मिथिलेश्वर – हरिहर काका Class 10: सारांश, पात्र और प्रश्न
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
‘हरिहर काका’ मिथिलेश्वर की कहानी है, जो संचयन भाग 2 का पहला पाठ है। एक निःसंतान किसान की पंद्रह बीघे ज़मीन के लिए उसके सगे भाई और ठाकुरबारी का महंत दोनों उस पर अत्याचार करते हैं। बोर्ड इससे 50-60 शब्दों के 3 अंकों वाले प्रश्न पूछता है, जिनमें स्वार्थ और चरित्र पर विचार माँगा जाता है।
What मिथिलेश्वर – हरिहर काका is about
‘हरिहर काका’ हिंदी पाठ्यक्रम-ब की पूरक पाठ्यपुस्तक संचयन भाग 2 का पहला पाठ है। इसके लेखक मिथिलेश्वर हैं। यह एक कहानी है, जिसे गाँव का एक युवक (कथावाचक) सुनाता है। कहानी का सार एक पंक्ति में: धन और ज़मीन के लालच में परिवार और धर्म दोनों के ठेकेदार एक बूढ़े, अकेले किसान को कैसे सताते हैं और वह अंत में कैसे मौन हो जाता है।
बोर्ड परीक्षा में यह पाठ खंड ग, प्रश्न 11 में आता है। वहाँ संचयन के पाठों पर तीन प्रश्न दिए जाते हैं, जिनमें से दो करने होते हैं। हर प्रश्न 3 अंक का है और उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखना होता है। इस पुस्तक से कोई गद्यांश-आधारित (अपठित या पठित) प्रश्न नहीं आता, इसलिए पूरी कहानी की घटनाएँ, पात्रों का स्वभाव और लेखक का संदेश अच्छी तरह याद होना चाहिए।
In real board papers: Course A, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026); Course B, asked in 16 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 4.6 marks per paper. See the questions
मिथिलेश्वर – हरिहर काका: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
कहानी वर्तमान से शुरू होती है। कथावाचक हरिहर काका के पास दो दिन बैठता है, पर काका कुछ नहीं बोलते। काका ने बचपन में उसे बहुत दुलार किया था और बड़ा होने पर उसकी पहली दोस्ती काका से ही हुई थी। काका की हालत मझधार में फँसी नाव जैसी है।
फिर कथावाचक गाँव की ठाकुरबारी का परिचय देता है। लोगों की आस्था के कारण इसके नाम बीस बीघे खेत हैं, पर वहाँ के साधु-संत बिना काम किए हलवा-पूड़ी खाते हैं।
हरिहर काका चार भाइयों में दूसरे हैं। उनकी दोनों पत्नियाँ बिना संतान के मर गईं। परिवार के पास साठ बीघे खेत हैं, काका के हिस्से पंद्रह बीघे। भाइयों की पत्नियाँ धीरे-धीरे उनकी उपेक्षा करने लगीं। एक दिन भतीजे के शहरी दोस्त के लिए अच्छे व्यंजन बने, पर काका को भात, मट्ठा और अचार मिला। काका ने थाली आँगन में फेंक दी और कहा कि उनके खेत की पैदावार इसी घर में आती है।
यह सुनकर पुजारी ने महंत को बताया। महंत काका को ठाकुरबारी ले गया और समझाया कि सब स्वार्थ के साथी हैं, इसलिए ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिख दो। रात में काका की खूब खातिर हुई। अगली सुबह भाई पाँव पकड़कर रोए और काका घर लौट आए। अब घर में उनकी भारी सेवा होने लगी।
गाँव दो वर्गों में बँट गया। काका ने कथावाचक से सलाह करके तय किया कि जीते-जी किसी को ज़मीन नहीं लिखेंगे। महंत ने आधी रात हथियारबंद साधुओं से काका का अपहरण करवाया और जबरन अँगूठे के निशान लिए। भाई पुलिस लाए। काका एक बंद कमरे में हाथ-पाँव बँधे, मुँह में कपड़ा ठुँसे मिले।
घर लौटने पर भाइयों ने पहरा बिठाया, पर फिर ज़मीन भतीजों के नाम लिखने का दबाव डाला। काका नहीं माने, क्योंकि उन्हें रमेसर की विधवा की दुर्दशा याद थी। भाइयों ने मारपीट करके अँगूठे के निशान लिए। काका के चिल्लाने पर महंत पुलिस लेकर आया और काका छुड़ाए गए।
अब काका अलग रहते हैं और चार पुलिस जवान उनकी सुरक्षा में हैं। नेता जी स्कूल का प्रस्ताव लाते हैं, पर काका नहीं मानते। गाँव में डरावनी अफ़वाहें फैलती हैं। काका एक नौकर के सहारे मौन जीवन जी रहे हैं और पुलिस वाले उन्हीं के खर्चे पर मौज कर रहे हैं।
Themes and message
पारिवारिक रिश्तों में बढ़ती स्वार्थपरता
कहानी दिखाती है कि आज के परिवार में रिश्ते प्रेम से कम, संपत्ति से अधिक जुड़े हैं। जब तक भाइयों को लगा कि ज़मीन तो घर में ही है, उन्होंने काका की उपेक्षा की। जैसे ही ज़मीन हाथ से निकलने का डर हुआ, वही भाई पाँव पकड़कर रोने लगे और सेवा शुरू हो गई। अंत में वे भी हथियार लेकर ज़मीन लिखवाने पर उतर आए। इससे पता चलता है कि सम्मान व्यक्ति का नहीं, उसकी जायदाद का हो रहा था। लेखक संयुक्त परिवार के भीतर छिपे इस लालच को उजागर करते हैं।
From the text: काका को भात, मट्ठा और अचार मिलना; ठाकुरबारी जाने पर भाइयों का रात-भर न सो पाना और ‘दो लाख से अधिक की संपत्ति!’ की चिंता; बाद में हथियार लेकर धमकाना। काका का निष्कर्ष: ‘इसी गाँव में जायदादहीन भाई को कौन पूछता है?’
