प्रेमचंद – बड़े भाई साहब Class 10: सारांश, चरित्र और संदेश
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'बड़े भाई साहब' प्रेमचंद की कहानी है, जो स्पर्श भाग 2 के गद्य खंड में है। इसमें एक बड़ा भाई छोटे भाई के लिए आदर्श बने रहने की कोशिश में अपना बचपन खो देता है। बोर्ड इस पाठ से गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के दो-दो अंकों वाले प्रश्न पूछता है।
What प्रेमचंद – बड़े भाई साहब is about
'बड़े भाई साहब' कथा सम्राट प्रेमचंद की कहानी है। यह NCERT की पुस्तक स्पर्श भाग 2 के गद्य खंड का पाठ है। कहानी छोटा भाई 'मैं' बनकर सुनाता है। इसमें दो भाई होस्टल में रहकर पढ़ते हैं। बड़ा भाई दिन-रात पढ़ता है, फिर भी फ़ेल होता है। छोटा भाई खेलता रहता है, फिर भी कक्षा में प्रथम आता है। एक पंक्ति में कहें तो यह कहानी बताती है कि बड़ा होने की ज़िम्मेदारी बच्चे का बचपन छीन लेती है। साथ ही यह रटंत वाली शिक्षा पर तीखा व्यंग्य करती है।
बोर्ड परीक्षा में यह पाठ दो तरह से आता है। पहला, प्रश्न 9 में पठित गद्यांश दिया जाता है। उस पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) होते हैं, जिनमें एक कथन-कारण प्रश्न भी होता है। दूसरा, प्रश्न 10 में 25-30 शब्दों के प्रश्न आते हैं, हर प्रश्न 2 अंक का। इनमें चरित्र, घटना का कारण, किसी कथन का आशय और अपने जीवन से जोड़ने वाले प्रश्न पूछे जाते हैं।
In real board papers: Course A, not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026); Course B, asked in 16 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 4.4 marks per paper. See the questions
प्रेमचंद – बड़े भाई साहब: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
कथावाचक छोटा भाई है। उसके भाई साहब उससे पाँच साल बड़े हैं, पर केवल तीन दरजे आगे। छोटा भाई नौ साल का है और पाँचवीं में है। भाई साहब चौदह साल के हैं और नौवीं में हैं। वे एक साल का काम दो-तीन साल में करते हैं, क्योंकि शिक्षा की 'बुनियाद' मज़बूत डालना चाहते हैं। वे हरदम किताब खोले रहते हैं। दिमाग को आराम देने के लिए हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों, बिल्लियों के चित्र बनाते हैं और बेमतलब शब्द लिखते हैं।
छोटे भाई का मन पढ़ाई में नहीं लगता। वह मौका मिलते ही मैदान में खेलने चला जाता है। लौटने पर भाई साहब का पहला सवाल होता है—'कहाँ थे?' फिर लंबा उपदेश मिलता है कि अंग्रेज़ी पढ़ना हँसी-खेल नहीं, खेल में समय गँवाओगे तो दादा की गाढ़ी कमाई बरबाद होगी। छोटा भाई रोता है, टाइम-टेबिल बनाता है, पर उस पर अमल नहीं कर पाता। खेल का मैदान उसे खींच ले जाता है।
सालाना इम्तिहान में भाई साहब फ़ेल हो जाते हैं और छोटा भाई प्रथम आता है। दोनों में दो दरजे का अंतर रह जाता है। छोटे भाई को अभिमान होता है, पर भाई साहब की उदासी देखकर वह उन्हें ताना नहीं मारता। वह खुलकर खेलने लगता है। भाई साहब इसे भाँप लेते हैं। वे रावण, शैतान और शाहेरूम के उदाहरण देकर घमंड न करने को कहते हैं। वे कहते हैं कि यह सफलता 'अंधे के हाथ बटेर' है। वे अपने दरजे की अलजबरा, जामेट्री, इंगलिस्तान के इतिहास और चार पन्नों के निबंध की कठिनाई का डरावना चित्र खींचते हैं।
अगले साल फिर छोटा भाई पास और प्रथम होता है, भाई साहब फिर फ़ेल। दोनों रो पड़ते हैं। अब केवल एक दरजे का अंतर बचता है। छोटे भाई के मन में आई कुटिल भावना वह खुद निकाल देता है। भाई साहब अब नरम पड़ जाते हैं। छोटा भाई इसका अनुचित लाभ उठाकर पढ़ाई छोड़ देता है और छिपकर पतंग उड़ाने लगता है।
एक शाम कटी पतंग लूटते समय भाई साहब उसे पकड़ लेते हैं। वे कहते हैं कि पाँच साल का अंतर खुदा भी नहीं मिटा सकता। समझ किताबों से नहीं, दुनिया देखने से आती है। वे अम्माँ, दादा और हेडमास्टर साहब की बूढ़ी माँ के अनुभव का उदाहरण देते हैं। छोटा भाई सजल आँखों से उनकी बात मान लेता है। भाई साहब उसे गले लगाते हैं और मानते हैं कि उनका भी पतंग उड़ाने को जी ललचाता है। तभी एक कटी पतंग ऊपर से गुज़रती है। भाई साहब उछलकर उसकी डोर पकड़ लेते हैं और होस्टल की ओर दौड़ पड़ते हैं।
Themes and message
बड़े होने की ज़िम्मेदारी और खोया हुआ बचपन
भाई साहब खुद भी बच्चे ही हैं, पर घर में बड़े होने के कारण वे छोटे भाई के लिए मिसाल बनना चाहते हैं। इसी कोशिश में वे खेल, मेले-तमाशे और पतंग से दूर रहते हैं। उनका मन भी खेलना चाहता है, पर वे अपनी इच्छा दबा लेते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि वे खुद भटके तो छोटे भाई की रक्षा कैसे करेंगे। कहानी के अंत में उनका पतंग की डोर पकड़कर दौड़ना दिखाता है कि उनके भीतर का बच्चा मरा नहीं, केवल दबा हुआ था। इससे पता चलता है कि समय से पहले मिली ज़िम्मेदारी बचपन को छिपा देती है।
From the text: भाई साहब कहते हैं—"मैं कनकौए उड़ाने को मना नहीं करता। मेरा भी जी ललचाता है;" और "खुद बेराह चलूँ, तो तुम्हारी रक्षा कैसे करूँ?" अंत में वे उछलकर कटी पतंग की डोर पकड़ लेते हैं।
रटंत शिक्षा और परीक्षा-प्रणाली पर व्यंग्य
प्रेमचंद भाई साहब के मुँह से उस शिक्षा पर व्यंग्य करते हैं जो केवल रटने पर टिकी है। परीक्षक चाहते हैं कि लड़के किताब का अक्षर-अक्षर रट लें। 'अ ब ज' की जगह 'अ ज ब' लिखने पर नंबर कट जाते हैं। हेनरी सातवें की जगह आठवाँ लिखने पर शून्य मिलता है। 'संक्षेप में' चार पन्नों का निबंध माँगा जाता है। यह व्यंग्य बताता है कि ऐसी शिक्षा में समझ से ज़्यादा याद करने को महत्त्व दिया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि सबसे ज़्यादा रटने वाले भाई साहब ही फ़ेल होते हैं।
From the text: भाई साहब कहते हैं—"और इसी रटंत का नाम शिक्षा रख छोड़ा है।" साथ ही 'समय की पाबंदी' पर चार पन्नों के निबंध और जामेट्री के नंबर कटने का प्रसंग।
किताबी ज्ञान बनाम जीवन का अनुभव
भाई साहब मानते हैं कि डिग्रियों से असली समझ नहीं आती। अम्माँ ने कोई दरजा पास नहीं किया और दादा भी शायद पाँचवीं-छठी तक पढ़े, फिर भी उन्हें बच्चों को समझाने का अधिकार है, क्योंकि उनके पास दुनिया का अनुभव है। दादा ने कम खर्च में नौ लोगों के परिवार को इज़्ज़त से पाला। ऑक्सफ़ोर्ड से एम.ए. हेडमास्टर साहब कर्ज़दार रहते थे, पर उनकी बूढ़ी माँ ने घर संभाला तो सब ठीक हो गया। इस तर्क से कहानी यह संदेश देती है कि व्यावहारिक समझ अनुभव से आती है।
From the text: "समझ किताबें पढ़ने से नहीं आती, दुनिया देखने से आती है।" साथ ही बीमारी में दादा के धैर्य और हेडमास्टर साहब की माँ के प्रबंध का उदाहरण।
घमंड का बुरा परिणाम
पहली बार प्रथम आने पर छोटे भाई को अभिमान हो जाता है और वह खुलकर खेलने लगता है। भाई साहब उसे समझाते हैं कि घमंड बड़े-बड़ों का नहीं टिका। वे रावण का उदाहरण देते हैं, जो चक्रवर्ती राजा था, पर घमंड ने उसका नाम-निशान मिटा दिया। शैतान को स्वर्ग से नरक में धकेला गया और शाहेरूम भीख माँगकर मरा। वे कहते हैं कि एक बार की सफलता 'अंधे के हाथ बटेर' है। इससे संदेश मिलता है कि सफलता के बाद विनम्र रहना ज़रूरी है।
From the text: "घमंड तो बड़े-बड़े का नहीं रहा, तुम्हारी क्या हस्ती है?" और रावण, शैतान, शाहेरूम के दृष्टांत।
भाइयों का आपसी स्नेह और आदर
डाँट-फटकार के पीछे भाई साहब का प्रेम छिपा है। वे स्नेह और रोष से मिले शब्दों में डाँटते हैं। छोटा भाई भी भाई साहब को फ़ेल होते देख उनके घाव पर नमक नहीं छिड़कता। वह छिपकर पतंग उड़ाता है ताकि उन्हें न लगे कि उसका सम्मान कम हुआ है। दूसरी बार भाई साहब फ़ेल होते हैं तो दोनों रोते हैं। अंत में छोटे भाई के मन में श्रद्धा जागती है और भाई साहब उसे गले लगा लेते हैं। इससे पता चलता है कि दोनों का रिश्ता डर पर नहीं, स्नेह पर टिका है।
From the text: परिणाम सुनकर "वह रो पड़े और मैं भी रोने लगा"; छोटा भाई सोचता है कि वे उसे उसके हित के विचार से ही डाँटते हैं; अंत में भाई साहब उसे गले से लगा लेते हैं।
Characters
बड़े भाई साहब
कहानी के मुख्य पात्र, छोटे भाई से पाँच साल बड़े, जो होस्टल में उसकी देखभाल और निगरानी करते हैं।
- अध्ययनशील और परिश्रमी: हरदम किताब खोले बैठे रहते हैं और दूसरी बार कोर्स का एक-एक शब्द चाट जाते हैं।
- उपदेश देने में निपुण: लंबे भाषण, मुहावरे और रावण जैसे दृष्टांतों से छोटे भाई को समझाते हैं।
- कर्तव्यनिष्ठ और त्यागी: छोटे भाई के लिए मिसाल बने रहने को अपनी खेलने की इच्छा दबा लेते हैं।
- छोटे भाई के हितैषी: उनकी डाँट के पीछे भाई का भला करने की भावना है।
- भीतर से बच्चे: अंत में कटी पतंग की डोर पकड़कर होस्टल की ओर दौड़ पड़ते हैं।
वे मेले-तमाशे, क्रिकेट और हॉकी के पास नहीं फटकते; दूसरी बार रात दस बजे तक और भोर चार बजे से पढ़ते हैं; वे कहते हैं "खुद बेराह चलूँ, तो तुम्हारी रक्षा कैसे करूँ?" और अंत में पतंग की डोर पकड़कर दौड़ते हैं।
छोटा भाई (कथावाचक)
कहानी सुनाने वाला 'मैं', जो नौ साल की उम्र में पाँचवीं कक्षा में है और खेल-प्रेमी है।
- खेल-कूद का प्रेमी: कंकरियाँ उछालना, गुल्ली-डंडा, फ़ुटबॉल और बाद में पतंगबाज़ी उसे खींच लेते हैं।
- बुद्धिमान: कम पढ़कर भी दो बार कक्षा में प्रथम आता है; भाई साहब भी उसे 'ज़हीन' कहते हैं।
- संवेदनशील: भाई साहब के फ़ेल होने पर उन्हें ताना नहीं मारता और उनके साथ रोता है।
- बड़े भाई का आदर करने वाला: नरमी मिलने पर भी छिपकर पतंग उड़ाता है ताकि उनका सम्मान कम न दिखे।
- कभी-कभी अवसरवादी: भाई साहब की सहिष्णुता का अनुचित लाभ उठाकर पढ़ाई छोड़ देता है।
वह कहता है कि उसका 'जी पढ़ने में बिलकुल न लगता था'; उदास भाई साहब को देखकर उसे घाव पर नमक छिड़कने का विचार लज्जास्पद लगता है; वह मानता है कि वह 'उनकी सहिष्णुता का अनुचित लाभ उठाने लगा'।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| व्यंग्य | भाई साहब का कथन—"समय की पाबंदी पर संक्षेप में एक निबंध लिखो, जो चार पन्नों से कम न हो।" | हास्य के साथ रटंत शिक्षा और परीक्षकों की उलटी माँगों पर चोट होती है। पाठक हँसता भी है और सोचता भी है। |
| मुहावरेदार भाषा | 'अंधे के हाथ बटेर लगना', 'लोहे के चने चबाना', 'दाँतों पसीना आना', 'घाव पर नमक छिड़कना', 'आड़े हाथों लेना' | भाषा जीवंत, चुटीली और असरदार बनती है। भाई साहब के उपदेशों में वज़न आता है और पात्र का स्वभाव उभरता है। |
| आत्मकथात्मक (प्रथम पुरुष) शैली | कहानी छोटा भाई 'मैं' बनकर सुनाता है—"मेरा जी पढ़ने में बिलकुल न लगता था।" | पाठक छोटे भाई के डर, अभिमान, पछतावे और श्रद्धा को भीतर से महसूस करता है। बड़े भाई का चित्र उसकी आँखों से दिखता है। |
| विरोधाभासी स्थिति (परिस्थितिजन्य विडंबना) | दिन-रात पढ़ने वाले भाई साहब फ़ेल होते हैं और खेलने वाला छोटा भाई दरजे में अव्वल आता है। | यह उलटा परिणाम कहानी को रोचक बनाता है और यह प्रश्न उठाता है कि क्या केवल रटना ही सच्ची पढ़ाई है। |
| उत्प्रेक्षा और चित्रात्मक वर्णन | गिरती पतंग को ऐसे देखा गया "मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।" | पतंग लूटने के दृश्य में बच्चों का उत्साह और सपनों की दुनिया आँखों के सामने आ जाती है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने।
कथावाचक (छोटा भाई): कहानी के आरंभ में भाई साहब के एक साल का काम दो-तीन साल में करने का कारण बताते हुए।
इसमें हल्का व्यंग्य है। बार-बार फ़ेल होने को 'मज़बूत नींव' बताकर लेखक भाई साहब की धीमी प्रगति पर मुस्कराता है।
हमेशा सिर पर एक नंगी तलवार-सी लटकती मालूम होती।
कथावाचक (छोटा भाई): टाइम-टेबिल तोड़कर खेलने के बाद भाई साहब की डाँट के डर का वर्णन।
यह उपमा छोटे भाई के लगातार डर को दिखाती है, फिर भी वह खेल नहीं छोड़ पाता।
घमंड तो बड़े-बड़े का नहीं रहा, तुम्हारी क्या हस्ती है?
बड़े भाई साहब: पहली बार प्रथम आने के बाद छोटा भाई गुल्ली-डंडा खेलकर लौटता है, तब।
यहीं से रावण, शैतान और शाहेरूम के दृष्टांत शुरू होते हैं। यह अभिमान न करने का संदेश है।
और इसी रटंत का नाम शिक्षा रख छोड़ा है।
बड़े भाई साहब: परीक्षकों के बारे में, जो चाहते हैं कि लड़के किताब का अक्षर-अक्षर रट डालें।
यह पंक्ति शिक्षा-प्रणाली पर कहानी के व्यंग्य का केंद्र है।
समझ किताबें पढ़ने से नहीं आती, दुनिया देखने से आती है।
बड़े भाई साहब: पतंग लूटते पकड़े जाने पर छोटे भाई को पाँच साल के अंतर का महत्त्व समझाते हुए।
इसमें अनुभव को किताबी ज्ञान से बड़ा बताने वाला कहानी का मुख्य संदेश है।
खुद बेराह चलूँ, तो तुम्हारी रक्षा कैसे करूँ?
बड़े भाई साहब: छोटे भाई को गले लगाकर अपनी दबी इच्छा स्वीकार करते हुए।
इससे पता चलता है कि भाई साहब कर्तव्य के कारण अपना बचपन दबाते हैं। यह उनके त्याग का प्रमाण है।
मैं कनकौए उड़ाने को मना नहीं करता। मेरा भी जी ललचाता है;
बड़े भाई साहब: कहानी के अंत में, लंबे उपदेश के बाद।
कठोर दिखने वाले भाई साहब के भीतर छिपा बच्चा पहली बार खुलकर सामने आता है।
प्रेमचंद – बड़े भाई साहब in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
बड़े होने की ज़िम्मेदारी और खोया हुआ बचपन
मान लीजिए आप कक्षा 10 में हैं और आपका छोटा भाई कक्षा 5 में है। माता-पिता कहते हैं, 'तुम बड़े हो, तुम्हें देखकर ही वह सीखेगा।' दोस्त गली में क्रिकेट खेलने बुलाते हैं, पर आप सोचते हैं कि छोटा भाई भी पढ़ाई छोड़कर साथ चल देगा।
आपकी स्थिति की तुलना बड़े भाई साहब की स्थिति से कीजिए। क्या अपने मन को पूरी तरह मारना ठीक है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- भाई साहब भी आदर्श बने रहने के लिए खेल से दूर रहते थे।
- उन्होंने माना कि उनका भी जी ललचाता है।
- इससे उनका बचपन दब गया (पाठ प्रवेश)।
- संतुलित राय: ज़िम्मेदारी निभाएँ, पर उचित खेल भी करें।
Answer: भाई साहब भी आदर्श बने रहने के लिए खेल से दूर रहे, जिससे उनका बचपन दब गया। मैं ज़िम्मेदारी निभाऊँगा, पर पढ़ाई पूरी करके थोड़ा खेलूँगा भी।
Memory hook: बड़ा होना = मिसाल बनना, पर बचपन मिटाना नहीं।
रटंत शिक्षा पर व्यंग्य
कल्पना कीजिए आपकी विज्ञान परीक्षा में एक दोस्त ने किताब की परिभाषा अक्षरशः रटकर लिखी और पूरे अंक पाए, जबकि आपने सही बात अपने शब्दों में समझाकर लिखी तो एक अंक कट गया।
इस घटना को 'बड़े भाई साहब' में परीक्षकों पर किए गए व्यंग्य से जोड़िए। आपके अनुसार सच्ची शिक्षा क्या है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- भाई साहब की शिकायत: परीक्षक केवल वही देखते हैं जो पुस्तक में लिखा है।
- 'अ ब ज' की जगह 'अ ज ब' पर सारे नंबर कटना।
- उनका मत: रटंत को ही शिक्षा मान लिया गया है।
- अपना मत: समझकर अपने शब्दों में लिखना सच्ची शिक्षा है।
Answer: भाई साहब भी कहते थे कि परीक्षक केवल किताब के शब्द देखते हैं और रटवाते हैं। मेरे अनुसार सच्ची शिक्षा बात समझकर अपने शब्दों में कहना है।
Memory hook: 'अ ब ज' या 'अ ज ब'? समझ ज़रूरी, रटना नहीं।
घमंड का बुरा परिणाम
मान लीजिए आपकी कक्षा का एक लड़का पहली बार गणित में सबसे ज़्यादा अंक लाया। अब वह सबको चिढ़ाता है और अभ्यास करना छोड़ देता है, यह सोचकर कि अगली बार भी वही प्रथम आएगा।
बड़े भाई साहब उस लड़के को क्या समझाते? पाठ के उदाहरणों के आधार पर लिखिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- छोटा भाई भी अव्वल आकर घमंडी और लापरवाह हो गया था।
- भाई साहब ने रावण, शैतान, शाहेरूम के घमंड और बुरे अंत का उदाहरण दिया।
- संयोग की सफलता 'अंधे के हाथ बटेर' जैसी है, बार-बार नहीं मिलती।
Answer: भाई साहब कहते कि घमंड बड़े-बड़ों का नहीं रहा; रावण का नाम तक मिट गया। एक बार अव्वल आना अंधे के हाथ बटेर हो सकता है, इसलिए अभ्यास रखो।
Memory hook: एक बार अव्वल, हर बार नहीं: घमंड छोड़ो, अभ्यास पकड़ो।
किताबी ज्ञान बनाम जीवन का अनुभव
कल्पना कीजिए आप और आपका चचेरा भाई होस्टल में हैं। रात को उसे तेज़ बुखार हो जाता है। आप घबराकर बस घर फ़ोन करते रहते हैं, जबकि आपकी दादी, जो कभी स्कूल नहीं गईं, फ़ोन पर शांति से बताती हैं कि पहले माथे पर ठंडी पट्टी रखो और फिर डॉक्टर को बुलाओ।
इस स्थिति को भाई साहब के इस विचार से जोड़िए कि 'समझ किताबें पढ़ने से नहीं आती, दुनिया देखने से आती है।' (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- भाई साहब ने कहा था कि बीमारी में छोटे भाई के हाथ-पाँव फूल जाएँगे, केवल तार देगा।
- दादा न घबराते, पहले खुद इलाज करते, फिर डॉक्टर बुलाते।
- दादी का व्यवहार उसी अनुभव का उदाहरण है।
Answer: भाई साहब ने कहा था कि बीमारी में हम घबराकर बस तार देंगे, पर दादा धैर्य से पहले खुद इलाज करेंगे। मेरी दादी ने भी अनुभव से सही रास्ता बताया।
Memory hook: बुखार की रात सिखाती है: अनुभव किताब से आगे है।
Topics in this chapter
- बड़े भाई साहब का चरित्र-चित्रणComing soon
- बड़े भाई साहब पाठ के प्रश्न-उत्तरComing soon
- बड़े भाई साहब का मूल संदेश और शिक्षाComing soon
- बड़े भाई साहब के आशय और गद्यांशComing soon
- बड़े भाई साहब कहानी का सारांशComing soon
- बड़े भाई साहब: भाई साहब का चरित्र और अनुभव की सीख
How the board asks प्रेमचंद – बड़े भाई साहब
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | पाठ का एक अंश देकर पाँच MCQ पूछे जाते हैं: किसी कथन में किस बात का संकेत है, किसी विचार का कारण, गद्यांश की भाषा, घटना का प्रभाव, और एक कथन-कारण प्रश्न। | पहले पूरा गद्यांश ध्यान से पढ़ें और पहचानें कि यह कहानी के किस मोड़ का है (पहली परीक्षा, दूसरी परीक्षा या पतंग वाला प्रसंग)। विकल्प चुनते समय केवल गद्यांश और पाठ के तथ्य पर टिके रहें, जैसे 'दो साल का अंतर' कक्षा का अंतर है, उम्र का नहीं। |
| कथन-कारण प्रश्न | कथन (A) और कारण (R) देकर पूछा जाता है कि दोनों सही हैं या नहीं, और क्या R, A की सही व्याख्या करता है। | पहले A और R को अलग-अलग पाठ से जाँचें। फिर देखें कि R सच में A का कारण है या नहीं। जैसे भाई साहब की फ़ज़ीहत का विचार लज्जास्पद लगा, क्योंकि वे बहुत दुखी और उदास थे। |
| चरित्र-चित्रण (25-30 शब्द, 2 अंक) | बड़े भाई साहब या छोटे भाई के व्यक्तित्व की विशेषताएँ, या पाठ के किन अंशों से कोई गुण पता चलता है। | दो गुण लिखें और हर गुण के साथ पाठ की एक घटना जोड़ें। जैसे अध्ययनशील (हरदम किताब खोले रहना) और हितैषी (भले के लिए डाँटना)। 30 शब्दों से अधिक न लिखें। |
| दृष्टांत या कथन का आशय | मोह-माया वाले दृष्टांत, रावण के उदाहरण या 'बुनियाद पुख्ता' जैसी पंक्ति का उद्देश्य या आशय स्पष्ट करने को कहा जाता है। | पहले बताएँ कि पंक्ति किस प्रसंग में आई। फिर उसका सीधा अर्थ लिखें। अंत में यह बताएँ कि उससे पात्र या संदेश के बारे में क्या पता चलता है। |
| अपने जीवन से जोड़ने वाले प्रश्न (HOTS) | भाई साहब का कौन-सा गुण अपनाएँगे, कौन-सा विषय आपको 'हँसी-खेल' नहीं लगता, या सिद्ध कीजिए कि समय से पहले ज़िम्मेदारी बचपन छीन लेती है। | पाठ से एक प्रमाण दें और फिर अपना तर्क या उदाहरण जोड़ें। अपनी राय साफ़ लिखें और उसके दो कारण दें। केवल पाठ दोहराने से पूरे अंक नहीं मिलते। |
| शिक्षा-प्रणाली पर व्यंग्य या अनुभव बनाम किताबी ज्ञान | लेखक ने शिक्षा के किन तरीकों पर व्यंग्य किया है, या बड़े भाई साहब ने अनुभव को क्यों महत्त्वपूर्ण माना। | पाठ के ठोस उदाहरण दें: अ ब ज वाला प्रसंग, हेनरी के नाम, चार पन्नों का निबंध; या दादा, अम्माँ और हेडमास्टर साहब की माँ के उदाहरण। फिर एक पंक्ति में अपना मत लिखें। |
Tricks to remember प्रेमचंद – बड़े भाई साहब
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
कहानी के तीन मोड़: 'तीन-दो-एक'
शुरू में तीन दरजे का अंतर, पहली परीक्षा के बाद दो, दूसरी के बाद एक। हर बार अंतर घटा, छोटे भाई का डर घटा और अंत में श्रद्धा बढ़ी। याद रखें: 3 (डर) → 2 (घमंड) → 1 (श्रद्धा और गले लगना)।
Use it when: घटनाओं का क्रम और छोटे भाई के बदलते भाव वाले प्रश्नों में।
घमंड के तीन उदाहरण: 'रा-शै-शा'
रा = रावण (नाम-निशान मिटा), शै = शैतान (स्वर्ग से नरक), शा = शाहेरूम (भीख माँगकर मरा)। तीनों का एक ही सबक: अभिमान का अंत बुरा।
Use it when: दृष्टांत के उद्देश्य वाले 2 अंक के प्रश्न और MCQ में।
परीक्षा पर व्यंग्य: 'हेनरी, अबज, चार पन्ने'
तीन चीज़ें याद रखें: हेनरी सातवें की जगह आठवाँ लिखा तो नंबर गायब; 'अ ब ज' की जगह 'अ ज ब' तो नंबर कटे; 'संक्षेप में' पर चार पन्ने। तीनों रटंत शिक्षा पर व्यंग्य हैं।
Use it when: शिक्षा-प्रणाली पर व्यंग्य वाले प्रश्नों में उदाहरण देने के लिए।
अनुभव के तीन गवाह: 'अम्माँ, दादा, हेडमास्टर की माँ'
अम्माँ ने कोई दरजा पास नहीं किया, दादा पाँचवीं-छठी तक, फिर भी समझाने का अधिकार इनका; हेडमास्टर (ऑक्सफ़ोर्ड एम.ए.) का घर उनकी बूढ़ी माँ ने सँभाला। तीनों = अनुभव किताबी ज्ञान से बड़ा।
Use it when: 'किताबी ज्ञान बनाम अनुभव' वाले प्रश्नों में।
प्रेमचंद – बड़े भाई साहब: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: गद्यांश 1: भाई साहब की 'मज़बूत बुनियाद' (पाठ का आरंभ)
मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े, लेकिन केवल तीन दरजे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था, जब मैंने शुरू किया लेकिन तालीम जैसे महत्त्व के मामले में वह जल्दबाज़ी से काम लेना पसंद न करते थे। इस भवन की बुनियाद खूब मज़बूत डालना चाहते थे, जिस पर आलीशान महल बन सके। एक साल का काम दो साल में करते थे। कभी-कभी तीन साल भी लग जाते थे। बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने।
(1) · 1 mark · MCQ
भाई साहब उम्र में पाँच साल बड़े होकर भी केवल तीन दरजे आगे क्यों थे?
(क) उन्होंने छोटे भाई से देर से पढ़ना शुरू किया था
(ख) वे एक-एक कक्षा में दो-तीन साल लगा देते थे
(ग) वे बीमारी के कारण स्कूल नहीं जा पाए
(घ) उन्होंने बीच में स्कूल बदल लिया था(2) · 1 mark · MCQ
गद्यांश में भाई साहब की पढ़ाई के बारे में लेखक का स्वर कैसा है?
(क) सीधी प्रशंसा का
(ख) हल्के हास्य और व्यंग्य का
(ग) कठोर क्रोध का
(घ) गहरे शोक का(3) · 1 mark · MCQ
गद्यांश में पढ़ाई के लिए 'भवन', 'बुनियाद' और 'आलीशान महल' जैसे शब्दों का प्रयोग लेखक की किस शैली का उदाहरण है?
(क) सीधी तथ्यात्मक शैली
(ख) प्रतीकात्मक और व्यंग्यपूर्ण शैली
(ग) भावुक काव्यात्मक शैली
(घ) संवाद शैली(4) · 1 mark · MCQ
भाई साहब की दृष्टि में 'आलीशान महल' किसका प्रतीक है?
(क) परिवार की धन-संपत्ति का
(ख) ऊँची और पक्की शिक्षा का
(ग) होस्टल की इमारत का
(घ) खेल के मैदान का(5) · 1 mark · MCQ
'बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने।'—इस वाक्य से भाई साहब के किस सोच का पता चलता है?
(क) वे पढ़ाई को जल्दी पूरा करना चाहते थे
(ख) वे अपनी असफलता को भी अपने ढंग से उचित ठहराते थे
(ग) वे मकान बनाने का काम सीख रहे थे
(घ) वे पढ़ाई छोड़ना चाहते थे
Show the answersAnswers
- (ख) वे एक-एक कक्षा में दो-तीन साल लगा देते थे। गद्यांश के अनुसार दोनों ने एक ही उम्र में पढ़ना शुरू किया था, पर भाई साहब एक साल का काम दो या तीन साल में करते थे।
- (ख) हल्के हास्य और व्यंग्य का। बार-बार फ़ेल होने को 'मज़बूत बुनियाद डालना' कहकर लेखक मीठा व्यंग्य करता है।
- (ख) प्रतीकात्मक और व्यंग्यपूर्ण शैली। पढ़ाई को भवन-निर्माण का रूप देकर लेखक भाई साहब के बार-बार फ़ेल होने पर मीठा व्यंग्य करता है।
- (ख) ऊँची और पक्की शिक्षा का। वे मानते थे कि नींव (बुनियाद) पक्की होगी, तभी उस पर ज्ञान का ऊँचा भवन टिकेगा।
- (ख) वे अपनी असफलता को भी अपने ढंग से उचित ठहराते थे। बार-बार फ़ेल होने को वे पक्की नींव डालने का नाम देते थे।
Extract 2: गद्यांश 2: कुटिल भावना और उस पर विजय (दूसरी परीक्षा के बाद)
मेरे और भाई साहब के बीच में अब केवल एक दरजे का अंतर और रह गया। मेरे मन में एक कुटिल भावना उदय हुई कि कहीं भाई साहब एक साल और फ़ेल हो जाएँ, तो मैं उनके बराबर हो जाऊँ, फिर वह किस आधार पर मेरी फ़जीहत कर सकेंगे, लेकिन मैंने इस विचार को दिल से बलपूर्वक निकाल डाला। आखिर वह मुझे मेरे हित के विचार से ही तो डाँटते हैं।
(1) · 1 mark · MCQ
'केवल एक दरजे का अंतर' किस अंतर की बात करता है?
(क) दोनों भाइयों की उम्र का अंतर
(ख) दोनों भाइयों की कक्षाओं का अंतर
(ग) दोनों के अंकों का अंतर
(घ) दोनों की लंबाई का अंतर(2) · 1 mark · MCQ
छोटे भाई के मन में उठी 'कुटिल भावना' क्या थी?
(क) भाई साहब की शिकायत दादा से कर दे
(ख) भाई साहब एक साल और फ़ेल हो जाएँ ताकि वह उनके बराबर हो जाए
(ग) पढ़ाई छोड़कर घर चला जाए
(घ) भाई साहब की किताबें छिपा दे(3) · 1 mark · Assertion-reason
निम्नलिखित कथन और कारण को पढ़कर सही विकल्प चुनिए—
कथन (A): छोटे भाई ने कुटिल विचार को अपने मन से बलपूर्वक निकाल दिया।
कारण (R): उसे एहसास हुआ कि भाई साहब उसके हित के लिए ही उसे डाँटते हैं।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।(4) · 1 mark · MCQ
इस गद्यांश से छोटे भाई के चरित्र की कौन-सी विशेषता सामने आती है?
(क) ईर्ष्या और बदले की भावना
(ख) आत्म-चिंतन और बड़े भाई के प्रति कृतज्ञता
(ग) पढ़ाई के प्रति गहरी लगन
(घ) दूसरों का मज़ाक उड़ाने की आदत(5) · 1 mark · MCQ
'आखिर वह मुझे मेरे हित के विचार से ही तो डाँटते हैं'—इस वाक्य से छोटे भाई के मन के बारे में क्या अनुमान लगता है?
(क) वह डर के कारण भाई साहब की झूठी प्रशंसा कर रहा है
(ख) डाँट से दुखी होकर भी वह भीतर से भाई साहब की नीयत पर भरोसा करता है
(ग) वह भाई साहब को नापसंद करता है
(घ) वह पढ़ाई छोड़ने का बहाना खोज रहा है
Show the answersAnswers
- (ख) दोनों भाइयों की कक्षाओं का अंतर। दूसरी वार्षिक परीक्षा में छोटा भाई फिर पास और भाई साहब फिर फ़ेल हुए, इसलिए कक्षा का अंतर एक रह गया।
- (ख) भाई साहब एक साल और फ़ेल हो जाएँ ताकि वह उनके बराबर हो जाए और वे उसकी फ़जीहत न कर सकें।
- (क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।
- (ख) आत्म-चिंतन और बड़े भाई के प्रति कृतज्ञता। वह गलत विचार पहचानकर खुद उसे मन से निकाल देता है।
- (ख) डाँट से दुखी होकर भी वह भीतर से भाई साहब की नीयत पर भरोसा करता है; इसलिए वह अपने कुटिल विचार को मन से निकाल देता है।
प्रेमचंद – बड़े भाई साहब: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: पहले परिणाम पर छोटे भाई के भाव · 2 marks · Short answerBoard level
पहली वार्षिक परीक्षा का परिणाम आने पर छोटे भाई के मन में कौन-कौन से भाव आए? 'बड़े भाई साहब' पाठ के आधार पर लिखिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- भाई साहब फ़ेल, छोटा भाई पास होकर कक्षा में प्रथम आया।
- पहले भाई साहब को 'आड़े हाथों' लेने और ताना देने का मन हुआ।
- भाई साहब को दुखी देखकर हमदर्दी हुई, ताना देना लज्जास्पद लगा।
- अपने ऊपर अभिमान और आत्मसम्मान बढ़ा, भाई साहब का रौब कम हुआ।
Answer: भाई साहब फ़ेल हुए, छोटा भाई प्रथम आया। पहले उसका मन ताना देने को हुआ, पर भाई साहब को उदास देखकर हमदर्दी जागी। फिर भी उसका आत्मसम्मान बढ़ा।
Example 2: रावण, शैतान और शाहेरूम के दृष्टांत · 2 marks · Short answerBoard level
बड़े भाई साहब ने छोटे भाई के सामने रावण, शैतान और शाहेरूम के उदाहरण किस उद्देश्य से दिए? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रसंग: पास होकर अव्वल आने पर छोटा भाई निडर होकर गुल्ली-डंडा खेलने लगा।
- तीनों ने घमंड किया और तीनों का बुरा अंत हुआ: रावण का नाम मिटा, शैतान नरक में गया, शाहेरूम भीख माँगकर मरा।
- उद्देश्य: छोटे भाई के मन से घमंड निकालना और उसे फिर से पढ़ाई की ओर मोड़ना।
Answer: अव्वल आकर छोटा भाई घमंडी हो गया था। भाई साहब ने बताया कि रावण, शैतान और शाहेरूम का घमंड के कारण बुरा अंत हुआ, ताकि वह अभिमान छोड़ दे।
Example 3: परीक्षा-प्रणाली पर व्यंग्य · 2 marks · Short answerBoard level
भाई साहब द्वारा परीक्षकों और अध्यापकों की शिकायत से तत्कालीन शिक्षा-प्रणाली की कौन-सी कमियाँ सामने आती हैं? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- रटने पर ज़ोर: परीक्षक चाहते हैं कि लड़के 'अक्षर-अक्षर रट डालें'।
- समझ के बजाय छोटी भूल पर पूरे नंबर काटना: 'अ ब ज' की जगह 'अ ज ब', हेनरी सातवें की जगह आठवाँ।
- उलटी माँग: 'संक्षेप में' निबंध, पर चार पन्नों से कम नहीं।
- इससे पता चलता है कि लेखक ने भाई साहब के मुँह से रटंत शिक्षा पर व्यंग्य किया है।
Answer: शिक्षा रटंत पर टिकी थी। 'अ ब ज' की जगह 'अ ज ब' लिखने पर सारे नंबर कट जाते थे और 'संक्षेप में' चार पन्नों का निबंध माँगा जाता था।
Example 4: पतंग की डोर पकड़ने वाला अंतिम दृश्य · 2 marks · Short answerHarder board level
पाठ के अंत में भाई साहब का उछलकर कटे कनकौए की डोर पकड़ना और होस्टल की ओर दौड़ना उनके व्यक्तित्व के बारे में क्या बताता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- भाई साहब ने स्वयं माना: 'मेरा भी जी ललचाता है'।
- वे छोटे भाई के सामने आदर्श बने रहने के लिए अपनी इच्छाएँ दबाते थे।
- डोर पकड़ना दिखाता है कि उनके भीतर भी खेलने वाला बालक जीवित था।
- इससे पता चलता है कि ज़िम्मेदारी ने उनका बचपन दबा दिया था, पर मिटाया नहीं।
Answer: यह दृश्य दिखाता है कि भाई साहब के भीतर भी एक खिलंदड़ा बालक था। आदर्श बने रहने के लिए वे इच्छाएँ दबाते थे, पर मौका मिलते ही बचपन जाग उठा।
Example 5: हेडमास्टर साहब का उदाहरण और आज का जीवन · 2 marks · Short answerHOTS / competency
भाई साहब ने हेडमास्टर साहब और उनकी बूढ़ी माँ का उदाहरण क्यों दिया? क्या आज के जीवन में भी यह बात सही लगती है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- हेडमास्टर साहब ऑक्सफ़ोर्ड के एम.ए. थे, फिर भी घर का खर्च नहीं सँभाल पाए और कर्ज़दार रहे।
- उनकी बूढ़ी माँ ने घर का प्रबंध अपने हाथ में लिया तो घर में जैसे लक्ष्मी आ गई।
- उद्देश्य: सिद्ध करना कि जीवन की समझ अनुभव से आती है, केवल डिग्री से नहीं।
- अपना मत: आज भी पैसे सँभालना, संकट में धैर्य रखना जैसे काम अनुभव से ही आते हैं।
Answer: भाई साहब ने दिखाया कि डिग्रीधारी हेडमास्टर साहब घर न सँभाल सके, पर उनकी बूढ़ी माँ ने सँभाल लिया। आज भी खर्च सँभालने में अनुभव ही काम आता है।
Example 6: भाई साहब को सफल होने की सलाह · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए बड़े भाई साहब आपके सहपाठी हैं। पाठ के आधार पर उन्हें बार-बार फ़ेल होने से बचाने के लिए आप कौन-सी दो सलाह देंगे और क्यों? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ से समस्या पहचानना: वे दिन-रात रटते थे, चेहरा कांतिहीन हो गया, फिर भी फ़ेल हुए।
- सलाह 1: रटने के बजाय अर्थ समझें, जैसा वे स्वयं कहते थे 'जो कुछ पढ़ो, उसका अभिप्राय समझो'।
- सलाह 2: थोड़ा खेल और विश्राम भी करें, ताकि दिमाग ताज़ा रहे।
- तर्क: छोटा भाई खेलते हुए भी पास होता था, इसलिए संतुलन ज़रूरी है।
Answer: मैं कहूँगा कि रटने के बजाय अर्थ समझें, जैसा वे खुद छोटे भाई को सिखाते थे। साथ ही थोड़ा खेल और आराम भी करें, ताकि दिमाग ताज़ा रहे।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ दबाकर रखनी पड़ती थीं। पाठ के आधार पर इसका कारण स्पष्ट कीजिए और बताइए कि इससे उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा। (25-30 शब्द, 2 अंक) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| कारण: बड़े होने के नाते वे छोटे भाई के लिए आदर्श बनना चाहते थे; 'खुद बेराह चलूँ, तो तुम्हारी रक्षा कैसे करूँ?' जैसा कोई पाठ-प्रमाण | 1 |
| प्रभाव: खेल-तमाशों से दूर रहकर उनका बचपन दब गया, भले ही पतंग देखकर उनका भी जी ललचाता था | 1 |
पठित गद्यांश ('मेरे और भाई साहब के बीच में अब केवल एक दरजे का अंतर...') पर आधारित पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, कथन-कारण सहित (5×1 = 5 अंक) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रश्न (i): 'एक दरजे का अंतर' का सही अर्थ चुनना (कक्षा का अंतर) | 1 |
| प्रश्न (ii): 'कुटिल भावना' की पहचान (भाई साहब एक साल और फ़ेल हों) | 1 |
| प्रश्न (iii): कथन-कारण का सही विकल्प चुनना (दोनों सही, कारण सही व्याख्या) | 1 |
| प्रश्न (iv): छोटे भाई की चारित्रिक विशेषता का अनुमान (आत्म-चिंतन, कृतज्ञता) | 1 |
| प्रश्न (v): 'हित के विचार से ही तो डाँटते हैं' से छोटे भाई के मन का अनुमान (भाई साहब की नीयत पर भरोसा); केवल सही विकल्प लिखने पर पूरा अंक, अधूरा या दो विकल्प लिखने पर शून्य | 1 |
Where students lose marks in प्रेमचंद – बड़े भाई साहब
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: उम्र और कक्षा के तथ्य गलत लिखना
छात्र 'पाँच साल बड़े' और 'तीन दरजे आगे' को आपस में मिला देते हैं।
Wrong working
बड़े भाई साहब छोटे भाई से तीन साल बड़े थे और दसवीं कक्षा में पढ़ते थे।
Right working
भाई साहब छोटे भाई से पाँच साल बड़े (चौदह साल के) थे और नौवीं कक्षा में थे; छोटा भाई नौ साल का, पाँचवीं में।
Do this: 'पाँच साल, तीन दरजे, नौवीं-पाँचवीं, चौदह-नौ' को एक साथ याद करें।
Usually costs: MCQ में पूरा 1 अंक; 2 अंक के उत्तर में आधा से एक अंक।
Mistake: यह लिखना कि भाई साहब खेलने के कारण फ़ेल होते थे
छात्र मान लेते हैं कि फ़ेल होने वाला ज़रूर पढ़ता नहीं होगा।
Wrong working
भाई साहब पढ़ाई छोड़कर खेलते रहते थे, इसलिए फ़ेल हो गए।
Right working
भाई साहब दिन-रात पढ़ते थे, 'कोर्स का एक-एक शब्द चाट गए', फिर भी रटंत पढ़ाई के कारण फ़ेल हुए; खेलता छोटा भाई था।
Do this: याद रखें: मेहनती पर असफल = बड़ा भाई; खिलाड़ी पर सफल = छोटा भाई।
Usually costs: पूरे 2 अंक, क्योंकि मूल तथ्य ही उलट जाता है।
Mistake: कथावाचक और भाई साहब के काम आपस में बदल देना
अंतिम दृश्य में कनकौआ दोनों से जुड़ा है, इसलिए भ्रम होता है।
Wrong working
अंत में छोटे भाई ने उछलकर कनकौए की डोर पकड़ ली और भाई साहब पीछे दौड़े।
Right working
अंत में लंबे होने के कारण भाई साहब ने उछलकर डोर पकड़ी और होस्टल की ओर दौड़े; छोटा भाई पीछे-पीछे दौड़ा।
Do this: 'भाई साहब लंबे हैं ही' वाली पंक्ति याद रखें; डोर उन्हीं के हाथ आई।
Usually costs: चरित्र वाले प्रश्न में 1-2 अंक।
Mistake: प्रश्न का उत्तर देने के बजाय पूरी कहानी सुनाना
छात्र सोचते हैं कि ज़्यादा लिखने से ज़्यादा अंक मिलेंगे।
Wrong working
(श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई पूछने पर) भाई साहब पाँच साल बड़े थे, वे पढ़ते रहते थे, छोटा भाई खेलता था, फिर परीक्षा हुई... (60-70 शब्द, कारण अंत तक नहीं आया)
Right working
भाई साहब ने बताया कि वे उसके हित के लिए अपनी इच्छाएँ दबाते हैं और अनुभव में सदा बड़े रहेंगे; यह सुनकर छोटे भाई को अपनी लघुता का अनुभव हुआ और श्रद्धा जागी।
Do this: पहले वाक्य में सीधा उत्तर दें, फिर एक पाठ-प्रमाण; 25-30 शब्दों में रुक जाएँ।
Usually costs: शब्द-सीमा पार करने और मुख्य बिंदु छूटने पर 1 अंक तक।
Mistake: भाई साहब को केवल कठोर या घमंडी बताना, उनका स्नेह छोड़ देना
छात्र डाँट वाले प्रसंग ही याद रखते हैं, कहानी का अंत भूल जाते हैं।
Wrong working
बड़े भाई साहब बहुत गुस्सैल और घमंडी थे, जो छोटे भाई को बस डाँटते रहते थे।
Right working
भाई साहब अनुशासनप्रिय और उपदेश देने वाले थे, पर उनकी डाँट में स्नेह था; वे छोटे भाई का हित चाहते थे और अंत में उसे गले से लगा लिया।
Do this: चरित्र-चित्रण में कम-से-कम एक कठोर गुण और एक कोमल गुण, दोनों पाठ-प्रमाण के साथ लिखें।
Usually costs: 2 अंक के उत्तर में 1 अंक।
प्रेमचंद – बड़े भाई साहब: previous year questions
- Course A: Not asked in any of the 21 board papers we hold (2023 to 2026).
- Course B: Asked in 16 of the 21 board papers we hold (2023 to 2026), on average 4.4 marks per paper; 17 questions in all, counting OR alternatives. In 3 of 4 sample papers.
Counted from the real papers on our previous year papers page, not estimated. Average marks are over every board paper we hold, with an OR pair counted once. Chapter tags are ours.
Solved board questions from प्रेमचंद – बड़े भाई साहब
Real questions from recent papers. Try each one first, then open our step-by-step solution with marks per step.
2026 Course B, set 4/1/1, Q8 · 6 marks · Short answer
गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए : 3×2 = 6
- (i)2 marks
'बड़े भाई साहब' पाठ में भाई साहब की दृष्टि में अंग्रेज़ी पढ़ना कोई हँसी-खेल नहीं था। आपको कौन-सा विषय पढ़ना हँसी-खेल नहीं लगता और क्यों ? किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
- (ii)2 marks
'डायरी का एक पन्ना' पाठ में पुलिस कमिश्नर ने क्या नोटिस निकाला था और उसका क्या उद्देश्य था ?
- (iii)2 marks
'तताँरा-वामीरो कथा' पाठ में अंडमान निकोबार द्वीप के दो भागों में विभक्त होने की जिस कथा का उल्लेख किया गया है, वैज्ञानिक दृष्टि से क्या आप उससे सहमत हैं ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
- (iv)2 marks
तीसरी कसम फ़िल्म की कहानी सुनकर राजकपूर ने शैलेंद्र को क्या समझाया ? इससे उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता का पता चलता है ?
Try it first, then show our solutionSolution
- 2 marks
(i) मुझे गणित पढ़ना हँसी-खेल नहीं लगता। पहला कारण: इसमें सूत्र और अवधारणाएँ याद रखकर निरंतर अभ्यास करना पड़ता है। दूसरा कारण: एक छोटी-सी भूल से भी पूरा उत्तर गलत हो जाता है, इसलिए एकाग्रता चाहिए।
- 2 marks
(ii) कमिश्नर ने नोटिस निकाला कि मोन्यूमेंट के नीचे कोई सभा नहीं होगी और सभा में भाग लेने वाले सरकारी कर्मचारी दोषी माने जाएँगे। उद्देश्य था देशवासियों को अंग्रेज़ सरकार के विरुद्ध एकजुट होने से रोकना।
- 2 marks
(iii) नहीं, मैं सहमत नहीं हूँ। वैज्ञानिक दृष्टि से द्वीप भू-गर्भीय हलचल और समुद्री बदलावों से बने-टूटे हैं, किसी व्यक्ति के तलवार से भूमि चीरने से नहीं। यह कथा लोक-विश्वास है।
- 2 marks
(iv) राजकपूर ने शैलेंद्र को फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह किया। इससे पता चलता है कि वे सच्चे और हितैषी मित्र थे तथा अनुभवी व व्यावसायिक सूझ-बूझ वाले थे।
Answer: किन्हीं तीन उपभागों के उत्तर ऊपर दिए गए हैं।
Where the marks are
- प्रत्येक उपभाग 2 अंक; किन्हीं तीन के लिए (3×2)
- दो कारण/दो बिंदु स्पष्ट (1+1)
2025 Course B, set 4/2/1, Q7 · 5 marks · Case-basedCompetency-based
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : (5×1=5)
मेरे और उनके बीच में केवल दो साल का अंतर रह गया। जी में आया, भाई साहब को आड़े हाथों लूँ – 'आपकी वह घोर तपस्या कहाँ गई ? मुझे देखिए, मज़े से खेलता भी रहा और दर्जे में अव्वल भी हूँ ।' लेकिन वह इतने दुखी और उदास थे कि मुझे उनसे दिली हमदर्दी हुई और उनके घाव पर नमक छिड़कने का विचार ही लज्जास्पद जान पड़ा। हाँ, अब मुझे अपने ऊपर कुछ अभिमान हुआ और आत्मसम्मान भी बढ़ा। भाई साहब का वह रौब मुझ पर न रहा। आज़ादी से खेलकूद में शरीक होने लगा। दिल मज़बूत था। अगर उन्होंने फिर मेरी फ़ज़ीहत की, तो साफ़ कह दूँगा – 'आपने अपना खून जलाकर कौन-सा तीर मार लिया ! मैं तो खेलते-कूदते दरजे में अव्वल आ गया ।' ज़बान से यह हेकड़ी जताने का साहस न होने पर भी मेरे रंग-ढंग से साफ़ ज़ाहिर होता था कि भाई साहब का वह आतंक मुझ पर नहीं था।
- (i)1 mark
'मेरे और उनके बीच में केवल दो साल का अंतर रह गया ।' – इस कथन में किस 'अंतर' की बात कही जा रही है ?
- (A)आयु
- (B)कक्षा
- (C)अनुभव
- (D)कद-काठी
- (ii)1 mark
बड़े भाई को आड़े हाथों लेने का विचार छोटे भाई के मन में क्यों आया ?
- (A)बड़े भाई साहब के लगातार दो बार कक्षा में फ़ेल होने के कारण
- (B)बड़े भाई साहब के फ़ेल होने और स्वयं के कक्षा में प्रथम आने के कारण
- (C)खेलते-कूदते हुए भी कक्षा में अव्वल आने के कारण
- (D)अपने भीतर बढ़ते अभिमान और आत्मसम्मान के कारण
- (iii)1 mark
प्रस्तुत गद्यांश की भाषा है :
- (A)तत्सम शब्दावली से युक्त
- (B)लोकोक्तियों से युक्त
- (C)देशज शब्दावली से युक्त
- (D)मुहावरों से युक्त
- (iv)1 mark
वार्षिक परीक्षा परिणाम का छोटे भाई पर क्या प्रभाव पड़ा ? इस प्रश्न का उत्तर उचित विकल्प का चयन कीजिए :
I. अपनी ही दृष्टि में अभिमान और सम्मान बढ़ने लगा।
II. बड़े भाई को अपमानित करने की योजना बनाने लगा।
III. बड़े भाई के साथ ज़्यादा समय व्यतीत करने लगा।
IV. खेल-कूद में ज़्यादा समय व्यतीत करने लगा।- (A)केवल I
- (B)I और II दोनों
- (C)I और IV दोनों
- (D)II और III दोनों
- (v)1 mark
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : बड़े भाई की फ़ज़ीहत करने का विचार लेखक को लज्जास्पद लगा।
कारण : वार्षिक परीक्षा में फेल होने के कारण वे दुखी और उदास थे।- (A)कथन ग़लत है, परन्तु कारण सही है।
- (B)कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
- (C)कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (D)कथन सही है, परन्तु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(i) दोनों भाइयों की कक्षाओं में अब केवल दो साल का अंतर रह गया, क्योंकि बड़े भाई फेल हुए और छोटा भाई आगे बढ़ गया। उत्तर (B)।
- 1 mark
(ii) बड़े भाई फेल हुए और स्वयं छोटा भाई कक्षा में प्रथम आया, इसी कारण उसे उन्हें आड़े हाथों लेने की इच्छा हुई। उत्तर (B)।
- 1 mark
(iii) गद्यांश में 'आड़े हाथों लेना', 'घाव पर नमक छिड़कना', 'तीर मार लेना', 'खून जलाना' जैसे मुहावरे हैं। उत्तर (D)।
- 1 mark
(iv) परिणाम से अपनी दृष्टि में अभिमान और आत्मसम्मान बढ़ा और वह खेलकूद में खुलकर शामिल होने लगा। कथन I और IV सही हैं। उत्तर (C)।
- 1 mark
(v) कथन सही है, और बड़े भाई के दुखी-उदास होने के कारण ही उसे फ़ज़ीहत करना लज्जास्पद लगा। कारण कथन की सही व्याख्या है। उत्तर (C)।
Answer: (i) B; (ii) B; (iii) D; (iv) C; (v) C
Where the marks are
- (i) B (1 अंक)
- (ii) B (1 अंक)
- (iii) D (1 अंक)
- (iv) C (1 अंक)
- (v) C (1 अंक)
2024 Course B, set 4/3/1, Q10 · 2 marks · MCQ
गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कर लिखिए :
- (i)1 mark
'व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।' – पंक्ति का भाव है –
- (A)जीवन की प्रत्येक घटना किसी उद्देश्य को लेकर घटित होती है।
- (B)सुख-दुख का सम्मिश्रण ही जीवन का आधार है।
- (C)विपरीत परिस्थितियाँ मनुष्य को सक्षम बनाने में सहायक हैं।
- (D)विपरीत परिस्थितियाँ मनुष्य को सुखों की ओर अग्रसर करती हैं।
- (ii)1 mark
बड़े भाई साहब को लेखक की निगरानी का पूरा और जन्मसिद्ध अधिकार क्यों था ?
- (A)आयु में बड़े होने के कारण
- (B)बड़ी जमात में पढ़ने के कारण
- (C)अधिक गुणी होने के कारण
- (D)पारिवारिक संस्कारों के कारण
Try it first, then show our solutionSolution
- 1 mark
(i) व्यथा हराती नहीं, आगे बढ़ाती है; इसका भाव यह है कि विपरीत परिस्थितियाँ मनुष्य को सक्षम बनाने में सहायक हैं। उत्तर (C)।
- 1 mark
(ii) बड़े भाई साहब को निगरानी का जन्मसिद्ध अधिकार पारिवारिक संस्कारों के कारण था, जिनमें बड़े का छोटे पर अनुशासन माना जाता है। उत्तर (D)।
Answer: (i) C; (ii) D
Where the marks are
- प्रत्येक सही विकल्प के लिए 1 अंक, कुल 2 अंक
Every प्रेमचंद – बड़े भाई साहब question, by year
Course A (0 questions, sample papers included)
Course B (20 questions, sample papers included)
- For 2027
Sample paper 2026-27: Q10 (6 marks, solved)
- 2026
Set 4/1/1: Q8 (6 marks, solved)
Set 4/2/1: Q10 (6 marks, solved)
Set 4/3/1: Q8 (6 marks, solved)
Sample paper 2025-26: Q8 (6 marks)
- 2025
Set 4/2/1: Q7 (5 marks, solved)
Set 4/3/1: Q7 (5 marks, solved)
Set 4/4/1: Q8 (6 marks, solved)
Set 4/5/1: Q8 (6 marks, solved)
Set 4/6/1: Q8 (6 marks, solved)
Sample paper 2024-25: Q8 (6 marks, solved)
Practice questions on प्रेमचंद – बड़े भाई साहब
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए कॉपी और किताब के हाशियों पर किसकी तसवीरें बनाते थे?
(क) पेड़ों, फूलों और नदियों की
(ख) चिड़ियों, कुत्तों और बिल्लियों की
(ग) राजाओं और बादशाहों की
(घ) पतंगों और गुल्ली-डंडे कीHint
पाठ के आरंभ में भाई साहब की 'रचनाओं' वाला अनुच्छेद याद कीजिए।
Answer
(ख) चिड़ियों, कुत्तों और बिल्लियों की।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
भाई साहब के अनुसार दोनों भाई दादा के भेजे पैसों के साथ क्या करते थे और दादा ने इससे कम पैसों में क्या कर दिखाया था? (25-30 शब्द)
Hint
महीने की 'बीस-बाईस' तारीख और नौ लोगों के परिवार वाली बात।
Answer
मूल्य-बिंदु: दोनों भाई महीने का खर्च बीस-बाईस तारीख तक उड़ा देते थे; फिर नाश्ता बंद, धोबी-नाई से मुँह चुराना; दादा ने इसके आधे में इज़्ज़त के साथ नौ लोगों का परिवार पाला।
आदर्श उत्तर: दोनों भाई दादा के भेजे पैसे बीस-बाईस तारीख तक खर्च कर देते थे और मोहताज हो जाते थे। दादा ने इससे आधे में इज़्ज़त से नौ लोगों का परिवार पाला।
Q3 · 2 marks · Short answerBoard level
'कहाँ थे?' सवाल का जवाब छोटा भाई केवल मौन से क्यों देता था? उसका मौन क्या कह देता था? (25-30 शब्द)
Hint
भाई साहब के 'रुद्र-रूप' और अपराध स्वीकार करने वाली बात सोचिए।
Answer
मूल्य-बिंदु: भाई साहब का रुद्र-रूप देखकर उसके प्राण सूख जाते थे; वह 'बाहर खेल रहा था' भी न कह पाता; उसका मौन मान लेता था कि उसने अपराध किया है।
आदर्श उत्तर: भाई साहब का रुद्र-रूप देखकर छोटा भाई डर जाता था और कुछ बोल नहीं पाता था। उसका मौन मान लेता था कि खेलने का अपराध उसी ने किया है।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
दूसरी बार फ़ेल होने के बाद भाई साहब के नरम पड़ जाने का कारण छोटा भाई क्या अनुमान लगाता है? इससे भाई साहब की कौन-सी मनोदशा झलकती है? (25-30 शब्द)
Hint
'डाँटने का अधिकार' वाली पंक्ति पर ध्यान दीजिए।
Answer
मूल्य-बिंदु: छोटे भाई का अनुमान: भाई साहब समझने लगे थे कि अब उन्हें डाँटने का अधिकार नहीं रहा, या बहुत कम रहा; डाँटने का अवसर पाकर भी धीरज रखते थे; यह उनकी झिझक और टूटे आत्मविश्वास का संकेत है (व्याख्या)।
आदर्श उत्तर: छोटे भाई को लगा कि भाई साहब अब मानते थे कि उन्हें डाँटने का अधिकार नहीं रहा। इससे झलकता है कि लगातार असफलता से उनका आत्मविश्वास कमज़ोर पड़ गया था।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder board level
'अंधे के हाथ बटेर लग गई' और गुल्ली-डंडे के 'अंधा-चोट निशाने' के उदाहरण से भाई साहब छोटे भाई की सफलता के बारे में क्या सिद्ध करना चाहते थे? (25-30 शब्द)
Hint
'सफल खिलाड़ी' की उनकी परिभाषा देखिए।
Answer
मूल्य-बिंदु: छोटे भाई की सफलता संयोग थी, मेहनत का फल नहीं; बटेर बार-बार हाथ नहीं लगती; सफल खिलाड़ी वही जिसका कोई निशाना खाली न जाए; उद्देश्य: घमंड तोड़ना।
आदर्श उत्तर: भाई साहब के अनुसार छोटे भाई का पास होना संयोग था, मेहनत का फल नहीं। ऐसी सफलता बार-बार नहीं मिलती; सफल वही है जिसका कोई निशाना खाली न जाए।
Q6 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level
निम्नलिखित कथन और कारण को पढ़कर सही विकल्प चुनिए—
कथन (A): भाई साहब ने छोटे भाई को बाज़ारी लड़कों के साथ कनकौए के लिए दौड़ने पर डाँटा।
कारण (R): भाई साहब को स्वयं कनकौए उड़ाने में कोई रुचि नहीं थी।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।Hint
पाठ के अंत में भाई साहब ने अपने मन की कौन-सी बात मानी?
Answer
(ग) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है। भाई साहब ने स्वयं कहा, 'मेरा भी जी ललचाता है'; वे केवल बड़े होने के कर्तव्य के कारण रोकते थे, और अंत में खुद डोर पकड़कर दौड़े।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
पाठ प्रवेश और कहानी के आधार पर बताइए कि क्या घर का बड़ा होना केवल अधिकार है या ज़िम्मेदारी भी? अपने अनुभव से एक उदाहरण देकर समझाइए। (25-30 शब्द)
Hint
'खुद बेराह चलूँ, तो तुम्हारी रक्षा कैसे करूँ?' वाली पंक्ति को अपने घर से जोड़िए।
Answer
मूल्य-बिंदु: बड़ा होना ज़िम्मेदारी भी है; भाई साहब आदर्श बने रहने के लिए अपनी इच्छाएँ दबाते थे; अपना उदाहरण: छोटे भाई-बहन के सामने अच्छी आदतें दिखाना।
आदर्श उत्तर: बड़ा होना ज़िम्मेदारी भी है। भाई साहब छोटे भाई की रक्षा के लिए इच्छाएँ दबाते थे। मैं भी छोटी बहन के सामने देर रात फ़ोन नहीं चलाता।
Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
छोटे भाई ने बड़ा-सा टाइम-टेबिल बनाया, पर पहले ही दिन उसका पालन टूट गया। पाठ के आधार पर बताइए कि उसकी योजना में क्या कमी थी और आप पढ़ाई तथा खेल का संतुलन कैसे बनाएँगे। (25-30 शब्द)
Hint
उसके टाइम-टेबिल में 'खेलकूद की मद' का क्या हुआ था?
Answer
मूल्य-बिंदु: उसके टाइम-टेबिल में खेल का समय बिलकुल नहीं था; सुबह छह से रात ग्यारह तक पढ़ाई ही पढ़ाई (बस आधा घंटा टहलना); इसलिए वह व्यावहारिक नहीं था; अपनी योजना में खेल और विश्राम दोनों को जगह।
आदर्श उत्तर: उसके टाइम-टेबिल में खेल का समय बिलकुल नहीं था, इसलिए वह टूट गया। मैं पढ़ाई के साथ शाम को एक घंटा खेल रखूँगा, ताकि योजना निभ सके।
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1.दोनों भाइयों की उम्र और कक्षा कहानी के आरंभ में क्या थी?Show answer
छोटा भाई नौ साल का, पाँचवीं में; भाई साहब चौदह साल के, नौवीं में।
2.भाई साहब छोटे भाई से हमेशा पहला सवाल क्या पूछते थे?Show answer
'कहाँ थे?'
3.किस पंक्ति में बार-बार फ़ेल होने को 'पक्की नींव' कहा गया है?Show answer
'बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने।'
4.पहली बार अव्वल आने के बाद भाई साहब ने किन तीन घमंडियों का उदाहरण दिया?Show answer
रावण, शैतान और शाहेरूम।
5.भाई साहब के अनुसार इतिहास और ज्यामिति में नंबर किन भूलों पर कट जाते थे?Show answer
हेनरी सातवें की जगह आठवाँ लिखने और 'अ ब ज' की जगह 'अ ज ब' लिखने पर।
6.दूसरी परीक्षा के बाद छोटे भाई को कौन-सा नया शौक लगा?Show answer
कनकौए (पतंग) उड़ाने का।
7.किस व्यक्ति का घर उसकी बूढ़ी माँ ने सँभाला, और इससे क्या सिद्ध हुआ?Show answer
ऑक्सफ़ोर्ड के एम.ए. हेडमास्टर साहब का; अनुभव डिग्री से बड़ा है।
8.कहानी किस दृश्य पर समाप्त होती है?Show answer
भाई साहब छोटे भाई को गले लगाते हैं, फिर उछलकर कटे कनकौए की डोर पकड़कर होस्टल की ओर दौड़ते हैं; छोटा भाई पीछे दौड़ता है।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप बता सकते हैं कि भाई साहब पाँच साल बड़े होकर भी केवल तीन दरजे आगे क्यों थे?
- क्या आप छोटे भाई के टाइम-टेबिल के टूटने का कारण एक वाक्य में लिख सकते हैं?
- क्या आप पहली और दूसरी परीक्षा के बाद छोटे भाई के व्यवहार का अंतर बता सकते हैं?
- क्या आप 'रा-शै-शा' के तीनों उदाहरण और उनका बुरा अंत बिना देखे लिख सकते हैं?
- क्या आप रटंत शिक्षा पर व्यंग्य के तीन उदाहरण (हेनरी, अ ब ज, चार पन्ने) याद कर सकते हैं?
- क्या आप दादा, अम्माँ और हेडमास्टर की माँ के उदाहरण से 'अनुभव बनाम किताबी ज्ञान' समझा सकते हैं?
- क्या आप बता सकते हैं कि छोटे भाई के मन में श्रद्धा क्यों जागी और भाई साहब ने क्या स्वीकार किया?
प्रेमचंद – बड़े भाई साहब: frequently asked questions
बड़े भाई साहब छोटे भाई से कितने बड़े थे और किस कक्षा में थे?
बड़े भाई साहब छोटे भाई से पाँच साल बड़े थे, पर केवल तीन दरजे आगे थे। कहानी के आरंभ में वे चौदह साल के थे और नौवीं में पढ़ते थे। छोटा भाई नौ साल का था और पाँचवीं में था।
बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ क्यों दबानी पड़ती थीं?
वे घर में बड़े थे और चाहते थे कि उनका हर काम छोटे भाई के लिए मिसाल बने। उन्हें लगता था कि अगर वे खुद खेल-कूद में भटक गए तो छोटे भाई की रक्षा नहीं कर पाएँगे। इसलिए पतंग उड़ाने को जी ललचाने पर भी वे खुद को रोकते थे।
'बड़े भाई साहब' कहानी का मूल संदेश क्या है?
कहानी बताती है कि समय से पहले मिली बड़ी ज़िम्मेदारी बच्चे का बचपन छीन लेती है। यह रटंत शिक्षा पर व्यंग्य करती है और बताती है कि असली समझ जीवन के अनुभव से आती है। साथ ही यह घमंड से बचने और बड़ों का आदर करने की सीख देती है।
छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा कब और क्यों जागी?
पतंग लूटते पकड़े जाने के बाद भाई साहब ने अनुभव के महत्त्व और अपने कर्तव्य की बात समझाई। तब छोटे भाई को अपनी लघुता का अनुभव हुआ। उसे समझ आया कि भाई साहब उसके भले के लिए ही डाँटते हैं, इसलिए उसके मन में श्रद्धा उत्पन्न हुई।
मोह और माया के बंधन वाला दृष्टांत क्यों दिया गया है?
यह दृष्टांत छोटा भाई अपनी खेल-कूद की आदत समझाने के लिए देता है। जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह-माया में बँधा रहता है, वैसे ही डाँट और घुड़कियाँ खाकर भी वह खेल नहीं छोड़ पाता था। इससे खेल के प्रति उसका गहरा लगाव दिखता है।
कहानी के अंत में भाई साहब का पतंग की डोर पकड़ना क्या बताता है?
इससे पता चलता है कि भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा छिपा था, जिसे वे ज़िम्मेदारी के कारण दबाए रखते थे। उपदेश के बाद जब उन्होंने अपनी इच्छा मान ली, तो वह बच्चा बाहर आ गया। यह अंत कहानी को हल्का और मार्मिक बना देता है।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम-ब (085), कक्षा 10, 2026-27; NCERT स्पर्श भाग 2 (Reprint 2026-27), बड़े भाई साहब