माता का अँचल (कृतिका भाग 2): पिता का स्नेह और माँ के आँचल की शरण
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
इस पाठ में भोलानाथ का पिता से गहरा स्नेह दिखाया गया है: वही उसे सुलाते, नहलाते, पूजा में साथ बैठाते और खेल में हार जाते हैं। फिर भी साँप से डरकर घायल भोलानाथ पिता की पुकार अनसुनी करके सीधे माँ की गोद में छिप जाता है। इससे संकेत मिलता है कि संकट के क्षण में बच्चे को सबसे बड़ी सुरक्षा और आश्वासन माँ के आँचल में मिलता है।
Father gives love and play, but in real fear Bholanath runs past him to his mother's aanchal for safety.
Illustration drawn for QuestionBuddy.
Understand माता का अँचल: पिता का स्नेह और माँ के आँचल की शरण
भोलानाथ का असली नाम तारकेश्वरनाथ है। पिता उसे प्यार से 'भोलानाथ' कहते हैं। वह पिता को 'बाबू जी' और माँ को 'मइयाँ' कहता है। वह बचपन से पिता के साथ बाहर की बैठक में सोता है; माँ से उसका नाता केवल दूध पीने तक है।
पिता का स्नेह। बाबू जी तड़के उठकर नहाते और पूजा करते हैं। वे बच्चे को भी नहलाकर बिठाते और माथे पर भभूत का त्रिपुंड लगाते हैं। रामायण-पाठ के समय बच्चा आइने में अपना मुँह देखता है। पिता राम-नाम लिखते हैं, आटे की गोलियाँ बनाकर गंगा में मछलियों को खिलाने जाते हैं और बच्चा कंधे पर बैठा रहता है। लौटते समय वे उसे पेड़ की डाल पर झूला झुलाते और कुश्ती में जानबूझकर हार जाते हैं। वे अपने हाथ से गोरस-भात खिलाते हैं।
माँ का ममत्व। मइयाँ कहती है कि बच्चे को बड़े कौर खिलाने चाहिए; वह तोता, मैना, कबूतर जैसे नामों से कौर बनाकर खिलाती है। वह कड़वा तेल डालती, काजल लगाती, चोटी गूँथती और बेटे को 'कन्हैया' बना देती है।
बच्चों का संसार। बाहर साथियों को देखते ही भोलानाथ रोना भूल जाता है। बच्चे चबूतरे पर मिठाई की दुकान, घरौंदा, ज्योनार, बरात का जुलूस और खेती जैसे खेल खेलते हैं। बाबू जी शामिल होने आते हैं तो बच्चे हँसकर भाग जाते हैं। वे दूल्हे की पालकी को देखकर तुकबंदी चिल्लाते हैं, आँधी के बाद बाग में आम चुनते हैं। बिच्छू के भय से भागते समय बैजू मूसन तिवारी को चिढ़ाता है, तिवारी जी पाठशाला में शिकायत करते हैं और भोलानाथ पकड़ा जाता है। गुरु जी सज़ा देते हैं और बाबू जी विनती करके उसे घर ले चलते हैं। रास्ते में साथियों को गाते देखकर वह फिर उनमें मिल जाता है।
अंतिम घटना। बच्चे चूहों के बिल में पानी डालते हैं; बिल से साँप निकल आता है। वे डरकर भागते, गिरते और घायल हो जाते हैं। घर पहुँचकर भोलानाथ बाबू जी की पुकार अनसुनी करके सीधे मइयाँ की गोद में छिप जाता है। मइयाँ रो पड़ती है और घावों पर हल्दी लगाती है। बाबू जी उसे गोद में लेना चाहते हैं, पर वह माँ का आँचल नहीं छोड़ता।
परीक्षा में पिता-पुत्र संबंध, माँ का ममत्व, बच्चों के खेल और अंतिम घटना का कारण 50-60 शब्दों में पूछे जाते हैं।
माता का अँचल: पिता का स्नेह और माँ के आँचल की शरण: key facts
- पिता के कार्य
- नहलाना और पूजा
- रामायण-पाठ
- मछलियों को आटे की गोलियाँ
- झूला झुलाना
- कुश्ती में हारना
- स्नेह-प्रश्न में तीन-चार कार्य।
- माँ के कार्य
- बड़े कौर खिलाना
- कड़वा तेल, काजल, चोटी
- कन्हैया बनाना
- घाव पर हल्दी
- ममत्व-प्रश्न में।
- बच्चों के खेल
- मिठाई की दुकान
- घरौंदा, ज्योनार
- बरात का जुलूस
- खेती
- आम चुनना
- खेल के उदाहरण।
माता का अँचल: पिता का स्नेह और माँ के आँचल की शरण in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
डर में माँ की याद
मान लीजिए रात में डरावना सपना देखकर एक बच्चा पिता के पास सोया होने पर भी नींद में माँ का नाम पुकारता है और माँ के पास जाकर शांत हो जाता है।
यह पाठ के किस प्रसंग से मेल खाता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- डर = साँप का भय।
- पिता के पास होना = बाबू जी की पुकार।
- माँ की ओर जाना = मइयाँ की गोद में छिपना।
Answer: अंतिम घटना से; संकट में माँ की ममता सबसे सहज शरण होती है।
Memory hook: डर में सबसे पहले माँ याद आती है।
पिता और बच्चे का खेल
मान लीजिए एक पिता अपने छोटे बच्चे से कुश्ती में जानबूझकर हार जाता है और बच्चा खुशी से उछल पड़ता है।
यह पिता के किस व्यवहार से मेल खाता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- जानबूझकर हारना = बाबू जी का कुश्ती में हारना।
- बच्चे की खुशी = स्नेह का सुख।
Answer: बाबू जी का बच्चे के साथ मित्रवत व्यवहार।
Memory hook: बच्चे को जिताना भी प्यार की भाषा है।
Tricks to remember माता का अँचल: पिता का स्नेह और माँ के आँचल की शरण
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
पि-मा-सा
पिता का स्नेह, माँ का ममत्व, साँप का भय: तीन चरण।
Use it when: अंतिम घटना के प्रश्न में।
बाबू-मइयाँ
बाबू जी = साथ-संग का स्नेह; मइयाँ = सुरक्षा की ममता।
Use it when: तुलना-प्रश्न में।
माता का अँचल: पिता का स्नेह और माँ के आँचल की शरण: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: भोलानाथ का असली नाम · 1 mark · MCQBoard level
भोलानाथ का असली नाम क्या है?
(क) रामनाथ (ख) तारकेश्वरनाथ (ग) विश्वनाथ (घ) शिवनाथ
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ के आरंभ में नाम दिया गया है।
Answer: (ख) तारकेश्वरनाथ।
Example 2: पिता के साथ भोलानाथ · 2 marks · Short answerBoard level
भोलानाथ पिता के साथ कौन-कौन-से काम करता था? कोई दो लिखिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पूजा, गंगा, झूला आदि।
Answer: भोलानाथ पिता के साथ तड़के नहाकर पूजा में बैठता, रामायण-पाठ सुनता और गंगा में आटे की गोलियाँ लेकर मछलियों को खिलाने जाता था। लौटते समय पिता उसे झूला भी झुलाते थे।
Example 3: माँ का खिलाना · 4 marks · Long answerHarder board level
माँ भोलानाथ को खाना कैसे खिलाती थी और वह इसे बाबू जी के खिलाने से कैसे भिन्न मानती थी? उत्तर 50-60 शब्दों में लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- गोरस-भात और बड़े कौर देखें।
Answer: बाबू जी हाथ से गोरस-भात खिलाते थे, पर माँ कहती थी कि बच्चे को बड़े कौर खिलाने चाहिए। वह तोता, मैना, कबूतर आदि के नाम पर कौर बनाकर खिलाती थी, इसलिए बच्चा खेल-खेल में पेट भर लेता था। माँ का ढंग प्यार और चतुराई से भरा था, जिसमें बच्चे का मन भी लगा रहता था।
Example 4: अंतिम घटना का औचित्य · 4 marks · Long answerHarder board level
साँप से डरकर भोलानाथ पिता के बजाय माँ की गोद में क्यों छिपा? पाठ के आधार पर 50-60 शब्दों में लिखिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- पिता की पुकार अनसुनी करना।
- माँ का रोना और हल्दी।
Answer: साँप के भय से भोलानाथ घायल और भयभीत था। पिता से गहरा स्नेह होने पर भी संकट में उसे माँ की गोद सबसे सुरक्षित लगी। माँ रो पड़ी और घावों पर हल्दी लगाई; इसी ममता के कारण वह बाबू जी की पुकार अनसुनी कर माँ का आँचल पकड़े रहा।
Example 5: पिता-पुत्र बनाम माँ-पुत्र · 4 marks · Long answerHOTS / competency
पाठ के आधार पर पिता और माँ के स्नेह की तुलना कीजिए और बताइए कि पाठ का शीर्षक 'माता का अँचल' क्यों उचित है। (50-60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- साथ-संग का स्नेह बनाम सुरक्षा की ममता।
Answer: पिता बच्चे के साथ पूजा, खेल और कुश्ती में मित्र की तरह जुड़े रहते हैं, जबकि माँ की ममता भोजन, श्रृंगार और संकट में सुरक्षा के रूप में दिखती है। अंत में डरा बच्चा माँ के आँचल में ही शरण पाता है, इसलिए शीर्षक 'माता का अँचल' पूरी तरह उचित है।
Where students lose marks in माता का अँचल: पिता का स्नेह और माँ के आँचल की शरण
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: केवल माँ को महत्त्व देना और पिता को छोड़ देना
पाठ का अधिकांश पिता-पुत्र के संबंध पर है।
Wrong working
पाठ में केवल माँ का प्रेम है।
Right working
पाठ में पिता का साथ-संग का स्नेह और माँ का ममत्व दोनों हैं।
Do this: दोनों का संतुलन रखें।
Usually costs: 2 अंक
Mistake: अंतिम घटना का कारण न लिखना
शीर्षक की सार्थकता इसी पर टिकी है।
Wrong working
भोलानाथ घर आया।
Right working
डरकर वह माँ की गोद में छिपा, इसलिए शीर्षक सार्थक है।
Do this: कारण + निष्कर्ष लिखें।
Usually costs: 2 अंक
Mistake: शब्द-सीमा का ध्यान न रखना
50-60 शब्दों से बहुत लंबा या छोटा उत्तर अंक कटवाता है।
Wrong working
150 शब्द का उत्तर।
Right working
50-60 शब्द: दो-तीन वाक्यों में मुख्य बात।
Do this: लिखकर शब्द गिनें।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- 4 अंक के प्रश्न में 50-60 शब्द: प्रसंग, कारण और निष्कर्ष तीन भाग रखें।
- पिता और माँ की तुलना हो तो दो-दो उदाहरण दें।
- शीर्षक की सार्थकता अंतिम घटना से जोड़ें।
- बाल-क्रीड़ाओं में कल्पनाशीलता, स्वतंत्रता और सहयोग का उल्लेख करें।
- लोकोक्तियाँ और तुकबंदी की भाषा-विशेषता याद रखें।
Practice questions on माता का अँचल: पिता का स्नेह और माँ के आँचल की शरण
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
भोलानाथ पिता को क्या कहता है?
(क) पिता जी (ख) बाबू जी (ग) डैडी (घ) तातHint
पाठ के आरंभ में संबोधन देखें।
Answer
(ख) बाबू जी।
Q2 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level
कथन (A): अंत में भोलानाथ बाबू जी की पुकार अनसुनी कर माँ की गोद में छिप जाता है।
कारण (R): संकट के क्षण में उसे माँ की गोद में अधिक सुरक्षा और ममत्व अनुभव होता है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
(ख) A और R दोनों सही हैं पर R, A की व्याख्या नहीं
(ग) A सही है, R गलत
(घ) A गलत है, R सहीHint
अंतिम घटना और शीर्षक की संगति देखें।
Answer
(क) माँ की गोद में सुरक्षा का भाव ही कारण है।
Q3 · 4 marks · Long answerHarder board level
बच्चों के खेल का वर्णन करते हुए बताइए कि उनमें बच्चों की कल्पनाशीलता कैसे झलकती है। (50-60 शब्द)
Hint
मिठाई की दुकान और 'हमीं लोग खरीदार' वाली पंक्ति देखें।
Answer
बच्चे चबूतरे पर मिठाई की दुकान, घरौंदा, ज्योनार, बरात और खेती के खेल रचते हैं। 'हमीं लोग खरीदार और हमीं लोग दुकानदार' जैसी पंक्तियों से पता चलता है कि वे अपनी कल्पना से पूरी दुनिया रच लेते हैं और आपस में भूमिकाएँ बाँट लेते हैं, जो उनका स्वतंत्र आनंद दिखाता है।
Q4 · 4 marks · Long answerHarder board level
बाबू जी की पुकार अनसुनी करना भोलानाथ के किस मनोभाव को प्रकट करता है? (50-60 शब्द)
Hint
भय, ममता और सुरक्षा की खोज।
Answer
यह प्रसंग बताता है कि भय के क्षण में भोलानाथ केवल सुरक्षा चाहता था और उसे माँ की गोद सबसे निकट और निश्चिंत लगी। उसके लिए पिता का स्नेह कम नहीं था, पर माँ का आँचल उसके आघात और भय को अधिक शीघ्र शांत कर सका, इसलिए वह उसी की ओर दौड़ा।
Q5 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
क्या 'माता का अँचल' केवल माँ की महिमा का पाठ है या पिता-पुत्र के संबंध का भी? अपने मत के पक्ष में तर्क दीजिए। (50-60 शब्द)
Hint
पाठ का बड़ा भाग किसके साथ बीतता है?
Answer
यह दोनों का पाठ है। पाठ का बड़ा भाग पिता के साथ पूजा, खेल और कुश्ती में बीतता है, जिससे पिता-पुत्र की निकटता दिखती है, जबकि अंत में माँ का आँचल शरण बनता है। इसलिए पाठ दोनों के स्नेह की भिन्न-भिन्न भूमिकाएँ दिखाता है, केवल माँ की महिमा नहीं।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.माता का अँचल कृतिका में किस भाग में है?Show answer
कृतिका भाग 2।
2.बाबू जी भोलानाथ के माथे पर क्या लगाते थे?Show answer
भभूत का त्रिपुंड।
3.बच्चों के खेल में कौन-सी दुकान लगती थी?Show answer
मिठाई की दुकान।
4.साँप कहाँ से निकला?Show answer
चूहों के बिल से।
5.माँ ने घावों पर क्या लगाया?Show answer
हल्दी।
माता का अँचल: पिता का स्नेह और माँ के आँचल की शरण: frequently asked questions
पाठ की विधा क्या है?
आत्मकथात्मक संस्मरणात्मक गद्य।
पाठ में बच्चों के खेल के प्रसंग में कौन-सी लोकोक्ति आती है?
जहाँ लड़कों का संग, तहाँ बाजे मृदंग।
पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
बाल-जीवन की स्वाभाविकता और माँ की ममता की अद्वितीय शरण।
परीक्षा में कैसे प्रश्न आते हैं?
पूरक पुस्तक कृतिका से 50-60 शब्दों के 4 अंक के प्रश्न।