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HindiCBSE Class 10 · Course A · Board exam 2025, set 3/6/1 · 7 marks · Case-based

CBSE Class 10 Hindi Course A 2025: question 1

Set in the CBSE Class 10 board exam of 2025, paper 3/6/1, section A, question 1, for 7 marks. Try it first; the hints and our step-by-step solution are below.

Q1 · 7 marks · Case-basedCompetency-basedकबीर – साखी

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

शिक्षकों को अपने यहाँ बहुत से विशेषणों से संबोधित किया जाता रहा है। शिक्षक को राष्ट्र-निर्माता कहा जाता है। युवा पीढ़ी का सुधारक, मशाल-वाहक और पथ-प्रदर्शक भी कहा जाता है। शिक्षक शिक्षा के साथ-साथ अपने शिष्यों को जीवन-कौशल और नैतिक मूल्यों का भी ज्ञान प्रदान करते हैं। मानव जाति के लिए नई सोच और दृष्टिकोण की अपेक्षा भी शिक्षकों से ही की जाती है। शिक्षकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका समाज को सशक्त और समृद्ध बनाने में भी है।

हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राचीन ग्रंथों में जगह-जगह एक आदर्श गुरु के गुणों को वर्णित किया गया है। स्कंद पुराण के गुरु-स्तोत्रम् में तो गुरुओं की तुलना ब्रह्मा, विष्णु और महेश से की गई है तथा गुरु को साक्षात् परब्रह्म माना गया है। एक अच्छे गुरु में गहन ज्ञान, विद्वत्ता, करुणा, नैतिकता व चरित्र, नवीनता, नवाचार, अनुशासनप्रियता और समानता का भाव अपेक्षित है। यही गुण एक गुरु को महान बनाते हैं और शिष्यों के जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। अपनी सदी के महान कवि और संत कबीरदास जी ने भी कहा है – 'गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट' – अर्थात् गुरु कुम्हार है और शिष्य घड़ा है जो गढ़-गढ़ कर शिष्य की कमियों को दूर करता है। शिक्षक अपने सफल मार्गदर्शन द्वारा शिष्यों को उनकी शक्तियों से परिचित कराते हुए उनके विकास के मार्ग को प्रशस्त करते हैं। शिक्षक समाज के भविष्य निर्माताओं को तैयार करने में एक अहम भूमिका निभाते हैं।

  1. (क)

    शिक्षक शिक्षा के साथ-साथ शिष्यों को प्रदान करता है –

    1. (A)नैतिक मूल्यों का ज्ञान
    2. (B)धन-अर्जित करने का ज्ञान
    3. (C)पेशेवर विकास का ज्ञान
    4. (D)भविष्य सुनिश्चित करने का ज्ञान
    1 mark
  2. (ख)

    गुरु को ब्रह्मा क्यों कहा गया है ?

    1. (A)छात्रों के हित गुरु के भीतर छिपी कल्याण-भावना के कारण
    2. (B)समाज के भविष्य निर्माताओं को तैयार करने की भूमिका के कारण
    3. (C)छात्रों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने के कारण
    4. (D)रोजगार हेतु विद्यार्थियों में कौशल विकसित करने के कारण
    1 mark
  3. (ग)

    निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कीजिए :
    कथन : मानव जाति के लिए नई सोच और दृष्टिकोण विकसित करना शिक्षक का दायित्व है।
    कारण : हमारी ज्ञान परंपरा और ग्रंथों में गुरु को महान बताया गया है।

    1. (A)कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
    2. (B)कारण सही है लेकिन कथन गलत है।
    3. (C)कथन सही है लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
    4. (D)कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
    1 mark
  4. (घ)

    शिक्षक को पथ-प्रदर्शक क्यों कहा जाता है ? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।

    2 marks
  5. (ङ)

    कबीरदास जी ने गुरु की तुलना कुम्हार से क्यों की है ? किन्हीं दो कारणों को स्पष्ट कीजिए।

    2 marks

Source: official question paper from cbse.gov.in (PDF). See it in the full 2025 board paper, set 3/6/1.

Hints

Open one hint at a time and try again before the next.

Hint 1

गद्यांश की पहली पंक्तियाँ फिर पढ़िए; शिक्षक शिष्यों को क्या-क्या देता है?

Hint 2

ब्रह्मा का कार्य क्या है, उसे गुरु की भूमिका से जोड़िए।

Hint 3

कुम्हार घड़े के साथ जो करता है, वही गुरु शिष्य के साथ करता है।

Step-by-step solution

Each step shows the marks it earns, as an examiner would award them. Checked by an independent re-solve from the question paper.

  1. (क) गद्यांश के अनुसार शिक्षक शिक्षा के साथ जीवन-कौशल और नैतिक मूल्यों का ज्ञान देते हैं। उत्तर: (A) नैतिक मूल्यों का ज्ञान।

    1 mark
  2. (ख) ब्रह्मा सृष्टिकर्ता हैं; उसी प्रकार गुरु समाज के भविष्य-निर्माताओं को तैयार करता है। उत्तर: (B)।

    1 mark
  3. (ग) कथन सही है, क्योंकि नई सोच की अपेक्षा शिक्षकों से की जाती है। कारण भी सही है, पर वह कथन की व्याख्या नहीं करता। उत्तर: (C)।

    1 mark
  4. (घ) शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा और शक्तियों को पहचानकर उन्हें विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाता है, इसलिए वह पथ-प्रदर्शक है।

    1 mark
  5. (घ) वह जीवन-कौशल और नैतिक मूल्यों का ज्ञान देकर सही-गलत की दिशा दिखाता है और जीवन-पथ पर मार्गदर्शन करता है।

    1 mark
  6. (ङ) जैसे कुम्हार घड़े को गढ़कर उसे आकार देता है, वैसे ही गुरु शिष्य के व्यक्तित्व को आकार देता है।

    1 mark
  7. (ङ) जैसे कुम्हार घड़े के दोष दूर करता है, वैसे ही गुरु शिष्य की कमियों और बुराइयों को पहचानकर दूर करता है।

    1 mark

Answer: (क) A; (ख) B; (ग) C; (घ) प्रतिभा पहचानकर विकास-मार्ग पर बढ़ाना, जीवन-कौशल व नैतिक मूल्य देना; (ङ) व्यक्तित्व को आकार देना, कमियाँ दूर करना

Where the marks are

  • (क) सही विकल्प A (1 अंक)
  • (ख) सही विकल्प B (1 अंक)
  • (ग) सही विकल्प C (1 अंक)
  • (घ) दो उपयुक्त बिंदु (1+1=2 अंक)
  • (ङ) दो उपयुक्त कारण (1+1=2 अंक)

Revise the chapter

The question is transcribed from the official paper; figures are described in words. The solution, hints and chapter tag are ours. Spotted an error? Write tosupport@questionbuddy.in.