गलता लोहा (शेखर जोशी): Class 11 सारांश, चरित्र-चित्रण और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'गलता लोहा' शेखर जोशी की कहानी है। मेधावी पर निर्धन ब्राह्मण युवक मोहन पढ़-लिखकर बड़ा आदमी नहीं बन पाता और गाँव लौटकर अपने बचपन के साथी धनराम लोहार की भट्ठी पर बैठता है। वह स्वयं हथौड़ा उठाकर लोहे को सुघड़ गोला बना देता है; उसके भीतर का जातीय अभिमान भी लोहे की तरह गल जाता है।
What शेखर जोशी – गलता लोहा is about
गलता लोहा आरोह भाग 1 का पाँचवाँ गद्य पाठ है। शेखर जोशी नई कहानी आंदोलन के प्रगतिशील कथाकार हैं, जिनकी कहानियों में मेहनतकश और सुविधाहीन लोग केंद्र में रहते हैं। यह कहानी बिना किसी भाषणबाज़ी के समाज के जातिगत विभाजन पर टिप्पणी करती है।
कहानी का ढाँचा फ़्लैशबैक (पूर्वदीप्ति) पर टिका है:
- वर्तमान: मोहन कुंद हँसुवा लेकर धनराम की भट्ठी पर पहुँचता है
- अतीत: मास्टर त्रिलोक सिंह की पाठशाला, मोहन का मॉनीटर होना, धनराम का तेरह का पहाड़ा
- मोहन की आगे की पढ़ाई का संघर्ष: चार मील दूर स्कूल, नदी की बाढ़
- लखनऊ में रमेश के घर घरेलू नौकर जैसा जीवन और तकनीकी स्कूल
- वंशीधर का स्वप्नभंग और धनराम से बोला गया झूठ
- वर्तमान का चरम: मोहन का भट्ठी पर बैठकर लोहे का छल्ला गढ़ना
कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा में इस पाठ से पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, लगभग 40 शब्दों के (2 अंक) और लगभग 60 शब्दों के (3 अंक) प्रश्न आ सकते हैं। शीर्षक की सार्थकता, मोहन और धनराम के चरित्र तथा मास्टर त्रिलोक सिंह की शिक्षण-पद्धति पर प्रश्न विशेष रूप से ध्यान देने योग्य हैं।
Weightage: खंड ग (आरोह भाग 1 एवं वितान भाग 1) के 80 में से 40 अंक हैं; गद्य खंड से पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5), तीन में से दो प्रश्न लगभग 60 शब्दों में (3×2) और तीन में से दो प्रश्न लगभग 40 शब्दों में (2×2) आते हैं।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27, कक्षा 11 परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम विनिर्देशन
शेखर जोशी – गलता लोहा: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
मोहन अपने खेतों की झाड़ियाँ काटने के लिए हँसुवा लेकर निकलता है, पर उसकी धार कुंद देखकर उसके पैर अपने आप शिल्पकार टोले में धनराम लोहार के आफर (भट्ठी) की ओर मुड़ जाते हैं। उसके पिता वंशीधर तिवारी बूढ़े पुरोहित हैं, जो अब कठिन अनुष्ठान नहीं कर पाते; मोहन को न अनुष्ठानों का अभ्यास है, न वैसी गति (क्षमता)।
भट्ठी पर बैठे-बैठे मोहन और धनराम बचपन की यादों में लौट जाते हैं। मास्टर त्रिलोक सिंह कठोर शिक्षक थे। कुशाग्र बुद्धि और मधुर स्वर वाला मोहन उनका चहेता था, स्कूल का मॉनीटर था और कमज़ोर छात्रों को सज़ा दिलाने का काम भी उसी से करवाया जाता था। धनराम तेरह का पहाड़ा याद न कर पाने पर पिटा और मास्टर ने ताना मारा कि उसके दिमाग में तो लोहा भरा है। फिर उन्होंने उसे दराँतियों पर धार लगाने भेज दिया। धनराम ने बचपन से मन में बैठाई गई जातिगत हीनता के कारण कभी मोहन को प्रतिद्वंद्वी नहीं माना। पिता गंगाराम के मरने के बाद उसने उनका आफर सँभाल लिया।
मोहन ने छात्रवृत्ति पाई तो वंशीधर उसे बड़ा आदमी बनाने के सपने देखने लगे। आगे का स्कूल चार मील दूर था, रास्ते में चढ़ाई और बरसाती नदी थी; एक बार नदी में अचानक आई बाढ़ से मोहन और घसियारे मुश्किल से सकुशल पार पहुँचे। तब बिरादरी के युवक रमेश ने उसे लखनऊ ले जाने का प्रस्ताव दिया। वहाँ मोहन घर और मुहल्ले के काम करने वाला नौकर-सा बनकर रह गया, साधारण स्कूल में अपनी पहचान न बना सका और आठवीं के बाद तकनीकी स्कूल में भेज दिया गया। अब वह कारखानों में नौकरी के लिए चक्कर लगा रहा था। सच जानकर वंशीधर टूट गए; धनराम के पूछने पर उन्होंने दाँतों में तिनका दबाकर कह दिया कि मोहन सेक्रेटेरियट में लग गया है।
