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HindiCBSE Class 11 · Chapter 13

नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन: Class 11 पाठ 13, तरीका और नमूना लेख

Updated 15 October 2026 · Fact-checked

नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन का अर्थ है अचानक दिए गए किसी अनोखे विषय पर, रटी हुई सामग्री के बिना, कम समय में अपने मौलिक विचारों को सुसंबद्ध और सुसंगत लेख के रूप में लिखना। कक्षा 11 की परीक्षा में तीन विषयों में से एक पर लगभग 120 शब्दों का लेख लिखना होता है, जो 6 अंक का है।

What नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन is about

नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन अभिव्यक्ति और माध्यम (NCERT) का पाठ 13 है। वार्षिक परीक्षा के खंड ख में प्रश्न 3 इसी कौशल पर है: दिए गए तीन अप्रत्याशित विषयों में से किसी एक पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेखन, 6 अंक। खंड ख में किसी एक उत्तर पर मिलने वाले ये सबसे अधिक अंक हैं, इसलिए इसका अभ्यास सीधे अंक दिलाता है।

पाठ के मुख्य बिंदु:

  • रटंत की 'कुटेव' और मौलिक लेखन का अभ्यास
  • भाषा: विचार की अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं, विचार करने का साधन भी
  • खुले विषय (जैसे दीवार, घड़ी, झरोखा) और केंद्रित विषय (जैसे टी.वी. धारावाहिकों में स्त्री)
  • विषय खुला मैदान है, दो खंभों के बीच बँधी रस्सी नहीं
  • कोण चुनना, आकर्षक पर निर्वाह-योग्य शुरुआत, मन में रूपरेखा
  • सुसंबद्धता और सुसंगति; 'मैं' शैली की छूट
  • 'दीवाल घड़ी' के तीन नमूने (स्मृति, दार्शनिक, अवलोकन) और 'जातिवाद का ज़हर' (तथ्य-विश्लेषण)

Weightage: खंड ख (अभिव्यक्ति और माध्यम, 80 में से 22 अंक): प्रश्न 3 में तीन अप्रत्याशित विषयों में से एक पर लगभग 120 शब्दों का रचनात्मक लेखन, 6 अंक।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27, कक्षा 11 परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम विनिर्देशन

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • जिस तरह हम बोलते हैं उस तरह तू लिख और इसके बाद भी हमसे बड़ा तू दिख।

    भवानी प्रसाद मिश्र, पाठ में उद्धृत: पाठ के आरंभ में।

    सहज, बोलचाल जैसी भाषा में लिखें, पर विचार में ऊँचाई हो।

  • भाषा विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं, स्वयं विचार करने का साधन भी है।

    NCERT पाठ: लेखन के अर्थ की चर्चा।

    लिखते-लिखते ही विचार साफ़ होते हैं; इसलिए मौलिक लेखन का अभ्यास ज़रूरी।

  • लिखने का कोई फ़ॉर्मूला आज तक दुनिया में नहीं बना।

    NCERT पाठ: लेख लिखने के सुझावों से पहले।

    रचनात्मकता इसी में है कि हर लेख अपने ढंग से लिखा जाए।

Key concepts

अप्रत्याशित विषय क्या है और क्यों

जो विषय पहले से तय या रटे हुए न हों और परीक्षा में अचानक सामने आएँ, वे अप्रत्याशित विषय हैं। पाठ के अनुसार हम बोलकर तो विचार आसानी से कह देते हैं, पर लिखने का निमंत्रण चुनौती लगता है, क्योंकि हम आत्मनिर्भर होकर लिखने का अभ्यास नहीं करते और रटंत पर निर्भर रहते हैं।

  • रटंत: दूसरों की तैयार सामग्री याद करके ज्यों-का-त्यों लिख देने की बुरी आदत (पाठ इसे 'कुटेव' कहता है)।
  • परंपरागत निबंध-विषयों पर तैयार सामग्री बहुत मिलती है, इसलिए वहाँ मौलिक सोच नहीं हो पाती।
  • नए विषयों का अभ्यास हमें अभिव्यक्ति के अधिकार का पूरा उपयोग करने की क्षमता देता है।
  • यहाँ लेखन का अर्थ सुंदर लिखावट नहीं, बल्कि भाषा के सहारे सोचना और उसे शुद्ध, सुसंगठित रूप में व्यक्त करना है।

