विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त): कर्ज़न पर व्यंग्य और सत्ता का अहंकार
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
विदाई-संभाषण में शिवशंभु विदा होते वायसराय लॉर्ड कर्ज़न को संबोधित करते हैं। ऊपर से यह करुण विदाई जैसा लगता है, पर हर वाक्य में व्यंग्य है: दिल्ली-दरबार की शान, बंग-भंग की ज़िद, प्रजा की विनती ठुकराना और फ़ौजी अफ़सर के प्रश्न पर अपमानजनक इस्तीफ़ा। लेखक बताते हैं कि सच्चा शासक प्रजा की बात सुनता है।
Understand विदाई-संभाषण: कर्ज़न पर व्यंग्य और सत्ता का अहंकार
व्यंग्य की शैली। भाषण विदाई का है, पर उसमें तारीफ़ के बहाने आलोचना है। शिवशंभु कहते हैं कि कर्ज़न और भारतवासियों के बीच कोई तीसरी शक्ति भी है, जिस पर किसी का वश नहीं। वे अपनी कमज़ोर गाय का दृष्टांत देते हैं जो सींग मारने वाली गाय के जाने पर भी दिन भर भूखी खड़ी रही, जिससे दिखाया जाता है कि भारतीय बिछड़ते समय वैर भूल जाते हैं।
कर्ज़न के शासन का नाटक। बंबई में उतरकर कर्ज़न ने कहा था कि वे भारत को ऐसा कर जाएँगे कि आगे के लाटों को वर्षों कुछ न करना पड़े, पर उलटे वे अशांति छोड़ चले। दिल्ली-दरबार में उनकी शान बादशाह के भाई से भी ऊँची थी: सोने की कुर्सी, सबसे ऊँचा हाथी और सबसे पहले सलाम। पर फ़ौजी अफ़सर की नियुक्ति के प्रश्न पर वे जंगी लाट से हार गए और इस्तीफ़ा मंज़ूर हो गया।
बंग-भंग और ज़िद। लेखक पूछते हैं कि क्या आँख मूँदकर हुक्म चलाना और प्रजा की बात न सुनना ही शासन है? नादिरशाह ने भी आसिफ़जाह की प्रार्थना पर कत्लेआम रोक दिया था, पर कर्ज़न ने आठ करोड़ प्रजा की विनती ठुकराकर बंगाल का विभाजन किया।
संदेश। पाठ आदर्श शासन की कसौटी बताता है: प्रजा की सुनना। साथ ही यह भी कि घमंड से आदमी जितना ऊँचा चढ़ता है, उतना ही नीचे गिरता है। पाठ के अन्य बिंदु अध्याय-पृष्ठ पर हैं।
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
आपके और यहाँ के निवासियों के बीच में कोई तीसरी शक्ति और भी है
शिवशंभु: विदाई के क्षण में।
नियति की शक्ति का संकेत, जो शासक के घमंड पर भारी है।
कितने ऊँचे होकर आप कितने नीचे गिरे!
शिवशंभु: इस्तीफ़े के प्रसंग में।
सत्ता के अहंकार के पतन पर व्यंग्य।
नादिर से भी बढ़कर आपकी जिद्द है।
शिवशंभु: बंग-भंग पर।
कर्ज़न की हठधर्मिता पर तीखी टिप्पणी।
विदाई-संभाषण: कर्ज़न पर व्यंग्य और सत्ता का अहंकार: key facts
- व्यंग्य के बिंदु
- शान
- घमंड
- बंग-भंग की ज़िद
- इस्तीफ़ा
- चार प्रसंग।
- तीसरी शक्ति
- कर्ज़न
- भारतवासी
- नियति
- दोनों से परे शक्ति।
- तुलना
- नादिरशाह | कर्ज़न
- नादिर ने सुनी, कर्ज़न ने नहीं।
विदाई-संभाषण: कर्ज़न पर व्यंग्य और सत्ता का अहंकार in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
पद की हनक
मान लीजिए किसी संस्था का अध्यक्ष सबकी सलाह ठुकराकर अपनी ज़िद पर नियम बदलता है और जब सदस्य इस्तीफ़ा माँगते हैं तो वह खुद इस्तीफ़ा देकर भी कहता है कि मैं तो सेवा कर रहा था।
यह स्थिति पाठ के किस भाव से मिलती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- सलाह की अनसुनी।
- ज़िद और अहंकार।
- अंत में अपमानजनक विदाई।
Answer: यह कर्ज़न की उस ज़िद और अहंकार से मिलती है, जिसमें प्रजा की विनती अनसुनी हुई और अंत में उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा।
Memory hook: ज़िद का अंत झुकना।
Tricks to remember विदाई-संभाषण: कर्ज़न पर व्यंग्य और सत्ता का अहंकार
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
श-घ-ब-इ
शान, घमंड, बंग-भंग, इस्तीफ़ा।
Use it when: व्यंग्य के चार प्रसंग।
ऊँचे से नीचे
जितना ऊँचा, उतना गहरा पतन।
Use it when: पाठ की सीख।
विदाई-संभाषण: कर्ज़न पर व्यंग्य और सत्ता का अहंकार: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: स्रोत · 1 mark · MCQBoard level
विदाई-संभाषण किस रचना का अंश है?