वर्तमान में धनराम हँसुवे की धार गढ़कर लौटाता है, पर मोहन वहीं बैठा रहता है, जबकि ब्राह्मण टोले के लोग शिल्पकार टोले में बैठते तक नहीं थे। धनराम लोहे की मोटी छड़ को गोल मोड़ने में अटकता है, तो मोहन संकोच छोड़कर हथौड़ा उठाता है, धौंकनी फूँकता है और लोहे को सुघड़ गोला बना देता है। धनराम को उसकी कारीगरी से अधिक आश्चर्य पुरोहित खानदान के युवक के उसकी भट्ठी पर हाथ डालने से होता है। मोहन की आँखों में सर्जक की चमक है, जिसमें न होड़ है, न हार-जीत का भाव।
Themes and message
जातिगत भेदभाव का टूटना
कहानी का अंत दिखाता है कि श्रम और परिस्थिति के आगे जातीय अभिमान बेमानी हो जाता है। ब्राह्मण युवक लोहार की भट्ठी पर बैठकर उसका काम करता है।
From the text: मोहन धनराम के हाथ से हथौड़ा लेकर लोहे को 'सुघड़ गोले' का रूप देता है।
शिक्षा-व्यवस्था और गरीबी
मेधावी मोहन गरीबी, दूरी और दूसरों के स्वार्थ के कारण अपनी प्रतिभा का उपयोग नहीं कर पाता; धनराम जाति और गरीबी के कारण तीसरे दर्जे से आगे नहीं बढ़ता।
From the text: 'किताबों की विद्या का ताप लगाने की सामर्थ्य धनराम के पिता की नहीं थी।'
बिरादरी का खोखला भाईचारा
जाति के नाम पर सहारा देने वाला रमेश मोहन को घरेलू नौकर बना देता है; सच्चा भाईचारा अंत में मेहनतकश धनराम और मोहन के बीच दिखता है।
From the text: वंशीधर कहते हैं, 'बिरादरी का यही सहारा होता है', पर लखनऊ में मोहन को नौकर से अधिक हैसियत नहीं मिलती।
श्रम की गरिमा
हाथ के काम को नीचा मानने वाली सोच के उलट कहानी कारीगरी को सृजन बताती है।
From the text: 'उसकी आँखों में एक सर्जक की चमक थी'
Characters
मोहन
पुरोहित वंशीधर तिवारी का बेटा, कहानी का नायक।
- कुशाग्र बुद्धि और गायन में बेजोड़
- परिस्थितियों से समझौता करने वाला, सहनशील
- परिवार को दुख न देने वाला संवेदनशील पुत्र
- जातीय अभिमान से मुक्त, श्रम का सम्मान करने वाला
लखनऊ की असलियत घरवालों से छिपाता है और अंत में संकोच छोड़कर धनराम की भट्ठी पर लोहा गढ़ता है।
धनराम
गंगाराम का बेटा, गाँव का लोहार और मोहन का बचपन का साथी।
- मेहनती और कुशल कारीगर
- विनम्र, मोहन के प्रति स्नेह और आदर रखने वाला
- जातिगत हीनता को स्वाभाविक मान लेने वाला
- सरल और भरोसा करने वाला
मोहन को प्रतिद्वंद्वी नहीं, श्रेष्ठ मानता है; वंशीधर की झूठी बात पर तुरंत विश्वास कर लेता है।
मास्टर त्रिलोक सिंह
गाँव की पाठशाला के कठोर अध्यापक।
- अनुशासनप्रिय और कठोर
- मेधावी छात्र को आगे बढ़ाने वाले
- जातिगत पूर्वाग्रह से ग्रस्त, कमज़ोर छात्र को अपमानित करने वाले
मोहन को मॉनीटर बनाते हैं, पर धनराम से कहते हैं कि उसके दिमाग में लोहा भरा है।
वंशीधर तिवारी
मोहन के पिता, गरीब पुरोहित।
- बेटे के भविष्य के लिए त्याग करने वाले
- स्वाभिमानी; स्वप्नभंग छिपाने वाले
धनराम से झूठ बोलते समय दाँतों में तिनका दबा लेते हैं, ताकि असत्य का दोष न लगे।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| पूर्वदीप्ति (फ़्लैशबैक) शिल्प | भट्ठी पर बैठे-बैठे दोनों का बचपन की दुनिया में लौट जाना | वर्तमान की घटना को अतीत के अनुभवों से अर्थ मिलता है। |
| प्रतीकात्मक शीर्षक | 'गलता लोहा' | भट्ठी में गलता लोहा और मोहन के मन में गलता जातीय अभिमान, दोनों का संकेत। |
| ध्वन्यात्मक शब्द | 'धप्-धप्', 'सटाक्', 'खनक' | लोहारी के काम और सज़ा के दृश्य सजीव हो उठते हैं। |
| आंचलिक (कुमाऊँनी) शब्द | 'लला', 'मास्साब', 'तेरै दूणी', 'आफर' | पहाड़ी गाँव का यथार्थ परिवेश। |
| मुहावरे | 'साँप सूँघ जाना', 'पहाड़ हो जाना', 'बलि का बकरा', 'ज़बान का चाबुक' | भाषा में व्यंग्य और चित्रात्मकता। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है रे! विद्या का ताप कहाँ लगेगा इसमें?
