नेताजी का चश्मा (स्वयं प्रकाश) Class 10: सारांश, पात्र और संदेश
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'नेताजी का चश्मा' स्वयं प्रकाश की कहानी है (क्षितिज भाग 2)। एक गरीब, लँगड़ा फेरीवाला कैप्टन नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति पर रोज़ असली चश्मा लगाता है। कहानी बताती है कि आम नागरिक और बच्चे भी अपने ढंग से देशभक्ति करते हैं। बोर्ड इस पर गद्यांश आधारित MCQ और 25-30 शब्दों के प्रश्न पूछता है।
What स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा is about
'नेताजी का चश्मा' क्षितिज भाग 2 के गद्य खंड की कहानी है। इसके लेखक स्वयं प्रकाश हैं, जो समकालीन हिंदी कहानी के महत्त्वपूर्ण कहानीकार माने जाते हैं। कहानी एक कस्बे के चौराहे पर लगी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति और उस पर बदलते चश्मों के माध्यम से यह दिखाती है कि देश के निर्माण में करोड़ों साधारण नागरिकों का, और बच्चों का भी, योगदान होता है।
बोर्ड परीक्षा में यह पाठ खंड ग (गद्य खंड) में आता है। प्रश्न 7 में इसके किसी पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1-1 अंक) आ सकते हैं, जिनमें कथन-कारण प्रश्न भी होता है। प्रश्न 8 में 25-30 शब्दों के 2-2 अंक वाले प्रश्न आते हैं, जिनमें पात्रों का चरित्र, घटनाओं के कारण, किसी कथन का आशय और कहानी का संदेश पूछा जाता है।
In real board papers: Course A, asked in 17 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 4.2 marks per paper; Course B, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026). See the questions
स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
हालदार साहब को कंपनी के काम से हर पंद्रहवें दिन एक छोटे कस्बे से गुज़रना पड़ता था। उस कस्बे की नगरपालिका ने मुख्य बाज़ार के मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की संगमरमर की एक छोटी मूर्ति लगवाई थी। लेखक अनुमान लगाता है कि बजट कम होने और समय बीत जाने के कारण यह काम कस्बे के हाई स्कूल के ड्राइंग मास्टर मोतीलाल जी को दिया गया होगा।
मूर्ति सुंदर थी, फ़ौजी वर्दी में थी, पर उसमें पत्थर का चश्मा नहीं था। उसकी जगह एक असली, काले चौड़े फ्रेम वाला चश्मा पहनाया गया था। हालदार साहब ने पान खाते समय यह देखा और मुसकरा उठे। उन्हें लगा कि मूर्ति का रूप नहीं, उसके पीछे की भावना महत्त्वपूर्ण है।
हर बार गुज़रने पर उन्हें मूर्ति पर नया चश्मा दिखता। कौतूहल बढ़ा तो उन्होंने पानवाले से पूछा। पानवाले ने बताया कि यह काम कैप्टन चश्मेवाला करता है। जब किसी ग्राहक को मूर्ति वाला फ्रेम चाहिए होता, तो वह उसे उतारकर बेच देता और मूर्ति पर दूसरा फ्रेम लगा देता। असली चश्मे के बारे में पानवाले ने कहा कि मास्टर बनाना भूल गया।
हालदार साहब ने पूछा कि क्या कैप्टन नेताजी का साथी या आज़ाद हिंद फ़ौज का सिपाही है। पानवाले ने उसका मज़ाक उड़ाया और उसे लँगड़ा और पागल कहा। हालदार साहब को यह बुरा लगा। उन्होंने देखा कि कैप्टन एक बहुत बूढ़ा, मरियल, लँगड़ा आदमी है, जो गांधी टोपी पहने बाँस पर चश्मे टाँगकर फेरी लगाता है।
दो साल तक हालदार साहब मूर्ति पर तरह-तरह के चश्मे देखते रहे। फिर एक दिन मूर्ति पर कोई चश्मा नहीं था। अगली बार पूछने पर पानवाले ने उदास होकर आँखें पोंछते हुए बताया कि कैप्टन मर गया। हालदार साहब दुखी हो गए और सोचते रहे कि उस कौम का क्या होगा जो देश के लिए सब कुछ देने वालों पर हँसती है।
पंद्रह दिन बाद उन्होंने तय किया कि चौराहे पर नहीं रुकेंगे और मूर्ति की ओर देखेंगे भी नहीं। पर आदत से आँखें मूर्ति की ओर उठ गईं। उन्होंने जीप रुकवाई और मूर्ति के सामने अटेंशन में खड़े हो गए। मूर्ति पर सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा था, जैसा बच्चे बनाते हैं। यह देखकर उनकी आँखें भर आईं।
Themes and message
साधारण नागरिकों की देशभक्ति
कहानी का मूल संदेश यह है कि देशभक्ति केवल सीमा पर लड़ने वाले सैनिक या बड़े नेता ही नहीं करते। कैप्टन एक गरीब, बूढ़ा और लँगड़ा फेरीवाला है। उसके पास दुकान तक नहीं है, फिर भी उसे नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति आहत करती है। वह अपने थोड़े-से फ्रेमों में से एक मूर्ति पर लगा देता है। पाठ की भूमिका भी कहती है कि यह कहानी देश के करोड़ों नागरिकों के योगदान को रेखांकित करती है। इससे पता चलता है कि छोटे-छोटे कामों में छिपी सच्ची भावना ही देशप्रेम है।
From the text: कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगाता है; हालदार साहब "चश्मेवाले की देश-भक्ति के समक्ष नतमस्तक" होते हैं।
भावना का महत्त्व, रूप का नहीं
मूर्ति कम बजट में एक स्थानीय ड्राइंग मास्टर ने बनाई थी और उसमें चश्मा भी नहीं बन पाया था। फिर भी हालदार साहब इस प्रयास को सराहनीय मानते हैं। उनका मानना है कि मूर्ति कितनी सुंदर या बड़ी है, यह मायने नहीं रखता; मायने रखती है वह भावना जिससे मूर्ति लगाई गई। असली चश्मे की मौजूदगी इसी भावना का प्रमाण है, क्योंकि कोई नागरिक उस कमी को अपने ढंग से पूरी कर रहा है।
From the text: "महत्त्व मूर्ति के रंग-रूप या कद का नहीं, उस भावना का है"
देशभक्तों के प्रति समाज की उदासीनता पर व्यंग्य
पानवाला कैप्टन को लँगड़ा और पागल कहकर उसका मज़ाक उड़ाता है। हालदार साहब को यह अच्छा नहीं लगता। कैप्टन की मृत्यु के बाद वे सोचते हैं कि उस कौम का क्या होगा जो देश के लिए सब कुछ त्यागने वालों पर हँसती है और अपने स्वार्थ के लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है। यहाँ लेखक समाज की उस सोच पर व्यंग्य करता है जो देशभक्ति को मज़ाक समझने लगी है।
From the text: "देश-भक्ति भी आजकल मज़ाक की चीज़ होती जा रही है।" और पानवाले की टिप्पणी "पागल है पागल!"
