राजस्थान की रजत बूँदें (अनुपम मिश्र): Class 11 सार, कुंई और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'राजस्थान की रजत बूँदें' अनुपम मिश्र का पाठ है, जिसमें राजस्थान की मरुभूमि में मीठा पानी जुटाने वाली 'कुंई' का वर्णन है। रेत के नीचे खड़िया पत्थर की पट्टी वर्षा-जल को खारे भूजल में मिलने से रोकती है; उस नमी को चेजारो द्वारा बनाई गहरी, संकरी कुंई बूँद-बूँद मीठे पानी में बदल देती है।
What अनुपम मिश्र – राजस्थान की रजत बूँदें is about
राजस्थान की रजत बूँदें वितान भाग 1 का दूसरा पाठ है। इसके लेखक अनुपम मिश्र पर्यावरण और पारंपरिक जल-संरक्षण पर लिखने वाले प्रसिद्ध लेखक हैं। पाठ बताता है कि मरुभूमि के समाज ने पीढ़ियों के अनुभव से पानी का पूरा एक शास्त्र विकसित किया है और कुंई उसका अद्भुत उदाहरण है।
पाठ के मुख्य बिंदु:
- कुंई की खुदाई करते चेलवांजी (चेजारो): गरमी, बसौली, रेत फेंककर हवा, धातु का टोप
- कुंई और कुएँ का अंतर
- खड़िया पत्थर की पट्टी और रेत के कणों की 'उदारता'
- पानी के तीन रूप: पालरपानी, पातालपानी, रेजाणीपानी
- चिनाई के तरीके: ईंट, खींप घास का रस्सा, लकड़ी के लट्ठे (साँपणी)
- चेजारो का सम्मान: भोज, भेंट, आच प्रथा; अब केवल मज़दूरी
- कुंई का मुँह छोटा रखने के कारण, चड़स, ढक्कन, ताले, घिरनी और ओड़ाक
- निजी कुंई, सार्वजनिक ज़मीन और ग्राम समाज का अंकुश
- चुरू, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर; खड़ेरों की ढाणी की 120 कुंइयाँ
वितान भाग 1 से कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा में प्रश्न 12 के अंतर्गत तीन में से दो प्रश्न, लगभग 60 शब्दों में, 5-5 अंक के आते हैं।
Weightage: खंड ग (आरोह भाग 1 एवं वितान भाग 1) के 80 में से 40 अंक हैं; वितान भाग 1 से प्रश्न 12 में तीन में से दो प्रश्न, लगभग 60 शब्दों में, 5-5 अंक के आते हैं।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27, कक्षा 11 परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम विनिर्देशन
अनुपम मिश्र – राजस्थान की रजत बूँदें: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
पाठ की शुरुआत एक दृश्य से होती है: पसीने में तरबतर चेलवांजी तीस-पैंतीस हाथ गहरी, बहुत संकरी कुंई के भीतर उकड़ूँ बैठकर बसौली (छोटे फावड़े जैसा औज़ार) से खुदाई कर रहे हैं। गहराई में गरमी बढ़ती है, इसलिए ऊपर खड़े लोग ज़ोर से मुट्ठी भर रेत नीचे फेंकते हैं, जिससे ताज़ी हवा नीचे जाती है और गरम हवा ऊपर आती है। सिर को गिरती रेत और कंकड़ से बचाने के लिए चेलवांजी धातु का टोप पहनते हैं। चेलवांजी या चेजारो कुंई की खुदाई और विशेष चिनाई (चेजा) के कुशल कारीगर हैं।
कुंई छोटा-सा कुआँ है; व्यास में छोटी, पर गहराई में कम नहीं। कुआँ भूजल के लिए बनता है, जबकि कुंई वर्षा के जल को अनोखे ढंग से समेटती है। मरुभूमि में रेत के नीचे कहीं-कहीं दस-पंद्रह से पचास-साठ हाथ नीचे खड़िया पत्थर की पट्टी होती है। यह वर्षा-जल को नीचे के खारे भूजल में मिलने से रोकती है और पानी रेत और पट्टी के बीच नमी के रूप में फैल जाता है। रेत के कण एक-दूसरे से चिपकते नहीं, इसलिए धरती में दरारें नहीं पड़तीं और नमी भाप बनकर नहीं उड़ती। कुंई इसी नमी को बूँद-बूँद पानी में बदलती है: खारे पानी के सागर में अमृत जैसा मीठा पानी।
