पतझर में टूटी पत्तियाँ Class 10: सारांश, विषय और प्रश्न-उत्तर
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'पतझर में टूटी पत्तियाँ' रवींद्र केलेकर की रचना है (स्पर्श भाग 2)। इसके दो प्रसंग हैं। 'गिन्नी का सोना' आदर्श और व्यावहारिकता का अंतर समझाता है। 'झेन की देन' टी-सेरेमनी के माध्यम से वर्तमान में जीने का संदेश देता है। बोर्ड इससे गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के प्रश्न पूछता है।
What रवींद्र केलेकर – पतझर में टूटी पत्तियाँ is about
'पतझर में टूटी पत्तियाँ' स्पर्श भाग 2 के गद्य खंड का पाठ है। इसके लेखक रवींद्र केलेकर हैं, जो कोंकणी और मराठी के शीर्षस्थ लेखक और पत्रकार थे और गांधीवादी चिंतक के रूप में विख्यात हैं। पाठ में दो छोटे प्रसंग हैं: (I) गिन्नी का सोना और (II) झेन की देन। ये प्रसंग थोड़े शब्दों में बहुत बड़ी बात कहते हैं। पहला प्रसंग आदर्श और व्यावहारिकता की तुलना करता है, दूसरा तेज़ रफ़्तार जीवन के बीच वर्तमान क्षण में जीने की सीख देता है।
बोर्ड परीक्षा में यह पाठ खंड ग (गद्य खंड) में आता है। प्रश्न 9 में किसी पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) पूछे जा सकते हैं, जिनमें कथन-कारण प्रश्न भी होता है। प्रश्न 10 में 25-30 शब्दों वाले प्रश्न (2 अंक) आते हैं, जिनमें 4 में से 3 करने होते हैं। इनमें बोध, आशय और 'क्या आप लेखक से सहमत हैं' जैसे विचार वाले प्रश्न पूछे जाते हैं।
In real board papers: Course A, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026); Course B, asked in 1 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 0.3 marks per paper. See the questions
रवींद्र केलेकर – पतझर में टूटी पत्तियाँ: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
(I) गिन्नी का सोना
लेखक बताते हैं कि शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग-अलग होते हैं। गिन्नी के सोने में थोड़ा ताँबा मिला होता है। इससे वह ज़्यादा चमकता है और मज़बूत भी होता है, इसलिए औरतें इसी के गहने बनवाती हैं।
लेखक कहते हैं कि शुद्ध आदर्श शुद्ध सोने जैसे होते हैं। कुछ लोग उनमें व्यावहारिकता का थोड़ा ताँबा मिलाकर उन्हें चला देते हैं। ऐसे लोगों को 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' कहा जाता है। पर असल में प्रशंसा आदर्शों की नहीं, व्यावहारिकता की होती है। धीरे-धीरे उनके जीवन से आदर्श पीछे हट जाते हैं और केवल व्यावहारिक सूझबूझ आगे रह जाती है।
कुछ लोग गांधीजी को भी 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' कहते हैं। लेखक मानते हैं कि गांधीजी व्यावहारिकता की कीमत जानते थे, पर वे आदर्शों को नीचे नहीं उतरने देते थे। वे व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर तक ऊपर उठाते थे, यानी ताँबे में सोना मिलाते थे। इसलिए उनके जीवन में सोना ही आगे रहा।
अंत में लेखक कहते हैं कि व्यवहारवादी लोग लाभ-हानि देखकर चलते हैं और सफल भी होते हैं, पर वे दूसरों को साथ लेकर ऊपर नहीं चढ़ते। समाज के पास जो शाश्वत मूल्य हैं, वे आदर्शवादी लोगों की देन हैं।
(II) झेन की देन
जापान में लेखक के एक मित्र बताते हैं कि वहाँ के अस्सी फ़ीसदी लोग मनोरुग्ण हैं। कारण है जीवन की बढ़ी हुई रफ़्तार, अमेरिका से होड़ और एक महीने का काम एक दिन में करने की कोशिश। इससे दिमाग पर तनाव बढ़ता है।
शाम को मित्र लेखक को 'टी-सेरेमनी' (चा-नो-यू) में ले जाते हैं। छः मंज़िली इमारत की छत पर एक सुंदर पर्णकुटी थी। बाहर रखे मिट्टी के बरतन के पानी से उन्होंने हाथ-पाँव धोए। अंदर चाजीन ने झुककर प्रणाम किया, स्वागत किया, अँगीठी सुलगाई, चायदानी रखी और बरतन साफ़ किए। उसकी हर क्रिया बहुत गरिमापूर्ण थी। वातावरण इतना शांत था कि पानी का खदबदाना भी सुनाई देता था।
शांति के कारण वहाँ तीन से अधिक लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाता। प्याले में दो घूँट चाय थी, जिसे वे लगभग डेढ़ घंटे तक बूँद-बूँद पीते रहे। पहले लेखक उलझन में पड़े, फिर उनके दिमाग की रफ़्तार धीमी होकर बंद-सी हो गई। उन्हें सन्नाटा भी सुनाई देने लगा। लेखक ने समझा कि भूत और भविष्य दोनों मिथ्या हैं, केवल वर्तमान क्षण सत्य है। उस दिन उन्हें पता चला कि जीना किसे कहते हैं।
Themes and message
आदर्श और व्यावहारिकता का संबंध
लेखक सोने और ताँबे के उदाहरण से आदर्श और व्यावहारिकता का अंतर समझाते हैं। शुद्ध आदर्श शुद्ध सोने जैसे कीमती हैं, पर उन्हें जीवन में चलाने के लिए थोड़ी व्यावहारिकता चाहिए। खतरा तब होता है जब व्यावहारिकता की प्रशंसा होने लगती है और आदर्श धीरे-धीरे पीछे छूट जाते हैं। लेखक व्यावहारिकता को बुरा नहीं कहते, पर चाहते हैं कि वह आदर्शों की सेवक बने, उनकी मालिक नहीं। इससे पता चलता है कि सही रास्ता वह है जिसमें आदर्श सबसे ऊपर रहें।
From the text: "सोना पीछे रहकर ताँबा ही आगे आता है।" - प्रैक्टिकल आइडियालिस्टों के बारे में लेखक की चेतावनी।
गांधीजी का आदर्शवादी नेतृत्व
लेखक गांधीजी को एक अलग तरह का उदाहरण मानते हैं। गांधीजी व्यावहारिकता की कीमत जानते थे, इसीलिए उनके विलक्षण आदर्श हवा में नहीं उड़ते रहे और देश उनके पीछे चला। पर उन्होंने कभी आदर्शों को नीचे नहीं गिरने दिया, बल्कि व्यवहार को ऊपर उठाया। इसका अर्थ यह है कि सच्चा नेता परिस्थिति को समझता है, पर अपने मूल्यों से समझौता नहीं करता। यही कारण है कि उनके जीवन में 'सोना' हमेशा आगे रहा।
From the text: "वे सोने में ताँबा नहीं बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे।"
शाश्वत मूल्य और समाज का उत्थान
लेखक व्यवहारवादी और आदर्शवादी लोगों की तुलना करते हैं। व्यवहारवादी लाभ-हानि का हिसाब लगाकर चलते हैं, सफल होते हैं और दूसरों से आगे निकल जाते हैं, पर वे ऊपर नहीं चढ़ते। लेखक के अनुसार असली महत्त्व की बात है खुद ऊपर चढ़ना और दूसरों को भी साथ ऊपर ले जाना। यह काम आदर्शवादी लोग करते हैं। समाज के पास जो भी शाश्वत मूल्य हैं, वे उन्हीं की देन हैं। पाठ प्रवेश भी कहता है कि यह प्रसंग उन लोगों से परिचित कराता है जो संसार को जीने योग्य बनाए हुए हैं।
