कबीर – साखी Class 10: भावार्थ, विषय और काव्य-सौंदर्य
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'साखी' स्पर्श भाग 2 का पहला पद्य पाठ है। इसमें कबीर के आठ दोहे हैं। वे मीठी वाणी, अहंकार-त्याग, घट-घट में बसे ईश्वर, निंदक की उपयोगिता और प्रेम के ज्ञान की बात करते हैं। बोर्ड इस पर काव्यांश के बहुविकल्पी प्रश्न (कथन-कारण सहित) और 25-30 शब्दों के दो-दो अंक वाले प्रश्न पूछता है।
What कबीर – साखी is about
'साखी' NCERT की पुस्तक स्पर्श भाग 2 के पद्य खंड का पहला पाठ है। इसके कवि संत कबीर हैं। 'साखी' शब्द 'साक्षी' का तद्भव रूप है, जिसका अर्थ है प्रत्यक्ष ज्ञान। साखी वास्तव में दोहा छंद है, जिसमें 13 और 11 मात्राओं पर विश्राम के साथ 24 मात्राएँ होती हैं। इस पाठ की आठ साखियाँ एक पंक्ति में यह सिखाती हैं कि अहंकार छोड़कर, मीठा बोलकर और प्रेम से भरा मन रखकर ही मनुष्य ईश्वर और सच्चे ज्ञान तक पहुँचता है।
बोर्ड परीक्षा के काव्य खंड (11 अंक) में यह पाठ दो तरह से आता है। पहला, पठित काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5), जिनमें कथन-कारण प्रश्न भी होता है। दूसरा, कविताओं पर 25-30 शब्दों वाले प्रश्न, जिनमें 4 में से 3 करने होते हैं और हर प्रश्न 2 अंक का होता है। इसलिए हर साखी का भाव, कठिन शब्दों के अर्थ और अलंकार अच्छी तरह समझना ज़रूरी है।
In real board papers: Course A, asked in 1 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 0.3 marks per paper; Course B, asked in 15 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 3.5 marks per paper. See the questions
कबीर – साखी: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
पहली साखी (मीठी वाणी): कबीर कहते हैं कि मन का अहंकार छोड़कर ऐसी बोली बोलनी चाहिए जिससे बोलने वाले का अपना तन शीतल हो और सुनने वालों को सुख मिले। मीठे वचन दोनों का भला करते हैं।
दूसरी साखी (कस्तूरी और मृग): कस्तूरी हिरण की नाभि में ही होती है, पर वह उसकी सुगंध से भटककर उसे जंगल में ढूँढता है। इसी तरह राम हर प्राणी के भीतर हैं, पर दुनिया उन्हें देख नहीं पाती और बाहर खोजती रहती है।
तीसरी साखी (अहंकार और ईश्वर): जब तक 'मैं' यानी अहंकार था, तब तक हरि नहीं मिले। अहंकार मिटते ही हरि मिल गए। भीतर ज्ञान का दीपक दिखा तो अज्ञान का सारा अँधेरा मिट गया।
चौथी साखी (सुखिया और दुखिया): सारा संसार खाने और सोने में मस्त है, इसलिए वह 'सुखी' दिखता है। कबीर स्वयं को दुखी कहते हैं, क्योंकि वे जागते हैं और रोते हैं। यहाँ सोना अज्ञान का और जागना ज्ञान व ईश्वर के प्रति चिंता का प्रतीक है।
पाँचवीं साखी (विरह रूपी साँप): विरह साँप की तरह शरीर में बस गया है, जिस पर कोई मंत्र असर नहीं करता। राम से बिछुड़ा व्यक्ति जीवित नहीं रहता, और यदि रहता भी है तो पागल-सा हो जाता है।
छठी साखी (निंदक): निंदा करने वाले को अपने पास, आँगन में कुटिया बनाकर रखना चाहिए। वह बिना साबुन और पानी के हमारे स्वभाव को निर्मल कर देता है, क्योंकि वह हमारी कमियाँ बताता रहता है।
सातवीं साखी (पोथी ज्ञान बनाम प्रेम): मोटी-मोटी पुस्तकें पढ़-पढ़कर दुनिया मर गई, पर कोई सच्चा पंडित नहीं बना। जो प्रिय (ईश्वर) के प्रेम का एक अक्षर पढ़ ले, वही सच्चा ज्ञानी है।
आठवीं साखी (त्याग): कबीर कहते हैं कि उन्होंने अपना घर जला दिया है और हाथ में जलती लकड़ी ले ली है। अब वे उसका घर भी जलाएँगे जो उनके साथ चलेगा। इससे संकेत मिलता है कि यहाँ 'घर' मोह-माया और अहंकार का प्रतीक है, जिसे छोड़े बिना भक्ति के मार्ग पर नहीं चला जा सकता।
केंद्रीय भाव: इन साखियों का प्रतिपाद्य है कि ईश्वर बाहर नहीं, हमारे भीतर है। उसे पाने के लिए अहंकार का त्याग, मधुर वाणी, आत्म-सुधार और प्रेम आवश्यक है। शास्त्रीय ज्ञान से अधिक अनुभव और प्रेम का ज्ञान महत्त्वपूर्ण है।
Themes and message
मधुर वाणी और अहंकार का त्याग
कबीर मानते हैं कि वाणी मन का दर्पण है। जब मन में अहंकार होता है तो शब्द कठोर हो जाते हैं। अहंकार छोड़कर बोली गई मीठी वाणी दोहरा लाभ देती है: बोलने वाले का मन शांत और शीतल रहता है, और सुनने वाले को सुख मिलता है। इससे पता चलता है कि कबीर के लिए मीठा बोलना केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि मन की शुद्धि का साधन है। तीसरी साखी भी यही कहती है कि 'मैं' मिटे बिना ईश्वर नहीं मिलते।
From the text: पहली साखी: "ऐसी बाँणी बोलिये, मन का आपा खोइ।" तथा तीसरी साखी: "जब मैं था तब हरि नहीं"।
ईश्वर घट-घट में व्याप्त है
कबीर के अनुसार ईश्वर मंदिर या जंगल जैसी बाहरी जगहों में नहीं, हर प्राणी के हृदय में बसता है। जैसे हिरण अपनी ही नाभि में बसी कस्तूरी को बाहर खोजता फिरता है, वैसे ही मनुष्य अज्ञान के कारण ईश्वर को बाहर ढूँढता है। जब भीतर ज्ञान का दीपक जलता है, तब अज्ञान का अँधेरा मिटता है और ईश्वर का अनुभव होता है। यह विचार बाहरी आडंबरों के विरोध से भी जुड़ता है।
From the text: "कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि।" और "सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि॥"
पुस्तकीय ज्ञान से बड़ा प्रेम और अनुभव का ज्ञान
कबीर शास्त्रीय ज्ञान की अपेक्षा अनुभव ज्ञान को अधिक महत्त्व देते थे, यह बात उनके परिचय में भी कही गई है। सातवीं साखी में वे कहते हैं कि पोथियाँ पढ़ते-पढ़ते लोग मर गए, फिर भी कोई सच्चा पंडित नहीं बना। सच्चा ज्ञानी वह है जो प्रिय (ईश्वर) के प्रेम का एक अक्षर पढ़ ले। इसका अर्थ है कि रटा हुआ ज्ञान मनुष्य को नहीं बदलता; प्रेम और अनुभव ही उसे सच्चा विद्वान बनाते हैं।
From the text: "पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ।" तथा "ऐकै अषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होइ॥"
आलोचना से आत्म-सुधार
साधारण लोग निंदा करने वाले से दूर भागते हैं, पर कबीर उसे आँगन में कुटिया बनाकर पास रखने की सलाह देते हैं। निंदक हमारी कमियाँ बार-बार बताता है, जिससे हम उन्हें सुधारते हैं। इस तरह वह बिना साबुन और पानी के हमारा स्वभाव निर्मल कर देता है। इससे पता चलता है कि कबीर आलोचना को शत्रु नहीं, बल्कि आत्म-सुधार का साधन मानते हैं, बशर्ते हम उसे विनम्रता से सुनें।
From the text: "निंदक नेड़ा राखिये, आँगणि कुटी बँधाइ।" और "बिन साबण पाँणीं बिना, निरमल करै सुभाइ॥"
आध्यात्मिक जागरण, विरह और त्याग
संसार खाने-सोने में मग्न है और स्वयं को सुखी समझता है, पर कबीर जागते और रोते हैं, क्योंकि वे ईश्वर से दूर होने की पीड़ा अनुभव करते हैं। यह विरह साँप के विष जैसा है जिस पर कोई मंत्र काम नहीं करता। अंतिम साखी में कबीर अपना 'घर' जला देने की बात करते हैं। इससे संकेत मिलता है कि ईश्वर-प्रेम के मार्ग पर चलने के लिए मोह-माया का त्याग करना पड़ता है, और कबीर यही साहस अपने साथियों से भी चाहते हैं।
