Skip to content
HindiCBSE Class 11 · Chapter 6

अक्कमहादेवी के वचन: Class 11 भावार्थ, काव्य-सौंदर्य और प्रश्न

Updated 15 October 2026 · Fact-checked

अक्कमहादेवी 12वीं सदी की कन्नड़ कवयित्री हैं। पहले वचन 'हे भूख! मत मचल' में वे भूख, प्यास, नींद, क्रोध, मोह, लोभ, मद और ईर्ष्या से प्रेमपूर्वक मनुहार करती हैं कि उन्हें न सताएँ। दूसरे वचन 'हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर' में वे शिव से भीख तक न मिलने की स्थिति माँगती हैं, ताकि उनका अहंकार मिट जाए।

What अक्कमहादेवी – हे भूख! मत मचल, हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर is about

अक्कमहादेवी 12वीं सदी के कर्नाटक के वीर शैव आंदोलन से जुड़ी महत्त्वपूर्ण कवयित्री थीं। उनके आराध्य चन्नमल्लिकार्जुन देव (शिव) थे; बसवन्ना और अल्लामा प्रभु उनके समकालीन संत कवि थे। कन्नड़ में 'अक्क' का अर्थ है बहन। राजा द्वारा विवाह की शर्तें न मानने पर उन्होंने राज-परिवार और वस्त्राभूषण तक त्याग दिए। उनकी कविता को भारतीय साहित्य में स्त्री की क्रांतिकारी चेतना का पहला सर्जनात्मक दस्तावेज़ माना जाता है।

पाठ्यपुस्तक में उनके दो वचन हैं, जिनका अंग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद केदारनाथ सिंह ने किया है:

  • वचन 1 'हे भूख! मत मचल': इंद्रियों और मनोविकारों पर नियंत्रण का संदेश, उपदेश नहीं बल्कि प्रेम-भरी मनुहार
  • वचन 2 'हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर': ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण; हर भौतिक वस्तु और अहंकार से खाली होने की कामना

कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा में काव्य खंड से पठित काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, लगभग 40 शब्दों के (2 अंक) और लगभग 60 शब्दों के (3 अंक) प्रश्न आते हैं।

Weightage: खंड ग (आरोह भाग 1 एवं वितान भाग 1) के 80 में से 40 अंक हैं; काव्य खंड से पठित काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5), तीन में से दो प्रश्न लगभग 60 शब्दों में (3×2) और तीन में से दो प्रश्न लगभग 40 शब्दों में (2×2) आते हैं।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27, कक्षा 11 परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम विनिर्देशन

अक्कमहादेवी – हे भूख! मत मचल, हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर: explanation

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

वचन 1 का भावार्थ: कवयित्री अपनी शारीरिक इच्छाओं और मन के विकारों को एक-एक करके संबोधित करती हैं। वे भूख से कहती हैं कि मत मचल, प्यास से कि मत तड़प, नींद से कि मत सता, और क्रोध से कि मन में उथल-पुथल मत मचा। वे मोह से अपने बंधन (पाश) ढीले करने, लोभ से न ललचाने, मद (अहंकार या नशे) से मदहोश न करने और ईर्ष्या से न जलाने की विनती करती हैं। अंत में वे संपूर्ण जड़-चेतन जगत (चराचर) से कहती हैं कि यह अवसर मत चूको, क्योंकि वे चन्नमल्लिकार्जुन (शिव) का संदेश लेकर आई हैं। यह वचन आदेश या उपदेश नहीं, बल्कि प्रेम-भरी मनुहार है; कवयित्री जानती हैं कि इंद्रियाँ और विकार ईश्वर-प्राप्ति के मार्ग में बाधा हैं।

