मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी: Class 10 पूरी व्याख्या
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'एक कहानी यह भी' मन्नू भंडारी का आत्मकथ्य है। इसमें अजमेर में बीता उनका किशोर जीवन, पिता का अंतर्विरोधों भरा व्यक्तित्व, प्राध्यापिका शीला अग्रवाल का प्रभाव और 1946-47 के स्वाधीनता आंदोलन में उनकी भागीदारी है। बोर्ड इससे पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (कथन-कारण सहित) और 25-30 शब्दों के दो अंकीय प्रश्न पूछता है।
What मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी is about
'एक कहानी यह भी' क्षितिज भाग 2 के गद्य खंड का पाठ है। इसकी लेखिका मन्नू भंडारी हैं। यह सिलसिलेवार आत्मकथा नहीं, बल्कि आत्मकथ्य है। इसमें लेखिका ने उन लोगों और घटनाओं के बारे में लिखा है जो उनके लेखकीय जीवन से जुड़े हैं। एक पंक्ति में कहें तो यह पाठ एक साधारण लड़की के असाधारण बनने के आरंभिक पड़ावों की कहानी है।
बोर्ड परीक्षा में यह पाठ खंड ग (गद्य खंड) में आता है। प्रश्न 7 में इसका कोई पठित गद्यांश देकर 1-1 अंक के पाँच बहुविकल्पी प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जिनमें एक कथन-कारण प्रश्न भी होता है। प्रश्न 8 में 25-30 शब्दों के 2-2 अंक वाले प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें चार में से तीन करने होते हैं। इनमें पात्रों के स्वभाव, घटनाओं के कारण और लेखिका के विचारों की समझ जाँची जाती है।
In real board papers: Course A, asked in 9 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 2.4 marks per paper; Course B, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026). See the questions
मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
लेखिका का जन्म मध्य प्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ, पर उनकी यादें अजमेर के ब्रह्मपुरी मोहल्ले के दो-मंज़िला मकान से शुरू होती हैं। ऊपर की मंज़िल पर पिता जी किताबों-अखबारों के बीच पढ़ते या 'डिक्टेशन' देते थे। नीचे बेपढ़ी-लिखी, सबकी आज्ञा मानने वाली माँ बच्चों के साथ रहती थीं।
इंदौर में पिता जी का बड़ा सम्मान था। वे कांग्रेस और समाज-सुधार से जुड़े थे और कई विद्यार्थियों को घर रखकर पढ़ाते थे। एक बड़े आर्थिक झटके के बाद वे अजमेर आए और विषयवार अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोश पर काम करने लगे। इससे यश तो मिला, पर धन नहीं। गिरती आर्थिक स्थिति ने उन्हें क्रोधी बना दिया और अपनों के विश्वासघात ने शक्की।
लेखिका काली और दुबली थीं। पिता जी उनकी तुलना गोरी, स्वस्थ बहन सुशीला से करते थे। इससे लेखिका के मन में हीन-भावना बैठ गई, जो बड़ी लेखिका बनने के बाद भी नहीं गई। माँ का त्याग और सहनशीलता भी उनका आदर्श नहीं बन सके, क्योंकि वह त्याग मजबूरी से उपजा था।
पाँच भाई-बहनों में सबसे छोटी मन्नू ने सुशीला के साथ आँगन में कई खेल खेले। उस समय पड़ोस घर का ही हिस्सा था। उनकी आरंभिक कहानियों के कई पात्र इसी मोहल्ले से आए।
सन् '44 में सुशीला की शादी हुई और भाई पढ़ने बाहर गए। तब लेखिका को पहली बार अपने अस्तित्व का बोध हुआ। पिता जी उन्हें रसोई से दूर रखते और राजनीतिक बहसों में बैठाते थे।
सन् '45 में कॉलेज के पहले वर्ष में हिंदी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल मिलीं। उन्होंने लेखिका को चुनकर पढ़ना सिखाया और साहित्य का दायरा बढ़ाया। उन्होंने देश की स्थितियों को समझने की बात को सक्रिय भागीदारी में बदल दिया। लेखिका नारे लगाने, हड़तालें करवाने लगीं और पिता जी से उनकी टक्कर शुरू हुई।
एक बार प्रिंसिपल का पत्र आने पर पिता जी गुस्से में कॉलेज गए, पर बेटी का प्रभाव जानकर गर्व से लौटे। आज़ाद हिंद फ़ौज के मुकदमे के समय चौपड़ पर लेखिका के भाषण के बाद एक दकियानूसी मित्र ने पिता जी को भड़काया। पर रात को डॉ. अंबालाल ने आकर लेखिका की खूब प्रशंसा की, तो पिता जी का गुस्सा गर्व में बदल गया।
मई '47 में शीला अग्रवाल को नोटिस मिला और लेखिका समेत दो-तीन छात्राओं का प्रवेश रोका गया। बाहर से विरोध के कारण अगस्त में थर्ड इयर खोलना पड़ा। पर यह खुशी 15 अगस्त 1947 की आज़ादी की बड़ी खुशी के सामने छोटी पड़ गई।
Themes and message
व्यक्तित्व-निर्माण पर परिवार और परिवेश का प्रभाव
लेखिका यह जानना चाहती हैं कि पिता की कौन-सी खूबियाँ और कमियाँ उनके भीतर बैठ गई हैं। वे मानती हैं कि पिता उनमें कुंठा, प्रतिक्रिया और प्रतिच्छाया के रूप में मौजूद हैं। बचपन की तुलना से उपजी हीन-भावना आज भी उन्हें अपनी उपलब्धियों पर भरोसा नहीं करने देती। पिता का शक्की स्वभाव भी उन्हें अपने टूटे विश्वासों में दिखता है। इससे पता चलता है कि हम चाहे अतीत को नकारें, वह हमारे भीतर जड़ जमाए रहता है।
From the text: लेखिका का कथन: "समय का प्रवाह भले ही हमें दूसरी दिशाओं में बहाकर ले जाए", फिर भी वह हमें पूरी तरह मुक्त नहीं कर सकता। सुशीला से तुलना पर: "गोरा रंग पिता जी की कमज़ोरी थी"।
पिता का अंतर्विरोधी व्यक्तित्व
पिता जी एक ओर आधुनिक थे। वे बेटी को रसोई से दूर रखते, बहसों में बैठाते और उसे विशिष्ट बनाना चाहते थे। दूसरी ओर वे समाज में अपनी छवि को लेकर डरते थे। बेटी का सड़कों पर नारे लगाना उन्हें सहन नहीं होता था। लोग प्रशंसा करें तो वे गर्व करते, निंदा करें तो भड़क उठते। लेखिका पूछती हैं कि विशिष्ट बनने की लालसा और सामाजिक छवि की चिंता साथ-साथ कैसे चल सकती हैं, क्योंकि इनका रास्ता ही टकराहट का है।
From the text: लेखिका की टिप्पणी: "कितनी तरह के अंतर्विरोधों के बीच जीते थे वे!" प्रिंसिपल वाली घटना और दकियानूसी मित्र तथा डॉ. अंबालाल वाली घटना में उनका बदलता व्यवहार।
स्त्री की पहचान और स्वतंत्रता
उस समय लड़कियों की सीमा घर थी और विवाह के लिए सोलह वर्ष की उम्र और मैट्रिक की पढ़ाई ही योग्यता मानी जाती थी। बड़े भाई-बहनों के जाने पर लेखिका को पहली बार अपने अस्तित्व का बोध हुआ। उन्होंने किसी की दी हुई आज़ादी के दायरे में चलने से इनकार किया। माँ का मजबूरी भरा त्याग भी उनका आदर्श नहीं बना। इससे संकेत मिलता है कि लेखिका स्त्री को सहने वाली नहीं, अपना रास्ता खुद चुनने वाली मानती हैं।
From the text: "नए सिरे से अपने वज़ूद का एहसास हुआ"; माँ के बारे में: "निहायत असहाय मजबूरी में लिपटा उनका यह त्याग कभी मेरा आदर्श नहीं बन सका"।
स्वाधीनता आंदोलन और युवा जोश
सन् '46-47 में प्रभात-फेरियाँ, हड़तालें, जुलूस और भाषण हर शहर में थे। शीला अग्रवाल की जोशीली बातों से लेखिका आंदोलन में कूद पड़ीं। उनके एक इशारे पर कॉलेज की लड़कियाँ कक्षाएँ छोड़कर नारे लगाने लगती थीं। आज़ाद हिंद फ़ौज के मुकदमे के समय उन्होंने चौपड़ पर भाषण दिया। प्रवेश रोके जाने पर भी बाहर से विरोध करके कॉलेज को झुकाया। पाठ इन सबका अंत 15 अगस्त 1947 की खुशी से करता है।
From the text: "रगों में बहते खून को लावे में बदल दिया था"; प्रिंसिपल की शिकायत कि सारा कॉलेज तीन लड़कियों के इशारे पर चल रहा है; अंतिम पंक्ति "शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धि...15 अगस्त 1947"।
अच्छे शिक्षक और साहित्य की भूमिका
दसवीं तक लेखिका बिना चुने और बिना समझे किताबें पढ़ती थीं। शीला अग्रवाल ने उन्हें चुनकर पढ़ना सिखाया, खुद किताबें दीं और उन पर बहसें कीं। दो साल में उनकी पढ़ाई शरत्-प्रेमचंद से जैनेंद्र, अज्ञेय, यशपाल और भगवतीचरण वर्मा तक पहुँच गई। इससे पता चलता है कि एक अच्छा शिक्षक केवल पढ़ाता नहीं, सोचने और काम करने की दिशा भी देता है। लेखिका के लेखकीय व्यक्तित्व के निर्माण में उनकी बड़ी भूमिका रही।
From the text: शीला अग्रवाल ने लेखिका का "मात्र पढ़ने को, चुनाव करके पढ़ने में बदला" और घर में बैठकर देश को जानने के सिलसिले को सक्रिय भागीदारी में बदल दिया।
Characters
मन्नू भंडारी (लेखिका)
आत्मकथ्य की नायिका और कथावाचक; पाँच भाई-बहनों में सबसे छोटी, जो किशोरावस्था में आंदोलन से जुड़ती हैं।
- आत्मविश्लेषी
- साहसी और विद्रोही
- नेतृत्व-क्षमता वाली
- संवेदनशील, भीतर से हीन-भावना से ग्रस्त
वे खुद देखती हैं कि पिता उनमें किन रूपों में हैं; पिता की रोक के बावजूद नारे लगाती और हड़तालें करवाती हैं; उनके इशारे पर लड़कियाँ कक्षा छोड़ देती थीं; उपलब्धियों की चर्चा पर वे "संकोच से सिमट" जाती हैं।
पिता जी (भंडारी जी)
लेखिका के पिता, शब्दकोश-निर्माता; लेखिका के व्यक्तित्व पर सबसे गहरा प्रभाव डालने वाले।
- कोमल और संवेदनशील, पर क्रोधी और अहंवादी
- यश-लिप्सा से भरे
- शक्की
- आधुनिक विचारों वाले, पर सामाजिक छवि से डरने वाले
पाठ में उन्हें एक ओर "बेहद कोमल और संवेदनशील" और दूसरी ओर "बेहद क्रोधी और अहंवादी" कहा गया है; अपनों के विश्वासघात ने उन्हें शक्की बनाया; बेटी को रसोई से दूर रखते थे; दकियानूसी मित्र की बात पर बेटी का घर से निकलना बंद करना चाहा।
माँ
लेखिका की बेपढ़ी-लिखी माँ, जो पिता के ठीक विपरीत हैं।
- अत्यंत धैर्यवान और सहनशील
- त्यागी
- अपने लिए कुछ न माँगने वाली
- व्यक्तित्वविहीन (लेखिका की दृष्टि में)
"धरती से कुछ ज़्यादा ही धैर्य और सहनशक्ति थी शायद उनमें"; वे पिता की हर ज़्यादती को अपना प्राप्य मानती थीं; बच्चों का लगाव उनसे था, पर उनका त्याग लेखिका का आदर्श नहीं बना।
शीला अग्रवाल
सावित्री गर्ल्स कॉलेज की हिंदी प्राध्यापिका, जिन्होंने लेखिका को साहित्य और आंदोलन से जोड़ा।
- प्रेरक शिक्षिका
- साहित्य की गहरी समझ वाली
- जोशीली और निडर
- देशभक्त
उन्होंने चुन-चुनकर किताबें दीं और उन पर बहसें कीं; उनकी बातों ने लेखिका के खून को लावे में बदल दिया; मई '47 में उन्हें लड़कियों को भड़काने के आरोप में नोटिस मिला।
डॉ. अंबालाल
पिता जी के अंतरंग मित्र और अजमेर के प्रतिष्ठित डॉक्टर।
- स्नेही
- खुले विचारों वाले
- उत्साह बढ़ाने वाले
चौपड़ पर भाषण सुनकर वे पिता जी को बधाई देने आए और कहा 'आई एम रिअली प्राउड ऑफ़ यू'; उनकी प्रशंसा से पिता जी का संतोष गर्व में बदल गया।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| आत्मकथ्य शैली और आत्मविश्लेषण | लेखिका आज की उम्र से पीछे मुड़कर देखती हैं: "आज पीछे मुड़कर देखती हूँ" और मानती हैं कि उस उम्र में उनका भाषण कैसा रहा होगा। | घटनाएँ केवल सुनाई नहीं जातीं, उन पर ईमानदार टिप्पणी भी होती है। इससे पाठ सच्चा और विश्वसनीय लगता है और पाठक लेखिका के मन को समझ पाता है। |
| मुहावरों का प्रयोग | "पिता जी की लू उतारी", "आग-बबूला", "आग लगाकर चले गए", "थू-थू करके चले जाएँ"। | भाषा बोलचाल जैसी, रोचक और जीवंत बनती है। पिता जी का गुस्सा और मित्र का भड़काना आँखों के सामने आ जाता है। |
| विरोध (कंट्रास्ट) और स्थिति-व्यंग्य | पिता और माँ के स्वभाव का विरोध; प्रिंसिपल के पत्र पर पिता जी जाते समय मुँह दिखाने से घबराते हैं और लौटकर बड़े गर्व से बात करते हैं। | अपेक्षा के उलट परिणाम से पाठ में रोचकता आती है। इससे पिता जी के अंतर्विरोध साफ़ दिखते हैं। |
| बिंब और लाक्षणिक भाषा | "रगों में बहते खून को लावे में बदल दिया था"; पिता को "इन गुणों के भग्नावशेषों को ढोते" बताना। | लावा युवा जोश की तीव्रता दिखाता है और भग्नावशेष पिता के टूटे हुए पुराने गौरव को। भाव गहरे और प्रभावशाली बनते हैं। |
| मिली-जुली भाषा | अंग्रेज़ी वाक्य 'यू हैव मिस्ड समथिंग' और उर्दू शब्द जैसे शिद्दत, वज़ूद, हकीकत। | पात्रों की बोली स्वाभाविक लगती है और उस समय के पढ़े-लिखे शहरी परिवेश का चित्र उभरता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
रसोई को वे भटियारखाना कहते थे
कथावाचक (लेखिका): बड़े भाई-बहनों के जाने के बाद पिता जी का ध्यान लेखिका पर गया और वे उन्हें रसोई से दूर रखते थे।
पिता जी मानते थे कि रसोई में रहना प्रतिभा को भट्टी में झोंकना है। यह उनकी आधुनिक सोच और बेटी को विशिष्ट बनाने की इच्छा दिखाता है।
निहायत असहाय मजबूरी में लिपटा उनका यह त्याग कभी मेरा आदर्श नहीं बन सका
कथावाचक (लेखिका): माँ के धैर्य, सहनशीलता और त्याग के वर्णन के बाद।
लेखिका माँ से प्रेम करती हैं, पर मजबूरी से उपजे त्याग को आदर्श नहीं मानतीं। इससे उनकी स्वतंत्र स्त्री-दृष्टि का पता चलता है।
यश-कामना बल्कि कहूँ कि यश-लिप्सा, पिता जी की सबसे बड़ी दुर्बलता थी
कथावाचक (लेखिका): पिता जी के जीवन-सिद्धांत के बारे में, ठीक प्रिंसिपल वाली घटना से पहले।
इसी यश-लिप्सा के कारण बेटी की प्रशंसा सुनकर पिता जी का क्रोध गर्व में बदल जाता था और लेखिका उनके कोप से बच जाती थीं।
यह लड़की मुझे कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं रखेगी
पिता जी: कॉलेज से प्रिंसिपल का पत्र पढ़कर, जिसमें अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात थी।
इससे पिता जी की सामाजिक छवि की चिंता दिखती है। बाद में वही बेटी के प्रभाव पर गर्व करते हैं, जो उनके अंतर्विरोध को उजागर करता है।
यह तो पूरे देश की पुकार है
पिता जी (लेखिका द्वारा उद्धृत): प्रिंसिपल से मिलकर लौटने पर पिता जी ने बताया कि उन्होंने वहाँ क्या कहा।
पिता जी बेटी के आंदोलन को देशहित से जोड़कर उसका पक्ष लेते हैं। लेखिका इस पर अवाक् रह गई थीं।
बंद करो अब इस मन्नू का घर से बाहर निकलना।
पिता जी: दकियानूसी मित्र द्वारा भड़काए जाने के बाद पिता जी दिन भर भभकते रहे।
यह दिखाता है कि दूसरों की निंदा से पिता जी तुरंत प्रभावित हो जाते थे। उनकी आज़ादी देने की सीमा यहीं स्पष्ट होती है।
आई एम रिअली प्राउड ऑफ़ यू
डॉ. अंबालाल: रात को लेखिका के घर लौटने पर, चौपड़ पर उनका भाषण सुनने के बाद।
प्रतिष्ठित व्यक्ति की प्रशंसा से पिता जी का गुस्सा गर्व में बदल गया। यह लेखिका के साहस की सार्वजनिक स्वीकृति है।
धरती से कुछ ज़्यादा ही धैर्य और सहनशक्ति थी शायद उनमें।
कथावाचक (लेखिका): माँ का परिचय देते हुए, जो पिता के ठीक विपरीत थीं।
धरती से तुलना माँ की असीम सहनशीलता दिखाती है। साथ ही यह बताती है कि उन्होंने अपने लिए कभी कुछ नहीं माँगा।
मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
तुलना से उपजी हीन-भावना
मान लीजिए आपके घर में रिश्तेदार बार-बार कहते हैं कि आपकी बहन आपसे ज़्यादा सुंदर और होशियार है। धीरे-धीरे आप सबके सामने बोलने से कतराने लगते हैं।
मन्नू भंडारी के अनुभव के आधार पर बताइए कि ऐसी तुलना का बच्चे पर क्या असर होता है और बड़ों को क्या करना चाहिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ: पिता द्वारा गोरी सुशीला से तुलना; लेखिका में हीन-भावना, जो बड़ी लेखिका बनने पर भी नहीं गई।
- असर: आत्मविश्वास की कमी लंबे समय तक रहती है।
- सुझाव: बड़ों को हर बच्चे की अपनी खूबी पहचाननी चाहिए।
Answer: तुलना से बच्चे में हीन-भावना बैठ जाती है, जैसी मन्नू भंडारी में जीवन भर रही। बड़ों को तुलना के बजाय हर बच्चे की अपनी खूबियों को सराहना चाहिए।
Memory hook: सुशीला से तुलना, मन्नू की हीन-भावना: तुलना घाव देती है।
एक अच्छे शिक्षक का प्रभाव
कल्पना कीजिए कि आपकी नई हिंदी अध्यापिका कक्षा के बाद आपको अच्छी कहानियों की सूची देती हैं और हर हफ़्ते उन पर आपसे चर्चा करती हैं।
शीला अग्रवाल के उदाहरण से बताइए कि ऐसी अध्यापिका आपके जीवन में क्या बदलाव ला सकती है।
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ: शीला अग्रवाल ने 'मात्र पढ़ने को, चुनाव करके पढ़ने में बदला'।
- परिणाम: लेखिका की साहित्यिक समझ बढ़ी और वे आंदोलन में सक्रिय हुईं।
- आज: ऐसी अध्यापिका पढ़ने की रुचि और सोचने की क्षमता बढ़ा सकती है।
Answer: ऐसी अध्यापिका मुझे सोच-समझकर पढ़ना और अपनी राय बनाना सिखाएगी। जैसे शीला अग्रवाल ने लेखिका का साहित्य-संसार बढ़ाया, वैसे ही मेरी रुचि और आत्मविश्वास भी बढ़ेंगे।
Memory hook: शीला अग्रवाल: पढ़ने को 'चुनकर पढ़ने' में बदलने वाली गुरु।
छवि की चिंता बनाम सच्चा गर्व
मान लीजिए आप स्कूल की बहस प्रतियोगिता में भाग लेना चाहती हैं। पिता पहले मना करते हैं कि लोग क्या कहेंगे, पर जीतने पर पड़ोसियों से आपकी तारीफ़ सुनकर गर्व करते हैं।
यह स्थिति लेखिका के पिता के अंतर्विरोध से कैसे मिलती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ: दकियानूसी मित्र की बात पर पिता का क्रोध; डॉ. अंबालाल की प्रशंसा पर गर्व।
- समानता: दोनों में निर्णय समाज की राय पर निर्भर।
- सीख: बच्चे की प्रतिभा पर भरोसा पहले से होना चाहिए, प्रशंसा के बाद नहीं।
Answer: दोनों पिता समाज की राय देखकर अपना मत बदलते हैं। लेखिका के पिता भी पहले नाराज़ हुए और डॉ. अंबालाल की प्रशंसा सुनकर गर्व से भर गए; यही अंतर्विरोध है।
Memory hook: पहले 'लोग क्या कहेंगे', फिर 'लोग क्या कह रहे हैं!': पिता जी का अंतर्विरोध।
Topics in this chapter
- लेखिका के पिता का चरित्र-चित्रणComing soon
- एक कहानी यह भी प्रश्न-उत्तरComing soon
- शीला अग्रवाल का लेखिका पर प्रभावComing soon
- स्वाधीनता आंदोलन में मन्नू भंडारी की भूमिकाComing soon
- एक कहानी यह भी का सारांश और संदेशComing soon
How the board asks मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (प्रश्न 7) | पाठ का कोई अंश, जैसे पिता की आर्थिक स्थिति, सुशीला का विवाह या आज़ाद हिंद फ़ौज वाली हड़ताल, देकर 1-1 अंक के पाँच प्रश्न पूछे जाते हैं। कुछ प्रश्नों में I, II, III कथन देकर सही संयोजन चुनना होता है। | पहले पूरा गद्यांश ध्यान से पढ़ें। उत्तर गद्यांश के शब्दों से मिलाएँ, अनुमान से नहीं। 'सर्वाधिक उपयुक्त' विकल्प चुनें; आधे सही विकल्प से बचें। कथनों वाले प्रश्न में हर कथन को अलग से जाँचें। |
| कथन-कारण प्रश्न | कथन (A) और कारण (R) देकर पूछा जाता है कि दोनों सही हैं या नहीं और R, A की सही व्याख्या है या नहीं, जैसे पिता के रसोई को भटियारखाना कहने का कारण। | पहले A और R को अलग-अलग पाठ से जाँचें। फिर देखें कि R सचमुच A का कारण है या केवल एक सही बात है। 'क्योंकि' जोड़कर पढ़ने से संबंध स्पष्ट हो जाता है। |
| कथन का संदर्भ (किसने, किसके लिए, क्यों) | पाठ की कोई पंक्ति देकर पूछा जाता है कि यह किसके लिए कही गई है और क्यों, या निर्देश किसे दिया गया है। 25-30 शब्दों में, 2 अंक। | पहले वक्ता और जिसके लिए कहा गया, उसका नाम लिखें। फिर एक-दो वाक्यों में कारण बताएँ और पाठ की घटना से जोड़ें। उत्तर 30 शब्दों से आगे न जाए। |
| घटना या कारण पर लघु प्रश्न | जैसे लेखिका को अस्तित्व का बोध कब हुआ, पिता जी का क्रोध गर्व में कैसे बदला, कॉलेज ने छात्राओं का प्रवेश क्यों रोका। 25-30 शब्दों में, 2 अंक। | घटना का समय या संदर्भ (जैसे सन् '44, सन् '47) और उसका परिणाम दोनों लिखें। दो अंक के लिए दो स्पष्ट बिंदु रखें। |
| चरित्र-चित्रण और विश्लेषण | पिता जी, माँ या शीला अग्रवाल के स्वभाव, पिता के अंतर्विरोध या लेखिका पर किसका क्या प्रभाव पड़ा, इस पर प्रश्न। | हर गुण के साथ पाठ का एक उदाहरण दें। पिता के बारे में दोनों पक्ष (आधुनिकता और छवि की चिंता) लिखें। केवल विशेषण गिनाने से पूरे अंक नहीं मिलते। |
| भाषा-शैली और मूल्य-आधारित प्रश्न | गद्यांश की भाषा कैसी है, किसी मुहावरे का अर्थ, या आज के समय से तुलना करते हुए लेखिका के विचार का मूल्यांकन। | भाषा के लिए मिली-जुली शब्दावली और मुहावरों का उदाहरण दें। मूल्य-आधारित प्रश्न में पहले पाठ का संदर्भ दें, फिर अपना तर्कपूर्ण विचार लिखें। |
Tricks to remember मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
घटनाओं का क्रम: 'अजमेर-तुलना-भटियारखाना-शीला-पत्र-अंबालाल-15 अगस्त'
(1) अजमेर: ब्रह्मपुरी का दो-मंज़िला मकान, शब्दकोश; (2) तुलना: सुशीला से, हीन-भावना; (3) भटियारखाना: रसोई से दूर, बहसें सुनो; (4) शीला अग्रवाल: चुनकर पढ़ना, आंदोलन; (5) प्रिंसिपल का पत्र: पिता का गर्व; (6) डॉ. अंबालाल: चौपड़ का भाषण; (7) 15 अगस्त 1947: शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धि।
Use it when: गद्यांश किस प्रसंग का है, यह पहचानकर प्रश्न के पात्र और कारण सही लिखें।
पिता जी के चार रूप
'यश, क्रोध, शक, गर्व': यश-लिप्सा (विशिष्ट बनना), क्रोध (आर्थिक तंगी), शक (अपनों का विश्वासघात), गर्व (बेटी की प्रशंसा पर)।
Use it when: पिता के चरित्र-चित्रण में चारों के एक-एक प्रमाण दें।
मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: शीला अग्रवाल और साहित्य की दुनिया
मात्र पढ़ने को, चुनाव करके पढ़ने में बदला...खुद चुन-चुनकर किताबें दीं...पढ़ी हुई किताबों पर बहसें कीं तो दो साल बीतते-न-बीतते साहित्य की दुनिया शरत्-प्रेमचंद से बढ़कर जैनेंद्र, अज्ञेय, यशपाल, भगवतीचरण वर्मा तक फैल गई और फिर तो फैलती ही चली गई।
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इससे पहले लेखिका बताती हैं कि उनका परिचय शीला अग्रवाल से हुआ, जो उसी वर्ष कॉलिज में नियुक्त हुई थीं।) शीला अग्रवाल कौन थीं?
(क) लेखिका की बड़ी बहन
(ख) कॉलिज की हिंदी प्राध्यापिका
(ग) कॉलिज की प्रिंसिपल
(घ) पिता जी की मित्र(2) · 1 mark · MCQ
'मात्र पढ़ने को, चुनाव करके पढ़ने में बदला' — इसका आशय है कि शीला अग्रवाल ने लेखिका को—
(क) पढ़ना छुड़वा दिया
(ख) कुछ भी पढ़ने के स्थान पर सोच-समझकर अच्छी पुस्तकें चुनकर पढ़ना सिखाया
(ग) केवल पाठ्यपुस्तकें पढ़ने को कहा
(घ) अंग्रेज़ी पुस्तकें पढ़ने को कहा(3) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: लेखिका बताती हैं कि उन्होंने सावित्री गर्ल्स हाई स्कूल में 'ककहरा' सीखा था।) 'ककहरा सीखना' का अर्थ है—
(क) कविता लिखना
(ख) प्रारंभिक अक्षर-ज्ञान प्राप्त करना
(ग) भाषण देना
(घ) खेल सीखना(4) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): दो वर्षों में लेखिका की साहित्य की दुनिया शरत्-प्रेमचंद से आगे बढ़कर जैनेंद्र, अज्ञेय, यशपाल तक फैल गई।
कारण (R): शीला अग्रवाल ने स्वयं चुनकर किताबें दीं और पढ़ी हुई किताबों पर उनसे बहसें कीं।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, पर कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता
(ग) कथन (A) सही है, पर कारण (R) गलत है
(घ) कथन (A) गलत है, पर कारण (R) सही है(5) · 1 mark · MCQ
गद्यांश से शीला अग्रवाल के बारे में कौन-सा निष्कर्ष सबसे उचित है?
(क) वे केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाली अध्यापिका थीं
(ख) वे विद्यार्थियों की रुचि और सोच को दिशा देने वाली प्रेरक अध्यापिका थीं
(ग) वे विद्यार्थियों से दूरी रखती थीं
(घ) उन्हें साहित्य में रुचि नहीं थी
Show the answersAnswers
- (ख) कॉलिज की हिंदी प्राध्यापिका
- (ख) कुछ भी पढ़ने के स्थान पर सोच-समझकर अच्छी पुस्तकें चुनकर पढ़ना सिखाया
- (ख) प्रारंभिक अक्षर-ज्ञान प्राप्त करना
- (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है
- (ख) वे विद्यार्थियों की रुचि और सोच को दिशा देने वाली प्रेरक अध्यापिका थीं
Extract 2: डॉ. अंबालाल की प्रशंसा
‘आई एम रिअली प्राउड ऑफ़ यू’...क्या तुम घर में घुसे रहते हो भंडारी जी...घर से निकला भी करो। ‘यू हैव मिस्ड समथिंग’, और वे धुआँधार तारीफ़ करने लगे—वे बोलते जा रहे थे और पिता जी के चेहरे का संतोष धीरे-धीरे गर्व में बदलता जा रहा था।
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इस अंश से ठीक पहले डॉ. अंबालाल लेखिका का गर्मजोशी से स्वागत करते हैं और बताते हैं कि वे 'चौपड़' से सीधे भंडारी जी को बधाई देने आए हैं।) डॉ. अंबालाल 'भंडारी जी' को बधाई देने क्यों आए थे?
(क) लेखिका की परीक्षा में सफलता पर
(ख) चौपड़ पर लेखिका का भाषण सुनकर
(ग) पिता जी की नई पुस्तक पर
(घ) सुशीला के विवाह पर(2) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: डॉ. अंबालाल कहते हैं कि वे 'चौपड़' से सीधे बधाई देने आए हैं।) 'चौपड़' से क्या अभिप्राय है?
(क) एक खेल
(ख) अजमेर के मुख्य बाज़ार का चौराहा
(ग) कॉलिज का मैदान
(घ) लेखिका का घर(3) · 1 mark · MCQ
'घर से निकला भी करो' कहकर डॉ. अंबालाल पिता जी से क्या कहना चाहते हैं?
(क) वे पिता जी को घूमने की सलाह देते हैं
(ख) पिता जी ने बाहर हो रही बेटी की प्रशंसनीय गतिविधि को नहीं देखा, यह उनकी चूक है
(ग) पिता जी को डॉक्टर के पास जाना चाहिए
(घ) पिता जी को घर बदल लेना चाहिए(4) · 1 mark · MCQ
पिता जी के चेहरे का 'संतोष' धीरे-धीरे किसमें बदलता गया?
(क) क्रोध में
(ख) गर्व में
(ग) भय में
(घ) निराशा में(5) · 1 mark · MCQ
इस प्रसंग से पिता जी के स्वभाव की कौन-सी विशेषता प्रकट होती है?
(क) वे समाज में अपनी प्रतिष्ठा और प्रशंसा के प्रति बहुत सजग थे
(ख) उन्हें किसी की राय की परवाह नहीं थी
(ग) वे बेटी की राजनीति के कट्टर समर्थक थे
(घ) वे डॉक्टर साहब से नाराज़ थे
Show the answersAnswers
- (ख) चौपड़ पर लेखिका का भाषण सुनकर
- (ख) अजमेर के मुख्य बाज़ार का चौराहा
- (ख) पिता जी ने बाहर हो रही बेटी की प्रशंसनीय गतिविधि को नहीं देखा, यह उनकी चूक है
- (ख) गर्व में
- (क) वे समाज में अपनी प्रतिष्ठा और प्रशंसा के प्रति बहुत सजग थे
मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: रसोई 'भटियारखाना' क्यों · 2 marks · Short answerBoard level
लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर क्यों संबोधित किया है?
Try it first, then show the solutionSolution
- भटियारखाना: जहाँ हमेशा भट्टी जलती रहे।
- पिता का मत: रसोई में रहना अपनी क्षमता और प्रतिभा को भट्टी में झोंकना।
- उद्देश्य: बेटी देश-दुनिया की बहसें सुने और विशिष्ट बने।
Answer: पिता जी मानते थे कि रसोई में समय बिताना अपनी क्षमता और प्रतिभा को भट्टी में झोंकना है। वे चाहते थे कि बेटी घर की राजनैतिक बहसें सुनकर जागरूक बने।
Example 2: आँखों और कानों पर विश्वास न होना · 2 marks · Short answerHarder board level
वह कौन-सी घटना थी जिसके बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हुआ, न कानों पर?
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रिंसिपल का पत्र: अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।
- अपेक्षा: पिता जी डाँटेंगे; लेखिका पड़ोस में छिप गई।
- वास्तविकता: पिता जी गर्व से लौटे; 'यह तो पूरे देश की पुकार है'।
Answer: शिकायत का पत्र आने पर लेखिका डाँट से डर रही थी। पर पिता जी प्रिंसिपल से मिलकर गर्व से लौटे और बोले कि यह तो पूरे देश की पुकार है।
Example 3: पिता से वैचारिक टकराहट · 2 marks · Short answerHarder board level
लेखिका की अपने पिता से वैचारिक टकराहट को अपने शब्दों में लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- पिता: आज़ादी घर की चारदीवारी में बहस सुनने तक सीमित।
- लेखिका: सड़कों पर नारे, हड़तालें, जुलूस में सक्रिय भागीदारी।
- परिणाम: टकराहट विवाह तक चलती रही।
Answer: पिता जी चाहते थे कि लेखिका घर की बहसें सुनकर जागरूक बने, पर सड़कों पर नारे लगाना और हड़तालें करवाना उन्हें बर्दाश्त नहीं था। यही टकराहट चलती रही।
Example 4: पिता जी के अंतर्विरोध · 2 marks · Short answerHarder board level
लेखिका के अनुसार पिता जी 'कितनी तरह के अंतर्विरोधों के बीच जीते थे'। उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- एक ओर: विशिष्ट बनने-बनाने की प्रबल लालसा।
- दूसरी ओर: अपनी सामाजिक छवि के प्रति उतनी ही सजगता।
- उदाहरण: दकियानूसी मित्र की बात पर क्रोध; डॉ. अंबालाल की प्रशंसा पर गर्व।
Answer: पिता जी बेटी को विशिष्ट बनाना चाहते थे, पर अपनी सामाजिक छवि की भी चिंता करते थे। दकियानूसी मित्र की बात पर भड़के, अंबालाल जी की प्रशंसा पर गर्वित हुए।
Example 5: स्वाधीनता आंदोलन में मन्नू की भूमिका · 2 marks · Short answerHOTS / competency
इस आत्मकथ्य के आधार पर स्वाधीनता आंदोलन के परिदृश्य में मन्नू जी की भूमिका को रेखांकित कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- परिदृश्य: '46-47 में प्रभात-फेरियाँ, हड़तालें, जुलूस, भाषण।
- भूमिका: नारे लगाना, हड़तालें करवाना, चौपड़ पर भाषण, कॉलिज की लड़कियों का नेतृत्व।
- प्रभाव: कॉलिज को थर्ड इयर फिर खोलना पड़ा।
Answer: उस समय प्रभात-फेरियाँ, हड़तालें और जुलूस आम थे। मन्नू जी नारे लगातीं, हड़तालें करवातीं, चौपड़ पर भाषण देतीं और कॉलिज की लड़कियों का नेतृत्व करती थीं।
Example 6: आज की लड़कियाँ और दायरे · 2 marks · Short answerHOTS / competency
लड़की होने के कारण लेखिका का दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था। क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ ऐसी ही हैं? तर्क सहित लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- तब: लड़कियाँ घर तक सीमित; विवाह के लिए मैट्रिक और सोलह वर्ष पर्याप्त।
- आज: शिक्षा, खेल, नौकरी में बहुत अवसर।
- पर: कई जगह सुरक्षा और सोच की बाधाएँ बाकी; बदलाव अधूरा।
Answer: आज लड़कियाँ शिक्षा, खेल और नौकरी में आगे बढ़ रही हैं, इसलिए स्थिति बहुत बदली है। फिर भी कई जगह सुरक्षा और पुरानी सोच की बाधाएँ बाकी हैं।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर क्यों संबोधित किया है? (25-30 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| पिता का मत: रसोई में रहना प्रतिभा और क्षमता को भट्टी में झोंकना | 1 |
| उद्देश्य: बेटी देश-दुनिया की बहसें सुनकर जागरूक और विशिष्ट बने | 1 |
पठित गद्यांश (एक कहानी यह भी) पर आधारित पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, जिनमें एक कथन-कारण प्रश्न शामिल है (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| पात्र या घटना की पहचान | 1 |
| शब्द या मुहावरे का अर्थ (जैसे ककहरा, चौपड़) | 1 |
| कथन का आशय | 1 |
| कथन-कारण | 1 |
| पात्र के स्वभाव का निष्कर्ष | 1 |
Where students lose marks in मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: प्रिंसिपल वाली घटना और डॉ. अंबालाल वाली घटना को एक मान लेना
पहली में पिता जी कॉलिज जाकर गर्व से लौटे; दूसरी में मित्र की शिकायत के बाद डॉ. अंबालाल ने चौपड़ के भाषण की प्रशंसा की।
Wrong working
डॉ. अंबालाल का पत्र आने पर पिता जी कॉलिज गए।
Right working
प्रिंसिपल का पत्र आने पर पिता जी कॉलिज गए; डॉ. अंबालाल चौपड़ पर भाषण सुनकर बधाई देने घर आए।
Do this: दोनों प्रसंगों का कारण और परिणाम अलग-अलग याद रखें।
Usually costs: 2 अंक
Mistake: शीला अग्रवाल को प्रिंसिपल लिख देना
वे हिंदी की प्राध्यापिका थीं; प्रिंसिपल ने तो पिता जी को शिकायत का पत्र भेजा था।
Do this: पात्रों के पद (प्राध्यापिका, प्रिंसिपल, डॉक्टर) ठीक लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: पिता जी को केवल 'बुरे' या केवल 'अच्छे' व्यक्ति के रूप में चित्रित करना
पाठ का केंद्र पिता के अंतर्विरोध हैं: प्रगतिशील भी, शक्की और छवि-सजग भी।
Do this: चरित्र-चित्रण में दोनों पक्ष, एक-एक प्रमाण के साथ।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 2 अंक के उत्तर में 40-50 शब्द लिख देना
क्षितिज गद्य खंड के लघु प्रश्न 25-30 शब्दों के होते हैं; लंबा उत्तर समय खाता है और अंक नहीं बढ़ाता।
Do this: मुख्य बात + एक प्रमाण, बस।
Usually costs: समय
Mistake: 'भटियारखाना' का अर्थ 'रसोई' मात्र लिखकर कारण न बताना
प्रश्न 'क्यों' पूछता है: पिता के अनुसार वहाँ रहना प्रतिभा को भट्टी में झोंकना था।
Do this: शब्द का अर्थ + पिता का उद्देश्य, दोनों लिखें।
Usually costs: 1 अंक
मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी: previous year questions
- Course A: Asked in 9 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 2.4 marks per paper; 10 questions in all, counting OR alternatives. In 0 of 4 sample papers.
- Course B: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).
Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.
Solved board questions from मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी
Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.
2026 Course A, set 3/2/1, Q7 · 5 marks · Reading comprehensionCompetency-based
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों का सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : 5×1=5
उन्होंने अपने अकेले के बल-बूते और हौसले से अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोश (विषयवार) के अधूरे काम को आगे बढ़ाना शुरू किया जो अपनी तरह का पहला और अकेला शब्दकोश था। इसने उन्हें यश और प्रतिष्ठा तो बहुत दी, पर अर्थ नहीं और शायद गिरती आर्थिक स्थिति ने ही उनके व्यक्तित्व के सारे सकारात्मक पहलुओं को निचोड़ना शुरू कर दिया। सिकुड़ती आर्थिक स्थिति के कारण और अधिक विस्फारित उनका अहं उन्हें इस बात तक की अनुमति नहीं देता था कि वे कम-से-कम अपने बच्चों को तो अपनी आर्थिक विवशताओं का भागीदार बनाएँ। नवाबी आदतें, अधूरी महत्वाकांक्षाएँ, हमेशा शीर्ष पर रहने के बाद हाशिए पर सरकते चले जाने की यातना क्रोध बनकर हमेशा माँ को कँपाती-थरथराती रहती थीं। अपनों के हाथों विश्वासघात की जाने कैसी गहरी चोटें होंगी वे जिन्होंने आँख मूँदकर सबका विश्वास करने वाले पिता को बाद के दिनों में इतना शक्की बना दिया कि जब-तब हम लोग भी उसकी चपेट में आते ही रहते।
- (i)1 mark
मन्नू भंडारी के पिता की गिरती आर्थिक स्थिति का उन पर क्या प्रभाव पड़ा ? इस प्रश्न के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए :
I. अधिक क्रोधी हो गए।
II. व्यक्तित्व के सकारात्मक पहलू बढ़ गए।
III. अहंकार में वृद्धि हो गई।
विकल्प :- (A)केवल I और II सही हैं।
- (B)केवल I और III सही हैं।
- (C)केवल I सही है।
- (D)I, II और III तीनों सही हैं।
- (ii)1 mark
गद्यांश के आधार पर पहले पिता की आर्थिक स्थिति कैसी थी ?
- (A)प्रतिष्ठित किंतु संकुचित आर्थिक स्थिति।
- (B)अस्थिर और अनिश्चितता से भरी हुई।
- (C)भविष्य के लिए उम्मीदों से भरी।
- (D)सम्पन्न और सम्मानजनक स्थिति।
- (iii)1 mark
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : विषयवार अंग्रेज़ी-हिंदी के शब्दकोश-निर्माण में पिता को प्रतिष्ठा बहुत मिली पर अर्थ प्राप्ति नहीं हुई।
कारण : वे शब्दकोश का काम भली-भाँति नहीं कर पा रहे थे।
विकल्प :- (A)कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है।
- (B)कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
- (C)कथन सही है, किंतु कारण ग़लत है।
- (D)कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv)1 mark
मन्नू भंडारी के पिता शक्की स्वभाव के क्यों हो गए ?
- (A)गिरती हुई आर्थिक स्थिति के कारण
- (B)मन्नू भंडारी के कॉलेज से शिकायत आने के कारण
- (C)अपने विश्वासपात्रों से मिले विश्वासघात को झेलने के कारण
- (D)हाशिए पर चले जाने के अपमान-बोध के कारण
- (v)1 mark
उपर्युक्त गद्यांश में मन्नू भंडारी ने अपने पिताजी के विषय में कौन-कौन सी बातें साझा की हैं ? इस प्रश्न के उत्तर के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए :
I. पिता अपने बच्चों को आर्थिक संकट के बारे में बताते थे।
II. पिताजी आँख मूँदकर सब पर विश्वास कर लेते थे।
III. पिता के भीतर नवाबी आदतें थीं और वे सदा शीर्ष पर रहना पसंद करते थे।
IV. पिता के संदेही स्वभाव का प्रभाव बच्चों पर भी पड़ता था।
विकल्प :- (A)I, II और III सही हैं।
- (B)I, III और IV सही हैं।
- (C)I, II और IV सही हैं।
- (D)II, III और IV सही हैं।
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(i) आर्थिक स्थिति गिरने पर पिता का क्रोध और अहं बढ़ा, जबकि सकारात्मक पहलू निचुड़ने लगे। इसलिए केवल I और III सही हैं: (B)।
- 1 mark
(ii) शब्दकोश के काम से पहले वे शीर्ष पर थे, नवाबी आदतों वाले थे। उनकी स्थिति संपन्न और सम्मानजनक थी: (D)।
- 1 mark
(iii) शब्दकोश से यश बहुत मिला, पर धन नहीं, इसलिए कथन सही है। कारण ग़लत है क्योंकि काम अनूठा और सफल था: (C)।
- 1 mark
(iv) अपनों से मिले विश्वासघात की गहरी चोटों ने उन्हें शक्की बनाया: (C)।
- 1 mark
(v) कथन II, III और IV पाठ से मेल खाते हैं। I ग़लत है क्योंकि पिता बच्चों को आर्थिक विवशता नहीं बताते थे: (D)।
Answer: (i) B; (ii) D; (iii) C; (iv) C; (v) D
Where the marks are
- (i) B (1 अंक)
- (ii) D (1 अंक)
- (iii) C (1 अंक)
- (iv) C (1 अंक)
- (v) D (1 अंक)
2024 Course A, set 3/2/1, Q8 · 2 marks · MCQ
गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित दो बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए : (2 × 1 = 2)
- (i)1 mark
'एक कहानी यह भी' पाठ में लेखिका की दृष्टि में उनकी माँ का व्यक्तित्व आदर्श रूप नहीं था क्योंकि
- (A)उनकी माँ अपने बच्चों से भेदभाव करती थीं।
- (B)उनकी माँ बहुत अधिक पढ़ी-लिखी नहीं थीं।
- (C)उन्हें उनका व्यक्तित्व काफ़ी दबा-दबा सा लगता था।
- (D)उनकी माँ बहुत ही आक्रामक स्वभाव की थीं।
- (ii)1 mark
'संस्कृति' पाठ में सुसंस्कृत व्यक्ति में किस भाव की प्रधानता मानी गई है ?
- (A)लोककल्याण की भावना
- (B)स्वकल्याण की भावना
- (C)बंधुकल्याण की भावना
- (D)भाषाकल्याण की भावना
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(i) 'एक कहानी यह भी' में लेखिका को अपनी माँ का व्यक्तित्व दबा-दबा सा लगता था, इसीलिए वह उसे आदर्श रूप नहीं मानती थीं। उत्तर (C) है।
- 1 mark
(ii) 'संस्कृति' पाठ में सुसंस्कृत व्यक्ति की पहचान लोककल्याण की भावना से होती है। उत्तर (A) है।
Answer: (i) C; (ii) A
Where the marks are
- (i) सही विकल्प C (1 अंक)
- (ii) सही विकल्प A (1 अंक)
2024 Course A, set 3/2/1, Q11 · 6 marks · Very short answer
गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए : (3 × 2 = 6)
- (क)2 marks
'एक कहानी यह भी' के आधार पर लिखिए कि मन्नू भंडारी को नए सिरे से अपने अस्तित्व का बोध कब हुआ ?
- (ख)2 marks
'शहनाई' क्या है ? भारतीय संगीत में इसका क्या महत्त्व है ?
- (ग)2 marks
'लखनवी अंदाज़' पाठ के लेखक को ऐसा क्यों लगा कि उनकी उपस्थिति ने नवाब साहब को असहज कर दिया ?
- (घ)2 marks
'बालगोबिन साहब के भक्त थे ।' पंक्ति में वर्णित साहब कौन थे और उनके प्रति उनकी भक्ति के क्या कारण रहे होंगे ?
Try it first, then show our solutionSolution
- 2 marks
(क) बड़ी बहन सुशीला के विवाह और भाई के पढ़ने के लिए बाहर जाने से घर में बड़े भाई-बहनों की छत्र-छाया हट गई। तब पिताजी का ध्यान पहली बार मन्नू पर केंद्रित हुआ और उन्हें अपने अस्तित्व का बोध हुआ।
- 2 marks
(ख) शहनाई एक सुषिर वाद्य है, जो फूँककर बजाया जाता है। इसे मंगल-ध्वनि का वाद्य माना जाता है और विवाह जैसे शुभ अवसरों पर बजाया जाता है। अवधी लोकगीतों और चैती में इसका बार-बार उल्लेख मिलता है।
- 2 marks
(ग) नवाब साहब ने खीरे काटकर नमक-मिर्च लगाकर सजा लिए थे। लेखक के आने से उनका एकांत भंग हुआ, संगति के लिए उन्होंने उत्साह नहीं दिखाया और उनके चेहरे पर असंतोष तथा विघ्न का भाव था। इसी से लेखक को लगा कि वे असहज हो गए हैं और वे खिड़की के बाहर देखने लगे।
- 2 marks
(घ) साहब कबीर थे। बालगोबिन भगत कबीर के आदर्शों के कारण उनके भक्त थे। कबीर की भक्ति-परंपरा में आस्था थी, वे गृहस्थ होकर भी साधु जैसा जीवन जीते थे और सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते थे।
Answer: किन्हीं तीन उपभागों के उत्तर, ऊपर चारों दिए गए हैं।
Where the marks are
- (क) संदर्भ के अनुसार एक उपयुक्त बिंदु (2 अंक); थोड़ा-बहुत उत्तर (1 अंक)
- (ख) शहनाई का परिचय (1 अंक) और भारतीय संगीत में महत्त्व (1 अंक)
- (ग) कोई दो उपयुक्त बिंदु (2 अंक)
- (घ) साहब = कबीर (½ अंक) तथा भक्ति के तीन कारण (½+½+½ अंक)
Every मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी question, by year
Course A (10 questions, sample papers included)
Course B (0 questions, sample papers included)
Practice questions on मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerBoard level
लेखिका के पिता इंदौर से अजमेर क्यों आए और वहाँ क्या काम करने लगे?
Hint
आर्थिक झटका और शब्दकोश।
Answer
उत्तर-बिंदु: बड़े आर्थिक झटके के कारण अजमेर आए; अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोश के अधूरे काम में लगे; यश मिला, धन नहीं।
आदर्श उत्तर: एक बड़े आर्थिक झटके के बाद पिता जी इंदौर से अजमेर आ गए। वहाँ वे विषयवार अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोश पर काम करने लगे, जिससे यश तो मिला, पर धन नहीं।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
लेखिका के मन में हीन-भावना क्यों पैदा हुई?
Hint
रंग-रूप और बहन सुशीला।
Answer
उत्तर-बिंदु: लेखिका काली और दुबली; पिता गोरी सुशीला से तुलना करते; हीन-भावना जीवन भर रही।
आदर्श उत्तर: लेखिका काली और दुबली थीं। पिता जी उनकी तुलना गोरी और स्वस्थ बहन सुशीला से करते थे। इसी से उनके मन में हीन-भावना बैठ गई, जो बाद तक रही।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
लेखिका के व्यक्तित्व पर किन दो व्यक्तियों का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा?
Hint
एक घर में, एक कॉलिज में।
Answer
उत्तर-बिंदु: पिता: हीन-भावना, शक्की स्वभाव, पर देश-दुनिया की जागरूकता; शीला अग्रवाल: साहित्य की समझ और आंदोलन में सक्रियता।
आदर्श उत्तर: पिता जी से लेखिका को हीन-भावना के साथ देश-दुनिया की जागरूकता मिली। प्राध्यापिका शीला अग्रवाल ने उन्हें चुनकर साहित्य पढ़ना सिखाया और आंदोलन में सक्रिय किया।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
पिता जी के दकियानूसी मित्र ने घर आकर क्या शिकायत की?
Hint
'मत मारी गई है' वाली बात।
Answer
उत्तर-बिंदु: मन्नू की मत मारी गई है; लड़कों के साथ हड़तालें करवाती, हुड़दंग मचाती है; घर की लड़कियों को यह शोभा नहीं देता।
आदर्श उत्तर: उन्होंने कहा कि मन्नू की मत मारी गई है। वह लड़कों के साथ हड़तालें करवाती और हुड़दंग मचाती फिरती है, जो घर की लड़कियों को शोभा नहीं देता।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level
सन् '47 में शीला अग्रवाल को कॉलिज ने नोटिस क्यों दिया? इसका क्या परिणाम हुआ?
Hint
आरोप क्या था, और थर्ड इयर का क्या हुआ?
Answer
उत्तर-बिंदु: लड़कियों को भड़काने और अनुशासन बिगाड़ने का आरोप; थर्ड इयर बंद, लेखिका सहित छात्राओं का प्रवेश निषिद्ध; विरोध से अगस्त में थर्ड इयर फिर खुला।
आदर्श उत्तर: उन पर लड़कियों को भड़काने का आरोप लगा। कॉलिज ने थर्ड इयर बंद कर लेखिका सहित छात्राओं का प्रवेश रोका, पर विरोध के कारण अगस्त में कक्षाएँ फिर खोलनी पड़ीं।
Q6 · 2 marks · Short answerHarder board level
लेखिका ने अपनी माँ के त्याग को अपना आदर्श क्यों नहीं माना?
Hint
माँ का त्याग किस कारण से था?
Answer
उत्तर-बिंदु: माँ बेपढ़ी, सबकी आज्ञा मानने वाली; उनका त्याग और सहनशीलता मजबूरी से उपजे थे; ऐसा त्याग आदर्श नहीं बन सकता।
आदर्श उत्तर: माँ बेपढ़ी-लिखी थीं और सबकी आज्ञा मानती थीं। उनका त्याग और सहनशीलता मजबूरी से उपजे थे, अपनी इच्छा से नहीं, इसलिए वे लेखिका का आदर्श नहीं बन सके।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
लेखिका को 15 अगस्त 1947 की खुशी के आगे कॉलिज की जीत की खुशी छोटी क्यों लगी?
Hint
व्यक्तिगत जीत और देश की जीत की तुलना कीजिए।
Answer
उत्तर-बिंदु: थर्ड इयर खुलवाना छोटी, निजी जीत; देश की आज़ादी 'शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धि'; बड़ी खुशी में छोटी खुशी समा गई।
आदर्श उत्तर: थर्ड इयर खुलवाना छात्राओं की छोटी, निजी जीत थी। देश की आज़ादी 'शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धि' थी, इसलिए उस बड़ी खुशी के सामने यह खुशी फीकी पड़ गई।
Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
पिता जी 'विशिष्ट' बनने के साथ अपनी सामाजिक छवि की भी चिंता करते थे। लेखिका के अनुसार इन दोनों का रास्ता टकराहट का क्यों है?
Hint
विशिष्ट बनने के लिए लीक से हटना पड़ता है; समाज लीक पर चलना चाहता है।
Answer
उत्तर-बिंदु: विशिष्ट बनने के लिए लीक से हटकर काम करने पड़ते हैं; समाज ऐसे कामों की आलोचना करता है; दोनों साथ नहीं चल सकते।
आदर्श उत्तर: विशिष्ट बनने के लिए लीक से हटकर साहसी काम करने पड़ते हैं, जिनकी समाज आलोचना करता है। छवि बचाने वाला ऐसा जोखिम नहीं ले पाता; इसलिए दोनों में टकराहट है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.लेखिका का जन्म कहाँ हुआ और उनकी यादें किस शहर से शुरू होती हैं?Show answer
भानपुरा (मध्य प्रदेश) में जन्म; यादें अजमेर के ब्रह्मपुरी मोहल्ले के घर से।
2.उस समय परिवार में लड़की के विवाह के लिए क्या योग्यता अनिवार्य थी?Show answer
उम्र में सोलह वर्ष और शिक्षा में मैट्रिक।
3.शीला अग्रवाल से लेखिका का परिचय कब हुआ?Show answer
सन् '45 में, दसवीं पास करके फर्स्ट इयर में आने पर।
4.डॉ. अंबालाल ने लेखिका का भाषण कहाँ सुना था?Show answer
अजमेर के चौपड़ (मुख्य बाज़ार का चौराहा) पर।
5.पाठ किस तिथि के उल्लेख के साथ समाप्त होता है?Show answer
15 अगस्त 1947, 'शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धि'।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप पिता जी के क्रोधी और शक्की बनने के दो कारण बता सकते हैं?
- क्या आप शीला अग्रवाल के दो योगदान (साहित्य, आंदोलन) लिख सकते हैं?
- क्या आप प्रिंसिपल वाले पत्र की घटना में लेखिका की अपेक्षा और वास्तविकता का अंतर बता सकते हैं?
- क्या आप पिता जी के अंतर्विरोध को एक उदाहरण से समझा सकते हैं?
- क्या आप '46-47 के आंदोलन में लेखिका की तीन गतिविधियाँ गिना सकते हैं?
मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी: frequently asked questions
'एक कहानी यह भी' आत्मकथा है या आत्मकथ्य?
यह आत्मकथ्य है। पाठ के परिचय में बताया गया है कि मन्नू भंडारी ने पारिभाषिक अर्थ में सिलसिलेवार आत्मकथा नहीं लिखी। उन्होंने केवल उन व्यक्तियों और घटनाओं के बारे में लिखा है जो उनके लेखकीय जीवन से जुड़े हैं।
लेखिका के पिता रसोई को भटियारखाना क्यों कहते थे?
पिता जी मानते थे कि रसोई में रहना अपनी क्षमता और प्रतिभा को भट्टी में झोंकना है। वे चाहते थे कि लेखिका रसोई से दूर रहे और देश की स्थितियों को जाने-समझे। इससे उनकी विशिष्ट बनाने वाली सोच दिखती है।
लेखिका को अपने अस्तित्व का बोध कब हुआ?
सन् '44 में बहन सुशीला शादी करके कोलकाता चली गई और दोनों बड़े भाई पढ़ाई के लिए बाहर चले गए। इनकी छत्र-छाया हटते ही लेखिका को पहली बार नए सिरे से अपने अस्तित्व का एहसास हुआ। तभी पिता जी का ध्यान भी उन पर केंद्रित हुआ।
शीला अग्रवाल का लेखिका पर क्या प्रभाव पड़ा?
शीला अग्रवाल ने लेखिका को चुनकर पढ़ना सिखाया और उनका साहित्य का दायरा जैनेंद्र, अज्ञेय, यशपाल तक बढ़ाया। उन्होंने देश की स्थितियों को जानने की बात को आंदोलन में सक्रिय भागीदारी में बदल दिया। उनकी जोशीली बातों से लेखिका निडर होकर नारे, हड़ताल और भाषण में आगे आईं।
पिता जी का गुस्सा गर्व में कैसे बदल गया?
दकियानूसी मित्र की बातों से पिता जी दिन भर नाराज़ रहे। रात को डॉ. अंबालाल ने आकर चौपड़ पर दिए लेखिका के भाषण की खूब प्रशंसा की। प्रतिष्ठित व्यक्ति से बेटी की तारीफ़ सुनकर पिता जी का संतोष धीरे-धीरे गर्व में बदल गया।
लेखिका ने माँ को अपना आदर्श क्यों नहीं माना?
माँ बहुत सहनशील और त्यागी थीं, पर उनका त्याग असहाय मजबूरी से उपजा था। वे पिता की हर ज़्यादती को अपना प्राप्य मानकर सह लेती थीं। लेखिका ऐसा जीवन नहीं चाहती थीं, इसलिए न उनका त्याग और न सहिष्णुता उनका आदर्श बने।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-अ (002), कक्षा 10, 2026-27; NCERT क्षितिज भाग 2 (Reprint 2026-27), एक कहानी यह भी