Worked example

'गाय' पर निबंध और 'खाली बेंच' पर लेख: दोनों में अभ्यास की दृष्टि से क्या अंतर है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. 'गाय' पर तैयार सामग्री हर जगह; रटकर लिखा जा सकता है।
  2. 'खाली बेंच' पर अपनी सोच और अनुभव से ही लिखना होगा।

Answer: 'गाय' जैसे परंपरागत विषय पर रटी हुई सामग्री काम चला देती है, जबकि 'खाली बेंच' पर लिखने के लिए अपने अनुभव, कल्पना और विचार जुटाने पड़ते हैं; यही मौलिक लेखन का असली अभ्यास है।

खुले और केंद्रित विषय

पाठ के अनुसार ऐसे विषयों की संख्या अपरिमित है।

खुला विषयकेंद्रित विषय
जैसे: सामने की दीवार, दीवाल घड़ी, झरोखाजैसे: टी.वी. धारावाहिकों में स्त्री, बहुत ज़रूरी है शिक्षा
कोई चौहद्दी नहीं; खुले मैदान में दौड़ने की छूट'फ़ोकस' स्पष्ट; विचार-प्रवाह को थोड़ा नियंत्रित रखना पड़ता है
सैकड़ों कोणों से सोचा जा सकता हैसोचने के कोण कम; विषय की वस्तुस्थिति की उपेक्षा नहीं कर सकते

'दीवाल घड़ी' खुला विषय है, पर 'दीवाल घड़ी की उपयोगिता' या 'दीवाल घड़ी का इतिहास' में एक ढीला-सा बंधन आ जाता है।

लिखने का तरीका: चार चरण

पाठ साफ़ कहता है कि लिखने का कोई फ़ॉर्मूला नहीं होता (होता तो कंप्यूटर हमसे बेहतर लेखक होता), फिर भी ये सुझाव मदद करते हैं:
1. ठहरें और कोण चुनें: दो-तीन मिनट रुककर तय करें कि विषय के किस पहलू को आप अच्छे से फैला सकते हैं।
2. आकर्षक शुरुआत: पर ऐसी, जिसका आगे निर्वाह हो सके; शुरुआत और बाकी बात आपस में जुड़नी चाहिए।
3. मन में रूपरेखा: बात सिलसिलेवार कैसे बढ़ेगी, यह पहले से स्पष्ट हो।
4. निचोड़: अंत में एक-दो वाक्यों में कोई सामान्य सत्य या अपनी राय, ताकि लेख सपाट विवरण न रह जाए।

परीक्षा के लिए: लगभग 120 शब्द, यानी 4-5 छोटे अनुच्छेद नहीं, बल्कि 1-2 कसे हुए अनुच्छेद; अपना शीर्षक दें।

सुसंबद्धता और सुसंगति
  • सुसंबद्धता: बातें आपस में जुड़ी हों। मौसम की चर्चा करते-करते बिना किसी कारण अचानक राजनीति पर आ जाना संबद्धता का अभाव है।
  • सुसंगति: बातों में तालमेल हो, वे एक-दूसरे का खंडन न करें। एक ही दिन के मौसम को एक बार सुहाना और दूसरी बार उबाऊ बताना असंगति है; पाठ इसे किसी भी अभिव्यक्ति का अक्षम्य दोष कहता है।
  • खुले विषयों में चौहद्दी तय न होने से सुसंबद्धता बनाए रखने के लिए विशेष सावधानी चाहिए; केंद्रित विषयों में बाहरी अनुशासन यह काम कुछ हद तक खुद कर देता है।
'मैं' शैली और आत्मनिष्ठता

सामान्य निबंधों, आलेखों और प्रश्नोत्तरों में वस्तुनिष्ठता के आग्रह से 'मैं' शैली से बचा जाता है। पर अप्रत्याशित विषयों के लेख में विचारों पर लेखक के व्यक्तित्व की छाप होना स्वाभाविक है, इसलिए यहाँ 'मैं' शैली पर कोई रोक नहीं।

  • अपने अनुभव, स्मृतियाँ और राय खुलकर लिखें।
  • पर केंद्रित सामाजिक विषय (जैसे जातिवाद) पर 'मैं' के साथ ठोस तथ्य और स्पष्ट तर्क भी चाहिए।
लेख की चार शैलियाँ (पाठ के नमूनों से)

