कर चले हम फ़िदा Class 10: भावार्थ, प्रतिपाद्य और प्रश्न
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
‘कर चले हम फ़िदा’ कैफ़ी आज़मी का देशभक्ति गीत है, जो युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म ‘हकीकत’ के लिए लिखा गया। इसमें शहीद होते सैनिक देशवासियों को देश की रक्षा सौंपते हैं। बोर्ड परीक्षा में इसके काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (कथन-कारण सहित) और 25-30 शब्दों के दो-दो अंक वाले प्रश्न पूछे जाते हैं।
What कैफ़ी आज़मी – कर चले हम फ़िदा is about
‘कर चले हम फ़िदा’ स्पर्श भाग 2 के पद्य खंड का पाठ 6 है। इसके कवि प्रगतिशील उर्दू शायर कैफ़ी आज़मी हैं। यह एक गीत है, जो युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म ‘हकीकत’ के लिए लिखा गया था। एक पंक्ति में: देश के लिए प्राण देते सैनिक गर्व से कहते हैं कि हमने अपना कर्तव्य निभा दिया, अब देश की रक्षा तुम्हारे हाथों में है।
बोर्ड परीक्षा के खंड ग (काव्य खंड) में इस पाठ से दो तरह से प्रश्न आ सकते हैं। पहला, प्रश्न 7 में पठित काव्यांश देकर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) पूछे जाते हैं, जिनमें कथन-कारण प्रश्न भी होता है। दूसरा, प्रश्न 8 में चार में से तीन प्रश्न 25-30 शब्दों में करने होते हैं, हर प्रश्न 2 अंक का। इनमें भाव स्पष्ट करना, प्रतीकों का अर्थ, सैनिक जीवन की कठिनाइयाँ और कविता का संदेश पूछा जाता है।
In real board papers: Course A, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026); Course B, asked in 5 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 1.3 marks per paper. See the questions
कैफ़ी आज़मी – कर चले हम फ़िदा: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
पहला अंश: कविता शहीद होते सैनिकों की आवाज़ है। वे अपने साथियों से कहते हैं कि हमने अपना तन और प्राण देश पर न्योछावर कर दिए, अब यह देश तुम्हें सौंप रहे हैं। युद्ध में उनकी साँसें रुकने लगीं और नाड़ी जमने लगी, फिर भी उन्होंने आगे बढ़ते कदमों को रुकने नहीं दिया। उनके सिर कट गए, पर इसका उन्हें दुख नहीं है, क्योंकि उन्होंने हिमालय का सिर, यानी देश का मान, झुकने नहीं दिया। मरते समय भी उनकी वीरता और बाँकपन बना रहा।
दूसरा अंश: सैनिक कहते हैं कि जीवित रहने के अवसर तो बहुत मिलते हैं, पर देश के लिए प्राण देने का अवसर रोज़ नहीं आता। जो जवानी देश के लिए खून में नहीं नहाती, वह सुंदरता और प्रेम दोनों को बदनाम करती है। आज धरती दुलहन की तरह सजी है। इससे लगता है कि वीरों के बलिदान ने धरती को सम्मान और शोभा दी है।
तीसरा अंश: सैनिक चाहते हैं कि बलिदान का रास्ता कभी सूना न हो। देशवासी वीरों के नए-नए दल तैयार करते रहें। जीत का उत्सव बलिदान के इस उत्सव के बाद ही आता है। इस समय जीवन और मृत्यु मानो गले मिल रहे हैं। इसलिए वे साथियों से कहते हैं कि सिर पर कफ़न बाँधकर, यानी मरने को तैयार होकर, आगे आओ।
चौथा अंश: अंत में सैनिक कहते हैं कि अपने खून से धरती पर ऐसी रेखा खींच दो कि कोई रावण, यानी शत्रु, इस पार न आ सके। यदि कोई हाथ देश की ओर उठे तो उसे तोड़ दो, ताकि कोई सीता के आँचल, यानी देश की मर्यादा, को छू न सके। देश की रक्षा करने वाले राम और लक्ष्मण भी अब तुम ही हो।
केंद्रीय भाव: कविता का प्रतिपाद्य यह है कि देश की स्वतंत्रता और सम्मान बलिदान से बचते हैं। सैनिक अपने बलिदान पर गर्व करते हैं और देशवासियों से अपेक्षा रखते हैं कि वे यह ज़िम्मेदारी आगे बढ़ाएँ। पाठ प्रवेश भी हमसे पूछता है कि क्या हम उनकी अपेक्षाएँ पूरी कर रहे हैं।
Themes and message
देश के लिए सर्वोच्च बलिदान
कविता का मूल भाव यह है कि सैनिक देश के लिए अपना तन-मन सब कुछ न्योछावर कर देते हैं। पाठ प्रवेश बताता है कि हर प्राणी अपना जीवन बचाना चाहता है, पर सैनिक दूसरों के जीवन और आज़ादी के लिए अपनी मौत का खतरा उठाता है। कविता में सैनिक सिर कटने का दुख नहीं मानते, बल्कि इसे गर्व की बात समझते हैं। वे बलिदान को ऐसा दुर्लभ अवसर मानते हैं जो रोज़ नहीं मिलता। इससे पता चलता है कि उनके लिए देश अपने प्राणों से बड़ा है।
From the text: ‘कट गए सर हमारे तो कुछ गम नहीं’ और ‘जान देने की रुत रोज़ आती नहीं’ – दोनों पंक्तियाँ बलिदान को गौरव और दुर्लभ अवसर बताती हैं।
देशवासियों को उत्तरदायित्व सौंपना
हर अंश के अंत में दोहराई गई पंक्ति बताती है कि सैनिक जाते-जाते देश की रक्षा का भार अपने साथियों को सौंप रहे हैं। वे चाहते हैं कि बलिदान की राह सूनी न हो और नए वीरों के दल बनते रहें। पाठ प्रवेश स्पष्ट कहता है कि ये देशवासी ‘हम और आप’ ही हैं। इससे पता चलता है कि देश की रक्षा केवल सीमा पर खड़े सैनिकों का नहीं, हर नागरिक का कर्तव्य है।
From the text: टेक ‘अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो’ तथा ‘तुम सजाते ही रहना नए काफ़िले’।
वीरता और अदम्य साहस
सैनिक मृत्यु के सामने भी नहीं डगमगाते। उनकी साँसें रुक रही थीं, नाड़ी जम रही थी, फिर भी उनके कदम आगे बढ़ते रहे। यह शारीरिक कमज़ोरी पर मन की दृढ़ता की जीत है। वे मरते-मरते भी अपना बाँकपन, यानी वीर का गर्व और ठसक, नहीं छोड़ते। वे साथियों से सिर पर कफ़न बाँधने को कहते हैं, अर्थात मृत्यु के डर से मुक्त होकर लड़ने को। यह साहस ही देश के गौरव को बचाता है।
From the text: ‘साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई / फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया’ और ‘मरते-मरते रहा बाँकपन साथियो’।
देश के मान-सम्मान की रक्षा
कविता में देश को केवल ज़मीन नहीं, सम्मान और मर्यादा के रूप में देखा गया है। हिमालय का सिर न झुकने देना देश का गौरव बचाने का प्रतीक है। अंतिम अंश में देश की तुलना सीता से और शत्रु की तुलना रावण से की गई है। सीता का दामन देश की पवित्रता और मर्यादा का संकेत है। सैनिक चाहते हैं कि कोई भी शत्रु इस मर्यादा को छू तक न सके। इससे पता चलता है कि देश का सम्मान प्राणों से भी ऊपर है।