समाज ने पानी के तीन रूप पहचाने हैं: पालरपानी (सीधे बरसात का, धरातल पर बहता), पातालपानी (भूजल) और रेजाणीपानी (धरातल से नीचे उतरा पर पाताल तक न पहुँचा)। वर्षा भी 'रेजा' से नापी जाती है, यानी धरती में कितनी अंगुल समाई। चार-पाँच हाथ व्यास की कुंई तीस से साठ-पैंसठ हाथ गहरी होती है और रोज़ खुदाई के बाद चिनाई की जाती है। जहाँ ईंट से मिट्टी न रुके, वहाँ खींप घास का रस्सा कुंडली की तरह बाँधा जाता है; कहीं अरणी आदि की लकड़ी के लट्ठे खड़े करके 'साँपणी' बनाई जाती है। खड़िया पट्टी आते ही पानी रिसने लगता है।
पहले कुंई पूरी होने पर भोज होता, चेजारो को भेंट दी जाती और आच प्रथा के तहत वर्ष भर नेग और फसल में हिस्सा मिलता; अब केवल मज़दूरी का चलन है। कुंई का मुँह छोटा रखा जाता है, ताकि कम पानी फैले नहीं, भाप बनकर उड़े नहीं और ढकना आसान हो। पानी चड़स से निकाला जाता है; ढक्कन और कहीं ताले भी लगते हैं। कुंई निजी होती है, पर ज़मीन सार्वजनिक; इसलिए नई कुंई के लिए ग्राम समाज की स्वीकृति चाहिए। गोधूलि में पूरा गाँव कुंइयों पर आता है। चुरू, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर में ऐसी कुंइयाँ बहुत हैं; खड़ेरों की ढाणी में तो एक सौ बीस कुंइयाँ थीं।
Themes and message
पारंपरिक ज्ञान और जल-संरक्षण
मरुभूमि के समाज ने पीढ़ियों के अनुभव से पानी का पूरा शास्त्र विकसित किया; कुंई उस लोक-विज्ञान का अद्भुत उदाहरण है।
From the text: पानी के तीन रूपों (पालर, पाताल, रेजाणी) की पहचान और वर्षा को 'रेजा' से नापना।
प्रकृति की उदारता
खड़िया पट्टी और न चिपकने वाले रेत के कण मिलकर वर्षा-जल को सुरक्षित रखते हैं; मनुष्य उस उदारता को समझकर उपयोग करता है।
From the text: 'पर यहाँ बिखरे रहने में ही संगठन है।'
श्रम और कौशल का सम्मान
चेजारो का काम जोखिम और दक्षता का है; पहले समाज उन्हें वर्ष भर सम्मान देता था, अब केवल मज़दूरी।
From the text: आच प्रथा: तीज-त्योहार पर नेग और खलिहान में उनके नाम का अनाज का ढेर।
निजी और सार्वजनिक का संतुलन
कुंई निजी है, पर नमी सार्वजनिक ज़मीन की है; इसलिए संसाधन के उचित बँटवारे के लिए समाज का अंकुश ज़रूरी है।
From the text: हर नई कुंई का अर्थ है पहले से तय नमी का बँटवारा; इसलिए समाज ज़रूरत पड़ने पर ही स्वीकृति देता है।
Characters
चेलवांजी (चेजारो)
कुंई की खुदाई और चिनाई के दक्ष कारीगर।
- अत्यंत कुशल और सावधान
- कठिन परिस्थितियों में धैर्य से काम करने वाले
- मिट्टी और पट्टी की गहरी परख रखने वाले
संकरी, गरम कुंई में बसौली से खुदाई करते हैं और खड़िया पट्टी आते ही पहचान लेते हैं।
मरुभूमि का समाज
कुंई बनाने, उपयोग करने और नियंत्रित करने वाला ग्राम समाज।
- अनुभवी और प्रकृति को समझने वाला
- सामूहिक हित के प्रति सजग
- कारीगरों का सम्मान करने वाला (पहले)
नई कुंई पर अंकुश रखता है और चेजारो को आच प्रथा से सम्मान देता था।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| दृश्यात्मक आरंभ | कुंई के भीतर पसीने में तरबतर चेलवांजी का दृश्य | पाठक सीधे घटनास्थल पर पहुँच जाता है; जानकारी कहानी जैसी लगती है। |