From the text: "व्यवहारवादी लोगों ने तो समाज को गिराया ही है।" - प्रसंग का अंतिम निष्कर्ष।
तेज़ रफ़्तार जीवन और मानसिक तनाव
'झेन की देन' में लेखक के जापानी मित्र बताते हैं कि होड़ और जल्दबाज़ी ने लोगों के मन को बीमार कर दिया है। लोग एक महीने का काम एक दिन में करना चाहते हैं। दिमाग पहले से तेज़ चलता है, उस पर 'स्पीड' का इंजन लग जाए तो तनाव बढ़ता है और इंजन टूट जाता है। यह चित्र केवल जापान का नहीं, आज के हर व्यस्त समाज का लगता है। इससे पता चलता है कि सफलता की अंधी दौड़ मनुष्य की शांति छीन लेती है।
From the text: मित्र का कथन: "यहाँ कोई चलता नहीं, बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है।" और अस्सी फ़ीसदी लोगों के मनोरुग्ण होने की बात।
वर्तमान क्षण में जीना (झेन की देन)
टी-सेरेमनी की शांति में लेखक का मन धीरे-धीरे थम जाता है। उन्हें समझ आता है कि हम या तो बीती यादों में उलझे रहते हैं या भविष्य के सपने देखते हैं। भूतकाल जा चुका है और भविष्यकाल आया नहीं, इसलिए दोनों मिथ्या हैं। केवल वर्तमान क्षण सत्य है। जब मन वर्तमान में टिकता है तो वह क्षण अनंतकाल जितना विस्तृत लगता है। लेखक इसे झेन परंपरा की बड़ी देन मानते हैं, जिससे जापानी लोग व्यस्त दिनचर्या में भी चैन के पल पा लेते हैं।
From the text: "हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है, वही सत्य है। उसी में जीना चाहिए।"
Characters
लेखक (रवींद्र केलेकर)
दोनों प्रसंगों के वक्ता। पहले में चिंतक के रूप में विचार रखते हैं, दूसरे में जापान यात्रा का अपना अनुभव सुनाते हैं।
- गहरे चिंतक: सोने-ताँबे के छोटे उदाहरण से आदर्श और व्यावहारिकता का बड़ा अंतर समझाते हैं।
- आदर्शों के समर्थक: मानते हैं कि शाश्वत मूल्य आदर्शवादी लोगों की देन हैं।
- जिज्ञासु: जापान में मित्र से पूछते हैं कि वहाँ कौन-सी बीमारियाँ अधिक होती हैं और क्यों।
- ईमानदार और आत्म-निरीक्षक: मानते हैं कि टी-सेरेमनी के पहले दस-पंद्रह मिनट वे उलझन में पड़े।
- नए अनुभव से सीखने वाले: चाय पीते हुए उन्हें पता चलता है कि 'जीना किसे कहते हैं'।
गिन्नी का सोना में गांधीजी और व्यवहारवादी लोगों का विश्लेषण; झेन की देन में मित्र से प्रश्न और टी-सेरेमनी के बाद मन के बदलाव का वर्णन।
लेखक का जापानी मित्र
लेखक को जापान के मानसिक रोगों का कारण बताते हैं और उन्हें टी-सेरेमनी में ले जाते हैं।
- स्पष्टवादी: अपने ही देश की समस्या खुलकर बताते हैं कि अस्सी फ़ीसदी लोग मनोरुग्ण हैं।
- सजग विश्लेषक: कारण गिनाते हैं, जैसे रफ़्तार, अमेरिका से प्रतिस्पर्धा, काम की जल्दबाज़ी।
- अपनी परंपरा के जानकार: तनाव के बीच शांति पाने के लिए लेखक को चा-नो-यू में ले जाते हैं।
"यहाँ कोई चलता नहीं, बल्कि दौड़ता है।" जैसे कथन और शाम को लेखक को 'टी-सेरेमनी' में ले जाना।
चाजीन
जापानी विधि से चाय पिलाने वाला व्यक्ति, जो टी-सेरेमनी संपन्न कराता है।
- विनम्र: अतिथियों को देखकर खड़ा होता है और कमर झुकाकर प्रणाम करता है।
- आतिथ्य-भावना वाला: 'दो...झो...' कहकर स्वागत करता है और बैठने की जगह दिखाता है।
- सलीकेदार और धैर्यवान: अँगीठी सुलगाने, चायदानी रखने, बरतन लाने और पोंछने का हर काम गरिमा से करता है।
- शांत स्वभाव का: उसकी हर भंगिमा से लेखक को लगता है मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों।
पाठ में चाजीन की क्रियाओं का क्रमवार वर्णन और यह कथन कि उसने "सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं"।
गांधीजी (जिनकी चर्चा है)
गिन्नी का सोना में लेखक उन्हें आदर्श और व्यवहार के सही मेल के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
- व्यावहारिक समझ वाले: व्यावहारिकता को पहचानते थे और उसकी कीमत जानते थे।
- आदर्शों पर अडिग: आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर उतरने नहीं देते थे।
- प्रभावशाली नेता: उनके विलक्षण आदर्शों के पीछे देश चला।
- व्यवहार को ऊँचा उठाने वाले: ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे।
"इसीलिए वे अपने विलक्षण आदर्श चला सके।" और "इसलिए सोना ही हमेशा आगे आता रहता था।"
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| प्रतीक और रूपक (सोना-ताँबा) | शुद्ध सोना = शुद्ध आदर्श, ताँबा = व्यावहारिकता, गिन्नी का सोना = प्रैक्टिकल आइडियालिज़्म; "सोना पीछे रहकर ताँबा ही आगे आता है।" | कठिन दार्शनिक बात रोज़ की चीज़ (गहने के सोने) से जुड़ जाती है, इसलिए पाठक उसे तुरंत समझ लेता है और याद रखता है। |
| सूक्ति शैली (थोड़े में बहुत कहना) | "जीना किसे कहते हैं, उस दिन मालूम हुआ।" और "व्यवहारवादी लोगों ने तो समाज को गिराया ही है।" | छोटे, कसे हुए वाक्य सूक्ति जैसे लगते हैं। पाठ प्रवेश के अनुसार ये प्रसंग 'थोड़ा कहा बहुत समझना' की माँग करते हैं। |
| संवाद और आत्मकथात्मक वर्णन | झेन की देन का आरंभ लेखक और मित्र के प्रश्न-उत्तर से होता है: "इसकी क्या वजह है?" | संवाद से प्रसंग जीवंत बनता है और समस्या (मानसिक रोग) सीधे एक जापानी की ज़बान से सामने आती है, जिससे बात विश्वसनीय लगती है। |
| उत्प्रेक्षा और विरोधाभास | "मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों" (उत्प्रेक्षा); "यहाँ तक कि सन्नाटा भी मुझे सुनाई देने लगा।" (विरोधाभास) | चाजीन की गरिमा संगीत जैसी लगती है, और 'सन्नाटा सुनाई देना' गहरी शांति की चरम अवस्था को प्रभावी ढंग से दिखाता है। |
| विरोध (तुलना) द्वारा अर्थ | चलता नहीं-दौड़ता है, बोलता नहीं-बकता है; सोने में ताँबा नहीं-ताँबे में सोना; आगे जाना बनाम ऊपर चढ़ना। | जोड़ियों के विरोध से अंतर तीखा होकर उभरता है और लेखक का पक्ष साफ़ दिखता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
शुद्ध सोना अलग है और गिन्नी का सोना अलग।
कथावाचक (लेखक): गिन्नी का सोना प्रसंग की पहली पंक्ति, जहाँ लेखक दोनों सोनों का अंतर बताते हैं।
यही अंतर पूरे प्रसंग का आधार है: शुद्ध आदर्श और व्यावहारिकता मिले आदर्श अलग-अलग चीज़ें हैं।
सोना पीछे रहकर ताँबा ही आगे आता है।
कथावाचक (लेखक): प्रैक्टिकल आइडियालिस्टों के जीवन में व्यावहारिकता की प्रशंसा होने के परिणाम पर।
