राही मासूम रज़ा – टोपी शुक्ला: सारांश, पात्र और प्रश्न Class 10
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'टोपी शुक्ला' राही मासूम रज़ा का पाठ है, जो संचयन भाग 2 में है। इसमें हिंदू बालक टोपी और मुसलमान बालक इफ़्फ़न की दोस्ती है। टोपी का इफ़्फ़न की दादी से गहरा प्रेम है और नवीं कक्षा में दो बार फ़ेल होने का दुख भी है। CBSE इस पाठ से 50-60 शब्दों के 3 अंक वाले प्रश्न पूछता है।
What राही मासूम रज़ा – टोपी शुक्ला is about
'टोपी शुक्ला' पूरक पाठ्यपुस्तक संचयन भाग 2 का तीसरा पाठ है। इसके लेखक राही मासूम रज़ा हैं। यह एक कथा है, जिसे कथाकार स्वयं बीच-बीच में बोलकर सुनाता है। पाठ बताता है कि प्रेम और अपनापन धर्म, जाति और भाषा की दीवारें नहीं मानते। साथ ही यह भरे-पूरे घर में अकेले पड़े एक बच्चे के मन की पीड़ा भी दिखाता है।
बोर्ड परीक्षा में यह पाठ खंड ग के प्रश्न 11 में आता है। वहाँ संचयन के तीन प्रश्नों में से कोई दो करने होते हैं। हर प्रश्न 3 अंक का है और उत्तर 50-60 शब्दों में लिखना होता है। इस पुस्तक पर गद्यांश वाला प्रश्न नहीं आता। इसलिए पूरी कहानी, पात्रों का स्वभाव और पाठ का संदेश अच्छी तरह समझना ज़रूरी है।
In real board papers: Course A, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026); Course B, asked in 4 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 1.1 marks per paper. See the questions
राही मासूम रज़ा – टोपी शुक्ला: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
कथाकार शुरू में बताता है कि इफ़्फ़न टोपी का पहला दोस्त था। दोनों अलग परंपराओं में पले, फिर भी एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। टोपी का पूरा नाम बलभद्र नारायण शुक्ला है और इफ़्फ़न का सय्यद जरगाम मुरतुज़ा।
इफ़्फ़न के दादा-परदादा प्रसिद्ध मौलवी थे। उनकी वसीयत थी कि लाश करबला ले जाई जाए। पर इफ़्फ़न के पिता हिंदुस्तानी कब्रिस्तान में दफ़न हुए। इफ़्फ़न की दादी एक ज़मींदार की बेटी थीं और पूरब से ब्याहकर लखनऊ आई थीं। वे जीवन भर पूरबी बोली बोलती रहीं। मौलवी के घर में बेटे की शादी पर गाना-बजाना नहीं हो सका, इसलिए उन्होंने इफ़्फ़न की छठी पर जी भरकर जश्न मनाया। मरते समय उन्होंने कहा कि लाश उनके अपने घर भेज दी जाए। वह घर अब कस्टोडियन का हो चुका था। वे बनारस में दफ़न हुईं।
टोपी को दादी की बोली अपनी माँ जैसी लगती थी। उसे अपनी दादी सुभद्रादेवी से नफ़रत थी। एक दिन खाने की मेज़ पर उसने माँ को 'अम्मी' कह दिया। घर में हंगामा हो गया। माँ रामदुलारी ने उसे बहुत पीटा, पर उसने इफ़्फ़न के घर न जाने की बात नहीं मानी। मुन्नी बाबू ने झूठ कहा कि टोपी ने कबाब खाए। सच यह था कि टोपी ने मुन्नी बाबू को कबाब खाते देखा था।
अगले दिन टोपी ने इफ़्फ़न से दादी बदलने को कहा। तभी खबर आई कि इफ़्फ़न की दादी नहीं रहीं। दादी के बिना टोपी को वह भरा घर खाली लगा। दस अक्तूबर सन् पैंतालीस को इफ़्फ़न के पिता की बदली मुरादाबाद हो गई। नए कलेक्टर के बेटों ने टोपी का मज़ाक उड़ाया और कुत्ता छोड़ दिया, जिससे उसे पेट में सात सुइयाँ लगीं।
अब बूढ़ी नौकरानी सीता ही उसका दुख समझती थी। जाड़े में टोपी को मुन्नी बाबू का उतरा कोट मिला, जो उसने केतकी के बेटे को दे दिया। इस पर फिर उसकी पिटाई हुई। टोपी नवीं में दो बार फ़ेल हुआ। पहले साल घरवाले उसे पढ़ने नहीं देते थे, दूसरे साल टाइफ़ाइड हो गया। छोटे बच्चों के साथ बैठना, मास्टरों के ताने और वहीद की बात उसे चुभ गई। चुनाव के शोर के बीच भी वह तीसरे साल थर्ड डिवीज़न में पास हुआ। दादी ने इस पर भी ताना मारा।
Themes and message
प्रेम और अपनापन धर्म-जाति से ऊपर
पाठ का मुख्य संदेश यह है कि सच्चा रिश्ता मन से बनता है, धर्म या जाति से नहीं। टोपी हिंदू था और इफ़्फ़न की दादी मुसलमान। टोपी को उनका नाम तक मालूम नहीं था और उसने उनके हाथ की कोई चीज़ भी नहीं खाई थी। फिर भी दोनों में गहरा प्रेम था। दादी की मृत्यु पर टोपी कोने में बैठकर रोया। इससे पता चलता है कि अपनापन बाहरी नियमों पर नहीं टिकता। जहाँ समझ और स्नेह मिलता है, वही अपना लगता है।
From the text: कथाकार कहता है, "प्रेम इन बातों का पाबंद नहीं होता।" दादी के न होने से टोपी को भरा हुआ घर भी खाली लगा।
भरे-पूरे घर में अकेलापन
टोपी और इफ़्फ़न की दादी दोनों अपने ही घर में अकेले थे। दादी की पूरबी बोली और उनके शौक मौलवी के घर में दबे रहे। टोपी को घर के सब छोटे-बड़े डाँटते थे, माँ पीटती थी, भाई चुगली करते थे। दोनों ने एक-दूसरे का अकेलापन दूर किया। बाद में टोपी की यही स्थिति स्कूल में भी हुई। इससे पता चलता है कि लोगों के बीच रहकर भी मन अकेला हो सकता है, अगर कोई उसे समझे नहीं।
From the text: "दोनों अपने घरों में अजनबी और भरे घर में अकेले थे।" बाद में सीता से टोपी का प्रेम भी इसी कारण हुआ, क्योंकि दोनों को सब डाँटते थे।
भाषा, नाम और परंपरा की दीवारें
लेखक बताता है कि नाम और भाषा बदलने से लोग आपस में बँट जाते हैं, जबकि भीतर से वे एक होते हैं। टोपी के घर में 'अम्मी' शब्द से ऐसा हंगामा हुआ मानो कोई बड़ा अपराध हो गया हो। दादी सुभद्रादेवी अपनी बहू की बोली को भी 'गँवारों की ज़बान' कहती थीं। इफ़्फ़न की दादी को भी अपनी बोली और शौक दबाने पड़े। इससे पता चलता है कि कठोर परंपराएँ लोगों के बीच दूरी बढ़ाती हैं।
From the text: "उर्दू और हिंदी एक ही भाषा, हिंदवी के दो नाम हैं।" 'अम्मी' सुनकर "परंपराओं की दीवार डोलने लगी।"
बच्चे के मन की उपेक्षा और शिक्षा व्यवस्था
टोपी पढ़ाई में तेज़ था, पर घर में कोई उसे पढ़ने नहीं देता था। कोई काम पकड़ा देता या भैरव उसकी कापियाँ फाड़ देता। फ़ेल होने पर घर ने ताने दिए, मास्टरों ने उसकी मिसाल देकर मज़ाक उड़ाया और उसका हाथ उठने पर भी जवाब नहीं पूछा। छोटे बच्चों के साथ बैठना उसे अजीब लगता था। इससे पता चलता है कि बच्चे की असफलता के पीछे परिवार और स्कूल का व्यवहार भी होता है। पाठ सहानुभूति वाली शिक्षा की ज़रूरत दिखाता है।
From the text: अंग्रेज़ी के मास्टर साहब का ताना और तीसरे साल पास होने पर दादी का व्यंग्य: "तीसरे बरस तीसरे दर्जे में पास तो हो गए।"
