मीरा – पद Class 10: भावार्थ, विषय और काव्य-सौंदर्य
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
‘पद’ स्पर्श भाग 2 में मीराबाई के दो भक्ति-पद हैं। पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण से अपनी पीड़ा हरने की विनती करती हैं। दूसरे पद में वे उनकी चाकर बनकर रोज़ दर्शन पाना चाहती हैं। बोर्ड काव्यांश पर पाँच MCQ (कथन-कारण सहित) और 25-30 शब्दों के दो अंक वाले प्रश्न पूछता है।
What मीरा – पद is about
‘पद’ स्पर्श भाग 2 के पद्य खंड का दूसरा पाठ है। इसकी रचयिता मीराबाई हैं, जो मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की प्रमुख कवयित्री और संत रैदास की शिष्या मानी जाती हैं। पाठ में दो पद हैं, और दोनों मीरा के आराध्य गिरधर गोपाल श्रीकृष्ण को संबोधित हैं। एक पंक्ति में कहें तो: मीरा कृष्ण के भक्तवत्सल रूप पर भरोसा करके अपना कष्ट दूर करने की प्रार्थना करती हैं और सेविका बनकर उनके दर्शन, स्मरण और भक्ति को ही अपना धन मानती हैं।
बोर्ड परीक्षा में यह पाठ काव्य खंड में दो तरह से आता है। पहला, प्रश्न 7 में पठित काव्यांश दिया जाता है और उस पर एक-एक अंक के पाँच बहुविकल्पी प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें एक कथन-कारण प्रश्न भी होता है। दूसरा, प्रश्न 8 में चार में से तीन प्रश्नों के उत्तर 25-30 शब्दों में लिखने होते हैं, हर प्रश्न दो अंक का होता है। इसलिए दोनों पदों का भाव, शब्दों के अर्थ और अलंकार अच्छी तरह समझ लें।
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मीरा – पद: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
पहला पद: पीड़ा हरने की विनती
मीरा श्रीकृष्ण को ‘हरि’ कहकर पुकारती हैं और विनती करती हैं कि वे अपने भक्तों का दुख दूर करें। अपनी बात को मज़बूत करने के लिए वे कृष्ण को उनके पुराने कामों की याद दिलाती हैं। जब दुर्योधन के कहने पर द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था, तब कृष्ण ने उसका वस्त्र इतना बढ़ा दिया कि दुःशासन का हाथ थक गया और द्रौपदी की लाज बच गई। भक्त की रक्षा के लिए उन्होंने नरहरि का शरीर धारण किया। डूबते हुए गजराज को बचाने के लिए उन्होंने मगरमच्छ को मारकर हाथी का कष्ट दूर किया। अंत में मीरा स्वयं को ‘दासी’ कहती हैं और प्रार्थना करती हैं कि जैसे आपने इन सबका दुख दूर किया, वैसे ही मेरी पीड़ा भी हर लीजिए। इन उदाहरणों से मीरा कृष्ण को प्यार से उनका कर्तव्य याद दिलाती हैं।
दूसरा पद: चाकर बनने की इच्छा
दूसरे पद में मीरा श्याम से कहती हैं कि मुझे अपनी नौकरानी (चाकर) बना लीजिए। चाकर बनकर वे बाग लगाएँगी, रोज़ सुबह उठकर कृष्ण के दर्शन पाएँगी और वृंदावन की कुंज गलियों में उनकी लीलाओं का गान करेंगी। वे इस नौकरी का ‘हिसाब’ भी बताती हैं: वेतन के रूप में दर्शन, जेब खर्च के रूप में स्मरण और जागीर के रूप में भाव-भक्ति मिलेगी। ये तीनों बातें उन्हें प्रिय हैं।
फिर वे कृष्ण के रूप का वर्णन करती हैं: सिर पर मोर-मुकुट, शरीर पर पीला वस्त्र (पीतांबर), गले में वैजंती माला, और वृंदावन में गाएँ चराते हुए मुरली बजाने वाले मोहन। मीरा ऊँचे-ऊँचे महल बनाने और उनके बीच-बीच में ‘बारी’ रखने की बात करती हैं, ताकि कुसुम्बी साड़ी पहनकर साँवरे के दर्शन कर सकें। वे प्रार्थना करती हैं कि प्रभु आधी रात को यमुना के किनारे दर्शन दें, क्योंकि उनका हृदय बहुत व्याकुल है।
केंद्रीय भाव
दोनों पदों का प्रतिपाद्य है: ईश्वर पर अटूट विश्वास और अनन्य प्रेम। पहले पद में दैन्य भाव है, जहाँ भक्त विनम्र होकर रक्षा माँगता है। दूसरे पद में दास्य और माधुर्य भाव है, जहाँ भक्त सांसारिक धन नहीं, केवल प्रभु का सान्निध्य चाहता है।
Themes and message
भक्तवत्सल ईश्वर पर अटूट विश्वास
पहले पद का मूल भाव यह है कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा अवश्य करते हैं। मीरा कोई नया तर्क नहीं देतीं; वे कृष्ण के ही पुराने उदाहरण गिनाती हैं—द्रौपदी, नरहरि रूप और गजराज। इससे पता चलता है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि जो प्रभु पहले भक्तों का दुख दूर कर चुके हैं, वे उनकी पीड़ा भी हरेंगे। पौराणिक उदाहरण देने का उद्देश्य कृष्ण को उनके कर्तव्य का स्मरण कराना है, यह विनती और उलाहना दोनों का मिला-जुला रूप है।
From the text: द्रौपदी का चीर बढ़ाना, भक्त के लिए नरहरि रूप धरना, डूबते गजराज को बचाना; अंत में विनती: "दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर॥"
दैन्य और दास्य भाव की भक्ति
मीरा स्वयं को बड़ा या अधिकारी नहीं मानतीं। पहले पद में वे अपने को ‘दासी’ कहती हैं और दूसरे पद में ‘चाकर’ बनने की प्रार्थना करती हैं। कवयित्री-परिचय में भी लिखा है कि मीरा की भक्ति दैन्य और माधुर्यभाव की है। सेविका बनना उनके लिए अपमान नहीं, बल्कि प्रभु के पास रहने का उपाय है। इससे पता चलता है कि सच्ची भक्ति में अहंकार का त्याग और पूर्ण समर्पण आवश्यक है।
From the text: "स्याम म्हाने चाकर राखो जी," और पहले पद में स्वयं को "दासी मीराँ" कहना।
सांसारिक वैभव नहीं, भक्ति ही सच्चा धन
दूसरे पद में मीरा नौकरी की भाषा में अपनी बात कहती हैं, पर उनका वेतन रुपये-पैसे नहीं हैं। दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति ही उनकी कमाई, खर्च और जागीर हैं। मीरा एक राजघराने की बहू थीं, फिर भी वे इन तीन बातों को ही प्रिय बताती हैं। इससे संकेत मिलता है कि भक्त के लिए भौतिक संपत्ति से बड़ा धन प्रभु का सान्निध्य है। यही कारण है कि चाकरी उन्हें घाटे का नहीं, लाभ का सौदा लगती है।
From the text: "चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।" और "भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।"
सगुण रूप का माधुर्य और अनन्य प्रेम
मीरा कृष्ण को निराकार रूप में नहीं, बल्कि एक सुंदर, जीवंत रूप में देखती हैं। मोर-मुकुट, पीतांबर, वैजंती माला, गाय चराना और मुरली बजाना—यह सब सगुण कृष्ण की छवि है। कुसुम्बी साड़ी पहनकर साँवरिया के दर्शन करने की इच्छा में प्रेमिका जैसा माधुर्य भाव दिखता है। पाठ प्रवेश के अनुसार मीरा गिरधर गोपाल के अनन्य और एकनिष्ठ प्रेम से अभिभूत थीं; यह पद उसी प्रेम का चित्र है।