पाठ 'दीवाल घड़ी' पर तीन और 'जातिवाद का ज़हर' पर एक नमूना देता है। उत्तर को निबंध, संस्मरण, रेखाचित्र या यात्रावृत्तांत किसी भी शक्ल में ढाला जा सकता है, इसलिए पाठ इसे सामान्य नाम 'लेख' देता है।
1. स्मृति-आधारित (घड़ी-1): घड़ी से जुड़ी यादें तरतीब से, अंत में सामान्य सत्य: जो समय बीतने पर नज़र रखती है, वही यादों में समय को रोक भी देती है।
2. दार्शनिक (घड़ी-2): चक्रीय गति से समय के अनादि-अनंत होने और हर किसी के अपने सीमित समय पर विचार।
3. अवलोकन-आधारित (घड़ी-3): घड़ी का रंग, आवाज़, टँगे होने का ढंग; विवरण के साथ अपनी राय।
4. तथ्य और विश्लेषण (जातिवाद का ज़हर): ज्वलंत सामाजिक मुद्दे पर कल्पना की उड़ान नहीं, ठोस विश्लेषण और स्पष्ट राय।

इसके अलावा किसी जगह के दृश्य (जैसे मुहल्ले का चौराहा) को 'चल-कैमरे' की तरह ब्योरों में उकेरा जा सकता है और किसी चलन के गुण-अवगुण पर तर्क से विचार किया जा सकता है।

नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

रटंत बनाम मौलिकता

मान लीजिए आपने 'प्रदूषण' पर एक तैयार निबंध रट रखा है और परीक्षा में विषय आता है 'धुएँ में खोया आसमान'।

रटा हुआ निबंध लिखने और नए सिरे से सोचने में से क्या बेहतर है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. रटा निबंध विषय से मेल नहीं खाएगा; परीक्षक पहचान लेगा।
  2. विषय के शब्दों से कोण निकालें: 'खोया आसमान', तारे न दिखना, सुबह की धुंध।

Answer: नए सिरे से सोचना बेहतर है। अपने शहर में तारे न दिखने या धुंध भरी सुबह के अनुभव से शुरू करके प्रदूषण की बात तक पहुँचें; इससे लेख मौलिक भी होगा और विषय पर टिका भी रहेगा।

Memory hook: विषय के शब्द ही पहला सुराग।

आकर्षक पर निर्वाह-योग्य शुरुआत

कल्पना कीजिए कि 'स्कूल का पुराना पेड़' पर लिखते हुए आप किसी भूत की कहानी से शुरुआत करना चाहते हैं।

पाठ की सलाह के अनुसार ऐसी शुरुआत ठीक है या नहीं?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. शुरुआत आकर्षक हो, पर आगे की बात से जुड़ सके।
  2. भूत की कहानी के बाद पेड़ की छाँव, यादें, पर्यावरण तक पहुँचना कठिन।

Answer: ऐसी शुरुआत तभी ठीक है जब आगे पूरी बात उससे जुड़ सके। बेहतर है कोई सच्चा, रोचक पल लें, जैसे 'उस पेड़ की छाल पर आज भी किसी ने 2015 खुरचा हुआ है', जिससे यादों और पेड़ की उम्र तक बात सहज बढ़े।

Memory hook: शुरुआत चमके, पर साथ निभाए।

समय-प्रबंधन

यदि परीक्षा में 6 अंक के इस प्रश्न के लिए आपके पास लगभग 15 मिनट हैं, तो आप उन्हें कैसे बाँटेंगे?

पाठ के 'ठहरकर कोण चुनने' वाले सुझाव को समय-योजना में बदलिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. 2-3 मिनट: तीनों विषय पढ़ें, एक चुनें, कोण और रूपरेखा तय करें।
  2. 10 मिनट: लिखें; 2 मिनट: शीर्षक, वर्तनी और शब्द-सीमा जाँचें।

Answer: पहले 2-3 मिनट सोचने में, लगभग 10 मिनट लिखने में और अंतिम 2 मिनट दोहराने में लगाएँ; सोचने के मिनट बचाने से ही लेख बिखरता है।