वचन 2 का भावार्थ: कवयित्री ईश्वर को 'जूही के फूल जैसा' कहती हैं, यानी कोमल, सुगंधित, सुंदर और शुभ्र। वे विनती करती हैं कि ईश्वर उनसे भीख मँगवाए और ऐसा कुछ करे कि वे अपना घर पूरी तरह भूल जाएँ। वे झोली फैलाएँ और उन्हें भीख न मिले; कोई कुछ देने को हाथ बढ़ाए तो वह चीज़ नीचे गिर जाए; और यदि वे उसे उठाने के लिए झुकें, तो कोई कुत्ता आकर उसे झपटकर छीन ले जाए। ये कठोर कामनाएँ इसलिए हैं कि उनका 'स्व' या अहंकार पूरी तरह नष्ट हो जाए और वे सांसारिक आसक्ति से पूर्णतः मुक्त होकर निस्पृह भाव से ईश्वर में लीन हो सकें।

दोनों वचनों का संबंध: पहला वचन मन और इंद्रियों को साधने की बात करता है; दूसरा उससे आगे जाकर अहंकार और भौतिक सहारों के पूर्ण त्याग की कामना करता है।

Themes and message

इंद्रिय-निग्रह और मनोविकारों पर नियंत्रण

भूख, प्यास, नींद और क्रोध, मोह, लोभ, मद, ईर्ष्या, सब ईश्वर-प्राप्ति के मार्ग की बाधाएँ हैं; कवयित्री उन्हें शांत करना चाहती हैं।

From the text: 'हे मोह ! पाश अपने ढील'

उपदेश नहीं, मनुहार

पहले वचन में कठोर आदेश के बजाय प्रेम से समझाने का स्वर है; विकारों को भी संबोधित करके मनाया गया है।

From the text: 'हे भूख! मत मचल'

पूर्ण समर्पण और अहंकार-नाश

दूसरे वचन में कवयित्री हर भौतिक सहारे और 'स्व' से मुक्त होना चाहती हैं, ताकि केवल ईश्वर रहे।

From the text: 'कि भूल जाऊँ अपना घर पूरी तरह'

ईश्वर का कोमल रूप

ईश्वर की तुलना जूही के फूल से करके कवयित्री उसकी कोमलता, सुगंध और शुभ्रता को प्रकट करती हैं।

From the text: 'हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर'

The speaker and the people in the poem

अक्कमहादेवी (कवयित्री-वक्ता)

चन्नमल्लिकार्जुन (शिव) की अनन्य भक्त।

  • आत्मसंयमी और साधिका
  • विनम्र और प्रेममयी
  • पूर्ण समर्पण वाली, अहंकार-त्याग की इच्छुक
  • साहसी: सांसारिक सुरक्षा तक त्यागने को तैयार

विकारों से मनुहार करती हैं और ईश्वर से भीख तक न मिलने की स्थिति माँगती हैं।

चन्नमल्लिकार्जुन (शिव)

कवयित्री के आराध्य।

  • जूही के फूल जैसे कोमल और सुंदर
  • जिनका संदेश लेकर कवयित्री संसार में आई हैं

'आई हूँ संदेश लेकर चन्नमल्लिकार्जुन का'

Poetic devices

DeviceExampleEffect
मानवीकरण और संबोधन शैली'हे भूख!', 'हे नींद !', 'हे मोह !', 'ओ चराचर!'अमूर्त विकारों को व्यक्ति की तरह संबोधित करके उनसे संवाद; भाव अधिक आत्मीय।
उपमा'जूही के फूल जैसे ईश्वर'ईश्वर की कोमलता, सुगंध और पवित्रता का सुंदर बिंब।
अनुप्रास'मत मचल', 'मद! मत कर मदहोश'ध्वनि-सौंदर्य और लय।
चित्रात्मकताझोली फैलाना, चीज़ का गिरना, झुकना, कुत्ते का झपटनाअहंकार-नाश की कामना एक दृश्य-श्रृंखला बन जाती है।
सरल, मुक्त छंद वाली खड़ी बोली (अनूदित)केदारनाथ सिंह का हिंदी अनुवादकन्नड़ वचनों की सहजता हिंदी में भी बनी रहती है।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • हे भूख! मत मचल