मास्टर त्रिलोक सिंह: धनराम के दूसरी बार भी तेरह का पहाड़ा न सुना पाने पर।
जातिगत पूर्वाग्रह और 'लोहा' शब्द से शीर्षक की ओर संकेत।
बिरादरी का यही सहारा होता है।
वंशीधर तिवारी: रमेश के मोहन को लखनऊ ले जाने के प्रस्ताव पर, भरे गले से।
बिरादरी के भरोसे का विडंबनापूर्ण कथन; आगे रमेश मोहन को नौकर बना देता है।
मास्साब भी क्या आदमी थे लला!
धनराम: मास्टर त्रिलोक सिंह की मृत्यु की बात पर।
पिटने के बावजूद गुरु के प्रति धनराम का आदर।
मोहन लला बचपन से ही बड़े बुद्धिमान थे
धनराम: वंशीधर से मोहन की नौकरी की (झूठी) खबर सुनकर।
ये शब्द वंशीधर को देर तक कचोटते रहे; स्वप्नभंग की पीड़ा।
उसकी आँखों में एक सर्जक की चमक थी
लेखक: मोहन के लोहे का छल्ला गढ़ने के बाद।
श्रम में सृजन का आनंद; जाति और होड़ से मुक्त भाव।
शेखर जोशी – गलता लोहा in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
जाति से ऊपर श्रम
मान लीजिए आपके स्कूल के स्वच्छता-अभियान में कुछ छात्र यह कहकर झाड़ू उठाने से मना करते हैं कि यह 'उनका काम' नहीं है।
'गलता लोहा' के मोहन के उदाहरण से आप उन्हें क्या कहेंगे? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- मोहन पुरोहित खानदान का होकर भी लोहार की भट्ठी पर हथौड़ा चलाता है।
- काम की गरिमा जाति या पद से नहीं, मन लगाने से है।
Answer: मैं कहूँगा कि मोहन पुरोहित खानदान का होकर भी लोहार की भट्ठी पर बैठा और गर्व से लोहा गढ़ा। कोई काम छोटा नहीं होता; उसे मन से करने वाले की आँखों में सर्जक की चमक आती है।
Memory hook: हथौड़ा उठाओ, अहंकार गलाओ।
शब्दों की चोट
कल्पना कीजिए कि एक शिक्षक कक्षा में किसी कमज़ोर छात्र से कहते हैं, 'तुम्हारे बस का पढ़ना नहीं है।'
धनराम के अनुभव से इस वाक्य के असर का अनुमान लगाइए।
Try it first, then show the solutionSolution
- धनराम ने 'दिमाग में लोहा भरा है' सुनकर पढ़ाई छोड़ दी, पुश्तैनी काम में लग गया।
- अपमान आत्मविश्वास तोड़ता है।
Answer: ऐसा वाक्य छात्र के मन में बैठ जाता है और वह कोशिश करना छोड़ सकता है, जैसे धनराम ने मान लिया कि पढ़ाई उसका अधिकार नहीं। प्रोत्साहन और अलग तरीके से समझाना ज़रूरी है।
Memory hook: बेंत की चोट भरती है, ज़बान की नहीं।
सहारे के नाम पर शोषण
यदि कोई रिश्तेदार किसी गरीब बच्चे को 'पढ़ाने' के नाम पर शहर ले जाए और उससे घर के सारे काम करवाए, तो क्या होगा?
कहानी का कौन-सा प्रसंग इससे मिलता है और इसमें क्या गलत है?