(क) शिवशंभु के चिट्ठे (ख) भारत भारती (ग) गोदान (घ) निर्मला
Try it first, then show the solutionSolution
- यह बालमुकुंद गुप्त की कृति शिवशंभु के चिट्ठे का अंश है (1 अंक)।
Answer: (क)
Example 2: तीसरी शक्ति · 2 marks · Short answerBoard level
"आपके और यहाँ के निवासियों के बीच में कोई तीसरी शक्ति और भी है" का क्या आशय है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- तीसरी शक्ति नियति या भाग्य है (1)।
- कर्ज़न का शासन अचानक समाप्त हुआ, किसी का वश नहीं (1)।
Answer: लेखक का आशय है कि कर्ज़न और भारतवासियों के बीच नियति जैसी कोई तीसरी शक्ति भी है, जिस पर किसी का वश नहीं। कर्ज़न का शासन इतनी जल्दी समाप्त होगा, यह किसी ने नहीं सोचा था।
Example 3: कर्ज़न की शान · 3 marks · Short answerHarder board level
दिल्ली-दरबार में कर्ज़न की शान का वर्णन करते हुए लेखक क्या व्यंग्य करते हैं? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- शान: सोने की कुर्सी, ऊँचा हाथी, पहला सलाम (1)।
- बादशाह के भाई से भी ऊँची शान (1)।
- अंत में अपमानजनक इस्तीफ़ा (1)।
Answer: लेखक बताते हैं कि दिल्ली-दरबार में कर्ज़न की शान बादशाह के भाई से भी ऊँची थी: सोने की कुर्सी, सबसे ऊँचा हाथी और सबसे पहले सलाम। पर फ़ौजी अफ़सर के प्रश्न पर उन्हें हारकर इस्तीफ़ा देना पड़ा। इस अंतर से लेखक उनके घमंड पर व्यंग्य करते हैं।
Example 4: गद्यांश · 5 marks · Source-basedHarder board level
पाठ के भाव पर आधारित अंश (अपने शब्दों में): लेखक पूछते हैं कि क्या आँख मूँदकर मनमाने हुक्म चलाना और प्रजा की बात न सुनना ही शासन है। नादिरशाह ने भी प्रार्थना पर कत्लेआम रोक दिया था, पर कर्ज़न ने आठ करोड़ प्रजा की विनती ठुकराकर बंगाल का विभाजन किया।
(i) लेखक किस पर प्रश्न उठाते हैं
(क) कर्ज़न के शासन-ढंग पर (ख) किसान पर (ग) शिक्षा पर (घ) खेती पर
(ii) नादिरशाह का उदाहरण क्यों
(क) तुलना से कर्ज़न की हठ दिखाने के लिए (ख) उसकी प्रशंसा के लिए (ग) युद्ध के लिए (घ) कविता के लिए
(iii) प्रजा की संख्या बताई गई है
(क) आठ करोड़ (ख) एक करोड़ (ग) पचास लाख (घ) दो करोड़
(iv) बंगाल के विभाजन को कहा गया है
(क) कर्ज़न की ज़िद (ख) जनता की माँग (ग) बादशाह की इच्छा (घ) संयोग
(v) अंश का मूल भाव है
(क) आदर्श शासक को प्रजा की सुननी चाहिए (ख) शासक को कठोर होना चाहिए (ग) विभाजन अच्छा है (घ) राजा को सुखी रहना चाहिए
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रत्येक उप-प्रश्न 1 अंक का है।
Answer: (i) (क); (ii) (क); (iii) (क); (iv) (क); (v) (क)।
Example 5: व्यंग्य का मूल्यांकन · 3 marks · Short answerHOTS / competency
"विदाई-संभाषण ऊपर से प्रशंसा, भीतर से आलोचना है।" इस कथन को पाठ के उदाहरण से परखिए। (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- ऊपरी स्वर: विदाई की करुणा (1)।
- भीतर की आलोचना: घमंड, ज़िद (1)।
- निष्कर्ष (1)।
Answer: पाठ विदाई के करुण क्षण और गाय के दृष्टांत से आरंभ होता है, जो सहृदयता दिखाता है। पर आगे लेखक कर्ज़न की शान, बंग-भंग की ज़िद और अपमानजनक इस्तीफ़े की खिल्ली उड़ाते हैं। इस प्रकार ऊपर से विनम्र और भीतर से तीखा व्यंग्य है।
Where students lose marks in विदाई-संभाषण: कर्ज़न पर व्यंग्य और सत्ता का अहंकार
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: पाठ को कर्ज़न की प्रशंसा समझना
पाठ व्यंग्य है।
Wrong working
लेखक कर्ज़न की तारीफ़ करते हैं।
Right working
लेखक विदाई के बहाने कर्ज़न पर व्यंग्य करते हैं।
Do this: व्यंग्य शब्द लिखें।
Usually costs: 2 अंक
Mistake: शिवशंभु को कर्ज़न लिखना
शिवशंभु वक्ता हैं, कर्ज़न संबोधित।
Wrong working
शिवशंभु ने इस्तीफ़ा दिया।
Right working
कर्ज़न ने इस्तीफ़ा दिया; शिवशंभु ने भाषण दिया।
Do this: पात्रों को अलग करें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: उदाहरण बिना उत्तर
व्यंग्य के उदाहरण चाहिए।
Wrong working
कर्ज़न घमंडी थे।
Right working
दिल्ली-दरबार की शान और बंग-भंग की ज़िद से घमंड दिखता है।
Do this: एक उदाहरण दें।
Usually costs: 1-2 अंक
Exam tips
- व्यंग्य के चार प्रसंग (शान, घमंड, बंग-भंग, इस्तीफ़ा) याद रखें।
- गाय के दृष्टांत से पाठ का आरंभ समझाएँ।
- नादिरशाह की तुलना का उल्लेख करें।
- पुस्तक शिवशंभु के चिट्ठे और लेखक का नाम याद रखें।
- 40 और 60 शब्दों की सीमा रखें।
Practice questions on विदाई-संभाषण: कर्ज़न पर व्यंग्य और सत्ता का अहंकार
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
कर्ज़न ने किस प्रांत का विभाजन किया?
(क) बंगाल (ख) पंजाब (ग) बिहार (घ) गुजरातHint
बंग-भंग शब्द देखें।
Answer
(क)
Q2 · 3 marks · Short answerHarder board level
शिवशंभु की गाय का दृष्टांत क्यों दिया गया है? (लगभग 60 शब्द)
Hint
सींग मारने वाली गाय के जाने पर कमज़ोर गाय की उदासी।
Answer
शिवशंभु की कमज़ोर गाय सींग मारने वाली गाय के चले जाने पर भी दिन भर भूखी खड़ी रही। यह दृष्टांत बताता है कि भारतवासी बिछड़ते समय वैर भूलकर कोमल हो जाते हैं। इसी भावुकता के साथ लेखक कर्ज़न की विदाई पर बात आरंभ करते हैं।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level
नादिरशाह और कर्ज़न की तुलना का क्या उद्देश्य है? (लगभग 60 शब्द)
Hint
प्रार्थना सुनना बनाम ठुकराना।
Answer
नादिरशाह ने आसिफ़जाह की प्रार्थना पर कत्लेआम रोक दिया था, जबकि कर्ज़न ने आठ करोड़ प्रजा की विनती ठुकरा दी। इस तुलना से लेखक कर्ज़न की ज़िद को नादिरशाह से भी अधिक कठोर दिखाते हैं और व्यंग्य करते हैं।
Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level
कथन (A): लेखक के अनुसार कर्ज़न का शासन-काल घोर दुखांत नाटक रहा। कारण (R): वे अशांति छोड़कर गए।
(क) A और R सही, R व्याख्या है (ख) A सही, R गलत (ग) A गलत, R सही (घ) दोनों गलतHint
बंबई में उतरकर कही बात बनाम परिणाम।
Answer
(क)
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
आज के शासकों के लिए इस पाठ से क्या शिक्षा मिलती है? अपने शब्दों में लिखिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
प्रजा की बात सुनना और अहंकार का पतन।
Answer
पाठ सिखाता है कि शासक को प्रजा की बात सुननी चाहिए और अपनी ज़िद पर अड़े नहीं रहना चाहिए। कर्ज़न की तरह घमंड रखने वाला जितना ऊँचा उठता है, उतना ही नीचे गिरता है। आज के शासकों के लिए भी विनम्रता और जनहित की सुनवाई आवश्यक है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.विदाई-संभाषण के लेखक कौन हैं?Show answer
बालमुकुंद गुप्त।
2.वक्ता का नाम क्या है?Show answer
शिवशंभु।
3.संबोधित व्यक्ति कौन है?Show answer
लॉर्ड कर्ज़न।
4.कर्ज़न ने किस प्रांत का विभाजन किया?Show answer
बंगाल का।
5.पाठ किस रचना का अंश है?Show answer
शिवशंभु के चिट्ठे।
विदाई-संभाषण: कर्ज़न पर व्यंग्य और सत्ता का अहंकार: frequently asked questions
पाठ की शैली क्या है?
विदाई के रूप में व्यंग्य।
कर्ज़न कितनी बार वायसराय रहे?
दो बार: 1899-1904 और 1904-1905।
आदर्श शासन की कसौटी क्या है?
प्रजा की बात सुनना।