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HindiCBSE Class 10 · Chapter 9

यशपाल – लखनवी अंदाज़ Class 10: सार, व्यंग्य और चरित्र-चित्रण

Updated 14 October 2026 · Fact-checked

‘लखनवी अंदाज़’ यशपाल की व्यंग्य रचना है, जो क्षितिज भाग 2 के गद्य खंड में है। ट्रेन के डिब्बे में एक नवाब साहब खीरे को बड़े सलीके से काटकर केवल सूँघते हैं और खिड़की से फेंक देते हैं। बोर्ड इस पाठ से पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों वाले 2 अंक के प्रश्न पूछता है।

What यशपाल – लखनवी अंदाज़ is about

‘लखनवी अंदाज़’ क्षितिज भाग 2 के गद्य खंड का पाठ 9 है। इसके लेखक यशपाल हैं, जो यथार्थवादी शैली के रचनाकार माने जाते हैं। यह एक व्यंग्य है, जिसमें रेल के सेकंड क्लास डिब्बे में मिले एक नवाब साहब के खीरा ‘खाने’ के अनोखे ढंग के माध्यम से दिखावे में जीने वाले पतनशील सामंती वर्ग और बिना कथ्य की ‘नयी कहानी’ पर चोट की गई है।

बोर्ड परीक्षा में यह पाठ खंड ग (गद्य खंड) से जुड़ा है। प्रश्न 7 में पठित गद्यांश देकर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) पूछे जा सकते हैं, जिनमें कथन-कारण प्रश्न भी होता है। प्रश्न 8 में गद्य पाठों पर चार में से तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखने होते हैं, हर उत्तर 2 अंक का होता है। इनमें कारण, चरित्र, व्यंग्य और आपकी अपनी राय पर प्रश्न आते हैं।

In real board papers: Course A, asked in 4 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 0.9 marks per paper; Course B, asked in 2 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 0.5 marks per paper. See the questions

यशपाल – लखनवी अंदाज़: summary

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

लेखक को पास ही जाना था। भीड़ से बचने, एकांत में नयी कहानी पर सोचने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए उन्होंने मुफ़स्सिल की पैसेंजर ट्रेन में सेकंड क्लास का टिकट लिया। गाड़ी छूट रही थी, इसलिए एक छोटे डिब्बे को खाली समझकर वे दौड़कर उसमें चढ़ गए। पर डिब्बा खाली नहीं था। एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक सफ़ेदपोश सज्जन पालथी मारे बैठे थे। उनके सामने तौलिए पर दो ताज़े-चिकने खीरे रखे थे।

लेखक के अचानक आ जाने से नवाब साहब की आँखों में एकांत भंग होने का असंतोष दिखा। उन्होंने बातचीत में कोई उत्साह नहीं दिखाया, तो लेखक ने भी आत्मसम्मान के कारण उनसे नज़रें फेर लीं। लेखक कल्पना करने लगे कि शायद नवाब साहब ने किफ़ायत के लिए सेकंड क्लास का टिकट लिया है और अब नहीं चाहते कि कोई सफ़ेदपोश उन्हें मँझले दर्जे में सफ़र करते या खीरे जैसी मामूली चीज़ खाते देखे।

कुछ देर बाद नवाब साहब ने अचानक ‘आदाब-अर्ज़’ कहकर लेखक से खीरा खाने का आग्रह किया। लेखक को यह बदला हुआ भाव अच्छा नहीं लगा। उन्हें लगा कि नवाब अपनी शराफ़त का भ्रम बचाने के लिए उन्हें भी ‘मामूली लोगों की हरकत’ में शामिल करना चाहते हैं। लेखक ने धन्यवाद कहकर मना कर दिया।

फिर नवाब साहब ने बड़े यत्न से खीरे तैयार किए। उन्होंने तौलिया झाड़कर बिछाया, लोटे के पानी से खीरे खिड़की के बाहर धोए और पोंछे। चाकू से सिर काटकर झाग निकाला, छीलकर फाँकें करीने से सजाईं और उन पर जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च बुरक दी। उनके चेहरे से साफ़ था कि मुँह में पानी भर रहा है। लेखक ने सोचा कि मियाँ रईस बनते हैं, पर अब असलियत पर उतर आए हैं। नवाब ने दोबारा आग्रह किया। लेखक का मन भी ललचाया, पर आत्मसम्मान निभाने के लिए उन्होंने मेदा कमज़ोर होने का बहाना बनाकर फिर मना कर दिया।

अब नवाब साहब ने एक-एक फाँक उठाई, होंठों तक ले जाकर सूँघी, स्वाद की कल्पना में पलकें मूँद लीं, मुँह का पानी गटका और फाँक खिड़की से बाहर फेंक दी। सारी फाँकें इसी तरह फेंककर उन्होंने तौलिए से हाथ और होंठ पोंछे और गर्व से लेखक की ओर देखा, मानो यही खानदानी रईसों का तरीका हो। फिर वे थककर लेट गए। लेखक ने व्यंग्य में इसे खानदानी तहज़ीब, नफ़ासत और नज़ाकत माना, पर मन में पूछा कि क्या ऐसे पेट भर सकता है?

तभी नवाब साहब ने भरे पेट जैसी ऊँची डकार ली और बोले कि खीरा स्वादिष्ट होता है, पर भारी होता है और मेदे पर बोझ डालता है। यह सुनकर लेखक के ‘ज्ञान-चक्षु’ खुल गए। उन्होंने व्यंग्य किया कि यदि सुगंध और स्वाद की कल्पना मात्र से डकार आ सकती है, तो बिना विचार, घटना और पात्रों के, लेखक की इच्छा मात्र से ‘नयी कहानी’ क्यों नहीं बन सकती।

Themes and message

पतनशील सामंती वर्ग का दिखावा

पाठ का केंद्र नवाब साहब का वह व्यवहार है जिसमें वे भूख और स्वाद जैसी सहज इच्छा को भी अपनी ‘खानदानी’ शान के आगे दबा देते हैं। खीरे को बड़े सलीके से काटना, सजाना, नमक-मिर्च लगाना और फिर केवल सूँघकर फेंक देना दिखाता है कि उनके लिए असली ज़रूरत से बड़ा लोगों के सामने अपनी छवि बचाना है। लेखक की टिप्पणी के अनुसार यशपाल ऐसे वर्ग पर कटाक्ष करते हैं जो बनावटी जीवन-शैली का आदी है। इससे पता चलता है कि यह दिखावा भीतर से खोखला है, क्योंकि अंत में अकेले होने पर भी वे भूखे ही लेट जाते हैं।

From the text: सारी फाँकें फेंकने के बाद नवाब साहब ने “गर्व से गुलाबी आँखों से हमारी ओर देख लिया” और लेखक ने उनके भाव को पढ़ा: “यह है खानदानी रईसों का तरीका!”

झूठी शान और अहं: दोनों ओर

व्यंग्य केवल नवाब साहब पर नहीं है। लेखक स्वयं भी अपने ‘आत्मसम्मान’ के कारण नवाब से नज़रें चुराते हैं और खीरा खाने का मन होने पर भी मना कर देते हैं। वे दूसरी बार मेदा कमज़ोर होने का बहाना भी बनाते हैं। इससे संकेत मिलता है कि दिखावे और अहं की यह आदत केवल नवाबों तक सीमित नहीं, पढ़े-लिखे सफ़ेदपोश व्यक्ति में भी है। दोनों अपनी-अपनी छवि बचाने में सहज मानवीय व्यवहार खो देते हैं। यह पाठ की गहरी विडंबना है।

From the text: लेखक मानते हैं कि फाँकें देखकर “पानी मुँह में ज़रूर आ रहा था”, फिर भी उन्होंने “आत्मसम्मान निबाहना ही उचित समझा” और मना कर दिया।

बिना कथ्य की ‘नयी कहानी’ पर व्यंग्य

पाठ की टिप्पणी बताती है कि यशपाल ने यह रचना यह साबित करने के लिए लिखी थी कि बिना कथ्य के कहानी नहीं लिखी जा सकती। अंत में लेखक नवाब साहब की डकार को इसी बात से जोड़ते हैं। जैसे केवल सूँघने से पेट नहीं भर सकता, वैसे ही बिना विचार, घटना और पात्रों के कहानी नहीं बन सकती। लेखक उलटे ढंग से, यानी व्यंग्य में, पूछते हैं कि जब कल्पना से डकार आ सकती है तो इच्छा मात्र से कहानी क्यों नहीं बन सकती। इस प्रश्न का उत्तर ‘नहीं’ ही है, यही लेखक का मत है।

From the text: अंतिम पंक्ति: बिना विचार, घटना और पात्रों के, “लेखक की इच्छा मात्र से ‘नयी कहानी’ क्यों” नहीं बन सकती? साथ ही नवाब के लिए लेखक कहते हैं: “ये हैं नयी कहानी के लेखक!”

