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HindiCBSE Class 10 · यशपाल – लखनवी अंदाज़

लखनवी अंदाज़ (यशपाल): नवाबी दिखावे पर व्यंग्य

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

यशपाल के व्यंग्य 'लखनवी अंदाज़' में नवाब साहब खीरे को सजाकर, नमक-मिर्च बुरककर केवल सूँघते हैं और खिड़की से फेंक देते हैं, फिर पेट भरे की डकार लेते हैं। लेखक इसे 'खानदानी तहज़ीब, नफ़ासत और नज़ाकत' कहकर व्यंग्य करता है। अंत में वह पूछता है कि जब गंध और स्वाद की कल्पना से डकार आ सकती है, तो बिना विचार-घटना-पात्र के 'नयी कहानी' क्यों नहीं बन सकती।

Understand लखनवी अंदाज़: नवाबी दिखावे पर व्यंग्य

लेखक पास ही जाने के लिए भीड़ से बचने और एकांत में नयी कहानी पर सोचने के इरादे से मुफ़स्सिल की पैसेंजर ट्रेन के सेकंड क्लास में चढ़ता है। उसे डिब्बा खाली लगा, पर एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी नस्ल के सफ़ेदपोश सज्जन पालथी मारे बैठे थे। उनके सामने तौलिए पर दो ताज़े खीरे रखे थे।

लेखक के आने से नवाब साहब का एकांत भंग होता है और उनकी आँखों में असंतोष दिखता है। उन्होंने बातचीत में उत्साह नहीं दिखाया, तो लेखक ने भी आत्मसम्मान में आँखें चुरा लीं। लेखक सोचता है कि शायद नवाब साहब किफ़ायत के लिए सेकंड क्लास में आए हैं और नहीं चाहते कि कोई सफ़ेदपोश उन्हें खीरे जैसी मामूली चीज़ खाते देखे।

फिर नवाब साहब ने अचानक 'आदाब-अर्ज़' कहकर खीरा खाने का आग्रह किया। लेखक ने मना कर दिया। नवाब साहब ने बड़े यत्न से खीरे धोए, पोंछे, सिर काटकर झाग निकाला, छीलकर फाँकें करीने से सजाईं और उन पर जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च बुरक दी। उनके चेहरे से साफ़ था कि मुँह में पानी भर रहा है। दूसरे आग्रह पर लेखक का भी मन ललचाया, पर आत्मसम्मान निभाने के लिए उसने पेट कमज़ोर होने का बहाना बनाकर फिर मना कर दिया।

तब नवाब साहब ने एक-एक फाँक उठाई, होंठों तक ले जाकर सूँघी, स्वाद की कल्पना में पलकें मूँदीं, मुँह का पानी गटका और फाँक खिड़की से बाहर फेंक दी। सारी फाँकें इसी तरह फेंककर उन्होंने तौलिए से हाथ-होंठ पोंछे और गर्व से लेखक की ओर देखा, मानो यही खानदानी रईसों का तरीका हो। फिर उन्होंने भरे पेट जैसी ऊँची डकार ली और कहा कि खीरा लज़ीज़ होता है, पर मेदे पर बोझ डालता है।

लेखक के 'ज्ञान-चक्षु खुल गए'। वह व्यंग्य करता है कि यदि सुगंध और स्वाद की कल्पना मात्र से पेट भर सकता है, तो बिना विचार, घटना और पात्रों के केवल लेखक की इच्छा से 'नयी कहानी' क्यों न बने। इस प्रकार पाठ दो स्तर पर व्यंग्य करता है: पतनशील सामंती दिखावे पर और कहानी के नाम पर खोखली कल्पना पर।

परीक्षा में नवाब के व्यवहार का कारण, व्यंग्य के शब्द, डकार का महत्त्व और अंतिम निष्कर्ष पूछे जाते हैं।

लखनवी अंदाज़: नवाबी दिखावे पर व्यंग्य: key facts

नवाब के क्रम
  • एकांत भंग का असंतोष
  • आग्रह
  • खीरे की तैयारी
  • सूँघकर फेंकना
  • डकार
प्रसंग-क्रम में यही चरण लिखें।
व्यंग्य के शब्द
  • खानदानी तहज़ीब
  • नफ़ासत
  • नज़ाकत
  • ज्ञान-चक्षु खुल गए
उद्धृत शब्दों के साथ भीतरी अर्थ।
दो स्तर के व्यंग्य
सामंती दिखावा | बिना विचार की नयी कहानी
अंतिम निष्कर्ष लिखते समय दोनों जोड़ें।

लखनवी अंदाज़: नवाबी दिखावे पर व्यंग्य in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

दिखावे का खर्च

मान लीजिए कोई परिवार रोज़ साधारण भोजन करता है, पर मेहमान आने पर इतने महँगे व्यंजन मँगवा लेता है कि महीने भर का बजट बिगड़ जाए, केवल इसलिए कि कोई उन्हें साधारण न समझे।

यह पाठ के किस प्रसंग से मेल खाता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. महँगे व्यंजन = सजाई गई खीरे की फाँकें।
  2. साधारण न दिखने की चिंता = नवाब का दिखावा।
  3. बजट बिगड़ना = वास्तविकता से कटाव।

Answer: नवाब साहब के खीरा सजाने और फेंकने के प्रसंग से।

Memory hook: दिखावा बड़ा, वास्तविकता खोखली।

बिना विचार की रचना

मान लीजिए कोई विद्यार्थी निबंध में बड़े-बड़े शब्द तो लिखता है पर विषय पर कोई ठोस बात नहीं कहता।

यह लेखक के अंतिम व्यंग्य से कैसे जुड़ता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. बड़े शब्द = खीरे की सजावट।
  2. ठोस बात का अभाव = बिना विचार की 'नयी कहानी'।

Answer: लेखक का अंतिम कटाक्ष विचारहीन रचना पर है।

Memory hook: सजावट बहुत, सार कम; यही व्यंग्य का निशाना।

Tricks to remember लखनवी अंदाज़: नवाबी दिखावे पर व्यंग्य

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • ध-ध-स-फे-ड

    धोना, धरना, सूँघना, फेंकना, डकार: नवाब के चरण।

    Use it when: क्रम-प्रश्न में।

  • दिखावा+कहानी

    व्यंग्य के दो निशाने: सामंती दिखावा और विचारहीन कहानी।

    Use it when: निष्कर्ष-प्रश्न में।

लखनवी अंदाज़: नवाबी दिखावे पर व्यंग्य: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: नवाब का नगर · 1 mark · MCQBoard level

नवाब साहब किस शहर के नवाबी नस्ल के थे?
(क) दिल्ली (ख) लखनऊ (ग) भोपाल (घ) हैदराबाद

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पाठ का शीर्षक संकेत देता है।

Answer: (ख) लखनऊ।

Example 2: लेखक का मना करना · 2 marks · Short answerBoard level

लेखक ने नवाब साहब के आग्रह पर खीरा खाने से मना क्यों किया? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. आत्मसम्मान और बहाना देखें।

Answer: पहले आग्रह पर लेखक को नवाब का बदला हुआ भाव दिखावटी लगा। दूसरे आग्रह पर मन ललचाने पर भी आत्मसम्मान निभाने के लिए उसने मेदा कमज़ोर होने का बहाना बनाकर मना कर दिया।

Example 3: डकार का व्यंग्य · 2 marks · Short answerHarder board level

नवाब साहब की डकार पर लेखक के व्यंग्य का आशय स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पेट खाली था पर डकार भरे पेट की थी।

Answer: नवाब ने खीरा खाया नहीं, केवल सूँघकर फेंका, फिर भी भरे पेट की डकार ली। इसमें दिखावे की नकली संतुष्टि और सामंती अहं पर व्यंग्य है।

Example 4: गद्यांश पर आधारित अंश · 5 marks · Source-basedHarder board level

पाठ के भाव पर आधारित अंश (अपने शब्दों में): नवाब साहब ने खीरे की फाँकें करीने से सजाईं, उन पर नमक-मिर्च बुरकी और एक-एक फाँक होंठों तक ले जाकर सूँघी, पलकें मूँदीं और खिड़की से बाहर फेंक दी। फिर गर्व से लेखक की ओर देखा।
(i) फाँकें फेंकने का कारण था
(क) खराब होना (ख) अपनी रईसी दिखाने की आदत (ग) पेट भरा होना (घ) स्वाद पसंद न आना
(ii) 'पलकें मूँदना' दर्शाता है
(क) थकान (ख) स्वाद की कल्पना (ग) भय (घ) क्रोध
(iii) गर्व से देखने का भाव है
(क) विनम्रता (ख) अपनी तहज़ीब पर अभिमान (ग) दया (घ) संकोच
(iv) लेखक की दृष्टि में यह व्यवहार है
(क) कमाल (ख) हास्यास्पद दिखावा (ग) दान (घ) सादगी
(v) इस प्रसंग का व्यंग्य किस पर है
(क) गरीबी पर (ख) सामंती दिखावे पर (ग) रेलयात्रा पर (घ) खीरे पर

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रत्येक उप-प्रश्न 1 अंक का है।

Answer: (i) (ख); (ii) (ख); (iii) (ख); (iv) (ख); (v) (ख)।

Example 5: नयी कहानी से संबंध · 2 marks · Short answerHOTS / competency

लेखक ने नवाब साहब के आचरण को नयी कहानी पर किस प्रकार लागू किया है? पाठ के अंतिम अनुच्छेद के आधार पर लिखिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सूँघने से डकार और इच्छा से कहानी की तुलना।

Answer: लेखक पूछता है कि जब गंध-स्वाद की कल्पना से डकार आ सकती है, तो बिना विचार, घटना और पात्र के इच्छा-मात्र से कहानी क्यों न बने। यह विचारहीन रचना पर व्यंग्य है।

Where students lose marks in लखनवी अंदाज़: नवाबी दिखावे पर व्यंग्य

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: नवाब को केवल कंजूस बताना

    पाठ का आशय दिखावा है, कंजूसी नहीं।

    Wrong working

    नवाब कंजूस था इसलिए खीरा फेंक दिया।

    Right working

    नवाब ने रईसी दिखाने के लिए खीरा सूँघकर फेंका।

    Do this: दिखावे का कारण लिखें।

    Usually costs: 1-2 अंक

  • Mistake: व्यंग्य का आशय न लिखना

    केवल शब्द उद्धृत करने से पूरे अंक नहीं मिलते।

    Wrong working

    लेखक कहता है खानदानी तहज़ीब।

    Right working

    लेखक 'खानदानी तहज़ीब' कहकर नवाब के दिखावे का उपहास करता है।

    Do this: उद्धरण के बाद भीतरी अर्थ लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: नयी कहानी वाले अंश को छोड़ देना

    अंतिम निष्कर्ष महत्त्वपूर्ण है।

    Wrong working

    नवाब ने डकार ली, कहानी खत्म।

    Right working

    लेखक ने डकार से नयी कहानी पर भी व्यंग्य किया।

    Do this: अंत का संदर्भ अवश्य दें।

    Usually costs: 1-2 अंक

Exam tips

  • व्यंग्य के प्रश्न में पहले ऊपरी अर्थ, फिर वास्तविक आशय लिखें।
  • डकार वाले प्रश्न में खाली पेट और भरे पेट की डकार का विरोध बताएँ।
  • नयी कहानी के संदर्भ को अंतिम वाक्य में अवश्य जोड़ें।
  • नवाब के चरित्र-वर्णन में आचरण के साथ लेखक की प्रतिक्रिया भी लिखें।
  • उद्धरणों को पाठ के रूप में ही लिखें।

Practice questions on लखनवी अंदाज़: नवाबी दिखावे पर व्यंग्य

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    नवाब साहब किस दर्जे में यात्रा कर रहे थे?
    (क) प्रथम (ख) सेकंड क्लास (ग) तृतीय (घ) एसी

    Hint

    पाठ के आरंभ को देखें।

    Answer

    (ख) सेकंड क्लास।

  2. Q2 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level

    कथन (A): नवाब साहब ने खीरे की फाँकें सूँघकर फेंक दीं।
    कारण (R): वे दिखाना चाहते थे कि खानदानी रईस खाने की खुशबू से ही तृप्त हो जाते हैं।
    (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
    (ख) A और R दोनों सही हैं पर R, A की व्याख्या नहीं
    (ग) A सही है, R गलत
    (घ) A गलत है, R सही

    Hint

    नवाब के गर्व और लेखक के व्यंग्य को जोड़ें।

    Answer

    (क) अपनी रईसी दिखाना ही फेंकने का कारण है।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level

    नवाब साहब ने खीरे जैसी साधारण चीज़ को खाने में संकोच क्यों किया होगा? लेखक के अनुमान के आधार पर लिखिए। (25-30 शब्द)

    Hint

    सफ़ेदपोश की छवि का प्रश्न।

    Answer

    लेखक का अनुमान है कि नवाब नहीं चाहते थे कि कोई सफ़ेदपोश उन्हें खीरे जैसी मामूली चीज़ खाते देखे। यह उनकी बनावटी शान और छवि की चिंता दिखाता है।

  4. Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level

    'खानदानी तहज़ीब, नफ़ासत और नज़ाकत' कहने में लेखक का व्यंग्य कैसे प्रकट होता है? (25-30 शब्द)

    Hint

    प्रशंसा-जैसे शब्दों में उपहास खोजें।

    Answer

    ऊपर से ये शब्द प्रशंसा के हैं, पर वास्तव में नवाब की दिखावटी आदतों का उपहास करते हैं। भूखे रहकर भी रईसी जताना इन शब्दों को खोखला सिद्ध करता है।

  5. Q5 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    क्या यह पाठ केवल नवाबों पर व्यंग्य है? अपने मत के पक्ष में तर्क दीजिए। (25-30 शब्द)

    Hint

    अंत में नयी कहानी का संदर्भ देखें।

    Answer

    नहीं, यह दिखावे की हर प्रवृत्ति पर व्यंग्य है। अंत में लेखक बिना विचार की 'नयी कहानी' पर भी चोट करता है, इसलिए निशाना नवाब ही नहीं, खोखली कल्पना भी है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.लखनवी अंदाज़ के लेखक कौन हैं?Show answer

    यशपाल।

  2. 2.नवाब साहब के सामने तौलिए पर क्या रखा था?Show answer

    दो ताज़े खीरे।

  3. 3.नवाब ने खीरे पर क्या बुरका?Show answer

    जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च।

  4. 4.नवाब ने क्या कहा खीरे के बारे में?Show answer

    खीरा लज़ीज़ है पर मेदे पर बोझ डालता है।

  5. 5.लेखक ने ट्रेन में क्यों यात्रा की?Show answer

    एकांत में नयी कहानी पर सोचने और प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए।

लखनवी अंदाज़: नवाबी दिखावे पर व्यंग्य: frequently asked questions

पाठ किस प्रकार की रचना है?

व्यंग्य।

'सफ़ेदपोश' का क्या अर्थ है?

भद्र, सम्मानित दिखने वाला व्यक्ति।

नवाब के आचरण का मूल कारण क्या है?

दिखावा और झूठी शान।

लेखक का अंतिम कटाक्ष किस पर है?

बिना विचार-घटना-पात्र की नयी कहानी पर।