धर्म की आड़ में पाखंड और लोभ
ठाकुरबारी गाँव की आस्था का केंद्र है, पर उसका महंत धर्म का उपयोग अपने स्वार्थ के लिए करता है। वह काका को बैकुंठ, कीर्ति और स्वर्ग के विमान का लालच देता है। जब बात नहीं बनती, तो अपहरण, फायरिंग और जबरन अँगूठे के निशान लेने तक पहुँच जाता है। लेखक बताते हैं कि साधु के वेश में ये लोग बिना परिश्रम आराम से रहना चाहते हैं। इससे पता चलता है कि अंधी श्रद्धा का लाभ धूर्त लोग उठाते हैं।
From the text: महंत का कहना कि ज़मीन लिखने से ‘सीधे बैकुंठ को प्राप्त करोगे’; आधी रात भाला, गंड़ासा और बंदूक से लैस साधुओं द्वारा अपहरण; काका का बयान कि वे साधु नहीं, डाकू, हत्यारे और कसाई हैं।
अनुभव से मिला ज्ञान और जागरूकता
हरिहर काका अनपढ़ और भोले किसान थे, पर कड़वे अनुभवों ने उन्हें समझदार बना दिया। उन्होंने गाँव के उन लोगों को याद किया जिन्होंने जीते-जी जायदाद लिख दी और फिर उनका जीवन दुखी हो गया। रमेसर की विधवा का उदाहरण भी उनके सामने था। इसलिए उन्होंने तय किया कि जीते-जी किसी को ज़मीन नहीं लिखेंगे। यह दिखाता है कि जीवन का व्यावहारिक ज्ञान किताबों से नहीं, अनुभव से आता है। ज्ञान ने उनका मृत्यु का डर भी दूर कर दिया।
From the text: ‘और अब हरिहर काका एक सीधे-सादे और भोले किसान की अपेक्षा चतुर और ज्ञानी हो चले थे।’ तथा कथावाचक का कथन: ‘अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं।’
वृद्ध और अकेले व्यक्ति की असुरक्षा
कहानी एक बूढ़े, निःसंतान व्यक्ति के अकेलेपन की करुण तस्वीर है। बीमारी में कोई उन्हें पानी तक नहीं देता और वे पत्नियों को याद कर रोते हैं। जिन पर भरोसा था, वही उन्हें बाँधते और पीटते हैं। अंत में पुलिस सुरक्षा के बावजूद वे मौन और अकेले हैं। इससे पता चलता है कि बुढ़ापे में व्यक्ति को धन नहीं, सच्चा प्रेम और सहारा चाहिए। कथावाचक की चिंता इसी करुणा को सामने लाती है।
From the text: बीमारी में ‘कोई उन्हें पानी देने वाला तक नहीं’; अंत में वे ‘खुली आँखों से बराबर आकाश को निहारा करते हैं’; मझधार में फँसी नाव की उपमा।
समाज का तमाशबीन रवैया
गाँव के लोग काका के मामले को केवल चर्चा का विषय बना लेते हैं। वे दो वर्गों में बँट जाते हैं, बहस करते हैं, अफ़वाहों में नमक-मिर्च लगाते हैं, पर कोई काका की असली मदद नहीं करता। नेता जी भी स्कूल के नाम पर अपना हित देखते हैं। पुलिस वाले काका के खर्चे पर मौज करते हैं। लेखक व्यंग्य करते हैं कि हर कोई अपने लाभ या मनोरंजन के लिए इस घटना से जुड़ा है।
From the text: ‘जितने मुँह, उतनी बातें।’; खबर को लोग ‘नमक-मिर्च मिला उसे चटकाकर आगे बढ़ा देता है’; अंत में ‘जिसका धन वह रहे उपास, खाने वाले करें विलास।’
Characters
हरिहर काका
कहानी के नायक; चार भाइयों में दूसरे, निःसंतान बूढ़े किसान जिनके हिस्से पंद्रह बीघे खेत हैं।
- सीधे-सादे और भोले, पर अनुभव से चतुर बने
- स्वाभिमानी
- धार्मिक संस्कारों वाले
- दृढ़ निश्चयी
- अंत में टूटे हुए और मौन
दोनों पत्नियों की मृत्यु के बाद धार्मिक संस्कारों के कारण तीसरी शादी से इंकार किया। अपमान होने पर थाली फेंककर कहा, ‘मैं अनाथ और बेसहारा नहीं हूँ।’ रमेसर की विधवा को याद कर तय किया कि जीते-जी ज़मीन नहीं लिखेंगे और भाइयों के सामने गरजे कि मार दो, पर ‘एक धूर ज़मीन भी’ नहीं लिखूँगा। अंत में वे ‘गूँगेपन का शिकार’ हो गए।
महंत जी
ठाकुरबारी के प्रमुख; धर्म की आड़ में काका की ज़मीन हड़पना चाहते हैं।
- चालाक और मीठी बातें करने वाले
- लोभी और स्वार्थी
- लड़ाकू और दबंग
- पाखंडी
- अवसर को तुरंत पहचानने वाले
पुजारी से झगड़े की बात सुनते ही वह दिन उन्हें ‘बहुत शुभ’ लगा और वे तुरंत काका को ठाकुरबारी ले गए। उन्होंने स्वर्ग और कीर्ति का लालच दिया। पाठ उन्हें ‘लड़ाकू और दबंग प्रकृति के आदमी’ कहता है। उन्होंने अपहरण करवाया, जबरन अँगूठे के निशान लिए और काका को बाँधकर गुप्त दरवाज़े से भाग गए।
हरिहर काका के तीनों भाई
काका के सगे भाई, जो ज़मीन के लिए पहले सेवा का दिखावा और फिर हिंसा करते हैं।
- स्वार्थी
- अवसरवादी
- दिखावटी प्रेम करने वाले
- क्रूर
उपेक्षा के समय वे निश्चिंत थे कि काका को खिला दिया गया होगा। ज़मीन हाथ से जाने के डर से पाँव पकड़कर रोए और ‘खून के रिश्ते की माया फैलाई।’ बाद में हथियार लेकर धमकाया कि मारकर घर के अंदर गाड़ देंगे, मारपीट की और पुलिस आते ही भाग गए।
कथावाचक (गाँव का युवक)
कहानी सुनाने वाला, काका का पड़ोसी और सबसे गहरा मित्र।
- संवेदनशील
- काका के प्रति सच्चा लगाव रखने वाला
- विश्वासपात्र सलाहकार
- पाखंड का आलोचक
माँ बताती है कि काका बचपन में उसे कंधे पर घुमाते थे; बड़ा होने पर उसकी पहली दोस्ती काका से हुई। काका ने ज़मीन के बारे में एकांत में उसी से बात की और दोनों ने मिलकर निर्णय लिया। उसे ठाकुरबारी के साधु-संत ‘फूटी आँखों नहीं सुहाते।’ काका की चुप्पी उसे चिंतित करती है।
भाइयों की पत्नियाँ
घर की महिलाएँ, जिनके व्यवहार से काका का मोहभंग शुरू होता है।
- उपेक्षा करने वाली
- स्वार्थ के अनुसार व्यवहार बदलने वाली
कुछ दिन बाद वे काका को बची-खुची चीज़ें देने लगीं और बीमारी में हाल पूछने भी नहीं आईं। ज़मीन का डर होने पर उन्होंने काका के पैरों पर माथा रख क्षमा माँगी और पाँच महिलाएँ उनकी सेवा में ‘मुस्तैद’ हो गईं।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| पूर्वदीप्ति (फ़्लैशबैक) शैली और उत्तम पुरुष कथावाचक | कहानी काका की वर्तमान चुप्पी से शुरू होती है, फिर कथावाचक पूछता है कि काका इस स्थिति में कैसे आ फँसे और पीछे की घटनाएँ सुनाता है। | पाठक के मन में शुरू से जिज्ञासा जागती है। ‘मैं’ के रूप में कहानी सुनाने से घटनाएँ आँखों देखी और विश्वसनीय लगती हैं। |
| उपमा और बिंब | काका की स्थिति की तुलना मझधार में फँसी नाव से; महंत के लिए ‘जाल में फँसी चिड़िया पकड़ से बाहर हो गई थी’; काका का डर कि ज़मीन लिखने पर वे ‘दूध की मक्खी’ हो जाएँगे। | काका की बेबसी और लालचियों की शिकारी सोच एक चित्र की तरह सामने आती है। भाव गहरे और याद रखने योग्य बनते हैं। |
| व्यंग्य | साधु-संत ‘दोनों जून हलवा-पूड़ी खाते हैं और आराम से पड़े रहते हैं’; अंत में पुलिस वाले काका के खर्चे पर मौज करते हैं। | धार्मिक पाखंड, नेताओं और व्यवस्था की स्वार्थपरता पर तीखी चोट होती है, पर कहानी उपदेश जैसी नहीं लगती। |
| विरोधाभास और समानता (कंट्रास्ट) | पहले घर में उपेक्षा, फिर अत्यधिक सेवा; महंत और भाई दोनों पहले मीठा व्यवहार करते हैं, फिर एक ही तरह अँगूठे के निशान जबरन लेते हैं। | इससे सिद्ध होता है कि दोनों का प्रेम दिखावा था। काका का यह कहना कि भाई महंत-पुजारी से कम नहीं, इसी समानता को स्पष्ट करता है। |
| ग्रामीण भाषा, मुहावरे और लोकोक्तियाँ | ‘जितने मुँह, उतनी बातें’, ‘कान खड़े हो गए’, ‘नाम की तूती बोलती है’, ‘जिसका धन वह रहे उपास, खाने वाले करें विलास।’ | गाँव का वातावरण जीवंत होता है और भाषा सहज, प्रभावशाली और व्यंग्यपूर्ण बनती है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
मैं अनाथ और बेसहारा नहीं हूँ।
हरिहर काका: रूखा-सूखा भोजन मिलने पर थाली आँगन में फेंकने के बाद काका घर की महिलाओं से कहते हैं।
यह काका के स्वाभिमान का पहला विस्फोट है। यहीं से उनका भाइयों के परिवार से मोहभंग खुलकर सामने आता है और महंत को अवसर मिलता है।
यहाँ कोई किसी का नहीं है। सब माया का बंधन है।
महंत जी: काका को ठाकुरबारी के एकांत कमरे में बैठाकर समझाते समय।
महंत आध्यात्मिक बातों का सहारा लेकर काका को परिवार से अलग करना चाहता है। यह उसकी चालाकी और धर्म की आड़ में स्वार्थ को दिखाता है।
जाल में फँसी चिड़िया पकड़ से बाहर हो गई थी
कथावाचक: जब काका न ‘हाँ’ कहते न ‘ना’ और महंत की चिंता बढ़ती जाती है।
इस बिंब से पता चलता है कि महंत काका को एक शिकार की तरह देखता था। इसी बेचैनी में उसने अपहरण की योजना बनाई।
इसी गाँव में जायदादहीन भाई को कौन पूछता है?