Memory hook: तीन मिनट सोच, दस मिनट लेख, दो मिनट जाँच।

Topics in this chapter

How the school exam asks नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
खुले विषय पर रचनात्मक लेख (6 अंक, लगभग 120 शब्द)किसी वस्तु, स्थान या पल पर लेख, जैसे: बंद पड़ा पुराना रेडियो, आधी छुट्टी की घंटी, बिजली गुल वाली शाम।स्मृति, अवलोकन या दार्शनिक कोण चुनें; आकर्षक शुरुआत, सिलसिलेवार विवरण, अंत में निचोड़।
केंद्रित/सामाजिक विषय पर लेख (6 अंक, लगभग 120 शब्द)किसी चलन या समस्या पर, जैसे: सोशल मीडिया पर दिखावा, ऑनलाइन कक्षाओं का एक दिन।तथ्य, कारण, प्रभाव, दोनों पक्ष और स्पष्ट राय; कल्पना की उड़ान कम।
पाठ की अवधारणा पर प्रश्न (अभ्यास के लिए)रटंत क्या है; सुसंबद्धता और सुसंगति में अंतर; 'मैं' शैली क्यों मान्य; खुले और केंद्रित विषय।पाठ की परिभाषा + पाठ का उदाहरण (मौसम-राजनीति, दीवाल घड़ी)।

Tricks to remember नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • चार चरण: 'को-शु-रू-नि'

    कोण चुनें → शुरुआत (आकर्षक, निर्वाह-योग्य) → रूपरेखा → निचोड़।

    Use it when: हर 6 अंक वाले लेख से पहले।

  • चार शैलियाँ: 'स्मृ-द-अ-त'

    स्मृति (घड़ी-1), दार्शनिक (घड़ी-2), अवलोकन (घड़ी-3), तथ्य-विश्लेषण (जातिवाद का ज़हर)।

    Use it when: विषय देखकर शैली चुनना।

  • दो 'सु'

    सुसंबद्धता = जुड़ाव (मौसम से राजनीति पर न कूदें); सुसंगति = तालमेल (सुहाना और उबाऊ एक साथ नहीं)।

    Use it when: अवधारणा वाले प्रश्न और अपने लेख की जाँच।

नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन: exam-level solved questions

Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: नमूना लेख: बिजली गुल वाली शाम (अवलोकन + निचोड़) · 6 marks · Long answerExam level

'बिजली गुल वाली शाम' विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 अंक)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कोण: अवलोकन; अँधेरे में मोहल्ले में क्या-क्या बदला।
  2. शुरुआत: बिजली जाने का पल; मध्य: पड़ोसी, बच्चे, दादी, तारे।
  3. निचोड़: रोशनी कभी-कभी हमें दूर भी कर देती है।

Answer: जब बिजली चली गई

शाम के सात बजे थे। अचानक पंखा रुका, टीवी चुप हुआ और पूरा मोहल्ला अँधेरे में डूब गया। पहले सबके मुँह से एक साथ 'ओह!' निकला, फिर एक-एक कर मोबाइल की टॉर्च जलने लगीं। मैं बालकनी में आया तो देखा कि जो पड़ोसी महीनों से सिर्फ़ 'नमस्ते' तक सीमित थे, वे आज सीढ़ियों पर बैठकर गप्पें मार रहे थे। बच्चे अँधेरे में छुपन-छुपाई खेल रहे थे और दादी बरसों पुरानी लालटेन ढूँढ लाई थीं। आसमान में तारे इतने साफ़ दिखे, मानो किसी ने उन पर से धूल झाड़ दी हो। एक घंटे बाद बिजली लौटी तो सब फिर अपने-अपने दरवाज़ों के पीछे चले गए। उस शाम समझ आया कि रोशनी कभी-कभी हमें एक-दूसरे से दूर भी कर देती है।

Example 2: नमूना लेख: पुराना रेडियो (स्मृति-आधारित) · 6 marks · Long answerHarder exam level

'बंद पड़ा पुराना रेडियो' विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 अंक)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कोण: स्मृति; रेडियो से जुड़ी बचपन की यादें।
  2. वर्तमान से तुलना: फ़ोन पर सब है, पर जमघट नहीं।
  3. निचोड़: चीज़ें पुरानी होती हैं, साझी यादें नहीं।

