Skip to content
HindiCBSE Class 11 · Chapter 5

दुष्यंत कुमार – गज़ल ('कहाँ तो तय था'): Class 11 व्याख्या और प्रश्न

Updated 15 October 2026 · Fact-checked

दुष्यंत कुमार की गज़ल 'कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए' उनके संग्रह 'साये में धूप' से ली गई है। इसमें शासन के झूठे वादों, अभावों को चुपचाप सहने वाले लोगों और कवि की आवाज़ दबाने की कोशिश पर व्यंग्य है। पूरी गज़ल का केंद्रीय सूत्र है: जो चल रहा है उसे नकारना और बेहतर विकल्प की तलाश।

What दुष्यंत कुमार – गज़ल is about

दुष्यंत कुमार को हिंदी में गज़ल विधा को प्रतिष्ठित करने का श्रेय दिया जाता है। उनके कई शेर राजनीतिक और साहित्यिक सभाओं में लोकोक्तियों की तरह दोहराए जाते हैं। यह गज़ल उनके संग्रह 'साये में धूप' से ली गई है। गज़लों में शीर्षक देने का चलन नहीं है, इसलिए पाठ का कोई शीर्षक नहीं है।

गज़ल का शिल्प:

  • हर शेर (दो पंक्तियाँ) अपने-आप में पूरा और स्वतंत्र होता है
  • पहले शेर (मतला) की दोनों पंक्तियों में तुक मिलती है; बाद के हर शेर की दूसरी पंक्ति उसी तुक का निर्वाह करती है
  • इस गज़ल में हर शेर की दूसरी पंक्ति '...र के लिए' पर समाप्त होती है: घर, शहर, भर, सफ़र, नज़र, असर, बहर, गुलमोहर
  • रूप के स्तर पर तुक और अंतर्वस्तु के स्तर पर मिज़ाज शेरों को जोड़ता है

केंद्रीय भाव: राजनीति और समाज की मौजूदा स्थिति को खारिज करना और विकल्प की तलाश को मान्यता देना।

कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा में काव्य खंड से पठित काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, लगभग 40 शब्दों के (2 अंक) और लगभग 60 शब्दों के (3 अंक) प्रश्न आते हैं।

Weightage: खंड ग (आरोह भाग 1 एवं वितान भाग 1) के 80 में से 40 अंक हैं; काव्य खंड से पठित काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5), तीन में से दो प्रश्न लगभग 60 शब्दों में (3×2) और तीन में से दो प्रश्न लगभग 40 शब्दों में (2×2) आते हैं।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27, कक्षा 11 परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम विनिर्देशन

दुष्यंत कुमार – गज़ल: explanation

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

शेर 1: कवि कहता है कि तय तो यह हुआ था कि हर घर के लिए दीपक (चिरागाँ) होंगे, यानी हर परिवार तक सुख-सुविधाएँ पहुँचेंगी; पर हालत यह है कि पूरे शहर के लिए एक चिराग भी उपलब्ध नहीं। यह शासन के बड़े वादों और कड़वी वास्तविकता पर व्यंग्य है।

शेर 2: यहाँ पेड़ों की छाया में भी धूप लगती है, अर्थात् जिन संस्थाओं और लोगों से सुरक्षा और राहत की आशा थी, वही कष्ट दे रहे हैं। इसलिए कवि कहता है कि चलो यहाँ से चलें, और हमेशा के लिए।

शेर 3: ये लोग कमीज़ न होने पर पाँवों से पेट ढँक लेंगे, यानी अभाव को चुपचाप सह लेंगे, शिकायत नहीं करेंगे। कवि व्यंग्य करता है कि ऐसे लोग इस (शोषण के) सफ़र के लिए कितने 'उपयुक्त' हैं।

शेर 4: यदि ईश्वर नहीं है, तो न सही; मनुष्य का सपना ही सही। कम-से-कम आँखों के सामने कोई सुंदर दृश्य (बेहतर दुनिया की कल्पना) तो है, जिसके सहारे जिया जा सके।