कथावाचक (काका की सोच): ठाकुरबारी से छूटने के बाद काका समझते हैं कि भाइयों का आदर ज़मीन के कारण है।
यह कहानी का केंद्रीय सत्य है कि रिश्तों में सम्मान संपत्ति से जुड़ गया है। यह काका के ज्ञानी बनने का प्रमाण है।
अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं।
कथावाचक: भाई हथियार लेकर ज़मीन लिखवाने की धमकी देते हैं, पर काका नहीं डरते।
अनुभव से मिला ज्ञान काका को निडर बना देता है। वे घुट-घुटकर जीने से अच्छा मर जाना समझते हैं।
तुम सब ठाकुरबारी के महंत-पुजारी से तनिक भी कम नहीं
हरिहर काका: भाइयों की धमकी के उत्तर में गरजते हुए।
काका के लिए अब भाई और महंत एक ही श्रेणी के हो गए हैं। दोनों का असली चेहरा स्वार्थ का है।
लोगों की ज़ुबान से घटनाओं की ज़ुबान ज़्यादा पैनी और असरदार होती है।
कथावाचक: किसी के बताए बिना गाँव वाले काका की घटना का सच जान लेते हैं।
यह दिखाता है कि घटनाएँ स्वयं सच बोल देती हैं। साथ ही गाँव का चर्चा-प्रिय स्वभाव सामने आता है।
जिसका धन वह रहे उपास, खाने वाले करें विलास।
कथावाचक: कहानी के अंत में, जब पुलिस के जवान काका के खर्चे पर मौज कर रहे हैं।
यह लोकोक्ति कहानी का व्यंग्यपूर्ण अंत है। धन का मालिक दुखी और मौन है, जबकि दूसरे उसका लाभ उठा रहे हैं।
मिथिलेश्वर – हरिहर काका in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
पारिवारिक रिश्तों में बढ़ती स्वार्थपरता
मान लीजिए आपके मोहल्ले में एक बुज़ुर्ग दादाजी अपने बेटों के साथ रहते हैं। जब तक उनकी पेंशन घर में आती है, सब उनका ध्यान रखते दिखते हैं। पर बीमार पड़ने पर कोई उन्हें समय पर दवा तक नहीं देता।
इस स्थिति की तुलना हरिहर काका के परिवार के व्यवहार से कीजिए और बताइए कि ऐसे परिवार में बुज़ुर्ग को सच्चा सम्मान कैसे मिल सकता है। (50-60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- समानता: दोनों जगह आदर धन से जुड़ा है।
- पाठ से प्रमाण: काका के खेत की उपज घर आती थी, फिर भी बीमारी में कोई पानी तक न देता था।
- समाधान: बुज़ुर्ग को कमाई का साधन नहीं, परिवार का सदस्य मानना।
- व्यावहारिक कदम: बातचीत, दवा और भोजन का ध्यान।
Answer: दोनों स्थितियों में बुज़ुर्ग का आदर उसके धन से जुड़ा है। हरिहर काका को भी बीमारी में कोई पानी तक न देता था, जबकि उनके खेत की उपज घर में आती थी। सच्चा सम्मान तभी मिलेगा जब परिवार बुज़ुर्ग को बोझ या कमाई का साधन न मानकर अपना माने। बच्चे उनसे बात करें, उनकी दवा और भोजन का ध्यान रखें।
Memory hook: पेंशन आए तो सेवा, बीमारी आए तो उपेक्षा: यही हरिहर काका के घर की कहानी है।
धर्म की आड़ में पाखंड और लोभ
कल्पना कीजिए कि आपके कस्बे में साधु के वेश में एक व्यक्ति आता है। वह कहता है कि घर का सोना उसे दान करने से बच्चों के बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक आएँगे। आपकी पड़ोसी आंटी उसकी बातों में आने लगती हैं।
'हरिहर काका' के महंत के व्यवहार से तुलना करते हुए आंटी को समझाइए कि उन्हें क्या करना चाहिए। (50-60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- महंत ने भी बैकुंठ और यश का लालच देकर ज़मीन माँगी थी।
- बाद में उसका असली रूप अपहरण और ज़बरदस्ती अँगूठे लगवाने में दिखा।
- दान के बदले फल की गारंटी देने वाला लोभी होता है।
- अंक मेहनत से आते हैं; परिवार से बात करें और कुछ न दें।
Answer: आंटी, 'हरिहर काका' के महंत ने भी बैकुंठ और यश का लालच देकर ज़मीन माँगी थी और बाद में अपहरण तक किया। जो व्यक्ति दान के बदले फल की गारंटी दे, वह भक्त नहीं, लोभी होता है। अच्छे अंक मेहनत से आते हैं, सोना देने से नहीं। ऐसे व्यक्ति की बात परिवार से साझा करें और उसे कुछ न दें।
Memory hook: जो स्वर्ग का टिकट बेचे, वह महंत जी जैसा है: पहले मीठी बात, फिर ज़बरदस्ती।
अनुभव से मिला ज्ञान: जीते-जी अधिकार न छोड़ना
मान लीजिए आपके बड़े भाई को कॉलेज की छात्रवृत्ति मिली है। उसके दो दोस्त अलग-अलग मीठे वादे करके कह रहे हैं कि वह पूरी राशि उनके किसी काम में लगा दे। भाई उलझन में है।
हरिहर काका के अनुभव के आधार पर आप अपने भाई को क्या सलाह देंगे? (50-60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- काका का निष्कर्ष: जीते-जी अपनी जायदाद का स्वामी किसी और को बनाना ठीक नहीं।
- रमेसर की विधवा का उदाहरण: लिखने के बाद दुर्गति।
- सलाह: मीठे वादों की जाँच, माता-पिता से परामर्श।
- अपने धन पर अपना अधिकार बनाए रखना।
Answer: हरिहर काका ने सीखा कि जीते-जी अपनी संपत्ति किसी को सौंपने वाले का बाद में कोई नहीं पूछता। रमेसर की विधवा का उदाहरण उनके सामने था। भैया, मीठे वादों पर अपनी छात्रवृत्ति किसी को मत दो। पहले सच्चाई जाँचो, माता-पिता से सलाह लो। जो धन तुम्हारी पढ़ाई के लिए है, उस पर अधिकार अपना ही रखो।
Memory hook: अनपढ़ हरिहर काका का पाठ: अपनी चीज़ का अधिकार मीठी बातों पर मत छोड़ो।
समाज का तमाशबीन रवैया
कल्पना कीजिए कि आपकी कॉलोनी के मोबाइल ग्रुप पर किसी परिवार के झगड़े की खबर आती है। लोग बिना जाँचे उसमें नई-नई बातें जोड़कर आगे भेजने लगते हैं। पर कोई उस परिवार से मिलने या मदद करने नहीं जाता।
हरिहर काका के गाँव की स्थिति से तुलना करते हुए बताइए कि ऐसे समय आपको क्या करना चाहिए। (50-60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- गाँव में खबरें बिजली की तरह फैलतीं, लोग नमक-मिर्च मिलाते।
- सच-झूठ पर कोई ध्यान नहीं, आतंक का माहौल बढ़ा।
- काका को वास्तविक सहारा नहीं मिला।
- अपनी भूमिका: बिना जाँची खबर न भेजना, दूसरों को रोकना, संभव हो तो मदद।
Answer: हरिहर काका के गाँव में भी खबरें बिजली की तरह फैलतीं और लोग नमक-मिर्च मिलाकर आगे बढ़ाते थे, सच-झूठ की चिंता किसी को नहीं थी। इससे आतंक बढ़ा, पर काका को सहारा नहीं मिला। मुझे बिना जाँची खबर आगे नहीं भेजनी चाहिए, दूसरों को भी रोकना चाहिए और संभव हो तो परिवार की सहायता करनी चाहिए।