Answer: नानाजी का रेडियो

नानाजी के कमरे में अलमारी के ऊपर एक भूरा, धूल से ढका रेडियो रखा है। अब वह बजता नहीं, पर उसे देखते ही मेरे कानों में सुबह की खबरें गूँजने लगती हैं। बचपन की छुट्टियों में नानाजी ठीक छह बजे उसकी घुंडी घुमाते और खरखराहट के बीच से कोई आवाज़ धीरे-धीरे साफ़ होती जाती। क्रिकेट मैच के दिनों में पूरा घर उसके आसपास सिमट आता; हर चौके पर मामा उछल पड़ते और नानी रसोई से ही स्कोर पूछतीं। आज हमारे फ़ोन में हज़ारों गाने और खबरें हैं, फिर भी वैसा जमघट नहीं लगता। शायद वह रेडियो केवल एक मशीन नहीं था, पूरे परिवार के साथ बैठकर सुनने का बहाना था। चीज़ें पुरानी हो जाती हैं, पर उनसे जुड़ी साझी यादें कभी पुरानी नहीं होतीं।

Example 3: नमूना लेख: सीढ़ियाँ (दार्शनिक) · 6 marks · Long answerHOTS / competency

'सीढ़ियाँ' विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 अंक)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. रोज़ की वस्तु से जीवन के सत्य तक: दार्शनिक कोण।
  2. दो विचार: हर कदम एक-एक पायदान (धीरज); चढ़ने-उतरने वाले के लिए एक ही सीढ़ी (विनम्रता)।
  3. निचोड़ एक वाक्य में।

Answer: सीढ़ियों का मौन पाठ

हमारे स्कूल की इमारत में चौथी मंज़िल तक सीढ़ियाँ जाती हैं। रोज़ चढ़ते-उतरते मैंने कभी उन पर ध्यान नहीं दिया, पर आज लगा कि ये ज़िंदगी का सबसे सीधा पाठ पढ़ाती हैं। ऊपर पहुँचने के लिए कोई छलाँग काम नहीं आती; हर कदम एक-एक पायदान पर ही रखना पड़ता है। जो जल्दबाज़ी में दो-दो सीढ़ियाँ फलाँगता है, वह या तो हाँफ जाता है या लड़खड़ा जाता है। सीढ़ियों की एक और खूबी है: चढ़ने वाले और उतरने वाले, दोनों के लिए वे एक ही हैं। आज जो ऊपर जा रहा है, कल उसे उन्हीं से नीचे भी आना है। शायद इसीलिए बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं कि ऊँचाई पर पहुँचकर भी विनम्र रहना चाहिए। धीरज और विनम्रता, यही सीढ़ियों का मौन संदेश है।

Example 4: नमूना लेख: सोशल मीडिया पर दिखावा (केंद्रित विषय, विश्लेषण) · 6 marks · Long answerHarder exam level

'सोशल मीडिया पर दिखावा' विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 अंक)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. केंद्रित विषय: वस्तुस्थिति से भटकना नहीं।
  2. चलन, कारण, प्रभाव (हीनता, 'लाइक' से अपनी कीमत आँकना), दूसरा पक्ष।
  3. स्पष्ट राय और सुझाव।

Answer: परदे के पीछे की ज़िंदगी

आज किसी के घर दावत हो या कोई नई किताब आए, पहले उसकी तसवीर सोशल मीडिया पर पहुँचती है, फिर स्वाद या पढ़ाई की बारी आती है। लोग अपने जीवन का केवल चमकीला हिस्सा दिखाते हैं: घूमने की जगहें, नए कपड़े, उपलब्धियाँ। देखने वाला मान बैठता है कि बाकी सबका जीवन उससे बेहतर है, और यहीं से हीनता और बेचैनी शुरू होती है। कई किशोर 'लाइक' गिनकर अपनी कीमत आँकने लगते हैं। दूसरी ओर, यही मंच प्रतिभा दिखाने, जानकारी बाँटने और दूर बैठे दोस्तों से जुड़ने का साधन भी है। इसलिए दोष माध्यम का कम, हमारे इस्तेमाल का अधिक है। ज़रूरत इस बात की है कि हम परदे के पीछे की असली ज़िंदगी को पहचानें और अपनी खुशी को दूसरों की तालियों का मोहताज न बनाएँ।

Example 5: नमूना लेख: आधी छुट्टी की घंटी (चल-कैमरा शैली) · 6 marks · Long answerHOTS / competency

