरित हो गई हो।
    2. (B)जैसे झोपड़ी में कमल का फूल खिल गया हो।
    3. (C)जैसे झोपड़ी के चारों ओर कमल खिल गए हों।
    4. (D)जैसे चारों तरफ कीचड़ और झोपड़ी कमल का फूल हो।
    1 mark
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (i) सूरदास के पदों में उद्धव की तुलना तेल की गगरी, मधुकर और कमल-पात से की गई है, हारिल की लकड़ी से नहीं, क्योंकि वह गोपियों की कृष्ण के प्रति दृढ़ता का प्रतीक है। (B)

    1 mark
  2. (ii) धूल-धूसरित शिशु को देखकर कवि को लगता है जैसे झोपड़ी में कमल का फूल खिल गया हो। (B)

    1 mark

Answer: (i) B; (ii) B

Where the marks are

  • (i) सही विकल्प B (1 अंक)
  • (ii) सही विकल्प B (1 अंक)

See it in the full 2024 board paper, set 3/3/1

Every सूरदास – पद question, by year

Course A (21 questions, sample papers included)

For 2027

Sample paper 2026-27: Q10 (6 marks, solved)

2026

Set 3/1/1: Q9 (5 marks, solved)

Set 3/2/1: Q9 (5 marks, solved)

Set 3/3/1: Q8 (6 marks, solved)

Set 3/4/1: Q10 (6 marks, solved)

Set 3/5/1: Q10 (6 marks, solved)

Sample paper 2025-26: Q10 (6 marks, solved)

2025

Set 3/2/1: Q9 (5 marks, solved)

Set 3/5/1: Q9 (5 marks, solved)

Set 3/6/1: Q9 (5 marks, solved)

Sample paper 2024-25: Q9 (5 marks, solved)

2024

Set 3/2/1: Q9 (5 marks, solved)

Set 3/3/1: Q10 (2 marks, solved)

Set 3/4/1: Q12 (6 marks, solved)

Set 3/5/1: Q12 (6 marks, solved)

2023

Set 3/1/1: Q10 (2 marks, solved), Q12 (6 marks, solved)

Set 3/2/1: Q12 (6 marks, solved)

Set 3/4/1: Q10 (2 marks, solved)

Set 3/5/1: Q10 (2 marks, solved)

Set 3/6/1: Q12 (6 marks, solved)

Course B (0 questions, sample papers included)

Practice questions on सूरदास – पद

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 2 marks · Short answerBoard level

    दूसरे पद के आधार पर बताइए कि गोपियाँ अब तक किस आधार पर अपने तन-मन की व्यथा सहती आ रही थीं?

    Hint

    'अवधि अधार आस आवन की' पंक्ति का अर्थ सोचिए।

    Answer

    मूल्य-बिंदु: कृष्ण के लौटने की निश्चित अवधि का आधार; उनके आने की आशा; इसी आशा में तन-मन की व्यथा सहना।

    आदर्श उत्तर: गोपियाँ इस आशा में जी रही थीं कि कृष्ण तय अवधि पूरी होने पर लौट आएँगे। इसी आशा के सहारे वे तन और मन की विरह-व्यथा चुपचाप सहती रहीं।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    चौथे पद में 'मधुकर' संबोधन किसके लिए प्रयुक्त हुआ है? गोपियाँ इस संबोधन से क्या करती हैं?

    Hint

    पाठ की भूमिका में भ्रमरगीत के आरंभ का प्रसंग देखिए।

    Answer

    मूल्य-बिंदु: मधुकर अर्थात् भौंरा; यह संबोधन उद्धव के लिए है; भौंरे के बहाने उद्धव पर व्यंग्य करना।

    आदर्श उत्तर: 'मधुकर' का अर्थ भौंरा है, पर यह संबोधन उद्धव के लिए है। उद्धव के आने पर एक भौंरा आ पहुँचा था; उसी के बहाने गोपियाँ उद्धव पर व्यंग्य करती हैं।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level

    'प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोर्यौ, दृष्टि न रूप परागी।' इस पंक्ति के द्वारा गोपियाँ उद्धव को क्या उलाहना देती हैं?

    Hint

    प्रेम को नदी माना गया है; पैर न डुबोने का अर्थ सोचिए।

    Answer

    मूल्य-बिंदु: प्रेम को नदी के रूप में दिखाया गया है; उद्धव ने उसमें पैर तक नहीं डुबोया; उनकी आँखें कृष्ण के रूप पर मुग्ध नहीं हुईं; इसलिए वे विरह का दुख नहीं समझते।

    आदर्श उत्तर: गोपियाँ कहती हैं कि उद्धव ने प्रेम की नदी में पैर तक नहीं डुबोया और कृष्ण के रूप पर मुग्ध नहीं हुए। इसलिए वे विरह का दुख नहीं समझ सकते।

  4. Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level

    'जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, कान्ह-कान्ह जक री।' इस पंक्ति से गोपियों की किस मनोदशा का पता चलता है?

    Hint

    'जक री' का अर्थ रटते रहना है।

    Answer

    मूल्य-बिंदु: हर समय (जागते, सोते, सपने में, दिन-रात) कृष्ण का नाम रटना; मन पूरी तरह कृष्ण में डूबा; किसी और बात के लिए जगह नहीं, योग के लिए भी नहीं।

    आदर्श उत्तर: गोपियाँ जागते-सोते, सपने में और दिन-रात 'कान्ह-कान्ह' रटती हैं। इससे पता चलता है कि उनका मन पूरी तरह कृष्ण में डूबा है; योग के लिए जगह नहीं।

  5. Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level

    'मन की मन ही माँझ रही।' गोपियों के मन की बात मन में ही क्यों रह गई? स्पष्ट कीजिए।

    Hint

    'कहिए जाइ कौन पै ऊधौ' पर ध्यान दीजिए: सुनने वाला कौन है?

    Answer

    मूल्य-बिंदु: अपने प्रेम और व्यथा की बात वे केवल कृष्ण से कहना चाहती थीं; कृष्ण स्वयं नहीं आए; उद्धव से कहना संभव नहीं ('नाहीं परत कही'); इसलिए अभिलाषाएँ भीतर ही रह गईं।

    आदर्श उत्तर: गोपियाँ अपने मन की बात कृष्ण से कहना चाहती थीं, पर कृष्ण स्वयं नहीं आए। योग सिखाने वाले उद्धव से वह बात कही नहीं जा सकती थी, इसलिए वह मन में रह गई।

  6. Q6 · 2 marks · Short answerHarder board level

    संकलित पदों के आधार पर सूर के भ्रमरगीत की कोई दो विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

    Hint

    व्यंग्य, सहज उपमाएँ और भाषा, इनमें से दो चुनिए।

    Answer

    मूल्य-बिंदु: व्यंग्य और वाक्चातुर्य, जैसे 'अति बड़भागी'; रोज़मर्रा की सहज उपमाएँ, जैसे कमल का पत्ता, गुड़ से लिपटी चींटी, कड़वी ककड़ी; निखरी ब्रजभाषा और लोकगीत जैसी गेयता।

    आदर्श उत्तर: भ्रमरगीत में तीखा व्यंग्य है, जैसे उद्धव को 'बड़भागी' कहना। कमल का पत्ता, गुड़ से लिपटी चींटी और कड़वी ककड़ी जैसी सहज उपमाएँ गहरी बात सरलता से कहती हैं।

  7. Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    गोपियाँ ज्ञान मार्ग की बजाय प्रेम मार्ग को श्रेष्ठ मानती हैं। क्या आप उनसे सहमत हैं? पदों के आधार पर तर्क सहित लिखिए।

    Hint

    अपना मत दीजिए, पर तर्क पद से जोड़िए, जैसे योग को 'करुई ककरी' कहना।

    Answer

    मूल्य-बिंदु: अपना स्पष्ट मत; गोपियों के लिए योग 'करुई ककरी' और 'ब्याधि' है क्योंकि वह भावना को नहीं समझता; प्रेम में मन, कर्म, वचन का समर्पण; विरह में सूखा उपदेश दुख बढ़ाता है।

    आदर्श उत्तर: हाँ, मैं सहमत हूँ। विरह में डूबे मन को सूखा योग-उपदेश कड़वी ककड़ी जैसा लगता है और पीड़ा बढ़ाता है। सच्चे प्रेम का सहारा ज्ञान नहीं दे पाता।