Memory hook: फॉरवर्ड करने से पहले याद रखो: हरिहर काका के गाँव में बातें बहुत थीं, मदद कम।
Topics in this chapter
- हरिहर काका का चरित्र चित्रणComing soon
- हरिहर काका पाठ के प्रश्न-उत्तरComing soon
- हरिहर काका कहानी का मूल संदेशComing soon
- महंत और भाइयों का स्वार्थ: हरिहर काकाComing soon
- अज्ञान में ही मृत्यु का भय: कथन की व्याख्याComing soon
How the board asks मिथिलेश्वर – हरिहर काका
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| कथन की पुष्टि / सिद्ध कीजिए | कोई कथन दिया जाता है, जैसे स्वार्थपरता, धार्मिक पाखंड या अनुभव का महत्त्व, और कहानी के आधार पर उसे सिद्ध करने को कहा जाता है। | पहले वाक्य में कथन से सहमति लिखें। फिर कहानी की दो-तीन घटनाएँ क्रम से दें (उपेक्षा, अचानक सेवा, जबरन अँगूठे के निशान)। अंत में एक पंक्ति का निष्कर्ष लिखें। 50-60 शब्दों में रहें। |
| चरित्र में परिवर्तन | हरिहर काका भोले से चतुर और ज्ञानी कैसे बने, या उनका मोहभंग कैसे हुआ और उसका क्या परिणाम निकला, यह पूछा जाता है। | परिवर्तन के कारण (परिवार की उपेक्षा, महंत का अपहरण, भाइयों की मारपीट, रमेसर की विधवा का उदाहरण) और परिणाम (जीते-जी ज़मीन न लिखने का निश्चय, अलग रहना, मौन) दोनों लिखें। |
| उपमा या कथन की व्याख्या | मझधार में फँसी नाव की तुलना, ‘अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं’ जैसे कथन का आशय पूछा जाता है। | पहले कथन या उपमा का सीधा अर्थ लिखें, फिर बताएँ कि काका पर यह कैसे लागू होता है। कहानी की एक घटना का प्रमाण अवश्य दें। |
| तुलना / समान श्रेणी | महंत और भाइयों के व्यवहार की तुलना, या काका को दोनों एक जैसे क्यों लगे, यह पूछा जाता है। | दोनों की समानताएँ बिंदुवार रखें: पहले मीठा व्यवहार, लक्ष्य ज़मीन, फिर हिंसा और जबरन अँगूठे के निशान। काका के कथन से उत्तर पूरा करें। |
| मूल्यपरक / अपने विचार (HOTS) | दोस्ती में उम्र, रिश्तों की अहमियत, ऐसे व्यक्ति की मदद या आज के समाज से संबंध पर तर्कपूर्ण विचार माँगे जाते हैं। | अपना स्पष्ट मत लिखें, उसे कहानी के एक प्रमाण से जोड़ें (जैसे कथावाचक और काका की मित्रता) और एक व्यावहारिक सुझाव दें। केवल अपने विचार या केवल कहानी न लिखें, दोनों को जोड़ें। |
| घटना, कारण और परिणाम | गाँव वालों की राय, अपहरण करने वाले कौन थे और उन्होंने कैसा बर्ताव किया, या ठाकुरबारी के प्रति गाँव की श्रद्धा पर प्रश्न। | घटना संक्षेप में बताएँ, कारण लिखें और उससे निकलने वाला निष्कर्ष दें। तथ्य (पंद्रह बीघे, अँगूठे के निशान, दो वर्ग) सही रखें। |
Tricks to remember मिथिलेश्वर – हरिहर काका
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
घटनाक्रम का सूत्र: था-म-से-अ-भा-पु-मौ
था = थाली आँगन में फेंकी; म = महंत ने ठाकुरबारी ले जाकर समझाया; से = घर लौटने पर खूब सेवा; अ = आधी रात ठाकुरबारी वालों ने अपहरण किया; भा = भाइयों ने भी हथियार लेकर हमला किया; पु = पुलिस के चार राइफलधारी जवान; मौ = काका का मौन।
Use it when: 'घटना, कारण और परिणाम' वाले प्रश्न में घटनाओं का सही क्रम लिखने के लिए।
संख्याओं की माला: 4-60-15-20
4 भाई (हरिहर दूसरे नंबर पर), परिवार के 60 बीघे, हर भाई के हिस्से 15 बीघे, ठाकुरबारी के नाम 20 बीघे। पहली बार पुलिस: एक दरोगा और 8 जवान; अंत में 4 राइफलधारी जवान। गाँव आरा से 40 किलोमीटर।
Use it when: उत्तर में तथ्य सही लिखने के लिए, ताकि 'तीन भाई' या 'साठ बीघे का हिस्सा' जैसी गलती न हो।
'दो-दो' का दर्पण: महंत = भाई
दोनों ने रात में हमला किया, दोनों ने जबरन अँगूठे के निशान लिए, दोनों ने मुँह में कपड़ा ठूँसा, दोनों बार पुलिस आई: पहली बार भाई पुलिस लाए, दूसरी बार महंत पुलिस लाया। इसी से काका ने कहा कि भाई महंत-पुजारी से कम नहीं।
Use it when: 'महंत और भाई एक ही श्रेणी के क्यों' जैसे तुलना वाले प्रश्न और 'दूसरी बार पुलिस कौन लाया' वाले तथ्य के लिए।
विषयों का सूत्र: स्वा-पा-ज्ञा-अ-त
स्वा = स्वार्थी रिश्ते; पा = धर्म की आड़ में पाखंड; ज्ञा = अनुभव से ज्ञान (भोले किसान से चतुर); अ = अकेले वृद्ध की असुरक्षा; त = तमाशबीन समाज।
Use it when: प्रतिपाद्य, मूल संदेश या 'सिद्ध कीजिए' वाले प्रश्न में विषय पहचानकर उत्तर शुरू करने के लिए।
मिथिलेश्वर – हरिहर काका: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: मोहभंग की शुरुआत और थाली वाली घटना · 3 marks · Short answerBoard level
'हरिहर काका' कहानी के आधार पर लिखिए कि हरिहर काका के मन में भाइयों के परिवार के प्रति मोहभंग किन बातों से शुरू हुआ। जिस दिन उनकी सहन-शक्ति जवाब दे गई, उस दिन क्या हुआ? (50-60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- भाइयों ने पत्नियों को सेवा की सीख दी थी, पर कुछ दिन बाद उपेक्षा शुरू हो गई।
- काका को बचा-खुचा, रूखा-सूखा भोजन मिलता था; बीमारी में कोई पानी तक नहीं देता था।
- पत्नियों को याद करके आँखें भर आतीं, यहीं से मोहभंग शुरू हुआ।
- भतीजे के शहरी मित्र के आने पर कई व्यंजन बने, पर बीमारी से उठे काका को किसी ने नहीं पूछा।
- स्वयं हवेली जाने पर भात, मट्ठा और अचार मिला, तो उन्होंने थाली आँगन में फेंक दी।
Answer: भाइयों की पत्नियाँ उनकी उपेक्षा करने लगीं। उन्हें बचा-खुचा भोजन मिलता और बीमारी में कोई पानी तक न देता। यहीं से मोहभंग शुरू हुआ। एक दिन भतीजे के मित्र के लिए अच्छे व्यंजन बने, पर बीमारी से उठे काका को किसी ने नहीं पूछा। स्वयं हवेली पहुँचने पर भात, मट्ठा और अचार मिला, तो उन्होंने थाली आँगन में फेंक दी।
Example 2: महंत जी के तर्क और उनकी चालाकी · 3 marks · Short answerHarder board level
थाली वाली घटना के बाद महंत जी ने हरिहर काका को ठाकुरबारी ले जाकर किन तर्कों से प्रभावित किया? इससे महंत के चरित्र की कौन-सी विशेषता प्रकट होती है? (50-60 शब्द)