'आधी छुट्टी की घंटी' विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 अंक)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कोण: दृश्य-चित्रण; कैमरे की तरह एक-एक कोना दिखाना।
  2. ध्वनियाँ, गतियाँ, लोग: गलियारा, मैदान, कैंटीन, पेड़ के नीचे।
  3. अंत: दूसरी घंटी, मेला सिमटता है (शुरुआत से जुड़ा अंत)।

Answer: बीस मिनट का मेला

घंटी बजते ही कक्षा का दरवाज़ा मानो बाँध की तरह खुल जाता है। गलियारे में जूतों की धप-धप, किसी का टिफ़िन गिरने की खनक और 'जल्दी चल, कैंटीन भर जाएगी!' की पुकार गूँजती है। मैदान के एक कोने में छोटे बच्चे खो-खो खेल रहे हैं, तो दूसरे कोने में बड़ी कक्षा के लड़के इस बहस में उलझे हैं कि पिछली गेंद नो-बॉल थी या नहीं। कैंटीन की खिड़की पर समोसों के लिए बस हाथ ही हाथ दिखते हैं। पेड़ के नीचे दो सहेलियाँ एक ही टिफ़िन बाँट रही हैं और चौकीदार काका सबको धूप से बचने की हिदायत दे रहे हैं। बीस मिनट में पूरा स्कूल एक मेले में बदल जाता है। फिर दूसरी घंटी बजती है और मेला उतनी ही तेज़ी से सिमटकर कक्षाओं में लौट जाता है।

Example 6: सुसंबद्धता और सुसंगति में अंतर · 2 marks · Short answerHarder exam level

सुसंबद्धता और सुसंगति में क्या अंतर है? पाठ के उदाहरण से स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सुसंबद्धता = बातों का आपस में जुड़ाव।
  2. सुसंगति = बातों में तालमेल, विरोध नहीं।

Answer: सुसंबद्धता का अर्थ है बातों का आपस में जुड़ा होना; मौसम की बात करते-करते बिना कारण राजनीति पर आ जाना इसका अभाव है। सुसंगति का अर्थ है बातों में तालमेल; एक ही दिन के मौसम को कभी सुहाना और कभी उबाऊ कहना असंगति है।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

किसी अप्रत्याशित विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख (6 अंक); सुझाया गया अंक-विभाजन (यह हमारा कार्य-ढाँचा है, CBSE की अंक-योजना से उद्धृत नहीं) (6 marks)

StepMarks
उपयुक्त शीर्षक और आकर्षक, निर्वाह-योग्य आरंभ1
विषयवस्तु: मौलिक विचार या अनुभव, विषय पर टिके रहना, सुसंबद्धता-सुसंगति3
भाषा: शुद्ध वर्तनी, व्याकरण, उपयुक्त शब्द-चयन1
निचोड़/निष्कर्ष और शब्द-सीमा में प्रस्तुति1

सुसंबद्धता और सुसंगति में अंतर (लगभग 40 शब्द, 2 अंक) (2 marks)

StepMarks
सुसंबद्धता: अर्थ और उदाहरण1
सुसंगति: अर्थ और उदाहरण1

Where students lose marks in नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: रटा हुआ निबंध विषय पर थोप देना

    विषय के शब्दों से मेल न खाने पर विषयवस्तु के अंक कटते हैं; मौलिकता ही इस प्रश्न की माँग है।

    Do this: विषय के शब्दों से ही कोण निकालें और अपना अनुभव जोड़ें।

    Usually costs: 2-3 अंक

  • Mistake: शब्द-सीमा से बहुत लंबा या बहुत छोटा लेख

    लगभग 120 शब्द माँगे गए हैं; 60 शब्द में विषय अधूरा रहता है और 250 शब्द में समय और कसाव दोनों जाते हैं।

    Do this: 1-2 कसे अनुच्छेद, लगभग 110-130 शब्द।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: केवल सपाट विवरण, कोई निचोड़ या राय नहीं

    पाठ के नमूने बताते हैं कि अंत में एक-दो वाक्यों का सामान्य सत्य या राय लेख को सपाट विवरण बनने से बचाती है।

    Do this: अंतिम वाक्य में अपना निष्कर्ष या जीवन से जुड़ा सत्य लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: बातें बिखरी हुईं या आपस में विरोधी

    सुसंबद्धता और सुसंगति के बिना लेख का प्रवाह टूटता है; विरोधी बातें अक्षम्य दोष हैं।

