तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Class 10: भावार्थ और विश्लेषण
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' तुलसीदास के रामचरितमानस के बाल कांड का अंश है। शिव-धनुष टूटने पर क्रोधित परशुराम सभा में आते हैं। राम विनम्रता से और लक्ष्मण व्यंग्य से उत्तर देते हैं। बोर्ड इस पर काव्यांश आधारित पाँच MCQ, कथन-कारण प्रश्न और 25-30 शब्दों के दो अंक वाले प्रश्न पूछता है।
What तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद is about
'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' क्षितिज भाग 2 के काव्य खंड का दूसरा पाठ है। इसके कवि तुलसीदास हैं। यह अंश रामचरितमानस के बाल कांड से लिया गया है और अवधी भाषा में दोहा-चौपाई छंद में लिखा गया है। सीता स्वयंवर में राम द्वारा शिव-धनुष तोड़ने पर परशुराम क्रोध में सभा में आते हैं। उनके क्रोध भरे वचनों का उत्तर राम विनय से और लक्ष्मण तीखे व्यंग्य से देते हैं।
बोर्ड परीक्षा में यह पाठ खंड ग (काव्य खंड) में आता है। पठित काव्यांश देकर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) पूछे जा सकते हैं, जिनमें कथन-कारण प्रश्न भी होता है। इसके अलावा चार में से तीन प्रश्नों के 25-30 शब्दों में उत्तर देने होते हैं, हर प्रश्न 2 अंक का। इनमें पात्रों का स्वभाव, लक्ष्मण के तर्क, व्यंग्य, अलंकार और विनम्रता जैसे मूल्यों पर प्रश्न आते हैं।
In real board papers: Course A, asked in 11 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 2.7 marks per paper; Course B, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026). See the questions
तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
पहला अंश (राम का विनय और परशुराम का क्रोध): शिव-धनुष टूटा देखकर परशुराम क्रोधित हैं। राम विनम्रता से कहते हैं कि हे नाथ, धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा, आज्ञा दीजिए। यह सुनकर क्रोधी मुनि भड़क उठते हैं। वे कहते हैं कि सेवक वह होता है जो सेवा करे; शत्रु जैसा काम करने वाले से तो लड़ाई ही होती है। जिसने शिव-धनुष तोड़ा है, वह सहस्रबाहु के समान उनका शत्रु है। वह सभा से अलग हो जाए, नहीं तो सारे राजा मारे जाएँगे।
दूसरा अंश (लक्ष्मण का पहला व्यंग्य): यह सुनकर लक्ष्मण मुस्कुराते हैं और परशुराम का अपमान-सा करते हुए कहते हैं कि बचपन में हमने बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया; इस धनुष पर इतनी ममता क्यों? परशुराम कहते हैं कि अरे राजकुमार, तू काल के वश में है; सारा संसार जानता है कि शिव-धनुष कोई छोटी धनुही नहीं है।
तीसरा अंश (लक्ष्मण के तर्क और परशुराम का आत्म-परिचय): लक्ष्मण हँसकर कहते हैं कि हमारे लिए सब धनुष एक जैसे हैं। पुराने धनुष के टूटने से क्या हानि-लाभ? राम ने इसे भूल से देखा था, यह छूते ही टूट गया, इसमें राम का दोष नहीं; आप बिना कारण क्रोध कर रहे हैं। तब परशुराम फरसे की ओर देखकर अपना परिचय देते हैं: मैं बाल ब्रह्मचारी, अत्यंत क्रोधी और क्षत्रिय कुल का शत्रु हूँ। मैंने अपनी भुजाओं के बल से धरती को कई बार राजाओं से रहित करके ब्राह्मणों को दे दिया और सहस्रबाहु की भुजाएँ काटीं। वे चेतावनी देते हैं कि अपने माता-पिता को चिंता में मत डाल; मेरा फरसा गर्भ के बच्चों तक का नाश करने वाला है।
चौथा अंश (लक्ष्मण का तीखा व्यंग्य): लक्ष्मण मधुर वाणी में कहते हैं कि आप बार-बार कुल्हाड़ा दिखाकर फूँक से पहाड़ उड़ाना चाहते हैं। यहाँ कोई कुम्हड़बतिया नहीं जो तर्जनी देखकर मर जाए। आपको ब्राह्मण जानकर मैं क्रोध रोककर सब सह रहा हूँ, क्योंकि हमारे कुल में देवता, ब्राह्मण, भक्त और गाय पर वीरता नहीं दिखाई जाती। आपके वचन ही करोड़ों कुलिश जैसे कठोर हैं, धनुष-बाण और कुठार व्यर्थ धारण करते हैं। यह सुनकर परशुराम क्रोध सहित गंभीर वाणी में बोलते हैं।
केंद्रीय भाव: यह प्रसंग दिखाता है कि क्रोध और अहंकार के सामने विनम्रता अधिक प्रभावशाली है। लक्ष्मण का वीर रस से भरा व्यंग्य परशुराम की आत्मप्रशंसा को हल्का कर देता है। पाठ की भूमिका के अनुसार राम के विनय, विश्वामित्र के समझाने और राम की शक्ति की परीक्षा के बाद अंत में परशुराम का गुस्सा शांत होता है।
Themes and message
क्रोध के सामने विनम्रता की शक्ति
परशुराम आते ही क्रोध में धमकी देते हैं, पर राम उन्हें 'नाथ' कहकर स्वयं को उनका दास बताते हैं। राम न बहस करते हैं, न डरते हैं; वे शांत रहकर आज्ञा माँगते हैं। इससे पता चलता है कि तुलसी विनय को शक्ति का आभूषण मानते हैं। राम के शब्द कम हैं, पर उनका प्रभाव गहरा है। भूमिका बताती है कि अंत में राम के विनय से ही परशुराम का क्रोध शांत होता है। यह संदेश आज भी लागू होता है कि शक्ति के साथ विनम्रता हो तो विवाद सुलझता है।
From the text: राम का कथन "नाथ संभुधनु भंजनिहारा" और "होइहि केउ एक दास तुम्हारा"; भूमिका में 'राम के विनय' से क्रोध शांत होने का उल्लेख।
अहंकार और आत्मप्रशंसा पर व्यंग्य
परशुराम बार-बार अपने बल, ब्रह्मचर्य, क्रोध और क्षत्रियों के संहार का बखान करते हैं। लक्ष्मण इसी आत्मप्रशंसा को व्यंग्य से हल्का कर देते हैं। वे परशुराम को 'महाभट' कहकर कहते हैं कि आप फूँक से पहाड़ उड़ाना चाहते हैं। इससे संकेत मिलता है कि अपने मुँह से अपनी वीरता गाना और बार-बार हथियार दिखाना सच्चे वीर का लक्षण नहीं है। व्यंग्य यहाँ अहंकार का दर्पण बन जाता है।