सच्ची मित्रता
टोपी और इफ़्फ़न की दोस्ती में धर्म, पद या अमीरी का कोई स्थान नहीं था। टोपी ने अपनी हर बात इफ़्फ़न को बताई और पिटकर भी उसके घर जाना नहीं छोड़ा। दादी की मृत्यु पर दोनों दोस्त चुपचाप साथ रोए। इसके उलट नए कलेक्टर के बेटों को अपने पद का घमंड था, इसलिए वे टोपी के दोस्त न बन सके। इससे पता चलता है कि मित्रता की कसौटी आपसी समझ और विश्वास है।
From the text: टोपी ने मुन्नी बाबू की कोई बात "इफ़्फ़न के सिवा" किसी को नहीं बताई। कलेक्टर के बेटों ने "टोपी को मुँह नहीं लगाया"।
Characters
टोपी (बलभद्र नारायण शुक्ला)
कहानी का नायक; डॉक्टर भृगु नारायण शुक्ला के घर का बालक और इफ़्फ़न का दोस्त।
- प्रेम का भूखा और भावुक
- अपनी बात पर अड़ा रहने वाला, ज़िद्दी
- चुगलखोर नहीं, ईमानदार
- स्वाभिमानी
- तेज़ पर उपेक्षित
माँ के मारते-मारते थक जाने पर भी उसने नहीं कहा कि वह इफ़्फ़न के घर नहीं जाएगा। मुन्नी बाबू की कबाब वाली बात उसने इफ़्फ़न के सिवा किसी को नहीं बताई। उतरन का कोट उसने केतकी के बेटे को दे दिया। पाठ कहता है कि वह काफ़ी तेज़ था, पर उसे कोई पढ़ने नहीं देता था।
इफ़्फ़न (सय्यद जरगाम मुरतुज़ा)
टोपी का पहला दोस्त; कलेक्टर सय्यद मुरतुज़ा हुसैन का बेटा।
- सच्चा मित्र
- दादी से विशेष प्रेम करने वाला
- समझदार और व्यावहारिक
दादी बदलने की बात पर उसने समझाया कि उसकी दादी उसके अब्बू की अम्माँ भी हैं। वह दादी से इसलिए ज़्यादा प्यार करता था कि उन्होंने कभी उसका दिल नहीं दुखाया। दादी की मृत्यु पर वह टोपी के साथ चुपचाप रोया।
इफ़्फ़न की दादी
इफ़्फ़न की दादी, जिनसे टोपी का गहरा स्नेह था।
- स्नेहमयी और ममता भरी
- अपनी बोली और मायके से जुड़ी हुई
- शौकीन, पर मन मसोसने वाली
- धर्म की संकीर्णता से दूर
वे जीवन भर पूरबी बोलती रहीं। बेटे को चेचक निकलने पर उन्होंने "माता" से माफ़ी माँगी। बेटे की शादी में गाने-बजाने की इच्छा दबानी पड़ी, तो इफ़्फ़न की छठी पर जश्न मनाया। टोपी को डाँटतीं तो भी उनका हर शब्द उसे मीठा लगता।
सुभद्रादेवी (टोपी की दादी)
टोपी की दादी; घर की परंपराओं की कठोर रक्षक।
- कठोर और रूढ़िवादी
- धर्म-भेद मानने वाली
- व्यंग्य करने वाली
'अम्मी' सुनकर वे गरज़ीं और खाने की मेज़ से उठ गईं। बहू रामदुलारी की बोली को उन्होंने "गँवारों की यह ज़बान" कहा। टोपी के थर्ड डिवीज़न में पास होने पर ताना मारा।
रामदुलारी (टोपी की माँ)
टोपी की माँ।
- घर के दबाव में रहने वाली
- गुस्से में बच्चे को पीटने वाली
- धार्मिक छुआछूत मानने वाली
'अम्मी' वाली घटना पर उसने टोपी को बहुत मारा। कबाब की बात सुनकर वह "राम राम राम!" कहकर दो कदम पीछे हट गई। सास की डाँट भी उसे सुननी पड़ती थी।
सीता (बूढ़ी नौकरानी)
टोपी के घर की बूढ़ी नौकरानी, जो उसका दुख समझती थी।
- स्नेही और सहानुभूति रखने वाली
- समझाने वाली
- स्वयं भी उपेक्षित
पिटाई के बाद वह टोपी को अपनी कोठरी में ले जाकर समझाती है कि दादी से ज़बान नहीं लड़ानी चाहिए। पाठ बताता है कि सीता और टोपी दोनों को घर के सब लोग डाँटते थे, इसलिए दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| कथाकार का बीच में बोलना (आत्मीय कथन-शैली) | लेखक कहता है कि वह हिंदू-मुस्लिम भाई-भाई की बात नहीं कर रहा, उसे कोई चुनाव नहीं लड़ना; वह तो एक कथाकार है। | पाठक को लगता है कि कोई सामने बैठकर कहानी सुना रहा है। इससे लेखक बिना भाषण दिए अपना संदेश बात-बात में रख देता है। |
| व्यंग्य | दादी का कहना "तीसरे बरस तीसरे दर्जे में पास तो हो गए" और मरने वाली बात पर लिखा "यह कथाकार का खयाल है, क्योंकि वह अभी तक मरा नहीं है!" | हल्की मुसकान के साथ पाठक घर के कठोर व्यवहार और समाज की संकीर्णता की चुभन महसूस करता है। |
| विरोध (कंट्रास्ट) | टोपी की अपनी दादी से नफ़रत और इफ़्फ़न की दादी से प्रेम; बहत्तर बरस की दादी और आठ साल का टोपी। | इस तुलना से पता चलता है कि रिश्ता खून से नहीं, व्यवहार से बनता है। उम्र और धर्म का अंतर प्रेम को रोक नहीं पाता। |
| बोलियों का प्रयोग | टोपी, दादी और सीता की भोजपुरी-पूरबी बोली, जैसे "तूँ हम्मे एक ठो दादियो ना दे सकत्यो?" | पात्र जीवंत और सच्चे लगते हैं। यह भी दिखता है कि बोली ही टोपी और दादी को जोड़ने वाला धागा थी। |
| मुहावरे और चित्रात्मक भाषा | "परंपराओं की दीवार डोलने लगी", "बड़े पापड़ बेलने पड़े", दादी का हर शब्द "शक्कर का खिलौना" बन जाना। | भाषा सरल होते हुए भी असरदार बनती है। भावनाएँ आँखों के सामने चित्र की तरह उभरती हैं। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
प्रेम इन बातों का पाबंद नहीं होता।
कथावाचक: दादी की मृत्यु के बाद; टोपी को उनका नाम तक मालूम नहीं था और उसने उनके हाथ की कोई चीज़ नहीं खाई थी।
पाठ का केंद्रीय संदेश: सच्चा प्रेम धर्म, जाति या खान-पान के नियम नहीं मानता।
दोनों अपने घरों में अजनबी और भरे घर में अकेले थे।
कथावाचक: टोपी और इफ़्फ़न की दादी के रिश्ते का वर्णन।
दोनों के अकेलेपन और एक-दूसरे की कमी पूरी करने को स्पष्ट करता है।
उर्दू और हिंदी एक ही भाषा, हिंदवी के दो नाम हैं।
कथावाचक: पाठ के आरंभ में नामों के चक्कर की बात करते हुए।
लेखक दिखाता है कि नाम बदलने से बँटवारा होता है, जबकि मूल में एकता है।
परंपराओं की दीवार डोलने लगी।
कथावाचक: खाने की मेज़ पर टोपी ने माँ को 'अम्मी' कहा।
एक शब्द से घर की कठोर धार्मिक परंपराओं का हिल जाना व्यंग्य के साथ दिखाया गया है।
टोपी ने खुद अपने दिल के टूटने की आवाज़ सुनी।
कथावाचक: इफ़्फ़न ने दादी बदलने से मना कर दिया।
प्रेम के लिए तरसते बच्चे की गहरी निराशा प्रकट होती है।
यह थर्ड डिवीज़न कलंक के टीके की तरह उसके माथे से चिपक गया।
कथावाचक: दो बार फ़ेल होने के बाद टोपी तीसरे साल पास हुआ।
दिखाता है कि घर और समाज ने टोपी की मुश्किलें समझे बिना उसे दोषी ठहराया।
वह अपने भरे-पूरे घर ही की तरह अपने स्कूल में भी अकेला हो गया था।
कथावाचक: नवीं कक्षा में दूसरी बार बैठने पर।
घर और स्कूल, दोनों जगह टोपी की उपेक्षा और भावनात्मक संघर्ष को दिखाता है।
हिंदू-मुसलमान अगर भाई-भाई हैं तो कहने की ज़रूरत नहीं।
