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HindiCBSE Class 10 · Chapter 3

जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य Class 10: भावार्थ और व्याख्या

Updated 14 October 2026 · Fact-checked

‘आत्मकथ्य’ जयशंकर प्रसाद की छायावादी कविता है। मित्रों ने उनसे ‘हंस’ के आत्मकथा विशेषांक के लिए आत्मकथा लिखने का आग्रह किया था। कवि इससे सहमत नहीं थे। कविता में वे अपने जीवन को साधारण बताते हैं और निजी पीड़ा छिपाए रखना चाहते हैं। बोर्ड इस पर काव्यांश-आधारित MCQ और 25-30 शब्दों के प्रश्न पूछता है।

What जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य is about

‘आत्मकथ्य’ क्षितिज भाग 2 के काव्य खंड का तीसरा पाठ है। इसके कवि जयशंकर प्रसाद छायावाद के प्रमुख कवियों में से एक हैं। प्रेमचंद के संपादन में ‘हंस’ पत्रिका का आत्मकथा विशेषांक निकलना था। मित्रों ने प्रसाद जी से आत्मकथा लिखने को कहा, पर वे सहमत नहीं थे। यह कविता उसी असहमति के तर्कों से बनी है और पहली बार 1932 में ‘हंस’ में छपी थी। एक पंक्ति में कहें तो कवि अपने जीवन को एक साधारण, अभावों भरी कहानी मानता है, जिसमें दूसरों के वाह-वाह करने लायक कुछ नहीं है।

बोर्ड परीक्षा में यह कविता खंड ग में आती है। एक रूप है पठित काव्यांश: कविता का एक अंश देकर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें एक कथन-कारण प्रश्न भी होता है। दूसरा रूप है 25-30 शब्दों के प्रश्न, जिनका उत्तर लिखना होता है। इनमें पंक्ति का आशय, कवि के आत्मकथा न लिखने के कारण, ‘पाथेय’, ‘गागर रीती’ जैसे शब्दों का अर्थ और कवि के व्यक्तित्व की झलक जैसे प्रश्न आते हैं।

In real board papers: Course A, asked in 11 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 2.8 marks per paper; Course B, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026). See the questions

जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य: explanation

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

पृष्ठभूमि: मित्र चाहते थे कि प्रसाद जी भी ‘हंस’ के आत्मकथा विशेषांक के लिए अपनी आत्मकथा लिखें। कवि ने कविता में ही उत्तर दिया कि वे ऐसा क्यों नहीं करना चाहते।

भाग 1 (पहली चार पंक्तियाँ): कवि कहता है कि मन रूपी भौंरा गुनगुनाकर न जाने अपनी कौन-सी कहानी कह रहा है। चारों ओर बहुत-सी पत्तियाँ मुरझाकर गिर रही हैं। यह जीवन की नश्वरता और निराशा का संकेत है। इस अंतहीन विस्तार में अनगिनत लोगों के जीवन-इतिहास पड़े हैं, जो मानो अपना ही बुरा उपहास करते रहते हैं। इससे पता चलता है कि कवि को आत्मकथाओं के मज़ाक बनने का डर है।

भाग 2 (पंक्ति 5-8): फिर भी मित्र कहते हैं कि अपनी बीती कमज़ोरियाँ कह डालो। कवि पूछता है कि मेरे खाली घड़े जैसे जीवन को देखकर क्या तुम्हें सुख मिलेगा? उसे यह भी डर है कि सुनने वाले ही वे लोग न निकलें, जिन्होंने उसका रस लेकर अपनी गागर भरी।

भाग 3 (पंक्ति 9-12): कवि इसे विडंबना कहता है। क्या वह अपनी सरलता की हँसी उड़ाए? क्या अपनी भूलें या दूसरों के दिए धोखे सबको दिखाए? चाँदनी रातों की मधुर और खिलखिलाती बातों की उज्ज्वल कहानी भी वह कैसे गाए? वे क्षण उसके निजी हैं।

भाग 4 (पंक्ति 13-18): जिस सुख का उसने सपना देखा था, वह मिला ही नहीं। वह पास आते-आते मुसकराकर भाग गया। जिसके लाल गालों की सुंदर छाया से प्रेम भरी भोर भी अपनी लाली लेती थी, उसी की याद अब थके हुए यात्री का सहारा (पाथेय) है। कवि पूछता है कि मेरे अंतर्मन रूपी गुदड़ी की सिलाई उधेड़कर क्यों देखना चाहते हो?

भाग 5 (अंतिम चार पंक्तियाँ): कवि कहता है कि छोटे-से जीवन की बड़ी कथाएँ वह कैसे कहे। अच्छा यही है कि वह दूसरों की सुने और स्वयं चुप रहे। उसकी भोली आत्मकथा सुनकर कोई क्या करेगा? अभी उसका समय भी नहीं आया है, क्योंकि उसकी मौन पीड़ा थककर सोई हुई है।

केंद्रीय भाव: कविता में एक ओर जीवन के यथार्थ और अभाव की स्वीकृति है, दूसरी ओर एक महान कवि की विनम्रता है। कवि अपने जीवन को साधारण मानता है। वह अपनी निजी पीड़ा और मधुर यादें सार्वजनिक करके न उपहास का पात्र बनना चाहता है, न दूसरों को दोषी ठहराना चाहता है।

Themes and message

आत्मकथा न लिखने का निर्णय और निजता की रक्षा

पूरी कविता मित्रों के आग्रह का उत्तर है। कवि मानता है कि उसका अंतर्मन एक पुरानी गुदड़ी (कंथा) जैसा है, जिसकी सिलाई के भीतर उसकी पीड़ा और यादें छिपी हैं। आत्मकथा लिखने का अर्थ होगा उस सिलाई को उधेड़कर सबके सामने रख देना। कवि को लगता है कि ऐसा करने से न उसका भला होगा, न सुनने वालों का। इससे पता चलता है कि वह अपने निजी दुख को निजी ही रखना चाहता है। वह लोगों के मनोरंजन या जिज्ञासा के लिए अपना मन नहीं खोलना चाहता।

From the text: कवि मित्रों से प्रश्न करता है: “सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की?” और अंत में कहता है: “सुनकर क्या तुम भला करोगे मेरी भोली आत्म-कथा?”

विनम्रता: अपने जीवन को साधारण मानना

प्रसाद जी उस समय के महान कवि थे, फिर भी वे अपने जीवन को ‘छोटा’ कहते हैं। उनकी दृष्टि में उनके जीवन में ऐसी कोई बड़ी या रोचक घटना नहीं है जिस पर लोग वाह-वाह करें। वे बोलने से अधिक सुनना पसंद करते हैं और दूसरों की कथाएँ सुनते हुए चुप रहना उचित समझते हैं। यह आत्म-प्रशंसा से दूर रहने वाले व्यक्ति का स्वभाव है। पाठ की भूमिका भी कहती है कि कविता में एक महान कवि की विनम्रता दिखाई देती है।

From the text: “छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?” और “क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ?”