चेतावनी है कि व्यावहारिकता हावी होने पर आदर्श धीरे-धीरे खो जाते हैं।
वे सोने में ताँबा नहीं बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे।
कथावाचक (लेखक): गांधीजी के आदर्श और व्यवहार के बारे में लेखक का मत।
गांधीजी की विशेषता बताता है: वे व्यवहार को आदर्श के स्तर तक उठाते थे, आदर्श को नीचे नहीं गिराते थे।
व्यवहारवादी लोगों ने तो समाज को गिराया ही है।
कथावाचक (लेखक): गिन्नी का सोना का अंतिम वाक्य, व्यवहारवादी और आदर्शवादी लोगों की तुलना के बाद।
लेखक का स्पष्ट निष्कर्ष कि समाज का उत्थान और शाश्वत मूल्य आदर्शवादियों की देन हैं।
यहाँ कोई चलता नहीं, बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है।
लेखक का जापानी मित्र: जापान में मानसिक रोग बढ़ने का कारण बताते हुए।
तेज़ रफ़्तार, अशांत जीवन का सजीव चित्र; मानसिक तनाव की जड़ यही जल्दबाज़ी है।
यहाँ तक कि सन्नाटा भी मुझे सुनाई देने लगा।
कथावाचक (लेखक): टी-सेरेमनी में चाय पीते हुए जब लेखक के दिमाग की रफ़्तार थम गई।
मन की पूर्ण शांति की अवस्था दिखाता है; विरोधाभास का सुंदर उदाहरण।
हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है, वही सत्य है। उसी में जीना चाहिए।
कथावाचक (लेखक): भूत और भविष्य को मिथ्या बताने के बाद लेखक का निष्कर्ष।
झेन की देन का केंद्रीय संदेश: वर्तमान में जीना ही सच्चा जीना है।
जीना किसे कहते हैं, उस दिन मालूम हुआ।
कथावाचक (लेखक): टी-सेरेमनी के अनुभव के अंत में।
दिखाता है कि यह अनुभव लेखक के लिए जीवन को नए ढंग से समझने वाला था।
रवींद्र केलेकर – पतझर में टूटी पत्तियाँ in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
आदर्श और व्यावहारिकता (गिन्नी का सोना)
मान लीजिए स्कूल के क्रिकेट फ़ाइनल में आपकी टीम का एक खिलाड़ी कैच पकड़ता है, पर गेंद पहले ज़मीन छू चुकी थी। अंपायर ने यह नहीं देखा और बल्लेबाज़ को आउट दे दिया। टीम के कई साथी कहते हैं कि चुप रहो, मैच जीतना ज़रूरी है।
‘गिन्नी का सोना’ में गांधीजी के ‘ताँबे में सोना मिलाने’ वाले विचार के आधार पर बताइए कि कप्तान को क्या करना चाहिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- सच बताना = आदर्श (सोना) को बनाए रखना।
- टीम को समझाकर साथ लेना = व्यावहारिक सूझबूझ।
- आदर्श को व्यवहार के स्तर पर न गिराना, बल्कि व्यवहार को आदर्श तक उठाना — गांधीजी की तरह।
Answer: कप्तान को सच बताना चाहिए, यही सोना है। साथ ही वह टीम को प्यार से समझाए कि ईमानदार जीत ही सम्मान देती है। यह व्यवहार को आदर्श तक उठाना होगा।
Memory hook: जीत का ताँबा चमकता है, पर ईमानदारी का सोना ही कीमत बढ़ाता है।
आगे जाना बनाम ऊपर चढ़ना (शाश्वत मूल्य)
कल्पना कीजिए आपकी कक्षा में दो मेधावी विद्यार्थी हैं। एक अपने नोट्स किसी को नहीं दिखाता ताकि वही सबसे आगे रहे। दूसरा खुद भी अच्छे अंक लाता है और कमज़ोर साथियों को रोज़ आधा घंटा पढ़ाता भी है।
लेखक के ‘आगे जाने’ और ‘ऊपर चढ़ने’ के अंतर के आधार पर दोनों विद्यार्थियों की तुलना कीजिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पहला विद्यार्थी लाभ-हानि देखकर चलता है — व्यवहारवादी की तरह आगे जाता है।
- दूसरा खुद चढ़ता है और दूसरों को भी साथ ऊपर ले जाता है।
- लेखक के अनुसार यही महत्त्व की बात है और यही आदर्शवादियों का काम है।
Answer: पहला विद्यार्थी लाभ-हानि देखकर आगे निकलता है, जैसा व्यवहारवादी करते हैं। दूसरा खुद बढ़ता है और साथियों को भी उठाता है; लेखक के अनुसार यही सच्चा ऊपर चढ़ना है।
Memory hook: अकेले आगे दौड़ना सफलता है; सबको साथ लेकर चढ़ना महानता है।
तेज़ रफ़्तार जीवन और मानसिक तनाव
मान लीजिए बोर्ड परीक्षा से पहले आपकी दीदी सुबह स्कूल, दोपहर कोचिंग और रात को ट्यूशन जाती है। वह खाना भी जल्दी-जल्दी खाती है और अकेले में खुद से बड़बड़ाती रहती है। पिछले हफ़्ते वह बहुत थकी और चिड़चिड़ी हो गई।
दीदी की स्थिति की तुलना ‘झेन की देन’ में लेखक के जापानी मित्र की बातों से कीजिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- मित्र के अनुसार लोग चलते नहीं, दौड़ते हैं; अकेले में बड़बड़ाते हैं।
- कम समय में बहुत काम करने की होड़ = दिमाग पर ‘स्पीड’ का इंजन।
- परिणाम: तनाव बढ़ना, मन का थक जाना।
Answer: दीदी की हालत जापानी मित्र की बात जैसी है—वह चलती नहीं, दौड़ती है। कम समय में बहुत काम करने की होड़ दिमाग पर तनाव बढ़ाती है, जिससे मन थक जाता है।
Memory hook: दिमाग पर ‘स्पीड’ का इंजन लगाओगे, तो इंजन टूटेगा ही।
वर्तमान क्षण में जीना (झेन की देन)
कल्पना कीजिए दिवाली की शाम पूरा परिवार साथ बैठकर बातें कर रहा है। पर आप कभी कल के टेस्ट की चिंता करते हैं, कभी पिछले हफ़्ते दोस्त से हुई बहस को याद करते रहते हैं। इस कारण उस शाम का आनंद नहीं ले पाते।
‘झेन की देन’ के आधार पर बताइए कि आपको इस स्थिति में क्या करना चाहिए और क्यों। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- कल का टेस्ट = भविष्य, बीती बहस = भूत; लेखक दोनों को मिथ्या कहता है।
- वर्तमान क्षण ही सत्य है, उसी में जीना चाहिए।
- इसलिए परिवार के साथ इसी पल का आनंद लेना।
Answer: मैं बीते और आने वाले दिन की चिंता छोड़कर परिवार के साथ इसी पल का आनंद लूँगा। लेखक के अनुसार वर्तमान क्षण ही सत्य है; उसी में सच्चा जीना है।
Memory hook: कल गया, कल आया नहीं — जो है, वह ‘अभी’ है।
Topics in this chapter
- गिन्नी का सोना का सारांश और भावार्थComing soon
- झेन की देन का सारांश और संदेशComing soon
- पतझर में टूटी पत्तियाँ प्रश्न-उत्तरComing soon
- गांधीजी: प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट की व्याख्याComing soon
- टी-सेरेमनी और चाजीन का वर्णनComing soon
How the board asks रवींद्र केलेकर – पतझर में टूटी पत्तियाँ
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | गिन्नी का सोना या झेन की देन का कोई अंश देकर पाँच MCQ: शब्दार्थ (शाश्वत, मनोरुग्ण, चाजीन), किसी वाक्य का आशय, लेखक का मत, और एक कथन-कारण प्रश्न। | गद्यांश दोबारा पढ़कर उत्तर उसी से खोजें। कथन-कारण में पहले देखें कि दोनों अलग-अलग सही हैं या नहीं, फिर जाँचें कि कारण सचमुच कथन को समझाता है या नहीं। मिलते-जुलते विकल्पों में वह चुनें जो पाठ के शब्दों के सबसे निकट हो। |