कथावाचक: लेखक बताता है कि वह भाईचारे का नारा नहीं लगा रहा, केवल कथा सुना रहा है।
सद्भाव नारों से नहीं, व्यवहार से दिखता है; पूरी कहानी यही साबित करती है।
राही मासूम रज़ा – टोपी शुक्ला in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
प्रेम और अपनापन धर्म-जाति से ऊपर
मान लीजिए आपकी कॉलोनी में दूसरे धर्म के एक परिवार की बुज़ुर्ग नानी रोज़ शाम आपके छोटे भाई को कहानियाँ सुनाती हैं। भाई उनसे बहुत घुल-मिल गया है। घर के कुछ बड़े कहते हैं कि उसे वहाँ जाना बंद कर देना चाहिए।
टोपी और इफ़्फ़न की दादी के रिश्ते का उदाहरण देते हुए 50-60 शब्दों में लिखिए कि आप घर के बड़ों को क्या समझाएँगे।
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- पाठ का उदाहरण: अलग धर्म के होकर भी टोपी और इफ़्फ़न की दादी ने एक-दूसरे का अकेलापन मिटाया।
- टोपी के घरवाले यह रिश्ता नहीं समझ पाए; परिणाम मार और दुख।
- अपनी स्थिति से जोड़ना: नानी भाई को प्यार और कहानियाँ दे रही हैं।
- निष्कर्ष: रोकना बच्चे के मन को चोट पहुँचाएगा।
Answer: मैं बड़ों से कहूँगा कि प्रेम धर्म नहीं देखता। टोपी हिंदू था और इफ़्फ़न की दादी मुसलमान, फिर भी दोनों ने एक-दूसरे का अकेलापन मिटाया। टोपी के घरवाले यह रिश्ता नहीं समझ पाए और टोपी को मार खानी पड़ी। नानी भाई को प्यार और कहानियाँ दे रही हैं, इसलिए उसे रोकना उसके मन को चोट पहुँचाएगा।
Memory hook: कहानी सुनाने वाली नानी = इफ़्फ़न की दादी; प्रेम किसी बात का पाबंद नहीं होता।
भरे-पूरे घर में अकेलापन
मान लीजिए आपके चचेरे भाई रोहन के घर में सब उसके बड़े भाई के अच्छे अंकों की तारीफ़ करते हैं। रोहन जब भी पढ़ने बैठता है, उसे कोई न कोई काम दे दिया जाता है। परीक्षा में कम अंक आने पर सब उसे ताने मारते हैं।
टोपी की स्थिति से तुलना करते हुए बताइए कि रोहन भरे घर में अकेला क्यों है और घरवालों को क्या बदलना चाहिए।
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- समानता: टोपी को भी पढ़ने बैठते ही काम दे दिया जाता था।
- भैरव उसकी कापियों के हवाई जहाज़ बना डालता था; फ़ेल होने पर सारे घर ने ताने दिए।
- भरा घर होने पर भी समझने वाला साथ न होना ही अकेलापन है।
- सुझाव: तुलना छोड़ें, पढ़ने का समय और प्रोत्साहन दें।
Answer: रोहन की हालत टोपी जैसी है। टोपी को भी पढ़ने बैठते ही कोई काम दे दिया जाता था, भैरव उसकी कापियों के हवाई जहाज़ बना डालता था और फ़ेल होने पर सारे घर ने उसे ताने दिए। घर भरा था, पर वह अकेला था। घरवालों को तुलना छोड़कर रोहन को पढ़ने का समय और प्रोत्साहन देना चाहिए।
Memory hook: तुलना और ताने = भरे घर का अकेलापन, जैसे टोपी का।
बच्चे के मन की उपेक्षा और शिक्षा व्यवस्था
कल्पना कीजिए कि आप कक्षा नौ के मॉनीटर हैं। आपकी कक्षा में अमन नाम का एक छात्र दूसरी बार नौवीं में बैठा है। कुछ छात्र उसे 'पुराना खिलाड़ी' कहकर चिढ़ाते हैं और वह किसी से बात नहीं करता।
अबदुल वहीद के व्यवहार से तुलना करते हुए बताइए कि एक मॉनीटर के रूप में आप अमन के लिए क्या करेंगे।
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- पाठ का संदर्भ: मॉनीटर वहीद ने टोपी को आठवें वालों से दोस्ती करने का ताना मारा।
- असर: बात टोपी के दिल के आर-पार हो गई।
- अपना निर्णय: ताना नहीं, साथ देना।
- उपाय: समूह में शामिल करना, चिढ़ाने वालों को रोकना, पढ़ाई में मदद।
Answer: अबदुल वहीद मॉनीटर था, पर उसने टोपी को ताना मारा कि वह आठवें वालों से दोस्ती करे। इससे टोपी का दिल छलनी हो गया। मैं ऐसा नहीं करूँगा। मैं अमन को अपने समूह में बैठाऊँगा, चिढ़ाने वालों को रोकूँगा और पढ़ाई में उसकी मदद करूँगा, ताकि वह अकेलापन नहीं, अपनापन महसूस करे।
Memory hook: मॉनीटर ताना दे तो वहीद, साथ दे तो सच्चा दोस्त।
सच्ची मित्रता
मान लीजिए आपके सबसे अच्छे दोस्त के पिता का तबादला दूसरे शहर में हो जाता है। उसके जाने के बाद आप उदास होकर तय कर लेते हैं कि अब किसी से गहरी दोस्ती नहीं करेंगे, क्योंकि सब छोड़कर चले जाते हैं।
टोपी की दस अक्तूबर सन् पैंतालीस वाली कसम से तुलना करते हुए अपने इस निर्णय का मूल्यांकन कीजिए।
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- पाठ का संदर्भ: इफ़्फ़न के पिता की बदली पर टोपी ने बदली वाली नौकरी वाले के बेटे से दोस्ती न करने की कसम खाई।
- मूल्यांकन: यह दुख में लिया गया भावुक निर्णय था।
- परिणाम: टोपी और अकेला हो गया।
- सीख: दूरी से दोस्ती नहीं टूटती; पुराने से जुड़े रहें, नए दोस्त भी बनाएँ।
Answer: टोपी ने भी इफ़्फ़न के जाने पर कसम खाई थी कि बदली वाली नौकरी वाले के बेटे से दोस्ती नहीं करेगा। यह दुख में लिया गया भावुक निर्णय था। ऐसा निर्णय हमें और अकेला कर देता है, जैसे टोपी हो गया। सच्ची दोस्ती दूरी से नहीं टूटती। हमें पुराने दोस्त से जुड़े रहकर नए दोस्त भी बनाने चाहिए।
Memory hook: दोस्त का तबादला = 10 अक्तूबर 1945; कसम नहीं, संपर्क रखो।
भाषा, नाम और परंपरा की दीवारें
कल्पना कीजिए कि आपके दादाजी गाँव से आए हैं और अपनी गाँव की बोली में बात करते हैं। शहर के कुछ रिश्तेदार उनकी बोली पर हँसते हैं और बच्चों से कहते हैं कि 'गँवारों वाली भाषा' मत बोलो।
इफ़्फ़न की दादी और टोपी के प्रसंग के आधार पर बताइए कि किसी की बोली का मज़ाक उड़ाना क्यों गलत है।
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- इफ़्फ़न की दादी के लिए पूरबी बोली मायके की याद और दिल का सहारा थी।
- यही बोली टोपी को उनसे जोड़ती थी; उनके शब्द उसे शक्कर के खिलौने जैसे लगते थे।
- सुभद्रादेवी ऐसी बोली को 'गँवारों की ज़बान' कहती थीं।
- निष्कर्ष: बोली पहचान और भावना से जुड़ी है; मज़ाक अपमान है।
Answer: इफ़्फ़न की दादी के लिए पूरबी बोली मायके की याद और दिल का सहारा थी। उसी बोली ने टोपी को उनसे जोड़ा, उसे उनके शब्द शक्कर के खिलौने जैसे मीठे लगे। पर सुभद्रादेवी ऐसी ही बोली को गँवारों की ज़बान कहती थीं। बोली व्यक्ति की पहचान और भावनाओं से जुड़ी होती है, इसलिए उसका मज़ाक उड़ाना उसका अपमान है।
Memory hook: दादाजी की बोली = दादी की पूरबी; बोली दिल की भाषा है।