    अक्कमहादेवी: पहले वचन की पहली पंक्ति।

    इंद्रियों से प्रेमपूर्ण मनुहार की शुरुआत।

  • ओ चराचर! मत चूक अवसर

    अक्कमहादेवी: पहले वचन के अंत में।

    सारे जगत को ईश्वर का संदेश ग्रहण करने का आह्वान।

  • हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर

    अक्कमहादेवी: दूसरे वचन की पहली पंक्ति।

    ईश्वर का कोमल, सुगंधित रूप; उपमा।

  • कि भूल जाऊँ अपना घर पूरी तरह

    अक्कमहादेवी: ईश्वर से कामना करते हुए।

    सांसारिक आसक्ति और 'स्व' के पूर्ण त्याग की इच्छा।

अक्कमहादेवी – हे भूख! मत मचल, हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

प्रलोभन से प्रेमपूर्ण संवाद

मान लीजिए परीक्षा से पहले की रात आपको बार-बार मोबाइल देखने और सो जाने का मन कर रहा है।

पहले वचन की शैली में आप अपने मन से क्या कहेंगे? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अक्क की तरह विकारों को संबोधित करना: 'हे नींद! मत सता'।
  2. कठोरता नहीं, प्रेम से मन को समझाना।

Answer: मैं कहूँगा, 'हे नींद! अभी मत सता, हे मोबाइल के मोह! अपना पाश ढीला कर; बस कुछ घंटे और।' प्रेम से समझाया मन अधिक देर तक साथ देता है।

Memory hook: डाँटो नहीं, मनाओ।

अहंकार छोड़ना

कल्पना कीजिए कि आप टीम-प्रोजेक्ट में सबसे होशियार हैं और हर काम का श्रेय खुद लेना चाहते हैं।

दूसरे वचन से इस स्थिति के लिए क्या सीख मिलती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अक्क 'स्व' और अहंकार को मिटाना चाहती हैं।
  2. टीम में 'मैं' कम, 'हम' अधिक।

Answer: अहंकार छोड़कर श्रेय टीम के साथ बाँटना चाहिए; जैसे अक्क अपना 'घर' और 'स्व' भूलना चाहती हैं, वैसे ही 'मैं' भूलने से 'हम' मज़बूत होता है।

Memory hook: 'मैं' घटे, 'हम' बढ़े।

आवश्यक और अनावश्यक

यदि कोई विद्यार्थी ठीक से खाना और सोना भी छोड़ दे, यह सोचकर कि यही संयम है, तो क्या यह सही होगा?

पहले वचन को सही ढंग से समझाइए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अक्क भूख-नींद से 'मत सता' कहती हैं, उन्हें समाप्त करने को नहीं।
  2. संयम = नियंत्रण, अति त्याग नहीं।

Answer: वचन का अर्थ है इच्छाओं को नियंत्रण में रखना, शरीर को कष्ट देना नहीं; संतुलित भोजन और नींद भी साधना के लिए ज़रूरी हैं।

Memory hook: संयम है, दमन नहीं।

Topics in this chapter

How the school exam asks अक्कमहादेवी – हे भूख! मत मचल, हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
पठित काव्यांश (प्रश्न 6, 1×5)किसी एक वचन के अंश पर शब्दार्थ (पाश, मद, चराचर), मानवीकरण, उपमा, 'घर' का आशय और भक्ति-भाव वाले पाँच बहुविकल्पी प्रश्न।पहले पहचानें कि अंश पहले वचन का है (इंद्रिय-निग्रह) या दूसरे का (अहंकार-नाश)।
लगभग 40 शब्द (प्रश्न 8, 2 अंक)'मत चूक अवसर' का आशय, जूही के फूल का साम्य, कुत्ते के झपटने वाली कामना, पहले वचन का स्वर।पंक्ति का अर्थ + भक्ति-दर्शन से संबंध।
लगभग 60 शब्द (प्रश्न 7, 3 अंक)दोनों वचनों की तुलना, अक्कमहादेवी की भक्ति की विशेषताएँ, आज के जीवन में इंद्रिय-संयम का महत्त्व।तीन बिंदु; दोनों वचनों से प्रमाण।

Tricks to remember अक्कमहादेवी – हे भूख! मत मचल, हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • पहले वचन के आठ संबोधन

    शरीर के तीन: भूख, प्यास, नींद; मन के पाँच: क्रोध, मोह, लोभ, मद, ईर्ष्या; फिर चराचर।

    Use it when: पहले वचन के प्रश्न और भावार्थ।

  • दूसरे वचन की सीढ़ी: 'भी-घ-झो-गि-कु'

    भीख मँगवाओ → घर भूलूँ → झोली खाली → दी चीज़ गिरे → कुत्ता छीने।

    Use it when: दूसरे वचन का क्रम याद रखने के लिए।

  • कवयित्री-परिचय

    12वीं सदी, कर्नाटक, वीर शैव, आराध्य चन्नमल्लिकार्जुन, अक्क = बहन, अनुवाद केदारनाथ सिंह।

    Use it when: अति लघु और बहुविकल्पी प्रश्न।

अक्कमहादेवी – हे भूख! मत मचल, हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: काव्यांश 1: मोह, लोभ, मद और ईर्ष्या

हे मोह ! पाश अपने ढील
लोभ, मत ललचा

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    'हे मोह ! पाश अपने ढील' में 'पाश' का अर्थ है:
    (क) पास
    (ख) जकड़, बंधन
    (ग) पासा
    (घ) पश्चात्ताप

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: वचन के अंत में कवयित्री समस्त जड़-चेतन जगत, यानी 'चराचर' को संबोधित करती हैं कि वह अवसर न चूके, क्योंकि वे अपने आराध्य का संदेश लेकर आई हैं।) 'चराचर' से तात्पर्य है:
    (क) केवल पशु-पक्षी
    (ख) जड़ और चेतन, यानी संपूर्ण जगत
    (ग) चरवाहे
    (घ) केवल मनुष्य

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: वचन के अंत में कवयित्री कहती हैं कि वे अपने आराध्य का संदेश लेकर आई हैं।) कवयित्री किसका संदेश लेकर आई हैं?
    (क) राजा का
    (ख) चन्नमल्लिकार्जुन (शिव) का
    (ग) बसवन्ना का
    (घ) अपने परिवार का

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: आगे कवयित्री मद और ईर्ष्या को भी इसी तरह संबोधित करती हैं—मत मदहोश कर, मत जला।) काव्यांश में मोह, लोभ, मद और ईर्ष्या को संबोधित करने में कौन-सा अलंकार है?
    (क) यमक
    (ख) मानवीकरण
    (ग) श्लेष
    (घ) उत्प्रेक्षा

  5. (5) · 1 mark · Assertion-reason

    कथन (A): इस वचन का स्वर कठोर उपदेश का है। कारण (R): कवयित्री विकारों से 'मत ललचा', 'जला मत' जैसी प्रेम-भरी विनती करती हैं।
    (क) A और R दोनों सही हैं, R, A की सही व्याख्या है
    (ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है
    (ग) A गलत, R सही
    (घ) A सही, R गलत

Show the answersAnswers
  1. (ख) जकड़, बंधन
  2. (ख) जड़ और चेतन, यानी संपूर्ण जगत
  3. (ख) चन्नमल्लिकार्जुन (शिव) का
  4. (ख) मानवीकरण
  5. (ग) A गलत, R सही (स्वर उपदेश का नहीं, प्रेम-भरी मनुहार का है)

Extract 2: काव्यांश 2: भीख भी न मिले

हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर
मँगवाओ मुझसे भीख
और कुछ ऐसा करो

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    कवयित्री ने ईश्वर की तुलना किससे की है?
    (क) कमल से
    (ख) जूही के फूल से
    (ग) गुलाब से
    (घ) चंदन से

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    'हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर' में कौन-सा अलंकार है?
    (क) रूपक
    (ख) उपमा
    (ग) यमक
    (घ) श्लेष

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: कवयित्री ईश्वर से चाहती हैं कि वे 'अपना घर पूरी तरह' भूल जाएँ।) 'भूल जाऊँ अपना घर पूरी तरह' में 'घर' का आशय है:
    (क) केवल मकान
    (ख) सांसारिक मोह-माया, परिवार और 'स्व' (अहंकार) का आश्रय
    (ग) मंदिर
    (घ) ससुराल

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: आगे कवयित्री चाहती हैं कि झोली फैलाने पर भी भीख न मिले, और कोई देने को हाथ बढ़ाए तो वह दान भी नीचे गिर जाए।) कवयित्री भीख न मिलने की कामना क्यों करती हैं?
    (क) वे भूखी रहना पसंद करती हैं
    (ख) ताकि किसी भी भौतिक सहारे पर निर्भरता और अहंकार पूरी तरह मिट जाए
    (ग) ताकि लोग उन पर दया करें
    (घ) ताकि उन्हें धन मिले

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    काव्यांश से कवयित्री की कौन-सी भावना प्रकट होती है?
    (क) सांसारिक सुख की चाह
    (ख) पूर्ण समर्पण और निस्पृहता
    (ग) क्रोध
    (घ) ईर्ष्या

Show the answersAnswers
  1. (ख) जूही के फूल से
  2. (ख) उपमा ('जैसे' वाचक शब्द से ईश्वर की तुलना जूही के फूल से)
  3. (ख) सांसारिक मोह-माया, परिवार और 'स्व' (अहंकार) का आश्रय
  4. (ख) ताकि किसी भी भौतिक सहारे पर निर्भरता और अहंकार पूरी तरह मिट जाए
  5. (ख) पूर्ण समर्पण और निस्पृहता

अक्कमहादेवी – हे भूख! मत मचल, हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर: exam-level solved questions

Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: पहले वचन का स्वर · 2 marks · Short answerExam level

पहले वचन को 'उपदेश' के बजाय 'मनुहार' क्यों कहा गया है? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. विकारों को 'हे भूख', 'हे नींद' कहकर प्रेम से संबोधन।
  2. 'मत मचल', 'मत सता' जैसी विनती, कठोर आदेश नहीं।

Answer: कवयित्री विकारों को डाँटती नहीं, बल्कि 'हे भूख', 'हे नींद' कहकर किसी प्रिय की तरह संबोधित करती हैं और 'मत मचल', 'मत सता' जैसी कोमल विनती करती हैं। इसमें दूसरों को सिखाने का भाव नहीं, अपने मन को प्रेम से मनाने का भाव है, इसलिए यह मनुहार है।

Example 2: कुत्ते का झपटना · 2 marks · Short answerHarder exam level

कवयित्री चाहती हैं कि गिरी हुई भीख उठाने झुकें तो कोई कुत्ता उसे झपट ले। इतनी कठोर कामना के पीछे क्या उद्देश्य है? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अंतिम भौतिक सहारा भी छिन जाए।
  2. अहंकार और आत्म-सम्मान का भ्रम मिटे; केवल ईश्वर पर निर्भरता।

Answer: कवयित्री चाहती हैं कि उनके पास कोई भी भौतिक सहारा न बचे, यहाँ तक कि भीख भी नहीं। कुत्ते के झपट लेने से 'मैं' और 'मेरा' का अंतिम भ्रम भी टूट जाएगा; अहंकार पूरी तरह मिटेगा और वे पूरी तरह ईश्वर पर निर्भर हो सकेंगी।

Example 3: दोनों वचनों की तुलना · 3 marks · Short answerHarder exam level

अक्कमहादेवी के दोनों वचनों में भक्ति की कौन-सी दो अलग अवस्थाएँ दिखाई देती हैं? तुलना कीजिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पहला वचन: साधना की आरंभिक अवस्था, इंद्रियों और विकारों पर नियंत्रण।
  2. दूसरा वचन: उच्च अवस्था, अहंकार और भौतिक सहारों का पूर्ण त्याग।
  3. स्वर: पहले में मनुहार, दूसरे में समर्पण।

Answer: पहला वचन साधना की आरंभिक अवस्था दिखाता है, जिसमें कवयित्री भूख, नींद, क्रोध, मोह जैसी इंद्रियों और विकारों को साधने की कोशिश करती हैं; स्वर मनुहार का है। दूसरा वचन उससे ऊँची अवस्था है, जहाँ वे घर, भीख और 'स्व' तक त्याग देना चाहती हैं; स्वर पूर्ण समर्पण का है। पहले में मन को साधना है, दूसरे में स्वयं को मिटाना।

Example 4: अक्कमहादेवी की भक्ति · 3 marks · Short answerExam level

पाठ और कवि-परिचय के आधार पर अक्कमहादेवी की भक्ति की तीन विशेषताएँ लिखिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अनन्यता: चन्नमल्लिकार्जुन ही आराध्य।
  2. संयम और त्याग: विकारों पर नियंत्रण, राजसी जीवन का त्याग।
  3. अहंकार-शून्यता और प्रेम: जूही जैसा कोमल ईश्वर, भीख तक न मिलने की कामना।

Answer: पहली, उनकी भक्ति अनन्य है; चन्नमल्लिकार्जुन (शिव) ही उनके एकमात्र आराध्य हैं, जिनका संदेश वे संसार तक पहुँचाती हैं। दूसरी, उसमें संयम और त्याग है; वे इंद्रियों और विकारों को साधती हैं और जीवन में राज-परिवार तक त्याग चुकी हैं। तीसरी, उसमें प्रेम और अहंकार-शून्यता है; ईश्वर उन्हें जूही के फूल जैसे कोमल लगते हैं और वे भीख तक न मिलने की कामना करती हैं।

Example 5: आज के जीवन में इंद्रिय-संयम · 3 marks · Short answerHOTS / competency

आज के समय में मोबाइल, जंक फ़ूड और दिखावे जैसी चीज़ें हमें 'ललचाती' और 'मदहोश' करती हैं। पहले वचन का संदेश आज के विद्यार्थी के लिए कितना उपयोगी है? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. आधुनिक प्रलोभन = लोभ, मद, मोह के नए रूप।
  2. संयम से एकाग्रता, स्वास्थ्य और लक्ष्य-प्राप्ति।
  3. तरीका: अक्क की तरह प्रेम से स्वयं को समझाना, कठोरता नहीं।

Answer: आज मोबाइल की लत, जंक फ़ूड और ब्रांड का दिखावा मोह, लोभ और मद के नए रूप हैं, जो पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों बिगाड़ते हैं। पहला वचन सिखाता है कि इन पर नियंत्रण से ही मन एकाग्र होता है और लक्ष्य मिलता है। खुद को कठोर दंड देने के बजाय अक्कमहादेवी की तरह मन को प्रेम से समझाना और धीरे-धीरे आदत बदलना अधिक कारगर है।

Example 6: शरीर की ज़रूरतें भी बाधक? · 2 marks · Short answerHOTS / competency

पहले वचन में भूख, प्यास और नींद जैसी स्वाभाविक ज़रूरतों को क्रोध, लोभ, ईर्ष्या जैसे विकारों के साथ क्यों रखा गया है? क्या इसका अर्थ इन ज़रूरतों को समाप्त करना है? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अति होने पर ये भी मन को भटकाती हैं; 'मत मचल', 'मत सता' = नियंत्रण।
  2. अर्थ समाप्त करना नहीं, उनके वश में न होना।

Answer: भूख, प्यास और नींद जब बेकाबू होकर 'मचलती' या 'सताती' हैं, तो वे भी साधना से ध्यान हटाती हैं; इसलिए उन्हें विकारों के साथ रखा गया। कवयित्री उन्हें समाप्त करने को नहीं कहतीं, केवल इतना चाहती हैं कि वे उन पर हावी न हों।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

दोनों वचनों में भक्ति की अवस्थाओं की तुलना (लगभग 60 शब्द, 3 अंक) (3 marks)

StepMarks
पहला वचन: इंद्रिय-निग्रह, मनुहार का स्वर1.25
दूसरा वचन: अहंकार-नाश, पूर्ण समर्पण1.25
भाषा और शब्द-सीमा0.5

पहले वचन को मनुहार क्यों कहा गया (लगभग 40 शब्द, 2 अंक) (2 marks)

StepMarks
विकारों का प्रेमपूर्ण संबोधन1
कोमल विनती, उपदेश या आदेश नहीं1

Where students lose marks in अक्कमहादेवी – हे भूख! मत मचल, हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: दूसरे वचन को निराशा या दरिद्रता की कामना समझना

    भीख न मिलने की कामना अहंकार-नाश और पूर्ण समर्पण के लिए है।

    Do this: 'स्व/अहंकार का नाश, निस्पृहता' का उल्लेख करें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: पहले वचन को उपदेश कहना

    पाठ की भूमिका के अनुसार यह उपदेशात्मक नहीं, प्रेम-भरी मनुहार है।

    Do this: 'मनुहार' शब्द का प्रयोग करें।

    Usually costs: आधा अंक

  • Mistake: चन्नमल्लिकार्जुन को कोई राजा या गुरु बताना

    चन्नमल्लिकार्जुन शिव का नाम है, जो अक्क के आराध्य हैं।

    Do this: शब्द-छवि के अनुसार 'शिव' लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: 'घर' का केवल शाब्दिक अर्थ लिखना

    यहाँ घर सांसारिक आसक्ति, सुरक्षा और 'स्व' का प्रतीक है।

    Do this: शाब्दिक + प्रतीकार्थ लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

Practice questions on अक्कमहादेवी – हे भूख! मत मचल, हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQExam level

    अक्कमहादेवी के आराध्य कौन थे?
    (क) विष्णु
    (ख) चन्नमल्लिकार्जुन (शिव)
    (ग) कृष्ण
    (घ) राम

    Hint

    वीर शैव आंदोलन।

    Answer

    (ख) चन्नमल्लिकार्जुन (शिव)

  2. Q2 · 1 mark · Very short answerExam level

    कन्नड़ में 'अक्क' शब्द का अर्थ क्या है और अक्कमहादेवी के वचनों का हिंदी अनुवाद किसने किया है?

    Hint

    रिश्ते का नाम; हिंदी के प्रसिद्ध कवि।

    Answer

    'अक्क' का अर्थ बहन है; वचनों का अंग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद केदारनाथ सिंह ने किया है।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level

    पहले वचन में शारीरिक इच्छाओं और मन के विकारों को अलग-अलग पहचानकर लिखिए। (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    शरीर की ज़रूरतें बनाम मन की बुराइयाँ।

    Answer

    शारीरिक इच्छाएँ: भूख, प्यास और नींद, जो शरीर की स्वाभाविक ज़रूरतें हैं। मन के विकार: क्रोध, मोह, लोभ, मद और ईर्ष्या, जो मनुष्य को भीतर से अशांत करते हैं। कवयित्री दोनों पर नियंत्रण चाहती हैं।

  4. Q4 · 1 mark · MCQHarder exam level

    कथन (A): अक्कमहादेवी ईश्वर से धन-धान्य और सुरक्षित घर माँगती हैं। कारण (R): भक्त ईश्वर से सांसारिक सुख माँगते ही हैं।
    (क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
    (ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
    (ग) A गलत, R गलत
    (घ) A सही, R गलत

    Hint

    वे घर भूलना और भीख तक न मिलना चाहती हैं।

    Answer

    (ग) A गलत, R गलत (वे सांसारिक सुख नहीं, अहंकार और आसक्ति का नाश माँगती हैं)

  5. Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency

    कवि-परिचय के अनुसार अक्कमहादेवी ने राजा द्वारा विवाह की शर्तें न माने जाने पर राज-परिवार और वस्त्राभूषण त्याग दिए। इस जीवन-प्रसंग और दूसरे वचन की कामनाओं में आपको क्या संबंध दिखता है? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    त्याग की निरंतरता; बाहरी वैभव से भीतरी अहंकार तक।

    Answer

    जीवन में अक्कमहादेवी ने राजसी वैभव, वस्त्र और आभूषण जैसे बाहरी सहारे छोड़े; यह इस बोध से जुड़ा था कि स्त्री केवल शरीर नहीं है। दूसरे वचन में वही त्याग और गहरा हो जाता है: अब वे घर, भीख और 'स्व' तक छोड़ना चाहती हैं। इस तरह उनका जीवन और कविता एक-दूसरे को पुष्ट करते हैं; जो उन्होंने कहा, वही जिया।