| बोध/तथ्य वाले लघु प्रश्न (25-30 शब्द, 2 अंक) | जैसे: टी-सेरेमनी में तीन से अधिक लोगों को प्रवेश क्यों नहीं मिलता, चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ कीं, गिन्नी का सोना शुद्ध सोने से अलग क्यों है। | दो स्पष्ट बिंदु लिखें: 'क्या' और 'क्यों'। पाठ का तथ्य (जैसे शांति मुख्य बात है) और उसका कारण दोनों आने चाहिए। 30 शब्द से आगे न जाएँ। |
| आशय/भाव स्पष्ट करने वाले प्रश्न | किसी पंक्ति का आशय पूछना, जैसे 'सोना पीछे रहकर ताँबा ही आगे आता है' या 'कोई बोलता नहीं, बकता है' से लेखक क्या कहना चाहते हैं। | प्रतीक खोलें (सोना = आदर्श, ताँबा = व्यावहारिकता), फिर बताएँ कि इससे जीवन या समाज के बारे में क्या संदेश मिलता है। केवल शब्दों को दोहराएँ नहीं। |
| सहमति-असहमति/मूल्यांकन वाले प्रश्न | जैसे: 'सत्य केवल वर्तमान है' या 'व्यवहारवादी लोगों ने समाज को गिराया है', क्या आप लेखक से सहमत हैं? तर्क दीजिए। | पहले अपना पक्ष एक वाक्य में लिखें, फिर पाठ से एक तर्क और अपने अनुभव से एक तर्क दें। दोनों पक्ष संतुलित रूप से मान सकते हैं, पर निष्कर्ष साफ़ हो। उत्तर उतने ही शब्दों में रखें जितने प्रश्न में माँगे गए हैं। |
| चरित्र और विचार-विश्लेषण (गांधीजी, चाजीन, लेखक) | जैसे: लेखक गांधीजी को साधारण प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट से अलग क्यों मानते हैं? या चाजीन के व्यवहार से कौन-से गुण झलकते हैं? | गुण का नाम लें और पाठ की घटना से उसे सिद्ध करें, जैसे गांधीजी ने 'ताँबे में सोना' मिलाया, चाजीन ने झुककर प्रणाम किया। |
| नई स्थिति में प्रयोग (HOTS) | किसी आज की स्थिति (परीक्षा का तनाव, मोबाइल में उलझा मन, कक्षा का चुनाव) पर पाठ का संदेश लागू करने को कहना। | स्थिति को पाठ के विचार से जोड़ें: तनाव हो तो झेन की देन, नैतिक दुविधा हो तो गिन्नी का सोना। पाठ का एक प्रमाण और एक व्यावहारिक सुझाव ज़रूर दें। |
Tricks to remember रवींद्र केलेकर – पतझर में टूटी पत्तियाँ
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
सोना-ताँबा सूत्र
शुद्ध सोना = शुद्ध आदर्श; ताँबा = व्यावहारिकता; गिन्नी का सोना = प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट; गांधीजी = ‘सोने में ताँबा नहीं, ताँबे में सोना’। याद रखें: गांधीजी ने ताँबे की कीमत बढ़ाई, सोने की घटाई नहीं।
Use it when: गिन्नी का सोना के हर प्रतीक-आधारित MCQ और आशय वाले प्रश्न में।
झेन प्रसंग का क्रम: ‘प्रश्न-कारण-कुटी-चाजीन-चाय-चुप्पी-सत्य’
प्रश्न (कौन-सी बीमारी?) → कारण (रफ़्तार, अमेरिका से होड़, स्पीड का इंजन) → कुटी (छः मंज़िली इमारत की छत, हाथ-पाँव धोना) → चाजीन (प्रणाम, ‘दो...झो...’, अँगीठी, बरतन) → चाय (दो घूँट, डेढ़ घंटा) → चुप्पी (उलझन, फिर सन्नाटा सुनाई देना) → सत्य (वर्तमान ही सत्य)।
Use it when: घटनाओं के क्रम, ‘किसके बाद क्या हुआ’ वाले प्रश्न और पूरा प्रसंग समझाने में।
संख्याओं की माला: 80-6-3-2-डेढ़-15
80 फ़ीसदी मनोरुग्ण, 6 मंज़िली इमारत, 3 से अधिक लोग नहीं, 2 घूँट चाय, डेढ़ घंटे चुसकियाँ, पहले 10-15 मिनट उलझन। गिन्नी के लिए: 22 कैरेट (शुद्ध 24 कैरेट)।
Use it when: तथ्य वाले MCQ में जल्दी सही विकल्प चुनने के लिए।
‘आगे’ बनाम ‘ऊपर’
व्यवहारवादी = आगे जाते हैं (सफल, सजग, लाभ-हानि वाले)। आदर्शवादी = ऊपर चढ़ते हैं और दूसरों को साथ ले जाते हैं; शाश्वत मूल्य इन्हीं की देन।
Use it when: व्यवहारवादी और आदर्शवादी की तुलना तथा शाश्वत मूल्य वाले प्रश्नों में।
पात्र पहचान: ‘ले-मि-चा-गां’
लेखक = अनुभव करने वाला (वर्तमान में जीना सीखा); मित्र = कारण बताने वाला (मनोरोग, रफ़्तार) और टी-सेरेमनी में ले जाने वाला; चाजीन = गरिमा से चाय पिलाने वाला; गांधीजी = ताँबे में सोना मिलाने का उदाहरण।
Use it when: ‘किसने कहा/किसने किया’ वाले प्रश्नों में पात्र की गड़बड़ी से बचने के लिए।
रवींद्र केलेकर – पतझर में टूटी पत्तियाँ: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: गिन्नी का सोना: गांधीजी और ताँबे में सोना
हाँ, पर गांधीजी कभी आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर उतरने नहीं देते थे। बल्कि व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर चढ़ाते थे। वे सोने में ताँबा नहीं बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे।
इसलिए सोना ही हमेशा आगे आता रहता था।
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इससे पहले लेखक बताते हैं कि कुछ लोग गांधीजी को अंग्रेज़ी के एक विशेषण से पुकारते हैं, क्योंकि वे व्यावहारिकता को पहचानते थे और उसकी कीमत जानते थे।) गद्यांश के अनुसार ‘चंद लोग’ गांधीजी को क्या कहते हैं?
(क) शुद्ध आदर्शवादी
(ख) प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट
(ग) केवल व्यवहारवादी
(घ) अव्यावहारिक स्वप्नद्रष्टा(2) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: लेखक कहते हैं कि व्यावहारिकता की समझ न होती तो गांधीजी के आदर्श 'हवा में ही उड़ते रहते' और देश उनके पीछे न जाता।) ‘वरना हवा में ही उड़ते रहते’ का आशय क्या है?
(क) गांधीजी हवाई यात्राएँ अधिक करते
(ख) गांधीजी बहुत प्रसिद्ध हो जाते
(ग) उनके आदर्श केवल कल्पना बनकर रह जाते, ज़मीन पर लागू न हो पाते
(घ) देश उन्हें जल्दी भूल जाता(3) · 1 mark · Assertion-reason
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यान से पढ़िए—
कथन (A): गांधीजी के जीवन में सोना ही हमेशा आगे आता रहता था।
कारण (R): गांधीजी व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर चढ़ाते थे।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।(4) · 1 mark · MCQ
गद्यांश में ‘ताँबा’ किसका प्रतीक है?
(क) शुद्ध आदर्श का
(ख) धन-संपत्ति का
(ग) देश की जनता का
(घ) व्यावहारिकता का(5) · 1 mark · MCQ
‘ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे’ से गांधीजी के नेतृत्व की कौन-सी विशेषता झलकती है?