Topics in this chapter
- टोपी शुक्ला का चरित्र-चित्रणComing soon
- टोपी और इफ़्फ़न की दादी का रिश्ताComing soon
- टोपी शुक्ला पाठ के बोध-प्रश्न उत्तरComing soon
- टोपी का नवीं में फ़ेल होना और भावनात्मक संघर्षComing soon
- टोपी शुक्ला का संदेश: सांप्रदायिक सद्भावComing soon
How the board asks राही मासूम रज़ा – टोपी शुक्ला
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| संदेश और सामाजिक सद्भाव | पाठ सांप्रदायिक सद्भाव या मानवीय एकता का संदेश कैसे देता है? किसी कथन के पक्ष में विचार लिखिए। | पहली पंक्ति में संदेश लिखें। फिर पाठ से दो प्रमाण दें, जैसे टोपी-दादी का प्रेम और 'अम्मी' वाली घटना। अंत में आज के समाज से एक पंक्ति जोड़ें। 50-60 शब्दों में रहें। |
| मित्रता की कसौटी | क्या मित्रता की कसौटी मज़हब या पद-प्रतिष्ठा हो सकती है? टोपी-इफ़्फ़न के आधार पर लिखिए। | साफ़ उत्तर दें कि नहीं। इफ़्फ़न से दोस्ती और कलेक्टर के बेटों के घमंड की तुलना करें। फिर विश्वास, समझ और सुख-दुख में साथ जैसी कसौटियाँ लिखें। |
| घटना का कारण या महत्त्व | टोपी इफ़्फ़न के घर की ओर क्यों खिंचा चला जाता था? दस अक्तूबर सन् पैंतालीस का क्या महत्त्व है? | घटना का पाठ वाला कारण सही-सही लिखें, जैसे दादी की बोली और प्यार, या इफ़्फ़न के पिता की बदली। फिर टोपी के मन पर उसका असर बताएँ। |
| भावात्मक संघर्ष और शिक्षा व्यवस्था | टोपी के दो बार फ़ेल होने के कारण और उसकी भावात्मक चुनौतियाँ लिखिए; शिक्षा में क्या बदलाव होने चाहिए? | घर में पढ़ने न देना, टाइफ़ाइड और चुनाव का शोर जैसे कारण दें। मास्टरों के ताने और छोटे बच्चों के साथ बैठने की पीड़ा बताएँ। अंत में सहानुभूति और प्रोत्साहन जैसे एक-दो सुझाव दें। |
| चरित्र-चित्रण | टोपी या इफ़्फ़न की दादी की चारित्रिक विशेषताएँ पाठ के आधार पर लिखिए। | तीन विशेषताएँ लिखें। हर विशेषता के साथ पाठ की एक घटना जोड़ें। केवल गुणों की सूची से पूरे अंक नहीं मिलते। |
| परिवार की उपेक्षा और अकेलापन (मूल्य-आधारित) | परिवार की उपेक्षा ने टोपी के मन पर क्या असर डाला? आप ऐसे बच्चे की मदद कैसे करेंगे? | घर में पिटाई, ताने और उतरन वाली घटना से उपेक्षा दिखाएँ। फिर बताएँ कि टोपी प्रेम के लिए बाहर भटका। अंत में अपना व्यावहारिक सुझाव लिखें। |
Tricks to remember राही मासूम रज़ा – टोपी शुक्ला
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
छह 'म' से घटनाक्रम
अम्मी → मौत → मुरादाबाद → माली → मुन्नी का कोट → मास्टर का ताना। यानी: 'अम्मी' शब्द पर पिटाई, इफ़्फ़न की दादी की मौत, पिता की बदली मुरादाबाद, कलेक्टर के बँगले पर माली-अंपायर वाला क्रिकेट, मुन्नी बाबू के कोट की उतरन, फिर नवीं में मास्टर का 'पारसाल' वाला ताना।
Use it when: किसी भी 3 अंक के उत्तर में घटनाओं का सही क्रम लिखने के लिए।
बोलियों की अदला-बदली
टोपी की दादी की भाषा = इफ़्फ़न के अब्बू जैसी; इफ़्फ़न की दादी की बोली = टोपी की माँ जैसी पूरबी। इसीलिए टोपी को 'दादी बदलने' का खयाल आया।
Use it when: दादी बदलने के प्रस्ताव और भाषा वाली थीम के प्रश्नों में कारण याद रखने के लिए।
संख्याओं की जोड़ी
72 और 8 (दादी और टोपी की उम्र), 10-10-45 (बदली की तारीख), 49 से 52 (नवीं से दसवीं तक), तीसरे बरस तीसरा दर्जा।
Use it when: तथ्य वाले प्रश्नों और रिश्ते की गहराई दिखाने में (उम्र का अंतर फिर भी प्रेम)।
पाँच थीम, पाँच दृश्य
प्रेम = दादी की कहानियाँ; अकेलापन = भरा घर, साथी केवल सीता; भाषा = 'अम्मी' शब्द; शिक्षा = 'पारसाल पूछ लूँगा'; मित्रता = दोनों दोस्तों का चुपचाप रोना।
Use it when: थीम वाले प्रश्न में हर बात के साथ पाठ का प्रमाण तुरंत याद करने के लिए।
राही मासूम रज़ा – टोपी शुक्ला: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: 'अम्मी' शब्द से डोलती परंपरा · 3 marks · Short answerBoard level
'परंपराओं की दीवार डोलने लगी।' 'अम्मी' वाले प्रसंग के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि टोपी के घर में कौन-सी बात परंपरा के विरुद्ध मानी गई और उसका परिणाम क्या हुआ।
Try it first, then show the solutionSolution
- टोपी के परंपरावादी घर में 'अम्मी' जैसा उर्दू शब्द और मुसलमान लड़के से दोस्ती, दोनों अस्वीकार्य थे।
- घटना: बैंगन का भुरता माँगते हुए टोपी ने माँ रामदुलारी को 'अम्मी' कह दिया और सबके हाथ रुक गए।
- परिणाम: दादी सुभद्रादेवी मेज़ से उठ गईं, रामदुलारी ने टोपी को बहुत पीटा।
- मुन्नी बाबू ने टोपी पर कबाब खाने का झूठा आरोप लगा दिया।
Answer: टोपी के परंपरावादी हिंदू परिवार में 'अम्मी' जैसा उर्दू शब्द और किसी 'मियाँ के लइका' से दोस्ती, दोनों अस्वीकार्य थे। भुरता माँगते हुए टोपी ने माँ को 'अम्मी' कहा तो सबके हाथ रुक गए। दादी सुभद्रादेवी मेज़ से उठ गईं, माँ रामदुलारी ने टोपी को बहुत पीटा और मुन्नी बाबू ने कबाब खाने का झूठा आरोप लगाया।
Example 2: इफ़्फ़न की दादी की बेचैन आत्मा · 3 marks · Short answerHarder board level
इफ़्फ़न की दादी की आत्मा ससुराल में सदा बेचैन क्यों रही? उनके जीवन के प्रसंगों से स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- वे ज़मींदार की बेटी थीं, पर ब्याह कर मौलवी के घर लखनऊ आईं।
- बेटे की शादी में गाने-बजाने की इच्छा मौलवी के घर में पूरी न हो सकी; वे दिल मसोसकर रह गईं।
- मायके का दूध-दही छूट गया; पूरबी बोली ही उनके दिल की बात कहने का सहारा रही।
- मरते समय उन्होंने करबला या नजफ़ नहीं, अपने घर भेजे जाने की इच्छा जताई।
Answer: इफ़्फ़न की दादी ज़मींदार की बेटी थीं, पर ब्याह कर मौलवी के घर आईं। वहाँ उनकी हर इच्छा दब गई। बेटे की शादी में गाने-बजाने का मन था, पर मौलवी के घर यह संभव न था। मायके का दूध-दही छूट गया और पूरबी बोली ही उनका सहारा रही। मरते समय भी उन्होंने करबला नहीं, अपना घर माँगा।
Example 3: दादी बदलने की बात: दो स्वभाव · 3 marks · Short answerHarder board level
टोपी और इफ़्फ़न के बीच 'दादी बदलने' को लेकर हुई बातचीत से दोनों के स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है?
