भारतीय कलाएँ: Class 11 (वितान भाग 1) सार, लोक-शास्त्रीय संबंध और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'भारतीय कलाएँ' वितान भाग 1 का चौथा पाठ है, जो चित्रकला, संगीत और नृत्य की भारतीय परंपरा का परिचय देता है। पाठ बताता है कि कलाओं की जड़ें लोक में हैं, वे त्योहारों और खेती से जुड़ी हैं और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र ने उन्हें शास्त्रीय रूप दिया। लोक और शास्त्र का संवाद ही उनकी ताकत है।
What भारतीय कलाएँ is about
भारतीय कलाएँ वितान भाग 1 का चौथा पाठ है। CBSE पाठ्यक्रम वितान भाग 1 पुस्तक को निर्धारित करता है; यह पाठ पुस्तक के वर्तमान संस्करण (Reprint 2026-27) में है और हटाए गए पाठों की सूची में नहीं है।
पाठ के मुख्य बिंदु:
- कलाओं की अपनी भाषा: चित्र, संगीत और नृत्य से अभिव्यक्ति
- कलाओं का त्योहारों, जन्म, विवाह, पूजा और खेती से जुड़ाव
- लोक से शास्त्र तक: समूह से व्यक्ति, व्यवसाय, राज-संरक्षण, गुप्त काल का स्वर्ण युग, भरत मुनि का नाट्यशास्त्र
- चित्रकला: भीमबेटका के शैलचित्र, अजंता-एलोरा, एलीफैंटा; स्थायी लघुचित्र (कलमकारी, फुलकारी, वरली, किवाड़, पटचित्र, मधुबनी) और अस्थायी (ऐपण, अल्पना, रंगोली, कोलम आदि)
- संगीत: वैदिक संगीत, मार्गी और देसी, राग और समय, रोज़मर्रा की चीज़ों से बने वाद्य, लोकगीत (कजरी, सोहर)
- नृत्य: नर्त्य और नृत्य, राज्यों के लोकनृत्य, शास्त्रीय नृत्य, मुद्राएँ
- लोक और शास्त्रीय कलाओं का संवाद; 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना
वितान भाग 1 से कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा में प्रश्न 12 के अंतर्गत तीन में से दो प्रश्न, लगभग 60 शब्दों में, 5-5 अंक के आते हैं।
Weightage: खंड ग (आरोह भाग 1 एवं वितान भाग 1) के 80 में से 40 अंक हैं; वितान भाग 1 से प्रश्न 12 में तीन में से दो प्रश्न, लगभग 60 शब्दों में, 5-5 अंक के आते हैं।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27, कक्षा 11 परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम विनिर्देशन
भारतीय कलाएँ: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
पाठ बताता है कि कलाओं की अपनी भाषा होती है। जैसे हम भाषा से अपने भाव व्यक्त करते हैं, वैसे ही चित्रकार रंगों से, गायक स्वरों से और नर्तक मुद्राओं से अपने परिवेश और भावों को व्यक्त करता है। भारत उत्सवधर्मी देश है; यहाँ की कलाएँ जन्मोत्सव, विवाह, पूजा और खेती से जुड़ी हैं। यही जुड़ाव उन्हें केवल मनोरंजन या सजावट बनने से बचाता है और अतीत को वर्तमान से जोड़े रखता है।
आरंभ में सभी कलाएँ लोक और समूह से जुड़ी थीं। जनजातीय और लोक कलाओं की व्यवस्था ही आगे चलकर शास्त्रीय कलाओं का आधार बनी। व्यवसाय से जुड़ने पर कलाएँ व्यक्ति-केंद्रित होने लगीं; मध्यकाल तक वे राजाओं के संरक्षण में शास्त्रीय नियमों में बँधीं। गुप्त साम्राज्य में कलाएँ शिखर पर पहुँचीं और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र ने उन्हें शास्त्रीय रूप दिया। फिर भी आज की कलाओं की जड़ें लोक में ही हैं।
चित्रकला: भाषा से पहले भी चित्र थे। मध्य प्रदेश की भीमबेटका गुफाओं के शैलचित्रों में शिकार, नृत्य, जानवर और युद्ध दिखते हैं। गुप्त काल में अजंता की गुफाएँ बनीं; माना जाता है कि उनके चित्र बौद्ध भिक्षुओं ने बनाए। एलोरा (सातवीं-आठवीं सदी) में कैलाश मंदिर है; एलीफैंटा में त्रिमूर्ति है। स्थायी लघुचित्रों में कलमकारी, पंजाब की फुलकारी, महाराष्ट्र की वरली, राजस्थान की किवाड़ चित्रकारी, ओड़िशा का पटचित्र और मिथिला की मधुबनी प्रसिद्ध हैं। अस्थायी कलाएँ, जैसे ऐपण, अल्पना, रंगोली, मांगलिक अवसरों से जुड़ी हैं और अलग-अलग राज्यों में अलग नामों से जानी जाती हैं। भारतीय कला देश के बाहर एशिया के कई देशों तक फैली।
संगीत: वैदिक काल में मार्गी (धार्मिक, नियमबद्ध) और देसी (लोक से जुड़ा, समूह में गाया जाने वाला) संगीत था। संगीत का सबसे प्रामाणिक वर्णन नाट्यशास्त्र में है। भारतीय संगीत में राग समय से जुड़े हैं, और भारतीय संगीतज्ञ रोज़मर्रा की चीज़ों से भी वाद्य बना लेते हैं। लोकगीत, जैसे मिर्ज़ापुर की कजरी और सोहर, जीवन का हिस्सा हैं। नृत्य: इसका आधार अभिनय है; नाट्यशास्त्र में 'नर्त्य' और 'नृत्य' दो रूप हैं। हर राज्य के लोकनृत्य समूह में होते हैं, प्रकृति और जीवन से जुड़े हैं। शास्त्रीय नृत्य भी लोकनृत्य से ही विकसित हुए हैं। लोक और शास्त्र का यह संवाद और 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना भारतीय कलाओं को विश्व भर में प्रिय बनाती है।
Themes and message
कला: अभिव्यक्ति की भाषा
चित्र, संगीत और नृत्य भी भाषा की तरह भाव और विचार व्यक्त करते हैं; भाषा के आने से पहले भी चित्रकारी अभिव्यक्ति का माध्यम थी।
From the text: 'जब हमारे पास भाषा नहीं थी तब भी चित्रकारी थी और यही अभिव्यक्ति का माध्यम थी।'
कला और जीवन का अटूट संबंध
भारतीय कलाएँ जन्म, विवाह, पूजा, फसल और ऋतुओं से जुड़ी हैं; इसलिए वे केवल मनोरंजन नहीं, जीवन का हिस्सा हैं।
From the text: रंगोली, ऐपण, कोलम जैसी अस्थायी कलाएँ मांगलिक अवसरों पर बनाई जाती हैं।
लोक से शास्त्र तक
लोक कलाओं की व्यवस्था ही शास्त्रीय कलाओं का आधार बनी; दोनों के बीच संवाद आज भी जारी है।
From the text: 'विद्वानों का यह मानना है कि लोक नृत्य से ही शास्त्रीय नृत्य विकसित हुआ है।'
विविधता में एकता
हर राज्य की कला अलग नाम और रूप में है, पर उनकी भावना एक है; कला राज्य की सीमाओं में नहीं बँधती।
From the text: 'राज्य की सीमाएँ भला कला को कैसे बाँध सकती हैं!'
समूह से व्यक्ति की ओर
व्यवसाय और राज-संरक्षण के कारण कलाएँ धीरे-धीरे समूह से व्यक्ति-केंद्रित हुईं; लोकनृत्यों में आज भी सामूहिकता और साहचर्य बचा है।
From the text: लोकनृत्यों में एक ताल में पैरों का उठना और हाथों का जुड़ना 'साहचर्य और प्रेमभावना' का संकेत है।
Characters
भरत मुनि (संदर्भित आचार्य)
नाट्यशास्त्र के रचयिता।
- कलाओं को शास्त्रीय रूप देने वाले
- संगीत, नृत्य और अभिनय के नियमों के प्रामाणिक स्रोत
पाठ के अनुसार नाट्यशास्त्र कला के लिए अब तक प्राप्त सबसे महत्त्वपूर्ण शास्त्र है।
लोक कलाकार और समुदाय
भारतीय कलाओं के मूल स्रोत।
- प्रकृति और जीवन से जुड़े
- सामूहिक भाव वाले
- परंपरा को जीवित रखने वाले
मधुबनी के कलाकार आज भी अपनी कला को जीवित रखे हुए हैं; लोकनृत्य समूह में होते हैं।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| सूचनात्मक-विवरणात्मक शैली | राज्यों के लोकनृत्यों और अस्थायी कलाओं के नामों की सूची | भारत की कला-विविधता का व्यापक परिचय। |
| पाठक से सीधा संवाद | 'क्या आपको यह नहीं लगता...', 'आपने देखा होगा...' | पाठक को सोचने और अपने अनुभव से जोड़ने का अवसर। |
| उद्धरण और संदर्भ | भर्तृहरि का श्लोक, रेजिनल्ड ली मे की पुस्तक का अंश | विचारों को प्रामाणिकता और गहराई। |
| चित्रों का सहयोग | भीमबेटका, वरली, रंगोली, पटचित्र, बाँस नृत्य के चित्र | दृश्य कलाओं की बात दृश्य रूप में स्पष्ट। |
| तत्सम और कला-पारिभाषिक शब्दावली | शैलचित्र, लघुचित्र, मार्गी, देसी, नर्त्य, मुद्रा, अभिनय | विषय की गंभीरता और स्पष्टता। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
हमारा देश भारत उत्सवधर्मी है। विविधता हमारी पहचान है।
पाठ (वितान भाग 1): भारतीय कलाओं की पृष्ठभूमि बताते हुए।
कलाओं और उत्सवों के गहरे संबंध का आधार।
आज की कलाओं की जड़ें लोक में ही हैं, चाहे चित्रकला हो, संगीतकला हो या फिर नृत्य कला।
पाठ (वितान भाग 1): शास्त्रीय और लोक कलाओं के संबंध की चर्चा में।
पाठ का केंद्रीय विचार।
जब हमारे पास भाषा नहीं थी तब भी चित्रकारी थी और यही अभिव्यक्ति का माध्यम थी।
पाठ (वितान भाग 1): चित्रकला की प्राचीनता।
कला अभिव्यक्ति का सबसे पुराना माध्यम।
सभी कलाएँ एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
पाठ (वितान भाग 1): गीतगोविंद के पटचित्र और ओड़िशी नृत्य, दोनों में अभिव्यक्त होने की बात।
कलाओं का अंतर्संबंध।
राज्य की सीमाएँ भला कला को कैसे बाँध सकती हैं!
पाठ (वितान भाग 1): अलग-अलग राज्यों के लोकनृत्यों की समानताओं पर।
कला की सार्वभौमिकता और विविधता में एकता।
भारतीय कलाएँ in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
त्योहार और कला
मान लीजिए दीवाली पर आपकी कॉलोनी में बाज़ार से खरीदे गए प्लास्टिक के रंगोली-स्टिकर लगाए जाते हैं और कोई हाथ से रंगोली नहीं बनाता।
पाठ के आधार पर आप इसे कैसे देखेंगे और क्या सुझाव देंगे? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- अस्थायी कलाएँ मांगलिक अवसरों से जुड़ी परंपरा हैं।
- हाथ से बनाने में भागीदारी और परंपरा का निर्वाह; प्राकृतिक रंग।
Answer: पाठ के अनुसार रंगोली जैसी कलाएँ उत्सव में सबकी भागीदारी से परंपरा को जीवित रखती हैं। मैं सुझाव दूँगा कि बच्चे-बड़े मिलकर प्राकृतिक रंगों से रंगोली बनाएँ; इससे कला और पर्यावरण, दोनों बचेंगे।
Memory hook: स्टिकर नहीं, हाथ की रंगोली।
विविधता में एकता
कल्पना कीजिए कि आपके छात्रावास में अलग-अलग राज्यों के विद्यार्थी हैं और सांस्कृतिक संध्या में हर कोई अपने राज्य का लोकनृत्य प्रस्तुत करता है।
पाठ की किस बात से यह दृश्य मेल खाता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- हर राज्य का नृत्य अलग नाम-रूप वाला।
- पर सब समूह में, प्रकृति और जीवन से जुड़े; 'राज्य की सीमाएँ कला को नहीं बाँधतीं'।
Answer: यह पाठ की उस बात से मेल खाता है कि नाम अलग होने पर भी सभी लोकनृत्य समूह में होते हैं और जीवन व प्रकृति से जुड़े हैं; कला राज्यों की सीमाओं में नहीं बँधती।
Memory hook: नाम अलग, ताल एक।
लोक से शास्त्र
यदि कोई कहे कि शास्त्रीय संगीत 'ऊँचा' है और लोकगीत 'साधारण', तो आप क्या कहेंगे?
पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- लोक की व्यवस्था ही शास्त्र का आधार बनी।
- दोनों का निरंतर संवाद ही ताकत है।
Answer: पाठ के अनुसार शास्त्रीय कलाएँ लोक से ही विकसित हुई हैं और आज भी दोनों में संवाद है; इसलिए लोकगीत 'साधारण' नहीं, बल्कि शास्त्रीय संगीत की जड़ हैं।
Memory hook: जड़ लोक, फूल शास्त्र।
Topics in this chapter
How the school exam asks भारतीय कलाएँ
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| वितान भाग 1 (प्रश्न 12, 3 में से 2, लगभग 60 शब्द, 5 अंक) | लोक और शास्त्रीय कलाओं का संबंध, स्थायी और अस्थायी लघुचित्र, मार्गी-देसी संगीत, लोकनृत्यों की समानताएँ, कलाओं का समूह से व्यक्ति की ओर जाना। | परिभाषा/मुख्य विचार + पाठ से दो-तीन उदाहरण (नाम सहित) + निष्कर्ष। |
| विचारात्मक प्रश्न (5 अंक) | आज की कलाओं पर बाज़ार और फ़िल्मों का प्रभाव, अपने क्षेत्र की कला का संरक्षण, कला और संस्कृति का संबंध। | पाठ का विचार + अपने परिवेश का उदाहरण + सुझाव। |
| तथ्य-आधारित (5 अंक) | भीमबेटका, अजंता, एलोरा, नाट्यशास्त्र, राग और समय, शास्त्रीय नृत्य और उनके राज्य। | तथ्य सटीक और क्रमबद्ध; अनावश्यक विस्तार नहीं। |
Tricks to remember भारतीय कलाएँ
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
अस्थायी कला के नाम
उत्तराखंड-ऐपण, राजस्थान-मंडवा, गुजरात-सत्तिया, महाराष्ट्र-रंगोली, बिहार-अरिपन, म.प्र./उ.प्र.-चौकपूरना, दक्षिण-कोलम।
Use it when: तथ्य-आधारित प्रश्न।
गुफाएँ और समय
भीमबेटका = प्रागैतिहासिक शैलचित्र (म.प्र.); अजंता = गुप्त काल, बौद्ध भिक्षु; एलोरा = 7-8वीं सदी, कैलाश मंदिर; एलीफैंटा = त्रिमूर्ति।
Use it when: चित्रकला वाले प्रश्न।
शास्त्रीय नृत्य और राज्य
कथकलि, मोहिनीअट्टम-केरल; कत्थक-उ.प्र.; कुचिपुड़ी-आंध्र; ओड़िशी-ओड़िशा; मणिपुरी-मणिपुर; भरतनाट्यम-कर्नाटक, तमिलनाडु (पाठ के अनुसार); सत्रिया-असम।
Use it when: नृत्य कला वाले प्रश्न।
भारतीय कलाएँ: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: स्थायी और अस्थायी लघुचित्र · 5 marks · Long answerExam level
पाठ के अनुसार लघुचित्र कितने प्रकार के हैं? दोनों प्रकारों के उदाहरण देते हुए उनका अंतर स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- स्थायी: कपड़े, किताब, लकड़ी, कागज़ पर; कलमकारी, फुलकारी, वरली, किवाड़, पटचित्र, मधुबनी।
- अस्थायी: कोहबर, ऐपण, अल्पना, रंगोली; शादी-त्योहार से जुड़ी।
- अंतर: टिकाऊ माध्यम बनाम अवसर-विशेष पर बनने वाली।
Answer: लघुचित्र दो प्रकार के हैं। स्थायी लघुचित्र कपड़े, किताब, लकड़ी या कागज़ पर बनते हैं और लंबे समय तक टिकते हैं, जैसे कलमकारी, पंजाब की फुलकारी, महाराष्ट्र की वरली, ओड़िशा का पटचित्र और मिथिला की मधुबनी। अस्थायी कलाएँ, जैसे कोहबर, ऐपण, अल्पना और रंगोली, शादी-त्योहार और मांगलिक अवसरों पर बनाई जाती हैं और कुछ समय बाद मिट जाती हैं।
Example 2: मार्गी और देसी संगीत · 5 marks · Long answerHarder exam level
वैदिक काल के मार्गी और देसी संगीत में क्या अंतर था? आज के संगीत में इन दोनों धाराओं की झलक कहाँ दिखती है? (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- मार्गी: धार्मिक समारोह, नियम-अनुशासन से बँधा।
- देसी: लोक से जुड़ा, लोक-रुचि अनुसार समूह में गाया जाने वाला।
- आज: शास्त्रीय संगीत (मार्गी की परंपरा), कजरी-सोहर जैसे लोकगीत (देसी)।
Answer: मार्गी संगीत धार्मिक समारोहों से जुड़ा था और नियम-अनुशासन में बँधा था, जबकि देसी संगीत लोक से जुड़ा था और लोक-रुचि के अनुसार समूह में गाया जाता था। आज मार्गी की झलक राग-ताल के नियमों वाले शास्त्रीय संगीत में दिखती है और देसी की झलक मिर्ज़ापुर की कजरी, जन्म पर गाए जाने वाले सोहर और विवाह-गीतों में। दोनों धाराओं का मेल फ़िल्मी संगीत में भी दिखता है।
Example 3: नर्त्य और नृत्य · 5 marks · Long answerHarder exam level
नाट्यशास्त्र में आए 'नर्त्य' और 'नृत्य' शब्दों का अंतर स्पष्ट करते हुए बताइए कि भारतीय नृत्य केवल हाथ-पैर की गति क्यों नहीं है। (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- दोनों अभिनय के रूप; नर्त्य = शब्द और भंगिमा, नृत्य = भाव और भंगिमा।
- सभी अंगों की गति-लय; आँख, भौंह, नासिका से भाव।
- हस्त-मुद्राओं से कथाएँ (रामायण, महाभारत)।
Answer: नाट्यशास्त्र के अनुसार नर्त्य और नृत्य, दोनों अभिनय के रूप हैं; नर्त्य में शब्द और भंगिमा महत्त्वपूर्ण हैं, जबकि नृत्य में भाव और भंगिमा। भारतीय नृत्य में सभी अंगों की गति और लय का महत्त्व है; नर्तक आँख, भौंह या नासिका से ही खुशी, दुख, क्रोध जैसे भाव व्यक्त कर देते हैं और हाथों की मुद्राओं से रामायण-महाभारत जैसी कथाएँ तक कह देते हैं।
Example 4: लोकनृत्यों की समानताएँ · 5 marks · Long answerExam level
भारत के अलग-अलग राज्यों के लोकनृत्यों के नाम भले अलग हों, उनमें कौन-सी समानताएँ हैं? पाठ से उदाहरण देकर लिखिए। (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- सभी समूह में; हाथ में हाथ, गोलाई में।
- प्रकृति और जीवन से संबंध: फसल, ऋतु, वर्षा।
- स्त्री-पुरुष साथ; विभिन्न धर्मों के अनुष्ठानों से जुड़े।
Answer: पहली समानता, सभी लोकनृत्य समूह में होते हैं; नर्तक प्रायः गोलाई में हाथ में हाथ डालकर नाचते हैं, जैसे गुजरात का गर्बा। दूसरी, सबका संबंध प्रकृति और जीवन से है; ऋतुओं का बदलना, फसल की बुवाई-कटाई उनके अवसर हैं, जैसे कटाई के बाद खलिहान में होने वाला टिप्पणी नृत्य। तीसरी, इनमें स्त्री-पुरुष साथ नाचते हैं और ये किसी एक नहीं, लगभग सभी धर्मों के अनुष्ठानों से जुड़े हैं।
Example 5: कलाओं का समूह से व्यक्ति की ओर जाना · 5 marks · Long answerHOTS / competency
पाठ के अनुसार भारतीय कलाएँ धीरे-धीरे समूह से व्यक्ति-केंद्रित क्यों होती गईं? इस परिवर्तन के लाभ और हानि पर अपना मत दीजिए। (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- कारण: व्यवसाय से जुड़ना, राज-संरक्षण, शास्त्रीय नियम, लंबी साधना।
- लाभ: परिष्कार, उत्कृष्टता, कलाकार की पहचान।
- हानि: आम लोगों की भागीदारी घटी, सामूहिकता का आनंद कम।
Answer: पाठ के अनुसार व्यवसाय से जुड़ने और मध्यकाल में राजाओं के संरक्षण में आने से कलाएँ शास्त्रीय नियमों में बँधीं; शास्त्रीय नृत्य जैसी कलाओं के लिए लंबी साधना चाहिए थी, इसलिए वे विशेष व्यक्तियों तक सिमट गईं। लाभ यह हुआ कि कलाओं में परिष्कार और उत्कृष्टता आई। हानि यह कि आम लोगों की भागीदारी और सामूहिक आनंद घटा; इसलिए लोक कलाओं को भी समान सम्मान मिलना चाहिए।
Example 6: उत्सव और कला: केवल मनोरंजन नहीं · 5 marks · Long answerHOTS / competency
पाठ कहता है कि पर्वों, त्योहारों और फसलों से जुड़ाव कलाओं को केवल मनोरंजन या अलंकरण बनने से बचाता है। आज जब कलाएँ बाज़ार और मंच पर अधिक दिखती हैं, इस कथन का क्या महत्त्व है? (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- जीवन से जुड़ी कला में अर्थ और निरंतरता; अतीत-वर्तमान की कड़ी।
- आज: मधुबनी, वरली की बाज़ार में माँग; पर कलाकार और परंपरा से कटाव का खतरा।
- संतुलन: बाज़ार के साथ समुदाय और अवसर से जुड़ाव बना रहे।
Answer: जीवन के अवसरों से जुड़ी कला केवल देखने की वस्तु नहीं रहती; उसमें अर्थ, भागीदारी और परंपरा की निरंतरता होती है, जो अतीत को वर्तमान से जोड़ती है। आज मधुबनी और वरली जैसी कलाओं की बाज़ार में माँग है, जो अच्छी बात है, पर केवल बिक्री के लिए बनी कला अपने समुदाय और अवसरों से कट सकती है। इसलिए बाज़ार के साथ त्योहारों और समुदाय से उनका जीवित संबंध भी बचाना ज़रूरी है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
लोकनृत्यों की समानताएँ (लगभग 60 शब्द, 5 अंक) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| तीन समानताएँ (समूह में, प्रकृति-जीवन से संबंध, स्त्री-पुरुष साथ/सभी धर्मों से जुड़ाव) | 2.5 |
| पाठ से नृत्यों के उदाहरण | 1.5 |
| भाषा और शब्द-सीमा | 1 |
स्थायी और अस्थायी लघुचित्र (लगभग 60 शब्द, 5 अंक) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| दोनों प्रकारों की परिभाषा | 2 |
| दोनों के उदाहरण | 2 |
| अंतर का निष्कर्ष, भाषा और शब्द-सीमा | 1 |
Where students lose marks in भारतीय कलाएँ
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: यह लिखना कि शास्त्रीय कलाएँ लोक कलाओं से अलग और श्रेष्ठ हैं
पाठ के अनुसार शास्त्रीय कलाओं का आधार लोक कलाएँ हैं और दोनों का संवाद ही ताकत है।
Do this: लोक-शास्त्र संबंध को संवाद के रूप में लिखें।
Usually costs: 2 अंक
Mistake: स्थायी और अस्थायी कलाओं के उदाहरण आपस में मिला देना
मधुबनी, वरली स्थायी हैं; रंगोली, ऐपण, अल्पना अस्थायी।
Do this: माध्यम (कपड़ा-कागज़ बनाम ज़मीन) से पहचानें।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: नाट्यशास्त्र के रचयिता का नाम गलत लिखना
नाट्यशास्त्र भरत मुनि का है।
Do this: नाम सही याद रखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: केवल नामों की सूची लिख देना
5 अंक के उत्तर में व्याख्या और निष्कर्ष भी चाहिए।
Do this: मुख्य विचार + 2-3 उदाहरण + एक वाक्य का निष्कर्ष।
Usually costs: 2 अंक
Practice questions on भारतीय कलाएँ
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
भीमबेटका की गुफाएँ किस राज्य में हैं और किसके लिए प्रसिद्ध हैं?
(क) महाराष्ट्र; मूर्तिकला
(ख) मध्य प्रदेश; शैलचित्र
(ग) ओड़िशा; पटचित्र
(घ) कर्नाटक; मंदिरHint
सबसे प्राचीन चित्र।
Answer
(ख) मध्य प्रदेश; शैलचित्र
Q2 · 1 mark · Very short answerExam level
उत्तराखंड का 'ऐपण' राजस्थान, बिहार और दक्षिण भारत में किन नामों से जाना जाता है?
Hint
मंडवा, अरिपन, कोलम।
Answer
राजस्थान में मंडवा, बिहार में अरिपन और दक्षिण भारत में कोलम।
Q3 · 5 marks · Long answerHarder exam level
अजंता, एलोरा और एलीफैंटा की गुफाओं की प्रमुख विशेषताएँ पाठ के आधार पर लिखिए। (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
Hint
गुप्त काल, बौद्ध भिक्षु; सातवीं-आठवीं सदी, कैलाश मंदिर; त्रिमूर्ति।
Answer
अजंता की गुफाएँ गुप्त काल (कलाओं का स्वर्ण युग) में खोदी गईं; माना जाता है कि उनकी दीवारों के आकर्षक चित्र बौद्ध भिक्षुओं ने बनाए, जो आज भी कलाकारों को प्रभावित करते हैं। एलोरा की गुफाएँ सातवीं-आठवीं सदी में चट्टानें काटकर बनीं; इनके बीच कैलाश का विशाल मंदिर है। लगभग उसी समय की एलीफैंटा की गुफाओं में त्रिमूर्ति की प्रभावशाली मूर्ति है।
Q4 · 1 mark · MCQHarder exam level
कथन (A): पाठ के अनुसार शास्त्रीय कलाओं का लोक कलाओं से कोई संबंध नहीं है। कारण (R): भरत मुनि के नाट्यशास्त्र ने कलाओं को शास्त्रीय रूप दिया।
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
(ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
(ग) A गलत, R सही
(घ) A सही, R गलतHint
आज की कलाओं की जड़ें कहाँ हैं?
Answer
(ग) A गलत, R सही (नाट्यशास्त्र ने शास्त्रीय रूप दिया, पर कलाओं की जड़ें लोक में ही हैं और दोनों में निरंतर संवाद है)
Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
मान लीजिए आपके विद्यालय में 'हमारी लोककला' प्रदर्शनी लगनी है। अपने राज्य या आसपास की किसी लोककला को चुनकर बताइए कि पाठ के अनुसार उसे किस प्रकार प्रस्तुत करेंगे कि वह केवल सजावट न लगे। (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
Hint
कला + उससे जुड़ा अवसर/उत्सव + कलाकार की बात + सामग्री।
Answer
उदाहरण के लिए मैं बिहार की मधुबनी या अरिपन चुनूँगा। चित्रों के साथ यह भी बताऊँगा कि अरिपन किन मांगलिक अवसरों पर बनता है, उसमें प्राकृतिक रंग कैसे बनते हैं और उसके प्रतीकों का क्या अर्थ है। किसी स्थानीय कलाकार को बुलाकर लाइव प्रदर्शन करवाऊँगा। इससे दर्शक समझेंगे कि यह कला जीवन और उत्सव से जुड़ी परंपरा है, केवल दीवार की सजावट नहीं।
Q6 · 5 marks · Long answerHarder exam level
भारतीय वाद्ययंत्रों की वह कौन-सी विशेषता है, जिसके कारण पाठ भारतीय कला को 'सबसे अलग' बताता है? (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
Hint
रोज़मर्रा की चीज़ें; वीणा, जलतरंग, रवाब, दोतार, बाँसुरी; सहजता, प्रकृति से जुड़ाव।
Answer
पाठ के अनुसार भारतीय संगीतज्ञ किसी भी वस्तु से संगीत निकाल सकते हैं। वीणा, जलतरंग, रवाब, दोतार और बाँसुरी जैसे वाद्यों में प्रयोग होने वाली चीज़ें हमारे आसपास रोज़मर्रा में मिलने वाली हैं; जलतरंग में तो पानी भरे पात्रों से सुर निकलते हैं। यह सहजता और प्रकृति से जुड़ाव भारतीय कला की विशेषता है, इसलिए पाठ इसे सबसे अलग बताता है।
Q7 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
पाठ के अनुसार पुरानी फ़िल्मों में गायक नाक से क्यों गाते थे? यह तथ्य भारतीय संगीत की परंपरा के बारे में क्या बताता है? (लगभग 60 शब्द, 5 अंक)
Hint
नाट्यशास्त्र में उल्लेख; वीणा के सुरों तक पहुँचने का प्रयास; परंपरा की निरंतरता।
Answer
पाठ बताता है कि दो हज़ार साल पहले भी गायक नाक से गाना पसंद करते थे, जिसका उल्लेख भरत के नाट्यशास्त्र में है। संभवतः यह मुख्य वाद्य वीणा के सुरों तक पहुँचने की कोशिश का प्रभाव था। यह तथ्य बताता है कि भारतीय संगीत में बदलाव धीरे-धीरे हुए हैं और प्राचीन परंपराएँ सदियों बाद तक, यहाँ तक कि फ़िल्मी गायकी में भी, जीवित रहती हैं।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.अजंता की गुफाओं के चित्र किसने बनाए, ऐसा माना जाता है?Show answer
बौद्ध भिक्षुओं ने।
2.एलोरा की गुफाओं के बीच कौन-सा मंदिर है?Show answer
कैलाश का विशाल मंदिर।
3.ओड़िशा के पटचित्र में किस कवि की रचना उकेरी गई है?Show answer
जयदेव के गीतगोविंद।
4.भारत का प्राचीन मुख्य वाद्य कौन-सा था?Show answer
वीणा।
5.किस नृत्य को भरतनाट्यम का प्रेरणा-स्रोत माना जाता है?Show answer
केरल का कुरूवांजी नृत्य।
6.राजस्थानी महिलाएँ ओढ़नी से चेहरा ढककर कौन-सा नृत्य करती हैं?Show answer
घूमर।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप कलाओं के लोक से शास्त्र तक पहुँचने की प्रक्रिया बता सकते हैं?
- क्या आप स्थायी और अस्थायी लघुचित्रों के उदाहरण लिख सकते हैं?
- क्या आप मार्गी-देसी संगीत और राग-समय संबंध समझा सकते हैं?
- क्या आप नर्त्य और नृत्य का अंतर तथा लोकनृत्यों की समानताएँ लिख सकते हैं?
- क्या आप शास्त्रीय नृत्यों को उनके राज्यों से मिला सकते हैं?
भारतीय कलाएँ: frequently asked questions
क्या 'भारतीय कलाएँ' 2026-27 के पाठ्यक्रम में है?
हाँ। CBSE पाठ्यक्रम वितान भाग 1 पुस्तक निर्धारित करता है; यह पाठ पुस्तक के वर्तमान संस्करण (Reprint 2026-27) में है और हटाए गए पाठों की सूची में नहीं है।
भारतीय कलाओं का सबसे महत्त्वपूर्ण शास्त्र कौन-सा है?
भरत मुनि का नाट्यशास्त्र, जिसने संगीत, नृत्य और अभिनय को शास्त्रीय रूप दिया।
कलाओं के लिए 'स्वर्ण युग' किसे कहा गया है?
चौथी से छठी सदी के गुप्त साम्राज्य को।
पाठ के अनुसार राग और समय का क्या संबंध है?
अलग-अलग राग अलग-अलग समय पर गाए जाते हैं, जैसे ब्रह्ममुहूर्त में भैरव, दोपहर में दीपक और श्रीराग, रात में कौशिक और हिंडोला।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) (302) पाठ्यक्रम, कक्षा 11-12, 2026-27; NCERT वितान भाग 1 (Reprint 2026-27), पाठ 4: भारतीय कलाएँ