(क) वे हर निर्णय लाभ-हानि देखकर लेते थे
(ख) वे साधारण व्यवहार को ऊँचे आदर्शों से जोड़कर उसे मूल्यवान बना देते थे
(ग) वे आदर्श छोड़कर पूरी तरह व्यावहारिक बन गए थे
(घ) वे आदर्शों को व्यवहार के स्तर पर उतार देते थे
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- (ख) प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट
- (ग) उनके आदर्श केवल कल्पना बनकर रह जाते, ज़मीन पर लागू न हो पाते
- (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
- (घ) व्यावहारिकता का
- (ख) वे साधारण व्यवहार को ऊँचे आदर्शों से जोड़कर उसे मूल्यवान बना देते थे
Extract 2: झेन की देन: वर्तमान क्षण ही सत्य
चाय पीते-पीते उस दिन मेरे दिमाग से भूत और भविष्य दोनों काल उड़ गए थे। केवल वर्तमान क्षण सामने था। और वह अनंतकाल जितना विस्तृत था।
जीना किसे कहते हैं, उस दिन मालूम हुआ।
झेन परंपरा की यह बड़ी देन मिली है जापानियों को!
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इससे पहले लेखक कहते हैं कि हम या तो भूतकाल में रहते हैं या भविष्यकाल में, पर ये दोनों काल 'मिथ्या' हैं और सामने का वर्तमान क्षण ही सत्य है।) लेखक ने भूतकाल और भविष्यकाल दोनों को ‘मिथ्या’ क्यों कहा है?
(क) क्योंकि दोनों केवल दुख देते हैं
(ख) क्योंकि जापानी लोग ऐसा मानते हैं
(ग) क्योंकि एक बीत चुका है और दूसरा अभी आया नहीं है
(घ) क्योंकि दोनों का कोई महत्त्व नहीं होता(2) · 1 mark · MCQ
लेखक के दिमाग से भूत और भविष्य दोनों काल कब ‘उड़ गए’?
(क) टी-सेरेमनी में चाय पीते-पीते
(ख) मित्र से जापान की बीमारियों पर बात करते हुए
(ग) छः मंज़िली इमारत की छत पर चढ़ते समय
(घ) बाहर रखे बरतन के पानी से हाथ-पाँव धोते समय(3) · 1 mark · MCQ
‘और वह अनंतकाल जितना विस्तृत था।’ — इस वाक्य में ‘वह’ किसके लिए आया है?
(क) चाय के प्याले के लिए
(ख) भूतकाल के लिए
(ग) पर्णकुटी के लिए
(घ) वर्तमान क्षण के लिए(4) · 1 mark · MCQ
गद्यांश के अनुसार ‘झेन परंपरा की देन’ किसे कहा गया है?
(क) कम समय में अधिक काम करने की कला
(ख) मन को शांत करके वर्तमान क्षण में जीने का अनुभव
(ग) अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करने की भावना
(घ) चाय बनाने की नई विधि(5) · 1 mark · MCQ
‘जीना किसे कहते हैं, उस दिन मालूम हुआ।’ — इससे लेखक का कौन-सा भाव प्रकट होता है?
(क) उसे पहली बार जापानी चाय का स्वाद पसंद आया
(ख) उसे लगा कि जीवन बहुत छोटा है
(ग) तनाव से मुक्त होकर वर्तमान में जीना ही सच्चा जीवन है
(घ) बीते दिनों की यादें ही असली जीवन हैं
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- (ग) क्योंकि एक बीत चुका है और दूसरा अभी आया नहीं है
- (क) टी-सेरेमनी में चाय पीते-पीते
- (घ) वर्तमान क्षण के लिए
- (ख) मन को शांत करके वर्तमान क्षण में जीने का अनुभव
- (ग) तनाव से मुक्त होकर वर्तमान में जीना ही सच्चा जीवन है
रवींद्र केलेकर – पतझर में टूटी पत्तियाँ: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: गिन्नी का सोना और उसका प्रतीक · 2 marks · Short answerBoard level
गिन्नी का सोना शुद्ध सोने से किन बातों में भिन्न है? लेखक ने उसे किस बात का प्रतीक बनाया है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- गिन्नी के सोने में थोड़ा ताँबा मिला होता है।
- इसलिए वह शुद्ध सोने से अधिक चमकीला और मज़बूत होता है।
- लेखक उसे ऐसे आदर्श का प्रतीक मानता है जिसमें व्यावहारिकता मिला दी गई हो (प्रैक्टिकल आइडियालिज़्म)।
Answer: गिन्नी के सोने में थोड़ा ताँबा मिला होता है, इसलिए वह शुद्ध सोने से अधिक चमकीला और मज़बूत होता है। लेखक इसे व्यावहारिकता मिले आदर्श का प्रतीक मानता है।
Example 2: ‘सोना पीछे, ताँबा आगे’ का आशय · 2 marks · Short answerHarder board level
‘सोना पीछे रहकर ताँबा ही आगे आता है।’ — पाठ के संदर्भ में इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- सोना = आदर्श, ताँबा = व्यावहारिकता — प्रतीक पहचानना।
- प्रशंसा आदर्शों की नहीं, व्यावहारिकता की होने लगती है।
- धीरे-धीरे आदर्श पीछे छूटते हैं और लाभ-हानि वाली सूझबूझ प्रमुख हो जाती है।
Answer: जब लोग आदर्शों में व्यावहारिकता मिलाकर केवल उसी की प्रशंसा करने लगते हैं, तब आदर्श धीरे-धीरे पीछे छूट जाते हैं और लाभ-हानि वाली सूझबूझ ही प्रमुख हो जाती है।
Example 3: गांधीजी: प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट? · 2 marks · Short answerHarder board level
कुछ लोग गांधीजी को ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ कहते हैं। इस पर लेखक क्या स्पष्टीकरण देता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- गांधीजी व्यावहारिकता को पहचानते थे और उसकी कीमत जानते थे।
- पर वे आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर नहीं उतरने देते थे।
- वे व्यवहार को आदर्शों के स्तर तक उठाते थे — ताँबे में सोना मिलाते थे, इसलिए सोना आगे रहा।
Answer: लेखक मानता है कि गांधीजी व्यावहारिकता की कीमत जानते थे, पर आदर्शों को नीचे नहीं उतरने देते थे। वे व्यवहार को आदर्शों तक उठाते थे, इसलिए सोना ही आगे रहा।
Example 4: दिमाग का ‘स्पीड’ वाला इंजन · 2 marks · Short answerHarder board level
लेखक के जापानी मित्र ने दिमाग की तुलना इंजन से करके मानसिक रोगों के बारे में क्या समझाना चाहा है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- दिमाग की रफ़्तार स्वभाव से ही तेज़ रहती है।
- होड़ की ‘स्पीड’ का इंजन लगने पर वह हज़ार गुना तेज़ दौड़ने लगता है।
- एक क्षण तनाव इतना बढ़ता है कि इंजन टूट जाता है — यही मानसिक रोग बढ़ने का कारण है।
Answer: दिमाग स्वभाव से तेज़ है; होड़ की ‘स्पीड’ जुड़ने पर वह हज़ार गुना दौड़ने लगता है। तब तनाव इतना बढ़ता है कि मन टूट जाता है; इसी से मनोरोग बढ़े।
Example 5: परीक्षा की चिंता और झेन का संदेश · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपका मित्र पिछली परीक्षा के खराब अंकों और आने वाले परिणाम की चिंता में इतना उलझा है कि आज पढ़ ही नहीं पाता। ‘झेन की देन’ का संदेश उसकी कैसे मदद कर सकता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- लेखक के अनुसार भूतकाल बीत चुका है, भविष्य आया नहीं — दोनों मिथ्या हैं।
- केवल वर्तमान क्षण सत्य है, उसी में जीना चाहिए।
- नई स्थिति में प्रयोग: बीते अंक और भावी परिणाम की चिंता छोड़ आज की पढ़ाई पर ध्यान — तनाव घटेगा।
