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HindiCBSE Class 10 · Chapter 3

मैं क्यों लिखता हूँ? (अज्ञेय) Class 10: सार, विषय और प्रश्न

Updated 14 October 2026 · Fact-checked

‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ कृतिका भाग 2 का अज्ञेय द्वारा लिखा निबंध है। इसमें लेखक बताते हैं कि वे अपनी भीतरी विवशता को पहचानने और उससे मुक्त होने के लिए लिखते हैं। हिरोशिमा के उदाहरण से वे अनुभव और अनुभूति का अंतर समझाते हैं। बोर्ड इस पाठ पर 50-60 शब्दों के 4 अंक वाले प्रश्न पूछता है।

What मैं क्यों लिखता हूँ? is about

‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ पूरक पाठ्यपुस्तक कृतिका भाग 2 का तीसरा पाठ है। इसके लेखक अज्ञेय हैं। यह एक विचारात्मक और आत्मकथात्मक निबंध है, जिसमें लेखक अपने ही लेखन की प्रेरणा की जाँच करते हैं। पाठ के अंत में उनकी ‘हिरोशिमा’ कविता भी दी गई है, जो 1959 में प्रकाशित काव्य-संग्रह ‘अरी ओ करुणा प्रभामय’ में संकलित है। एक पंक्ति में: सच्चा लेखन बाहरी दबाव से नहीं, भीतर की अनुभूति से जन्म लेता है।

बोर्ड परीक्षा के खंड ग (प्रश्न 11) में कृतिका के पाठों पर तीन प्रश्न आते हैं, जिनमें से दो करने होते हैं। हर प्रश्न 4 अंक का है और उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखना होता है। इस पाठ पर कोई गद्यांश-आधारित प्रश्न नहीं आता। प्रश्न प्रायः दो भागों में होते हैं: पहला भाग पाठ की समझ पूछता है (जैसे अनुभव और अनुभूति का अंतर) और दूसरा भाग आपका अपना विचार या आज के जीवन से जुड़ाव (जैसे विज्ञान का दुरुपयोग रोकने में युवाओं की भूमिका)।

In real board papers: Course A, asked in 6 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 2.3 marks per paper; Course B, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026). See the questions

मैं क्यों लिखता हूँ?: summary

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

लेखक आरंभ में कहते हैं कि ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ प्रश्न सरल लगता है, पर इसका सच्चा उत्तर कठिन है, क्योंकि यह लेखक के आंतरिक जीवन से जुड़ा है। उनका पहला और सच्चा उत्तर यह है कि वे यह जानने के लिए लिखते हैं कि वे क्यों लिखते हैं। लिखकर ही लेखक अपनी भीतरी विवशता को पहचानता है और उससे मुक्त होता है।

लेखक मानते हैं कि प्रसिद्धि मिलने के बाद कभी-कभी बाहरी कारणों से भी लिखना पड़ता है, जैसे संपादकों का आग्रह, प्रकाशक का तकाजा और पैसों की ज़रूरत। पर सच्चा कृतिकार ईमानदारी से यह भेद याद रखता है कि कौन-सी रचना भीतर की प्रेरणा से बनी और कौन-सी बाहरी दबाव से। कभी बाहरी दबाव भी भीतरी प्रेरणा को जगाने का कारण बन जाता है। यहाँ कृतिकार का स्वभाव और आत्मानुशासन महत्त्वपूर्ण है। कुछ आलसी लेखक बिना बाहरी दबाव के लिख ही नहीं पाते, जैसे कोई नींद खुलने पर भी अलार्म बजने तक बिस्तर पर पड़ा रहे। लेखक कहते हैं कि उन्हें इस सहारे की ज़रूरत नहीं, पर उससे कोई हानि भी नहीं।

भीतरी विवशता समझाने के लिए लेखक अपनी हिरोशिमा कविता का उदाहरण देते हैं। वे विज्ञान के विद्यार्थी थे और अणु तथा रेडियम-धर्मिता का सैद्धांतिक ज्ञान रखते थे। हिरोशिमा पर अणु-बम गिरने के समाचार और उसके बाद के प्रभाव उन्होंने पढ़े। विज्ञान के इस दुरुपयोग पर उनकी बुद्धि ने विद्रोह किया और उन्होंने लेख भी लिखे, पर कविता नहीं लिखी। युद्धकाल में उन्होंने भारत की पूर्वी सीमा पर सैनिकों को ब्रह्मपुत्र में बम फेंककर हज़ारों मछलियाँ मारते देखा था; उस व्यथा से वे व्यर्थ जीव-नाश को कुछ हद तक समझ सके थे।

जापान जाने पर वे हिरोशिमा गए और वह अस्पताल देखा जहाँ रेडियम से आहत लोग वर्षों से कष्ट भोग रहे थे। यह प्रत्यक्ष अनुभव था, फिर भी उन्होंने तुरंत कुछ नहीं लिखा, क्योंकि अनुभूति की कमी थी। एक दिन सड़क पर घूमते हुए उन्होंने एक जले पत्थर पर लंबी उजली छाया देखी। विस्फोट के समय वहाँ खड़ा व्यक्ति भाप बनकर उड़ गया होगा और उसकी छाया पत्थर पर रह गई। यह देखकर उन्हें थप्पड़-सा लगा और वे स्वयं को विस्फोट का भोक्ता महसूस करने लगे। धीरे-धीरे वे इस भाव से अलग हुए और भारत लौटकर रेलगाड़ी में बैठे-बैठे उन्होंने हिरोशिमा पर कविता लिखी। वे कहते हैं कि कविता अच्छी है या बुरी, इससे उन्हें मतलब नहीं; वह सच है, क्योंकि अनुभूति से जन्मी है।

Themes and message

लेखन की भीतरी विवशता

लेखक के अनुसार सच्चा कृतिकार इसलिए लिखता है क्योंकि उसके भीतर कोई बेचैनी या विवशता होती है। लिखते-लिखते ही वह इस विवशता को पहचानता है और उससे मुक्त होता है। यानी लेखन उनके लिए आत्म-खोज और मुक्ति का साधन है। लेखक यह भी कहते हैं कि सभी लेखक कृतिकार नहीं होते और न उनका सब लेखन कृति होता है। इससे पता चलता है कि अज्ञेय भीतर से उपजे लेखन को ही सच्ची रचना मानते हैं, केवल शब्द जोड़ने को नहीं।

From the text: लेखक कहते हैं कि वे यह जानने के लिए लिखते हैं कि क्यों लिखते हैं, और “लिखकर ही वह उससे मुक्त हो जाता है।”

अनुभव और अनुभूति का अंतर

अनुभव उस घटना का होता है जो हमारी आँखों के सामने घटती है। अनुभूति इससे गहरी है: यह संवेदना और कल्पना के सहारे उस सत्य को अपने भीतर उतार लेती है जो लेखक के साथ घटा ही नहीं। लेखक ने हिरोशिमा का अस्पताल देखा, यह अनुभव था, पर कविता नहीं लिखी। जले पत्थर पर छाया देखकर उन्होंने विस्फोट की पीड़ा को भीतर से महसूस किया, यही अनुभूति थी, और तभी कविता जन्मी। इससे पता चलता है कि लेखक के लिए रचना की असली जड़ अनुभूति है।

From the text: “अनुभव से अनुभूति गहरी चीज़ है, कम-से-कम कृतिकार के लिए”; अस्पताल देखकर भी तुरंत न लिखना और छाया देखकर कविता की प्रेरणा जागना।

आंतरिक प्रेरणा और बाहरी दबाव

लेखक स्वीकार करते हैं कि प्रसिद्धि के बाद संपादकों के आग्रह, प्रकाशक के तकाजे और आर्थिक ज़रूरत से भी लिखना पड़ता है। पर सच्चा कृतिकार ईमानदारी से यह अंतर याद रखता है कि कौन-सी रचना भीतर से आई और कौन-सी बाहरी दबाव से। कभी बाहरी दबाव भी भीतरी प्रेरणा को जगाने का निमित्त बन जाता है। यहाँ स्वभाव और आत्मानुशासन का महत्त्व है: आलसी लेखक दबाव के बिना लिख नहीं पाते, जबकि अनुशासित लेखक अपने आप लिखता है, जैसे कोई बिना अलार्म के जाग जाए।