शेर 5: सत्ता में बैठे लोग आश्वस्त हैं कि पत्थर (कठोर व्यवस्था या लोगों का हृदय) पिघल नहीं सकता; पर कवि बेचैन है कि उसकी आवाज़ में ऐसा असर हो कि पत्थर भी पिघल जाए।

शेर 6: कवि शासन से कहता है कि राज तुम्हारा है, चाहो तो शायर की ज़ुबान सिल दो; इस छंद (बहर) के लिए, यानी ऐसी विद्रोही कविता को रोकने के लिए, यह सावधानी ज़रूरी भी है। यह अभिव्यक्ति पर पाबंदी पर तीखा व्यंग्य है।

शेर 7: जिएँ तो अपने बगीचे में गुलमोहर के नीचे, और मरें तो दूसरों की गलियों में गुलमोहर के लिए। अर्थात् अपने घर-देश में स्वाभिमान और सुंदरता से जिएँ, और यदि मरना पड़े, तो दूसरों के सुख-सौंदर्य (या किसी ऊँचे उद्देश्य) के लिए मरें।

Themes and message

झूठे वादों पर व्यंग्य

शासन ने हर घर तक रोशनी पहुँचाने का वादा किया, पर पूरे शहर में एक दीपक भी नहीं; कथनी और करनी का अंतर।

From the text: 'कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए,'

शोषण को सहने वाली जनता

जो लोग अभाव को चुपचाप सह लेते हैं, वे शोषक व्यवस्था के लिए 'उपयुक्त' बन जाते हैं; कवि इस सहनशीलता पर भी चोट करता है।

From the text: 'न हो कमीज़ तो पाँवों से पेट ढँक लेंगे,'

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

सत्ता कवि की आवाज़ दबाना चाहती है, क्योंकि उसकी कविता में बदलाव की आग है।

From the text: 'तेरा निज़ाम है सिल दे ज़ुबान शायर की,'

बदलाव और विकल्प की तलाश

कवि मौजूदा स्थिति को नकारता है, बेहतर दुनिया का सपना देखता है और अपनी आवाज़ में असर चाहता है।

From the text: 'मैं बेकरार हूँ आवाज़ में असर के लिए।'

स्वाभिमान और त्याग

अपने स्थान पर सम्मान से जीना और ऊँचे उद्देश्य या दूसरों के लिए बलिदान देना।

From the text: 'जिएँ तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले,'

The speaker and the people in the poem

कवि (शायर, वक्ता)

व्यवस्था का आलोचक और बदलाव का आकांक्षी।

  • संवेदनशील और जनपक्षधर
  • निर्भीक: शासन से सीधे बात करने वाला
  • आशावादी: सपने और आवाज़ के असर में विश्वास
  • स्वाभिमानी

'मैं बेकरार हूँ आवाज़ में असर के लिए' और 'तेरा निज़ाम है सिल दे ज़ुबान शायर की'।

'वे' (सत्ताधारी) और 'ये लोग' (जनता)

गज़ल में संकेतित दो पक्ष।

  • सत्ताधारी: आश्वस्त, आत्मसंतुष्ट, कठोर
  • जनता: अभाव सहने वाली, चुप रहने वाली

'वे मुतमइन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता'; 'ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए'।

Poetic devices

DeviceExampleEffect
गज़ल का शिल्प: मतला, काफ़िया, रदीफ़पहले शेर की दोनों पंक्तियाँ और हर शेर की दूसरी पंक्ति '...र के लिए' पर समाप्तस्वतंत्र शेरों के बीच संगीतात्मक एकता।
प्रतीकचिराग = सुख-सुविधा/रोशनी; दरख्त का साया = सुरक्षा देने वाली संस्थाएँ; पत्थर = कठोर व्यवस्था; गुलमोहर = सुंदर, सम्मानपूर्ण जीवनसीधी राजनीतिक बात को कलात्मक और बहुअर्थी बनाना।
विरोधाभास'दरख्तों के साये में धूप लगती है'जहाँ राहत की आशा थी, वहीं कष्ट; व्यवस्था की विडंबना।
वचन का प्रयोग'चिरागाँ' (बहुवचन) और 'चिराग' (एकवचन)वादे की विशालता और वास्तविकता की कमी का तीखा अंतर।
हिंदी-उर्दू मिली-जुली भाषामयस्सर, दरख्त, मुनासिब, मुतमइन, निज़ाम, एहतियात, बहरआम बोलचाल की हिंदुस्तानी, जिससे शेर लोकोक्तियों की तरह याद रहते हैं।
व्यंग्य'ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए'; 'ये एहतियात ज़रूरी है इस बहर के लिए'प्रशंसा जैसे शब्दों में तीखी आलोचना।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए,

    कवि: गज़ल का पहला मिसरा (मतला)।

    सत्ता के वादों पर व्यंग्य; गज़ल का प्रवेश-बिंदु।

  • चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए।

    कवि: पेड़ों के साये में भी धूप लगने की बात के बाद।

    असह्य स्थिति को छोड़कर विकल्प खोजने का भाव।

  • मैं बेकरार हूँ आवाज़ में असर के लिए।

    कवि: सत्ताधारियों के आश्वस्त होने के विपरीत।

    कवि की बदलाव की बेचैनी और प्रतिबद्धता।

  • तेरा निज़ाम है सिल दे ज़ुबान शायर की,

    कवि: शासन को संबोधित करते हुए।

    अभिव्यक्ति पर पाबंदी पर व्यंग्य।

  • जिएँ तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले,

    कवि: गज़ल का अंतिम शेर।

    स्वाभिमानपूर्ण जीवन की कामना।

दुष्यंत कुमार – गज़ल in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

वादा और वास्तविकता

मान लीजिए आपके मोहल्ले में चुनाव से पहले हर गली में स्ट्रीट-लाइट लगाने का वादा हुआ, पर दो साल बाद एक भी लाइट नहीं लगी।

दुष्यंत के पहले शेर से इस स्थिति को समझाइए। (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. 'चिरागाँ हरेक घर के लिए' = बड़ा वादा।
  2. 'चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए' = वादे की असफलता।

Answer: यह ठीक पहले शेर जैसी स्थिति है: वादा हर घर में रोशनी का था, पर पूरे इलाके में एक दीपक भी नहीं। नागरिकों को ऐसे वादों का हिसाब माँगना चाहिए।

Memory hook: वादा चिरागाँ, हाथ में अँधेरा।

चुप्पी का खतरा

कल्पना कीजिए कि आपके स्कूल की कैंटीन में खराब खाना मिलता है, पर सब छात्र चुपचाप खा लेते हैं और कोई शिकायत नहीं करता।

तीसरे शेर के आधार पर इस चुप्पी पर टिप्पणी कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. 'पाँवों से पेट ढँक लेंगे' = अभाव चुपचाप सहना।
  2. चुप्पी से गलत व्यवस्था और मज़बूत होती है।

Answer: छात्र 'मुनासिब' बन गए हैं, यानी उनकी चुप्पी से खराब खाना देने वालों को सुविधा मिलती है; विनम्र और संगठित शिकायत ही बदलाव ला सकती है।

Memory hook: चुप रहोगे तो सहते रहोगे।

आवाज़ का असर

यदि कोई छात्र पर्यावरण पर लगातार पोस्टर और लेख बनाता रहे और अंततः स्कूल प्लास्टिक-मुक्त हो जाए, तो?

इसे गज़ल के किस शेर से जोड़ेंगे?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. 'मैं बेकरार हूँ आवाज़ में असर के लिए'।
  2. लगातार, ईमानदार आवाज़ पत्थर भी पिघला देती है।

Answer: पाँचवें शेर से; जिन्हें लगता था कि 'पत्थर पिघल नहीं सकता', उन्हें छात्र की असरदार आवाज़ ने गलत सिद्ध कर दिया।

Memory hook: आवाज़ में असर, पत्थर भी नरम।

Topics in this chapter

How the school exam asks दुष्यंत कुमार – गज़ल

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
पठित काव्यांश (प्रश्न 6, 1×5)दो-तीन शेरों पर शब्दार्थ (मयस्सर, मुनासिब, मुतमइन, निज़ाम, एहतियात, बहर), प्रतीक, व्यंग्य और गज़ल-शिल्प वाले पाँच बहुविकल्पी प्रश्न।हर शेर को स्वतंत्र इकाई मानकर उसका प्रतीकार्थ पहचानें; 'वे' और 'ये लोग' कौन हैं, यह स्पष्ट रखें।
लगभग 40 शब्द (प्रश्न 8, 2 अंक)किसी एक शेर का आशय, 'दरख्तों के साये में धूप' का अर्थ, ख्वाब वाला शेर, गज़ल का तुक-विधान।शेर का सीधा अर्थ + प्रतीकार्थ।
लगभग 60 शब्द (प्रश्न 7, 3 अंक)गज़ल का केंद्रीय भाव, गज़ल के शिल्प की विशेषताएँ, आज के समय में गज़ल की प्रासंगिकता।तीन बिंदु; दो-तीन शेरों के प्रमाण।

Tricks to remember दुष्यंत कुमार – गज़ल

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • सात शेर, सात संकेत: 'चि-सा-क-ख्वा-प-ज़ु-गु'

    चिराग (वादे) → साया (धूप) → कमीज़ (सहनशीलता) → ख्वाब (आशा) → पत्थर (असर) → ज़ुबान (पाबंदी) → गुलमोहर (स्वाभिमान)।

    Use it when: शेर पहचानने और क्रम याद रखने के लिए।

  • तुक-शृंखला

    घर-शहर-भर-सफ़र-नज़र-असर-बहर-गुलमोहर + 'के लिए'।

    Use it when: गज़ल-शिल्प वाले प्रश्न।

  • कठिन शब्द

    मयस्सर = उपलब्ध, दरख्त = पेड़, मुनासिब = उचित, मुतमइन = आश्वस्त, बेकरार = बेचैन, निज़ाम = शासन, एहतियात = सावधानी, बहर = छंद।

    Use it when: शब्दार्थ वाले बहुविकल्पी प्रश्न।

दुष्यंत कुमार – गज़ल: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: काव्यांश 1: कमीज़, ख्वाब और पत्थर

न हो कमीज़ तो पाँवों से पेट ढँक लेंगे,
ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए।
खुदा नहीं, न सही, आदमी का ख्वाब सही,
कोई हसीन नज़ारा तो है नज़र के लिए।

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    'पाँवों से पेट ढँक लेंगे' किस प्रवृत्ति का चित्र है?
    (क) आलस्य
    (ख) अभाव को बिना शिकायत चुपचाप सह लेना
    (ग) फ़िज़ूलखर्ची
    (घ) कलाप्रियता

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    'ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए' में किस भाव की प्रधानता है?
    (क) प्रशंसा
    (ख) व्यंग्य
    (ग) भक्ति
    (घ) शृंगार

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    'खुदा नहीं, न सही, आदमी का ख्वाब सही' का भाव है:
    (क) ईश्वर पर पूर्ण आस्था
    (ख) ईश्वर न भी हो तो बेहतर दुनिया का मानवीय सपना जीने का सहारा है
    (ग) सपने देखना व्यर्थ है
    (घ) मनुष्य ईश्वर से बड़ा है

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: अगले शेर में कवि कहता है कि 'वे' 'मुतमइन' हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता, जबकि वह स्वयं अपनी आवाज़ में असर के लिए 'बेकरार' है।) 'मुतमइन' और 'बेकरार' शब्द क्रमशः किनकी मनःस्थिति बताते हैं?
    (क) कवि की और जनता की
    (ख) सत्ताधारियों की (आश्वस्त) और कवि की (बेचैन)
    (ग) जनता की और सत्ता की
    (घ) दोनों कवि की

  5. (5) · 1 mark · Assertion-reason

    (संदर्भ: अगले शेर में 'पत्थर पिघल नहीं सकता' और 'आवाज़ में असर' की बात है।) कथन (A): 'पत्थर पिघल नहीं सकता' में पत्थर कठोर व्यवस्था और संवेदनहीन लोगों का प्रतीक है। कारण (R): कवि अपनी आवाज़ में ऐसा असर चाहता है जिससे यह कठोरता टूटे।
    (क) A और R दोनों सही हैं, R, A की सही व्याख्या है
    (ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है
    (ग) A सही, R गलत
    (घ) A गलत, R सही

Show the answersAnswers
  1. (ख) अभाव को बिना शिकायत चुपचाप सह लेना
  2. (ख) व्यंग्य
  3. (ख) ईश्वर न भी हो तो बेहतर दुनिया का मानवीय सपना जीने का सहारा है
  4. (ख) सत्ताधारियों की (आश्वस्त) और कवि की (बेचैन)
  5. (क) A और R दोनों सही हैं, R, A की सही व्याख्या है

Extract 2: काव्यांश 2: शायर की ज़ुबान और गुलमोहर

तेरा निज़ाम है सिल दे ज़ुबान शायर की,
ये एहतियात ज़रूरी है इस बहर के लिए।
जिएँ तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले,
मरें तो गैर की गलियों में गुलमोहर के लिए।

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    'निज़ाम' शब्द का अर्थ है:
    (क) नियम
    (ख) राज, शासन
    (ग) निशान
    (घ) नाम

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    'सिल दे ज़ुबान शायर की' से किस समस्या की ओर संकेत है?
    (क) शायर की बीमारी
    (ख) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सत्ता की पाबंदी
    (ग) कपड़े सिलने की कला
    (घ) शायर का मौन व्रत

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    'बहर' का अर्थ है:
    (क) बाहर
    (ख) छंद
    (ग) बहरा
    (घ) बहार

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    'ये एहतियात ज़रूरी है' में कवि का स्वर कैसा है?
    (क) सत्ता के प्रति सच्ची सहमति
    (ख) व्यंग्यपूर्ण: सत्ता को ऐसी कविता से डर है, इसलिए वह 'सावधानी' बरतेगी
    (ग) भयभीत
    (घ) उदासीन

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    अंतिम शेर में 'तले' और 'लिए' के बीच का अंतर किस भाव को प्रकट करता है?
    (क) केवल फूलों का वर्णन
    (ख) अपने स्थान पर सम्मान से जीना और दूसरों या ऊँचे उद्देश्य के लिए बलिदान देना
    (ग) गुलमोहर काटना
    (घ) बगीचे की सफ़ाई

Show the answersAnswers
  1. (ख) राज, शासन
  2. (ख) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सत्ता की पाबंदी
  3. (ख) छंद
  4. (ख) व्यंग्यपूर्ण: सत्ता को ऐसी कविता से डर है, इसलिए वह 'सावधानी' बरतेगी
  5. (ख) अपने स्थान पर सम्मान से जीना और दूसरों या ऊँचे उद्देश्य के लिए बलिदान देना

दुष्यंत कुमार – गज़ल: exam-level solved questions

Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: दरख्तों के साये में धूप · 2 marks · Short answerExam level

'यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पेड़ की छाया = राहत और सुरक्षा।
  2. छाया में धूप = रक्षक ही कष्ट दें; इसलिए यहाँ से चलने की बात।

Answer: पेड़ की छाया राहत और सुरक्षा का प्रतीक है। जब छाया में भी धूप लगे, तो अर्थ है कि जिन संस्थाओं और लोगों से रक्षा की आशा थी, वही कष्ट दे रहे हैं। ऐसी असह्य स्थिति से तंग आकर कवि हमेशा के लिए वहाँ से चल देने की बात करता है।

Example 2: आदमी का ख्वाब · 2 marks · Short answerHarder exam level

'खुदा नहीं, न सही, आदमी का ख्वाब सही' शेर में कवि का दृष्टिकोण आशावादी है या निराशावादी? तर्क दीजिए। (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. ईश्वर न भी हो, मनुष्य का सपना ही सहारा।
  2. बेहतर दुनिया की कल्पना = आशावाद।

Answer: कवि का दृष्टिकोण आशावादी है। वह कहता है कि ईश्वर न भी मिले, तो मनुष्य का बेहतर दुनिया का सपना ही काफ़ी है; कम-से-कम आँखों के सामने एक सुंदर दृश्य तो है, जिसके सहारे संघर्ष किया जा सके।

Example 3: गज़ल का शिल्प · 3 marks · Short answerExam level

इस गज़ल के आधार पर गज़ल विधा की तीन शिल्पगत विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. हर शेर स्वतंत्र और पूर्ण।
  2. मतले की दोनों पंक्तियों में तुक; हर शेर की दूसरी पंक्ति में उसी तुक का निर्वाह ('...र के लिए')।
  3. मिज़ाज की एकता; शीर्षक नहीं।

Answer: पहली, गज़ल का हर शेर अपने-आप में पूरा और स्वतंत्र होता है; उसे क्रम से पढ़ना ज़रूरी नहीं। दूसरी, पहले शेर की दोनों पंक्तियों में तुक मिलती है (घर, शहर) और बाद के हर शेर की दूसरी पंक्ति उसी तुक पर समाप्त होती है: भर, सफ़र, नज़र, असर, बहर, गुलमोहर, और साथ में 'के लिए'। तीसरी, शेरों को मिज़ाज की एकता जोड़ती है; गज़ल का शीर्षक नहीं होता।

Example 4: गज़ल का केंद्रीय सूत्र · 3 marks · Short answerHarder exam level

'राजनीति और समाज की वर्तमान स्थिति को नकारना और विकल्प की तलाश' इस गज़ल का केंद्रीय सूत्र है। तीन शेरों के आधार पर इस कथन की पुष्टि कीजिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. नकार: चिरागाँ बनाम एक चिराग भी नहीं (झूठे वादे)।
  2. विकल्प: 'चलो यहाँ से चलें'; आदमी का ख्वाब।
  3. संघर्ष: आवाज़ में असर; ज़ुबान सिलने पर व्यंग्य।

Answer: पहले शेर में कवि हर घर में रोशनी के वादे और एक चिराग भी न मिलने की सच्चाई दिखाकर वर्तमान व्यवस्था को नकारता है। दूसरे शेर में 'चलो यहाँ से चलें' कहकर और चौथे में 'आदमी का ख्वाब' की बात करके वह विकल्प खोजता है। पाँचवें शेर में वह अपनी आवाज़ में असर के लिए बेचैन है, यानी बदलाव के लिए संघर्ष करना चाहता है।

Example 5: सहनशीलता: गुण या दोष · 3 marks · Short answerHOTS / competency

'न हो कमीज़ तो पाँवों से पेट ढँक लेंगे' वाले शेर में कवि सहनशीलता को गुण मानता है या दोष? आज के नागरिक के लिए इसमें क्या संदेश है? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. व्यंग्य: ऐसे लोग शोषण के सफ़र के लिए 'मुनासिब'।
  2. अत्यधिक सहनशीलता = अन्याय को बढ़ावा।
  3. संदेश: अधिकारों के लिए जागरूक होकर शांतिपूर्ण आवाज़ उठाना।

Answer: यहाँ कवि सहनशीलता को दोष के रूप में देखता है। 'ये लोग कितने मुनासिब हैं' कहकर वह व्यंग्य करता है कि जो लोग कमीज़ न होने पर भी शिकायत नहीं करते, वे शोषक व्यवस्था के लिए सबसे सुविधाजनक हैं। आज के नागरिक के लिए संदेश है कि अभाव और अन्याय को चुपचाप सहने के बजाय जागरूक होकर अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज़ उठाए।

Example 6: 'तले' और 'लिए' · 2 marks · Short answerHOTS / competency

अंतिम शेर में एक ही शब्द 'गुलमोहर' के साथ 'तले' और 'लिए' का प्रयोग करके कवि ने जीने और मरने के बारे में कौन-सा आदर्श रखा है? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. जीना: अपने बगीचे में, गुलमोहर के तले = स्वाभिमान और अपनेपन से।
  2. मरना: गैर की गलियों में गुलमोहर के लिए = दूसरों की खुशी या ऊँचे उद्देश्य के लिए बलिदान।

Answer: कवि चाहता है कि हम अपने घर-परिवेश में स्वाभिमान और सुंदरता के साथ (गुलमोहर के तले) जिएँ, और यदि मरना पड़े तो दूसरों की गलियों में गुलमोहर के लिए, यानी दूसरों के सुख-सौंदर्य या किसी ऊँचे उद्देश्य के लिए मरें। जीवन अपना, बलिदान सबके लिए।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

गज़ल के शिल्प की तीन विशेषताएँ (लगभग 60 शब्द, 3 अंक) (3 marks)

StepMarks
शेरों की स्वतंत्रता और मिज़ाज की एकता1
मतले में तुक और हर शेर की दूसरी पंक्ति में उसका निर्वाह (उदाहरण सहित)1.5
भाषा और शब्द-सीमा0.5

'दरख्तों के साये में धूप' का आशय (लगभग 40 शब्द, 2 अंक) (2 marks)

StepMarks
छाया = सुरक्षा; उसमें धूप = रक्षक से ही कष्ट1
परिणाम: वहाँ से हमेशा के लिए चलने का निश्चय1

Where students lose marks in दुष्यंत कुमार – गज़ल

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: गज़ल का कोई शीर्षक गढ़कर लिखना

    गज़लों में शीर्षक देने का चलन नहीं; पाठ में भी शीर्षक नहीं है।

    Do this: 'दुष्यंत कुमार की गज़ल (साये में धूप)' लिखें।

    Usually costs: आधा अंक

  • Mistake: 'मुनासिब' वाले शेर को लोगों की प्रशंसा समझना

    यह व्यंग्य है; चुपचाप अभाव सहने वाले शोषण के लिए 'उपयुक्त' बताए गए हैं।

    Do this: व्यंग्यार्थ स्पष्ट लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: गुलमोहर को केवल फूल का पेड़ बताना

    यह सुंदर, सम्मानपूर्ण जीवन और ऊँचे उद्देश्य का प्रतीक है।

    Do this: शाब्दिक अर्थ के साथ प्रतीकार्थ लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: 'बहर' का अर्थ 'बाहर' या 'बहार' लिखना

    बहर = छंद।

    Do this: शब्द-छवि के अर्थ याद रखें।

    Usually costs: 1 अंक

Practice questions on दुष्यंत कुमार – गज़ल

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQExam level

    यह गज़ल दुष्यंत कुमार के किस संग्रह से ली गई है?
    (क) सूर्य का स्वागत
    (ख) साये में धूप
    (ग) आवाज़ों के घेरे
    (घ) जलते हुए वन का वसंत

    Hint

    दूसरे शेर से जुड़ा नाम।

    Answer

    (ख) साये में धूप

  2. Q2 · 1 mark · Very short answerExam level

    'मयस्सर' और 'मुनासिब' शब्दों के अर्थ लिखिए।

    Hint

    उपलब्ध; उचित।

    Answer

    मयस्सर = उपलब्ध; मुनासिब = उचित, उपयुक्त।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level

    पहले शेर में 'तय था' शब्दों से किस ओर संकेत मिलता है? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    योजनाएँ, घोषणाएँ, वादे।

    Answer

    'तय था' बताता है कि हर घर तक रोशनी और सुविधाएँ पहुँचाने की योजनाएँ और घोषणाएँ हुई थीं। सत्ता ने वादा किया था, पर वह पूरा नहीं हुआ; कवि इसी कथनी-करनी के अंतर पर व्यंग्य करता है।

  4. Q4 · 1 mark · MCQHarder exam level

    कथन (A): दुष्यंत की इस गज़ल का हर शेर एक-दूसरे पर कहानी की तरह निर्भर है। कारण (R): गज़ल के शेरों को आपस में तुक और मिज़ाज जोड़ते हैं।
    (क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
    (ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
    (ग) A गलत, R सही
    (घ) A सही, R गलत

    Hint

    क्या शेरों को क्रम से पढ़ना ज़रूरी है?