From the text: ‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’ और ‘छू न पाए सीता का दामन कोई’।
जवानी की सार्थकता
कवि के अनुसार यौवन का सही उपयोग देश के काम आना है। जो जवानी देश के लिए खून बहाने से पीछे हटती है, वह सुंदरता और प्रेम दोनों को बदनाम करती है। यानी ऐसी जवानी केवल नाम की है। कवि युवाओं को याद दिलाते हैं कि जीने के मौके बहुत हैं, पर देश पर कुर्बान होने का मौका कभी-कभी आता है। यह भाव युवाओं को कर्तव्य और त्याग की प्रेरणा देता है।
From the text: ‘हुस्न और इश्क दोनों को रुस्वा करे / वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं’।
The speaker and the people in the poem
वक्ता: शहीद होते सैनिक
कविता का वक्ता। युद्ध में प्राण दे रहे सैनिक, जो जाते-जाते अपने साथियों को देश की रक्षा सौंपते हैं। ‘हम’ शब्द से वे सभी सैनिकों की ओर से बोलते हैं।
- अदम्य साहसी: मृत्यु निकट होने पर भी आगे बढ़ते रहे
- बलिदान पर गर्व करने वाले: सिर कटने का दुख नहीं
- देश के सम्मान को सर्वोपरि मानने वाले
- कर्तव्यनिष्ठ और दूरदर्शी: आगे की रक्षा की चिंता करते हैं
- आत्मगौरव से भरे: मरते समय भी बाँकपन बना रहा
‘फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया’ साहस दिखाता है; ‘कट गए सर हमारे तो कुछ गम नहीं’ बलिदान पर गर्व; ‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’ देश के मान की चिंता; ‘राह कुर्बानियों की न वीरान हो’ आगे की रक्षा की चिंता; ‘मरते-मरते रहा बाँकपन साथियो’ आत्मगौरव।
‘साथियो’: देशवासी (और साथी सैनिक)
जिन्हें संबोधित किया गया है। पाठ प्रवेश के अनुसार ये देशवासी, यानी ‘हम और आप’ हैं। इससे यह भी लगता है कि इनमें आगे लड़ने वाले साथी सैनिक शामिल हैं।
- देश की रक्षा के नए उत्तरदायी
- बलिदान की परंपरा आगे बढ़ाने वाले
- शत्रु से देश की मर्यादा बचाने वाले रक्षक
- राम-लक्ष्मण जैसे वीर और कर्तव्यपरायण बनने की अपेक्षा
‘अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो’ से उत्तरदायित्व; ‘तुम सजाते ही रहना नए काफ़िले’ से परंपरा आगे बढ़ाना; ‘तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे’ से रक्षक की भूमिका; ‘राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो’ से राम-लक्ष्मण जैसी अपेक्षा।
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| टेक (आवृत्ति/पुनरावृत्ति) | ‘अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो’ – यह पंक्ति हर अंश के अंत में दोहराई गई है। | गीत में लय आती है और मुख्य संदेश, यानी देश की ज़िम्मेदारी सौंपना, बार-बार मन पर अंकित होता है। यही इसे याद रहने वाला गीत बनाता है। |
| प्रतीक | ‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’, ‘इस तरफ़ आने पाए न रावन कोई’, ‘छू न पाए सीता का दामन कोई’ | हिमालय देश के गौरव का, रावण शत्रु का, सीता देश की मर्यादा का और राम-लक्ष्मण रक्षकों का प्रतीक हैं। जाने-पहचाने प्रतीकों से बात गहरी और भावपूर्ण बनती है। |
| मानवीकरण अलंकार | ‘ज़िंदगी मौत से मिल रही है गले’ | जीवन और मृत्यु को मनुष्य की तरह गले मिलते दिखाया गया है। इससे युद्ध का वह क्षण सजीव होता है जब वीर जीवन की कीमत पर मृत्यु को अपनाते हैं। |
| रूपक/मानवीकरण (धरती का दुलहन बनना) | ‘आज धरती बनी है दुलहन साथियो’ | धरती को सजी हुई दुलहन के रूप में दिखाया गया है। इससे लगता है कि वीरों के बलिदान ने धरती को शोभा और सम्मान दिया है। |
| पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार | ‘मरते-मरते रहा बाँकपन साथियो’ | ‘मरते-मरते’ की आवृत्ति अंतिम साँस तक बने रहने वाले साहस पर ज़ोर देती है। |
| मुहावरों का प्रयोग | ‘बाँध लो अपने सर से कफ़न साथियो’, ‘तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे’ | ‘सिर पर कफ़न बाँधना’ (मरने को तैयार रहना) और ‘हाथ उठना’ (आक्रमण करना) जैसे मुहावरे भाषा को ओजपूर्ण और प्रभावशाली बनाते हैं। |
| तुकांत और ओज गुण | ‘साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई’ | ‘थमती’-‘जमती’ की तुक से गेयता आती है। पूरे गीत का स्वर ओजपूर्ण है, जो सुनने वाले में वीरता का भाव जगाता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
कर चले हम फ़िदा जानो-तन साथियो
शहीद होते सैनिक: गीत की पहली पंक्ति, जिसमें सैनिक अपने बलिदान की घोषणा करते हैं।
‘फ़िदा’ का अर्थ है न्योछावर। सैनिक बताते हैं कि उन्होंने देश पर प्राण और शरीर दोनों अर्पित कर दिए। यह पंक्ति पूरी कविता का स्वर तय करती है।
साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई
शहीद होते सैनिक: युद्ध में घायल होकर मृत्यु के निकट पहुँचने की स्थिति का वर्णन।
सैनिक जीवन की कठिनाई और मृत्यु के सामने भी न टूटने वाले साहस को दिखाती है, क्योंकि इसके बाद भी कदम नहीं रुके।
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया
शहीद होते सैनिक: सिर कटने के दुख को नकारते हुए सैनिक अपनी उपलब्धि बताते हैं।
हिमालय देश के गौरव और मान का प्रतीक है। सैनिकों का संतोष यह है कि देश का सम्मान बचा रहा।
जान देने की रुत रोज़ आती नहीं
शहीद होते सैनिक: जीने के अवसरों और बलिदान के अवसर की तुलना।
बलिदान को दुर्लभ और सौभाग्यपूर्ण अवसर बताया गया है। यह युवाओं को देश के लिए त्याग की प्रेरणा देता है।
फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है
शहीद होते सैनिक: बलिदान की राह आगे बढ़ाने की बात करते समय।
यहाँ बलिदान को भी एक उत्सव कहा गया है। इससे पता चलता है कि जीत की खुशी बलिदान के बाद ही मिलती है।
बाँध लो अपने सर से कफ़न साथियो
शहीद होते सैनिक: साथियों को युद्ध के लिए तैयार होने का आह्वान।
मुहावरे के माध्यम से मृत्यु का भय छोड़कर देश के लिए हर बलिदान को तैयार रहने का संदेश।
खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर
शहीद होते सैनिक: अंतिम अंश में देश की सीमा की रक्षा का आह्वान।
खून से रेखा खींचना यानी प्राण देकर भी सीमा को सुरक्षित करना, ताकि कोई शत्रु इस पार न आ सके।
राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो
शहीद होते सैनिक: सीता के दामन की रक्षा की बात के बाद देशवासियों को संबोधन।
देशवासियों को ही देश की मर्यादा के रक्षक राम और लक्ष्मण बताया गया है। अब रक्षा की ज़िम्मेदारी उनकी है।
कैफ़ी आज़मी – कर चले हम फ़िदा in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
देशवासियों को उत्तरदायित्व सौंपना
मान लीजिए आपके विद्यालय की कक्षा 12 की छात्रा अपने सदन (हाउस) की कप्तान है। विद्यालय छोड़ते समय वह कक्षा 10 के विद्यार्थियों से कहती है, "मैंने सदन का नाम ऊँचा रखा, अब इसकी शान तुम्हारे हाथ में है।"
इस स्थिति की तुलना 'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो' पंक्ति से कीजिए। दोनों में क्या समानता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- दोनों में जाने वाला अपना कार्य पूरा कर चुका है
- दोनों अगली पीढ़ी को ज़िम्मेदारी सौंपते हैं
- अंतर: सैनिक प्राण देकर देश सौंपते हैं, इसलिए उनका दायित्व कहीं बड़ा है
Answer: दोनों में जाने वाला अपना कर्तव्य निभाकर अगली पीढ़ी को ज़िम्मेदारी सौंपता है। पर सैनिक प्राण न्योछावर करके पूरा देश सौंपते हैं, इसलिए उनका सौंपा दायित्व कहीं बड़ा है।
Memory hook: कप्तान सदन सौंपती है, शहीद वतन सौंपते हैं: 'अब तुम्हारे हवाले'।
जवानी की सार्थकता
कल्पना कीजिए आपके मोहल्ले में बाढ़ आ गई है। कुछ युवक घर बैठे मोबाइल पर समय बिता रहे हैं, जबकि कुछ युवक राहत सामग्री बाँटने और बुज़ुर्गों को सुरक्षित जगह पहुँचाने में लगे हैं।
'जान देने की रुत रोज़ आती नहीं' और 'वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं' के आधार पर बताइए कि किन युवकों की जवानी सार्थक है और क्यों? (25-30 शब्द)
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- गीत का भाव: संकट का अवसर रोज़ नहीं आता
- जो युवा संकट में आगे नहीं आते, उनकी जवानी व्यर्थ
- राहत में लगे युवकों की जवानी सार्थक
Answer: राहत में जुटे युवकों की जवानी सार्थक है। गीत बताता है कि सेवा और त्याग का अवसर रोज़ नहीं आता, और संकट में पीछे रहने वाली जवानी व्यर्थ कहलाती है।
Memory hook: संकट का समय = 'रुत'; उसे पहचानो, वरना जवानी 'रुस्वा' होगी।
अदम्य साहस: बढ़ते कदम न रुकने देना
मान लीजिए विद्यालय के फ़ाइनल क्रिकेट मैच में आपकी टीम का बल्लेबाज़ उँगली में चोट लगने के बाद भी पट्टी बाँधकर खेलता रहता है और टीम को मैच जिताता है।
इस खिलाड़ी के साहस की तुलना 'साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई' वाले सैनिकों से कीजिए। (25-30 शब्द)
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- समानता: पीड़ा के बावजूद लक्ष्य से पीछे न हटना
- सैनिकों की साँस थम रही थी, फिर भी कदम नहीं रुके
- अंतर: सैनिक का संघर्ष प्राणों की बाज़ी और देश के लिए है
Answer: दोनों पीड़ा सहकर भी लक्ष्य से पीछे नहीं हटे। पर सैनिकों की साँस थम रही थी, फिर भी वे देश के लिए बढ़ते रहे; उनका साहस प्राणों की बाज़ी वाला है।
Memory hook: चोट में भी बल्ला न छोड़ना छोटा 'बाँकपन' है; सैनिक का बाँकपन मरते-मरते भी रहता है।
देश के मान-सम्मान की रक्षा: खून से लकीर
कल्पना कीजिए आपके विद्यालय के गेट के पास कोई अनजान व्यक्ति बच्चों को नशीली चीज़ें बेचने की कोशिश करता है। कक्षा के विद्यार्थी मिलकर शिक्षकों को बताते हैं और तय करते हैं कि ऐसे व्यक्ति को विद्यालय के पास टिकने नहीं देंगे।
विद्यार्थियों के इस निर्णय को 'खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर, इस तरफ़ आने पाए न रावन कोई' पंक्तियों से जोड़कर समझाइए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- गीत में लकीर = रक्षा-रेखा; रावन = बुराई/शत्रु
- विद्यार्थियों ने भी बुराई के विरुद्ध रेखा खींची
- सामूहिक दृढ़ता ही रक्षा का आधार
Answer: गीत में शत्रु रूपी रावण को रोकने के लिए रेखा खींचने का आह्वान है। विद्यार्थियों ने भी मिलकर बुराई के विरुद्ध ऐसी रेखा खींची कि वह उनके विद्यालय तक न पहुँचे।
Memory hook: हर बुराई एक 'रावन' है; मिलकर खींची गई रेखा उसे रोकती है।
Topics in this chapter
- कर चले हम फ़िदा का भावार्थComing soon
- कर चले हम फ़िदा प्रश्न-उत्तरComing soon
- कर चले हम फ़िदा का प्रतिपाद्य और संदेशComing soon
- राम-लक्ष्मण और रावण का प्रतीक: भाव स्पष्टComing soon
- कैफ़ी आज़मी का जीवन परिचय और रचनाएँComing soon
How the board asks कैफ़ी आज़मी – कर चले हम फ़िदा
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (प्रश्न 7) | कविता का कोई अंश देकर पाँच प्रश्न: किसी शब्द का अर्थ (जैसे ‘फ़िदा’, ‘रुत’), किसी पंक्ति का आशय, ‘हमारे’ या ‘साथियो’ किसके लिए है, और काव्यांश का संदेश। | पहले पूरा काव्यांश ध्यान से पढ़ें। शब्दार्थ पाठ की शब्दावली से याद रखें। हर विकल्प को पंक्ति से मिलाकर देखें; जो विकल्प केवल आधा सच हो या पाठ से बाहर की बात कहे, उसे हटा दें। |
| कथन-कारण प्रश्न | कथन (A) और कारण (R) देकर पूछा जाता है कि दोनों सही हैं या नहीं, और क्या R, A की सही व्याख्या करता है। जैसे सैनिकों के आगे बढ़ते रहने का कथन और उसका कारण। | पहले A और R को अलग-अलग पाठ से जाँचें। दोनों सही हों तो देखें कि ‘क्योंकि’ लगाकर R, A को समझाता है या नहीं। केवल सही होना काफ़ी नहीं, संबंध भी जाँचें। |
| प्रतीक और भाव स्पष्ट करना (2 अंक, 25-30 शब्द) | ‘हिमालय’, ‘रावन’, ‘सीता का दामन’, ‘राम-लक्ष्मण’ किसके प्रतीक हैं; या ‘खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर’ जैसी पंक्ति का भाव। | पहले प्रतीक का सीधा अर्थ बताएँ, फिर कविता के संदर्भ में उसका भाव लिखें। एक वाक्य में पंक्ति से जुड़ाव दिखाएँ। 30 शब्द से आगे न बढ़ें। |
