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HindiCBSE Class 10 · Chapter 4

निराला की कविताएँ उत्साह और अट नहीं रही है Class 10

Updated 14 October 2026 · Fact-checked

‘उत्साह’ और ‘अट नहीं रही है’ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की दो कविताएँ हैं, जो क्षितिज भाग 2 में हैं। ‘उत्साह’ बादल को संबोधित एक आह्वान गीत है, जिसमें बादल नवजीवन और क्रांति का प्रतीक है। ‘अट नहीं रही है’ फागुन के सौंदर्य का चित्र है। बोर्ड काव्यांश पर पाँच MCQ और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न पूछता है।

What सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह, अट नहीं रही है is about

‘उत्साह’ और ‘अट नहीं रही है’ क्षितिज भाग 2 के काव्य खंड का पाठ 4 हैं। इनके कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ हैं। NCERT के अनुसार छायावादी कवियों में उन्होंने सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग किया। ‘उत्साह’ में कवि बादल से गरजने और दुखी संसार में नया जीवन भरने का आह्वान करता है। ‘अट नहीं रही है’ में कवि फागुन की ऐसी सुंदरता दिखाता है जो कहीं समा नहीं रही।

बोर्ड परीक्षा में काव्य खंड 11 अंक का है। प्रश्न 9 में किसी पठित काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न आते हैं, जिनमें कथन-कारण प्रश्न भी होता है। प्रश्न 10 में चार में से तीन प्रश्न 25-30 शब्दों में करने होते हैं, हर प्रश्न 2 अंक का। इन कविताओं से भाव, प्रतीक, शीर्षक, अलंकार और काव्य-शिल्प पर प्रश्न बन सकते हैं।

In real board papers: Course A, asked in 3 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 0.5 marks per paper; Course B, asked in 1 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 0.2 marks per paper. See the questions

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह, अट नहीं रही है: explanation

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

उत्साह – पहला पद: कवि बादल से कहता है कि तुम गरजो और पूरे आकाश को घेर लो। कवि बादलों को सुंदर, काले और घुँघराले कहता है, जैसे कल्पना ने उन्हें पाला हो। बादल के हृदय में बिजली की चमक है। कवि बादल को ही ‘कवि’ और ‘नवजीवन वाले’ कहकर पुकारता है। वह कहता है कि अपने भीतर वज्र जैसी कठोर शक्ति छिपाकर तुम संसार में नई कविता भर दो। इससे पता चलता है कि कवि बादल से कोमलता नहीं, बल्कि बदलाव लाने वाली शक्ति चाहता है।

उत्साह – दूसरा पद: संसार के सभी लोग गर्मी से व्याकुल और अनमने थे। उनका मन कहीं नहीं टिक रहा था। तभी अनजान दिशा से, अनंत आकाश से बादल आ गए। कवि बादल से कहता है कि तपती हुई धरती को जल से फिर ठंडा कर दो। यहाँ गर्मी को लोगों के दुख और कष्ट का संकेत भी माना जा सकता है। बादल उस दुख को दूर करने वाला है।

उत्साह का केंद्रीय भाव: बादल एक ओर प्यासे, पीड़ित लोगों की इच्छा पूरी करता है। दूसरी ओर वह क्रांति और नए निर्माण की चेतना भी जगाता है। NCERT के अनुसार निराला सामाजिक बदलाव में साहित्य की भूमिका को ‘नवजीवन’ और ‘नूतन कविता’ के रूप में देखते हैं।

अट नहीं रही है: फागुन की चमक इतनी अधिक है कि वह कहीं समा नहीं पा रही। कवि फागुन को ‘तुम’ कहकर संबोधित करता है। फागुन जहाँ साँस लेता है, वहाँ घर-घर भर जाते हैं। इसका अर्थ सुगंध और उल्लास से भर जाना समझा जा सकता है। फागुन मन को आकाश में उड़ने के लिए पंख दे देता है। कवि अपनी आँख हटाना चाहता है, पर वह हटती नहीं। डालियाँ पत्तों से लदी हैं, जो कहीं हरे हैं और कहीं लाल। कहीं हृदय पर हल्की सुगंध वाले फूलों की माला पड़ी हुई लगती है। जगह-जगह सौंदर्य इतना भरा है कि समा नहीं रहा।

अट नहीं रही है का केंद्रीय भाव: NCERT के अनुसार यह कविता फागुन की मादकता को प्रकट करती है। जब मन प्रसन्न हो, तो हर तरफ़ फागुन का ही सौंदर्य और उल्लास दिखाई देता है। मन के भीतर की खुशी बाहर की प्रकृति से मिल जाती है।

Themes and message

बादल: नवजीवन और क्रांति का प्रतीक

‘उत्साह’ में बादल केवल वर्षा करने वाला नहीं है। कवि उसे ‘नवजीवन वाले’ कहता है और उससे ‘वज्र’ छिपाकर नई कविता भरने को कहता है। वज्र कठोरता और भीषण शक्ति का संकेत है। इससे पता चलता है कि बादल पुरानी, जड़ व्यवस्था को तोड़ने वाली क्रांति का प्रतीक है। NCERT भी बताती है कि बादल नए अंकुर के लिए विध्वंस, विप्लव और क्रांति चेतना संभव करता है। इसीलिए कवि बादल से बरसने के स्थान पर पहले गरजने को कहता है, क्योंकि गर्जन जागरण और ललकार का स्वर है।

From the text: “वज्र छिपा, नूतन कविता” और “विद्युत-छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले!”

पीड़ित जन के प्रति सहानुभूति

दूसरे पद में कवि संसार के सभी लोगों को गर्मी से व्याकुल और अनमना दिखाता है। यह गर्मी केवल मौसम की नहीं, जीवन के दुख और शोषण की भी हो सकती है। कवि चाहता है कि बादल तपती धरती को जल से शीतल कर दे। इससे कवि की करुणा दिखती है। NCERT के लेखक-परिचय में भी लिखा है कि निराला की कविता में शोषित, पीड़ित और उपेक्षित जन के प्रति गहरी सहानुभूति मिलती है। बादल यहाँ प्यासे जन की आकांक्षा पूरी करने वाला है।

From the text: “विश्व के निदाघ के सकल जन,” और “तप्त धरा, जल से फिर”

साहित्य और कवि की भूमिका

कवि बादल को ‘कवि’ कहकर पुकारता है और उससे ‘नूतन कविता’ भरने की माँग करता है। इसका अर्थ यह निकलता है कि कवि और कविता भी बादल की तरह समाज में नया जीवन ला सकते हैं। जैसे बादल धरती को हरा-भरा करता है, वैसे ही कविता लोगों के मन में नई चेतना जगाती है। NCERT के अनुसार सामाजिक बदलाव में साहित्य की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है और निराला इसे ‘नवजीवन’ तथा ‘नूतन कविता’ के संदर्भ में देखते हैं।

From the text: बादल को “कवि, नवजीवन वाले!” कहना और “नूतन कविता” भर देने का आह्वान

फागुन का सर्वव्यापक सौंदर्य

‘अट नहीं रही है’ में फागुन की सुंदरता इतनी अधिक है कि वह किसी सीमा में समा नहीं पाती। पेड़ों की डालियाँ हरे और लाल पत्तों से लदी हैं। फूलों की हल्की सुगंध हर ओर है। घर-घर में फागुन का असर दिखता है। ‘पाट-पाट’ यानी जगह-जगह शोभा फैली है। कवि की आँख इस सौंदर्य से हटती ही नहीं। इससे पता चलता है कि प्रकृति का सौंदर्य आँख, नाक और मन, सबको एक साथ बाँध लेता है।

From the text: “पत्तों से लदी डाल” और “पाट-पाट शोभा-श्री”

मन की प्रसन्नता और प्रकृति का मेल

NCERT कहती है कि जब मन प्रसन्न हो, तो हर तरफ़ फागुन का ही सौंदर्य और उल्लास दिखाई पड़ता है। कविता में फागुन मन को आकाश में उड़ने के लिए पंख दे देता है। फूलों की माला बाहर नहीं, ‘उर में’ यानी हृदय पर पड़ी है। इससे पता चलता है कि बाहर की प्रकृति और भीतर का मन एक हो गए हैं। अंतर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से यह मेल छायावाद की विशेषता है।

From the text: “कहीं पड़ी है उर में” और “उड़ने को नभ में तुम”

The speaker and the people in the poem

कवि (वक्ता)

दोनों कविताओं का वक्ता। ‘उत्साह’ में वह बादल का आह्वान करता है और ‘अट नहीं रही है’ में फागुन के सौंदर्य पर मुग्ध है।

  • क्रांति की चेतना वाला: वह बादल से गरजने और वज्र छिपाकर आने को कहता है।
  • करुणामय: गर्मी से व्याकुल लोगों के लिए वह शीतलता माँगता है।
  • प्रकृति-प्रेमी: फागुन की सुंदरता से उसकी आँख हटती नहीं।
  • कल्पनाशील: वह बादल को कवि और फागुन को साँस लेने वाला मानता है।

“बादल, गरजो!” की बार-बार पुकार, “तप्त धरा, जल से फिर” की प्रार्थना और “आँख हटाता हूँ तो” वाली पंक्ति कवि के इन गुणों को दिखाती है।

बादल (‘उत्साह’ में संबोधित)

कविता का संबोधित पात्र। वह वर्षा देने वाला भी है और क्रांति लाने वाला भी।

  • शक्तिशाली: वह पूरे आकाश को घेर लेता है और उसके भीतर वज्र छिपा है।
  • सुंदर: वह ललित, काला और घुँघराला है।
  • नवजीवन देने वाला: वह धरती और जन-जीवन में नई ऊर्जा भरता है।
  • रहस्यमय: वह अज्ञात दिशा और अनंत आकाश से आता है।

“घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!”, “ललित ललित, काले घुँघराले,” और “आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!”

फागुन (‘अट नहीं रही है’ में ‘तुम’)

कविता में ‘तुम’ कहकर संबोधित। फागुन को एक जीवित व्यक्ति की तरह दिखाया गया है (यह व्याख्या कविता के संबोधन से निकलती है)।

  • उदार: वह घर-घर को भर देता है।
  • उल्लास जगाने वाला: वह मन को उड़ने के पंख देता है।
  • अपार सौंदर्य वाला: उसकी आभा कहीं समा नहीं रही।
  • मनमोहक: कवि की आँख उससे हटती नहीं।

“कहीं साँस लेते हो,” “घर-घर भर देते हो,” और “आभा फागुन की तन”

Poetic devices

DeviceExampleEffect
पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार“ललित ललित, काले घुँघराले,” और “विकल विकल, उन्मन थे उन्मन”; ‘अट नहीं रही है’ में “घर-घर”, “पर-पर”, “पाट-पाट”एक ही शब्द के दोहराव से भाव गहरा होता है। बादल की सुंदरता, लोगों की व्याकुलता और फागुन का हर जगह फैलना अधिक प्रभावशाली लगता है।
अनुप्रास अलंकार“घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!”‘घ’ और ‘ग’ वर्ण की आवृत्ति से बादलों के गरजने जैसी ध्वनि बनती है। इसे नाद-सौंदर्य भी कहते हैं।
मानवीकरण अलंकार“कहीं साँस लेते हो,” (फागुन) और बादल को “कवि, नवजीवन वाले!” कहनाफागुन और बादल जीवित व्यक्ति जैसे लगते हैं। इससे प्रकृति कवि के लिए एक साथी बन जाती है और कविता अधिक जीवंत हो जाती है।
उपमा अलंकार“बाल कल्पना के-से पाले,”‘के-से’ से तुलना होती है। बादलों की कोमलता और सुंदरता कल्पना जैसी मोहक लगती है।
संबोधन शैली और प्रतीक“बादल, गरजो!” की बार-बार पुकार; ‘वज्र’ और ‘तप्त धरा’ जैसे प्रतीकसीधी पुकार से कविता आह्वान गीत बनती है। प्रतीक बादल को क्रांति और गर्मी को दुख का अर्थ देते हैं।
तुकांत लय और खड़ी बोली‘अट’, ‘सट’, ‘हट’, ‘पट’ का मेल; “पाट-पाट शोभा-श्री”खड़ी बोली के छोटे, लयपूर्ण शब्द कविता को गेय बनाते हैं। NCERT के अनुसार शब्द-चयन और लय ने कविता को फागुन की तरह सुंदर बना दिया है।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • बादल, गरजो!

    कवि: ‘उत्साह’ की टेक, जो दोनों पदों में बार-बार आती है।

    कवि बरसने के स्थान पर गरजने को कहता है। गर्जन क्रांति, जागरण और उत्साह का प्रतीक है। इसी से शीर्षक ‘उत्साह’ सार्थक बनता है।

  • विद्युत-छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले!

    कवि: पहले पद में बादल का वर्णन।

    बादल को कवि और नवजीवन देने वाला कहा गया है। इससे पता चलता है कि कवि कविता को भी समाज में नया जीवन लाने वाली शक्ति मानता है।

  • वज्र छिपा, नूतन कविता

    कवि: कवि बादल से नई कविता भरने को कहता है।

    ‘वज्र’ कठोर शक्ति और ‘नूतन कविता’ नई चेतना है। यह पंक्ति विध्वंस और नए निर्माण, दोनों को एक साथ दिखाती है।

  • विकल विकल, उन्मन थे उन्मन

    कवि: दूसरे पद में गर्मी से परेशान लोगों का वर्णन।

    लोगों की व्याकुलता और अनमनेपन को दोहराव से गहरा किया गया है। यह पीड़ित जन के प्रति कवि की सहानुभूति दिखाती है।

  • आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!

    कवि: व्याकुल लोगों के बीच बादलों का आना।

    बादल अनंत आकाश से आए हैं। यह आशा के अचानक आने का संकेत है।

  • आभा फागुन की तन

    कवि: ‘अट नहीं रही है’ की आरंभिक पंक्तियाँ।

    फागुन की चमक इतनी है कि वह कहीं समा नहीं रही। पूरी कविता का भाव यही है।

  • आँख हटाता हूँ तो

    कवि: फागुन की सुंदरता देखकर कवि की दशा।

    अगली पंक्ति ‘हट नहीं रही है’ के साथ यह बताती है कि सौंदर्य इतना मोहक है कि कवि चाहकर भी नज़र नहीं हटा पाता।

  • पाट-पाट शोभा-श्री

    कवि: कविता की अंतिम पंक्तियाँ।

    जगह-जगह भरा सौंदर्य समा नहीं रहा। ‘पाट-पाट’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह, अट नहीं रही है in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

बादल: नवजीवन और क्रांति का प्रतीक

मान लीजिए आपके मोहल्ले का पार्क कूड़े से भर गया है। सब शिकायत करते हैं, पर कोई कुछ नहीं करता। एक दिन कक्षा 10 की एक छात्रा ऊँची आवाज़ में सबको बुलाती है और सफ़ाई का अभियान शुरू कर देती है।

इस छात्रा की तुलना 'उत्साह' कविता के गरजते बादल से कीजिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कविता में बादल गरजकर नवजीवन और क्रांति-चेतना लाता है
  2. छात्रा की पुकार = गर्जना, जो सोए लोगों को जगाती है
  3. पुराने का अंत (कूड़ा) और नए का आरंभ (साफ़ पार्क) = विध्वंस से सृजन

Answer: जैसे कवि बादल से गरजकर नवजीवन लाने को कहता है, वैसे छात्रा ने पुकार से सोए लोगों में उत्साह जगाया। पहल कूड़े का अंत और पार्क का नया जीवन है।

Memory hook: जो पुकारकर सोए लोगों को जगाए, वही आज का 'गरजता बादल' है।

पीड़ित जन के प्रति सहानुभूति

कल्पना कीजिए कि मई की तपती दोपहर में आपकी बस एक जगह रुकती है। आप देखते हैं कि सड़क पर काम करने वाले मज़दूर प्यास से बेहाल हैं। कुछ दोस्त अनदेखा करके आगे बढ़ जाते हैं, पर आप अपनी पानी की बोतल उन्हें दे देते हैं।

'विकल विकल, उन्मन थे उन्मन' पंक्ति के आधार पर बताइए कि आपका व्यवहार कविता के किस भाव से मेल खाता है। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कविता में निदाघ (गर्मी) से सब लोग विकल और उन्मन हैं
  2. कवि बादल से तप्त धरा को जल से शीतल करने की प्रार्थना करता है
  3. प्यासे को पानी देना = पीड़ित जन के प्रति वही सहानुभूति

Answer: कविता में गर्मी से बेचैन, अनमने लोगों के लिए कवि बादल से जल बरसाने की प्रार्थना करता है। प्यासे मज़दूरों को पानी देना पीड़ितों के प्रति वैसी ही सहानुभूति है।

Memory hook: प्यासे को पानी देने वाला हाथ, छोटा-सा बादल ही है।

साहित्य और कवि की भूमिका

मान लीजिए आपके विद्यालय में बाल-श्रम पर कविता-पाठ प्रतियोगिता हो रही है। आपकी सहेली कहती है कि कविता से कुछ नहीं बदलता, यह बस मनोरंजन है।

'उत्साह' में बादल को 'कवि' और 'नूतन कविता' भरने वाला कहा गया है। इसके आधार पर सहेली को उत्तर दीजिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. बादल और कवि की समानता: दोनों नवजीवन लाते हैं
  2. कविता मन को झकझोरकर बदलाव की चेतना जगाती है
  3. निष्कर्ष: कविता केवल मनोरंजन नहीं

Answer: निराला बादल को कवि कहते हैं, क्योंकि दोनों नवजीवन लाते हैं। कविता लोगों के मन को झकझोरकर बदलाव की चेतना जगाती है, इसलिए बाल-श्रम पर कविता केवल मनोरंजन नहीं है।

Memory hook: बादल धरती को सींचता है, कविता मन को।

फागुन का सर्वव्यापक सौंदर्य और मन की प्रसन्नता

कल्पना कीजिए कि बोर्ड परीक्षा का आख़िरी पेपर देकर आप घर लौट रहे हैं और होली पास है। रास्ते के वही पेड़, जिन पर रोज़ ध्यान नहीं जाता था, आज फूलों से लदे बहुत सुंदर लग रहे हैं।

'अट नहीं रही है' के आधार पर समझाइए कि आज वही दृश्य इतना सुंदर क्यों लग रहा है। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मन का बोझ उतरा, मन प्रसन्न हुआ
  2. प्रसन्न मन को हर तरफ़ सौंदर्य और उल्लास दिखता है
  3. कवि भी फागुन की आभा से आँख नहीं हटा पाता

Answer: परीक्षा का बोझ उतरने से मन प्रसन्न है, प्रसन्न मन को हर ओर सौंदर्य दिखता है। जैसे कवि फागुन की आभा से आँख नहीं हटा पाता, वैसे मैं मुग्ध हूँ।

Memory hook: मन में फागुन हो, तो बाहर भी फागुन ही दिखता है।

Topics in this chapter

  • उत्साह कविता का भावार्थ और व्याख्याComing soon
  • अट नहीं रही है कविता का भावार्थComing soon
  • उत्साह कविता के प्रश्न-उत्तरComing soon
  • अट नहीं रही है के प्रश्न-उत्तरComing soon
  • निराला का जीवन परिचय और काव्यगत विशेषताएँComing soon
  • उत्साह: बादल का गर्जन-आह्वान और नवजीवन

How the board asks सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह, अट नहीं रही है

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्न (1×5)किसी एक कविता का अंश देकर पाँच प्रश्न: ऋतु या विषय, किसी पंक्ति का भाव, कवि का प्रेम, शब्द का अर्थ (जैसे निदाघ, धाराधर, पट)।काव्यांश को दो बार पढ़ें। हर विकल्प को पंक्ति से मिलाकर देखें। शब्द-संपदा के अर्थ याद रखें, जैसे ‘अट’ = समाना, ‘पाट-पाट’ = जगह-जगह।
कथन-कारण प्रश्नकथन (A) में कविता की कोई पंक्ति या भाव, कारण (R) में उसकी व्याख्या। चार मानक विकल्पों में से चुनना होता है।पहले देखें कि A और R अलग-अलग सही हैं या नहीं। फिर पूछें: क्या R सचमुच A का कारण बताता है? जैसे ‘बादल गरजो’ का कारण क्रांति का आह्वान है, केवल वर्षा नहीं।
भाव और प्रतीक पर 25-30 शब्दों के प्रश्न (2 अंक)बादल किन अर्थों का संकेत करता है, कवि गरजने को क्यों कहता है, कवि की आँख क्यों नहीं हटती।दो स्पष्ट बिंदु लिखें और एक छोटी पंक्ति का प्रमाण दें। शब्द-सीमा 30 से अधिक न हो।
शीर्षक की सार्थकता‘उत्साह’ या ‘अट नहीं रही है’ शीर्षक क्यों उचित है?शीर्षक को कविता के केंद्रीय भाव से जोड़ें। ‘उत्साह’ में बादल की गर्जना और नवजीवन का जोश, ‘अट नहीं रही है’ में फागुन की न समाने वाली आभा।
काव्य-शिल्प और अलंकारकविता की भाषा, शैली, नाद-सौंदर्य या अलंकार पहचानना। MCQ में ‘संबोधन शैली, खड़ी बोली’ जैसे विकल्प।खड़ी बोली, संबोधन शैली, पुनरुक्ति, अनुप्रास, मानवीकरण और तुकांत लय, हर एक का उदाहरण कविता से तैयार रखें।
दोनों कविताओं की तुलना या प्रकृति-चित्रणदोनों कविताओं में प्रकृति के रूप, या छायावाद की विशेषता (मन के भाव और बाहरी प्रकृति का मेल)।‘उत्साह’ में प्रकृति का शक्तिशाली, क्रांतिकारी रूप और ‘अट नहीं रही है’ में कोमल, मोहक रूप बताएँ। दोनों का एक-एक प्रमाण दें।

Tricks to remember सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह, अट नहीं रही है

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • 'उत्साह' = तीन बार 'गरजो'

    'बादल, गरजो!' कविता में तीन बार आता है: शुरू में, बीच में और अंत में। पहले हिस्से में बादल का रूप और 'नूतन कविता'; दूसरे में विकल जन और 'तप्त धरा'।

    Use it when: काव्यांश पहचानने और यह याद रखने में कि कौन-सी पंक्ति किस हिस्से की है।

  • क्रम याद रखें: गगन → कवि → वज्र → जन → घन → धरा

    घेर गगन (आकाश घिरा) → कवि, नवजीवन वाले (बादल का परिचय) → वज्र छिपा, नूतन कविता (शक्ति) → विकल जन (दुख) → अनंत के घन (आगमन) → तप्त धरा शीतल (राहत)।

    Use it when: 'उत्साह' का भावार्थ सही क्रम में लिखने के लिए।

  • अट-सट-हट-पट: चार बार 'नहीं समा रहा'

    'अट नहीं रही', 'सट नहीं रही', 'हट नहीं रही', 'पट नहीं रही': चारों का एक ही भाव है कि फागुन का सौंदर्य कहीं समा नहीं पा रहा, आँख तक उससे हट नहीं पाती।

    Use it when: शीर्षक की सार्थकता और 'सर्वव्यापक सौंदर्य' वाले प्रश्नों में।

  • दो कविताएँ, दो संबोधन

    'उत्साह' में 'ओ बादल' (धाराधर ओ!); 'अट नहीं रही है' में 'तुम' = फागुन। एक में ओज (गर्जना), दूसरे में उल्लास (सुगंध)।

    Use it when: 'तुम' कौन है, और दोनों कविताओं की तुलना वाले प्रश्नों में।

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह, अट नहीं रही है: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: काव्यांश 1: 'उत्साह' – गरजते बादल का रूप

बादल, गरजो!—
घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!
ललित ललित, काले घुँघराले,
बाल कल्पना के-से पाले,
विद्युत-छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले!

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    काव्यांश में 'धाराधर' शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
    (क) नदी
    (ख) पर्वत
    (ग) बादल
    (घ) बिजली

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    कवि बादल को 'कवि' और 'नवजीवन वाले' कहकर किस ओर संकेत करता है?
    (क) बादल कविता लिखना जानता है
    (ख) बादल और कवि, दोनों संसार में नया जीवन और नई चेतना लाते हैं
    (ग) बादल केवल मन बहलाने का साधन है
    (घ) कवि बादलों से डरता है

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    'विद्युत-छबि उर में' का क्या आशय है?
    (क) बादल के हृदय में बिजली की चमक छिपी है
    (ख) कवि के घर में बिजली जल रही है
    (ग) बादल बिजली से डर रहा है
    (घ) धरती पर बिजली गिर रही है

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    'घेर घेर घोर गगन' में कौन-सा अलंकार है?
    (क) उपमा
    (ख) अनुप्रास
    (ग) उत्प्रेक्षा
    (घ) श्लेष

  5. (5) · 1 mark · Assertion-reason

    निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार कीजिए:
    कथन (A): कवि बादल से बरसने के स्थान पर 'गरजो!' कहता है।
    कारण (R): बादल की गर्जना लोगों में उत्साह और क्रांति-चेतना जगाने का प्रतीक है।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

Show the answersAnswers
  1. (ग) बादल
  2. (ख) बादल और कवि, दोनों संसार में नया जीवन और नई चेतना लाते हैं
  3. (क) बादल के हृदय में बिजली की चमक छिपी है
  4. (ख) अनुप्रास ('घ' और 'ग' वर्णों की बार-बार आवृत्ति)
  5. (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

Extract 2: काव्यांश 2: 'अट नहीं रही है' – फागुन की साँस और उड़ान

कहीं साँस लेते हो,
घर-घर भर देते हो,
उड़ने को नभ में तुम
पर-पर कर देते हो,
आँख हटाता हूँ तो
हट नहीं रही है।

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    काव्यांश में 'तुम' संबोधन किसके लिए है?
    (क) बादल
    (ख) फागुन
    (ग) कवि का मित्र
    (घ) सूर्य

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    'घर-घर भर देते हो' पंक्ति से कौन-सा भाव प्रकट होता है?
    (क) फागुन घरों को अनाज से भर देता है
    (ख) फागुन की साँस से घर-घर उल्लास और मादक सुगंध फैल जाती है
    (ग) घरों में पानी भर जाता है
    (घ) लोग अपने घर छोड़ देते हैं

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    'उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो' का आशय है—
    (क) फागुन पक्षियों को पकड़ लेता है
    (ख) फागुन मानो पंख लगाकर मन में आकाश में उड़ने की उमंग जगा देता है
    (ग) तेज़ हवा से पत्ते उड़ जाते हैं
    (घ) आकाश में बादल छा जाते हैं

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    'आँख हटाता हूँ तो हट नहीं रही है' से कवि की कौन-सी मनःस्थिति प्रकट होती है?
    (क) थकान
    (ख) भय
    (ग) सौंदर्य पर मुग्धता
    (घ) क्रोध

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    'कहीं साँस लेते हो' में फागुन को साँस लेते हुए दिखाया गया है। यहाँ कौन-सा अलंकार है?
    (क) उपमा
    (ख) मानवीकरण
    (ग) यमक
    (घ) श्लेष

Show the answersAnswers
  1. (ख) फागुन
  2. (ख) फागुन की साँस से घर-घर उल्लास और मादक सुगंध फैल जाती है
  3. (ख) फागुन मानो पंख लगाकर मन में आकाश में उड़ने की उमंग जगा देता है
  4. (ग) सौंदर्य पर मुग्धता
  5. (ख) मानवीकरण

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह, अट नहीं रही है: board-level solved questions

Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: बादल से कवि की माँगें · 2 marks · Short answerBoard level

'उत्साह' कविता में कवि बादल से क्या-क्या करने का आग्रह करता है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. आकाश को घेरकर गरजने का आग्रह ('घेर घेर घोर गगन', 'बादल, गरजो!')
  2. 'नूतन कविता' और नवजीवन भरने का आग्रह
  3. गर्मी से तपती धरती को जल से शीतल करने का आग्रह ('तप्त धरा, जल से फिर शीतल कर दो')

Answer: कवि बादल से आकाश को घेरकर गरजने, संसार में नूतन कविता और नवजीवन भरने तथा गर्मी से तपती धरती को जल बरसाकर शीतल करने का आह्वान करता है।

Example 2: 'उत्साह' आह्वान गीत क्यों · 2 marks · Short answerHarder board level

'उत्साह' कविता को बादल को संबोधित आह्वान गीत क्यों कहा गया है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कविता में 'बादल, गरजो!' की बार-बार पुकार (आरंभ, बीच और अंत में)
  2. कवि बादल को सीधे संबोधित करता है ('धाराधर ओ!')
  3. उद्देश्य: नवजीवन, नूतन कविता और क्रांति-चेतना जगाना

Answer: 'उत्साह' में कवि बार-बार 'बादल, गरजो!' कहकर बादल को नवजीवन, नूतन कविता तथा क्रांति-चेतना लाने के लिए पुकारता है। इसलिए यह बादल को संबोधित आह्वान गीत है।

Example 3: वज्र और नूतन कविता का मेल · 2 marks · Short answerHarder board level

'वज्र छिपा, नूतन कविता फिर भर दो' पंक्ति में बादल की किन दो शक्तियों का मेल दिखाई देता है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. 'वज्र' (कठोर, भीषण) = विनाशक शक्ति, विप्लव और क्रांति
  2. 'नूतन कविता' = सृजन की शक्ति, नवजीवन
  3. निष्कर्ष: पुराने के विध्वंस से ही नए अंकुर और नवजीवन की संभावना

Answer: इस पंक्ति में बादल की विनाशक और सृजनकारी, दोनों शक्तियाँ हैं। 'वज्र' विप्लव और क्रांति का संकेत है, 'नूतन कविता' नए सृजन का। अर्थात विध्वंस से नवजीवन संभव होता है।

Example 4: 'पाट-पाट शोभा-श्री' का आशय · 2 marks · Short answerHarder board level

'पाट-पाट शोभा-श्री पट नहीं रही है' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. शब्दार्थ: पाट-पाट = जगह-जगह, शोभा-श्री = सौंदर्य से भरपूर, पट = समा नहीं रही
  2. फागुन का सौंदर्य इतना अधिक कि समा नहीं पा रहा
  3. प्रमाण: हरी-लाल पत्तों से लदी डालियाँ, मंद-गंध-पुष्प-माल

Answer: कवि कहता है कि फागुन में जगह-जगह सौंदर्य इतना भर गया है कि वह कहीं समा नहीं पा रहा। हरी-लाल डालियाँ और सुगंधित फूल हर ओर शोभा बिखेर रहे हैं।

Example 5: आज का 'निदाघ' और आज का 'बादल' · 2 marks · Short answerHOTS / competency

'विश्व के निदाघ के सकल जन' पंक्ति को आज के समाज से जोड़िए। आज 'निदाघ' और 'बादल' किसके प्रतीक हो सकते हैं? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कविता में निदाघ = गर्मी, जिससे सब लोग विकल और उन्मन हैं
  2. आज के संदर्भ में निदाघ = समाज के दुख, जैसे गरीबी, अन्याय
  3. बादल = राहत और बदलाव लाने वाला व्यक्ति या विचार (अपना तर्क)

Answer: आज 'निदाघ' गरीबी, बेरोज़गारी और अन्याय जैसे दुखों का प्रतीक हो सकता है। 'बादल' वह उत्साही व्यक्ति या विचार है जो पीड़ितों को राहत दे और समाज में बदलाव लाए।

Example 6: सौंदर्य और मन की प्रसन्नता · 2 marks · Short answerHOTS / competency

क्या प्रकृति का सौंदर्य देखने वाले के मन पर निर्भर करता है? 'अट नहीं रही है' के आधार पर अपना मत दीजिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. स्पष्ट मत (हाँ/नहीं) देना
  2. पाठ का प्रमाण: प्रसन्न मन को फागुन का सौंदर्य घर-घर दिखता है; कवि आँख नहीं हटा पाता
  3. तुलना/तर्क: उदास मन को वही दृश्य फीका लग सकता है

Answer: हाँ। प्रसन्न मन को फागुन का सौंदर्य घर-घर दिखता है; कवि आँख नहीं हटा पाता। उदास मन को वही दृश्य फीका लग सकता है। अतः सौंदर्य-बोध मन से जुड़ा है।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

'उत्साह' कविता में बादल को राहत देने वाला और क्रांति लाने वाला—दोनों क्यों कहा जा सकता है? (25-30 शब्द) (2 marks)

StepMarks
राहत देने वाला रूप: निदाघ से विकल जन और तप्त धरा को जल से शीतल करना (पाठ का प्रमाण सहित)1
क्रांति लाने वाला रूप: 'वज्र छिपा' बादल विप्लव और क्रांति-चेतना जगाकर 'नूतन कविता' व नवजीवन लाता है1

काव्यांश 'पत्तों से लदी डाल ... पट नहीं रही है।' पर आधारित पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5), कथन-कारण प्रश्न सहित (5 marks)

StepMarks
प्रश्न (i): डालियों का वर्णन—पत्तों से लदी, कहीं हरी, कहीं लाल (सही विकल्प)1
प्रश्न (ii): 'पाट-पाट' का अर्थ—जगह-जगह (सही विकल्प)1
प्रश्न (iii): 'मंद-गंध-पुष्प-माल' का भाव—हल्की सुगंध वाले फूलों की माला (सही विकल्प)1
प्रश्न (iv): कथन-कारण—कथन और कारण दोनों की सत्यता तथा व्याख्या-संबंध की सही पहचान1
प्रश्न (v): शोभा-श्री 'पट नहीं रही'—सौंदर्य की सर्वव्यापकता/अधिकता की पहचान (सही विकल्प)1

Where students lose marks in सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह, अट नहीं रही है

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: 'अट नहीं रही है' में 'तुम' को गलत पहचानना

    कविता में 'फागुन' शब्द एक ही बार आता है, इसलिए छात्र 'तुम' को बादल, हवा या ईश्वर मान लेते हैं।

    Wrong working

    'उड़ने को नभ में तुम' – यहाँ 'तुम' हवा के लिए आया है।

    Right working

    'तुम' फागुन के लिए आया है; कवि ने फागुन का मानवीकरण किया है जो साँस लेता और पर देता है।

    Do this: पहली पंक्तियाँ 'आभा फागुन की' से जोड़कर पढ़ें: पूरी कविता फागुन को ही संबोधित है।

    Usually costs: MCQ में पूरा 1 अंक; लिखित उत्तर में 2 में से 1 अंक तक कट सकता है।

  • Mistake: 'गरजो' की जगह 'बरसो' लिखना

    बादल का सामान्य काम बरसना है, इसलिए छात्र याद से लिख देते हैं।

    Wrong working

    कवि बादल से रिमझिम बरसने को कहता है ताकि मौसम सुहावना हो जाए।

    Right working

    कवि बादल से 'गरजो!' कहता है, क्योंकि गर्जना उत्साह और क्रांति-चेतना जगाने का प्रतीक है।

    Do this: टेक की पंक्ति 'बादल, गरजो!' को ठीक वैसे ही याद करें।

    Usually costs: 2 अंक के प्रश्न में पूरा उत्तर गलत माना जा सकता है।

  • Mistake: बादल का केवल प्राकृतिक अर्थ लिखना

    छात्र प्रतीक-अर्थ (क्रांति, नवजीवन, कवि) छोड़ देते हैं।

    Wrong working

    बादल गर्मी में पानी बरसाकर धरती को ठंडा करता है।

    Right working

    बादल प्यासे जन की आकांक्षा पूरी करने वाला भी है और 'वज्र' छिपाए विप्लव व क्रांति लाने वाला, नवजीवन देने वाला भी।

    Do this: बादल के दोनों रूप लिखें: राहत देने वाला और क्रांति लाने वाला।

    Usually costs: 2 में से 1 अंक कट सकता है।

  • Mistake: शब्द-सीमा से बाहर पूरा भावार्थ लिख देना

    छात्र प्रश्न का सीधा उत्तर देने के बजाय पूरी कविता दोहरा देते हैं।

    Wrong working

    (60-70 शब्दों में दोनों पदों का पूरा अर्थ, जबकि प्रश्न केवल 'आँख न हटने' का कारण पूछ रहा था।)

    Right working

    फागुन का सौंदर्य घर-घर, डाल-डाल में फैला है और इतना मनमोहक है कि कवि मुग्ध होकर उससे आँख नहीं हटा पाता।

    Do this: पहले वाक्य में सीधा उत्तर दें, फिर एक पंक्ति का प्रमाण; 25-30 शब्द पर रुक जाएँ।

    Usually costs: सीधा उत्तर न होने पर 2 में से 1 अंक तक कट सकता है और समय भी नष्ट होता है।

  • Mistake: पंक्ति गलत उद्धृत करना

    पंक्तियाँ याद से, बोलचाल के रूप में लिख दी जाती हैं।

    Wrong working

    कवि कहता है—'आँख हटाता हूँ तो हटती नहीं है।'

    Right working

    कवि कहता है—'आँख हटाता हूँ तो हट नहीं रही है।'

    Do this: केवल वही छोटी पंक्तियाँ उद्धृत करें जो पक्की याद हों; बाकी भाव अपने शब्दों में लिखें।

    Usually costs: भाषा-शुद्धता और प्रमाण के अंश में अंक कम हो सकते हैं।

  • Mistake: अलंकार की गलत पहचान

    'घेर घेर' की आवृत्ति देखकर छात्र यमक लिख देते हैं, जबकि अर्थ नहीं बदलता।

    Wrong working

    'घेर घेर घोर गगन' में यमक अलंकार है।

    Right working

    'घेर घेर घोर गगन' में 'घ' और 'ग' वर्णों की आवृत्ति है, इसलिए अनुप्रास अलंकार है।

    Do this: यमक तभी, जब एक ही शब्द बार-बार अलग अर्थ में आए; केवल वर्ण दोहराए जाएँ तो अनुप्रास।

    Usually costs: MCQ में पूरा 1 अंक।

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह, अट नहीं रही है: previous year questions

  • Course A: Asked in 3 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 0.5 marks per paper; 3 questions in all, counting OR alternatives. In 1 of 4 sample papers.
  • Course B: Asked in 1 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 0.2 marks per paper; 1 questions in all, counting OR alternatives. In 0 of 4 sample papers.

Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.

Solved board questions from सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह, अट नहीं रही है

Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.

2025 Course A, set 3/6/1, Q2 · 7 marks · Case-basedCompetency-based

निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

लीक पर वे चले जिनके
चरण दुर्बल और हारे हैं
हमें तो जो हमारी यात्रा से बने
ऐसे अनिर्मित पंथ प्यारे हैं ।
साक्षी हों राह रोके खड़े
पीले बाँस के झुरमुट,
कि उनमें गा रही है जो हवा
उसी से लिपटे हुए सपने हमारे हैं ।
शेष जो भी हैं –
वक्ष खोले डोलती अमराइयाँ
गर्व से आकाश थामे खड़े
ताड़ के ये पेड़
हिलती क्षितिज की झालरें,
झूमती हर डाल पर बैठी
फलों से मारती
खिलखिलाती शोख अल्हड़ हवा
गायक-मंडली-से थिरकते
आते गगन में मेघ,
वाद्य यंत्रों से पड़े टीले,
नदी बनने की प्रतीक्षा में, कहीं नीचे
शुष्क नाले में नाचता एक अँजुरी जल
सभी, बन रहा है कहीं जो विश्वास
जो संकल्प हममें
बस उसी के सहारे हैं

  1. (क)

    कवि पूर्व निर्मित मार्ग का अनुसरण क्यों नहीं करना चाहता है ?

    1. (A)वह किसी और का अनुचर बनकर रहना चाहता है।
    2. (B)किसी और के द्वारा निर्मित मार्ग उसे अच्छा नहीं लगता है।
    3. (C)कवि आत्मविश्वासी है और अपना मार्ग स्वयं बनाना चाहता है।
    4. (D)किसी अन्य द्वारा निर्मित मार्ग पर चलना उसे अनुचित लगता है।
    1 mark
  2. (ख)

    किस तरह के लोग दूसरों के सहारे जीवन जीते हैं ?

    1. (A)जो आज्ञाकारी प्रवृत्ति के होते हैं।
    2. (B)जो अक्षम और निराश होते हैं।
    3. (C)जो जल्दी सफल होना चाहते हैं।
    4. (D)जिनके सपने बहुत बड़े होते हैं।
    1 mark
  3. (ग)

    बादलों की तुलना किससे की गई है ?

    1. (A)अपनी ही धुन पर थिरकती गायक मंडली से
    2. (B)दूसरों की धुन पर थिरकती गायक मंडली से
    3. (C)अपनी ही धुन में मग्न नर्तक मंडली से
    4. (D)तीव्र गति से नृत्य करती नर्तक मंडली से
    1 mark
  4. (घ)

    "हमें तो जो हमारी यात्रा से बने ऐसे अनिर्मित पंथ प्यारे हैं।" – का आशय स्पष्ट कीजिए।

    2 marks
  5. (ङ)

    प्रकृति के विविध घटक कवि को क्या प्रेरणा देते हैं ? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।

    2 marks
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (क) कवि को अपनी यात्रा से बने अनिर्मित पथ प्यारे हैं; वह आत्मविश्वासी है और अपना मार्ग स्वयं बनाना चाहता है। उत्तर: (C)।

    1 mark
  2. (ख) 'लीक पर वे चले जिनके चरण दुर्बल और हारे हैं' अर्थात् अक्षम और निराश लोग। उत्तर: (B)।

    1 mark
  3. (ग) बादलों को 'गायक-मंडली-से थिरकते' कहा गया है, यानी अपनी ही धुन में थिरकती गायक मंडली से। उत्तर: (A)।

    1 mark
  4. (घ) कवि बने-बनाए रास्ते पर चलने के बजाय अपना नया रास्ता स्वयं बनाना चाहता है।

    1 mark
  5. (घ) अपने संघर्ष और प्रयास से मिली उपलब्धियाँ उसे आत्मिक संतोष देती हैं, इसीलिए वे उसे प्रिय हैं।

    1 mark
  6. (ङ) प्रकृति के घटक जीवन में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

    1 mark
  7. (ङ) वे आशावान रहने, उत्साह, आनंद और बेफ़िक्र होकर जीवन जीने तथा आत्मविश्वास व संकल्प की प्रेरणा देते हैं।

    1 mark

Answer: (क) C; (ख) B; (ग) A; (घ) कवि अपना मार्ग स्वयं बनाकर संघर्ष से मिली उपलब्धियों में संतोष पाता है; (ङ) निरंतर आगे बढ़ना, आशा, उत्साह और आत्मविश्वास

Where the marks are

  • (क) सही विकल्प C (1 अंक)
  • (ख) सही विकल्प B (1 अंक)
  • (ग) सही विकल्प A (1 अंक)
  • (घ) दो उपयुक्त आशय-बिंदु (1+1=2 अंक)
  • (ङ) दो उपयुक्त बिंदु (1+1=2 अंक)

See it in the full 2025 board paper, set 3/6/1

2025 Course B, set 4/3/1, Q9 · 5 marks · Reading comprehensionCompetency-based

निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों का सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : 5×1=5

उड़ गया अचानक लो, भूधर
फड़का अपार पारद के पर!
रव-शेष रह गए हैं निर्झर!
है टूट पड़ा भू पर अंबर!

धँस गए धरा में सभ्य शाल!
उठ रहा धुआँ, जल गया ताल!
– यों जलद-यान में विचर-विचर
था इंद्र खेलता इंद्रजाल।

  1. (i)

    'भूधर' के उड़ने से क्या अभिप्राय है ?

    1. (A)पर्वतों के पंख लगना
    2. (B)पर्वतों का अदृश्य होना
    3. (C)पर्वतों का बादलों के पार जाना
    4. (D)पर्वतों का आकाश की ऊँचाई को छूना
    1 mark
  2. (ii)

    'भूधर' किसके पंख लगाकर उड़ गए ?

    1. (A)बादलों के
    2. (B)कल्पना के
    3. (C)बारिश के
    4. (D)कोहरे के
    1 mark
  3. (iii)

    'रव-शेष रह गए हैं निर्झर' – का आशय है :

    1. (A)केवल झरने दिखाई दे रहे हैं
    2. (B)केवल झरनों की ध्वनि शेष रह गई है
    3. (C)वृक्षों का अस्तित्व नष्ट हो गया है
    4. (D)पर्वतों का अस्तित्व नष्ट हो गया है
    1 mark
  4. (iv)

    'है टूट पड़ा भू पर अंबर' – पंक्ति में अंबर के टूटने से क्या अभिप्राय है ?

    1. (A)आकाश का धरती पर आक्रमण करना
    2. (B)आकाश द्वारा धरती पर मूसलाधार वर्षा करना
    3. (C)आकाश द्वारा धरती पर बिजली गिराना
    4. (D)आकाश का टूट कर धरती पर आ गिरना
    1 mark
  5. (v)

    काव्यांश में इंद्रजाल किसे कहा गया है ?

    1. (A)पावस ऋतु में प्रकृति के पल-पल परिवर्तित रूप को
    2. (B)इंद्र के बादलों रूपी यान पर विचरण करने को
    3. (C)शाल के वृक्षों के गहरी खाई में छिप जाने को
    4. (D)तालाबों के चारों तरफ उड़ते घने धुएँ को
    1 mark
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (i) भूधर (पर्वत) का उड़ना अर्थात् बादलों में छिपकर अदृश्य हो जाना। उत्तर: (B)।

    1 mark
  2. (ii) पर्वत बादलों के पंख लगाकर उड़े। उत्तर: (A)।

    1 mark
  3. (iii) केवल झरनों की ध्वनि शेष है, वे दिखते नहीं। उत्तर: (B)।

    1 mark
  4. (iv) अंबर के टूटने का अर्थ मूसलाधार वर्षा है। उत्तर: (B)।

    1 mark
  5. (v) पावस में प्रकृति के पल-पल बदलते रूप को इंद्रजाल कहा गया है। उत्तर: (A)।

    1 mark

Answer: (i) B; (ii) A; (iii) B; (iv) B; (v) A

Where the marks are

  • (i) B (1)
  • (ii) A (1)
  • (iii) B (1)
  • (iv) B (1)
  • (v) A (1)

See it in the full 2025 board paper, set 4/3/1

2024 Course A, set 3/4/1, Q10 · 2 marks · Reading comprehension

पठित कविताओं के आधार पर बहुविकल्पी प्रश्नों का सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनिए : 2×1=2

  1. (i)

    'उत्साह' कविता की विशेषताएँ हैं :
    I. संबोधन शैली
    II. खड़ी बोली
    III. ब्रजभाषा
    IV. संवाद शैली

    1. (A)I, II
    2. (B)III, IV
    3. (C)II, III
    4. (D)I, IV
    1 mark
  2. (ii)

    'यह दंतुरित मुसकान' कविता में कौन-सा भाव मुखरित होता है?

    1. (A)मैत्री
    2. (B)व्यंग्य
    3. (C)प्रेम
    4. (D)वात्सल्य
    1 mark
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (i) 'उत्साह' में बादल को संबोधित किया गया है और भाषा खड़ी बोली है: I, II। उत्तर (A)।

    1 mark
  2. (ii) शिशु की मुसकान देखकर पिता में वात्सल्य उमड़ता है। उत्तर (D)।

    1 mark

Answer: (i) A; (ii) D

Where the marks are

  • (i) A (1 अंक)
  • (ii) वात्सल्य (1 अंक)

See it in the full 2024 board paper, set 3/4/1

Every सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह, अट नहीं रही है question, by year

Course A (4 questions, sample papers included)

For 2027

Sample paper 2026-27: Q9 (5 marks, solved)

2025

Set 3/6/1: Q2 (7 marks, solved)

2024

Set 3/4/1: Q10 (2 marks, solved)

Set 3/5/1: Q10 (2 marks, solved)

Course B (1 questions, sample papers included)

2025

Set 4/3/1: Q9 (5 marks, solved)

Practice questions on सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह, अट नहीं रही है

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 2 marks · Short answerBoard level

    'अट नहीं रही है' कविता में फागुन के समय पेड़ों और फूलों का कैसा चित्र खींचा गया है? (25-30 शब्द)

    Hint

    कविता के तीसरे हिस्से की 'डाल' और 'माल' वाली पंक्तियाँ देखिए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: पत्तों से लदी डालियाँ; कहीं हरी, कहीं लाल; हल्की सुगंध वाले फूलों की माला।

    आदर्श उत्तर: फागुन में डालियाँ पत्तों से लद गई हैं, कहीं हरी तो कहीं लाल दिखती हैं। प्रकृति के हृदय पर मानो धीमी सुगंध वाले फूलों की माला पड़ी है।

  2. Q2 · 1 mark · MCQBoard level

    'उत्साह' कविता में आए शब्द 'निदाघ' का अर्थ है—
    (क) वर्षा
    (ख) गर्मी
    (ग) सर्दी
    (घ) आँधी

    Hint

    संसार के लोग किससे विकल हैं और धरती 'तप्त' क्यों है?

    Answer

    (ख) गर्मी

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level

    बादलों को 'अज्ञात दिशा से' आए 'अनंत के घन' कहने का क्या भाव है? (25-30 शब्द)

    Hint

    सोचिए, विकल लोगों को राहत कहाँ से और कैसे मिलती है।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: बादल अचानक, अनजानी दिशा से आते हैं; अनंत आकाश की विराट शक्ति; पीड़ितों को अनपेक्षित राहत।

    आदर्श उत्तर: बादल अज्ञात दिशा से, अनंत आकाश से अचानक आते हैं। इससे पता चलता है कि पीड़ितों को राहत और परिवर्तन किसी विराट शक्ति से अनपेक्षित रूप में मिलते हैं।

  4. Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level

    निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार कीजिए:
    कथन (A): 'अट नहीं रही है' में कवि फागुन को 'तुम' कहकर संबोधित करता है।
    कारण (R): कवि ने फागुन का मानवीकरण किया है; फागुन साँस लेता है और उड़ने को पर देता है।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

    Hint

    फागुन जो-जो काम करता है, क्या वे मनुष्य के काम हैं?

    Answer

    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है। फागुन को व्यक्ति की तरह साँस लेते और पर देते दिखाया गया है, इसलिए उसे 'तुम' कहा गया है।

  5. Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level

    'उत्साह' और 'अट नहीं रही है' में प्रकृति के किन दो भिन्न रूपों का चित्रण हुआ है? (25-30 शब्द)

    Hint

    एक कविता में गर्जना है, दूसरी में सुगंध। दोनों का भाव पहचानिए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: 'उत्साह' में गरजते बादल का उग्र, क्रांतिकारी रूप; 'अट नहीं रही है' में फागुन का कोमल, सुगंधित सौंदर्य; ओज बनाम उल्लास।

    आदर्श उत्तर: 'उत्साह' में गरजते बादल का क्रांति और नवजीवन लाने वाला उग्र रूप है। 'अट नहीं रही है' में फागुन का कोमल, सुगंधित सौंदर्य है। एक में ओज, दूसरे में उल्लास।

  6. Q6 · 2 marks · Short answerHarder board level

    दोनों कविताओं में शब्दों की आवृत्ति (जैसे 'विकल विकल', 'पाट-पाट') से कविता पर क्या प्रभाव पड़ता है? (25-30 शब्द)

    Hint

    इन शब्दों को ज़ोर से पढ़िए: लय और भाव, दोनों पर ध्यान दीजिए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: लय और नाद-सौंदर्य; भाव की तीव्रता; 'विकल विकल' से अत्यधिक बेचैनी, 'पाट-पाट' से सौंदर्य की व्यापकता।

    आदर्श उत्तर: शब्दों की आवृत्ति से लय और नाद-सौंदर्य बढ़ता है तथा भाव गहरा होता है। 'विकल विकल' लोगों की अत्यधिक बेचैनी और 'पाट-पाट' सौंदर्य की सर्वव्यापकता को दिखाता है।

  7. Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    मान लीजिए आपके विद्यालय में 'हरित अभियान' शुरू करना है, पर साथी उत्साह नहीं दिखा रहे। 'उत्साह' कविता का संदेश आप उन्हें कैसे देंगे? (25-30 शब्द)

    Hint

    बादल गरजकर क्या जगाता है और 'तप्त धरा' के साथ क्या करता है?

    Answer

    उत्तर-बिंदु: बादल की तरह उत्साह से आगे आना; गर्जना = जागृति; तप्त धरा को शीतल करने जैसा रचनात्मक कार्य।

    आदर्श उत्तर: मैं साथियों से कहूँगा कि बादल की तरह उत्साह से आगे आएँ और पौधे लगाएँ। जैसे बादल तप्त धरा को शीतल करता है, वैसे हम भी विद्यालय को हरा-भरा बनाएँ।

  8. Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    'उत्साह' में बादल को 'कवि' कहा गया है जो 'नूतन कविता' भरता है। क्या आज भी साहित्य समाज में बदलाव ला सकता है? तर्क सहित लिखिए। (25-30 शब्द)

    Hint

    'वज्र छिपा, नूतन कविता' पंक्ति के दोनों पक्ष याद कीजिए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: स्पष्ट मत; बादल-कवि की समानता; साहित्य अन्याय पर चोट करता और नई सोच जगाता है।

    आदर्श उत्तर: हाँ। जैसे बादल वज्र छिपाकर नूतन कविता भरता है, वैसे साहित्य अन्याय पर चोट करता और नई सोच जगाता है। कविता पाठकों को जागरूक बनाकर बदलाव की चेतना देती है।

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Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.'उत्साह' किसे संबोधित है और यह किस प्रकार का गीत है?Show answer

    बादल को; यह एक आह्वान गीत है।

  2. 2.'धाराधर', 'निदाघ' और 'उन्मन' के अर्थ?Show answer

    धाराधर = बादल; निदाघ = गर्मी; उन्मन = अनमनापन, मन न टिकना।

  3. 3.बादल को 'कवि' क्यों कहा गया है?Show answer

    क्योंकि कवि की तरह बादल भी 'नूतन कविता' और नवजीवन भरता है; दोनों बदलाव लाते हैं।

  4. 4.'तप्त धरा' को कौन और किससे शीतल करेगा?Show answer

    बादल, जल बरसाकर ('तप्त धरा, जल से फिर शीतल कर दो')।

  5. 5.'अट नहीं रही है' में 'तुम' कौन है?Show answer

    फागुन, जिसका कवि ने मानवीकरण किया है।

  6. 6.'पाट-पाट' और 'पट' का अर्थ?Show answer

    पाट-पाट = जगह-जगह; पट = समा नहीं रही है।

  7. 7.कवि की आँख किससे नहीं हट रही?Show answer

    फागुन के सर्वव्यापक, मनमोहक सौंदर्य से।

  8. 8.निराला का जन्म और देहांत कब-कहाँ? कौन-सी विशेषता उन्हें छायावादियों में अलग करती है?Show answer

    जन्म 1899, महिषादल (बंगाल); देहांत 1961। छायावादी रचनाकारों में सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग उन्होंने किया।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप बता सकते हैं कि 'बादल, गरजो!' कविता में कितनी बार और कहाँ-कहाँ आता है?
  • क्या आप बादल के दोनों रूप (प्यासे जन की आकांक्षा पूरी करने वाला और विप्लव-क्रांति लाने वाला) एक-एक पंक्ति के प्रमाण सहित लिख सकते हैं?
  • क्या आप 'वज्र छिपा, नूतन कविता' में विनाश और सृजन का मेल 25-30 शब्दों में समझा सकते हैं?
  • क्या आप धाराधर, निदाघ, उन्मन, सकल, आभा, अट, पाट-पाट, पट के अर्थ बिना देखे बता सकते हैं?
  • क्या आप बता सकते हैं कि 'अट नहीं रही है' में 'तुम' कौन है और फागुन क्या-क्या करता है (साँस लेता, घर-घर भरता, पर-पर करता)?
  • क्या आप 'घेर घेर घोर गगन' (अनुप्रास) और 'कहीं साँस लेते हो' (मानवीकरण) के अलंकार पहचान सकते हैं?
  • क्या आप समझा सकते हैं कि प्रसन्न मन को हर तरफ़ फागुन का सौंदर्य क्यों दिखता है?
  • क्या आप दोनों कविताओं की तुलना ओज (उत्साह) और उल्लास (अट नहीं रही है) के आधार पर कर सकते हैं?

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह, अट नहीं रही है: frequently asked questions

कवि बादल से बरसने के बजाय गरजने को क्यों कहता है?

गरजना शक्ति, जागरण और क्रांति का प्रतीक है। कवि चाहता है कि बादल पहले गरजकर लोगों में उत्साह और नई चेतना जगाए। फिर वह तपती धरती को जल से शीतल करे।

‘उत्साह’ कविता में बादल किन अर्थों की ओर संकेत करता है?

बादल एक ओर प्यासे और पीड़ित लोगों की इच्छा पूरी करने वाला है। दूसरी ओर वह विध्वंस, विप्लव और क्रांति की चेतना लाने वाला है। कवि उसे ‘कवि’ और ‘नवजीवन वाले’ कहकर नए जीवन का प्रतीक भी बनाता है।

‘अट नहीं रही है’ कविता में किस ऋतु का वर्णन है?

इस कविता में फागुन मास की सुंदरता का वर्णन है। फागुन की आभा इतनी अधिक है कि वह कहीं समा नहीं रही। पत्तों से लदी डालियाँ और फूलों की सुगंध इसके प्रमाण हैं।

‘उत्साह’ कविता का शीर्षक उचित क्यों है?

पूरी कविता में बादल से गरजने, नवजीवन भरने और धरती को शीतल करने का जोशभरा आह्वान है। इसमें निराशा नहीं, उमंग और बदलाव की ललकार है। इसलिए ‘उत्साह’ शीर्षक कविता के भाव से पूरी तरह मेल खाता है।

इन कविताओं में कौन-से अलंकार प्रमुख हैं?

दोनों कविताओं में पुनरुक्ति प्रकाश प्रमुख है, जैसे ‘ललित ललित’, ‘घर-घर’, ‘पाट-पाट’। ‘घेर घेर घोर गगन’ में अनुप्रास है। फागुन के साँस लेने और बादल को कवि कहने में मानवीकरण है।

निराला के काव्य की कौन-सी विशेषताएँ NCERT में बताई गई हैं?

NCERT के अनुसार निराला की कविता में दार्शनिकता, विद्रोह, क्रांति, प्रेम की तरलता और प्रकृति का विराट चित्र मिलता है। छायावादी कवियों में उन्होंने सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग किया। शोषित जन के प्रति सहानुभूति भी उनकी कविता की विशेषता है।

Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-अ (002), कक्षा 10, 2026-27; NCERT क्षितिज भाग 2 (Reprint 2026-27), उत्साह; अट नहीं रही है