मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई: Class 11 व्याख्या और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई' मीरा का पद है, जिसमें वे मोर-मुकुटधारी कृष्ण को ही अपना पति मानकर उनके प्रति अनन्य प्रेम प्रकट करती हैं। कृष्ण-प्रेम के लिए उन्होंने कुल की मर्यादा और लोक-लाज छोड़ दी, आँसुओं से प्रेम की बेल सींची और संसार के मोह को छाछ की तरह त्याग दिया।
What मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई is about
मीरा भक्तिकाल की सगुण धारा की प्रमुख कृष्णभक्त कवयित्री हैं। संत रैदास उनके गुरु माने जाते हैं। उन्होंने कृष्ण को आराध्य और पति माना और लोक-लाज तथा कुल-मर्यादा के नाम पर लगाए गए बंधनों का खुलकर विरोध किया; इसलिए उन्हें अपने युग में स्त्री-मुक्ति की आवाज़ भी कहा जाता है। उनकी भाषा मूलतः राजस्थानी है, जिसमें कहीं-कहीं ब्रजभाषा का प्रभाव है।
2026-27 के पाठ्यक्रम में मीरा का केवल पहला पद 'मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई' है; दूसरा पद 'पग घुँघरू बाँधि मीरा नाची' हटा दिया गया है। यह पद नरोत्तम दास स्वामी द्वारा संपादित 'मीराँ मुक्तावली' से लिया गया है।
पद के मुख्य भाव:
- गिरधर गोपाल के प्रति अनन्यता: 'दूसरो न कोई'
- कुल की कानि (मर्यादा) और लोक-लाज का त्याग
- आँसुओं से सींची प्रेम-बेल और आनंद-फल
- दूध-मथानी का रूपक: सार (घी) लिया, असार (छाछ) छोड़ा
- भक्तों को देखकर प्रसन्नता, संसार को देखकर दुख, और उद्धार की प्रार्थना
कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा में काव्य खंड से पठित काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, लगभग 40 शब्दों के (2 अंक) और लगभग 60 शब्दों के (3 अंक) प्रश्न आते हैं।
Weightage: खंड ग (आरोह भाग 1 एवं वितान भाग 1) के 80 में से 40 अंक हैं; काव्य खंड से पठित काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5), तीन में से दो प्रश्न लगभग 60 शब्दों में (3×2) और तीन में से दो प्रश्न लगभग 40 शब्दों में (2×2) आते हैं।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27, कक्षा 11 परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम विनिर्देशन
मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
प्रसंग: इस पद में मीरा ने कृष्ण के प्रति अपनी अनन्य भक्ति व्यक्त की है और व्यर्थ के कामों में उलझे संसार के प्रति दुख प्रकट किया है।
भावार्थ: मीरा कहती हैं कि मेरे तो केवल गिरधर गोपाल (पर्वत उठाने वाले, गायों के पालक कृष्ण) हैं, दूसरा कोई नहीं। जिनके सिर पर मोर-मुकुट है, वही मेरे पति हैं। मैंने कुल की मर्यादा छोड़ दी है; अब कोई मेरा क्या कर लेगा? संतों के पास बैठ-बैठकर मैंने लोक-लाज भी खो दी है, अर्थात् समाज क्या कहेगा, इसकी चिंता अब नहीं रही।
मीरा कहती हैं कि मैंने आँसुओं के जल से सींच-सींचकर प्रेम की बेल बोई है। अब वह बेल फैल गई है और उस पर आनंद के फल लगने लगे हैं; यानी विरह के आँसुओं से पोषित प्रेम अब आत्मिक आनंद दे रहा है। मैंने बड़े प्रेम से दूध की मथानी में दूध बिलोया, दही को मथकर घी निकाल लिया और छाछ फेंक दी। इस रूपक का अर्थ है कि संसार रूपी दूध को मथकर उन्होंने भक्ति रूपी सार (घी) ग्रहण किया और सांसारिक मोह रूपी सारहीन अंश (छाछ) त्याग दिया।
भक्तों को देखकर मीरा प्रसन्न होती हैं, पर संसार को माया-मोह और व्यर्थ के कामों में उलझा देखकर रो पड़ती हैं। अंत में वे स्वयं को कृष्ण की दासी कहकर प्रार्थना करती हैं: हे लाल गिरधर, अब मेरा उद्धार करो।
निष्कर्ष: पद में दाम्पत्य भाव की अनन्य भक्ति, सामाजिक बंधनों के प्रति विद्रोह और सांसारिक मोह से वैराग्य, तीनों एक साथ हैं।
Themes and message
अनन्य भक्ति (दाम्पत्य भाव)
मीरा कृष्ण को ही पति मानती हैं; उनके जीवन में किसी दूसरे के लिए स्थान नहीं।
From the text: 'मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई'
सामाजिक बंधनों का त्याग
कुल-मर्यादा और लोक-लाज के नाम पर स्त्री पर लगे बंधनों को मीरा ने भक्ति के लिए ठुकरा दिया।
From the text: 'छांड़ि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई?'