| सैनिक जीवन और भावना पर प्रश्न (2 अंक) | ‘साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई’ में किस स्थिति का वर्णन है, सैनिक के मन की कौन-सी भावना है, या सैनिकों को किस बात का गर्व है। | दो बिंदु लिखें: स्थिति (घायल होकर मृत्यु के निकट) और भावना (साहस, कर्तव्य, देशप्रेम)। पंक्ति का छोटा अंश उद्धृत करें तो उत्तर मज़बूत होता है। |
| प्रतिपाद्य/संदेश और देशवासियों से अपेक्षा | कविता का संदेश क्या है, सैनिक देशवासियों से क्या चाहते हैं, या किस काफ़िले को आगे बढ़ाने की बात है। | संदेश को अपने शब्दों में लिखें: बलिदान पर गर्व और देश की रक्षा का उत्तरदायित्व देशवासियों को सौंपना। टेक की पंक्ति का उल्लेख करें। |
| शब्द-प्रयोग और मुहावरे | ‘सर पर कफ़न बाँधना’, ‘हाथ उठने लगे’, ‘जान देने की रुत’ जैसे प्रयोगों का आशय, या कविता का कोई अलंकार पहचानना। | पहले मुहावरे का सामान्य अर्थ लिखें, फिर बताएँ कि कविता में यह किस भाव को व्यक्त करता है। अलंकार के साथ उदाहरण की पंक्ति ज़रूर लिखें। |
Tricks to remember कैफ़ी आज़मी – कर चले हम फ़िदा
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
अंतरों का क्रम: "कर, ज़िंदा, राह, खींच"
हर अंतरे का पहला शब्द जोड़िए: "कर ज़िंदा राह खींच"।
- कर चले: बलिदान और हिमालय का गर्व
- ज़िंदा रहने: जवानी और बलिदान की रुत
- राह कुर्बानियों की: नए काफ़िले और सर पर कफ़न
- खींच दो: लकीर, रावन, सीता, राम-लक्ष्मणUse it when: काव्यांश पढ़ते ही पहचान लें कि यह गीत का कौन-सा भाग है और उसका केंद्रीय भाव क्या है।
प्रतीकों की जोड़ियाँ
- हिमालय = देश का मान-सम्मान
- रावन = शत्रु, आक्रमणकारी
- सीता का दामन = मातृभूमि की मर्यादा
- राम-लक्ष्मण = रक्षक देशवासी
- कफ़न = मृत्यु की परवाह छोड़ बलिदान की तैयारी
- काफ़िले = वीरों के नए दलUse it when: "किसका प्रतीक है" वाले MCQ और 2 अंक के प्रश्नों में सीधे सही प्रतीकार्थ लिखने के लिए।
शब्दार्थ की चाबी: "फ़िदा हुए, हवाले किया"
एक वाक्य याद रखें: "सैनिक फ़िदा (न्योछावर) हुए, वतन हवाले (सौंपा) किया; रुत (मौसम) में न लड़ने वाली जवानी रुस्वा (बदनाम); फ़तह (जीत) का जश्न (खुशी) कुर्बानियों (बलिदान) के बाद।"
Use it when: शब्द-अर्थ वाले MCQ ('फ़िदा', 'रुस्वा', 'काफ़िले' का अर्थ) के लिए।
विषयों का सूत्र: "बलि, भार, वीर, मान, जवानी"
- बलि: देश के लिए सर्वोच्च बलिदान
- भार: देशवासियों को उत्तरदायित्व सौंपना
- वीर: अदम्य साहस, मरते-मरते बाँकपन
- मान: हिमालय का सिर न झुकने देना
- जवानी: खून में न नहाने वाली जवानी व्यर्थUse it when: प्रतिपाद्य या संदेश वाले प्रश्न में सभी मुख्य भाव एक साथ लिखने के लिए।
कैफ़ी आज़मी – कर चले हम फ़िदा: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: काव्यांश 1: जवानी की सार्थकता और बलिदान का अवसर
ज़िंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर
जान देने की रुत रोज़ आती नहीं
हुस्न और इश्क दोनों को रुस्वा करे
वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं
(1) · 1 mark · MCQ
'जान देने की रुत रोज़ आती नहीं' पंक्ति का भाव है:
(क) देश के लिए प्राण न्योछावर करने का अवसर बार-बार नहीं मिलता
(ख) मौसम हर दिन बदलता रहता है
(ग) सैनिकों को रोज़ युद्ध करना पड़ता है
(घ) जीवन में सुख के दिन कम आते हैं(2) · 1 mark · MCQ
काव्यांश में प्रयुक्त 'रुस्वा' शब्द का अर्थ है:
(क) प्रसन्न
(ख) बदनाम
(ग) सुंदर
(घ) दुखी(3) · 1 mark · MCQ
कवि के अनुसार कौन-सी जवानी सुंदरता और प्रेम दोनों को बदनाम करती है?
(क) जो प्रेम में डूबी रहती है
(ख) जो धन कमाने में लगी रहती है
(ग) जो देश पर संकट आने पर भी बलिदान के लिए आगे नहीं आती
(घ) जो युद्ध में घायल हो जाती है(4) · 1 mark · Assertion-reason
निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़कर सही विकल्प चुनिए:
कथन (A): सैनिक देश पर बलिदान होने के अवसर को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहते।
कारण (R): कवि के अनुसार जान देने की रुत रोज़ नहीं आती।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।(5) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इसके बाद की पंक्ति है—'आज धरती बनी है दुलहन साथियो'।) 'आज धरती बनी है दुलहन साथियो' पंक्ति का सबसे उपयुक्त आशय है:
(क) धरती पर विवाह का उत्सव मनाया जा रहा है
(ख) वीरों के बलिदान से धरती सजी-सँवरी और गौरवमयी लग रही है
(ग) धरती पर चारों ओर हरियाली छा गई है
(घ) युद्ध के कारण धरती उजड़ गई है
Show the answersAnswers
- (क) देश के लिए प्राण न्योछावर करने का अवसर बार-बार नहीं मिलता
- (ख) बदनाम
- (ग) जो देश पर संकट आने पर भी बलिदान के लिए आगे नहीं आती
- (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
- (ख) वीरों के बलिदान से धरती सजी-सँवरी और गौरवमयी लग रही है
Extract 2: काव्यांश 2: कुर्बानी की राह और सर पर कफ़न
राह कुर्बानियों की न वीरान हो
तुम सजाते ही रहना नए काफ़िले
फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है
ज़िंदगी मौत से मिल रही है गले
(1) · 1 mark · MCQ
'राह कुर्बानियों की न वीरान हो' पंक्ति में सैनिक क्या चाहते हैं?
(क) युद्ध जल्दी समाप्त हो जाए
(ख) देश के लिए बलिदान देने की परंपरा कभी न रुके
(ग) सीमा की सड़कें सुंदर बनाई जाएँ
(घ) सैनिकों को आराम मिले(2) · 1 mark · MCQ
'तुम सजाते ही रहना नए काफ़िले' में 'काफ़िले' से अभिप्राय है:
(क) व्यापारियों के ऊँट
(ख) तीर्थयात्रियों की भीड़
(ग) देश पर बलिदान होने को तैयार वीरों के नए दल
(घ) सेना के हथियारों का भंडार(3) · 1 mark · MCQ
'फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है' पंक्ति में 'इस जश्न' से आशय है:
(क) विजय के बाद होने वाला उत्सव
(ख) सैनिकों के घर लौटने की खुशी
(ग) वीरों के बलिदान का उत्सव
(घ) किसी त्योहार का आयोजन(4) · 1 mark · MCQ
'ज़िंदगी मौत से मिल रही है गले' पंक्ति सैनिकों की किस स्थिति को दर्शाती है?