From the text: परशुराम: "बाल ब्रह्मचारी अति कोही", "भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही"; लक्ष्मण: "अहो मुनीसु महाभट मानी", "चहत उड़ावन फूँकि पहारू"।
तर्क बनाम अंधा क्रोध
लक्ष्मण क्रोध का उत्तर तर्क से देते हैं। वे पूछते हैं कि बचपन में तोड़ी धनुहियों पर क्रोध नहीं हुआ तो इस धनुष पर ममता क्यों? उनके लिए सब धनुष समान हैं, पुराना धनुष टूटने से कोई हानि-लाभ नहीं, और वह छूते ही टूट गया, इसलिए राम दोषी नहीं। परशुराम इन तर्कों का उत्तर नहीं देते, केवल धमकी और अपना परिचय देते हैं। इससे पता चलता है कि क्रोध में व्यक्ति सोचने की क्षमता खो देता है।
From the text: "येहि धनु पर ममता केहि हेतू", "का छति लाभु जून धनु तोरें", "छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू", "मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू"।
कुल-मर्यादा और ब्राह्मण के प्रति सम्मान
लक्ष्मण तीखा बोलते हैं, पर मर्यादा नहीं छोड़ते। वे कहते हैं कि आपको भृगु का पुत्र और जनेऊधारी देखकर मैं क्रोध रोककर सब सह रहा हूँ। उनके कुल में देवता, ब्राह्मण, भक्त और गाय पर वीरता नहीं दिखाई जाती, क्योंकि इन्हें मारना पाप है और इनसे हारना अपयश। अंत में वे अनुचित कहे के लिए क्षमा भी माँगते हैं। इससे पता चलता है कि उनकी वीरता नैतिक नियमों से बँधी है।
From the text: "भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी", "सुर महिसुर हरिजन अरु गाई", "बधें पापु अपकीरति हारें", "जो बिलोकि अनुचित कहेउँ छमहु महामुनि धीर"।
The speaker and the people in the poem
लक्ष्मण
राम के छोटे भाई; परशुराम के क्रोध का उत्तर व्यंग्य वचनों से देने वाले मुख्य वक्ता।
- निर्भीक और वीर: परशुराम की धमकियों से नहीं डरते और कहते हैं, "इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं"।
- व्यंग्य में कुशल: मुस्कुराते हुए कहते हैं "अहो मुनीसु महाभट मानी", जो प्रशंसा के रूप में चोट है।
- तर्कशील: "छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू" कहकर राम को निर्दोष सिद्ध करते हैं।
- मर्यादा मानने वाले: "सुर महिसुर हरिजन अरु गाई" पर वीरता न दिखाने की कुल-परंपरा बताते हैं।
- कभी-कभी उग्र और उत्तेजित करने वाले: उनके व्यंग्य से परशुराम का क्रोध और भड़कता है ("सुनि सरोष भृगुबंसमनि")।
परशुराम के हर कथन के बाद लक्ष्मण 'मुसुकाने', 'हसि' और 'बिहसि' कहकर उत्तर देते हैं, जिससे उनकी निडरता और व्यंग्य-कला दोनों दिखती हैं।
परशुराम
भृगु कुल के मुनि; शिव-धनुष टूटने से क्रोधित होकर सभा में आए और धनुष तोड़ने वाले को शत्रु कहा।
- अत्यंत क्रोधी: स्वयं कहते हैं "बाल ब्रह्मचारी अति कोही"; कवि भी उन्हें 'मुनि कोही' कहते हैं।
- अहंकारी और आत्मप्रशंसक: "भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही" कहकर अपने बल का बखान करते हैं।
- क्षत्रिय-विरोधी: "बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही" कहकर स्वयं को क्षत्रियों का शत्रु बताते हैं।
- धमकी देने वाले: "न त मारे जैहहिं सब राजा" और फरसा दिखाकर डराते हैं।
- शिव के प्रति श्रद्धालु: शिव-धनुष को साधारण धनुही नहीं मानते: "धनुही सम त्रिपुरारिधनु बिदित सकल संसार"।
पूरे अंश में परशुराम का हर कथन क्रोध, धमकी या आत्मप्रशंसा से भरा है, और अंत में भी वे 'सरोष' (क्रोध सहित) बोलते हैं।
राम
शिव-धनुष तोड़ने वाले; संवाद में कम बोलने वाले पर सबसे संयमित पात्र।
- विनम्र: परशुराम को 'नाथ' कहकर संबोधित करते हैं।
- शांत और धैर्यवान: धमकी सुनकर भी क्रोध नहीं करते।
- मर्यादा का पालन करने वाले: स्वयं को परशुराम का दास बताकर आज्ञा माँगते हैं: "आयेसु काह कहिअ किन मोही"।
राम केवल एक बार बोलते हैं, पर उनके विनय भरे शब्द पूरे प्रसंग का संतुलन बनाते हैं; भूमिका के अनुसार उनके विनय से ही अंत में परशुराम शांत होते हैं।
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| अनुप्रास अलंकार | "बालकु बोलि बधौं नहि तोही" | 'ब' वर्ण की बार-बार आवृत्ति से पंक्ति में लय और कठोरता आती है, जो परशुराम के क्रोध भरे स्वर को उभारती है। |
| अनुप्रास अलंकार | "भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही" | 'भ' और 'ब' की आवृत्ति से वाक्य गूँजदार बनता है और परशुराम की आत्मप्रशंसा का प्रभाव बढ़ता है। |
| उपमा अलंकार | "कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा" | परशुराम के वचनों की तुलना करोड़ों कुलिश से की गई है ('सम' वाचक शब्द)। इससे लक्ष्मण का व्यंग्य तीखा होता है कि आपके शब्द ही इतने कठोर हैं, हथियारों की क्या ज़रूरत। |
| उपमा अलंकार | "सहसबाहु सम सो रिपु मोरा" | धनुष तोड़ने वाले की तुलना सहस्रबाहु से करके परशुराम अपने गहरे बैर और क्रोध की तीव्रता दिखाते हैं। |
| पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार | "पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारु" | 'पुनि' शब्द की आवृत्ति से परशुराम का बार-बार कुल्हाड़ा दिखाना चित्र की तरह सामने आता है और व्यंग्य गहरा होता है। |
| अतिशयोक्ति अलंकार | "चहत उड़ावन फूँकि पहारू" | फूँक से पहाड़ उड़ाने की बढ़ा-चढ़ाकर कही बात से लक्ष्मण परशुराम की धमकियों को हास्यास्पद बना देते हैं। |