    Do this: लिखने से पहले मन में रूपरेखा बनाएँ; अंत में जाँचें कि कोई बात दूसरी को काटती तो नहीं।

    Usually costs: 1-2 अंक

  • Mistake: शीर्षक न देना और वर्तनी की गलतियाँ

    प्रस्तुति और भाषा के अंक इन्हीं पर निर्भर हैं।

    Do this: विषय से जुड़ा आकर्षक शीर्षक दें; नुक्ता, अनुस्वार-चंद्रबिंदु, मात्राएँ जाँचें।

    Usually costs: 1 अंक

Practice questions on नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQExam level

    पाठ में 'रटंत' को क्या कहा गया है?
    (क) सबसे अच्छी तैयारी
    (ख) एक कुटेव (बुरी लत)
    (ग) रियाज़ का तरीका
    (घ) लेखन की शैली

    Hint

    दूसरों की सामग्री ज्यों-का-त्यों।

    Answer

    (ख) एक कुटेव (बुरी लत)

  2. Q2 · 1 mark · MCQHarder exam level

    कथन (A): अप्रत्याशित विषयों के लेख में 'मैं' शैली का प्रयोग किया जा सकता है। कारण (R): ऐसे लेख में विचारों पर लेखक के व्यक्तित्व की छाप और आत्मनिष्ठता स्वाभाविक है।
    (क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
    (ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
    (ग) A सही, R गलत
    (घ) A गलत, R सही

    Hint

    आत्मनिष्ठता।

    Answer

    (क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level

    'दीवाल घड़ी' खुला विषय है, जबकि 'दीवाल घड़ी का इतिहास' कुछ बँधा हुआ। इस अंतर से लिखने के तरीके पर क्या असर पड़ता है? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    चौहद्दी, कोण, विचार-प्रवाह।

    Answer

    खुले विषय में कोई चौहद्दी नहीं, इसलिए यादें, दर्शन या अवलोकन, किसी भी कोण से लिखा जा सकता है। 'दीवाल घड़ी का इतिहास' में ढीला-सा बंधन है; विचार-प्रवाह को नियंत्रित रखकर इतिहास की मर्यादा में ही लिखना होगा।

  4. Q4 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    एक विद्यार्थी ने 'बारिश' पर लेख की पहली पंक्ति में लिखा कि उसे बारिश सबसे प्यारा मौसम लगता है, और अंत में लिखा कि बारिश से उसे सदा चिढ़ होती है, कोई कारण नहीं दिया। पाठ के अनुसार यह कौन-सा दोष है और इसे कैसे सुधारेंगे? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    अक्षम्य दोष।

    Answer

    यह असंगति है: दो बातें एक-दूसरे का खंडन करती हैं, जिसे पाठ अक्षम्य दोष कहता है। सुधार के लिए या तो एक ही भाव रखें, या बदलाव का कारण बताएँ, जैसे 'बचपन में प्यारी लगती थी, पर अब जलभराव के कारण चिढ़ होती है।'

  5. Q5 · 2 marks · Short answerHarder exam level

    'जातिवाद का ज़हर' जैसे विषय पर कल्पना की उड़ान वाली शैली क्यों नहीं अपनाई जाती? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    ज्वलंत सामाजिक मुद्दा।

    Answer

    क्योंकि यह एक ज्वलंत सामाजिक मुद्दा है, जो ठोस विश्लेषण और स्पष्ट राय माँगता है। ऐसे विषय पर तथ्य, कारण और परिणाम रखकर अपना पक्ष बताना होता है; कल्पना की उड़ान विषय की गंभीरता को कमज़ोर कर देगी।

  6. Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency

    मान लीजिए परीक्षा में विषय आया है: 'रेलवे प्लेटफ़ॉर्म पर एक घंटा'। लिखने से पहले के दो-तीन मिनट में आप कौन-से कोण चुन सकते हैं और रूपरेखा कैसी बनाएँगे? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    कोण चुनें, शुरुआत, क्रम, निचोड़।

    Answer

    संभव कोण: चल-कैमरे जैसा दृश्य-चित्रण, किसी यात्रा की स्मृति, या 'इंतज़ार' पर दार्शनिक विचार। मैं दृश्य-चित्रण चुनूँगा। रूपरेखा: शुरुआत में ट्रेन की घोषणा की आवाज़; मध्य में चाय वाला, कुली, बिछड़ते-मिलते लोग; अंत में निचोड़ कि प्लेटफ़ॉर्म पर हर पल कोई आ रहा है, कोई जा रहा है, जैसे जीवन में।