(क) वे मृत्यु से डरकर पीछे हट रहे हैं
(ख) वे निडर होकर मृत्यु को अपना रहे हैं
(ग) वे अपने परिवार से गले मिल रहे हैं
(घ) वे युद्ध छोड़कर लौट रहे हैं(5) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इसके बाद की पंक्ति है—'बाँध लो अपने सर से कफ़न साथियो'।) 'बाँध लो अपने सर से कफ़न साथियो' कहकर सैनिक साथियों से अपेक्षा करते हैं कि वे:
(क) मृत्यु की चिंता छोड़कर बलिदान के लिए तैयार रहें
(ख) युद्ध में सिर की सुरक्षा के लिए कपड़ा बाँधें
(ग) शहीदों का अंतिम संस्कार करें
(घ) युद्ध से दूर रहें
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- (ख) देश के लिए बलिदान देने की परंपरा कभी न रुके
- (ग) देश पर बलिदान होने को तैयार वीरों के नए दल
- (ग) वीरों के बलिदान का उत्सव
- (ख) वे निडर होकर मृत्यु को अपना रहे हैं
- (क) मृत्यु की चिंता छोड़कर बलिदान के लिए तैयार रहें
कैफ़ी आज़मी – कर चले हम फ़िदा: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: 'साथियो' संबोधन किसके लिए · 2 marks · Short answerBoard level
'कर चले हम फ़िदा' गीत में शहीद होते सैनिक 'साथियो' संबोधन का प्रयोग किसके लिए करते हैं? इस संबोधन के पीछे उनका उद्देश्य भी लिखिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- 'साथियो' = देशवासी और साथी सैनिक
- उद्देश्य: उन्हें अपना साथी मानकर देश की रक्षा का दायित्व सौंपना ('अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो')
Answer: 'साथियो' संबोधन शहीद होते सैनिक अपने देशवासियों और साथी सैनिकों के लिए करते हैं। वे उन्हें अपना साथी मानकर देश की रक्षा का दायित्व सौंपते हैं।
Example 2: 'मरते-मरते रहा बाँकपन' का आशय · 2 marks · Short answerHarder board level
'मरते-मरते रहा बाँकपन साथियो' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। इससे सैनिकों की किस विशेषता का पता चलता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- बाँकपन = जोश, शान, बहादुरी की अकड़
- मरते समय भी जोश और शान कम नहीं हुई
- विशेषता: अंतिम साँस तक निडरता और स्वाभिमान
Answer: इसका आशय है कि मरते समय भी सैनिकों का जोश और शान कम नहीं हुई। इससे पता चलता है कि वे अंतिम साँस तक निडर और स्वाभिमानी रहे।
Example 3: व्यर्थ जवानी कौन-सी · 2 marks · Short answerHarder board level
'वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं' पंक्ति के आधार पर बताइए कि कवि किस जवानी को व्यर्थ मानता है और क्यों? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- व्यर्थ जवानी: जो देश पर संकट में बलिदान से पीछे हटे
- ऐसी जवानी हुस्न और इश्क दोनों को रुस्वा (बदनाम) करती है
- कारण: जान देने की रुत रोज़ नहीं आती, अवसर गँवाना कायरता है
Answer: कवि उस जवानी को व्यर्थ मानता है जो संकट में बलिदान से पीछे हटे। ऐसी जवानी सुंदरता और प्रेम को बदनाम करती है, क्योंकि जान देने का अवसर रोज़ नहीं आता।
Example 4: राम और लक्ष्मण: देशवासियों की दोहरी भूमिका · 2 marks · Short answerHarder board level
'राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो' पंक्ति द्वारा सैनिक देशवासियों से कौन-सी दोहरी अपेक्षा करते हैं? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- राम: रक्षक, जो सीता (मातृभूमि की मर्यादा) पर उठे हाथ को रोके
- लक्ष्मण: रेखा खींचकर सीमा की रक्षा करने वाला
- दोनों भूमिकाएँ अब देशवासियों को ही निभानी हैं (व्याख्या)
Answer: सैनिक चाहते हैं कि देशवासी राम की तरह शत्रु रूपी रावण का नाश करें और लक्ष्मण की तरह सीमा पर रेखा खींचकर मातृभूमि की मर्यादा की रक्षा करें।
Example 5: सामान्य प्राणी और सैनिक का अंतर · 2 marks · Short answerHOTS / competency
पाठ प्रवेश के अनुसार हर प्राणी अपना जीवन बचाना चाहता है। इस संदर्भ में 'ज़िंदगी मौत से मिल रही है गले' पंक्ति के आधार पर सैनिक का जीवन सामान्य प्राणियों से भिन्न कैसे है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- सामान्य प्राणी: अपने प्राणों पर संकट आने पर ही मुकाबला करता है
- सैनिक: दूसरों के जीवन और आज़ादी के लिए सीना तानकर खड़ा होता है
- सैनिक मृत्यु को गले लगाता है; बलिदान ही उसके जीवन की सार्थकता
Answer: सामान्य प्राणी केवल अपने प्राण बचाने के लिए लड़ता है, पर सैनिक दूसरों की आज़ादी के लिए मृत्यु को गले लगाता है। उसके लिए बलिदान ही जीवन की सार्थकता है।
Example 6: विद्यार्थी और कुर्बानी की राह · 2 marks · Short answerHOTS / competency
शहीद सैनिक चाहते हैं कि 'राह कुर्बानियों की न वीरान हो'। एक विद्यार्थी के रूप में आप इस अपेक्षा को कैसे पूरा कर सकते हैं? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- अपेक्षा का अर्थ: देश-सेवा और बलिदान की परंपरा चलती रहे
- विद्यार्थी के ठोस कर्तव्य: देश की संपत्ति की रक्षा, ईमानदारी, अनुशासन
- सेना या समाज-सेवा से जुड़कर परंपरा आगे बढ़ाना
Answer: मैं देश की संपत्ति की रक्षा करूँगा और ईमानदारी व अनुशासन अपनाऊँगा। सेना या समाज-सेवा से जुड़कर बलिदान की परंपरा आगे बढ़ाऊँगा, ताकि यह राह सूनी न हो।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
'खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर, इस तरफ़ आने पाए न रावन कोई' पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द, 2 अंक) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रतीकार्थ: 'लकीर' = देश की सीमा या रक्षा-रेखा, 'रावन' = शत्रु/आक्रमणकारी | 1 |
| भाव: देशवासी अपना खून बहाकर, यानी बलिदान देकर भी, ऐसी रेखा खींचें कि कोई शत्रु देश में न घुस सके (शब्द-सीमा में, शुद्ध भाषा) | 1 |
पठित काव्यांश ('राह कुर्बानियों की न वीरान हो' से 'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो' तक) पर आधारित पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (5 अंक) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रश्न 1: 'राह कुर्बानियों की न वीरान हो' का भाव, सही विकल्प | 1 |
| प्रश्न 2: 'काफ़िले' का आशय, सही विकल्प | 1 |
| प्रश्न 3: 'इस जश्न' से आशय (बलिदान का उत्सव), सही विकल्प | 1 |
| प्रश्न 4: 'ज़िंदगी मौत से मिल रही है गले' की स्थिति, सही विकल्प | 1 |
| प्रश्न 5: 'सर से कफ़न बाँधना' का आशय, सही विकल्प (विकल्प-संख्या और पाठ दोनों लिखें) | 1 |
Where students lose marks in कैफ़ी आज़मी – कर चले हम फ़िदा
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: 'साथियो' को केवल साथी सैनिक मान लेना
गीत देशवासियों को देश सौंपता है; पाठ प्रवेश साफ़ कहता है कि जिनसे अपेक्षाएँ हैं वे 'हम और आप' ही हैं।
