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HindiCBSE Class 10 · Chapter 9

डायरी का एक पन्ना Class 10: सारांश, पात्र और प्रश्न-उत्तर

Updated 14 October 2026 · Fact-checked

'डायरी का एक पन्ना' सीताराम सेकसरिया की डायरी का 26 जनवरी 1931 का लेखाजोखा है। इसमें कलकत्ता के लोगों, सुभाष बाबू और स्त्रियों ने अंग्रेज़ पुलिस की लाठियों के बीच दूसरा स्वतंत्रता दिवस मनाया। बोर्ड इस पाठ से गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के दो अंकीय प्रश्न पूछता है।

What सीताराम सेकसरिया – डायरी का एक पन्ना is about

'डायरी का एक पन्ना' स्पर्श भाग 2 के गद्य खंड का पाठ है। इसके लेखक सीताराम सेकसरिया हैं, जो स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल रहे। यह डायरी विधा में लिखा गया है। इसमें 26 जनवरी 1931 को कलकत्ता में मनाए गए देश के दूसरे स्वतंत्रता दिवस, पुलिस के अत्याचार और लोगों, खासकर स्त्रियों, के साहस का आँखों देखा वर्णन है।

बोर्ड परीक्षा में यह पाठ दो तरह से आता है। पहला, पठित गद्यांश देकर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) पूछे जाते हैं, जिनमें कथन-कारण प्रश्न भी होता है। दूसरा, गद्य खंड के प्रश्न में 25-30 शब्दों के उत्तर वाले प्रश्न (2 अंक) पूछे जाते हैं, जैसे किसी कथन को पाठ के आधार पर सिद्ध करना या किसी घटना का कारण बताना।

In real board papers: Course A, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026); Course B, asked in 5 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 1.4 marks per paper. See the questions

सीताराम सेकसरिया – डायरी का एक पन्ना: summary

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

लेखक 26 जनवरी 1931 को 'अमर दिन' कहते हैं, क्योंकि 1930 में इसी दिन पूरे देश में पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। इस वर्ष उसे दोहराना था। पिछले वर्ष कलकत्ता का हिस्सा साधारण रहा था, इसलिए इस बार बड़ी तैयारी हुई। केवल प्रचार पर दो हज़ार रुपये खर्च हुए। कार्यकर्ताओं के घर जाकर समझाया गया कि सारा काम उनकी अपनी ज़िम्मेदारी है।

बड़े बाज़ार के लगभग हर मकान पर राष्ट्रीय झंडा था। मकान ऐसे सजे थे मानो आज़ादी मिल गई हो। दूसरी ओर पुलिस पूरी ताकत से गश्त कर रही थी। मोड़ों पर लारियों में गोरखे और सारजेंट तैनात थे, घुड़सवार भी थे। ट्रैफ़िक पुलिस तक इसी काम में लगा दी गई। पार्कों, मैदानों और मोनुमेंट को सुबह से घेर लिया गया।

फिर भी कई जगह सुबह झंडा फहराया गया। श्रद्धानंद पार्क में अविनाश बाबू ने झंडा गाड़ा तो उन्हें पकड़ लिया गया। तारा सुंदरी पार्क में हरिश्चंद्र सिंह भीतर न जा सके, मारपीट में कुछ लोगों के सिर फटे। गुजराती सेविका संघ के जुलूस की लड़कियाँ गिरफ़्तार हुईं। 11 बजे मारवाड़ी बालिका विद्यालय में झंडोत्सव हुआ। दो-तीन बजे पूर्णोदास और पुरुषोत्तम राय पकड़े गए।

पुलिस कमिश्नर ने नोटिस निकाला कि कोई सभा नहीं होगी। कौंसिल ने घोषणा की कि मोनुमेंट के नीचे 4 बजकर 24 मिनट पर झंडा फहराया जाएगा और प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी। यह खुली चुनौती थी। तीन बजे से मैदान में हज़ारों लोग जुटने लगे।

4 बजकर 10 मिनट पर सुभाष बाबू जुलूस लेकर आए। चौरंगी पर रोकने की कोशिश नाकाम रही। मैदान के मोड़ पर लाठियाँ चलीं, सुभाष बाबू पर भी लाठियाँ पड़ीं, पर वे वंदे मातरम् बोलते हुए आगे बढ़ते रहे। उसी समय स्त्रियाँ मोनुमेंट की सीढ़ियों पर झंडा फहराकर घोषणा पढ़ रही थीं। सुभाष बाबू को पकड़कर लालबाज़ार लॉकअप भेज दिया गया।

इसके बाद स्त्रियों का जुलूस चला। धर्मतल्ले के मोड़ पर जुलूस टूटा और 50-60 स्त्रियाँ वहीं बैठ गईं, जिन्हें पकड़ लिया गया। विमल प्रतिभा के नेतृत्व वाला दल बहू बाज़ार के मोड़ पर बैठ गया। वृजलाल गोयनका, मदालसा आदि भी गिरफ़्तार हुए। कुल 105 स्त्रियाँ पकड़ी गईं, जिन्हें रात नौ बजे छोड़ा गया।

रात को कांग्रेस दफ़्तर में डॉक्टर दासगुप्ता घायलों की देखभाल करते हुए उनके फ़ोटो उतरवा रहे थे। लगभग दो सौ लोग घायल हुए। लेखक के अनुसार इस दिन बंगाल और कलकत्ता पर लगा 'काम न होने' का कलंक काफ़ी हद तक धुल गया।

Themes and message

संगठित समाज की शक्ति

पाठ दिखाता है कि जब पूरा समाज एक लक्ष्य के लिए मिलकर तैयारी करता है, तो बड़ी से बड़ी सरकारी ताकत भी उसे रोक नहीं पाती। प्रचार पर धन खर्च हुआ, कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर ज़िम्मेदारी समझाई गई, हर मोहल्ले में झंडे लगे। पुलिस ने मैदान घेरा, नेताओं को पकड़ा, फिर भी हज़ारों लोग पहुँचे और झंडा फहराया गया। नेता पकड़े गए तो दूसरे लोगों ने काम सँभाल लिया। इससे पता चलता है कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति पर नहीं, पूरे समाज के संकल्प पर टिका था।

From the text: पूर्णोदास के पकड़े जाने से पहले ही सुभाष बाबू के जुलूस का प्रबंध हो चुका था; पुलिस के रोकने पर भी 'भीड़ की अधिकता के कारण पुलिस जुलूस को रोक नहीं सकी'।

स्वतंत्रता आंदोलन में स्त्रियों की भूमिका

इस दिन स्त्रियाँ केवल दर्शक नहीं थीं, वे आंदोलन की अगुवा थीं। जब पुरुषों के जुलूस पर लाठियाँ चल रही थीं, स्त्रियों ने मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहराया और घोषणा पढ़ी। वे जुलूस बनाकर आगे बढ़ीं, रोके जाने पर सड़क पर बैठ गईं और गिरफ़्तारी दी। मदालसा को थाने में मारा भी गया। 105 स्त्रियों का एक साथ पकड़ा जाना कलकत्ता में पहली बार हुआ। इससे पता चलता है कि आज़ादी की लड़ाई में स्त्रियों का साहस पुरुषों से कम नहीं था।

From the text: 'स्त्रियाँ बहुत बड़ी संख्या में पहुँच गई थीं।'; विमल प्रतिभा का नेतृत्व; कुल 105 स्त्रियों की गिरफ़्तारी।

अंग्रेज़ी शासन का दमन और देशवासियों का बलिदान

अंग्रेज़ प्रशासन ने स्वतंत्रता दिवस मनाने को अपराध माना। पूरे शहर में पुलिस, गोरखे, सारजेंट और घुड़सवार तैनात किए गए। झंडा फहराने वालों को पकड़ा गया, लाठियाँ चलाई गईं, लोगों के सिर फटे। लेखक क्षितीश चटर्जी का बहता खून देखकर आँखें बंद कर लेते हैं। लगभग दो सौ लोग घायल हुए। यह विवरण हमें याद दिलाता है कि आज जिस आज़ादी में हम जीते हैं, उसके लिए लोगों ने कितनी चोटें और अपमान सहे।

From the text: 'पुलिस भयानक रूप से लाठियाँ चला रही थी।'; 160 लोग अस्पताल पहुँचे और लगभग दो सौ घायल हुए।

अदम्य साहस और देशभक्ति

पाठ के पात्र डर के आगे नहीं झुकते। पुलिस नोटिस देती है कि सभा में भाग लेने वाले दोषी समझे जाएँगे, फिर भी कौंसिल खुली घोषणा करती है और लोग पहुँचते हैं। सुभाष बाबू लाठियाँ खाकर भी वंदे मातरम् बोलते हैं और पीछे हटने से मना करते हैं। स्वयंसेवक लाठियाँ पड़ने पर भी अपनी जगह नहीं छोड़ते। वृजलाल गोयनका छोड़ दिए जाने पर भी बार-बार जुलूस में लौटते हैं। यह साहस बताता है कि लोगों के मन से गुलामी का डर निकल चुका था।