वास्तविकता से कटी परजीवी संस्कृति

नवाब साहब किफ़ायत के लिए सेकंड क्लास में बैठे हैं (लेखक का अनुमान), पर दिखाना चाहते हैं कि वे साधारण चीज़ों से ऊपर हैं। वे भरे पेट का अभिनय करते हुए डकार लेते हैं और खीरे को ही दोष देते हैं। यह जीवन की सच्चाई से आँख चुराना है। पाठ की टिप्पणी कहती है कि ऐसी परजीवी संस्कृति आज भी देखी जा सकती है। इससे विद्यार्थी समझ सकते हैं कि यह व्यंग्य आज के दिखावे और झूठी प्रतिष्ठा पर भी लागू होता है।

From the text: टिप्पणी में यशपाल उस वर्ग पर कटाक्ष करते हैं जो “वास्तविकता से बेखबर एक बनावटी जीवन शैली का आदी है” और नवाब कहते हैं: “नामुराद मेदे पर बोझ डाल देता है।”

Characters

नवाब साहब

पाठ के मुख्य पात्र; लखनऊ की नवाबी नस्ल के सफ़ेदपोश सज्जन, जिनके खीरा ‘खाने’ के ढंग पर पूरा व्यंग्य टिका है।

  • दिखावा करने वाले और झूठी शान में जीने वाले
  • एकांतप्रिय और अहंकारी
  • सलीकेदार और नफ़ासत-पसंद
  • लोकलाज से डरने वाले (संकोची)
  • अवसर देखकर भाव बदलने वाले

लेखक के आने पर उनकी आँखों में “एकांत चिंतन में विघ्न का असंतोष” दिखा और उन्होंने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया। कुछ देर बाद अचानक ‘आदाब-अर्ज़’ कहकर खीरा पेश किया, यह भाव-परिवर्तन है। खीरों को धोकर, छीलकर “फाँकों को करीने से तौलिए पर” सजाना उनकी नफ़ासत दिखाता है। लेखक के अनुमान के अनुसार वे खीरे जैसी मामूली चीज़ खाते देखे जाने के संकोच में थे। अंत में सब फाँकें फेंककर गर्व से देखना और डकार लेना उनकी झूठी शान का प्रमाण है।

लेखक (कथावाचक ‘हम’)

कहानी सुनाने वाला पात्र, जो नवाब साहब के हर हाव-भाव को देखकर व्यंग्य करता है।

  • कल्पनाशील
  • सूक्ष्म पर्यवेक्षक
  • आत्मसम्मानी, पर कुछ अहंकारी भी
  • व्यंग्यप्रिय
  • लालच पर संयम रखने वाले

वे स्वयं कहते हैं कि “ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है” और नवाब के संकोच के कारणों का अनुमान लगाते हैं। वे “कनखियों से” नवाब के जबड़ों के स्फुरण तक देखते हैं। आत्मसम्मान में आँखें चुराना और मन होने पर भी खीरा न लेना उनके अहं और संयम दोनों को दिखाता है। अंत में ‘ज्ञान-चक्षु खुल गए’ कहना उनकी व्यंग्यप्रियता है।

How it is written

DeviceExampleEffect
व्यंग्य (कटाक्ष)लेखक नवाब के खीरा फेंकने को “खानदानी तहज़ीब, नफ़ासत और नज़ाकत” कहते हैं और अंत में “ज्ञान-चक्षु खुल गए!” लिखते हैं।प्रशंसा के शब्दों में असल में मज़ाक छिपा है। इससे पाठक हँसता भी है और दिखावे की खोखली आदत तथा बिना कथ्य की कहानी पर गंभीर चोट भी समझता है।
प्रथम पुरुष (‘हम’) शैली में आत्मकथात्मक वर्णन“हम कनखियों से नवाब साहब की ओर देख रहे थे।”घटना लेखक की आँखों से दिखाई जाती है, इसलिए पाठक उसके अनुमानों और भावों का सहभागी बन जाता है। साथ ही लेखक का अपना अहं भी सामने आता है, जिससे व्यंग्य दोनों ओर जाता है।
सूक्ष्म, चित्रात्मक वर्णनखीरे धोना, सिर काटकर झाग निकालना, फाँकें सजाना और “जबड़ों के स्फुरण” का वर्णन।छोटी-छोटी क्रियाओं के विस्तार से पूरा दृश्य आँखों के सामने आ जाता है। इतनी मेहनत के बाद फाँकें फेंक देना और भी हास्यास्पद लगता है।
लखनवी (उर्दू-फ़ारसी) शब्दावली और शिष्टाचार वाले संवाद“शुक्रिया, किबला शौक फरमाएँ।” तथा ‘आदाब-अर्ज़’, ‘वल्लाह’, ‘लज़ीज़’, ‘सकील’।भाषा पात्र और लखनऊ के नवाबी माहौल को जीवंत बनाती है। बाहर का यह औपचारिक शिष्टाचार भीतर के दिखावे से टकराकर व्यंग्य को तीखा करता है।
विडंबना (उलटी स्थिति)खीरा खाए बिना ही नवाब साहब “भरे पेट के ऊँचे डकार” लेते हैं और खीरे को भारी बताते हैं।जो हुआ ही नहीं, उसका परिणाम दिखाना हास्य पैदा करता है और लेखक के अंतिम तर्क, यानी बिना कथ्य कहानी नहीं बनती, की नींव बनता है।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • अनुमान के प्रतिकूल डिब्बा निर्जन नहीं था।

    लेखक (कथावाचक): लेखक डिब्बे को खाली समझकर दौड़कर चढ़ते हैं, पर वहाँ नवाब साहब बैठे मिलते हैं।

    यहीं से कहानी का तनाव शुरू होता है। एकांत चाहने वाले दो लोग आमने-सामने आ जाते हैं और दोनों का अहं टकराता है।

  • हमने भी उनके सामने की बर्थ पर बैठकर आत्मसम्मान में आँखें चुरा लीं।

    लेखक (कथावाचक): नवाब साहब ने बातचीत में उत्साह नहीं दिखाया, तो लेखक ने भी उनकी ओर देखना छोड़ दिया।

    ‘आत्मसम्मान में आँखें चुराना’ यानी अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए उपेक्षा का जवाब उपेक्षा से देना। यह लेखक के अहं को भी दिखाता है।

  • वल्लाह, शौक कीजिए, लखनऊ का बालम खीरा है!

    नवाब साहब: खीरे की फाँकों पर नमक-मिर्च लगाने के बाद नवाब दूसरी बार लेखक से खीरा खाने का आग्रह करते हैं।

    इसमें लखनवी शिष्टाचार और अपने शहर की चीज़ पर गर्व झलकता है, पर यह आग्रह भी दिखावे का हिस्सा है।

  • मियाँ रईस बनते हैं, लेकिन लोगों की नज़रों से बच सकने के खयाल में

    लेखक (कथावाचक): नवाब को खीरा तैयार करते देख लेखक मन में सोचते हैं कि अब ये असलियत पर उतर आए हैं।

    ‘रईस बनते हैं’ में व्यंग्य है: नवाब की रईसी असली नहीं, ओढ़ी हुई है। पर लेखक का यह अनुमान आगे गलत साबित होता है।

  • यह है खानदानी रईसों का तरीका!

    लेखक (नवाब की गर्व भरी नज़र का अर्थ बताते हुए): सारी फाँकें खिड़की से फेंककर नवाब गर्व से लेखक की ओर देखते हैं।

    नवाब के लिए खीरा फेंकना शान की बात है। यह पंक्ति पतनशील सामंती वर्ग की झूठी प्रतिष्ठा का सार है।

  • यह है खानदानी तहज़ीब, नफ़ासत और नज़ाकत!

    लेखक (कथावाचक): नवाब खीरे की तैयारी से थककर लेट जाते हैं और लेखक ‘सम्मान में’ सिर झुका लेते हैं।

    प्रशंसा के रूप में किया गया तीखा व्यंग्य; शिष्टता, स्वच्छता और कोमलता के नाम पर किया गया व्यर्थ आचरण।

  • खीरा लज़ीज़ होता है लेकिन होता है सकील, नामुराद मेदे पर बोझ डाल देता है।

    नवाब साहब: खीरा खाए बिना डकार लेने के बाद नवाब लेखक की ओर देखकर यह कहते हैं।

    नवाब अपनी भूख और दिखावे को छिपाने के लिए खीरे को दोष देते हैं। यह विडंबना लेखक के अंतिम व्यंग्य का आधार बनती है।

  • ज्ञान-चक्षु खुल गए! पहचाना—ये हैं नयी कहानी के लेखक!