जीवन का यथार्थ, अभाव और अधूरा सुख

कवि अपने जीवन को खाली घड़े (गागर रीती) जैसा बताता है, जिसमें अब कोई रस या भाव नहीं बचा। उसने सुख का सपना देखा था, पर वह सुख मिलने से पहले ही हाथ से निकल गया, जैसे कोई आलिंगन में आते-आते मुसकराकर भाग जाए। अब उसके पास केवल उस सुख की याद है, जो जीवन-यात्रा में थके यात्री का सहारा बनी है। इससे पता चलता है कि कवि अपने जीवन के अभावों को ईमानदारी से स्वीकार करता है और उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाता।

From the text: “मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।” तथा “उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।”

संसार की नश्वरता और आत्मकथाओं का उपहास

कविता की शुरुआत में ही मुरझाकर गिरती घनी पत्तियों का चित्र है। यह जीवन की क्षणभंगुरता और निराशा का प्रतीक है। कवि कहता है कि इस अंतहीन संसार में असंख्य लोगों के जीवन-इतिहास हैं, जो बुरे ढंग से मज़ाक का विषय बनते रहते हैं। इससे यह अर्थ निकलता है कि जब इतनी कथाएँ पहले से उपहास झेल रही हैं, तो कवि अपनी कथा कहकर स्वयं को उपहास का पात्र क्यों बनाए। उसका संकोच इसी अनुभव से उपजा है।

From the text: “मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।” और “करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मलिन उपहास”

सरलता और दूसरों के धोखे को उजागर न करना

कवि मानता है कि उसकी सरलता के कारण उसे जीवन में धोखे मिले। आत्मकथा लिखने पर उसे या तो अपनी भूलें दिखानी पड़ेंगी या दूसरों की प्रवंचना (धोखा) सबके सामने लानी पड़ेगी। दोनों बातें उसे स्वीकार नहीं। अपनी सरलता की हँसी उड़ाना उसे विडंबना लगती है और दूसरों को दोषी ठहराना उसके स्वभाव के विरुद्ध है। इससे कवि की उदारता और शालीनता झलकती है: वह चोट खाकर भी किसी को बदनाम नहीं करना चाहता।

From the text: “यह विडंबना! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।” और “भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।”

The speaker and the people in the poem

कवि (वक्ता – जयशंकर प्रसाद)

कविता का वक्ता, जो मित्रों के आत्मकथा लिखने के आग्रह का उत्तर दे रहा है

  • विनम्र: अपने जीवन को ‘छोटा’ कहता है
  • सरल और भोला: अपनी आत्मकथा को ‘भोली’ कहता है
  • उदार: दूसरों के धोखे को उजागर नहीं करना चाहता
  • संवेदनशील और दुखी: भीतर मौन व्यथा छिपाए है
  • यथार्थवादी: अपने जीवन के खालीपन को स्वीकार करता है

‘छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?’ से विनम्रता, ‘भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं’ से उदारता और ‘थकी सोई है मेरी मौन व्यथा’ से भीतर छिपा दुख पता चलता है। ‘यह गागर रीती’ कहकर वह अपने जीवन का खालीपन मानता है।

मित्र (‘तुम’)

वे लोग जिन्हें कवि संबोधित करता है; जो कवि से आत्मकथा लिखने का आग्रह करते हैं

  • आग्रही: बार-बार आत्मकथा लिखने को कहते हैं
  • जिज्ञासु: कवि के निजी जीवन को जानना चाहते हैं
  • कवि के मन में उनके प्रति शंका है: कहीं वही रस लेने वाले न हों

‘तब भी कहते हो—कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती’ से उनका आग्रह दिखता है। कवि की शंका इस पंक्ति में है: ‘कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले—अपने को समझो’। यह कवि का संदेह है, आरोप नहीं।

वह, जिसकी स्मृति कवि का पाथेय है

कवि के जीवन का प्रिय और सुंदर व्यक्ति, जिसका केवल वर्णन है; कविता नाम नहीं बताती

  • अत्यंत सुंदर: उसके लाल गालों से भोर भी लाली लेती थी
  • कवि को न मिल सका सुख: पास आते-आते दूर चला गया
  • कवि के जीवन का सहारा: उसकी याद ही कवि का संबल है

‘जिसके अरुण-कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में’ और ‘उसकी स्मृति पाथेय बनी है’। व्याख्या: इससे लगता है कि यह कवि का कोई प्रिय व्यक्ति था, जिसके साथ बिताए मधुर क्षण अब केवल यादें हैं।

Poetic devices

DeviceExampleEffect
रूपक अलंकार“उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।”स्मृति को यात्रा के भोजन (पाथेय) के रूप में दिखाया गया है। इससे पता चलता है कि जैसे राह का भोजन यात्री को शक्ति देता है, वैसे ही प्रिय की याद कवि को जीने की शक्ति देती है।
मानवीकरण अलंकार“अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।”भोर (उषा) को प्रेम करने वाली स्त्री की तरह दिखाया गया है, जो प्रिय के लाल गालों से अपनी लाली लेती है। इससे प्रिय की सुंदरता बहुत बढ़कर सामने आती है।
मानवीकरण (व्यथा)“अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मेरी मौन व्यथा।”पीड़ा को थककर सोए हुए व्यक्ति जैसा बताया है। इससे संकेत मिलता है कि कवि अपने दुख को जगाकर फिर से उसकी चुभन नहीं झेलना चाहता।
पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार“आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।”‘आते-आते’ की आवृत्ति से यह भाव गहरा होता है कि सुख बिलकुल पास पहुँचकर भी हाथ से निकल गया। ‘गुन-गुना’ और ‘खिल-खिला’ में भी यही अलंकार है।
अनुप्रास अलंकार“छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?”‘क’ वर्ण की आवृत्ति (कैसे, कथाएँ, कहूँ) से पंक्ति में लय और मधुरता आती है। ‘पथिक की पंथा’ में ‘प’ की आवृत्ति भी ऐसा ही प्रभाव देती है।
प्रतीक और लाक्षणिकता (बिंब)“तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे—यह गागर रीती।”‘गागर रीती’ यानी खाली घड़ा, भावों से खाली मन का प्रतीक है। इसी तरह ‘कंथा’ अंतर्मन का और गिरती पत्तियाँ निराशा का प्रतीक हैं। ऐसे बिंब छायावादी शैली की सूक्ष्मता दिखाते हैं।
प्रश्न शैली और तुकांत लय“सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की?”कवि बार-बार प्रश्न पूछकर अपना संकोच और तर्क एक साथ रखता है। पंक्तियाँ जोड़ों में तुक मिलाती हैं (अपनी-घनी, बीती-रीती, कहूँ-रहूँ), जिससे कविता में गेयता आती है।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।

    कवि: कविता की शुरुआत में कवि आसपास बिखरे निराशा के दृश्य की ओर संकेत करता है।

    मुरझाकर गिरती पत्तियाँ जीवन की नश्वरता और कवि के मन की उदासी का प्रतीक हैं। इसी उदासी से आत्मकथा न लिखने का भाव शुरू होता है।

  • तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे—यह गागर रीती।

    कवि: मित्रों के आग्रह के उत्तर में कवि व्यंग्य भरा प्रश्न करता है।

    ‘गागर रीती’ से कवि बताता है कि उसका जीवन खाली घड़े जैसा है। वह पूछता है कि ऐसे खाली जीवन को देखकर किसी को क्या सुख मिलेगा।

  • भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।

    कवि: कवि सोचता है कि आत्मकथा में उसे क्या-क्या लिखना पड़ेगा।

    यह पंक्ति कवि की उदारता दिखाती है। वह न अपनी भूलों का प्रदर्शन करना चाहता है, न दूसरों के दिए धोखे उजागर करना चाहता है।

  • मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।

    कवि: कवि अपने जीवन के अधूरे सुख की बात करता है।

    इससे पता चलता है कि कवि का सुख केवल सपना बनकर रह गया। यह जीवन के अभाव पक्ष की मार्मिक अभिव्यक्ति है।

  • उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।

    कवि: प्रिय के सौंदर्य का वर्णन करने के बाद कवि बताता है कि अब उसके पास क्या बचा है।

    प्रिय की याद ही थके हुए कवि का जीवन-संबल है। यही कारण है कि वह इन यादों को सबके सामने नहीं बाँटना चाहता।

  • सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की?

    कवि: कवि मित्रों से पूछता है कि वे उसके मन के भीतर झाँकना क्यों चाहते हैं।

    ‘कंथा’ (गुदड़ी, अंतर्मन) की सिलाई उधेड़ने का बिंब निजता में दखल का प्रतीक है। यह कवि की निजता की रक्षा का भाव दिखाता है।

  • छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?