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- टोपी को घर में प्यार नहीं मिलता था; उसे इफ़्फ़न की दादी की बोली अपनी माँ जैसी लगती थी।
- दादी बदलने का प्रस्ताव उसके भोलेपन, भावुकता और अकेलेपन को दिखाता है।
- इफ़्फ़न ने कहा कि अब्बू नहीं मानेंगे, कहानी कौन सुनाएगा, और उसकी दादी उसके अब्बू की अम्माँ भी हैं।
- इससे पता चलता है कि इफ़्फ़न अधिक समझदार था और रिश्तों को व्यावहारिक ढंग से समझता था।
Answer: टोपी को अपने घर में प्यार नहीं मिलता था, इसलिए उसने भोलेपन से दादी बदलने का प्रस्ताव रखा। इससे उसकी भावुकता और अकेलापन दिखता है। इफ़्फ़न अधिक समझदार निकला। उसने कहा कि उसकी दादी उसके अब्बू की अम्माँ भी हैं, और कहानी कौन सुनाएगा। इससे पता चलता है कि इफ़्फ़न रिश्तों को व्यावहारिक ढंग से समझता था।
Example 4: नारा नहीं, जीता-जागता सद्भाव · 3 marks · Short answerHarder board level
लेखक कहता है कि वह 'हिंदू-मुस्लिम भाई-भाई' की बात नहीं कर रहा। फिर भी यह कहानी सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश किस प्रकार देती है?
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- लेखक नारेबाज़ी को व्यर्थ मानता है: भाई-भाई हैं तो कहने की ज़रूरत नहीं, नहीं हैं तो कहने से फ़र्क नहीं पड़ेगा।
- वह उपदेश के बजाय टोपी, इफ़्फ़न और दादी का सच्चा रिश्ता दिखाता है।
- उर्दू और हिंदी को 'हिंदवी' के दो नाम बताता है।
- कृष्ण और मुहम्मद दोनों के पशु चराने की समानता से दिखाता है कि अंतर केवल नामों का है।
Answer: लेखक नारेबाज़ी नहीं करना चाहता। वह मानता है कि भाई-भाई होना कहने से नहीं, जीने से सिद्ध होता है। इसीलिए वह उपदेश के बजाय टोपी, इफ़्फ़न और दादी का सच्चा रिश्ता दिखाता है। उर्दू-हिंदी को एक भाषा बताकर और कृष्ण-मुहम्मद की समानता दिखाकर वह बताता है कि अंतर केवल नामों का है, मन का नहीं।
Example 5: अगर मैं टोपी का अध्यापक होता · 3 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आप टोपी के अंग्रेज़ी-साहित्य के अध्यापक होते। तीसरी बार नवीं में बैठे टोपी का उत्तर देने के लिए उठा हुआ हाथ देखकर आप क्या करते और क्यों? पाठ के संदर्भ में लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ का संदर्भ: मास्टर ने 'पारसाल पूछ लूँगा' कहकर ताना मारा, कक्षा हँसी और टोपी शर्म से टूट गया।
- अपना निर्णय: मज़ाक के बजाय उत्तर देने का अवसर देना।
- कारण: उठा हुआ हाथ सीखने की इच्छा दिखाता है; बच्चा पहले ही अपमान झेल रहा है।
- सुझाव: प्रशंसा, अकेले में बात करना, कक्षा को सम्मान करना सिखाना।
Answer: मैं टोपी का मज़ाक नहीं उड़ाता, बल्कि उसे उत्तर देने का अवसर देता। तीन साल से एक कक्षा में बैठा बच्चा पहले ही अपमान झेल रहा होता है। उसका उठा हाथ बताता है कि वह सीखना चाहता है। मैं उसकी प्रशंसा करता, अकेले में उसकी परेशानी पूछता और कक्षा को भी उसका सम्मान करना सिखाता।
Example 6: उतरन का कोट: आत्मसम्मान या बदतमीज़ी? · 3 marks · Short answerHOTS / competency
टोपी ने मुन्नी बाबू के लिए बना कोट केतकी के बेटे को दे दिया और बाद में दादी से कड़वे शब्द भी बोले। आप टोपी के व्यवहार के किस पक्ष से सहमत हैं और किससे असहमत? तर्क सहित लिखिए।
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- प्रसंग: कोट नया था, पर मुन्नी बाबू के लिए बना था, इसलिए टोपी के लिए उतरन था।
- सहमति: उतरन ठुकराना आत्मसम्मान था; कोट पाकर नौकरानी का बेटा खुश हुआ।
- असहमति: दादी से 'त का हम इनकी पूजा करें' कहना अनुचित था।
- निष्कर्ष: अन्याय का विरोध शांत और सम्मानजनक ढंग से होना चाहिए।
Answer: मैं टोपी के आत्मसम्मान से सहमत हूँ। उतरन देना उसके साथ भेदभाव था, इसलिए नया होने पर भी उसने कोट केतकी के बेटे को दे दिया, जिससे एक बच्चा खुश हुआ। पर दादी से 'त का हम इनकी पूजा करें' कहना उचित नहीं था। अन्याय का विरोध शांत ढंग से होना चाहिए, बदतमीज़ी से नहीं।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
'दोनों अपने घरों में अजनबी और भरे घर में अकेले थे।' टोपी और इफ़्फ़न की दादी के संदर्भ में इस कथन को स्पष्ट कीजिए। (50-60 शब्द) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| इफ़्फ़न की दादी का अकेलापन: मौलवी के घर इच्छाएँ दबीं, गाना-बजाना न हो सका, पूरबी बोली के सिवा दिल की बात समझने वाला कोई न था। | 1 |
| टोपी का अकेलापन: अपनी दादी से नफ़रत, 'अम्मी' कहने पर मार, घर में किसी का उसे न समझना। | 1 |
| एक-दूसरे की पूर्ति: बोली और कहानियों ने जोड़ा; उम्र (72 और 8) और धर्म अलग होने पर भी दोनों ने एक-दूसरे का अकेलापन मिटाया। (उत्तर-बिंदु सांकेतिक हैं; उपयुक्त भिन्न उत्तर भी मान्य।) | 1 |
क्या आप मानते हैं कि टोपी के नवीं कक्षा में दो बार फ़ेल होने का दोष केवल टोपी का था? तर्क सहित उत्तर दीजिए। (50-60 शब्द) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| स्पष्ट मत: दोष केवल टोपी का नहीं था; पाठ के अनुसार वह काफ़ी तेज़ था। | 1 |
| पाठ से कारण: पढ़ने बैठते ही काम दे दिया जाता, भैरव कापियाँ बिगाड़ता, दूसरे साल टाइफ़ाइड, फिर पिता के चुनाव का माहौल। | 1 |
| स्कूल और परिवार की भूमिका पर निष्कर्ष: मास्टरों के ताने और घर की उपेक्षा ने उसे तोड़ा; बच्चे को सहारा मिलना चाहिए। (भिन्न किंतु तर्कपूर्ण मत को भी अंक मिलते हैं।) | 1 |
Where students lose marks in राही मासूम रज़ा – टोपी शुक्ला