From the text: "दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै॥", "बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।" और "हम घर जाल्या आपणाँ, लिया मुराड़ा हाथि।"
The speaker and the people in the poem
कबीर (वक्ता)
साखियों के कवि और वक्ता, जो गुरु की तरह जीवन का तत्वज्ञान समझाते हैं और स्वयं को 'दास कबीर' कहते हैं।
- विनम्र और अहंकार-रहित
- ईश्वर-प्रेम में डूबे विरही भक्त
- जागरूक और चिंतनशील
- आत्म-सुधार में विश्वास रखने वाले
- त्यागी और साहसी
विनम्रता: वे स्वयं को "दास कबीर" कहते हैं और "मन का आपा खोइ" की सीख देते हैं। विरह: "जागै अरू रोवै" और "बिरह भुवंगम तन बसै"। आत्म-सुधार: "निंदक नेड़ा राखिये"। त्याग: "हम घर जाल्या आपणाँ"।
संसार के लोग (जिनका वर्णन है)
वे साधारण मनुष्य जिनसे कबीर अपनी तुलना करते हैं और जिन्हें वे सीख देते हैं।
- सांसारिक सुखों में मग्न
- अज्ञानी, ईश्वर को बाहर खोजने वाले
- पुस्तकीय ज्ञान पर निर्भर
- आत्मचिंतन से दूर
"सुखिया सब संसार है, खायै अरू सोवै।"; "दुनियाँ देखै नाँहिं"; "पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा"। इससे पता चलता है कि लोग खाने-सोने को ही सुख मानते हैं और भीतर बसे ईश्वर को नहीं पहचानते।
निंदक (जिसका वर्णन है)
निंदा करने वाला व्यक्ति, जिसे कबीर आत्म-सुधार का साधन मानते हैं।
- कमियाँ बताने वाला
- अनजाने में स्वभाव सुधारने वाला
- पास रखने योग्य
"निंदक नेड़ा राखिये, आँगणि कुटी बँधाइ।" वह "निरमल करै सुभाइ", यानी स्वभाव को निर्मल करता है।
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| दृष्टांत / उदाहरण अलंकार | "कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि। ऐसैं घटि घटि राँम है" | हिरण और कस्तूरी का परिचित उदाहरण देकर कबीर कठिन बात (ईश्वर भीतर है) को सरल और यादगार बना देते हैं। 'ऐसैं' शब्द उदाहरण को मूल बात से जोड़ता है। |
| रूपक अलंकार | "बिरह भुवंगम तन बसै" | विरह को ही साँप (भुवंगम) बना दिया गया है। इससे विरह की पीड़ा साँप के विष जैसी घातक और असाध्य लगती है, जिस पर कोई मंत्र असर नहीं करता। |
| पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार | "घटि घटि राँम है" तथा "पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा" | 'घटि घटि' से ईश्वर का हर जगह होना ज़ोर देकर कहा गया है। 'पढ़ि पढ़ि' से लगातार, जीवन भर पढ़ते रहने का भाव उभरता है। |
| अनुप्रास अलंकार | "पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ।" | 'प' वर्ण की बार-बार आवृत्ति से पंक्ति में लय और संगीत आता है और वह आसानी से याद हो जाती है। |
| प्रतीक और विरोध (विपरीत भाव) | "सुखिया सब संसार है, खायै अरू सोवै।" / "दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै॥" | सोना अज्ञान का और जागना ज्ञान का प्रतीक है। 'सुखिया' और 'दुखिया' को आमने-सामने रखने से यह व्यंग्य उभरता है कि संसार का सुख असल में अज्ञान है और कबीर का दुख जागरूकता है। |
| दोहा छंद और सधुक्कड़ी भाषा | "ऐसी बाँणी बोलिये, मन का आपा खोइ।" | 13-11 मात्राओं वाला दोहा छोटा और लयबद्ध है, इसलिए गहरी बात भी आसानी से याद रहती है। 'बाँणी', 'आपा', 'खोइ' जैसे बोलचाल के शब्द भाषा को सहज और जन-जन की भाषा बनाते हैं। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
ऐसी बाँणी बोलिये, मन का आपा खोइ।
कबीर: पहली साखी, जिसमें मीठी वाणी बोलने की सीख दी गई है।
यह बताती है कि मीठी वाणी की जड़ अहंकार का त्याग है। 'आपा' का अर्थ अहंकार है, यह शब्दार्थ अक्सर प्रश्नों में काम आता है।
ऐसैं घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखै नाँहिं॥
कबीर: कस्तूरी-मृग के उदाहरण के बाद की पंक्ति।
साखी का मुख्य विचार: ईश्वर हर प्राणी के भीतर है, पर अज्ञान के कारण लोग उसे नहीं देखते।
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।
कबीर: तीसरी साखी, अहंकार और ईश्वर-प्राप्ति के संबंध पर।
'मैं' यहाँ अहंकार है। अहंकार और ईश्वर एक साथ नहीं रह सकते, यह इस पंक्ति का भाव है।
दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै॥
कबीर: चौथी साखी, जिसमें संसार और कबीर की तुलना है।
कबीर का 'दुख' ज्ञान और ईश्वर से दूरी की पीड़ा है; 'जागना' आध्यात्मिक जागरूकता का प्रतीक है।
बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।
कबीर: पाँचवीं साखी, ईश्वर से विरह की पीड़ा पर।
रूपक अलंकार का उदाहरण; विरह की पीड़ा को साँप के विष जैसा असाध्य बताया गया है।
निंदक नेड़ा राखिये, आँगणि कुटी बँधाइ।
कबीर: छठी साखी, आत्म-सुधार के उपाय पर।
आलोचना को स्वीकार करने और उससे स्वभाव सुधारने की सीख देती है; मूल्यपरक प्रश्नों का आधार।
ऐकै अषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होइ॥
कबीर: सातवीं साखी, पोथी-ज्ञान की तुलना में प्रेम के ज्ञान पर।
सच्चा पंडित वही है जो ईश्वर-प्रेम का एक अक्षर समझ ले; अनुभव और प्रेम के ज्ञान की महत्ता।
हम घर जाल्या आपणाँ, लिया मुराड़ा हाथि।
कबीर: आठवीं साखी; 'मुराड़ा' का अर्थ जलती हुई लकड़ी है।
इससे संकेत मिलता है कि कबीर ने मोह-माया रूपी घर का त्याग कर दिया है और साथ चलने वालों से भी यही त्याग चाहते हैं।
कबीर – साखी in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
मधुर वाणी और अहंकार का त्याग
मान लीजिए कक्षा के ऑनलाइन समूह में एक सहपाठी ने परीक्षा की गलत तिथि डाल दी। कुछ बच्चे उसका मज़ाक उड़ाने लगे और वह चुप हो गया।
कबीर की पहली साखी के आधार पर बताइए कि आपको कैसे उत्तर देना चाहिए और क्यों।
Try it first, then show the solutionSolution
- अहंकार छोड़कर, विनम्र शब्दों में गलती सुधारना
- कबीर के अनुसार ऐसी वाणी बोलने वाले का मन शांत रखती है
- सुनने वाले को भी सुख मिलता है
- मज़ाक और कड़वे शब्द कटुता बढ़ाते हैं
Answer: मुझे अहंकार छोड़कर विनम्रता से जानकारी सुधारनी चाहिए। कबीर के अनुसार ऐसी वाणी अपने मन को शांत रखती है और सुनने वाले को सुख देती है; मज़ाक कटुता बढ़ाता है।
Memory hook: गलती सुधारो, पर मीठे शब्दों से — 'मन का आपा खोइ'।
आलोचना से आत्म-सुधार (निंदक)
कल्पना कीजिए कि आपके स्कूल की क्रिकेट टीम के कोच हर मैच के बाद आपकी बल्लेबाज़ी की कमियाँ गिनाते हैं। आपको बुरा लगता है और आप अभ्यास में उनसे बचने लगते हैं।
निंदक वाली साखी के आधार पर अपने इस व्यवहार का मूल्यांकन कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- कमियाँ बताने वाले से बचना उचित नहीं
- कबीर निंदक को आँगन में कुटी बनाकर निकट रखने को कहते हैं
- निंदक बिना साबुन-पानी के स्वभाव निर्मल करता है
- कमियाँ सुधारने से ही खेल बेहतर होगा
Answer: कोच से बचना गलत है। कबीर कहते हैं कि निंदक बिना साबुन-पानी के स्वभाव निर्मल कर देता है। कोच की बताई कमियाँ सुधारकर ही मैं बेहतर बल्लेबाज़ बन सकता हूँ।
Memory hook: आलोचना साबुन है — बिना पानी के मन धो देती है।
पुस्तकीय ज्ञान से बड़ा अनुभव और प्रेम का ज्ञान
मान लीजिए आपका एक मित्र बोर्ड परीक्षा के लिए विज्ञान के सारे उत्तर रट लेता है, पर प्रयोगशाला में एक साधारण प्रयोग भी नहीं कर पाता।
'पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा' साखी से इस स्थिति की तुलना कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- मित्र केवल पढ़ता और रटता है, समझता नहीं
- कबीर: पोथियाँ पढ़कर भी कोई पंडित न बना
- सच्चा ज्ञान समझ और अनुभव से आता है
- कबीर अनुभव-ज्ञान को अधिक महत्त्व देते थे
Answer: मित्र की स्थिति कबीर के उन लोगों जैसी है जो पोथियाँ पढ़ते-पढ़ते जीवन बिता दिया, पर ज्ञानी न बने। रटने से नहीं, समझ और अनुभव से सच्चा ज्ञान आता है।
Memory hook: रटा हुआ ज्ञान पोथी है, समझा हुआ ज्ञान पंडिताई।
अहंकार मिटने पर ज्ञान का दीपक
कल्पना कीजिए कि कक्षा में हर बार प्रथम आने वाला एक छात्र सोचने लगता है कि उसे अब किसी से कुछ सीखने की ज़रूरत नहीं है। वह शिक्षकों के सुझाव भी अनसुने कर देता है।
'जब मैं था तब हरि नहीं' साखी के आधार पर समझाइए कि उसका यह 'मैं' उसकी प्रगति में कैसे बाधक है।
Try it first, then show the solutionSolution
- 'मैं' = अहंकार
- अहंकार रहते हरि (सत्य) नहीं मिलता
- अहंकारी छात्र नया सीखने के द्वार बंद कर लेता है
- अहंकार मिटे तो ज्ञान का दीपक जलेगा
Answer: कबीर के अनुसार जब तक 'मैं' यानी अहंकार रहता है, तब तक हरि नहीं मिलते। इसी तरह अहंकारी छात्र ज्ञान नहीं ग्रहण करता; अहंकार मिटे तो ज्ञान का दीपक जलेगा।
Memory hook: 'मैं' का अँधेरा हटे, तभी सीखने का दीया जले।
Topics in this chapter
- कबीर की साखियों का भावार्थComing soon
- साखी पाठ के प्रश्न-उत्तरComing soon
- साखी की भाषा और काव्य-सौंदर्यComing soon
- कबीर का जीवन परिचय और साखी का अर्थComing soon
- साखी का केंद्रीय भाव और संदेशComing soon
- कबीर की साखियाँ: अहंकार-त्याग, आत्म-सुधार और प्रेम का ज्ञान
How the board asks कबीर – साखी
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | दो-तीन साखियाँ देकर पाँच प्रश्न: किसी शब्द का अर्थ ('बौरा', 'घटि घटि', 'कुंडलि'), किसी पंक्ति का भाव या आशय, कभी 'गलत अर्थ' चुनने वाला प्रश्न। | हर विकल्प को काव्यांश से मिलाइए। शब्दार्थ (आपा = अहंकार, भुवंगम = साँप, नेड़ा = निकट, पीव = प्रिय, मुराड़ा = जलती लकड़ी) पक्के याद रखें। 'गलत' या 'असत्य' शब्द वाले प्रश्न को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि वहाँ उलटा विकल्प चुनना होता है। |
| कथन-कारण प्रश्न | कथन (A) और कारण (R) दिए जाते हैं, जैसे ईश्वर के भीतर होने या निंदक को पास रखने से जुड़ा कथन, और चार मानक विकल्पों में से सही चुनना होता है। | पहले कथन को साखी के आधार पर सही-गलत जाँचें, फिर कारण को अलग से जाँचें। अंत में देखें कि क्या कारण सचमुच कथन की व्याख्या करता है। दोनों सही होने पर भी कारण व्याख्या न करे तो वह अलग विकल्प बनता है। |
| भाव या आशय स्पष्ट करना (25-30 शब्द, 2 अंक) | किसी एक पंक्ति का भाव पूछा जाता है, जैसे 'जब मैं था तब हरि नहीं' या कस्तूरी-मृग वाली पंक्ति का आशय। | पहले प्रतीक खोलें ('मैं' = अहंकार, 'दीपक' = ज्ञान), फिर सीधा भाव लिखें और अंत में एक पंक्ति में संदेश जोड़ें। 25-30 शब्दों से अधिक न लिखें; दो-तीन ठोस बिंदु पर्याप्त हैं। |
| तुलना और प्रतीक वाले प्रश्न | संसार को 'सुखिया' और कबीर को 'दुखिया' क्यों कहा गया, या कबीर के रोने का कारण क्या है, या सुख-दुख के विषय में दोनों के दृष्टिकोण में अंतर। | दोनों पक्ष लिखें: संसार खाने-सोने (अज्ञान) को सुख मानता है; कबीर जागकर (ज्ञान) ईश्वर-विरह में रोते हैं। 'सोना' और 'जागना' को प्रतीक के रूप में स्पष्ट करना ज़रूरी है। |
| मूल्यपरक और सहमति वाले प्रश्न (HOTS) | निंदक को पास रखने के विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं, या आज के जीवन में मीठी वाणी का क्या महत्त्व है, यह पूछा जाता है। | पहले अपनी राय साफ़ लिखें (सहमत/असहमत), फिर साखी का तर्क दें, फिर अपने जीवन या विद्यालय से एक छोटा उदाहरण जोड़ें। राय के साथ साखी का आधार अवश्य हो। |
| भाषा की विशेषता | कबीर की साखियों की भाषा की विशेषताएँ पूछी जाती हैं। | पाठ प्रवेश के आधार पर लिखें: सधुक्कड़ी या 'पचमेल खिचड़ी' भाषा, जिसमें अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी के शब्द हैं; दोहा छंद; सरल, सहज, बोलचाल के शब्द; एक उदाहरण अवश्य दें। |
Tricks to remember कबीर – साखी
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
आठ साखियों का क्रम
वाक्य याद कीजिए: 'बाबा कल जब सुबह बिना नींद पोथी घर लाए'।
बा = बाँणी, क = कस्तूरी, ज = जब मैं था, सु = सुखिया, बि = बिरह, नि = निंदक, पो = पोथी, घ = घर जाल्या।Use it when: काव्यांश देखते ही पता चल जाएगा कि वह पाठ के आरंभ, मध्य या अंत की साखी है।
प्रतीकों की जोड़ी
प्रकाश वाले शब्द = ज्ञान: दीपक, जागना, मुराड़ा।
अँधेरे वाले शब्द = अज्ञान या मोह: अँधियारा, सोना, घर।
कस्तूरी = भीतर बसा ईश्वर; भुवंगम = विरह।Use it when: प्रतीक पूछने वाले MCQ और 2 अंक के प्रश्नों में सही अर्थ तुरंत लिखने के लिए।
दोहा की मात्राएँ
'तेरह-ग्यारह, चौबीस सारा' — 13 और 11 पर विश्राम, कुल 24 मात्राएँ = दोहा = साखी।
Use it when: साखी के छंद और अर्थ वाले प्रश्न में।
पाँच विषय, पाँच उँगलियाँ
अँगूठा = वाणी (मीठा बोलो), तर्जनी = भीतर का ईश्वर (कस्तूरी), मध्यमा = ज्ञान बनाम पोथी, अनामिका = निंदक से सुधार, कनिष्ठा = विरह और त्याग (जागना, घर जलाना)।
Use it when: केंद्रीय भाव या संदेश वाले प्रश्न में सभी विषय एक साथ याद रहें।
कबीर – साखी: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: अहंकार का अंत और जागरण (साखी 3-4)
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।
सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि॥
सुखिया सब संसार है, खायै अरू सोवै।
दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै॥
(1) · 1 mark · MCQ
'जब मैं था तब हरि नहीं' पंक्ति में 'मैं' किसका प्रतीक है?
(क) मनुष्य का शरीर
(ख) अहंकार
(ग) सांसारिक संबंध
(घ) गुरु(2) · 1 mark · MCQ
'जब दीपक देख्या माँहि' में 'दीपक' किसका प्रतीक है?
(क) मिट्टी का दीया
(ख) सूर्य का प्रकाश
(ग) भीतर का ज्ञान-प्रकाश
(घ) धन-संपत्ति(3) · 1 mark · MCQ
कबीर के अनुसार संसार के लोग 'सुखिया' क्यों हैं?
(क) उन्होंने ईश्वर को पा लिया है
(ख) वे केवल खाने और सोने में मग्न हैं
(ग) वे पोथियाँ पढ़कर पंडित बन गए हैं
(घ) वे निंदक को पास रखते हैं(4) · 1 mark · Assertion-reason
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सही विकल्प चुनिए:
कथन (A): कबीर स्वयं को 'दुखिया' कहते हैं।
कारण (R): वे ज्ञान से जाग चुके हैं और ईश्वर से दूर होने की पीड़ा में रोते हैं।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।(5) · 1 mark · MCQ
काव्यांश में 'सोवै' और 'जागै' क्रमशः किसके प्रतीक हैं?
(क) अज्ञान और ज्ञान
(ख) रात और दिन
(ग) आलस्य और परिश्रम
(घ) सुख और धन
Show the answersAnswers
- (ख) अहंकार
- (ग) भीतर का ज्ञान-प्रकाश
- (ख) वे केवल खाने और सोने में मग्न हैं
- (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।
- (क) अज्ञान और ज्ञान
Extract 2: सच्चा ज्ञान और त्याग (साखी 7-8)
पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ।
ऐकै अषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होइ॥
हम घर जाल्या आपणाँ, लिया मुराड़ा हाथि।
अब घर जालौं तास का, जे चलै हमारे साथि॥
(1) · 1 mark · MCQ
'पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ' का आशय है:
(क) अधिक पढ़ने से लोग मर जाते हैं
(ख) केवल पुस्तकें पढ़कर कोई सच्चा ज्ञानी नहीं बना
(ग) पुस्तकें पढ़नी ही नहीं चाहिए
(घ) पंडित पुस्तकें नहीं पढ़ते(2) · 1 mark · MCQ
'ऐकै अषिर पीव का' में 'पीव' शब्द का अर्थ है:
(क) पिता
(ख) पानी
(ग) प्रिय अर्थात ईश्वर
(घ) पंडित(3) · 1 mark · MCQ
कबीर के अनुसार सच्चा पंडित कौन है?
(क) जिसने अनेक ग्रंथ कंठस्थ किए हों
(ख) जो शास्त्रार्थ में सबको हरा दे
(ग) जो प्रिय के प्रेम का एक अक्षर पढ़ ले
(घ) जो अपना घर छोड़ दे(4) · 1 mark · MCQ
'लिया मुराड़ा हाथि' में 'मुराड़ा' का अर्थ है:
(क) जलती हुई लकड़ी
(ख) लाठी
(ग) झाड़ू
(घ) माला(5) · 1 mark · MCQ
'हम घर जाल्या आपणाँ' से कबीर का प्रतीकात्मक भाव क्या है?
(क) उन्होंने क्रोध में अपना घर जला दिया
(ख) उन्होंने मोह-माया और आसक्ति को त्याग दिया
(ग) वे नया घर बनाना चाहते थे
(घ) उनका घर किसी दुर्घटना में जल गया
Show the answersAnswers
- (ख) केवल पुस्तकें पढ़कर कोई सच्चा ज्ञानी नहीं बना
- (ग) प्रिय अर्थात ईश्वर
- (ग) जो प्रिय के प्रेम का एक अक्षर पढ़ ले
- (क) जलती हुई लकड़ी
- (ख) उन्होंने मोह-माया और आसक्ति को त्याग दिया
कबीर – साखी: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: अहंकार-रहित वाणी के लाभ · 2 marks · Short answerBoard level
पहली साखी के अनुसार मन का अहंकार त्यागकर बोली गई वाणी के दो लाभ लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- वाणी की शर्त: 'मन का आपा खोइ' अर्थात अहंकार छोड़कर बोलना
- पहला लाभ: बोलने वाले का अपना तन-मन शीतल (शांत) होता है
- दूसरा लाभ: सुनने वाले औरों को सुख मिलता है
- उत्तर 25-30 शब्दों में, दोनों लाभ अलग-अलग
Answer: कबीर कहते हैं कि मन का अहंकार त्यागकर बोली गई वाणी के दो लाभ हैं। पहला, बोलने वाले का तन-मन शीतल होता है। दूसरा, सुनने वालों को सुख मिलता है।
Example 2: कस्तूरी-मृग और मनुष्य की भूल · 2 marks · Short answerHarder board level
कस्तूरी-मृग का उदाहरण देकर कबीर मनुष्य की किस भूल की ओर संकेत करते हैं?
Try it first, then show the solutionSolution
- मृग की नाभि (कुंडलि) में कस्तूरी है, पर वह उसे वन में ढूँढ़ता है
- इसी प्रकार ईश्वर 'घटि घटि' अर्थात हर हृदय में है
- भूल: मनुष्य ईश्वर को अपने भीतर न देखकर बाहर खोजता है
Answer: मृग की नाभि में कस्तूरी होती है, पर वह उसे वन में ढूँढ़ता है। इसी प्रकार ईश्वर हर हृदय में है, पर मनुष्य उसे भीतर न देखकर बाहर खोजता है।
Example 3: अहंकार, ईश्वर और दीपक · 2 marks · Short answerHarder board level
कबीर के अनुसार अहंकार और ईश्वर-प्राप्ति में क्या संबंध है? 'दीपक' का प्रयोग इस बात को कैसे स्पष्ट करता है?
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- 'मैं' (अहंकार) और 'हरि' एक साथ नहीं रह सकते
- अहंकार मिटने पर ही ईश्वर का अनुभव होता है
- दीपक = ज्ञान, अँधियारा = अज्ञान; ज्ञान का प्रकाश अज्ञान मिटा देता है
Answer: अहंकार रहते ईश्वर नहीं मिलता; अहंकार मिटते ही हरि का अनुभव होता है। जैसे दीपक अँधेरा मिटाता है, वैसे ही भीतर का ज्ञान-दीपक अज्ञान का अंधकार मिटा देता है।
Example 4: विरह रूपी साँप · 2 marks · Short answerHarder board level
कबीर ने विरह को 'भुवंगम' (साँप) क्यों कहा है? 'मंत्र न लागै कोइ' से विरह के विषय में क्या पता चलता है?
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- 'बिरह भुवंगम' में रूपक: विरह को साँप माना गया
- साँप के विष की तरह ईश्वर का विरह भक्त को तड़पाता है
- कोई मंत्र असर नहीं करता: यह पीड़ा किसी उपाय से दूर नहीं होती
Answer: साँप का विष शरीर में फैलकर व्याकुल कर देता है; वैसे ही ईश्वर का विरह भक्त को तड़पाता है। इस पर कोई मंत्र असर नहीं करता, अर्थात यह असाध्य है।
Example 5: आलोचना से नाराज़ मॉनिटर · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपकी कक्षा का मॉनिटर उस सहपाठी से नाराज़ रहता है जो उसकी कमियाँ बताता है। कबीर की साखी के आधार पर आप उसे क्या सलाह देंगे?
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- कबीर की सलाह: निंदक को निकट रखो, आँगन में कुटी बनाकर
- कारण: निंदक बिना साबुन-पानी के स्वभाव निर्मल करता है
- व्यावहारिक निष्कर्ष: कमियाँ जानकर ही सुधार संभव
Answer: मैं उसे समझाऊँगा कि कबीर निंदक को आँगन में कुटिया बनाकर रखने को कहते हैं, क्योंकि वह बिना साबुन-पानी के स्वभाव निर्मल करता है। कमियाँ जानकर ही सुधार संभव है।
Example 6: डिग्री बनाम सच्चा ज्ञान · 2 marks · Short answerHOTS / competency
आजकल डिग्रियों को ही ज्ञान का प्रमाण माना जाता है। 'पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा' साखी के आधार पर क्या आप इस विचार से सहमत हैं? तर्क दीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- स्पष्ट मत: सहमत नहीं
- कबीर का तर्क: केवल पोथियाँ पढ़कर कोई पंडित नहीं बना
- प्रेम का एक अक्षर पढ़ने वाला ही पंडित
- कबीर अनुभव-ज्ञान को शास्त्रीय ज्ञान से बड़ा मानते थे
Answer: मैं सहमत नहीं हूँ। कबीर मानते हैं कि केवल पोथियाँ पढ़कर कोई ज्ञानी नहीं बनता; प्रेम का एक अक्षर समझने वाला ही पंडित है। डिग्री के साथ अनुभव भी चाहिए।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
कस्तूरी-मृग के उदाहरण द्वारा कबीर क्या समझाना चाहते हैं? (25-30 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| उदाहरण का सही उल्लेख: कस्तूरी मृग की नाभि (कुंडलि) में होती है, पर वह उसे वन में ढूँढ़ता है | 1 |
| भाव: ईश्वर घट-घट (हर हृदय) में है, पर मनुष्य उसे भीतर न देखकर बाहर खोजता है; उत्तर शब्द-सीमा में | 1 |
पठित काव्यांश (जैसे 'जब मैं था तब हरि नहीं...' से 'जागै अरू रोवै' तक) पर आधारित पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रश्न 1: प्रतीक की पहचान ('मैं' = अहंकार) — सही विकल्प | 1 |
| प्रश्न 2: प्रतीक की पहचान ('दीपक' = ज्ञान) — सही विकल्प | 1 |
| प्रश्न 3: भाव-बोध (संसार सुखिया क्यों) — सही विकल्प | 1 |
| प्रश्न 4: कथन-कारण — दोनों की सत्यता और व्याख्या का संबंध परखकर सही विकल्प | 1 |
| प्रश्न 5: प्रतीक-युग्म (सोना-जागना = अज्ञान-ज्ञान) — सही विकल्प | 1 |
Where students lose marks in कबीर – साखी
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: 'मुवा' का शाब्दिक अर्थ लेकर साखी को पढ़ाई का विरोध बताना
कबीर पढ़ने का नहीं, प्रेम-रहित केवल पुस्तकीय ज्ञान का विरोध करते हैं। 'मुवा' का भाव है जीवन भर पढ़ते रहना।
Wrong working
पोथी पढ़ते-पढ़ते लोग मर गए, इसलिए कबीर कहते हैं कि पढ़ना नहीं चाहिए।
Right working
लोग जीवन भर पोथियाँ पढ़ते रहे, फिर भी प्रेम के बिना सच्चे ज्ञानी न बन सके।
Do this: उत्तर में 'केवल पुस्तकीय ज्ञान' और 'प्रेम का एक अक्षर' दोनों बातें लिखिए।
Usually costs: 2 अंक के प्रश्न में 1 से 2 अंक
Mistake: 'सुखिया सब संसार' का अर्थ सचमुच का सुख समझना
खाना और सोना यहाँ अज्ञान के प्रतीक हैं; कबीर संसार की अचेत दशा बता रहे हैं।
Wrong working
संसार के लोग सुखी हैं क्योंकि उन्हें खाने और सोने को मिलता है।
Right working
संसार खाने-सोने में मग्न रहकर अचेत है; उसका सुख अज्ञान का सुख है, जबकि कबीर जाग चुके हैं।
Do this: 'सोना = अज्ञान, जागना = ज्ञान' वाला प्रतीक हर बार लिखिए।
Usually costs: 2 में से 1 अंक; MCQ में पूरा 1 अंक
Mistake: 'नेड़ा' का अर्थ गलत लेकर निंदक से दूर रहने की बात लिखना
शब्दार्थ में 'नेड़ा' का अर्थ निकट है; कबीर निंदक को पास रखने को कहते हैं।
Wrong working
कबीर कहते हैं कि निंदक लोगों से दूर रहना चाहिए।
Right working
कबीर निंदक को आँगन में कुटी बनाकर निकट रखने को कहते हैं, क्योंकि वह स्वभाव निर्मल करता है।
Do this: शब्दार्थ सूची के कठिन शब्द (नेड़ा, आँगणि, पीव, मुराड़ा) अलग से याद कीजिए।
Usually costs: पूरा उत्तर गलत होने से 2 के 2 अंक
Mistake: घर जलाने को सच्ची घटना मान लेना
अंतिम साखी प्रतीकात्मक है; घर मोह-माया का और जलती लकड़ी ज्ञान का प्रतीक है।
Wrong working
कबीर ने हाथ में जलती लकड़ी लेकर अपना घर जला दिया था।
Right working
कबीर ने ज्ञान रूपी जलती लकड़ी से मोह-माया का घर जलाया; यही त्याग वे साथियों से चाहते हैं।
Do this: 'प्रतीकात्मक रूप से' या 'इससे पता चलता है कि' जैसे शब्दों से भाव लिखिए।
Usually costs: 2 में से 1 से 2 अंक
Mistake: प्रश्न का उत्तर देने के बजाय पूरी साखी का भावार्थ दोहराना और शब्द-सीमा पार करना
25-30 शब्दों के प्रश्न में परीक्षक केवल पूछे गए बिंदु देखता है; लंबा भावार्थ मूल बिंदु छिपा देता है।
Wrong working
प्रश्न 'निंदक स्वभाव कैसे निर्मल करता है' पर पूरी साखी का शब्दार्थ, फिर भावार्थ, फिर कबीर का परिचय — लगभग 70 शब्द।
Right working
निंदक हमारी कमियाँ बताता है। उन्हें सुधारने से स्वभाव बिना साबुन-पानी के ही निर्मल हो जाता है।
Do this: पहले पंक्ति में सीधा उत्तर, फिर एक प्रमाण; उत्तर लिखने से पहले शब्द गिनिए।
Usually costs: विषयवस्तु अधूरी या अस्पष्ट होने पर 1 अंक
Mistake: कबीर की भाषा को केवल 'ब्रज' या 'शुद्ध अवधी' बताना
पाठ के अनुसार कबीर की भाषा पूर्वी जनपद की भाषा है, जिसमें कई भाषाओं के शब्द हैं; इसे सधुक्कड़ी और पचमेल खिचड़ी कहते हैं।
Wrong working
कबीर की भाषा शुद्ध अवधी है।
Right working
कबीर की भाषा सधुक्कड़ी या पचमेल खिचड़ी है, जिसमें अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी शब्दों का मेल है।
Do this: भाषा वाले प्रश्न में दोनों नाम और चारों भाषाएँ लिखिए, साथ में एक-दो उदाहरण शब्द।
Usually costs: 2 में से 1 अंक
कबीर – साखी: previous year questions
- Course A: Asked in 1 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 0.3 marks per paper; 1 questions in all, counting OR alternatives. In 0 of 4 sample papers.
- Course B: Asked in 15 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 3.5 marks per paper; 15 questions in all, counting OR alternatives. In 3 of 4 sample papers.
Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.
Solved board questions from कबीर – साखी
Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.
2026 Course B, set 4/1/1, Q10 · 6 marks · Short answer
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए : 3×2 = 6
- (i)2 marks
सुख-दुख के विषय में कबीर और सांसारिक मनुष्यों के दृष्टिकोण में क्या अंतर है ? 'साखी' कविता के आधार पर लिखिए।
- (ii)2 marks
'मनुष्यता' कविता में कवि मनुष्य को मृत्यु से भयभीत न होने की सलाह क्यों दे रहा है ?
- (iii)2 marks
आपकी पाठ्यपुस्तक की किस कविता में प्रकृति-सौंदर्य का वर्णन किया गया है ? उस कविता में वर्णित प्रकृति के कोमल रूप का वर्णन कीजिए।
- (iv)2 marks
'तोप' कविता के माध्यम से कवि ने हमें देशभक्ति का कौन-सा पाठ पढ़ाया है ? स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show our solutionSolution
- 2 marks
(i) कबीर के अनुसार ज्ञान-प्राप्ति ही सच्चा सुख है और अज्ञान से बड़ा कोई दुख नहीं। सामान्य मनुष्य भौतिक संपदा तथा खाने-सोने जैसे निजी स्वार्थ पूरे करने में ही सुख खोजता है।
- 2 marks
(ii) कवि कहता है कि मृत्यु निश्चित है, इसलिए उससे डरना व्यर्थ है। मनुष्य को ऐसा जीवन जीना चाहिए कि परोपकार और मानवता के कारण मृत्यु के बाद भी उसकी कीर्ति बनी रहे।
- 2 marks
(iii) 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में प्रकृति-सौंदर्य है। कोमल रूप: रंग-बिरंगे पुष्प, दर्पण-से ताल में अपना आकार देखते विशाल पर्वत, मोती की लड़ियों-से झरते सुंदर झरने।
- 2 marks
(iv) 'तोप' कविता सिखाती है कि हमें जागरूक और सचेत रहकर अपनी विरासत को सँभालना चाहिए। स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से सीख लेकर मातृभूमि की रक्षा का भाव रखना चाहिए।
Answer: किन्हीं तीन उपभागों के उत्तर ऊपर दिए गए हैं।
Where the marks are
- प्रत्येक उपभाग 2 अंक; किन्हीं तीन के लिए (3×2)
2026 Course B, set 4/5/1, Q9 · 5 marks · Reading comprehensionCompetency-based
निम्नलिखित काव्यांश (दोहों) को पढ़कर दिए गए प्रश्नों का सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कर लिखिए : 5 × 1 = 5
कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढ़े बन माँहि ।
ऐसैं घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखे नाँहि ॥
बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ ।
राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होई ॥
- (i)1 mark
'बौरा' किसे कहा गया है ?
- (A)जो परमात्मा के प्रेम में डूबा है।
- (B)जो संसार के प्रेम में डूबा है।
- (C)जिसे किसी साँप ने डँस लिया हो।
- (D)जिसे सांसारिक प्रेम में निराशा मिली हो।
- (ii)1 mark
'ऐसैं घटि घटि राँम है' में 'घटि घटि' का गलत अर्थ है –
- (A)जीव मात्र
- (B)कण-कण
- (C)हर जगह
- (D)हर घड़ी
- (iii)1 mark
'बिरह भुवंगम तन बसै' का भाव है –
- (A)भुजंग का तन में वास होना
- (B)भुजंग से विरह की अनुभूति होना
- (C)परमात्मा का तन से विरह होना
- (D)परमात्मा से विरह की अनुभूति होना
- (iv)1 mark
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : परमात्मा प्रत्येक प्राणी के हृदय में निवास करता है।
कारण : सांसारिक मोह-माया में लिप्त प्राणी इस सत्य से सुपरिचित होता है।- (A)कथन और कारण दोनों गलत हैं।
- (B)कथन गलत है, लेकिन कारण सही है।
- (C)कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की गलत व्याख्या करता है।
- (D)कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
- (v)1 mark
'राम वियोगी ना जिवै' का आशय है –
- (A)राम का वियोगी स्वयं मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।
- (B)राम का वियोगी स्वयं मृत्यु का वरण कर लेता है।
- (C)राम का वियोगी सांसारिक मोह-माया से मुक्त हो जाता है।
- (D)राम से विरही व्यक्ति की स्थिति विक्षिप्तों जैसी हो जाती है।
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(i) कबीर के अनुसार 'बौरा' वह है जो परमात्मा के प्रेम में डूबा है। उत्तर (A)।
- 1 mark
(ii) 'घटि घटि' का अर्थ जीव मात्र, कण-कण और हर जगह है, 'हर घड़ी' नहीं। गलत अर्थ (D) है।
- 1 mark
(iii) 'बिरह भुवंगम तन बसै' का भाव परमात्मा से विरह की अनुभूति होना है। उत्तर (D)।
- 1 mark
(iv) कथन सही है, पर कारण गलत है, क्योंकि मोह-माया में लिप्त प्राणी इस सत्य को नहीं जानता। इसलिए कारण कथन की गलत व्याख्या करता है। उत्तर (C)।
- 1 mark
(v) राम-वियोगी जीवित नहीं रहता, और यदि रहे तो पागलों जैसा हो जाता है। उत्तर (D)।
Answer: (i) A; (ii) D; (iii) D; (iv) C; (v) D
Where the marks are
- (i) A (1 अंक)
- (ii) D (1 अंक)
- (iii) D (1 अंक)
- (iv) C (1 अंक)
- (v) D (1 अंक)
2025 Course A, set 3/6/1, Q1 · 7 marks · Case-basedCompetency-based
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
शिक्षकों को अपने यहाँ बहुत से विशेषणों से संबोधित किया जाता रहा है। शिक्षक को राष्ट्र-निर्माता कहा जाता है। युवा पीढ़ी का सुधारक, मशाल-वाहक और पथ-प्रदर्शक भी कहा जाता है। शिक्षक शिक्षा के साथ-साथ अपने शिष्यों को जीवन-कौशल और नैतिक मूल्यों का भी ज्ञान प्रदान करते हैं। मानव जाति के लिए नई सोच और दृष्टिकोण की अपेक्षा भी शिक्षकों से ही की जाती है। शिक्षकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका समाज को सशक्त और समृद्ध बनाने में भी है।
हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राचीन ग्रंथों में जगह-जगह एक आदर्श गुरु के गुणों को वर्णित किया गया है। स्कंद पुराण के गुरु-स्तोत्रम् में तो गुरुओं की तुलना ब्रह्मा, विष्णु और महेश से की गई है तथा गुरु को साक्षात् परब्रह्म माना गया है। एक अच्छे गुरु में गहन ज्ञान, विद्वत्ता, करुणा, नैतिकता व चरित्र, नवीनता, नवाचार, अनुशासनप्रियता और समानता का भाव अपेक्षित है। यही गुण एक गुरु को महान बनाते हैं और शिष्यों के जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। अपनी सदी के महान कवि और संत कबीरदास जी ने भी कहा है – 'गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट' – अर्थात् गुरु कुम्हार है और शिष्य घड़ा है जो गढ़-गढ़ कर शिष्य की कमियों को दूर करता है। शिक्षक अपने सफल मार्गदर्शन द्वारा शिष्यों को उनकी शक्तियों से परिचित कराते हुए उनके विकास के मार्ग को प्रशस्त करते हैं। शिक्षक समाज के भविष्य निर्माताओं को तैयार करने में एक अहम भूमिका निभाते हैं।
- (क)1 mark
शिक्षक शिक्षा के साथ-साथ शिष्यों को प्रदान करता है –
- (A)नैतिक मूल्यों का ज्ञान
- (B)धन-अर्जित करने का ज्ञान
- (C)पेशेवर विकास का ज्ञान
- (D)भविष्य सुनिश्चित करने का ज्ञान
- (ख)1 mark
गुरु को ब्रह्मा क्यों कहा गया है ?
- (A)छात्रों के हित गुरु के भीतर छिपी कल्याण-भावना के कारण
- (B)समाज के भविष्य निर्माताओं को तैयार करने की भूमिका के कारण
- (C)छात्रों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने के कारण
- (D)रोजगार हेतु विद्यार्थियों में कौशल विकसित करने के कारण
- (ग)1 mark
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कीजिए :
कथन : मानव जाति के लिए नई सोच और दृष्टिकोण विकसित करना शिक्षक का दायित्व है।
कारण : हमारी ज्ञान परंपरा और ग्रंथों में गुरु को महान बताया गया है।- (A)कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
- (B)कारण सही है लेकिन कथन गलत है।
- (C)कथन सही है लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
- (D)कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
- (घ)2 marks
शिक्षक को पथ-प्रदर्शक क्यों कहा जाता है ? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।
- (ङ)2 marks
कबीरदास जी ने गुरु की तुलना कुम्हार से क्यों की है ? किन्हीं दो कारणों को स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(क) गद्यांश के अनुसार शिक्षक शिक्षा के साथ जीवन-कौशल और नैतिक मूल्यों का ज्ञान देते हैं। उत्तर: (A) नैतिक मूल्यों का ज्ञान।
- 1 mark
(ख) ब्रह्मा सृष्टिकर्ता हैं; उसी प्रकार गुरु समाज के भविष्य-निर्माताओं को तैयार करता है। उत्तर: (B)।
- 1 mark
(ग) कथन सही है, क्योंकि नई सोच की अपेक्षा शिक्षकों से की जाती है। कारण भी सही है, पर वह कथन की व्याख्या नहीं करता। उत्तर: (C)।
- 1 mark
(घ) शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा और शक्तियों को पहचानकर उन्हें विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाता है, इसलिए वह पथ-प्रदर्शक है।
- 1 mark
(घ) वह जीवन-कौशल और नैतिक मूल्यों का ज्ञान देकर सही-गलत की दिशा दिखाता है और जीवन-पथ पर मार्गदर्शन करता है।
- 1 mark
(ङ) जैसे कुम्हार घड़े को गढ़कर उसे आकार देता है, वैसे ही गुरु शिष्य के व्यक्तित्व को आकार देता है।
- 1 mark
(ङ) जैसे कुम्हार घड़े के दोष दूर करता है, वैसे ही गुरु शिष्य की कमियों और बुराइयों को पहचानकर दूर करता है।
Answer: (क) A; (ख) B; (ग) C; (घ) प्रतिभा पहचानकर विकास-मार्ग पर बढ़ाना, जीवन-कौशल व नैतिक मूल्य देना; (ङ) व्यक्तित्व को आकार देना, कमियाँ दूर करना
Where the marks are
- (क) सही विकल्प A (1 अंक)
- (ख) सही विकल्प B (1 अंक)
- (ग) सही विकल्प C (1 अंक)
- (घ) दो उपयुक्त बिंदु (1+1=2 अंक)
- (ङ) दो उपयुक्त कारण (1+1=2 अंक)
Every कबीर – साखी question, by year
Course B (18 questions, sample papers included)
Practice questions on कबीर – साखी
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerBoard level
'साखी' शब्द का अर्थ बताते हुए लिखिए कि साखी किस छंद में रची जाती है।
Hint
पाठ प्रवेश में 'साक्षी' और मात्राओं की बात याद कीजिए।
Answer
मूल्य बिंदु: 'साक्षी' का तद्भव रूप; अर्थ प्रत्यक्ष ज्ञान; दोहा छंद, 13 और 11 पर विश्राम, कुल 24 मात्राएँ।
आदर्श उत्तर: 'साखी' शब्द 'साक्षी' का तद्भव रूप है, जिसका अर्थ है प्रत्यक्ष ज्ञान। साखी वस्तुतः दोहा छंद है, जिसमें 13 और 11 मात्राओं पर विश्राम से कुल 24 मात्राएँ होती हैं।
Q2 · 1 mark · MCQBoard level
कबीर की भाषा को 'पचमेल खिचड़ी' क्यों कहा जाता है?
(क) उसमें केवल संस्कृत के शब्द हैं
(ख) उसमें अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी आदि भाषाओं के शब्द मिले हैं
(ग) कबीर ने भोजन पर कविताएँ लिखीं
(घ) वह केवल ब्रजभाषा हैHint
कबीर जगह-जगह भ्रमण करते थे; इसका असर भाषा पर क्या पड़ा?
Answer
(ख) उसमें अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी आदि भाषाओं के शब्द मिले हैं
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
'जागै अरू रोवै' — कबीर का जागना और रोना संसार के लोगों की दशा से किस प्रकार भिन्न है?
Hint
जागना और सोना यहाँ प्रतीक हैं; रोने का कारण सांसारिक नहीं है।
Answer
मूल्य बिंदु: जागना = आध्यात्मिक चेतना; रोना = ईश्वर से बिछुड़ने की पीड़ा; संसार खाने-सोने में ही सुखी (अज्ञान)।
आदर्श उत्तर: कबीर का जागना आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। वे सांसारिक हानि के लिए नहीं, ईश्वर से बिछुड़ने की पीड़ा में रोते हैं, जबकि संसार खाने-सोने में ही सुखी है।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
अंतिम साखी में कबीर अपने साथ चलने वालों से किस बात की अपेक्षा करते हैं?
Hint
'घर' और 'मुराड़ा' का प्रतीकात्मक अर्थ सोचिए।
Answer
मूल्य बिंदु: मुराड़ा (जलती लकड़ी) = ज्ञान (प्रतीकात्मक अर्थ); घर = मोह-माया; साथ चलने वालों से भी वैसा ही त्याग।
आदर्श उत्तर: कबीर ने ज्ञान की जलती लकड़ी से अपना मोह-माया रूपी घर जला दिया है। वे अपने साथ चलने वालों से भी आसक्ति का ऐसा ही त्याग चाहते हैं।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level
साखियों में प्रयुक्त 'बाँणी', 'साबण', 'पाँणीं' जैसे शब्द कबीर की भाषा के विषय में क्या बताते हैं?
Hint
ये शब्द किताबी हैं या बोलचाल के? भाषा के दो नाम याद कीजिए।
Answer
मूल्य बिंदु: जनसाधारण की बोलचाल के शब्द; भ्रमण से कई बोलियों का मेल; सधुक्कड़ी या पचमेल खिचड़ी।
आदर्श उत्तर: 'बाँणी', 'साबण', 'पाँणीं' जनसाधारण की बोलचाल के शब्द हैं। कबीर घूम-घूमकर ज्ञान पाते थे, इसलिए उनकी भाषा में कई बोलियों का मेल है; इसे सधुक्कड़ी या पचमेल खिचड़ी कहते हैं।
Q6 · 2 marks · Short answerHarder board level
'बिरह भुवंगम तन बसै' और 'पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा' में प्रयुक्त अलंकार पहचानकर उनका सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
Hint
एक में उपमेय पर उपमान का आरोप है, दूसरे में शब्द दोहराया गया है।
Answer
मूल्य बिंदु: 'बिरह भुवंगम' में रूपक, पीड़ा की तीव्रता; 'पढ़ि पढ़ि' में पुनरुक्ति प्रकाश, लगातार पढ़ने पर बल।
आदर्श उत्तर: 'बिरह भुवंगम' में रूपक है; विरह को साँप माना गया है, जिससे पीड़ा तीव्र लगती है। 'पढ़ि पढ़ि' में पुनरुक्ति प्रकाश है, जो लगातार पढ़ने पर बल देता है।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए क्रिकेट मैच हारने के बाद आपकी टीम का कप्तान साथियों पर चिल्लाने लगता है। पहली साखी के आधार पर आप उसे कैसे समझाएँगे?
Hint
अहंकार छोड़कर बोली गई वाणी किस-किसको लाभ देती है?
Answer
मूल्य बिंदु: अहंकार छोड़कर बोलना; अपना मन शीतल, दूसरों को सुख; कड़वे शब्द टीम का मनोबल तोड़ते हैं।
आदर्श उत्तर: कबीर अहंकार छोड़कर ऐसी वाणी बोलने को कहते हैं जो स्वयं को शीतल करे और दूसरों को सुख दे। कड़वे शब्द टीम का मनोबल तोड़ते हैं; मीठे शब्द जोड़ते हैं।
Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
यदि ईश्वर 'घटि घटि' में बसता है, तो इस विचार का दूसरों के प्रति हमारे व्यवहार पर क्या प्रभाव पड़ना चाहिए?
Hint
हर किसी के भीतर ईश्वर हो, तो भेदभाव का क्या अर्थ रह जाता है?
Answer
मूल्य बिंदु: सबके भीतर ईश्वर; घृणा और भेदभाव अनुचित; सबका आदर; ईश्वर को भीतर खोजना।
आदर्श उत्तर: यदि सबके भीतर ईश्वर है, तो किसी से घृणा या भेदभाव करना ईश्वर का अपमान है। हमें सबका आदर करना चाहिए और ईश्वर को बाहर नहीं, अपने भीतर खोजना चाहिए।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.कबीर के गुरु कौन थे?Show answer
गुरु रामानंद।
2.कबीर ने जीवन के अंतिम वर्ष कहाँ बिताए?Show answer
मगहर में।
3.'साखी' किस शब्द का तद्भव रूप है और उसका अर्थ क्या है?Show answer
'साक्षी' का; अर्थ है प्रत्यक्ष ज्ञान।
4.'कस्तूरी कुंडलि बसै' में 'कुंडलि' का अर्थ क्या है?Show answer
नाभि।
5.कबीर ने किसे 'भुवंगम' (साँप) कहा है?Show answer
ईश्वर के विरह को; उस पर कोई मंत्र असर नहीं करता।
6.कबीर निंदक को कहाँ रखने की सलाह देते हैं?Show answer
निकट, आँगन में कुटी बनाकर।
7.कबीर के अनुसार पंडित कौन है?Show answer
जो प्रिय (ईश्वर) के प्रेम का एक अक्षर पढ़ ले।
8.'मुराड़ा' का अर्थ और प्रतीक क्या है?Show answer
जलती हुई लकड़ी; प्रतीक रूप में ज्ञान, जिससे मोह-माया का घर जलाया।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- पहली साखी: कैसी वाणी बोलें, और उसके दो लाभ क्या हैं?
- कस्तूरी-मृग और 'घटि घटि राँम' का संबंध दो वाक्यों में बता सकते हैं?
- 'मैं', 'हरि', 'दीपक' और 'अँधियारा' — चारों के प्रतीकार्थ बिना देखे लिखिए।
- संसार 'सुखिया' और कबीर 'दुखिया' क्यों? 'सोना-जागना' किसके प्रतीक हैं?
- 'बिरह भुवंगम' में कौन-सा अलंकार है और 'बौरा' का अर्थ क्या है?
- निंदक स्वभाव को कैसे निर्मल करता है — साबुन-पानी वाली बात याद है?
- 'पोथी पढ़ि पढ़ि' और 'ऐकै अषिर पीव का' से कबीर का ज्ञान-संबंधी मत क्या है?
- कबीर की भाषा के दो नाम और उसमें मिली चार भाषाएँ बता सकते हैं?
कबीर – साखी: frequently asked questions
'साखी' शब्द का अर्थ क्या है?
'साखी' शब्द 'साक्षी' का तद्भव रूप है। साक्षी शब्द साक्ष्य से बना है, जिसका अर्थ है प्रत्यक्ष ज्ञान। यह ज्ञान गुरु शिष्य को देता है। साखी वास्तव में दोहा छंद ही है।
कबीर की भाषा को 'पचमेल खिचड़ी' और 'सधुक्कड़ी' क्यों कहा जाता है?
कबीर जगह-जगह घूमकर प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करते थे। इसलिए उनकी साखियों में अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी भाषाओं के शब्दों का प्रभाव दिखता है। कई भाषाओं के इस मेल के कारण इसे 'पचमेल खिचड़ी' और सधुक्कड़ी कहा जाता है।
कबीर ने संसार को सुखी और स्वयं को दुखी क्यों कहा है?
संसार के लोग खाने और सोने में मग्न हैं और इसी को सुख मानते हैं; 'सोना' यहाँ अज्ञान का प्रतीक है। कबीर जागते हैं, यानी ज्ञानी हैं, और ईश्वर से दूरी के कारण रोते हैं। इसलिए वे स्वयं को 'दुखिया' कहते हैं।
'जब मैं था तब हरि नहीं' पंक्ति में 'मैं' और 'दीपक' का क्या अर्थ है?
यहाँ 'मैं' अहंकार का प्रतीक है और 'दीपक' ज्ञान का। जब तक मन में अहंकार था, ईश्वर नहीं मिले। भीतर ज्ञान का दीपक दिखते ही अज्ञान का अँधेरा मिट गया और ईश्वर का अनुभव हुआ।
कबीर निंदक को पास रखने की सलाह क्यों देते हैं?
निंदक हमारी कमियाँ बार-बार बताता है, जिससे हम उन्हें सुधार सकते हैं। कबीर कहते हैं कि वह बिना साबुन और पानी के हमारा स्वभाव निर्मल कर देता है। इसलिए उसे आँगन में कुटिया बनाकर पास रखना चाहिए।
इस पाठ से बोर्ड परीक्षा में किस तरह के प्रश्न आते हैं?
पठित काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न आ सकते हैं, जिनमें कथन-कारण प्रश्न भी होता है। इसके अलावा 25-30 शब्दों वाले 2 अंक के प्रश्न आते हैं, जिनमें भाव, प्रतीक, तुलना या आपकी राय पूछी जाती है। शब्दार्थ और हर साखी का भाव तैयार रखें।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-ब (085), कक्षा 10, 2026-27; NCERT स्पर्श भाग 2 (Reprint 2026-27), साखी