Answer: लेखक के अनुसार भूत चला गया और भविष्य आया नहीं, दोनों मिथ्या हैं। मित्र बीते अंकों और परिणाम की चिंता छोड़ आज की पढ़ाई पर ध्यान दे, तो तनाव घटेगा।
Example 6: व्यवहारवादियों पर लेखक का मत: सहमति-असहमति · 2 marks · Short answerHOTS / competency
‘व्यवहारवादी लोगों ने तो समाज को गिराया ही है।’ क्या आप लेखक की इस बात से पूरी तरह सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- अपना स्पष्ट पक्ष (पूर्ण/आंशिक सहमति) लिखना।
- पाठ से तर्क: व्यवहारवादी लाभ-हानि देखकर खुद आगे बढ़ते हैं, दूसरों को ऊपर नहीं उठाते।
- संतुलन: गांधीजी के उदाहरण से — व्यावहारिकता आदर्शों के अधीन रहे तो उपयोगी है।
Answer: आंशिक रूप से सहमत हूँ। केवल लाभ-हानि देखने वाले खुद आगे बढ़ते हैं, दूसरों को नहीं उठाते। पर गांधीजी की तरह व्यावहारिकता आदर्शों के अधीन रहे, तो उपयोगी है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
‘झेन की देन’ में लेखक ने भूतकाल और भविष्यकाल को मिथ्या कहकर केवल वर्तमान को सत्य क्यों माना है? (25-30 शब्द, 2 अंक) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| भूतकाल बीत चुका है, लौटता नहीं — यह बताना | 0.5 |
| भविष्यकाल अभी आया नहीं है — इसलिए दोनों मिथ्या हैं | 0.5 |
| सामने का वर्तमान क्षण ही सत्य है, उसी में जीना चाहिए | 0.5 |
| टी-सेरेमनी के अनुभव से जोड़ना (चाय पीते-पीते भूत-भविष्य उड़ गए, ‘जीना’ समझ आया) तथा शब्द-सीमा में स्पष्ट भाषा | 0.5 |
पठित गद्यांश (‘गिन्नी का सोना’ — गांधीजी और ताँबे में सोना वाला अंश) पर आधारित पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, कथन-कारण सहित (1×5 = 5 अंक) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रश्न 1: तथ्य की पहचान — गांधीजी को ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ कहे जाने वाला सही विकल्प | 1 |
| प्रश्न 2: आशय — ‘हवा में ही उड़ते रहते’ का अर्थ (आदर्श कल्पना बनकर रह जाते) सही चुनना | 1 |
| प्रश्न 3: कथन-कारण — दोनों की सत्यता परखना और यह देखना कि कारण कथन की व्याख्या करता है या नहीं; एक भी अंश गलत आँकने पर अंक नहीं | 1 |
| प्रश्न 4: प्रतीक — ‘ताँबा’ को व्यावहारिकता का प्रतीक पहचानना | 1 |
| प्रश्न 5: निष्कर्ष/चरित्र — गांधीजी के नेतृत्व की विशेषता (व्यवहार को आदर्श तक उठाना) पहचानना | 1 |
Where students lose marks in रवींद्र केलेकर – पतझर में टूटी पत्तियाँ
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: गांधीजी के बारे में प्रतीक उलट देना
‘सोना-ताँबा’ के दो वाक्य मिलते-जुलते हैं, इसलिए जल्दी में उल्टा लिख दिया जाता है।
Wrong working
गांधीजी सोने में ताँबा मिलाकर अपने आदर्शों को व्यावहारिक बनाते थे।
Right working
गांधीजी सोने में ताँबा नहीं, बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे, यानी व्यवहार को आदर्शों तक उठाते थे।
Do this: याद रखें: गांधीजी के साथ ‘सोना ही हमेशा आगे’ रहता था — तो मिलाया सोना ही गया।
Usually costs: मुख्य बिंदु गलत होने से 2 अंक के उत्तर में 1 से 2 अंक तक कट सकते हैं।
Mistake: कथन किसका है, यह गलत बताना
झेन प्रसंग संवाद में है; छात्र मित्र की बात लेखक के नाम लिख देते हैं।
Wrong working
लेखक ने बताया कि जापान के अस्सी फ़ीसदी लोग मनोरुग्ण हैं।
Right working
लेखक के जापानी मित्र ने बताया कि वहाँ के अस्सी फ़ीसदी लोग मनोरुग्ण हैं; लेखक ने केवल प्रश्न पूछा था।
Do this: प्रश्न-उत्तर वाले अंश में देखें कि प्रश्न कौन पूछ रहा है और उत्तर कौन दे रहा है।
Usually costs: तथ्य की गलती पर आधा से 1 अंक कट सकता है।
Mistake: व्यवहारवादियों को ‘असफल’ लिख देना
लेखक उनकी आलोचना करता है, इसलिए छात्र मान लेते हैं कि वे असफल होते हैं।
Wrong working
व्यवहारवादी लोग जीवन में असफल रहते हैं, इसलिए लेखक उन्हें पसंद नहीं करता।
Right working
व्यवहारवादी सफल होते हैं और आगे भी जाते हैं, पर वे दूसरों को साथ लेकर ऊपर नहीं चढ़ते।
Do this: लेखक का अंतर पकड़िए: ‘आगे जाना’ (सफलता) और ‘ऊपर चढ़ना’ (सबका उत्थान)।
Usually costs: विचार गलत समझने पर पूरे उत्तर के अंक जा सकते हैं।
Mistake: आशय पूछने पर केवल घटना दोहराना
छात्र टी-सेरेमनी का पूरा वर्णन लिखने लगते हैं और निष्कर्ष (वर्तमान में जीना) छूट जाता है।
Wrong working
लेखक छत पर गया, हाथ-पाँव धोए, चाजीन ने चाय बनाई, प्यालों में दो घूँट चाय थी और डेढ़ घंटे तक वे चाय पीते रहे...
Right working
चाय पीते-पीते लेखक का मन भूत और भविष्य से मुक्त हो गया; उसे समझ आया कि वर्तमान क्षण ही सत्य है और उसी में जीना चाहिए।
Do this: पहले पूछे गए भाव का सीधा उत्तर दें, घटना का उल्लेख केवल प्रमाण के रूप में एक पंक्ति में करें।
Usually costs: विषयवस्तु का मुख्य बिंदु छूटने पर 1 अंक तक कट सकता है, और शब्द-सीमा भी टूटती है।
Mistake: गिन्नी के सोने का तथ्य गलत लिखना
‘मिलावट’ सुनकर छात्र चाँदी या कमज़ोर सोना लिख देते हैं।
Wrong working
गिन्नी के सोने में चाँदी मिली होती है, इसलिए वह शुद्ध सोने से कमज़ोर होता है।
Right working
गिन्नी के सोने में थोड़ा ताँबा मिला होता है, इसलिए वह ज़्यादा चमकता है और शुद्ध सोने से मज़बूत होता है।
Do this: तीन शब्द याद रखें: ताँबा, चमक, मज़बूती।
Usually costs: बहुविकल्पी या लघु उत्तर में तथ्य गलत होने पर पूरा 1 अंक जा सकता है।
Mistake: 25-30 शब्दों के प्रश्न में लंबा उत्तर लिखना
छात्र सोचते हैं कि अधिक लिखने से अधिक अंक मिलेंगे।
Wrong working
(70-80 शब्दों में गांधीजी, गिन्नी के सोने, व्यवहारवादियों और शाश्वत मूल्यों — सब कुछ एक साथ लिख देना)
Right working
पूछे गए बिंदु के 2-3 वाक्य, जैसे: ‘लेखक के अनुसार आदर्शवादी स्वयं ऊपर चढ़ते हैं और दूसरों को भी ऊपर ले जाते हैं; शाश्वत मूल्य इन्हीं की देन हैं।’
Do this: उत्तर लिखने से पहले 2-3 उत्तर-बिंदु तय करें और उन्हीं पर रुकें।
Usually costs: समय की हानि होती है और अप्रासंगिक बातों से अभिव्यक्ति के अंक कम हो सकते हैं।
रवींद्र केलेकर – पतझर में टूटी पत्तियाँ: previous year questions
- Course A: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).
- Course B: Asked in 1 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 0.3 marks per paper; 1 questions in all, counting OR alternatives. In 0 of 4 sample papers.
Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.
Solved board questions from रवींद्र केलेकर – पतझर में टूटी पत्तियाँ
Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.