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: पात्रों के रिश्ते उलट देना
सुभद्रादेवी और रामदुलारी के नाम मिलते-जुलते प्रसंगों में आते हैं, इसलिए छात्र दादी और माँ को बदल देते हैं।
Wrong working
टोपी की माँ सुभद्रादेवी ने 'अम्मी' सुनकर उसे पीटा।
Right working
टोपी की दादी सुभद्रादेवी मेज़ से उठ गईं और माँ रामदुलारी ने टोपी को बहुत पीटा।
Do this: याद रखें: सुभद्रादेवी = दादी, रामदुलारी = माँ, सीता = बूढ़ी नौकरानी।
Usually costs: 1 अंक तक
Mistake: कबाब वाले प्रसंग में गलत तथ्य
छात्र आरोप को ही सच मान लेते हैं।
Wrong working
टोपी ने रहीम कबाबची की दुकान पर कबाब खाया था, इसलिए उसे मार पड़ी।
Right working
कबाब मुन्नी बाबू ने खाया था और टोपी को इकन्नी रिश्वत दी थी; टोपी पर लगाया गया आरोप झूठा था।
Do this: घटना लिखते समय 'आरोप' और 'असलियत' अलग-अलग पहचानें।
Usually costs: 1 अंक तक
Mistake: 10 अक्तूबर 1945 की घटना गलत बताना
दादी की मृत्यु और पिता की बदली पास-पास हुईं, इसलिए छात्र दोनों मिला देते हैं।
Wrong working
10 अक्तूबर 1945 को इफ़्फ़न की दादी की मृत्यु हुई थी।
Right working
इस दिन इफ़्फ़न के पिता की बदली मुरादाबाद हुई; दादी की मृत्यु उससे थोड़े दिन पहले हुई थी।
Do this: क्रम याद रखें: पहले दादी की मृत्यु, फिर बदली, फिर टोपी की कसम।
Usually costs: 1 से 2 अंक
Mistake: टोपी को बुद्धू बताना
फ़ेल होने को ही कमज़ोरी मान लिया जाता है।
Wrong working
टोपी पढ़ाई में कमज़ोर था, इसलिए नवीं में दो बार फ़ेल हुआ।
Right working
पाठ के अनुसार टोपी काफ़ी तेज़ था; घर में उसे पढ़ने नहीं दिया जाता था और दूसरे साल उसे टाइफ़ाइड हो गया।
Do this: 'वह काफ़ी तेज़ था परंतु उसे कोई पढ़ने ही नहीं देता था' वाला भाव ज़रूर लिखें।
Usually costs: 1 से 2 अंक
Mistake: मूल्य-आधारित प्रश्न में कहानी दोहराना
छात्र पूरी कहानी लिख देते हैं, पर अपना मत और तर्क नहीं देते।
Wrong working
टोपी इफ़्फ़न के घर जाता था, दादी कहानी सुनाती थीं, फिर दादी मर गईं, फिर इफ़्फ़न चला गया...
Right working
मेरे विचार से सच्ची मित्रता धर्म नहीं, अपनापन देखती है, जैसे टोपी और इफ़्फ़न ने एक-दूसरे को दुख में सहारा दिया।
Do this: पहली पंक्ति में अपना मत, फिर एक-दो पाठ-प्रमाण, अंत में निष्कर्ष।
Usually costs: 1 से 2 अंक
Mistake: शब्द-सीमा से बहुत आगे लिखना
3 अंक के उत्तर को निबंध बना देने से समय कम पड़ता है और मुख्य बिंदु दब जाते हैं।
Wrong working
120-150 शब्दों में पूरा पाठ और भूमिका लिख देना।
Right working
50-60 शब्दों में तीन स्पष्ट बिंदु: संदर्भ, पाठ-प्रमाण, निष्कर्ष।
Do this: लिखने से पहले तीन बिंदु तय करें और हर बिंदु पर दो वाक्य लिखें।
Usually costs: सीधा अंक न कटे तो भी समय की कमी से अगला प्रश्न अधूरा रह सकता है।
राही मासूम रज़ा – टोपी शुक्ला: previous year questions
- Course A: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).
- Course B: Asked in 4 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 1.1 marks per paper; 4 questions in all, counting OR alternatives. In 3 of 4 sample papers.
Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.
Solved board questions from राही मासूम रज़ा – टोपी शुक्ला
Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.
2026 Course B, set 4/3/1, Q11 · 6 marks · Short answer
पूरक पाठ्य-पुस्तक पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 – 50 शब्दों में लिखिए : 2×3=6
- (i)3 marks
एक भरे-पूरे परिवार का सदस्य होने तथा घर के बड़ों द्वारा मना किए जाने के बाद भी टोपी इफ़्फ़न की हवेली की तरफ़ क्यों खींचा चला जाता था ? 'टोपी शुक्ला' पाठ के आधार पर लिखिए।
- (ii)3 marks
'सपनों के-से दिन' पाठ में लेखक और उनके अधिकांश साथियों को पढ़ाई करने और विद्यालय जाने में रुचि नहीं थी। क्या वर्तमान में आपके तथा आपके साथियों के साथ ऐसा ही है ? कारण सहित उत्तर लिखिए।
- (iii)3 marks
'हरिहर काका' पाठ के आधार पर लिखिए कि यदि हरिहर काका महंत जी के कहने पर अपनी ज़मीन ठाकुरबारी के नाम कर देते तो उससे महंत जी को क्या लाभ होता।
Try it first, then show our solutionSolution
- 3 marks
(i) टोपी अपने भरे-पूरे घर में उपेक्षित, प्रताड़ित और अकेलेपन का शिकार था। इफ़्फ़न ही उसकी भावनाओं को समझने और कद्र करने वाला अभिन्न मित्र था। इफ़्फ़न की दादी और उनकी बोली से टोपी को विशेष स्नेह था, इसलिए वह हवेली की ओर खिंचता था।
- 3 marks
(ii) मेरे और साथियों के साथ ऐसा नहीं है। आज विद्यालय में गतिविधियाँ, खेल और रोचक शिक्षण विधियाँ हैं, शिक्षक स्नेहपूर्ण हैं और शिक्षा का महत्त्व समझ आता है, इसलिए हम रुचि से पढ़ते हैं। (तर्कपूर्ण अन्य उत्तर भी मान्य)
- 3 marks
(iii) ज़मीन ठाकुरबारी के नाम होने पर ठाकुरबारी का विस्तार होता और महंत का धन, सुख-सुविधा, मान-सम्मान व वर्चस्व बढ़ता। साथ ही उसके पुनः या स्थायी महंत बने रहने की संभावना मजबूत होती।
Answer: किन्हीं दो उपप्रश्नों के उत्तर ऊपर दिए गए हैं (सभी तीन हल किए गए)।
Where the marks are
- प्रत्येक उपप्रश्न के तीन बिंदु, 3 अंक; कुल दो उत्तर पर 6 अंक
- उत्तर पाठ-आधारित और 40-50 शब्दों में
Every राही मासूम रज़ा – टोपी शुक्ला question, by year
Course A (0 questions, sample papers included)
Course B (7 questions, sample papers included)
- For 2027