    लेखक (कथावाचक): नवाब की डकार और बात सुनकर लेखक का निष्कर्ष।

    यहीं पाठ का असली लक्ष्य सामने आता है: बिना विचार, घटना और पात्रों के लिखी जाने वाली ‘नयी कहानी’ पर व्यंग्य।

यशपाल – लखनवी अंदाज़ in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

पतनशील सामंती वर्ग का दिखावा

मान लीजिए स्कूल पिकनिक पर आपका सहपाठी रोहन माँ के बनाए पराँठे बैग में छिपाए रखता है। सबके सामने वह केवल दुकान से खरीदा महँगा नाश्ता खोलता है, ताकि कोई उसे ‘साधारण’ न समझे। बस में अकेला होने पर वह चुपके से पराँठे खाता है।

रोहन के व्यवहार की तुलना ‘लखनवी अंदाज़’ के नवाब साहब से कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. रोहन का व्यवहार: साधारण भोजन को छिपाना, दिखावा करना।
  2. नवाब साहब: लेखक के अनुसार सफ़ेदपोश के सामने खीरा खाने में संकोच।
  3. समानता: दूसरों की नज़र में ‘बड़ा’ दिखने की चाह।
  4. निष्कर्ष: सादगी में शर्म नहीं होनी चाहिए।

Answer: रोहन नवाब साहब जैसा दिखावा कर रहा है। लेखक के अनुसार नवाब साहब सफ़ेदपोश के सामने खीरा खाने में संकोच करते थे; रोहन शान के लिए सादा भोजन छिपाता है।

Memory hook: छिपे पराँठे और सूँघा खीरा: दोनों में ‘लोग क्या कहेंगे’ का डर।

झूठी शान और अहं: दोनों ओर

कल्पना कीजिए कि कक्षा में छोटी-सी बहस के बाद आपकी दोस्त लंच में अपने टिफ़िन से समोसा आपकी ओर बढ़ाती है। आपको ज़ोर की भूख लगी है, पर आप कह देते हैं, ‘मुझे अभी भूख नहीं है।’

‘लखनवी अंदाज़’ के लेखक के व्यवहार से तुलना करके बताइए कि आपका इनकार आत्मसम्मान है या झूठा अहं।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अपनी स्थिति: भूख है, फिर भी इनकार।
  2. लेखक: मुँह में पानी आया, पर पहले इनकार कर चुका था।
  3. लेखक ने मेदे का बहाना बनाया; यह अहं था।
  4. सीख: अहं छोड़ने से रिश्ते बचते हैं।

Answer: यह झूठा अहं है। लेखक के मुँह में भी पानी आया था, पर पहले इनकार कर चुकने के कारण उसने मेदे का बहाना बनाया। अहं छोड़ने से दोस्ती बचती है।

Memory hook: ‘मेदा कमज़ोर है’ = ‘मुझे भूख नहीं’: दोनों अहं के बहाने।

बिना कथ्य की ‘नयी कहानी’ पर व्यंग्य

मान लीजिए आप स्कूल पत्रिका के छात्र-संपादक हैं। एक सहपाठी ‘मेरी कहानी’ शीर्षक से रचना देती है जिसमें भारी-भरकम शब्द और सुंदर वाक्य तो हैं, पर न कोई घटना है, न कोई पात्र, न कोई विचार।

संपादक के रूप में आप उसे क्या सुझाव देंगे? ‘लखनवी अंदाज़’ के अंत से जोड़कर लिखिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. रचना की कमी पहचानना: कथ्य का अभाव।
  2. सुझाव: घटना, पात्र और विचार जोड़ना।
  3. पाठ से जोड़: कल्पना से डकार और इच्छा मात्र से ‘नयी कहानी’ पर व्यंग्य।

Answer: मेरा सुझाव है कि रचना में कोई घटना, पात्र और विचार जोड़ो। यशपाल ने व्यंग्य किया है कि बिना कथ्य की कहानी नवाब साहब के सूँघे खीरे जैसी खोखली है।

Memory hook: सुगंध से पेट नहीं भरता, शब्दों से कहानी नहीं बनती।

वास्तविकता से कटी परजीवी संस्कृति

कल्पना कीजिए कि बोर्ड परीक्षा से पहले आपका भाई रंगीन टाइम-टेबल बनाता है, किताबों पर नए कवर चढ़ाता है और मोबाइल पर ‘ऐसे पढ़ें’ वाले वीडियो देखता रहता है। एक भी अध्याय पढ़े बिना वह रात को कहता है, ‘आज तो बहुत मेहनत हो गई।’

भाई के इस संतोष की तुलना नवाब साहब के डकार से कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. भाई: केवल तैयारी का दिखावा, असली पढ़ाई नहीं।
  2. नवाब साहब: खीरा सजाया, सूँघा, खाया नहीं, फिर भी डकार।
  3. समानता: कल्पना से तृप्ति का भ्रम।
  4. निष्कर्ष: वास्तविक मेहनत ही फल देती है।

Answer: भाई का संतोष नवाब साहब के डकार जैसा है। नवाब साहब ने खीरा खाया नहीं, केवल सूँघा, फिर भी पेट भरा दिखाया। तैयारी की कल्पना से अंक नहीं मिलते।

Memory hook: सजा टाइम-टेबल = सजी फाँकें; पढ़ाई नहीं तो डकार भी झूठा।

Topics in this chapter

  • नवाब साहब का चरित्र-चित्रणComing soon
  • लखनवी अंदाज़ का मूल भाव और व्यंग्यComing soon
  • लखनवी अंदाज़ प्रश्न-उत्तर (पाठ्यपुस्तक)Coming soon
  • लखनवी अंदाज़ पाठ का सारComing soon
  • यशपाल का जीवन परिचय और रचनाएँComing soon
  • लखनवी अंदाज़: नवाबी दिखावे पर व्यंग्य

How the board asks यशपाल – लखनवी अंदाज़

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5)पाठ का कोई अंश, जैसे डिब्बे में चढ़ना या खीरा तैयार करना, देकर पूछा जाता है कि किसी भाव का कारण क्या है, किसकी कौन-सी प्रवृत्ति दिखती है, या किसी पद का अभिप्राय क्या है।पहले गद्यांश ध्यान से पढ़ें और हर विकल्प को गद्यांश की पंक्ति से मिलाएँ। ‘सर्वाधिक उपयुक्त’ विकल्प वही है जो गद्यांश से सीधे सिद्ध हो, केवल आपकी राय से नहीं। ‘एकांत चिंतन में विघ्न’, ‘आत्मसम्मान में आँखें चुराना’ जैसे पदों का अर्थ संदर्भ से समझें।
कथन-कारण प्रश्नकथन (A) में किसी पात्र का कोई व्यवहार और कारण (R) में उसकी वजह दी जाती है, जैसे लेखक का खीरा लेने से मना करना और उसका कारण।पहले जाँचें कि कथन पाठ के अनुसार सही है या नहीं, फिर कारण। अंत में देखें कि क्या कारण सचमुच कथन की सही व्याख्या करता है। दोनों सही हों पर संबंध न हो, तो वह अलग विकल्प है।
कारण या व्यवहार स्पष्ट करने वाले प्रश्न (2 अंक, 25-30 शब्द)जैसे: नवाब साहब ने खीरा सूँघकर क्यों फेंका, या लेखक का व्यवहार शुरू से अंत तक कैसा रहा और क्यों।दो स्पष्ट बिंदु लिखें: क्या हुआ और उसका कारण। हर बिंदु को पाठ की किसी घटना से जोड़ें। 30 शब्दों से अधिक न लिखें।
चरित्र-चित्रण और व्यंग्य/प्रतिपाद्य वाले प्रश्नजैसे: पाठ नवाबी संस्कृति पर कैसे व्यंग्य करता है, या नवाब साहब की दो विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।विशेषता या व्यंग्य का नाम लिखकर तुरंत पाठ से उदाहरण दें, जैसे खीरे को सजाकर फेंकना या बिना खाए डकार लेना। ‘सोदाहरण’ लिखा हो तो उदाहरण के बिना पूरे अंक नहीं मिलते।
मूल्यांकन और राय वाले प्रश्न (HOTS)जैसे: क्या आपको नवाब साहब का व्यवहार सामान्य लगा? या क्या बिना विचार, घटना और पात्रों के कहानी लिखी जा सकती है?पहले साफ़ राय दें (हाँ या नहीं), फिर पाठ से एक तर्क और अपने अनुभव या आज के जीवन से एक तर्क दें। राय कोई भी हो, पर उसे युक्ति से सिद्ध करना ज़रूरी है।