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- पुजारी से घटना सुनकर महंत ने उस दिन को शुभ अवसर माना और तुरंत काका को रास्ते से ले आए।
- तर्क: सब रिश्ते स्वार्थ के हैं; भाई केवल पंद्रह बीघे खेत के कारण तुम्हें पकड़े हुए हैं।
- लालच: ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिखने पर बैकुंठ, कीर्ति और ठाकुरबारी में आराम मिलेगा।
- डर: पत्नियों की अकालमृत्यु और संतान न होने को पूर्वजन्म के पाप से जोड़ा।
- निष्कर्ष: महंत अवसरवादी, चालाक और लोभी है जो दुखी व्यक्ति की कमज़ोरी का लाभ उठाता है।
Answer: महंत जी ने अवसर देखकर हरिहर के दुख को हथियार बनाया। उन्होंने कहा कि सब रिश्ते स्वार्थ के हैं और भाई केवल पंद्रह बीघे खेत के कारण उन्हें पकड़े हैं। ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिखने पर बैकुंठ, अमर कीर्ति और ठाकुरबारी में आराम का लालच दिया। पत्नियों की मृत्यु को पूर्वजन्म का पाप बताकर डराया। इससे उनकी चालाकी झलकती है।
Example 3: रमेसर की विधवा का उदाहरण · 3 marks · Short answerHarder board level
भाइयों की धमकी के समय हरिहर काका को रमेसर की विधवा की याद क्यों आई? इस उदाहरण से कहानी का कौन-सा सत्य सामने आता है? (50-60 शब्द)
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- रमेसर के भाइयों ने विधवा को बहला-फुसलाकर उसके हिस्से की ज़मीन लिखवा ली।
- पहले आदर-मान हुआ, पर बुढ़ापे में दोनों जून खाना देना भी अखरने लगा और उसकी दुर्गति हुई।
- भाइयों के हथियार लेकर खड़े होने पर काका ने घुट-घुटकर जीने से अच्छा मरना समझा।
- सत्य: संपत्ति हाथ से जाते ही परिवार में आदर भी चला जाता है; रिश्तों में स्वार्थ हावी है।
Answer: रमेसर के भाइयों ने उसकी विधवा को बहला-फुसलाकर ज़मीन लिखवा ली। पहले आदर हुआ, पर बुढ़ापे में दो जून खाना देना उन्हें अखरने लगा और उसकी दुर्गति हो गई। भाइयों की धमकी पर हरिहर को यही याद आया, इसलिए उन्होंने घुट-घुटकर जीने के बजाय मरना ठीक समझा। इससे पता चलता है कि संपत्ति जाते ही आदर भी चला जाता है।
Example 4: कहानी के आरंभ और अंत का मौन · 3 marks · Short answerHarder board level
कहानी हरिहर काका के मौन से आरंभ होती है और उनके 'गूँगेपन' पर समाप्त होती है। उनका यह मौन क्या प्रकट करता है? तर्क सहित लिखिए। (50-60 शब्द)
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- आरंभ में काका कथावाचक से भी बात नहीं करते, केवल एक नज़र से देखते हैं।
- अंत में वे नौकर के साथ अलग रहते हैं, किसी बात का जवाब नहीं देते, आकाश निहारते हैं।
- कारण: महंत और भाइयों, दोनों ने उन्हें बाँधा, ज़बरदस्ती अँगूठे लगवाए; भाइयों ने मारा-पीटा।
- अर्थ (व्याख्या): मौन गहरी निराशा, अविश्वास और अकेलेपन का प्रतीक है; धन होते हुए भी वे टूट चुके हैं।
Answer: हरिहर काका ने अपने भाइयों और महंत, दोनों का असली रूप देख लिया। जिनसे सहारे की आशा थी, उन्हीं ने उन्हें बाँधा, पीटा और ज़बरदस्ती अँगूठे लगवाए। अब उनके पास न कोई अपना है, न कहने लायक बात। उनका मौन गहरी निराशा, अविश्वास और अकेलेपन का प्रतीक है। धन होते हुए भी वे भीतर से टूट चुके हैं।
Example 5: नेता जी का विद्यालय प्रस्ताव: निर्णय का मूल्यांकन · 3 marks · Short answerHOTS / competency
गाँव के नेता जी ने हरिहर काका की ज़मीन पर 'हरिहर उच्च विद्यालय' खोलने का प्रस्ताव रखा, जिसे काका ने नहीं माना। क्या उनका यह निर्णय उचित था? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए। (50-60 शब्द)
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- स्पष्ट मत: निर्णय उनकी परिस्थिति में स्वाभाविक और समझदारी भरा था।
- महंत ने भी कीर्ति और नाम अमर होने का लालच देकर बाद में अपहरण किया था।
- नेता जी बिना नौकरी या खेती के बारहों महीने मौज उड़ाते थे, इसलिए उनकी नीयत पर भरोसा कठिन था।
- संतुलन: विद्यालय का विचार अपने आप में गाँव के हित में था।
Answer: हरिहर काका का प्रस्ताव ठुकराना उनकी स्थिति में स्वाभाविक था। महंत ने भी अमर कीर्ति का लालच दिया था और फिर अपहरण किया। नेता जी भी बिना काम मौज उड़ाने वाले व्यक्ति थे, इसलिए उनकी नीयत पर भरोसा कठिन था। फिर भी स्कूल का विचार गाँव के हित में था। मेरे विचार से उनका निर्णय समझदारी भरा था।
Example 6: गाँव का तमाशबीन रवैया: कितना दोषी? · 3 marks · Short answerHOTS / competency
हरिहर काका के मामले में गाँव के लोग दो वर्गों में बँटकर बहस करते रहे और खबरें फैलाते रहे। क्या गाँव वाले भी काका की दुर्दशा के लिए ज़िम्मेदार थे? अपने विचार लिखिए। (50-60 शब्द)
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- स्पष्ट मत: हाँ, कुछ हद तक गाँव भी ज़िम्मेदार था।
- लोग बैठकों में तू-तू, मैं-मैं करते रहे, पर ठोस सहायता नहीं की।
- अपहरण की रात बहुत-से लोग अपने दालान और छतों पर खड़े होकर केवल आहट लेते रहे।
- खबरों में नमक-मिर्च मिलाकर आगे बढ़ाया गया, जिससे आतंक का माहौल गहराया।
- निष्कर्ष: एकजुट विरोध होता तो अत्याचारी इतने निडर न होते।
Answer: हाँ, कुछ हद तक गाँव भी ज़िम्मेदार था। लोग बैठकों में बहस करते रहे, पर अधिकतर ने काका की वास्तविक सहायता नहीं की। पहले अपहरण की रात कई लोग छतों पर खड़े होकर केवल आहट लेते रहे। खबरों में नमक-मिर्च मिलाकर आतंक फैलाया गया। यदि गाँव एकजुट होकर अन्याय का विरोध करता, तो महंत और भाई इतने निडर न होते।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
'हरिहर काका' कहानी में धर्म के नाम पर पाखंड को उजागर किया गया है। महंत जी के आचरण के आधार पर सिद्ध कीजिए। (50-60 शब्द) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| कथन से सहमति और मुख्य विचार: महंत धर्म का उपयोग अपने लोभ के लिए करता है। | 1 |