विरह-वेदना से उपजा आनंद
प्रेम की बेल आँसुओं से सींची गई, पर अब उस पर आनंद के फल लगे हैं; दुख साधना बनकर सुख देता है।
From the text: 'अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी'
सार-असार का विवेक
जीवन को मथकर मीरा ने भक्ति का सार लिया और सांसारिक मोह छोड़ दिया।
From the text: 'दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी'
The speaker and the people in the poem
मीरा (कवयित्री-वक्ता)
कृष्ण की अनन्य भक्त, पद की वक्ता।
- अनन्य प्रेम और समर्पण वाली
- निर्भीक और दृढ़निश्चयी
- रूढ़ियों का विरोध करने वाली
- विवेकशील: सार-असार पहचानने वाली
'कहा करिहै कोई?' कहकर समाज की परवाह छोड़ती हैं और संसार के मोह को छाछ की तरह त्याग देती हैं।
गिरधर गोपाल (कृष्ण)
मीरा के आराध्य और पति।
- मोर-मुकुटधारी सगुण रूप
- पर्वत उठाने वाले (गिरधर), गायों के पालक (गोपाल)
'जा के सिर मोर-मुकुट, मेरो पति सोई'
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| सांगरूपक | 'अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी... आणंद-फल होयी' | आँसू = जल, प्रेम = बेल, आनंद = फल; पूरी भक्ति-साधना एक बेल के बढ़ने का चित्र बन जाती है। |
| रूपक/अन्योक्ति: दूध-मथानी | 'दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी' | घी = भक्ति का सार, छाछ = सांसारिक मोह; गहरी दार्शनिक बात घरेलू दृश्य से। |
| पुनरुक्ति प्रकाश | 'बैठि-बैठि', 'सींचि-सींचि' | निरंतरता और लंबी साधना का भाव। |
| अनुप्रास | 'गिरधर गोपाल', 'कुल की कानि' | संगीतात्मकता। |
| राजस्थानी-ब्रज मिश्रित भाषा और गेयता | दूसरो, दयी, आणंद, मोही, छांड़ि | सरल, मधुर, लोकगीत जैसी पद शैली; इसे आज भी गाया जाता है। |
| विरोधाभासी चित्र | 'भगत देखि राजी हुयी, जगत देखि रोयी' | भक्ति के आनंद और संसार की दशा पर करुणा का संतुलन। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई
मीरा: पद की टेक (पहली पंक्ति)।
अनन्य भक्ति का घोषणा-वाक्य।
छांड़ि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई?
मीरा: कृष्ण-भक्ति के लिए सामाजिक मर्यादा छोड़ने पर।
निर्भीकता और रूढ़ियों के प्रति विद्रोह।
अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी
मीरा: अपनी प्रेम-साधना का वर्णन।
विरह-वेदना से पोषित प्रेम; सांगरूपक।
भगत देखि राजी हुयी, जगत देखि रोयी
मीरा: पद के अंत से पहले।
भक्तों के प्रति प्रसन्नता और मोह में डूबे संसार के प्रति करुणा।
मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
अपने चुनाव पर दृढ़ता
मान लीजिए आपकी एक सहेली संगीत में करियर बनाना चाहती है, पर रिश्तेदार कहते हैं कि 'लोग क्या कहेंगे'।
मीरा के पद से उसे क्या प्रेरणा मिल सकती है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- मीरा: 'कहा करिहै कोई?'; लोक-लाज की परवाह छोड़ी।
- अपने सच्चे लगाव पर दृढ़ रहना, विनम्रता के साथ।
Answer: मीरा ने अपने सच्चे प्रेम के लिए 'लोग क्या कहेंगे' की चिंता छोड़ दी थी। सहेली भी विनम्रता से अपनी बात रखे और लगन से अभ्यास करे; सच्ची साधना अंत में 'आनंद-फल' देती है।
Memory hook: कहा करिहै कोई!
