विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त): Class 11 सार, व्यंग्य और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'विदाई-संभाषण' बालमुकुंद गुप्त की व्यंग्य-रचना 'शिवशंभु के चिट्ठे' का अंश है। इसमें शिवशंभु वायसराय लॉर्ड कर्ज़न को विदाई के समय संबोधित करते हैं और उनकी शान, घमंड, बंग-भंग की ज़िद और अपमानजनक इस्तीफ़े पर तीखा व्यंग्य करते हैं। साथ ही बताते हैं कि सच्चा शासक प्रजा की बात सुनता है।
What बालमुकुंद गुप्त – विदाई-संभाषण is about
विदाई-संभाषण आरोह भाग 1 का चौथा गद्य पाठ है। यह बालमुकुंद गुप्त की प्रसिद्ध व्यंग्य कृति 'शिवशंभु के चिट्ठे' का अंश है। लॉर्ड कर्ज़न 1899-1904 और 1904-1905 में दो बार भारत के वायसराय रहे। उनकी नीतियों का उद्देश्य अंग्रेज़ों का वर्चस्व बढ़ाना था; उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता पर भी अंकुश लगाया। अंत में अपनी पसंद के फ़ौजी अफ़सर की नियुक्ति के प्रश्न पर उन्हें नीचा देखना पड़ा और इस्तीफ़ा देना पड़ा।
पाठ की विशेषता यह है कि यह विदाई-भाषण जैसा दिखता है, पर हर वाक्य में व्यंग्य छिपा है:
- विदाई का करुण क्षण और 'तीसरी शक्ति' का संकेत
- शिवशंभु की दो गायों का दृष्टांत
- बंबई में ज़ाहिर किए इरादे और उलटा परिणाम
- दिल्ली-दरबार की शान और फिर अपमानजनक पतन
- 'क्या यही शासन है?' का प्रश्न, नादिरशाह से तुलना और बंग-भंग
- नर सुलतान का नरवरगढ़ से विदा होना और कर्ज़न से वैसे संभाषण की अपेक्षा
कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा में इस पाठ से पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, लगभग 40 शब्दों के (2 अंक) और लगभग 60 शब्दों के (3 अंक) प्रश्न आ सकते हैं। व्यंग्य को पहचानना और ऐतिहासिक संकेत (बंग-भंग, दिल्ली-दरबार) समझना सबसे ज़रूरी है।
Weightage: खंड ग (आरोह भाग 1 एवं वितान भाग 1) के 80 में से 40 अंक हैं; गद्य खंड से पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5), तीन में से दो प्रश्न लगभग 60 शब्दों में (3×2) और तीन में से दो प्रश्न लगभग 40 शब्दों में (2×2) आते हैं।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27, कक्षा 11 परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम विनिर्देशन
बालमुकुंद गुप्त – विदाई-संभाषण: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
शिवशंभु लॉर्ड कर्ज़न से कहते हैं कि अंततः उनके शासन-काल का अंत हो गया। संसार में हर चीज़ का अंत होता है, पर इतनी जल्दी अंत होगा, यह न कर्ज़न ने सोचा था, न भारतवासियों ने; इससे लगता है कि दोनों के बीच कोई तीसरी शक्ति भी है, जिस पर किसी का वश नहीं। भारतवासी नहीं चाहते थे कि कर्ज़न दूसरी बार आएँ, फिर भी आज उनके जाने पर उन्हें दुख हो रहा है, क्योंकि बिछड़ने का क्षण वैर भुलाकर मन को कोमल बना देता है। इस देश में तो पशु भी बिछड़ते समय उदास होते हैं: शिवशंभु की कमज़ोर गाय उसे सींग मारने वाली गाय के चले जाने पर भी दिन भर भूखी खड़ी रही।
लेखक कहते हैं कि शासकों का जाना परंपरा है, पर कर्ज़न के शासन का नाटक घोर दुखांत रहा। बंबई में उतरकर उन्होंने कहा था कि वे भारत को ऐसा कर जाएँगे कि आगे के लाटों को वर्षों कुछ न करना पड़े, पर उलटे वे ऐसी अशांति छोड़ चले, जिसे मिटाने में उत्तराधिकारियों की नींद-भूख हराम हो जाएगी। दिल्ली-दरबार में उनकी शान बादशाह के भाई से भी ऊँची थी: सोने की कुर्सी, सबसे ऊँचा हाथी और सबसे पहले सलाम। पर फ़ौजी अफ़सर की नियुक्ति के प्रश्न पर वे जंगी लाट से हार गए, इस्तीफ़े की धमकियाँ भी काम न आईं और अंत में इस्तीफ़ा मंज़ूर हो गया।
लेखक पूछते हैं कि क्या आँख मूँदकर मनमाने हुक्म चलाना और प्रजा की बात न सुनना ही शासन है? नादिरशाह ने भी आसिफ़जाह की प्रार्थना पर कत्लेआम रोक दिया था, पर कर्ज़न ने आठ करोड़ प्रजा की विनती ठुकराकर बंगाल का विभाजन किया। उनकी ज़िद ने प्रजा के साथ उन्हें भी पीड़ा दी। अंत में लेखक नर सुलतान का गीत याद करते हैं, जिसने नरवरगढ़ से विदा होते समय आँसुओं के साथ उस नगर को प्रणाम किया था। वे पूछते हैं कि क्या कर्ज़न भी जाते समय भारत की भलाई की कामना करते हुए अपनी भूल मान सकेंगे? फिर स्वयं उत्तर देते हैं: इतनी उदारता उनमें कहाँ!
Themes and message
सत्ता के अहंकार पर व्यंग्य
कर्ज़न अपने को सर्वशक्तिमान समझते थे, पर एक फ़ौजी अफ़सर की नियुक्ति तक न करा सके। लेखक दिखाते हैं कि घमंडी शासक का पतन भी उतना ही नाटकीय होता है।
From the text: 'कितने ऊँचे होकर आप कितने नीचे गिरे!'
आदर्श शासन की कसौटी
शासक का कर्तव्य प्रजा की बात सुनना है; ज़िद और मनमानी शासन नहीं, तानाशाही है।
From the text: 'क्या आँख बंद करके मनमाने हुक्म चलाना और किसी की कुछ न सुनने का नाम ही शासन है?'
भारतीय संस्कृति की सहृदयता
भारतीय विदा होते शत्रु के प्रति भी करुणा रखते हैं; गायों का दृष्टांत और नर सुलतान का प्रणाम इसी संस्कृति के प्रमाण हैं।
From the text: बिछड़ने के समय 'वैर-भाव छूटकर शांत रस का आविर्भाव' होता है।
नियति की शक्ति
कर्ज़न अपने को सूत्रधार मानते थे, पर परदे के पीछे कोई और ही शक्ति खेल चला रही थी।
From the text: 'घमंडी खिलाड़ी समझता है कि दूसरों को अपनी लीला दिखाता हूँ।'
Characters
लॉर्ड कर्ज़न
भारत के वायसराय (1899-1904, 1904-1905), जिन्हें संबोधित करके व्यंग्य किया गया है।
- घमंडी और शान-शौकत के प्रेमी
- ज़िद्दी और निरंकुश: प्रजा की बात न सुनने वाले
- भारत के हितों के प्रति उदासीन
- अंत में अपमानित और असहाय
दिल्ली-दरबार में सोने की कुर्सी, आठ करोड़ प्रजा की प्रार्थना ठुकराकर बंग-भंग, और फ़ौजी अफ़सर के प्रश्न पर इस्तीफ़ा।
शिवशंभु (वक्ता)
स्वयं को 'दीन ब्राह्मण' कहने वाला वक्ता, जिसके माध्यम से लेखक बोलते हैं।
- निर्भीक और व्यंग्य-कुशल
- विनम्र भाषा में तीखी बात कहने वाला
- भारतीय संस्कृति पर गर्व करने वाला
'माइ लॉर्ड' कहकर आदर का स्वर रखते हुए भी शासन की हर भूल गिनाता है।
नर सुलतान
लोकगीत का राजकुमार, आदर्श विदाई का उदाहरण।
- कृतज्ञ और विनम्र
- कर्तव्यनिष्ठ और प्रजा का शुभचिंतक
नरवरगढ़ को अन्नदाता कहकर आँसुओं के साथ प्रणाम करता है।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| व्यंग्य (विडंबना) | 'वे दिन-रात यही मनाते थे कि जल्द श्रीमान् यहाँ से पधारें' | 'पधारें' का अर्थ यहाँ 'चले जाएँ' है; आदर के शब्दों में तिरस्कार। |
| संबोधन शैली | बार-बार 'माइ लॉर्ड!' | भाषण जैसा प्रवाह; विनम्रता के आवरण में तीखा प्रहार। |
| उपमा और मुहावरे | 'गरम तवे पर पानी की बूँदों की भाँति नचाया', 'पटखनी खाना', 'दिवाला निकालना', 'तिलांजलि देना' | प्रजा की बेचैनी और कर्ज़न के पतन का सजीव चित्र। |
| नाटक का रूपक | 'शासन-काल का नाटक घोर दुखांत है', सूत्रधार, सुखांत | कर्ज़न के शासन को ऐसा खेल बताना जिसका अंत उसका खिलाड़ी भी नहीं जानता था। |
| दृष्टांत और ऐतिहासिक-पौराणिक संदर्भ | दो गायें, नादिरशाह, अलिफ़ लैला का अलहदीन, नर सुलतान | तर्क को रोचक और विश्वसनीय बनाते हैं। |
| भारतेंदु-युगीन भाषा | 'आवें', 'जावेगा', 'वरंच', 'रखाया' | उस समय की खड़ी बोली का स्वाद। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
आपके और यहाँ के निवासियों के बीच में कोई तीसरी शक्ति और भी है
शिवशंभु: कर्ज़न के शासन के अचानक अंत पर।
ईश्वर या नियति की ओर संकेत, जिस पर शासक और प्रजा किसी का वश नहीं।
घमंडी खिलाड़ी समझता है कि दूसरों को अपनी लीला दिखाता हूँ।
शिवशंभु: शासन-काल को दुखांत नाटक बताते हुए।
सत्ता के अहंकार पर व्यंग्य।
भारतवासियों को गरम तवे पर पानी की बूँदों की भाँति नचाया है
शिवशंभु: बंबई में ज़ाहिर किए इरादों के उलटे परिणाम पर।
कर्ज़न की नीतियों से प्रजा की बेचैनी।
कितने ऊँचे होकर आप कितने नीचे गिरे!
शिवशंभु: दिल्ली-दरबार की शान और फिर इस्तीफ़े की तुलना।
पतन की नाटकीयता।
नादिर से भी बढ़कर आपकी जिद्द है।
शिवशंभु: बंग-भंग की ज़िद पर।
क्रूर आक्रमणकारी से भी अधिक हठी बताकर कठोर व्यंग्य।
पर इतनी उदारता माइ लॉर्ड में कहाँ?
शिवशंभु: पाठ का अंतिम वाक्य।
कर्ज़न से आत्म-स्वीकृति की अपेक्षा और उसके असंभव होने का व्यंग्य।
बालमुकुंद गुप्त – विदाई-संभाषण in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
नेतृत्व में सुनने का गुण
मान लीजिए आपकी कक्षा का मॉनिटर बिना किसी से पूछे पिकनिक की जगह तय कर देता है और विरोध करने वालों को डाँट देता है।
'विदाई-संभाषण' के आधार पर आप उसे क्या समझाएँगे? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- कर्ज़न ने प्रजा की प्रार्थना नहीं सुनी; अंत में स्वयं भी पीड़ित हुए।
- नेतृत्व का अर्थ है सबकी राय लेकर निर्णय करना।
Answer: मैं उसे बताऊँगा कि कर्ज़न ने भी आठ करोड़ प्रजा की बात नहीं सुनी और अंत में अपमानित होकर गए। अच्छा नेता सबकी राय सुनकर निर्णय लेता है; ज़िद से लिया फ़ैसला उसकी अपनी प्रतिष्ठा भी गिराता है।
Memory hook: जो सुनता नहीं, वह टिकता नहीं।
कृतज्ञतापूर्ण विदाई
कल्पना कीजिए कि आप बारहवीं के बाद अपने स्कूल से विदा हो रहे हैं और आपको विदाई-समारोह में दो मिनट बोलना है।
नर सुलतान के प्रणाम से आप अपने भाषण में क्या शामिल करेंगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- नर सुलतान ने नरवरगढ़ को अन्नदाता कहकर धन्यवाद दिया।
- स्कूल का ऋण स्वीकारना, अपनी भूलों के लिए क्षमा, आशीर्वाद माँगना।
Answer: मैं स्कूल को अपना दूसरा घर बताकर शिक्षकों और कर्मचारियों का धन्यवाद करूँगा, जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा माँगूँगा और स्कूल की प्रगति की कामना करूँगा।
Memory hook: विदा हो तो कृतज्ञ होकर।
पद का अहंकार
मान लीजिए किसी खेल-टीम का कप्तान जीत के दिनों में साथियों का अपमान करता है और खराब दौर आने पर कोई उसका साथ नहीं देता।
यह स्थिति पाठ के किस विचार से मिलती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- कर्ज़न: 'कितने ऊँचे होकर कितने नीचे गिरे'।
- पद के समय का व्यवहार ही पतन के समय साथ तय करता है।
Answer: कर्ज़न भी शान के दिनों में किसी की न सुनते थे और पतन के समय न देश में सम्मान बचा, न विलायत में। पद रहते विनम्र रहना ही स्थायी सम्मान देता है।
Memory hook: ऊँचाई पर विनम्र, गिरावट में सुरक्षित।
Topics in this chapter
How the school exam asks बालमुकुंद गुप्त – विदाई-संभाषण
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित गद्यांश (प्रश्न 9, 1×5) | विदाई का क्षण, गायों का दृष्टांत, दिल्ली-दरबार, शासन का अर्थ या नर सुलतान वाले अंश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (कथन-कारण सहित)। | हर वाक्य का ऊपरी अर्थ और व्यंग्यार्थ, दोनों पहचानें; 'पधारें', 'तीसरी शक्ति' जैसे प्रयोगों पर ध्यान दें। |
| लगभग 40 शब्द (प्रश्न 11, 2 अंक) | बंबई में ज़ाहिर किए इरादे, दिल्ली-दरबार की शान, 'गरम तवे पर पानी की बूँदें', नर सुलतान का प्रणाम। | प्रसंग + व्यंग्य का अर्थ; एक ऐतिहासिक संकेत जोड़ें। |
| लगभग 60 शब्द (प्रश्न 10, 3 अंक) | कर्ज़न का चरित्र, पाठ की व्यंग्य-शैली, शासक के कर्तव्य, आज के संदर्भ में प्रासंगिकता। | तीन बिंदु; हर बिंदु के साथ पाठ का प्रमाण। |
Tricks to remember बालमुकुंद गुप्त – विदाई-संभाषण
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
पाठ का क्रम: 'वि-गा-बं-द-शा-न'
विदाई का दुख → गायों का दृष्टांत → बंबई के इरादे → दरबार की शान और पतन → शासन क्या है (नादिर, बंग-भंग) → नर सुलतान।
Use it when: सार और प्रसंग पहचानने के लिए।
दरबार की तुलना
कर्ज़न = सोना, दाहिने, पहले; बादशाह का भाई = चाँदी, बाएँ, बाद में।
Use it when: दिल्ली-दरबार वाले बहुविकल्पी प्रश्न।
तीन तुलनाएँ
नादिरशाह (उससे भी ज़िद्दी), कैसर-ज़ार (वे भी सुन लेते हैं), नर सुलतान (कृतज्ञ विदाई)।
Use it when: कर्ज़न की ज़िद और आदर्श शासक वाले प्रश्न।
बालमुकुंद गुप्त – विदाई-संभाषण: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: गद्यांश 1: बिछड़न-समय
बिछड़न-समय बड़ा करुणोत्पादक होता है। आपको बिछड़ते देखकर आज हृदय में बड़ा दुख है। माइ लॉर्ड! आपके दूसरी बार इस देश में आने से भारतवासी किसी प्रकार प्रसन्न न थे। वे यही चाहते थे कि आप फिर न आवें। पर आप आए और उससे यहाँ के लोग बहुत ही दुखित हुए। वे दिन-रात यही मनाते थे कि जल्द श्रीमान् यहाँ से पधारें। पर अहो! आज आपके जाने पर हर्ष की जगह विषाद होता है।
(1) · 1 mark · MCQ
'हर्ष की जगह विषाद होता है' में 'विषाद' का अर्थ है:
(क) प्रसन्नता
(ख) दुख, उदासी
(ग) विवाद
(घ) विष(2) · 1 mark · MCQ
भारतवासी कर्ज़न के दूसरी बार आने से क्यों दुखी थे?
(क) उनकी नीतियों से प्रजा पहले ही त्रस्त थी
(ख) वे हिंदी नहीं बोलते थे
(ग) वे बहुत कम समय के लिए आए थे
(घ) वे दिल्ली-दरबार नहीं करते थे(3) · 1 mark · MCQ
'हर्ष की जगह विषाद' होने का कारण लेखक क्या बताते हैं?
(क) कर्ज़न ने भलाई के काम किए थे
(ख) बिछड़ने का क्षण वैर भुलाकर मन को कोमल बना देता है
(ग) नया वायसराय और कठोर था
(घ) प्रजा को कर्ज़न से प्रेम था(4) · 1 mark · MCQ
गद्यांश की शैली को सबसे अच्छी तरह कौन-सा कथन बताता है?
(क) शुद्ध वर्णनात्मक
(ख) आदर के आवरण में व्यंग्य
(ग) वैज्ञानिक विश्लेषण
(घ) आत्मकथात्मक विलाप(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): लेखक को कर्ज़न के जाने पर सचमुच गहरा व्यक्तिगत शोक है। कारण (R): भारतवासी चाहते थे कि कर्ज़न फिर न आएँ।
(क) A और R दोनों सही हैं, R, A की सही व्याख्या है
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है
(ग) A गलत, R सही
(घ) A सही, R गलत
Show the answersAnswers
- (ख) दुख, उदासी
- (क) उनकी नीतियों से प्रजा पहले ही त्रस्त थी
- (ख) बिछड़ने का क्षण वैर भुलाकर मन को कोमल बना देता है
- (ख) आदर के आवरण में व्यंग्य
- (ग) A गलत, R सही (दुख की बात भारतीय सहृदयता और व्यंग्य के रूप में कही गई है, व्यक्तिगत शोक के रूप में नहीं)
Extract 2: गद्यांश 2: शासन का अर्थ
माइ लॉर्ड, एक बार अपने कामों की ओर ध्यान दीजिए। आप किस काम को आए थे और क्या कर चले। शासक-प्रजा के प्रति कुछ तो कर्तव्य होता है, यह बात आप निश्चित मानते होंगे। सो कृपा करके बतलाइए, क्या कर्तव्य आप इस देश की प्रजा के साथ पालन कर चले! क्या आँख बंद करके मनमाने हुक्म चलाना और किसी की कुछ न सुनने का नाम ही शासन है?
(1) · 1 mark · MCQ
लेखक कर्ज़न से किस बात पर विचार करने को कहते हैं?
(क) इंग्लैंड लौटने की तारीख पर
(ख) अपने कामों और प्रजा के प्रति कर्तव्य पर
(ग) दिल्ली-दरबार की तैयारी पर
(घ) नई कौंसिल पर(2) · 1 mark · MCQ
'आँख बंद करके मनमाने हुक्म चलाना' से कर्ज़न के शासन की कौन-सी विशेषता प्रकट होती है?
(क) उदारता
(ख) निरंकुशता
(ग) लोकप्रियता
(घ) न्यायप्रियता(3) · 1 mark · MCQ
गद्यांश का अंतिम प्रश्न किस प्रकार का है?
(क) सूचना माँगने वाला प्रश्न
(ख) व्यंग्यपूर्ण अलंकारिक प्रश्न, जिसका उत्तर 'नहीं' निहित है
(ग) परीक्षा का प्रश्न
(घ) कर्ज़न की प्रशंसा(4) · 1 mark · MCQ
इसके आगे लेखक कर्ज़न की ज़िद की तुलना किससे करते हैं?
(क) अलहदीन से
(ख) नादिरशाह से
(ग) नर सुलतान से
(घ) महाराज एडवर्ड से(5) · 1 mark · MCQ
लेखक के अनुसार आदर्श शासक की पहचान है:
(क) भव्य दरबार लगाना
(ख) प्रजा की बात सुनना और उसके प्रति कर्तव्य निभाना
(ग) बार-बार इस्तीफ़े की धमकी देना
(घ) नए आयोग बनाना
Show the answersAnswers
- (ख) अपने कामों और प्रजा के प्रति कर्तव्य पर
- (ख) निरंकुशता
- (ख) व्यंग्यपूर्ण अलंकारिक प्रश्न, जिसका उत्तर 'नहीं' निहित है
- (ख) नादिरशाह से
- (ख) प्रजा की बात सुनना और उसके प्रति कर्तव्य निभाना
बालमुकुंद गुप्त – विदाई-संभाषण: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: बंबई के इरादे और परिणाम · 2 marks · Short answerExam level
दूसरी बार बंबई में उतरकर कर्ज़न ने क्या इरादा ज़ाहिर किया था और परिणाम क्या निकला? (लगभग 40 शब्द)
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- इरादा: भारत को ऐसा कर जाऊँगा कि बाद के लाट वर्षों सुख की नींद सोएँ।
- परिणाम: ऐसी अशांति कि उत्तराधिकारियों की नींद-भूख हराम।
Answer: कर्ज़न ने कहा था कि वे भारत को ऐसा व्यवस्थित कर जाएँगे कि बाद में आने वाले वायसरायों को वर्षों तक कुछ न करना पड़ेगा। परिणाम उलटा हुआ: वे स्वयं बेचैन रहे और ऐसी अशांति छोड़ गए, जिसे मिटाने में उत्तराधिकारियों की नींद-भूख हराम हो जाएगी।
Example 2: दिल्ली-दरबार की शान · 2 marks · Short answerHarder exam level
दिल्ली-दरबार में कर्ज़न की शान का वर्णन लेखक ने किस उद्देश्य से किया है? (लगभग 40 शब्द)
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- शान: सोने की कुर्सी, पहला सलाम, सबसे ऊँचा हाथी; बादशाह के भाई से भी ऊपर।
- उद्देश्य: इतनी ऊँचाई के बाद के अपमानजनक पतन को उभारना।
Answer: दरबार में कर्ज़न की कुर्सी सोने की थी, रईसों ने पहले उन्हें सलाम किया और उनका हाथी सबसे ऊँचा था; वे बादशाह के भाई से भी ऊपर थे। लेखक यह शान इसलिए दिखाते हैं ताकि इतनी ऊँचाई के बाद हुआ अपमानजनक पतन और तीखा लगे।
Example 3: कर्ज़न का चरित्र · 3 marks · Short answerExam level
पाठ के आधार पर लॉर्ड कर्ज़न के चरित्र की तीन विशेषताएँ लिखिए। (लगभग 60 शब्द)
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- शान-शौकत का प्रेमी और घमंडी: दिल्ली-दरबार।
- ज़िद्दी और निरंकुश: आठ करोड़ प्रजा की प्रार्थना ठुकराकर बंग-भंग।
- प्रजा-हित से उदासीन: शिक्षा पायमाल, स्वाधीनता उड़ी।
Answer: कर्ज़न शान-शौकत के प्रेमी और घमंडी थे; दिल्ली-दरबार में वे बादशाह के भाई से भी ऊपर बैठे। वे ज़िद्दी और निरंकुश थे; आठ करोड़ प्रजा की प्रार्थना ठुकराकर उन्होंने बंगाल का विभाजन किया। वे प्रजा के हित से उदासीन रहे; उनके इशारे पर देश की शिक्षा नष्ट हुई और स्वाधीनता छिन गई।
Example 4: विनम्र भाषा, तीखा प्रहार · 3 marks · Short answerHarder exam level
लेखक ने पूरे पाठ में कर्ज़न को 'माइ लॉर्ड' कहकर आदर से संबोधित किया है, फिर भी पाठ कठोर व्यंग्य बन गया है। दो उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए कि यह कैसे संभव हुआ। (लगभग 60 शब्द)
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- 'पधारें' जैसे आदरसूचक शब्द का अर्थ 'चले जाएँ'।
- प्रशंसा जैसी लगने वाली दरबार की शान के तुरंत बाद पटखनी का वर्णन।
- विनम्र प्रश्न, जिनका उत्तर स्वयं अपमान है।
Answer: लेखक आदर के शब्दों से ही चोट करते हैं। 'जल्द श्रीमान् यहाँ से पधारें' में 'पधारें' का अर्थ 'चले जाएँ' है। दिल्ली-दरबार की शान का भव्य वर्णन प्रशंसा जैसा लगता है, पर तुरंत बाद जंगी लाट से पटखनी की बात आती है। 'क्या यही शासन है?' जैसे विनम्र प्रश्नों का उत्तर स्वयं कर्ज़न की निंदा है। इसी विरोधाभास से व्यंग्य तीखा बनता है।
Example 5: नर सुलतान और कर्ज़न · 3 marks · Short answerHOTS / competency
लेखक ने नर सुलतान के विदाई-प्रणाम का प्रसंग कर्ज़न के सामने क्यों रखा? दोनों की तुलना से पाठ का कौन-सा संदेश उभरता है? (लगभग 60 शब्द)
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- नर सुलतान: नरवरगढ़ को अन्नदाता मानकर कृतज्ञता, प्रजा की शुभचिंता।
- कर्ज़न: भारत से लाभ उठाया, पर भलाई की इच्छा नहीं।
- संदेश: सच्चा शासक कृतज्ञ और प्रजा-हितैषी होता है।
Answer: नर सुलतान ने संकट के दिन नरवरगढ़ में काटे थे; विदा होते समय उसने नगर को अन्नदाता कहकर आँसुओं के साथ प्रणाम किया और प्रजा की शुभचिंता को अपनी कसौटी बनाया। कर्ज़न ने भारत से हर लाभ उठाया, पर उसकी भलाई नहीं चाही। इस तुलना से संदेश उभरता है कि शासक की महानता शान में नहीं, कृतज्ञता और प्रजा-हित में है।
Example 6: आज के शासकों के लिए सीख · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'विदाई-संभाषण' सौ वर्ष से अधिक पुराना है। आज के किसी भी स्तर के अधिकारी या नेता के लिए यह पाठ क्या सीख देता है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- जनता की बात सुनना, ज़िद छोड़ना।
- पद अस्थायी है; अहंकार का अंत अपमान में।
Answer: पाठ सिखाता है कि पद अस्थायी है और जनता की बात सुने बिना ज़िद से लिया गया फ़ैसला अंततः शासक को भी चोट पहुँचाता है। आज के अधिकारी या नेता को अहंकार छोड़कर लोगों की राय सुननी चाहिए और उनके हित को सर्वोपरि रखना चाहिए।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
लॉर्ड कर्ज़न के चरित्र की तीन विशेषताएँ (लगभग 60 शब्द, 3 अंक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| तीन विशेषताएँ (घमंड, ज़िद-निरंकुशता, प्रजा-हित से उदासीनता) | 1.5 |
| प्रत्येक के लिए पाठ का प्रमाण (दरबार, बंग-भंग, शिक्षा-स्वाधीनता) | 1 |
| भाषा और शब्द-सीमा | 0.5 |
बंबई के इरादे और परिणाम (लगभग 40 शब्द, 2 अंक) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| इरादा: बाद के लाटों को वर्षों कुछ न करना पड़े | 1 |
| उलटा परिणाम: अशांति, स्वयं भी बेचैन | 1 |
Where students lose marks in बालमुकुंद गुप्त – विदाई-संभाषण
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: पाठ को सचमुच का प्रशंसात्मक विदाई-भाषण समझना
पूरा पाठ व्यंग्य है; 'दुख' और 'पधारें' जैसे शब्दों का व्यंग्यार्थ उलटा है।
Do this: हर उत्तर में ऊपरी अर्थ के साथ व्यंग्यार्थ भी लिखें।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: कर्ज़न के इस्तीफ़े का कारण बंग-भंग बताना
पाठ के अनुसार इस्तीफ़ा अपनी पसंद के फ़ौजी अफ़सर को नियुक्त न करा पाने और जंगी लाट से हार के कारण हुआ।
Do this: इस्तीफ़ा = फ़ौजी अफ़सर का प्रश्न; बंग-भंग = ज़िद का उदाहरण।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 'तीसरी शक्ति' को अंग्रेज़ सरकार या कांग्रेस बताना
पाठ में यह ईश्वर या नियति का संकेत है, जिस पर न प्रजा का वश है, न वायसराय का।
Do this: 'परदे के पीछे लीलामय की लीला' से जोड़कर लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: नर सुलतान को कोई ऐतिहासिक वायसराय या मुगल बादशाह लिखना
वह अनपढ़ प्रजा में गाए जाने वाले लोकगीत का राजकुमार है।
Do this: 'लोकगीत का राजकुमार, नरवरगढ़' लिखें।
Usually costs: आधा अंक
Practice questions on बालमुकुंद गुप्त – विदाई-संभाषण
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
दिल्ली-दरबार में कर्ज़न और उनकी लेडी की कुर्सी किस धातु की थी?
(क) चाँदी
(ख) सोना
(ग) पीतल
(घ) हाथीदाँतHint
बादशाह के भाई की कुर्सी चाँदी की थी।
Answer
(ख) सोना
Q2 · 1 mark · Very short answerExam level
नादिरशाह ने दिल्ली में कत्लेआम किसके कहने पर रोका था?
Hint
गले में तलवार डालकर प्रार्थना।
Answer
आसिफ़जाह के, जिन्होंने गले में तलवार डालकर प्रार्थना की थी।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'इस बार आपने अपना बिस्तरा गरम राख पर रखा है'—इस कथन का व्यंग्यार्थ स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)
Hint
स्वयं कर्ज़न की बेचैनी।
Answer
गरम राख पर बिस्तर रखने वाला चैन से सो नहीं सकता। लेखक कहना चाहते हैं कि दूसरे कार्यकाल में कर्ज़न ने स्वयं भी चैन नहीं पाया; झगड़ों, धमकियों और अपमान के बीच वे लगातार बेचैन रहे, जबकि उन्होंने सुख से शासन करने का दावा किया था।
Q4 · 1 mark · MCQHarder exam level
कथन (A): लेखक कहते हैं कि कर्ज़न को अपने पद का एक-एक दिन भारी पड़ रहा होगा। कारण (R): वे उनकी तुलना उस अदने क्लर्क से करते हैं जो नोटिस मिलने के बाद बचे दिन घृणा से काटता है।
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
(ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
(ग) A सही, R गलत
(घ) A गलत, R सहीHint
पद छूटा, पर पीछा नहीं छूटा।
Answer
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
'यहाँ की प्रजा वह प्रजा है, जो अपने दुख और कष्टों की अपेक्षा परिणाम का अधिक ध्यान रखती है।' भारतीय प्रजा की इस विशेषता को पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए और बताइए कि यह शक्ति है या दुर्बलता। (लगभग 60 शब्द)
Hint
सब चीज़ों का अंत; धैर्य; पर अन्याय सहते जाना भी।
Answer
पाठ के अनुसार भारतीय प्रजा जानती है कि संसार में हर चीज़ का अंत है, इसलिए वह मानती है कि दुख का समय भी बीत जाएगा; इसी धैर्य से वह पराधीनता सहकर भी जीती है। यह धैर्य उसकी शक्ति है, क्योंकि वह निराश होकर टूटती नहीं। पर यदि यही धैर्य अन्याय का विरोध न करने दे, तो दुर्बलता भी बन सकता है।
Q6 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
शिवशंभु ने अपने को 'दीन ब्राह्मण' क्यों कहा है? इस आत्म-परिचय से व्यंग्य को क्या बल मिलता है? (लगभग 40 शब्द)
Hint
शक्तिशाली वायसराय बनाम साधारण भारतीय।
Answer
'दीन ब्राह्मण' कहकर वक्ता अपने को एक साधारण, शक्तिहीन भारतीय के रूप में रखता है। सबसे शक्तिशाली शासक के सामने ऐसा साधारण व्यक्ति निडर होकर सच कहता है, तो कर्ज़न का घमंड और छोटा दिखता है और व्यंग्य अधिक तीखा हो जाता है।
Q7 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'बंग देश के सिर पर आरह रखा गया'—यहाँ किस घटना की ओर संकेत है और 'आरह' (आरा) का प्रतीकार्थ क्या है?
Hint
1905; आरा चीरता है।
Answer
यहाँ 1905 के बंगाल-विभाजन (बंग-भंग) की ओर संकेत है। आरा लकड़ी को चीरकर दो टुकड़े कर देता है; उसी तरह कर्ज़न ने बंगाल को दो भागों में चीर दिया, जिससे वहाँ की जनता को गहरी पीड़ा हुई।
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1.पाठ के लेखक कौन हैं?Show answer
बालमुकुंद गुप्त।
2.लेखक किस नाम से बोलते हैं?Show answer
शिवशंभु।
3.शिवशंभु की गायों में से कौन-सी गाय पुरोहित को दे दी गई?Show answer
टक्कर मारने वाली बलवान गाय।
4.कर्ज़न किससे मुकाबले में हारे?Show answer
जंगी लाट से।
5.नर सुलतान ने अपने संकट के दिन कहाँ काटे?Show answer
नरवरगढ़ में।
6.दरबार में ईश्वर और किसके बाद कर्ज़न का दर्जा था?Show answer
महाराज एडवर्ड के बाद।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप 'तीसरी शक्ति' और 'पधारें' का व्यंग्यार्थ समझा सकते हैं?
- क्या आप गायों के दृष्टांत का उद्देश्य बता सकते हैं?
- क्या आप दिल्ली-दरबार की शान और कर्ज़न के पतन की तुलना कर सकते हैं?
- क्या आप कर्ज़न के इस्तीफ़े और बंग-भंग को अलग-अलग पहचान सकते हैं?
- क्या आप नर सुलतान के प्रसंग से आदर्श शासक का संदेश लिख सकते हैं?
बालमुकुंद गुप्त – विदाई-संभाषण: frequently asked questions
'विदाई-संभाषण' किस रचना का अंश है?
बालमुकुंद गुप्त की व्यंग्य कृति 'शिवशंभु के चिट्ठे' का।
पाठ में किस वायसराय को संबोधित किया गया है?
लॉर्ड कर्ज़न को, जो 1899-1904 और 1904-1905 में दो बार भारत के वायसराय रहे।
लेखक ने कर्ज़न के शासन-काल को 'घोर दुखांत नाटक' क्यों कहा है?
जिस खेल को सूत्रधार कर्ज़न ने सुखांत समझकर शुरू किया था, जिसके आदि और मध्य में भरपूर शान थी, उसका अंत अपमानजनक इस्तीफ़े और प्रजा की अशांति में हुआ; यह अंत स्वयं सूत्रधार भी नहीं जानता था।
यह पाठ साहसिक गद्य क्यों माना जाता है?
क्योंकि यह उस दौर में लिखा गया जब प्रेस पर पाबंदियाँ थीं, फिर भी लेखक ने सबसे शक्तिशाली शासक पर खुलकर व्यंग्य किया।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) (302) पाठ्यक्रम, कक्षा 11-12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 1 (Reprint 2026-27), पाठ 4: विदाई-संभाषण