    कवि: कविता के अंतिम भाग में कवि अपने जीवन का मूल्यांकन करता है।

    यह पंक्ति कवि की विनम्रता की सबसे स्पष्ट झलक है। महान कवि होकर भी वह अपने जीवन को साधारण मानता है।

  • अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मेरी मौन व्यथा।

    कवि: कविता की अंतिम पंक्ति, जिसमें कवि अपना अंतिम तर्क देता है।

    कवि की पीड़ा अभी शांत है। आत्मकथा लिखने से वह फिर जाग उठेगी, इसलिए कवि कहता है कि अभी इसका समय नहीं है।

जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

आत्मकथा न लिखने का निर्णय और निजता की रक्षा

मान लीजिए आपके विद्यालय की पत्रिका 'मेरी कहानी' नाम से विशेषांक निकाल रही है। शिक्षिका चाहती हैं कि रोहन अपने परिवार के कठिन दिनों के बारे में लिखे। रोहन संकोच में है और लिखना नहीं चाहता।

रोहन की स्थिति की तुलना 'आत्मकथ्य' के कवि से कीजिए। क्या रोहन का संकोच उचित है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. समानता: कवि से भी 'हंस' के आत्मकथा विशेषांक के लिए आग्रह हुआ था
  2. कवि की तरह रोहन भी निजी पीड़ा सार्वजनिक नहीं करना चाहता
  3. निर्णय: निजी बातें बताना व्यक्ति का अपना अधिकार है

Answer: रोहन की स्थिति कवि जैसी है; कवि ने भी 'हंस' के विशेषांक हेतु मित्रों का आग्रह नहीं माना। निजी पीड़ा सबके सामने लाना व्यक्ति का अपना अधिकार है, इसलिए संकोच उचित है।

Memory hook: पत्रिका का विशेषांक = 'हंस' का विशेषांक; संकोच = कवि की असहमति।

विनम्रता: अपने जीवन को साधारण मानना

कल्पना कीजिए आपके विद्यालय की क्रिकेट टीम का कप्तान फ़ाइनल में शतक लगाकर टीम को जिताता है। स्थानीय अख़बार का संवाददाता उससे उसकी 'संघर्ष-गाथा' पूछता है, पर वह मुसकराकर कहता है, 'मैंने कुछ ख़ास नहीं किया, पूरी टीम ने खेला।'

कप्तान के व्यवहार की तुलना 'छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?' कहने वाले कवि से कीजिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कप्तान और कवि दोनों विनम्र हैं
  2. प्रसाद महान कवि होकर भी अपने जीवन को 'छोटा' कहते हैं
  3. सीख: सच्ची महानता अपनी उपलब्धियों का प्रचार न करने में है

Answer: कप्तान भी प्रसाद जी जैसा विनम्र है। महान कवि होकर भी प्रसाद अपने जीवन को 'छोटा' कहते हैं। दोनों सिखाते हैं कि सच्ची महानता अपनी उपलब्धियों का ढिंढोरा न पीटने में है।

Memory hook: शतक लगाकर भी 'कुछ ख़ास नहीं' = महान कवि होकर भी 'छोटा जीवन'।

स्मृति पाथेय: यादें जीवन का संबल

कल्पना कीजिए बोर्ड परीक्षा की तैयारी करते-करते आधी रात को आप थककर किताब बंद करने वाले हैं। तभी आपको अपनी स्वर्गवासी दादी की बात याद आती है, 'मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।' आप फिर से पढ़ने बैठ जाते हैं।

इस स्थिति के आधार पर 'उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पाथेय = स्मृति रूपी संबल (रास्ते का सहारा)
  2. थका पथिक = जीवन-पथ पर थका कवि; यहाँ थका हुआ विद्यार्थी
  3. किसी प्रिय की स्मृति थकान में आगे बढ़ने की शक्ति देती है

Answer: जैसे दादी की याद थके विद्यार्थी को फिर पढ़ने की शक्ति देती है, वैसे ही प्रिय की स्मृति जीवन-पथ पर थके कवि का संबल, अर्थात पाथेय, बनकर उसे आगे बढ़ाती है।

Memory hook: दादी की याद = कवि का पाथेय; थकान में सहारा।

सरलता और दूसरों के धोखे को उजागर न करना

मान लीजिए आपके एक मित्र ने आपका एक निजी राज़ दूसरों को बता दिया। अब कक्षा के मोबाइल समूह पर सब पूछ रहे हैं कि आप दोनों का झगड़ा क्यों हुआ, और आपसे पूरी कहानी लिखने को कह रहे हैं।

'भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं' पंक्ति के आधार पर बताइए कि कवि की तरह आप क्या करेंगे और क्यों। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कवि न अपनी भूलें दिखाना चाहता है, न दूसरों का धोखा
  2. पूरी कहानी लिखने से अपनी सरलता की हँसी उड़ेगी और मित्र का अपमान होगा
  3. मौन रहकर बात को सम्मान से समाप्त करना

Answer: कवि की तरह मैं न अपनी भूल दिखाऊँगा, न मित्र का धोखा। सबके सामने कहानी लिखने से मेरी सरलता की हँसी उड़ेगी और बात बढ़ेगी, इसलिए मौन रहना ही उचित है।

Memory hook: मोबाइल समूह पर चुप्पी = 'प्रवंचना औरों की' न दिखलाना।

Topics in this chapter

  • आत्मकथ्य कविता का भावार्थComing soon
  • आत्मकथ्य प्रश्न-उत्तर (प्रश्न-अभ्यास)Coming soon
  • आत्मकथ्य कविता का केंद्रीय भावComing soon
  • आत्मकथ्य की काव्यभाषा और काव्य-सौंदर्यComing soon
  • जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय और रचनाएँComing soon
  • आत्मकथ्य: कवि के आत्मकथा न लिखने के कारण

How the board asks जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5)कविता की 6-10 पंक्तियाँ देकर पाँच MCQ पूछे जाते हैं। जैसे: किसी शब्द (मधुप, कंथा, पाथेय, गागर रीती) का प्रसंग में अर्थ, ‘तुम’ किसके लिए आया है, किसी पंक्ति से कवि के स्वभाव का पता, या कई कथनों में से सही कथन चुनना।हर पंक्ति को शब्द-संपदा के अर्थों के साथ समझकर रखें। विकल्प चुनते समय शब्द का सामान्य अर्थ नहीं, कविता के प्रसंग वाला अर्थ चुनें। उदाहरण: मधुप = मन रूपी भौंरा, कंथा = अंतर्मन। ‘कौन-सा/से कथन सही है/हैं’ वाले प्रश्न में हर कथन को अलग-अलग पाठ से मिलाकर जाँचें।
कथन-कारण प्रश्नकथन (A) में कवि का कोई भाव और कारण (R) में उसका संभावित कारण दिया जाता है। जैसे: कवि अपनी व्यथा मौन रखना चाहता है / कारण: व्यथा जागने पर पीड़ा देगी। चार मानक विकल्पों में से एक चुनना होता है।पहले देखें कि कथन पाठ के अनुसार सही है या नहीं, फिर कारण की जाँच करें। अंत में देखें कि कारण सचमुच कथन की व्याख्या करता है या नहीं। कारण सही होकर भी असंबद्ध हो सकता है, इसलिए दोनों को पंक्ति से मिलाएँ।
पंक्ति का आशय या भाव (2 अंक, 25-30 शब्द)किसी पंक्ति का आशय पूछा जाता है। जैसे ‘अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास’, ‘उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ’ या ‘अभी समय भी नहीं’।पहले पंक्ति का सीधा अर्थ एक वाक्य में लिखें, फिर उसमें छिपा संकेत या कवि का भाव दूसरे वाक्य में। प्रतीकों का अर्थ (जैसे गागर रीती = खाली मन) अवश्य खोलें। 30 शब्द से अधिक न लिखें।
कवि के आत्मकथा न लिखने के कारणसीधे पूछा जा सकता है कि कवि आत्मकथा क्यों नहीं लिखना चाहता। या किसी स्थिति से जोड़कर, जैसे ‘खुशियाँ बाँटने से बढ़ती हैं, फिर भी कवि सुखद स्मृतियाँ क्यों नहीं बाँटता?’कम से कम दो ठोस कारण दें: जीवन साधारण और अभावपूर्ण है; आत्मकथाओं का उपहास होता है; अपनी भूलें या दूसरों के धोखे उजागर होंगे; मधुर स्मृतियाँ निजी संबल हैं; व्यथा जाग उठेगी। हर कारण को पाठ के किसी भाव से जोड़ें।
कवि का व्यक्तित्व और कविता का प्रतिपाद्यपूछा जाता है कि कविता से प्रसाद जी के व्यक्तित्व की कौन-सी झलक मिलती है, या कविता का केंद्रीय भाव क्या है।विनम्रता, सरलता, उदारता और यथार्थ की स्वीकृति जैसे दो-तीन गुण लिखें। हर गुण के साथ उसका आधार देने वाली पंक्ति का संकेत दें, जैसे ‘छोटे से जीवन’ से विनम्रता।
काव्य-सौंदर्य और काव्यभाषाकविता की भाषा की विशेषता, किसी पंक्ति का अलंकार, या छायावादी शैली की कोई बात पूछी जाती है।तत्सम-प्रधान खड़ी बोली, ललित और नवीन शब्द, प्रतीक और बिंब (गागर रीती, कंथा, पाथेय), मानवीकरण और रूपक के उदाहरण दें। पंक्ति लिखकर उसमें अलंकार का नाम और उसका प्रभाव बताएँ।