Sample paper 2026-27: Q11 (6 marks, solved)
- 2025
Set 4/5/1: Q11 (6 marks, solved)
Sample paper 2024-25: Q11 (6 marks, solved)
- 2024
Set 4/1/1: Q13 (6 marks, solved)
Sample paper 2023-24: Q13 (6 marks, solved)
Practice questions on राही मासूम रज़ा – टोपी शुक्ला
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 3 marks · Short answerBoard level
इफ़्फ़न के मुरादाबाद चले जाने के बाद टोपी नए कलेक्टर ठाकुर हरिनाम सिंह के बेटों से दोस्ती क्यों नहीं कर सका? पाठ के आधार पर लिखिए।
Hint
तीनों बेटों की उम्र, उनकी भाषा और बँगले में हुई क्रिकेट वाली घटना याद कीजिए।
Answer
मूल्य-बिंदु:
- डब्बू बहुत छोटा, बीलू बहुत बड़ा, गुंड्डू बराबर का पर केवल अंग्रेज़ी बोलने वाला।
- तीनों को कलेक्टर का बेटा होने का एहसास था; किसी ने टोपी को मुँह नहीं लगाया।
- बीलू ने टोपी को मारा, डब्बू ने अलसेशियन कुत्ता उसके पीछे लगा दिया।
आदर्श उत्तर: इफ़्फ़न के पिता की बदली के बाद नए कलेक्टर ठाकुर हरिनाम सिंह के तीन बेटे आए। डब्बू बहुत छोटा था, बीलू बहुत बड़ा, और गुंड्डू बराबर का होकर भी केवल अंग्रेज़ी बोलता था। तीनों को कलेक्टर का बेटा होने का एहसास था। बीलू ने टोपी को मारा और डब्बू ने उस पर कुत्ता छोड़ दिया।
Q2 · 3 marks · Short answerBoard level
इफ़्फ़न के परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी देश के प्रति लगाव में क्या बदलाव आया? दादा-परदादा और पिता की वसीयत के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Hint
सोचिए कि किसकी लाश करबला ले जाई जानी थी और कौन हिंदुस्तानी कब्रिस्तान में दफ़न हुआ।
Answer
मूल्य-बिंदु:
- दादा-परदादा प्रसिद्ध मौलवी थे; भारत में जन्मे और मरे, पर लाश करबला ले जाने की वसीयत की।
- पाठ के अनुसार उनकी आत्मा ने इस देश में एक साँस तक न ली।
- इफ़्फ़न के पिता खानदान के पहले हिंदुस्तानी बच्चे थे; वे हिंदुस्तानी कब्रिस्तान में दफ़न हुए।
आदर्श उत्तर: इफ़्फ़न के दादा-परदादा प्रसिद्ध मौलवी थे। वे भारत में जन्मे और मरे, फिर भी वसीयत की कि उनकी लाश करबला ले जाई जाए; उनका मन इस देश से नहीं जुड़ा। इफ़्फ़न के पिता सय्यद मुरतुज़ा हुसैन उस खानदान के पहले हिंदुस्तानी बच्चे थे। उन्होंने ऐसी वसीयत नहीं की और हिंदुस्तानी कब्रिस्तान में दफ़न हुए।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level
मुन्नी बाबू ने टोपी पर कबाब खाने का आरोप लगाया। इस प्रसंग से टोपी और मुन्नी बाबू के चरित्र की कौन-सी विशेषताएँ सामने आती हैं?
Hint
असल में कबाब किसने खाया था और इकन्नी किसने किसको दी थी?
Answer
मूल्य-बिंदु:
- आरोप झूठा था; असल में टोपी ने मुन्नी बाबू को कबाब खाते देखा था।
- मुन्नी बाबू ने टोपी को इकन्नी रिश्वत दी थी।
- टोपी चुगलखोर नहीं था; उसने यह बात इफ़्फ़न के सिवा किसी को नहीं बताई थी।
- टोपी: ईमानदार, भरोसेमंद; मुन्नी बाबू: धूर्त, दूसरों को फँसाने वाले।
आदर्श उत्तर: मुन्नी बाबू ने टोपी को कबाब खाते देखने का झूठा आरोप लगाया। सच यह था कि टोपी ने मुन्नी बाबू को कबाब खाते देखा था और उन्होंने उसे इकन्नी रिश्वत दी थी। टोपी चाहता तो सच बता देता, पर वह चुगलखोर नहीं था। इससे टोपी की ईमानदारी और मुन्नी बाबू की कायरता व धूर्तता प्रकट होती है।
Q4 · 3 marks · Short answerHarder board level
'सीता की छाया में जाने के बाद उसकी आत्मा भी छोटी हो गई।' इस कथन के आधार पर टोपी और बूढ़ी नौकरानी सीता के संबंध को स्पष्ट कीजिए।
Hint
घर में सीता और टोपी, दोनों के साथ एक जैसा क्या होता था?
Answer
मूल्य-बिंदु:
- इफ़्फ़न के जाने और कलेक्टर के बँगले से अपमानित होने के बाद टोपी अकेला था।
- घर में केवल सीता उसका दुख-दर्द समझती थी।
- घर के सभी छोटे-बड़े दोनों को डाँटते थे; यही समान उपेक्षा उनके प्रेम का आधार बनी।
- 'आत्मा छोटी होना' से लगता है कि टोपी का आत्मविश्वास टूट गया।
आदर्श उत्तर: इफ़्फ़न के जाने और कलेक्टर के बँगले से अपमानित होकर लौटने के बाद टोपी के पास केवल बूढ़ी नौकरानी सीता बची। घर के सभी छोटे-बड़े दोनों को डाँटते थे। एक जैसी उपेक्षा ने दोनों को जोड़ दिया। 'आत्मा छोटी होना' बताता है कि टोपी का आत्मविश्वास टूट गया और वह भी घर के सबसे दबे व्यक्ति जैसा महसूस करने लगा।
Q5 · 3 marks · Short answerHarder board level
लेखक कहता है कि टोपी झूठ और सच के किस्से में पड़ने लायक 'इतना बड़ा कभी नहीं हो सका'। इस कथन से टोपी के स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है? पाठ से उदाहरण दीजिए।
Hint
'बड़ा होना' यहाँ उम्र नहीं, चालाकी सीखने की ओर संकेत है।
Answer
मूल्य-बिंदु:
- टोपी जीवन भर सरल और निश्छल रहा; छल-कपट नहीं सीखा।
- मुन्नी बाबू के झूठ पर भी उनका राज़ नहीं खोला, बस उदास रहा।
- मन की बात सीधे कह देता था; दादी बदलने जैसा भोला प्रस्ताव रखा।
आदर्श उत्तर: इस कथन से पता चलता है कि टोपी जीवन भर सरल और निश्छल रहा। वह छल-कपट और जोड़-तोड़ नहीं सीख पाया। मुन्नी बाबू के झूठ के जवाब में भी वह उनका राज़ नहीं खोलता, बस उदास रहता है। दादी से मन की बात सीधे कह देता है और दादी बदलने जैसा भोला प्रस्ताव भी रखता है।
Q6 · 3 marks · Short answerHarder board level
नवीं कक्षा में बार-बार बैठने पर स्कूल में टोपी के साथ जो व्यवहार हुआ, उसने उसे तोड़ा भी और जगाया भी। पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Hint
मास्टरों के तानों और अबदुल वहीद की बात के बाद टोपी ने क्या कसम खाई?
