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HindiCBSE Class 10 · Chapter 1

माता का अँचल Class 10: सार, पात्र और प्रश्न-उत्तर

Updated 14 October 2026 · Fact-checked

'माता का अँचल' शिवपूजन सहाय का उपन्यास अंश है। यह कृतिका भाग 2 का पहला पाठ है। इसमें भोलानाथ के बचपन, पिता के लाड़, माँ की ममता, गाँव के खेलों और तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से 50-60 शब्दों वाले 4 अंक के प्रश्न पूछे जाते हैं।

What माता का अँचल is about

'माता का अँचल' कृतिका भाग 2 का पहला पाठ है। इसके लेखक शिवपूजन सहाय हैं। यह एक उपन्यास अंश है। इसमें लेखक अपने बचपन की कहानी 'हम' कहकर सुनाता है। एक पंक्ति में कहें तो यह पाठ बताता है कि बच्चा दिन भर पिता के साथ रहता है, पर संकट आने पर उसे माँ के आँचल में ही सच्ची शांति मिलती है।

बोर्ड परीक्षा के प्रश्न 11 में कृतिका के निर्धारित पाठों से तीन प्रश्न आते हैं। इनमें से दो के उत्तर 50-60 शब्दों में लिखने होते हैं। हर प्रश्न 4 अंक का होता है। इस पुस्तक से गद्यांश या बहुविकल्पी प्रश्न नहीं आते। प्रश्न प्रायः विश्लेषण वाले होते हैं, जैसे खेलों में गाँव का परिवेश, पिता की भूमिका, शीर्षक की उपयुक्तता या आज के जीवन से तुलना।

In real board papers: Course A, asked in 12 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 4.6 marks per paper; Course B, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026). See the questions

माता का अँचल: summary

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

भोलानाथ का असली नाम तारकेश्वरनाथ है। पिता उसे प्यार से 'भोलानाथ' कहते हैं। बच्चा पिता को 'बाबू जी' और माँ को 'मइयाँ' कहता है। वह बचपन से पिता के साथ बाहर की बैठक में सोता है। माँ से उसका नाता केवल दूध पीने तक है।

बाबू जी तड़के उठकर नहाते हैं और पूजा करते हैं। वे बच्चे को भी नहलाकर साथ बिठाते हैं और उसके माथे पर भभूत का त्रिपुंड लगाते हैं। रामायण के पाठ के समय बच्चा आइने में अपना मुँह देखता है। फिर पिता राम-नाम लिखते हैं और आटे की गोलियाँ बनाकर गंगा में मछलियों को खिलाने जाते हैं। बच्चा उनके कंधे पर बैठा रहता है। लौटते समय वे उसे पेड़ की डाल पर झूला झुलाते हैं। वे उससे कुश्ती में जानबूझकर हार जाते हैं।

बाबू जी उसे अपने हाथ से गोरस-भात खिलाते हैं। मइयाँ कहती है कि बच्चे को बड़े कौर खिलाने चाहिए। वह तोता, मैना, कबूतर जैसे नामों से कौर बनाकर खिलाती है। वह जबरदस्ती उसके सिर पर कड़वा तेल डालती है, काजल लगाती है, चोटी गूँथती है और उसे 'कन्हैया' बना देती है।

बाहर साथियों को देखते ही बच्चा रोना भूल जाता है। बच्चे चबूतरे पर मिठाई की दुकान, घरौंदा और ज्योनार, बरात का जुलूस और खेती जैसे खेल खेलते हैं। बाबू जी इनमें शामिल होने आते हैं तो बच्चे हँसकर भाग जाते हैं। बच्चे ददरी के मेले वालों और दूल्हे की पालकी को देखकर तुकबंदी चिल्लाते हैं। एक बार एक बूढ़ा वर उन्हें ढेलों से मारता है। आँधी के बाद वे बाग में आम चुनते हैं।

एक दिन बारिश के बाद बाग में बिच्छू दिखते हैं। भागते समय बैजू बूढ़े मूसन तिवारी को चिढ़ाता है और बाकी बच्चे भी साथ देते हैं। तिवारी जी पाठशाला में शिकायत करते हैं। भोलानाथ पकड़ा जाता है और गुरु जी उसे सज़ा देते हैं। बाबू जी गुरु जी से विनती करके उसे घर ले चलते हैं। रास्ते में साथियों को गाते देखकर वह फिर उनमें मिल जाता है। बच्चे मकई के खेत में चिड़ियाँ पकड़ने दौड़ते हैं।

फिर बच्चे टीले पर चूहों के बिल में पानी डालते हैं। बिल से साँप निकल आता है। बच्चे डरकर भागते हैं, गिरते हैं और घायल हो जाते हैं। घर पहुँचकर भोलानाथ बाबू जी की पुकार अनसुनी करके सीधे मइयाँ की गोद में छिप जाता है। मइयाँ रो पड़ती है और घावों पर हल्दी लगाती है। बाबू जी उसे गोद में लेना चाहते हैं, पर वह माँ का आँचल नहीं छोड़ता।

Themes and message

माँ की ममता और संकट में सुरक्षा

पूरे पाठ में बच्चा पिता के साथ रहता है, पर अंत में साँप से डरकर वह सीधे माँ के पास जाता है। इससे पता चलता है कि माँ का आँचल बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित जगह है। माँ बच्चे का डर देखकर सब काम छोड़ देती है, रोती है, उसे चूमती है और घावों पर हल्दी लगाती है। लेखक माँ के आँचल को 'प्रेम और शांति' का चँदोवा कहता है। यही भाव शीर्षक को सार्थक बनाता है।

From the text: अंत में बच्चा बाबू जी की पुकार अनसुनी करके मइयाँ की गोद में शरण लेता है। लेखक कहता है कि उसने आँचल की "प्रेम और शांति के चँदोवे की" छाया न छोड़ी।

पिता का वात्सल्य और पालन-पोषण में भूमिका

बाबू जी बच्चे के सच्चे साथी हैं। वे उसे नहलाते हैं, खिलाते हैं, कंधे पर घुमाते हैं, कुश्ती में हार जाते हैं और उसके खेलों में शामिल होते हैं। जब गुरु जी बच्चे को सज़ा देते हैं, तब वे दौड़कर आते हैं और विनती करके उसे घर ले जाते हैं। इससे पता चलता है कि पिता भी बच्चे को माँ जैसा स्नेह और देखभाल दे सकता है।

From the text: बाबू जी उसे अपने हाथ से गोरस-भात खिलाते हैं, कुश्ती में शिथिल होकर उसे जीतने देते हैं और खेल में पूछते हैं: "इस साल की खेती कैसी रही भोलानाथ?"

बचपन की मस्ती और साथियों का आकर्षण

बच्चों के लिए खेल और साथी सबसे बड़ा सुख हैं। भोलानाथ तेल लगवाते समय रोता है, गुरु जी से पिटकर रोता है, पर साथियों को देखते ही सब भूल जाता है। बच्चे बेकार की चीज़ों से दुकान, घर, बरात और खेती बना लेते हैं। इससे बच्चों की कल्पनाशक्ति और सहज आनंद का पता चलता है। पाठ की शुरुआती पंक्ति भी यही कहती है कि जहाँ बच्चे होते हैं, वहाँ उत्सव होता है।

From the text: "जहाँ लड़कों का संग, तहाँ बाजे मृदंग"; गुरु जी की सज़ा के बाद भी गाते साथियों को देखकर बच्चा पिता की गोद से उतरकर उनमें मिल जाता है।

तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति

पाठ में उस समय के गाँव का जीवन दिखता है: गंगा स्नान, पूजा, चबूतरा, बैठक, कुआँ, मोट, बैल, खलिहान, बरात, ददरी का मेला और पाठशाला। बच्चों के खेल भी इसी परिवेश से बने हैं। खेती के खेल में जोतना, बोना, सींचना, काटना, ओसाना और तौलना आता है। इससे पता चलता है कि गाँव का जीवन खेती पर टिका था और बच्चे बड़ों के कामों की नकल करके सीखते थे।

From the text: खेती के खेल में दो लड़के बैल बनकर मोट खींचते हैं और फसल काटते समय गाते हैं: "ऊँच नीच में बई कियारी, जो उपजी सो भई हमारी।"

बच्चों की नासमझी और शरारत

पाठ बच्चों को आदर्श बनाकर नहीं दिखाता। वे बूढ़े वर को चिढ़ाते हैं, कम देखने वाले मूसन तिवारी को चिढ़ाते हैं, चिड़ियों को पकड़ने दौड़ते हैं और चूहों के बिल में पानी डालते हैं। गाँव के लोग इसे देखकर हँसते हैं। लेखक स्वयं मानता है कि बच्चे दूसरों का दुख नहीं समझते। इससे यह संदेश मिलता है कि शरारत का फल भी मिलता है, जैसे साँप से डरकर सबका घायल होना।

From the text: लेखक कहता है: "लड़के और बंदर पराई पीर नहीं समझते।" बैजू के साथ मिलकर मूसन तिवारी को चिढ़ाने पर गुरु जी भोलानाथ को सज़ा देते हैं।

Characters

भोलानाथ (तारकेश्वरनाथ)

कथावाचक और मुख्य पात्र, जो अपने बचपन की कहानी 'हम' कहकर सुनाता है।

  • पिता से गहरा लगाव
  • खेल-प्रेमी और कल्पनाशील
  • भावुक, जल्दी रोने और जल्दी भूलने वाला
  • शरारती
  • संकट में माँ पर भरोसा करने वाला

वह पिता के साथ बैठक में सोता है और उनके कंधे पर गंगा जाता है। साथियों को देखते ही सिसकना भूल जाता है। बैजू के साथ मूसन तिवारी को चिढ़ाता है। साँप से डरकर पिता की पुकार अनसुनी करके माँ के आँचल में छिप जाता है।

बाबू जी (पिता)

भोलानाथ के पिता और उसके सबसे करीबी साथी।

  • धार्मिक
  • स्नेही और धैर्यवान
  • विनोदी स्वभाव
  • बच्चे के खेलों में रुचि लेने वाले
  • बच्चे के रक्षक

वे तड़के पूजा करते हैं और राम-नाम लिखते हैं। कुश्ती में जानबूझकर हारते हैं और बनावटी रोना रोते हैं। ज्योनार में पाँत के अंत में बैठ जाते हैं। गुरु जी की चिरौरी करके बच्चे को घर लाते हैं।

मइयाँ (माता)

भोलानाथ की माँ, जिसके आँचल के नाम पर पाठ का शीर्षक है।

  • ममतामयी
  • बच्चे की सेहत की चिंता करने वाली
  • दृढ़ और व्यावहारिक
  • संवेदनशील

वह बड़े कौर खिलाने का हठ करती है और चिड़ियों के नाम से कौर बनाती है। बच्चे के रोने पर भी सिर में तेल लगाकर ही छोड़ती है। बच्चे को डर से काँपता देखकर रो पड़ती है और घावों पर हल्दी लगाती है।

बैजू

भोलानाथ का साथी, शरारत में सबसे आगे।

  • ढीठ
  • शरारती
  • चालाक

लेखक उसे 'बड़ा ढीठ' कहता है। वह मूसन तिवारी को चिढ़ाता है और गुरु जी के भेजे लड़कों को देखकर भाग निकलता है, जबकि भोलानाथ पकड़ा जाता है।

मूसन तिवारी

गाँव के बूढ़े व्यक्ति, जिन्हें बच्चे चिढ़ाते हैं।

  • बूढ़े और कम देखने वाले
  • अपमान सहन न करने वाले

बच्चों के चिढ़ाने पर वे उन्हें खदेड़ते हैं और फिर पाठशाला जाकर गुरु जी से शिकायत करते हैं।

How it is written

DeviceExampleEffect
आत्मकथात्मक शैली ('हम' का प्रयोग)लेखक अपने लिए 'मैं' के स्थान पर 'हम' लिखता है, जैसे "हमीं लोग खरीदार और हमीं लोग दुकानदार।"कहानी आपबीती जैसी सच्ची लगती है। पाठक बच्चे की आँखों से उसकी दुनिया देखता है।
तुकबंदी और लोकगीत"राम जी की चिरई, राम जी का खेत, खा लो चिरई, भर-भर पेट।"बच्चों की मस्ती और गाँव की लोक-संस्कृति जीवंत हो उठती है। भाषा में संगीत और सहजता आती है।
लोकोक्तियाँ और मुहावरे'नौ-दो ग्यारह होना', 'खबर लेना', "लड़के और बंदर पराई पीर नहीं समझते।"भाषा में ग्रामीण रंग और चुटीलापन आता है। कम शब्दों में बड़ी बात कही जाती है।
हास्य और विनोदगुरु जी के भेजे लड़कों को 'गिरफ्तारी वारंट' लेकर निकले 'सिपाही' कहा गया है। साँप के लिए कहा गया: गणेश जी के चूहे की रक्षा के लिए शिव जी का साँप निकल आया।घटनाएँ मनोरंजक बनती हैं और बचपन की हल्की-फुल्की दुनिया का भाव बना रहता है।
दृश्य-चित्रण और विरोधाभास भरा अंतआँधी के वर्णन में "पेड़ झूमने और ज़मीन चूमने लगे।" पूरे पाठ में पिता का साथ है, पर अंत में बच्चा माँ का आँचल नहीं छोड़ता।चित्र आँखों के सामने आ जाता है। अचानक बदला अंत शीर्षक के अर्थ को गहरा कर देता है।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • जहाँ लड़कों का संग, तहाँ बाजे मृदंग

    कथावाचक: पाठ के आरंभ में दी गई लोकोक्ति।

    यह पूरे पाठ का स्वर तय करती है: जहाँ बच्चे इकट्ठे होते हैं, वहाँ खेल और आनंद होता है।

  • मरदुए क्या जाने कि बच्चों को कैसे खिलाना चाहिए

    मइयाँ: बाबू जी के खिलाने के बाद माँ और खिलाने का हठ करती है।

    इससे माँ के आत्मविश्वास और बच्चे के पेट भरने की उसकी चिंता का पता चलता है।

  • हमीं लोग खरीदार और हमीं लोग दुकानदार।

    कथावाचक: मिठाई की दुकान वाले खेल का वर्णन।

    बच्चों की कल्पनाशक्ति और आत्मनिर्भर खेल-दुनिया का परिचय मिलता है।

  • फिर कब भोज होगा भोलानाथ?

    बाबू जी: ज्योनार के खेल में पिता पाँत में बैठते हैं और बच्चे घरौंदा बिगाड़कर भाग जाते हैं।

    पिता के विनोदी स्वभाव और बच्चों के खेल में उनकी रुचि का प्रमाण।

  • ऊँच नीच में बई कियारी, जो उपजी सो भई हमारी।

    बच्चे (कथावाचक और साथी): खेती के खेल में फसल काटते समय का गीत।

    गाँव की खेती और लोकगीत की परंपरा बच्चों के खेल में दिखती है।

  • लड़के और बंदर पराई पीर नहीं समझते।

    कथावाचक: बच्चे मकई के खेत में चिड़ियाँ पकड़ने दौड़ते हैं और गाँव वाले हँसते हैं।

    लेखक बचपन की नासमझी को स्वयं स्वीकार करता है।

  • प्रेम और शांति के चँदोवे की

    कथावाचक: अंतिम पंक्ति, जब बच्चा पिता की गोद में न जाकर माँ के आँचल में ही रहता है।

    यह शीर्षक का मूल भाव है: माँ का आँचल प्रेम और शांति की छाया है।

माता का अँचल in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

माँ की ममता और संकट में सुरक्षा

मान लीजिए दसवीं का छात्र रोहन गली के क्रिकेट मैच में गिरकर घुटना छिलवा बैठता है। उसके पापा रोज़ उसके साथ खेलते हैं, फिर भी घर पहुँचते ही वह सीधे माँ के पास जाकर रो पड़ता है।

रोहन के व्यवहार की तुलना पाठ के अंत में भोलानाथ के व्यवहार से कीजिए। दोनों में कौन-सी समान भावना काम कर रही है? (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. भोलानाथ पिता के साथ अधिक रहता था।
  2. साँप से डरकर उसने बाबू जी की पुकार अनसुनी की और मइयाँ के आँचल में छिपा।
  3. रोहन भी चोट लगने पर माँ के पास गया।
  4. समान भावना: डर और दर्द में माँ की ममता सबसे गहरी सुरक्षा देती है।

Answer: भोलानाथ पिता के साथ अधिक रहता था, फिर भी साँप से डरकर वह बाबू जी की पुकार अनसुनी करके मइयाँ के आँचल में छिप गया। रोहन भी चोट लगने पर पापा को छोड़ माँ के पास गया। दोनों में एक भावना है: खेल में साथी पिता होते हैं, पर दर्द और डर में गहरी सुरक्षा माँ की ममता देती है।

Memory hook: खेल में पापा, चोट में माँ: यही 'माता का अँचल' है।

बचपन की मस्ती और साथियों का आकर्षण

कल्पना कीजिए कि आपकी छोटी बहन टीका लगवाने के बाद रो रही है। तभी गली से उसकी सहेलियाँ खो-खो खेलने के लिए आवाज़ देती हैं और वह आँसू पोंछकर दौड़ जाती है।

पाठ के किस प्रसंग से यह घटना मिलती है? इससे बच्चों के मन के बारे में क्या निष्कर्ष निकलता है? (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रसंग: मइयाँ के तेल-काजल लगाने पर सिसकता भोलानाथ।
  2. बालकों का झुंड देखते ही सिसकना भूलकर गोद से उतरना।
  3. साथियों के साथ तमाशे करने लगना।
  4. निष्कर्ष: बच्चों का दुख क्षणिक, खेल का आनंद प्रबल।

Answer: यह घटना उस प्रसंग से मिलती है जब मइयाँ के तेल लगाने पर सिसकता भोलानाथ बाहर हमजोलियों का झुंड देखते ही सिसकना भूलकर बाबू जी की गोद से उतर पड़ा और तमाशे करने लगा। इससे निष्कर्ष निकलता है कि बच्चों का दुख देर तक नहीं टिकता और साथियों के साथ खेलने का आनंद उन्हें हर पीड़ा भुला देता है।

Memory hook: दोस्त दिखे, आँसू सूखे: भोलानाथ भी यही करता था।

बच्चों की नासमझी और शरारत

मान लीजिए आपकी सोसाइटी के बुज़ुर्ग चौकीदार को कम सुनाई देता है। कुछ बच्चे उनके पीछे से आवाज़ें निकालकर हँसते हैं और आपके दोस्त भी उनके साथ हो जाते हैं।

मूसन तिवारी वाले प्रसंग से तुलना करते हुए बताइए कि ऐसी शरारत क्यों गलत है और आप क्या करेंगे। (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पाठ: बैजू ने कम देखने वाले मूसन तिवारी को चिढ़ाया, बाकी बच्चे साथ हो गए।
  2. परिणाम: भोलानाथ को गुरु जी से मार पड़ी।
  3. शरारत क्यों गलत: बुज़ुर्ग की कमज़ोरी का मज़ाक दुख देता है, असम्मान है।
  4. अपना कदम: दोस्तों को रोकना, माफ़ी माँगना, मदद करना।

Answer: पाठ में बैजू ने कम देखने वाले मूसन तिवारी को चिढ़ाया और बाकी बच्चे भी साथ हो गए। तिवारी जी की शिकायत पर भोलानाथ को गुरु जी से मार पड़ी। बुज़ुर्ग की कमज़ोरी का मज़ाक उड़ाना उन्हें दुख देता है और यह असम्मान है। मैं दोस्तों को रोकूँगा, चौकीदार जी से माफ़ी माँगूँगा और उनकी मदद करूँगा।

Memory hook: भीड़ में सुर मिलाना आसान, सही बात पर रुकना असली समझदारी।

मइयाँ का खिलाने का ढंग (बाल-मनोविज्ञान)

कल्पना कीजिए कि आपकी मौसी का तीन साल का बेटा खाना नहीं खाता। मौसी हर कौर को 'हवाई जहाज़' कहकर उसके मुँह तक उड़ाती हैं और वह हँसते-हँसते पूरी कटोरी खा जाता है।

मौसी के तरीके की तुलना मइयाँ के खिलाने के तरीके से कीजिए। इसमें बाल-मन की कौन-सी समझ छिपी है? (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मइयाँ दही-भात के कौरों को चिड़ियों के नाम देती थी।
  2. 'जल्दी खा लो, नहीं तो उड़ जाएँगे' कहकर खिलाती थी।
  3. भोलानाथ उन्हें झट खा जाता था; मौसी का तरीका भी यही खेल है।
  4. समझ: बच्चे खेल और कल्पना से जुड़ते हैं, भोजन खेल बने तो मन से खाते हैं।

Answer: मइयाँ भी दही-भात के कौरों को तोता, मैना, मोर के नाम देकर कहती थी कि जल्दी खा लो, नहीं तो उड़ जाएँगे। भोलानाथ उन्हें झट खा जाता था। मौसी का 'हवाई जहाज़' भी यही खेल है। दोनों जानती हैं कि बच्चे खेल और कल्पना से जल्दी जुड़ते हैं, इसलिए भोजन को खेल बना देने से वे मन से खाते हैं।

Memory hook: तोता-मैना वाले कौर हों या हवाई जहाज़, खेल बना खाना जल्दी 'उड़ जाता' है।

Topics in this chapter

  • माता का अँचल पाठ का सार और मूल संदेशComing soon
  • माता का अँचल: प्रश्न-उत्तर (प्रश्न-अभ्यास)Coming soon
  • माता का अँचल शीर्षक की उपयुक्तताComing soon
  • भोलानाथ और उसके साथियों के खेलComing soon
  • माता-पिता का वात्सल्य: पिता और माँ का चित्रणComing soon
  • माता का अँचल: पिता का स्नेह और माँ के आँचल की शरण

How the board asks माता का अँचल

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
शीर्षक की उपयुक्तता'माता का अँचल' शीर्षक कहाँ तक सार्थक है? कोई अन्य शीर्षक भी सुझाइए।पहले बताइए कि पाठ में ज़्यादातर पिता का साथ है। फिर अंतिम घटना लिखिए: साँप से डरा बच्चा माँ के आँचल में शरण लेता है। 'प्रेम और शांति के चँदोवे' का उल्लेख कीजिए। अंत में एक उचित शीर्षक, जैसे 'बचपन के दिन' या 'माँ की ममता', कारण सहित दीजिए।
खेलों में ग्रामीण परिवेशबच्चों के खेलों से गाँव के सामाजिक-आर्थिक जीवन या सामाजिक परिवेश के बारे में क्या पता चलता है?दो-तीन खेल चुनिए, जैसे खेती, बरात, ज्योनार। हर खेल से एक बात जोड़िए: खेती पर निर्भरता (कुआँ, मोट, बैल, ओसाना), सामूहिक भोज की परंपरा, विवाह की रीतियाँ। यह भी लिखिए कि सामग्री बेकार की चीज़ों से बनती थी, जो सादगी दिखाती है।
पिता और माँ का वात्सल्यपाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि पुरुष भी बच्चे का पालन-पोषण अच्छे से कर सकता है; या माता-पिता के वात्सल्य का वर्णन कीजिए।पिता के कम-से-कम दो प्रसंग लिखिए: नहलाना-खिलाना, कुश्ती, खेलों में शामिल होना, गुरु जी से छुड़ाना। माँ के प्रसंग भी जोड़िए यदि प्रश्न दोनों पर हो। अंत में निष्कर्ष वाक्य लिखिए।
तब और अब की तुलनापाठ की घटनाएँ आज काल्पनिक क्यों लगती हैं? या आज की ग्रामीण संस्कृति में क्या बदलाव दिखते हैं?पाठ से दो-तीन बातें लीजिए (मिट्टी-ठीकरों के खेल, नंग-धड़ंग गली में घूमना, बैल और मोट से सिंचाई, पिता का पूरा समय बच्चे के साथ)। फिर हर बात के सामने आज का सामान्य बदलाव अपने शब्दों में लिखिए। पाठ और आज, दोनों पक्ष बराबर रखिए।
व्यक्तिगत मूल्यांकन वाला प्रश्नआपको बच्चों का कौन-सा खेल या व्यवहार पसंद नहीं आया और क्यों?एक प्रसंग चुनिए, जैसे चिड़ियाँ पकड़ना, चूहों के बिल में पानी डालना या मूसन तिवारी को चिढ़ाना। घटना पाठ के अनुसार सही-सही लिखिए। फिर तर्क दीजिए: जीवों को कष्ट, बड़ों का अनादर, खतरा। अंत में अपना मूल्य-आधारित निष्कर्ष दीजिए।
मनोवैज्ञानिक कारणपिता से अधिक जुड़ाव होने पर भी बच्चा संकट में माँ के पास क्यों जाता है? साथियों को देखकर वह रोना क्यों भूल जाता है?पाठ की घटना बताइए, फिर कारण को व्याख्या के रूप में लिखिए ('इससे पता चलता है')। जैसे माँ की ममता स्वाभाविक सुरक्षा देती है, या खेल का आकर्षण दुख से बड़ा होता है। 50-60 शब्दों की सीमा में रहिए।

Tricks to remember माता का अँचल

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • घटनाओं का क्रम एक तुकबंदी में

    पूजा, गंगा, कुश्ती, खाना; सजकर फिर खेलों में जाना; आँधी, तिवारी, चिड़िया, साँप; अंत में माँ का आँचल आप। (पूजा और गंगा, कुश्ती, भोजन, तेल-काजल, खेल, आम की आँधी और बिच्छू, मूसन तिवारी और पाठशाला, मकई के खेत की चिड़ियाँ, साँप, मइयाँ की गोद)

    Use it when: किसी भी प्रसंग को पाठ के आरंभ, मध्य या अंत में सही जगह रखने के लिए।

  • चार खेल: दुकान से खेत तक

    'दु-घ-ब-खे' = दुकान, घरौंदा, बरात, खेती। हर खेल का अंत बाबू जी पर होता है: भोज की पंगत में बैठना, दुलहिन का ओहार उघारना, खेती का हाल पूछना; और बच्चे हँसकर भाग जाते हैं।

    Use it when: खेलों और उनमें प्रयुक्त सामग्री वाले प्रश्नों में सही क्रम और उदाहरण देने के लिए।

  • पात्र: तीन घर के, दो बाहर के

    घर के: भोलानाथ (बच्चा), बाबू जी (खेल-साथी पिता), मइयाँ (संकट की शरण)। बाहर के: बैजू (ढीठ, भाग निकला), मूसन तिवारी (बूढ़े, कम सूझता था)। साथ में गुरु जी, जिन्होंने भोलानाथ की खबर ली।

    Use it when: किसने क्या किया, यह गलत पात्र पर न जाए, इसके लिए।

  • पाँच 'म' से पाँच विषय

    ममता (माँ का आँचल), मनमौजी पिता (बाबू जी का वात्सल्य), मस्ती (साथियों का संग), माटी (तीस के दशक का गाँव), मसखरी (बच्चों की शरारत और नासमझी)।

    Use it when: प्रतिपाद्य, शीर्षक या विषय वाले प्रश्न में सारे भाव याद रखने के लिए।

  • दो नाम, दो रूप

    असली नाम तारकेश्वरनाथ, प्यार का नाम भोलानाथ। भभूत से 'बम-भोला', मइयाँ के तेल-काजल से 'कन्हैया'।

    Use it when: नाम और वेश-भूषा वाले छोटे प्रश्नों में भ्रम से बचने के लिए।

माता का अँचल: board-level solved questions

Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: बाबू जी की दिनचर्या और स्वभाव · 4 marks · Long answerBoard level

'माता का अँचल' पाठ के आधार पर भोलानाथ के पिता की दिनचर्या का वर्णन कीजिए। इससे उनके स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है? (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. बाबू जी तड़के उठकर नहाते और पूजा करते थे।
  2. वे रामायण का पाठ करते और रामनामा बही पर हज़ार राम-नाम लिखते थे।
  3. पाँच सौ राम-नाम कागज़ पर लिखकर आटे की गोलियों में लपेटते और गंगा की मछलियों को खिलाते थे।
  4. भोलानाथ इस पूरे समय उनके साथ, उनके कंधे पर रहता था।
  5. निष्कर्ष: वे धार्मिक, दयालु और स्नेही पिता थे।

Answer: बाबू जी तड़के उठकर नहाते और पूजा करते थे। वे रामायण का पाठ करते और रामनामा बही पर हज़ार बार राम-नाम लिखते थे। फिर पाँच सौ राम-नाम आटे की गोलियों में लपेटकर गंगा की मछलियों को खिलाते थे। भोलानाथ उनके कंधे पर बैठा रहता था। इससे पता चलता है कि वे धार्मिक, अनुशासित, दयालु और स्नेही पिता थे।

Example 2: खिलाने के दो ढंग: पिता और माँ · 4 marks · Long answerHarder board level

'मरदुए क्या जाने कि बच्चों को कैसे खिलाना चाहिए' – मइयाँ के इस कथन के आधार पर बाबू जी और मइयाँ के भोजन कराने के ढंग की तुलना कीजिए। (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. बाबू जी फूल के कटोरे में गोरस-भात सानकर छोटे कौर खिलाते थे।
  2. मइयाँ का तर्क: छोटे कौर से बच्चा थोड़ा खाकर भी पेट भरा समझ लेता है।
  3. मइयाँ कौरों को तोता, मैना, मोर आदि के नाम देकर 'उड़ जाएँगे' कहकर खिलाती थी।
  4. तुलना: पिता के ढंग में दुलार, माँ के ढंग में पेट भरने की चिंता और चतुराई।

Answer: बाबू जी फूल के कटोरे में गोरस-भात सानकर छोटे-छोटे कौर खिलाते थे। मइयाँ मानती थी कि इससे बच्चा थोड़े में ही पेट भरा समझ लेता है। वह बड़े कौरों को तोता, मैना, मोर के नाम देकर 'उड़ जाएँगे' कहकर खिलाती थी। पिता के ढंग में दुलार है, जबकि माँ के ढंग में पेट भरने की चिंता और चतुराई है।

Example 3: पाठ का अंत और केंद्रीय भाव · 4 marks · Long answerHarder board level

पाठ के अंत में बाबू जी के बुलाने और गोद में लेने की कोशिश के बाद भी भोलानाथ मइयाँ का आँचल नहीं छोड़ता। मइयाँ की प्रतिक्रिया का वर्णन करते हुए बताइए कि यह अंत पाठ के केंद्रीय भाव को कैसे उभारता है। (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. साँप से डरकर लहूलुहान भोलानाथ बाबू जी की पुकार अनसुनी करके मइयाँ के पास जाता है।
  2. मइयाँ रो पड़ती है, सारा काम छोड़ देती है और अधीर होकर भय का कारण पूछती है।
  3. वह उसे छाती से लगाती, आँचल से पोंछती और चूमती है।
  4. बाबू जी गोद में लेना चाहते हैं, पर भोलानाथ आँचल नहीं छोड़ता।
  5. केंद्रीय भाव: संकट में सबसे गहरी सुरक्षा माँ के आँचल में, यही शीर्षक का अर्थ।

Answer: डरे, लहूलुहान भोलानाथ को देखकर मइयाँ रो पड़ी और सारा काम छोड़ बैठी। वह अधीर होकर भय का कारण पूछती, उसे छाती से लगाती और आँचल से पोंछकर चूमती। बाबू जी के गोद में लेने की कोशिश पर भी बच्चे ने आँचल न छोड़ा। शीर्षक बताता है कि संकट में सबसे गहरी सुरक्षा माँ के आँचल में ही मिलती है।

Example 4: खेलों में बाबू जी की भागीदारी · 4 marks · Long answerHarder board level

भोलानाथ और उसके साथियों के खेलों में बाबू जी किस प्रकार शामिल होते थे? दो प्रसंग लिखकर बताइए कि इनसे उनके व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषताएँ प्रकट होती हैं। (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. भोज के खेल में बाबू जी पंगत के अंत में जीमने बैठ जाते और पूछते, 'फिर कब भोज होगा भोलानाथ?'
  2. खेती के खेल के अंत में पूछते कि इस साल की खेती कैसी रही।
  3. मिठाई की दुकान से दो-चार गोरखपुरिए पैसे खरीदते थे।
  4. विशेषताएँ: विनोदी, सरल, बच्चों के खेल में रस लेने वाले स्नेही पिता।

Answer: बाबू जी बच्चों के भोज की पंगत में जीमने बैठ जाते और हँसते हुए पूछते, 'फिर कब भोज होगा भोलानाथ?' खेती के खेल के अंत में वे पूछते कि इस साल की खेती कैसी रही। वे मिठाई की दुकान से गोरखपुरिए पैसे खरीदते थे। स्पष्ट है कि वे विनोदी, सरल और बच्चों के खेलों में रस लेने वाले पिता थे।

Example 5: मूसन तिवारी प्रसंग: व्यवहार का मूल्यांकन · 4 marks · Long answerHOTS / competency

बैजू के उकसाने पर बच्चों ने मूसन तिवारी को चिढ़ाया। इस घटना में बच्चों के व्यवहार का मूल्यांकन कीजिए। यदि आप उस टोली में होते तो क्या करते? (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. घटना: ढीठ बैजू ने कम देखने वाले बूढ़े मूसन तिवारी को 'बुढ़वा बेईमान' कहकर चिढ़ाया, बाकी बच्चों ने सुर मिलाया।
  2. मूल्यांकन: यह बुज़ुर्ग का अपमान और बच्चों की नासमझी थी।
  3. परिणाम: तिवारी जी पाठशाला गए, भोलानाथ पकड़ा गया और गुरु जी से मार पड़ी।
  4. अपनी भूमिका: साथियों को रोकना, क्षमा माँगना, कमज़ोरी का मज़ाक न उड़ाने की सीख।

Answer: बैजू ने कम देखने वाले बूढ़े मूसन तिवारी को 'बुढ़वा बेईमान' कहकर चिढ़ाया और बच्चे सुर मिलाने लगे। यह बुज़ुर्ग का अपमान था, जो बच्चों की नासमझी दिखाता है। इसीलिए गुरु जी ने भोलानाथ को दंड दिया। यदि मैं होता तो साथियों को रोकता, तिवारी जी से क्षमा माँगता और समझाता कि किसी की कमज़ोरी का मज़ाक उड़ाना गलत है।

Example 6: बेकार वस्तुओं से खिलौने: आज के लिए सीख · 4 marks · Long answerHOTS / competency

मान लीजिए आपके विद्यालय में 'बिना खरीदे खिलौने' नाम की प्रदर्शनी लग रही है। 'माता का अँचल' पाठ में बच्चों द्वारा घर की बेकार वस्तुओं से बनाई गई चीज़ों के उदाहरण देते हुए बताइए कि यह सोच आज के जीवन में क्यों उपयोगी है। (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पाठ से उदाहरण: टूटी चूहेदानी की पालकी, कनस्तर का तंबूरा, दियासलाई की पेटियों के किवाड़, फूटे घड़े के टुकड़ों के बताशे।
  2. ये सब घर की बेकार वस्तुओं से बनते थे।
  3. आज उपयोगिता: कल्पनाशक्ति बढ़ती है, पैसे बचते हैं, कचरा कम होता है।
  4. मिल-जुलकर रचनात्मक काम करने की आदत बनती है।

Answer: पाठ के बच्चे टूटी चूहेदानी से पालकी, कनस्तर से तंबूरा, दियासलाई की पेटियों से किवाड़ और फूटे घड़े के टुकड़ों से बताशे बनाते थे। ये सब चीज़ें घर की बेकार वस्तुओं से बनती थीं। यह सोच आज भी उपयोगी है, क्योंकि इससे कल्पनाशक्ति बढ़ती है, पैसे बचते हैं, कचरा कम होता है और बच्चे मिल-जुलकर रचनात्मक काम करना सीखते हैं।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

'माता का अँचल' शीर्षक की सार्थकता पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए। (लगभग 50-60 शब्द) (4 marks)

StepMarks
शीर्षक का अर्थ: माँ का आँचल = ममता, सुरक्षा और शांति1
पाठ में भोलानाथ का पिता से अधिक जुड़ाव (साथ सोना, पूजा, गंगा, खेल) बताना1
अंत का प्रसंग: साँप से डरकर बाबू जी की पुकार अनसुनी कर मइयाँ के आँचल में छिपना, बाबू जी के लेने पर भी न छोड़ना1
निष्कर्ष: संकट में सबसे गहरी शरण माँ का आँचल, इसलिए शीर्षक सार्थक; भाषा शुद्ध और शब्द-सीमा में1

मान लीजिए भोलानाथ आज के किसी शहर में पला-बढ़ा बच्चा होता। उसके दिन भर के अनुभव पाठ से किस प्रकार भिन्न होते? तर्क सहित लिखिए। (लगभग 50-60 शब्द) (4 marks)

StepMarks
पाठ से पहला उदाहरण: खुले चबूतरे, गली और बाग में टोली के साथ खेलना1
पाठ से दूसरा उदाहरण: घर की बेकार वस्तुओं से खेल-सामग्री और लोक-तुकबंदियाँ1
आज की स्थिति से तुलना: कम खुली जगह, खरीदे हुए खिलौने, स्क्रीन और अकेले खेलना1
तर्कपूर्ण निष्कर्ष: क्या खोया और क्या पाया, अपनी राय सहित1

Where students lose marks in माता का अँचल

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: नाम उलट देना

    दोनों नाम एक साथ आते हैं, इसलिए जल्दी में असली और प्यार का नाम उलट जाता है।

    Wrong working

    भोलानाथ का असली नाम भोलानाथ था, पिता उसे प्यार से तारकेश्वर कहते थे।

    Right working

    उसका असली नाम तारकेश्वरनाथ था; बाबू जी उसे प्यार से 'भोलानाथ' कहकर पुकारते थे।

    Do this: याद रखें: 'तारक' कागज़ का नाम, 'भोला' प्यार का नाम।

    Usually costs: तथ्य गलत होने पर उस बिंदु का पूरा अंक, लगभग 1 अंक, कट सकता है।

  • Mistake: गलत पात्र को घटना से जोड़ना

    मूसन तिवारी प्रसंग में बैजू और भोलानाथ दोनों हैं, इसलिए छात्र भूल जाते हैं कि कौन भागा और कौन पकड़ा गया।

    Wrong working

    बैजू पकड़ा गया और गुरु जी ने उसे खूब मारा।

    Right working

    बैजू नौ-दो ग्यारह हो गया, भोलानाथ पकड़ा गया और गुरु जी ने उसकी खूब खबर ली।

    Do this: उत्तर लिखने से पहले मन में पूछें: शुरू किसने किया, सज़ा किसे मिली?

    Usually costs: गलत तथ्य से 1-2 अंक कट सकते हैं।

  • Mistake: प्रश्न का उत्तर देने की जगह कहानी दोहराना

    छात्र सोचते हैं कि जितना अधिक लिखेंगे, उतने अंक मिलेंगे।

    Wrong working

    (शीर्षक की उपयुक्तता पर) बाबू जी पूजा करते थे, गंगा जाते थे, बच्चे दुकान लगाते थे, बरात निकालते थे...

    Right working

    पिता से अधिक जुड़ाव होते हुए भी संकट में भोलानाथ मइयाँ के आँचल में ही शरण लेता है; इसलिए 'माता का अँचल' शीर्षक सार्थक है।

    Do this: पहली पंक्ति में सीधे प्रश्न का उत्तर दें, फिर केवल उससे जुड़े प्रसंग चुनें।

    Usually costs: विषयवस्तु के अंक घटते हैं; 4 में से 2 तक कट सकते हैं।

  • Mistake: शब्द-सीमा से बहुत आगे लिखना

    खेलों की सूची या पूरा प्रसंग लिखने के चक्कर में उत्तर 100 शब्दों से ऊपर चला जाता है।

    Wrong working

    घरौंदे की हर वस्तु, मिठाई की हर चीज़ और बरात का पूरा क्रम एक ही उत्तर में लिख देना।

    Right working

    दो-तीन सटीक उदाहरण (जैसे चूहेदानी की पालकी, कनस्तर का तंबूरा) और एक निष्कर्ष, कुल 50-60 शब्द।

    Do this: चार बिंदु पहले पेंसिल से लिखें, हर बिंदु पर 12-15 शब्द।

    Usually costs: दूसरे प्रश्नों का समय घटता है और बिखरा उत्तर विषयवस्तु के अंक खो देता है।

  • Mistake: मूल भाव (थीम) से न जोड़ना

    छात्र घटना सही लिखते हैं, पर अंत में यह नहीं बताते कि उससे क्या पता चलता है।

    Wrong working

    मइयाँ रो पड़ी और भोलानाथ को चूमने लगी।

    Right working

    मइयाँ का रो पड़ना और सब काम छोड़ देना उसकी ममता दिखाता है; संकट में बच्चे को सुरक्षा माँ के आँचल में ही मिलती है।

    Do this: हर उत्तर का अंतिम वाक्य 'इससे पता चलता है कि...' से लिखें।

    Usually costs: निष्कर्ष वाला 1 अंक कट सकता है।

माता का अँचल: previous year questions

  • Course A: Asked in 12 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 4.6 marks per paper; 12 questions in all, counting OR alternatives. In 4 of 4 sample papers.
  • Course B: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).

Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.

Solved board questions from माता का अँचल

Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.

2026 Course A, set 3/1/1, Q11 · 8 marks · Long answer

पूरक पाठ्यपुस्तक के निर्धारित पाठों पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए : 2 × 4 = 8

  1. (i)

    'प्रयास करने पर पुरुष भी बच्चों का पालन-पोषण भली-भाँति कर सकते हैं।' 'माता का अँचल' पाठ में वर्णित भोलानाथ और उसके पिता के जीवन-प्रसंगों से दो उदाहरण लेते हुए इस कथन के पक्ष में उचित तर्क प्रस्तुत कीजिए।

    4 marks
  2. (ii)

    'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ की लेखिका को 'लायुंग' किन कारणों से अधिक पसंद आया? आपके विचार से किसी पर्यटन स्थल को प्रसिद्ध और दर्शनीय बनाने वाले बिंदु कौन-से होते हैं?

    4 marks
  3. (iii)

    क्या किसी एक लेखक के लिए जो बातें प्रेरणास्रोत हैं वे अन्य लेखक को भी प्रेरित कर सकती हैं? सहमति या असहमति को उचित तर्कों एवं उदाहरणों द्वारा 'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के संदर्भ में लिखिए।

    4 marks
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (i) तर्क: बच्चे का पालन-पोषण किसी एक माता-पिता का जन्मजात कर्त्तव्य नहीं है। जो भी धैर्य से पर्याप्त समय देगा, वह यह दायित्व निभा सकता है।

    2 marks
  2. उदाहरण 1: भोलानाथ के पिता उसे अपने साथ सुलाते, नहलाते और पूजा में साथ बैठाते थे। उदाहरण 2: वे उसके साथ कुश्ती खेलते और हार जाने का नाटक करके उसे खुश करते थे। उसके साँप से डरने पर भी वे व्याकुल हुए और उसकी सुरक्षा की।

    2 marks
  3. (ii) कारण: लायुंग की शांति और रमणीयता। ऊँचे पहाड़ों से घिरी घाटी, तिस्ता नदी की शांत कल-कल ध्वनि और मंद हवा ने लेखिका को मोहा।

    2 marks
  4. मेरे विचार से स्थान को दर्शनीय बनाने वाले बिंदु: प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्त्व, आवागमन-निवास-भोजन की सुविधाएँ तथा प्रदूषणरहित वातावरण।

    2 marks
  5. (iii) सहमति: एक लेखक के अनुभव, विचार और संघर्ष दूसरे लेखकों को भी प्रभावित कर सकते हैं। उन रचनाओं से नए लेखकों के मन में लिखने की प्रेरणा और भीतरी विवशता पैदा हो सकती है।

    2 marks
  6. उदाहरण: अज्ञेय के लिए हिरोशिमा की घटना की अनुभूति भीतरी विवशता बनी। ऐसी ही अनुभूति अन्य लेखकों को भी लिखने को प्रेरित कर सकती है, इसलिए प्रेरणास्रोत केवल एक लेखक तक सीमित नहीं हैं।

    2 marks

Answer: (i) पिता के साथ सोना, खेलना और हार का नाटक करके खुश करना; पालन-पोषण का दायित्व धैर्य और समय पर निर्भर; (ii) लायुंग की शांति, रमणीयता और प्राकृतिक सुंदरता; स्थल की प्रसिद्धि के बिंदु: प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्त्व, सुविधाएँ; (iii) सहमति: अनुभव और प्रेरणा अन्य लेखकों को भी प्रभावित करते हैं

Where the marks are

  • (i) उपयुक्त तर्क (2) और दो उदाहरण (1+1), कुल 4 अंक
  • (ii) लायुंग पसंद आने के दो कारण (1+1) और पर्यटन स्थल के दो बिंदु (1+1)
  • (iii) दो उपयुक्त बिंदुओं का उदाहरण सहित तर्कसंगत उत्तर (2+2)

See it in the full 2026 board paper, set 3/1/1

Every माता का अँचल question, by year

Course A (16 questions, sample papers included)

For 2027

Sample paper 2026-27: Q11 (8 marks, solved)

2026

Set 3/1/1: Q11 (8 marks, solved)

Set 3/2/1: Q11 (8 marks, solved)

Set 3/3/1: Q11 (8 marks, solved)

Set 3/4/1: Q11 (8 marks, solved)

Set 3/5/1: Q11 (8 marks, solved)

Sample paper 2025-26: Q11 (8 marks, solved)

2025

Set 3/1/1: Q11 (8 marks, solved)

Sample paper 2024-25: Q11 (8 marks, solved)

2024

Set 3/4/1: Q13 (8 marks, solved)

Set 3/5/1: Q13 (8 marks, solved)

Sample paper 2023-24: Q13 (8 marks, solved)

2023

Set 3/1/1: Q13 (8 marks, solved)

Set 3/4/1: Q13 (8 marks, solved)

Set 3/5/1: Q13 (8 marks, solved)

Set 3/6/1: Q13 (8 marks, solved)

Course B (0 questions, sample papers included)

Practice questions on माता का अँचल

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 4 marks · Long answerBoard level

    मइयाँ भोलानाथ को बाहर भेजने से पहले किस प्रकार सजाती थी? इस पर भोलानाथ और बाबू जी की क्या प्रतिक्रिया होती थी? (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    तेल, काजल, चोटी, कुरता-टोपी और 'कन्हैया' शब्द को क्रम से याद कीजिए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • छटपटाने पर भी सिर पर कड़वा तेल डालना, उबटन करना
    • नाभि और लिलार पर काजल की बिंदी, चोटी गूँथना, रंगीन कुरता-टोपी
    • भोलानाथ रोता, बाबू जी मइयाँ पर बिगड़ते
    • भोलानाथ 'कन्हैया' बनकर सिसकते हुए बाहर आता

    आदर्श उत्तर: मइयाँ भोलानाथ को पकड़कर, उसके छटपटाने पर भी, सिर पर कड़वा तेल डालती और उबटन करती। फिर नाभि और लिलार पर काजल की बिंदी लगाकर चोटी गूँथती और रंगीन कुरता-टोपी पहनाती। भोलानाथ रोता था और बाबू जी मइयाँ पर बिगड़ते थे। अंत में भोलानाथ 'कन्हैया' बनकर सिसकते हुए बाबू जी की गोद में बाहर आता।

  2. Q2 · 4 marks · Long answerBoard level

    टीले पर चूहों के बिल वाली घटना का वर्णन कीजिए। इस घटना का भोलानाथ पर क्या परिणाम हुआ? (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    घटना के तीन हिस्से सोचिए: बिल से पानी उलीचना, साँप निकलना, भागते हुए चोट और मइयाँ की शरण।

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • बच्चे टीले पर चूहों के बिल से पानी उलीचने लगे, नीचे से ऊपर पानी फेंकते-फेंकते थक गए
    • तभी साँप निकल आया, सब रोते-चिल्लाते भागे
    • कोई गिरा, किसी का सिर फूटा, किसी के दाँत टूटे
    • भोलानाथ लहूलुहान, तलवे काँटों से छलनी; डरकर मइयाँ के पास भागा

    आदर्श उत्तर: बच्चे एक टीले पर चूहों के बिल से पानी उलीचने लगे। नीचे से ऊपर पानी फेंकते-फेंकते वे थक गए। तभी एक साँप निकल आया। सब रोते-चिल्लाते भागे; कोई औंधा गिरा, किसी का सिर फूटा, किसी के दाँत टूटे। भोलानाथ का शरीर लहूलुहान हो गया और काँटों से तलवे छलनी हो गए। डरकर वह सीधा मइयाँ के पास भागा।

  3. Q3 · 4 marks · Long answerHarder board level

    'लड़के और बंदर पराई पीर नहीं समझते।' – मकई के खेत वाले प्रसंग के आधार पर इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए। उस समय भोलानाथ का व्यवहार अन्य लड़कों से कैसे अलग था? (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    सोचिए, खेत में कौन दौड़ा और कौन अलग खड़ा होकर गा रहा था।

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • लड़के मकई के खेत में चरती चिड़ियों को पकड़ने दौड़े, पर एक भी हाथ न आई
    • गाँव वाले हँसते थे कि चिड़िया की जान जाती है और लड़कों का खेल होता है
    • आशय: बच्चे खेल में दूसरों का दुख नहीं समझते
    • भोलानाथ खेत से अलग खड़ा होकर चिड़ियों को पेट भर खाने को कहता गा रहा था

    आदर्श उत्तर: बच्चे मकई के खेत में चरती चिड़ियों को पकड़ने दौड़ पड़े, यह सोचे बिना कि चिड़ियों को कितना डर लगेगा। गाँव वाले हँसकर कहते थे कि चिड़िया की जान जाए, लड़कों का खिलौना। यही कथन का आशय है कि बच्चे दूसरों का दुख नहीं समझते। भोलानाथ खेत से अलग खड़ा होकर गा रहा था, 'खा लो चिरई, भर-भर पेट।'

  4. Q4 · 4 marks · Long answerHarder board level

    पाठ में भोलानाथ दो बार रोना-सिसकना भूलकर साथियों की टोली में मिल जाता है। दोनों प्रसंग लिखिए और बताइए कि इनसे बाल-मन के बारे में क्या पता चलता है। (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    एक प्रसंग तेल-काजल के बाद का है, दूसरा पाठशाला से लौटते समय का।

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • पहला प्रसंग: तेल लगवाकर सिसकता भोलानाथ बालकों का झुंड देखते ही गोद से उतर पड़ा
    • दूसरा प्रसंग: गुरु जी की मार के बाद रोता भोलानाथ 'माई पकाई गरर-गरर पूआ' गाती टोली देखकर हठ करके गोद से उतरा
    • बच्चों का दुख क्षणिक होता है
    • साथियों और खेल का आकर्षण प्रबल होता है

    आदर्श उत्तर: पहली बार, मइयाँ के तेल लगाने पर सिसकता भोलानाथ हमजोलियों को देखते ही बाबू जी की गोद से उतर पड़ा। दूसरी बार, गुरु जी की मार के बाद रोता भोलानाथ 'माई पकाई गरर-गरर पूआ' गाती टोली देखकर हठपूर्वक गोद से उतरकर गाने लगा। इससे पता चलता है कि बच्चों का दुख क्षणिक और साथियों का आकर्षण प्रबल होता है।

  5. Q5 · 4 marks · Long answerHarder board level

    भोलानाथ और उसके साथी खेलते समय अनेक तुकबंदियाँ गाते हैं। किन्हीं दो तुकबंदियों के प्रसंग बताते हुए स्पष्ट कीजिए कि ये उस समय की ग्राम्य संस्कृति के बारे में क्या बताती हैं। (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    ददरी के मेले और फसल काटने के समय की तुकबंदी पर ध्यान दीजिए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • ददरी के मेले जाने वालों को देखकर गाई गई तुकबंदी
    • फसल काटते समय गाई गई तुकबंदी
    • गाँव में मेले, खेती और लोकगीत जीवन का हिस्सा थे
    • बच्चे लोक-भाषा की तुकबंदियों को खेल में सहज रूप से गाते थे

    आदर्श उत्तर: ददरी के मेले जाते लोगों को देखकर बच्चे गाते, 'चलो भाइयो ददरी, सतू पिसान की मोटरी।' खेती के खेल में फसल काटते हुए वे 'जो उपजी सो भई हमारी' गाते थे। इनसे पता चलता है कि तब गाँव में मेले, खेती और लोकगीत जीवन का हिस्सा थे। बच्चे लोक-भाषा की तुकबंदियाँ अपने खेलों में सहज रूप से गाते थे।

  6. Q6 · 4 marks · Long answerHarder board level

    पाठ के आरंभ में दी गई पंक्ति 'जहाँ लड़कों का संग, तहाँ बाजे मृदंग' पूरे पाठ पर कैसे सटीक बैठती है? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए। (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    पहले पंक्ति का अर्थ लिखिए, फिर टोली के खेलों और बाजों के उदाहरण दीजिए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • अर्थ: जहाँ बच्चे इकट्ठे हों, वहाँ मौज-मस्ती का माहौल
    • बालकों का झुंड मिलते ही भोलानाथ का रोना भूल जाना
    • टोली के खेल: मिठाई की दुकान, घरौंदा, बरात, खेती
    • कनस्तर का तंबूरा, अमोले की शहनाई: सचमुच बाजे बजते हैं

    आदर्श उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि जहाँ बच्चे इकट्ठे होते हैं, वहाँ मौज-मस्ती का माहौल बन जाता है। पाठ में बालकों का झुंड मिलते ही भोलानाथ रोना भूल जाता है। टोली कभी मिठाई की दुकान लगाती, कभी घरौंदा बनाती, कभी बरात निकालती और कभी खेती करती। कनस्तर का तंबूरा और अमोले की शहनाई बजती। पाठ में 'मृदंग' बजता रहता है।

  7. Q7 · 4 marks · Long answerHOTS / competency

    क्या बाबू जी का पाठशाला जाकर गुरु जी की चिरौरी करना और भोलानाथ को घर ले आना उचित था? अपने तर्क दीजिए। (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    उनके प्यार और गुरु जी के प्रति उनके व्यवहार, दोनों को तौलिए; फिर बताइए कि और क्या होना चाहिए था।

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • हाल सुनते ही दौड़कर आना: गहरा वात्सल्य
    • गुरु जी से विनती करना: शिक्षक के प्रति सम्मान
    • अपनी राय: बूढ़े को चिढ़ाने की गलती भी समझानी चाहिए थी
    • निष्कर्ष: प्यार के साथ सही-गलत की सीख ज़रूरी

    आदर्श उत्तर: हाल सुनते ही बाबू जी का दौड़कर पाठशाला आना उनके गहरे वात्सल्य को दिखाता है। उन्होंने गुरु जी से झगड़ा नहीं किया, विनती की, जो शिक्षक के प्रति सम्मान है। फिर भी मेरे विचार से उन्हें भोलानाथ को यह भी समझाना चाहिए था कि बूढ़े मूसन तिवारी को चिढ़ाना गलत था। प्यार के साथ सही-गलत की सीख भी ज़रूरी है।

  8. Q8 · 4 marks · Long answerHOTS / competency

    आज कई पिता व्यस्तता के कारण बच्चों के साथ समय नहीं बिता पाते। भोलानाथ के बाबू जी के व्यवहार से ऐसे पिताओं को कौन-सी तीन सीखें मिल सकती हैं? पाठ से उदाहरण सहित लिखिए। (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    पूजा-गंगा, कुश्ती और भोज की पंगत, इन तीन प्रसंगों से एक-एक सीख निकालिए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • बच्चे को दिनचर्या में शामिल करना (नहलाना, पूजा पर बिठाना, गंगा ले जाना)
    • बच्चे के साथ खेलना (कुश्ती में ढीले पड़कर उसे जिताना)
    • बच्चे की कल्पना का सम्मान (भोज की पंगत में बैठना)
    • परिणाम: बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है

    आदर्श उत्तर: पहली सीख, बच्चे को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, जैसे बाबू जी उसे साथ नहलाकर पूजा पर बिठाते और गंगा ले जाते थे। दूसरी, बच्चे के साथ खेलें; बाबू जी कुश्ती में जान-बूझकर हार जाते थे। तीसरी, बच्चे की कल्पना की दुनिया का सम्मान करें, जैसे वे भोज की पंगत में बैठ जाते थे। इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.भोलानाथ का असली नाम क्या था?Show answer

    तारकेश्वरनाथ। बाबू जी उसे प्यार से 'भोलानाथ' कहते थे।

  2. 2.बाबू जी रामनामा बही पर और आटे की गोलियों के लिए कितनी बार राम-नाम लिखते थे?Show answer

    बही पर हज़ार राम-नाम; पाँच सौ बार कागज़ के टुकड़ों पर लिखकर आटे की गोलियों में लपेटते थे।

  3. 3.मइयाँ कौरों को किन चिड़ियों के नाम देती थी?Show answer

    तोता, मैना, कबूतर, हंस, मोर आदि; कहती थी कि जल्दी खा लो, नहीं तो उड़ जाएँगे।

  4. 4.भोज के खेल में बाबू जी के पंगत में बैठते ही बच्चे क्या करते थे?Show answer

    हँसकर और घरौंदा बिगाड़कर भाग जाते थे; बाबू जी पूछते, 'फिर कब भोज होगा भोलानाथ?'

  5. 5.दूल्हे की पालकी देखकर चिढ़ाने पर क्या हुआ था?Show answer

    एक बूढ़े वर ने बच्चों को बड़ी दूर तक खदेड़कर ढेलों से मारा था।

  6. 6.मूसन तिवारी को किसने चिढ़ाया और कौन पकड़ा गया?Show answer

    ढीठ बैजू ने चिढ़ाया; बैजू भाग निकला और भोलानाथ पकड़ा गया, गुरु जी ने उसकी खूब खबर ली।

  7. 7.पाठशाला से भोलानाथ को कौन घर ले गया और कैसे?Show answer

    बाबू जी; वे दौड़कर आए, उसे पुचकारा और गुरु जी की चिरौरी करके घर ले चले।

  8. 8.साँप वाली घटना के समय बाबू जी और मइयाँ क्या कर रहे थे?Show answer

    बाबू जी बैठक के ओसारे में हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे; मइयाँ चावल साफ़ कर रही थी।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • बिना देखे बताइए: भोलानाथ का असली नाम और प्यार का नाम, और भभूत लगाने पर वह क्या बन जाता था।
  • बाबू जी की सुबह की दिनचर्या के चार काम क्रम से कह सकते हैं?
  • बाबू जी और मइयाँ के खिलाने के ढंग में अंतर, मइयाँ के तर्क सहित, 30 सेकंड में बोलिए।
  • चारों खेल (दुकान, घरौंदा, बरात, खेती) और हर एक की दो-दो खेल-सामग्री याद हैं?
  • मूसन तिवारी प्रसंग: किसने चिढ़ाया, कौन भागा, कौन पकड़ा गया, कौन छुड़ाने आया?
  • मकई के खेत में चिड़ियों वाले प्रसंग से 'पराई पीर' वाली कहावत समझा सकते हैं?
  • साँप की घटना के बाद मइयाँ की तीन प्रतिक्रियाएँ और अंतिम पंक्ति का भाव बता सकते हैं?
  • शीर्षक की सार्थकता चार बिंदुओं में, 50-60 शब्दों में, मन में लिखिए।

माता का अँचल: frequently asked questions

'माता का अँचल' के लेखक कौन हैं और यह किस पुस्तक में है?

इसके लेखक शिवपूजन सहाय हैं। यह कृतिका भाग 2 का पहला पाठ है। प्रश्न-अभ्यास में इसे उपन्यास अंश कहा गया है।

भोलानाथ का असली नाम क्या था?

उसका असली नाम तारकेश्वरनाथ था। भभूत लगाने से वह 'बम-भोला' जैसा लगता था, इसलिए पिता उसे प्यार से 'भोलानाथ' कहते थे।

पाठ का शीर्षक 'माता का अँचल' क्यों रखा गया?

पूरे पाठ में बच्चा पिता के साथ रहता है, पर साँप से डरकर वह माँ के आँचल में ही शरण लेता है। पिता के बुलाने पर भी वह आँचल नहीं छोड़ता। इससे पता चलता है कि संकट में माँ का आँचल ही सबसे सुरक्षित जगह है, इसलिए शीर्षक सार्थक है।

भोलानाथ और उसके साथी कौन-कौन से खेल खेलते थे?

वे मिठाई की दुकान, घरौंदा बनाकर ज्योनार, बरात का जुलूस और खेती के खेल खेलते थे। इसके अलावा वे चिड़ियाँ पकड़ने दौड़ते थे और चूहों के बिल में पानी डालते थे। खेल की सामग्री ठीकरे, धूल, तिनके, घड़े के टुकड़े जैसी बेकार चीज़ों से बनती थी।

इस पाठ से बोर्ड में कितने अंक का प्रश्न आता है?

कृतिका के प्रश्न 11 में तीन में से दो प्रश्न करने होते हैं। हर प्रश्न 4 अंक का होता है और उत्तर 50-60 शब्दों में लिखना होता है। इस पुस्तक से गद्यांश वाले प्रश्न नहीं आते।

4 अंक का उत्तर कैसे लिखें कि पूरे अंक मिलें?

उत्तर में लगभग चार बिंदु रखिए और हर बिंदु के साथ पाठ की कोई घटना दीजिए। पहले वाक्य में सीधा उत्तर दीजिए और अंत में एक छोटा निष्कर्ष लिखिए। शब्द-सीमा 50-60 शब्दों के आसपास रखिए।

Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-अ (002), कक्षा 10, 2026-27; NCERT कृतिका भाग 2 (Reprint 2026-27), माता का अँचल