| व्यंग्य (वक्रोक्ति शैली) और छंद | "अहो मुनीसु महाभट मानी" (चौपाई); बीच-बीच में दोहा, जैसे "रे नृपबालक कालबस बोलत तोहि न सँभार" | ऊपर से प्रशंसा, भीतर से चोट; यही व्यंजना शैली पूरे प्रसंग का सौंदर्य है। चौपाई का संवाद-प्रवाह और दोहे का ठहराव नाटकीयता बढ़ाते हैं। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
नाथ संभुधनु भंजनिहारा
राम: परशुराम के क्रोधित होकर आने पर राम का पहला उत्तर, जिसके आगे वे कहते हैं कि धनुष तोड़ने वाला आपका कोई दास होगा।
राम की विनम्रता और संयम का प्रमाण; 'नाथ' संबोधन से वे क्रोध को शांत करने का प्रयास करते हैं।
सहसबाहु सम सो रिपु मोरा
परशुराम: राम को उत्तर देते हुए परशुराम कहते हैं कि जिसने शिव-धनुष तोड़ा है, वह सहस्रबाहु के समान उनका शत्रु है।
परशुराम के तीव्र क्रोध और बैर-भाव को दिखाता है; इसमें उपमा अलंकार है।
येहि धनु पर ममता केहि हेतू
लक्ष्मण: लक्ष्मण याद दिलाते हैं कि बचपन में उन्होंने बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब परशुराम ने क्रोध नहीं किया।
लक्ष्मण का पहला व्यंग्य और तर्क; इसी से परशुराम और भड़क उठते हैं।
छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू
लक्ष्मण: लक्ष्मण कहते हैं कि पुराना धनुष छूते ही टूट गया, इसलिए राम का कोई दोष नहीं।
लक्ष्मण के तर्क का केंद्र; वे राम को निर्दोष और परशुराम के क्रोध को अकारण सिद्ध करते हैं।
बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही
परशुराम: फरसे की ओर देखकर परशुराम अपना परिचय देते हैं कि वे संसार भर में प्रसिद्ध क्षत्रिय कुल के शत्रु हैं।
परशुराम के अहंकार और आत्मप्रशंसा का स्पष्ट उदाहरण।
इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं
लक्ष्मण: परशुराम के बार-बार फरसा दिखाने पर लक्ष्मण कहते हैं कि यहाँ कोई कुम्हड़बतिया नहीं जो तर्जनी देखकर मर जाए।
लक्ष्मण की निर्भीकता और व्यंग्य-कला; वे बताते हैं कि वे कमज़ोर नहीं हैं।
कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा
लक्ष्मण: लक्ष्मण कहते हैं कि आपके वचन ही करोड़ों कुलिश जैसे कठोर हैं, आप धनुष-बाण और कुठार व्यर्थ धारण करते हैं।
प्रसंग का सबसे तीखा व्यंग्य; उपमा अलंकार का प्रसिद्ध उदाहरण।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर
परशुराम: लक्ष्मण को चेतावनी देते हुए परशुराम कहते हैं कि माता-पिता को चिंता में मत डालो, मेरा फरसा बहुत भयानक है।
परशुराम की क्रूर धमकी, जो उनके क्रोध की चरम सीमा दिखाती है।
तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
विनम्रता से क्रोध शांत होता है
मान लीजिए आपकी कक्षा में किसी से प्रिंसिपल की प्रिय पुरानी ट्रॉफ़ी गिरकर टूट गई। प्रिंसिपल गुस्से में पूछते हैं कि यह किसने किया। एक छात्र विनम्रता से बात सँभालता है, दूसरा व्यंग्य से कहता है, 'पुरानी ट्रॉफ़ी थी, अपने-आप टूट गई।'
राम और लक्ष्मण के व्यवहार के आधार पर बताइए कि किस छात्र का तरीका स्थिति को सुलझाएगा और क्यों।
Try it first, then show the solutionSolution
- राम: 'होइहि केउ एक दास तुम्हारा' — विनम्रता से क्रोध कम करने का प्रयास।
- लक्ष्मण: 'का छति लाभु जून धनु तोरें' — तर्क सही, पर व्यंग्य से क्रोध और भड़का।
- निष्कर्ष: विनम्र छात्र का तरीका स्थिति सुलझाएगा।
Answer: विनम्र छात्र का तरीका सही है। राम की तरह विनम्रता क्रोध को शांत करती है, जबकि लक्ष्मण जैसा व्यंग्य, तर्क सही होने पर भी, क्रोध को और भड़काता है।
Memory hook: राम का जल, लक्ष्मण की आग: गुस्से पर पानी डालो, घी नहीं।
शक्ति का अहंकार
कल्पना कीजिए कि स्कूल का सबसे अच्छा खिलाड़ी हर छोटी गलती पर जूनियर खिलाड़ियों को धमकाता है और अपनी ट्रॉफ़ियाँ गिनाता है।
परशुराम के आत्म-परिचय से इस खिलाड़ी के व्यवहार की तुलना कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- परशुराम: अपनी उपलब्धियाँ गिनाकर (धरती राजाओं से रहित करना, सहस्रबाहु की भुजाएँ काटना) डराते हैं।
- खिलाड़ी: ट्रॉफ़ियाँ गिनाकर जूनियरों को डराता है।
- परिणाम: दोनों सम्मान नहीं, विरोध और उपहास पाते हैं।
Answer: दोनों अपनी उपलब्धियाँ गिनाकर दूसरों को डराते हैं। जैसे लक्ष्मण ने परशुराम के अहंकार का उपहास किया, वैसे ही ऐसा खिलाड़ी सम्मान नहीं, विरोध पाता है।
Memory hook: फरसा दिखाने से नहीं, व्यवहार से बड़ा बनते हैं।
गलती के लिए क्षमा माँगना
मान लीजिए किसी बहस में आपने अपने दादाजी से तर्क तो सही दिए, पर कुछ कड़वे शब्द भी कह दिए।
लक्ष्मण के अंतिम दोहे के आधार पर बताइए कि आपको क्या करना चाहिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- लक्ष्मण: 'जो बिलोकि अनुचित कहेउँ छमहु महामुनि धीर' — अनुचित कहने पर क्षमा माँगी।
- सीख: तर्क सही हो तो भी कड़वे शब्दों के लिए क्षमा माँगनी चाहिए।
- आचरण: दादाजी से क्षमा माँगना।
Answer: मुझे दादाजी से क्षमा माँगनी चाहिए। लक्ष्मण ने भी तर्क देने के बाद अनुचित शब्दों के लिए 'छमहु महामुनि धीर' कहकर क्षमा माँगी थी।
Memory hook: तर्क जीतो, रिश्ता नहीं हारो: लक्ष्मण का 'छमहु'।
Topics in this chapter
- लक्ष्मण का चरित्र-चित्रणComing soon
- परशुराम का चरित्र-चित्रणComing soon
- राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद की व्याख्याComing soon
- राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद प्रश्न-उत्तरComing soon
- संवाद में व्यंग्य, अलंकार और भाषा-सौंदर्यComing soon
- राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: लक्ष्मण के व्यंग्य और तर्क
How the board asks तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | 8-12 पंक्तियों का काव्यांश देकर पाँच MCQ: किसने किससे क्या कहा, किसी शब्द का अर्थ (जैसे कोही, रिपु, जड़), वक्ता की वाणी कैसी थी, किसी पात्र का परिचय। | पहले काव्यांश को पंक्ति दर पंक्ति पढ़कर वक्ता पहचानें। शब्द-संपदा के अर्थ याद रखें। विकल्प चुनते समय काव्यांश की पंक्ति से मिलान करें, अनुमान से नहीं। |
| कथन-कारण प्रश्न | कथन (A) में किसी पात्र का व्यवहार और कारण (R) में उसकी वजह दी जाती है, जैसे लक्ष्मण का मुस्कुराना या उनका व्यवहार विनम्र होना। | दोनों को अलग-अलग पाठ से जाँचें: क्या कथन सही है, क्या कारण सही है, और क्या कारण सचमुच कथन को समझाता है। ध्यान रखें कि लक्ष्मण की वाणी 'मृदु' है पर भाव व्यंग्य भरा है। |
| पात्रों के स्वभाव पर प्रश्न (2 अंक, 25-30 शब्द) | राम, लक्ष्मण या परशुराम के स्वभाव की तुलना; राम की उपस्थिति कम पर प्रभाव अधिक कैसे; परशुराम ने धनुष तोड़ने वाले को शत्रु क्यों कहा। | दो स्पष्ट बिंदु लिखें और हर बिंदु के साथ पाठ का प्रमाण (घटना या छोटा उद्धरण) दें। शब्द-सीमा 30 से आगे न बढ़ाएँ। |
| तर्क, व्यंग्य और भाव पर प्रश्न (2 अंक) | लक्ष्मण ने धनुष टूटने के कौन-से तर्क दिए; किसी पंक्ति का भाव या व्यंग्य स्पष्ट कीजिए; सभा का दृश्य अपने शब्दों में लिखिए। | पंक्ति का सीधा अर्थ, फिर उसमें छिपा व्यंग्य लिखें। तर्क पूछे जाएँ तो कम से कम दो-तीन तर्क क्रम से दें। |
| अलंकार और भाषा-सौंदर्य | किसी पंक्ति में अलंकार पहचानना या तुलसी की भाषा (अवधी, दोहा-चौपाई, व्यंजना शैली, वीर रस) की विशेषता बताना। | अलंकार का नाम, उसका कारण (कौन-सा वर्ण दोहराया गया, कौन-सा वाचक शब्द है) और प्रभाव तीनों लिखें। |
| मूल्य-आधारित / विचारात्मक प्रश्न (HOTS) | 'शक्ति और साहस के साथ विनम्रता हो तो अच्छा प्रभाव पड़ता है'—पाठ के आलोक में विचार; क्या लक्ष्मण का व्यवहार उचित था; क्रोध का परिणाम। | अपना मत स्पष्ट लिखें, पाठ के एक पात्र के व्यवहार से उसे जोड़ें (जैसे राम का विनय, लक्ष्मण का व्यंग्य) और एक पंक्ति में निष्कर्ष दें। |
Tricks to remember तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
संवाद का क्रम: 'विनय-क्रोध-धनुही-परिचय-फरसा-कुम्हड़बतिया-क्षमा'
(1) विनय: राम कहते हैं, तोड़ने वाला आपका दास होगा; (2) क्रोध: परशुराम, वह सहस्रबाहु जैसा शत्रु; (3) धनुही: लक्ष्मण, बचपन में बहुत धनुहियाँ तोड़ीं; (4) परिचय: परशुराम, बाल ब्रह्मचारी, क्षत्रियकुल द्रोही; (5) फरसा: गर्भ के बच्चों का नाश करने वाला; (6) कुम्हड़बतिया: लक्ष्मण, हम तर्जनी से मुरझाने वाले नहीं; (7) क्षमा: 'छमहु महामुनि धीर'।
Use it when: काव्यांश किस मोड़ का है, यह पहचानकर वक्ता और श्रोता सही लिखें।
परशुराम के नाम (संबोधन)
मुनि कोही, परसुधर, भृगुकुलकेतू, भृगुसुत, भृगुबंसमनि, महामुनि धीर — 'भृगु' वाले सारे नाम परशुराम के हैं।
Use it when: बहुविकल्पी प्रश्नों में संबोधन से वक्ता पहचानें।
तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: लक्ष्मण का व्यंग्य: 'फूँक से पहाड़'
बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी॥
पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥
(1) · 1 mark · MCQ
लक्ष्मण किस प्रकार बोले?
(क) क्रोध से चिल्लाकर
(ख) हँसकर, मधुर वाणी में
(ग) डरते हुए, धीमे स्वर में
(घ) रोते हुए(2) · 1 mark · MCQ
'अहो मुनीसु महाभट मानी' में लक्ष्मण परशुराम को क्या कहकर संबोधित करते हैं?
(क) शांत स्वभाव वाला साधु
(ख) अपने को महान योद्धा मानने वाला मुनि
(ग) राजा जनक का मित्र
(घ) शिव का पुजारी(3) · 1 mark · MCQ
'चहत उड़ावन फूँकि पहारू' का आशय है—
(क) परशुराम सचमुच पहाड़ उड़ा सकते हैं
(ख) परशुराम केवल धमकियों से लक्ष्मण को डराना चाहते हैं, जो असंभव है
(ग) लक्ष्मण पहाड़ पर चढ़ना चाहते हैं
(घ) आँधी से पहाड़ उड़ गया(4) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): लक्ष्मण के इन वचनों में व्यंग्य है।
कारण (R): वे ऊपर से मृदु वाणी में बोलते हैं, पर परशुराम के बार-बार कुल्हाड़ा दिखाने का उपहास करते हैं।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, पर कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता
(ग) कथन (A) सही है, पर कारण (R) गलत है
(घ) कथन (A) गलत है, पर कारण (R) सही है(5) · 1 mark · MCQ
'पुनि पुनि' में कौन-सा अलंकार है?
(क) उपमा
(ख) रूपक
(ग) पुनरुक्ति प्रकाश
(घ) उत्प्रेक्षा
Show the answersAnswers
- (ख) हँसकर, मधुर वाणी में
- (ख) अपने को महान योद्धा मानने वाला मुनि
- (ख) परशुराम केवल धमकियों से लक्ष्मण को डराना चाहते हैं, जो असंभव है
- (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है
- (ग) पुनरुक्ति प्रकाश
Extract 2: परशुराम की चेतावनी
मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर॥
(1) · 1 mark · MCQ
'महीसकिसोर' संबोधन किसके लिए है?
(क) राम के लिए
(ख) लक्ष्मण के लिए
(ग) राजा जनक के लिए
(घ) विश्वामित्र के लिए(2) · 1 mark · MCQ
'अर्भक' शब्द का अर्थ है—
(क) बच्चा
(ख) शत्रु
(ग) राजा
(घ) शस्त्र(3) · 1 mark · MCQ
परशुराम लक्ष्मण से 'मातु पितहि जनि सोचबस करसि' क्यों कहते हैं?
(क) वे लक्ष्मण के माता-पिता को जानते हैं
(ख) वे धमकी देते हैं कि लक्ष्मण अपनी मृत्यु बुलाकर माता-पिता को शोक में न डाले
(ग) वे लक्ष्मण को घर लौटने की सलाह देते हैं
(घ) वे लक्ष्मण के माता-पिता की प्रशंसा करते हैं(4) · 1 mark · MCQ
परशुराम अपने फरसे को कैसा बताते हैं?
(क) पुराना और टूटा हुआ
(ख) गर्भ के बच्चों तक का नाश करने वाला, अत्यंत भयानक
(ग) केवल पूजा के काम आने वाला
(घ) शिव का दिया हुआ धनुष(5) · 1 mark · MCQ
इस दोहे से परशुराम के स्वभाव की कौन-सी विशेषता प्रकट होती है?
(क) विनम्रता
(ख) क्षमाशीलता
(ग) क्रोध और अपनी शक्ति का अहंकार
(घ) हास्य-प्रियता
Show the answersAnswers
- (ख) लक्ष्मण के लिए
- (क) बच्चा
- (ख) वे धमकी देते हैं कि लक्ष्मण अपनी मृत्यु बुलाकर माता-पिता को शोक में न डाले
- (ख) गर्भ के बच्चों तक का नाश करने वाला, अत्यंत भयानक
- (ग) क्रोध और अपनी शक्ति का अहंकार
तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: लक्ष्मण के तर्क · 2 marks · Short answerBoard level
परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?
Try it first, then show the solutionSolution
- बचपन में बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब क्रोध नहीं किया।
- हमारे लिए सब धनुष समान हैं; पुराने धनुष के टूटने से क्या हानि-लाभ?
- राम ने नए के भ्रम में देखा, छूते ही टूट गया; राम का दोष नहीं।
Answer: लक्ष्मण बोले कि बचपन में हमने बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब आपने क्रोध नहीं किया। यह पुराना धनुष राम के छूते ही टूट गया, इसमें उनका कोई दोष नहीं।
Example 2: राम और लक्ष्मण के स्वभाव की तुलना · 2 marks · Short answerHarder board level
परशुराम के क्रोध पर राम और लक्ष्मण की प्रतिक्रियाओं के आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ लिखिए।
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- राम: 'नाथ संभुधनु भंजनिहारा, होइहि केउ एक दास तुम्हारा' — विनम्र, शांत, धैर्यवान।
- लक्ष्मण: व्यंग्य, तर्क, निडरता — उग्र और वाक्पटु।
- तुलना: राम जल समान शीतल, लक्ष्मण अग्नि समान तीखे।
Answer: राम विनम्र, शांत और धैर्यवान हैं; वे परशुराम को 'नाथ' कहकर स्वयं को उनका दास बताते हैं। लक्ष्मण निडर, वाक्पटु और उग्र हैं; वे व्यंग्य से परशुराम को चिढ़ाते हैं।
Example 3: परशुराम का आत्म-परिचय · 2 marks · Short answerHarder board level
परशुराम ने सभा में अपने विषय में क्या-क्या कहा?
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- बाल ब्रह्मचारी, अत्यंत क्रोधी, क्षत्रिय कुल के शत्रु के रूप में विश्वविख्यात।
- भुजबल से धरती को कई बार राजाओं से रहित करके ब्राह्मणों को दे दी; सहस्रबाहु की भुजाएँ काटीं।
- फरसा गर्भ के बच्चों तक का नाश करने वाला।
Answer: परशुराम ने कहा कि मैं बाल ब्रह्मचारी, अति क्रोधी और क्षत्रिय कुल का शत्रु हूँ। मैंने कई बार धरती राजाओं से रहित कर ब्राह्मणों को दी, सहस्रबाहु की भुजाएँ काटीं।
Example 4: 'कुम्हड़बतिया' वाला व्यंग्य · 2 marks · Short answerHarder board level
"इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥" — इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
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- कुम्हड़बतिया: कुम्हड़े का छोटा कच्चा फल; मान्यता है कि तर्जनी दिखाने से मुरझा जाता है।
- भाव: हम इतने कमज़ोर नहीं कि आपकी धमकी से डर जाएँ।
- शैली: व्यंग्य और वीरता का मेल।
Answer: लक्ष्मण कहते हैं कि यहाँ कोई कुम्हड़े का कच्चा फल नहीं है, जो तर्जनी देखते ही मुरझा जाए। अर्थात हम निर्बल नहीं हैं, आपकी धमकियों से नहीं डरेंगे।
Example 5: साहस, शक्ति और विनम्रता · 2 marks · Short answerHOTS / competency
"साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है।" इस प्रसंग के आधार पर इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
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- परशुराम: शक्ति है, पर विनम्रता नहीं; क्रोध से स्थिति बिगड़ती है।
- राम: शक्तिशाली होकर भी विनम्र; वातावरण शांत करते हैं।
- निष्कर्ष: विनम्रता शक्ति को सम्मान दिलाती है।
Answer: परशुराम में शक्ति है, पर विनम्रता नहीं, इसलिए उनका क्रोध विवाद बढ़ाता है। राम शक्तिशाली होकर भी विनम्र हैं और स्थिति सँभालते हैं। विनम्रता से ही शक्ति सम्मान पाती है।
Example 6: प्रसंग में व्यंग्य का सौंदर्य · 2 marks · Short answerHOTS / competency
इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा सौंदर्य है। एक उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
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- व्यंग्य: ऊपर से आदर, भीतर उपहास।
- उदाहरण: 'अहो मुनीसु महाभट मानी' — मुनि को 'महाभट' कहकर उनके अहंकार पर चोट।
- प्रभाव: परशुराम का क्रोध और भड़कता है; संवाद नाटकीय बनता है।
Answer: लक्ष्मण ऊपर से आदर दिखाते, पर भीतर उपहास करते हैं। 'अहो मुनीसु महाभट मानी' में मुनि को 'महाभट' कहकर वे परशुराम के अहंकार पर चोट करते हैं; संवाद नाटकीय बनता है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-से तर्क दिए? (25-30 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| पहला तर्क: बचपन में बहुत धनुहियाँ तोड़ीं, तब क्रोध नहीं किया / सब धनुष समान | 1 |
| दूसरा तर्क: पुराना धनुष राम के छूते ही टूटा, राम का दोष नहीं | 1 |
पठित काव्यांश (राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद) पर आधारित पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, जिनमें एक कथन-कारण प्रश्न शामिल है (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| वक्ता-श्रोता या संबोधन की पहचान | 1 |
| कठिन शब्द का अर्थ (जैसे अर्भक, कुलिस) | 1 |
| पंक्ति का आशय | 1 |
| कथन-कारण या अलंकार | 1 |
| पात्र के स्वभाव का अनुमान | 1 |
Where students lose marks in तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: वक्ता और श्रोता उलट देना
संवाद में तीन पात्र हैं; 'महीसकिसोर', 'नृपबालक' लक्ष्मण के लिए और 'मुनीसु', 'भृगुसुत' परशुराम के लिए हैं।
Wrong working
'मातु पितहि जनि सोचबस करसि' लक्ष्मण ने परशुराम से कहा।
Right working
'मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर' परशुराम ने लक्ष्मण से कहा।
Do this: हर काव्यांश में पहले संबोधन देखें, फिर वक्ता तय करें।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: 'कुम्हड़बतिया' को कोई व्यक्ति या जगह समझना
कुम्हड़बतिया कुम्हड़े का छोटा कच्चा फल है; यह निर्बल व्यक्ति का प्रतीक है।
Do this: शब्द-संपदा के कठिन शब्द (कुलिस, अर्भक, कोही, महिदेव) याद रखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: अलंकार पहचानते समय उपमा और रूपक में भ्रम
'कोटि कुलिस सम बचनु' में 'सम' वाचक शब्द है, इसलिए उपमा; रूपक में वाचक शब्द नहीं होता।
Do this: सम, सा, सी, सरिस जैसे वाचक शब्द दिखें तो उपमा।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: पाठ में न आए प्रसंग (जैसे राम द्वारा परशुराम का धनुष चढ़ाना) उत्तर में लिख देना
पाठ्यपुस्तक का अंश लक्ष्मण की क्षमा-याचना वाले दोहे पर समाप्त होता है; बाहर की कथा पर अंक नहीं मिलते और गलत तथ्य से अंक कटते हैं।
Do this: केवल पाठ में दिए संवादों के आधार पर उत्तर लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 2 अंक के उत्तर में अवधी पंक्तियाँ ही दोहरा देना
परीक्षक भाव अपने शब्दों में चाहता है; पंक्ति उद्धरण केवल प्रमाण के लिए।
Do this: एक छोटी पंक्ति प्रमाण के रूप में, बाकी उत्तर सरल हिंदी में, 25-30 शब्द।
Usually costs: आधा से 1 अंक
तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: previous year questions
- Course A: Asked in 11 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 2.7 marks per paper; 11 questions in all, counting OR alternatives. In 2 of 4 sample papers.
- Course B: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).
Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.
Solved board questions from तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.
2026 Course A, set 3/1/1, Q10 · 6 marks · Very short answer
निर्धारित कविताओं के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए : 3 × 2 = 6
- (i)2 marks
परशुराम के आगमन के पश्चात् राजा जनक की सभा का दृश्य 'राम-लक्ष्मण-परशुराम' संवाद के आधार पर अपने शब्दों में वर्णित कीजिए।
- (ii)2 marks
'संगतकार' कविता में कवि जिसे संगतकार की मनुष्यता बता रहा है वह वास्तव में उसका कर्त्तव्य ही है। इस कथन के पक्ष में उचित तर्कों को प्रस्तुत कीजिए।
- (iii)2 marks
'यह दंतुरित मुस्कान' कविता में बाँस या बबूल की संज्ञा से किसे संबोधित किया गया है और क्यों?
- (iv)2 marks
'उत्साह' कविता का केन्द्रीय भाव स्पष्ट करते हुए लिखिए कि उसकी अभिव्यक्ति 'बादल' के सहारे क्यों की गई है?
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(i) धनुष-भंग के बाद परशुराम के क्रोधित रूप में आते ही सभा में भय छा गया और उपस्थित राजा सहम गए।
- 1 mark
राम विनम्रता से उन्हें शांत करते रहे, जबकि लक्ष्मण निर्भय व्यंग्य करते रहे। परशुराम की चेतावनी से क्रोध और बढ़ा और सब अनिष्ट की आशंका से भर उठे।
- 1 mark
(ii) तर्क 1: मुख्य गायक का साथ देना संगतकार का कर्त्तव्य है। यह पेशेवर प्रतिबद्धता है, कोई विशेष त्याग नहीं।
- 1 mark
तर्क 2: वह विशिष्ट उद्देश्यों के कारण संगतकार की भूमिका स्वीकार करता है और साथ देकर कोई अलग विशेष कार्य नहीं कर रहा। इसलिए इसे मनुष्यता कहना कर्त्तव्य का ही रूप है।
- 1 mark
(iii) कवि ने स्वयं को (पिता को) बाँस या बबूल कहा है।
- 1 mark
कारण: कठोर, नीरस और रूखे जीवन के कारण वे बाँस-बबूल जैसे हैं, जो शिशु की मुस्कान के स्पर्श से शेफालिका के फूल झराने लगे।
- 1 mark
(iv) केंद्रीय भाव: परिवर्तन और नवनिर्माण का आह्वान।
- 1 mark
बादल विध्वंस, विप्लव और क्रांति-चेतना के प्रतीक हैं। जैसे वे तपती धरती को राहत देते हैं, वैसे शोषित जनता की आकांक्षा पूरी होने की कल्पना की गई है।
Answer: (i) भय, राजाओं की आशंका, राम की विनम्रता, लक्ष्मण का व्यंग्य, परशुराम का क्रोध; (ii) कर्त्तव्य और पेशेवर प्रतिबद्धता; (iii) स्वयं कवि/पिता को, कठोर-नीरस जीवन के कारण; (iv) परिवर्तन/नवनिर्माण का आह्वान, बादल क्रांति के प्रतीक
Where the marks are
- (i) सभा के दृश्य के दो उपयुक्त बिंदु (1+1)
- (ii) कर्त्तव्य के पक्ष में दो तर्क (1+1)
- (iii) किसे संबोधित (1) और क्यों (1)
- (iv) केंद्रीय भाव (1) और बादल का कारण (1)
2026 Course A, set 3/3/1, Q7 · 5 marks · MCQCompetency-based
निम्नलिखित पठित काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : 5×1=5
नाथ संभुधनु भंजनिहारा, होइहि केउ एक दास तुम्हारा ॥
आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही ॥
सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई ॥
सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा ॥
सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा ॥
सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अवमाने ॥
बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥
येहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू ॥
- (i)1 mark
राम ने शिव धनुष तोड़ने वाले को क्या कहा है ?
- (A)शिव का भक्त
- (B)शिव का दास
- (C)परशुराम का दास
- (D)विश्वामित्र का शिष्य
- (ii)1 mark
परशुराम के अनुसार शिव धनुष तोड़ने वाला उनके लिए किसके समान है ? इस कथन के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए :
I. शत्रु के समान
II. सहस्रबाहु के समान
III. सेवक के समान- (A)केवल I और II सही हैं।
- (B)केवल II और III सही हैं।
- (C)केवल I और III सही हैं।
- (D)I, II और III तीनों सही हैं।
- (iii)1 mark
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : परशुराम के अहंकारपूर्ण वचनों को सुनकर लक्ष्मण मुस्कुराने लगे।
कारण : उन्होंने बचपन से ही बहुत से धनुष तोड़े हैं।- (A)कथन सही है, किंतु कारण ग़लत है।
- (B)कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
- (C)कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की उचित व्याख्या करता है।
- (D)कथन और कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण, कथन की उचित व्याख्या नहीं करता है।
- (iv)1 mark
इस काव्यांश के आधार पर लक्ष्मण की वाणी किस प्रकार की थी ?