  8. Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    'हरि हैं राजनीति पढ़ि आए' कहकर गोपियाँ कृष्ण में आए बदलाव पर दुख जताती हैं। ऊँचे पद पर पहुँचकर पुराने अपनों से दूर हो जाने के बारे में अपना विचार पदों के आधार पर लिखिए।

    Hint

    गोपियाँ कृष्ण को क्या याद दिलाती हैं: 'पर हित' और 'प्रजा न जाहिं सताए'।

    Answer

    मूल्य-बिंदु: कृष्ण के मथुरा जाने के बाद स्वयं न आकर योग-संदेश भेजना गोपियों को चतुर राजनीति लगती है; गोपियाँ याद दिलाती हैं कि भले लोग दूसरों के हित के लिए काम करते थे; अपना विचार: पद बढ़ने पर भी अपनों के प्रति संवेदना नहीं छोड़नी चाहिए।

    आदर्श उत्तर: कृष्ण स्वयं न आकर योग-संदेश भेजते हैं; गोपियों को यह राजनीति लगती है। मेरे विचार से ऊँचे पद पर पहुँचकर भी अपनों का दुख समझना चाहिए; यही भले लोगों की पहचान है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.कृष्ण ने गोपियों के पास संदेश किसके द्वारा और किस विषय का भेजा?Show answer

    उद्धव के द्वारा; निर्गुण ब्रह्म और योग का संदेश।

  2. 2.ये चार पद किस ग्रंथ के किस भाग से लिए गए हैं?Show answer

    सूरसागर के भ्रमरगीत से।

  3. 3.भ्रमरगीत का आरंभ किस घटना से होता है?Show answer

    उद्धव के संदेश के समय वहाँ एक भौंरा आ पहुँचा; गोपियों ने उसी के बहाने उद्धव पर व्यंग्य किए।

  4. 4.गोपियाँ स्वयं की तुलना किससे करती हैं?Show answer

    गुड़ से लिपटी चींटी से: 'गुर चाँटी ज्यौं पागी'।

  5. 5.गोपियाँ अब तक किस आशा में व्यथा सह रही थीं?Show answer

    कृष्ण के तय अवधि पर लौट आने की आशा में: 'अवधि अधार आस आवन की'।

  6. 6.योग का संदेश गोपियों को कैसा लगता है?Show answer

    कड़वी ककड़ी जैसा: 'ज्यौं करुई ककरी'।

  7. 7.'हरि हैं राजनीति पढ़ि आए' किस पद की पहली पंक्ति है और उसमें क्या ताना है?Show answer

    चौथे पद की; कृष्ण चतुर राजनीतिज्ञ बन गए हैं, इसीलिए प्रेम के बदले योग-संदेश भेजा।

  8. 8.गोपियों के अनुसार राजधर्म क्या है?Show answer

    प्रजा को किसी भी प्रकार सताया न जाए: 'जो प्रजा न जाहिं सताए'।

  9. 9.शब्दार्थ बताइए: अपरस, पुरइनि पात, परागीShow answer

    अपरस: अलिप्त, नीरस, अछूता; पुरइनि पात: कमल का पत्ता; परागी: मुग्ध होना।

  10. 10.शब्दार्थ बताइए: गुहारि, जक री, मन चकरीShow answer

    गुहारि: रक्षा के लिए पुकारना; जक री: रटती रहती हैं; मन चकरी: जिनका मन स्थिर नहीं रहता।

  11. 11.शब्दार्थ बताइए: हारिल, मरजादा, ब्याधिShow answer

    हारिल: एक पक्षी जो पैरों में सदा एक लकड़ी पकड़े रहता है; मरजादा: मर्यादा, प्रतिष्ठा; ब्याधि: रोग, पीड़ा पहुँचाने वाली वस्तु।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • चारों पदों की पहली पंक्तियाँ क्रम से बोल सकते हैं? (बड़भागी, मन की मन, हारिल, राजनीति)
  • कमल का पत्ता और तेल की गगरी किसके लिए हैं, और गुड़ से लिपटी चींटी किसके लिए?
  • 'बड़भागी' का शब्दार्थ और उसमें छिपा व्यंग्य, दोनों एक-एक वाक्य में बता सकते हैं?
  • 'चाहति हुतीं गुहारि जितहिं तैं, उत तैं धार बही' का आशय 25 शब्दों में कह सकते हैं?
  • हारिल पक्षी लकड़ी के साथ क्या करता है, और गोपियाँ कृष्ण के साथ क्या करती हैं?
  • गोपियाँ योग की शिक्षा किन्हें देने को कहती हैं और 'मन चकरी' का अर्थ क्या है?
  • कृष्ण में गोपियों को कौन-सा बदलाव दिखता है, और वे अपना मन वापस पाने की बात क्यों कहती हैं?
  • राजधर्म वाली अंतिम पंक्ति बिना देखे लिख सकते हैं, और बता सकते हैं कि यह सूर की लोकधर्मिता कैसे दिखाती है?

सूरदास – पद: frequently asked questions

सूरदास का संक्षिप्त परिचय क्या है?

पाठ्यपुस्तक के अनुसार सूरदास का जन्म सन् 1478 में माना जाता है। वे महाप्रभु वल्लभाचार्य के शिष्य और अष्टछाप के कवियों में सर्वाधिक प्रसिद्ध थे। वे मथुरा और वृंदावन के बीच गऊघाट पर रहते थे और श्रीनाथ जी के मंदिर में भजन-कीर्तन करते थे। सन् 1583 में पारसौली में उनका निधन हुआ। उनके ग्रंथों में सूरसागर सबसे लोकप्रिय है; ये पद उसी के भ्रमरगीत से लिए गए हैं।

भ्रमरगीत क्या है और इसका नाम ऐसा क्यों पड़ा?

भ्रमरगीत सूरसागर का वह भाग है जिसमें गोपियाँ उद्धव के योग-संदेश का उत्तर देती हैं। जब उद्धव उपदेश दे रहे थे, तभी एक भौंरा आ गया और गोपियों ने भौंरे के बहाने उद्धव पर व्यंग्य किए। इसी भ्रमर (भौंरे) के कारण इसे भ्रमरगीत कहा जाता है।

गोपियाँ उद्धव को 'बड़भागी' क्यों कहती हैं?

यह व्यंग्य है। ऊपर से वे उद्धव को भाग्यवान कहती हैं, पर असल में कहना चाहती हैं कि कृष्ण के पास रहकर भी उद्धव प्रेम से अछूते रहे। इसलिए वे प्रेम के सुख और विरह के दुख दोनों से वंचित, यानी अभागे हैं।

'हारिल की लकरी' से गोपियाँ क्या कहना चाहती हैं?

हारिल एक पक्षी है जो अपने पैरों में सदा एक लकड़ी लिए रहता है और उसे छोड़ता नहीं। गोपियाँ कहती हैं कि कृष्ण उनके लिए वैसी ही लकड़ी हैं, यानी जीवन का अटल सहारा। इससे उनका एकनिष्ठ प्रेम प्रकट होता है।

योग-संदेश ने गोपियों की पीड़ा कैसे बढ़ाई?

गोपियाँ कृष्ण के लौटने की आशा के सहारे विरह सह रही थीं। उद्धव का योग-संदेश उस आशा को तोड़ देता है। जहाँ से वे सहारे की उम्मीद रखती थीं, वहीं से योग की धारा आई, इसलिए उनकी विरह-अग्नि और भड़क उठी।

गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या है?

गोपियों के अनुसार राजा का धर्म यह है कि उसकी प्रजा को कोई कष्ट न हो। जो दूसरों को अन्याय से छुड़ाता है, उसे स्वयं अन्याय नहीं करना चाहिए। यह बात सूरदास की लोकधर्मिता को दर्शाती है।

इस पाठ की तैयारी बोर्ड परीक्षा के लिए कैसे करें?

चारों पदों का भावार्थ और कठिन शब्दों के अर्थ अच्छी तरह याद करें, क्योंकि काव्यांश पर MCQ आते हैं। मुख्य प्रतीकों (हारिल, कमल का पत्ता, तेल की गगरी, करुई ककरी) और अलंकारों को पंक्तियों सहित पहचानना सीखें। 2 अंक के उत्तरों में दो बिंदु और एक छोटा प्रमाण 25-30 शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।

Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-अ (002), कक्षा 10, 2026-27; NCERT क्षितिज भाग 2 (Reprint 2026-27), पद