From the text: 'जो वालेंटियर गए थे वे अपने स्थान से लाठियाँ पड़ने पर भी हटते नहीं थे।'; सुभाष बाबू का कथन 'आगे बढ़ना है।'

कलंक का धुलना: कलकत्ता का आत्मसम्मान

बंगाल और कलकत्ता के बारे में यह धारणा थी कि यहाँ आज़ादी का काम ठीक से नहीं हो रहा। पिछले वर्ष कलकत्ता का हिस्सा भी साधारण रहा था। 26 जनवरी 1931 की घटनाओं ने यह धारणा बदल दी। इतनी बड़ी सभा, इतनी सजावट और इतनी गिरफ़्तारियाँ पहले कभी नहीं हुई थीं। इसलिए घायलों और गिरफ़्तारियों के बावजूद लेखक इस दिन को 'अपूर्व' कहते हैं। इससे पता चलता है कि उनके लिए सफलता का अर्थ था जनता का जागना, भले ही उसकी कीमत चोटें हों।

From the text: 'आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है।' और 'लोग सोचने लग गए कि यहाँ भी बहुत सा काम हो सकता है।'

Characters

लेखक (सीताराम सेकसरिया)

डायरी लिखने वाले, स्वतंत्रता आंदोलन के कार्यकर्ता और घटनाओं के प्रत्यक्षदर्शी

  • सक्रिय कार्यकर्ता
  • सच्चा और ईमानदार वर्णनकर्ता
  • संवेदनशील
  • सेवाभावी

वे तैयारी में शामिल थे और फ़ोटो का प्रबंध भी किया था। वे साफ़ बताते हैं कि कौन-सी बात सुनी हुई है और कौन-सी आँखों देखी: 'यह सब तो अपने सुनी हुई लिख रहे हैं'। क्षितीश चटर्जी का खून देखकर उनकी आँख मिंच जाती है। रात को वे जानकीदेवी के साथ घायलों को देखने कांग्रेस दफ़्तर और अस्पताल जाते हैं।

सुभाष बाबू (नेताजी सुभाषचंद्र बोस)

मोनुमेंट की ओर जाने वाले मुख्य जुलूस के नेता

  • निडर
  • दृढ़ संकल्पी
  • कुशल नेतृत्वकर्ता
  • देशभक्त

चौरंगी पर रोके जाने पर भी वे जुलूस लेकर आगे बढ़े। लाठियाँ पड़ने पर भी ज़ोर से वंदे मातरम् बोलते रहे। ज्योतिर्मय गांगुली ने उन्हें एक ओर आने को कहा तो बोले, 'आगे बढ़ना है।' अंत में उन्हें पकड़कर लालबाज़ार लॉकअप भेजा गया।

स्त्री समाज (जानकीदेवी, मदालसा, विमल प्रतिभा आदि)

आंदोलन की अगुवा शक्ति, जिन्होंने मोनुमेंट पर झंडा फहराया और गिरफ़्तारी दी

  • साहसी
  • संगठित
  • अनुशासित
  • त्यागी

स्त्रियों ने मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहराया और घोषणा पढ़ी। धर्मतल्ले के मोड़ पर 50-60 स्त्रियाँ बैठ गईं। विमल प्रतिभा ने एक दल का नेतृत्व किया। मदालसा को थाने में मारा गया। कुल 105 स्त्रियाँ पकड़ी गईं।

वृजलाल गोयनका

लेखक के साथी कार्यकर्ता, जो दमदम जेल में भी उनके साथ रहे थे

  • जोशीला
  • हार न मानने वाला
  • जुझारू

वे झंडा लेकर वंदे मातरम् बोलते हुए इतने ज़ोर से दौड़े कि गिर पड़े। घुड़सवार ने लाठी मारी और छोड़ दिया, तो वे स्त्रियों के जुलूस में मिल गए। वहाँ भी छोड़ा गया तो दो सौ आदमियों का जुलूस बनाकर लालबाज़ार पहुँचे और गिरफ़्तार हुए।

अंग्रेज़ पुलिस और प्रशासन

विरोधी शक्ति, जिसने स्वतंत्रता दिवस मनाने को अपराध माना

  • दमनकारी
  • शक्ति-प्रदर्शन करने वाली
  • कठोर

पुलिस कमिश्नर ने सभा पर रोक का नोटिस निकाला। गोरखे, सारजेंट और घुड़सवार तैनात किए गए, ट्रैफ़िक पुलिस तक हटा ली गई। पुलिस ने भीड़ पर बार-बार लाठियाँ चलाईं और लोगों को गिरफ़्तार किया।

How it is written

DeviceExampleEffect
डायरी शैली (तिथि और 'अपने' का प्रयोग)पाठ '26 जनवरी 1931' तिथि से शुरू होता है। लेखक 'मैं' या 'हम' की जगह 'अपने' लिखते हैं, जैसे 'यह अपनी आँख से देखा।'इससे वर्णन निजी, सच्चा और ताज़ा लगता है। पाठक को लगता है कि वह उसी दिन की घटनाएँ लेखक के साथ देख रहा है। 'अपने' का प्रयोग लेखक की अपनी लेखन शैली की पहचान है।
सुनी और देखी बातों का अंतर (प्रत्यक्षदर्शी वर्णन)'यह सब तो अपने सुनी हुई लिख रहे हैं' और 'सुभाष बाबू बड़े ज़ोर से वंदे मातरम् बोलते थे, यह अपनी आँख से देखा।'लेखक अपनी ईमानदारी दिखाते हैं। इससे डायरी एक भरोसेमंद ऐतिहासिक दस्तावेज़ बन जाती है।
समय और संख्याओं का सटीक उल्लेखचार बजकर दस मिनट, चार बजकर चौबीस मिनट, 105 स्त्रियाँ, 67 और फिर 103 घायल, लगभग दो सौ घायल।घटनाएँ क्रम से और सजीव रूप में सामने आती हैं। संख्याएँ दमन की गंभीरता और आंदोलन के विस्तार का ठोस प्रमाण बन जाती हैं।
विरोधी दृश्यों की प्रस्तुति (विरोधाभास)एक ओर मकान ऐसे सजे थे 'मानो स्वतंत्रता मिल गई हो', दूसरी ओर पुलिस लाठियाँ चला रही थी। जब लाठियाँ चल रही थीं, उसी समय स्त्रियाँ मोनुमेंट की सीढ़ियों पर झंडा फहरा रही थीं।उत्साह और अत्याचार साथ-साथ दिखाकर लेखक जनता के साहस को और उभारते हैं। पाठक समझता है कि डर के बीच भी लोग पीछे नहीं हटे।
अंग्रेज़ी शब्दों का सहज प्रयोग'ओपन लड़ाई', 'खुला चैलेंज', मोनुमेंट, वालेंटियर, लॉकअप, नोटिस।भाषा उस समय के कलकत्ता की बोलचाल जैसी स्वाभाविक लगती है। 'ओपन लड़ाई' जैसे शब्द सभा के खुले विरोध वाले रूप को तीखेपन से प्रकट करते हैं।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • आज का दिन तो अमर दिन है।

    लेखक (कथावाचक): डायरी का आरंभ, 26 जनवरी 1931 के बारे में।

    1930 में इसी दिन पहली बार पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था, इसलिए लेखक इसे अमर कहते हैं। यह पंक्ति पूरे पाठ का भाव तय करती है।

  • केवल प्रचार में दो हज़ार रुपया खर्च किया गया था।

    लेखक (कथावाचक): इस वर्ष की तैयारियों का वर्णन।

    इससे पता चलता है कि पिछले वर्ष के साधारण हिस्से के बाद इस बार लोगों ने पूरी शक्ति और साधन लगाए। यह संगठित तैयारी का प्रमाण है।

  • ऐसा मालूम होता था कि मानो स्वतंत्रता मिल गई हो

    लेखक (कथावाचक): बड़े बाज़ार के झंडों और सजे हुए मकानों का दृश्य।

    यह लोगों के उत्साह और आज़ादी की गहरी इच्छा को दिखाता है। उत्प्रेक्षा जैसे ढंग से लेखक बताते हैं कि मन से लोग आज़ाद हो चुके थे।

  • आज जो बात थी वह निराली थी।

    लेखक (कथावाचक): तीन बजे से मैदान में हज़ारों लोगों के टोलियाँ बनाकर घूमने का वर्णन।