From the text: "मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजन्ती माला।" और "साँवरिया रा दरसण पास्यूँ, पहर कुसुम्बी साड़ी।"
दर्शन की तीव्र व्याकुलता
दूसरे पद का अंत मीरा की बेचैनी पर होता है। वे इतनी अधीर हैं कि आधी रात को भी यमुना के किनारे दर्शन चाहती हैं। ‘दरसण पास्यूँ’ बार-बार आता है, जिससे लगता है कि पूरे पद का केंद्र दर्शन की इच्छा ही है। बाग लगाना, महल बनाना, लीला गाना—ये सब काम दर्शन पाने के ही रास्ते हैं। इससे पता चलता है कि मीरा का प्रेम शांत नहीं, बल्कि गहरी विरह-वेदना से भरा है।
From the text: "आधी रात प्रभु दरसण, दीज्यो जमनाजी रे तीरां।" और "मीराँ रा प्रभु गिरधर नागर, हिवड़ो घणो अधीराँ॥"
The speaker and the people in the poem
मीरा (वक्ता, भक्त कवयित्री)
दोनों पदों की वक्ता, जो अपने आराध्य श्रीकृष्ण से विनती करती हैं और उनकी सेविका बनना चाहती हैं।
- विनम्र और समर्पित: स्वयं को ‘दासी’ और ‘चाकर’ कहती हैं।
- अटूट विश्वासी: पौराणिक उदाहरणों से मानती हैं कि प्रभु उनकी पीड़ा भी हरेंगे।
- चतुर और भावुक: चाकरी की भाषा में वेतन, खर्च और जागीर का हिसाब जोड़कर अपनी बात कहती हैं।
- सांसारिक मोह से दूर: धन नहीं, दर्शन-स्मरण-भक्ति को प्रिय मानती हैं।
- दर्शन के लिए व्याकुल: आधी रात को भी यमुना-तट पर दर्शन चाहती हैं।
"दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर॥"; "चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ।"; "हिवड़ो घणो अधीराँ॥" कवयित्री-परिचय के अनुसार मीरा ने घर-परिवार त्यागकर वृंदावन में स्वयं को कृष्ण के प्रति समर्पित कर दिया था।
श्रीकृष्ण (आराध्य, जिन्हें संबोधित किया गया है)
मीरा के आराध्य, जिन्हें हरि, स्याम, गिरधारी लाला, गोविंद, मोहन, साँवरिया और गिरधर नागर कहकर पुकारा गया है।
- भक्तवत्सल: भक्तों की रक्षा के लिए रूप तक धारण कर लेते हैं।
- संकटमोचक: द्रौपदी की लाज और गजराज के प्राण बचाए।
- अत्यंत सुंदर: मोर-मुकुट, पीतांबर और वैजंती माला से सुशोभित।
- ग्वाल रूप में सरल: वृंदावन में गाएँ चराते और मुरली बजाते हैं।
"भगत कारण रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर।"; "बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर।"; "बिन्दरावन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला।"
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| अनुप्रास अलंकार | "हरि आप हरो जन री भीर।" (‘ह’ वर्ण की आवृत्ति); "मोर मुगट" और "मोहन मुरली" (‘म’ वर्ण की आवृत्ति) | एक ही वर्ण के दोहराव से पंक्ति में लय और मधुरता आती है, जिससे पद गाने में सरल और कानों को प्रिय लगता है। |
| पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार | "ऊँचा ऊँचा महल बणावं बिच बिच राखूँ बारी।" | ‘ऊँचा ऊँचा’ और ‘बिच बिच’ के दोहराव से भाव पर ज़ोर पड़ता है और मीरा की उत्सुकता व कल्पना की भव्यता सामने आती है। |
| रूपक अलंकार | "भाव भगती जागीरी पास्यूँ" और "सुमरण पास्यूँ खरची" | भक्ति को जागीर और स्मरण को खर्च के रूप में दिखाया गया है। इससे पता चलता है कि मीरा के लिए भक्ति ही संपत्ति है; आध्यात्मिक बात रोज़मर्रा की भाषा में समझ आती है। |
| दृष्टांत/पौराणिक उदाहरण (अंतर्कथा) | "द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।" और "बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर।" | पौराणिक प्रसंगों से मीरा अपनी विनती को तर्क का आधार देती हैं और कृष्ण को उनके भक्त-रक्षक कर्तव्य का स्मरण कराती हैं। |
| चित्रात्मकता / रूप-चित्रण (बिंब) | "मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजन्ती माला।" | मोर-मुकुट, पीले वस्त्र और माला का दृश्य आँखों के सामने कृष्ण की सजीव छवि बना देता है, जिससे सगुण भक्ति का माधुर्य झलकता है। |
| तुकांत, गेयता और भाषा का मिश्रण | पहले पद में "भीर", "चीर", "सरीर", "पीर" का तुक; "री", "म्हाने", "पास्यूँ" जैसे राजस्थानी शब्द | अंत में समान ध्वनि वाले शब्द पद को गाने योग्य बनाते हैं। राजस्थानी, ब्रज और गुजराती के मिश्रण वाली सरल भाषा से भाव सहज और आत्मीय बनता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
हरि आप हरो जन री भीर।
मीरा: पहले पद की पहली पंक्ति, जिसमें मीरा श्रीकृष्ण से भक्तों का दुख दूर करने की प्रार्थना करती हैं।
यही पूरे पहले पद का मुख्य भाव है। ‘भीर’ का अर्थ पीड़ा या कष्ट है; यह पंक्ति दैन्य भाव और अनुप्रास दोनों का उदाहरण है।
द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
मीरा: मीरा कृष्ण को याद दिलाती हैं कि उन्होंने चीरहरण के समय द्रौपदी का वस्त्र बढ़ाकर उसकी लाज बचाई थी।
पौराणिक उदाहरण से कृष्ण का भक्तवत्सल रूप सामने आता है और मीरा का विश्वास पक्का होता है।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर॥
मीरा: पहले पद की अंतिम पंक्ति, जहाँ उदाहरण गिनाने के बाद मीरा अपनी पीड़ा हरने की विनती करती हैं।
स्वयं को ‘दासी’ कहकर मीरा अपनी विनम्रता और पूर्ण समर्पण दिखाती हैं; पद का निष्कर्ष यहीं है।
स्याम म्हाने चाकर राखो जी,
मीरा: दूसरे पद की टेक, जिसमें मीरा कृष्ण से अपनी सेविका बना लेने का अनुरोध करती हैं।
दास्य भाव की भक्ति का सबसे स्पष्ट रूप; चाकरी को मीरा प्रभु के निकट रहने का उपाय मानती हैं।
चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
मीरा: मीरा बताती हैं कि नौकरी के बदले उन्हें क्या मिलेगा।
दर्शन वेतन है और स्मरण जेब खर्च; इससे दिखता है कि भक्त के लिए आध्यात्मिक लाभ ही सच्चा धन है।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।
मीरा: चाकरी के लाभों की गिनती का अंतिम हिस्सा।
भक्ति को जागीर कहने में रूपक है; ‘तीनूं बाताँ’ यानी दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति मीरा को सबसे प्रिय हैं।
मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजन्ती माला।
मीरा: मीरा श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन करती हैं।
सगुण रूप का सुंदर चित्र; अनुप्रास और चित्रात्मकता दोनों के लिए उपयोगी पंक्ति।