  6. Q6 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    'मँगवाओ मुझसे भीख' जैसी प्रार्थना सामान्य प्रार्थनाओं से किस प्रकार अलग है? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    सामान्य प्रार्थना में सुख माँगा जाता है।

    Answer

    सामान्य प्रार्थनाओं में लोग ईश्वर से धन, सुख और सुरक्षा माँगते हैं, पर अक्कमहादेवी अभाव और अपमान माँगती हैं। उनका उद्देश्य भौतिक लाभ नहीं, अहंकार का नाश और ईश्वर में पूर्ण लीनता है; इसलिए यह प्रार्थना अनोखी है।

  7. Q7 · 2 marks · Short answerHarder exam level

    अक्कमहादेवी की कविता को स्त्री-चेतना का दस्तावेज़ क्यों माना जाता है? कवि-परिचय के आधार पर लिखिए। (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    राजा की शर्तें, त्याग; 'स्त्री केवल शरीर नहीं'।

    Answer

    राजा द्वारा विवाह की शर्तें न मानने पर उन्होंने राज-परिवार और वस्त्राभूषण छोड़ दिए; यह इस बोध का प्रतीक था कि स्त्री केवल शरीर नहीं है। उनके कारण बड़ी संख्या में स्त्रियाँ शैव आंदोलन से जुड़ीं और अपने संघर्ष को कविता में व्यक्त किया।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.अक्कमहादेवी का जन्म कहाँ हुआ?Show answer

    कर्नाटक के शिवमोगा ज़िले के उडुतरी गाँव में (12वीं सदी)।

  2. 2.अक्कमहादेवी के समकालीन दो कन्नड़ संत कवि कौन थे?Show answer

    बसवन्ना और अल्लामा प्रभु।

  3. 3.'मद' का अर्थ क्या है?Show answer

    नशा (यहाँ अहंकार का नशा भी)।

  4. 4.ईश्वर की तुलना किस फूल से की गई है?Show answer

    जूही के फूल से।

  5. 5.अंत में भीख कौन छीन ले, ऐसी कामना है?Show answer

    कोई कुत्ता।

  6. 6.अक्कमहादेवी की रचनाओं का अंग्रेज़ी संकलन किस नाम से है?Show answer

    'स्पीकिंग ऑफ़ शिवा' (संपादक ए. के. रामानुजन)।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप पहले वचन के सभी संबोधन (शरीर और मन) क्रम से बता सकते हैं?
  • क्या आप 'मनुहार' और 'उपदेश' का अंतर इस वचन के संदर्भ में समझा सकते हैं?
  • क्या आप दूसरे वचन की कामनाओं की सीढ़ी और उनका उद्देश्य लिख सकते हैं?
  • क्या आप जूही के फूल और ईश्वर का साम्य बता सकते हैं?
  • क्या आप दोनों वचनों की तुलना लिख सकते हैं?

अक्कमहादेवी – हे भूख! मत मचल, हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर: frequently asked questions

अक्कमहादेवी कौन थीं?

12वीं सदी की कर्नाटक की संत-कवयित्री, जो वीर शैव आंदोलन से जुड़ी थीं और चन्नमल्लिकार्जुन (शिव) की अनन्य भक्त थीं।

'वचन' क्या होते हैं?

कन्नड़ के संत कवियों द्वारा कहे गए छोटे, सरल गद्यात्मक-काव्यात्मक कथन, जिनमें भक्ति और जीवन-दर्शन की बात होती है।

पहले वचन में कौन-सा संदेश है?

इंद्रियों और मन के विकारों पर नियंत्रण का संदेश, जो उपदेश के बजाय प्रेम-भरी मनुहार के रूप में दिया गया है।

अक्कमहादेवी के दोनों वचनों के स्वर में क्या अंतर है?

पहला वचन इंद्रियों और विकारों से प्रेम-भरी मनुहार है; दूसरा ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की प्रार्थना है, जिसमें अहंकार और हर भौतिक सहारे के त्याग की कामना है।

Based on: CBSE हिंदी (आधार) (302) पाठ्यक्रम, कक्षा 11-12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 1 (Reprint 2026-27), पाठ 6: हे भूख! मत मचल