बालगोबिन भगत Class 10: सार, चरित्र-चित्रण और प्रश्न-उत्तर
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
‘बालगोबिन भगत’ रामवृक्ष बेनीपुरी का रेखाचित्र है, जो क्षितिज भाग 2 के गद्य खंड में है। इसमें एक गृहस्थ किसान का चित्र है, जो अपने आचरण से सच्चा साधु है, कबीर का भक्त है और रूढ़ियाँ तोड़ता है। बोर्ड इस पाठ से गद्यांश पर पाँच MCQ और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न पूछता है।
What रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत is about
‘बालगोबिन भगत’ क्षितिज भाग 2 के गद्य खंड का आठवाँ पाठ है। इसके लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी हैं, जिन्हें विशिष्ट शैली के कारण ‘कलम का जादूगर’ कहा जाता है। यह एक रेखाचित्र है। इसमें एक ऐसे गृहस्थ किसान का चित्र है जो वेशभूषा से नहीं, अपने आचरण से सच्चा साधु है। वह कबीर का भक्त है, मधुर गायक है और सामाजिक रूढ़ियों को खुलकर तोड़ता है। पाठ में गाँव के जीवन और ऋतुओं की सजीव झाँकी भी है।
बोर्ड परीक्षा में यह पाठ खंड ग (गद्य खंड) में आता है। प्रश्न 7 में क्षितिज का कोई पठित गद्यांश देकर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) पूछे जाते हैं, जिनमें कथन-कारण प्रश्न भी होता है; यह गद्यांश इस पाठ से भी हो सकता है। प्रश्न 8 में गद्य पाठों से चार में से तीन प्रश्न आते हैं, जिनका उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखना होता है और हर प्रश्न 2 अंक का होता है।
In real board papers: Course A, asked in 8 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 1.9 marks per paper; Course B, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026). See the questions
रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
रूप-रंग और वेशभूषा: बालगोबिन भगत मँझोले कद के गोरे आदमी थे, उम्र साठ से ऊपर। बाल पक गए थे, पर लंबी दाढ़ी या जटा नहीं थी। कमर में केवल लंगोटी, सिर पर कबीरपंथियों जैसी कनफटी टोपी, जाड़े में काली कमली, माथे पर रामानंदी चंदन और गले में तुलसी की जड़ों की बेडौल माला रहती थी।
गृहस्थ होकर भी साधु: वे साधु नहीं, गृहस्थ थे। उनके बेटा और पतोहू थे, थोड़ी खेती और साफ़-सुथरा मकान था। फिर भी आचरण से वे सच्चे साधु थे। वे कबीर को ‘साहब’ मानते, उन्हीं के पद गाते और उन्हीं के आदेश मानते। वे कभी झूठ नहीं बोलते, दो-टूक बात करते, बेवजह झगड़ा नहीं करते और किसी की चीज़ बिना पूछे नहीं छूते; दूसरे के खेत में शौच तक नहीं करते थे। खेत की उपज पहले चार कोस दूर कबीरपंथी मठ में भेंट करते और प्रसाद रूप में जो मिलता, उसी से घर चलाते।
ऋतुओं के साथ गायन: आषाढ़ में धान की रोपनी करते हुए उनके गीत से बच्चे झूम उठते, औरतें गुनगुनाने लगतीं, हलवाहों के पैर ताल पर उठते। भादो की अँधेरी आधी रात में खँजड़ी के साथ उनका गीत सबको चौंका देता। कार्तिक से फागुन तक वे भोर में दो मील दूर नदी नहाकर पोखरे के ऊँचे भिंडे पर प्रभातियाँ गाते। माघ की ठिठुरती भोर में लेखक भी उनका गीत सुनने पहुँचा और देखा कि ठंड में भी उनके माथे पर श्रमबिंदु चमक रहे थे। गर्मियों की शाम आँगन में प्रेमी-मंडली के साथ ‘संझा’ गाते-गाते सब नाच उठते।
बेटे की मृत्यु: उनका इकलौता बेटा सुस्त और बोदा था, इसलिए भगत उसे और अधिक प्यार करते थे। उसकी पत्नी सुशील थी और घर का पूरा प्रबंध सँभालती थी। बेटे की मृत्यु पर भगत ने शव को सफ़ेद कपड़े से ढककर फूल और तुलसीदल बिखेरे, सिरहाने दीपक जलाया और गीत गाते रहे। उन्होंने रोती बहू को उत्सव मनाने को कहा, क्योंकि आत्मा परमात्मा से मिल गई थी। उन्होंने बहू से ही बेटे को आग दिलवाई। श्राद्ध के बाद बहू को उसके भाई के साथ भेज दिया और दूसरी शादी करने का आदेश दिया। बहू ने उनकी सेवा के लिए रुकने की विनती की, पर भगत ने कहा कि वह नहीं गई तो वे ही घर छोड़ देंगे।
भगत की मृत्यु: वे हर साल तीस कोस दूर गंगा-स्नान पैदल जाते और रास्ते में किसी से भोजन नहीं माँगते थे। एक बार लौटे तो तबीयत खराब रही, बुखार आया, पर उन्होंने नियम नहीं छोड़े। एक संध्या उनके गीत का स्वर टूटा-सा लगा और अगली भोर लोगों ने पाया कि भगत नहीं रहे।
Themes and message
सच्चा साधु: वेशभूषा से नहीं, आचरण से
पाठ का मुख्य संदेश यह है कि कोई व्यक्ति केवल कपड़ों या बाहरी पूजा-पाठ से साधु नहीं बनता। भगत गृहस्थ थे, खेती करते थे, परिवार रखते थे, फिर भी लेखक उन्हें सच्चा साधु मानता है। इसका आधार उनका आचरण है: सच बोलना, खरा व्यवहार, दूसरे की वस्तु का सम्मान और अपनी उपज को भी ‘साहब’ की मानना। इससे पता चलता है कि लेखक के अनुसार साधुता मनुष्यता और ईमानदारी में है, संसार छोड़ने में नहीं।
From the text: लेखक स्वयं चेतावनी देता है कि वेशभूषा देखकर उन्हें साधु न माना जाए, क्योंकि वे ‘बिलकुल गृहस्थ’ थे; फिर भी वे “साधु की सब परिभाषाओं में खरे उतरनेवाले” थे। उनके नियम: “कभी झूठ नहीं बोलते, खरा व्यवहार रखते।” और “किसी की चीज़ नहीं छूते, न बिना पूछे व्यवहार में लाते।”
सामाजिक रूढ़ियों पर प्रहार
भगत ने बेटे की मृत्यु पर समाज की कई प्रचलित मान्यताएँ तोड़ीं। उस समय मुखाग्नि पुरुष देते थे, पर भगत ने यह काम बहू से करवाया। विधवा बहू को घर में बिठाकर जीवन भर सेवा करवाने के बजाय उन्होंने उसके दूसरे विवाह का आदेश दिया। मृत्यु पर रोने-पीटने की जगह उन्होंने उत्सव मनाने की बात कही। इससे पता चलता है कि वे अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर बहू के भविष्य के बारे में सोचते थे; उनके लिए प्रेम का अर्थ मोह नहीं, दूसरे का भला था।
From the text: “पतोहू से ही आग दिलाई उसकी।” श्राद्ध के बाद बहू के भाई को यह आदेश दिया कि “इसकी दूसरी शादी कर देना”। बहू की विनती पर भी उनका निर्णय अटल रहा।
कबीर-भक्ति और मृत्यु पर आस्था की विजय
भगत कबीर को ‘साहब’ मानते थे और उनके हर काम में यह भक्ति दिखती है। वे कबीर के पद गाते, उनके आदेश मानते और उपज पहले कबीरपंथी मठ में चढ़ाते। बेटे की मृत्यु पर भी वे इसी विश्वास के सहारे शांत रहे कि आत्मा अपने प्रेमी परमात्मा से मिल गई है। लेखक को पहले लगा कि वे पागल हो गए हैं, पर बाद में उसने समझा कि यह उनका गहरा विश्वास था। इससे पता चलता है कि सच्ची आस्था मनुष्य को दुख में भी टूटने नहीं देती।
From the text: “वह गृहस्थ थे; लेकिन उनकी सब चीज़ ‘साहब’ की थी।” बेटे की मृत्यु पर: “आत्मा परमात्मा के पास चली गई, विरहिनी अपने प्रेमी से जा मिली”; लेखक के शब्दों में यह “वह चरम विश्वास जो हमेशा ही मृत्यु पर विजयी होता आया है।”
लोक संगीत, ऋतुएँ और ग्रामीण सामूहिक जीवन
पाठ में भगत का संगीत पूरे गाँव को जोड़ता है। आषाढ़ की रोपनी, भादो की आधी रात, कार्तिक से फागुन की प्रभातियाँ और गर्मियों की ‘संझा’, हर ऋतु के साथ उनका गायन बदलता है। उनके गीत से काम करने वाले लोगों में नई लय आ जाती है और आँगन में सब एक साथ नाच उठते हैं। इससे पता चलता है कि लोक संगीत गाँव की मेहनत को उत्सव बना देता है। साथ ही, पाठ ग्रामीण जीवन की सजीव झाँकी दिखाता है।
From the text: रोपनी के समय “हलवाहों के पैर ताल से उठने लगते हैं” और लेखक पूछता है: “बालगोबिन भगत का यह संगीत है या जादू!” संझा में अंत तक “सारा आँगन नृत्य और संगीत से ओतप्रोत है!”
नियम-निष्ठा और स्वाभिमान
भगत अपने नियमों पर अंत तक टिके रहे। वे हर साल तीस कोस दूर गंगा-स्नान पैदल जाते और रास्ते में किसी से भोजन नहीं माँगते, क्योंकि उनका तर्क था कि साधु को सहारा नहीं लेना चाहिए और गृहस्थ को भीख नहीं माँगनी चाहिए। बुढ़ापे और बीमारी में भी उन्होंने गीत, स्नान-ध्यान और खेती देखना नहीं छोड़ा। इससे पता चलता है कि उनका अनुशासन किसी दिखावे के लिए नहीं, उनके स्वभाव का हिस्सा था।
From the text: “साधु को संबल लेने का क्या हक? और, गृहस्थ किसी से भिक्षा क्यों माँगे?” तथा “अब बुढ़ापा आ गया था, किंतु टेक वही जवानीवाली।” लोगों के मना करने पर भी वे “हँसकर टाल देते रहे।”
Characters
बालगोबिन भगत
पाठ के नायक; साठ से ऊपर के गृहस्थ किसान, जो कबीर के भक्त, मधुर गायक और आचरण से सच्चे साधु हैं।
- सत्यवादी और खरे व्यवहार वाले
- कबीर के अनन्य भक्त
- रूढ़ियों को तोड़ने वाले प्रगतिशील विचारक
- नियमों के पक्के और स्वाभिमानी
- कोमल हृदय और दुख में भी संयमी
वे कभी झूठ नहीं बोलते, दो-टूक बात कहते और किसी की चीज़ बिना पूछे नहीं छूते। उपज पहले कबीरपंथी मठ ले जाते। बहू से बेटे को आग दिलाई और उसके पुनर्विवाह का आदेश दिया। तीस कोस पैदल गंगा जाते पर भिक्षा नहीं माँगते। सुस्त, बोदे बेटे को इसलिए और अधिक प्यार करते थे कि ऐसे लोग “निगरानी और मुहब्बत के ज़्यादा हकदार होते” हैं।
पतोहू (भगत की पुत्रवधू)
भगत के बेटे की पत्नी, जो घर का पूरा प्रबंध सँभालती थी और पति की मृत्यु के बाद भी ससुर की सेवा करना चाहती थी।
- सुशील और सुंदर (सुभग)
- कुशल गृहिणी और घर की प्रबंधिका
- सेवाभावी और कर्तव्यनिष्ठ
- ससुर के प्रति गहरी श्रद्धा रखने वाली
लेखक के अनुसार पतोहू “बड़ी ही सुभग और सुशील” थी और उसने भगत को दुनियादारी से बहुत कुछ मुक्त कर दिया था। जाते समय वह रो-रोकर कहती है कि बुढ़ापे में उनके लिए भोजन कौन बनाएगा और बीमार पड़ने पर पानी कौन देगा। वह पैर पड़कर उनके चरणों से अलग न करने की विनती करती है।
भगत का बेटा
भगत का इकलौता पुत्र, जिसकी बीमारी और मृत्यु पाठ के सबसे मार्मिक प्रसंग का आधार है।
- सुस्त और कम बुद्धि वाला (बोदा)
- पिता का अत्यंत प्रिय
- समाज की उपेक्षा का शिकार
लेखक उसे “कुछ सुस्त और बोदा-सा” बताता है, पर इसी कारण भगत उसे और अधिक मानते थे। उसकी बीमारी की खबर रखने की लोगों को फुरसत नहीं थी; मृत्यु के बाद ही सबका ध्यान उसकी ओर गया। भगत ने बड़ी साध से उसकी शादी कराई थी।
लेखक (कथावाचक)
गाँव का व्यक्ति, जो भगत को पास से देखता है और उनके जीवन का रेखाचित्र प्रस्तुत करता है।
- भगत के गायन पर मुग्ध
- जिज्ञासु
- ईमानदार प्रेक्षक, जो अपनी शंका भी खुलकर लिखता है
वह कहता है कि वह शुरू से देर तक सोनेवाला है, फिर भी माघ की ठिठुरती भोर में भगत का संगीत उसे पोखरे तक ले गया। बेटे की मृत्यु पर वह “कुतूहलवश” उनके घर जाता है और एक बार सोचता है कि कहीं भगत पागल तो नहीं हो गए, पर फिर उसे उनका विश्वास समझ में आता है।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| रेखाचित्र शैली और चित्रात्मक वर्णन | पाठ भगत के रूप-रंग से शुरू होता है: लंगोटी, कनफटी टोपी, काली कमली, रामानंदी चंदन और तुलसी की जड़ों की बेडौल माला। रोपनी का दृश्य वर्तमान काल में लिखा गया है: “आसाढ़ की रिमझिम है। समूचा गाँव खेतों में उतर पड़ा है।” | छोटे-छोटे वाक्यों और वर्तमान काल के कारण पाठक को लगता है कि दृश्य उसकी आँखों के सामने घट रहा है। भगत का चित्र शब्दों से बनता चला जाता है, जो रेखाचित्र की मुख्य पहचान है। |
| ऋतु-चित्रण और प्रकृति का सजीव वर्णन | माघ की भोर का वर्णन: “अभी आसमान के तारों के दीपक बुझे नहीं थे।” पूरब में लोही की लालिमा, शुक्र तारा और खेत-बगीचे पर छाया कुहासा। | तारों को दीपक कहने वाली रूपक-भरी भाषा वातावरण को रहस्यमय और सुंदर बना देती है। हर ऋतु के साथ भगत के गायन का रूप बदलता है, जिससे उनकी संगीत-साधना की निरंतरता दिखती है। |
| विरोधाभास (गृहस्थ होकर साधु; शोक में उत्सव) | “बिलकुल गृहस्थ!” होते हुए भी भगत “साधु की सब परिभाषाओं में खरे उतरनेवाले” थे। बेटे की मृत्यु पर बहू रो रही है, पर भगत गाए जा रहे हैं। | यह विरोध पाठक को सोचने पर मजबूर करता है कि साधुता और शोक के बारे में समाज की धारणा कितनी सतही है। इससे भगत की असाधारणता उभरकर सामने आती है। |
| प्रतीकात्मक भाषा | भगत की अंतिम संध्या के गीत के लिए: “मालूम होता जैसे तागा टूट गया हो, माला का एक-एक दाना बिखरा हुआ।” भादो की रात का कबीर-पद: “तेरी गठरी में लागा चोर, मुसाफ़िर जाग ज़रा!” | टूटा तागा और बिखरी माला भगत के जीवन-सूत्र के टूटने का संकेत देते हैं, जिससे उनकी मृत्यु का पूर्वाभास होता है। ‘मुसाफ़िर जाग’ वाला पद संसार में सोए मनुष्य को जगाने का प्रतीक लगता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
बालगोबिन भगत साधु थे—साधु की सब परिभाषाओं में खरे उतरनेवाले।
लेखक (कथावाचक): भगत के गृहस्थ होने की बात बताने के तुरंत बाद लेखक यह कहता है।
यह पाठ का केंद्रीय कथन है। इससे स्पष्ट होता है कि साधुता का आधार आचरण और मानवीय गुण हैं, घर-परिवार छोड़ना नहीं।
वह गृहस्थ थे; लेकिन उनकी सब चीज़ ‘साहब’ की थी।
लेखक (कथावाचक): भगत की उपज को कबीरपंथी मठ में भेंट करने की आदत का परिचय देते हुए।
यह भगत की कबीर के प्रति समर्पण-भावना और अपरिग्रह को दिखाता है। वे अपनी कमाई को भी अपनी नहीं, ईश्वर की मानते थे।
बालगोबिन भगत का यह संगीत है या जादू!
लेखक (कथावाचक): आषाढ़ में धान की रोपनी के समय भगत के गायन का पूरे गाँव पर प्रभाव देखकर।
इससे भगत के गायन की शक्ति प्रकट होती है, जो बच्चों, औरतों, हलवाहों और रोपनी करने वालों सबको एक लय में बाँध देता है।
आत्मा परमात्मा के पास चली गई, विरहिनी अपने प्रेमी से जा मिली
भगत का विचार, लेखक के शब्दों में: बेटे की मृत्यु पर भगत रोती हुई बहू को रोने के बदले उत्सव मनाने को कहते हैं।
यहाँ विरहिनी आत्मा है और प्रेमी परमात्मा। यह कबीर के दर्शन पर भगत की अटूट आस्था दिखाता है, जिसके कारण वे मृत्यु को दुख नहीं, मिलन मानते हैं।
वह चरम विश्वास जो हमेशा ही मृत्यु पर विजयी होता आया है।
लेखक (कथावाचक): लेखक भगत को पागल समझने की अपनी शंका को दूर करते हुए।
इससे पता चलता है कि भगत का व्यवहार पागलपन नहीं, गहरी आस्था का परिणाम था। यह कथन मृत्यु पर आस्था की विजय का संदेश देता है।
तू जा, नहीं तो मैं ही इस घर को छोड़कर चल दूँगा
बालगोबिन भगत: बहू जब ससुर की सेवा के लिए घर में रहने की विनती करती है, तब भगत की आखिरी दलील।
यह भगत के अटल निर्णय और प्रगतिशील सोच का प्रमाण है। वे अपनी सुविधा छोड़कर युवा विधवा बहू के भविष्य को प्राथमिकता देते हैं।
अब बुढ़ापा आ गया था, किंतु टेक वही जवानीवाली।
लेखक (कथावाचक): बुढ़ापे में भी तीस कोस पैदल गंगा-स्नान जाने और रास्ते में कुछ न खाने के नियम के वर्णन में।
इसका आशय है कि शरीर बूढ़ा हो गया था, पर भगत का प्रण और नियम-पालन का दृढ़ संकल्प जवानी जैसा ही बना रहा।
मालूम होता जैसे तागा टूट गया हो, माला का एक-एक दाना बिखरा हुआ।
लेखक (कथावाचक): भगत की अंतिम संध्या के गीत का वर्णन, जिसके अगले दिन भोर में वे नहीं रहे।
यह उपमा भगत के कमज़ोर होते स्वर और टूटते जीवन-सूत्र को दिखाती है तथा उनकी मृत्यु का संकेत पहले ही दे देती है।
रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
सच्चा साधु: वेशभूषा से नहीं, आचरण से
मान लीजिए आपके मोहल्ले में दो लोग हैं। एक हमेशा धार्मिक वेश में रहता है, पर दुकानदारों से झूठ बोलकर उधार लेता है। दूसरा साधारण कपड़े पहनने वाला किसान है, जो सच बोलता है और बस में मिला किसी का बटुआ लौटा देता है।
बालगोबिन भगत के आधार पर बताइए कि इन दोनों में किसे 'साधु' कहना उचित होगा और क्यों।
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- पाठ का आधार: भगत गृहस्थ थे, फिर भी 'साधु की सब परिभाषाओं में खरे' उतरते थे।
- भगत के गुण: झूठ न बोलना, खरा व्यवहार, किसी की चीज़ न छूना।
- निष्कर्ष: बटुआ लौटाने वाला किसान साधु कहलाने योग्य है; वेश नहीं, आचरण कसौटी है।
Answer: बटुआ लौटाने वाला किसान साधु कहलाने योग्य है। भगत की तरह वह सच बोलता है और पराई चीज़ नहीं रखता। साधुता वेश से नहीं, ईमानदार आचरण से पहचानी जाती है।
Memory hook: चोला नहीं, चाल-चलन देखो: भगत की लंगोटी में भी साधु था।
सामाजिक रूढ़ियों पर प्रहार
कल्पना कीजिए कि आपके एक पड़ोसी परिवार में युवा बेटे की मृत्यु हो गई है। कुछ रिश्तेदार कहते हैं कि बहू को जीवनभर इसी घर में रहकर सास-ससुर की सेवा करनी चाहिए, पर घर के दादाजी कहते हैं कि बहू को नया जीवन शुरू करने का अधिकार है।
दादाजी के विचार की तुलना बालगोबिन भगत के निर्णय से कीजिए और बताइए कि किसकी सोच उचित है।
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- भगत ने बेटे की मृत्यु के बाद पतोहू को उसके भाई के साथ भेजा और दूसरी शादी कराने का आदेश दिया।
- पतोहू सेवा के लिए रुकना चाहती थी, पर भगत ने अपनी सुविधा से ऊपर उसका भविष्य रखा।
- दादाजी की सोच भगत जैसी है: रूढ़ि से ऊपर मनुष्य का हित।
Answer: दादाजी की सोच भगत जैसी है। भगत ने अपनी सेवा की चिंता छोड़कर पतोहू की दूसरी शादी का आदेश दिया था। बहू के नए जीवन का अधिकार मानना ही उचित है।
Memory hook: भगत का अटल निर्णय: बहू का भविष्य, अपनी सुविधा से बड़ा।
लोक संगीत और ग्रामीण सामूहिक जीवन
मान लीजिए आपकी कक्षा को विद्यालय का बगीचा साफ़ करने का काम मिला है। धूप तेज़ है और सब थके हुए हैं। तभी एक सहपाठी लोकगीत गाने लगता है, बाकी सब साथ दोहराने लगते हैं और काम तेज़ी से होने लगता है।
इस घटना की तुलना आसाढ़ में रोपनी के समय भगत के गीत के प्रभाव से कीजिए।
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- रोपनी के समय भगत के गीत से बच्चे झूम उठते, औरतें गुनगुनाने लगतीं।
- हलवाहों के पैर ताल से और रोपनी करने वालों की अँगुलियाँ क्रम से चलने लगतीं।
- दोनों जगह संगीत ने थकान घटाई और काम को सामूहिक उत्सव बना दिया।
Answer: जैसे भगत के गीत पर हलवाहों के पैर ताल से उठते और रोपनी लय में होने लगती, वैसे ही सहपाठी के गीत ने थकान भुलाकर सफ़ाई को सामूहिक उत्सव बना दिया।
Memory hook: गीत साथ हो तो रोपनी भी उत्सव, सफ़ाई भी उत्सव।
नियम-निष्ठा और स्वाभिमान
कल्पना कीजिए कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी के दौरान आपके मित्र का कैलकुलेटर और मोबाइल फ़ोन आपकी मेज़ पर रखा है। आपको जल्दी में उसकी ज़रूरत है और मित्र कमरे में नहीं है।
बालगोबिन भगत के नियम के आधार पर बताइए कि आपको क्या करना चाहिए और क्यों।
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- भगत किसी की चीज़ नहीं छूते थे, न बिना पूछे व्यवहार में लाते थे।
- वे इस नियम को इतनी बारीकी तक निभाते थे कि दूसरे के खेत में शौच के लिए भी नहीं बैठते थे।
- इसलिए मित्र से पूछकर ही चीज़ लेनी चाहिए; यह ईमानदारी और भरोसे का सवाल है।
Answer: मुझे मित्र के लौटने पर पूछकर ही उसकी चीज़ लेनी चाहिए। भगत बिना पूछे किसी की चीज़ व्यवहार में नहीं लाते थे। छोटी बात में भी ईमानदारी भरोसा बनाती है।
Memory hook: पूछे बिना न छुओ: भगत का छोटा नियम, बड़ा चरित्र।
Topics in this chapter
- बालगोबिन भगत का चरित्र-चित्रणComing soon
- बालगोबिन भगत पाठ का मूल भाव और संदेशComing soon
- बालगोबिन भगत प्रश्न-उत्तर (पाठ पर आधारित)Coming soon
- बेटे की मृत्यु पर भगत और सामाजिक रूढ़ियाँComing soon
- भगत का मधुर गायन और ऋतुओं का वर्णनComing soon
- बालगोबिन भगत: गृहस्थ होकर भी सच्चे साधु
How the board asks रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | पाठ का कोई अनुच्छेद (जैसे भगत की वेशभूषा, रोपनी का दृश्य, प्रभातियाँ या बेटे की मृत्यु) देकर पाँच MCQ पूछे जाते हैं: तथ्य, शब्द या पंक्ति का आशय, ऋतु का नाम, और कभी ‘अनुपयुक्त विकल्प’ चुनना। | पहले पूरा गद्यांश ध्यान से पढ़ें, फिर हर विकल्प को गद्यांश की पंक्ति से मिलाएँ। ‘अनुपयुक्त’ या ‘आशय नहीं है’ जैसे शब्दों पर विशेष ध्यान दें। कठिन शब्दों (कलेवा, लोही, पुरवाई, बोदा) के अर्थ पहले से याद रखें। |
| कथन-कारण प्रश्न | एक कथन (जैसे भगत गृहस्थ होते हुए भी साधु थे) और एक कारण दिया जाता है; पूछा जाता है कि दोनों सही हैं या नहीं और कारण कथन की सही व्याख्या करता है या नहीं। | कथन और कारण को अलग-अलग पाठ से जाँचें। फिर देखें कि कारण सचमुच कथन को समझाता है या नहीं। ध्यान रखें: भगत अपनी पारिवारिक भूमिका निभाते थे, इसलिए ‘परिवार न सँभालने’ जैसा कारण गलत होगा। |
| पंक्ति का आशय स्पष्ट करना (2 अंक, 25-30 शब्द) | पाठ की कोई पंक्ति देकर उसका आशय पूछा जाता है, जैसे ‘टेक वही जवानीवाली’ या ‘संगीत है या जादू’। | पंक्ति का संदर्भ एक वाक्य में बताएँ, फिर उसका सीधा अर्थ और भगत के चरित्र से उसका संबंध लिखें। उदाहरण पाठ से दें और 30 शब्द से आगे न जाएँ। |
| चरित्र-चित्रण / विशेषता सिद्ध करना (2 अंक) | ‘भगत सच्चे गृहस्थ भी थे, स्पष्ट कीजिए’ या ‘भगत किन गुणों के कारण साधु कहलाते थे’ जैसे प्रश्न। | दो-तीन गुण नाम से लिखें और हर गुण के साथ पाठ की एक घटना जोड़ें (जैसे खेती, बेटे-बहू की देखभाल, सच बोलना, उपज मठ में चढ़ाना)। केवल गुणों की सूची से पूरे अंक नहीं मिलते। |
| रूढ़ियों और प्रगतिशील सोच पर प्रश्न (2 अंक) | बेटे की मृत्यु पर भगत के व्यवहार को लेकर पूछा जाता है कि उन्होंने कौन-सी सामाजिक मान्यताएँ तोड़ीं या बहू से उनकी क्या अपेक्षा थी। | तीन बिंदु स्पष्ट लिखें: बहू से मुखाग्नि दिलवाना, रोने के बदले उत्सव मनाने को कहना, बहू के पुनर्विवाह का आदेश। अंत में एक वाक्य में बताएँ कि इससे उनकी कौन-सी सोच दिखती है। |
| मूल्यपरक / HOTS प्रश्न | ‘क्या साधु की पहचान पहनावे से होनी चाहिए?’ या ‘भगत का बहू को भेजना मोह था या प्रेम?’ जैसे विचार और मूल्यांकन वाले प्रश्न। | अपना स्पष्ट मत पहले वाक्य में लिखें, फिर पाठ से एक-दो प्रमाण दें और अंत में आज के जीवन से जोड़ें। तर्क पाठ पर ही टिका होना चाहिए। |
Tricks to remember रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
घटनाओं का क्रम: 'रूप-साधु-गीत-शोक-विदा-गंगा-अंत'
पाठ सात कदमों में चलता है: (1) रूप: लंगोटी, कनफटी टोपी, चंदन, तुलसी-माला; (2) साधु: गृहस्थ होकर भी साधु, उपज 'साहब' को; (3) गीत: ऋतुवार गायन; (4) शोक: बेटे की मृत्यु पर गाना; (5) विदा: पतोहू को भाई के साथ भेजना; (6) गंगा: तीस कोस पैदल यात्रा; (7) अंत: बीमारी में भी नेम-व्रत, भोर में मृत्यु।
Use it when: गद्यांश पढ़ते ही पहचान लें कि वह पाठ के किस हिस्से का है, ताकि उत्तर में सही संदर्भ लिखें।
ऋतुओं का गीत-कैलेंडर: 'रोपनी, रात, भोर, संझा'
आसाढ़ = रोपनी का गीत (खेत में); भादो = आधी रात का गीत ('गोदी में पियवा'); कातिक से फागुन = प्रभातियाँ (पोखरे के भिंडे पर), माघ की भोर में लेखक भी गया; गर्मी = 'संझा' (घर के आँगन में प्रेमी-मंडली के साथ)।
Use it when: ऋतु, समय और स्थान वाले बहुविकल्पी प्रश्नों में भ्रम से बचने के लिए।
दूरियों के अंक: '2-4-30'
2 मील = नदी-स्नान; 4 कोस = कबीरपंथी मठ ('साहब का दरबार'); 30 कोस = गंगा। छोटी दूरी रोज़ के स्नान की, मध्यम दूरी भक्ति की, सबसे बड़ी दूरी वार्षिक यात्रा की। उम्र: साठ से ऊपर।
Use it when: तथ्य वाले प्रश्नों में दूरी आपस में न बदल जाए।
पाँच विषय: 'सा-रू-क-लो-नि'
सा = साधुता आचरण से; रू = रूढ़ियों पर प्रहार (पतोहू से आग, दूसरी शादी); क = कबीर-भक्ति और मृत्यु पर आस्था; लो = लोक संगीत और सामूहिक जीवन; नि = नियम-निष्ठा और स्वाभिमान (संबल न लेना, भिक्षा न माँगना)।
Use it when: मूल भाव या संदेश वाले प्रश्न में कम से कम दो विषय जोड़कर उत्तर को पूरा बनाने के लिए।
रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: गर्मियों की 'संझा' और प्रेमी-मंडली
गर्मियों में उनकी ‘संझा’ कितनी उमसभरी शाम को न शीतल करती! अपने घर के आँगन में आसन जमा बैठते। गाँव के उनके कुछ प्रेमी भी जुट जाते। खँजड़ियों और करतालों की भरमार हो जाती। एक पद बालगोबिन भगत कह जाते, उनकी प्रेमी-मंडली उसे दुहराती, तिहराती।
(1) · 1 mark · MCQ
गर्मियों में भगत की 'संझा' का उमसभरी शाम पर क्या प्रभाव पड़ता था?
(क) शाम और अधिक गर्म लगने लगती थी
(ख) उमसभरी शाम भी शीतल लगने लगती थी
(ग) लोग गायन छोड़कर घर लौट जाते थे
(घ) पूरे गाँव में सन्नाटा छा जाता था(2) · 1 mark · MCQ
गद्यांश में 'प्रेमी-मंडली' से क्या आशय है?
(क) भगत के परिवार के सदस्य
(ख) गाँव के वे लोग जो भगत के गायन में साथ देते थे
(ग) कबीरपंथी मठ के साधु
(घ) दूसरे गाँव से आए पेशेवर गायक(3) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: आगे लेखक बताते हैं कि स्वर एक निश्चित ताल और गति से ऊँचा होता जाता और श्रोताओं के मन भी ऊपर उठने लगते।) 'धीरे-धीरे मन तन पर हावी हो जाता' — इस पंक्ति का आशय है:
(क) श्रोता थककर वहीं सो जाते थे
(ख) श्रोता शरीर की थकान और उमस भूलकर मन से संगीत में डूब जाते थे
(ग) श्रोताओं का मन संगीत से ऊब जाता था
(घ) श्रोता शरीर से कमज़ोर हो जाते थे(4) · 1 mark · MCQ
भगत की 'संझा' की कौन-सी विशेषता गद्यांश में नहीं बताई गई है?
(क) भगत अपने घर के आँगन में आसन जमाकर बैठते थे
(ख) मंडली पद को दुहराती-तिहराती थी
(ग) खँजड़ियों और करतालों की भरमार होती थी
(घ) गायन गाँव के मंदिर के मंच पर होता था(5) · 1 mark · MCQ
गद्यांश के आधार पर भगत के संगीत के बारे में कौन-सा निष्कर्ष सबसे उपयुक्त है?
(क) यह केवल उनका निजी शौक था, जिसमें कोई शामिल नहीं होता था
(ख) यह गाँव के लोगों को एक साथ जोड़कर सामूहिक आनंद देता था
(ग) वे लोगों से पैसे लेकर गाते थे
(घ) यह केवल बच्चों के मनोरंजन के लिए था
Show the answersAnswers
- (ख) उमसभरी शाम भी शीतल लगने लगती थी
- (ख) गाँव के वे लोग जो भगत के गायन में साथ देते थे
- (ख) श्रोता शरीर की थकान और उमस भूलकर मन से संगीत में डूब जाते थे
- (घ) गायन गाँव के मंदिर के मंच पर होता था
- (ख) यह गाँव के लोगों को एक साथ जोड़कर सामूहिक आनंद देता था
Extract 2: पतोहू की विदाई और भगत का अटल निर्णय
इधर पतोहू रो-रोकर कहती—मैं चली जाऊँगी तो बुढ़ापे में कौन आपके लिए भोजन बनाएगा, बीमार पड़े, तो कौन एक चुल्लू पानी भी देगा? मैं पैर पड़ती हूँ, मुझे अपने चरणों से अलग नहीं कीजिए! लेकिन भगत का निर्णय अटल था।
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: बेटे की मृत्यु के बाद भगत ने उसका क्रिया-कर्म बिना किसी आडंबर के किया था और चिता को आग पतोहू से दिलवाई थी।) बेटे के क्रिया-कर्म के बारे में कौन-सा कथन गद्यांश के अनुसार सही है?
(क) भगत ने क्रिया-कर्म बहुत धूमधाम से किया
(ख) भगत ने तूल नहीं किया और पतोहू से ही आग दिलाई
(ग) पतोहू के भाई ने चिता को आग दी
(घ) भगत ने स्वयं चिता को आग दी(2) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: श्राद्ध की अवधि पूरी होते ही भगत ने पतोहू के भाई को बुलाकर उसे उसके साथ भेजने का निश्चय किया।) श्राद्ध की अवधि पूरी होने पर भगत ने पतोहू के भाई को क्या आदेश दिया?
(क) इसे कुछ दिन बाद वापस भेज देना
(ख) इसकी दूसरी शादी कर देना
(ग) इसे कबीरपंथी मठ में भेज देना
(घ) इसे खेतीबारी सौंप देना(3) · 1 mark · Assertion-reason
निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प चुनिए:
कथन (A): पतोहू भगत को छोड़कर मायके नहीं जाना चाहती थी।
कारण (R): उसे चिंता थी कि बुढ़ापे और बीमारी में भगत को भोजन-पानी कौन देगा।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।(4) · 1 mark · MCQ
'मुझे अपने चरणों से अलग नहीं कीजिए!' — पतोहू के इस कथन से उसका कौन-सा भाव प्रकट होता है?
(क) भगत से डर
(ख) ससुर के प्रति श्रद्धा और सेवा-भाव
(ग) भगत पर क्रोध
(घ) घर-संपत्ति का लालच(5) · 1 mark · MCQ
'लेकिन भगत का निर्णय अटल था' — इससे भगत के चरित्र की कौन-सी विशेषता सबसे स्पष्ट होती है?
(क) निर्दयता और कठोरता
(ख) दृढ़ता और रूढ़ियों से ऊपर उठी प्रगतिशील सोच
(ग) स्वार्थ और अकेले रहने की इच्छा
(घ) अनिर्णय और उलझन
Show the answersAnswers
- (ख) भगत ने तूल नहीं किया और पतोहू से ही आग दिलाई
- (ख) इसकी दूसरी शादी कर देना
- (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।
- (ख) ससुर के प्रति श्रद्धा और सेवा-भाव
- (ख) दृढ़ता और रूढ़ियों से ऊपर उठी प्रगतिशील सोच
रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: खेत की उपज और कबीर-भक्ति · 2 marks · Short answerBoard level
बालगोबिन भगत अपने खेत की उपज के साथ क्या करते थे? इससे उनके किस गुण का पता चलता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- उपज सिर पर लादकर चार कोस दूर कबीरपंथी मठ ('साहब के दरबार') में भेंट रूप में ले जाते थे।
- प्रसाद रूप में जो मिलता, उसी से घर का गुज़ारा चलाते थे।
- गुण: अनासक्ति, त्याग और कबीर के प्रति गहरी श्रद्धा।
Answer: भगत खेत की उपज चार कोस दूर कबीरपंथी मठ में भेंट चढ़ाते थे। प्रसाद रूप में जो मिलता, उसी से गुज़ारा करते। इससे उनकी अनासक्ति और कबीर-भक्ति झलकती है।
Example 2: 'किसी की चीज़ नहीं छूते' का नियम · 2 marks · Short answerHarder board level
भगत 'किसी की चीज़ नहीं छूते' थे। इस नियम को वे कितनी बारीकी तक निभाते थे और इससे उनके चरित्र के बारे में क्या पता चलता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- बिना पूछे किसी की चीज़ व्यवहार में नहीं लाते थे।
- बारीकी: दूसरे के खेत में शौच के लिए भी नहीं बैठते थे, जिससे लोगों को कुतूहल होता।
- चरित्र: ईमानदारी, खरा व्यवहार, कठोर नियम-निष्ठा।
Answer: भगत बिना पूछे किसी की चीज़ काम में नहीं लाते थे; दूसरे के खेत में शौच के लिए भी नहीं बैठते थे। यह उनकी ईमानदारी और कठोर नियम-निष्ठा दिखाता है।
Example 3: संगीत 'जाग रहा है, जगा रहा है' · 2 marks · Short answerHarder board level
'बालगोबिन भगत का संगीत जाग रहा है, जगा रहा है!' — भादो की रात के प्रसंग के आधार पर आशय स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रसंग: भादो की अँधेरी आधी रात, मूसलधार वर्षा के बाद सारा संसार निस्तब्धता में सोया है।
- भगत तब भी खँजड़ी बजाकर गा रहे हैं: संगीत 'जाग रहा है'।
- 'मुसाफ़िर जाग ज़रा' जैसे पद सोए मनुष्य को सजग होने का संदेश देते हैं: संगीत 'जगा रहा है' (व्याख्या)।
Answer: भादो की आधी रात में जब सारा संसार सन्नाटे में सोया होता, तब भगत गाते रहते। उनका गीत 'मुसाफ़िर जाग ज़रा' कहकर सोए मनुष्य को सजग होने का संदेश देता।
Example 4: सुस्त और बोदे बेटे से अधिक प्रेम · 2 marks · Short answerHarder board level
भगत अपने सुस्त और बोदे-से इकलौते बेटे को और भी अधिक क्यों मानते थे? इससे उनकी कौन-सी सोच प्रकट होती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- बेटा इकलौता था, पर कुछ सुस्त और बोदा-सा था।
- भगत की समझ: ऐसे लोग निगरानी और मुहब्बत के ज़्यादा हकदार होते हैं।
- इसलिए उसे और अधिक प्यार करते; यह उनकी गहरी मानवीय संवेदना दिखाता है।
Answer: भगत मानते थे कि सुस्त-बोदे लोग निगरानी और मुहब्बत के ज़्यादा हकदार होते हैं। इसलिए वे बेटे को और भी प्यार करते थे। यह उनकी गहरी मानवीय संवेदना दिखाता है।
Example 5: पागलपन या आस्था? · 2 marks · Short answerHOTS / competency
बेटे की मृत्यु पर भगत को गाते देखकर लेखक कभी-कभी सोचता कि यह पागल तो नहीं हो गए। क्या आप इस संदेह से सहमत हैं? तर्क सहित लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- स्पष्ट मत: सहमत नहीं।
- भगत शव के सामने गा रहे थे और पतोहू से रोने के बदले उत्सव मनाने को कह रहे थे।
- कारण: विश्वास कि आत्मा परमात्मा के पास चली गई; लेखक स्वयं कहता है कि उनमें 'चरम विश्वास' बोल रहा था।
Answer: मैं सहमत नहीं हूँ। भगत का गाना और उत्सव मनाने को कहना उनके चरम विश्वास से उपजा था कि आत्मा परमात्मा से मिल गई। यह पागलपन नहीं, आस्था थी।
Example 6: यदि भगत पतोहू को घर रख लेते · 2 marks · Short answerHOTS / competency
कल्पना कीजिए कि भगत पतोहू की विनती मानकर उसे अपने पास रख लेते। तब पतोहू का जीवन कैसा होता? भगत के निर्णय का औचित्य स्पष्ट कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- संभावित परिणाम: युवा पतोहू जीवनभर विधवा बनकर ससुर की सेवा में बँधी रहती।
- भगत ने अपने बुढ़ापे की सुविधा से ऊपर पतोहू के भविष्य को रखा।
- दूसरी शादी का आदेश देकर विधवा-जीवन की रूढ़ि तोड़ी; निर्णय उचित और प्रगतिशील।
Answer: तब पतोहू जीवनभर विधवा बनकर ससुर की सेवा में बँधी रहती। भगत ने अपने बुढ़ापे के सुख से ऊपर उसका भविष्य रखा और दूसरी शादी का आदेश देकर रूढ़ि तोड़ी।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
बेटे की मृत्यु के बाद पतोहू की दूसरी शादी का आदेश देकर बालगोबिन भगत ने किस सोच का परिचय दिया? (25-30 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रसंग सही लिखना: श्राद्ध के बाद पतोहू को उसके भाई के साथ भेजा और उसकी दूसरी शादी करने का आदेश दिया; पतोहू के रोने पर भी निर्णय अटल रहा। | 1 |
| सोच की व्याख्या: विधवा-जीवन की रूढ़ि का विरोध, अपने बुढ़ापे की सुविधा से ऊपर पतोहू के भविष्य को रखना, प्रगतिशील और मानवीय दृष्टि। | 1 |
पठित गद्यांश (बालगोबिन भगत) पर आधारित पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, जिनमें एक कथन-कारण प्रश्न शामिल है (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रश्न 1: तथ्य पर आधारित सही विकल्प (जैसे किसने, कहाँ, कब) | 1 |
| प्रश्न 2: शब्द या पद का अर्थ/आशय पहचानना | 1 |
| प्रश्न 3: कथन-कारण: दोनों की सत्यता और कारण द्वारा कथन की व्याख्या जाँचकर सही विकल्प | 1 |
| प्रश्न 4: पात्र के भाव या चरित्र की विशेषता का अनुमान | 1 |
| प्रश्न 5: गद्यांश का निष्कर्ष या 'अनुपयुक्त विकल्प' पहचानना | 1 |
Where students lose marks in रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: भगत की साधुता को उनकी वेशभूषा से जोड़ देना
पाठ स्पष्ट कहता है कि 'ऊपर की तसवीर' से उन्हें साधु न माना जाए; साधुता का आधार उनका आचरण है।
Wrong working
भगत साधु थे क्योंकि वे कनफटी टोपी पहनते और माथे पर रामानंदी चंदन लगाते थे।
Right working
भगत गृहस्थ होकर भी साधु थे, क्योंकि वे सच बोलते, खरा व्यवहार रखते, किसी की चीज़ नहीं छूते और सब कुछ 'साहब' को अर्पित करते थे।
Do this: साधु वाले प्रश्न में हमेशा आचरण के कम से कम दो गुण लिखें; वेशभूषा केवल वर्णन वाले प्रश्न में।
Usually costs: 2 अंक के प्रश्न में पूरे 2 अंक तक
Mistake: मुखाग्नि देने वाले व्यक्ति को गलत बताना
पाठ में साफ़ लिखा है कि भगत ने पतोहू से ही आग दिलाई; यही रूढ़ि-विरोध का प्रमाण है।
Wrong working
बेटे की मृत्यु पर भगत ने स्वयं चिता को आग दी और फिर पतोहू को मायके भेज दिया।
Right working
भगत ने बेटे के क्रिया-कर्म में तूल नहीं किया और पतोहू से ही आग दिलाई, जो उस समय की परंपरा के विरुद्ध था।
Do this: रूढ़ि वाले उत्तर में दोनों प्रसंग लिखें: पतोहू से आग दिलाना और उसकी दूसरी शादी का आदेश।
Usually costs: तथ्य गलत होने पर 1 से 2 अंक
Mistake: दूरियों और ऋतुओं को आपस में मिला देना
नदी दो मील, मठ चार कोस, गंगा तीस कोस; प्रभातियाँ कातिक से फागुन तक। अंक बदलते ही बहुविकल्पी उत्तर गलत हो जाता है।
Wrong working
भगत रोज़ दो मील दूर गंगा नहाने जाते थे और प्रभातियाँ आसाढ़ से शुरू होती थीं।
Right working
भगत प्रभातियों के दिनों में दो मील दूर नदी-स्नान को जाते थे; गंगा तीस कोस दूर थी। प्रभातियाँ कातिक से फागुन तक चलती थीं।
Do this: '2-4-30' और 'कातिक से फागुन' याद रखें; विकल्प चुनने से पहले गद्यांश में अंक दोबारा देखें।
Usually costs: हर गलत बहुविकल्पी पर 1 अंक
Mistake: पंक्ति का आशय पूछने पर पूरा प्रसंग दोहरा देना
आशय वाले प्रश्न में अंक भाव समझाने पर मिलते हैं, कहानी सुनाने पर नहीं।
Wrong working
'बालगोबिन भगत का यह संगीत है या जादू!' — आसाढ़ में गाँव खेतों में था, बादल थे, पुरवाई चल रही थी, औरतें कलेवा लेकर बैठी थीं...
Right working
आशय: भगत का गीत इतना मोहक था कि बच्चे झूम उठते, औरतें गुनगुनाने लगतीं और काम करने वालों की गति ताल में बँध जाती; इसलिए वह जादू-सा लगता था।
Do this: एक वाक्य में प्रसंग, फिर सीधे 'आशय यह है कि...' लिखें और एक प्रमाण दें।
Usually costs: 2 अंक के प्रश्न में 1 अंक
Mistake: 25-30 शब्दों की सीमा को अनदेखा करके लंबा उत्तर लिखना
लंबे उत्तर में मुख्य बिंदु दब जाते हैं और बाकी प्रश्नों का समय कटता है।
Wrong working
भगत बहुत अच्छे इंसान थे, वे गाते थे, खेती करते थे, उनका बेटा था, बहू थी, वे गंगा जाते थे, कबीर को मानते थे... (60-70 शब्द, बिना केंद्र के)
Right working
भगत ने बेटे की मृत्यु पर शोक के बदले गीत गाए और पतोहू से उत्सव मनाने को कहा, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि आत्मा परमात्मा से मिल गई है।
Do this: दो उत्तर-बिंदु तय करें, हर बिंदु एक वाक्य में लिखें, फिर शब्द गिन लें।
Usually costs: विषयवस्तु बिखरने पर 1 अंक तक
रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत: previous year questions
- Course A: Asked in 8 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 1.9 marks per paper; 8 questions in all, counting OR alternatives. In 3 of 4 sample papers.
- Course B: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).
Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.
Solved board questions from रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत
Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.
2025 Course A, set 3/1/1, Q7 · 5 marks · Reading comprehensionCompetency-based
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों का सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : 5×1=5
ऊपर की तसवीर से यह नहीं माना जाए कि बालगोबिन भगत साधु थे। नहीं, बिलकुल गृहस्थ ! उनकी गृहिणी की तो मुझे याद नहीं, उनके बेटे और पतोहू को तो मैंने देखा था। थोड़ी खेती-बारी भी थी, एक अच्छा साफ़-सुथरा मकान भी था।
किंतु, खेती-बारी करते, परिवार रखते भी, बालगोबिन भगत साधु थे — साधु की सब परिभाषाओं में खरे उतरने वाले। कबीर को 'साहब' मानते थे, उन्हीं के गीतों को गाते, उन्हीं के आदेशों पर चलते। कभी झूठ नहीं बोलते, खरा व्यवहार रखते। किसी से भी दो-टूक बात करने में संकोच नहीं करते, न किसी से खामखाह झगड़ा मोल लेते। किसी की चीज़ नहीं छूते, न बिना पूछे व्यवहार में लाते। इस नियम को कभी-कभी इतनी बारीकी तक ले जाते कि लोगों को कुतूहल होता ! — कभी वह दूसरे के खेत में शौच के लिए भी नहीं बैठते ! वह गृहस्थ थे; लेकिन उनकी सब चीज़ 'साहब' की थी। जो कुछ खेत में पैदा होता, सिर पर लादकर पहले उसे साहब के दरबार में ले जाते — जो उनके घर से चार कोस दूरी पर था — एक कबीरपंथी मठ से मतलब ! वह दरबार में 'भेंट' रूप रख लिया जाकर 'प्रसाद' रूप में जो उन्हें मिलता, उसे घर लाते और उसी से गुजर चलाते !
- (i)1 mark
लेखक के अनुसार बालगोबिन भगत 'बिलकुल गृहस्थ' कैसे थे ?
I. उनके पास खेती-बारी थी।
II. उनका एक अच्छा और साफ़-सुथरा मकान था।
III. उनके परिवार में बेटे और बहू के साथ-साथ उनकी गृहिणी भी मौजूद थी।
IV. वे एक पारिवारिक व्यक्ति थे।- (A)I, II और III
- (B)II, III और IV
- (C)III, IV और I
- (D)I, II और IV
- (ii)1 mark
कथन और कारण को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए :
कथन : गृहस्थ होते हुए भी बालगोबिन भगत साधु थे।
कारण : क्योंकि वे अपनी पारिवारिक भूमिका नहीं निभाते थे।- (A)कथन सही है, परंतु कारण ग़लत है।
- (B)कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
- (C)कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (D)कथन और कारण दोनों सही हैं, परंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
- (iii)1 mark
बालगोबिन भगत कबीर को 'साहब' मानते थे – पंक्ति का आशय है :
- (A)बालगोबिन भगत कबीर को बड़ा संत मानते थे।
- (B)बालगोबिन भगत कबीर को ईश्वर-तुल्य मानते थे।
- (C)बालगोबिन भगत कबीर को पिता-तुल्य मानते थे।
- (D)बालगोबिन भगत कबीर को समाज-सुधारक मानते थे।
- (iv)1 mark
गद्यांश में वर्णित उदाहरणों में से किस उदाहरण को हम सबसे बड़ा प्रमाण बता सकते हैं, जिससे यह साबित हो कि बालगोबिन भगत कबीर को सबसे अधिक मानते थे ?
- (A)सुबह-शाम, खेती-किसानी के समय भी कबीर के पदों को गाते रहना।
- (B)कभी झूठ न बोलना और सबसे खरा व्यवहार करना।
- (C)दूसरे के खेत में निवृत्त होने के लिए भी न जाना और सबसे दो-टूक व्यवहार करना।
- (D)अपनी पूरी फ़सल को कबीर-दरबार में चढ़ाना और प्रसाद स्वरूप जो मिले उसे स्वयं के लिए लाना।
- (v)1 mark
अनुच्छेद में भगत के विषय में जो जानकारियाँ हैं, उस आधार पर वे हैं :
I. सत्यवादी
II. स्पष्टतावादी
III. सच्चे भक्त- (A)I, II और III तीनों
- (B)केवल III
- (C)केवल I और III
- (D)केवल II और III
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- 1 mark
(i) गद्यांश में खेती-बारी, साफ़-सुथरा मकान और बेटे-पतोहू का उल्लेख है, पर गृहिणी की उन्हें याद नहीं है। इसलिए कथन III ग़लत है और उत्तर (D) I, II और IV है।
- 1 mark
(ii) गृहस्थ होते हुए भी वे साधु थे, इसलिए कथन सही है। पर कारण ग़लत है, क्योंकि साधुता उनके आचरण और कबीर-भक्ति के कारण थी, पारिवारिक भूमिका न निभाने के कारण नहीं। उत्तर (A)।
- 1 mark
(iii) 'साहब' मानने का आशय है कि वे कबीर को ईश्वर के समान मानते थे। उत्तर (B)।
- 1 mark
(iv) सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि वे पूरी फ़सल पहले कबीर के दरबार में भेंट चढ़ाते थे और प्रसाद रूप में जो मिलता, उसी से गुज़ारा करते थे। उत्तर (D)।
- 1 mark
(v) वे कभी झूठ नहीं बोलते थे (सत्यवादी), दो-टूक बात करते थे (स्पष्टवादी) और कबीर के सच्चे भक्त थे। अतः I, II और III तीनों, उत्तर (A)।
Answer: (i) D; (ii) A; (iii) B; (iv) D; (v) A
Where the marks are
- (i) D (1 अंक)
- (ii) A (1 अंक)
- (iii) B (1 अंक)
- (iv) D (1 अंक)
- (v) A (1 अंक)
2025 Course A, set 3/6/1, Q8 · 6 marks · Short answer
निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए : 3 × 2 = 6
- (क)2 marks
'बालगोबिन भगत एक सच्चे गृहस्थ भी थे ।' स्पष्ट कीजिए।
- (ख)2 marks
"ई काशी छोड़कर कहाँ जाएँ" बिस्मिल्ला खाँ के मन में काशी के प्रति विशेष अनुराग के क्या कारण थे ?
- (ग)2 marks
'संस्कृति' पाठ के आधार पर संस्कृति और असंस्कृति में अंतर बताइए।
- (घ)2 marks
'एक कहानी यह भी' की लेखिका के जीवन पर उनकी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल का क्या प्रभाव पड़ा ?
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- 1 mark
(क) बालगोबिन भगत खेतीबाड़ी करते थे और बहू-बेटे वाले परिवार के साथ साफ़-सुथरे मकान में रहते थे।
- 1 mark
वे गंगा-स्नान जाते समय किसी से भिक्षा नहीं लेते थे, अपनी उपज से निर्वाह करते थे; इसलिए सच्चे गृहस्थ थे।
- 1 mark
(ख) काशी से उनके पूर्वजों का संबंध था और बचपन से जुड़ाव था; वहीं रहकर उन्होंने सुर-साधना की।
- 1 mark
काशी में रहकर ही शहनाई-वादन से विश्व में प्रसिद्ध हुए; गंगा मइया, बालाजी, बाबा विश्वनाथ और काशी की परंपराओं से लगाव था।
- 1 mark
(ग) संस्कृति कल्याणकारी होती है, वह मानव-कल्याण की भावना पर टिकी है।
- 1 mark
असंस्कृति अकल्याणकारी, विध्वंसात्मक और आत्म-विनाशक होती है।
- 1 mark
(घ) शीला अग्रवाल ने साहित्य की समझ और रुचि बढ़ाई तथा चुनकर पढ़ने की प्रेरणा दी।
- 1 mark
उन्होंने देशप्रेम को दिशा दी और लेखिका को आज़ादी के आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
Answer: किन्हीं तीन उपभागों के उत्तर ऊपर दिए गए हैं।
Where the marks are
- प्रत्येक उपभाग के दो उपयुक्त बिंदु (1+1=2 अंक), किन्हीं तीन उपभागों के (कुल 6 अंक)
2023 Course A, set 3/4/1, Q8 · 2 marks · MCQ
गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित दो बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए - (2×1=2)
- (i)1 mark
किस घटना के आधार पर कहा जा सकता है कि बालगोबिन भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे?
- (a)जवान बेटे की मृत्यु पर पद गा रहे थे
- (b)हर वर्ष गंगा स्नान के लिए जाते
- (c)अपनी खेती-बाड़ी स्वयं करते
- (d)बेटे का क्रिया-कर्म बहू से करवाया
- (ii)1 mark
शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी क्यों हैं?
- (a)डुमराँव में उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ का जन्म हुआ
- (b)इनके परदादा उस्ताद सलार हुसैन ख़ाँ डुमराँव निवासी थे
- (c)रीड की नरकट डुमराँव में सोन नदी-किनारे पाई जाती है
- (d)बिहार के संगीत प्रेमी परिवार डुमराँव में रहते थे
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- 1 mark
(i) बालगोबिन भगत ने बेटे का क्रिया-कर्म बहू से करवाया, जो प्रचलित मान्यता के विरुद्ध था। उत्तर: (d)
- 1 mark
(ii) शहनाई की रीड नरकट से बनती है, जो डुमराँव में सोन नदी के किनारे मिलती है। उत्तर: (c)
Answer: (i) d; (ii) c
Where the marks are
- (i) d (1 अंक)
- (ii) c (1 अंक)
Every रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत question, by year
Course A (11 questions, sample papers included)
- For 2027
Sample paper 2026-27: Q8 (6 marks, solved)
- For 2026
Sample paper 2025-26: Q7 (5 marks, solved)
Course B (0 questions, sample papers included)
Practice questions on रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerBoard level
बालगोबिन भगत के मस्तक के चंदन और गले की माला का वर्णन कीजिए।
Hint
चंदन कहाँ से शुरू होता था और किसकी तरह? माला किस चीज़ की थी?
Answer
उत्तर-बिंदु: मस्तक पर चमकता रामानंदी चंदन; नाक के एक छोर से औरतों के टीके की तरह शुरू; गले में तुलसी की जड़ों की बेडौल माला।
आदर्श उत्तर: भगत के मस्तक पर हमेशा चमकता रामानंदी चंदन रहता, जो नाक के एक छोर से औरतों के टीके की तरह शुरू होता। गले में तुलसी की जड़ों की बेडौल माला बँधी रहती।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
आसाढ़ की रिमझिम में रोपनी करते समय भगत किस रूप में दिखाई देते हैं?
Hint
उनका शरीर, उनकी अँगुलियाँ और उनका कंठ — तीनों क्या कर रहे थे?
Answer
उत्तर-बिंदु: समूचा शरीर कीचड़ में लिथड़ा; अपने खेत में रोपनी; अँगुली धान का एक-एक पौधा पंक्तिबद्ध बिठाती; साथ में मधुर गायन।
आदर्श उत्तर: कीचड़ में लिथड़े शरीर के साथ भगत अपने खेत में रोपनी कर रहे थे। उनकी अँगुलियाँ धान के पौधे पंक्तिबद्ध बिठा रही थीं और कंठ से मधुर गीत निकल रहा था।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
'तारे की छाँव में भी उनके मस्तक के श्रमबिंदु, जब-तब, चमक ही पड़ते।' — माघ की भोर के प्रसंग के आधार पर आशय स्पष्ट कीजिए।
Hint
लेखक की हालत और भगत की हालत की तुलना कीजिए।
Answer
उत्तर-बिंदु: माघ की दाँत किटकिटाने वाली भोर; लेखक जाड़े से काँप रहा था; भगत गायन में इतने मस्त-उत्तेजित कि माथे पर पसीना; संगीत-साधना की तल्लीनता और श्रम।
आदर्श उत्तर: माघ की कड़कती ठंड में लेखक काँप रहा था, पर भगत गायन में इतने मस्त और उत्तेजित थे कि उनके माथे पर पसीना चमक उठता। यह उनकी गहरी तल्लीनता दिखाता है।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
गंगा-स्नान की यात्रा में भगत रास्ते का भोजन (संबल) क्यों नहीं लेते थे और भिक्षा भी क्यों नहीं माँगते थे?
Hint
पाठ में 'साधु' और 'गृहस्थ' के बारे में दो प्रश्न पूछे गए हैं।
Answer
उत्तर-बिंदु: साधु को संबल लेने का हक नहीं; गृहस्थ किसी से भिक्षा क्यों माँगे; घर से खाकर चलते, लौटकर घर पर ही खाते; चार-पाँच दिन के उपवास में भी मस्ती; स्वाभिमान और नियम-निष्ठा।
आदर्श उत्तर: भगत मानते थे कि साधु को संबल लेने का हक नहीं और गृहस्थ भिक्षा क्यों माँगे। इसलिए घर से खाकर चलते और लौटकर ही खाते। यह उनका स्वाभिमान दर्शाता है।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level
लेखक ने कहा है कि बालगोबिन भगत की मौत 'उन्हीं के अनुरूप' हुई। पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Hint
बीमारी में भी उन्होंने कौन-से नियम नहीं छोड़े और अंतिम दिन क्या किया?
Answer
उत्तर-बिंदु: गंगा-स्नान से लौटकर तबीयत सुस्त, बुखार; फिर भी दोनों जून गीत, स्नान-ध्यान, खेतीबारी नहीं छोड़ी; लोगों की सलाह हँसकर टाली; अंतिम संध्या तक गीत गाए; भोर में गीत न सुनाई देने पर मृत्यु का पता चला।
आदर्श उत्तर: बीमार होकर भी भगत ने नेम-व्रत नहीं छोड़ा; दोनों जून गाते और खेतीबारी देखते रहे। अंतिम संध्या तक गीत गाए। भोर में गीत न सुनाई देने पर उनकी मृत्यु का पता चला।
Q6 · 2 marks · Short answerHarder board level
'मालूम होता जैसे तागा टूट गया हो, माला का एक-एक दाना बिखरा हुआ।' — इस उपमा के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?
Hint
भगत के गीत में पहले कैसा क्रम और लय थी? अंतिम संध्या में क्या बदला?
Answer
उत्तर-बिंदु: अंतिम संध्या के गीत में पहले जैसी लय और निरंतरता नहीं रही; स्वर बिखरे-से; शारीरिक शक्ति क्षीण; आने वाली मृत्यु का संकेत (व्याख्या)।
आदर्श उत्तर: अंतिम संध्या में भगत के गीत की लय टूटी-सी थी, जैसे तागा टूटने पर माला के दाने बिखर जाते हैं। इससे उनकी घटती शक्ति और निकट आती मृत्यु का संकेत मिलता है।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपका एक सहपाठी कहता है, 'साधु वही है जो घर छोड़कर भगवा वस्त्र पहनता है।' बालगोबिन भगत के उदाहरण से आप उसे कैसे उत्तर देंगे?
Hint
भगत गृहस्थ थे, फिर भी लेखक उन्हें किस आधार पर साधु कहता है?
Answer
उत्तर-बिंदु: भगत गृहस्थ थे, खेतीबारी और परिवार रखते थे; फिर भी सच बोलना, खरा व्यवहार, किसी की चीज़ न छूना, सब कुछ 'साहब' को अर्पित करना; साधुता आचरण से, वेश से नहीं।
आदर्श उत्तर: मैं कहूँगा कि भगत गृहस्थ होकर भी साधु थे। वे झूठ नहीं बोलते, खरा व्यवहार रखते और किसी की चीज़ नहीं छूते थे। साधुता वेश से नहीं, आचरण से पहचानी जाती है।
Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
रोपनी के प्रसंग के आधार पर बताइए कि भगत के संगीत ने खेत के कठिन काम को बोझ क्यों नहीं रहने दिया। अपने जीवन से ऐसा एक उदाहरण भी जोड़िए।
Hint
बच्चे, औरतें, हलवाहे और रोपनी करने वाले — गीत सुनकर हर एक पर क्या असर हुआ?
Answer
उत्तर-बिंदु: बच्चे झूम उठते, औरतें गुनगुनाने लगतीं, हलवाहों के पैर ताल से उठते, रोपनी करने वालों की अँगुलियाँ लय में चलतीं; काम उत्सव-सा बन गया; अपने जीवन का उदाहरण, जैसे मिलकर सफ़ाई करते समय गीत गाना।
आदर्श उत्तर: भगत के गीत पर हलवाहों के पैर ताल से उठते और रोपनी लय में होती; काम उत्सव बन जाता। विद्यालय की सफ़ाई में गीत गाने से थकान घटती है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.भगत कबीर को किस नाम से पुकारते थे और उनका 'दरबार' क्या था?Show answer
वे कबीर को 'साहब' मानते थे; 'साहब का दरबार' घर से चार कोस दूर एक कबीरपंथी मठ था।
2.भगत की प्रभातियाँ कब से कब तक चलती थीं और वे कहाँ बैठकर गाते थे?Show answer
कातिक से फागुन तक; नदी-स्नान के बाद गाँव के बाहर पोखरे के ऊँचे भिंडे पर खँजड़ी लेकर।
3.भादो की आधी रात में भगत कौन-सा पद गा रहे थे?Show answer
'गोदी में पियवा, चमक उठे सखिया, चिहुँक उठे ना!'
4.बेटे का शव भगत ने किस प्रकार रखा था?Show answer
आँगन में चटाई पर लिटाकर सफ़ेद कपड़े से ढका, ऊपर फूल और तुलसीदल बिखेरे, सिरहाने चिराग जलाया।
5.भगत ने पतोहू को साथ भेजने के लिए किसे बुलाया और क्या आदेश दिया?Show answer
पतोहू के भाई को; आदेश दिया कि इसकी दूसरी शादी कर देना।
6.पतोहू के न जाने पर भगत की 'आखिरी दलील' क्या थी?Show answer
'तू जा, नहीं तो मैं ही इस घर को छोड़कर चल दूँगा।'
7.भगत गंगा-स्नान में किस बात पर अधिक आस्था रखते थे?Show answer
स्नान से अधिक संत-समागम और लोक-दर्शन पर।
8.लेखक को भगत की मृत्यु का पता कैसे चला?Show answer
भोर में लोगों ने उनका गीत नहीं सुना; जाकर देखा तो केवल उनका पंजर पड़ा था।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप बिना देखे भगत की वेशभूषा की चार चीज़ें बता सकते हैं: लंगोटी, कनफटी टोपी, काली कमली, रामानंदी चंदन, तुलसी-माला?
- क्या आप दो प्रमाण दे सकते हैं कि भगत गृहस्थ होकर भी साधु थे?
- क्या आप आसाढ़, भादो, कातिक-फागुन (माघ की भोर) और गर्मी की 'संझा' — चारों गायन-प्रसंग क्रम से बता सकते हैं?
- क्या आप रोपनी के समय बच्चों, औरतों, हलवाहों और रोपनी करने वालों पर गीत का असर एक-एक शब्द में बता सकते हैं?
- क्या आप बेटे की मृत्यु वाले दिन भगत के व्यवहार को 'पागलपन नहीं, चरम विश्वास' सिद्ध कर सकते हैं?
- क्या आप रूढ़ि-विरोध के दोनों प्रसंग (पतोहू से आग दिलाना, दूसरी शादी का आदेश) तुरंत लिख सकते हैं?
- क्या आप बता सकते हैं कि भगत संबल क्यों नहीं लेते और भिक्षा क्यों नहीं माँगते थे?
- क्या आप '2-4-30' (नदी, मठ, गंगा) की दूरियाँ और भगत की मृत्यु का क्रम सही-सही याद कर सकते हैं?
रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत: frequently asked questions
‘बालगोबिन भगत’ पाठ की विधा क्या है और इसके लेखक कौन हैं?
यह एक रेखाचित्र है, जिसके लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी हैं। रेखाचित्र में किसी व्यक्ति के रूप, स्वभाव और जीवन का शब्दों से सजीव चित्र खींचा जाता है। बेनीपुरी जी को विशिष्ट शैली के कारण ‘कलम का जादूगर’ कहा जाता है।
बालगोबिन भगत गृहस्थ होते हुए भी साधु क्यों कहलाते थे?
वे खेती करते और परिवार रखते थे, फिर भी उनका आचरण साधु जैसा था। वे कभी झूठ नहीं बोलते, खरा व्यवहार रखते, किसी की चीज़ बिना पूछे नहीं छूते और कबीर के आदेशों पर चलते थे। अपनी उपज भी पहले कबीरपंथी मठ में भेंट करते और प्रसाद से ही घर चलाते थे।
बेटे की मृत्यु पर भगत ने कौन-सी सामाजिक रूढ़ियाँ तोड़ीं?
उन्होंने बेटे की चिता को आग बहू से दिलवाई, जबकि समाज में यह काम पुरुष करते थे। उन्होंने बहू को रोने के बदले उत्सव मनाने को कहा और श्राद्ध के बाद उसके भाई को उसकी दूसरी शादी करने का आदेश दिया। इससे उनकी प्रगतिशील सोच दिखती है।
‘विरहिनी अपने प्रेमी से जा मिली’ में विरहिनी और प्रेमी कौन हैं?
भगत के अनुसार विरहिनी आत्मा है और प्रेमी परमात्मा। बेटे की मृत्यु को वे आत्मा का परमात्मा से मिलन मानते थे, इसलिए उसे आनंद की बात कहते थे।
पाठ में किन-किन ऋतुओं और महीनों का वर्णन है?
पाठ में आषाढ़ की रिमझिम और धान की रोपनी, भादो की अँधेरी आधी रात, कार्तिक से फागुन तक की प्रभातियाँ, माघ की ठिठुरती भोर और गर्मियों की उमसभरी शाम की ‘संझा’ का वर्णन है। हर ऋतु के साथ भगत के गायन का अलग रूप दिखाया गया है।
बालगोबिन भगत की मृत्यु कैसे हुई?
वे हर वर्ष तीस कोस पैदल गंगा-स्नान जाते थे। एक बार लौटने पर तबीयत खराब रही और बुखार आने लगा, पर उन्होंने गीत, स्नान-ध्यान और खेती देखने का नियम नहीं छोड़ा। एक संध्या गीत गाने के बाद अगली भोर लोगों ने पाया कि वे नहीं रहे।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-अ (002), कक्षा 10, 2026-27; NCERT क्षितिज भाग 2 (Reprint 2026-27), बालगोबिन भगत