मीराँ रा प्रभु गिरधर नागर, हिवड़ो घणो अधीराँ॥
मीरा: दूसरे पद की अंतिम पंक्ति, आधी रात यमुना-तट पर दर्शन की प्रार्थना के बाद।
‘अधीराँ’ का अर्थ व्याकुल है; यह पंक्ति मीरा के हृदय की गहरी बेचैनी और दर्शन की तीव्र चाह दिखाती है।
मीरा – पद in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
भक्तवत्सल ईश्वर पर अटूट विश्वास
मान लीजिए बोर्ड परीक्षा से एक रात पहले आप बहुत घबरा रहे हैं। आपकी दादी शांत स्वर में कहती हैं कि पिछली बार भी तुम डरे थे और सब ठीक हुआ था, भरोसा रखो। उनकी बात सुनकर आपका मन थोड़ा हल्का हो जाता है।
दादी के भरोसे की तुलना पहले पद में मीरा के विश्वास से कीजिए। ऐसा विश्वास कठिन समय में कैसे सहायता करता है? (लगभग 25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- दादी पिछले अनुभव याद दिलाकर भरोसा देती हैं।
- मीरा भी द्रौपदी और गजराज के उद्धार याद करती हैं।
- दोनों में पुराने अनुभव से विश्वास बनता है।
- विश्वास से धैर्य और साहस मिलता है।
Answer: दादी का भरोसा मीरा जैसा है। मीरा द्रौपदी और गजराज के उद्धार को याद कर विश्वास करती हैं कि प्रभु उनकी पीड़ा हरेंगे। विश्वास से धैर्य और साहस मिलता है।
Memory hook: दादी की बात और मीरा के उदाहरण: पुराना सहारा याद आए तो नया डर छोटा हो जाता है।
सांसारिक वैभव नहीं, भक्ति ही सच्चा धन
कल्पना कीजिए आपकी मित्र सान्या को एक प्रतियोगिता में इनाम के पैसे मिलते हैं। वह महँगा मोबाइल लेने के बजाय उन पैसों से संगीत सीखने लगती है, क्योंकि गाना उसे सबसे अधिक आनंद देता है। कुछ सहपाठी इसे मूर्खता कहते हैं।
सान्या के निर्णय की तुलना मीरा की 'जागीरी' वाली सोच से कीजिए और अपना मत दीजिए। (लगभग 25-30 शब्द)
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- सान्या दिखावे की वस्तु नहीं, मन का आनंद चुनती है।
- मीरा चाकरी के बदले धन नहीं, स्मरण और भाव-भक्ति चाहती हैं।
- मीरा के लिए भक्ति ही जागीर है।
- मत: जो मन को सच्चा आनंद दे, वही असली संपत्ति है।
Answer: सान्या का निर्णय मीरा जैसा है। मीरा ने चाकरी के बदले धन नहीं, स्मरण और भाव-भक्ति को अपनी जागीर माना। जो मन को सच्चा आनंद दे, वही असली संपत्ति है।
Memory hook: सान्या का संगीत, मीरा की भक्ति: दोनों की 'जागीरी' मन का आनंद है।
दर्शन की तीव्र व्याकुलता
कल्पना कीजिए आपके बड़े भैया सेना में हैं और दो साल बाद घर लौट रहे हैं। उनकी ट्रेन रात को आनी है। आप रात भर सो नहीं पाते और बार-बार घड़ी देखते रहते हैं।
अपनी इस बेचैनी की तुलना दूसरे पद की अंतिम पंक्ति 'हिवड़ो घणो अधीराँ' से कीजिए। (लगभग 25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रिय से मिलने की प्रतीक्षा में मन बेचैन होता है।
- मीरा का हृदय प्रभु-दर्शन के लिए बहुत अधीर है।
- वे आधी रात यमुना-किनारे दर्शन माँगती हैं।
- प्रेम जितना गहरा, प्रतीक्षा उतनी कठिन।
Answer: जैसे मैं भैया से मिलने को बेचैन हूँ, वैसे मीरा का हृदय प्रभु-दर्शन के लिए अधीर है। वे आधी रात यमुना-किनारे दर्शन माँगती हैं; प्रेम में प्रतीक्षा कठिन लगती है।
Memory hook: भैया की ट्रेन का इंतज़ार = मीरा का 'अधीराँ' हृदय।
कर्तव्य-स्मरण: उदाहरण देकर विनती करना
मान लीजिए आप अपने विद्यालय की क्रिकेट टीम के कप्तान हैं। पिछले वर्ष कोच जी ने कठिन मैचों से पहले अतिरिक्त अभ्यास कराकर टीम को जिताया था। इस बार टीम कमज़ोर पड़ रही है और आप उनसे फिर सहायता माँगना चाहते हैं।
मीरा के पहले पद की शैली अपनाकर आप कोच जी से अपनी बात कैसे रखेंगे? पद से तुलना करते हुए लिखिए। (लगभग 25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- विनम्रता से विनती करना।
- पहले की सहायता याद दिलाना।
- मीरा भी द्रौपदी, नरहरि, गजराज के प्रसंग गिनाती हैं।
- इससे प्रभु को उनका कर्तव्य याद आता है।
Answer: मीरा की तरह मैं विनम्रता से कोच जी को याद दिलाऊँगा कि आपने पहले भी संकट से उबारा था। मीरा द्रौपदी-गजराज के उद्धार गिनाकर प्रभु को कर्तव्य याद दिलाती हैं।
Memory hook: 'आपने पहले भी बचाया था' = मीरा की विनती का तरीका।
Topics in this chapter
- मीरा के पद का भावार्थ और व्याख्याComing soon
- मीरा के पद के प्रश्न-उत्तरComing soon
- मीरा के पदों का काव्य-सौंदर्यComing soon
- मीराबाई का जीवन परिचय और भक्ति-भावComing soon
- पहले पद में कृष्ण के उद्धार-प्रसंगComing soon
How the board asks मीरा – पद
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | पहला या दूसरा पूरा पद देकर पाँच MCQ पूछे जाते हैं: मीरा क्या प्रार्थना करती हैं, किसी पंक्ति का अर्थ, ‘खरची’ या ‘जागीरी’ के रूप में क्या मिलेगा, कौन-सा काम मीरा ने नहीं गिनाया, काव्यांश का मूल भाव कौन-सा कथन है। | हर विकल्प को पंक्ति से मिलाकर देखें। ‘नहीं’ वाले प्रश्न में वह विकल्प चुनें जो पद में है ही नहीं। दरसण = वेतन, सुमरण = खर्च, भाव भगती = जागीर, यह क्रम याद रखें। ‘मूल भाव’ वाले प्रश्न में पूरे पद का भाव देखें, किसी एक पंक्ति का नहीं। |
| कथन-कारण प्रश्न | कथन (A) में मीरा के बारे में कोई बात (जैसे ‘मीरा को विश्वास है कि कृष्ण उनका कष्ट दूर करेंगे’) और कारण (R) में उसका आधार (जैसे ‘कृष्ण ने पहले भी भक्तों की रक्षा की है’) दिया जाता है। | पहले A और R को अलग-अलग पद से जाँचें कि सही हैं या गलत। फिर देखें कि क्या R सचमुच A का कारण बताता है। दोनों सही होकर भी R, A की व्याख्या न करे, तो वही विकल्प चुनें। |
| भाव या कारण पूछने वाला लघु उत्तर (25-30 शब्द, 2 अंक) | ‘मीरा श्रीकृष्ण की चाकर क्यों बनना चाहती हैं?’, ‘मीरा ने हरि से पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की?’, ‘अभीष्ट की प्राप्ति के लिए वे सेविका बनने को क्यों तैयार हैं?’ जैसे प्रश्न। | दो स्पष्ट बिंदु लिखें, क्योंकि प्रश्न दो अंक का है। जैसे चाकरी के प्रश्न में: (1) रोज़ दर्शन और लीला-गान का अवसर, (2) दर्शन, स्मरण और भक्ति रूपी तीन लाभ। 30 शब्द से ज़्यादा न लिखें। |