Tricks to remember जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • कविता का क्रम: दस चित्रों की माला

    भौंरा → पत्तियाँ → आसमान → खाली घड़ा → सरलता की हँसी → चाँदनी रातें → टूटा सपना → रास्ते का पाथेय → उधड़ी गुदड़ी → सोई व्यथा। याद रखें: 'भौंरा पत्ती आसमान, घड़ा हँसी चाँद; सपना पाथेय गुदड़ी, सोई नींद।'

    Use it when: काव्यांश पढ़ते ही पहचानिए कि वह कविता के आरंभ, मध्य या अंत का है और उससे पहले-बाद क्या आता है।

  • आत्मकथा न लिखने के कारण: 'चार स'

    साधारण जीवन (छोटे से जीवन की बड़ी कथा नहीं), सरलता का उपहास (अरी सरलते), स्मृति निजी (पाथेय), समय नहीं (थकी सोई व्यथा)।

    Use it when: 'कवि आत्मकथा क्यों नहीं लिखना चाहता' जैसे 2 अंक के प्रश्न में दो-तीन कारण तुरंत लिखने के लिए।

  • कठिन शब्द: शब्द में छिपा अर्थ

    पाथेय में 'पथ' है = रास्ते का संबल; पंथा में 'पंथ' है = रास्ता; मधुप = मधु पीने वाला = मन रूपी भौंरा; गागर रीती = रीता (खाली) घड़ा; कंथा ≠ कथा, कंथा = गुदड़ी/अंतर्मन।

    Use it when: बहुविकल्पी प्रश्नों में शब्दार्थ और प्रतीक वाले विकल्प सही चुनने के लिए।

  • पृष्ठभूमि: 'हंस-प्रेमचंद-बत्तीस'

    'हंस ने बत्तीस में आत्मकथा माँगी, प्रसाद ने कविता दी।' — पत्रिका हंस, संपादक प्रेमचंद, प्रकाशन 1932।

    Use it when: कविता की रचना-पृष्ठभूमि पूछे जाने पर तीनों तथ्य एक साथ लिखने के लिए।

जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: काव्यांश 1: सरलता, प्रवंचना और चाँदनी रातें

किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले—
अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।
यह विडंबना! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।
भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।
उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की।
अरे खिल-खिला कर हँसते होने वाली उन बातों की।

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    'मेरा रस ले अपनी भरने वाले' पंक्ति में कवि मित्रों के बारे में किस आशंका की ओर संकेत करता है?
    (क) मित्र उसकी कविताएँ अपने नाम से छपवा लेंगे
    (ख) आत्मकथा सुनकर मित्रों को ही पता चले कि उसके जीवन को खाली करने वाले वे स्वयं थे
    (ग) मित्र उसकी आत्मकथा की प्रशंसा नहीं करेंगे
    (घ) पत्रिका उसकी आत्मकथा छापने से मना कर देगी

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    काव्यांश में प्रयुक्त 'प्रवंचना' शब्द का अर्थ है—
    (क) प्रशंसा
    (ख) धोखा
    (ग) प्रार्थना
    (घ) पछतावा

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    'अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं' में कवि किसे संबोधित कर रहा है?
    (क) अपनी प्रेयसी को
    (ख) अपनी सरलता अर्थात भोलेपन को
    (ग) आग्रह करने वाले मित्रों को
    (घ) अनुरागिनी उषा को

  4. (4) · 1 mark · Assertion-reason

    निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प चुनिए—
    कथन (A): कवि आत्मकथा लिखकर दूसरों की प्रवंचना सबके सामने नहीं लाना चाहता।
    कारण (R): आत्मकथा लिखने पर उसे अपनी भूलें या औरों के धोखे दिखाने पड़ते, जिससे उसकी अपनी सरलता की भी हँसी उड़ती।
    (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
    (ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
    (घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    'उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की' — इस पंक्ति के आधार पर कवि क्या नहीं करना चाहता?
    (क) प्रकृति की सुंदरता पर कविता लिखना
    (ख) अपने मित्रों से बातचीत करना
    (ग) प्रिय के साथ बिताए सुखद, निजी क्षणों का सबके सामने वर्णन करना
    (घ) रात में जागकर लिखना

Show the answersAnswers
  1. (ख) आत्मकथा सुनकर मित्रों को ही पता चले कि उसके जीवन को खाली करने वाले वे स्वयं थे
  2. (ख) धोखा
  3. (ख) अपनी सरलता अर्थात भोलेपन को
  4. (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।
  5. (ग) प्रिय के साथ बिताए सुखद, निजी क्षणों का सबके सामने वर्णन करना

Extract 2: काव्यांश 2: अधूरा सुख और स्मृति का संबल

मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।
जिसके अरुण-कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।
उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।
सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की?

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    'मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया' — इस पंक्ति का भाव है—
    (क) कवि को जीवन में भरपूर सुख मिला
    (ख) कवि ने जिस सुख की कल्पना की, वह उसे वास्तव में नहीं मिला
    (ग) कवि को रात में नींद नहीं आती थी
    (घ) कवि सुख से ऊब चुका था

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    'अरुण-कपोलों' का अर्थ है—
    (क) लाल गाल
    (ख) सुनहरी सुबह
    (ग) कोमल पत्तियाँ
    (घ) लाल फूल

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    'थके पथिक की पंथा' में 'थका पथिक' किसे कहा गया है?
    (क) आत्मकथा माँगने वाले मित्र को
    (ख) रास्ते पर चलते किसी यात्री को
    (ग) स्वयं कवि को, जो जीवन की राह पर थक चुका है
    (घ) गुनगुनाते मधुप को

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    'सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की?' — इस प्रश्न से कवि का आशय है—
    (क) मित्र उसकी फटी गुदड़ी सिल दें
    (ख) मित्र उसके मन की गहराई में छिपी निजी पीड़ा और स्मृतियों को क्यों कुरेदना चाहते हैं
    (ग) मित्र उसके पुराने वस्त्र देखना चाहते हैं
    (घ) कवि अपनी कथा स्वयं सुनाना चाहता है

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    'अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
    (क) उपमा
    (ख) मानवीकरण
    (ग) श्लेष
    (घ) यमक

Show the answersAnswers
  1. (ख) कवि ने जिस सुख की कल्पना की, वह उसे वास्तव में नहीं मिला
  2. (क) लाल गाल
  3. (ग) स्वयं कवि को, जो जीवन की राह पर थक चुका है
  4. (ख) मित्र उसके मन की गहराई में छिपी निजी पीड़ा और स्मृतियों को क्यों कुरेदना चाहते हैं
  5. (ख) मानवीकरण (उषा को प्रेम भरी, सुहाग लेती स्त्री के रूप में दिखाया गया है)

जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य: board-level solved questions

Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: 'मधुप' का प्रतीकार्थ · 2 marks · Short answerBoard level

'मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी' — इस पंक्ति में 'मधुप' किसका प्रतीक है और उसका गुनगुनाना क्या संकेत देता है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मधुप = मन रूपी भौंरा (कवि का मन) — 1 अंक
  2. गुनगुनाकर कहानी कहना = मन का बीते जीवन की यादें दोहराना — 1 अंक

Answer: 'मधुप' कवि के मन रूपी भौंरे का प्रतीक है। उसका गुनगुनाकर अपनी कहानी कहना बताता है कि कवि का मन अपने बीते जीवन की यादें धीरे-धीरे दोहरा रहा है।

Example 2: 'सुख पाओगे' पर कवि का व्यंग्य · 2 marks · Short answerHarder board level

'तुम सुनकर सुख पाओगे' — कवि मित्रों से यह बात व्यंग्य में क्यों कहता है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कवि का जीवन 'रीती गागर' जैसा — भावों और सुखों से खाली, अभावों वाला
  2. उसकी बीती दुर्बलताएँ सुनकर किसी को सुख नहीं मिल सकता; मित्रों को केवल खालीपन दिखेगा — इसलिए कथन में व्यंग्य है

Answer: कवि का जीवन खाली गागर-सा अभावों से भरा है। वह व्यंग्य करता है कि उसकी बीती दुर्बलताएँ सुनकर मित्रों को भला क्या सुख मिलेगा; उन्हें केवल खालीपन ही दिखेगा।

Example 3: कवि के स्वभाव की झलक · 2 marks · Short answerHarder board level

'छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?' तथा 'औरों की सुनता मैं मौन रहूँ' — इन पंक्तियों के आधार पर कवि के स्वभाव की दो विशेषताएँ प्रमाण सहित लिखिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. विनम्रता — महान कवि होकर भी अपने जीवन को 'छोटा' कहना
  2. आत्मप्रचार से दूरी — दूसरों की सुनना, स्वयं मौन रहना पसंद करना

Answer: पहली विशेषता विनम्रता है; महान कवि होकर भी वह अपने जीवन को 'छोटा' मानता है। दूसरी, वह आत्मप्रचार से दूर रहकर दूसरों की सुनना और मौन रहना पसंद करता है।

Example 4: सुख 'स्वप्न' क्यों रहा · 2 marks · Short answerHarder board level

कवि के अनुसार उसके जीवन का सुख 'स्वप्न' जैसा क्यों रहा? इससे उसके जीवन के किस यथार्थ का पता चलता है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. जिस सुख का सपना देखा, वह 'आलिंगन में आते-आते' मुसकराकर भाग गया
  2. यथार्थ: कवि के जीवन में सुख अधूरा और क्षणिक रहा; अभाव ही अधिक रहे

Answer: कवि ने जिस सुख का सपना देखा, वह आलिंगन में आते-आते मुसकराकर भाग गया। इससे पता चलता है कि उसके जीवन में सुख अधूरा और क्षणिक ही रहा, स्वप्न-सा।

Example 5: केवल सुखद बातों वाली आत्मकथा? · 2 marks · Short answerHOTS / competency

मान लीजिए कोई कहे कि आत्मकथा में केवल सुखद बातें लिखनी चाहिए। 'आत्मकथ्य' के कवि के दृष्टिकोण से इस विचार का मूल्यांकन कीजिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कवि के अनुसार आत्मकथा में अपनी भूलें और औरों की प्रवंचना भी आती
  2. केवल सुखद बातें = अधूरा सच; कवि ऐसी आत्मकथा के बजाय मौन चुनता है (व्याख्या)

Answer: कवि मानता है कि आत्मकथा लिखने पर अपनी भूलें और दूसरों की प्रवंचना दिखानी पड़ेगी। केवल सुखद बातें लिखना अधूरा सच होगा; इसलिए ऐसी आत्मकथा से बेहतर मौन रहना है।

Example 6: हर बात साझा करने के दौर में मौन · 2 marks · Short answerHOTS / competency

'क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ?' — आज जब लोग अपनी हर निजी बात सोशल मीडिया पर डाल देते हैं, तब कवि की यह सोच कितनी उपयोगी है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. आज निजी सुख-दुख तुरंत सबके सामने रख दिए जाते हैं
  2. कवि की सीख: दूसरों को सुनना, अपनी निजता बचाना
  3. कारण: निजी व्यथा का प्रदर्शन 'व्यंग्य-मलिन उपहास' बन सकता है

Answer: आज लोग निजी सुख-दुख तुरंत सबको दिखा देते हैं। कवि सिखाता है कि दूसरों को सुनना और निजता बचाना समझदारी है, क्योंकि निजी व्यथा का प्रदर्शन उपहास बन सकता है।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

कवि ने अपनी आत्मकथा को 'भोली आत्म-कथा' क्यों कहा है? (25-30 शब्द) (2 marks)

StepMarks
'भोली' का आशय: कवि का जीवन सरल और साधारण है, उसमें कुछ महान या रोचक नहीं जिस पर लोग वाह-वाह करें1
कारण/संबंध: कवि की विनम्रता और सरलता; इसी सरलता के कारण वह औरों के धोखे का शिकार हुआ, इसलिए वह मानता है कि मित्रों का इसे सुनकर कोई भला नहीं होगा1

पठित काव्यांश ('मिला कहाँ वह सुख...' से '...मेरी कंथा की?' तक) पर आधारित पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, कथन-कारण सहित (5×1) (5 marks)

StepMarks
(i) भाव पहचान: 'स्वप्न देखकर जाग गया' = कल्पित सुख का न मिलना — सही विकल्प1
(ii) शब्दार्थ: 'अरुण-कपोल' = लाल गाल — सही विकल्प1
(iii) प्रतीक/संदर्भ: 'थका पथिक' = स्वयं कवि — सही विकल्प1
(iv) आशय: 'सीवन उधेड़ना' = मन की छिपी पीड़ा कुरेदना — सही विकल्प1
(v) कथन-कारण या काव्य-सौंदर्य (जैसे मानवीकरण की पहचान): दोनों कथनों की सत्यता और संबंध जाँचकर सही विकल्प; केवल विकल्प-अक्षर के साथ उसका पाठ भी लिखें1

Where students lose marks in जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: 'मधुप' को साधारण भौंरा लिख देना

    प्रश्न प्रतीकार्थ पूछता है, पर विद्यार्थी शाब्दिक अर्थ लिखकर रुक जाता है।

    Wrong working

    मधुप एक भौंरा है जो फूलों पर गुनगुनाता है।

    Right working

    मधुप कवि के मन रूपी भौंरे का प्रतीक है, जो गुनगुनाकर बीते जीवन की कहानी दोहराता है।

    Do this: प्रतीक वाले शब्द (मधुप, गागर, कंथा, पाथेय) का अर्थ हमेशा शब्द-संपदा वाले भाव में लिखिए।

    Usually costs: 2 अंक के प्रश्न में 1 अंक; MCQ में पूरा 1 अंक

  • Mistake: 'तुम' को प्रेमचंद मान लेना

    भूमिका में प्रेमचंद का नाम पढ़कर विद्यार्थी मान लेता है कि आग्रह उन्होंने किया।

    Wrong working

    'तुम सुनकर सुख पाओगे' में 'तुम' प्रेमचंद के लिए आया है।

    Right working

    'तुम' उन मित्रों के लिए है जिन्होंने प्रसाद जी से आत्मकथा लिखने का आग्रह किया था।

    Do this: भूमिका ध्यान से पढ़िए: प्रेमचंद संपादक थे, आग्रह मित्रों ने किया था।

    Usually costs: पूरा 1 अंक (MCQ) या 2 अंक के उत्तर में 1 अंक

  • Mistake: 'कंथा' को 'कथा' समझ लेना

    दोनों शब्द मिलते-जुलते लगते हैं, इसलिए अर्थ गड़बड़ा जाता है।

    Wrong working

    कवि पूछता है कि तुम मेरी कथा की सिलाई क्यों खोलोगे, अर्थात मेरी कहानी सुनोगे।

    Right working

    कंथा का अर्थ गुदड़ी या अंतर्मन है; सीवन उधेड़ना यानी मन में छिपी निजी पीड़ा को कुरेदकर देखना।

    Do this: कंथा = गुदड़ी/अंतर्मन, पंथा = रास्ता — दोनों शब्द जोड़ी में याद कीजिए।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: 'क्यों' पूछे जाने पर भावार्थ दोहराना

    विद्यार्थी पंक्ति का अर्थ लिखता है, पर कारण नहीं बताता।

    Wrong working

    कवि कहता है कि उसकी व्यथा थकी सोई है और अभी समय नहीं है।

    Right working

    कवि की व्यथा सहते-सहते शांत हो चुकी है; आत्मकथा लिखने पर वह फिर जागकर पीड़ा देगी, इसलिए 'अभी समय नहीं'।

    Do this: उत्तर 'क्योंकि' वाले बिंदु से बनाइए; पंक्ति दोहराना उत्तर नहीं है।

    Usually costs: 2 में से 1 अंक

  • Mistake: शब्द-सीमा से बहुत आगे लिखना और पूरा भावार्थ उतार देना

    विद्यार्थी सोचता है कि लंबा उत्तर अधिक अंक लाएगा, और समय भी गँवाता है।

    Wrong working

    (70-80 शब्दों में पूरी कविता का भावार्थ, जिसमें पूछा गया बिंदु बीच में कहीं दबा है)

    Right working

    25-30 शब्दों में दो स्पष्ट बिंदु: एक तथ्य और एक कारण/आशय, पंक्ति के प्रमाण के साथ।

    Do this: 2 अंक = दो बिंदु = लगभग 25-30 शब्द; लिखने से पहले बिंदु तय कीजिए।

    Usually costs: उत्तर अस्पष्ट होने पर 1 अंक तक, साथ में समय की हानि

  • Mistake: केवल 'दुख' को कारण बताकर विनम्रता छोड़ देना

    कविता का दूसरा पक्ष, महान कवि की विनम्रता, विद्यार्थी भूल जाता है।

    Wrong working

    कवि बहुत दुखी था, इसलिए उसने आत्मकथा नहीं लिखी।

    Right working

    कवि अपने जीवन को साधारण और 'छोटा' मानता है; यह उसकी विनम्रता है, साथ ही वह अपनी निजी पीड़ा भी उजागर नहीं करना चाहता।

    Do this: कविता के दोनों पक्ष याद रखिए: यथार्थ की स्वीकृति और विनम्रता।

    Usually costs: 1 अंक

जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य: previous year questions

  • Course A: Asked in 11 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 2.8 marks per paper; 11 questions in all, counting OR alternatives. In 0 of 4 sample papers.
  • Course B: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).

Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.

Solved board questions from जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य

Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.

2026 Course A, set 3/4/1, Q9 · 5 marks · Case-basedCompetency-based

निम्नलिखित पठित काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : 5 × 1 = 5

मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।
इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास
यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मलिन उपहास
तब भी कहते हो – कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती।
तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।
किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले –
अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।

  1. (i)

    'पत्तियों का मुरझाकर गिरना' किसका प्रतीक है ?

    1. (A)जीवन की बाधाओं का
    2. (B)जीवन की अनंतता का
    3. (C)जीवन की नश्वरता का
    4. (D)जीवन की निश्चितता का
    1 mark
  2. (ii)

    'तुम सुनकर सुख पाओगे' पंक्ति में 'तुम' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है ?

    1. (A)मित्रों के लिए
    2. (B)प्रेयसी के लिए
    3. (C)अंतर्मन के लिए
    4. (D)पाठकों के लिए
    1 mark
  3. (iii)

    कवि ने अपने मित्रों से क्या-क्या सवाल किए हैं ? इस प्रश्न के उत्तर के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए :
    (I) क्या तुम मेरे जीवन के खालीपन को देखकर सुखी हो पाओगे ?
    (II) कहीं मेरे जीवन का सुख लेकर तो तुमने अपने जीवन को नहीं भर लिया है ?
    (III) आत्म-कथाओं का उपहास उड़ाया जाता है फिर तुम क्यों चाहते हो कि मैं अपनी दुर्बलता लिखूँ।

    1. (A)विकल्प (I) और (II) सही हैं।
    2. (B)विकल्प (I), (II) और (III) सही हैं।
    3. (C)विकल्प (II) और (III) सही हैं।
    4. (D)केवल विकल्प (I) सही है।
    1 mark
  4. (iv)

    काव्यांश के संदर्भ में 'रीती गागर' से क्या अभिप्राय है ?

    1. (A)धन-संपत्ति का अभाव
    2. (B)जीवन में कोई अपना न होना
    3. (C)सम्मान से रहित जीवन
    4. (D)उपलब्धियों से रहित जीवन
    1 mark
  5. (v)

    निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन कर लिखिए :
    कथन : कवि अपने जीवन की दुर्बलता समाज के सामने नहीं लाना चाहता।
    कारण : लोगों के बीच कटाक्षपूर्ण मज़ाक बनने का भय।

    1. (A)कथन ग़लत है, किंतु कारण सही है।
    2. (B)कथन और कारण दोनों ही ग़लत हैं।
    3. (C)कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
    4. (D)कथन सही है, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है।
    1 mark
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (i) मुरझाकर गिरती पत्तियाँ जीवन की नश्वरता का प्रतीक हैं। उत्तर: (C)

    1 mark
  2. (ii) 'तुम' कवि के मित्रों के लिए है, जो आत्मकथा लिखने का आग्रह करते हैं। उत्तर: (A)

    1 mark
  3. (iii) कवि तीनों प्रश्न उठाता है। उत्तर: (B)

    1 mark
  4. (iv) रीती गागर का अर्थ उपलब्धियों से रहित जीवन है। उत्तर: (D)

    1 mark
  5. (v) कवि दुर्बलता प्रकट नहीं करना चाहता क्योंकि उपहास का भय है; कारण कथन की व्याख्या है। उत्तर: (C)

    1 mark

Answer: (i) C; (ii) A; (iii) B; (iv) D; (v) C

Where the marks are

  • प्रत्येक सही विकल्प के लिए 1 अंक (कुल 5 अंक)

See it in the full 2026 board paper, set 3/4/1

2025 Course A, set 3/3/1, Q10 · 6 marks · Short answer

निर्धारित कविताओं के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25–30 शब्दों में लिखिए : 3×2=6

  1. (क)

    सूरदास की गोपियों की वाक्-चातुर्य को किन्हीं दो उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।

    2 marks
  2. (ख)

    कवि निराला बादलों से किन-किन कारणों से गरजने/बरसने का आग्रह कर रहे हैं ? 'उत्साह' कविता के आधार पर कोई दो कारण अवश्य लिखिए।

    2 marks
  3. (ग)

    'यह दंतुरित मुसकान' कविता में बच्चे के स्पर्श से 'शेफालिका के फूलों के झरने' से क्या अभिप्राय है ?

    2 marks
  4. (घ)

    'आत्मकथ्य' कविता के कवि के जीवन का संबल क्या है ? वह उसे सबसे बाँटना क्यों नहीं चाहता ?