2023 Course B, set 4/5/1, Q11 · 6 marks · Short answer
गद्य पाठों पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए : 2×3=6
- (क)3 marks
‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ के लेखक के अनुसार ‘सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए ।’ क्या आप लेखक के विचार से सहमत हैं ? अपने पक्ष के समर्थन या विरोध में तर्क सहित उत्तर दीजिए ।
- (ख)3 marks
निदा फ़ाज़ली अपनी माँ और पत्नी द्वारा जीव-जंतुओं के साथ किए जाने वाले व्यवहार के अंतर से क्या कहना चाहते हैं ? ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ के संदर्भ में लिखिए ।
- (ग)3 marks
‘तताँरा-वामीरो कथा’ पाठ के आधार पर ‘पशु-पर्व’ में होने वाली घटना का उल्लेख कीजिए ।
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(क) सहमति का मत: वर्तमान ही हमारे हाथ में है; अतीत बीत चुका और भविष्य अनिश्चित है, इसलिए वर्तमान में जीना चाहिए।
- 1 mark
तर्क: वर्तमान का सदुपयोग कर्म और सफलता का आधार है; अतीत-भविष्य की चिंता तनाव बढ़ाती है। (विरोध में तर्क भी स्वीकार्य, यदि उचित हो।)
- 1 mark
निष्कर्ष: अतीत से सीख और भविष्य की योजना के साथ वर्तमान को प्रमुखता देना ही सही है।
- 1 mark
(ख) निदा फ़ाज़ली की माँ पशु-पक्षियों के प्रति दया और संवेदना रखती थीं, जबकि पत्नी का व्यवहार उदासीन/असंवेदनशील था।
- 1 mark
यह अंतर दिखाता है कि सभ्यता के विकास के साथ संवेदनशीलता और जीवन-मूल्य घटे हैं।
- 1 mark
यह दो पीढ़ियों की सोच का अंतर भी दर्शाता है।
- 1 mark
(ग) पशु-पर्व में लपाती और पासा के गाँववाले एकत्र हुए; मेले में तताँरा और वामीरो मिले और उनका प्रेम प्रकट हुआ।
- 1 mark
वामीरो की माँ और गाँववालों ने इस प्रेम का विरोध किया।
- 1 mark
क्रोध में तताँरा ने तलवार धरती में गाड़ी जिससे द्वीप दो टुकड़ों में बँट गया।
Answer: किन्हीं दो उपभाग (क), (ख), (ग) के तर्कसंगत उत्तर, प्रत्येक 3 अंक
Where the marks are
- (क) मत, तर्क और निष्कर्ष (3 अंक)
- (ख) माँ-पत्नी का व्यवहार-अंतर, संवेदनशीलता में कमी, पीढ़ियों का अंतर (3 अंक)
- (ग) गाँववालों का जुटना, प्रेम का प्रकट होना, विरोध, तताँरा द्वारा द्वीप का विभाजन (3 अंक)
Every रवींद्र केलेकर – पतझर में टूटी पत्तियाँ question, by year
Course A (0 questions, sample papers included)
Practice questions on रवींद्र केलेकर – पतझर में टूटी पत्तियाँ
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerBoard level
लेखक जिस पर्णकुटी में चाय पीने गया, वह कहाँ थी और कैसी बनी थी? (25-30 शब्द)
Hint
इमारत की मंज़िलें, दीवारें और ज़मीन — तीनों याद कीजिए।
Answer
उत्तर-बिंदु: छः मंज़िली इमारत की छत पर; दफ़्ती की दीवारें; तातामी (चटाई) की ज़मीन; शांत वातावरण।
आदर्श उत्तर: वह पर्णकुटी एक छह मंज़िली इमारत की छत पर थी। उसकी दीवारें दफ़्ती की थीं और ज़मीन पर तातामी यानी चटाई बिछी थी। वातावरण अत्यंत शांत था।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
टी-सेरेमनी में भीतर जाने से पहले लेखक और उसके मित्रों ने क्या किया? चाजीन ने उनका स्वागत किस प्रकार किया? (25-30 शब्द)
Hint
बाहर रखा बेढब बरतन और ‘दो...झो...’ — दोनों का उल्लेख कीजिए।
Answer
उत्तर-बिंदु: बाहर रखे बरतन के पानी से हाथ-पाँव धोए, तौलिए से पोंछे; चाजीन खड़ा हुआ, कमर झुकाकर प्रणाम किया, ‘दो...झो...’ कहकर स्वागत किया।
आदर्श उत्तर: उन्होंने बाहर रखे बेढब बरतन के पानी से हाथ-पाँव धोकर तौलिए से पोंछे। अंदर चाजीन ने खड़े होकर, कमर झुकाकर प्रणाम किया और ‘दो...झो...’ कहकर स्वागत किया।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
लेखक के अनुसार व्यवहारवादी लोग जीवन में सफल होते हैं, फिर भी वे ‘ऊपर’ क्यों नहीं चढ़ते? (25-30 शब्द)
Hint
लेखक ‘आगे जाना’ और ‘ऊपर चढ़ना’ में अंतर करता है।
Answer
उत्तर-बिंदु: लाभ-हानि का हिसाब लगाकर कदम; सफल होकर आगे निकलते हैं; पर दूसरों को साथ लेकर ऊपर नहीं उठाते; यह काम आदर्शवादी करते हैं।
आदर्श उत्तर: व्यवहारवादी लाभ-हानि का हिसाब लगाकर कदम उठाते हैं, इसलिए सफल होकर दूसरों से आगे निकलते हैं। पर वे दूसरों को साथ लेकर ऊपर नहीं उठाते; यह काम आदर्शवादी करते हैं।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
लेखक ने चाजीन की क्रियाओं की तुलना ‘जयजयवंती के सुर’ से क्यों की है? (25-30 शब्द)
Hint
जयजयवंती एक राग है — संगीत की लय और चाजीन के सलीके को जोड़िए।
Answer
उत्तर-बिंदु: अँगीठी सुलगाना, चायदानी रखना, बरतन लाना-पोंछना — सब गरिमा और सलीके से; हर मुद्रा में राग जैसी लय और मधुरता; शांत वातावरण।
आदर्श उत्तर: चाजीन ने अँगीठी सुलगाने से बरतन पोंछने तक हर काम बड़े सलीके और शांति से किया। उसकी हर मुद्रा में संगीत के राग जैसी लय और मधुरता थी।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level
‘यहाँ तक कि सन्नाटा भी मुझे सुनाई देने लगा।’ — इस कथन से लेखक की किस मानसिक अवस्था का पता चलता है? (25-30 शब्द)
Hint
सन्नाटा ‘सुनाई’ कब दे सकता है? जब मन के भीतर की दौड़ रुक जाए।
Answer
उत्तर-बिंदु: मन पूरी तरह शांत; दिमाग की रफ़्तार धीमी होकर बंद; गहरी खामोशी का भी अनुभव — ध्यान जैसी अवस्था।
आदर्श उत्तर: इससे पता चलता है कि लेखक का मन पूरी तरह शांत हो गया था। दिमाग की दौड़ रुक गई थी, इसलिए गहरी खामोशी को भी वह महसूस करने लगा।
Q6 · 2 marks · Short answerHarder board level
‘गिन्नी का सोना’ और ‘झेन की देन’ — दोनों प्रसंग मिलकर पाठक को कौन-सा साझा संदेश देते हैं? (25-30 शब्द)
Hint
पाठ प्रवेश में कहा गया है कि ये प्रसंग केवल पढ़ने के लिए नहीं, किस तरह का नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
Answer
उत्तर-बिंदु: थोड़े में बहुत कहना; पहला — ऊँचे आदर्शों पर टिके रहना; दूसरा — भागदौड़ छोड़ वर्तमान में जीना; दोनों जागरूक, सक्रिय नागरिक बनने की प्रेरणा।
आदर्श उत्तर: दोनों प्रसंग थोड़े में बहुत कहते हैं। पहला ऊँचे आदर्शों पर टिके रहना सिखाता है, दूसरा भागदौड़ छोड़ वर्तमान में जीना। दोनों जागरूक, सक्रिय नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
कल्पना कीजिए कि आपकी कक्षा का मॉनिटर बहुत ईमानदार है, पर हर नियम इतनी रूखाई से लागू करता है कि कोई उसकी बात नहीं मानता। ‘गिन्नी का सोना’ के आधार पर आप उसे क्या सलाह देंगे? (25-30 शब्द)
Hint
गांधीजी व्यावहारिकता की कीमत जानते थे, वरना उनके आदर्श ‘हवा में ही उड़ते रहते’।
Answer
उत्तर-बिंदु: ईमानदारी (सोना) न छोड़े; गांधीजी की तरह व्यवहार की समझ जोड़े; सबको साथ लेकर चले तभी आदर्श चलेंगे; पर आदर्श से समझौता न करे।
आदर्श उत्तर: मैं कहूँगा कि ईमानदारी का सोना बनाए रखे, पर गांधीजी की तरह व्यवहार की समझ भी जोड़े। सबको साथ लेकर चलेगा, तभी आदर्श चलेंगे; पर आदर्श से समझौता न करे।
Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
आजकल मोबाइल पर लगातार सूचनाएँ देखते रहने की आदत को ‘झेन की देन’ के संदर्भ में कैसे समझा जा सकता है? कोई एक उपाय भी सुझाइए। (25-30 शब्द)
Hint
मित्र की ‘स्पीड का इंजन’ वाली बात और टी-सेरेमनी की शांति — दोनों को जोड़िए।
Answer
उत्तर-बिंदु: लगातार सूचनाएँ = दिमाग पर ‘स्पीड’ का इंजन; तनाव बढ़ता है; उपाय — टी-सेरेमनी जैसी शांति, रोज़ कुछ समय फ़ोन दूर रखकर शांत बैठना।
आदर्श उत्तर: यह आदत भी दिमाग पर ‘स्पीड’ का इंजन लगाने जैसी है, जो तनाव बढ़ाती है। टी-सेरेमनी की तरह रोज़ कुछ समय फ़ोन दूर रखकर शांत बैठना उपयोगी उपाय है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.गिन्नी के सोने में क्या मिला होता है और इससे उसमें क्या गुण आते हैं?Show answer
थोड़ा-सा ताँबा; इससे वह ज़्यादा चमकता है और शुद्ध सोने से मज़बूत होता है। (शब्दार्थ के अनुसार 22 कैरेट।)
2.पाठ में ‘शुद्ध आदर्श’ की तुलना किससे की गई है?Show answer
शुद्ध सोने से; और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से।
3.किस पंक्ति से पता चलता है कि गांधीजी के जीवन में आदर्श ही प्रधान रहे?Show answer
‘वे सोने में ताँबा नहीं बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे।’ — इसलिए सोना ही हमेशा आगे रहता था।
4.लेखक के अनुसार समाज के पास शाश्वत मूल्य किनकी देन हैं?Show answer
आदर्शवादी लोगों की; व्यवहारवादियों ने तो समाज को गिराया ही है।
5.जापान में मानसिक रोग बढ़ने का कारण किसने बताया और क्या?Show answer
लेखक के जापानी मित्र ने — जीवन की रफ़्तार बढ़ना, अमेरिका से प्रतिस्पर्धा और महीने का काम एक दिन में करने की कोशिश।
6.टी-सेरेमनी को जापानी में क्या कहते हैं और चाय पिलाने वाले को क्या?Show answer
चा-नो-यू; चाय पिलाने वाला ‘चाजीन’ कहलाता है।
7.टी-सेरेमनी में तीन से अधिक लोगों को प्रवेश क्यों नहीं दिया जाता?Show answer
क्योंकि इस विधि में शांति मुख्य बात होती है।
8.चाय पीते समय पहले और बाद में लेखक ने क्या अनुभव किया?Show answer
पहले 10-15 मिनट उलझन; फिर दिमाग की रफ़्तार धीमी होकर बंद हो गई, उसे अनंतकाल में जीने जैसा लगा और सन्नाटा भी सुनाई देने लगा।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप बिना देखे बता सकते हैं कि गिन्नी का सोना शुद्ध सोने से अधिक चमकीला और मज़बूत क्यों होता है?
- क्या आप ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ का अर्थ और लेखक की चेतावनी (बखान व्यावहारिकता का होता है, आदर्श पीछे हटते हैं) दो वाक्यों में लिख सकते हैं?
- क्या आप समझा सकते हैं कि गांधीजी ‘ताँबे में सोना’ कैसे मिलाते थे और इससे क्या होता था?
- क्या आप ‘आगे जाना’ और ‘ऊपर चढ़ना’ का अंतर बताकर शाश्वत मूल्यों को आदर्शवादियों से जोड़ सकते हैं?
- क्या आप जापानी मित्र के बताए मानसिक रोग के कारण और ‘स्पीड का इंजन’ वाली तुलना बिना रुके लिख सकते हैं?
- क्या आप टी-सेरेमनी का क्रम — छत की पर्णकुटी, हाथ-पाँव धोना, चाजीन का स्वागत, तीन लोग, दो घूँट, डेढ़ घंटा — क्रम से बोल सकते हैं?
- क्या आप बता सकते हैं कि लेखक भूत और भविष्य को मिथ्या क्यों कहता है और ‘जीना किसे कहते हैं’ उसे कब समझ आया?
रवींद्र केलेकर – पतझर में टूटी पत्तियाँ: frequently asked questions
'पतझर में टूटी पत्तियाँ' पाठ के कितने प्रसंग हैं और कौन-से?
इस पाठ में दो प्रसंग हैं: (I) गिन्नी का सोना और (II) झेन की देन। पहला आदर्श और व्यावहारिकता के संबंध पर है। दूसरा जापान की टी-सेरेमनी के माध्यम से वर्तमान में जीने की सीख देता है।
'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' किसे कहा गया है?
जो लोग शुद्ध आदर्शों में थोड़ी व्यावहारिकता मिलाकर उन्हें चलाकर दिखाते हैं, उन्हें 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' कहा गया है। लेखक के अनुसार ऐसे लोगों की प्रशंसा असल में व्यावहारिकता की होती है। धीरे-धीरे उनके जीवन से आदर्श पीछे हट जाते हैं।
लेखक गांधीजी को बाकी प्रैक्टिकल आइडियालिस्टों से अलग क्यों मानते हैं?
गांधीजी व्यावहारिकता की कीमत जानते थे, पर आदर्शों को व्यवहार के स्तर तक नीचे नहीं आने देते थे। वे व्यवहार को आदर्शों के स्तर तक ऊपर उठाते थे, यानी ताँबे में सोना मिलाते थे। इसलिए उनके जीवन में आदर्श ही आगे रहे।
टी-सेरेमनी को जापानी में क्या कहते हैं और उसमें तीन ही लोग क्यों होते हैं?
टी-सेरेमनी को जापानी में 'चा-नो-यू' कहते हैं। इस विधि में शांति सबसे मुख्य बात होती है। इसलिए वहाँ तीन से अधिक आदमियों को प्रवेश नहीं दिया जाता।
चाय पीने के बाद लेखक ने अपने भीतर क्या बदलाव महसूस किया?
पहले दस-पंद्रह मिनट लेखक उलझन में रहे, फिर उनके दिमाग की रफ़्तार धीमी होकर बंद-सी हो गई। उन्हें लगा मानो वे अनंतकाल में जी रहे हैं और सन्नाटा भी सुनाई देने लगा। भूत और भविष्य उनके मन से उड़ गए और केवल वर्तमान क्षण बचा।
लेखक भूतकाल और भविष्यकाल को मिथ्या क्यों कहते हैं?
लेखक के अनुसार भूतकाल जा चुका है और भविष्यकाल अभी आया नहीं है। इसलिए दोनों हमारे हाथ में नहीं हैं। केवल सामने का वर्तमान क्षण सत्य है, इसलिए उसी में जीना चाहिए।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-ब (085), कक्षा 10, 2026-27; NCERT स्पर्श भाग 2 (Reprint 2026-27), पतझर में टूटी पत्तियाँ