Tricks to remember यशपाल – लखनवी अंदाज़

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • सात ‘स’ की कड़ी (घटनाक्रम)

    सेकंड क्लास → सज्जन (नवाब साहब) → सलाह (खीरे का आग्रह, लेखक का इनकार) → सजावट (धोना, छीलना, नमक-मिर्च) → सूँघना और फेंकना → सकील (डकार और बहाना) → सीख (‘नयी कहानी’ पर व्यंग्य)।

    Use it when: गद्यांश पढ़ते ही पहचानिए कि वह कहानी की किस कड़ी का है; इससे MCQ और 2 अंक के उत्तर में घटनाओं का क्रम नहीं बिगड़ता।

  • एक डिब्बा, दो अहं

    नवाब साहब = ‘शान’ (खीरा फेंका, गर्व से देखा); लेखक = ‘आत्मसम्मान’ (आँखें चुराईं, मेदे का बहाना)। याद रखें: दोनों ने ‘दिखावा’ किया, बस तरीका अलग था।

    Use it when: चरित्र-चित्रण और ‘क्या लेखक भी दोषी था’ जैसे मूल्यांकन प्रश्नों में दोनों पक्ष लिखने के लिए।

  • खीरा = कहानी (व्यंग्य का समीकरण)

    खीरे की सुगंध = लेखक की इच्छा; डकार = ‘नयी कहानी’; खाया हुआ खीरा = विचार, घटना, पात्र। जहाँ खीरा नहीं, वहाँ तृप्ति नहीं।

    Use it when: प्रतिपाद्य या ‘नयी कहानी’ पर व्यंग्य वाले प्रश्न में अंतिम पंक्ति को सही ढंग से समझाने के लिए।

  • कठिन शब्दों की जोड़ी

    सफ़ेदपोश = भद्र व्यक्ति; सकील = आसानी से न पचने वाला; मेदा = अमाशय; स्फुरण = फड़कना; बुरक देना = छिड़क देना; तसलीम में सिर खम करना = सम्मान में सिर झुकाना।

    Use it when: गद्यांश के शब्दार्थ वाले MCQ में विकल्पों को तुरंत परखने के लिए।

यशपाल – लखनवी अंदाज़: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: गद्यांश 1: दूसरा आग्रह और लेखक का इनकार

नमक-मिर्च छिड़क दिए जाने से ताज़े खीरे की पनियाती फाँकें देखकर पानी मुँह में ज़रूर आ रहा था, लेकिन इनकार कर चुके थे। आत्मसम्मान निबाहना ही उचित समझा, उत्तर दिया, ‘शुक्रिया, इस वक्त तलब महसूस नहीं हो रही, मेदा भी ज़रा कमज़ोर है, किबला शौक फरमाएँ।’

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: इससे ठीक पहले नवाब साहब लेखक की ओर देखकर फिर से खीरा खाने का आग्रह करते हैं—‘वल्लाह, शौक कीजिए, लखनऊ का बालम खीरा है!’) ‘लखनऊ का बालम खीरा है!’ कहकर नवाब साहब क्या करना चाहते थे?
    (क) खीरे की खास किस्म की प्रशंसा करके लेखक को खाने के लिए ललचाना
    (ख) लेखक को खीरे का दाम बताना
    (ग) लेखक को लखनऊ स्टेशन का रास्ता समझाना
    (घ) खीरा बेचने वाले की शिकायत करना

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    लेखक के मुँह में पानी आने का सबसे उपयुक्त कारण कौन-सा है?
    (क) उसे सुबह से कुछ खाने को नहीं मिला था
    (ख) नमक-मिर्च छिड़की हुई ताज़े खीरे की रसीली फाँकें उसके सामने थीं
    (ग) स्टेशन से पकवानों की सुगंध आ रही थी
    (घ) नवाब साहब ने उसे खीरे का स्वाद बताया था

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    ‘इस वक्त तलब महसूस नहीं हो रही’ — लेखक के इस उत्तर से उसके बारे में क्या पता चलता है?
    (क) वह सचमुच बीमार था और खीरा नहीं खा सकता था
    (ख) वह नवाब साहब से डरता था
    (ग) वह मन की इच्छा दबाकर अपने पहले इनकार और आत्मसम्मान पर टिका रहा
    (घ) उसे खीरा बिलकुल पसंद नहीं था

  4. (4) · 1 mark · Assertion-reason

    निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सही विकल्प चुनिए:
    कथन (A): लेखक ने नवाब साहब से कहा कि उसका मेदा ज़रा कमज़ोर है।
    कारण (R): लेखक पहले ही इनकार कर चुका था, इसलिए आत्मसम्मान बचाने के लिए उसने बहाना बनाया।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, किंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
    (ग) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    ‘मेदा भी ज़रा कमज़ोर है’ में ‘मेदा’ शब्द का अर्थ है—
    (क) हृदय
    (ख) अमाशय
    (ग) गला
    (घ) मस्तिष्क

Show the answersAnswers
  1. (क) खीरे की खास किस्म की प्रशंसा करके लेखक को खाने के लिए ललचाना
  2. (ख) नमक-मिर्च छिड़की हुई ताज़े खीरे की रसीली फाँकें उसके सामने थीं
  3. (ग) वह मन की इच्छा दबाकर अपने पहले इनकार और आत्मसम्मान पर टिका रहा
  4. (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।
  5. (ख) अमाशय

Extract 2: गद्यांश 2: डकार और ‘नयी कहानी’ पर व्यंग्य

ज्ञान-चक्षु खुल गए! पहचाना—ये हैं नयी कहानी के लेखक! खीरे की सुगंध और स्वाद की कल्पना से पेट भर जाने का डकार आ सकता है तो बिना विचार, घटना और पात्रों के, लेखक की इच्छा मात्र से ‘नयी कहानी’ क्यों नहीं बन सकती?

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: इससे पहले नवाब साहब खीरे की फाँकें सूँघकर खिड़की से बाहर फेंक देते हैं, फिर कहते हैं कि खीरा लज़ीज़ तो होता है पर 'सकील' होता है और मेदे पर बोझ डालता है।) नवाब साहब ने खीरे को ‘सकील’ क्यों बताया होगा?
    (क) खीरा सचमुच बासी और भारी था
    (ख) खीरा खाने के बजाय फेंक देने को उचित ठहराने के लिए
    (ग) लेखक को खीरा खाने से रोकने के लिए
    (घ) खीरा बेचने वाले को दोष देने के लिए

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: खीरा खाए बिना ही नवाब साहब ने 'भरे पेट के ऊँचे डकार' ली।) ‘भरे पेट के ऊँचे डकार’ में कौन-सा व्यंग्य छिपा है?
    (क) नवाब साहब ने बहुत अधिक खीरा खा लिया था
    (ख) पेट में एक फाँक भी नहीं गई, फिर भी तृप्ति का दिखावा किया गया
    (ग) गाड़ी के हिलने से नवाब साहब का पेट खराब हो गया
    (घ) नवाब साहब को खीरे से सचमुच अपच हो गई थी

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    ‘ज्ञान-चक्षु खुल गए!’ का यहाँ क्या अभिप्राय है?
    (क) लेखक की नींद टूट गई
    (ख) लेखक को अचानक एक गहरी सच्चाई समझ में आ गई
    (ग) लेखक ने खिड़की से बाहर देखना शुरू किया
    (घ) लेखक को नवाब साहब पर दया आ गई

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    लेखक ने ‘नयी कहानी’ के लेखकों की तुलना किससे की है?
    (क) लखनऊ स्टेशन के खीरा बेचने वालों से
    (ख) सेकंड क्लास के यात्रियों से
    (ग) सुगंध और स्वाद की कल्पना से डकार लेने वाले नवाब साहब से
    (घ) भीड़ से बचने वाले यात्रियों से

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    इस गद्यांश का मुख्य व्यंग्य किस पर है?
    (क) खीरे के पोषक गुणों पर
    (ख) बिना विचार, घटना और पात्रों के केवल इच्छा से कहानी रचने की प्रवृत्ति पर
    (ग) रेल यात्रा की असुविधाओं पर
    (घ) लखनऊ के खान-पान की परंपरा पर