नई पीढ़ी से आशा
कैप्टन की मृत्यु के बाद हालदार साहब निराश हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि अब मूर्ति पर कोई चश्मा नहीं लगाएगा। पर अंत में मूर्ति पर सरकंडे का बना छोटा-सा चश्मा मिलता है, जैसा बच्चे बनाते हैं। इससे संकेत मिलता है कि देशप्रेम की भावना नई पीढ़ी में भी जीवित है। बच्चों के पास पैसे या साधन नहीं हैं, फिर भी वे अपने ढंग से योगदान करते हैं। भूमिका भी कहती है कि बड़े ही नहीं, बच्चे भी इसमें शामिल हैं।
From the text: "सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, जैसा बच्चे बना लेते हैं।"
Characters
हालदार साहब
कहानी के मुख्य पात्र, जिनकी आँखों से पूरी घटना देखी जाती है। वे कंपनी के काम से हर पंद्रहवें दिन कस्बे से गुज़रते हैं।
- देशभक्त और संवेदनशील
- जिज्ञासु (कौतूहल से भरे)
- भावुक
- दूसरों के प्रयास का सम्मान करने वाले
मूर्ति पर असली चश्मा देखकर वे नागरिकों के प्रयास को सराहनीय मानते हैं। जब "कौतूहल दुर्दमनीय" हो उठा तो पानवाले से चश्मे का रहस्य पूछा। पानवाले द्वारा कैप्टन का मज़ाक उड़ाना उन्हें अच्छा नहीं लगा। अंत में सरकंडे का चश्मा देखकर वे मूर्ति के सामने अटेंशन में खड़े हो जाते हैं और उनकी आँखें भर आती हैं।
कैप्टन चश्मेवाला
एक गरीब फेरीवाला, जो नेताजी की मूर्ति पर बार-बार चश्मा लगाता है। कहानी का केंद्रीय देशभक्त पात्र।
- सच्चा देशभक्त
- गरीब पर भावनाशील
- नेताजी के प्रति श्रद्धालु
- समझदार और व्यावहारिक
वह "एक बेहद बूढ़ा मरियल-सा लँगड़ा आदमी" है, जो गांधी टोपी पहनता है और बाँस पर चश्मे टाँगकर फेरी लगाता है। उसे बिना चश्मे वाली मूर्ति आहत करती है, इसलिए वह अपने गिने-चुने फ्रेमों में से एक मूर्ति पर लगाता है। ग्राहक को वही फ्रेम चाहिए तो उसे देकर मूर्ति पर दूसरा लगा देता है, ताकि मूर्ति कभी बिना चश्मे के न रहे।
पानवाला
चौराहे पर पान की दुकान चलाने वाला, जो हालदार साहब को कैप्टन और चश्मे के बारे में बताता है।
- खुशमिज़ाज़ और मज़ाकिया
- बातूनी पर बात सीमित रखने वाला
- ऊपर से कठोर, भीतर से संवेदनशील
वह "एक काला मोटा और खुशमिज़ाज़ आदमी" है, जो आँखों-ही-आँखों में हँसता है और उसकी तोंद थिरकती है। वह कैप्टन को लँगड़ा और पागल कहता है, पर उसकी मृत्यु पर उदास होकर धोती के सिरे से आँखें पोंछता है। इससे पता चलता है कि मन में उसे भी कैप्टन से लगाव था।
मास्टर मोतीलाल
कस्बे के इकलौते हाई स्कूल के ड्राइंग मास्टर, जिन्होंने मूर्ति बनाई (लेखक के अनुमान के अनुसार)।
- स्थानीय कलाकार
- जल्दी काम पूरा करने का वादा करने वाले
- सीमित साधनों में काम करने वाले
वे महीने-भर में मूर्ति बनाकर "पटक देने" का विश्वास दिला रहे थे। मूर्ति के नीचे 'मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल' लिखा था। लेखक अनुमान लगाता है कि वे पत्थर में पारदर्शी चश्मा बनाना तय नहीं कर पाए होंगे, इसलिए मूर्ति बिना चश्मे के रह गई।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| प्रतीकात्मकता | नेताजी की मूर्ति पर लगा असली चश्मा और अंत में सरकंडे का चश्मा। | चश्मा साधारण नागरिकों की देशभक्ति का प्रतीक बन जाता है। सरकंडे का चश्मा नई पीढ़ी में जीवित देशप्रेम और आशा का संकेत देता है। |
| व्यंग्य | "देश-भक्ति भी आजकल मज़ाक की चीज़ होती जा रही है।" और पानवाले का कैप्टन को "पागल" कहना। | समाज की उस सोच पर चोट होती है जो देशभक्तों का सम्मान करने के बजाय उनकी हँसी उड़ाती है। |
| स्थानीय बोली और अंग्रेज़ी शब्दों का प्रयोग | "कोई गिराक आ गया समझो।" तथा "आइडिया", "रियल", "चेंज" जैसे शब्द। | पात्र असली और जीवंत लगते हैं। भाषा सहज, बोलचाल वाली और रोचक बनती है। |
| किस्सागोई और अनुमान वाली शैली | "मान लीजिए मोतीलाल जी" तथा "मास्टर बनाना भूल गया" के बाद लेखक के कई अनुमान कि चश्मा क्यों नहीं बना होगा। | लेखक पाठक से सीधे बात करता-सा लगता है। कहानी सुनाने जैसी रोचकता आती है और हल्का हास्य भी पैदा होता है। |
| नाटकीय और भावुक अंत | हालदार साहब का "रोको!" चीखना, जीप से कूदना और मूर्ति के सामने अटेंशन में खड़े होना। | निराशा अचानक आशा में बदल जाती है। पाठक के मन पर कहानी का संदेश गहराई से अंकित हो जाता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
मूर्ति पत्थर की, लेकिन चश्मा रियल!
कथावाचक (हालदार साहब के मन की बात): पहली बार कस्बे से गुज़रते समय हालदार साहब मूर्ति पर असली चश्मा देखकर मुसकराते हैं।
यही विरोधाभास पूरी कहानी की नींव है। यहीं से हालदार साहब का कौतूहल शुरू होता है।
महत्त्व मूर्ति के रंग-रूप या कद का नहीं, उस भावना का है
कथावाचक (हालदार साहब का निष्कर्ष): जीप आगे बढ़ने पर हालदार साहब मूर्ति के बारे में सोचते हुए इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं।
कहानी का एक मुख्य विचार: देशभक्ति में दिखावे से ज़्यादा भावना का महत्त्व है।
मास्टर बनाना भूल गया।
पानवाला: हालदार साहब पूछते हैं कि नेताजी का ओरिजिनल चश्मा कहाँ गया।
पानवाले के लिए यह मज़ाक है, पर हालदार साहब के लिए यह चकित और द्रवित करने वाली बात है। इससे मूर्ति में चश्मा न होने का कारण पता चलता है।
वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल!