| पाठ से कम से कम दो प्रमाण: बैकुंठ और कीर्ति का लालच देकर ज़मीन माँगना; अपहरण कर सादे-लिखे कागज़ों पर जबरन अँगूठे लगवाना और कमरे में बाँधकर गुप्त दरवाज़े से भागना। | 1 |
| निष्कर्ष तथा शब्द-सीमा में शुद्ध भाषा: साधु के वेश में लोभी, बिना परिश्रम आराम चाहने वाला; ठाकुरबारी उसके इरादे छिपाने का माध्यम। | 1 |
यदि आप हरिहर काका की जगह होते और भाई हथियार लेकर ज़मीन लिखने का दबाव डालते, तो आप क्या करते? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए। (50-60 शब्द) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| स्पष्ट निर्णय: दबाव में ज़मीन न लिखना और सहायता के लिए आवाज़ उठाना या कानून की मदद लेना। | 1 |
| पाठ से संबंध: काका का निर्भीक उत्तर, रमेसर की विधवा का उदाहरण, चिल्लाने से गाँव तक आवाज़ पहुँचना। | 1 |
| तर्क या मूल्य: दबाव में दिया अधिकार बाद में दुर्गति लाता है; भिन्न किंतु उपयुक्त तर्क भी स्वीकार्य; शब्द-सीमा और भाषा का ध्यान। | 1 |
Where students lose marks in मिथिलेश्वर – हरिहर काका
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: दूसरी घटना में पुलिस बुलाने वाले को गलत बताना
पहली बार भाई पुलिस लाए थे, इसलिए छात्र मान लेते हैं कि दूसरी बार भी वही लाए होंगे।
Wrong working
भाइयों के हमले के बाद काका के भाई ही पुलिस लेकर आए और उन्हें बचाया।
Right working
भाइयों के हमले की खबर पक्षधरों से महंत तक पहुँची; महंत जी पुलिस की जीप लेकर आ धमके और भाई-भतीजे भाग गए।
Do this: याद रखें: पहली बार भाई पुलिस लाए, दूसरी बार महंत। यही कहानी की विडंबना है।
Usually costs: तथ्य गलत होने पर उस उत्तर-बिंदु का लगभग 1 अंक कट सकता है।
Mistake: यह लिखना कि हरिहर काका ने ज़मीन लिख दी
दोनों दलों द्वारा अँगूठे लगवाने की बात पढ़कर छात्र मान लेते हैं कि ज़मीन लिखी जा चुकी है।
Wrong working
अंत में हरिहर काका ने अपनी ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिख दी।
Right working
दोनों दलों ने जबरन अँगूठे लगवाए, पर काका ने बयान दर्ज कराया कि वे किसी को उत्तराधिकारी नहीं मानते; महंत के विरुद्ध मुकदमा भी किया।
Do this: काका ने अपनी इच्छा से कभी किसी को ज़मीन नहीं लिखी; अंत में उत्तराधिकार का प्रश्न अनसुलझा है।
Usually costs: कहानी का अंत ही गलत हो जाने से उत्तर के 1-2 अंक कट सकते हैं।
Mistake: कथावाचक को हरिहर काका का भतीजा बताना
कथावाचक काका से बहुत जुड़ा है, इसलिए छात्र उसे परिवार का सदस्य मान लेते हैं।
Wrong working
कथावाचक हरिहर काका का भतीजा था, इसलिए वे उससे सब बातें करते थे।
Right working
कथावाचक गाँव का युवक और काका का पड़ोसी था; काका बचपन में उसे कंधे पर घुमाते थे और बड़ा होने पर वही उनका पहला गहरा मित्र बना।
Do this: पात्र का संबंध लिखने से पहले पाठ के आरंभ के दो कारण (पड़ोसी, बचपन का दुलार) याद करें।
Usually costs: पात्र-संबंध गलत होने पर उस बिंदु का लगभग 1 अंक कट सकता है।
Mistake: 'सिद्ध कीजिए' प्रश्न में पूरी कहानी सुना देना
छात्र सोचते हैं कि अधिक घटनाएँ लिखने से अधिक अंक मिलेंगे।
Wrong working
हरिहर काका चार भाई थे। गाँव आरा के पास था। वहाँ ठाकुरबारी थी। एक दिन थाली फेंकी... (कथन से संबंध कहीं नहीं)
Right working
पहली पंक्ति में कथन से सहमति, फिर दो-तीन चुने हुए प्रमाण (बचा-खुचा भोजन, ज़मीन के लिए हमला), और अंत में एक पंक्ति का निष्कर्ष।
Do this: उत्तर का ढाँचा रखें: मत, प्रमाण, निष्कर्ष; केवल वही घटनाएँ लें जो कथन को सिद्ध करें।
Usually costs: विश्लेषण और निष्कर्ष न होने पर 1-2 अंक कट सकते हैं।
Mistake: भाइयों की संख्या गलत लिखना
पाठ में 'चार भाई' और 'तीनों भाई' दोनों आते हैं, जिससे भ्रम होता है।
Wrong working
हरिहर काका के चार भाई थे, जो उनकी ज़मीन चाहते थे।
Right working
हरिहर काका चार भाई थे, यानी उनके तीन भाई थे; भाइयों में उनका नंबर दूसरा था।
Do this: 'हरिहर सहित चार, हरिहर के अलावा तीन' याद रखें।
Usually costs: छोटी तथ्य-त्रुटि से उत्तर की विश्वसनीयता घटती है और आधा या 1 अंक कट सकता है।
Mistake: मूल्यपरक प्रश्न में पाठ से जोड़े बिना केवल उपदेश लिखना
'अपने विचार लिखिए' देखकर छात्र कहानी का कोई प्रमाण नहीं देते।
Wrong working
हमें बुज़ुर्गों का आदर करना चाहिए। यह हमारा कर्तव्य है। आदर से घर में सुख आता है।
Right working
हरिहर काका का आदर तभी हुआ जब ज़मीन का डर दिखा; इससे सीख मिलती है कि बुज़ुर्ग का सम्मान उसके धन से नहीं, रिश्ते से होना चाहिए।
Do this: हर विचार के साथ कहानी की कम से कम एक घटना जोड़ें।
Usually costs: पाठ-आधारित तर्क न होने पर लगभग 1 अंक कट सकता है।
मिथिलेश्वर – हरिहर काका: previous year questions
- Course A: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).
- Course B: Asked in 16 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 4.6 marks per paper; 16 questions in all, counting OR alternatives. In 1 of 4 sample papers.
Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.
Solved board questions from मिथिलेश्वर – हरिहर काका
Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.
2026 Course B, set 4/1/1, Q11 · 6 marks · Short answer
पूरक पाठ्यपुस्तक 'संचयन' पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए : 2×3 = 6
- (i)3 marks
'हरिहर काका' कहानी के माध्यम से लेखक ने पारिवारिक जीवन में बढ़ती स्वार्थपरता को उजागर किया है। सिद्ध कीजिए।
- (ii)3 marks
क्या 'टोपी शुक्ला' कहानी बाल-मनोविज्ञान पर आधारित है ? तर्कपूर्ण उत्तर लिखिए।
- (iii)3 marks
'परचूनिये, आढ़तीये भी अपने बच्चों को स्कूल भेजना ज़रूरी न समझते।' - 'सपनों के से दिन' पाठ से उद्धृत प्रस्तुत पंक्ति के संदर्भ में लिखिए कि तत्कालीन समय में शिक्षा के प्रति लोगों का क्या दृष्टिकोण था और इसका क्या कारण हो सकता है ?