Try it first, then show the solutionSolution
- रमेश ने मोहन को घरेलू नौकर बना दिया।
- यह बाल-श्रम और विश्वास का दुरुपयोग है।
Answer: रमेश का मोहन से घर और मुहल्ले का काम करवाना; इसमें बच्चे की पढ़ाई और आत्मसम्मान का शोषण है, जो सहायता नहीं, विश्वासघात है।
Memory hook: सहारा वह जो पंख दे, बोझ नहीं।
Topics in this chapter
How the school exam asks शेखर जोशी – गलता लोहा
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित गद्यांश (प्रश्न 9, 1×5) | भट्ठी की आवाज़ें, पाठशाला का दृश्य, तेरह का पहाड़ा, लखनऊ का जीवन, वंशीधर का झूठ या अंतिम दृश्य से गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न। | पहचानें कि गद्यांश वर्तमान का है या फ़्लैशबैक का; शब्दों (सर्जक, आफर, निहाई) के अर्थ पक्के रखें। |
| लगभग 40 शब्द (प्रश्न 11, 2 अंक) | धनराम का मोहन के प्रति भाव, वंशीधर का तिनका दबाकर झूठ, नदी की बाढ़ वाली घटना, रमेश का व्यवहार। | घटना + उसका कारण या प्रभाव; एक शब्द का सही प्रमाण। |
| लगभग 60 शब्द (प्रश्न 10, 3 अंक) | शीर्षक की सार्थकता, मोहन या धनराम का चरित्र, कहानी में जातिगत विभाजन, आज के संदर्भ में संदेश। | तीन बिंदु; प्रतीक (लोहा) को घटना से जोड़कर समझाएँ। |
Tricks to remember शेखर जोशी – गलता लोहा
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
पात्र और रिश्ते
मोहन-वंशीधर (पुरोहित पिता-पुत्र), धनराम-गंगाराम (लोहार पिता-पुत्र), त्रिलोक सिंह (मास्टर), रमेश (लखनऊ, बिरादरी)।
Use it when: बहुविकल्पी और अति लघु प्रश्न।
मोहन की यात्रा: 'मॉ-छा-न-ल-त-भ'
मॉनीटर → छात्रवृत्ति → नदी की बाढ़ → लखनऊ (नौकर-सा) → तकनीकी स्कूल → भट्ठी पर हथौड़ा।
Use it when: सारांश और चरित्र-चित्रण।
दो लोहे
एक लोहा 'दिमाग में' (मास्टर का ताना), दूसरा 'भट्ठी में' (जो गलकर गोला बनता है)।
Use it when: शीर्षक की सार्थकता वाले प्रश्न।
शेखर जोशी – गलता लोहा: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: गद्यांश 1: ज़बान का चाबुक
‘तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है रे! विद्या का ताप कहाँ लगेगा इसमें?’ अपने थैले से पाँच-छह दराँतियाँ निकालकर उन्होंने धनराम को धार लगा लाने के लिए पकड़ा दी थीं। किताबों की विद्या का ताप लगाने की सामर्थ्य धनराम के पिता की नहीं थी।
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इस बार मास्टर त्रिलोक सिंह ने धनराम के लाए हुए बेंत का उपयोग करने के बजाय उसे 'ज़बान की चाबुक' लगा दी।) 'उसके लाए हुए बेंत' से पता चलता है कि मास्टर त्रिलोक सिंह का नियम था कि:
(क) बेंत स्कूल में रखा जाता था
(ख) सज़ा पाने वाला स्वयं अपने लिए संटी लाए
(ग) मॉनीटर बेंत लाता था
(घ) बेंत का प्रयोग नहीं होता था(2) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: मास्टर ने बेंत के बजाय 'ज़बान की चाबुक' लगाई।) 'ज़बान की चाबुक' का अर्थ है:
(क) ज़ोर से चिल्लाना
(ख) ऐसे कठोर, अपमानजनक शब्द जो मार से भी अधिक चोट करें
(ग) मीठी बातें
(घ) गाना गाना(3) · 1 mark · MCQ
मास्टर का धनराम को दराँतियाँ पकड़ाना किस मानसिकता का संकेत है?
(क) उसे पुरस्कार देने की
(ख) यह मान लेने की कि लोहार का बेटा पढ़ाई के बजाय अपने पुश्तैनी काम के लायक है
(ग) उसकी मदद करने की
(घ) खेती सिखाने की(4) · 1 mark · MCQ
'तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है रे! विद्या का ताप कहाँ लगेगा इसमें?' का आशय है:
(क) धनराम बहुत बलवान है
(ख) धनराम की बुद्धि इतनी जड़ है कि उस पर पढ़ाई का असर नहीं होगा
(ग) धनराम को लोहारी नहीं आती
(घ) धनराम को तेज़ बुखार है(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): धनराम आगे नहीं पढ़ सका। कारण (R): उसके पिता के पास पढ़ाने की आर्थिक सामर्थ्य नहीं थी और उन्होंने उसे जल्दी ही लोहारी में लगा दिया।
(क) A और R दोनों सही हैं, R, A की सही व्याख्या है
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है
(ग) A सही, R गलत
(घ) A गलत, R सही
Show the answersAnswers
- (ख) सज़ा पाने वाला स्वयं अपने लिए संटी लाए
- (ख) ऐसे कठोर, अपमानजनक शब्द जो मार से भी अधिक चोट करें
- (ख) यह मान लेने की कि लोहार का बेटा पढ़ाई के बजाय अपने पुश्तैनी काम के लायक है
- (ख) धनराम की बुद्धि इतनी जड़ है कि उस पर पढ़ाई का असर नहीं होगा
- (क) A और R दोनों सही हैं, R, A की सही व्याख्या है
Extract 2: गद्यांश 2: सर्जक की चमक
उसने धनराम की ओर अपनी कारीगरी की स्वीकृति पाने की मुद्रा में देखा। उसकी आँखों में एक सर्जक की चमक थी— जिसमें न स्पर्धा थी और न ही किसी प्रकार की हार-जीत का भाव।
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: धनराम संकोच, असमंजस और 'धर्म-संकट' में था, पर मोहन इससे उदासीन होकर संतुष्ट भाव से अपने बनाए लोहे के छल्ले की त्रुटिहीन गोलाई जाँच रहा था।) धनराम 'धर्म-संकट' में क्यों था?
(क) उसका लोहा खराब हो गया था
(ख) पुरोहित खानदान का युवक उसकी भट्ठी पर बैठकर उसका काम कर रहा था
(ग) उसे पैसे नहीं मिले थे
(घ) मोहन ने उसका अपमान किया था(2) · 1 mark · MCQ
मोहन धनराम की ओर किस भाव से देखता है?
(क) घमंड से
(ख) अपनी कारीगरी की स्वीकृति पाने की इच्छा से
(ग) दया से
(घ) क्रोध से(3) · 1 mark · MCQ
'सर्जक' शब्द का अर्थ है:
(क) सर्जन (डॉक्टर)
(ख) रचना या निर्माण करने वाला
(ग) सज़ा देने वाला
(घ) सजाने वाला(4) · 1 mark · MCQ
'न स्पर्धा थी और न ही हार-जीत का भाव'—इससे मोहन के बारे में क्या पता चलता है?
(क) वह धनराम को नीचा दिखाना चाहता था
(ख) वह काम के आनंद में डूबा था, किसी होड़ में नहीं
(ग) वह थक गया था
(घ) वह नौकरी माँग रहा था(5) · 1 mark · MCQ
यह गद्यांश कहानी के शीर्षक 'गलता लोहा' को किस रूप में सार्थक करता है?
(क) लोहा पिघलकर बह जाता है
(ख) भट्ठी के लोहे के साथ मोहन का जातीय अभिमान भी गलकर नया रूप लेता है
(ग) मोहन लोहा बेचता है
(घ) धनराम का आफर बंद हो जाता है
Show the answersAnswers
- (ख) पुरोहित खानदान का युवक उसकी भट्ठी पर बैठकर उसका काम कर रहा था
- (ख) अपनी कारीगरी की स्वीकृति पाने की इच्छा से
- (ख) रचना या निर्माण करने वाला
- (ख) वह काम के आनंद में डूबा था, किसी होड़ में नहीं
- (ख) भट्ठी के लोहे के साथ मोहन का जातीय अभिमान भी गलकर नया रूप लेता है
शेखर जोशी – गलता लोहा: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: नदी की बाढ़ और उसका परिणाम · 2 marks · Short answerExam level
छुट्टी के पहले दिन नदी पार करते समय क्या घटना हुई और उसने मोहन के जीवन की दिशा कैसे बदल दी? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पहाड़ी के पार वर्षा से नदी अचानक बढ़ी; घसियारों के साथ मोहन किसी तरह बचा।
- वंशीधर चिंतित; रमेश के प्रस्ताव पर मोहन लखनऊ गया।
Answer: मोहन घसियारों के साथ नदी पार कर रहा था कि पहाड़ी के दूसरी ओर भारी वर्षा से पानी अचानक बढ़ गया; वे किसी तरह सकुशल पार पहुँचे। इससे वंशीधर घबरा गए और जब रमेश ने प्रस्ताव दिया, तो उन्होंने मोहन को उसके साथ लखनऊ भेज दिया।
Example 2: दाँतों में तिनका · 2 marks · Short answerHarder exam level
वंशीधर ने धनराम से मोहन के बारे में क्या कहा और उस समय दाँतों में तिनका क्यों दबाया? (लगभग 40 शब्द)
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- झूठ: सेक्रेटेरियट में नियुक्ति, शीघ्र बड़ा पद।
- तिनका: लोक-विश्वास कि इससे असत्य का दोष नहीं लगता; स्वप्नभंग की लज्जा।
Answer: वंशीधर ने कहा कि मोहन की सेक्रेटेरियट में नियुक्ति हो गई है और वह जल्दी बड़े पद पर पहुँचेगा। सच यह नहीं था; बेटे के स्वप्नभंग की लज्जा छिपाते हुए उन्होंने दाँतों में तिनका दबा लिया, ताकि मन को संतोष रहे कि असत्य बोलने का दोष नहीं लगेगा।
Example 3: शीर्षक की सार्थकता · 3 marks · Short answerHarder exam level
'गलता लोहा' शीर्षक कहानी के स्थूल और प्रतीकात्मक, दोनों स्तरों पर कैसे सार्थक है? (लगभग 60 शब्द)
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- स्थूल स्तर: भट्ठी में गलाकर लोहे की छड़ को गोलाई देना।
- प्रतीकात्मक: मोहन का जातीय अभिमान गलना।
- मास्टर का ताना 'दिमाग में लोहा' भी जुड़ता है।
Answer: स्थूल स्तर पर कहानी के अंत में लोहे की मोटी छड़ भट्ठी में गलाकर सुघड़ गोले में ढाली जाती है। प्रतीकात्मक स्तर पर मोहन के मन का जातीय अभिमान और संकोच भी गल जाता है; पुरोहित खानदान का युवक लोहार की भट्ठी पर बैठकर उसका काम करता है। इस तरह कठोर सामाजिक दीवार पिघलकर मेहनतकशों के भाईचारे का नया आकार लेती है।
Example 4: धनराम का चरित्र · 3 marks · Short answerExam level
धनराम के चरित्र की तीन विशेषताएँ पाठ के आधार पर लिखिए। (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- मेहनती, कुशल कारीगर: पिता का आफर सँभाला, मन लगाकर धार गढ़ी।
- विनम्र, स्नेही: मोहन के प्रति आदर।
- सरल, पर जातिगत हीनता से ग्रस्त।
Answer: धनराम मेहनती और कुशल कारीगर है; पिता के बाद उसने आफर सँभाला और मोहन के हँसुवे की धार मन लगाकर गढ़ी। वह विनम्र और स्नेही है; मार खाने के बावजूद मोहन और मास्टर, दोनों का आदर करता है। वह सरल है, पर बचपन से भरी गई जातिगत हीनता के कारण मोहन को प्रतिद्वंद्वी नहीं, श्रेष्ठ मान लेता है।
Example 5: मोहन का भट्ठी पर रुक जाना · 3 marks · Short answerHOTS / competency
हँसुवा मिल जाने के बाद भी मोहन धनराम की भट्ठी पर बैठा रहा और फिर स्वयं हथौड़ा उठा लिया। उसके जीवन के अनुभवों के आधार पर इन दोनों क्रियाओं के पीछे की मनःस्थिति स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द)
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- लखनऊ में नौकर-सा जीवन, तकनीकी स्कूल, नौकरी की तलाश: बड़े आदमी का सपना टूट चुका था।
- धनराम के पास बचपन की आत्मीयता और अपने हुनर को आज़माने का अवसर।
- जातीय मर्यादा से अधिक काम का आनंद और बराबरी का भाव।
Answer: लखनऊ में नौकर-सा जीवन, तकनीकी स्कूल और नौकरी की तलाश ने मोहन के बड़ा आदमी बनने के सपने तोड़ दिए थे और जातीय श्रेष्ठता का भ्रम भी। धनराम के पास उसे बचपन की आत्मीयता मिली, इसलिए वह जाने की जल्दी में नहीं था। लोहा मुड़ता न देख उसने अपना तकनीकी हुनर आज़माया; अब उसके लिए जाति की मर्यादा से बड़ा काम का आनंद था।
Example 6: मास्टर त्रिलोक सिंह की पद्धति · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मास्टर त्रिलोक सिंह मोहन से ही कमज़ोर छात्रों को सज़ा दिलवाते थे। आज की शिक्षा-दृष्टि से इस पद्धति के दो दुष्परिणाम बताइए। (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- कमज़ोर छात्र का अपमान और हीनता।
- छात्रों में ऊँच-नीच और दूरी; मेधावी छात्र में अहं।
Answer: पहला, सहपाठी के हाथों पिटने से कमज़ोर छात्र अपमानित होता है और उसकी हीनता गहरी हो जाती है, जैसे धनराम की। दूसरा, इससे छात्रों के बीच ऊँच-नीच और दूरी बढ़ती है; मेधावी छात्र अपने को श्रेष्ठ और दूसरों को छोटा मानने लगता है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
'गलता लोहा' शीर्षक की सार्थकता (लगभग 60 शब्द, 3 अंक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| स्थूल अर्थ: भट्ठी में लोहे का गलना और गोला बनना | 1 |
| प्रतीकात्मक अर्थ: मोहन का जातीय अभिमान गलना, नए भाईचारे का आकार | 1.5 |
| भाषा और शब्द-सीमा | 0.5 |
वंशीधर का दाँतों में तिनका दबाकर झूठ बोलना (लगभग 40 शब्द, 2 अंक) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| क्या कहा: सेक्रेटेरियट में नियुक्ति | 1 |
| क्यों: असत्य का दोष न लगने का संतोष, स्वप्नभंग की लज्जा | 1 |
Where students lose marks in शेखर जोशी – गलता लोहा
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: शीर्षक का केवल स्थूल अर्थ लिखना
प्रश्न प्रायः प्रतीकात्मक अर्थ (जातीय अभिमान का गलना) माँगता है।
Do this: दोनों स्तर लिखें: भट्ठी का लोहा और मन का अभिमान।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: यह लिखना कि मोहन लखनऊ में बड़ा अफ़सर बन गया
यह वंशीधर का झूठ था; मोहन तकनीकी स्कूल के बाद नौकरी ढूँढ़ रहा था।
Do this: वंशीधर के झूठ और मोहन की वास्तविक स्थिति में अंतर रखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: धनराम के आश्चर्य का कारण मोहन की कारीगरी बताना
पाठ के अनुसार उसे कारीगरी से उतना आश्चर्य नहीं हुआ, जितना पुरोहित खानदान के युवक के उसकी भट्ठी पर हाथ डालने से।
Do this: आश्चर्य का सामाजिक कारण लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: मास्टर त्रिलोक सिंह को केवल खलनायक या केवल आदर्श शिक्षक बताना
उनमें अनुशासन और मेधा की पहचान है, पर जातिगत पूर्वाग्रह और अपमानजनक दंड भी।
Do this: खूबियाँ और खामियाँ, दोनों प्रमाण सहित।
Usually costs: 1 अंक
Practice questions on शेखर जोशी – गलता लोहा
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
धनराम को कौन-सा पहाड़ा याद नहीं हुआ था?
(क) बारह का
(ख) तेरह का
(ग) चौदह का
(घ) ग्यारह काHint
'तेरै दूणी चौबीस'।
Answer
(ख) तेरह का
Q2 · 1 mark · Very short answerExam level
वंशीधर उस दिन गणनाथ जाकर क्या करने वाले थे?
Hint
चंद्रदत्त जी के लिए।
Answer
चंद्रदत्त जी के लिए रुद्रीपाठ, पर दो मील की सीधी चढ़ाई अब उनके बूते की नहीं थी।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level
रमेश ने मोहन को आगे की पढ़ाई के बजाय तकनीकी स्कूल में क्यों भर्ती कराया? इसके पीछे का असली कारण क्या लगता है? (लगभग 40 शब्द)
Hint
बी.ए.-एम.ए. बेकार; पर घर की सुविधा।
Answer
रमेश के घरवाले कहते थे कि हज़ारों बी.ए., एम.ए. बेकार घूम रहे हैं, इसलिए हाथ का काम सीखना बेहतर है। असली कारण यह लगता है कि वे मोहन पर आगे की पढ़ाई का खर्च और समय नहीं लगाना चाहते थे; उनके लिए वह घर का काम करने वाला सहायक था।
Q4 · 1 mark · MCQHarder exam level
कथन (A): धनराम ने कभी मोहन को अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं समझा। कारण (R): मोहन ने उसे कभी सज़ा नहीं दी थी।
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
(ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
(ग) A सही, R गलत
(घ) A गलत, R सहीHint
मास्टर के आदेश पर किसने बेंत मारे?