| आंचलिक-पारिभाषिक शब्दावली | चेजारो, बसौली, खींप, साँपणी, चड़स, ओड़ाक, रेजाणीपानी, आच प्रथा | विषय की प्रामाणिकता और राजस्थानी जीवन का रंग। |
| रोचक तुलनाएँ और कहावतें | 'कुआँ पुंलिंग है, कुंई स्त्रीलिंग'; सोने का अंडा देने वाली मुर्गी | तकनीकी बात सरल और याद रखने योग्य बनती है। |
| विरोधाभास और सूक्तियाँ | 'जहाँ लगाव है, वहाँ अलगाव भी होता है'; 'बिखरे रहने में ही संगठन है' | वैज्ञानिक तथ्य को दार्शनिक गहराई मिलती है। |
| प्रतीकात्मक शीर्षक | 'रजत बूँदें' | मरुभूमि में पानी की हर बूँद चाँदी जैसी कीमती है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
कुआँ पुंलिंग है, कुंई स्त्रीलिंग।
अनुपम मिश्र: कुंई का परिचय देते हुए।
आकार के अंतर को रोचक ढंग से बताना।
पर यहाँ बिखरे रहने में ही संगठन है।
अनुपम मिश्र: रेत के कणों के न चिपकने के गुण पर।
मरुभूमि में नमी बचे रहने का रहस्य।
खारे पानी के सागर में अमृत जैसा मीठा पानी।
अनुपम मिश्र: कुंई में नमी के बूँदों में बदलने पर।
कुंई के पानी का महत्त्व।
चेजो यानी चिनाई का श्रेष्ठतम काम कुंई का प्राण है।
अनुपम मिश्र: कुंई बनाने की कला का वर्णन।
चिनाई के बिना कुंई धँस जाएगी; कौशल का महत्त्व।
हर दिन सोने का एक अंडा देने वाली मुर्गी की चिरपरिचित कहानी को ज़मीन पर उतारती है कुंई।
अनुपम मिश्र: कुंई से रोज़ थोड़ा-सा पानी मिलने की बात।
धैर्य और संयम से संसाधन के उपयोग का संदेश।
अनुपम मिश्र – राजस्थान की रजत बूँदें in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
वर्षा-जल संचयन
मान लीजिए आपकी सोसाइटी में गर्मियों में पानी के टैंकर मँगाने पड़ते हैं, जबकि बरसात में छतों का पानी नालियों में बह जाता है।
कुंई के सिद्धांत से आप क्या सुझाव देंगे? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- कुंई वर्षा की नमी को सहेजकर साल भर पानी देती है।
- छत के पानी के लिए रिचार्ज पिट या टैंक।
Answer: मैं सुझाव दूँगा कि छतों का वर्षा-जल पाइप से टैंक या ज़मीन में रिचार्ज पिट तक पहुँचाया जाए। जैसे कुंई बरसात की नमी को साल भर पानी में बदलती है, वैसे ही संचित जल गर्मियों में काम आएगा।
Memory hook: बरसात की बूँद आज बचाओ, गर्मी में पाओ।
साझा संसाधन, साझा नियम
कल्पना कीजिए कि आपके मोहल्ले में हर घर अपना बोरवेल गहरा करता जा रहा है और कुछ ही वर्षों में सबके बोरवेल सूखने लगे हैं।
कुंई पर ग्राम समाज के अंकुश से इसकी तुलना कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- कुंई: नमी तय, हर नई कुंई = बँटवारा, इसलिए समाज की स्वीकृति।
- बोरवेल: भूजल साझा; बिना नियम के सबका नुकसान।
Answer: जैसे गाँव ने नई कुंई के लिए स्वीकृति ज़रूरी रखी, वैसे ही मोहल्ले को बोरवेल की गहराई और संख्या पर साझा नियम बनाने चाहिए, नहीं तो साझा भूजल सबके लिए खत्म हो जाएगा।
Memory hook: पानी सबका, नियम सबके।
धैर्य से उपयोग
यदि किसी के पास ऐसी गुल्लक हो जिसमें रोज़ थोड़ा-सा ही पैसा आता हो, तो उसे कैसे खर्च करना चाहिए?
सोने का अंडा देने वाली मुर्गी और कुंई की तुलना से समझाइए।
Try it first, then show the solutionSolution
- कुंई रोज़ दो-तीन घड़े देती है, फिर आराम करती है।
- लालच में सब एक साथ लेने से स्रोत ही नष्ट।
Answer: कुंई की तरह रोज़ के सीमित स्रोत का संयम से उपयोग करना चाहिए; मुर्गी की कहानी की तरह लालच में सब एक साथ लेने से स्रोत ही नष्ट हो जाता है।
Memory hook: रोज़ थोड़ा, हमेशा थोड़ा।
Topics in this chapter
How the school exam asks अनुपम मिश्र – राजस्थान की रजत बूँदें
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| वितान भाग 1 (प्रश्न 12, 3 में से 2, लगभग 60 शब्द, 5 अंक) | कुंई बनाने की प्रक्रिया, खड़िया पट्टी की भूमिका, कुंई का मुँह छोटा रखने के कारण, चेजारो का बदलता सम्मान, निजी-सार्वजनिक संतुलन। | प्रक्रिया-प्रश्नों में क्रम से बिंदु; कारण-प्रश्नों में 'पहला, दूसरा, तीसरा'; अंत में एक पंक्ति का निष्कर्ष। |
| विचारात्मक/प्रासंगिकता (5 अंक) | आज के जल-संकट में पाठ की सीख, पारंपरिक ज्ञान बनाम आधुनिक तकनीक, संसाधनों का सामूहिक प्रबंधन। | पाठ का तथ्य + आज का उदाहरण + सुझाव। |
| शब्द/अवधारणा-आधारित (5 अंक) | पालरपानी-पातालपानी-रेजाणीपानी, रेजा, साँपणी, आच प्रथा, चड़स, ओड़ाक जैसे शब्दों की व्याख्या। | परिभाषा + पाठ में उसका कार्य या महत्त्व। |
Tricks to remember अनुपम मिश्र – राजस्थान की रजत बूँदें
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
पानी के तीन रूप: 'पा-पा-रे'
पालर (ऊपर बहता) → पाताल (गहरा भूजल) → रेजाणी (बीच में, पट्टी के ऊपर)।
Use it when: पानी के रूपों वाले प्रश्न।
मुँह छोटा, तीन कारण: 'कम-गर्म-ढक'
कम पानी फैले नहीं; गरमी में भाप न बने; ढकना आसान।
Use it when: कुंई के व्यास वाले प्रश्न।
चिनाई के तीन तरीके
ईंट (सामान्य) → खींप का रस्सा (मिट्टी न रुके तो) → लकड़ी के लट्ठे, साँपणी (पत्थर-खींप न मिलें तो; अरणी सबसे उम्दा)।
Use it when: निर्माण-प्रक्रिया वाले प्रश्न।
अनुपम मिश्र – राजस्थान की रजत बूँदें: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: पानी के तीन रूप · 5 marks · Long answerExam level
मरुभूमि के समाज ने पानी को किन तीन रूपों में बाँटा है? रेजाणीपानी को बचाए रखने में खड़िया पट्टी की क्या भूमिका है? (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
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- पालरपानी: बरसात का, धरातल पर बहने वाला; नदी, तालाब में रोका जाता है।
- पातालपानी: भूजल, कुओं से।
- रेजाणीपानी: धरातल में उतरा, पाताल तक न पहुँचा; खड़िया पट्टी उसे खारे पातालपानी में मिलने से रोकती है।
Answer: पहला रूप पालरपानी है, यानी सीधे बरसात से मिलने वाला पानी, जो धरातल पर बहता है और नदी-तालाब में रोका जाता है। दूसरा पातालपानी है, यानी कुओं से निकलने वाला भूजल। तीसरा रेजाणीपानी है, जो धरातल में उतरा पर पाताल तक नहीं पहुँचा। खड़िया पट्टी इसे नीचे के खारे पातालपानी में मिलने से रोकती है; पट्टी न हो, तो यह भी खारा हो जाए।
Example 2: रेत के कणों की उदारता · 5 marks · Long answerHarder exam level
'जहाँ लगाव है, वहाँ अलगाव भी होता है' और 'बिखरे रहने में ही संगठन है'—इन कथनों के आधार पर समझाइए कि मरुभूमि में वर्षा की नमी कैसे बची रहती है। (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
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- दोमट या काली मिट्टी: कण चिपकते हैं, जगह छोड़ते हैं, दरारें; नमी भाप बनकर उड़ती है।
- रेत: कण नहीं चिपकते, जगह नहीं छोड़ते; दरारें नहीं।
- नीचे पट्टी, ऊपर रेत का पहरा: नमी भीतर सुरक्षित।
Answer: गुजरात, मध्य प्रदेश आदि की दोमट या काली मिट्टी के कण धूप में आपस में चिपकते हैं और इसी 'लगाव' से जगह छोड़कर दरारें बना देते हैं, जिनसे नमी भाप बनकर उड़ जाती है। रेत के कण एक-दूसरे से चिपकते नहीं, बिखरे रहते हैं, इसलिए जगह नहीं छोड़ते और दरारें नहीं पड़तीं। नीचे खड़िया पट्टी और ऊपर रेत के असंख्य कणों का पहरा वर्षा की नमी को भीतर सुरक्षित रखता है।
Example 3: कुंई का मुँह छोटा क्यों · 5 marks · Long answerExam level
कुंई का मुँह (व्यास) छोटा रखने के कौन-से तीन कारण पाठ में बताए गए हैं? (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
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- पानी बहुत कम: बड़े व्यास में फैल जाएगा, निकालना संभव नहीं; छोटे में दो-चार हाथ ऊँचाई।
- तेज़ गरमी: बड़ा व्यास भाप बनने से नहीं रोक पाएगा।
- सफ़ाई: छोटा मुँह ढकना आसान।
Answer: पहला, कुंई में दिन भर में बहुत कम पानी (दो-तीन घड़े) जमा होता है; व्यास बड़ा हो तो यह फैल जाएगा और निकालना संभव नहीं होगा, जबकि छोटे व्यास में पानी दो-चार हाथ की ऊँचाई ले लेता है। दूसरा, तेज़ गरमी में बड़ा व्यास पानी को भाप बनकर उड़ने से नहीं रोक पाएगा। तीसरा, पानी साफ़ रखने के लिए कुंई को ढकना ज़रूरी है और छोटा मुँह ढकना आसान है।
Example 4: रस्से से बँधी कुंई · 5 marks · Long answerHarder exam level
जहाँ ईंट की चिनाई से मिट्टी नहीं रुकती, वहाँ कुंई को रस्से से कैसे 'बाँधा' जाता है? इस प्रक्रिया से समाज के श्रम-संगठन के बारे में क्या पता चलता है? (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
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- खींप घास से तीन अंगुल मोटा रस्सा; पहले दिन दस हाथ खुदाई।
- तल पर रस्से के गोले एक के ऊपर एक; अगले दिन कुंडली नीचे सरकाना, ऊपर नया रस्सा।
- तीस हाथ के लिए लगभग चार हज़ार हाथ रस्सा; सामूहिक श्रम।
Answer: पहले दिन खुदाई के साथ खींप घास जमा की जाती है और बाकी लोग तीन अंगुल मोटा रस्सा बटते हैं। लगभग दस हाथ गहराई पर तल से शुरू करके दीवार से सटाकर रस्से के गोले एक के ऊपर एक बिछाए जाते हैं। अगले दिन खुदाई के बाद यह कुंडली नीचे सरकाकर ऊपर नया रस्सा बाँधा जाता है। तीस हाथ के लिए लगभग चार हज़ार हाथ रस्सा लगता है; यह पूरे गाँव के सामूहिक श्रम का प्रमाण है।
Example 5: गोधूलि में कुंइयों का मेला · 5 marks · Long answerHOTS / competency
गोधूलि बेला में कुंइयों पर लगने वाले 'मेले' के वर्णन से मरुभूमि के सामुदायिक जीवन और प्रकृति के साथ उसके तालमेल के बारे में क्या पता चलता है? (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
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- दिन भर रिसा पानी: पूरा गाँव एक साथ आता है; तीस-चालीस घिरनियों का स्वर, लौटते पशुओं की घंटियाँ।
- दो-तीन घड़े भरकर डोल-रस्सी समेटना; कुंइयाँ 'आराम' करती हैं।
- निष्कर्ष: सामूहिकता, संयम, प्रकृति की लय से जीवन।
Answer: कुंई दिन भर में थोड़ा ही पानी जमा करती है, इसलिए पूरा गाँव गोधूलि में एक साथ कुंइयों पर आता है और मेला-सा लग जाता है। तीस-चालीस घिरनियों का स्वर गोचर से लौटते पशुओं की घंटियों में घुल जाता है। सब दो-तीन घड़े भरकर ढक्कन बंद कर देते हैं और कुंइयाँ अगले दिन तक 'आराम' करती हैं। इससे पता चलता है कि यह समाज सामूहिकता, संयम और प्रकृति की लय के साथ जीता है।
Example 6: आधुनिकता और कुंई · 5 marks · Long answerHOTS / competency
सड़कों, ट्रकों और नए लोगों की आवाजाही ने कुंई से जुड़े जीवन में कौन-से बदलाव लाए हैं? पाठ के आधार पर इन बदलावों का मूल्यांकन कीजिए। (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
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- ट्रकों की फटी ट्यूब से चड़सी: पुरानी तकनीक में नई सामग्री।
- अपरिचितों की आवक-जावक: ढक्कनों और घिरनी पर ताले।
- चेजारो को अब केवल मज़दूरी: संबंधों में ठंडापन; मूल्यांकन संतुलित।
Answer: गाँवों के पास से सड़कें निकलने और ट्रक दौड़ने से ट्रकों की फटी ट्यूब से भी छोटी चड़सी बनने लगीं; यह परंपरा में नई सामग्री का समझदारी भरा उपयोग है। पर नए और अपरिचित लोगों की आवाजाही से मीठे पानी की सुरक्षा के लिए ढक्कनों और घिरनियों पर ताले लगने लगे, जो घटते भरोसे का संकेत है। चेजारो के प्रति आत्मीय सम्मान की जगह केवल मज़दूरी भी इसी बदलाव का हिस्सा है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
कुंई का मुँह छोटा रखने के तीन कारण (लगभग 60 शब्द, 5 अंक) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| पहला कारण: कम पानी, बड़े व्यास में फैलकर निकालना असंभव | 1.5 |
| दूसरा कारण: तेज़ गरमी में भाप बनना | 1.5 |
| तीसरा कारण: ढककर साफ़ रखना आसान; भाषा और शब्द-सीमा | 2 |
पानी के तीन रूप और खड़िया पट्टी (लगभग 60 शब्द, 5 अंक) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| तीनों रूपों की सही परिभाषा | 3 |
| खड़िया पट्टी की भूमिका: रेजाणी को खारे पाताल से अलग रखना | 1.5 |
| भाषा और शब्द-सीमा | 0.5 |
Where students lose marks in अनुपम मिश्र – राजस्थान की रजत बूँदें
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: कुंई को भूजल वाला छोटा कुआँ बताना
कुंई भूजल नहीं, रेत में समाई वर्षा की नमी (रेजाणीपानी) समेटती है।
Do this: खड़िया पट्टी और रेजाणीपानी का उल्लेख अवश्य करें।
Usually costs: 2 अंक
Mistake: पालरपानी और पातालपानी की परिभाषाएँ आपस में बदल देना
पालर = धरातल का बरसाती पानी; पाताल = भूजल।
Do this: 'पा-पा-रे' सूत्र याद रखें।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: चेजारो के सम्मान वाले प्रश्न में केवल 'पहले अच्छा व्यवहार था' लिखना
भोज, भेंट, आच प्रथा (नेग, खलिहान में अनाज का ढेर) जैसे ठोस प्रमाण अपेक्षित हैं।
Do this: पहले और अब, दोनों ठोस तथ्यों के साथ लिखें।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: पूरे राजस्थान में कुंइयाँ बताना
कुंई केवल वहीं है जहाँ खड़िया पट्टी है: चुरू, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर के कई क्षेत्र।
Do this: क्षेत्रों के नाम सही लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Practice questions on अनुपम मिश्र – राजस्थान की रजत बूँदें
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
कुंई की खुदाई किस औज़ार से की जाती है?
(क) कुल्हाड़ी
(ख) फावड़ा
(ग) बसौली
(घ) हलHint
छोटी डंडी का छोटे फावड़े जैसा औज़ार।
Answer
(ग) बसौली
Q2 · 1 mark · Very short answerExam level
खड़ेरों की ढाणी को 'छह-बीसी' क्यों कहा जाता था?
Hint
छह गुणा बीस।
Answer
क्योंकि वहाँ एक सौ बीस (छह गुणा बीस) कुंइयाँ थीं।
Q3 · 5 marks · Long answerHarder exam level
कुंई के भीतर काम कर रहे चेलवांजी को गरमी और गिरते कंकड़ों से बचाने के लिए क्या उपाय किए जाते हैं? इन उपायों में छिपी समझ स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
Hint
मुट्ठी भर रेत फेंकना; धातु का टोप।
Answer
गहराई में बढ़ती गरमी और दमघोंटू हवा से बचाने के लिए ऊपर खड़े लोग बीच-बीच में मुट्ठी भर रेत ज़ोर से नीचे फेंकते हैं; इससे ऊपर की ताज़ी हवा नीचे जाती है और गरम हवा ऊपर लौटती है। गिरती रेत और बाल्टी से छलकते कंकड़ों से बचने के लिए चेलवांजी सिर पर काँसे या पीतल का बर्तन टोप की तरह पहनते हैं। इन उपायों में हवा के प्रवाह और सुरक्षा की गहरी व्यावहारिक समझ है।
Q4 · 1 mark · MCQHarder exam level
कथन (A): कुंई भूजल पाने के लिए खोदी जाती है। कारण (R): मरुभूमि में भूजल प्रायः मीठा होता है।
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
(ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
(ग) A गलत, R गलत
(घ) A सही, R गलतHint
बड़े कुओं का पानी कैसा होता है?
Answer
(ग) A गलत, R गलत (कुंई रेत में समाई वर्षा की नमी, यानी रेजाणीपानी समेटती है; वहाँ का भूजल प्रायः खारा होता है)
Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
मान लीजिए आपके गाँव में सार्वजनिक ज़मीन पर कई परिवार अपनी-अपनी कुंई बनाना चाहते हैं। पाठ के आधार पर बताइए कि ग्राम समाज को स्वीकृति देते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और क्यों। (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
Hint
नमी की मात्रा पहले से तय; हर नई कुंई = बँटवारा।
Answer
समाज को याद रखना चाहिए कि उस क्षेत्र की नमी की कुल मात्रा पहले हुई वर्षा से तय हो चुकी है; हर नई कुंई उसी नमी का बँटवारा है। इसलिए स्वीकृति तभी दी जाए जब परिवार की ज़रूरत सचमुच हो, जैसे बड़ा परिवार या कोई दूसरा स्रोत न होना। बहुत अधिक कुंइयाँ बनने से सबकी कुंइयों में पानी घट जाएगा; यही सोचकर समाज निजी कुंइयों पर अंकुश रखता है।
Q6 · 5 marks · Long answerHarder exam level
चड़स बाल्टी की तुलना में कुंई से पानी निकालने के लिए अधिक उपयुक्त क्यों है? (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
Hint
कम पानी; धातु की बाल्टी आसानी से नहीं डूबती।
Answer
कुंई के तल पर पानी बहुत कम होता है और धातु की बाल्टी उसमें आसानी से नहीं डूबती। चड़स मोटे कपड़े या चमड़े का होता है और उसके मुँह पर लोहे का वज़नी कड़ा बँधा रहता है। पानी से टकराते ही ऊपर का भारी हिस्सा नीचे गिरता है और चड़स कम पानी में भी डूबकर भर जाता है; ऊपर उठते ही वह पूरा आकार ले लेता है। अब ट्रकों की फटी ट्यूब से भी चड़सी बनने लगी हैं।
Q7 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
पाठ का शीर्षक 'राजस्थान की रजत बूँदें' कितना सार्थक है? तर्क दीजिए। (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
Hint
रजत = चाँदी; मरुभूमि में मीठे पानी का मूल्य।
Answer
रजत यानी चाँदी कीमती और चमकदार धातु है। मरुभूमि में, जहाँ बड़े कुओं का पानी भी खारा है, कुंई से बूँद-बूँद रिसकर मिलने वाला मीठा पानी चाँदी जितना ही कीमती है; इसे सहेजने के लिए ताले तक लगाए जाते हैं। पाठ इन्हीं बूँदों को पाने की कला, श्रम और समाज की समझ का वर्णन करता है, इसलिए शीर्षक पूरी तरह सार्थक है।
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1.पाठ के लेखक कौन हैं?Show answer
अनुपम मिश्र।
2.कुंई का रस्सा किस घास से बनाया जाता है?Show answer
खींप घास से।
3.लट्ठों के लिए सबसे उम्दा लकड़ी किस पेड़ की मानी जाती है?Show answer
अरणी की।
4.लट्ठों की कुंडलीनुमा बँधाई को क्या कहते हैं?Show answer
साँपणी।
5.जैसलमेर में किनके बनाए पार या कुंइयाँ आज भी पानी दे रही हैं?Show answer
पालीवाल ब्राह्मणों और मेघवालों के।
6.चरखी लगाने के लिए गुलेल के आकार के तने को क्या कहते हैं?Show answer
ओड़ाक।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप कुंई और कुएँ का अंतर बता सकते हैं?
- क्या आप खड़िया पट्टी और रेत के कणों की भूमिका समझा सकते हैं?
- क्या आप पानी के तीन रूप और 'रेजा' का अर्थ लिख सकते हैं?
- क्या आप चिनाई के तीनों तरीके और कुंई का मुँह छोटा रखने के कारण बता सकते हैं?
- क्या आप चेजारो के सम्मान में आए बदलाव और समाज के अंकुश पर लिख सकते हैं?
अनुपम मिश्र – राजस्थान की रजत बूँदें: frequently asked questions
कुंई की खुदाई पूरी होने का संकेत क्या होता है?
खड़िया पत्थर की पट्टी आते ही सारा काम रोक दिया जाता है; उसी क्षण नीचे पानी की धार लग जाती है और चेजारो ऊपर आ जाते हैं।
चेजारो किसे कहते हैं?
कुंई की खुदाई और विशेष तरह की चिनाई करने वाले दक्ष कारीगरों को; उन्हें चेलवांजी भी कहा जाता है।
'रेजा' किसकी माप है?
धरातल में समाई वर्षा की; जैसे पानी पाँच अंगुल भीतर समाए, तो उस दिन की वर्षा 'पाँच अंगुल रेजो' कहलाएगी।
आच प्रथा क्या थी?
कुंई बनाने वाले चेजारो को वर्ष भर तीज-त्योहार और विवाह पर नेग-भेंट देने और फसल पर खलिहान में उनके नाम का अनाज का ढेर लगाने की प्रथा।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) (302) पाठ्यक्रम, कक्षा 11-12, 2026-27; NCERT वितान भाग 1 (Reprint 2026-27), पाठ 2: राजस्थान की रजत बूँदें