सार लो, छाछ छोड़ो
कल्पना कीजिए कि आप इंटरनेट पर पढ़ाई का कोई विषय खोजते हैं और उपयोगी जानकारी के साथ ढेर सारे बेकार वीडियो और विज्ञापन भी आते हैं।
मीरा के दूध-मथानी वाले रूपक से इस स्थिति को जोड़िए।
Try it first, then show the solutionSolution
- मथकर घी निकालना = छाँटकर काम की जानकारी लेना।
- छाछ फेंकना = बेकार सामग्री पर समय न लगाना।
Answer: जैसे मीरा ने मथकर घी लिया और छाछ फेंक दी, वैसे ही हमें धैर्य से छाँटकर उपयोगी जानकारी लेनी चाहिए और बेकार सामग्री छोड़ देनी चाहिए।
Memory hook: घी रखो, छाछ छोड़ो।
धीरे-धीरे फलने वाला परिश्रम
यदि कोई खिलाड़ी कई महीनों की थकाऊ और कभी-कभी आँसू भरी प्रैक्टिस के बाद पहला पदक जीतता है, तो इसे पद की किस पंक्ति से जोड़ेंगे?
प्रेम-बेल वाले रूपक से तुलना कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- आँसुओं से सींची बेल = कठिन अभ्यास।
- आनंद-फल = सफलता का सुख।
Answer: 'अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी... आणंद-फल होयी' से; लंबे, कष्ट-भरे अभ्यास की बेल अंत में सफलता का फल देती है।
Memory hook: आँसुओं से सींचो, आनंद पाओ।
Topics in this chapter
How the school exam asks मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित काव्यांश (प्रश्न 6, 1×5) | पद की पहली या दूसरी आधी पंक्तियों पर शब्दार्थ (कानि, ढिग, विलोयी, छोयी), प्रतीक (बेल, घी, छाछ), अलंकार और भाव वाले पाँच बहुविकल्पी प्रश्न। | हर रूपक का प्रतीकार्थ जानें; राजस्थानी शब्दों का सरल हिंदी अर्थ पक्का रखें। |
| लगभग 40 शब्द (प्रश्न 8, 2 अंक) | किसी पंक्ति का भाव, 'कहा करिहै कोई' की निर्भीकता, संतों की संगति का प्रभाव, मीरा की भाषा। | भाव + पद से प्रमाण, दो वाक्यों में। |
| लगभग 60 शब्द (प्रश्न 7, 3 अंक) | पद का काव्य-सौंदर्य, मीरा की भक्ति की विशेषताएँ, मीरा का स्त्री-मुक्ति से संबंध, आज के संदर्भ में संदेश। | तीन बिंदु; पंक्तियाँ उद्धृत करके। |
Tricks to remember मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
पद का क्रम: 'अ-त्या-बे-म-रो-ता'
अनन्यता (गिरधर) → त्याग (कानि, लोक-लाज) → बेल (आँसू, आनंद-फल) → मथानी (घी-छाछ) → रोयी (जगत) → तारो (उद्धार)।
Use it when: भावार्थ क्रम से लिखने के लिए।
प्रतीक-तालिका
आँसू = जल, प्रेम = बेल, आनंद = फल; घी = भक्ति, छाछ = संसार का मोह।
Use it when: रूपक और प्रतीक वाले प्रश्न।
कठिन शब्द
कानि = मर्यादा, ढिग = पास, विलोयी = मथी, छोयी = छाछ, मोही = मुझे, तारो = उद्धार करो।
Use it when: शब्दार्थ वाले बहुविकल्पी प्रश्न।
मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: काव्यांश 1: कुल की कानि और लोक-लाज
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई
जा के सिर मोर-मुकुट, मेरो पति सोई
छांड़ि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई?