Answer
(ग) A सही, R गलत (मोहन के हाथों धनराम ने कई बार बेंत खाए थे; प्रतिद्वंद्वी न मानने का कारण उसके मन में बैठाई गई जातिगत हीनता थी)
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए कहानी के अंत में मोहन धनराम के साथ मिलकर गाँव में औज़ार बनाने की साझा कार्यशाला खोलता है। कहानी में दिखे दोनों के गुणों के आधार पर बताइए कि यह साझेदारी कितनी सफल हो सकती है और गाँव का समाज उस पर कैसी प्रतिक्रिया कर सकता है। (लगभग 60 शब्द)
Hint
धनराम का अनुभव, मोहन का तकनीकी प्रशिक्षण; ब्राह्मण-शिल्पकार टोले की मर्यादाएँ।
Answer
साझेदारी सफल हो सकती है, क्योंकि धनराम के पास वर्षों का अनुभव है और मोहन के पास तकनीकी स्कूल का प्रशिक्षण और नपी-तुली चोट मारने का कौशल। पर गाँव में ब्राह्मण टोले के लोग शिल्पकार टोले में बैठते तक नहीं थे, इसलिए शुरू में विरोध और ताने मिल सकते हैं। अच्छे काम और ईमानदारी से धीरे-धीरे समाज की सोच भी बदल सकती है।
Q6 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
धनराम ने हँसुवा लौटाते हुए 'जैसे अपनी भूल-चूक के लिए माफ़ी माँगी हो'। उसके इस व्यवहार से उसके मन की कौन-सी स्थिति प्रकट होती है? (लगभग 40 शब्द)
Hint
पंडित जी को फ़ुर्सत नहीं; सेवा-भाव और संकोच।
Answer
धनराम को लगा कि पुरोहित परिवार का काम अटका रहा, जिसे वह पहले कर सकता था; इसलिए उसने कहा कि किसी के हाथ भिजवा देते तो वह तुरंत बना देता। इससे उसका सेवा-भाव, विनम्रता और ऊँची जाति के प्रति मन में बैठा संकोच प्रकट होता है।
Q7 · 2 marks · Short answerHarder exam level
मोहन ने लखनऊ में अपनी वास्तविक स्थिति घरवालों से क्यों छिपाई? (लगभग 40 शब्द)
Hint
पिता के सपने।
Answer
मोहन जानता था कि पिता उसके सुनहरे भविष्य के सपने देख रहे हैं और गरीबी में उसी आशा से जी रहे हैं। सच बताकर वह उन्हें दुखी नहीं करना चाहता था, और उसके पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था, इसलिए उसने चुपचाप परिस्थितियों से समझौता कर लिया।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.मोहन के पिता का नाम क्या था?Show answer
वंशीधर तिवारी।
2.धनराम के पिता का नाम क्या था?Show answer
गंगाराम।
3.मास्टर त्रिलोक सिंह स्कूल आने से पहले कहाँ हुक्का पीते थे?Show answer
गोपाल सिंह की दुकान पर।
4.मोहन को लखनऊ कौन ले गया?Show answer
बिरादरी का युवक रमेश।
5.आगे की पढ़ाई का स्कूल गाँव से कितनी दूर था?Show answer
चार मील।
6.अंत में मोहन ने लोहे से क्या बनाया?Show answer
लोहे का सुघड़ गोल छल्ला।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप कहानी का वर्तमान और फ़्लैशबैक वाला भाग अलग-अलग बता सकते हैं?
- क्या आप 'ज़बान का चाबुक' और 'बिरादरी का सहारा' का प्रसंग समझा सकते हैं?
- क्या आप मोहन के लखनऊ जीवन की कठिनाइयाँ गिना सकते हैं?
- क्या आप धनराम के आश्चर्य का सही कारण लिख सकते हैं?
- क्या आप शीर्षक की सार्थकता दोनों स्तरों पर लिख सकते हैं?
शेखर जोशी – गलता लोहा: frequently asked questions
'गलता लोहा' कहानी का मूल संदेश क्या है?
जातिगत अभिमान बेमानी है; मेहनतकशों का सच्चा भाईचारा जाति से ऊपर है और श्रम में सृजन का आनंद है।
'आफर' किसे कहते हैं?
लोहार की भट्ठी या कार्यशाला को, जहाँ लोहा गरम करके औज़ार बनाए जाते हैं।
कहानी में फ़्लैशबैक का क्या उपयोग है?
वर्तमान में भट्ठी पर बैठे मोहन और धनराम बचपन में लौटते हैं; इससे पता चलता है कि मोहन किन परिस्थितियों से गुज़रकर जातीय अभिमान छोड़ने की मनोदशा तक पहुँचा।
शेखर जोशी किस आंदोलन से जुड़े कथाकार हैं?
नई कहानी आंदोलन से; उनकी कहानियाँ उसके प्रगतिशील पक्ष का प्रतिनिधित्व करती हैं।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) (302) पाठ्यक्रम, कक्षा 11-12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 1 (Reprint 2026-27), पाठ 5: गलता लोहा