From the text: “यहाँ पर कृतिकार के स्वभाव और आत्मानुशासन का महत्त्व बहुत होता है।” तथा अलार्म का उदाहरण: “सबेरे उठ जाता हूँ अपने आप ही”।

विज्ञान का दुरुपयोग और मानवीय संवेदना

लेखक विज्ञान के विद्यार्थी थे और अणु-शक्ति को जानते थे, इसलिए हिरोशिमा पर अणु-बम को वे विज्ञान का दुरुपयोग मानते हैं। ब्रह्मपुत्र में बम से हज़ारों मछलियों का मारा जाना भी व्यर्थ जीव-नाश का उदाहरण है। पाठ बताता है कि ज्ञान के साथ संवेदना न हो तो विज्ञान विनाश का साधन बन जाता है। कविता में ‘मानव का रचा हुआ सूरज’ मनुष्य को ही भाप बना देता है। इससे संदेश मिलता है कि विज्ञान का उपयोग मानवता की रक्षा के लिए होना चाहिए।

From the text: “विज्ञान के इस दुरुपयोग के प्रति बुद्धि का विद्रोह स्वाभाविक था”; कविता की पंक्ति “मानव का रचा हुआ सूरज मानव को भाप बनाकर सोख गया।”

रचना की सच्चाई उसकी कसौटी

पाठ के अंत में लेखक कहते हैं कि उनकी कविता अच्छी है या बुरी, इससे उन्हें मतलब नहीं। उनके लिए महत्त्व इस बात का है कि कविता सच्ची है, क्योंकि वह अनुभूति से जन्मी है। इससे पता चलता है कि अज्ञेय रचना को प्रशंसा या कला-कौशल से नहीं, बल्कि उसकी ईमानदारी से परखते हैं। सच्चा लेखक वही लिखता है जिसे उसने भीतर से जिया हो।

From the text: “यह कविता अच्छी है या बुरी; इससे मुझे मतलब नहीं है।”

Characters

लेखक (अज्ञेय)

पाठ के वक्ता और केंद्र; वे अपने लेखन की प्रेरणा की जाँच करते हैं और हिरोशिमा के अपने अनुभव से अनुभूति का अर्थ समझाते हैं।

  • आत्म-विश्लेषी और ईमानदार: अपने लेखन की भीतरी और बाहरी प्रेरणा का भेद खुलकर बताते हैं।
  • वैज्ञानिक समझ वाले: विज्ञान के विद्यार्थी थे और अणु तथा रेडियम-धर्मिता का ज्ञान रखते थे।
  • संवेदनशील: ब्रह्मपुत्र में मरी मछलियों से व्यथित हुए और जले पत्थर की छाया देखकर हिल उठे।
  • आत्मानुशासित: उन्हें लिखने के लिए बाहरी दबाव की ज़रूरत नहीं पड़ती।
  • धैर्यवान रचनाकार: हिरोशिमा देखकर भी तुरंत नहीं लिखा; अनुभूति पकने पर भारत लौटकर कविता लिखी।

“मैं विज्ञान का विद्यार्थी रहा हूँ”; “उस छाया को देखकर जैसे एक थप्पड़-सा लगा।”; “मुझे इस सहारे की ज़रूरत नहीं पड़ती”; कविता “भारत लौटकर, रेलगाड़ी में बैठे-बैठे” लिखी गई।

पत्थर पर छाया वाला अनाम व्यक्ति

पाठ में प्रत्यक्ष पात्र नहीं, पर उसकी छाया ही लेखक की अनुभूति को जगाती है; वह हिरोशिमा के सभी पीड़ितों का प्रतीक बन जाता है।

  • मौन साक्षी: उसकी छाया पूरी त्रासदी को बिना शब्दों के कह देती है।
  • विनाश का शिकार: विस्फोट की किरणों ने उसे भाप बनाकर उड़ा दिया होगा।
  • प्रतीकात्मक: कविता में उसकी जली छाया ‘मानव की साखी’ बनती है।

“इस प्रकार समूची ट्रेजडी जैसे पत्थर पर लिखी गई।”; कविता में “जली हुई छाया मानव की साखी है।”

How it is written

DeviceExampleEffect
दृष्टांत या उदाहरण शैली (अलार्म की तुलना)आलसी लेखक की तुलना उस व्यक्ति से की गई है जो नींद खुलने पर भी तब तक बिस्तर पर पड़ा रहे “जब तक घड़ी का एलार्म न बज जाए।”बाहरी दबाव और आत्मानुशासन जैसी कठिन बात रोज़मर्रा के उदाहरण से सरल और याद रखने योग्य बन जाती है।
आत्मकथात्मक और प्रश्नात्मक शैलीपाठ एक प्रश्न से शुरू होता है और लेखक “मैं” के रूप में अपना अनुभव सुनाते हैं; बीच में भी पूछते हैं “यह भीतरी विवशता क्या होती है?”पाठक लेखक के साथ सोचने लगता है और निबंध व्यक्तिगत तथा विश्वसनीय लगता है।
प्रतीक (जले पत्थर पर छाया)“एक जले हुए पत्थर पर एक लंबी उजली छाया है”एक छोटी-सी छाया पूरे हिरोशिमा विनाश का प्रतीक बन जाती है; इसी से लेखक का अनुभव अनुभूति में बदलता है।
कविता में विरोधाभास और बिंब“सूरज निकला अरे क्षितिज पर नहीं, नगर के चौक”; “धूप बरसी पर अंतरिक्ष से नहीं, फटी मिट्टी से।”अणु-बम के विस्फोट को उलटे सूरज के रूप में दिखाकर कवि उसकी भयानकता का तीखा दृश्य-चित्र खड़ा करते हैं।
उपमा और उत्प्रेक्षा“अवाक् इतिहास जैसे भीतर कहीं सहसा एक जलते हुए सूर्य-सा उग आया” (भाव)लेखक के भीतर अचानक उठे झटके और पीड़ा को प्रकाश और आग की छवि से जीवंत बनाया गया है।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • लिखकर ही वह उससे मुक्त हो जाता है।

    लेखक (अज्ञेय): पाठ के आरंभ में लेखक बताते हैं कि लेखक लिखकर ही अपनी भीतरी विवशता को पहचानता है।

    यह पाठ का मूल उत्तर है: लेखन भीतरी बेचैनी से मुक्ति का साधन है।

  • यहाँ पर कृतिकार के स्वभाव और आत्मानुशासन का महत्त्व बहुत होता है।

    लेखक (अज्ञेय): बाहरी दबाव (संपादक, प्रकाशक, पैसा) की चर्चा के बाद लेखक यह बात कहते हैं।

    बताता है कि बाहरी दबाव से लिखना पड़े या नहीं, यह लेखक के स्वभाव और अनुशासन पर निर्भर है।

  • विज्ञान के इस दुरुपयोग के प्रति बुद्धि का विद्रोह स्वाभाविक था

    लेखक (अज्ञेय): हिरोशिमा पर अणु-बम के समाचार पढ़ने के बाद की लेखक की प्रतिक्रिया।

    दिखाता है कि यह विद्रोह अभी बुद्धि के स्तर पर था, अनुभूति के स्तर पर नहीं; इसलिए तब कविता नहीं बनी।

  • अनुभव से अनुभूति गहरी चीज़ है, कम-से-कम कृतिकार के लिए

    लेखक (अज्ञेय): हिरोशिमा का अस्पताल देखने के प्रत्यक्ष अनुभव के बाद लेखक यह अंतर बताते हैं।

    अनुभव और अनुभूति के अंतर वाले प्रश्नों का केंद्रीय वाक्य।

  • उस छाया को देखकर जैसे एक थप्पड़-सा लगा।

    लेखक (अज्ञेय): जले पत्थर पर किसी व्यक्ति की उजली छाया देखने का क्षण।

    यही वह क्षण है जब अनुभव अनुभूति में बदला और कविता की प्रेरणा जागी।

  • एक अर्थ में मैं स्वयं हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता बन गया।

    लेखक (अज्ञेय): छाया देखने के बाद लेखक अपनी मनःस्थिति बताते हैं।

    ‘भोक्ता कब और कैसे बने’ वाले प्रश्न का सीधा आधार; संवेदना से पराई पीड़ा अपनी बन गई।

  • यह कविता अच्छी है या बुरी; इससे मुझे मतलब नहीं है।

    लेखक (अज्ञेय): पाठ के अंत में हिरोशिमा कविता के बारे में लेखक का मत।

    रचना की असली कसौटी उसकी सच्चाई और अनुभूति है, प्रशंसा नहीं।

  • मानव का रचा हुआ सूरज मानव को भाप बनाकर सोख गया।

    कवि (अज्ञेय), हिरोशिमा कविता: कविता में अणु-बम को मनुष्य का बनाया सूरज कहा गया है।

    विज्ञान के दुरुपयोग की विडंबना: मनुष्य की रचना ने मनुष्य को ही नष्ट कर दिया।

मैं क्यों लिखता हूँ? in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

अनुभव और अनुभूति का अंतर

मान लीजिए आपने अख़बार में पढ़ा कि किसी गाँव में बाढ़ से कई घर बह गए। आपको थोड़ा दुख हुआ, पर अगले दिन आप भूल गए। कुछ दिन बाद उसी गाँव से एक नया सहपाठी आपकी कक्षा में आता है, जिसका बस्ता और किताबें तक बाढ़ में बह गईं।

इस स्थिति के आधार पर 'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ में बताए अनुभव और अनुभूति के अंतर को समझाइए। (50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अख़बार पढ़ना = घटना की जानकारी, जैसे लेखक ने हिरोशिमा के समाचार पढ़े।
  2. सहपाठी को सामने देखना = घटना का भीतर जीवित होना, जैसे पत्थर की छाया।
  3. अनुभव घटित का होता है; अनुभूति संवेदना और कल्पना से दूसरे का सत्य अपना बना लेती है।
  4. अनुभूति ही कर्म (मदद) की प्रेरणा बनती है।

Answer: अख़बार पढ़ना घटना की जानकारी था, जैसे लेखक ने हिरोशिमा के समाचार पढ़े थे। सहपाठी को सामने देखकर वह घटना मन में जीवित हो उठती है, जैसे लेखक को पत्थर की छाया देखकर हुआ। अनुभव घटित का होता है, जबकि अनुभूति संवेदना और कल्पना से दूसरे का दुख अपना बना देती है। यही हमें मदद को प्रेरित करती है।

Memory hook: अख़बार की ख़बर = अनुभव; सामने बैठा दुखी सहपाठी = अनुभूति।

आंतरिक प्रेरणा, बाहरी दबाव और आत्मानुशासन

मान लीजिए बोर्ड परीक्षा से पहले रोहन तभी पढ़ने बैठता है जब माँ टोकती हैं या मोबाइल का अलार्म बजता है। उसकी बहन मीना हर सुबह अपने आप उठकर पढ़ती है, फिर भी माँ के याद दिलाने पर नाराज़ नहीं होती।

पाठ की अलार्म घड़ी वाली उपमा के आधार पर रोहन और मीना की तुलना कीजिए और बताइए कि किसका तरीका बेहतर है। (50-60 शब्द)

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  1. रोहन = वह आलसी कृतिकार जो अलार्म बजने तक बिस्तर पर पड़ा रहता है।
  2. मीना = लेखक जैसी, जो अपने आप उठता है।
  3. भीतरी प्रेरणा और आत्मानुशासन अधिक भरोसेमंद हैं।
  4. बाहरी याद दिलाना सहायक यंत्र भर हो, तो हानि नहीं।

Answer: रोहन उन कृतिकारों जैसा है जो नींद खुलने पर भी अलार्म बजने तक पड़े रहते हैं; उसे बाहरी दबाव चाहिए। उसकी बहन लेखक जैसी है, जो अपने आप उठ जाता है। भीतरी प्रेरणा और आत्मानुशासन बेहतर हैं, क्योंकि वे हमेशा साथ रहते हैं। फिर भी, लेखक की तरह, बाहरी याद दिलाना बुरा नहीं, यदि उसे सहायक यंत्र भर माना जाए।

Memory hook: अपने आप जागना = भीतरी प्रेरणा; अलार्म = बाहरी दबाव, जो बस सहायक है।

विज्ञान का दुरुपयोग और मानवीय संवेदना

कल्पना कीजिए आपकी कक्षा का एक छात्र फ़ोटो बदलने वाले किसी टूल से एक सहपाठी की मज़ाक उड़ाने वाली नकली तस्वीर बनाकर कक्षा के समूह में भेज देता है। सब हँस रहे हैं और तस्वीर आगे भेजी जा रही है।

'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ में दिखाए गए विज्ञान के दुरुपयोग से इस घटना को जोड़िए और बताइए कि एक संवेदनशील विद्यार्थी के रूप में आप क्या करेंगे। (50-60 शब्द)

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  1. हिरोशिमा: मनुष्य की बनाई शक्ति ने मनुष्य को ही मिटाया।
  2. यहाँ छोटे स्तर पर तकनीक किसी का सम्मान चोट पहुँचा रही है।
  3. केवल बुद्धि से नहीं, संवेदना से सोचना।
  4. ठोस कदम: आगे न भेजना, समझाना, शिक्षक को बताना।

Answer: हिरोशिमा में मनुष्य की बनाई शक्ति ने ही मनुष्य को मिटा दिया था। छोटे स्तर पर यह भी वैसा ही दुरुपयोग है, जहाँ तकनीक किसी के सम्मान को चोट पहुँचा रही है। लेखक की तरह हमें केवल बुद्धि से नहीं, संवेदना से सोचना चाहिए। मैं वह चित्र आगे नहीं भेजूँगा, मित्र को समझाऊँगा और शिक्षक को बताऊँगा।

Memory hook: 'मानव का रचा हुआ सूरज' आज मोबाइल में भी हो सकता है; बटन दबाने से पहले संवेदना।

रचना की सच्चाई उसकी कसौटी

मान लीजिए माँ के जन्मदिन पर आप एक कार्ड बना रही हैं। आपके पास दो रास्ते हैं: इंटरनेट से एक सुंदर, तुकबंदी वाली कविता नकल कर लें, या माँ के साथ बिताए पलों पर अपनी चार सरल पंक्तियाँ लिखें।

हिरोशिमा कविता के बारे में लेखक के विचार के आधार पर बताइए कि आप कौन-सा रास्ता चुनेंगी और क्यों। (50-60 शब्द)

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  1. लेखक: कविता अच्छी है या बुरी, इससे मतलब नहीं; वह सच है क्योंकि अनुभूति से जन्मी।
  2. इसी कसौटी पर अपनी पंक्तियाँ चुनना।
  3. अपनी पंक्तियों में सच्ची भावना है।
  4. नकल में शब्द हैं, अपनी अनुभूति नहीं।

Answer: लेखक कहता है कि उसकी कविता अच्छी है या बुरी, इससे उसे मतलब नहीं; वह सच है क्योंकि अनुभूति से जन्मी है। इसी कसौटी पर मैं अपनी चार सरल पंक्तियाँ चुनूँगी। उनमें माँ के साथ बिताए पलों की सच्ची भावना होगी। नकल की सुंदर कविता में शब्द तो होंगे, पर मेरी अपनी अनुभूति नहीं होगी।

Memory hook: सुंदर नहीं, सच्चा: अपनी चार पंक्तियाँ नकल की चालीस से भारी।

Topics in this chapter

How the board asks मैं क्यों लिखता हूँ?