Show the answersAnswers
  1. (ख) खीरा खाने के बजाय फेंक देने को उचित ठहराने के लिए
  2. (ख) पेट में एक फाँक भी नहीं गई, फिर भी तृप्ति का दिखावा किया गया
  3. (ख) लेखक को अचानक एक गहरी सच्चाई समझ में आ गई
  4. (ग) सुगंध और स्वाद की कल्पना से डकार लेने वाले नवाब साहब से
  5. (ख) बिना विचार, घटना और पात्रों के केवल इच्छा से कहानी रचने की प्रवृत्ति पर

यशपाल – लखनवी अंदाज़: board-level solved questions

Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट क्यों लिया · 2 marks · Short answerBoard level

‘लखनवी अंदाज़’ पाठ के आधार पर लिखिए कि लेखक ने अधिक दाम होने पर भी सेकंड क्लास का टिकट क्यों लिया।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लेखक को दूर नहीं जाना था, इसलिए अधिक दाम की चिंता कम थी।
  2. भीड़ से बचना और एकांत पाना।
  3. नयी कहानी के संबंध में सोचना।
  4. खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखना।

Answer: लेखक को दूर नहीं जाना था। उसने भीड़ से बचने, एकांत में नयी कहानी पर सोचने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए सेकंड क्लास का टिकट लिया।

Example 2: नवाब साहब का अचानक भाव-परिवर्तन · 2 marks · Short answerHarder board level

नवाब साहब ने अचानक लेखक से खीरा खाने का आग्रह किया। लेखक को उनका यह भाव-परिवर्तन अच्छा क्यों नहीं लगा?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पहले नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया था।
  2. फिर सहसा ‘आदाब-अर्ज़’ कहकर खीरे का आग्रह किया।
  3. लेखक ने भाँपा कि वे शराफ़त का गुमान (भ्रम) बनाए रखना चाहते हैं।
  4. वे लेखक को भी ‘मामूली लोगों की हरकत’ में शामिल करना चाहते थे।

Answer: उदासीन रहे नवाब साहब ने अचानक खीरे का आग्रह किया। लेखक को लगा कि वे शराफ़त का भ्रम बचाने के लिए उसे मामूली लोगों की हरकत में घसीटना चाहते हैं।

Example 3: नवाब साहब का चरित्र · 2 marks · Short answerHarder board level

पाठ के आधार पर नवाब साहब के चरित्र की दो विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. दिखावा-प्रिय: बड़े यत्न से खीरा धोया, छीला, सजाया, पर केवल सूँघकर फेंक दिया।
  2. झूठी शान: गर्व से लेखक की ओर देखा, मानो यह खानदानी रईसों का तरीका हो।
  3. अपनी हरकत को सही ठहराने के लिए खीरे को ‘सकील’ बताया।

Answer: नवाब साहब दिखावा-प्रिय और झूठी शान वाले हैं। वे यत्न से सजाया खीरा केवल सूँघकर फेंक देते हैं, फिर उसे सकील बताकर इस हरकत को नफ़ासत सिद्ध करते हैं।

Example 4: ‘नयी कहानी’ पर व्यंग्य · 2 marks · Short answerHarder board level

‘लखनवी अंदाज़’ में खीरे की घटना के माध्यम से ‘नयी कहानी’ पर किस प्रकार व्यंग्य किया गया है? स्पष्ट कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. नवाब साहब ने खीरा खाया नहीं, केवल सुगंध और स्वाद की कल्पना की।
  2. फिर भी भरे पेट का डकार लिया।
  3. लेखक ने इसकी तुलना बिना विचार, घटना और पात्रों वाली ‘नयी कहानी’ से की।
  4. संदेश: बिना कथ्य की कहानी खोखली होती है।

Answer: जैसे नवाब साहब खीरा खाए बिना केवल सुगंध की कल्पना से डकार लेते हैं, वैसे कुछ लेखक बिना विचार, घटना और पात्रों के इच्छा मात्र से ‘नयी कहानी’ बनाना चाहते हैं।

Example 5: क्या लेखक भी झूठी शान में था · 2 marks · Short answerHOTS / competency

‘लखनवी अंदाज़’ में केवल नवाब साहब ही नहीं, लेखक भी अहं से भरा दिखाई देता है। क्या आप इससे सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. स्पष्ट मत: हाँ, कुछ हद तक।
  2. प्रमाण: खीरे की फाँकें देखकर लेखक के मुँह में पानी आ रहा था।
  3. फिर भी पहले इनकार कर चुका था, इसलिए ‘आत्मसम्मान निबाहना’ उचित समझा।
  4. कमज़ोर मेदे का बहाना बनाया; अहं दोनों ओर था।

Answer: हाँ, कुछ हद तक। मुँह में पानी आने पर भी लेखक ने आत्मसम्मान के नाम पर खीरा नहीं लिया और कमज़ोर मेदे का बहाना बनाया। अहं दोनों ओर था।

Example 6: पाठ की आज के समय में प्रासंगिकता · 2 marks · Short answerHOTS / competency

यशपाल मानते हैं कि वास्तविकता से बेखबर बनावटी जीवन-शैली आज भी देखी जा सकती है। किसी उदाहरण द्वारा पाठ की प्रासंगिकता सिद्ध कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. आज का उदाहरण: केवल दिखाने के लिए महँगी चीज़ें खरीदना।
  2. नवाब साहब से तुलना: खीरा सजाया पर खाया नहीं।
  3. निष्कर्ष: बनावटी, परजीवी जीवन-शैली आज भी है, इसलिए पाठ प्रासंगिक है।

Answer: आज भी कुछ लोग महँगी चीज़ें दिखाने के लिए खरीदते हैं, उपयोग नहीं करते। नवाब साहब की तरह वे वास्तविकता से कटकर बनावटी जीवन जीते हैं, इसलिए पाठ प्रासंगिक है।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

‘नवाब साहब का खीरा न खाना भूख की नहीं, शान की समस्या थी।’ पाठ के आधार पर इस कथन को स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द) (2 marks)

StepMarks
कारण: लेखक (एक सफ़ेदपोश) के सामने साधारण खीरा खाना उनकी खानदानी रईसी की शान के विरुद्ध था; इसलिए फाँकें सूँघकर फेंक दीं।1
प्रमाण और निष्कर्ष: गर्व से लेखक की ओर देखना या खीरे को ‘सकील’ बताना; इससे उनका दिखावा-प्रिय स्वभाव प्रकट होता है।1

पठित गद्यांश (‘नवाब साहब की ओर से भरे पेट के ऊँचे डकार...’ वाला अंश) पर आधारित पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, कथन-कारण सहित (5 marks)

StepMarks
प्रश्न (i): तथ्य या शब्दार्थ पर आधारित सही विकल्प (जैसे ‘सकील’ का अर्थ)1
प्रश्न (ii): नवाब साहब के कथन या व्यवहार का कारण पहचानना1
प्रश्न (iii): मुहावरे ‘ज्ञान-चक्षु खुल गए’ का प्रसंग के अनुसार अर्थ1
प्रश्न (iv): कथन-कारण: दोनों की सत्यता और उनका संबंध सही आँकना1
प्रश्न (v): गद्यांश का केंद्रीय व्यंग्य (बिना कथ्य की ‘नयी कहानी’) पहचानना1

Where students lose marks in यशपाल – लखनवी अंदाज़

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: यह लिख देना कि नवाब साहब ने खीरा खाया

    छात्र तैयारी का वर्णन याद रखते हैं, पर अंत भूल जाते हैं कि फाँकें केवल सूँघकर खिड़की से बाहर फेंकी गईं।

    Wrong working

    नवाब साहब ने बड़े स्वाद से खीरा खाया और फिर लेट गए।

    Right working

    नवाब साहब ने फाँकें सूँघकर खिड़की से बाहर फेंक दीं, फिर भी भरे पेट का डकार लिया।

    Do this: उत्तर लिखने से पहले खुद से पूछिए: खीरे की फाँकें अंत में कहाँ गईं?