- (A)कटु
- (B)व्यंग्यपूर्ण
- (C)गंभीर
- (D)विनोदप्रिय
- (v)1 mark
परशुराम सभा में मौजूद राजाओं से क्या कह रहे हैं ?
- (A)शत्रु को उनके सामने उपस्थित कर दें।
- (B)दोषी स्वयं ही सभा से अलग हो जाए।
- (C)सभी राजा सभा से अलग हो जाएँ।
- (D)सभी राजा इसके लिए दोषी हैं।
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- 1 mark
(i) राम ने कहा कि शिव धनुष तोड़ने वाला कोई आपका (परशुराम का) दास होगा। विकल्प (C)।
- 1 mark
(ii) परशुराम के अनुसार धनुष तोड़ने वाला शत्रु और सहस्रबाहु के समान है, सेवक नहीं। केवल I और II सही। विकल्प (A)।
- 1 mark
(iii) दोनों सही हैं, पर बचपन में धनुही तोड़ना मुस्कुराने की सीधी व्याख्या नहीं, लक्ष्मण का परशुराम की अहंकारी बातों पर हँसना है। विकल्प (D)।
- 1 mark
(iv) लक्ष्मण की वाणी 'अवमाने' (अपमान सहित) और धनुही की बात के कारण व्यंग्यपूर्ण थी। विकल्प (B)।
- 1 mark
(v) परशुराम कहते हैं कि दोषी स्वयं समाज से अलग हो जाए, नहीं तो सब राजा मारे जाएँगे। विकल्प (B)।
Answer: (i) C; (ii) A; (iii) D; (iv) B; (v) B
Where the marks are
- प्रत्येक सही विकल्प (1 अंक × 5)
2023 Course A, set 3/6/1, Q10 · 2 marks · MCQ
पद्य खंड के पाठों के आधार पर निम्नलिखित दो बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए : (2 × 1 = 2)
- (i)1 mark
'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' में परशुराम बार-बार विश्वामित्र से लक्ष्मण की शिकायत क्यों कर रहे हैं ?
- (a)विश्वामित्र सभी मुनियों में श्रेष्ठ थे।
- (b)विश्वामित्र राम और लक्ष्मण के कुल गुरु थे।
- (c)विश्वामित्र सीता-स्वयंवर में जनक के पुरोहित थे।
- (d)विश्वामित्र उस समय राम-लक्ष्मण के गुरु एवं अभिभावक थे।
- (ii)1 mark
'दंतुरित मुस्कान' का कवि स्वयं को चिर प्रवासी क्यों कह रहा है ?
- (a)वह पहली बार बच्चे से मिल रहा है।
- (b)कवि सदा यात्रा पर रहने वाला व्यक्ति है।
- (c)कवि लंबी यात्रा के बाद घर आया है।
- (d)कवि का कोई घर नहीं है वह खानाबदोश है।
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(i) विश्वामित्र उस समय राम-लक्ष्मण के गुरु एवं अभिभावक थे, इसलिए परशुराम उनसे शिकायत करते हैं: (d)।
- 1 mark
(ii) कवि सदा यात्रा पर रहने वाला व्यक्ति है, इसलिए स्वयं को चिर प्रवासी कहता है: (b)।
Answer: (i) d; (ii) b
Where the marks are
- प्रत्येक सही विकल्प के लिए (1 अंक) × 2
Every तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद question, by year
Course A (13 questions, sample papers included)
Course B (0 questions, sample papers included)
Practice questions on तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerBoard level
राम ने परशुराम से धनुष तोड़ने वाले के बारे में क्या कहा?
Hint
'नाथ संभुधनु भंजनिहारा' वाली पंक्ति देखें।
Answer
उत्तर-बिंदु: हे नाथ, शिव-धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा; क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते।
आदर्श उत्तर: राम ने विनम्रता से कहा कि हे नाथ, शिव-धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा। आपकी क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते?
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
परशुराम ने 'सेवक' की क्या परिभाषा दी?
Hint
'सेवकु सो जो करै सेवकाई' पंक्ति देखें।
Answer
उत्तर-बिंदु: सेवक वह है जो सेवा करे; शत्रु जैसा काम करने वाले से लड़ाई ही की जाती है।
आदर्श उत्तर: परशुराम ने कहा कि सेवक वह होता है जो सेवा का काम करे। जो शत्रु जैसा काम करे, उससे तो लड़ाई ही की जाती है।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
परशुराम ने धनुष तोड़ने वाले को किसके समान शत्रु बताया और सभा को क्या चेतावनी दी?
Hint
सहस्रबाहु और 'सो बिलगाउ बिहाइ समाजा'।
Answer
उत्तर-बिंदु: सहस्रबाहु के समान शत्रु; वह सभा छोड़कर अलग हो जाए, नहीं तो सब राजा मारे जाएँगे।
आदर्श उत्तर: परशुराम ने धनुष तोड़ने वाले को सहस्रबाहु के समान अपना शत्रु बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि वह सभा से अलग हो जाए, नहीं तो सारे राजा मारे जाएँगे।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
लक्ष्मण ने परशुराम के कुल का सम्मान करने की बात किन शब्दों में कही?
Hint
'सुर महिसुर हरिजन अरु गाई' वाली पंक्ति देखें।
Answer
उत्तर-बिंदु: देवता, ब्राह्मण, भक्त और गाय पर हमारे कुल में वीरता नहीं दिखाई जाती; इन्हें मारना पाप, हारना अपयश।
आदर्श उत्तर: लक्ष्मण ने कहा कि हमारे कुल में देवता, ब्राह्मण, भगवान के भक्त और गाय पर वीरता नहीं दिखाई जाती। इन्हें मारने में पाप और हारने में अपयश है।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level
'कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा' में कौन-सा अलंकार है? इसका भाव भी लिखिए।
Hint
'सम' शब्द किस अलंकार का वाचक है?
Answer
उत्तर-बिंदु: उपमा अलंकार ('सम' वाचक शब्द); वचन करोड़ों वज्रों के समान कठोर; इसलिए धनुष-बाण-कुठार धारण करना व्यर्थ।
आदर्श उत्तर: इसमें उपमा अलंकार है। लक्ष्मण कहते हैं कि आपके वचन ही करोड़ों वज्रों के समान कठोर हैं, इसलिए धनुष, बाण और कुठार धारण करना व्यर्थ है।
Q6 · 2 marks · Short answerHarder board level
'बालकु बोलि बधौं नहि तोही' — परशुराम ने लक्ष्मण को अब तक क्यों नहीं मारा था?
