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HindiCBSE Class 10 · कबीर – साखी

कबीर की साखियाँ (स्पर्श भाग 2): अहंकार-त्याग, आत्म-सुधार और प्रेम का ज्ञान

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

कबीर की आठ साखियाँ बताती हैं कि ईश्वर बाहर नहीं, हर प्राणी के भीतर है। उसे पाने के लिए मधुर वाणी, अहंकार (आपा) का त्याग, निंदक से आत्म-सुधार और पुस्तकीय ज्ञान के स्थान पर प्रेम का एक अक्षर आवश्यक है। जब तक 'मैं' था तब तक हरि नहीं मिले; अहंकार मिटते ही हरि मिल गए। अंतिम साखी में घर जलाना मोह-माया त्यागने का प्रतीक है।

Understand कबीर की साखियाँ: अहंकार-त्याग, आत्म-सुधार और प्रेम का ज्ञान

साखी दोहा छंद है और 'साखी' शब्द 'साक्षी' का तद्भव रूप है, जिसका अर्थ प्रत्यक्ष ज्ञान है। पाठ में कबीर की आठ साखियाँ हैं।

(1) मीठी वाणी: मन का आपा (अहंकार) खोकर ऐसी बोली बोलो जिससे अपना तन शीतल हो और दूसरों को सुख मिले।
(2) कस्तूरी और मृग: कस्तूरी हिरण की नाभि में होती है, पर वह उसे बन में ढूँढता फिरता है। इसी तरह ईश्वर हर प्राणी के भीतर है, पर दुनिया उसे देख नहीं पाती।
(3) अहंकार और ईश्वर: जब तक 'मैं' था तब तक हरि नहीं; अहंकार मिटते ही हरि मिले। भीतर ज्ञान का दीपक दिखा तो अज्ञान का अँधेरा मिट गया।
(4) सुखिया और दुखिया: संसार खाने और सोने में मस्त है, इसलिए सुखी दिखता है। कबीर दुखी हैं, क्योंकि वे जागते और रोते हैं। यहाँ सोना अज्ञान का और जागना ज्ञान व ईश्वर के प्रति चिंता का प्रतीक है।
(5) विरह-भुवंगम: विरह साँप की तरह शरीर में बसा है, जिस पर कोई मंत्र असर नहीं करता। राम से बिछुड़ा व्यक्ति जीवित नहीं रहता, और रहे भी तो पागल-सा हो जाता है।
(6) निंदक: निंदक को पास, आँगन में कुटिया बनाकर रखो; वह बिना साबुन और पानी के हमारे स्वभाव को निर्मल करता है।
(7) पोथी ज्ञान और प्रेम: मोटी पुस्तकें पढ़-पढ़कर दुनिया मर गई, पर कोई सच्चा पंडित न बना। जो प्रिय (ईश्वर) के प्रेम का एक अक्षर पढ़ ले, वही पंडित है।
(8) घर जलाना: कबीर ने अपना घर जला दिया है और हाथ में जलती लकड़ी (मुराड़ा) ले ली है। अब वे उसका घर भी जलाएँगे जो उनके साथ चलेगा। यहाँ घर मोह-माया और अहंकार का प्रतीक है।

शब्दार्थ: आपा = अहंकार; भुवंगम = साँप; नेड़ा = निकट; पीव = प्रिय; मुराड़ा = जलती लकड़ी। कस्तूरी-मृग वाली साखी में दृष्टांत, विरह की साखी में रूपक और 'घटि घटि' में पुनरुक्ति प्रकाश है।

कबीर की साखियाँ: अहंकार-त्याग, आत्म-सुधार और प्रेम का ज्ञान: key facts

आठ साखियाँ
  • मीठी वाणी
  • कस्तूरी-मृग
  • अहंकार और हरि
  • सुखिया-दुखिया
  • विरह-भुवंगम
  • निंदक
  • पोथी और प्रेम
  • घर जलाना
क्रम से आठ का एक-एक शब्द याद रखें।
शब्दार्थ
आपाअहंकार
भुवंगमसाँप
नेड़ानिकट
पीवप्रिय
मुराड़ाजलती लकड़ी
अर्थ-प्रश्न में सीधे अंक।
मुख्य शिक्षाएँ
  • अहंकार त्यागो
  • मधुर बोलो
  • निंदक को निकट रखो
  • प्रेम को ज्ञान से बड़ा मानो
भाव-प्रश्न के लिए।

कबीर की साखियाँ: अहंकार-त्याग, आत्म-सुधार और प्रेम का ज्ञान in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

सच्ची आलोचना

मान लीजिए किसी छात्र का मित्र हर बार उसकी लिखावट की कमियाँ बताता है। शुरू में बुरा लगता है, पर महीनों बाद उसकी लिखावट सुधर जाती है।

यह किस साखी से मेल खाता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कमियाँ बताने वाला मित्र = निंदक।
  2. उसे पास रखना = आँगन में कुटिया बँधवाना।
  3. लिखावट सुधरना = स्वभाव का निर्मल होना।

Answer: 'निंदक नेड़ा राखिये, आँगणि कुटी बँधाइ' वाली साखी से।

Memory hook: निंदक पास रखो, आत्म-सुधार करो।

मैं की दीवार

मान लीजिए दो दोस्त हर बात में अपनी बात ऊपर रखने की ज़िद करते हैं और जब एक अपनी ज़िद छोड़ता है तो मित्रता फिर गहरी हो जाती है।

यह किस साखी का भाव है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. ज़िद = अहंकार।
  2. ज़िद छोड़ना = 'मैं' मिटना।
  3. मित्रता का लौटना = हरि का मिलना।

Answer: 'जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि' का भाव।

Memory hook: 'मैं' हटे, तो रिश्ता बने।

Tricks to remember कबीर की साखियाँ: अहंकार-त्याग, आत्म-सुधार और प्रेम का ज्ञान

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • मी-क-अ-सु-वि-नि-पो-घ

    आठों साखियों के शब्द: मीठी, कस्तूरी, अहंकार, सुखिया, विरह, निंदक, पोथी, घर।

    Use it when: आठों का क्रम पक्का करने के लिए।

  • आपा = अहंकार

    आपा खोना = अहंकार छोड़ना।

    Use it when: शब्दार्थ में बार-बार आता है।

कबीर की साखियाँ: अहंकार-त्याग, आत्म-सुधार और प्रेम का ज्ञान: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: आपा का अर्थ · 1 mark · MCQBoard level

'ऐसी बाँणी बोलिये, मन का आपा खोइ' में 'आपा' का अर्थ है
(क) शरीर (ख) अहंकार (ग) क्रोध (घ) ज्ञान

Try it first, then show the solutionSolution
  1. साखी के भाव से अर्थ जोड़ें।

Answer: (ख) अहंकार।

Example 2: कस्तूरी-मृग का दृष्टांत · 2 marks · Short answerBoard level

कबीर ने कस्तूरी-मृग का उदाहरण किस बात को समझाने के लिए दिया है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कस्तूरी कहाँ होती है और मृग कहाँ ढूँढता है?

Answer: कस्तूरी हिरण की नाभि में होती है, पर वह उसे जंगल में ढूँढता है। कबीर इससे समझाते हैं कि ईश्वर हर प्राणी के भीतर है, पर मनुष्य अज्ञानवश उसे बाहर खोजता फिरता है।

Example 3: अहंकार और हरि · 2 marks · Short answerHarder board level

'जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि' का भाव स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. 'मैं' यहाँ अहंकार है।

Answer: यहाँ 'मैं' का अर्थ अहंकार है। कबीर कहते हैं कि अहंकार और ईश्वर साथ नहीं रह सकते; जब तक अहंकार था, हरि नहीं मिले, और अहंकार मिटते ही हरि मिल गए।

Example 4: काव्यांश पर आधारित प्रश्न · 5 marks · Source-basedHarder board level

कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि।
ऐसैं घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखै नाँहिं॥
(i) 'कुंडलि' का अर्थ है
(क) जंगल (ख) नाभि-स्थल (ग) सुगंध (घ) सींग
(ii) कबीर ने उदाहरण किसका दिया है
(क) मृग का (ख) शेर का (ग) हाथी का (घ) मोर का
(iii) 'घटि घटि' से तात्पर्य है
(क) घड़े-घड़े (ख) प्रत्येक प्राणी के भीतर (ग) घाट-घाट (घ) घर-घर
(iv) यह अंश किसका प्रमाण है
(क) ईश्वर की व्यापकता का (ख) मृग की गति का (ग) जंगल की सुंदरता का (घ) सुगंध के प्रकार का
(v) 'दुनियाँ देखै नाँहिं' का कारण है
(क) अज्ञान (ख) भय (ग) लोभ (घ) थकान

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रत्येक उप-प्रश्न 1 अंक का है।

Answer: (i) (ख); (ii) (क); (iii) (ख); (iv) (क); (v) (क)।

Example 5: निंदक की उपयोगिता · 2 marks · Short answerHOTS / competency

कबीर निंदक को आँगन में कुटिया बनाकर पास रखने की सलाह क्यों देते हैं? आज के संदर्भ में इसकी उपयोगिता बताइए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. निंदक बिना साबुन-पानी के क्या करता है?

Answer: निंदक हमारी कमियाँ बताकर बिना साबुन-पानी के हमारे स्वभाव को निर्मल करता है। आज भी सच्ची आलोचना से आत्म-सुधार होता है, इसलिए आलोचक को शत्रु नहीं, सुधारक मानना चाहिए।

Where students lose marks in कबीर की साखियाँ: अहंकार-त्याग, आत्म-सुधार और प्रेम का ज्ञान

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: आपा का अर्थ 'अपना' लिखना

    शब्दार्थ गलत होने पर पूरा भाव बिगड़ता है।

    Wrong working

    आपा = अपना।

    Right working

    आपा = अहंकार।

    Do this: शब्दार्थ की सूची दोहराएँ।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: दृष्टांत का निष्कर्ष न देना

    उदाहरण और उससे सिद्ध बात, दोनों चाहिए।

    Wrong working

    मृग कस्तूरी ढूँढता है।

    Right working

    मृग की तरह मनुष्य ईश्वर को बाहर ढूँढता है, जबकि वह भीतर है।

    Do this: उदाहरण + निष्कर्ष।

    Usually costs: 1-2 अंक

  • Mistake: साखी और दोहा का भेद उलझाना

    साखी दोहा छंद है, पर शब्द साक्षी से बना है।

    Wrong working

    साखी कोई अलग छंद है।

    Right working

    साखी दोहा छंद में लिखी जाती है; शब्द साक्षी का तद्भव है।

    Do this: दोनों पहचान याद रखें।

    Usually costs: 1 अंक

Exam tips

  • शब्दार्थ (आपा, भुवंगम, नेड़ा, पीव, मुराड़ा) पक्के कर लें।
  • दृष्टांत के प्रश्न में उदाहरण के बाद निष्कर्ष अवश्य लिखें।
  • कथन-कारण प्रश्न में प्रत्येक कथन को साखी से अलग-अलग जाँचें।
  • प्रतीक (घर, सोना-जागना) का अर्थ लिखकर पंक्ति का भाव दें।
  • दोहे की पंक्ति को ज्यों-का-त्यों उद्धृत करें।

Practice questions on कबीर की साखियाँ: अहंकार-त्याग, आत्म-सुधार और प्रेम का ज्ञान

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    'भुवंगम' का अर्थ क्या है?
    (क) फूल (ख) साँप (ग) दीपक (घ) नदी

    Hint

    विरह की साखी देखें।

    Answer

    (ख) साँप।

  2. Q2 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level

    कथन (A): कबीर स्वयं को दुखी कहते हैं।
    कारण (R): वे संसार की तरह खाते-सोते नहीं, जागकर ईश्वर के लिए रोते हैं।
    (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
    (ख) A और R दोनों सही हैं पर R, A की व्याख्या नहीं
    (ग) A सही है, R गलत
    (घ) A गलत है, R सही

    Hint

    सुखिया-दुखिया वाली साखी का सोने-जागने का अर्थ देखें।

    Answer

    (क) जागना और रोना ज्ञान तथा ईश्वर की चिंता का प्रतीक है, यही दुखी होने का कारण है।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level

    'बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ' में कौन-सा अलंकार है और भाव क्या है? (25-30 शब्द)

    Hint

    विरह पर साँप का आरोप है।

    Answer

    यहाँ रूपक अलंकार है, क्योंकि विरह (उपमेय) पर भुवंगम (उपमान) का आरोप है। भाव यह है कि ईश्वर-वियोग की पीड़ा साँप के विष जैसी असाध्य है, जिस पर कोई मंत्र काम नहीं करता।

  4. Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level

    पोथी ज्ञान की अपेक्षा प्रेम को श्रेष्ठ मानने का कबीर का तर्क समझाइए। (25-30 शब्द)

    Hint

    'ऐकै अषिर पीव का' पर ध्यान दें।

    Answer

    कबीर के अनुसार मोटी पुस्तकें पढ़कर भी कोई सच्चा पंडित नहीं बना। जो ईश्वर-प्रेम का केवल एक अक्षर पढ़ ले, वही ज्ञानी है, क्योंकि प्रेम का अनुभव शास्त्र-ज्ञान से बड़ा है।

  5. Q5 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    'हम घर जाल्या आपणाँ, लिया मुराड़ा हाथि' का प्रतीकार्थ स्पष्ट कीजिए और बताइए कि यह आज के लिए क्या सीख देता है। (25-30 शब्द)

    Hint

    घर और मुराड़ा के प्रतीकार्थ।

    Answer

    घर मोह-माया और अहंकार का, तथा मुराड़ा ज्ञान की जलती लकड़ी का प्रतीक है। सीख यह है कि सच्चे मार्ग पर चलने के लिए स्वार्थ और मोह त्यागने का साहस चाहिए।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.साखी शब्द का मूल रूप क्या है?Show answer

    साक्षी (तद्भव रूप साखी)।

  2. 2.साखी में कितने दोहे हैं?Show answer

    आठ।

  3. 3.मृग कस्तूरी कहाँ ढूँढता है?Show answer

    बन (जंगल) में, जबकि वह उसकी नाभि में है।

  4. 4.निंदक को कहाँ रखने को कहा गया है?Show answer

    निकट, आँगन में कुटिया बनाकर।

  5. 5.मुराड़ा क्या है?Show answer

    जलती हुई लकड़ी।

कबीर की साखियाँ: अहंकार-त्याग, आत्म-सुधार और प्रेम का ज्ञान: frequently asked questions

साखियों का मुख्य संदेश क्या है?

ईश्वर भीतर है; अहंकार छोड़ें, प्रेम और अनुभव को ज्ञान से बड़ा मानें।

कबीर की भाषा कैसी है?

अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी शब्दों से मिली-जुली भाषा।

घर जलाने का अर्थ क्या है?

मोह-माया और अहंकार का त्याग।

परीक्षा में कैसे प्रश्न आते हैं?

काव्यांश के 5 MCQ (कथन-कारण सहित) और 25-30 शब्दों के 2 अंक के प्रश्न।