    2 marks
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (क) गोपियाँ उद्धव को 'बड़भागी' कहकर वास्तव में अभागा सिद्ध करती हैं, क्योंकि वे प्रेम से अछूते रहे। वे कृष्ण को राजनीतिज्ञ कहकर उनके छलपूर्ण व्यवहार पर व्यंग्य करती हैं।

    2 marks
  2. (ख) कवि बादलों से गरजने-बरसने का आग्रह सामाजिक परिवर्तन और नव-निर्माण के लिए करते हैं। वे शोषित-पीड़ित जनता के कल्याण और तपती गर्मी से मुक्ति के लिए भी बरसने को कहते हैं।

    2 marks
  3. (ग) बच्चे के स्पर्श से कवि का कठोर, रूखा मन कोमल हो उठता है। उसके भीतर स्नेह और वात्सल्य का आनंदमय प्रवाह फूट पड़ता है, मानो शेफालिका के फूल झर रहे हों।

    2 marks
  4. (घ) कवि का संबल प्रेम के सुखद दिनों की स्मृतियाँ हैं। वह उन्हें सबसे इसलिए नहीं बाँटना चाहता कि अपनी निजी, सुखद यादों को सार्वजनिक नहीं करना चाहता।

    2 marks

Answer: किन्हीं तीन उप-भागों के उत्तर ऊपर दिए गए हैं

Where the marks are

  • (क) दो उदाहरण (2 marks)
  • (ख) दो कारण (2 marks)
  • (ग) अभिप्राय (2 marks)
  • (घ) संबल और कारण (2 marks)

See it in the full 2025 board paper, set 3/3/1

2023 Course A, set 3/2/1, Q10 · 2 marks · MCQ

पद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित दो बहुविकल्पी प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :

  1. (i)

    जयशंकर प्रसाद अपनी आत्मकथा क्यों नहीं लिखना चाहते हैं ?

    1. (a)वह एक सामान्य व्यक्ति की भोली कथा है।
    2. (b)वह कथा दुर्बलताओं से भरी हुई है।
    3. (c)उसमें दूसरों के दिए धोखे और छल हैं।
    4. (d)विनम्र स्वभाववश स्वयं को सामान्य मानव मानते हैं।
    1 mark
  2. (ii)

    कवि के अनुमानों के आधार पर बताइए कि निम्नलिखित में से 'संगतकार' मुख्य गायक की सहायता किस रूप में नहीं करता ।

    1. (a)मुख्य गायक के छोटे भाई के रूप में
    2. (b)मुख्य गायक के शिष्य के रूप में
    3. (c)मुख्य गायक के दूर के रिश्तेदार के रूप में
    4. (d)मुख्य गायक के बेटे के रूप में
    1 mark
Try it first, then show our solutionSolution
  1. (i) 'आत्मकथ्य' में प्रसाद विनम्रतावश स्वयं को सामान्य मानव मानते हैं, इसलिए आत्मकथा नहीं लिखना चाहते। उत्तर (d)।

    1 mark
  2. (ii) कविता में संगतकार मुख्य गायक का छोटा भाई, शिष्य या रिश्तेदार हो सकता है, बेटे का उल्लेख नहीं है। उत्तर (d)।

    1 mark

Answer: (i) d; (ii) d

Where the marks are

  • (i) विकल्प (d) (1 अंक)
  • (ii) विकल्प (d) (1 अंक)

See it in the full 2023 board paper, set 3/2/1

Every जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य question, by year

Course A (11 questions, sample papers included)

2026

Set 3/4/1: Q9 (5 marks, solved)

Set 3/5/1: Q9 (5 marks, solved)

2025

Set 3/1/1: Q9 (5 marks, solved)

Set 3/3/1: Q10 (6 marks, solved)

Set 3/5/1: Q10 (6 marks, solved)

2024

Set 3/1/1: Q12 (6 marks, solved)

Set 3/3/1: Q12 (6 marks, solved)

2023

Set 3/1/1: Q9 (5 marks, solved)

Set 3/2/1: Q10 (2 marks, solved)

Set 3/4/1: Q12 (6 marks, solved)

Set 3/5/1: Q12 (6 marks, solved)

Course B (0 questions, sample papers included)

Practice questions on जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 2 marks · Short answerBoard level

    'आत्मकथ्य' कविता किस अवसर पर और किस कारण लिखी गई? (25-30 शब्द)

    Hint

    पाठ की भूमिका याद कीजिए: पत्रिका, संपादक, मित्रों का आग्रह।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: प्रेमचंद के संपादन में 'हंस' का आत्मकथा विशेषांक; मित्रों का आग्रह; प्रसाद जी की असहमति; उसी असहमति से कविता; 1932 में उसी विशेषांक में प्रकाशित।

    आदर्श उत्तर: प्रेमचंद के संपादन में 'हंस' का आत्मकथा विशेषांक निकलना था। मित्रों ने प्रसाद जी से आत्मकथा लिखने का आग्रह किया। वे असहमत थे; इसी असहमति से यह कविता बनी।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    'कंथा' और 'पंथा' शब्दों के अर्थ लिखते हुए बताइए कि 'थका पथिक' कौन है। (25-30 शब्द)

    Hint

    शब्द-संपदा के अर्थ लिखिए, फिर सोचिए कि जीवन-पथ पर कौन चल रहा है।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: कंथा = अंतर्मन, गुदड़ी; पंथा = रास्ता; थका पथिक = स्वयं कवि; स्मृति ही उसका सहारा।

    आदर्श उत्तर: 'कंथा' का अर्थ अंतर्मन या गुदड़ी और 'पंथा' का अर्थ रास्ता है। 'थका पथिक' स्वयं कवि है, जो जीवन-पथ पर थककर प्रिय की स्मृति के सहारे चलता है।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level

    कविता के आरंभ में आए प्रकृति के बिंब — मधुप, मुरझाती पत्तियाँ और अनंत नीलिमा — कवि के आत्मकथा न लिखने के तर्क को कैसे मज़बूत करते हैं? (25-30 शब्द)

    Hint

    पत्तियों का गिरना किस सच्चाई को दिखाता है? नीलिमा में बसे जीवन-इतिहास क्या करते हैं?

    Answer

    उत्तर-बिंदु: मुरझाती पत्तियाँ = जीवन की नश्वरता; असंख्य जीवन-इतिहास अपना ही 'व्यंग्य-मलिन उपहास' करते हैं; इसलिए एक और साधारण आत्मकथा व्यर्थ।

    आदर्श उत्तर: मुरझाती पत्तियाँ जीवन की नश्वरता दिखाती हैं और अनंत नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास अपना ही उपहास करते हैं। इनसे कवि संकेत करता है कि एक और साधारण आत्मकथा व्यर्थ है।

  4. Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level

    कवि अपनी व्यथा को 'थकी सोई' क्यों कहता है? उसे जगाने से क्या हानि हो सकती है? (25-30 शब्द)

    Hint

    लंबे समय तक सहा गया दुख शांत हो जाता है; आत्मकथा उसे फिर छेड़ेगी।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: दुख सहते-सहते थककर शांत हो गया है; आत्मकथा लिखने पर व्यथा फिर जागेगी; पुरानी पीड़ा दोबारा होगी (व्याख्या)।

    आदर्श उत्तर: कवि का दुख लंबे समय से सहते-सहते थककर शांत हो गया है। आत्मकथा लिखने पर वह व्यथा फिर जाग उठेगी और पुराने घाव हरे होकर उसे दोबारा पीड़ा देंगे।

  5. Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level

    कविता में 'तुम' (आग्रह करने वाले मित्रों) के प्रति कवि का स्वर कैसा है — कटु, व्यंग्यपूर्ण या आत्मीय? पंक्तियों के प्रमाण सहित लिखिए। (25-30 शब्द)

    Hint

    कवि मित्रों से प्रश्न पूछता है और एक चेतावनी भी देता है; क्या उसमें गुस्सा है?

    Answer

    उत्तर-बिंदु: स्वर आत्मीय पर हल्का व्यंग्यपूर्ण; प्रमाण: 'सुनकर क्या तुम भला करोगे'; चेतावनी कि कहीं वे ही 'रस ले अपनी भरने वाले' न निकलें; कटुता नहीं।

    आदर्श उत्तर: स्वर आत्मीय किंतु हल्का व्यंग्यपूर्ण है। कवि मित्रों से पूछता है — 'सुनकर क्या तुम भला करोगे' — और चेताता है कि कहीं वे ही उसका रस लेने वाले न निकलें।

  6. Q6 · 2 marks · Short answerHarder board level

    'चाँदनी रातों की उज्ज्वल गाथा' और 'सीवन को उधेड़ कर' — इन प्रयोगों के आधार पर प्रसाद की काव्यभाषा की लाक्षणिकता स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द)

    Hint

    लाक्षणिक भाषा सीधे न कहकर संकेत से कहती है; दोनों प्रयोगों का संकेतित अर्थ लिखिए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: लाक्षणिकता = संकेत से बात कहना; चाँदनी रातों की गाथा = प्रेम के सुखद निजी पल; सीवन उधेड़ना = मन की छिपी परतें खोलना।

    आदर्श उत्तर: प्रसाद संकेत से कहते हैं। 'चाँदनी रातों की उज्ज्वल गाथा' प्रेम के सुखद पलों का और 'सीवन उधेड़ना' मन की छिपी परतें खोलने का संकेत है। यही लाक्षणिकता है।

  7. Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    मान लीजिए कक्षा में कोई मित्र आपसे आपकी पुरानी असफलताओं के बारे में सबके सामने बताने का आग्रह करता है। 'आत्मकथ्य' के कवि की तरह आप क्या उत्तर देंगे और क्यों? (25-30 शब्द)

    Hint

    कवि की 'मौन रहूँ' वाली सोच और उपहास के डर को अपनी स्थिति से जोड़िए।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: विनम्र इनकार; भूलें खोलने से उपहास का डर; दूसरों को सुनना और निजी बातें मन में रखना — कवि जैसा दृष्टिकोण।

    आदर्श उत्तर: मैं कवि की तरह विनम्रतापूर्वक मना करूँगा। अपनी भूलें सबके सामने खोलने से उपहास हो सकता है; बेहतर है कि मैं दूसरों की सुनूँ और निजी बातें मन में रखूँ।

  8. Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    क्या कवि का आत्मकथा न लिखने का निर्णय उचित है? 'आत्मकथ्य' के आधार पर तर्क सहित अपना मत दीजिए। (25-30 शब्द)

    Hint

    सरलता का उपहास, औरों का धोखा और सुखद स्मृति का निजी संबल — तीनों तर्क तौलिए। विपक्ष में तर्कपूर्ण मत भी स्वीकार्य है।

    Answer

    उत्तर-बिंदु: स्पष्ट मत; सरलता की हँसी उड़ने और औरों की प्रवंचना उजागर होने का कारण; सुखद स्मृति = निजी पाथेय, बाँटने योग्य नहीं।

    आदर्श उत्तर: हाँ, उचित है। आत्मकथा लिखने पर कवि को अपनी सरलता का उपहास और दूसरों के धोखे उजागर करने पड़ते। उसकी सुखद स्मृतियाँ निजी संबल हैं, जिन्हें वह बाँटना नहीं चाहता।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.'आत्मकथ्य' पहली बार कहाँ और कब प्रकाशित हुई?Show answer

    1932 में 'हंस' पत्रिका के आत्मकथा विशेषांक में, जिसके संपादक प्रेमचंद थे।

  2. 2.कविता में 'तुम' कौन है?Show answer

    प्रसाद जी के वे मित्र, जिन्होंने उनसे आत्मकथा लिखने का आग्रह किया था।

  3. 3.'गागर रीती' किसका प्रतीक है?Show answer

    भावों और सुखों से खाली मन; कवि का अभावों वाला जीवन (खाली घड़ा)।

  4. 4.कवि किसकी हँसी नहीं उड़ाना चाहता?Show answer

    अपनी सरलता की — 'अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।'

  5. 5.'प्रवंचना' का अर्थ क्या है और किसकी प्रवंचना की बात है?Show answer

    धोखा; औरों द्वारा कवि के साथ किए गए धोखे की।

  6. 6.थके पथिक का पाथेय क्या बना है?Show answer

    उस प्रिय की स्मृति, जिसके अरुण-कपोलों की छाया में अनुरागिनी उषा सुहाग लेती थी।

  7. 7.कवि दूसरों की सुनकर क्या करना अच्छा मानता है?Show answer

    स्वयं मौन रहना — 'औरों की सुनता मैं मौन रहूँ।'

  8. 8.कविता की अंतिम पंक्ति क्या है और उसका भाव?Show answer

    'अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मेरी मौन व्यथा।' — कवि का दुख शांत है, उसे जगाना उचित नहीं।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप बता सकते हैं कि 'आत्मकथ्य' किस असहमति से पैदा हुई और किस पत्रिका के विशेषांक में छपी?
  • क्या आप मधुप, मुरझाती पत्तियाँ और अनंत नीलिमा — तीनों बिंबों का अर्थ बिना देखे लिख सकते हैं?
  • क्या आप कवि की वह आशंका समझा सकते हैं कि मित्र ही 'खाली करने वाले' न निकलें?
  • क्या आप आत्मकथा न लिखने के 'चार स' — साधारण जीवन, सरलता का उपहास, स्मृति निजी, समय नहीं — क्रम से बोल सकते हैं?
  • क्या आप पाथेय, पंथा, कंथा, प्रवंचना और अरुण-कपोल के अर्थ एक साँस में बता सकते हैं?
  • क्या आप 'अनुरागिनी उषा...' में मानवीकरण और 'आते-आते', 'खिल-खिला' में शब्दों की पुनरावृत्ति पहचान सकते हैं?
  • क्या आप कविता के दो पक्ष — यथार्थ की स्वीकृति और महान कवि की विनम्रता — एक-एक पंक्ति के प्रमाण सहित लिख सकते हैं?

जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य: frequently asked questions

‘आत्मकथ्य’ कविता किस अवसर पर लिखी गई थी?

प्रेमचंद के संपादन में ‘हंस’ पत्रिका का आत्मकथा विशेषांक निकलना था। प्रसाद जी के मित्रों ने आग्रह किया कि वे भी आत्मकथा लिखें, पर वे सहमत नहीं थे। इसी असहमति के तर्कों से यह कविता बनी और 1932 में ‘हंस’ में छपी।

कवि आत्मकथा क्यों नहीं लिखना चाहता?

कवि को लगता है कि उसका जीवन साधारण और खाली घड़े जैसा है, जिसमें सराहने लायक कुछ नहीं। आत्मकथा में उसे अपनी भूलें या दूसरों के धोखे दिखाने पड़ेंगे, और उसकी सोई हुई व्यथा फिर जाग उठेगी। वह अपनी मधुर यादों को भी निजी रखना चाहता है।

‘गागर रीती’ और ‘कंथा’ का क्या अर्थ है?

‘गागर रीती’ का अर्थ है खाली घड़ा, यानी ऐसा मन जिसमें कोई भाव नहीं बचा। ‘कंथा’ का अर्थ गुदड़ी या अंतर्मन है। ‘कंथा की सीवन उधेड़ना’ का अर्थ है किसी के मन के छिपे दुख खोलकर देखना।

‘उसकी स्मृति पाथेय बनी है’ में पाथेय का क्या आशय है?

पाथेय यात्रा में साथ रखा भोजन होता है, जो यात्री को शक्ति देता है। कवि कहता है कि प्रिय की याद ही उसकी थकी जीवन-यात्रा का सहारा है। इसलिए ये यादें उसके लिए बहुत कीमती और निजी हैं।

इस कविता से जयशंकर प्रसाद के स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है?

कविता से पता चलता है कि प्रसाद जी विनम्र थे, क्योंकि वे अपने जीवन को ‘छोटा’ कहते हैं। वे सरल और उदार भी थे, क्योंकि दूसरों के धोखे उजागर नहीं करना चाहते। वे अपने जीवन के अभावों को ईमानदारी से स्वीकार करते हैं।

जयशंकर प्रसाद की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?

उनकी प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं चित्राधार, कानन-कुसुम, झरना, आँसू, लहर और कामायनी; कामायनी पर उन्हें मंगलाप्रसाद पारितोषिक मिला। अजातशत्रु, चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त और ध्रुवस्वामिनी उनके नाटक हैं; कंकाल, तितली और इरावती उपन्यास हैं। आकाशदीप, आँधी और इंद्रजाल उनके कहानी संग्रह हैं।

Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-अ (002), कक्षा 10, 2026-27; NCERT क्षितिज भाग 2 (Reprint 2026-27), आत्मकथ्य