    Answer

    (ग) A गलत, R सही (गज़ल का हर शेर स्वतंत्र होता है; उन्हें तुक और मिज़ाज जोड़ते हैं)

  5. Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency

    मान लीजिए आपको विद्यालय की वाद-विवाद प्रतियोगिता में 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' पर बोलना है। दुष्यंत की गज़ल के किन दो शेरों का उपयोग आप करेंगे और किस तर्क के साथ? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    पत्थर-असर वाला शेर; ज़ुबान सिलने वाला शेर।

    Answer

    मैं 'तेरा निज़ाम है सिल दे ज़ुबान शायर की' से शुरू करूँगा और तर्क दूँगा कि सत्ता उसी आवाज़ से डरती है जिसमें सच हो, इसलिए उसे दबाना चाहती है। फिर 'मैं बेकरार हूँ आवाज़ में असर के लिए' से कहूँगा कि लोकतंत्र में नागरिक की आवाज़ ही कठोर व्यवस्था रूपी पत्थर को पिघला सकती है; इसलिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता आवश्यक है।

  6. Q6 · 2 marks · Short answerHarder exam level

    'वे मुतमइन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता' में 'वे' कौन हैं और वे आश्वस्त क्यों हैं? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    सत्ता में बैठे लोग; जनता चुप।

    Answer

    'वे' सत्ता और व्यवस्था पर काबिज़ लोग हैं। वे आश्वस्त हैं कि जनता अभाव सहकर भी चुप रहेगी और कठोर व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा; इसलिए उन्हें किसी विरोध का डर नहीं।

  7. Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    दुष्यंत कुमार के शेर लोकोक्तियों की तरह क्यों दोहराए जाते हैं? इस गज़ल के आधार पर दो कारण बताइए। (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    सरल हिंदुस्तानी; हर समय लागू होने वाला सच।

    Answer

    पहला, उनकी भाषा सरल हिंदुस्तानी है, जो आम आदमी तुरंत समझ लेता है। दूसरा, शेरों में झूठे वादों, अभावों और अभिव्यक्ति पर पाबंदी जैसे ऐसे सच हैं, जो हर समय की राजनीति और समाज पर लागू होते हैं; इसलिए लोग इन्हें मुहावरों की तरह दोहराते हैं।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.गज़ल के कवि कौन हैं?Show answer

    दुष्यंत कुमार।

  2. 2.गज़ल में कुल कितने शेर हैं?Show answer

    सात।

  3. 3.'दरख्त' का अर्थ क्या है?Show answer

    पेड़।

  4. 4.कवि किस चीज़ के लिए बेकरार है?Show answer

    अपनी आवाज़ में असर के लिए।

  5. 5.'एहतियात' का अर्थ क्या है?Show answer

    सावधानी।

  6. 6.दुष्यंत कुमार के गीतिनाट्य का नाम क्या है?Show answer

    एक कंठ विषपायी।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप सातों शेरों का क्रम और संकेत बता सकते हैं?
  • क्या आप गज़ल का तुक-विधान उदाहरण सहित समझा सकते हैं?
  • क्या आप 'मुनासिब' और 'एहतियात' वाले शेरों का व्यंग्य लिख सकते हैं?
  • क्या आप चिराग, साया, पत्थर और गुलमोहर के प्रतीकार्थ बता सकते हैं?
  • क्या आप गज़ल का केंद्रीय सूत्र तीन शेरों से सिद्ध कर सकते हैं?

दुष्यंत कुमार – गज़ल: frequently asked questions

इस गज़ल का शीर्षक क्या है?

गज़लों में शीर्षक देने का चलन नहीं है, इसलिए पाठ में कोई शीर्षक नहीं दिया गया; यह 'साये में धूप' संग्रह से ली गई है।

गज़ल का केंद्रीय भाव क्या है?

राजनीति और समाज की वर्तमान स्थिति को खारिज करना और बेहतर विकल्प की तलाश को मान्यता देना।

हिंदी गज़ल को प्रतिष्ठित करने का श्रेय किसे है?

दुष्यंत कुमार को।

गज़ल में शेरों को आपस में क्या जोड़ता है?

रूप के स्तर पर तुक का निर्वाह और अंतर्वस्तु के स्तर पर मिज़ाज (भाव) का निर्वाह।

Based on: CBSE हिंदी (आधार) (302) पाठ्यक्रम, कक्षा 11-12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 1 (Reprint 2026-27), पाठ 5: गज़ल