पानवाला: हालदार साहब पूछते हैं कि क्या कैप्टन आज़ाद हिंद फ़ौज का सिपाही है।
इससे समाज का देशभक्तों के प्रति उपेक्षा भरा रवैया दिखता है, जिससे हालदार साहब आहत होते हैं।
साहब! कैप्टन मर गया।
पानवाला: मूर्ति पर चश्मा न देखकर हालदार साहब पूछते हैं, तब पानवाला आँखें पोंछते हुए बताता है।
पानवाले का संवेदनशील रूप सामने आता है और कहानी का दुखद मोड़ आता है।
सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, जैसा बच्चे बना लेते हैं।
कथावाचक: कैप्टन की मृत्यु के पंद्रह दिन बाद हालदार साहब मूर्ति पर यह चश्मा देखते हैं।
यह नई पीढ़ी में देशप्रेम के जीवित रहने की आशा का प्रतीक है।
हालदार साहब भावुक हैं। इतनी-सी बात पर उनकी आँखें भर आईं।
कथावाचक: कहानी का अंतिम वाक्य, सरकंडे का चश्मा देखने के बाद।
हालदार साहब की संवेदनशीलता और 'इतनी-सी बात' के पीछे छिपे बड़े अर्थ को सामने लाता है।
स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
भावना का महत्त्व, रूप का नहीं
मान लीजिए आपके स्कूल में स्वतंत्रता दिवस पर एक सफ़ाई कर्मचारी ने अपने पैसों से गेंदे के फूलों की छोटी-सी माला लाकर गांधीजी के चित्र पर चढ़ाई। कुछ विद्यार्थी हँसे कि माला बहुत सस्ती है।
'नेताजी का चश्मा' के आधार पर बताइए कि इन विद्यार्थियों का हँसना कितना उचित है।
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ: हालदार साहब के अनुसार महत्त्व मूर्ति के रंग-रूप या कद का नहीं, भावना का है।
- समानता: सस्ती माला वैसी ही है जैसे सरकंडे का चश्मा; दोनों में सच्चा सम्मान है।
- निष्कर्ष: हँसना पानवाले जैसी संवेदनहीनता है; भावना का आदर होना चाहिए।
Answer: विद्यार्थियों का हँसना अनुचित है। हालदार साहब कहते हैं कि महत्त्व रूप का नहीं, भावना का है। सस्ती माला भी सरकंडे के चश्मे की तरह सच्चे सम्मान का प्रतीक है।
Memory hook: सरकंडे का चश्मा, गेंदे की माला: कीमत नहीं, भावना देखो।
साधारण नागरिकों की देशभक्ति
कल्पना कीजिए कि आपके मोहल्ले का एक चायवाला हर सुबह पार्क में लगे तिरंगे के खंभे के आसपास की सफ़ाई करता है, जबकि यह उसका काम नहीं है। लोग उसे 'सनकी' कहते हैं।
इस चायवाले की तुलना कैप्टन चश्मेवाले से कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- कैप्टन: गरीब फेरीवाला, फिर भी नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगाता; लोग 'पागल' कहते।
- चायवाला: बिना किसी लाभ के राष्ट्रीय प्रतीक का सम्मान; लोग 'सनकी' कहते।
- समानता: दोनों छोटे साधनों से बड़ी देशभक्ति निभाते हैं और समाज उन्हें नहीं समझता।
Answer: चायवाला कैप्टन जैसा ही है। दोनों बिना लाभ के राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करते हैं और दोनों का मज़ाक उड़ता है। पाठ सिखाता है कि ऐसे लोगों का सम्मान करना चाहिए।
Memory hook: जिसे दुनिया 'पागल' कहे, वह कभी-कभी सबसे सच्चा 'कैप्टन' होता है।
नई पीढ़ी से आशा
मान लीजिए आपके इलाके में एक बुज़ुर्ग हर साल पेड़ लगाते थे। उनके निधन के बाद अगली बरसात में कुछ बच्चों ने अपने जेब-खर्च से पौधे लाकर उसी जगह लगा दिए।
यह घटना 'नेताजी का चश्मा' के अंत से कैसे मिलती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ का अंत: कैप्टन के मरने के बाद बच्चों ने सरकंडे का चश्मा रखा।
- घटना: बुज़ुर्ग के बाद बच्चों ने काम आगे बढ़ाया।
- संदेश: अच्छी भावना एक पीढ़ी से दूसरी तक जाती है।
Answer: दोनों में एक व्यक्ति के जाने के बाद बच्चे उसका काम आगे बढ़ाते हैं। जैसे सरकंडे का चश्मा आशा जगाता है, वैसे ही बच्चों के पौधे बताते हैं कि अच्छी भावना मरती नहीं।
Memory hook: कैप्टन गया, पर चश्मा लौटा: अच्छाई पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है।
Topics in this chapter
- कैप्टन चश्मेवाले का चरित्र-चित्रणComing soon
- नेताजी का चश्मा पाठ का मूल संदेशComing soon
- हालदार साहब का चरित्र-चित्रणComing soon
- नेताजी का चश्मा प्रश्न-उत्तर (सरकंडे का चश्मा)Coming soon
- पानवाले का रेखाचित्र और कैप्टन पर टिप्पणीComing soon
- नेताजी का चश्मा: कैप्टन का चरित्र और सच्ची देशभक्ति
How the board asks स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (कथन-कारण सहित) | पाठ का कोई अंश देकर पाँच MCQ पूछे जाते हैं: किसी शब्द या वाक्य का आशय, पात्र की भावना, घटना का कारण, और एक कथन (A)-कारण (R) प्रश्न। | गद्यांश दो बार पढ़िए। हर विकल्प को गद्यांश की पंक्ति से मिलाइए। कथन-कारण में पहले जाँचिए कि A और R दोनों सही हैं या नहीं, फिर देखिए कि R सचमुच A का कारण बताता है या नहीं। |
| घटना का कारण बताने वाले प्रश्न | जैसे: मूर्ति पर पत्थर का चश्मा क्यों नहीं था, कैप्टन चश्मा क्यों बदलता था, हालदार साहब ने ड्राइवर को पहले रुकने से क्यों मना किया। | 25-30 शब्दों में दो स्पष्ट बिंदु लिखिए: क्या हुआ और क्यों हुआ। पाठ की घटना का नाम लेकर उत्तर दीजिए, अपनी ओर से नई घटनाएँ मत जोड़िए। |
| चरित्र-चित्रण | हालदार साहब, कैप्टन या पानवाले के व्यक्तित्व की दो विशेषताएँ, या कैप्टन का नाम, पेशा और आर्थिक स्थिति पूछी जाती है। | दो गुण लिखिए और हर गुण के साथ पाठ की एक घटना जोड़िए। केवल गुणों की सूची से पूरे अंक नहीं मिलते। |
| आशय या कथन की व्याख्या | कोई पंक्ति देकर उसका आशय पूछा जाता है, जैसे कौम के देशभक्तों पर हँसने वाली पंक्ति या 'मूर्ति पत्थर की, लेकिन चश्मा रियल'। | पहले बताइए कि पंक्ति किस संदर्भ में आई है, फिर उसका गहरा अर्थ और कहानी के संदेश से उसका संबंध लिखिए। |
| भावना और प्रतीक पर आधारित प्रश्न | सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है, हालदार साहब के मन में कौन-से भाव उभरे, वे इतनी-सी बात पर भावुक क्यों हुए। | प्रतीक का अर्थ (बच्चों में देशप्रेम) और पात्र की भावना (निराशा से आशा, श्रद्धा) दोनों लिखिए। |
| मूल्य आधारित और अपने विचार वाले प्रश्न | पानवाले की टिप्पणी पर आपकी प्रतिक्रिया, या आप अपने जीवन में कैप्टन जैसी देशभक्ति कैसे दिखा सकते हैं। | अपनी राय साफ़ लिखिए, उसे पाठ की घटना से जोड़िए और एक व्यावहारिक उदाहरण दीजिए। शब्द-सीमा का ध्यान रखिए। |
Tricks to remember स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
कहानी का क्रम: 'मूर्ति-चश्मा-कैप्टन-मृत्यु-सरकंडा'
पाँच पड़ाव याद रखें: (1) मूर्ति: मास्टर मोतीलाल ने बनाई, चश्मा बनाना भूल गए; (2) चश्मा: हर बार नया असली चश्मा; (3) कैप्टन: बूढ़ा लँगड़ा फेरीवाला चश्मे बदलता; (4) मृत्यु: कैप्टन मर गया, मूर्ति बिना चश्मे के; (5) सरकंडा: बच्चों का बनाया चश्मा, हालदार साहब की आँखें भर आईं।
Use it when: गद्यांश किस पड़ाव का है, यह पहचानकर उत्तर में सही प्रसंग लिखें।
तीन पात्र, तीन भाव
हालदार साहब = संवेदनशील दर्शक; पानवाला = ऊपर से मज़ाकिया, भीतर से भावुक; कैप्टन = गरीब पर सच्चा देशभक्त।
Use it when: चरित्र-चित्रण के प्रश्न में हर पात्र का एक मुख्य गुण और एक प्रमाण लिखें।
स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: पत्थर की मूर्ति, असली चश्मा
और अंत में इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि कुल मिलाकर कस्बे के नागरिकों का यह प्रयास सराहनीय ही कहा जाना चाहिए। महत्त्व मूर्ति के रंग-रूप या कद का नहीं, उस भावना का है वरना तो देश-भक्ति भी आजकल मज़ाक की चीज़ होती जा रही है।
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इससे पहले पत्थर की मूर्ति पर असली चश्मा देखकर हालदार साहब मन में कहते हैं—) 'मूर्ति पत्थर की, लेकिन चश्मा रियल!' — इस कथन से हालदार साहब का कौन-सा भाव प्रकट होता है?
(क) क्रोध
(ख) कौतुक और प्रसन्नता
(ग) दुख
(घ) भय(2) · 1 mark · MCQ
'सराहनीय' शब्द का अर्थ है—
(क) निंदा के योग्य
(ख) प्रशंसा के योग्य
(ग) दिखावटी
(घ) अधूरा(3) · 1 mark · MCQ
हालदार साहब ने कस्बे के नागरिकों के प्रयास को सराहनीय क्यों माना?
(क) मूर्ति बहुत महँगे संगमरमर की थी
(ख) मूर्ति किसी प्रसिद्ध मूर्तिकार ने बनाई थी
(ग) मूर्ति के रंग-रूप से अधिक उसके पीछे की देशभक्ति की भावना महत्त्वपूर्ण थी
(घ) मूर्ति चौराहे पर ट्रैफ़िक को नियंत्रित करती थी(4) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): हालदार साहब के अनुसार मूर्ति के रंग-रूप या कद का महत्त्व नहीं है।
कारण (R): उनके विचार में देश-भक्ति आजकल मज़ाक की चीज़ होती जा रही है, इसलिए भावना का बचे रहना ही बड़ी बात है।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, पर कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता
(ग) कथन (A) सही है, पर कारण (R) गलत है
(घ) कथन (A) गलत है, पर कारण (R) सही है(5) · 1 mark · MCQ
गद्यांश के आधार पर हालदार साहब के स्वभाव के बारे में कौन-सा निष्कर्ष सबसे उचित है?
(क) वे हर चीज़ में कमी निकालने वाले व्यक्ति थे
(ख) वे छोटी बातों में भी गहरी भावना देखने वाले संवेदनशील व्यक्ति थे
(ग) वे कला के कठोर आलोचक थे
(घ) वे मूर्तियों को समय की बरबादी मानते थे
Show the answersAnswers
- (ख) कौतुक और प्रसन्नता
- (ख) प्रशंसा के योग्य
- (ग) मूर्ति के रंग-रूप से अधिक उसके पीछे की देशभक्ति की भावना महत्त्वपूर्ण थी
- (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है
- (ख) वे छोटी बातों में भी गहरी भावना देखने वाले संवेदनशील व्यक्ति थे
Extract 2: 'साहब! कैप्टन मर गया'
बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है। दुखी हो गए।
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इससे पहले पानवाला उदास होकर, सिर झुकाकर धोती के सिरे से आँखें पोंछते हुए बताता है कि कैप्टन मर गया।) कैप्टन की मृत्यु की खबर देते समय पानवाले के व्यवहार से उसके बारे में क्या पता चलता है?
(क) उसे कैप्टन की मृत्यु से कोई फ़र्क नहीं पड़ा
(ख) ऊपर से मज़ाक उड़ाने वाला पानवाला भीतर से कैप्टन के प्रति स्नेह रखता था
(ग) वह हालदार साहब से पैसे ऐंठना चाहता था
(घ) वह कैप्टन की मृत्यु से खुश था(2) · 1 mark · MCQ
'सब कुछ होम देनेवालों' में 'होम देना' का अर्थ है—
(क) घर बनाना
(ख) हवन में आहुति की तरह पूरी तरह न्योछावर कर देना
(ग) घर लौट जाना
(घ) किसी को घर देना(3) · 1 mark · MCQ
'अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है' — इस पंक्ति में किस पर व्यंग्य है?
(क) व्यापार करने वाले ईमानदार दुकानदारों पर
(ख) उन लोगों पर जो निजी स्वार्थ के लिए अपना ईमान तक बेचने को तैयार रहते हैं
(ग) फेरी लगाने वालों पर
(घ) नगरपालिका के कर्मचारियों पर(4) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: खबर सुनकर हालदार साहब कुछ पल चुपचाप खड़े रहे, फिर पान के पैसे चुकाकर जीप में बैठकर चले गए।) खबर सुनकर हालदार साहब 'और कुछ नहीं पूछ पाए'। इसका सबसे उचित कारण क्या है?
(क) उन्हें जल्दी थी
(ख) वे गहरे दुख और स्तब्धता में डूब गए थे
(ग) पानवाले ने बात करने से मना कर दिया था
(घ) उन्हें कैप्टन में कोई रुचि नहीं थी(5) · 1 mark · MCQ
गद्यांश में लेखक की मुख्य चिंता क्या है?
(क) कस्बे में पान की दुकानों की कमी
(ख) समाज का देशभक्तों के त्याग पर हँसना और स्वार्थ में डूबे रहना
(ग) मूर्ति का टूट जाना
(घ) चश्मों का महँगा होना
Show the answersAnswers
- (ख) ऊपर से मज़ाक उड़ाने वाला पानवाला भीतर से कैप्टन के प्रति स्नेह रखता था
- (ख) हवन में आहुति की तरह पूरी तरह न्योछावर कर देना
- (ख) उन लोगों पर जो निजी स्वार्थ के लिए अपना ईमान तक बेचने को तैयार रहते हैं
- (ख) वे गहरे दुख और स्तब्धता में डूब गए थे
- (ख) समाज का देशभक्तों के त्याग पर हँसना और स्वार्थ में डूबे रहना
स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: चश्मेवाले को 'कैप्टन' क्यों कहते थे · 2 marks · Short answerBoard level
सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे?
Try it first, then show the solutionSolution
- तथ्य: वह फ़ौजी नहीं, एक बूढ़ा लँगड़ा फेरीवाला था।
- कारण: नेताजी के प्रति उसका सम्मान और बिना चश्मे की मूर्ति पर चश्मा लगाने की लगन।
- निष्कर्ष: उसकी देशभक्ति की भावना ने उसे 'कैप्टन' बना दिया।
Answer: चश्मेवाला फ़ौजी नहीं था, पर नेताजी के प्रति उसके मन में गहरा सम्मान था। वह मूर्ति पर रोज़ चश्मा लगाता था। इसी देशभक्ति के कारण लोग उसे कैप्टन कहते थे।
Example 2: सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है · 2 marks · Short answerHarder board level
मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- संकेत: सरकंडे का चश्मा बच्चों जैसा बना था, यानी किसी बच्चे ने रखा।
- उम्मीद: कैप्टन के बाद भी देशभक्ति की भावना जीवित है।
- विस्तार: नई पीढ़ी देशभक्तों का सम्मान करना सीख रही है।
Answer: सरकंडे का चश्मा किसी बच्चे ने बनाकर रखा था। यह उम्मीद जगाता है कि कैप्टन के बाद भी देशभक्ति जीवित है और नई पीढ़ी उसे आगे बढ़ाएगी।
Example 3: हालदार साहब पहले मायूस क्यों हुए · 2 marks · Short answerHarder board level
हालदार साहब ने ड्राइवर को चौराहे पर रुकने से मना क्यों किया था? उस समय उनकी मनःस्थिति क्या थी?
Try it first, then show the solutionSolution
- कारण: कैप्टन की मृत्यु की खबर; अब मूर्ति पर चश्मा लगाने वाला कोई नहीं।
- सोच: 'मास्टर बनाना भूल गया... और कैप्टन मर गया'; बिना चश्मे की मूर्ति देखना असहनीय।
- मनःस्थिति: गहरी निराशा और दुख।
Answer: कैप्टन की मृत्यु के बाद हालदार साहब मान बैठे थे कि मूर्ति पर अब चश्मा नहीं होगा। बिना चश्मे की मूर्ति देखना उन्हें असहनीय था; वे निराश थे।
Example 4: पानवाले की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया · 2 marks · Short answerHarder board level
"वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल!" कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- टिप्पणी का स्वभाव: शारीरिक कमी का मज़ाक; संवेदनहीन और अनुचित।
- तर्क: देशभक्ति शरीर से नहीं, भावना से होती है; कैप्टन की भावना सच्ची थी।
- संतुलन: बाद में पानवाले का रोना दिखाता है कि यह ऊपरी मज़ाक था।
Answer: यह टिप्पणी अनुचित और संवेदनहीन है। किसी की शारीरिक कमी का मज़ाक उड़ाना गलत है। देशभक्ति शरीर से नहीं, भावना से होती है, जो कैप्टन में सच्ची थी।
Example 5: 'कौम' वाली पंक्ति का आशय · 2 marks · Short answerHOTS / competency
"क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है" — इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए और बताइए कि आज के संदर्भ में यह कितना सही है।
Try it first, then show the solutionSolution
- आशय: जो समाज देश पर सब कुछ न्योछावर करने वालों का मज़ाक उड़ाए, उसका भविष्य अंधकारमय है।
- व्यंग्य: वही समाज अपने स्वार्थ के लिए बिकने को तैयार है।
- आज: शहीदों और ईमानदार नागरिकों की उपेक्षा आज भी दिखती है, इसलिए कथन सार्थक है।
Answer: जो समाज देश पर सब कुछ न्योछावर करने वालों पर हँसता और स्वार्थ में बिकता है, उसका भविष्य अंधकारमय है। आज भी ईमानदारों की उपेक्षा इसे सार्थक बनाती है।
Example 6: देशभक्ति: सीमा पर ही नहीं · 2 marks · Short answerHOTS / competency
कैप्टन न सैनिक था, न नेता। फिर भी लेखक उसे देशभक्त मानता है। इस आधार पर बताइए कि एक विद्यार्थी अपने दैनिक जीवन में देशभक्ति कैसे दिखा सकता है।
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ: कैप्टन ने अपनी छोटी-सी सामर्थ्य से नेताजी का सम्मान किया।
- सिद्धांत: देशभक्ति छोटे, नियमित कामों में भी होती है।
- उदाहरण: सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा, स्वच्छता, नियम-पालन।
Answer: कैप्टन ने अपनी छोटी-सी सामर्थ्य से नेताजी का सम्मान किया। विद्यार्थी भी सार्वजनिक संपत्ति बचाकर, सफ़ाई रखकर और नियम मानकर रोज़ देशभक्ति दिखा सकता है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है? (25-30 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रसंग: कैप्टन की मृत्यु के बाद किसी बच्चे ने सरकंडे का चश्मा रखा | 1 |
| उम्मीद: देशभक्ति की भावना जीवित है; नई पीढ़ी उसे आगे बढ़ाएगी | 1 |
पठित गद्यांश (नेताजी का चश्मा) पर आधारित पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, जिनमें एक कथन-कारण प्रश्न शामिल है (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| तथ्य पर आधारित प्रश्न (किसने, क्यों, क्या) | 1 |
| शब्द या पद का अर्थ (जैसे कौतुकभरी, होम देना) | 1 |
| कथन-कारण: दोनों की सत्यता और संबंध जाँचना | 1 |
| पात्र के भाव या स्वभाव का अनुमान | 1 |
| गद्यांश का केंद्रीय भाव या निष्कर्ष | 1 |
Where students lose marks in स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: कैप्टन को सचमुच का फ़ौजी या आज़ाद हिंद फ़ौज का सिपाही लिख देना
पाठ में पानवाला साफ़ कहता है कि वह फ़ौज में नहीं गया; 'कैप्टन' उसकी देशभक्ति के कारण दिया गया नाम है।
Wrong working
कैप्टन आज़ाद हिंद फ़ौज का सिपाही था, इसलिए उसे कैप्टन कहते थे।
Right working
कैप्टन फ़ौजी नहीं था; नेताजी के प्रति उसकी श्रद्धा और चश्मा लगाने की लगन के कारण लोग उसे कैप्टन कहते थे।
Do this: पाठ में दिए तथ्य से आगे अनुमान को तथ्य बनाकर न लिखें।
Usually costs: 2 अंक के प्रश्न में पूरे 2 अंक
Mistake: सरकंडे का चश्मा कैप्टन का रखा हुआ बताना
कैप्टन मर चुका था; पाठ कहता है चश्मा वैसा था 'जैसा बच्चे बना लेते हैं'।
Wrong working
कैप्टन ने सरकंडे का चश्मा मूर्ति पर रखा।
Right working
कैप्टन की मृत्यु के बाद किसी बच्चे ने सरकंडे का चश्मा बनाकर मूर्ति पर रखा।
Do this: घटनाओं का क्रम (मृत्यु के बाद सरकंडा) याद रखें।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: 2 अंक के उत्तर में पूरी कहानी का सारांश लिख देना
25-30 शब्दों की सीमा है; परीक्षक केवल पूछे गए बिंदु पर अंक देता है।
Do this: पहले वाक्य में सीधा उत्तर, दूसरे में पाठ का प्रमाण; बस।
Usually costs: समय की बरबादी और आधा अंक तक
Mistake: 'मास्टर बनाना भूल गया' को मूर्तिकार की लापरवाही मानकर उसकी निंदा करना
लेखक मास्टर के प्रति सहानुभूति रखता है: शायद पत्थर में पारदर्शी चश्मा बनाना संभव न रहा हो।
Do this: लेखक के अनुमान (बनाना कठिन, टूट गया, निकल गया) को ध्यान में रखकर संतुलित उत्तर दें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: कथन-कारण प्रश्न में केवल कथन जाँचना
विकल्प (क) और (ख) का अंतर इसी पर है कि कारण कथन की व्याख्या करता है या नहीं।
Do this: तीन जाँचें करें: कथन सही? कारण सही? कारण से कथन समझ आता है?
Usually costs: 1 अंक
स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा: previous year questions
- Course A: Asked in 17 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 4.2 marks per paper; 18 questions in all, counting OR alternatives. In 3 of 4 sample papers.
- Course B: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).
Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.
Solved board questions from स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा
Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.
2026 Course A, set 3/1/1, Q8 · 6 marks · Very short answer
निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए : 3 × 2 = 6
- (i)2 marks
'नेताजी का चश्मा' पाठ में नेताजी की मूर्ति पर पत्थर का चश्मा न होना बड़ी बात नहीं थी, बड़ी बात तो असली चश्मे की मौजूदगी थी। क्यों? उपयुक्त तर्कों के आधार पर उत्तर लिखिए।
- (ii)2 marks
बालगोबिन भगत का बेटा सामान्य बच्चों से अलग कैसे था? वे उसके साथ किस प्रकार का बर्ताव करते थे?
- (iii)2 marks
किस आधार पर यह कहा जा सकता है कि 'लखनवी अंदाज़' पाठ में नवाब साहब खीरे के साथ देखे जाने पर ही असहज हो गए थे?
- (iv)2 marks
'एक कहानी यह भी' पाठ में मन्नू भंडारी ने स्वयं पर अपने पिता के प्रभाव को स्वीकारा है। उनके व्यक्तित्व के किन्हीं दो पहलुओं का उल्लेख कीजिए जो पिता के प्रभाव को दर्शाते हों।
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(i) कारण: मूर्ति पर असली चश्मा देशभक्तों के सम्मान की भावना और लोगों के हृदय में आज भी बसे देशप्रेम को दिखाता है।
- 1 mark
तर्क: कैप्टन को मूर्ति पर चश्मा न होना खटका और वह अपनी सामर्थ्य से उसे लगाता रहा। यह उदासीनता और उपहास के बजाय जागरूकता और सक्रियता का भाव है।
- 1 mark
(ii) बालगोबिन भगत का बेटा सुस्त और बोदा था, अर्थात मंदबुद्धि और काम में ढीला।
- 1 mark
भगत उसके साथ अधिक प्रेम और देखभाल का बर्ताव करते थे। उनके अनुसार ऐसे लोगों पर ज़्यादा ध्यान और स्नेह चाहिए।
- 1 mark
(iii) नवाब साहब ने लेखक को देखकर खीरे खाने से इनकार किया और बाद में फाँकों को सूँघकर फेंक दिया, जबकि उनकी खाने की तीव्र इच्छा थी। इससे उनकी असहजता झलकती है।
- 1 mark
उन्होंने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया और लेखक को अनदेखा किया। एकांत में विघ्न पड़ने का असंतोष स्पष्ट था।
- 1 mark
(iv) पहला पहलू: मन्नू जी में शक्की स्वभाव है। यश मिलने के बाद भी हीन-भावना और सहज विश्वास न कर पाने की प्रवृत्ति पिता से आई।
- 1 mark
दूसरा पहलू: देश और समाज के प्रति जागरूकता और अध्ययन-लेखन की प्रवृत्ति। पिता से मिली राजनीतिक चेतना ने उन्हें आज़ादी के आंदोलन से जोड़ा।
Answer: (i) असली चश्मा लोगों में देशभक्ति और जागरूकता का प्रतीक; (ii) सुस्त और बोदा; भगत अधिक स्नेह/देखभाल करते; (iii) खीरा देखकर संकोच, इनकार और फाँकें सूँघकर फेंकना; (iv) शक्की स्वभाव और देश-समाज के प्रति जागरूकता
Where the marks are
- (i) उपयुक्त कारण (1) और तर्क (1)
- (ii) बेटा कैसे अलग था (1) और भगत का बर्ताव (1)
- (iii) दो उपयुक्त बिंदु (1+1)
- (iv) व्यक्तित्व के दो पहलू (1+1)
2025 Course A, set 3/6/1, Q7 · 5 marks · Reading comprehensionCompetency-based
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : 5 × 1 = 5
हालदार साहब को पानवाले द्वारा एक देशभक्त का इस तरह मज़ाक उड़ाया जाना अच्छा नहीं लगा। मुड़कर देखा तो अवाक् रह गए। एक बेहद बूढ़ा मरियल-सा लँगड़ा आदमी सिर पर गांधी टोपी और आँखों पर काला चश्मा लगाए एक हाथ में एक छोटी-सी संदूकची और दूसरे हाथ में एक बाँस पर टँगे बहुत-से चश्मे लिए अभी-अभी एक गली से निकला था और अब एक बंद दुकान के सहारे अपना बाँस टिका रहा था। तो इस बेचारे की दुकान भी नहीं। फेरी लगाता है ! हालदार साहब चक्कर में पड़ गए। पूछना चाहते थे, इसे कैप्टन क्यों कहते हैं ? क्या यही इसका वास्तविक नाम है ? लेकिन पानवाले ने साफ़ बता दिया था कि अब वह इस बारे में और बात करने को तैयार नहीं। ड्राइवर भी बेचैन हो रहा था। काम भी था। हालदार साहब जीप में बैठकर चले गए।
- (क)1 mark
हालदार साहब किस बात पर आश्चर्यचकित रह गए ?
- (A)पानवाले द्वारा कैप्टन का मज़ाक उड़ाने पर
- (B)कैप्टन की शारीरिक अवस्था को देखकर
- (C)कैप्टन को चश्मा बेचते हुए देखकर
- (D)ड्राइवर को बेचैन होते देखकर
- (ख)1 mark
दिव्यांग होते हुए भी कैप्टन द्वारा फेरी लगाकर अपना गुज़र-बसर करना दर्शाता है कि वह ______ था। (रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए)
- (A)आत्मविश्वासी
- (B)स्वाभिमानी
- (C)सक्षम
- (D)स्वावलंबी
- (ग)1 mark
पानवाला किसका मज़ाक उड़ा रहा था ?
- (A)हालदार साहब का
- (B)नेताजी का
- (C)चश्मेवाले का
- (D)दुकानवाले का
- (घ)1 mark
हालदार साहब जीप में बैठकर क्यों चले गए ? – इस प्रश्न के उत्तर के लिए निम्नलिखित कथन पढ़िए और उचित विकल्प चुनकर लिखिए :
(i) पानवाला कैप्टन के विषय में और अधिक बात करने को तैयार नहीं था।
(ii) कैप्टन की शारीरिक अवस्था देखकर निराश हो गए थे।
(iii) उन्हें आवश्यक कार्यालय काम निपटाना था।
(iv) ड्राइवर बेचैन हो रहा था।
विकल्प :
(A) (i) और (iii) दोनों
(B) (ii) और (iv) दोनों
(C) (i) और (iv) दोनों
(D) केवल (i)- (A)(i) और (iii) दोनों
- (B)(ii) और (iv) दोनों
- (C)(i) और (iv) दोनों
- (D)केवल (i)
- (ङ)1 mark
कथन और कारण को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए :
कथन : हालदार साहब के मन में कैप्टन के प्रति सम्मान का भाव था।
कारण : सुभाष बाबू के प्रति कैप्टन के विशेष लगाव को देखकर वह उससे प्रभावित थे।- (A)कथन और कारण दोनों गलत हैं।
- (B)कारण गलत है किंतु कथन सही है।
- (C)कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण उसकी सही व्याख्या करता है।
- (D)कथन सही है किंतु कारण उसकी सही व्याख्या नहीं है।
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(क) हालदार साहब बूढ़े, मरियल, लँगड़े कैप्टन की शारीरिक दशा देखकर अवाक् रह गए। उत्तर: (B)।
- 1 mark
(ख) दिव्यांग होकर भी फेरी लगाकर गुज़ारा करना उसे स्वावलंबी दर्शाता है। उत्तर: (D)।
- 1 mark
(ग) पानवाला चश्मेवाले कैप्टन का मज़ाक उड़ा रहा था। उत्तर: (C)।
- 1 mark
(घ) गद्यांश के अनुसार पानवाला बात करने को तैयार नहीं था और ड्राइवर बेचैन था, इसलिए (i) और (iv)। उत्तर: (C)।
- 1 mark
(ङ) कथन और कारण दोनों सही हैं; सुभाष बाबू के प्रति लगाव ही सम्मान का कारण है। उत्तर: (C)।
Answer: (क) B; (ख) D; (ग) C; (घ) C; (ङ) C
Where the marks are
- (क) B (1 अंक)
- (ख) D (1 अंक)
- (ग) C (1 अंक)
- (घ) C (1 अंक)
- (ङ) C (1 अंक)
2024 Course A, set 3/4/1, Q8 · 2 marks · Reading comprehension
गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित बहुविकल्पी प्रश्नों का सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए : 2×1=2
- (i)1 mark
'नेताजी का चश्मा' पाठ का केन्द्र-बिंदु है :
- (A)देशभक्ति
- (B)दिव्यांग का साहस
- (C)नेताजी का चश्मा
- (D)नेताजी की मूर्ति
- (ii)1 mark
'लखनवी अंदाज़' के लेखक ने यात्रा के लिए सेकंड क्लास का टिकट क्यों लिया?
- (A)लंबा सफ़र तय करना था
- (B)पैसे अपेक्षाकृत कम लगते
- (C)नई कहानी के बारे में सोच सकने के लिए
- (D)नवाब साहब से दोस्ती करने के लिए
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(i) पाठ में हालदार साहब, कैप्टन और बच्चों के माध्यम से देशभक्ति की भावना केंद्र में है। उत्तर (A)।
- 1 mark
(ii) लेखक भीड़ से बचकर एकांत में नई कहानी के बारे में सोचना चाहता था। उत्तर (C)।
Answer: (i) A; (ii) C
Where the marks are
- (i) देशभक्ति (1 अंक)
- (ii) नई कहानी के बारे में सोचने के लिए (1 अंक)
Every स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा question, by year
Course A (21 questions, sample papers included)
- 2026
Set 3/1/1: Q8 (6 marks, solved)
Set 3/2/1: Q8 (6 marks, solved)
Set 3/3/1: Q10 (6 marks, solved)
Set 3/4/1: Q8 (6 marks, solved)
Set 3/5/1: Q8 (6 marks, solved)
Sample paper 2025-26: Q8 (6 marks, solved)
- 2025
Set 3/1/1: Q8 (6 marks, solved)
Set 3/2/1: Q8 (6 marks, solved)
Set 3/5/1: Q8 (6 marks, solved)
Set 3/6/1: Q7 (5 marks, solved)
Sample paper 2024-25: Q8 (6 marks, solved)
Course B (0 questions, sample papers included)
Practice questions on स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerBoard level
नेताजी की मूर्ति किसने बनाई थी और उसमें कौन-सी कमी थी?
Hint
मूर्ति के नीचे क्या लिखा था? आँखों पर क्या नहीं था?
Answer
उत्तर-बिंदु: कस्बे के हाई स्कूल के ड्राइंग मास्टर मोतीलाल; संगमरमर का चश्मा नहीं बना।
आदर्श उत्तर: मूर्ति कस्बे के हाई स्कूल के ड्राइंग मास्टर मोतीलाल ने बनाई थी। मूर्ति सुंदर थी, पर उसमें संगमरमर का चश्मा नहीं था, इसलिए असली चश्मा पहनाया गया।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
कैप्टन चश्मेवाले का रूप-रंग कैसा था?
Hint
उम्र, शरीर, टोपी, चश्मा और हाथ में क्या था?
Answer
उत्तर-बिंदु: बेहद बूढ़ा, मरियल, लँगड़ा; गांधी टोपी, काला चश्मा; एक हाथ में संदूकची, दूसरे में बाँस पर टँगे चश्मे।
आदर्श उत्तर: कैप्टन बेहद बूढ़ा, मरियल और लँगड़ा था। वह गांधी टोपी और काला चश्मा पहनता था। एक हाथ में संदूकची और दूसरे में बाँस पर टँगे चश्मे होते थे।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
पानवाले का एक रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।
Hint
शरीर, आदत (पान, तोंद, हँसी) और भीतर का स्वभाव — तीनों लिखें।
Answer
उत्तर-बिंदु: काला, मोटा, खुशमिज़ाज; मुँह में पान ठुँसा, हँसने पर तोंद थिरकती, लाल-काली बत्तीसी; ऊपर से मज़ाकिया, भीतर से संवेदनशील।
आदर्श उत्तर: पानवाला काला, मोटा और खुशमिज़ाज था। मुँह में पान ठुँसा रहता और हँसने पर तोंद थिरकती। वह कैप्टन का मज़ाक उड़ाता था, पर उसकी मृत्यु पर रो पड़ा।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
कैप्टन मूर्ति का चश्मा बार-बार क्यों बदल देता था? इससे उसकी किस विशेषता का पता चलता है?
Hint
ग्राहक को मूर्ति वाला फ्रेम चाहिए हो तो?
Answer
उत्तर-बिंदु: ग्राहक को मूर्ति वाला फ्रेम चाहिए तो उसे बेचकर दूसरा लगा देता; मूर्ति को बिना चश्मे के नहीं छोड़ता; गरीबी के बीच भी देशभक्ति।
आदर्श उत्तर: ग्राहक को मूर्ति वाला फ्रेम चाहिए होता तो कैप्टन उसे बेचकर मूर्ति पर दूसरा फ्रेम लगा देता। गरीब होकर भी वह नेताजी को बिना चश्मे के नहीं छोड़ता था।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level
हालदार साहब इतनी-सी बात पर भावुक क्यों हो उठे?
Hint
उन्होंने क्या मान लिया था और क्या देखा?
Answer
उत्तर-बिंदु: मान लिया था कि कैप्टन के बाद देशभक्ति खत्म; बच्चों का बनाया सरकंडे का चश्मा देखा; भावना जीवित देखकर आँखें भर आईं।
आदर्श उत्तर: हालदार साहब मान बैठे थे कि कैप्टन के बाद मूर्ति पर चश्मा नहीं लगेगा। बच्चों का बनाया सरकंडे का चश्मा देखकर देशभक्ति जीवित लगी, इसलिए आँखें भर आईं।
Q6 · 2 marks · Short answerHarder board level
हालदार साहब मूर्ति के ठीक सामने जाकर 'अटेंशन' में क्यों खड़े हो गए?
Hint
अटेंशन में खड़ा होना किस भाव का संकेत है?
Answer
उत्तर-बिंदु: अटेंशन सैनिक का सम्मान-भाव; नेताजी, कैप्टन और बच्चे की भावना के प्रति आदर; कृतज्ञता।
आदर्श उत्तर: अटेंशन में खड़ा होना सम्मान का प्रतीक है। सरकंडे का चश्मा देखकर हालदार साहब ने नेताजी, कैप्टन और उस बच्चे की देशभक्ति को सैनिक की तरह सलामी दी।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'नेताजी का चश्मा' कहानी का शीर्षक कितना सार्थक है? तर्क सहित लिखिए।
Hint
कहानी की हर घटना किस वस्तु के आसपास घूमती है, और वह किसका प्रतीक है?
Answer
उत्तर-बिंदु: पूरी कहानी चश्मे के इर्द-गिर्द; चश्मा देशभक्ति की भावना का प्रतीक; अंत में सरकंडे का चश्मा भी आशा का प्रतीक; शीर्षक सार्थक।
आदर्श उत्तर: पूरी कहानी नेताजी की मूर्ति के चश्मे के इर्द-गिर्द घूमती है। चश्मा देशभक्ति की भावना का प्रतीक है और सरकंडे का चश्मा आशा जगाता है। शीर्षक सार्थक है।
Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
कल्पना कीजिए कि सरकंडे का चश्मा बनाने वाला बच्चा आपकी कक्षा में है। उसके इस काम से आप क्या सीखेंगे?
Hint
साधन छोटे हों तो भी भावना कैसे प्रकट होती है?
Answer
उत्तर-बिंदु: साधन नहीं, भावना महत्त्वपूर्ण; किसी के छोड़े काम को आगे बढ़ाना; बड़ों के इंतज़ार के बिना पहल करना।
आदर्श उत्तर: उस बच्चे से मैं सीखूँगा कि सम्मान के लिए बड़े साधन नहीं, सच्ची भावना चाहिए। कैप्टन के बाद उसने बिना किसी के कहे काम आगे बढ़ाया; यही पहल है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.हालदार साहब कितने दिन बाद कस्बे से गुज़रते थे और क्यों?Show answer
हर पंद्रहवें दिन, कंपनी के काम के सिलसिले में।
2.मूर्ति किस चीज़ की थी और कितनी ऊँची थी?Show answer
संगमरमर की; टोपी की नोक से कोट के दूसरे बटन तक लगभग दो फुट ऊँची (बस्ट)।
3.नेताजी के कौन-से दो नारे मूर्ति देखकर याद आते थे?Show answer
'दिल्ली चलो' और 'तुम मुझे खून दो...'।
4.हालदार साहब कितने समय तक मूर्ति पर बदलते चश्मे देखते रहे?Show answer
दो साल तक।
5.अंत में मूर्ति पर कैसा चश्मा था?Show answer
सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा, जैसा बच्चे बना लेते हैं।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप बता सकते हैं कि मूर्ति बनाने का काम ड्राइंग मास्टर को क्यों दिया गया होगा (बजट, समय, जानकारी की कमी)?
- क्या आप पानवाले के दोनों रूप — मज़ाकिया और भावुक — एक-एक प्रमाण के साथ बता सकते हैं?
- क्या आप 'कौम' वाली पंक्ति का आशय 25-30 शब्दों में लिख सकते हैं?
- क्या आप समझा सकते हैं कि सरकंडे का चश्मा किस बात का प्रतीक है?
- क्या आप शीर्षक की सार्थकता दो तर्कों में सिद्ध कर सकते हैं?
स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा: frequently asked questions
'नेताजी का चश्मा' कहानी का मूल संदेश क्या है?
कहानी का संदेश है कि देशभक्ति केवल बड़े नेता या सैनिक ही नहीं करते। कैप्टन जैसे गरीब नागरिक और बच्चे भी अपने छोटे-छोटे कामों से देश के प्रति प्रेम दिखाते हैं। सच्ची भावना ही असली देशभक्ति है।
चश्मेवाले को कैप्टन क्यों कहा जाता था?
पाठ में इसका सीधा कारण नहीं दिया गया; हालदार साहब भी यह पूछना चाहते थे। इससे यह अनुमान लगता है कि नेताजी की मूर्ति के प्रति उसकी सैनिक जैसी निष्ठा और देशभक्ति के कारण लोग उसे सम्मान या मज़ाक में कैप्टन कहते थे। वह सेनानी नहीं था, बल्कि एक लँगड़ा फेरीवाला था।
मूर्ति पर पत्थर का चश्मा क्यों नहीं था?
पानवाले के अनुसार मूर्ति बनाने वाला मास्टर चश्मा बनाना भूल गया। लेखक अनुमान लगाता है कि शायद मास्टर पत्थर में पारदर्शी चश्मा बनाना तय नहीं कर पाया, या कोशिश में असफल रहा, या चश्मा टूट गया या निकल गया।
सरकंडे का चश्मा देखकर हालदार साहब भावुक क्यों हो गए?
कैप्टन की मृत्यु के बाद उन्हें लगा था कि मूर्ति अब बिना चश्मे के रहेगी। सरकंडे का चश्मा देखकर उन्हें पता चला कि बच्चों में भी देशप्रेम की भावना जीवित है। निराशा के बाद मिली इस आशा से उनकी आँखें भर आईं।
पानवाले का चरित्र कैसा है?
पानवाला काला, मोटा और खुशमिज़ाज़ आदमी है, जो हँसते हुए बात करता है। वह कैप्टन को लँगड़ा और पागल कहकर मज़ाक उड़ाता है। पर कैप्टन की मृत्यु पर उदास होकर आँखें पोंछता है, जिससे उसका संवेदनशील मन दिखता है।
इस पाठ से बोर्ड परीक्षा में कितने अंक के प्रश्न आ सकते हैं?
पाठ्यक्रम के अनुसार इस पाठ के किसी गद्यांश पर 1-1 अंक के पाँच MCQ आ सकते हैं। इसके अलावा 25-30 शब्दों वाले 2 अंक के प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-अ (002), कक्षा 10, 2026-27; NCERT क्षितिज भाग 2 (Reprint 2026-27), नेताजी का चश्मा