Try it first, then show our solutionSolution
- 3 marks
(i) कहानी में हरिहर काका के भाई और उनके परिवार वाले उनकी ज़मीन के लालच में सेवा का दिखावा करते हैं। ज़मीन न मिलने पर उनकी उपेक्षा और दुर्व्यवहार करते हैं। इससे पारिवारिक जीवन में प्रेम, करुणा और सहानुभूति का अभाव तथा रिश्तों से अधिक धन को महत्त्व देना दिखता है।
- 3 marks
(ii) हाँ, कहानी बाल-मनोविज्ञान पर आधारित है। टोपी भावुक, संवेदनशील और भेदभाव से रहित है, उम्र के बंधन से मुक्त प्रेम की भाषा समझता है। उसके मन में प्रेम, मित्रता, अकेलापन, डर, ईर्ष्या और विद्रोह के भाव दिखाए गए हैं।
- 3 marks
(iii) उस समय लोग शिक्षा के प्रति उदासीन थे। वे स्कूली पढ़ाई को समय और धन की बर्बादी मानते थे। कारण: उनकी व्यापारिक पृष्ठभूमि थी, इसलिए वे बच्चों को हिसाब-किताब सिखाकर काम में लगाना पसंद करते थे।
Answer: किन्हीं दो उपभागों के उत्तर ऊपर दिए गए हैं।
Where the marks are
- प्रत्येक उपभाग 3 अंक; किन्हीं दो के लिए (2×3)
Every मिथिलेश्वर – हरिहर काका question, by year
Course A (0 questions, sample papers included)
Course B (17 questions, sample papers included)
Practice questions on मिथिलेश्वर – हरिहर काका
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 3 marks · Short answerBoard level
हरिहर काका के गाँव के लोगों के जीवन में ठाकुरबारी का क्या स्थान था? पाठ से उदाहरण देकर लिखिए। (50-60 शब्द)
Hint
त्योहार, फसल, बाढ़-सूखा और मनौती, इन चार बातों में ठाकुरबारी की भूमिका याद कीजिए।
Answer
उत्तर-बिंदु: होली का पहला गुलाल और दीवाली का पहला दीप ठाकुरबारी में; फसल से पहले अगउम; बाढ़-सूखे में अखंड हरिकीर्तन; मनौती पूरी होने पर रुपये, ज़ेवर, खेत चढ़ाना; गहरी आस्था।
आदर्श उत्तर: गाँव का जीवन ठाकुरबारी से गहराई से जुड़ा था। होली का पहला गुलाल ठाकुरजी को चढ़ता और दीवाली का पहला दीप वहीं जलता। फसल तैयार होने पर पहले ठाकुरजी का अगउम निकाला जाता। बाढ़ या सूखे में वहाँ अखंड हरिकीर्तन होता। मनौती पूरी होने पर लोग रुपये, ज़ेवर और खेत तक चढ़ाते। इससे उनकी गहरी आस्था प्रकट होती है।
Q2 · 3 marks · Short answerBoard level
पहले अपहरण के बाद पुलिस को ठाकुरबारी में हरिहर काका कहाँ और किस दशा में मिले? मुक्त होने पर उन्होंने महंत और साधुओं के बारे में क्या बताया? (50-60 शब्द)
Hint
ताले वाले कमरे और 'अनाज है' कहने वाले वृद्ध साधु को याद कीजिए।
Answer
उत्तर-बिंदु: ठाकुरबारी में केवल वृद्ध साधु; ताले वाले कमरे का दरवाज़ा भीतर से धकेला गया; हाथ-पाँव बँधे, मुँह में कपड़ा; लुढ़ककर दरवाज़े तक आए; ज़बरदस्ती अँगूठे के निशान, गुप्त दरवाज़े से भागना।
आदर्श उत्तर: पुलिस को ठाकुरबारी में केवल एक वृद्ध साधु मिला। ताला लगे एक कमरे का दरवाज़ा भीतर से धकेला गया, तो ताला तोड़ा गया। अंदर हरिहर काका के हाथ-पाँव बँधे थे और मुँह में कपड़ा ठूँसा था। वे लुढ़ककर दरवाज़े तक आए थे। उन्होंने बताया कि महंत और साधु ज़बरदस्ती अँगूठे लगवाकर गुप्त दरवाज़े से भाग गए।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level
'जाल में फँसी चिड़िया पकड़ से बाहर हो गई थी'—यह किसके लिए कहा गया है? इस स्थिति में महंत ने क्या योजना बनाई और क्यों? (50-60 शब्द)
Hint
काका न 'हाँ' कहते थे, न 'ना'; महंत ने इसे किस संकट का नाम दिया?
Answer
उत्तर-बिंदु: चिड़िया = हरिहर काका, जाल = महंत की मीठी बातें; काका ने न हाँ कहा न ना; महंत ने इसे धर्म-संकट माना; अपहरण कर ज़बरदस्ती लिखवाने की योजना; महंत की दबंग, लोभी प्रकृति।
आदर्श उत्तर: यह हरिहर काका के लिए कहा गया है। महंत को लगा था कि काका ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिख देंगे, पर वे न 'हाँ' कहते, न 'ना'। महंत ने सोचा कि काका धर्म-संकट में हैं, इसलिए अपहरण करके ज़बरदस्ती लिखवाना ही उपाय है। बाद में वे स्वयं राज़ी हो जाएँगे। इससे महंत की दबंग और लोभी प्रकृति झलकती है।
Q4 · 3 marks · Short answerHarder board level
हरिहर काका के प्रति भाइयों की पत्नियों के व्यवहार में आए बदलावों के आधार पर उनका चरित्र स्पष्ट कीजिए। (50-60 शब्द)
Hint
ठाकुरबारी जाने से पहले और लौटने के बाद के व्यवहार की तुलना कीजिए।
Answer
उत्तर-बिंदु: कुछ दिन सेवा, फिर उपेक्षा; पतियों को अच्छे व्यंजन, काका को बचा-खुचा; ठाकुरबारी से लौटने पर पैरों पर माथा रख क्षमा; दोनों जून मनचाहा भोजन; बदलाव का कारण स्वार्थ।
आदर्श उत्तर: पत्नियों ने पतियों के कहने पर कुछ दिन काका की सेवा की, फिर उपेक्षा करने लगीं। अपने पतियों को अच्छे व्यंजन खिलातीं और काका को बचा-खुचा देतीं। पर ठाकुरबारी से लौटने पर उन्होंने पैरों पर माथा रखकर क्षमा माँगी और दोनों जून मनचाहा भोजन देने लगीं। इससे पता चलता है कि उनका व्यवहार स्नेह नहीं, ज़मीन के स्वार्थ से बदला।
Q5 · 3 marks · Short answerHarder board level
हरिहर काका ने अपने सगे भाइयों को भी जीते-जी ज़मीन न लिखने का निश्चय क्यों किया? 'दूध की मक्खी' हो जाने के उनके डर का आशय स्पष्ट कीजिए। (50-60 शब्द)
Hint
भाइयों के अचानक बढ़े आदर-सम्मान की असली वजह क्या थी?
Answer
उत्तर-बिंदु: काका समझ गए कि आदर रिश्ते के कारण नहीं, जायदाद के कारण है; ज़मीन लिखते ही उनकी उपयोगिता खत्म; दूध की मक्खी की तरह निकालकर फेंक दिए जाते; बुढ़ापे का दुख।
आदर्श उत्तर: ठाकुरबारी की घटना के बाद काका समझ गए कि भाइयों का आदर-सम्मान रिश्ते के कारण नहीं, उनकी जायदाद के कारण है। यदि वे ज़मीन लिख देते, तो उनकी कोई उपयोगिता न रहती। तब परिवार उन्हें दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकालकर फेंक देता और बुढ़ापा दुख में कटता। इसलिए उन्होंने ज़मीन अपने पास रखना ही सुरक्षित समझा।
Q6 · 3 marks · Short answerHarder board level
लेखक के अनुसार हरिहर काका पुलिस की सुरक्षा में तो हैं, पर 'वास्तविक सुरक्षा' उन्हें ठाकुरबारी और अपने भाइयों से मिल रही है। इस कथन की विडंबना स्पष्ट कीजिए। (50-60 शब्द)
Hint
दोनों दल एक-दूसरे से क्या डरते थे?
Answer
उत्तर-बिंदु: अत्याचार करने वाले ही रक्षक बने; भाइयों को महंत से डर, महंत को भाइयों से डर; दोनों ने पैरवी लगाकर और पैसे खर्च कर पुलिस दिलवाई; यह रक्षा लालच से उपजी।
आदर्श उत्तर: जिन दोनों दलों ने काका पर अत्याचार किया, वही अब उनकी रक्षा कर रहे हैं। भाइयों को डर है कि महंत उन्हें फिर उठा ले जाएगा और महंत को डर है कि भाई उन्हें दबोच लेंगे। इसलिए दोनों ने पैसे खर्च कर पुलिस दिलवाई और चौकसी रखते हैं। यह रक्षा प्रेम नहीं, ज़मीन के लालच से उपजी है।
Q7 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
कल्पना कीजिए कि आप कहानी के कथावाचक हैं और हरिहर काका अब आपसे भी बात नहीं करते। उन्हें इस अकेलेपन से बाहर निकालने के लिए आप क्या-क्या करेंगे? (50-60 शब्द)
Hint
कथावाचक और काका की पुरानी दोस्ती, और काका का हर किसी पर से उठा भरोसा, दोनों को ध्यान में रखिए।
Answer
उत्तर-बिंदु: रोज़ पास बैठना, निःस्वार्थ साथ का भरोसा; बचपन की यादें (कंधे पर घुमाना); मुकदमे और खेती में भरोसेमंद सलाह; समझदार लोगों के सहारे समाज से जोड़ना; ज़मीन में कोई रुचि न दिखाना।
आदर्श उत्तर: मैं रोज़ उनके पास बैठूँगा, भले वे न बोलें, ताकि उन्हें लगे कि कोई निःस्वार्थ भाव से साथ है। बचपन की यादें छेड़ूँगा, क्योंकि वे मुझे कंधे पर घुमाते थे। उनके मुकदमे और खेती के काम में भरोसेमंद सलाह दिलाऊँगा। गाँव के समझदार लोगों को जोड़कर उन्हें सम्मान से समाज में लौटाऊँगा, पर उनकी ज़मीन में कोई रुचि नहीं दिखाऊँगा।
Q8 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
आज भी कुछ लोग धर्म या चमत्कार के नाम पर भोले लोगों से धन ऐंठते हैं। 'हरिहर काका' कहानी से ऐसे पाखंड से बचने की क्या सीख मिलती है? (50-60 शब्द)
Hint
महंत के वादे और उसकी असली नीयत की तुलना कीजिए; काका ने बड़ा निर्णय किससे बात करके लिया था?
Answer
उत्तर-बिंदु: मीठी बातों और धार्मिक वेश पर अंधविश्वास नहीं; महंत का बैकुंठ-कीर्ति का लालच और असली नीयत (बिना परिश्रम आराम); सच्ची भक्ति संपत्ति नहीं माँगती; बड़ा निर्णय सलाह लेकर, जैसे काका ने कथावाचक से बात की।
आदर्श उत्तर: कहानी सिखाती है कि मीठी बातों और धार्मिक वेश पर आँख मूँदकर भरोसा न करें। महंत ने बैकुंठ और कीर्ति का लालच देकर ज़मीन माँगी, पर असल में वह मेहनत के बिना आराम चाहता था। सच्ची भक्ति किसी से संपत्ति नहीं माँगती। बड़ा निर्णय सोच-समझकर, भरोसेमंद लोगों से सलाह लेकर करना चाहिए, जैसा काका ने कथावाचक से बात करके किया।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.हरिहर काका का गाँव कहाँ है?Show answer
कस्बाई शहर आरा से चालीस किलोमीटर दूर, हसनबाज़ार बस स्टैंड के पास।
2.गाँव के तीन प्रमुख स्थान कौन-से हैं?Show answer
पश्चिम में बड़ा तालाब, बीच में पुराना बरगद और पूरब में ठाकुरजी का विशाल मंदिर (ठाकुरबारी)।
3.हरिहर काका ने तीसरी शादी क्यों नहीं की?Show answer
दोनों पत्नियाँ संतानहीन ही चल बसीं; गिरती उम्र और धार्मिक संस्कारों के कारण उन्होंने तीसरी शादी से इंकार किया।
4.थाली फेंकने की बात महंत तक कैसे पहुँची?Show answer
उस समय ठाकुरबारी के पुजारी जी वार्षिक हुमाध के लिए घी और शकील लेने काका के दालान पर बैठे थे; उन्होंने लौटकर महंत को बताया।
5.ठाकुरबारी में बंद कमरे के बारे में वृद्ध साधु ने क्या कहा था?Show answer
कुंजी माँगने पर कहा 'मेरे पास नहीं' और पूछने पर बताया कि कमरे में 'अनाज है'।
6.भाइयों के हमले के समय पुलिस कौन लाया?Show answer
महंत जी, जिन्होंने काका के भाइयों से भी अधिक तत्परता और फुरती दिखाई।
7.नेता जी ने क्या प्रस्ताव रखा था?Show answer
काका की ज़मीन पर 'हरिहर उच्च विद्यालय' नाम से हाई स्कूल खोलने का, जिससे उनका नाम अमर हो; काका नहीं माने।
8.'जिसका धन वह रहे उपास, खाने वाले करें विलास।' किनके संदर्भ में कहा गया है?Show answer
काका की सुरक्षा में लगे पुलिस के जवानों के संदर्भ में, जो काका के खर्चे पर मौज कर रहे हैं, जबकि काका मौन होकर दिन काट रहे हैं।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप बता सकते हैं कि कथावाचक काका से किन दो कारणों से जुड़ा है?
- क्या आप थाली फेंकने वाले दिन बने व्यंजन और काका को परोसा गया भोजन बिना देखे लिख सकते हैं?
- महंत जी के तीन लालच और एक डर (पूर्वजन्म का पाप) क्या आपको याद हैं?
- ठाकुरबारी से लौटने पर घर में काका की सेवा में कितनी महिलाएँ लगीं और क्यों?
- पहली बार और दूसरी बार पुलिस कौन लाया? दोनों बार काका किस हालत में मिले?
- 'अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं।' इसे काका के निर्भीक उत्तर से जोड़कर समझा सकते हैं?
- रमेसर की विधवा का उदाहरण काका के निर्णय में कैसे काम आया?
- कहानी के अंत में चार खबरें कौन-सी थीं और गाँव में कैसा माहौल बन गया?
मिथिलेश्वर – हरिहर काका: frequently asked questions
‘हरिहर काका’ पाठ के लेखक कौन हैं और यह किस पुस्तक में है?
इस कहानी के लेखक मिथिलेश्वर हैं। यह CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-ब की पूरक पुस्तक संचयन भाग 2 का पहला पाठ है। यह 2026-27 के पाठ्यक्रम में शामिल है।
इस पाठ से बोर्ड परीक्षा में कैसे प्रश्न आते हैं?
खंड ग के प्रश्न 11 में संचयन पर तीन प्रश्न आते हैं, जिनमें से दो करने होते हैं। हर प्रश्न 3 अंक का है और उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखना होता है। इस पुस्तक से गद्यांश पर आधारित प्रश्न नहीं आते।
हरिहर काका को महंत और अपने भाई एक जैसे क्यों लगने लगे?
दोनों का लक्ष्य केवल उनकी पंद्रह बीघे ज़मीन थी। दोनों ने पहले प्रेम और सेवा का दिखावा किया, फिर हिंसा करके जबरन अँगूठे के निशान लिए। इसीलिए काका ने भाइयों से कहा कि तुम महंत-पुजारी से तनिक भी कम नहीं।
हरिहर काका ने जीते-जी ज़मीन किसी के नाम क्यों नहीं लिखी?
उन्होंने गाँव के ऐसे लोगों को देखा था जिन्होंने जीते-जी जायदाद लिख दी और बाद में उन्हें कोई पूछने वाला नहीं रहा। रमेसर की विधवा की दुर्दशा भी उनके सामने थी। उन्हें डर था कि ज़मीन लिखते ही वे दूध की मक्खी की तरह निकाल फेंके जाएँगे।
कहानी का मूल संदेश क्या है?
कहानी बताती है कि धन के लालच ने पारिवारिक रिश्तों और धर्म दोनों को स्वार्थी बना दिया है। साथ ही यह संदेश देती है कि बुज़ुर्गों को सम्मान उनकी संपत्ति के कारण नहीं, मनुष्य होने के कारण मिलना चाहिए। अंधी श्रद्धा से सावधान रहना भी इसका एक संदेश है।
कहानी के अंत में हरिहर काका की क्या स्थिति है?
वे परिवार से अलग रहते हैं और चार राइफलधारी पुलिस जवान उनकी सुरक्षा में हैं। एक नौकर उनका खाना बनाता है। वे पूरी तरह मौन हो गए हैं और आकाश को निहारते रहते हैं, जबकि पुलिस वाले उन्हीं के खर्चे पर मौज करते हैं।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-ब (085), कक्षा 10, 2026-27; NCERT संचयन भाग 2 (Reprint 2026-27), हरिहर काका