Answer
मूल्य-बिंदु:
- मास्टर कमज़ोर लड़कों को टोपी की मिसाल देते, कक्षा हँसती।
- अंग्रेज़ी-साहित्य के मास्टर ने 'पारसाल पूछ लूँगा' कहकर ताना मारा; टोपी शर्म से टूट गया।
- मॉनीटर अबदुल वहीद ने आठवें वालों से दोस्ती करने को कहा; बात दिल के आर-पार हो गई।
- टोपी ने टाइफ़ाइड हो या कुछ भी, पास होने की कसम खाई।
आदर्श उत्तर: स्कूल में मास्टर कमज़ोर लड़कों को टोपी की मिसाल देकर डाँटते और कक्षा हँसती। अंग्रेज़ी-साहित्य के मास्टर ने ताना मारा कि उससे 'पारसाल' पूछेंगे, तो वह शर्म से बिलकुल टूट गया। अबदुल वहीद ने कहा कि वह आठवें वालों से दोस्ती करे। यह बात दिल के पार हो गई और टोपी ने हर हाल में पास होने की कसम खाई।
Q7 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
कल्पना कीजिए कि टोपी के घरवाले इफ़्फ़न और उसकी दादी से टोपी के रिश्ते को सहज रूप से स्वीकार कर लेते। तब टोपी के बचपन और स्वभाव पर क्या प्रभाव पड़ता? तर्क सहित लिखिए।
Hint
पाठ में टोपी को किन बातों पर मार और अपमान झेलना पड़ा, पहले वह सूची बनाइए।
Answer
मूल्य-बिंदु:
- 'अम्मी' कहने पर मार और झूठे आरोप का अपमान न झेलना पड़ता।
- घर में अपनापन मिलता, वह भरे घर में अकेला न रहता।
- आत्मविश्वास बढ़ता; अलग धर्मों के लोगों के साथ सहज रहना सीखता।
आदर्श उत्तर: तब टोपी को 'अम्मी' कहने पर मार न खानी पड़ती और उसे झूठ-सच की लड़ाई में अपमानित न होना पड़ता। घर में भी उसे अपनापन मिलता, इसलिए वह भरे घर में अकेला न रहता। उसका आत्मविश्वास बढ़ता और शायद पढ़ाई में भी मन लगता। वह खुले मन से अलग धर्मों के लोगों के साथ जीना सीखता।
Q8 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
टोपी की मुसलमान लड़के से दोस्ती पर घर में हंगामा हुआ, पर डॉक्टर भृगु नारायण यह जानकर कि लड़का कलेक्टर साहब का बेटा है, अपना गुस्सा पी गए और परमिट ले आए। बड़ों के इस व्यवहार का मूल्यांकन कीजिए। बच्चों पर इसका क्या असर पड़ सकता है?
Hint
सिद्धांत और स्वार्थ, दोनों को आमने-सामने रखकर सोचिए।
Answer
मूल्य-बिंदु:
- यह दोहरे मापदंड और स्वार्थ का उदाहरण है।
- जिस दोस्ती पर टोपी पिटा, उसी से लाभ दिखते ही पिता ने कपड़े और शक्कर के परमिट ले लिए।
- बच्चे सीखते हैं कि बड़ों के सिद्धांत सुविधा के अनुसार बदलते हैं; उनका भरोसा घटता है।
आदर्श उत्तर: यह व्यवहार दोहरे मापदंड और स्वार्थ को दिखाता है। जिस दोस्ती पर घर में टोपी को मार पड़ी, उसी से लाभ दिखते ही पिता चुप हो गए और युद्ध के दिनों में कपड़े-शक्कर के परमिट ले आए। ऐसा देखकर बच्चे सीखते हैं कि बड़ों के सिद्धांत सुविधा के अनुसार बदलते हैं। इससे बच्चों का बड़ों पर भरोसा घटता है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.टोपी और इफ़्फ़न के पूरे नाम क्या हैं?Show answer
टोपी: बलभद्र नारायण शुक्ला; इफ़्फ़न: सय्यद जरगाम मुरतुज़ा।
2.इफ़्फ़न की दादी और टोपी की उम्र में कितना अंतर था?Show answer
दादी बहत्तर बरस की थीं और टोपी आठ साल का।
3.दस अक्तूबर सन् पैंतालीस को क्या हुआ?Show answer
इफ़्फ़न के पिता की बदली मुरादाबाद हुई और टोपी ने बदली वाली नौकरी वाले के बेटे से दोस्ती न करने की कसम खाई।
4.इफ़्फ़न की दादी कहाँ दफ़न हुईं और क्यों?Show answer
बनारस के 'फ़ातमैन' में, क्योंकि उन दिनों मुरतुज़ा हुसैन की पोस्टिंग वहीं थी।
5.दादी के मायके का घर किस नाम से जाना जाता था और अब उसका क्या हुआ था?Show answer
कच्ची हवेली; घरवाले कराची में थे और घर कस्टोडियन का हो चुका था।
6.टोपी ने मुन्नी बाबू वाला कोट किसे दे दिया?Show answer
दूसरी नौकरानी केतकी के बेटे को।
7.'तीसरे बरस तीसरे दर्जे में पास तो हो गए' किसने और किस भाव से कहा?Show answer
टोपी की दादी सुभद्रादेवी ने, व्यंग्य और ताने के भाव से।
8.डॉक्टर भृगु नारायण शुक्ला को किस नाम से पहचाना जाता था और चुनाव में उनका क्या हुआ?Show answer
'नीले तेल वाले'; चुनाव में उनकी ज़मानत ज़ब्त हो गई।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप बिना देखे बता सकते हैं कि लेखक उर्दू और हिंदी को किस भाषा के दो नाम कहता है?
- क्या आप इफ़्फ़न के दादा-परदादा और पिता की वसीयत का अंतर दो वाक्यों में बता सकते हैं?
- क्या आप इफ़्फ़न की दादी की तीन अधूरी इच्छाएँ गिना सकते हैं?
- क्या आप 'अम्मी' प्रसंग में दादी, माँ और मुन्नी बाबू की भूमिका क्रम से लिख सकते हैं?
- क्या आप बता सकते हैं कि दादी की मृत्यु के बाद भरा हुआ घर टोपी को खाली क्यों लगा?
- क्या आप कलेक्टर के तीन बेटों के नाम और टोपी से उनकी दोस्ती न होने के कारण बता सकते हैं?
- क्या आप टोपी के नवीं में अटकने के घर और स्कूल के कारण अलग-अलग गिना सकते हैं?
- क्या आप पाँचों थीम के लिए पाठ का एक-एक प्रमाण तुरंत बता सकते हैं?
राही मासूम रज़ा – टोपी शुक्ला: frequently asked questions
टोपी शुक्ला पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
पाठ बताता है कि प्रेम और अपनापन धर्म, जाति और भाषा की सीमाएँ नहीं मानते। हिंदू बालक टोपी और मुसलमान दादी का गहरा रिश्ता इसका प्रमाण है। पाठ बच्चों के मन को समझने की ज़रूरत भी दिखाता है।
टोपी को इफ़्फ़न की दादी क्यों अच्छी लगती थीं?
दादी की पूरबी बोली टोपी की माँ की बोली जैसी थी, इसलिए वह उसके दिल में उतर गई। वे उसे प्यार से बुलातीं और डाँटतीं भी तो उनके शब्द मीठे लगते। अपने घर में टोपी को ऐसा स्नेह नहीं मिलता था।
'अम्मी' शब्द पर टोपी के घर में क्या हुआ?
खाने की मेज़ पर सबके हाथ रुक गए और सब टोपी को देखने लगे। दादी सुभद्रादेवी गरज़ीं और मेज़ से उठ गईं। माँ रामदुलारी ने टोपी को बहुत पीटा, पर उसने इफ़्फ़न के घर न जाने की बात नहीं मानी।
टोपी नवीं कक्षा में दो बार फ़ेल क्यों हुआ?
पहले साल घर के लोग उसे पढ़ने ही नहीं देते थे; कोई काम पकड़ा देता या भैरव उसकी कापियाँ बिगाड़ देता। दूसरे साल उसे टाइफ़ाइड हो गया। वह तेज़ था, पर परिस्थितियाँ उसके विरुद्ध थीं।
दस अक्तूबर सन् पैंतालीस का टोपी के जीवन में क्या महत्त्व है?
इसी दिन इफ़्फ़न के पिता की बदली मुरादाबाद हो गई और टोपी का दोस्त चला गया। दादी पहले ही गुज़र चुकी थीं, इसलिए टोपी और अकेला हो गया। उसने कसम खाई कि बदली वाली नौकरी करने वाले के बेटे से दोस्ती नहीं करेगा।
इस पाठ के उत्तर कितने शब्दों में लिखने चाहिए?
संचयन के प्रश्न 3 अंक के होते हैं और उत्तर 50-60 शब्दों में लिखना होता है। उत्तर में पाठ की घटना का प्रमाण ज़रूर दें। विचार वाले प्रश्न में अंत में अपना मत भी जोड़ें।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-ब (085), कक्षा 10, 2026-27; NCERT संचयन भाग 2 (Reprint 2026-27), टोपी शुक्ला