Wrong working
'साथियो' शब्द सैनिक केवल अपने साथ लड़ने वाले सैनिकों के लिए कहते हैं।
Right working
'साथियो' संबोधन देशवासियों और साथी सैनिकों, दोनों के लिए है, जिन्हें शहीद होते सैनिक देश की रक्षा का दायित्व सौंपते हैं।
Do this: उत्तर में 'देशवासी' शब्द अवश्य लिखें और 'अब तुम्हारे हवाले वतन' से जोड़ें।
Usually costs: 2 अंक के उत्तर में 1 अंक तक कट सकता है; MCQ में पूरा 1 अंक।
Mistake: प्रतीक का शाब्दिक अर्थ लिख देना
हिमालय, रावन, सीता प्रतीक हैं; केवल पहाड़ या रामायण का पात्र लिखने से भाव स्पष्ट नहीं होता।
Wrong working
सैनिकों ने हिमालय पर्वत को झुकने नहीं दिया, यानी पहाड़ की रक्षा की।
Right working
हिमालय देश के मान-सम्मान का प्रतीक है; सैनिकों ने प्राण देकर भी देश का गौरव झुकने नहीं दिया।
Do this: हमेशा लिखें: "...किसका प्रतीक है" और फिर उसका भाव एक वाक्य में।
Usually costs: 2 अंक के उत्तर में 1 से 2 अंक तक कट सकते हैं।
Mistake: दोनों 'जश्न' को एक ही समझना
'फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है' में पहला जश्न बलिदान का है, विजय का जश्न बाद में आता है।
Wrong working
सैनिक युद्ध जीत चुके हैं और विजय का जश्न मना रहे हैं।
Right working
अभी बलिदान का जश्न हो रहा है; विजय का जश्न इस बलिदान के बाद ही मनाया जाएगा।
Do this: पंक्ति का क्रम ध्यान से पढ़ें: 'इस जश्न के बाद' = बलिदान के बाद।
Usually costs: MCQ में पूरा 1 अंक; 2 अंक के उत्तर में 1 अंक तक।
Mistake: शब्द-सीमा से बाहर जाकर पूरी कविता का भावार्थ लिख देना
2 अंक के प्रश्न में 25-30 शब्द और केवल पूछी गई पंक्ति का भाव चाहिए; लंबा सारांश मुख्य बिंदु को छिपा देता है।
Wrong working
(पूरा पृष्ठ) सैनिक युद्ध में गए, उनकी साँस थमी, हिमालय बचा, फिर धरती दुलहन बनी, फिर काफ़िले, फिर रावन... (पूछी गई पंक्ति का भाव स्पष्ट नहीं)
Right working
केवल पूछी गई पंक्ति: उसका अर्थ (1 बिंदु) + उससे निकला भाव या सैनिक की विशेषता (1 बिंदु), लगभग 25-30 शब्दों में।
Do this: लिखने से पहले प्रश्न के दो हिस्से पहचानें और हर हिस्से का एक वाक्य लिखें।
Usually costs: समय की हानि और 1 अंक तक की कटौती हो सकती है।
Mistake: कवि परिचय या फ़िल्म से जुड़े तथ्य गलत लिखना
'मेरी आवाज़ सुनो' फ़िल्मी गीतों का संग्रह है, फ़िल्म नहीं; गीत फ़िल्म 'हकीकत' के लिए लिखा गया था।
Wrong working
यह गीत कैफ़ी आज़मी ने फ़िल्म 'मेरी आवाज़ सुनो' के लिए लिखा था।
Right working
यह गीत युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी चेतन आनंद की फ़िल्म 'हकीकत' के लिए लिखा गया था।
Do this: याद रखें: फ़िल्म = हकीकत; गीत-संग्रह = मेरी आवाज़ सुनो; असली नाम = अतहर हुसैन रिज़वी।
Usually costs: तथ्य वाले प्रश्न में पूरा अंक कट सकता है।
कैफ़ी आज़मी – कर चले हम फ़िदा: previous year questions
- Course A: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).
- Course B: Asked in 5 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 1.3 marks per paper; 5 questions in all, counting OR alternatives. In 1 of 4 sample papers.
Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.
Solved board questions from कैफ़ी आज़मी – कर चले हम फ़िदा
Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.
2025 Course B, set 4/6/1, Q9 · 5 marks · Case-basedCompetency-based
निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों को चुनिए : 5 x 1 = 5
कर चले हम फ़िदा जानो-तन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो
साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई
फिर भी बढ़ते क़दम को न रुकने दिया
कट गए सर हमारे तो कुछ गम नहीं
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया
मरते-मरते रहा बाँकपन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो...
- (I)1 mark
'सर हिमालय का हमने न झुकने दिया' – पंक्ति में हिमालय किसका प्रतीक है ?
- (A)भारत माता के मुकुट का
- (B)उत्तर में स्थित पर्वत-शृंखला का
- (C)देश की आन-बान और शान का
- (D)देश के प्राकृतिक सौंदर्य का
- (II)1 mark
'साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई' – पंक्ति के संदर्भ में सैनिकों की इस स्थिति का कारण है –
- (A)मार्ग की थकावट और निद्रा
- (B)ऊँची-ऊँची पर्वत-चोटियाँ
- (C)युद्ध में घायल होना
- (D)विपरीत प्राकृतिक परिस्थितियाँ
- (III)1 mark
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए। दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
● कथन : सामने के खतरों के समक्ष साँसें रुकती थीं फिर भी दुश्मन से मुकाबला करने के लिए कदम बढ़ते ही जाते थे।
● कारण : देश की स्वतंत्रता-सुरक्षा सैनिक के लिए सर्वोपरि थी।
विकल्प :- (A)कथन सही है और कारण उसकी सही व्याख्या है।
- (B)कथन और कारण दोनों गलत हैं।
- (C)कथन सही है, किंतु कारण गलत है।
- (D)कथन गलत है, किंतु कारण सही है।
- (IV)1 mark
शहीद होने वाले सैनिक को किस बात का गर्व है ?
- (A)देश को सुरक्षित हाथों में सौंपने का
- (B)आखिरी साँस तक देश की रक्षा करने का
- (C)देश की सीमा पर बलिदान देने का
- (D)शत्रु को देश में न आने देने का
- (V)1 mark
'कर चले हम फ़िदा जानो-तन साथियो' – पंक्ति के संदर्भ में 'फ़िदा' शब्द का अर्थ है –
- (A)भेंट देना
- (B)मोहित होना
- (C)लुटाना
- (D)बलिदान करना
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(I) हिमालय देश की आन-बान और शान का प्रतीक है। उत्तर: (C)।
- 1 mark
(II) ऊँचे पर्वतों की बर्फीली, विपरीत प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण साँस थमती और नब्ज़ जमती है। उत्तर: (D)।
- 1 mark
(III) खतरों के बीच भी कदम बढ़ते रहे क्योंकि देश की रक्षा सर्वोपरि थी; कारण सही व्याख्या है। उत्तर: (A)।
- 1 mark
(IV) सैनिक को आखिरी साँस तक देश की रक्षा करने का गर्व है। उत्तर: (B)।
- 1 mark
(V) 'फ़िदा' का अर्थ बलिदान करना है। उत्तर: (D)।
Answer: (I) C; (II) D; (III) A; (IV) B; (V) D
Where the marks are
- प्रत्येक सही विकल्प 1 अंक (कुल 5 अंक)
2024 Course B, set 4/2/1, Q12 · 6 marks · Short answer
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :
- (क)3 marks
'कर चले हम फिदा' कविता से उद्धृत – 'साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई' – पंक्ति के संदर्भ में सैनिक जीवन की कठिनाइयों का उल्लेख कीजिए ।
- (ख)3 marks
'तोप' कविता के आधार पर लिखिए कि पूर्वजों से मिली धरोहर का क्या महत्त्व है ? इन्हें सँभालकर क्यों रखा जाता है ?
- (ग)3 marks
मीरा के 'पद' के आधार पर लिखिए कि द्रौपदी, प्रह्लाद आदि का उल्लेख कर मीरा भगवान को उनका कौन-सा रूप स्मरण करवा रही है और क्यों ?
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(क) सैनिकों को बर्फ़ीले, मौसम-संबंधी कठिनाइयों वाले दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में रहना पड़ता है।
- 1 mark
उन्हें लंबे समय तक ऐसे क्षेत्रों में तैनात रहना पड़ता है।
- 1 mark
वे हर क्षण मृत्यु के सामने खड़े रहते हैं।
- 1 mark
(ख) विरासत में मिली वस्तुएँ पूर्वजों की स्मृति-चिह्न होती हैं।
- 1 mark
उनसे भावी पीढ़ी इतिहास, परंपरा और संस्कृति से परिचित होती है।
- 1 mark
उनसे पूर्वजों के त्याग-बलिदान की प्रेरणा और अतीत से सीख मिलती है, इसलिए उन्हें सँभालकर रखा जाता है।
- 1 mark
(ग) मीरा भगवान को उनका भक्तवत्सल/भक्तों के रक्षक रूप स्मरण करा रही हैं।
- 1 mark
भगवान ने द्रौपदी की लाज बचाई और प्रह्लाद की रक्षा की, अर्थात् भक्तों की पुकार सुनकर उनके कष्ट हरे।
- 1 mark
मीरा भी अपने कष्ट दूर करवाना चाहती हैं, इसलिए यह स्मरण कराती हैं।
Answer: किन्हीं दो भागों के उत्तर (प्रत्येक 3 अंक)
Where the marks are
- (क) मौसम की कठिनाई (1), दुर्गम क्षेत्र में लंबी तैनाती (1), मृत्यु से सामना (1)
- (ख) स्मृति-चिह्न (1), इतिहास-परंपरा से परिचय (1), त्याग से प्रेरणा/गलतियाँ न दोहराना (1)
- (ग) भक्तवत्सल रूप (1), भक्तों के कष्ट हरना (1), मीरा की अपने कष्ट दूर करने की अभिलाषा (1)
Every कैफ़ी आज़मी – कर चले हम फ़िदा question, by year
Course A (0 questions, sample papers included)
Practice questions on कैफ़ी आज़मी – कर चले हम फ़िदा
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerBoard level
'कर चले हम फ़िदा' गीत किस फ़िल्म के लिए लिखा गया था? इस गीत में किनके हृदय की आवाज़ है? (25-30 शब्द)
Hint
पाठ प्रवेश और योग्यता विस्तार में फ़िल्म और निर्माता का नाम देखिए।
Answer
मूल्य बिंदु: फ़िल्म 'हकीकत', निर्माता चेतन आनंद, युद्ध की पृष्ठभूमि; शहीद होते सैनिकों के हृदय की आवाज़।
आदर्श उत्तर: यह गीत युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी चेतन आनंद की फ़िल्म 'हकीकत' के लिए लिखा गया था। इसमें उन सैनिकों के हृदय की आवाज़ है, जिन्हें अपने बलिदान पर नाज़ है।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
'कट गए सर हमारे तो कुछ गम नहीं' पंक्ति के आधार पर बताइए कि सैनिकों को अपने सिर कटने का दुख क्यों नहीं है? (25-30 शब्द)
Hint
अगली पंक्ति में हिमालय के सिर की बात पढ़िए।
Answer
मूल्य बिंदु: सिर कटने पर भी गम नहीं; हिमालय (देश के मान-सम्मान) का सिर नहीं झुकने दिया; यही उनका गर्व।
आदर्श उत्तर: सैनिकों को सिर कटने का दुख नहीं, क्योंकि उन्होंने हिमालय का सिर नहीं झुकने दिया। देश का मान-सम्मान बचाए रखना ही उनके लिए सबसे बड़ा गर्व है।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
'खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर' पंक्ति में 'लकीर' किसका प्रतीक है? सैनिक इस पंक्ति द्वारा क्या आह्वान करते हैं? (25-30 शब्द)
Hint
अगली पंक्ति में 'रावन' कहाँ न आने पाए, यह देखिए।
Answer
मूल्य बिंदु: लकीर = देश की सीमा, रक्षा-रेखा (लक्ष्मण-रेखा की याद दिलाती है); अपने खून से, यानी बलिदान देकर भी; शत्रु (रावन) इस पार न आ सके।
आदर्श उत्तर: 'लकीर' देश की सीमा की रक्षा-रेखा का प्रतीक है। सैनिक आह्वान करते हैं कि देशवासी अपना खून बहाकर भी ऐसी रेखा खींचें कि कोई शत्रु इस पार न आ सके।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
'तुम सजाते ही रहना नए काफ़िले' पंक्ति में 'काफ़िले' शब्द का क्या अर्थ है? सैनिक नए काफ़िले सजाने की बात क्यों कहते हैं? (25-30 शब्द)
Hint
शब्दार्थ में 'काफ़िले' देखिए और पिछली पंक्ति 'राह कुर्बानियों की' से जोड़िए।
Answer
मूल्य बिंदु: काफ़िला = यात्रियों का समूह; यहाँ बलिदान के लिए तैयार वीरों के दल; उद्देश्य: कुर्बानी की राह वीरान न हो, देश-रक्षा की परंपरा चलती रहे।
आदर्श उत्तर: काफ़िले का अर्थ है यात्रियों का समूह, यहाँ वीरों के दल। सैनिक चाहते हैं कि उनके बाद भी नए वीर आगे आते रहें, ताकि कुर्बानी की राह कभी सूनी न हो।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level
'फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है' पंक्ति में दो बार 'जश्न' शब्द आया है। दोनों जश्न किन-किन अवसरों के लिए हैं? स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द)
Hint
पहला जश्न अभी हो रहा है, दूसरा बाद में होगा। अभी सैनिक क्या कर रहे हैं?
Answer
मूल्य बिंदु: 'इस जश्न' = अभी हो रहा बलिदान का उत्सव; 'फ़तह का जश्न' = बाद में मिलने वाली विजय का उत्सव; बलिदान के बाद ही जीत संभव।
आदर्श उत्तर: पहला जश्न सैनिकों के बलिदान का उत्सव है, जो अभी हो रहा है। दूसरा जश्न विजय का है, जो इस बलिदान के बाद ही मनाया जाएगा।
Q6 · 2 marks · Short answerHarder board level
'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो' पंक्ति हर अंतरे के अंत में दोहराई गई है। इस दोहराव से गीत में क्या प्रभाव उत्पन्न होता है? (25-30 शब्द)
Hint
'हवाले' का अर्थ सौंपना है। बार-बार सौंपने से क्या ज़ोर बनता है?
Answer
मूल्य बिंदु: टेक (स्थायी पंक्ति) की तरह दोहराव; देश सौंपने की बात पर ज़ोर; देशवासियों को उत्तरदायित्व का बार-बार स्मरण; गीत में लय और गेयता।
आदर्श उत्तर: इस दोहराव से गीत में लय आती है और मुख्य संदेश गहरा होता है। हर बार देशवासियों को याद दिलाया जाता है कि अब देश की रक्षा उनकी ज़िम्मेदारी है।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपका मित्र कहता है, "देश की रक्षा केवल सैनिकों का काम है, हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं।" 'कर चले हम फ़िदा' गीत के आधार पर आप उसे क्या उत्तर देंगे? (25-30 शब्द)
Hint
पाठ प्रवेश की अंतिम बात और 'राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण' पर ध्यान दीजिए।
Answer
मूल्य बिंदु: सैनिक देश 'साथियो' यानी देशवासियों के हवाले करते हैं; पाठ प्रवेश: वे देशवासी हम और आप ही हैं; राम-लक्ष्मण दोनों की भूमिका देशवासियों की।
आदर्श उत्तर: मैं कहूँगा कि शहीद सैनिक देश हम देशवासियों को सौंपकर जाते हैं। गीत कहता है 'राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण', इसलिए देश की रक्षा हम सबका कर्तव्य है।
Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे' पंक्ति में देश की मर्यादा पर उठने वाले हाथों की बात है। आज के समय में देश के सम्मान पर ऐसे 'हाथ' किन रूपों में उठ सकते हैं? अपने विचार लिखिए। (25-30 शब्द)
Hint
पंक्ति का मूल अर्थ (शत्रु का आक्रमण) लिखकर फिर आज के उदाहरण सोचिए।
Answer
मूल्य बिंदु: पंक्ति में अर्थ: मातृभूमि की मर्यादा पर हमला करने वाले शत्रु को रोकना; आज के रूप (छात्र के विचार): सीमा पर घुसपैठ, आतंकवाद, देश की संपत्ति को नुकसान, समाज को बाँटने वाली ताकतें; इन्हें मिलकर रोकना।
आदर्श उत्तर: गीत में ये हाथ शत्रु के आक्रमण के हैं। आज ये घुसपैठ, आतंकवाद, देश की संपत्ति को नुकसान और समाज को बाँटने वाली ताकतों के रूप में उठ सकते हैं।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.कैफ़ी आज़मी का असली नाम क्या था और उनका जन्म कहाँ हुआ?Show answer
अतहर हुसैन रिज़वी; 19 जनवरी 1919 को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले के मजमां गाँव में।
2.'कर चले हम फ़िदा' गीत किस फ़िल्म के लिए लिखा गया?Show answer
युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म 'हकीकत' के लिए, जिसके निर्माता चेतन आनंद थे।
3.गीत में बोलने वाला (वक्ता) कौन है?Show answer
शहीद होते सैनिक, जो देशवासियों को देश सौंप रहे हैं।
4.'सर हिमालय का हमने न झुकने दिया' में हिमालय किसका प्रतीक है?Show answer
देश के मान-सम्मान और गौरव का।
5.कौन-सी पंक्ति बताती है कि बलिदान का अवसर दुर्लभ है?Show answer
'जान देने की रुत रोज़ आती नहीं'।
6.'फ़िदा', 'रुस्वा' और 'फ़तह' के अर्थ?Show answer
फ़िदा = न्योछावर; रुस्वा = बदनाम; फ़तह = जीत।
7.गीत के अंतिम अंतरे में 'रावन' और 'सीता का दामन' किसके प्रतीक हैं?Show answer
रावन = शत्रु या आक्रमणकारी; सीता का दामन = मातृभूमि की मर्यादा और सम्मान।
8.सैनिक 'राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण' किससे और क्यों कहते हैं?Show answer
देशवासियों से; क्योंकि अब देश की रक्षा और मर्यादा बचाने की पूरी ज़िम्मेदारी उन्हीं की है।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप बिना देखे गीत के चारों अंतरों का क्रम और हर अंतरे का मुख्य भाव बता सकते हैं?
- क्या आप 'साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई' से सैनिकों की कठिन स्थिति और उनका अदम्य साहस 25-30 शब्दों में लिख सकते हैं?
- क्या आप हिमालय, रावन, सीता, राम-लक्ष्मण, कफ़न और काफ़िले के प्रतीकार्थ एक-एक पंक्ति में बता सकते हैं?
- क्या आप समझा सकते हैं कि कवि किस जवानी को हुस्न और इश्क को रुस्वा करने वाली मानता है?
- क्या आप 'फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है' में दोनों जश्नों का अंतर बता सकते हैं?
- क्या आप बता सकते हैं कि 'साथियो' कौन हैं और 'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो' बार-बार क्यों आता है?
- क्या आप कैफ़ी आज़मी का असली नाम, जन्म-स्थान, फ़िल्म 'हकीकत' और गीत-संग्रह 'मेरी आवाज़ सुनो' बिना गड़बड़ किए लिख सकते हैं?
- क्या आप पाठ प्रवेश के आधार पर सामान्य प्राणी और सैनिक के जीवन का अंतर दो वाक्यों में लिख सकते हैं?
कैफ़ी आज़मी – कर चले हम फ़िदा: frequently asked questions
‘कर चले हम फ़िदा’ गीत किस फ़िल्म के लिए और किस पृष्ठभूमि पर लिखा गया?
यह गीत फ़िल्म ‘हकीकत’ के लिए लिखा गया था, जो युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी थी। NCERT के अनुसार इस फ़िल्म के निर्माता चेतन आनंद थे। इसलिए गीत में युद्ध में शहीद होते सैनिकों की भावनाएँ हैं।
कविता में हिमालय, रावण और सीता किसके प्रतीक हैं?
हिमालय देश के गौरव और सम्मान का प्रतीक है। रावण देश पर आक्रमण करने वाले शत्रु का प्रतीक है। सीता का दामन देश की मर्यादा और पवित्रता का प्रतीक है, और राम-लक्ष्मण उसके रक्षक देशवासियों के।
‘आज धरती बनी है दुलहन साथियो’ का क्या भाव है?
इस पंक्ति में धरती को सजी हुई दुलहन कहा गया है। इससे लगता है कि वीरों के बलिदान ने धरती को शोभा और सम्मान दिया है। सैनिक बलिदान को उत्सव की तरह देखते हैं।
इस कविता में ‘साथियो’ किसे कहा गया है?
पाठ प्रवेश के अनुसार सैनिकों की अपेक्षाएँ देशवासियों से हैं, यानी हम और आप से। इसलिए ‘साथियो’ देशवासियों के लिए है। इसमें आगे लड़ने वाले साथी सैनिक भी शामिल माने जा सकते हैं।
कैफ़ी आज़मी के बारे में बोर्ड के लिए क्या याद रखें?
कैफ़ी आज़मी का असली नाम अतहर हुसैन रिज़वी था और उनका जन्म 19 जनवरी 1919 को आज़मगढ़ ज़िले के मजमां गाँव में हुआ। वे प्रगतिशील उर्दू कवि थे और फ़िल्मों के लिए सैकड़ों गीत लिखे। उनकी रचनाओं में झंकार, आखिर-ए-शब, आवारा सज़दे, सरमाया और मेरी आवाज़ सुनो हैं, तथा उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला।
‘फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है’ में दो बार ‘जश्न’ क्यों आया है?
पहला ‘जश्न’ जीत की खुशी के लिए है और दूसरा बलिदान के उत्सव के लिए। सैनिक बलिदान को भी उत्सव मानते हैं। भाव यह है कि देश की जीत की खुशी वीरों के बलिदान के बाद ही आती है।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-ब (085), कक्षा 10, 2026-27; NCERT स्पर्श भाग 2 (Reprint 2026-27), कर चले हम फ़िदा