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
अनुभव और अनुभूति का अंतरअनुभव और अनुभूति का अंतर स्पष्ट करते हुए बताइए कि लेखक ने हिरोशिमा में सब देखकर भी तुरंत क्यों नहीं लिखा।पहले दोनों की परिभाषा दें: अनुभव घटित का, अनुभूति संवेदना और कल्पना से। फिर अस्पताल देखना (अनुभव) और जली छाया देखना (अनुभूति) का उदाहरण दें। अंत में बताएँ कि अनुभूति की कसर के कारण तुरंत नहीं लिखा। चार बिंदु, 50-60 शब्द।
हिरोशिमा का प्रसंग: क्या देखा, भोक्ता कैसे बनेहिरोशिमा में लेखक ने क्या-क्या देखा और किस बात ने उनकी अनुभूति को झकझोरा; वे विस्फोट के भोक्ता कब और कैसे बने।क्रम से लिखें: अस्पताल में आहत लोग, फिर सड़क पर जले पत्थर पर उजली छाया, थप्पड़-सा लगना, स्वयं को भोक्ता मानना, भारत लौटकर रेलगाड़ी में कविता लिखना। यदि दूसरा भाग सीख पूछे तो एक-दो पंक्ति अपने विचार की जोड़ें।
आंतरिक विवशता, बाहरी दबाव और आत्मानुशासनकोई लेखक क्यों लिखता है; बाहरी दबाव कौन-से हैं; कृतिकार के स्वभाव और आत्मानुशासन का लेखन में क्या महत्त्व है।भीतरी विवशता से मुक्ति को मुख्य कारण बताएँ; बाहरी दबाव गिनाएँ (संपादक का आग्रह, प्रकाशक का तकाजा, आर्थिक ज़रूरत); अलार्म का उदाहरण दें; बताएँ कि बाहरी दबाव भीतरी प्रेरणा का निमित्त भी बन सकता है।
विज्ञान का दुरुपयोग और युवाओं की भूमिका (HOTS)हिरोशिमा जैसी घटना रोकने के लिए युवा क्या कर सकते हैं; जागरूकता और संवेदनशीलता विज्ञान के दुरुपयोग को कैसे कम कर सकती है।पाठ से जोड़कर शुरू करें (अणु-बम, ब्रह्मपुत्र की मछलियाँ, ‘मानव का रचा हुआ सूरज’)। फिर दो-तीन ठोस सुझाव दें: शांति के प्रति जागरूकता, विज्ञान का मानव-हित में प्रयोग, प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदना। तर्कसंगत और संतुलित भाषा रखें।
लेखन के कारकों पर अपना मतलेखन के लिए आप किन कारकों को अनिवार्य मानेंगे और क्यों; क्या बाहरी दबाव अन्य क्षेत्रों के कलाकारों को भी प्रभावित करता है।पाठ का आधार दें (अनुभूति, भीतरी विवशता, आत्मानुशासन), फिर अपना चुनाव तर्क के साथ लिखें। उदाहरण अपने जीवन या कल्पित स्थिति से दें, पर पाठ से बाहर के तथ्य न गढ़ें।
हिरोशिमा कविता का भावहिरोशिमा कविता लेखक के आंतरिक और बाह्य दोनों दबावों का परिणाम कैसे है; कविता में ‘छाया’ और ‘सूरज’ का क्या अर्थ है।बाह्य: समाचार, लेख, हिरोशिमा यात्रा, अस्पताल। आंतरिक: छाया देखकर जागी अनुभूति। कविता में सूरज को अणु-बम और छाया को मानव की साखी के रूप में समझाएँ।

Tricks to remember मैं क्यों लिखता हूँ?

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • कविता तक की सात सीढ़ियाँ

    'पुस्तक पढ़ी, समाचार सुने, लेख लिखे, मछली देखी, अस्पताल गए, छाया ने थप्पड़ मारा, रेल में कविता।' यानी पुस्तकीय ज्ञान → हिरोशिमा के समाचार → लेख → ब्रह्मपुत्र की मछलियाँ → जापान का अस्पताल → पत्थर पर छाया → भारत लौटकर रेलगाड़ी में कविता।

    Use it when: क्रम वाले प्रश्नों में और यह याद रखने के लिए कि कविता जापान में नहीं, भारत में रेलगाड़ी में लिखी गई।

  • आँख और आत्मा

    अनुभव = आँख (जो घटित हुआ, सामने आया)। अनुभूति = आत्मा (जो घटित नहीं हुआ, पर संवेदना और कल्पना से भीतर ज्वलंत हो उठा)। लेखक के लिए आत्मा, आँख से गहरी।

    Use it when: अनुभव-अनुभूति के अंतर वाले हर प्रश्न का पहला वाक्य इसी से बनाइए।

  • तीन बाहरी दबाव: सं-प्र-आ

    संपादक का आग्रह, प्रकाशक का तकाज़ा, आर्थिक आवश्यकता। और इन तीनों के लिए एक चित्र: अलार्म घड़ी।

    Use it when: बाहरी दबाव और आत्मानुशासन वाले प्रश्नों में तीनों दबाव और उपमा एक साथ लिखने के लिए।

  • दिमाग ने लेख लिखवाया, दिल ने कविता

    बुद्धि का विद्रोह → लेख। संवेदना की विवशता → कविता। बीच का पुल: पत्थर पर जली छाया।

    Use it when: 'लेख लिखे पर कविता क्यों नहीं' जैसे प्रश्नों में कारण तुरंत याद आ जाता है।

  • उलटा सूरज

    हिरोशिमा कविता का सूरज हर बात में उलटा है: क्षितिज पर नहीं, नगर के चौक पर; अंतरिक्ष से नहीं, फटी मिट्टी से; पूरब में नहीं, बीचों-बीच नगर के। और अंत में छायाएँ बचीं, मानव भाप हो गए।

    Use it when: कविता का भाव और विडंबना लिखते समय उदाहरण देने के लिए।

मैं क्यों लिखता हूँ?: board-level solved questions

Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: प्रश्न सरल भी, कठिन भी · 4 marks · Long answerBoard level

'मैं क्यों लिखता हूँ?' पाठ के आरंभ में लेखक इस प्रश्न को सरल भी और कठिन भी क्यों मानता है? लेखक के अनुसार इसका सच्चा उत्तर क्या है? लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए।

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  1. प्रश्न सुनने में सरल लगता है।
  2. इसका सच्चा उत्तर लेखक के आंतरिक जीवन के कई स्तरों से जुड़ा है, इसलिए कठिन है।
  3. उन स्तरों को कुछ वाक्यों में बाँधना आसान नहीं।
  4. सच्चा उत्तर: लेखक स्वयं जानना चाहता है कि क्यों लिखता है; लिखकर ही वह भीतरी विवशता पहचानता है और उससे मुक्त होता है।

Answer: लेखक के अनुसार यह प्रश्न सुनने में सरल है, पर इसका सच्चा उत्तर लेखक के आंतरिक जीवन के कई स्तरों से जुड़ा है। उन्हें कुछ वाक्यों में बाँधना कठिन है। सच्चा उत्तर यह है कि लेखक स्वयं जानना चाहता है कि वह क्यों लिखता है। लिखकर ही वह अपनी भीतरी विवशता पहचानता है और उससे मुक्त होता है।

Example 2: अलार्म घड़ी की उपमा · 4 marks · Long answerHarder board level

लेखक ने कृतिकार और बाहरी दबाव के संबंध को समझाने के लिए अलार्म घड़ी की उपमा दी है। इस उपमा का आशय स्पष्ट करते हुए बताइए कि लेखक स्वयं किस श्रेणी में आता है।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कुछ आलसी कृतिकार बाहरी दबाव के बिना लिख नहीं पाते।
  2. उपमा: नींद खुलने पर भी अलार्म बजने तक बिस्तर पर पड़े रहना।
  3. ऐसा कृतिकार दबाव के प्रति समर्पित नहीं होता, उसे सहायक यंत्र की तरह काम में लाता है।
  4. लेखक अपने आप उठ जाता है, यानी भीतरी प्रेरणा से लिखता है; पर अलार्म बजने को हानि नहीं मानता।

Answer: लेखक कहता है कि कुछ आलसी कृतिकार बाहरी दबाव के बिना लिख नहीं पाते, जैसे कोई नींद खुलने पर भी अलार्म बजने तक बिस्तर पर पड़ा रहे। ऐसे कृतिकार दबाव को केवल सहायक यंत्र की तरह इस्तेमाल करते हैं। लेखक स्वयं अपने आप जाग जाता है, यानी भीतरी प्रेरणा से लिखता है, पर अलार्म बजे तो हानि नहीं मानता।

Example 3: ब्रह्मपुत्र की मछलियों का प्रसंग · 4 marks · Long answerHarder board level

लेखक ने ब्रह्मपुत्र में मारी गई मछलियों का प्रसंग क्यों सुनाया है? इस अनुभव ने उसे क्या दिया और क्या नहीं दे सका?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. युद्धकाल में भारत की पूर्वी सीमा पर सैनिक ब्रह्मपुत्र में बम फेंककर हज़ारों मछलियाँ मार देते थे।
  2. उन्हें थोड़ी-सी मछलियों की ही आवश्यकता होती थी; यह जीव का अपव्यय था।
  3. इससे लेखक के भीतर व्यथा उमड़ी और वह एक सीमा तक अणु-बम से हुए व्यर्थ जीव-नाश को महसूस कर सका।
  4. पर कविता लिखने लायक गहरी अनुभूति अभी नहीं जागी थी; वह बाद में हिरोशिमा की छाया देखकर जागी।

Answer: युद्धकाल में भारत की पूर्वी सीमा पर लेखक ने सैनिकों को ब्रह्मपुत्र में बम फेंककर हज़ारों मछलियाँ मारते देखा, जबकि उन्हें थोड़ी ही चाहिए थीं। जीवों के इस व्यर्थ नाश से उसके मन में व्यथा उमड़ी। इससे वह एक सीमा तक अणु-बम से होने वाले व्यर्थ जीव-नाश को महसूस कर सका, पर कविता के लिए गहरी अनुभूति अभी बाकी थी।

Example 4: पत्थर पर लिखी त्रासदी · 4 marks · Long answerHarder board level

हिरोशिमा में जले पत्थर पर बनी उजली छाया कैसे बनी होगी? लेखक ने क्यों कहा कि 'समूची ट्रेजडी जैसे पत्थर पर लिखी गई'?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लेखक का अनुमान: विस्फोट के समय कोई व्यक्ति वहाँ खड़ा रहा होगा।
  2. जो किरणें उस व्यक्ति पर अटकीं, उन्होंने उसे भाप बनाकर उड़ा दिया।
  3. आसपास से आगे बढ़ी किरणों ने पत्थर को झुलसा दिया, इसलिए व्यक्ति वाली जगह उजली छाया रह गई।
  4. वह छाया एक जीवन के मिट जाने का प्रमाण बनी, मानो पूरी त्रासदी पत्थर पर लिख दी गई हो।

Answer: लेखक के अनुमान से विस्फोट के समय कोई व्यक्ति वहाँ खड़ा रहा होगा। रेडियम-धर्मी किरणें उस पर अटकीं और उसे भाप बनाकर उड़ा दिया, जबकि आसपास की किरणों ने पत्थर झुलसा दिया। व्यक्ति वाली जगह उजली छाया रह गई। वह छाया एक जीवन के मिट जाने का प्रमाण थी, इसलिए लगा मानो पूरी त्रासदी पत्थर पर लिख दी गई।

Example 5: मानव का रचा हुआ सूरज · 4 marks · Long answerHOTS / competency

'मानव का रचा हुआ सूरज मानव को भाप बनाकर सोख गया।' हिरोशिमा कविता की इस पंक्ति में छिपी विडंबना स्पष्ट कीजिए और बताइए कि यह पंक्ति आज के समय को क्या चेतावनी देती है।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कविता में विस्फोट को 'सूरज' कहा गया है, जो क्षितिज से नहीं, नगर के चौक में उगा।
  2. यह सूरज प्रकृति का नहीं, मनुष्य का रचा हुआ है।
  3. विडंबना: जिस शक्ति को मनुष्य ने स्वयं रचा, उसी ने मनुष्य को भाप बना दिया।
  4. अपना मत: खोज के साथ संवेदना ज़रूरी है, वरना मनुष्य की शक्ति ही उसका विनाश बनती है।

Answer: कविता में अणु-बम को 'मानव का रचा हुआ सूरज' कहा गया है। जिस शक्ति को मनुष्य ने स्वयं रचा, उसी ने उसे भाप बना दिया; यही विडंबना है। मेरे विचार में यह पंक्ति आज के वैज्ञानिकों को चेताती है कि खोज के साथ संवेदना भी ज़रूरी है, वरना मनुष्य की शक्ति ही उसका विनाश बन सकती है।

Example 6: रचना की सच्चाई या सुंदरता? · 4 marks · Long answerHOTS / competency

लेखक कहता है कि उसकी हिरोशिमा कविता अच्छी है या बुरी, इससे उसे मतलब नहीं। क्या आप मानते हैं कि किसी रचना की सच्चाई उसकी सुंदरता से अधिक महत्त्वपूर्ण है? पाठ के आधार पर तर्क सहित उत्तर दीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अपना मत स्पष्ट (सहमति या असहमति)।
  2. पाठ का आधार: लेखक के लिए कविता इसलिए सच है क्योंकि वह अनुभूति से जन्मी है।
  3. तर्क: सच्ची संवेदना से निकली रचना ही पाठक को छूती है।
  4. अपने जीवन से उदाहरण।

Answer: हाँ, मैं सहमत हूँ। लेखक के लिए हिरोशिमा कविता इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि वह अनुभूति से जन्मी है, न कि उसकी सुंदरता के कारण। जो रचना सच्ची संवेदना से निकलती है, वही पाठक के मन को छूती है। उदाहरण के लिए, केवल अंकों के लिए रटा निबंध नकली लगता है, जबकि अपने अनुभव से लिखा लेख भी असर छोड़ता है।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक की दृष्टि में बाहरी दबाव कृतिकार के लिए बाधा है या सहायक। (50-60 शब्द) (4 marks)

StepMarks
बाहरी दबावों का उल्लेख: संपादकों का आग्रह, प्रकाशक का तकाज़ा, आर्थिक आवश्यकता1
कृतिकार ईमानदारी से भीतरी प्रेरणा और बाहरी दबाव से लिखी रचना का भेद बनाए रखता है1
बाहरी दबाव भीतरी प्रेरणा का कारण बन सकता है; कृतिकार उसे सहायक यंत्र की तरह काम में लाता है1
अलार्म घड़ी की उपमा और लेखक का अपना मत (ज़रूरत नहीं, पर बाधा भी नहीं), शुद्ध भाषा और शब्द-सीमा सहित1

'पत्थर पर लिखी हुई यह जली हुई छाया मानव की साखी है।' हिरोशिमा कविता के अंतिम अंश के आधार पर इस कथन का भाव स्पष्ट करते हुए बताइए कि यह पंक्ति मनुष्य जाति को क्या संदेश देती है। (50-60 शब्द) (4 marks)

StepMarks
संदर्भ: विस्फोट के बाद मानव भाप हो गए, छायाएँ झुलसे पत्थरों और उजड़ी सड़कों पर बची रहीं1
विडंबना: 'मानव का रचा हुआ सूरज' मानव को ही सोख गया1
'साखी' का अर्थ: छाया मनुष्य के विनाश की गवाह है1
संदेश: विज्ञान के दुरुपयोग से बचना और संवेदना बनाए रखना; उत्तर अपने शब्दों में, शुद्ध भाषा में1

Where students lose marks in मैं क्यों लिखता हूँ?

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: कविता लिखने का स्थान गलत लिखना

    छाया देखने का प्रसंग जापान का है, इसलिए विद्यार्थी मान लेते हैं कि कविता भी वहीं लिखी गई।

    Wrong working

    छाया देखते ही लेखक ने हिरोशिमा में बैठकर तुरंत कविता लिख दी।

    Right working

    छाया देखकर अनुभूति जागी, पर कविता लेखक ने कुछ समय बाद भारत लौटकर रेलगाड़ी में बैठे-बैठे लिखी।

    Do this: याद रखिए: पहले वह उस भाव से धीरे-धीरे अपने को अलग कर सका, तभी लिख पाया।

    Usually costs: तथ्य गलत होने पर लगभग 1 अंक

  • Mistake: ब्रह्मपुत्र की मछलियों का प्रसंग जापान से जोड़ देना

    दोनों प्रसंग साथ-साथ आते हैं, इसलिए स्थान गड़बड़ा जाता है।

    Wrong working

    जापान में लेखक ने सैनिकों को नदी में बम फेंककर मछलियाँ मारते देखा।

    Right working

    युद्धकाल में भारत की पूर्वी सीमा पर सैनिक ब्रह्मपुत्र में बम फेंककर हज़ारों मछलियाँ मार देते थे।

    Do this: मछलियाँ = भारत, ब्रह्मपुत्र; अस्पताल और छाया = जापान, हिरोशिमा।

    Usually costs: लगभग 1 अंक

  • Mistake: अनुभव और अनुभूति को एक ही बता देना या उलट देना

    दोनों शब्द मिलते-जुलते हैं और विद्यार्थी परिभाषा रटकर नहीं, अंदाज़े से लिखते हैं।

    Wrong working

    अनुभूति वह है जो आँखों से देखा जाए, और अनुभव मन में होता है।

    Right working

    अनुभव घटित का होता है; अनुभूति संवेदना और कल्पना के सहारे उस सत्य को आत्मसात् कर लेती है जो कृतिकार के साथ घटित नहीं हुआ।

    Do this: 'आँख और आत्मा' वाली युक्ति से पहले परिभाषा लिखिए, फिर हिरोशिमा का उदाहरण दीजिए।

    Usually costs: मुख्य बिंदु गलत होने पर 2 अंक तक

  • Mistake: प्रश्न का उत्तर देने के बजाय पूरा पाठ सुना देना

    विद्यार्थी सोचते हैं कि जितनी ज़्यादा कहानी, उतने ज़्यादा अंक।

    Wrong working

    (प्रश्न: आत्मानुशासन का महत्त्व) लेखक विज्ञान का विद्यार्थी था, फिर बम गिरा, फिर वह जापान गया, फिर छाया देखी...

    Right working

    कुछ कृतिकार बाहरी दबाव के बिना नहीं लिख पाते, जैसे अलार्म बजने तक बिस्तर पर पड़े रहना; आत्मानुशासन वाला कृतिकार भीतरी प्रेरणा से लिखता है।

    Do this: पहले वाक्य में ही सीधा उत्तर दीजिए; उदाहरण केवल वही जो प्रश्न से जुड़ा हो।

    Usually costs: प्रासंगिक बिंदु छूटने पर 2 अंक तक

  • Mistake: यह लिखना कि लेखक बाहरी दबाव को बिल्कुल गलत मानता है

    'भीतरी प्रेरणा' पर ज़ोर देखकर विद्यार्थी मान लेते हैं कि बाहरी दबाव का लेखक विरोधी है।

    Wrong working

    लेखक के अनुसार बाहरी दबाव से लिखना बुरा है और कृतिकार को कभी दबाव में नहीं लिखना चाहिए।

    Right working

    लेखक को इस सहारे की ज़रूरत नहीं पड़ती, पर उससे बाधा भी नहीं होती; कई बार बाहरी दबाव भीतरी प्रेरणा का कारण बन जाता है।

    Do this: अलार्म की उपमा का अंतिम हिस्सा याद रखिए: अलार्म बज जाए तो लेखक कोई हानि नहीं मानता।

    Usually costs: लगभग 1-2 अंक

  • Mistake: 50-60 शब्दों की जगह 100-120 शब्द लिख देना

    4 अंक देखकर विद्यार्थी लंबा उत्तर लिखते हैं और बाकी प्रश्नों के लिए समय कम पड़ता है।

    Wrong working

    भूमिका में लेखक का परिचय, पाठ का सार और फिर उत्तर, कुल मिलाकर डेढ़ पृष्ठ।

    Right working

    चार बिंदु, लगभग चार-पाँच वाक्य, सीधे प्रश्न पर; अंत में एक वाक्य अपना मत (यदि पूछा गया हो)।

    Do this: हर बिंदु के लिए लगभग 12-15 शब्द का एक वाक्य, बस।

    Usually costs: सीधे अंक भले न कटें, पर भाषा-प्रस्तुति और समय दोनों का नुकसान

मैं क्यों लिखता हूँ?: previous year questions

  • Course A: Asked in 6 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 2.3 marks per paper; 6 questions in all, counting OR alternatives. In 0 of 4 sample papers.
  • Course B: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).

Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.

Solved board questions from मैं क्यों लिखता हूँ?

Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.

2025 Course A, set 3/2/1, Q11 · 8 marks · Short answer

पूरक पाठ्य-पुस्तक के निर्धारित पाठों पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 50 – 60 शब्दों में लिखिए :

  1. (क)

    'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर लिखिए कि हिरोशिमा में लेखक ने क्या-क्या देखा और उसकी अनुभूति को किसने झकझोरा ? हिरोशिमा की विभीषिका से मनुष्य-जगत क्या सीख सकता है ?

    4 marks
  2. (ख)

    'माता का अँचल' में भोलानाथ के पिता उसके जीवन से किस प्रकार जुड़े थे ? सोदाहरण लिखिए। भोलानाथ के पिता जैसा व्यवहार बच्चों के जीवन में क्यों आवश्यक होता है ? अपने विचारों के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

    4 marks
  3. (ग)

    'साना साना हाथ जोड़ि' पाठ की लेखिका जितना ही बाहर के सौंदर्य से अभिभूत हो रही थीं उतना ही अपने भीतर डूब जा रही थीं। पाठ से दो उदाहरण लेकर लेखिका की दोनों अवस्थाओं का चित्रण कीजिए।

    4 marks
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (क) हिरोशिमा में लेखक ने अस्पताल में रेडियोधर्मी पदार्थ से पीड़ित लोगों को देखा। उसने एक पत्थर पर परमाणु विस्फोट के समय बनी किसी व्यक्ति की छाया भी देखी।

    1 mark
  2. (क) लेखक की अनुभूति को जले हुए पत्थर पर बनी मनुष्य की छाया ने झकझोर दिया।

    1 mark
  3. (क) सीख: हमें विज्ञान का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए, युद्ध से बचकर शांति स्थापित करनी चाहिए और प्रकृति का सम्मान करना चाहिए। इस विभीषिका से मनुष्य को यही शिक्षा मिलती है।

    2 marks
  4. (ख) भोलानाथ के पिता उसकी दिनचर्या और खुशियों से जुड़े थे। वे उसे अपने साथ पूजा पर बैठाते, तिलक लगाते, कंधे पर बैठाकर गंगा किनारे ले जाते, अपने हाथों से गोरस-भात खिलाते और उसके खेल में दर्शक या ग्राहक बनकर शामिल होते।

    2 marks
  5. (ख) ऐसा व्यवहार बच्चों में आत्मीयता और सुरक्षा का भाव जगाता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है, उन्हें भावनात्मक रूप से मज़बूत बनाता है और नैतिक विकास में सहायक होता है।

    2 marks
  6. (ग) (अतिरिक्त भाग) 'सेवेन सिस्टर्स वॉटरफ़ॉल' के सौंदर्य से लेखिका को जीवन की शक्ति का अहसास हुआ और उसके भीतर की तामसिकता और बुराइयाँ दूर हुईं। लायुंग की शाम में तिस्ता के किनारे बैठकर वह आध्यात्मिकता और दर्शन में डूब गई।

Answer: (क) अस्पताल में पीड़ित लोग और पत्थर पर छाया; छाया ने झकझोरा; सीख: विज्ञान का दुरुपयोग न हो, शांति बने। (ख) पिता पूजा, भोजन, खेल में साथ थे; ऐसा व्यवहार बच्चों में सुरक्षा व आत्मविश्वास देता है।

Where the marks are

  • (क) हिरोशिमा के दृश्य (1 अंक)
  • (क) अनुभूति को झकझोरने वाली घटना (1 अंक)
  • (क) सीख, विचार सहित (2 अंक)
  • (ख) पिता का जुड़ाव, उदाहरण सहित (2 अंक)
  • (ख) ऐसा व्यवहार आवश्यक क्यों, अपने विचार (2 अंक)
  • (ग) दो उदाहरण विस्तार से (4 अंक, यदि चुना जाए)

See it in the full 2025 board paper, set 3/2/1

Every मैं क्यों लिखता हूँ? question, by year

Course A (6 questions, sample papers included)

2025

Set 3/2/1: Q11 (8 marks, solved)

Set 3/3/1: Q11 (8 marks, solved)

Set 3/4/1: Q11 (8 marks, solved)

Set 3/5/1: Q11 (8 marks, solved)

Set 3/6/1: Q11 (8 marks, solved)

2024

Set 3/3/1: Q13 (8 marks, solved)

Course B (0 questions, sample papers included)

Practice questions on मैं क्यों लिखता हूँ?