    Usually costs: 2 अंक के उत्तर में 1 से 2 अंक; MCQ में पूरा 1 अंक

  • Mistake: प्रतिपाद्य में केवल नवाबी दिखावा लिखना, ‘नयी कहानी’ वाला व्यंग्य छोड़ देना

    पाठ का अंतिम अनुच्छेद और लेखक-परिचय का यह कथन कि व्यंग्य बिना कथ्य की कहानी के विरुद्ध लिखा गया, ध्यान से नहीं पढ़ा जाता।

    Wrong working

    यह पाठ नवाबों के खाने के शौक के बारे में है।

    Right working

    पाठ नवाबी दिखावे के साथ बिना विचार, घटना और पात्रों वाली ‘नयी कहानी’ पर भी व्यंग्य करता है।

    Do this: प्रतिपाद्य के उत्तर में दोनों परतें लिखिए: पतनशील सामंती वर्ग और कथ्यहीन कहानी।

    Usually costs: 2 अंक के उत्तर में 1 अंक

  • Mistake: लेखक को पूरी तरह निर्दोष और विनम्र बताना

    छात्र कथावाचक को ‘अच्छा पात्र’ मान लेते हैं और उसके आँखें चुराने व मेदे के बहाने पर ध्यान नहीं देते।

    Wrong working

    लेखक बहुत सरल था, उसे खीरा खाने की इच्छा ही नहीं थी।

    Right working

    लेखक के मुँह में पानी आया, पर आत्मसम्मान निबाहने के लिए उसने कमज़ोर मेदे का बहाना बनाया।

    Do this: लेखक के व्यवहार पर प्रश्न हो तो पाठ की पंक्ति ‘इनकार कर चुके थे’ का प्रमाण अवश्य दीजिए।

    Usually costs: 2 अंक के उत्तर में 1 अंक

  • Mistake: 25-30 शब्दों की जगह पूरी कहानी दोहराना

    प्रश्न का सीधा उत्तर देने के बजाय छात्र ट्रेन, डिब्बा, खीरा, सब कुछ क्रम से लिखने लगते हैं।

    Wrong working

    लेखक ट्रेन में चढ़ा, वहाँ नवाब साहब बैठे थे, उनके पास खीरे थे, उन्होंने खीरे धोए, काटे... (60 से अधिक शब्द, कारण कहीं नहीं)

    Right working

    नवाब साहब ने खीरा इसलिए फेंका क्योंकि वे लेखक के सामने साधारण खीरा खाकर अपनी खानदानी रईसी की शान कम नहीं होने देना चाहते थे।

    Do this: पहली पंक्ति में सीधे प्रश्न का उत्तर दीजिए, फिर एक प्रमाण; बस।

    Usually costs: 2 अंक के उत्तर में 1 अंक तक (सही बिंदु छूट जाने पर)

  • Mistake: ‘सकील’ को ‘स्वादिष्ट’ समझ लेना

    वाक्य में ‘लज़ीज़’ और ‘सकील’ साथ आते हैं, इसलिए दोनों का अर्थ एक मान लिया जाता है।

    Wrong working

    नवाब साहब ने कहा कि खीरा बहुत सकील यानी स्वादिष्ट होता है।

    Right working

    ‘लज़ीज़’ का अर्थ स्वादिष्ट है और ‘सकील’ का अर्थ आसानी से न पचने वाला है।

    Do this: शब्द-संपदा के अर्थ पढ़कर जोड़ी में याद कीजिए: लज़ीज़ (स्वाद) बनाम सकील (पाचन)।

    Usually costs: शब्दार्थ वाले MCQ में पूरा 1 अंक

यशपाल – लखनवी अंदाज़: previous year questions

  • Course A: Asked in 4 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 0.9 marks per paper; 4 questions in all, counting OR alternatives. In 1 of 4 sample papers.
  • Course B: Asked in 2 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 0.5 marks per paper; 2 questions in all, counting OR alternatives. In 0 of 4 sample papers.

Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.

Solved board questions from यशपाल – लखनवी अंदाज़

Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.

2026 Course A, set 3/3/1, Q9 · 5 marks · Reading comprehensionCompetency-based

निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : 5×1=5

गाड़ी छूट रही थी। सेकंड क्लास के एक छोटे डिब्बे को खाली समझकर, जरा दौड़कर उसमें चढ़ गए। अनुमान के प्रतिकूल डिब्बा निर्जन नहीं था। एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक सफ़ेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे। सामने दो ताजे-चिकने खीरे तौलिए पर रखे थे। डिब्बे में हमारे सहसा कूद जाने से सज्जन की आँखों में एकांत चिंतन में विघ्न का असंतोष दिखाई दिया। सोचा, हो सकता है, यह भी कहानी के लिए सूझ की चिंता में हों या खीरे-जैसी अपदार्थ वस्तु का शौक करते देखे जाने के संकोच में हों।

नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया। हमने भी उनके सामने की बर्थ पर बैठकर आत्मसम्मान में आँखें चुरा लीं।

ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है। नवाब साहब की असुविधा और संकोच के कारण का अनुमान करने लगे। संभव है, नवाब साहब ने बिलकुल अकेले यात्रा कर सकने के अनुमान में किफ़ायत के विचार से सेकंड क्लास का टिकट खरीद लिया हो और अब गवारा न हो कि शहर का कोई सफ़ेदपोश उन्हें मँझले दर्जे में सफ़र करता देखे।

  1. (i)

    लेखक के अनुसार नवाब साहब की आँखों में असंतोष का भाव क्यों दिखाई दे रहा था ? इस प्रश्न के उत्तर के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए :
    I. एकांत चिंतन में विघ्न पड़ने के कारण
    II. कहानी के लिए उपयुक्त कथानक नहीं मिलने के कारण
    III. खीरे जैसी साधारण वस्तु के साथ देखे जाने के कारण

    1. (A)I, II और III तीनों सही हैं।
    2. (B)I, II और III तीनों ग़लत हैं।
    3. (C)I और II दोनों सही हैं।
    4. (D)I और III दोनों सही हैं।
    1 mark
  2. (ii)

    नवाब साहब के व्यवहार से उनकी किस प्रवृत्ति का परिचय मिलता है ?

    1. (A)सादगी और सहजता
    2. (B)मित्रवत व्यवहार और अपनापन
    3. (C)अपरिचितों पर संदेह
    4. (D)दिखावा और संकोच
    1 mark
  3. (iii)

    प्रस्तुत गद्यांश में लेखक के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषताएँ दिखाई देती हैं ?

    1. (A)आक्रामक और क्रोधी
    2. (B)उदासीन और तटस्थ
    3. (C)निराश और क्षुब्ध
    4. (D)आलोचनात्मक और कल्पनाशील
    1 mark
  4. (iv)

    निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
    कथन : लेखक ने नवाब साहब से अपनी नज़रें चुरा लीं और दूसरी ओर देखने लगा।
    कारण : नवाब साहब के व्यवहार के कारण अपने आत्मसम्मान को निबाहने के लिए उसने ऐसा किया।

    1. (A)कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
    2. (B)कथन सही है, किंतु कारण ग़लत है।
    3. (C)कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की उचित व्याख्या करता है।
    4. (D)कथन और कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण, कथन की उचित व्याख्या नहीं करता है।
    1 mark
  5. (v)

    'आत्मसम्मान में आँखें चुराना' से क्या अभिप्राय है ?

    1. (A)स्वाभिमान का निर्वाह करने के लिए आँखें हटाना
    2. (B)स्वयं के संतोष के लिए दृष्टि हटाना
    3. (C)आत्मा के सम्मान के लिए आँखें झुकाना
    4. (D)सामने वाले के सम्मान के लिए आँखें झुकाना
    1 mark
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (i) लेखक ने असंतोष के कारण एकांत चिंतन में विघ्न और खीरे जैसी साधारण वस्तु के साथ देखे जाने का संकोच माना; कहानी का कथानक नहीं। विकल्प (D)।

    1 mark
  2. (ii) नवाब साहब के व्यवहार से दिखावे और संकोच की प्रवृत्ति झलकती है। विकल्प (D)।

    1 mark
  3. (iii) लेखक अनुमान लगाता और व्यवहार की परख करता है, इसलिए आलोचनात्मक और कल्पनाशील। विकल्प (D)।

    1 mark
  4. (iv) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की उचित व्याख्या है। विकल्प (C)।

    1 mark
  5. (v) इसका अर्थ है स्वाभिमान का निर्वाह करने के लिए आँखें हटाना। विकल्प (A)।

    1 mark

Answer: (i) D; (ii) D; (iii) D; (iv) C; (v) A

Where the marks are

  • प्रत्येक सही विकल्प (1 अंक × 5)

See it in the full 2026 board paper, set 3/3/1

2025 Course A, set 3/3/1, Q8 · 6 marks · Short answer

निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25–30 शब्दों में लिखिए : 3×2=6

  1. (क)

    'एक कहानी यह भी' पाठ के आधार पर आज़ादी के आंदोलन के भीतर विद्यार्थियों की भूमिका के कोई दो पहलू स्पष्ट कीजिए।

    2 marks
  2. (ख)

    'नेताजी का चश्मा' पाठ के पात्र 'पानवाले' के व्यक्तित्व पर टिप्पणी करते हुए उसकी दो विशेषताएँ लिखिए। एक जिसे आप पसंद करते हों और दूसरी जिसे आप अवश्य बदलना चाहेंगे। दोनों को स्पष्ट करना ज़रूरी है।

    2 marks
  3. (ग)

    'बालगोबिन भगत' पाठ से सोदाहरण सिद्ध कीजिए कि भगत, कबीर की शिक्षा को सिर्फ कथनी में ही नहीं करनी में भी उतारते थे।

    2 marks
  4. (घ)

    'लखनवी अंदाज़' पाठ नवाबी संस्कृति की परतों को खोलकर रख देता है, कैसे ? सोदाहरण समझाइए।

    2 marks
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (क) आज़ादी के आंदोलन में विद्यार्थी सक्रिय आंदोलनकर्मी थे। वे प्रभात फेरियों, हड़तालों और भाषणों में भाग लेते थे और कॉलेज-स्कूल छोड़कर सड़कों पर प्रदर्शन करते थे।

    2 marks
  2. (ख) पसंद: पानवाला हँसमुख और संवेदनशील था, कैप्टन की मृत्यु पर दुखी हुआ। बदलना चाहूँगा: वह कैप्टन को लंगड़ा और पागल कहकर उसका मज़ाक उड़ाता था, यह असंवेदनशीलता बदलूँगा।

    2 marks
  3. (ग) भगत कबीर के आदर्शों को जीते थे। बेटे की मृत्यु पर उन्होंने धैर्य रखा और आत्मा-परमात्मा के मिलन का उत्सव मनाया। वे झूठ नहीं बोलते थे और बिना पूछे किसी की वस्तु को हाथ नहीं लगाते थे।

    2 marks
  4. (घ) नवाबी संस्कृति बनावटी जीवनशैली और दिखावे की है। नवाब साहब खीरे को तुच्छ मानकर सजाते हैं, खाने से हिचकते हैं, सूँघकर फेंक देते हैं और सुगंध से तृप्ति का दिखावा करते हैं।

    2 marks

Answer: किन्हीं तीन उप-भागों के उत्तर ऊपर दिए गए हैं

Where the marks are

  • (क) विद्यार्थियों की भूमिका के दो पहलू (2 marks)
  • (ख) एक पसंद और एक बदलने योग्य विशेषता (2 marks)
  • (ग) उदाहरण सहित उत्तर (2 marks)
  • (घ) नवाबी संस्कृति और एक उदाहरण (2 marks)

See it in the full 2025 board paper, set 3/3/1

2023 Course A, set 3/1/1, Q8 · 2 marks · MCQ

गद्य खंड के पाठों के आधार पर निम्नलिखित दो प्रश्नों का सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए :

  1. (i)

    'लखनवी अंदाज' पाठ के नवाब साहब द्वारा लेखक की तरफ उत्सुकता नहीं दिखाई जाने के कारणों को पढ़कर सबसे उचित विकल्प चुनकर लिखिए –
    कारण :
    (क) दूसरे दर्जे में सफर करते देखे जाने की हिचक रही होगी
    (ख) खीरे जैसी साधारण वस्तु के साथ देखे जाने का संकोच
    (ग) संभवतः वे भी नई कहानी के विषय में सोचने के लिए एकांत चाहते हों ।

    1. (a)इनमें से कोई भी नहीं ।
    2. (b)केवल (क) और (ख)
    3. (c)(क), (ख) और (ग) तीनों ।
    4. (d)केवल (ग)
    1 mark
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (i) नवाब साहब की उदासीनता के तीनों कारण संभव हैं: दूसरे दर्जे में दिखने की हिचक, खीरे जैसी साधारण वस्तु का संकोच और नई कहानी पर सोचने के लिए एकांत। इसलिए (क), (ख), (ग) तीनों। उत्तर (c)।

    1 mark

Answer: (i) विकल्प (c) – (क), (ख) और (ग) तीनों

Where the marks are

  • (i) सही विकल्प (c) (1 अंक)

See it in the full 2023 board paper, set 3/1/1

Every यशपाल – लखनवी अंदाज़ question, by year

Course A (5 questions, sample papers included)

2026

Set 3/3/1: Q9 (5 marks, solved)

2025

Set 3/3/1: Q8 (6 marks, solved)

Set 3/4/1: Q8 (6 marks, solved)

For 2024

Sample paper 2023-24: Q11 (6 marks, solved)

2023

Set 3/1/1: Q8 (2 marks, solved)

Course B (2 questions, sample papers included)

2026

Set 4/1/1: Q7 (5 marks, solved)

Set 4/5/1: Q7 (5 marks, solved)

Practice questions on यशपाल – लखनवी अंदाज़

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 2 marks · Short answerBoard level

    नवाब साहब ने खीरा खाने से पहले उसकी तैयारी किस प्रकार की? क्रम से लिखिए।

    Hint

    तौलिया, लोटा, चाकू, झाग, फाँकें, नमक-मिर्च: इसी क्रम में सोचिए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • तौलिया झाड़कर बिछाया, लोटे के पानी से खीरे धोकर पोंछे।
    • सिर काटकर गोदा और झाग निकाला।
    • सावधानी से छीलकर फाँकें तौलिए पर सजाईं।
    • जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च बुरकी।

    आदर्श उत्तर: नवाब साहब ने तौलिया बिछाया, लोटे के पानी से खीरे धोकर पोंछे, सिर काटकर झाग निकाला, सावधानी से छीलकर फाँकें सजाईं और उन पर जीरा-मिला नमक व लाल मिर्च बुरकी।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    लेखक ने कैसे भाँप लिया कि नमक-मिर्च बुरकते समय नवाब साहब का मुँह खीरे के रसास्वादन की कल्पना से भर रहा था?

    Hint

    नवाब साहब के चेहरे और जबड़ों पर ध्यान दीजिए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • नवाब साहब की प्रत्येक भाव-भंगिमा।
    • जबड़ों का स्फुरण (फड़कना)।
    • इनसे स्पष्ट था कि स्वाद की कल्पना से मुँह में पानी भर रहा था।

    आदर्श उत्तर: नमक-मिर्च बुरकते समय नवाब साहब की प्रत्येक भाव-भंगिमा और जबड़ों के फड़कने से लेखक ने भाँप लिया कि खीरे के स्वाद की कल्पना से उनके मुँह में पानी भर रहा था।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level

    लेखक के अनुमान के अनुसार नवाब साहब ने सेकंड क्लास का टिकट क्यों लिया होगा और लेखक के आने से उन्हें संकोच क्यों हुआ?

    Hint

    ‘किफ़ायत’ और ‘मँझले दर्जे’ शब्दों से जुड़ा लेखक का अनुमान याद कीजिए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • अकेले यात्रा कर सकने के अनुमान में किफ़ायत के विचार से टिकट लिया होगा।
    • अब गवारा न था कि कोई सफ़ेदपोश उन्हें मँझले दर्जे में देखे।
    • यह लेखक का अनुमान है, पाठ में तथ्य के रूप में नहीं।

    आदर्श उत्तर: लेखक के अनुसार अकेले यात्रा की आशा में किफ़ायत के लिए उन्होंने सेकंड क्लास लिया होगा। अब उन्हें गवारा नहीं था कि कोई सफ़ेदपोश उन्हें मँझले दर्जे में देखे।

  4. Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level

    ‘यह है खानदानी तहज़ीब, नफ़ासत और नज़ाकत!’ — लेखक के इस कथन में छिपे व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।

    Hint

    लेखक ऊपर से प्रशंसा कर रहा है; भीतर उसका आशय क्या है?

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • कथन प्रशंसा जैसा दिखता है, पर वास्तव में व्यंग्य है।
    • खीरा सूँघकर फेंकना और ‘तैयारी’ से थककर लेट जाना।
    • इससे पता चलता है कि यह तहज़ीब नहीं, खोखला दिखावा है।

    आदर्श उत्तर: लेखक प्रशंसा के रूप में व्यंग्य करता है। खीरा सूँघकर फेंक देना और फिर थककर लेट जाना तहज़ीब नहीं, बल्कि नवाबी वर्ग का खोखला दिखावा और भोजन की बर्बादी है।

  5. Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level

    पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि पतनशील सामंती वर्ग वास्तविकता से बेखबर बनावटी जीवन-शैली का आदी है।

    Hint

    खीरे की फाँकों का अंत और नवाब साहब का डकार: दोनों को जोड़िए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • खीरा खाने के बजाय सूँघकर फेंक देना।
    • कल्पना से पेट भरने का डकार लेना।
    • असली ज़रूरत (भूख) से अधिक महत्त्व दिखावे को देना।

    आदर्श उत्तर: नवाब साहब दिखावे के लिए खीरा खाने के बजाय सूँघकर फेंक देते हैं और कल्पना से पेट भरने का डकार लेते हैं। यह वास्तविकता से कटी बनावटी जीवन-शैली है।

  6. Q6 · 2 marks · Short answerHarder board level

    नवाब साहब का ‘आदाब-अर्ज़’ कहना और लेखक का ‘किबला शौक फरमाएँ’ कहना — इन शिष्ट संबोधनों के पीछे दोनों के मन में क्या भाव था? पाठ के आधार पर लिखिए।

    Hint

    शब्द मीठे थे, पर क्या मन भी उतने ही खुले थे?

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • ऊपर से दोनों ओर शिष्टाचार के शब्द।
    • भीतर अहं और दूरी: नवाब साहब पहले उदासीन, लेखक ने आँखें चुराईं।
    • इससे पता चलता है कि शिष्टता केवल औपचारिक थी।

    आदर्श उत्तर: दोनों ओर से शिष्टाचार के शब्द बोले गए, पर मन में अहं और दूरी थी। इससे पता चलता है कि यह शिष्टता केवल ऊपरी औपचारिकता थी, सच्ची आत्मीयता नहीं।

  7. Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    मान लीजिए आप उस डिब्बे में लेखक की जगह होते। नवाब साहब के खीरा खाने के आग्रह पर आप क्या करते और क्यों?

    Hint

    सोचिए, आपके एक छोटे निर्णय से अहं की दीवार टूटती या और ऊँची होती।

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • अपना स्पष्ट निर्णय (स्वीकार या विनम्र इनकार)।
    • कारण: झूठे अहं से बचना, सहज व्यवहार।
    • पाठ से जोड़: लेखक ने इच्छा होते हुए भी इनकार किया था।

    आदर्श उत्तर: मैं विनम्रता से खीरा स्वीकार कर लेता और बातचीत शुरू करता। इससे झूठे अहं की दीवार टूटती, सफ़र सहज बनता और शायद नवाब साहब खीरा फेंकने का दिखावा न करते।

  8. Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    आपका मित्र कहता है, ‘भाषा सुंदर हो तो कहानी में घटना या पात्र की ज़रूरत नहीं।’ ‘लखनवी अंदाज़’ के आधार पर उसके मत का मूल्यांकन कीजिए।

    Hint

    पाठ के अंत में लेखक डकार और ‘नयी कहानी’ को कैसे जोड़ता है?

    Answer

    उत्तर-बिंदु:

    • स्पष्ट मत: असहमति।
    • पाठ का प्रमाण: कल्पना के डकार जैसी बिना कथ्य की कहानी।
    • विचार, घटना और पात्र कहानी के लिए आवश्यक।

    आदर्श उत्तर: मैं असहमत हूँ। पाठ के अनुसार बिना कथ्य की कहानी नवाब साहब के झूठे डकार जैसी खोखली होगी। विचार, घटना और पात्रों के बिना पाठक तृप्त नहीं होता।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट किन कारणों से लिया?Show answer

    भीड़ से बचने, एकांत में नयी कहानी पर सोचने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए; दूर भी नहीं जाना था।

  2. 2.डिब्बे में बैठे सज्जन का लेखक ने कैसा वर्णन किया?Show answer

    लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक सफ़ेदपोश सज्जन, जो बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे; सामने तौलिए पर दो ताज़े-चिकने खीरे थे।

  3. 3.लेखक के आने पर नवाब साहब की आँखों में कौन-सा भाव दिखा?Show answer

    एकांत चिंतन में विघ्न पड़ने का असंतोष।

  4. 4.नवाब साहब ने फाँकों पर क्या बुरका?Show answer

    जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च की सुर्खी।

  5. 5.दूसरी बार इनकार करते समय लेखक ने कौन-सा बहाना बनाया?Show answer

    कहा कि इस वक्त तलब महसूस नहीं हो रही और मेदा भी ज़रा कमज़ोर है।

  6. 6.फाँकें फेंकने के बाद नवाब साहब ने क्या किया?Show answer

    तौलिए से हाथ और होंठ पोंछे, गर्व से लेखक की ओर देखा और तैयारी से थककर लेट गए; फिर डकार लिया।

  7. 7.‘ज्ञान-चक्षु खुल गए’ के बाद लेखक ने किसे पहचाना?Show answer

    ‘नयी कहानी’ के लेखकों को, जो बिना विचार, घटना और पात्रों के, इच्छा मात्र से कहानी बनाना चाहते हैं।

  8. 8.लेखक-परिचय के अनुसार यशपाल ने यह व्यंग्य क्यों लिखा था?Show answer

    यह साबित करने के लिए कि बिना कथ्य के कहानी नहीं लिखी जा सकती।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप बिना देखे बता सकते हैं कि ट्रेन किस प्रकार की थी और लेखक ने कौन-सा टिकट लिया?
  • क्या आप लेखक के वे दो अनुमान बता सकते हैं जो उसने नवाब साहब के असंतोष के बारे में लगाए?
  • क्या आप खीरे की तैयारी के सभी चरण सही क्रम में (तौलिया से नमक-मिर्च तक) गिना सकते हैं?
  • क्या आप बता सकते हैं कि लेखक ने दो बार खीरा क्यों नहीं लिया और दूसरी बार क्या बहाना बनाया?
  • क्या आप ‘यह है खानदानी तहज़ीब, नफ़ासत और नज़ाकत!’ का व्यंग्य दो पंक्तियों में समझा सकते हैं?
  • क्या आप डकार और ‘नयी कहानी’ का संबंध 30 शब्दों में लिख सकते हैं?
  • क्या आप सकील, मेदा, सफ़ेदपोश, स्फुरण और तसलीम के अर्थ बिना रुके बता सकते हैं?
  • क्या आप साबित कर सकते हैं कि अहं केवल नवाब साहब में नहीं, लेखक में भी था?

यशपाल – लखनवी अंदाज़: frequently asked questions

‘लखनवी अंदाज़’ पाठ में व्यंग्य किस पर किया गया है?

यशपाल दो बातों पर व्यंग्य करते हैं। पहला, उस पतनशील सामंती वर्ग पर जो सच्चाई से बेखबर होकर बनावटी शान में जीता है, जैसे नवाब साहब। दूसरा, उस ‘नयी कहानी’ पर जो बिना विचार, घटना और पात्रों के केवल लेखक की इच्छा से लिखी जाए।

नवाब साहब ने खीरा खाने के बजाय उसे सूँघकर बाहर क्यों फेंक दिया?

लेखक के सामने खीरे जैसी मामूली चीज़ खाना नवाब साहब को अपनी खानदानी शान के खिलाफ़ लगा होगा। इसलिए उन्होंने केवल सूँघकर स्वाद की कल्पना की और फाँकें फेंक दीं। फिर गर्व से लेखक की ओर देखा, मानो यही रईसों का तरीका हो।

क्या लेखक भी झूठी शान के दोषी हैं?

हाँ, पाठ से ऐसा संकेत मिलता है। लेखक भी आत्मसम्मान के कारण नवाब से आँखें चुराते हैं और मन ललचाने पर भी खीरा लेने से मना कर देते हैं। दूसरी बार वे मेदा कमज़ोर होने का बहाना भी बनाते हैं।

‘लखनवी अंदाज़’ शीर्षक कितना सार्थक है?

शीर्षक सार्थक है, क्योंकि पूरा पाठ लखनऊ के नवाब साहब के अनोखे अंदाज़ पर टिका है। उनकी नफ़ासत, शिष्टाचार की भाषा और खीरा ‘खाने’ का ढंग ही कहानी है। यह अंदाज़ ही व्यंग्य का केंद्र बनता है।

पाठ के अंत में ‘ज्ञान-चक्षु खुल गए’ का क्या अर्थ है?

यह व्यंग्य भरा कथन है। नवाब बिना खाए डकार लेते हैं, तो लेखक कहते हैं कि अब समझ आया, ऐसे ही लोग ‘नयी कहानी’ के लेखक हैं। अर्थात जैसे सूँघने से पेट नहीं भरता, वैसे ही बिना कथ्य के कहानी नहीं बनती।

यशपाल के बारे में पाठ में क्या बताया गया है?

यशपाल का जन्म सन् 1903 में फीरोज़पुर छावनी में हुआ और मृत्यु सन् 1976 में हुई। वे स्वाधीनता संग्राम की क्रांतिकारी धारा से जुड़े और जेल भी गए। वे यथार्थवादी शैली के रचनाकार हैं; झूठा सच, दिव्या, अमिता उनके उपन्यास और ज्ञानदान, पिंजरे की उड़ान उनके कहानी संग्रह हैं।

Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-अ (002), कक्षा 10, 2026-27; NCERT क्षितिज भाग 2 (Reprint 2026-27), लखनवी अंदाज़