| कर्तव्य-स्मरण और पौराणिक प्रसंग वाले प्रश्न | ‘मीरा अपने आराध्य को उनके कर्तव्य का स्मरण कैसे कराती हैं?’ या ‘पौराणिक पात्रों का उल्लेख किस उद्देश्य से किया गया है?’ | तीनों प्रसंग संक्षेप में लिखें: द्रौपदी का चीर बढ़ाना, भक्त के लिए नरहरि रूप, गजराज की रक्षा। फिर उद्देश्य बताएँ कि इससे मीरा कृष्ण को भक्त-रक्षक होने का कर्तव्य याद दिलाती हैं। पाठ से बाहर की कथाएँ न जोड़ें। |
| रूप-सौंदर्य, भाषा-शैली और काव्य-सौंदर्य | ‘मीरा ने कृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है?’, ‘भाषा शैली पर प्रकाश डालिए’ या किसी पंक्ति के अलंकार/भाव पर MCQ। | रूप-सौंदर्य में मोर-मुकुट, पीतांबर, वैजंती माला, गाय चराना और मुरली लिखें। भाषा में राजस्थानी-ब्रज-गुजराती मिश्रण, गेयता, अनुप्रास और रूपक का एक-एक उदाहरण दें। |
| मूल्य-आधारित / दक्षता प्रश्न | ‘मीरा की भक्ति से आज के विद्यार्थी क्या सीख सकते हैं?’ या ‘धन की जगह दर्शन-भक्ति को महत्त्व देना कितना उचित है?’ | पहले पद से एक आधार लें (जैसे समर्पण, विश्वास, सादगी), फिर उसे अपने जीवन से जोड़ें। अपना मत स्पष्ट रखें और उसके पक्ष में पद की एक बात अवश्य लिखें। |
Tricks to remember मीरा – पद
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
पहले पद के तीन उद्धार: 'द-न-ग'
क्रम याद रखिए: द = द्रौपदी (चीर बढ़ाया), न = नरहरि (भक्त के लिए रूप धरा), ग = गजराज (डूबते हाथी को बचाया)। वाक्य बनाइए: 'दया, नरमी, गरिमा' — तीनों से प्रभु ने भक्तों को बचाया।
Use it when: पहले पद के प्रसंग वाले MCQ और 'कर्तव्य कैसे याद दिलाती हैं' जैसे 2 अंक के प्रश्न में।
चाकरी के तीन लाभ: 'दरसण वेतन, सुमरण खर्च, भक्ति जागीर'
नौकरी में तीन चीज़ें मिलती हैं: वेतन, जेब-खर्च, संपत्ति। मीरा की नौकरी में: दर्शन = वेतन जैसा लाभ, सुमरण = खरची, भाव-भक्ति = जागीरी। तीनों मिलकर 'तीनूं बाताँ सरसी'।
Use it when: 'खरची' और 'जागीरी' के अर्थ वाले MCQ और 'चाकरी क्यों' वाले प्रश्न में।
कृष्ण का रूप: 'मो-पी-वै-धे-मु'
मो = मोर मुकुट, पी = पीतांबर, वै = वैजंती माला, धे = धेनु चराना, मु = मुरली। ऊपर से नीचे सोचिए: सिर पर मुकुट, तन पर पीतांबर, गले में माला, हाथ में मुरली, साथ में गाएँ।
Use it when: रूप-सौंदर्य और सगुण भक्ति वाले प्रश्न में।
दूसरे पद का क्रम: 'सेवा → सौंदर्य → सपना → बेचैनी'
सेवा (चाकर, बाग, लीला-गान, तीन लाभ) → सौंदर्य (मोर मुकुट, मुरली) → सपना (ऊँचे महल, बारी, कुसुंबी साड़ी) → बेचैनी (आधी रात, यमुना तीर, 'अधीराँ')।
Use it when: काव्यांश किस भाग का है, यह पहचानने और पंक्तियों का क्रम याद रखने में।
दोनों पद, दो भाव
पद 1 = 'हरो' (पीड़ा हरने की विनती, दैन्य भाव)। पद 2 = 'राखो' (चाकर रखने की विनती, माधुर्य और दास्य भाव)। हरो और राखो — दोनों विनतियाँ हैं।
Use it when: दोनों पदों के प्रसंग आपस में न मिलाने के लिए।
मीरा – पद: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: दूसरा पद: चाकरी की चाह और उसके तीन लाभ
स्याम म्हाने चाकर राखो जी,
गिरधारी लाला म्हाँने चाकर राखोजी।
चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ।
बिन्दरावन री कुंज गली में, गोविन्द लीला गास्यूँ।
चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।
(1) · 1 mark · MCQ
मीरा बाग लगाने का काम किस रूप में करना चाहती हैं?
(क) श्रीकृष्ण की सेविका (चाकर) बनकर
(ख) वृंदावन की रानी बनकर
(ग) किसी जागीर की स्वामिनी बनकर
(घ) एक साधारण यात्री बनकर(2) · 1 mark · MCQ
काव्यांश के अनुसार 'बिन्दरावन री कुंज गली में' मीरा क्या करना चाहती हैं?
(क) गाएँ चराना
(ख) गोविंद की लीलाओं का गान करना
(ग) ऊँचे महल बनवाना
(घ) यमुना के किनारे बैठना(3) · 1 mark · MCQ
पाठ के शब्दार्थ के अनुसार 'जागीरी' शब्द का अर्थ है:
(क) रात भर जागना
(ख) नौकरी का वेतन
(ग) जागीर या साम्राज्य
(घ) रोज़ का खर्च(4) · 1 mark · Assertion-reason
निम्नलिखित कथन और कारण को पढ़कर सही विकल्प चुनिए:
कथन (A): मीरा को चाकरी के बदले सांसारिक धन-दौलत की कोई इच्छा नहीं है।
कारण (R): वे खर्च के रूप में प्रभु का स्मरण और जागीर के रूप में भाव-भक्ति पाना चाहती हैं।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।(5) · 1 mark · MCQ
इस काव्यांश का मूल भाव कौन-सा है?
(क) राजसी सुख-सुविधाओं की कामना
(ख) दास्य भाव से प्रभु के सान्निध्य और दर्शन की चाह
(ग) प्रभु को उलाहना देकर उनसे रूठना
(घ) वृंदावन की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन
Show the answersAnswers
- (क) श्रीकृष्ण की सेविका (चाकर) बनकर
- (ख) गोविंद की लीलाओं का गान करना
- (ग) जागीर या साम्राज्य
- (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
- (ख) दास्य भाव से प्रभु के सान्निध्य और दर्शन की चाह
Extract 2: दूसरा पद: कृष्ण का रूप और दर्शन की व्याकुलता
मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजन्ती माला।
बिन्दरावन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला।
ऊँचा ऊँचा महल बणावं बिच बिच राखूँ बारी।
साँवरिया रा दरसण पास्यूँ, पहर कुसुम्बी साड़ी।
आधी रात प्रभु दरसण, दीज्यो जमनाजी रे तीरां।
मीराँ रा प्रभु गिरधर नागर, हिवड़ो घणो अधीराँ॥
(1) · 1 mark · MCQ
काव्यांश में श्रीकृष्ण के किस रूप का वर्णन हुआ है?
(क) निर्गुण, निराकार ब्रह्म का
(ख) मोर-मुकुट, पीतांबर और वैजंती माला धारण किए सगुण रूप का
(ग) निर्मोही परदेशी जोगी का
(घ) भक्त के लिए धारण किए नरहरि रूप का(2) · 1 mark · MCQ
मीरा साँवरिया के दर्शन किस वेश में करना चाहती हैं?
(क) पीला वस्त्र पहनकर
(ख) जोगिन का वेश धारण करके
(ग) कुसुंबी साड़ी पहनकर
(घ) वैजंती माला पहनकर(3) · 1 mark · MCQ
मीरा प्रभु से कब और कहाँ दर्शन देने की विनती करती हैं?
(क) आधी रात को, यमुना के किनारे
(ख) सुबह-सुबह, कुंज गली में
(ग) संध्या समय, महल की खिड़की पर
(घ) दोपहर को, बाग में(4) · 1 mark · MCQ
'मोहन मुरली वाला' और 'ऊँचा ऊँचा' में क्रमशः कौन-से अलंकार हैं?
(क) अनुप्रास और पुनरुक्ति प्रकाश
(ख) उपमा और रूपक
(ग) यमक और श्लेष
(घ) रूपक और उत्प्रेक्षा(5) · 1 mark · MCQ
'हिवड़ो घणो अधीराँ' से मीरा की कौन-सी मनोदशा प्रकट होती है?
(क) पूर्ण संतोष
(ख) प्रभु-दर्शन के लिए तीव्र व्याकुलता
(ग) प्रभु पर क्रोध
(घ) संसार का भय
Show the answersAnswers
- (ख) मोर-मुकुट, पीतांबर और वैजंती माला धारण किए सगुण रूप का
- (ग) कुसुंबी साड़ी पहनकर
- (क) आधी रात को, यमुना के किनारे
- (क) अनुप्रास और पुनरुक्ति प्रकाश
- (ख) प्रभु-दर्शन के लिए तीव्र व्याकुलता
मीरा – पद: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: पहले पद की विनती और उद्धार-प्रसंग · 2 marks · Short answerBoard level
पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण से क्या विनती करती हैं? इसके लिए वे किन प्रसंगों को याद करती हैं? (लगभग 25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- विनती: 'हरो म्हारी भीर' अर्थात मेरी पीड़ा हर लो।
- प्रसंग 1: द्रौपदी की लाज बचाने के लिए चीर बढ़ाया।
- प्रसंग 2: भक्त के लिए नरहरि रूप धारण किया।
- प्रसंग 3: डूबते गजराज को बचाया, हाथी की पीड़ा दूर की।
Answer: मीरा श्रीकृष्ण से पीड़ा हरने की विनती करती हैं। याद दिलाती हैं कि प्रभु ने द्रौपदी की लाज बचाई, भक्त के लिए नरहरि रूप धरा और डूबते गजराज को बचाया।
Example 2: 'दासी मीराँ' और दैन्य भाव · 2 marks · Short answerHarder board level
'दासी मीराँ लाल गिरधर' कहकर मीरा स्वयं को 'दासी' क्यों कहती हैं? इससे उनकी भक्ति के किस भाव का पता चलता है? (लगभग 25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- 'दासी' शब्द से दीनता और पूर्ण समर्पण प्रकट होता है।
- भक्त स्वयं को छोटा और प्रभु को सर्वसमर्थ मानता है।
- यह दैन्य भाव की भक्ति है (कवयित्री-परिचय में मीरा की भक्ति दैन्य और माधुर्यभाव की बताई गई है)।
- भक्त का सहारा केवल प्रभु की कृपा है।
Answer: मीरा स्वयं को 'दासी' कहकर प्रभु के सामने अपनी दीनता और पूर्ण समर्पण प्रकट करती हैं। इससे उनकी दैन्य भाव की भक्ति झलकती है, जो केवल प्रभु-कृपा पर टिकी है।
Example 3: चाकरी के तीन लाभ: 'तीनूं बाताँ सरसी' · 2 marks · Short answerHarder board level
मीरा श्रीकृष्ण की चाकरी से कौन-सी तीन वस्तुएँ पाने की बात कहती हैं? 'तीनूं बाताँ सरसी' का भाव स्पष्ट कीजिए। (लगभग 25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पहला लाभ: नित्य दर्शन ('चाकरी में दरसण पास्यूँ')।
- दूसरा लाभ: खर्च (खरची) के रूप में प्रभु का स्मरण।
- तीसरा लाभ: जागीर के रूप में भाव-भक्ति।
- 'तीनूं बाताँ सरसी': एक ही सेवा से तीनों लाभ सिद्ध हो जाएँगे।
Answer: चाकरी से मीरा को दर्शन, खर्च के रूप में स्मरण और जागीर के रूप में भाव-भक्ति मिलेगी। 'तीनूं बाताँ सरसी' अर्थात एक ही सेवा से तीनों लाभ सध जाएँगे।
Example 4: कृष्ण के सगुण रूप का माधुर्य · 2 marks · Short answerHarder board level
मीरा के दूसरे पद में श्रीकृष्ण के वर्णन से सगुण रूप का माधुर्य किस प्रकार झलकता है? (लगभग 25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- वेशभूषा: मोर-मुकुट, पीतांबर, गले में वैजंती माला।
- कर्म: वृंदावन में धेनु (गाएँ) चराना।
- 'मोहन मुरली वाला': मनमोहक, मुरलीधारी रूप।
- यह सगुण, साकार रूप है जिससे माधुर्य भाव जागता है (व्याख्या)।
Answer: मीरा के कृष्ण मोर-मुकुट, पीतांबर और वैजंती माला धारण करते हैं। वे वृंदावन में गाएँ चराने वाले मुरलीधारी मोहन हैं। यह सगुण, साकार और मनमोहक रूप माधुर्य भाव जगाता है।
Example 5: भक्ति की 'जागीरी' और आज का जीवन · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए कोई व्यक्ति केवल पद, धन और प्रसिद्धि को ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है। मीरा के दूसरे पद के आधार पर आप उसे क्या संदेश देंगे? (लगभग 25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- मीरा सांसारिक संपत्ति नहीं, भाव-भक्ति को अपनी 'जागीरी' मानती हैं।
- उनके लिए प्रभु का स्मरण ही 'खरची' (खर्च) है।
- पद से तुलना: सच्चा सुख मन के प्रेम और संतोष में है।
- संदेश: केवल धन-पद के पीछे न भागें, मन की शांति भी कमाएँ।
Answer: मीरा सांसारिक संपत्ति नहीं, भक्ति की 'जागीरी' चाहती हैं। उनके लिए प्रभु-स्मरण ही खर्च है। ऐसे व्यक्ति को समझाएँगे कि मन की शांति और सच्चा प्रेम ही असली धन है।
Example 6: संकट में विश्वास: पहले पद की सीख · 2 marks · Short answerHOTS / competency
पहले पद में मीरा का विश्वास कठिन परिस्थितियों में आज के विद्यार्थी को क्या सीख देता है? अपने जीवन से जोड़कर लिखिए। (लगभग 25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- मीरा को पूरा भरोसा है कि प्रभु उनकी पीड़ा हरेंगे।
- आधार: प्रभु ने पहले द्रौपदी और गजराज की रक्षा की थी।
- सीख: संकट में आशा और धैर्य न छोड़ें।
- अपने जीवन से जोड़: परीक्षा या कठिन समय में आत्मविश्वास बनाए रखें।
Answer: मीरा को विश्वास है कि जिस प्रभु ने द्रौपदी और गजराज को बचाया, वे उनकी पीड़ा भी हरेंगे। परीक्षा या संकट में हम भी आशा और आत्मविश्वास न छोड़ें।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण को उनका कर्तव्य किस प्रकार याद दिलाती हैं? (लगभग 25-30 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| पौराणिक उदाहरण देना: द्रौपदी की लाज बचाना, भक्त के लिए नरहरि रूप धारण करना, डूबते गजराज को बचाना (कम से कम दो उदाहरण)। | 1 |
| निष्कर्ष: जब प्रभु ने पहले भक्तों की पीड़ा हरी है, तो अपनी 'दासी' मीरा की पीड़ा हरना भी उनका कर्तव्य है। | 1 |
पठित काव्यांश (दूसरा पद, 'मोर मुगट पीताम्बर सौहे' से 'हिवड़ो घणो अधीराँ' तक) पर आधारित पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, कथन-कारण सहित (1×5) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रश्न (i): कृष्ण के रूप-वर्णन पर सही विकल्प | 1 |
| प्रश्न (ii): दर्शन के समय मीरा के वेश (कुसुंबी साड़ी) पर सही विकल्प | 1 |
| प्रश्न (iii): दर्शन का समय और स्थान (आधी रात, यमुना-तट) पर सही विकल्प | 1 |
| प्रश्न (iv): अलंकार (अनुप्रास, पुनरुक्ति प्रकाश) पर सही विकल्प | 1 |
| प्रश्न (v): कथन-कारण या मूल भाव (दर्शन की व्याकुलता) पर सही विकल्प | 1 |
Where students lose marks in मीरा – पद
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: गजराज के प्रसंग में गलत तथ्य लिखना
पाठ की टिप्पणी ध्यान से न पढ़ना और अपनी कल्पना से कहानी जोड़ देना।
Wrong working
श्रीकृष्ण ने गजराज को शेर से बचाया और युद्ध में जीत दिलाई।
Right working
श्रीकृष्ण ने डूबते गजराज को बचाया; हाथी का कष्ट दूर करने के लिए मगरमच्छ को मारा।
Do this: केवल वही लिखिए जो पद और शब्दार्थ-टिप्पणी में दिया है।
Usually costs: तथ्य गलत होने पर उस बिंदु का 1 अंक कट सकता है।
Mistake: 'खरची' का अर्थ उलटा समझना
'खरची' को 'खर्च कर देना' मान लेना।
Wrong working
मीरा अपना सारा स्मरण खर्च कर देंगी।
Right working
चाकरी में प्रभु का स्मरण ही मीरा का खर्च (जेब-खर्च) होगा।
Do this: याद रखिए: 'सुमरण पास्यूँ खरची' = स्मरण को खर्च के रूप में पाऊँगी।
Usually costs: MCQ में पूरा 1 अंक; 2 अंक के उत्तर में 1 अंक।
Mistake: प्रश्न का उत्तर देने के बजाय पूरा भावार्थ लिख देना
'क्यों' वाले प्रश्न में कारण छोड़कर पद की हर पंक्ति समझाने लगना।
Wrong working
मीरा कहती हैं मुझे चाकर रखो, मैं बाग लगाऊँगी, मोर मुकुट पहने कृष्ण गाएँ चराते हैं, महल बनाऊँगी...