    पुलिस की घेराबंदी के बाद भी इतनी भीड़ का जुटना इस दिन को बाकी दिनों से अलग बनाता था।

  • खुला चैलेंज देकर ऐसी सभा पहले नहीं की गई थी।

    लेखक (कथावाचक): पुलिस कमिश्नर के रोक वाले नोटिस के जवाब में कौंसिल की समय बताकर की गई घोषणा।

    यह दिखाता है कि यह सभा छिपकर नहीं, सरकार को खुली चुनौती देकर की गई थी। इसी कारण लेखक इसे 'ओपन लड़ाई' कहते हैं।

  • आगे बढ़ना है।

    सुभाष बाबू: लाठियाँ पड़ने पर ज्योतिर्मय गांगुली ने उन्हें एक ओर आ जाने को कहा, तब का उत्तर।

    दो शब्दों में सुभाष बाबू की निडरता और दृढ़ संकल्प सामने आता है। नेता पीछे नहीं हटा, इससे जुलूस का हौसला बना रहा।

  • जो वालेंटियर गए थे वे अपने स्थान से लाठियाँ पड़ने पर भी हटते नहीं थे।

    लेखक (कथावाचक): मोनुमेंट के पास पुलिस की लाठियों के बीच स्वयंसेवकों का व्यवहार।

    यह स्वयंसेवकों के अनुशासन और साहस का प्रमाण है और संगठित समाज की शक्ति को दिखाता है।

  • आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है।

    लेखक (कथावाचक): दिन भर की घटनाओं, घायलों और गिरफ़्तारियों के बाद लेखक का निष्कर्ष।

    चोटों के बावजूद दिन 'अपूर्व' था, क्योंकि कलकत्ता पर लगा 'काम न होने' का कलंक धुल गया और लोगों में नया विश्वास जागा।

सीताराम सेकसरिया – डायरी का एक पन्ना in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

संगठित समाज की शक्ति

मान लीजिए आपके विद्यालय में वार्षिक उत्सव है। पिछली बार हर छात्र ने सोचा कि काम कोई और कर लेगा, इसलिए आयोजन फीका रहा। इस बार कक्षा-प्रतिनिधि हर साथी से मिलकर काम बाँटता है और हर कोई अपना हिस्सा ज़िम्मेदारी से उठाता है।

पाठ में 26 जनवरी 1931 की तैयारी से इस स्थिति की तुलना करते हुए बताइए कि इस बार आयोजन सफल क्यों हो सकता है। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पाठ में गत वर्ष का हिस्सा 'बहुत साधारण' था, इस वर्ष पूरी तैयारी हुई।
  2. कार्यकर्ता सारे काम का भार अपने ऊपर समझते थे।
  3. कार्यकर्ताओं के घर जा-जाकर समझाया गया था।
  4. विद्यालय में भी हर छात्र की ज़िम्मेदारी और आपसी संपर्क से सफलता मिलेगी।

Answer: पाठ में कार्यकर्ता सारे काम का भार अपने ऊपर समझते थे और घर-घर जाकर समझाया गया था। इसी तरह जब हर छात्र ज़िम्मेदारी लेगा, संगठित प्रयास से उत्सव सफल होगा।

Memory hook: जब हर कोई सोचे 'भार मेरे ऊपर है', तभी उत्सव 'अमर दिन' बनता है।

डायरी लेखन: सुनी हुई और आँखों देखी बात

मान लीजिए आपके मोबाइल पर एक संदेश आता है कि कल की बोर्ड परीक्षा का पेपर बदल गया है। आपने यह बात किसी से सुनी है, विद्यालय की सूचना में कहीं नहीं देखी। आपके कई दोस्त इसे तुरंत आगे भेज रहे हैं।

लेखक के डायरी-लेखन से सीख लेकर बताइए कि आपको यह संदेश आगे भेजने से पहले क्या करना चाहिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लेखक ने लिखा कि कुछ बातें वे 'सुनी हुई' लिख रहे हैं।
  2. सुभाष बाबू का वंदे मातरम् बोलना उन्होंने अपनी आँख से देखा और यह अलग से बताया।
  3. सुनी बात को सच मान लेना ठीक नहीं।
  4. पहले भरोसेमंद स्रोत से जाँच करनी चाहिए।

Answer: लेखक ने सुनी बातों को 'सुनी हुई' कहकर देखी बातों से अलग लिखा। मुझे भी संदेश को सच मानकर आगे भेजने से पहले विद्यालय की आधिकारिक सूचना से जाँचना चाहिए।

Memory hook: सेकसरिया जी का नियम: सुनी बात को 'सुनी' कहो, देखी बात को 'देखी'।

स्वतंत्रता आंदोलन में स्त्रियों की भूमिका

कल्पना कीजिए आपके मोहल्ले में स्वच्छता अभियान की रैली निकलनी है। आपकी बहन उसका नेतृत्व करना चाहती है, पर एक बुज़ुर्ग पड़ोसी कहते हैं कि लड़कियों को ऐसे कामों में आगे नहीं आना चाहिए।

'डायरी का एक पन्ना' में स्त्रियों की भूमिका के आधार पर आप पड़ोसी को विनम्रता से क्या उत्तर देंगे? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. स्त्रियों ने मोनुमेंट की सीढ़ियों पर झंडा फहराया और घोषणा पढ़ी।
  2. लाठियाँ चलने पर भी जुलूस निकाला; विमल प्रतिभा ने एक दल का नेतृत्व किया।
  3. 105 स्त्रियाँ गिरफ़्तार हुईं।
  4. निष्कर्ष: लड़कियाँ भी समाज के अच्छे कामों में बराबर योगदान दे सकती हैं।

Answer: मैं कहूँगा कि 1931 में स्त्रियों ने मोनुमेंट पर झंडा फहराया, जुलूस निकाला और 105 स्त्रियाँ गिरफ़्तार हुईं। लड़कियाँ हर अच्छे काम में बराबर योगदान दे सकती हैं।

Memory hook: मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़ी स्त्रियाँ: नेतृत्व किसी एक का नहीं होता।

कलंक का धुलना: आत्मसम्मान

मान लीजिए आपकी कक्षा को विद्यालय में 'सबसे शरारती कक्षा' कहा जाता है। एक दिन पूरी कक्षा मिलकर खेल-दिवस का सारा प्रबंध अनुशासन से सँभालती है और सब शिक्षक उसकी प्रशंसा करते हैं।

पाठ के अंतिम अंश में कलकत्ता के 'कलंक' की बात से इस स्थिति की तुलना कीजिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है।
  2. 26 जनवरी 1931 के साहस से यह कलंक बहुत अंश में धुल गया।
  3. लोग सोचने लगे कि यहाँ भी बहुत-सा काम हो सकता है।
  4. कक्षा ने भी मिलकर अच्छा काम करके अपनी छवि बदली।

Answer: जैसे 1931 में कलकत्ता का 'काम नहीं हो रहा' वाला कलंक बहुत अंश में धुल गया, वैसे ही कक्षा के मिले-जुले काम ने उसकी छवि सुधार दी।

Memory hook: छवि बातों से नहीं, मिलकर किए काम से धुलती है, जैसे कलकत्ता की।

Topics in this chapter

  • डायरी का एक पन्ना प्रश्न उत्तरComing soon
  • डायरी का एक पन्ना का सारांशComing soon
  • सुभाष बाबू और स्त्रियों की भूमिकाComing soon
  • 26 जनवरी 1931 का दिन अपूर्व क्योंComing soon
  • सीताराम सेकसरिया का जीवन परिचयComing soon

How the board asks सीताराम सेकसरिया – डायरी का एक पन्ना

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5)पाठ का एक अंश देकर पाँच MCQ पूछे जाते हैं: किसी घटना का कारण, किसी शब्द या कथन का आशय, सही कथनों का चयन और एक कथन-कारण प्रश्न।गद्यांश को दो बार पढ़ें। हर विकल्प को गद्यांश की पंक्ति से मिलाएँ, अपने अनुमान से नहीं। कथन-कारण में पहले देखें कि कथन और कारण दोनों अलग-अलग सही हैं या नहीं, फिर जाँचें कि कारण सचमुच कथन को समझाता है या नहीं।
कारण बताइए (25-30 शब्द, 2 अंक)किसी घटना का कारण पूछा जाता है, जैसे कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर क्यों समझाया गया, या पुलिस ने पार्कों को क्यों घेरा।पहले वाक्य में सीधा कारण लिखें, फिर पाठ से एक प्रमाण (घटना, स्थान या संख्या) जोड़ें। उत्तर 30 शब्दों के भीतर रखें, भूमिका न बाँधें।
कथन को पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए (25-30 शब्द, 2 अंक)एक विचार दिया जाता है, जैसे 'संगठित समाज कृतसंकल्प हो तो कुछ भी कर सकता है' या 'पूर्वजों ने आज़ादी के लिए अत्याचार सहे', और उसे पाठ से सिद्ध करने को कहा जाता है।कथन से सहमति एक वाक्य में लिखें, फिर पाठ की दो ठोस घटनाएँ दें, जैसे पुलिस की घेराबंदी के बाद भी झंडा फहराना, 105 स्त्रियों की गिरफ़्तारी, लगभग दो सौ घायल।
आशय स्पष्ट कीजिए या किसी दिन/दृश्य का महत्त्वकिसी पंक्ति का आशय पूछा जाता है ('खुला चैलेंज', 'ओपन लड़ाई', 'कलंक धुल गया') या पूछा जाता है कि दिन को 'अमर' या 'अपूर्व' क्यों कहा गया।पंक्ति का संदर्भ एक वाक्य में बताएँ, फिर उसका भाव अपने शब्दों में खोलें। 'अपूर्व' जैसे प्रश्न में चोटों और गिरफ़्तारियों के बावजूद जनता के जागने की बात ज़रूर लिखें।
पात्र-विशेषता या भूमिकासुभाष बाबू, स्त्री समाज या लेखक की भूमिका और उनके चरित्र की विशेषता पूछी जाती है।दो विशेषताएँ नाम लेकर लिखें और हर एक के साथ पाठ की घटना जोड़ें, जैसे सुभाष बाबू का 'आगे बढ़ना है' कहना, या स्त्रियों का मोनुमेंट पर झंडा फहराना।
मूल्यपरक या दक्षता-आधारित प्रश्नपाठ के संदेश को आज के जीवन से जोड़ने को कहा जाता है, जैसे दृश्यों का स्वतंत्रता आंदोलन में महत्त्व, या आज़ादी के प्रति हमारा कर्तव्य।पहले पाठ से एक प्रमाण दें, फिर अपना तर्कपूर्ण विचार लिखें। उत्तर पाठ से बाहर के ऐतिहासिक तथ्यों पर न टिकाएँ।

Tricks to remember सीताराम सेकसरिया – डायरी का एक पन्ना

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • घड़ी के साथ पूरा दिन (समय-रेखा)

    भोर 6 बजे: पुलिस ने मोनुमेंट घेरा → 11 बजे: मारवाड़ी बालिका विद्यालय में झंडोत्सव → 1 बजे: पुलिस का प्रबंध ढीला, झूठी आशा → 2-3 बजे: पूर्णोदास, पुरुषोत्तम राय पकड़े गए → 3 बजे: मैदान में हज़ारों की भीड़ → 4:10: सुभाष बाबू का जुलूस → 4:24: झंडा फहराने का घोषित समय → 8 बजे: खादी भंडार, घायलों के लिए फ़ोन → 9 बजे रात: 105 स्त्रियाँ छोड़ी गईं।

    Use it when: घटनाओं का क्रम पूछने वाले MCQ और 'दिन निराला क्यों था' जैसे उत्तरों में सही समय-क्रम लिखने के लिए।

  • स्थान-पात्र की जोड़ियाँ

    श्रद्धानंद पार्क = अविनाश बाबू (पकड़े गए); तारा सुंदरी पार्क = हरिश्चंद्र सिंह (भीतर न जा सके); चौरंगी = सुभाष बाबू को रोका; धर्मतल्ला = 50-60 स्त्रियाँ बैठ गईं; बहू बाज़ार = विमल प्रतिभा; लालबाज़ार = लॉकअप; दमदम जेल = लेखक और वृजलाल गोयनका साथ रहे।

    Use it when: किसी स्थान या पात्र के बारे में सीधे पूछे गए MCQ में भ्रम से बचने के लिए।

  • संख्याओं की सीढ़ी

    2000 (प्रचार का खर्च) → 50-60 (धर्मतल्ले पर बैठी स्त्रियाँ) → 67 फिर 103 (कांग्रेस ऑफ़िस में घायल) → 105 (पकड़ी गई स्त्रियाँ) → 160 (अस्पताल पहुँचे) → 200 (कुल घायल, लेखक के अनुमान से)। याद रखें: 103 घायल पुरुष-स्त्री सब, 105 केवल गिरफ़्तार स्त्रियाँ।

    Use it when: आँकड़ों वाले MCQ और 'दिन अपूर्व क्यों' के उत्तर में प्रमाण देने के लिए।

  • पाँच विषयों का एक वाक्य

    'संगठन की स्त्री ने दमन सहकर साहस से कलंक धोया।' संगठन = संगठित समाज की शक्ति; स्त्री = स्त्रियों की भूमिका; दमन = अंग्रेज़ी शासन का अत्याचार और बलिदान; साहस = अदम्य देशभक्ति; कलंक = कलकत्ता का आत्मसम्मान।

    Use it when: प्रतिपाद्य या संदेश वाले प्रश्न में पाँचों विषय जल्दी याद करने के लिए।

  • दो नोटिस: 'रोक' बनाम 'रुकेंगे नहीं'

    पुलिस कमिश्नर = 'कोई सभा नहीं हो सकती' (रोक)। कौंसिल = 'चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराएँगे' (चुनौती)। याद रखें: क-क: कमिश्नर कहे कतई नहीं, कौंसिल कहे करके दिखाएँगे।

    Use it when: 'खुला चैलेंज' वाले प्रश्नों में दोनों नोटिस को उलटने से बचने के लिए।

सीताराम सेकसरिया – डायरी का एक पन्ना: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: गद्यांश 1: 'अमर दिन' की तैयारी (पाठ का आरंभ)

गत वर्ष अपना हिस्सा बहुत साधारण था। इस वर्ष जितना अपने दे सकते थे, दिया था। केवल प्रचार में दो हज़ार रुपया खर्च किया गया था। सारे काम का भार अपने समझते थे अपने ऊपर है, और इसी तरह जो कार्यकर्ता थे उनके घर जा-जाकर समझाया था।

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: डायरी के इस अंश से ठीक पहले लेखक 26 जनवरी 1931 को 'अमर दिन' कहते हैं।) लेखक ने 26 जनवरी को 'अमर दिन' क्यों कहा है?
    (क) इसी दिन भारत को आज़ादी मिली थी
    (ख) इसी दिन सारे हिंदुस्तान में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था
    (ग) इसी दिन सुभाष बाबू ने कलकत्ता में जुलूस निकालना आरंभ किया था
    (घ) इसी दिन अंग्रेज़ों ने सभाओं पर से रोक हटाई थी

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: लेखक लिखते हैं कि इस वर्ष भी उस दिन की 'पुनरावृत्ति' थी, जिसके लिए पहले से तैयारियाँ की गई थीं।) गद्यांश में आए शब्द 'पुनरावृत्ति' का अर्थ है:
    (क) पूरी तैयारी
    (ख) फिर से आना
    (ग) पहली बार होना
    (घ) समाप्त हो जाना

  3. (3) · 1 mark · Assertion-reason

    कथन (A): 1931 में स्वतंत्रता दिवस की तैयारी पिछले वर्ष से कहीं बढ़कर थी।
    कारण (R): इस वर्ष कार्यकर्ताओं ने जितना दे सकते थे, दिया और केवल प्रचार पर ही दो हज़ार रुपये खर्च किए गए।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    गद्यांश में लेखक ने 'अपने' और 'अपना' शब्दों का प्रयोग किसके लिए किया है?
    (क) अपने परिवार के लोगों के लिए
    (ख) हम, हमारे या मेरा अर्थात स्वयं लेखक और उनके साथियों के लिए
    (ग) अंग्रेज़ अधिकारियों के लिए
    (घ) कलकत्ता की पुलिस के लिए

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    कार्यकर्ताओं के घर जा-जाकर समझाने की बात से क्या प्रकट होता है?
    (क) कार्यकर्ताओं को अंग्रेज़ों का डर था
    (ख) आंदोलन की तैयारी संगठित और सुनियोजित थी
    (ग) आंदोलन के पास धन की बहुत कमी थी
    (घ) कार्यकर्ता पुलिस से समझौता करना चाहते थे

Show the answersAnswers
  1. (ख) इसी दिन सारे हिंदुस्तान में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था
  2. (ख) फिर से आना
  3. (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है। (गत वर्ष हिस्सा 'बहुत साधारण' था, इस वर्ष पूरा योगदान दिया गया।)
  4. (ख) हम, हमारे या मेरा अर्थात स्वयं लेखक और उनके साथियों के लिए
  5. (ख) आंदोलन की तैयारी संगठित और सुनियोजित थी

Extract 2: गद्यांश 2: सुभाष बाबू का जुलूस और लाठियाँ (पाठ का मध्य)

सुभाष बाबू पर भी लाठियाँ पड़ीं। सुभाष बाबू बहुत ज़ोरों से वंदे मातरम् बोल रहे थे। ज्योतिर्मय गांगुली ने सुभाष बाबू से कहा, आप इधर आ जाइए। पर सुभाष बाबू ने कहा, आगे बढ़ना है।

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: सुभाष बाबू ठीक चार बजकर दस मिनट पर जुलूस लेकर आए; पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, पर भीड़ आगे बढ़ती गई और मैदान के मोड़ पर लाठियाँ चलीं।) सुभाष बाबू के जुलूस को सबसे पहले कहाँ रोका गया?
    (क) धर्मतल्ले के मोड़ पर
    (ख) चौरंगी पर
    (ग) बहू बाज़ार के मोड़ पर
    (घ) लालबाज़ार में

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: पुलिस ने जुलूस को रोकना चाहा था, पर रोक नहीं सकी।) पुलिस सुभाष बाबू के जुलूस को क्यों नहीं रोक सकी?
    (क) पुलिस के पास लाठियाँ नहीं थीं
    (ख) पुलिस कमिश्नर ने जुलूस की अनुमति दे दी थी
    (ग) भीड़ बहुत अधिक थी
    (घ) जुलूस दूसरे रास्ते से निकल गया था

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    'आगे बढ़ना है' कथन से सुभाष बाबू के चरित्र की कौन-सी विशेषता प्रकट होती है?
    (क) क्रोध और बदले की भावना
    (ख) दृढ़ निश्चय और निर्भीकता
    (ग) जल्दबाज़ी और लापरवाही
    (घ) प्रसिद्धि पाने की इच्छा

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    ज्योतिर्मय गांगुली ने सुभाष बाबू से 'आप इधर आ जाइए' क्यों कहा होगा?
    (क) उन्हें लाठियों की मार से बचाने के लिए
    (ख) सभा रद्द करवाने के लिए
    (ग) उन्हें पुलिस के हवाले करने के लिए
    (घ) उनका फ़ोटो खिंचवाने के लिए

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    लाठियाँ पड़ते समय भी सुभाष बाबू का ज़ोर-ज़ोर से वंदे मातरम् बोलना किस बात का संकेत है?
    (क) वे पुलिस से बहस कर रहे थे
    (ख) वे अत्याचार के आगे झुकने को तैयार नहीं थे
    (ग) वे भीड़ को वापस लौटने को कह रहे थे
    (घ) वे घायल होकर सहायता के लिए पुकार रहे थे

Show the answersAnswers
  1. (ख) चौरंगी पर
  2. (ग) भीड़ बहुत अधिक थी
  3. (ख) दृढ़ निश्चय और निर्भीकता
  4. (क) उन्हें लाठियों की मार से बचाने के लिए
  5. (ख) वे अत्याचार के आगे झुकने को तैयार नहीं थे

सीताराम सेकसरिया – डायरी का एक पन्ना: board-level solved questions

Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: पुलिस का शक्ति-प्रदर्शन · 2 marks · Short answerBoard level

26 जनवरी 1931 को अंग्रेज़ पुलिस ने कलकत्ता में अपनी ताकत का प्रदर्शन किस प्रकार किया? 'डायरी का एक पन्ना' पाठ के आधार पर लिखिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पुलिस पूरी ताकत से शहर में गश्त कर रही थी।
  2. मोटर लारियों में गोरखे और सारजेंट हर मोड़ पर तैनात थे; घुड़सवारों का प्रबंध था।
  3. ट्रैफ़िक पुलिस तक इसी काम में लगा दी गई थी।
  4. बड़े पार्क, मैदान और मोनुमेंट का स्थान सवेरे से घेर लिया गया था।

Answer: पुलिस ताकत से शहर में गश्त कर रही थी। मोड़-मोड़ पर गोरखे-सारजेंट तैनात थे, घुड़सवार थे, ट्रैफ़िक पुलिस तक इसी काम में लगा दी गई और पार्क-मैदान घेर लिए गए।

Example 2: वृजलाल गोयनका का चरित्र · 2 marks · Short answerHarder board level

वृजलाल गोयनका के आचरण से उसके चरित्र की कौन-सी विशेषताएँ प्रकट होती हैं? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. वह झंडा लेकर वंदे मातरम् बोलता हुआ मोनुमेंट की ओर इतने ज़ोर से दौड़ा कि गिर पड़ा।
  2. अंग्रेज़ घुड़सवार की लाठी खाई, पकड़कर छोड़ दिया गया; स्त्रियों के जुलूस में भी छोड़ दिया गया।
  3. फिर भी हार न मानकर दो सौ आदमियों का जुलूस बनाकर लालबाज़ार गया और गिरफ़्तार हुआ।
  4. विशेषताएँ: अदम्य जोश, लगन, हार न मानना।

Answer: वृजलाल गोयनका में अदम्य जोश और लगन थी। झंडा लेकर दौड़ा, लाठी खाई, दो बार छोड़ा गया, फिर भी दो सौ लोगों का जुलूस बनाकर लालबाज़ार पहुँचा और गिरफ़्तार हुआ।

Example 3: एक बजे की झूठी आशा · 2 marks · Short answerHarder board level

दोपहर एक बजे के आसपास लोगों को क्या आशा होने लगी थी? उनकी यह आशा किस प्रकार टूटी? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. भोर में मोनुमेंट के पास पुलिस का जैसा प्रबंध था, वैसा करीब एक बजे नहीं रहा।
  2. इससे लोगों को आशा हुई कि शायद पुलिस 'अपना रंग' न दिखाए।
  3. लेखक के शब्दों में पुलिस 'कब रुकने वाली थी'।
  4. जुलूस मैदान के मोड़ पर पहुँचते ही पुलिस ने लाठियाँ चलानी शुरू कर दीं।

Answer: एक बजे मोनुमेंट के पास भोर जैसा प्रबंध न देखकर लोगों को लगा कि पुलिस शायद रंग न दिखाए। यह आशा झूठी निकली; जुलूस आते ही लाठियाँ चलीं।

Example 4: स्त्रियाँ पीछे नहीं रहीं · 2 marks · Short answerHarder board level

'डायरी का एक पन्ना' पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि 26 जनवरी 1931 को स्त्रियाँ स्वतंत्रता आंदोलन में पुरुषों से पीछे नहीं रहीं। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लाठियाँ चलने के बीच स्त्रियों ने मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहराया और घोषणा पढ़ी।
  2. धर्मतल्ले के मोड़ पर करीब 50-60 स्त्रियाँ बैठ गईं; विमल प्रतिभा के नेतृत्व में दूसरा दल बहू बाज़ार के मोड़ पर बैठ गया।
  3. कुल 105 स्त्रियाँ पकड़ी गईं; कलकत्ता में इतनी स्त्रियाँ एक साथ पहले कभी गिरफ़्तार नहीं हुई थीं।
  4. मदालसा को थाने में भी मारा गया।

Answer: स्त्रियों ने मोनुमेंट की सीढ़ियों पर झंडा फहराकर घोषणा पढ़ी, धर्मतल्ले और बहू बाज़ार के मोड़ों पर बैठ गईं। 105 स्त्रियाँ गिरफ़्तार हुईं, मदालसा को थाने में मारा गया।

Example 5: सुनी और देखी बात का अंतर · 2 marks · Short answerHOTS / competency

लेखक ने लिखा है कि कुछ बातें वे 'सुनी हुई' लिख रहे हैं, पर कुछ उन्होंने 'अपनी आँख से' देखीं। डायरी-लेखक की इस सावधानी से उनके बारे में क्या पता चलता है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लेखक सुनी हुई बात और आँखों देखी बात को अलग-अलग बताते हैं।
  2. सुभाष बाबू को बड़े ज़ोर से वंदे मातरम् बोलते उन्होंने स्वयं देखा, क्योंकि उनके और सुभाष बाबू के बीच विशेष फ़ासला नहीं था।
  3. इससे लेखक की सच्चाई और ईमानदारी का पता चलता है (व्याख्या)।
  4. ऐसी सावधानी से डायरी विश्वसनीय बनती है।

Answer: इससे पता चलता है कि लेखक ईमानदार थे। उन्होंने सुनी बात को देखी बात से अलग रखा, जैसे सुभाष बाबू को वंदे मातरम् बोलते स्वयं देखा। इससे डायरी विश्वसनीय बनी।

Example 6: हार या जीत: मूल्यांकन · 2 marks · Short answerHOTS / competency

मान लीजिए कोई कहता है कि 26 जनवरी 1931 को सैकड़ों लोगों का घायल और गिरफ़्तार होना आंदोलन की हार थी। पाठ के आधार पर इस मत का मूल्यांकन कीजिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पुलिस कमिश्नर की रोक के बावजूद मोनुमेंट पर झंडा फहरा और घोषणा पढ़ी गई।
  2. स्वयंसेवक लाठियाँ पड़ने पर भी अपने स्थान से नहीं हटे।
  3. लेखक ने इस दिन को 'अपूर्व' कहा है।
  4. कलकत्ता पर लगा 'यहाँ काम नहीं हो रहा' का कलंक बहुत अंश में धुल गया; इसलिए यह हार नहीं, जीत थी (मूल्यांकन)।

Answer: यह मत उचित नहीं। रोक के बावजूद झंडा फहरा, घोषणा पढ़ी गई, लोग लाठियों से नहीं डरे। लेखक के अनुसार कलकत्ता का कलंक काफ़ी धुल गया; यह नैतिक जीत थी।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

'बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक' क्या था और 26 जनवरी 1931 को वह कैसे धुला? (25-30 शब्द) (2 marks)

StepMarks
कलंक का अर्थ: लोग कहते थे कि बंगाल या कलकत्ता में स्वतंत्रता आंदोलन का काम नहीं हो रहा है।1
कलंक धुलने का प्रमाण: खुला चैलेंज देकर इतनी बड़ी सभा, स्त्रियों द्वारा झंडा फहराना, 105 स्त्रियों की गिरफ़्तारी, लगभग दो सौ घायल; लोग सोचने लगे कि यहाँ भी बहुत-सा काम हो सकता है।1

पठित गद्यांश (सुभाष बाबू के जुलूस वाला अंश) पर आधारित पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) (5 marks)

StepMarks
प्रश्न 1: तथ्य की पहचान (जैसे, जुलूस कहाँ रोका गया): सही विकल्प1
प्रश्न 2: कारण की पहचान (जैसे, पुलिस जुलूस क्यों न रोक सकी): सही विकल्प1
प्रश्न 3: पात्र की विशेषता (जैसे, 'आगे बढ़ना है' से प्रकट गुण): सही विकल्प1
प्रश्न 4: आशय या अनुमान (जैसे, ज्योतिर्मय गांगुली की सलाह का कारण): सही विकल्प1
प्रश्न 5: संकेत या आशय (जैसे, लाठियों के बीच वंदे मातरम् बोलना किस बात का संकेत है): सही विकल्प; गलत विकल्प पर कोई अंश-अंक नहीं1

Where students lose marks in सीताराम सेकसरिया – डायरी का एक पन्ना

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: 1930 और 1931 को मिला देना

    पाठ 1931 का है, पर 'अमर दिन' इसलिए है कि पहली बार स्वतंत्रता दिवस 1930 में मना था; छात्र दोनों वर्ष उलट देते हैं।

    Wrong working

    26 जनवरी 1931 को भारत में पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।

    Right working

    पहली बार स्वतंत्रता दिवस 26 जनवरी 1930 को मनाया गया था; 1931 में उसकी पुनरावृत्ति थी, यानी देश का दूसरा स्वतंत्रता दिवस।

    Do this: 'पुनरावृत्ति' शब्द को याद रखें: 1931 = फिर से मनाया गया।

    Usually costs: 2 अंक के उत्तर में 1 अंक तक कट सकता है; MCQ में पूरा 1 अंक।

  • Mistake: पात्रों का काम एक-दूसरे पर डाल देना

    पाठ में कई नाम हैं; छात्र जुलूस का भार, चेतावनी और नेतृत्व गलत व्यक्ति के नाम लिख देते हैं।

    Wrong working

    सुभाष बाबू के जुलूस का भार ज्योतिर्मय गांगुली पर था।

    Right working

    जुलूस का भार पूर्णोदास पर था, जो प्रबंध कर चुका था; ज्योतिर्मय गांगुली ने केवल सुभाष बाबू से 'आप इधर आ जाइए' कहा था।

    Do this: स्थान-पात्र और काम-पात्र की जोड़ियाँ बनाकर दोहराएँ।

    Usually costs: MCQ में पूरा 1 अंक; 2 अंक के उत्तर में तथ्य गलत होने पर पूरे अंक जा सकते हैं।

  • Mistake: दोनों नोटिस उलट देना

    दोनों नोटिस एक ही सभा से जुड़े हैं, इसलिए छात्र भूल जाते हैं कि रोक किसने लगाई और चुनौती किसने दी।

    Wrong working

    कौंसिल ने सभा पर रोक लगाई और पुलिस ने चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराने की सूचना दी।

    Right working

    पुलिस कमिश्नर के नोटिस में सभा पर रोक थी; कौंसिल के नोटिस में मोनुमेंट के नीचे चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराने और प्रतिज्ञा पढ़ने की घोषणा थी।

    Do this: 'कमिश्नर = कतई नहीं, कौंसिल = करके दिखाएँगे' याद रखें।

    Usually costs: 2 अंक के उत्तर में 1 से 2 अंक तक।

  • Mistake: गिरफ़्तार स्त्रियों के बारे में बात बढ़ा-चढ़ाकर लिखना

    पाठ के बाहर की कल्पना जोड़ देना; पाठ में स्पष्ट है कि स्त्रियों को उसी रात छोड़ दिया गया।

    Wrong working

    105 स्त्रियों को कई महीनों के लिए जेल में बंद कर दिया गया।

    Right working

    सब मिलाकर 105 स्त्रियाँ पकड़ी गईं और रात नौ बजे सबको छोड़ दिया गया; कलकत्ता में इतनी स्त्रियाँ एक साथ पहले कभी गिरफ़्तार नहीं हुई थीं।

    Do this: केवल वही तथ्य लिखें जो पाठ में हैं; संख्या के साथ समय भी याद रखें।

    Usually costs: तथ्य गलत होने पर 2 में से 1 अंक कट सकता है।

  • Mistake: 'अपूर्व' या 'निराला' पूछने पर पूरी कहानी दोहराना

    छात्र प्रश्न का कारण बताने के बजाय सुबह से रात तक का वर्णन लिखने लगते हैं और मुख्य बिंदु छूट जाता है।

    Wrong working

    सुबह झंडे लगे, फिर 11 बजे झंडोत्सव हुआ, फिर तीन बजे भीड़ आई, फिर चार बजे सुभाष बाबू आए, फिर पुलिस ने लाठियाँ चलाईं...

    Right working

    दिन अपूर्व था क्योंकि खुला चैलेंज देकर इतनी बड़ी सभा पहली बार हुई, स्त्रियों ने झंडा फहराया और कलकत्ता का 'काम नहीं हो रहा' वाला कलंक बहुत अंश में धुल गया।

    Do this: पहले पंक्ति में सीधा उत्तर दें, फिर दो प्रमाण दें।

    Usually costs: मुख्य कारण न लिखने पर 2 में से 1 अंक तक।

  • Mistake: 2 अंक के उत्तर में शब्द-सीमा से बहुत आगे लिखना

    25-30 शब्दों के प्रश्न को 60-70 शब्दों में लिखने से समय नष्ट होता है और लंबे उत्तर में अनावश्यक या गलत बात जुड़ने का खतरा बढ़ता है।

    Wrong working

    सीताराम सेकसरिया राजस्थान के नवलगढ़ में जन्मे थे और कलकत्ता में रहते थे... (लेखक-परिचय से शुरू करके 70 शब्द)

    Right working

    सीधे प्रश्न का उत्तर, दो उत्तर-बिंदुओं के साथ, 25-30 शब्दों में।

    Do this: उत्तर लिखने से पहले दो बिंदु तय करें; हर बिंदु के लिए एक-दो वाक्य ही लिखें।

    Usually costs: अतिरिक्त शब्दों के अंक नहीं मिलते; बचे प्रश्नों के लिए समय कम पड़ सकता है।

सीताराम सेकसरिया – डायरी का एक पन्ना: previous year questions

  • Course A: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).
  • Course B: Asked in 5 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 1.4 marks per paper; 5 questions in all, counting OR alternatives. In 1 of 4 sample papers.

Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.

Solved board questions from सीताराम सेकसरिया – डायरी का एक पन्ना

Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.

2025 Course B, set 4/1/1, Q8 · 6 marks · Short answer

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25–30 शब्दों में लिखिए : 3×2=6

  1. (क)

    'एक संगठित समाज कृत-संकल्प हो तो कुछ भी कर सकता है ।' 'डायरी का एक पन्ना' पाठ के आधार पर इस कथन को सिद्ध कीजिए।

    2 marks
  2. (ख)

    अंडमान निकोबार द्वीपसमूह की भौगोलिक स्थिति स्पष्ट करते हुए, इसमें आए परिवर्तन का उल्लेख 'तताँरा-वामीरो कथा' पाठ के आधार पर कीजिए।

    2 marks
  3. (ग)

    'तीसरी कसम फ़िल्म में राजकपूर अभिनय नहीं करता । वह हीरामन के साथ एकाकार हो गया है ।' – 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के संदर्भ में कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

    2 marks
  4. (घ)

    'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले' पाठ के आधार पर नूह के मुद्दत तक रोते रहने का कारण स्पष्ट कीजिए। इससे उनके चरित्र की किस विशेषता का पता चलता है ?

    2 marks
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (क) कलकत्ता के निवासियों ने संगठित होकर अंग्रेज़ सरकार के नोटिस की परवाह न करते हुए मोनुमेंट पर झंडा फहराया और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी। सुभाष बाबू के नेतृत्व में स्त्री-पुरुषों की एकजुटता से संगठन की शक्ति सिद्ध हुई।

    2 marks
  2. (ख) अंडमान-निकोबार में पोर्ट ब्लेयर से लगभग सौ किलोमीटर दूर लिटिल अंडमान के बाद निकोबार द्वीपसमूह शुरू होता है। लिटिल अंडमान से 96 किलोमीटर दूर निकोबार का पहला द्वीप कार-निकोबार है। लोककथा के अनुसार पहले दोनों द्वीप जुड़े थे। ततारा के क्रोध से वे दो भागों में बँट गए।

    2 marks
  3. (ग) राजकपूर लोकप्रिय कलाकार होकर भी देहाती भोले गाड़ीवान हीरामन के चरित्र में पूरी तरह डूब गया। उसका अभिनय स्वाभाविक और प्रभावी लगता है, इसलिए कहा गया कि वह अभिनय नहीं करता, हीरामन ही बन गया है।

    2 marks
  4. (घ) घायल कुत्ते ने जब नूह को उनकी गलती का बोध कराया तो वे पश्चाताप से मुद्दत तक रोते रहे। इससे उनके संवेदनशील, दयालु और करुणा से भरे चरित्र का पता चलता है। (किन्हीं तीन का उत्तर पर्याप्त है।)

Answer: (क) संगठन की शक्ति: नोटिस के बावजूद झंडा फहराया; (ख) पोर्ट ब्लेयर से सौ किमी दूर, निकोबार; दो द्वीपों में बँटना; (ग) राजकपूर हीरामन में डूब गया; (घ) पश्चाताप, संवेदनशीलता

Where the marks are

  • किन्हीं तीन उपभागों के उत्तर, प्रत्येक (2 अंक)
  • (ख) में भौगोलिक स्थिति और परिवर्तन दोनों (1+1 अंक)
  • (घ) में कारण और चरित्र-विशेषता दोनों (1+1 अंक)

See it in the full 2025 board paper, set 4/1/1

Every सीताराम सेकसरिया – डायरी का एक पन्ना question, by year

Course A (0 questions, sample papers included)

Course B (6 questions, sample papers included)

2025

Set 4/1/1: Q8 (6 marks, solved)

Set 4/2/1: Q8 (6 marks, solved)

Set 4/3/1: Q8 (6 marks, solved)

2024

Set 4/4/1: Q11 (6 marks, solved)

Set 4/5/1: Q11 (6 marks, solved)

Sample paper 2023-24: Q10 (2 marks, solved)

Practice questions on सीताराम सेकसरिया – डायरी का एक पन्ना

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 2 marks · Short answerBoard level

    श्रद्धानंद पार्क और तारा सुंदरी पार्क में झंडा फहराने के प्रयास में क्या-क्या हुआ? (25-30 शब्द)

    Hint

    दोनों पार्कों के दो नेताओं के नाम याद कीजिए: एक विद्यार्थी संघ से, एक कांग्रेस कमेटी से।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: श्रद्धानंद पार्क में बंगाल प्रांतीय विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू ने झंडा गाड़ा, पुलिस ने उन्हें पकड़ा और लोगों को मारा या हटाया; तारा सुंदरी पार्क में युद्ध मंत्री हरिश्चंद्र सिंह भीतर न जा सके, मारपीट में दो-चार आदमियों के सिर फटे।

    आदर्श उत्तर: श्रद्धानंद पार्क में अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर पुलिस ने उन्हें पकड़ा, लोगों को मारा-हटाया। तारा सुंदरी पार्क में हरिश्चंद्र सिंह भीतर न जा सके; मारपीट में सिर फटे।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    शाम को घायलों की सहायता के लिए लेखक ने क्या किया और वहाँ उन्होंने क्या देखा? (25-30 शब्द)

    Hint

    करीब आठ बजे लेखक खादी भंडार पहुँचे, तभी एक फ़ोन आया।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: करीब आठ बजे खादी भंडार पहुँचने पर कांग्रेस ऑफ़िस से फ़ोन आया कि घायलों के लिए गाड़ी चाहिए; लेखक जानकीदेवी के साथ वहाँ गए; डॉ. दासगुप्ता घायलों की देख-रेख कर रहे थे और फ़ोटो उतरवा रहे थे; वहाँ 67 और बाद में 103 घायल पहुँचे; लेखक अस्पताल भी गए।

    आदर्श उत्तर: खादी भंडार पहुँचने पर कांग्रेस ऑफ़िस से घायलों के लिए गाड़ी माँगी गई। लेखक जानकीदेवी के साथ वहाँ गए, जहाँ डॉ. दासगुप्ता घायलों की देख-रेख कर रहे थे। फिर अस्पताल भी गए।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level

    मारवाड़ी बालिका विद्यालय में झंडोत्सव के समय लड़कियों को उत्सव का मतलब समझाया गया। इसका क्या उद्देश्य रहा होगा? (25-30 शब्द)

    Hint

    सोचिए, किसी उत्सव का अर्थ समझने से बच्चों के मन में क्या बदलता है।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: 11 बजे विद्यालय में झंडोत्सव हुआ, जानकीदेवी और मदालसा भी गईं; उत्सव का अर्थ समझाने से लड़कियों में देशप्रेम और आज़ादी की चेतना जागती (व्याख्या); इससे लगता है कि आंदोलन नई पीढ़ी और स्त्रियों को जोड़ना चाहता था।

    आदर्श उत्तर: लड़कियों को उत्सव का अर्थ समझाने से उनमें देशप्रेम और आज़ादी की चेतना जागी होगी। इससे लगता है कि आंदोलन नई पीढ़ी और स्त्रियों को जोड़कर आगे बढ़ाना चाहता था।

  4. Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level

    लाठियों की मार के बीच सुभाष बाबू के व्यवहार से उनके नेतृत्व की कौन-सी दो विशेषताएँ सामने आती हैं? (25-30 शब्द)

    Hint

    ज्योतिर्मय गांगुली की सलाह पर सुभाष बाबू ने क्या उत्तर दिया था?

    Answer

    उत्तर-बिंदु: निर्भीकता: लाठियाँ पड़ने पर भी बहुत ज़ोर से वंदे मातरम् बोलते रहे; दृढ़ निश्चय: ज्योतिर्मय गांगुली के 'आप इधर आ जाइए' कहने पर बोले 'आगे बढ़ना है'; अंत में पकड़कर लालबाज़ार लॉकअप भेजे गए।

    आदर्श उत्तर: सुभाष बाबू निर्भीक थे; लाठियाँ पड़ने पर भी ज़ोर से वंदे मातरम् बोलते रहे। वे दृढ़ निश्चयी थे; ज्योतिर्मय गांगुली के बचने को कहने पर बोले, 'आगे बढ़ना है।'

  5. Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level

    दो-तीन बजे पूर्णोदास के पकड़े जाने के बाद भी सुभाष बाबू का जुलूस कैसे निकल सका? इससे आंदोलन के बारे में क्या पता चलता है? (25-30 शब्द)

    Hint

    पाठ में लिखा है कि पूर्णोदास जुलूस के लिए क्या 'कर चुका था'।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: सुभाष बाबू के जुलूस का भार पूर्णोदास पर था; वह प्रबंध कर चुका था, इसलिए उसकी गिरफ़्तारी से काम नहीं रुका; इससे आंदोलन की संगठित और योजनाबद्ध तैयारी का पता चलता है।

    आदर्श उत्तर: जुलूस का भार पूर्णोदास पर था, पर वह पकड़े जाने से पहले ही प्रबंध कर चुका था। इससे पता चलता है कि आंदोलन की तैयारी संगठित और योजनाबद्ध थी।

  6. Q6 · 2 marks · Short answerHarder board level

    'डायरी का एक पन्ना' में डायरी विधा की कौन-सी दो विशेषताएँ दिखाई देती हैं? उदाहरण सहित लिखिए। (25-30 शब्द)

    Hint

    पाठ में बार-बार आने वाले समय और लेखक के 'अपने' शब्द पर ध्यान दीजिए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: पाठ एक तिथि (26 जनवरी 1931) का लेखा-जोखा है; घटनाएँ समय-क्रम में हैं: भोर छह बजे, 11 बजे, दो-तीन बजे, चार बजकर दस मिनट, आठ बजे, रात नौ बजे; लेखक 'अपने/अपना' शब्द से आत्मीय, निजी ढंग से लिखते हैं।

    आदर्श उत्तर: पहली, घटनाएँ समय-क्रम में दर्ज हैं, जैसे 11 बजे झंडोत्सव, चार बजकर दस मिनट पर सुभाष बाबू का जुलूस। दूसरी, लेखक 'अपने' शब्द से बात आत्मीय ढंग से कहते हैं।

  7. Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    मान लीजिए सीताराम सेकसरिया ने यह डायरी न लिखी होती। तब आने वाली पीढ़ियाँ उस दिन की किन बातों से वंचित रह जातीं? पाठ के आधार पर बताइए। (25-30 शब्द)

    Hint

    पाठ की वे छोटी-छोटी बातें सोचिए जो केवल किसी आँखों देखे लेखक से मिल सकती हैं।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: स्त्रियों का मोनुमेंट की सीढ़ियों पर झंडा फहराना; सुभाष बाबू का साहस; क्षितीश चटर्जी जैसे घायलों की दशा; 105 गिरफ़्तार स्त्रियाँ और करीब दो सौ घायलों की संख्या; डायरी इतिहास को जीवंत बनाती है।

    आदर्श उत्तर: तब हम उस दिन की सच्ची झलक न पाते, जैसे स्त्रियों का मोनुमेंट पर झंडा फहराना, सुभाष बाबू का साहस और घायलों की संख्या। डायरी इतिहास को जीवंत बनाती है।

  8. Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    'जो वालेंटियर गए थे वे अपने स्थान से लाठियाँ पड़ने पर भी हटते नहीं थे।' स्वयंसेवकों के इस गुण को एक विद्यार्थी अपने जीवन में कैसे अपना सकता है? (25-30 शब्द)

    Hint

    पहले गुण का नाम बताइए, फिर विद्यार्थी-जीवन की एक कठिन स्थिति से जोड़िए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: गुण: कष्ट सहकर भी कर्तव्य पर डटे रहना; विद्यार्थी के जीवन में कठिन विषय, असफलता या हँसी उड़ाए जाने की स्थिति; हार न मानकर लक्ष्य पर टिके रहना।

    आदर्श उत्तर: स्वयंसेवक कष्ट सहकर भी अपने कर्तव्य पर डटे रहे। विद्यार्थी भी कठिन विषय, असफलता या हँसी उड़ाए जाने पर हार न मानकर लक्ष्य पर टिके रह सकते हैं।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.सुभाष बाबू के जुलूस का भार किस पर था?Show answer

    पूर्णोदास पर, जो पकड़े जाने से पहले प्रबंध कर चुका था।

  2. 2.कौंसिल के नोटिस के अनुसार मोनुमेंट के नीचे झंडा किस समय फहराना था?Show answer

    ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर; साथ ही स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जानी थी।

  3. 3.'आगे बढ़ना है' किसने और किससे कहा?Show answer

    सुभाष बाबू ने ज्योतिर्मय गांगुली से, जब उन्होंने सुभाष बाबू को 'आप इधर आ जाइए' कहा।

  4. 4.गिरफ़्तारी के बाद सुभाष बाबू को कहाँ भेजा गया?Show answer

    गाड़ी में बैठाकर लालबाज़ार लॉकअप में।

  5. 5.बहू बाज़ार के मोड़ पर रोके गए स्त्रियों के दल का नेतृत्व कौन कर रही थीं?Show answer

    विमल प्रतिभा; वे वहीं मोड़ पर बैठ गईं और करीब पौन घंटे बाद लारी में लालबाज़ार ले जाई गईं।

  6. 6.कुल कितनी स्त्रियाँ पकड़ी गईं और कब छोड़ी गईं?Show answer

    105 स्त्रियाँ; रात नौ बजे सबको छोड़ दिया गया।

  7. 7.किसका फटा सिर और बहता खून देखकर लेखक की 'आँख मिंच जाती थी'?Show answer

    क्षितीश चटर्जी का।

  8. 8.वृजलाल गोयनका लेखक के साथ किस जेल में रहा था?Show answer

    दमदम जेल में।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • 26 जनवरी 1931 को 'अमर दिन' क्यों कहा गया और 1930 से इसका क्या संबंध है?
  • प्रचार पर कितना खर्च हुआ और कार्यकर्ताओं को किस तरह समझाया गया?
  • अविनाश बाबू, हरिश्चंद्र सिंह और गुजराती सेविका संघ की लड़कियों के साथ क्या हुआ?
  • पुलिस कमिश्नर और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था, और 4:10 तथा 4:24 का अंतर क्या है?
  • सुभाष बाबू: चौरंगी पर रोके गए, लाठियाँ खाईं, वंदे मातरम्, 'आगे बढ़ना है', लालबाज़ार लॉकअप — क्रम से बोल सकते हैं?
  • धर्मतल्ला, बहू बाज़ार, विमल प्रतिभा, मदालसा और 105 स्त्रियाँ: स्त्री समाज की भूमिका दो प्रमाणों के साथ बताइए।
  • वृजलाल गोयनका ने कितनी बार कोशिश की और अंत में कहाँ गिरफ़्तार हुआ?
  • 67 फिर 103, 160 और लगभग दो सौ घायल: ये संख्याएँ किसकी हैं, और कलकत्ता का कलंक कैसे धुला?

सीताराम सेकसरिया – डायरी का एक पन्ना: frequently asked questions

26 जनवरी 1931 को 'अमर दिन' क्यों कहा गया है?

26 जनवरी 1930 को गुलाम भारत में पहली बार पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। 1931 में उसी दिन की पुनरावृत्ति होनी थी, इसलिए लेखक ने इसे अमर दिन कहा। इस दिन कलकत्ता के लोगों ने पुलिस के दमन के बावजूद बड़े जोश से यह दिवस मनाया।

इस पाठ के लेखक सीताराम सेकसरिया कौन थे?

उनका जन्म 1892 में राजस्थान के नवलगढ़ में हुआ और उनका अधिकांश जीवन कलकत्ता में बीता। वे व्यापार से जुड़े थे और गांधी जी के आह्वान पर स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए तथा जेल भी गए। उन्हें विद्यालयी शिक्षा नहीं मिली, स्वाध्याय से पढ़ना-लिखना सीखा। 1962 में उन्हें पद्मश्री मिला।

लेखक 'मैं' की जगह 'अपने' शब्द क्यों लिखते हैं?

यह लेखक की अपनी लेखन शैली है। पाठ के शब्दार्थ में बताया गया है कि 'अपने/अपना' का अर्थ 'हम/हमारे/मेरा' है। जैसे 'यह अपनी आँख से देखा' का अर्थ है 'यह मैंने अपनी आँखों से देखा।'

इस दिन स्त्रियों की क्या भूमिका रही?

स्त्रियों ने लाठियों के बीच मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहराया और स्वतंत्रता की घोषणा पढ़ी। उन्होंने जुलूस निकाला, रोके जाने पर सड़क पर बैठ गईं और गिरफ़्तारी दी। कुल 105 स्त्रियाँ पकड़ी गईं, जितनी कलकत्ता में पहले कभी एक साथ नहीं पकड़ी गई थीं।

इतने लोग घायल हुए, फिर भी दिन को 'अपूर्व' क्यों कहा गया?

बंगाल और कलकत्ता पर यह कलंक था कि यहाँ आज़ादी का काम नहीं हो रहा। इस दिन इतनी बड़ी खुली सभा, सजावट और गिरफ़्तारियों ने यह कलंक काफ़ी हद तक धो दिया। लोगों को विश्वास हो गया कि यहाँ भी बहुत काम हो सकता है।

इस पाठ से बोर्ड में किस तरह के प्रश्न आते हैं और उत्तर कितने शब्दों में लिखें?

इस पाठ से पठित गद्यांश पर पाँच MCQ (कथन-कारण सहित) और 25-30 शब्दों के दो अंकीय प्रश्न आते हैं। 25-30 शब्दों के उत्तर में सीधा उत्तर और पाठ का एक-दो प्रमाण लिखें। शब्द-सीमा से बहुत आगे न जाएँ।

Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-ब (085), कक्षा 10, 2026-27; NCERT स्पर्श भाग 2 (Reprint 2026-27), डायरी का एक पन्ना