  7. Q7 · 6 marks · Long answerHOTS / competency

    'माँ की रसोई की खिड़की' विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 अंक)

    Hint

    स्मृति और अवलोकन मिलाएँ; खिड़की से क्या दिखता है, माँ उससे क्या देखती हैं; अंत में निचोड़।

    Answer

    खिड़की, जो सब देखती है

    हमारी रसोई की छोटी-सी खिड़की गली की ओर खुलती है। माँ सुबह चाय चढ़ाते समय सबसे पहले उसी से झाँकती हैं: दूध वाला आया या नहीं, पड़ोस की आंटी की तबीयत कैसी है, स्कूल बस मोड़ तक पहुँची या नहीं। दोपहर में उसी खिड़की से धूप का एक टुकड़ा आता है, जिसमें माँ अचार के मर्तबान रख देती हैं। शाम को उसी से मुझे खेल से लौटते देखकर वे गैस पर रोटी डालती हैं। मुझे लगता है, यह खिड़की माँ की आँख बन गई है, जिससे वे पूरे मोहल्ले की खबर रखती हैं, पर खुद कभी बाहर नहीं निकलतीं। कभी-कभी सोचता हूँ, जो खिड़की माँ को दुनिया दिखाती है, क्या कभी किसी ने उससे माँ की दुनिया भी देखी है?

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.पाठ के आरंभ में किस कवि की पंक्तियाँ हैं?Show answer

    भवानी प्रसाद मिश्र की।

  2. 2.पाठ 'रटंत' को किस शब्द से पुकारता है?Show answer

    कुटेव (बुरी लत)।

  3. 3.पाठ के अनुसार विषय किसकी तरह नहीं होता?Show answer

    दो खंभों के बीच बँधी रस्सी की तरह; वह खुले मैदान की तरह होता है।

  4. 4.'दीवाल घड़ी' के तीनों नमूने किस-किस प्रकार के हैं?Show answer

    पहला स्मृति-आधारित, दूसरा दार्शनिक, तीसरा अवलोकन-आधारित।

  5. 5.केंद्रित विषय का पाठ में दिया उदाहरण?Show answer

    टी.वी. धारावाहिकों में स्त्री।

  6. 6.पाठ में तथ्य-विश्लेषण शैली का नमूना किस विषय पर है?Show answer

    जातिवाद का ज़हर।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप बता सकते हैं कि रटंत क्या है और नए विषयों का अभ्यास क्यों ज़रूरी है?
  • क्या आप खुले और केंद्रित विषयों का अंतर उदाहरण सहित बता सकते हैं?
  • क्या आप लेख लिखने के चार चरण क्रम से बता सकते हैं?
  • क्या आप सुसंबद्धता और सुसंगति में अंतर समझा सकते हैं?
  • क्या आप 15 मिनट में किसी नए विषय पर 120 शब्दों का लेख शीर्षक सहित लिख सकते हैं?

नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन: frequently asked questions

परीक्षा में यह प्रश्न कितने अंक का होता है?

खंड ख का प्रश्न 3: तीन अप्रत्याशित विषयों में से किसी एक पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेखन, 6 अंक।

क्या लेख में 'मैं' लिख सकते हैं?

हाँ। पाठ के अनुसार ऐसे लेखन में 'मैं' शैली पर कोई रोक नहीं, क्योंकि विचारों में लेखक के व्यक्तित्व की छाप स्वाभाविक है।

क्या शीर्षक देना ज़रूरी है?

दिया गया विषय ही शीर्षक बन सकता है, पर विषय से जुड़ा अपना आकर्षक शीर्षक देना प्रस्तुति को बेहतर बनाता है।

किस विषय को चुनें?

वह विषय जिस पर आपके पास अपना अनुभव या स्पष्ट विचार हो; दो-तीन मिनट में तीनों विषयों पर सोचकर तय करें कि किसे आप अच्छे से फैला सकते हैं।

Based on: CBSE हिंदी (आधार) (302) पाठ्यक्रम, कक्षा 11-12, 2026-27; NCERT अभिव्यक्ति और माध्यम (Reprint 2026-27), पाठ 13: नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन