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HindiCBSE Class 11 · Chapter 2

मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती): Class 11 सार, चरित्र-चित्रण और प्रश्न

Updated 15 October 2026 · Fact-checked

'मियाँ नसीरुद्दीन' कृष्णा सोबती का शब्दचित्र है, जो 'हम-हशमत' संग्रह से लिया गया है। दिल्ली के मटियामहल के खानदानी नानबाई मियाँ नसीरुद्दीन छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर हैं। लेखिका से बातचीत में वे अपने पेशे पर गर्व, करके सीखने की सीख और बीते कद्रदान ज़माने की कसक प्रकट करते हैं।

What कृष्णा सोबती – मियाँ नसीरुद्दीन is about

मियाँ नसीरुद्दीन आरोह भाग 1 का दूसरा गद्य पाठ है। यह कहानी नहीं, शब्दचित्र है: लेखिका कृष्णा सोबती एक दोपहर दिल्ली के मटियामहल के गढ़ैया मुहल्ले में एक साधारण-सी दुकान पर पहुँचती हैं और सत्तर वर्ष के खानदानी नानबाई से बातचीत करती हैं। पूरी रचना इसी बातचीत से बनी है, इसलिए इसमें घटनाएँ कम और व्यक्तित्व की झलकियाँ अधिक हैं।

पाठ के मुख्य बिंदु:

  • मियाँ का पहला परिचय: चेहरा, आँखें, तेवर और पत्रकारों पर व्यंग्य
  • खानदानी पेशा: दादा मियाँ कल्लन, पिता मियाँ बरकत शाही और स्वयं मियाँ नसीरुद्दीन
  • 'काम करने से आता है' और 'तालीम की तालीम' वाली सीख
  • बादशाह के लिए बनी वह चीज़ जो न आग से पके, न पानी से बने
  • बादशाह का नाम पूछने पर खीज, कारीगरों की मजूरी और रोटियों के नाम
  • अंत में बीते कद्रदान ज़माने की कसक

कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा में इस पाठ से पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, लगभग 40 शब्दों के (2 अंक) और लगभग 60 शब्दों के (3 अंक) प्रश्न आ सकते हैं। चरित्र-चित्रण और भाषा-शैली (उर्दू-पंजाबी मिश्रित बोलचाल) पर प्रश्न विशेष रूप से ध्यान देने योग्य हैं।

Weightage: खंड ग (आरोह भाग 1 एवं वितान भाग 1) के 80 में से 40 अंक हैं; गद्य खंड से पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5), तीन में से दो प्रश्न लगभग 60 शब्दों में (3×2) और तीन में से दो प्रश्न लगभग 40 शब्दों में (2×2) आते हैं।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27, कक्षा 11 परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम विनिर्देशन

कृष्णा सोबती – मियाँ नसीरुद्दीन: summary

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

लेखिका एक दोपहर जामा मस्जिद के पास मटियामहल के गढ़ैया मुहल्ले से गुज़र रही थीं। एक मामूली, अँधेरी दुकान में आटे का ढेर गूँधा जाता देख वे रुकीं और पता चला कि यह खानदानी नानबाई मियाँ नसीरुद्दीन की दुकान है, जो छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए प्रसिद्ध हैं। मियाँ चारपाई पर बैठे बीड़ी पी रहे थे; उनका चेहरा मौसम की मार से पका हुआ था और आँखों में चालाकी भरा भोलापन था।

सवाल पूछने की बात सुनकर मियाँ ने पहले शक किया कि कहीं वे अखबारवाली तो नहीं, क्योंकि उनकी नज़र में अखबार बनाने और पढ़ने वाले दोनों निठल्ले होते हैं। फिर गर्व से बताया कि रोटी पकाने का हुनर उन्होंने किसी दूसरे कारीगर से नहीं, अपने पिता से सीखा; यह उनका खानदानी पेशा है। उनके पिता मियाँ बरकत शाही गढ़ैयावाले और दादा आला नानबाई मियाँ कल्लन थे। नसीहत के बारे में पूछने पर बोले कि काम करने से आता है, नसीहतों से नहीं। मदरसे की कच्ची-पक्की जमातों का उदाहरण देकर उन्होंने समझाया कि बर्तन धोना, भट्ठी बनाना और आँच देना सीखे बिना कोई सीधे नानबाई नहीं बन सकता; यानी तालीम की तालीम भी बड़ी चीज़ है।

उन्होंने बताया कि उनके बुज़ुर्गों ने बादशाह के लिए ऐसी चीज़ बनाई थी जो न आग से पकी, न पानी से बनी, पर वह चीज़ क्या थी, यह बताने से इनकार कर दिया। बादशाह का नाम पूछने पर वे खीज गए और टालते रहे। उन्होंने बताया कि वे सत्तर के हो चुके हैं और कारीगरों को आटे और मैदे की मजूरी गिनकर देते हैं। बेटे-बेटियों के बारे में पूछने का मन हुआ, पर उनके चेहरे पर दबे अंधड़ के आसार देखकर लेखिका ने यह प्रसंग नहीं छेड़ा। अंत में रोटियों के नाम गिनाकर उन्होंने लंबी साँस भरी कि अब पकाने-खाने की कद्र करने वाले नहीं रहे; लोग तंदूर से निकालते हैं, निगलते हैं और हज़म कर जाते हैं।

Themes and message

पेशे को कला का दर्जा

मियाँ रोटी बनाने को साधारण धंधा नहीं, खानदानी हुनर मानते हैं। हुनर कहाँ से सीखा, यह पूछे जाने पर वे चिढ़कर पूछते हैं कि क्या नानबाई नगीनासाज़ या रँगरेज़ से सीखने जाएगा, क्योंकि उनके लिए नानबाई का इल्म अपने आप में पूरा है।

From the text: 'मियाँ मशहूर हैं छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए' और रोटियों के नामों की लंबी सूची।

करके सीखना ही असली तालीम

मियाँ के अनुसार नसीहतों से नहीं, छोटे-छोटे काम क्रम से करने से हुनर आता है; बर्तन धोने से भट्ठी की आँच तक हर सीढ़ी ज़रूरी है।

From the text: 'काम करने से आता है, नसीहतों से नहीं।'

खानदानी परंपरा और गर्व

तीन पीढ़ियों का हुनर, बादशाह के यहाँ काम करने की बात और 'खानदानी' शब्द पर बार-बार ज़ोर उनकी पहचान का आधार है।

From the text: 'बहुतेरे, पर खानदानी नहीं' कहकर वे दूसरे नानबाइयों से अपने को अलग करते हैं।

बदलते ज़माने की कसक

अंत में मियाँ दुखी हैं कि अब खाने का स्वाद और मेहनत समझने वाले लोग नहीं रहे; जल्दबाज़ी की संस्कृति ने कारीगरी की कद्र घटा दी है।

From the text: 'उतर गए वे ज़माने।'

Characters

मियाँ नसीरुद्दीन

सत्तर वर्ष के खानदानी नानबाई, शब्दचित्र के केंद्र।

  • अपने हुनर पर गर्व करने वाले, कुछ अहंकारी
  • बातूनी, हाज़िरजवाब और नाटकीय अंदाज़ वाले
  • व्यावहारिक: करके सीखने में विश्वास
  • चतुर: असुविधाजनक प्रश्नों (पकवान, बादशाह का नाम) को टाल जाने वाले
  • भीतर से अकेले और बीते समय की याद में डूबे

पत्रकारों को 'निठल्ला' कहना, 'तालीम की तालीम' समझाना, बादशाह का नाम पूछने पर खीजना और अंत में 'उतर गए वे ज़माने' कहना।

लेखिका (कृष्णा सोबती)

प्रश्नकर्ता और शब्दचित्र की कथावाचक।

  • जिज्ञासु और धैर्यवान
  • संवेदनशील: मियाँ की दुखती रग नहीं छेड़तीं
  • विनोदप्रिय: 'मज़ा लेने के लिए' टोकती हैं

बेटे-बेटियों के बारे में पूछने का मन होते हुए भी चेहरे पर दबे अंधड़ के आसार देखकर वह विषय नहीं छेड़तीं।

How it is written

DeviceExampleEffect
शब्दचित्र विधा और संवाद-शैलीपूरा पाठ लेखिका और मियाँ के प्रश्नोत्तर पर टिका है।पात्र अपने ही शब्दों से पाठक के सामने जीवित हो उठता है।
उर्दू, पंजाबी और बोलचाल के शब्द'इल्म', 'वालिद', 'मरहूम', 'बतावेंगे', 'लेवेंगे', 'इत्ता'पुरानी दिल्ली के कारीगर की ठेठ भाषा और परिवेश की प्रामाणिकता।
मुहावरे'बाल की खाल निकालना', 'आँखों के कंचे फेर देना', 'खिसियानी हँसी हँसना'भाषा में चुटीलापन और दृश्यात्मकता।
व्यंग्य और हास्य'यह तो खोजियों की खुराफ़ात है'; 'झूठ से रोटी पकेगी?'मियाँ के स्वभाव की तीखी और मज़ेदार झलक।
शब्द-क्रम में परिवर्तन'मियाँ मशहूर हैं छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए'बोलचाल का प्रवाह और अर्थ पर बल।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • मियाँ, कहीं अखबारनवीस तो नहीं हो? यह तो खोजियों की खुराफ़ात है।

    मियाँ नसीरुद्दीन: लेखिका के सवाल पूछने की बात कहने पर।

    पत्रकारों के प्रति मियाँ की अरुचि और उनका कामकाजी नज़रिया।

  • काम करने से आता है, नसीहतों से नहीं।

    मियाँ नसीरुद्दीन: पिता या दादा की कोई नसीहत याद होने के प्रश्न पर।

    पाठ का केंद्रीय विचार: व्यावहारिक अनुभव ही हुनर देता है।

  • कहने का मतलब साहिब यह कि तालीम की तालीम भी बड़ी चीज़ होती है।

    मियाँ नसीरुद्दीन: मदरसे की जमातों और भट्ठी के कामों का उदाहरण देने के बाद।

    सीखने का क्रमिक तरीका सीखना भी शिक्षा का अंग है।

  • रोटी जनाब पकती है आँच से, समझे!

    मियाँ नसीरुद्दीन: लेखिका के यह टोकने पर कि क्या कहावत सच्ची है।

    मियाँ की हाज़िरजवाबी और व्यावहारिक तर्क।

  • वक्त से वक्त को किसी ने मिलाया है आज तक!

    मियाँ नसीरुद्दीन: बादशाह का नाम पूछकर समय मिलाने की बात पर।

    असुविधाजनक प्रश्न को दार्शनिक अंदाज़ में टाल देना।

  • उतर गए वे ज़माने।

    मियाँ नसीरुद्दीन: पाठ के अंत में रोटियों के नाम गिनाने के बाद।

    कद्रदानों के खो जाने की कसक।

कृष्णा सोबती – मियाँ नसीरुद्दीन in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

करके सीखना

मान लीजिए आपका एक मित्र बिना कोई अभ्यास-मैच खेले सीधे स्कूल की क्रिकेट टीम का कप्तान बनना चाहता है।

मियाँ नसीरुद्दीन की 'तालीम की तालीम' वाली बात से आप उसे क्या समझाएँगे? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मियाँ: बर्तन धोना, भट्ठी बनाना, आँच देना सीखे बिना नानबाई नहीं।
  2. खेल में भी फ़ील्डिंग, अभ्यास और छोटे मैचों की सीढ़ी ज़रूरी।

Answer: जैसे बर्तन धोने और आँच देने की सीढ़ियाँ चढ़े बिना कोई नानबाई नहीं बनता, वैसे ही अभ्यास, फ़ील्डिंग और छोटे मैचों का अनुभव लिए बिना अच्छा कप्तान नहीं बना जा सकता। पहले क्रम से सीखो, फिर नेतृत्व करो।

Memory hook: सीढ़ी छोड़ोगे तो छत नहीं मिलेगी।

कारीगरी की कद्र

कल्पना कीजिए कि आपके मोहल्ले में एक बुज़ुर्ग दर्ज़ी हैं, जो हाथ से बेहद बारीक सिलाई करते हैं, पर अब लोग तैयार कपड़े खरीदते हैं और उनकी दुकान खाली रहती है।

इस स्थिति को पाठ के अंतिम अंश से जोड़िए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मियाँ की कसक: 'उतर गए वे ज़माने'।
  2. जल्दबाज़ी और तैयार माल की संस्कृति से हुनर की कद्र घटी।

Answer: मियाँ नसीरुद्दीन की तरह यह दर्ज़ी भी कद्रदानों के न रहने से दुखी होंगे। हम ऐसे कारीगरों से काम करवाकर और उनके हुनर की सराहना करके उनकी कला को जीवित रख सकते हैं।

Memory hook: कद्रदान बचेंगे तो कारीगर बचेंगे।

दूसरे के दुख का सम्मान

मान लीजिए आप स्कूल पत्रिका के लिए किसी बुज़ुर्ग चौकीदार का साक्षात्कार ले रहे हैं और परिवार के बारे में पूछते ही उनका चेहरा उतर जाता है।

लेखिका के व्यवहार से आप क्या सीखेंगे?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लेखिका ने 'दबे हुए अंधड़ के आसार' देखकर विषय बदल दिया।
  2. साक्षात्कार में जानकारी से बड़ी चीज़ सामने वाले की भावना है।

Answer: मैं वह प्रश्न वहीं छोड़कर उनके काम और अनुभवों की बात करूँगा, जैसे लेखिका ने मियाँ के बेटे-बेटियों का प्रसंग नहीं छेड़ा।

Memory hook: हर सवाल पूछने लायक नहीं होता।

Topics in this chapter

How the school exam asks कृष्णा सोबती – मियाँ नसीरुद्दीन

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
पठित गद्यांश (प्रश्न 9, 1×5)पहली मुलाकात, खानदानी हुनर, 'तालीम की तालीम', बादशाह का प्रसंग या अंत की कसक से गद्यांश और पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (कथन-कारण सहित)।उर्दू शब्दों (पेशानी, इल्म, मरहूम) के अर्थ और मुहावरों का भाव पहचानें; विकल्प चुनने से पहले बताएँ कि बात किस प्रश्न के उत्तर में कही गई।
लगभग 40 शब्द (प्रश्न 11, 2 अंक)'नानबाइयों का मसीहा' का आशय, पत्रकारों के बारे में मियाँ की राय, बादशाह का नाम पूछने पर खीज, कारीगरों की मजूरी।दो सटीक बिंदु और पाठ का एक छोटा प्रमाण।
लगभग 60 शब्द (प्रश्न 10, 3 अंक)मियाँ का चरित्र-चित्रण, शब्दचित्र की शैली, 'तालीम की तालीम' का अर्थ, पारंपरिक पेशों का आज के समय में भविष्य।तीन बिंदु; हर बिंदु के साथ पाठ का कोई कथन या घटना।

Tricks to remember कृष्णा सोबती – मियाँ नसीरुद्दीन

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • तीन पीढ़ियाँ: 'क-ब-न'

    कल्लन (दादा) → बरकत शाही (पिता) → नसीरुद्दीन (स्वयं)।

    Use it when: खानदानी पेशे वाले प्रश्नों में नाम सही लिखने के लिए।

  • बातचीत का क्रम: 'प-ता-बा-म-क'

    पत्रकार पर शक → तालीम की तालीम → बादशाह की अनोखी चीज़ → मजूरी और रोटियाँ → कसक।

    Use it when: सार और प्रसंग-आधारित प्रश्न।

  • संख्याएँ

    56 किस्म की रोटियाँ, उम्र 70, पिता 80 पर गुज़रे; मजूरी 2 रुपये मन आटा, 4 रुपये मन मैदा।

    Use it when: बहुविकल्पी और अति लघु प्रश्न।

कृष्णा सोबती – मियाँ नसीरुद्दीन: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: गद्यांश 1: मियाँ से पहली मुलाकात

मौसमों की मार से पका चेहरा, आँखों में काइयाँ भोलापन और पेशानी पर मँजे हुए कारीगर के तेवर। हमें गाहक समझ मियाँ ने नज़र उठाई—‘फ़रमाइए।’ झिझक से कहा—‘आपसे कुछ एक सवाल पूछने थे—आपको वक्त हो तो...’

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    'आँखों में काइयाँ भोलापन' से मियाँ के व्यक्तित्व की कौन-सी बात प्रकट होती है?
    (क) वे पूरी तरह भोले हैं
    (ख) भोलेपन के भीतर छिपी चतुराई
    (ग) उनकी आँखें कमज़ोर हैं
    (घ) वे डरपोक हैं

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    मियाँ ने लेखिका की ओर नज़र क्यों उठाई?
    (क) उन्हें पहचानते थे
    (ख) उन्हें ग्राहक समझा
    (ग) उन्हें पत्रकार समझा
    (घ) वे कारीगर को बुला रहे थे

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: इसके बाद मियाँ 'पंचहज़ारी अंदाज़ से' सिर हिलाकर कहते हैं कि थोड़ा वक्त निकाल लेंगे।) 'पंचहज़ारी अंदाज़ से सिर हिलाया'—इस प्रयोग का भाव है:
    (क) पाँच हज़ार रुपये माँगना
    (ख) किसी बड़े मनसबदार जैसी शान और रोब से
    (ग) डरते-डरते
    (घ) बार-बार मना करते हुए

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    'पेशानी पर मँजे हुए कारीगर के तेवर' में 'पेशानी' का अर्थ है:
    (क) परेशानी
    (ख) माथा
    (ग) पेशा
    (घ) पसीना

  5. (5) · 1 mark · Assertion-reason

    कथन (A): लेखिका ने मियाँ से झिझकते हुए समय माँगा। कारण (R): मियाँ ने पहली ही नज़र में उन्हें पत्रकार समझकर डाँट दिया था।
    (क) A और R दोनों सही हैं, R, A की सही व्याख्या है
    (ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है
    (ग) A सही, R गलत
    (घ) A गलत, R सही

Show the answersAnswers
  1. (ख) भोलेपन के भीतर छिपी चतुराई
  2. (ख) उन्हें ग्राहक समझा
  3. (ख) किसी बड़े मनसबदार जैसी शान और रोब से
  4. (ख) माथा
  5. (ग) A सही, R गलत (मियाँ ने पहले उन्हें ग्राहक समझा था; पत्रकार होने का शक बाद में किया)

Extract 2: गद्यांश 2: बादशाह के लिए अनोखी चीज़

हमारे बुज़ुर्गों से बादशाह सलामत ने यूँ कहा—मियाँ नानबाई, कोई नई चीज़ खिला सकते हो?’ ‘हुक्म कीजिए, जहाँपनाह!’ बादशाह सलामत ने फ़रमाया—‘कोई ऐसी चीज़ बनाओ जो न आग से पके, न पानी से बने।’

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: इससे ठीक पहले मियाँ घूरकर कहते हैं—‘बहुतेरे, पर खानदानी नहीं’—और फिर यह किस्सा सुनाते हैं।) 'बहुतेरे, पर खानदानी नहीं'—मियाँ यह किस प्रश्न के उत्तर में कहते हैं?
    (क) क्या आपके बेटे हैं?
    (ख) क्या यहाँ और भी नानबाई हैं?
    (ग) आपने हुनर कहाँ सीखा?
    (घ) बादशाह का नाम क्या था?

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    बादशाह ने नानबाई से कैसी चीज़ बनाने को कहा?
    (क) जो सबसे मीठी हो
    (ख) जो न आग से पके, न पानी से बने
    (ग) जो छप्पन तरह की हो
    (घ) जो पापड़ से महीन हो

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: किस्से के अंत में मियाँ बताते हैं कि वह चीज़ बनी और बादशाह ने उसे खूब खाया और सराहा।) इस प्रसंग को सुनाने के पीछे मियाँ का मुख्य उद्देश्य है:
    (क) बादशाह की आलोचना करना
    (ख) अपने खानदान के हुनर की श्रेष्ठता जताना
    (ग) नई रोटी की विधि बताना
    (घ) लेखिका को डराना

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: किस्सा शुरू करने से पहले मियाँ कहते हैं—‘दिमाग में चक्कर काट गई है एक बात’।) 'दिमाग में चक्कर काट गई है एक बात' वाक्य की विशेषता है:
    (क) शब्द-क्रम बदलकर बोलचाल का प्रवाह
    (ख) तत्सम शब्दों की अधिकता
    (ग) प्रश्नवाचक वाक्य
    (घ) अंग्रेज़ी शब्दों का प्रयोग

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    इस प्रसंग के आगे मियाँ उस पकवान के बारे में क्या करते हैं?
    (क) उसकी पूरी विधि बताते हैं
    (ख) लेखिका को खिलाते हैं
    (ग) उसका नाम बताने से इनकार कर देते हैं
    (घ) कहते हैं कि वह कभी बना ही नहीं

Show the answersAnswers
  1. (ख) क्या यहाँ और भी नानबाई हैं?
  2. (ख) जो न आग से पके, न पानी से बने
  3. (ख) अपने खानदान के हुनर की श्रेष्ठता जताना
  4. (क) शब्द-क्रम बदलकर बोलचाल का प्रवाह
  5. (ग) उसका नाम बताने से इनकार कर देते हैं

कृष्णा सोबती – मियाँ नसीरुद्दीन: exam-level solved questions

Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: पत्रकारों के बारे में मियाँ की राय · 2 marks · Short answerExam level

मियाँ नसीरुद्दीन ने पत्रकारों के बारे में क्या राय प्रकट की और क्यों? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. राय: अखबार बनाने वाले और पढ़ने वाले दोनों निठल्ले; पूछताछ 'खोजियों की खुराफ़ात'।
  2. कारण: वे हाथ के काम को ही असली काम मानते हैं।

Answer: मियाँ को लगा कि लेखिका कहीं अखबार वाली तो नहीं। उन्होंने पूछताछ को 'खोजियों की खुराफ़ात' कहा और अखबार बनाने तथा पढ़ने वाले, दोनों को निठल्ला बताया, क्योंकि वे हाथ से मेहनत करने वाले कामकाजी आदमी को ही उपयोगी मानते थे।

Example 2: 'वक्त से वक्त को किसी ने मिलाया है' · 2 marks · Short answerHarder exam level

बादशाह का नाम पूछे जाने पर मियाँ ने कहा, 'वक्त से वक्त को किसी ने मिलाया है आज तक!' इस उत्तर में छिपी उनकी चतुराई स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लेखिका नाम जानकर बात को इतिहास के समय से मिलाना चाहती थीं।
  2. मियाँ ने दार्शनिक-से वाक्य से प्रश्न टाल दिया और उलटे लेखिका की खिल्ली उड़ाई।

Answer: लेखिका बादशाह का नाम जानकर बुज़ुर्गों की बात को इतिहास के समय से मिलाना चाहती थीं। मियाँ के पास शायद कोई ठोस प्रमाण नहीं था, इसलिए उन्होंने एक दार्शनिक-सा वाक्य बोलकर प्रश्न टाल दिया और उलटे लेखिका की ही खिल्ली उड़ा दी।

Example 3: 'तालीम की तालीम' · 3 marks · Short answerHarder exam level

'तालीम की तालीम भी बड़ी चीज़ होती है'—मियाँ ने यह बात किन उदाहरणों से समझाई? इसका आशय स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मदरसे का उदाहरण: कच्ची, पक्की और दूसरी जमात छोड़कर सीधे तीसरी में बैठना।
  2. भट्ठी का उदाहरण: बर्तन धोना, भट्ठी बनाना, आँच देना।
  3. आशय: सीखने का क्रम सीखना भी शिक्षा है।

Answer: मियाँ ने पहले मदरसे का उदाहरण दिया कि जो बच्चा कच्ची, पक्की और दूसरी जमात छोड़कर सीधे तीसरी में जा बैठे, उसकी नींव कमज़ोर रहती है। फिर कहा कि बर्तन धोना, भट्ठी बनाना और आँच देना सीखे बिना कोई सीधे नानबाई नहीं बन सकता। आशय है कि हुनर को सही क्रम से, सीढ़ी-दर-सीढ़ी सीखना भी उतनी ही बड़ी शिक्षा है।

Example 4: मियाँ नसीरुद्दीन का चरित्र · 3 marks · Short answerExam level

मियाँ नसीरुद्दीन के चरित्र की तीन विशेषताएँ पाठ के उदाहरणों सहित लिखिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. हुनर पर गर्व: 'बहुतेरे, पर खानदानी नहीं'।
  2. हाज़िरजवाब: 'झूठ से रोटी पकेगी?'
  3. भीतर की कसक: 'उतर गए वे ज़माने'।

Answer: मियाँ को अपने खानदानी हुनर पर बड़ा गर्व है; वे कहते हैं कि नानबाई तो बहुत हैं, पर खानदानी नहीं। वे हाज़िरजवाब हैं; कहावत की सच्चाई पर टोकने पर पूछते हैं कि क्या झूठ से रोटी पकेगी। उनके भीतर एक कसक भी है: अंत में वे कहते हैं कि पकाने-खाने की कद्र करने वाले ज़माने चले गए।

Example 5: मियाँ का अकेलापन · 3 marks · Short answerHOTS / competency

ऊपर से हाज़िरजवाब और रोबीले दिखने वाले मियाँ नसीरुद्दीन के भीतर के अकेलेपन के कौन-से संकेत पाठ में मिलते हैं? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. उम्र सत्तर; पिता अस्सी पर गए, 'हमें इतनी मोहलत मिले, न मिले'।
  2. भट्ठी कारीगर बब्बन मियाँ के भरोसे; परिवार के प्रश्न पर चेहरे पर दबा अंधड़।
  3. अंत: 'उतर गए वे ज़माने'।

Answer: मियाँ सत्तर के हो चुके हैं और कहते हैं कि पिता तो अस्सी पर गए, उन्हें इतनी मोहलत मिले या न मिले। भट्ठी वे अपने कारीगर बब्बन मियाँ से सुलगवाते हैं; परिवार की बात आते ही उनके चेहरे पर दबे अंधड़ के आसार दिखते हैं। अंत में कद्रदानों के खो जाने की कसक भी उनके भीतर के अकेलेपन की ओर इशारा करती है।

Example 6: बोलने देना: शब्दचित्र की ताकत · 2 marks · Short answerHOTS / competency

लेखिका ने मियाँ के बारे में अपनी ओर से टिप्पणियाँ कम की हैं और उन्हें अधिक बोलने दिया है। इससे शब्दचित्र को क्या लाभ हुआ? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पात्र अपने ही शब्दों और लहजे से प्रकट होता है।
  2. पाठक स्वयं गर्व, खीज और कसक को पहचानता है; चित्र विश्वसनीय बनता है।

Answer: मियाँ अपनी ठेठ, उर्दू-मिश्रित बोली में बोलते हैं, इसलिए उनका गर्व, खीज, हाज़िरजवाबी और कसक बिना किसी व्याख्या के सामने आ जाती है। पाठक स्वयं उनके स्वभाव का अनुमान लगाता है, जिससे शब्दचित्र अधिक जीवंत और विश्वसनीय बन जाता है।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

मियाँ नसीरुद्दीन का चरित्र-चित्रण (लगभग 60 शब्द, 3 अंक) (3 marks)

StepMarks
तीन विशेषताएँ (गर्व, हाज़िरजवाबी, कसक या व्यावहारिकता)1.5
हर विशेषता के लिए पाठ का कथन या प्रसंग1
भाषा की शुद्धता और शब्द-सीमा0.5

'काम करने से आता है, नसीहतों से नहीं' का आशय (लगभग 40 शब्द, 2 अंक) (2 marks)

StepMarks
आशय: अनुभव और अभ्यास से हुनर आता है1
पाठ का उदाहरण (भट्ठी के काम, पिता के ठीये पर बैठना)1

Where students lose marks in कृष्णा सोबती – मियाँ नसीरुद्दीन

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: पाठ को कहानी कहना

    यह 'हम-हशमत' संग्रह से लिया गया शब्दचित्र है; विधा पूछे जाने पर 'कहानी' लिखना गलत है।

    Do this: विधा: शब्दचित्र (व्यक्ति-चित्र), संवाद-शैली में।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: यह लिखना कि मियाँ ने बादशाह वाले पकवान का नाम बताया

    मियाँ ने साफ़ कहा, 'यह हम न बतावेंगे'।

    Do this: प्रसंग का क्रम याद रखें: चीज़ बनी, बादशाह ने सराही, नाम नहीं बताया।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: मियाँ के चरित्र में केवल अच्छाइयाँ या केवल अहंकार लिखना

    उनके व्यक्तित्व में गर्व, हाज़िरजवाबी, टालमटोल और भीतर की कसक, सब हैं।

    Do this: कम-से-कम एक सकारात्मक और एक मानवीय कमज़ोरी, दोनों प्रमाण सहित।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: पिता और दादा के नाम आपस में बदल देना

    मियाँ कल्लन दादा थे, मियाँ बरकत शाही पिता।

    Do this: 'क-ब-न' क्रम याद रखें।

    Usually costs: आधा अंक

  • Mistake: उत्तर में उर्दू शब्दों के गलत अर्थ देना

    पेशानी (माथा), इल्म (ज्ञान), मरहूम (दिवंगत), मज़मून (विषय) पर बहुविकल्पी प्रश्न बनते हैं।

    Do this: पाठ के कठिन शब्दों की छोटी सूची बनाकर दोहराएँ।

    Usually costs: 1 अंक

Practice questions on कृष्णा सोबती – मियाँ नसीरुद्दीन

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQExam level

    मियाँ नसीरुद्दीन किस काम के लिए मशहूर थे?
    (क) सेवइयाँ बनाने के लिए
    (ख) छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए
    (ग) शाही बिरयानी के लिए
    (घ) मिठाइयों के लिए

    Hint

    लेखिका को दुकान पर क्या पता चला?

    Answer

    (ख) छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए

  2. Q2 · 1 mark · Very short answerExam level

    मियाँ नसीरुद्दीन अपने कारीगरों को कितनी मजूरी देते थे?

    Hint

    आटा और मैदा अलग-अलग।

    Answer

    दो रुपये मन आटे की और चार रुपये मन मैदे की मजूरी, गिनकर।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level

    मियाँ नसीरुद्दीन ने नानबाई का हुनर किसी नगीनासाज़ या रँगरेज़ से सीखने की बात को क्यों हास्यास्पद माना? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    हर हुनर का अपना इल्म; खानदानी पेशा।

    Answer

    उनके अनुसार हर कारीगरी का अपना अलग इल्म होता है; नानबाई का हुनर दूसरे कारीगर नहीं सिखा सकते। यह उनका खानदानी पेशा था, जो उन्होंने अपने पिता से ही सीखा और पिता के बाद उन्हीं के ठीये पर बैठकर सँभाला।

  4. Q4 · 1 mark · MCQHarder exam level

    कथन (A): मियाँ नसीरुद्दीन ने बादशाह के लिए बने पकवान का नाम नहीं बताया। कारण (R): वे लेखिका से छुटकारा पाना चाहते थे और उन्हें रोटियों में कोई रुचि नहीं थी।
    (क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
    (ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
    (ग) A सही, R गलत
    (घ) A गलत, R सही

    Hint

    क्या मियाँ को अपनी रोटियों में रुचि नहीं थी?

    Answer

    (ग) A सही, R गलत (रोटियों में तो उनकी गहरी रुचि थी; उन्होंने पकवान का रहस्य बनाए रखने के लिए नाम नहीं बताया)

  5. Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency

    मान लीजिए मियाँ नसीरुद्दीन अपनी दुकान और खानदानी हुनर को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए आपसे सलाह माँगते हैं। पाठ में दिखी उनकी शक्तियों और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए दो ठोस सुझाव दीजिए। (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    शक्ति: छप्पन किस्म की रोटियाँ, करके सिखाने की पद्धति; समस्या: कद्रदानों की कमी, उत्तराधिकारी का अभाव।

    Answer

    मियाँ की शक्ति छप्पन किस्म की रोटियों का हुनर और 'करके सीखने' वाली पद्धति है, जबकि समस्या कद्रदानों और उत्तराधिकारी की कमी है। पहला सुझाव: बब्बन मियाँ जैसे कारीगरों को क्रम से पूरा हुनर सिखाकर उत्तराधिकारी तैयार करें। दूसरा: तुनकी, शीरमाल जैसी दुर्लभ रोटियों के बारे में ग्राहकों को बताकर और खिलाकर नए कद्रदान बनाएँ।

  6. Q6 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    'निकाली तंदूर से—निगली और हज़म!' मियाँ के इस कथन में आज की किस प्रवृत्ति पर व्यंग्य है? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    जल्दबाज़ी, स्वाद और मेहनत की अनदेखी।

    Answer

    इसमें जल्दबाज़ी वाली जीवन-शैली पर व्यंग्य है। लोग भोजन को केवल पेट भरने की चीज़ मानकर जल्दी-जल्दी खा जाते हैं; रोटी बनाने वाले की मेहनत और कारीगरी की सराहना कोई नहीं करता, इसलिए कलाकार नानबाई दुखी है।

  7. Q7 · 2 marks · Short answerHarder exam level

    मियाँ नसीरुद्दीन की भाषा की दो विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए। (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    उर्दू शब्द, बोलचाल के क्रिया-रूप, बदला हुआ शब्द-क्रम।

    Answer

    उनकी भाषा में उर्दू शब्दों की भरमार है, जैसे इल्म, वालिद, मरहूम, नसीहत। दूसरे, वे ठेठ बोलचाल के रूप बोलते हैं, जैसे 'बतावेंगे', 'लेवेंगे', 'इत्ता', और शब्द-क्रम बदलकर बात पर ज़ोर देते हैं: 'निकाल लेंगे वक्त थोड़ा'।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.पाठ की लेखिका कौन हैं?Show answer

    कृष्णा सोबती।

  2. 2.मियाँ नसीरुद्दीन की दुकान कहाँ थी?Show answer

    दिल्ली में जामा मस्जिद के पास मटियामहल के गढ़ैया मुहल्ले में।

  3. 3.मियाँ के दादा का नाम क्या था?Show answer

    आला नानबाई मियाँ कल्लन।

  4. 4.मियाँ के कारीगर का नाम क्या था?Show answer

    बब्बन मियाँ।

  5. 5.मियाँ की उम्र कितनी थी?Show answer

    सत्तर वर्ष।

  6. 6.मियाँ के अनुसार कौन-सी रोटी पापड़ से भी महीन होती है?Show answer

    तुनकी।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप बता सकते हैं कि यह रचना शब्दचित्र क्यों है और किस संग्रह से ली गई है?
  • क्या आप मियाँ की तीन पीढ़ियों के नाम क्रम से लिख सकते हैं?
  • क्या आप 'तालीम की तालीम' को मदरसे और भट्ठी के उदाहरणों से समझा सकते हैं?
  • क्या आप बादशाह वाले प्रसंग और नाम पूछने पर मियाँ की खीज का कारण बता सकते हैं?
  • क्या आप मियाँ का चरित्र-चित्रण और अंत की कसक का अर्थ लिख सकते हैं?

कृष्णा सोबती – मियाँ नसीरुद्दीन: frequently asked questions

'मियाँ नसीरुद्दीन' किस विधा की रचना है?

यह शब्दचित्र है, जो कृष्णा सोबती के संग्रह 'हम-हशमत' से लिया गया है। इसमें एक नानबाई के व्यक्तित्व, रुचियों और स्वभाव को बातचीत के माध्यम से उभारा गया है।

'खानदानी नानबाई कुएँ में भी रोटी पका सकता है'—पाठ में यह कहावत किस प्रसंग में आती है?

बादशाह के लिए बने अनोखे पकवान का नाम बताने के बजाय मियाँ यह कहावत सुनाते हैं और कहते हैं कि यह उनके बुज़ुर्गों के करतब पर ही पूरी उतरती है; इससे वे अपने खानदानी हुनर की श्रेष्ठता जताते हैं।

पाठ का केंद्रीय संदेश क्या है?

हर पेशा सम्मान का पात्र है; हुनर करके और क्रम से सीखा जाता है, और कारीगरी को जीवित रखने के लिए उसकी कद्र करने वाले लोग भी चाहिए।

मियाँ की बातों में 'खानदानी' शब्द पर इतना ज़ोर क्यों है?

खानदानी होना उनकी पहचान और गर्व का आधार है; इसी से वे अपने को बाकी नानबाइयों से अलग और श्रेष्ठ मानते हैं।

Based on: CBSE हिंदी (आधार) (302) पाठ्यक्रम, कक्षा 11-12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 1 (Reprint 2026-27), पाठ 2: मियाँ नसीरुद्दीन