Right working
मीरा चाकर बनना चाहती हैं ताकि नित्य दर्शन, स्मरण रूपी खर्च और भाव-भक्ति रूपी जागीर पा सकें।
Do this: पहले वाक्य में सीधा कारण लिखिए, फिर एक प्रमाण दीजिए।
Usually costs: कारण न आने पर 2 में से 1 या पूरे 2 अंक।
Mistake: 25-30 शब्दों की सीमा से बहुत लंबा उत्तर
ज़्यादा लिखने से ज़्यादा अंक मिलने का भ्रम।
Wrong working
60-70 शब्दों में मीरा का जीवन, वृंदावन जाना और दोनों पदों की कहानी लिख देना।
Right working
दो-तीन वाक्यों में मुख्य बिंदु और एक पंक्ति का प्रमाण।
Do this: उत्तर लिखने से पहले दो उत्तर-बिंदु तय कीजिए और वहीं रुकिए।
Usually costs: अतिरिक्त अंक नहीं मिलते; समय नष्ट होता है और अन्य प्रश्न अधूरे रह सकते हैं।
Mistake: दोनों पदों के प्रसंग आपस में मिला देना
पढ़ते समय पदों को अलग-अलग न समझना।
Wrong working
दूसरे पद में मीरा द्रौपदी की लाज की याद दिलाकर चाकरी माँगती हैं।
Right working
द्रौपदी, नरहरि और गजराज के प्रसंग पहले पद में हैं; चाकरी, रूप-वर्णन और कुसुंबी साड़ी दूसरे पद में।
Do this: 'पद 1 = हरो, पद 2 = राखो' वाला सूत्र याद रखिए।
Usually costs: तथ्य गलत होने पर 1 अंक।
Mistake: कथन-कारण में कारण की 'व्याख्या' न जाँचना
दोनों कथन सही देखकर बिना सोचे विकल्प (ख) या (क) चुन लेना।
Wrong working
कथन और कारण दोनों सही लगे, इसलिए (ख) चुन लिया।
Right working
पहले देखा कि क्या कारण (R), कथन (A) का 'क्यों' बताता है; बताता है, इसलिए (क)।
Do this: कथन के बाद 'क्योंकि' लगाकर कारण पढ़िए; वाक्य ठीक बैठे तो (क)।
Usually costs: पूरा 1 अंक।
मीरा – पद: previous year questions
- Course A: Asked in 0 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 0 marks per paper; 0 questions in all, counting OR alternatives. In 1 of 4 sample papers.
- Course B: Asked in 7 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 1.9 marks per paper; 7 questions in all, counting OR alternatives. In 1 of 4 sample papers.
Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.
Solved board questions from मीरा – पद
Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.
2026 Course B, set 4/1/1, Q9 · 5 marks · Reading comprehensionCompetency-based
निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कर लिखिए : 5×1 = 5
स्याम म्हाने चाकर राखो जी,
गिरधारी लाला म्हाने चाकर राखो जी।
चाकर रहसूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ।
बिन्दरावन री कुंज गली में, गोविन्द लीला गास्यूँ।
चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।
मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजन्ती माला।
बिन्दरावन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला।
ऊँचा ऊँचा महल बणावं बिच बिच राखूँ बारी।
साँवरिया रा दरसण पास्यूँ पहर कुसुम्बी साड़ी।
- (i)1 mark
'मीरा श्रीकृष्ण की चाकरी करना चाहती है'- इस कथन के पक्ष में उचित कारण है :
- (A)उनका नाम-स्मरण करना चाहती है।
- (B)उनके दैनिक कार्यों में हाथ बँटाना चाहती है।
- (C)उनके दर्शनों का लाभ उठाना चाहती है।
- (D)उनके लिए बाग-बगीचे लगाना चाहती है।
- (ii)1 mark
काव्यांश के आधार पर प्रभु सेवा में समर्पित मीरा सामंजस्य स्थापित करती हैं :
- (A)त्याग, भक्ति और विनय का
- (B)दर्शन, स्मरण और भक्ति का
- (C)प्रेम, उपालंभ और दर्शन का
- (D)सम्मान, प्रेम और भक्ति का
- (iii)1 mark
श्रीकृष्ण का सामीप्य पाने के लिए मीरा द्वारा कौन-सा कार्य नहीं किए जाने की बात कही गई ?
- (A)कृष्ण का गुणगान करते हुए धेनु चराना
- (B)कृष्ण की चाकरी करने को तैयार रहना
- (C)उनके लिए ऊँचे-ऊँचे महल बनवाना
- (D)उनके पसंदीदा वस्त्र धारण करना
- (iv)1 mark
श्रीकृष्ण की चाकरी में मीरा को जेब खर्च के रूप में क्या प्राप्त होगा ?
- (A)कृष्ण के दर्शन
- (B)नाम-स्मरण
- (C)भाव रूपी भक्ति
- (D)वृंदावन में रहना
- (v)1 mark
दिए गए काव्यांश के मूल भाव को व्यक्त करने वाला/वाले कथन है/हैं :
(I) श्रीकृष्ण के भक्तवत्सल रूप का वर्णन किया गया है।
(II) मीरा ने श्रीकृष्ण से अपनी सहायता करने का आग्रह किया है।
(III) श्रीकृष्ण के सान्निध्य के लिए मीरा उनकी सेविका बनने के लिए भी तैयार है।
(IV) श्रीकृष्ण के रूप सौंदर्य का वर्णन किया गया है।- (A)(I) और (III) सही हैं।
- (B)केवल (III) सही है।
- (C)(I) और (II) सही हैं।
- (D)(III) और (IV) सही हैं।
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(i) 'चाकर रहसूँ ... नित उठ दरसण पास्यूँ' – मीरा चाकरी इसलिए करना चाहती हैं कि उन्हें प्रतिदिन श्रीकृष्ण के दर्शन मिलें। उत्तर (C) उनके दर्शनों का लाभ उठाना चाहती है।
- 1 mark
(ii) 'चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची। भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी' – चाकरी से दर्शन, स्मरण और भक्ति तीनों का सामंजस्य बनता है। उत्तर (B)।
- 1 mark
(iii) मीरा बाग लगाने, लीला गाने, ऊँचे महल बनवाने और कुसुंबी साड़ी पहनने की बात कहती हैं। धेनु चराने का कार्य श्रीकृष्ण करते हैं ('बिन्दरावन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला'), मीरा नहीं। उत्तर (A) कृष्ण का गुणगान करते हुए धेनु चराना।
- 1 mark
(iv) 'सुमरण पास्यूँ खरची' – खरची अर्थात् जेब खर्च के रूप में नाम-स्मरण मिलेगा। उत्तर (B) नाम-स्मरण।
- 1 mark
(v) काव्यांश का मूल भाव है कि श्रीकृष्ण के सान्निध्य के लिए मीरा उनकी सेविका बनने को भी तैयार हैं। उत्तर (B) केवल (III) सही है। (अंक-योजना के अनुसार (D) (III) और (IV) पर भी अंक दिए जाएँगे, क्योंकि पद में कृष्ण के रूप-सौंदर्य का भी वर्णन है।)
Answer: (i) C; (ii) B; (iii) A; (iv) B; (v) B (अथवा D)
Where the marks are
- (i) (C) उनके दर्शनों का लाभ उठाना चाहती है – 1 अंक
- (ii) (B) दर्शन, स्मरण और भक्ति का – 1 अंक
- (iii) (A) कृष्ण का गुणगान करते हुए धेनु चराना – 1 अंक
- (iv) (B) नाम-स्मरण – 1 अंक
- (v) (B) केवल (III) सही है अथवा (D) (III) और (IV) सही हैं – 1 अंक
- कुल (5 marks)
2025 Course B, set 4/2/1, Q10 · 6 marks · Short answer
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25–30 शब्दों में लिखिए : (3×2=6)
- (क)2 marks
'मीराबाई' के पद के आधार पर लिखिए कि अभीष्ट की प्राप्ति के लिए वह सेविका बनने के लिए भी क्यों तैयार है।
- (ख)2 marks
'मनुष्यता' कविता के संदर्भ में लिखिए कि पशु-प्रवृत्ति क्या है । पशु-प्रवृत्ति मानव के लिए निंदनीय क्यों है ?
- (ग)2 marks
तोप अपना महत्त्व किस रूप में बताती है ? 'तोप' कविता के आधार पर लिखिए।
- (घ)2 marks
'कर चले हम फ़िदा' कविता के आधार पर लिखिए कि युवावस्था की सार्थकता किसमें है और क्यों ?
Try it first, then show our solutionSolution
- 2 marks
(क) मीरा श्रीकृष्ण का सान्निध्य पाने के लिए कोई भी कार्य करने को तत्पर हैं। सेविका बनकर वे नित्य दर्शन, स्मरण और भक्ति रूपी जागीर का लाभ पाना चाहती हैं।
- 2 marks
(ख) अपने ही विषय में सोचना और केवल स्वार्थ में जीना पशु-प्रवृत्ति है। यह मनुष्य के लिए निंदनीय है, क्योंकि मनुष्य की पहचान उदारता और परोपकार जैसे आदर्शों से होती है, जो पशु-प्रवृत्ति के विपरीत हैं।
- 2 marks
(ग) तोप अपने समय में बहुत शक्तिशाली रही है। उसने अनेक बड़े सूरमाओं को मौत के घाट उतारा, पर अंततः वह भी शांत होकर निष्क्रिय हो गई।
- 2 marks
(घ) युवावस्था की सार्थकता देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने में है। शरीर नश्वर है और आत्मा शाश्वत, इसलिए देशप्रेम और बलिदान की परंपरा में जीवन लगाना ही सार्थक है।
Answer: (क) कृष्ण का सान्निध्य पाने हेतु; (ख) स्वार्थ में जीना पशु-प्रवृत्ति, परोपकार के विरुद्ध; (ग) शक्तिशाली, सूरमाओं को मारने वाली; (घ) देश-रक्षा में बलिदान
Where the marks are
- किन्हीं तीन उपभागों के उत्तर, प्रत्येक 2 अंक (कुल 6 अंक)
- प्रत्येक उत्तर में दो बिंदु (1+1)
Every मीरा – पद question, by year
Course A (1 questions, sample papers included)
- For 2024
Sample paper 2023-24: Q12 (6 marks, solved)
Course B (8 questions, sample papers included)
Practice questions on मीरा – पद
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerBoard level
दूसरे पद के आधार पर लिखिए कि मीरा सेविका बनकर कौन-से काम करना चाहती हैं और प्रतिदिन क्या पाना चाहती हैं। (लगभग 25-30 शब्द)
Hint
'बाग लगास्यूँ', 'लीला गास्यूँ' और 'नित उठ दरसण पास्यूँ' वाली पंक्तियाँ देखिए।
Answer
उत्तर-बिंदु: बाग लगाना; वृंदावन की कुंज गलियों में गोविंद की लीला का गान; नित्य उठकर दर्शन पाना।
आदर्श उत्तर: मीरा बाग लगाना और वृंदावन की कुंज गलियों में गोविंद की लीलाओं का गान करना चाहती हैं। सेविका बनकर वे नित्य उठकर प्रभु के दर्शन पाना चाहती हैं।
Q2 · 1 mark · MCQBoard level
पाठ की टिप्पणी के अनुसार 'काटी कुण्जर पीर' का आशय है:
(क) श्रीकृष्ण ने हाथी का कष्ट दूर करने के लिए मगरमच्छ को मारा
(ख) श्रीकृष्ण ने हाथी को युद्ध में हराया
(ग) श्रीकृष्ण ने द्रौपदी का चीर बढ़ाया
(घ) श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गाएँ चराईंHint
शब्दार्थ और टिप्पणियों में 'काटी कुंजर पीर' की व्याख्या पढ़िए।
Answer
(क) श्रीकृष्ण ने हाथी का कष्ट दूर करने के लिए मगरमच्छ को मारा
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
'हिवड़ो घणो अधीराँ' कहना मीरा की किस मनोदशा को दिखाता है? पद के अंतिम भाग के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (लगभग 25-30 शब्द)
Hint
'अधीराँ' का शब्दार्थ और 'आधी रात' वाली विनती को साथ जोड़िए।
Answer
उत्तर-बिंदु: अर्थ: हृदय बहुत व्याकुल है; आधी रात यमुना-तट पर दर्शन की विनती; प्रभु-मिलन की तीव्र बेचैनी।
आदर्श उत्तर: 'हिवड़ो घणो अधीराँ' का अर्थ है हृदय बहुत व्याकुल है। आधी रात यमुना-तट पर दर्शन की विनती बताती है कि मीरा प्रभु-मिलन के लिए अत्यंत बेचैन हैं।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
मीरा ऊँचे महलों के बीच-बीच खिड़कियाँ (बारी) क्यों रखना चाहती हैं? इससे उनके मन के बारे में क्या पता चलता है? (लगभग 25-30 शब्द)
Hint
'बारी' वाली पंक्ति के ठीक बाद की पंक्ति पढ़िए।
Answer
उत्तर-बिंदु: महल में बीच-बीच खिड़कियाँ; कुसुंबी साड़ी पहनकर साँवरिया के दर्शन; महल वैभव के लिए नहीं, दर्शन के लिए (व्याख्या)।
आदर्श उत्तर: मीरा ऊँचे महल बनाकर बीच-बीच में खिड़कियाँ रखना चाहती हैं ताकि कुसुंबी साड़ी पहनकर साँवरिया के दर्शन कर सकें। महल वैभव के लिए नहीं, केवल प्रभु-दर्शन के लिए है।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level
मीरा के पदों की भाषा में कई बोलियों का मेल है। पाठ के आधार पर इसे स्पष्ट कीजिए और पद से शब्दों के उदाहरण दीजिए। (लगभग 25-30 शब्द)
Hint
कवयित्री-परिचय में भाषा के बारे में क्या लिखा है, पहले वह याद कीजिए।
Answer
उत्तर-बिंदु: राजस्थानी, ब्रज और गुजराती का मिश्रण; उदाहरण: 'म्हाने', 'री', 'घणो'; भाषा सरल, गेय, भावपूर्ण।
आदर्श उत्तर: मीरा की भाषा में राजस्थानी, ब्रज और गुजराती का मिश्रण है। 'म्हाने', 'री', 'घणो' जैसे शब्द इसका प्रमाण हैं। भाषा सरल, गेय और भावपूर्ण है।
Q6 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level
निम्नलिखित कथन और कारण को पढ़कर सही विकल्प चुनिए:
कथन (A): पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण से अपने कष्ट दूर करने की प्रार्थना करती हैं।
कारण (R): मीरा को संदेह है कि श्रीकृष्ण उनकी सहायता करेंगे।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।Hint
मीरा द्रौपदी और गजराज के उदाहरण संदेह से देती हैं या भरोसे से?
Answer
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है। मीरा को संदेह नहीं, पूर्ण विश्वास है; इसीलिए वे पुराने उद्धार-प्रसंग याद दिलाती हैं।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपकी कक्षा के एक मित्र का मानना है कि ईश्वर से सहायता माँगना कमज़ोरी है। मीरा के पहले पद के आधार पर अपना मत तर्क सहित लिखिए। (लगभग 25-30 शब्द)
Hint
सोचिए, मीरा की प्रार्थना में डर है या भरोसा, और क्या केवल प्रार्थना काफ़ी है।
Answer
उत्तर-बिंदु: यह कमज़ोरी नहीं, विश्वास है; मीरा पौराणिक उदाहरणों से भरोसा दृढ़ करती हैं; प्रार्थना धैर्य देती है; साथ में प्रयास ज़रूरी।
आदर्श उत्तर: मेरे विचार में यह कमज़ोरी नहीं, विश्वास है। मीरा पौराणिक उदाहरणों से अपना भरोसा दृढ़ करती हैं। ऐसी प्रार्थना धैर्य देती है, पर प्रयास भी ज़रूरी है।
Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
संसार में सेवक का स्थान छोटा माना जाता है, फिर भी मीरा 'चाकर' बनना अपना सौभाग्य मानती हैं। इस सोच का मूल्यांकन कीजिए। (लगभग 25-30 शब्द)
Hint
चाकरी से मीरा को क्या मिलता है और प्रेम में पद का कितना महत्त्व है, यह जोड़िए।
Answer
उत्तर-बिंदु: चाकरी = प्रभु के पास रहना और नित्य दर्शन; प्रेम में छोटा-बड़ा पद महत्त्वहीन; भक्ति ही असली जागीर।
आदर्श उत्तर: मीरा के लिए चाकरी का अर्थ है प्रभु के पास रहना और नित्य दर्शन पाना। प्रेम में पद छोटा-बड़ा नहीं होता; भक्ति ही उनकी असली जागीर है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'हरि आप हरो जन री भीर' में 'भीर' का अर्थ क्या है?Show answer
पीड़ा, कष्ट या दुख।
2.श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की लाज कैसे बचाई?Show answer
चीर को इतना बढ़ा दिया कि दुःशासन का हाथ थक गया।
3.पाठ के शब्दार्थ में 'गजराज' और 'कुंजर' के क्या अर्थ दिए गए हैं?Show answer
गजराज = ऐरावत; कुंजर = हाथी।
4.चाकरी में मीरा को 'खरची' के रूप में क्या मिलेगा?Show answer
प्रभु का स्मरण (सुमरण)।
5.मीरा कौन-सी साड़ी पहनकर साँवरिया के दर्शन करना चाहती हैं?Show answer
कुसुंबी साड़ी।
6.मीरा प्रभु से कब और कहाँ दर्शन देने को कहती हैं?Show answer
आधी रात को, यमुना जी के किनारे।
7.किस पंक्ति में मीरा की व्याकुलता सबसे स्पष्ट है?Show answer
'मीराँ रा प्रभु गिरधर नागर, हिवड़ो घणो अधीराँ॥'
8.कवयित्री-परिचय के अनुसार मीरा की भक्ति किस भाव की है और वे किसकी शिष्या थीं?Show answer
दैन्य और माधुर्यभाव की; वे संत रैदास की शिष्या थीं।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- पहले पद के तीनों उद्धार-प्रसंग क्रम से बता सकते हैं: द्रौपदी, नरहरि, गजराज?
- मीरा पहले पद में स्वयं को 'दासी' क्यों कहती हैं और यह कौन-सा भाव है?
- चाकरी के तीन लाभ (दर्शन, स्मरण रूपी खरची, भाव-भक्ति रूपी जागीरी) बिना देखे लिख सकते हैं?
- 'तीनूं बाताँ सरसी' का भाव एक वाक्य में बता सकते हैं?
- कृष्ण के रूप-वर्णन की पाँच बातें (मोर मुकुट, पीतांबर, वैजंती माला, धेनु, मुरली) याद हैं?
- ऊँचे महल, बारी, कुसुंबी साड़ी, आधी रात और यमुना-तट — ये किस इच्छा से जुड़े हैं?
- मीरा की भाषा में किन बोलियों का मिश्रण है और पद से दो शब्द-उदाहरण क्या हैं?
- 'मोहन मुरली' और 'ऊँचा ऊँचा' में कौन-से अलंकार हैं?
मीरा – पद: frequently asked questions
मीरा के पहले पद का मुख्य भाव क्या है?
पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण से अपनी पीड़ा हरने की विनती करती हैं। वे द्रौपदी की लाज बचाने, भक्त के लिए नरहरि रूप धरने और गजराज को बचाने के उदाहरण देकर उन्हें उनके कर्तव्य की याद दिलाती हैं। इसमें दैन्य भाव और ईश्वर पर अटूट विश्वास है।
मीरा श्रीकृष्ण की चाकर क्यों बनना चाहती हैं?
चाकर बनकर वे रोज़ सुबह कृष्ण के दर्शन कर सकेंगी और वृंदावन की कुंज गलियों में उनकी लीला गा सकेंगी। इस चाकरी में उन्हें दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति रूपी तीन लाभ मिलेंगे, जो उन्हें बहुत प्रिय हैं।
‘सुमरण पास्यूँ खरची’ और ‘भाव भगती जागीरी’ का क्या अर्थ है?
मीरा कहती हैं कि चाकरी के बदले उन्हें स्मरण जेब खर्च के रूप में और भाव-भक्ति जागीर के रूप में मिलेगी। इसमें रूपक अलंकार है। इससे पता चलता है कि मीरा के लिए भक्ति ही सबसे बड़ी संपत्ति है।
मीरा के पदों की भाषा कौन-सी है?
कवयित्री-परिचय के अनुसार मीरा के पदों की भाषा में राजस्थानी, ब्रज और गुजराती का मिश्रण है, और कहीं-कहीं पंजाबी, खड़ी बोली और पूर्वी के प्रयोग भी मिलते हैं। इस पाठ में ‘री’, ‘म्हाने’, ‘पास्यूँ’, ‘हिवड़ो’ जैसे राजस्थानी शब्द दिखते हैं। भाषा सरल और गेय है।
पहले पद में ‘गजराज’ और ‘कुंजर’ का क्या अर्थ है?
NCERT के शब्दार्थ के अनुसार ‘गजराज’ का अर्थ ऐरावत और ‘कुंजर’ का अर्थ हाथी है। ‘काटी कुण्जर पीर’ का अर्थ है कि कृष्ण ने हाथी का कष्ट दूर करने के लिए मगरमच्छ को मारा।
मीरा की भक्ति किस भाव की है?
कवयित्री-परिचय के अनुसार मीरा की भक्ति दैन्य और माधुर्यभाव की है। पहले पद में ‘दासी’ बनकर विनती करना दैन्य भाव है, और दूसरे पद में कृष्ण के रूप पर मुग्ध होकर कुसुम्बी साड़ी पहनकर दर्शन की चाह माधुर्य भाव दिखाती है।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-ब (085), कक्षा 10, 2026-27; NCERT स्पर्श भाग 2 (Reprint 2026-27), पद