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 4 marks · Long answerBoard level

    लेखक के अनुसार ख्याति मिलने के बाद कृतिकार किन बाहरी कारणों से भी लिखता है? ऐसे में सच्चा कृतिकार अपने सामने कौन-सा भेद ईमानदारी से बनाए रखता है? (50-60 शब्द)

    Hint

    पाठ के पहले हिस्से में तीन बाहरी कारण गिनाए गए हैं; फिर 'भीतरी प्रेरणा' और 'बाहरी दबाव' का भेद देखिए।

    Answer

    मूल्य बिंदु:

    • संपादकों का आग्रह
    • प्रकाशक का तकाज़ा
    • आर्थिक आवश्यकता
    • कृतिकार जानता है कि कौन-सी रचना भीतरी प्रेरणा का फल है, कौन-सी बाहरी दबाव का; कई बार दबाव भीतरी प्रेरणा का कारण बन जाता है।

    आदर्श उत्तर: ख्याति मिलने के बाद कृतिकार कभी-कभी बाहरी विवशता से भी लिखता है—संपादकों के आग्रह, प्रकाशक के तकाज़े और आर्थिक आवश्यकता से। फिर भी सच्चा कृतिकार ईमानदारी से याद रखता है कि कौन-सी रचना भीतरी प्रेरणा का फल है और कौन-सा लेखन बाहरी दबाव का। कई बार बाहरी दबाव भीतरी प्रेरणा जगाने का कारण बन जाता है।

  2. Q2 · 4 marks · Long answerBoard level

    हिरोशिमा पर कविता लिखने से पहले लेखक किन-किन चरणों से गुज़रा? कविता अंततः कब और कहाँ लिखी गई? (50-60 शब्द)

    Hint

    पुस्तकीय ज्ञान से शुरू कीजिए और रेलगाड़ी पर खत्म कीजिए।

    Answer

    मूल्य बिंदु:

    • विज्ञान के विद्यार्थी के रूप में अणु और रेडियम-धर्मिता का पुस्तकीय ज्ञान
    • बम गिरने के समाचार और परवर्ती प्रभाव पढ़े, लेख लिखे
    • जापान में अस्पताल के पीड़ित देखे, फिर पत्थर पर जली छाया देखी
    • भारत लौटकर रेलगाड़ी में बैठे-बैठे अचानक कविता लिखी

    आदर्श उत्तर: लेखक ने विज्ञान में अणु और रेडियम-धर्मिता का पुस्तकीय ज्ञान पाया था। हिरोशिमा पर बम गिरने के समाचार और प्रभाव पढ़े, लेख भी लिखे। जापान जाकर अस्पताल में पीड़ित लोग देखे। फिर पत्थर पर जली छाया देखकर अनुभूति जागी। कुछ समय बाद, भारत लौटकर रेलगाड़ी में बैठे-बैठे उसने अचानक कविता लिखी।

  3. Q3 · 4 marks · Long answerHarder board level

    'सभी लेखक कृतिकार नहीं होते; न उनका सब लेखन ही कृति होता है।' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक की दृष्टि में कृतिकार की पहचान क्या है।

    Hint

    कृतिकार क्यों लिखता है और वह किस बात में ईमानदार रहता है, यह जोड़िए।

    Answer

    मूल्य बिंदु:

    • हर लिखने वाला कृतिकार नहीं, हर लेखन कृति नहीं
    • कृतिकार भीतरी विवशता को पहचानने और उससे मुक्त होने के लिए लिखता है
    • वह भीतरी प्रेरणा और बाहरी दबाव से लिखी रचना का भेद ईमानदारी से जानता है
    • (व्याख्या) इसलिए उसकी रचना अनुभूति से जन्मी कृति होती है

    आदर्श उत्तर: पाठ से पता चलता है कि हर लिखने वाला कृतिकार नहीं होता और हर लेखन कृति नहीं होता। लेखक के अनुसार कृतिकार भीतरी विवशता को पहचानने और उससे मुक्त होने के लिए लिखता है। वह ईमानदारी से जानता है कि कौन-सी रचना भीतरी प्रेरणा से निकली और कौन-सी बाहरी दबाव से। इसलिए उसकी रचना अनुभूति से जन्मी कृति होती है।

  4. Q4 · 4 marks · Long answerHarder board level

    हिरोशिमा की घटना पर लेखक ने लेख तो लिखे, पर तुरंत कविता क्यों नहीं लिखी? 'बुद्धि का विद्रोह' और 'अनुभूति की विवशता' के अंतर के आधार पर समझाइए।

    Hint

    लेख बुद्धि से निकले; कविता के लिए कौन-सी चीज़ चाहिए थी जो 'बौद्धिक पकड़ से आगे' है?

    Answer

    मूल्य बिंदु:

    • समाचार और प्रभावों के विवरण पढ़े
    • विज्ञान के दुरुपयोग पर बुद्धि का विद्रोह स्वाभाविक था, इसलिए लेख लिखे
    • कविता के लिए अनुभूति के स्तर की विवशता चाहिए, जो बौद्धिक पकड़ से आगे की बात है
    • उसकी तर्क-संगति अलग होती है; वह विवशता अभी नहीं जागी थी

    आदर्श उत्तर: हिरोशिमा पर बम गिरने के बाद लेखक ने समाचार और प्रभावों के विवरण पढ़े। विज्ञान के इस दुरुपयोग पर उसकी बुद्धि ने विद्रोह किया, इसलिए उसने लेख लिखे। पर कविता के लिए अनुभूति के स्तर की विवशता चाहिए, जो बौद्धिक पकड़ से आगे की बात है और जिसकी तर्क-संगति अलग होती है। वह विवशता तब तक जागी नहीं थी।

  5. Q5 · 4 marks · Long answerHarder board level

    जली हुई छाया देखकर लेखक को 'थप्पड़-सा' क्यों लगा? उस क्षण के बाद लेखक के भीतर की आकुलता में क्या परिवर्तन आया?

    Hint

    'बुद्धि के क्षेत्र' से 'संवेदना के क्षेत्र' तक की यात्रा पर ध्यान दीजिए।

    Answer

    मूल्य बिंदु:

    • जले पत्थर पर किसी मनुष्य की उजली छाया ने लेखक को झकझोर दिया
    • अब तक का पुस्तकीय, समाचारों और अस्पताल से मिला ज्ञान भीतर जीवित हो उठा
    • आकुलता बुद्धि के क्षेत्र से संवेदना के क्षेत्र में आ गई
    • लेखक स्वयं को विस्फोट का भोक्ता अनुभव करने लगा

    आदर्श उत्तर: जले पत्थर पर किसी मनुष्य की उजली छाया देखकर लेखक को लगा जैसे किसी ने थप्पड़ मारा हो। अब तक जो ज्ञान पुस्तकों, समाचारों और अस्पताल के दृश्यों से मिला था, वह भीतर जीवित हो उठा। उसकी आकुलता बुद्धि के क्षेत्र से आगे बढ़कर संवेदना के क्षेत्र में आ गई और वह स्वयं को विस्फोट का भोक्ता अनुभव करने लगा।

  6. Q6 · 4 marks · Long answerHarder board level

    हिरोशिमा कविता में 'छायाएँ' और 'मानव' के बीच कैसी विडंबना दिखाई गई है? 'मानव की साखी' का आशय भी स्पष्ट कीजिए।

    Hint

    सामान्यतः छाया मिट जाती है और मनुष्य रहता है; कविता में उलटा क्या हुआ?

    Answer

    मूल्य बिंदु:

    • विस्फोट के बाद मनुष्यों की छायाएँ दिशाहीन होकर सब ओर पड़ीं
    • छायाएँ नहीं मिटीं, मानव ही सब भाप हो गए
    • छायाएँ झुलसे पत्थरों और उजड़ी सड़कों पर अभी भी लिखी हैं
    • जली छाया मानव की साखी, यानी उसके विनाश की गवाह है

    आदर्श उत्तर: कविता में विस्फोट के बाद मनुष्यों की छायाएँ हर दिशा में पड़ीं, पर वे छायाएँ नहीं मिटीं; मनुष्य ही भाप बन गए। आज भी वे छायाएँ झुलसे पत्थरों और उजड़ी सड़कों पर लिखी हैं। विडंबना यह है कि छाया रह गई, शरीर मिट गया। इसीलिए पत्थर पर जली छाया मानव की साखी, यानी उसके विनाश की गवाह है।

  7. Q7 · 4 marks · Long answerHOTS / competency

    मान लीजिए आपके विद्यालय की पत्रिका के संपादक आपसे कल तक एक ऐसे विषय पर कविता माँगते हैं, जिस पर आपने पहले कभी सोचा भी नहीं। 'मैं क्यों लिखता हूँ' में बताए बाहरी दबाव और भीतरी प्रेरणा के विचार के आधार पर बताइए कि आप इस स्थिति को कैसे सँभालेंगे।

    Hint

    लेखक के अनुसार बाहरी दबाव कब 'दबाव' नहीं रहता? अलार्म की उपमा भी याद कीजिए।

    Answer

    मूल्य बिंदु:

    • पाठ का विचार: बाहरी दबाव कभी-कभी भीतरी प्रेरणा जगाने का कारण बन जाता है
    • संपादक के आग्रह को अलार्म की तरह सहायक मानना
    • विषय से जुड़ी अपनी याद या अनुभव खोजकर सच्चे भाव लाना
    • ईमानदारी से मानना कि रचना दबाव से शुरू हुई

    आदर्श उत्तर: लेखक के अनुसार बाहरी दबाव कभी-कभी भीतरी प्रेरणा को जगाने का कारण बन जाता है। इसलिए मैं संपादक के आग्रह को अलार्म की तरह लूँगा। विषय से जुड़ी अपनी कोई याद या देखी घटना खोजूँगा, ताकि लिखते समय भाव सच्चे हों। पर मैं ईमानदारी से यह भी मानूँगा कि यह रचना दबाव से शुरू हुई है।

  8. Q8 · 4 marks · Long answerHOTS / competency

    मान लीजिए आप मोबाइल पर किसी युद्ध में नष्ट हुए शहर के चित्र तेज़ी से स्क्रॉल करते हुए देख रहे हैं। पाठ में बताए अनुभव और अनुभूति के अंतर के आधार पर बताइए कि ऐसे चित्र देखना अनुभव है या अनुभूति, और इसे अनुभूति में बदलना क्यों ज़रूरी है।

    Hint

    लेखक ने अस्पताल देखकर भी तुरंत क्यों नहीं लिखा था? अनुभूति को किसने जगाया?

    Answer

    मूल्य बिंदु:

    • तेज़ी से देखना घटित की केवल जानकारी, यानी अनुभव है
    • लेखक ने भी अस्पताल देखकर तुरंत नहीं लिखा; छाया ने अनुभूति जगाई
    • संवेदना और कल्पना से स्वयं को पीड़ितों की जगह रखना
    • यही संवेदना युद्ध और विज्ञान के दुरुपयोग के विरोध की शक्ति देती है

    आदर्श उत्तर: तेज़ी से स्क्रॉल करते हुए चित्र देखना केवल अनुभव है, क्योंकि उसमें हम ठहरकर महसूस नहीं करते। लेखक ने भी अस्पताल देखकर तुरंत नहीं लिखा; अनुभूति तब जागी जब एक छाया ने उसे झकझोरा। यदि हम पीड़ितों की जगह स्वयं को रखें, तो संवेदना जागेगी। यही संवेदना हमें युद्ध और विज्ञान के दुरुपयोग का विरोध करने की ताकत देती है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.लेखक के अनुसार 'मैं क्यों लिखता हूँ' का सच्चा उत्तर क्या है?Show answer

    वह स्वयं जानना चाहता है कि क्यों लिखता है; लिखकर ही वह भीतरी विवशता को पहचानता है और उससे मुक्त होता है।

  2. 2.ख्याति के बाद कौन-से तीन बाहरी दबाव लिखवाते हैं?Show answer

    संपादकों का आग्रह, प्रकाशक का तकाज़ा और आर्थिक आवश्यकता।

  3. 3.आलसी कृतिकार की तुलना किससे की गई है?Show answer

    उस व्यक्ति से जो नींद खुलने पर भी घड़ी का अलार्म बजने तक बिछौने पर पड़ा रहता है।

  4. 4.लेखक ने किस विषय की नियमित शिक्षा पाई थी?Show answer

    विज्ञान की; उसे अणु और रेडियम-धर्मिता का पुस्तकीय ज्ञान था।

  5. 5.ब्रह्मपुत्र वाली घटना कहाँ और कब देखी गई?Show answer

    युद्धकाल में भारत की पूर्वीय सीमा पर, जहाँ सैनिक बम फेंककर हज़ारों मछलियाँ मार देते थे।

  6. 6.हिरोशिमा में लेखक ने कौन-सा अस्पताल देखा?Show answer

    वह अस्पताल जहाँ रेडियम-पदार्थ से आहत लोग वर्षों से कष्ट पा रहे थे।

  7. 7.किस दृश्य ने लेखक को 'भोक्ता' बना दिया?Show answer

    जले पत्थर पर बनी लंबी उजली छाया ने; उसे देखकर जैसे थप्पड़-सा लगा।

  8. 8.हिरोशिमा कविता किस काव्य-संग्रह में है और कब प्रकाशित हुआ?Show answer

    'अरी ओ करुणा प्रभामय' में, जो सन् 1959 में प्रकाशित हुआ।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप दो वाक्यों में बता सकते हैं कि लेखक के लिए लिखना 'मुक्ति' कैसे है?
  • क्या आप बिना देखे अनुभव और अनुभूति की परिभाषा और हिरोशिमा से एक-एक उदाहरण लिख सकते हैं?
  • क्या आप अलार्म घड़ी की उपमा पूरी (आलसी कृतिकार और लेखक दोनों के लिए) समझा सकते हैं?
  • क्या आप याद कर सकते हैं कि लेखक ने लेख तो लिखे पर कविता तुरंत क्यों नहीं लिखी?
  • क्या आप पत्थर पर उजली छाया बनने की प्रक्रिया तीन वाक्यों में लिख सकते हैं?
  • क्या आप बता सकते हैं कि कविता कहाँ लिखी गई: जापान में या भारत में, और किस स्थिति में?
  • क्या आप 'मानव का रचा हुआ सूरज' और 'मानव की साखी' का भाव अपने शब्दों में लिख सकते हैं?
  • क्या आप विज्ञान के दुरुपयोग पर अपने जीवन से एक उदाहरण देकर 50-60 शब्दों का उत्तर लिख सकते हैं?

मैं क्यों लिखता हूँ?: frequently asked questions

‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ पाठ का मूल भाव क्या है?

इस पाठ का मूल भाव है कि सच्चा कृतिकार अपनी भीतरी विवशता को पहचानने और उससे मुक्त होने के लिए लिखता है। लेखक मानते हैं कि अनुभव से गहरी अनुभूति ही सच्ची रचना को जन्म देती है। हिरोशिमा का उदाहरण इसी बात को स्पष्ट करता है।

अनुभव और अनुभूति में क्या अंतर है?

अनुभव उस घटना का होता है जो आँखों के सामने घटती है। अनुभूति संवेदना और कल्पना के सहारे उस सत्य को भीतर उतार लेती है जो लेखक के साथ घटा ही नहीं। हिरोशिमा का अस्पताल देखना अनुभव था, जबकि जली छाया देखकर विस्फोट की पीड़ा महसूस करना अनुभूति थी।

लेखक ने हिरोशिमा पर कविता कब और कहाँ लिखी?

लेखक ने हिरोशिमा पर कविता जापान में नहीं लिखी। वे पहले उस भाव से धीरे-धीरे अलग हुए और फिर भारत लौटकर रेलगाड़ी में बैठे-बैठे अचानक एक दिन कविता लिखी।

लेखक के अनुसार बाहरी दबाव कौन-से होते हैं?

पाठ में तीन बाहरी दबाव बताए गए हैं: संपादकों का आग्रह, प्रकाशक का तकाजा और आर्थिक आवश्यकता। लेखक कहते हैं कि कभी-कभी यह बाहरी दबाव भी भीतरी प्रेरणा जगाने का कारण बन जाता है।

इस पाठ पर बोर्ड में कितने अंक का और कैसा प्रश्न आता है?

कृतिका के पाठों पर प्रश्न 11 में तीन प्रश्न आते हैं, जिनमें से दो करने होते हैं। हर प्रश्न 4 अंक का होता है और उत्तर 50-60 शब्दों में लिखना होता है। इस पाठ पर गद्यांश-आधारित प्रश्न नहीं आता।

ब्रह्मपुत्र वाली घटना का पाठ में क्या महत्त्व है?

युद्धकाल में लेखक ने सैनिकों को ब्रह्मपुत्र में बम फेंककर हज़ारों मछलियाँ मारते देखा था, जबकि उन्हें थोड़ी ही ज़रूरत थी। इस व्यर्थ जीव-नाश से उपजी व्यथा से लेखक अणु-बम द्वारा हुए व्यर्थ विनाश को कुछ हद तक समझ सके थे।

Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-अ (002), कक्षा 10, 2026-27; NCERT कृतिका भाग 2 (Reprint 2026-27), मैं क्यों लिखता हूँ?