सूरदास के पद (क्षितिज भाग 2): गोपियों का व्यंग्य और एकनिष्ठ प्रेम
Updated 17 October 2026 · Draft, not yet fact-checked
सूरदास के चारों पदों में गोपियाँ उद्धव के योग-संदेश को अस्वीकार करती हैं। वे उद्धव को 'बड़भागी' कहकर व्यंग्य करती हैं, क्योंकि वे कृष्ण के पास रहकर भी प्रेम से अछूते रहे। कमल के पत्ते, तेल की गगरी, हारिल की लकड़ी और कड़वी ककड़ी जैसे उदाहरणों से वे सिद्ध करती हैं कि उनका मन कृष्ण में अटल है और योग उनके लिए व्यर्थ है। अंत में वे राजधर्म की याद दिलाकर कृष्ण को ही कठघरे में खड़ा कर देती हैं।
Understand सूरदास के पद: गोपियों का व्यंग्य और एकनिष्ठ प्रेम
ये पद सूरसागर के भ्रमरगीत प्रसंग से लिए गए हैं। कृष्ण मथुरा चले गए और स्वयं लौटने के बजाय उद्धव को संदेश देकर भेजा। उद्धव ने गोपियों को निर्गुण ब्रह्म और योग का उपदेश दिया। गोपियों ने उद्धव को सीधे नहीं टोका; भौंरे (मधुकर) के बहाने तीखे व्यंग्य किए।
पहला पद। गोपियाँ कहती हैं, 'ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी'। यह प्रशंसा नहीं, ताना है। कमल का पत्ता जल में रहकर भी भीगता नहीं और तेल लगी गगरी पर पानी की बूँद नहीं ठहरती; उसी प्रकार उद्धव कृष्ण के पास रहकर भी प्रेम के बंधन में नहीं बँधे। उन्होंने प्रीति-नदी में पाँव तक नहीं डुबोया, जबकि भोली गोपियाँ कृष्ण से ऐसे चिपटी हैं जैसे चींटी गुड़ से।
दूसरा पद। गोपियों की बात मन में ही रह गई। वे कृष्ण के लौटने की आशा के सहारे तन-मन की पीड़ा सह रही थीं। योग-संदेश ने वह आशा तोड़ दी और विरह की आग और भड़का दी। जहाँ से रक्षा की पुकार की आशा थी, वहीं से योग की धारा बह आई। जब कृष्ण ने ही मर्यादा नहीं रखी तो वे धैर्य क्यों रखें?
तीसरा पद। कृष्ण गोपियों के लिए हारिल पक्षी की लकड़ी हैं, जिसे वह कभी नहीं छोड़ता। गोपियाँ मन, कर्म और वचन से उन्हें थामे हैं और दिन-रात 'कान्ह-कान्ह' रटती हैं। योग उन्हें कड़वी ककड़ी जैसा लगता है और ऐसा रोग जो न देखा, न सुना, न भोगा। इसे वे उन्हें दें जिनका मन चकरी की तरह चंचल है।
चौथा पद। गोपियाँ ताना देती हैं कि कृष्ण अब राजनीति पढ़ आए हैं और पहले से अधिक चतुर हो गए हैं। भले लोग दूसरों के हित के लिए दौड़ते थे; अब वे अपना वह मन वापस पाना चाहती हैं जो कृष्ण जाते समय चुरा ले गए थे। जो दूसरों को अन्याय से छुड़ाते थे, वे स्वयं अन्याय क्यों करें? प्रजा को न सताना ही राजा का धर्म है।
परीक्षा की दृष्टि से पाठ की तीन बातें याद रखें: (1) व्यंग्य किस पर और किस शब्द में है; (2) हर उदाहरण (कमल-पत्ता, गगरी, हारिल, ककड़ी) क्या सिद्ध करता है; (3) कौन-सा अलंकार किस पंक्ति में है।
सूरदास के पद: गोपियों का व्यंग्य और एकनिष्ठ प्रेम: key facts
- चारों पदों का क्रम
- व्यंग्य: बड़भागी
- विरह की आग भड़कना
- हारिल की लकड़ी और कड़वी ककड़ी
- राजनीति और राजधर्म
- प्रत्येक पद का एक मुख्य भाव पहचानें।
- उदाहरण और उनका अर्थ
- कमल का पत्ता
- तेल की गगरी
- चींटी और गुड़
- हारिल की लकड़ी
- कड़वी ककड़ी
- पहले दो उद्धव के अनासक्त रहने के लिए, तीसरा गोपियों के प्रेम के लिए, चौथा-पाँचवाँ क्रमशः अटलता और योग की अरुचि के लिए।
- अलंकार-पहचान
ज्यौं करुई ककरी उपमा प्रीति-नदी रूपक कान्ह-कान्ह पुनरुक्ति प्रकाश - वाचक शब्द (ज्यौं) हो तो उपमा, आरोप हो तो रूपक।
सूरदास के पद: गोपियों का व्यंग्य और एकनिष्ठ प्रेम in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
अनासक्त रहना और जुड़ना
मान लीजिए एक सहपाठी साल भर एक ही बेंच पर बैठा, पर कक्षा के किसी आयोजन में कभी शामिल नहीं हुआ। आख़िर में उसे सबसे बड़ा 'भाग्यशाली' कहकर बाकी छात्र हँसते हैं कि उसने साथ का कोई आनंद चखा ही नहीं।
यह किस पद के भाव से मेल खाता है और क्यों?
Try it first, then show the solutionSolution
- 'बड़भागी' शब्द में प्रशंसा नहीं, ताना है।
- साथ रहकर भी न जुड़ना = कमल के पत्ते का जल में रहकर भी न भीगना।
- बाकी छात्रों का हँसना = गोपियों का उद्धव पर व्यंग्य।
Answer: पहले पद से; पास रहकर भी भावनात्मक रूप से अछूता रहना ही उद्धव के प्रति गोपियों के व्यंग्य का आधार है।
Memory hook: पास रहे पर जुड़े नहीं, तो पत्ता कमल का, भाव नहीं।
सलाह कब बोझ बनती है
मान लीजिए किसी बच्ची की सहेली दूर शहर चली गई है और खुद आने के बजाय एक बड़े भाई के हाथ संदेश भेजती है कि दुखी मत हो, मन को वश में रखना सीखो। बच्ची को सांत्वना नहीं, खीज होती है।
इसकी तुलना गोपियों की किस स्थिति से होगी?
Try it first, then show the solutionSolution
- सहेली का स्वयं न आना = कृष्ण का स्वयं न लौटना।
- उपदेश भेजना = उद्धव के हाथ योग-संदेश।
- खीज = विरह की आग का और भड़कना।
Answer: दूसरे पद से; योग-संदेश ने गोपियों की व्यथा घटाई नहीं, बढ़ा दी।
Memory hook: आशा के बदले उपदेश मिले, तो आग में घी पड़े।
Tricks to remember सूरदास के पद: गोपियों का व्यंग्य और एकनिष्ठ प्रेम
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
क-ह-क-रा
कमल-पत्ता, हारिल की लकड़ी, कड़वी ककड़ी, राजनीति: चार प्रमुख प्रतीक-शब्द।
Use it when: उदाहरण वाले प्रश्न में क्रम से लिखने के लिए।
तीन तीर
तीर 1 बड़भागी (ताना), तीर 2 राजनीति पढ़ आए (ताना), तीर 3 मर्यादा/अन्याय का प्रश्न (तर्क)।
Use it when: व्यंग्य और तर्क अलग-अलग दिखाने के लिए।
सूरदास के पद: गोपियों का व्यंग्य और एकनिष्ठ प्रेम: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: 'बड़भागी' का भाव · 1 mark · MCQBoard level
गोपियाँ उद्धव को 'अति बड़भागी' कहती हैं। इसका वास्तविक भाव क्या है?
(क) सचमुच भाग्यशाली मानना
(ख) कृष्ण के निकट रहकर भी प्रेम से वंचित रहने पर व्यंग्य
(ग) कृष्ण का आभार मानना
(घ) उद्धव की ज्ञान-प्रशंसा
Try it first, then show the solutionSolution
- 'बड़भागी' ऊपर से प्रशंसा है।
- आगे के उदाहरण बताते हैं कि उद्धव प्रेम से अछूते रहे।
Answer: (ख) कृष्ण के निकट रहकर भी प्रेम से वंचित रहने पर व्यंग्य।
Example 2: कमल-पत्ता और गगरी · 2 marks · Short answerBoard level
पहले पद में कमल के पत्ते और जल में डूबी तेल लगी गगरी के उदाहरण किस बात को स्पष्ट करते हैं? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- दोनों वस्तुएँ जल में रहकर भी भीगती नहीं।
- तुलना उद्धव से है।
Answer: कमल का पत्ता जल में रहकर भी भीगता नहीं और तेल लगी गगरी पर बूँद नहीं ठहरती। इसी प्रकार उद्धव कृष्ण के निकट रहकर भी प्रेम-बंधन से अछूते रहे।
Example 3: चींटी और गुड़ · 2 marks · Short answerHarder board level
'अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यौं पागी' पंक्ति में गोपियाँ अपने बारे में क्या कहती हैं और इसमें कौन-सा अलंकार है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पहले आशय, फिर वाचक शब्द खोजें।
- 'ज्यौं' तुलना का सूचक है।
Answer: गोपियाँ स्वयं को भोली अबला कहती हैं जो कृष्ण-प्रेम में उसी तरह लिपटी हैं जैसे चींटी गुड़ से चिपटी रहती है। 'ज्यौं' वाचक शब्द से तुलना होने के कारण यहाँ उपमा अलंकार है।
Example 4: काव्यांश: योग और हारिल · 5 marks · Source-basedHarder board level
पाठ के भाव पर आधारित अंश (अपने शब्दों में): गोपियाँ कहती हैं कि कृष्ण उनके लिए हारिल पक्षी की लकड़ी हैं जिसे वे मन, कर्म और वचन से थामे हैं; दिन-रात वे केवल कृष्ण-नाम रटती हैं। योग उन्हें कड़वी ककड़ी जैसा लगता है और ऐसा रोग जो न देखा, न सुना, न भोगा। वे कहती हैं कि यह योग उन्हें दो जिनका मन चकरी की तरह अस्थिर है।
(i) हारिल की लकड़ी का प्रतीक है
(क) कृष्ण-प्रेम की अटलता (ख) उद्धव की ज्ञान-गरिमा (ग) गोपियों की चंचलता (घ) योग की कठिनाई
(ii) योग को कड़वी ककड़ी कहने में अलंकार है
(क) रूपक (ख) उपमा (ग) अनुप्रास (घ) श्लेष
(iii) 'कान्ह-कान्ह' में शब्द-सौंदर्य है
(क) पुनरुक्ति प्रकाश (ख) विरोधाभास (ग) यमक (घ) उत्प्रेक्षा
(iv) चकरी जैसे मन वाले कौन हैं
(क) जिनका मन स्थिर है (ख) जिनका मन चंचल है (ग) जो प्रेम में डूबे हैं (घ) जो योग त्याग चुके हैं
(v) गोपियों ने योग को 'व्याधि' कहा क्योंकि
(क) वह अपरिचित और अप्रिय है (ख) वह महँगा है (ग) वह गाया जाता है (घ) वह कृष्ण ने भेजा ही नहीं
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रत्येक उप-प्रश्न 1 अंक का है।
- वाचक शब्द 'ज्यौं' और दोहराव को देखें।
Answer: (i) (क); (ii) (ख) उपमा, क्योंकि 'ज्यौं' वाचक शब्द है; (iii) (क); (iv) (ख); (v) (क)।
Example 5: योग-संदेश से विरह क्यों भड़का · 2 marks · Short answerHOTS / competency
दूसरे पद के आधार पर समझाइए कि उद्धव का योग-संदेश गोपियों की पीड़ा घटाने के बजाय क्यों बढ़ा देता है। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पहले बताएँ कि गोपियाँ अब तक किस सहारे जी रही थीं।
- फिर बताएँ कि संदेश ने उस सहारे के साथ क्या किया।
Answer: गोपियाँ कृष्ण के लौटने की आशा के सहारे पीड़ा सह रही थीं। योग-संदेश से उन्हें लगा कि कृष्ण आएँगे ही नहीं; आशा टूटते ही विरह-अग्नि और भड़क उठी।
Where students lose marks in सूरदास के पद: गोपियों का व्यंग्य और एकनिष्ठ प्रेम
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: 'बड़भागी' का अर्थ सीधे भाग्यशाली लिख देना
यह व्यंग्य है; प्रशंसा समझने पर भावार्थ उलट जाता है।
Wrong working
गोपियाँ उद्धव को बड़ा भाग्यशाली मानती हैं।
Right working
गोपियाँ 'बड़भागी' कहकर व्यंग्य करती हैं कि उद्धव प्रेम से वंचित रहे।
Do this: हर बार पूछें: वक्ता का वास्तविक भाव क्या है?
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: उदाहरण लिखकर उसका निष्कर्ष न देना
अंक उदाहरण के साथ उससे सिद्ध होने वाली बात पर मिलते हैं।
Wrong working
कमल का पत्ता जल में रहता है।
Right working
कमल का पत्ता जल में रहकर भी भीगता नहीं, वैसे ही उद्धव प्रेम से अछूते हैं।
Do this: उदाहरण + 'जैसे... वैसे' से निष्कर्ष जोड़ें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: उपमा और रूपक में भेद न करना
वाचक शब्द न देखकर अलंकार का नाम गलत लिखा जाता है।
Wrong working
'ज्यौं करुई ककरी' में रूपक है।
Right working
वाचक शब्द 'ज्यौं' है, इसलिए उपमा।
Do this: वाचक शब्द खोजें, फिर नाम लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- व्यंग्य वाले प्रश्न में पहले शब्द का ऊपरी अर्थ, फिर वास्तविक भाव लिखें।
- 2 अंक के प्रश्न में दो बातें लिखें: क्या कहा गया और उससे क्या सिद्ध होता है; 25-30 शब्द की सीमा रखें।
- काव्यांश के MCQ में पंक्ति के वाचक शब्द और दोहराव देखकर अलंकार तय करें।
- चारों पदों का एक-एक भाव याद रखें ताकि किसी भी पद से प्रश्न आए तो उत्तर तैयार रहे।
- पंक्तियाँ उद्धृत करते समय उनका मूल रूप ही लिखें; भावार्थ अपने शब्दों में दें।
Practice questions on सूरदास के पद: गोपियों का व्यंग्य और एकनिष्ठ प्रेम
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
गोपियों ने उद्धव को क्या संबोधन दिया है जिसमें व्यंग्य है?
(क) मधुर वक्ता (ख) बड़भागी (ग) योगीराज (घ) सखाHint
पहले पद की पहली पंक्ति देखें।
Answer
(ख) बड़भागी।
Q2 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level
कथन (A): गोपियाँ उद्धव के योग-संदेश को स्वीकार नहीं करतीं।
कारण (R): उनका मन कृष्ण-प्रेम में हारिल की लकड़ी की तरह दृढ़ है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
(ख) A और R दोनों सही हैं पर R, A की व्याख्या नहीं
(ग) A सही है, R गलत
(घ) A गलत है, R सहीHint
तीसरे पद का हारिल का उदाहरण कथन का कारण बनता है या नहीं, देखें।
Answer
(क) अटल प्रेम ही अस्वीकार का कारण है, इसलिए R, A की सही व्याख्या है।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
'प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोर्यौ' में कौन-सा अलंकार है और उसका आशय क्या है? (25-30 शब्द)
Hint
प्रेम पर नदी का आरोप है।
Answer
यहाँ रूपक अलंकार है, क्योंकि प्रेम (उपमेय) पर नदी (उपमान) का आरोप किया गया है। आशय यह है कि उद्धव ने प्रेम में कभी डूबकर देखा ही नहीं।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
'अब गोपियाँ अपना मन वापस पा लेंगी' से चौथे पद में कौन-सा व्यंग्य और कौन-सी शिकायत प्रकट होती है? (25-30 शब्द)
Hint
कृष्ण जाते समय क्या ले गए थे? यह मन किसे लौटाया जाना है?
Answer
कृष्ण जाते समय गोपियों का मन चुरा ले गए थे। व्यंग्य यह है कि अब वे अपना मन वापस पा लेंगी, क्योंकि कृष्ण राजनीति पढ़कर चतुर हो गए हैं। शिकायत है कि जो दूसरों को अन्याय से छुड़ाते थे, वे स्वयं अन्याय कर रहे हैं।
Q5 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
यदि उद्धव गोपियों को योग के साथ कृष्ण के लौटने का आश्वासन भी देते, तो पदों का स्वर कैसे बदलता? तर्क सहित लिखिए। (25-30 शब्द)
Hint
दूसरे पद में आशा टूटने की बात याद करें।
Answer
तब विरह की आग इतनी न भड़कती और व्यंग्य की कटुता घटती। गोपियाँ आशा के सहारे धैर्य रखतीं; योग को अस्वीकार करने पर भी वे उद्धव से इतना रोष न दिखातीं।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.सूरदास के पद किस प्रसंग से लिए गए हैं?Show answer
सूरसागर के भ्रमरगीत प्रसंग से।
2.गोपियाँ उद्धव को और किस नाम से संबोधित करती हैं?Show answer
मधुकर (भौंरा) के बहाने; पदों में 'ऊधौ' संबोधन भी है।
3.गोपियों के लिए कृष्ण किसके समान हैं?Show answer
हारिल पक्षी की लकड़ी के समान।
4.योग की तुलना किससे की गई है?Show answer
कड़वी ककड़ी से।
5.चौथे पद में गोपियाँ कृष्ण के बारे में क्या ताना देती हैं?Show answer
कि वे राजनीति पढ़ आए हैं।
सूरदास के पद: गोपियों का व्यंग्य और एकनिष्ठ प्रेम: frequently asked questions
सूरदास के पदों का मुख्य विषय क्या है?
ज्ञान-योग की तुलना में एकनिष्ठ प्रेम की श्रेष्ठता।
'पुरइनि पात' का क्या अर्थ है?
कमल का पत्ता।
बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से क्या पूछा जाता है?
काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2-2 अंक के प्रश्न।
गोपियों का तर्क किस पर टिका है?
अपने अटल प्रेम और राजा के धर्म की मर्यादा पर।