Hint
वे लक्ष्मण को क्या समझकर छोड़ रहे थे?
Answer
उत्तर-बिंदु: बालक समझकर छोड़ा; लक्ष्मण उन्हें केवल मुनि समझ रहे हैं; वे अपनी क्रोधी प्रकृति याद दिलाते हैं।
आदर्श उत्तर: परशुराम लक्ष्मण को बालक समझकर नहीं मार रहे थे। उन्हें लगा कि लक्ष्मण उन्हें केवल साधारण मुनि समझते हैं, इसलिए वे अपना क्रोधी स्वभाव याद दिलाते हैं।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
लक्ष्मण का बार-बार परशुराम को चिढ़ाना क्या उचित था? पाठ के आधार पर अपना मत दीजिए।
Hint
अन्याय का विरोध और बड़ों का सम्मान — दोनों पक्ष तौलें।
Answer
उत्तर-बिंदु: अनुचित धमकी का विरोध उचित; पर बड़े और मुनि का उपहास मर्यादा के विरुद्ध; अंत में लक्ष्मण स्वयं क्षमा माँगते हैं।
आदर्श उत्तर: अनुचित धमकी का विरोध उचित था, पर किसी बड़े मुनि का बार-बार उपहास मर्यादा के विरुद्ध है। इसीलिए अंत में लक्ष्मण स्वयं 'छमहु महामुनि धीर' कहकर क्षमा माँगते हैं।
Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार क्रोध कभी-कभी आवश्यक होता है। परशुराम का क्रोध इस कसौटी पर कितना खरा उतरता है?
Hint
उचित क्रोध अन्याय रोकता है; क्या धनुष टूटना अन्याय था?
Answer
उत्तर-बिंदु: उचित क्रोध अन्याय रोकने के लिए; यहाँ धनुष संयोग से टूटा, कोई अन्याय नहीं; अतः परशुराम का क्रोध अनुचित और अहंकार भरा।
आदर्श उत्तर: उचित क्रोध अन्याय रोकने के लिए होता है। यहाँ धनुष राम के छूते ही टूटा था, कोई अन्याय नहीं हुआ। इसलिए परशुराम का क्रोध अनुचित और अहंकार भरा था।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.यह अंश किस ग्रंथ के किस कांड से लिया गया है?Show answer
रामचरितमानस के बाल कांड से।
2.रामचरितमानस किस भाषा में है और उसका मुख्य छंद कौन-सा है?Show answer
अवधी में; मुख्य छंद चौपाई, बीच-बीच में दोहे।
3.परशुराम ने धनुष तोड़ने वाले को किसके समान शत्रु कहा?Show answer
सहस्रबाहु के समान।
4.'कुलिस' और 'कोही' के अर्थ क्या हैं?Show answer
कुलिस: कठोर (वज्र); कोही: क्रोधी।
5.दोहे और चौपाई में मात्राएँ कितनी होती हैं?Show answer
दोहा: पहली-तीसरी पंक्ति में 13-13, दूसरी-चौथी में 11-11; चौपाई: हर पंक्ति में 16।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप राम के विनय वाली पहली पंक्ति और उसका अर्थ बता सकते हैं?
- क्या आप लक्ष्मण के तीन तर्क (धनुही, सब धनुष समान, छूते ही टूटा) क्रम से लिख सकते हैं?
- क्या आप परशुराम के आत्म-परिचय की चार बातें गिना सकते हैं?
- क्या आप 'कुम्हड़बतिया' और 'फूँक से पहाड़' वाले व्यंग्य समझा सकते हैं?
- क्या आप 'कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा' और 'पुनि पुनि' के अलंकार पहचान सकते हैं?
तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: frequently asked questions
तुलसीदास का संक्षिप्त परिचय क्या है?
पाठ्यपुस्तक के अनुसार तुलसीदास का जन्म सन् 1532 में उत्तर प्रदेश के बाँदा ज़िले के राजापुर गाँव में हुआ था; कुछ विद्वान सोरों (ज़िला एटा) को उनका जन्मस्थान मानते हैं। रामचरितमानस उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना है, जो अवधी में है; विनयपत्रिका और कवितावली ब्रजभाषा में हैं। गीतावली, दोहावली और कृष्णगीतावली भी उनकी रचनाएँ हैं। सन् 1623 में काशी में उनका देहावसान हुआ।
राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद किस ग्रंथ से लिया गया है?
यह अंश तुलसीदास के रामचरितमानस के बाल कांड से लिया गया है। इसकी भाषा अवधी है और इसमें मुख्य रूप से चौपाई तथा बीच-बीच में दोहा छंद है।
परशुराम क्रोधित क्यों थे?
सीता स्वयंवर में राम ने शिव-धनुष तोड़ दिया था। शिव-धनुष को खंडित देखकर परशुराम आपे से बाहर हो गए और धनुष तोड़ने वाले को सहस्रबाहु के समान अपना शत्रु कहने लगे।
लक्ष्मण ने धनुष टूटने के पक्ष में कौन-से तर्क दिए?
लक्ष्मण ने कहा कि बचपन में बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब क्रोध नहीं हुआ, तो इस धनुष पर ममता क्यों। उनके लिए सब धनुष समान हैं, पुराने धनुष के टूटने से कोई हानि-लाभ नहीं। धनुष छूते ही टूट गया, इसलिए राम का दोष नहीं और परशुराम का क्रोध अकारण है।
'कुम्हड़बतिया' का क्या अर्थ है और लक्ष्मण ने यह शब्द क्यों कहा?
शब्द-संपदा के अनुसार कुम्हड़बतिया का अर्थ है बहुत कमज़ोर व्यक्ति या कुम्हड़े का बहुत छोटा फल। लक्ष्मण ने कहा कि यहाँ कोई कुम्हड़बतिया नहीं जो तर्जनी देखकर मर जाए, यानी वे परशुराम के फरसे से डरने वाले नहीं हैं।
'कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा' में कौन-सा अलंकार है?
इसमें उपमा अलंकार है, क्योंकि परशुराम के वचनों की तुलना करोड़ों कुलिश से 'सम' वाचक शब्द के साथ की गई है। इससे लक्ष्मण का व्यंग्य तीखा हो जाता है।
इस प्रसंग में राम की भूमिका क्या है?
राम बहुत कम बोलते हैं, पर विनम्रता से परशुराम को 'नाथ' कहकर स्वयं को उनका दास बताते हैं। पाठ की भूमिका के अनुसार राम के विनय, विश्वामित्र के समझाने और राम की शक्ति की परीक्षा के बाद परशुराम का गुस्सा शांत होता है।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-अ (002), कक्षा 10, 2026-27; NCERT क्षितिज भाग 2 (Reprint 2026-27), राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद