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HindiCBSE Class 10 · Chapter 2

साना-साना हाथ जोड़ि... Class 10: सारांश, पात्र और प्रश्न-उत्तर

Updated 14 October 2026 · Fact-checked

‘साना-साना हाथ जोड़ि...’ कृतिका भाग 2 में मधु कांकरिया का यात्रा-वृत्तांत है। इसमें लेखिका सिक्किम की यात्रा में हिमालय का सौंदर्य देखती हैं और साथ ही पहाड़ी श्रमिकों, बच्चों और सैनिकों के कठिन जीवन को समझती हैं। बोर्ड में इस पाठ से 50-60 शब्दों के 4 अंक वाले प्रश्न पूछे जाते हैं।

What साना-साना हाथ जोड़ि... is about

‘साना-साना हाथ जोड़ि...’ कृतिका भाग 2 का दूसरा पाठ है। इसकी लेखिका मधु कांकरिया हैं और यह एक यात्रा-वृत्तांत है। लेखिका गैंगटॉक से यूमथांग और कटाओ तक की यात्रा में प्रकृति का मनोरम रूप देखती हैं, पर साथ ही पत्थर तोड़ती पहाड़िनों, स्कूल जाते पहाड़ी बच्चों और सीमा पर तैनात फ़ौजियों का संघर्ष भी देखती हैं। इस तरह बाहर की यात्रा के साथ उनके मन की यात्रा भी चलती है।

बोर्ड प्रश्न पत्र में यह पाठ खंड ग के प्रश्न 11 में आता है। वहाँ कृतिका के पाठों पर तीन प्रश्न दिए जाते हैं, जिनमें से दो के उत्तर 50-60 शब्दों में लिखने होते हैं। हर प्रश्न 4 अंक का है। इस पुस्तक से गद्यांश पर आधारित प्रश्न नहीं आता, इसलिए पूरे पाठ की घटनाएँ, पात्र और संदेश अच्छी तरह याद होने चाहिए।

In real board papers: Course A, asked in 3 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 1.1 marks per paper; Course B, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026). See the questions

साना-साना हाथ जोड़ि...: summary

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

रात में जगमगाता गैंगटॉक शहर लेखिका को ऐसा लगता है मानो आसमान उलटा पड़ा हो और तारे नीचे टिमटिमा रहे हों। उस सम्मोहन में उनके होंठों पर वह प्रार्थना आती है जो उन्होंने एक नेपाली युवती से सीखी थी: ‘साना-साना हाथ जोड़ि...’। सुबह बादलों के कारण कंचनजंघा नहीं दिखती।

ड्राइवर-कम-गाइड जितेन नार्गे के साथ वे यूमथांग के लिए निकलती हैं। रास्ते में सफ़ेद बौद्ध पताकाएँ दिखती हैं। जितेन बताता है कि किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु पर एक सौ आठ श्वेत पताकाएँ लगती हैं और नए कार्य की शुरुआत पर रंगीन। कवी-लोंग स्टॉक में घूमता धर्म चक्र देखकर लेखिका सोचती हैं कि मैदान हो या पहाड़, देश की आस्थाएँ और विश्वास एक जैसे हैं।

ऊँचाई बढ़ने पर हिमालय विशाल होता जाता है। सेवन सिस्टर्स झरने में पाँव डुबोकर लेखिका को लगता है कि भीतर की बुराइयाँ बह गई हैं। धुंध और छाया-पहाड़ों के बीच वे स्वयं को ईश्वर के निकट पाती हैं, पर तभी पत्थर तोड़ती पहाड़ी औरतें दिखती हैं, जिनकी पीठ पर डोको में बच्चे बँधे हैं। बी.आर.ओ. का कर्मचारी बताता है कि ये रास्ते चौड़े कर रही हैं और पिछले महीने एक की जान भी गई। लेखिका को पलामू और गुमला की आदिवासी युवतियाँ याद आती हैं। जितेन उन्हें पहाड़ों की सुंदरता देखने को कहता है, पर वे सोचती हैं कि ये स्त्रियाँ कम लेकर समाज को बहुत अधिक लौटाती हैं।

आगे स्कूल से लौटते पहाड़ी बच्चे लिफ़्ट माँगते हैं। वे रोज़ लगभग तीन-साढ़े तीन किलोमीटर चढ़कर स्कूल जाते हैं और शाम को मवेशी चराते, पानी भरते, लकड़ियाँ ढोते हैं। रात लायुंग में तिस्ता के किनारे बीतती है, जहाँ लेखिका को लगता है कि हमारी पीढ़ी ने प्रकृति की लय से खिलवाड़ किया है। जितेन और सैलानी नाचते हैं, पचास वर्षीय मणि सबसे जानदार नाचती है।

लायुंग में बर्फ़ नहीं मिलती; एक युवक बताता है कि प्रदूषण से स्नो-फॉल घट रहा है। खतरनाक, धुंध भरे रास्ते से वे कटाओ पहुँचते हैं, जहाँ घुटनों तक बर्फ़ है। मणि हिमशिखरों को एशिया के ‘जल स्तंभ’ कहती है। फ़ौजी छावनियाँ देखकर लेखिका सैनिकों के त्याग से उदास होती हैं। यूमथांग थोड़ा फीका लगता है। चिप्स बेचती युवती स्वयं को ‘इंडियन’ बताती है। लौटते समय जितेन गुरुनानक के पदचिह्न वाले पत्थर, खेदुम और कैप्टन शेखर दत्ता के बारे में बताता है। लेखिका सोचती हैं कि मनुष्य की असमाप्त खोज का नाम ही सौंदर्य है।

Themes and message

प्राकृतिक सौंदर्य और लेखिका की आंतरिक यात्रा

यह पाठ केवल पहाड़, झरने और बर्फ़ का वर्णन नहीं है। हर दृश्य लेखिका के मन को बदलता है। झरने में पाँव डुबोकर उन्हें लगता है कि भीतर की तामसिकताएँ बह गईं। धुंध और छाया-पहाड़ों के बीच वे ईश्वर के निकट होने का अनुभव करती हैं। तिस्ता के किनारे उन्हें समझ आता है कि सच्चा सुख वहीं है जहाँ सब अपनी लय में हों। इससे पता चलता है कि यह यात्रा बाहर की कम और मन की अधिक है; लेखिका स्वयं इसे ‘खोज यात्रा’ कहती हैं।

From the text: झरने को लेखिका “जीवन की अनंतता का प्रतीक” मानती हैं और तिस्ता के किनारे कहती हैं: “हिमालय अब मेरे लिए कविता ही नहीं, दर्शन बन गया था।”

श्रम, अभाव और आम जनता का योगदान

स्वर्ग जैसे सौंदर्य के बीच पत्थर तोड़ती पहाड़िनें लेखिका का ध्यान तोड़ देती हैं। ये स्त्रियाँ पीठ पर बच्चे बाँधकर जान जोखिम में डालकर वही रास्ते बनाती हैं जिन पर सैलानी घूमते हैं। लेखिका को पलामू और गुमला की आदिवासी युवतियाँ याद आती हैं और वे समझती हैं कि आम लोगों की कहानी हर जगह एक-सी है। सुविधाएँ कुछ को मिलती हैं और कष्ट दूसरों के हिस्से आते हैं। फिर भी ये स्त्रियाँ हँसती हैं, यानी उनमें जीवन की शक्ति है।

From the text: लेखिका मन में सोचती हैं: “कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती हैं”; और उन्हें लगता है “सारी मलाई एक तरफ़; सारे आँसू, अभाव, यातना और वंचना एक तरफ़!”

भारत की सांस्कृतिक एकता

लेखिका देखती हैं कि पहाड़ के लोगों की आस्थाएँ भी मैदान के लोगों जैसी हैं। धर्म चक्र घुमाने से पाप धुलने का विश्वास उन्हें देश के बाकी हिस्सों के विश्वासों जैसा लगता है। जल हाथ में लेकर संकल्प करने की परंपरा उन्हें तिस्ता के किनारे याद आती है। यूमथांग में एक युवती का स्वयं को ‘इंडियन’ कहना उन्हें अच्छा लगता है। इससे पता चलता है कि भौगोलिक विविधता और वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद देश के लोगों की सोच और भावना एक सूत्र में बँधी है।

From the text: प्रेयर व्हील देखकर लेखिका कहती हैं: “तमाम वैज्ञानिक प्रगतियों के बावज़ूद इस देश की आत्मा एक जैसी”; चिप्स बेचती युवती कहती है: “नहीं मैं इंडियन हूँ”।

पर्यावरण-चेतना

पाठ प्रकृति की रक्षा का संदेश देता है। लायुंग में अप्रैल में भी बर्फ़ नहीं मिलती और एक युवक बताता है कि प्रदूषण के कारण स्नो-फॉल कम हो रहा है। मणि बताती है कि हिमशिखर सर्दी में बर्फ़ के रूप में जल जमा करते हैं और गर्मी में पिघलकर पानी देते हैं। जितेन कहता है कि वे लोग पहाड़, नदी, झरनों की पूजा करते हैं, इसलिए गंदगी नहीं फैलाते। लेखिका स्वीकार करती हैं कि हमारी पीढ़ी ने प्रकृति से खिलवाड़ करके बड़ा अपराध किया है।

From the text: तिस्ता के किनारे लेखिका का विचार: “प्रकृति की इस लय, ताल और गति से खिलवाड़ कर अक्षम्य अपराध किया है”; रास्ते में लिखा था ‘थिंक ग्रीन।’

सैनिकों का त्याग और देश-सेवा

कटाओ के आगे बॉर्डर एरिया में लेखिका फ़ौजी छावनियाँ देखती हैं। उस समय तापमान माइनस 15 डिग्री था। जहाँ सैलानी पाँच मिनट में ठिठुरने लगते हैं, वहाँ जवान पौष और माघ की कड़ाके की ठंड में भी तैनात रहते हैं। एक फ़ौजी की उदास हँसी और छावनी पर लिखा वाक्य लेखिका का मन पिघला देते हैं। महानगर में रहते हुए उन्होंने कभी इस त्याग के बारे में नहीं सोचा था। इससे पता चलता है कि हमारी सुरक्षित नींद के पीछे किसी का कठोर परिश्रम छिपा है।

From the text: फ़ौजी कहता है: “आप चैन की नींद सो सकें, इसीलिए तो हम यहाँ पहरा दे रहे हैं।” छावनी पर लिखा था: ‘वी गिव अवर टुडे फॉर योर टुमारो।’

Characters

लेखिका (मधु कांकरिया)

कथावाचिका; यात्रा का अनुभव उन्हीं की दृष्टि से बताया गया है।

  • प्रकृति-प्रेमी और भावुक
  • संवेदनशील, दूसरों का दुख महसूस करने वाली
  • चिंतनशील और जिज्ञासु
  • आध्यात्मिक दृष्टि वाली

सैलानी गाते हैं, पर वे ‘किसी ऋषि की तरह शांत’ रहकर दृश्य को भीतर भरना चाहती हैं। पत्थर तोड़ती पहाड़िनों को देखकर वे गमगीन हो जाती हैं और फ़ौजियों के बारे में सोचकर उनका मन उदास हो जाता है। वे जितेन से धर्म चक्र, खेदुम और पताकाओं के बारे में पूछती रहती हैं। कटाओ में उन्हें लगता है कि ऐसी ही दिव्यता के बीच ऋषियों ने वेदों की रचना की होगी।

जितेन नार्गे

ड्राइवर-कम-गाइड, जो पूरी यात्रा में लेखिका को सिक्किम की जानकारी देता है।

  • जानकार और कुशल गाइड
  • हँसमुख और मस्तमौला
  • अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करने वाला
  • सावधान और अनुभवी चालक

वह पताकाओं, धर्म चक्र, कवी-लोंग स्टॉक, गुरुनानक के पदचिह्न, खेदुम और गंतोक के असली नाम के बारे में बताता है। लायुंग में वह नाचना शुरू करता है और बर्फ़ देखकर गाने लगता है। लेखिका के ‘राम रोछो’ कहने पर भाषा के गर्व से उसकी आँखें चमक उठती हैं। कटाओ के धुंध भरे रास्ते पर वह ‘लगभग अंदाज़ से’ सँभलकर गाड़ी चलाता है।

मणि

लेखिका की पचास वर्षीय सहेली और सहयात्री।

  • जीवन से भरपूर और आनंदमयी
  • तर्क करने वाली, स्पष्टवादी
  • प्रकृति के प्रति कृतज्ञ
  • दार्शनिक सोच वाली

लायुंग में वह ऐसा जानदार नृत्य करती है कि सब उसे देखते रह जाते हैं। जितेन जब कटाओ को हिंदुस्तान का स्विट्ज़रलैंड कहता है तो वह तुरंत प्रतिवाद करती है। वह हिमशिखरों को ‘जल स्तंभ’ कहकर प्रकृति की जल-संचय व्यवस्था समझाती है और माथा नवाकर नदियों-हिमशिखरों का ऋण मानती है।

पत्थर तोड़ती पहाड़ी स्त्रियाँ

सामूहिक पात्र, जो आम जनता के श्रम और संघर्ष का प्रतीक हैं।

  • परिश्रमी
  • साहसी, जान जोखिम में डालने वाली
  • ममतामयी
  • कठिनाई में भी प्रसन्न रहने वाली

वे हाथों में कुदाल-हथौड़े लेकर पहाड़ी रास्ते चौड़े करती हैं। कर्मचारी बताता है कि पिछले महीने एक की जान भी गई थी। कई की पीठ पर डोको में बच्चे बँधे थे, यानी ‘मातृत्व और श्रम साधना साथ-साथ’। फिर भी वे किसी बात पर खिलखिलाकर हँस पड़ती हैं।

सीमा पर तैनात फ़ौजी

गौण पात्र, जो देश के लिए त्याग का प्रतीक है।

  • कर्तव्यनिष्ठ
  • त्यागी
  • सहनशील

माइनस 15 डिग्री की ठंड में भी वह पहरा देता है। लेखिका की सहानुभूति पर वह उदास हँसी के साथ कहता है कि लोग चैन की नींद सो सकें, इसीलिए वे यहाँ हैं।

How it is written

DeviceExampleEffect
विरोधाभास (सौंदर्य और संघर्ष का आमना-सामना)‘स्वर्गीय सौंदर्य’ के बीच पत्थर तोड़ती पहाड़िनें, जिन्हें देखकर लेखिका कहती हैं: “भूख, मौत, दैन्य और ज़िंदा रहने की यह जंग!”सुंदर दृश्यों के तुरंत बाद कठोर श्रम का चित्र आने से पाठक चौंकता है। इससे पता चलता है कि पर्यटन का आनंद आम लोगों के परिश्रम पर टिका है। पाठ का सामाजिक संदेश इसी विरोध से उभरता है।
सजीव चित्रात्मकता और उपमाएँरास्ते “जलेबी की तरह घुमावदार”, घाटियों में घर “ताश के घरों की तरह”, जल-प्रपात “दूध की धार की तरह झर-झर गिरते”।रोज़मर्रा की चीज़ों से तुलना करने पर पहाड़ी दृश्य आँखों के सामने आ जाते हैं। पाठक भी यात्रा का अनुभव करने लगता है।
प्रतीकझरना “जीवन की अनंतता का प्रतीक” है; पहाड़िनों की हँसी से “वह सारा खंडहर ताजमहल बन गया था”।झरना जीवन के निरंतर बहने का भाव देता है। खंडहर का ताजमहल बनना दिखाता है कि श्रमिकों की हँसी उजाड़ जगह को भी सुंदर बना देती है।
मिली-जुली भाषा और स्थानीय रंगनेपाली वाक्य “राम रोछो”, ‘फेरी भेटुला’, अंग्रेज़ी बोर्ड ‘इफ यू आर मैरिड, डाइवोर्स स्पीड।’ और उर्दू शब्द जैसे ‘रफ़्ता-रफ़्ता’, ‘शिद्दत’।नेपाली बोली और सड़क के बोर्ड पाठ को सच्चा और स्थानीय बनाते हैं। विविध शब्दों से भाषा जीवंत और सहज लगती है।
आत्मकथात्मक शैली और आत्म-चिंतनलेखिका मन-ही-मन सोचती हैं: “शायद मनुष्य की इसी असमाप्त खोज का नाम सौंदर्य है”।‘मैं’ शैली में लिखे इस वृत्तांत में घटनाओं के साथ लेखिका के विचार भी चलते हैं। इससे बाहरी यात्रा के साथ आंतरिक यात्रा भी दिखाई देती है।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • तमाम वैज्ञानिक प्रगतियों के बावज़ूद इस देश की आत्मा एक जैसी

    लेखिका (कथावाचक): कवी-लोंग स्टॉक के पास जितेन बताता है कि धर्म चक्र घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं।

    लेखिका देखती हैं कि पहाड़ और मैदान के लोगों के विश्वास एक-से हैं। यह कथन भारत की सांस्कृतिक एकता को दिखाता है।

  • सारी मलाई एक तरफ़; सारे आँसू, अभाव, यातना और वंचना एक तरफ़!

    लेखिका (कथावाचक): पत्थर तोड़ती पहाड़िनों और पलामू-गुमला की आदिवासी युवतियों की तुलना करते हुए।

    यह समाज की असमानता बताता है: सुख-सुविधा कुछ लोगों को मिलती है और कष्ट आम श्रमिकों को।

  • कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती हैं

    लेखिका (मन ही मन): जितेन के यह कहने के बाद कि इन्हें नहीं, पहाड़ों की सुंदरता देखिए।

    लेखिका श्रमिक स्त्रियों को ‘जीवन का प्रति संतुलन’ मानती हैं। यह आम जनता के योगदान का सम्मान है।

  • प्रकृति की इस लय, ताल और गति से खिलवाड़ कर अक्षम्य अपराध किया है

    लेखिका (कथावाचक): लायुंग में तिस्ता नदी के किनारे शांत वातावरण में बैठी लेखिका का चिंतन।

    यह पर्यावरण-चेतना का मुख्य कथन है। लेखिका अपनी पीढ़ी को प्रकृति के विनाश का दोषी मानती हैं।

  • हिमालय अब मेरे लिए कविता ही नहीं, दर्शन बन गया था।

    लेखिका (कथावाचक): लायुंग में सुख-शांति के रहस्य का बोध होने के बाद।

    यह आंतरिक यात्रा का संकेत है: हिमालय अब केवल सुंदर दृश्य नहीं, जीवन को समझने का माध्यम बन गया।

  • आप चैन की नींद सो सकें, इसीलिए तो हम यहाँ पहरा दे रहे हैं।

    एक फ़ौजी: कटाओ के आगे बॉर्डर एरिया में लेखिका कड़ी ठंड में होने वाली तकलीफ़ के बारे में पूछती हैं।

    यह सैनिकों के त्याग और कर्तव्य-भाव को दिखाता है और नागरिकों को उनके प्रति कृतज्ञ होने की याद दिलाता है।

  • मंज़िल से कहीं ज़्यादा रोमांचक होता है मंज़िल तक का सफ़र।

    लेखिका (कथावाचक): कटाओ की बर्फ़ देखने के बाद यूमथांग पहुँचकर वह थोड़ा फीका लगता है।

    इससे पता चलता है कि यात्रा के अनुभव और रास्ते की खोज ही असली आनंद देते हैं।

  • नहीं मैं इंडियन हूँ

    यूमथांग में चिप्स बेचती सिक्किमी युवती: लेखिका पूछती हैं कि क्या वह सिक्किमी है।

    लेखिका के अनुसार सिक्किम के लोग भारत में घुलमिल गए हैं। यह राष्ट्रीय एकता का भाव है।

साना-साना हाथ जोड़ि... in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

सौंदर्य के पीछे का श्रम

मान लीजिए आप परिवार के साथ किसी हिल स्टेशन गए हैं। सुंदर सड़क पर सेल्फ़ी लेते समय आप देखते हैं कि कुछ मज़दूर तेज़ धूप में उसी सड़क की मरम्मत कर रहे हैं।

'साना-साना हाथ जोड़ि' के आधार पर बताइए कि उस समय आपकी सोच कैसी होनी चाहिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पाठ: पत्थर तोड़ती स्त्रियाँ देखकर लेखिका ने सौंदर्य के पीछे का संघर्ष देखा।
  2. जितेन ने कहा, पहाड़ों की सुंदरता देखिए; पर लेखिका श्रम को अनदेखा नहीं कर सकीं।
  3. सोच: सुंदर सड़क इन्हीं के श्रम से बनी है; उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता।

Answer: मुझे सोचना चाहिए कि जिस सुंदर सड़क पर मैं सेल्फ़ी ले रहा हूँ, वह इन्हीं मज़दूरों के श्रम से बनी है। लेखिका की तरह मुझे उनके कष्ट को देखना और उनके प्रति सम्मान रखना चाहिए।

Memory hook: सेल्फ़ी के पीछे भी कोई 'श्रम-सुंदरी' है।

प्रदूषण और घटती बर्फ़

कल्पना कीजिए कि आपके दादाजी बताते हैं कि उनके बचपन में आपके शहर में सर्दियों में घना कोहरा और ठिठुरन होती थी, पर अब सर्दियाँ छोटी हो गई हैं।

लायुंग के प्रसंग से इस बदलाव को जोड़कर बताइए कि हम क्या कर सकते हैं।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पाठ: प्रदूषण से लायुंग में बर्फ़ गिरना कम हुआ।
  2. लेखिका: प्रकृति की लय से खिलवाड़ अक्षम्य अपराध।
  3. हमारा कर्तव्य: वाहन कम, पेड़ अधिक, ऊर्जा की बचत।

Answer: जैसे प्रदूषण से लायुंग में बर्फ़ कम हुई, वैसे ही हमारे मौसम भी बदल रहे हैं। हमें कम दूरी पर पैदल या साइकिल से जाना, पेड़ लगाना और बिजली बचाना चाहिए।

Memory hook: लायुंग में बर्फ़ नहीं: प्रकृति की लय तोड़ोगे, तो मौसम रूठेगा।

विविधता में एकता

मान लीजिए आपके स्कूल में सिक्किम से आए एक नए सहपाठी को कुछ बच्चे 'विदेशी' कहकर चिढ़ाते हैं।

पाठ के आधार पर इन बच्चों को समझाइए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पाठ: यूमथांग में चिप्स बेचती युवती ने गर्व से कहा, 'मैं इंडियन हूँ'।
  2. लेखिका: पहाड़ हो या मैदान, देश की आत्मा एक है।
  3. समझाना: रूप-रंग या भाषा अलग होने से कोई पराया नहीं होता।

Answer: मैं उन्हें बताऊँगा कि सिक्किम की युवती ने भी गर्व से कहा था, 'मैं इंडियन हूँ'। लेखिका के अनुसार पहाड़ हो या मैदान, देश की आत्मा एक है; इसलिए नया सहपाठी हमारा ही है।

Memory hook: 'नहीं, मैं इंडियन हूँ': अलग चेहरा, एक देश।

Topics in this chapter

How the board asks साना-साना हाथ जोड़ि...

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
घटना और उसका कारणपाठ के किसी प्रसंग पर ‘कब और क्यों’ पूछा जाता है, जैसे लेखिका को कब लगा कि देश की आत्मा एक है, या किन दृश्यों ने उन्हें झकझोर दिया।पहले प्रसंग (स्थान और घटना) बताइए, फिर कारण लिखिए, फिर लेखिका का निष्कर्ष और अंत में एक पंक्ति में अपना मत। 50-60 शब्दों में लगभग चार बिंदु रखें।
दो पक्षों की व्याख्याकिसी कथन के आधार पर दो पहलू समझाने को कहा जाता है, जैसे प्रकृति-चित्रण और लेखिका की आंतरिक यात्रा।दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग दो उदाहरण दीजिए (जैसे झरना, तिस्ता और फिर पहाड़िनें, फ़ौजी)। अंत में दोनों को जोड़कर निष्कर्ष लिखें।
पात्र का चरित्र-चित्रणजितेन नार्गे, मणि या पहाड़ी स्त्रियों की विशेषताएँ, या एक कुशल गाइड के गुण पूछे जा सकते हैं।तीन-चार गुण लिखिए और हर गुण के साथ पाठ की एक घटना जोड़िए। केवल गुणों की सूची से पूरे अंक नहीं मिलते।
विश्वास या मान्यता का मूल्यांकनखेदुम, धर्म चक्र या पताकाओं से जुड़ी मान्यता बताकर पूछा जाता है कि क्या उसे सही माना जा सकता है, तर्क सहित।पहले पाठ के अनुसार मान्यता बताइए, फिर उसका अच्छा प्रभाव (जैसे सफ़ाई और प्रकृति-रक्षा), फिर अपना तर्कपूर्ण मत। अंधविश्वास और उपयोगी परिणाम में अंतर स्पष्ट करें।
आज के जीवन से जोड़ना (मूल्य-आधारित)प्रदूषण, प्रकृति से खिलवाड़, श्रमिकों या सैनिकों के प्रति हमारे कर्तव्य पर आपकी भूमिका पूछी जाती है।पाठ का एक संदर्भ देकर शुरुआत कीजिए, फिर दो-तीन व्यावहारिक सुझाव लिखिए जो एक विद्यार्थी कर सके। उत्तर पाठ से जुड़ा रहे।

Tricks to remember साना-साना हाथ जोड़ि...

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • यात्रा का क्रम: 'गंतोक-पताका-धर्मचक्र-झरना-पत्थर-बच्चे-लायुंग-कटाओ-यूमथांग'

    रात का गंतोक (उलटा आसमान) → श्वेत-रंगीन पताकाएँ → कवी-लोंग स्टॉक का धर्म चक्र → सेवन सिस्टर्स झरना → पत्थर तोड़ती स्त्रियाँ → स्कूल से लौटते बच्चे → लायुंग (तिस्ता, बर्फ़ नहीं) → कटाओ (घुटनों तक बर्फ़, जल स्तंभ, फ़ौजी) → यूमथांग ('मैं इंडियन हूँ') → लौटते हुए गुरुनानक के पदचिह्न, खेदुम।

    Use it when: किसी भी प्रश्न का प्रसंग यात्रा के सही पड़ाव से जोड़ें।

  • जितेन की चार जानकारियाँ

    'पताका, चक्र, कटाओ, खेदुम': 108 श्वेत पताकाएँ; धर्म चक्र से पाप धुलना; कटाओ हिंदुस्तान का स्विट्ज़रलैंड; खेदुम में गंदगी फैलाने वाला मर जाएगा।

    Use it when: गाइड वाले प्रश्न में तथ्य।

साना-साना हाथ जोड़ि...: board-level solved questions

Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: मेहनतकश बादशाहों का शहर · 4 marks · Long answerBoard level

गंतोक (गैंगटॉक) को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' क्यों कहा गया है? (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. गंतोक के लोग कठिन पहाड़ी जीवन में कड़ी मेहनत करते हैं।
  2. पत्थर तोड़ना, भारी बोझ ढोना, ऊँचे रास्ते चढ़कर स्कूल जाना उनकी दिनचर्या है।
  3. फिर भी वे सुख-शांति और मस्ती से, बादशाहों की तरह जीते हैं।
  4. इसलिए मेहनत और मस्ती का यह मेल 'मेहनतकश बादशाह' कहलाता है।

Answer: गंतोक के लोग कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में कड़ी मेहनत करते हैं। स्त्रियाँ पत्थर तोड़ती हैं, लोग पीठ पर भारी बोझ ढोते हैं और बच्चे रोज़ ऊँची चढ़ाई चढ़कर स्कूल जाते हैं। इतनी कठिनाइयों के बीच भी वे मस्ती और आत्मसम्मान से जीते हैं, इसलिए लेखिका ने गंतोक को मेहनतकश बादशाहों का शहर कहा है।

Example 2: श्वेत और रंगीन पताकाएँ · 4 marks · Long answerHarder board level

कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओं का फहराना किन अलग-अलग अवसरों की ओर संकेत करता है? (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. श्वेत पताकाएँ: किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु पर, उसकी आत्मा की शांति के लिए।
  2. संख्या: एक सौ आठ श्वेत पताकाएँ शहर से दूर किसी पवित्र स्थान पर।
  3. रंगीन पताकाएँ: किसी नए कार्य की शुरुआत पर।
  4. निष्कर्ष: पताकाएँ जीवन के शोक और शुभ, दोनों अवसरों से जुड़ी आस्था हैं।

Answer: जितेन ने बताया कि किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु होने पर उसकी आत्मा की शांति के लिए शहर से दूर किसी पवित्र स्थान पर एक सौ आठ श्वेत पताकाएँ फहराई जाती हैं। किसी नए कार्य की शुरुआत पर रंगीन पताकाएँ लगाई जाती हैं। इस तरह पताकाएँ शोक और शुभ, दोनों अवसरों की आस्था दिखाती हैं।

Example 3: धर्म चक्र और देश की आत्मा · 4 marks · Long answerHarder board level

कवी-लोंग स्टॉक में घूमते हुए धर्म चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक-सी क्यों दिखाई दी? (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. जितेन: धर्म चक्र (प्रेयर व्हील) घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं।
  2. लेखिका को मैदानों की वैसी ही मान्यताएँ याद आईं।
  3. विचार: वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद आस्थाएँ, विश्वास, अंधविश्वास और पाप-पुण्य की धारणाएँ एक जैसी।
  4. निष्कर्ष: पहाड़ हो या मैदान, देश की आत्मा एक है।

Answer: जितेन ने बताया कि धर्म चक्र घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं। यह सुनकर लेखिका को मैदानी भारत की ऐसी ही मान्यताएँ याद आईं। उन्हें लगा कि चाहे मैदान हो या पहाड़, तमाम वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद लोगों की आस्थाएँ, विश्वास, अंधविश्वास और पाप-पुण्य की धारणाएँ एक जैसी हैं; देश की आत्मा एक है।

Example 4: पत्थर तोड़ती पहाड़ी स्त्रियाँ · 4 marks · Long answerHarder board level

पत्थर तोड़ती पहाड़ी स्त्रियों को देखकर लेखिका के मन में क्या विचार आए? (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. दृश्य: कोमल-सी स्त्रियाँ पत्थर तोड़ रही थीं, पीठ पर डोको में बच्चे बँधे थे।
  2. जानकारी: वे रास्ते चौड़े कर रही थीं, काम में जान भी चली जाती है।
  3. विचार: सौंदर्य के बीच भूख, मौत और ज़िंदा रहने की जंग; 'सारी मलाई एक तरफ़, सारे आँसू एक तरफ़'।
  4. निष्कर्ष: ये कितना कम लेकर समाज को कितना अधिक लौटाती हैं।

Answer: पीठ पर डोको में बच्चे बाँधे पत्थर तोड़ती स्त्रियों को देखकर लेखिका का मन दुख से भर गया। उन्हें लगा कि इस अपार सौंदर्य के बीच भी भूख, मौत और ज़िंदा रहने की जंग है। उन्होंने सोचा कि ये स्त्रियाँ कितना कम लेकर भी समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती हैं।

Example 5: प्रकृति से खिलवाड़ · 4 marks · Long answerHOTS / competency

लायुंग में बर्फ़ न मिलने और तिस्ता के किनारे की रात ने लेखिका को किस चिंता से भर दिया? आज के संदर्भ में इस चिंता पर विचार कीजिए। (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. तथ्य: एक युवक ने बताया कि प्रदूषण के कारण स्नो-फॉल लगातार कम हो रहा है।
  2. लेखिका का विचार: हमारी पीढ़ी ने प्रकृति की लय, ताल और गति से खिलवाड़ कर अक्षम्य अपराध किया है।
  3. आज: पिघलते हिमनद, घटती बर्फ़, पानी का संकट।
  4. सीख: प्रदूषण कम करना और प्रकृति का सम्मान करना।

Answer: लायुंग में एक युवक ने बताया कि प्रदूषण के कारण बर्फ़ गिरना कम हो रहा है। लेखिका को लगा कि हमारी पीढ़ी ने प्रकृति की लय और गति से खिलवाड़ करके अक्षम्य अपराध किया है। आज भी घटती बर्फ़ और पानी का संकट इस चिंता को सही सिद्ध करते हैं, इसलिए प्रदूषण कम करना ज़रूरी है।

Example 6: 'जल स्तंभ' और प्रकृति की व्यवस्था · 4 marks · Long answerHOTS / competency

मणि ने हिमशिखरों को 'पूरे एशिया के जल स्तंभ' क्यों कहा? प्रकृति की इस व्यवस्था से हमें क्या सीख मिलती है? (लगभग 50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. व्यवस्था: सर्दियों में बर्फ़ के रूप में जल-संग्रह।
  2. गर्मियों में यही बर्फ़ पिघलकर नदियाँ बनती है और प्यास बुझाती है।
  3. मणि का भाव: हम पर नदियों और हिमशिखरों का बड़ा ऋण है।
  4. सीख: जल-संरक्षण करना और प्रकृति का ऋण मानना।

Answer: मणि के अनुसार प्रकृति सर्दियों में बर्फ़ के रूप में पानी जमा कर लेती है और गर्मियों में यही बर्फ़ पिघलकर जलधारा बनती है, जो सूखे कंठों को तरावट देती है। इसलिए हिमशिखर एशिया के जल स्तंभ हैं। इससे सीख मिलती है कि हमें भी पानी बचाना चाहिए और प्रकृति का ऋण मानना चाहिए।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' क्यों कहा गया है? (लगभग 50-60 शब्द) (4 marks)

StepMarks
कठिन पहाड़ी जीवन का उल्लेख1
मेहनत के उदाहरण (पत्थर तोड़ना, बोझ ढोना, बच्चों की चढ़ाई)1
'बादशाह': कठिनाइयों में भी मस्ती और आत्मसम्मान1
निष्कर्ष और भाषा, शब्द-सीमा1

Where students lose marks in साना-साना हाथ जोड़ि...

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: लेखिका की सहेली मणि और गाइड जितेन को एक मान लेना

    मणि लेखिका की सहयात्री सहेली है (जल स्तंभ वाली बात उसकी है); जितेन नार्गे ड्राइवर-कम-गाइड है।

    Wrong working

    जितेन ने हिमशिखरों को एशिया के जल स्तंभ कहा।

    Right working

    मणि ने हिमशिखरों को एशिया के जल स्तंभ कहा।

    Do this: किसने क्या कहा, यह याद रखें: जितेन = जानकारी, मणि = दार्शनिक टिप्पणी।

    Usually costs: 1-2 अंक

  • Mistake: 'मेहनतकश बादशाह' में केवल मेहनत लिखना

    'बादशाह' शब्द का अर्थ भी चाहिए: कठिन जीवन में भी मस्ती और आत्मसम्मान।

    Do this: दोनों शब्दों का अर्थ जोड़कर उत्तर दें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: 4 अंक के उत्तर को 20-25 शब्दों में निपटा देना

    कृतिका के प्रश्न लगभग 50-60 शब्दों के होते हैं; मूल्यांकन में 3-4 बिंदु देखे जाते हैं।

    Do this: हर उत्तर में कम से कम तीन बिंदु और एक निष्कर्ष।

    Usually costs: 1-2 अंक

  • Mistake: श्वेत और रंगीन पताकाओं के अवसर उलट देना

    श्वेत: मृत्यु पर (108); रंगीन: नए कार्य की शुरुआत पर।

    Do this: श्वेत = शांति/शोक, रंगीन = शुभारंभ।

    Usually costs: 2 अंक

साना-साना हाथ जोड़ि...: previous year questions

  • Course A: Asked in 3 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 1.1 marks per paper; 3 questions in all, counting OR alternatives. In 0 of 4 sample papers.
  • Course B: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).

Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.

Solved board questions from साना-साना हाथ जोड़ि...

Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.

2024 Course A, set 3/1/1, Q13 · 8 marks · Short answer

पूरक पाठ्यपुस्तक के पाठों पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए :

  1. (क)

    'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ में लेखिका को कब और क्यों लगा कि तमाम भौगोलिक विविधता और वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद भारत की आत्मा एक ही है?

    4 marks
  2. (ख)

    'माता का अँचल' पाठ में जिस ग्राम्य जीवन और संस्कृति का उल्लेख है, उसमें वर्तमान में क्या अंतर आया है? क्या उस अंतर को आप सकारात्मक मानते हैं?

    4 marks
  3. (ग)

    'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए कि क्या एक रचनाकार और उसकी रचनाएँ बाहरी दबाव से भी प्रभावित हो सकती हैं? आपकी दृष्टि में वे कौन-से बाहरी दबाव हैं जो रचनाकार की रचना को प्रभावित करते हैं?

    4 marks
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (क) कब: लेखिका ने कुटिया में घूमता चक्र देखा और जाना कि उसे घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं। तब उन्हें यह लगा। क्यों: पहाड़ हो या मैदान, धार्मिक आस्थाएँ, विश्वास और पाप-पुण्य, स्वर्ग-नरक की धारणाएँ पूरे भारत में एक जैसी हैं, इसलिए भौगोलिक विविधता और वैज्ञानिक प्रगति के बाद भी भारत की आत्मा एक है।

    4 marks
  2. (ख) पाठ में गाँव शांत, प्रकृति के निकट, सरल जीवन और खेल-मनोरंजन के सुलभ साधनों वाला है। अब गाँवों में आधुनिक तकनीक आ गई है, पर कृत्रिमता और शहरी चकाचौंध बढ़ी है और प्रकृति से दूरी हो गई है। मेरे विचार से सुविधाएँ अच्छी हैं, पर सादगी और आत्मीयता का खोना नकारात्मक है, इसलिए यह अंतर मिला-जुला है।

    4 marks
  3. (ग) हाँ, रचनाकार बाहरी दबाव से प्रभावित हो सकता है। संपादकों का आग्रह, प्रकाशकों की माँग और रचनाकार की आर्थिक विवशता ऐसे दबाव हैं, जो लेखक को समय-सीमा या विषय के अनुसार लिखने को बाध्य करते हैं, जैसे लेखक ने 'हिरोशिमा' कविता संपादक के कहने पर लिखी। (किन्हीं दो उपभागों पर 8 अंक; तीसरा अतिरिक्त है।)

Answer: (क) चक्र देखकर और पाप-पुण्य की समान मान्यताओं से; (ख) सरलता से आधुनिकता व कृत्रिमता की ओर, मिला-जुला अंतर; (ग) हाँ, संपादकों-प्रकाशकों की माँग और आर्थिक विवशता

Where the marks are

  • (क) 'कब' का उपयुक्त उत्तर (2 अंक)
  • (क) 'क्यों' का उपयुक्त उत्तर (2 अंक)
  • (ख) पाठ के ग्रामीण जीवन और वर्तमान का अंतर (2 अंक)
  • (ख) व्यक्तिगत दृष्टिकोण से उपयुक्त उत्तर (2 अंक)
  • (ग) बाहरी दबाव के बिंदु (3 अंक)
  • (ग) दूसरे हिस्से का उपयुक्त उत्तर (1 अंक)

See it in the full 2024 board paper, set 3/1/1

Every साना-साना हाथ जोड़ि... question, by year

Course A (3 questions, sample papers included)

2024

Set 3/1/1: Q13 (8 marks, solved)

Set 3/2/1: Q13 (8 marks, solved)

2023

Set 3/2/1: Q13 (8 marks, solved)

Course B (0 questions, sample papers included)

Practice questions on साना-साना हाथ जोड़ि...

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 4 marks · Long answerBoard level

    झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका को किस तरह सम्मोहित कर रहा था? (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    'आसमान जैसे उलटा पड़ा था' वाली कल्पना याद करें।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: रात में जगमगाता गंतोक; लगा आसमान उलटा पड़ा है और तारे नीचे टिमटिमा रहे हैं; रोशनियों की झालर; लेखिका अपने को भूलकर प्रार्थना गुनगुनाने लगी।

    आदर्श उत्तर: रात में रोशनियों से जगमगाता गंतोक देखकर लेखिका को लगा मानो आसमान उलटा पड़ा हो और सारे तारे बिखरकर नीचे टिमटिमा रहे हों। ढलान पर रोशनियों की झालर-सी बनी थी। इस सम्मोहन में वे सब कुछ भूल गईं और उनके होंठों पर 'साना-साना हाथ जोड़ि' प्रार्थना आ गई।

  2. Q2 · 4 marks · Long answerBoard level

    'साना-साना हाथ जोड़ि' प्रार्थना लेखिका ने किससे सीखी थी और उसका भाव क्या है? (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    प्रार्थना छोटे-छोटे हाथ जोड़कर क्या माँगती है?

    Answer

    उत्तर-बिंदु: एक नेपाली युवती से सीखी; छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना; मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो; सम्मोहित लेखिका के मन की शांति।

    आदर्श उत्तर: लेखिका ने यह प्रार्थना एक नेपाली युवती से सीखी थी। इसका भाव है कि मैं छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हूँ कि मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो। गंतोक की जगमगाती रात के सम्मोहन में लेखिका के मन की यही शुभ कामना होंठों पर आ गई। यह उनके कोमल और श्रद्धालु मन को दिखाता है।

  3. Q3 · 4 marks · Long answerHarder board level

    जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति और जनजीवन के बारे में कौन-सी जानकारियाँ दीं? (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    पताकाएँ, धर्म चक्र, कटाओ, गुरुनानक के पदचिह्न, खेदुम।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: श्वेत और रंगीन पताकाएँ; धर्म चक्र; कटाओ 'हिंदुस्तान का स्विट्ज़रलैंड'; गुरुनानक के पदचिह्न वाला पत्थर; खेदुम में देवी-देवताओं का निवास; पहाड़ी जीवन की कठिनाइयाँ।

    आदर्श उत्तर: जितेन ने श्वेत और रंगीन पताकाओं का अर्थ बताया, धर्म चक्र के बारे में बताया और कटाओ को हिंदुस्तान का स्विट्ज़रलैंड कहा। उसने गुरुनानक के पदचिह्न वाला पत्थर और खेदुम दिखाया, जहाँ देवी-देवताओं का निवास माना जाता है। उसने पहाड़ी लोगों के कठिन जीवन की जानकारी भी दी।

  4. Q4 · 4 marks · Long answerHarder board level

    जितेन नार्गे की भूमिका के आधार पर लिखिए कि एक कुशल गाइड में कौन-से गुण होने चाहिए। (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    जानकारी, व्यवहार, सुरक्षा और सैलानियों का मन।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: क्षेत्र की भौगोलिक, धार्मिक, सांस्कृतिक जानकारी; रोचक ढंग से बताना; सैलानियों की रुचि का ध्यान; कुशल और सावधान ड्राइविंग; मिलनसार, नाचने-गाने में शामिल।

    आदर्श उत्तर: कुशल गाइड को क्षेत्र के भूगोल, धर्म और संस्कृति की पूरी जानकारी होनी चाहिए, जैसी जितेन को थी। उसे रोचक ढंग से बातें बतानी चाहिए, सैलानियों की रुचि और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए और मिलनसार होना चाहिए। जितेन ड्राइवर-कम-गाइड के रूप में इन सब गुणों से भरपूर था।

  5. Q5 · 4 marks · Long answerHarder board level

    पहाड़ी बच्चों का जीवन मैदानी बच्चों से किस प्रकार भिन्न है? पाठ के आधार पर लिखिए। (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    स्कूल की दूरी और शाम के काम।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: रोज़ लगभग तीन-साढ़े तीन किलोमीटर की चढ़ाई चढ़कर स्कूल; शाम को मवेशी चराना, पानी भरना, लकड़ियाँ ढोना; जीवन कठिन और श्रमपूर्ण।

    आदर्श उत्तर: पहाड़ी बच्चे रोज़ लगभग तीन-साढ़े तीन किलोमीटर की कठिन चढ़ाई चढ़कर स्कूल जाते हैं। स्कूल से लौटकर वे मवेशी चराते, पानी भरते और लकड़ियों के भारी गट्ठर ढोते हैं। मैदानी बच्चों को आम तौर पर ऐसी कठिनाइयाँ नहीं झेलनी पड़तीं, इसलिए पहाड़ी बच्चों का जीवन कहीं अधिक श्रमपूर्ण है।

  6. Q6 · 4 marks · Long answerHarder board level

    सीमा पर तैनात फ़ौजियों को देखकर लेखिका के मन में क्या भाव उठे? (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    'आप चैन की नींद सो सकें, इसीलिए तो हम यहाँ पहरा दे रहे हैं।'

    Answer

    उत्तर-बिंदु: कड़ाके की ठंड और कठिन परिस्थितियों में फ़ौजी; 'आप चैन की नींद सो सकें, इसीलिए हम पहरा दे रहे हैं'; लेखिका उदास और कृतज्ञ।

    आदर्श उत्तर: बर्फ़ीले, कठिन इलाकों में तैनात फ़ौजियों को देखकर लेखिका उदास हो गईं। एक फ़ौजी ने कहा कि आप चैन की नींद सो सकें, इसीलिए तो हम यहाँ पहरा दे रहे हैं। लेखिका को उनके त्याग के प्रति गहरी कृतज्ञता हुई और लगा कि देश उनका बहुत ऋणी है।

  7. Q7 · 4 marks · Long answerHOTS / competency

    'मंज़िल से कहीं ज़्यादा रोमांचक होता है मंज़िल तक का सफ़र' — इस कथन को अपने किसी अनुभव से जोड़कर स्पष्ट कीजिए। (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    यूमथांग फीका क्यों लगा, और रास्ता क्यों यादगार रहा?

    Answer

    उत्तर-बिंदु: यूमथांग लेखिका को फीका लगा, जबकि रास्ते के दृश्य, लोग और अनुभव रोमांचक थे; जीवन में भी लक्ष्य तक की यात्रा से ही सीख और आनंद मिलते हैं; अपना उदाहरण।

    आदर्श उत्तर: लेखिका को यूमथांग थोड़ा फीका लगा, पर रास्ते के झरने, बर्फ़, लोग और बातें रोमांचक थे। मेरे साथ भी ऐसा हुआ: विज्ञान प्रदर्शनी का पुरस्कार जल्दी भूल गया, पर मॉडल बनाने की मेहनत, गलतियाँ और दोस्तों का साथ आज भी याद है। सफ़र ही असली अनुभव देता है।

  8. Q8 · 4 marks · Long answerHOTS / competency

    'कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती हैं।' इस कथन के आलोक में समाज में श्रमिकों के योगदान पर विचार कीजिए। (लगभग 50-60 शब्द)

    Hint

    कम मज़दूरी, अधिक योगदान; हम क्या कर सकते हैं?

    Answer

    उत्तर-बिंदु: पहाड़ी स्त्रियाँ कम मज़दूरी में रास्ते बनाती हैं, जिनसे सबको लाभ; हर श्रमिक (सफ़ाईकर्मी, निर्माण-मज़दूर) यही करता है; उचित सम्मान, मज़दूरी और सुरक्षा उनका अधिकार।

    आदर्श उत्तर: पत्थर तोड़ने वाली स्त्रियाँ बहुत कम मज़दूरी पाकर ऐसे रास्ते बनाती हैं, जिनसे सबका जीवन आसान होता है। सफ़ाईकर्मी, किसान और निर्माण-मज़दूर भी ऐसा ही करते हैं। समाज को उनके श्रम का सम्मान करना चाहिए और उन्हें उचित मज़दूरी तथा सुरक्षा मिलनी चाहिए। हम भी उनसे विनम्रता और कृतज्ञता से पेश आ सकते हैं।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.लेखिका के ड्राइवर-कम-गाइड का नाम क्या था?Show answer

    जितेन नार्गे।

  2. 2.किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु पर कितनी श्वेत पताकाएँ लगाई जाती हैं?Show answer

    एक सौ आठ।

  3. 3.जितेन ने किस जगह को 'हिंदुस्तान का स्विट्ज़रलैंड' कहा?Show answer

    कटाओ को।

  4. 4.लायुंग किस नदी के किनारे है?Show answer

    तिस्ता नदी के किनारे।

  5. 5.पाठ की लेखिका कौन हैं?Show answer

    मधु कांकरिया।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप रात के गंतोक का दृश्य अपने शब्दों में लिख सकते हैं?
  • क्या आप पताकाओं और धर्म चक्र से जुड़ी आस्थाएँ बता सकते हैं?
  • क्या आप पत्थर तोड़ती स्त्रियों पर लेखिका के विचार 50-60 शब्दों में लिख सकते हैं?
  • क्या आप लायुंग में बर्फ़ न मिलने का कारण और लेखिका की चिंता बता सकते हैं?
  • क्या आप हिमालय के बदलते रूपों के तीन चित्र गिना सकते हैं?

साना-साना हाथ जोड़ि...: frequently asked questions

‘साना-साना हाथ जोड़ि’ का अर्थ क्या है?

यह एक नेपाली प्रार्थना की पंक्ति है जो लेखिका ने एक नेपाली युवती से सीखी थी। इसका अर्थ है कि छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रही हूँ कि मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो। पाठ में यह प्रार्थना बार-बार लेखिका के होंठों पर आती है।

इस पाठ की विधा क्या है?

यह एक यात्रा-वृत्तांत है। इसमें लेखिका मधु कांकरिया ने ‘मैं’ शैली में सिक्किम यात्रा के दृश्यों के साथ अपने मन के विचार भी लिखे हैं।

खेदुम क्या है और उसके बारे में क्या विश्वास है?

जितेन के अनुसार खेदुम लगभग एक किलोमीटर का क्षेत्र है जहाँ देवी-देवताओं का निवास माना जाता है। विश्वास है कि वहाँ गंदगी फैलाने वाला मर जाएगा। इस विश्वास के कारण लोग पहाड़, नदी और झरनों को गंदा नहीं करते।

लेखिका को आनंद के बीच कौन-से दृश्य झकझोर गए?

पत्थर तोड़ती पहाड़ी स्त्रियाँ, जिनकी पीठ पर बच्चे बँधे थे, और रोज़ पहाड़ी चढ़ाई चढ़कर स्कूल जाने वाले बच्चे। कटाओ के आगे कड़ी ठंड में पहरा देते फ़ौजियों के बारे में सोचकर भी उनका मन उदास हो गया।

कटाओ को ‘भारत का स्विट्जरलैंड’ किसने कहा और मणि ने क्या जवाब दिया?

कटाओ के रास्ते में जितेन नार्गे ने उत्साहित होकर कहा, 'कटाओ हिंदुस्तान का स्विट्ज़रलैंड है।' (लायुंग के एक सिक्किमी नवयुवक ने लेखिका को बर्फ़ देखने के लिए कटाओ जाने की सलाह दी थी।) मणि स्विट्ज़रलैंड घूम आई थी, इसलिए उसने प्रतिवाद किया कि स्विट्ज़रलैंड न इतनी ऊँचाई पर है और न इतना सुंदर।

इस पाठ के उत्तर कितने शब्दों में लिखें?

इस पाठ के प्रश्न 4 अंक के होते हैं और उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखना होता है। उत्तर में लगभग चार ठोस बिंदु रखें और हर बिंदु को पाठ की किसी घटना से जोड़ें।

Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-अ (002), कक्षा 10, 2026-27; NCERT कृतिका भाग 2 (Reprint 2026-27), साना-साना हाथ जोड़ि...