संतन ढिग बैठि-बैठि, लोक-लाज खोयी
अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी
(1) · 1 mark · MCQ
'गिरधर गोपाल' नाम कृष्ण के किन दो रूपों की ओर संकेत करता है?
(क) राजा और योद्धा
(ख) पर्वत (गोवर्धन) उठाने वाले और गायों के पालक
(ग) बाँसुरी बजाने वाले और नर्तक
(घ) सारथी और उपदेशक(2) · 1 mark · MCQ
'कुल की कानि' का अर्थ है:
(क) कुल का कान
(ख) परिवार की मर्यादा
(ग) कुल का धन
(घ) कुल देवता(3) · 1 mark · MCQ
'कहा करिहै कोई?' में मीरा का कौन-सा भाव प्रकट होता है?
(क) भय
(ख) निर्भीकता और दृढ़ निश्चय
(ग) पश्चात्ताप
(घ) उदासीनता(4) · 1 mark · MCQ
मीरा ने लोक-लाज कैसे खोई?
(क) महल छोड़कर
(ख) संतों के पास बैठ-बैठकर, यानी सत्संग में समाज की परवाह छोड़कर
(ग) गीत न गाकर
(घ) तीर्थयात्रा न करके(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): 'प्रेम-बेलि' में रूपक अलंकार है। कारण (R): यहाँ प्रेम पर बेल का आरोप किया गया है, यानी प्रेम को ही बेल मान लिया गया है।
(क) A और R दोनों सही हैं, R, A की सही व्याख्या है
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है
(ग) A सही, R गलत
(घ) A गलत, R सही
Show the answersAnswers
- (ख) पर्वत (गोवर्धन) उठाने वाले और गायों के पालक
- (ख) परिवार की मर्यादा
- (ख) निर्भीकता और दृढ़ निश्चय
- (ख) संतों के पास बैठ-बैठकर, यानी सत्संग में समाज की परवाह छोड़कर
- (क) A और R दोनों सही हैं, R, A की सही व्याख्या है
Extract 2: काव्यांश 2: घी लिया, छाछ छोड़ी
अब त बेलि फैलि गयी, आणंद-फल होयी
दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से विलोयी
दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी
भगत देखि राजी हुयी, जगत देखि रोयी
दासि मीरां लाल गिरधर! तारो अब मोही
(1) · 1 mark · MCQ
'आणंद-फल होयी' का भाव है:
(क) बेल पर मीठे फल लगे
(ख) प्रेम-साधना अब आत्मिक आनंद देने लगी है
(ग) मीरा को धन मिला
(घ) बाग में फल पक गए(2) · 1 mark · MCQ
'घृत' और 'छोयी' यहाँ क्रमशः किसके प्रतीक हैं?
(क) धन और गरीबी
(ख) भक्ति का सार और सांसारिक मोह (सारहीन अंश)
(ग) सुख और दुख
(घ) मीरा और समाज(3) · 1 mark · MCQ
'विलोयी' शब्द का अर्थ है:
(क) खो दी
(ख) मथी
(ग) देखी
(घ) बोई(4) · 1 mark · MCQ
'जगत देखि रोयी' में मीरा के रोने का कारण है:
(क) संसार ने उन्हें धन नहीं दिया
(ख) संसार माया-मोह और व्यर्थ के कामों में उलझा है, ईश्वर से दूर है
(ग) उन्हें घर की याद आई
(घ) भक्त उनसे नाराज़ थे(5) · 1 mark · MCQ
अंतिम पंक्ति में मीरा स्वयं को क्या कहती हैं और क्या माँगती हैं?
(क) रानी; राज्य
(ख) दासी; उद्धार
(ग) सखी; मिलन का स्थान
(घ) कवयित्री; प्रसिद्धि
Show the answersAnswers
- (ख) प्रेम-साधना अब आत्मिक आनंद देने लगी है
- (ख) भक्ति का सार और सांसारिक मोह (सारहीन अंश)
- (ख) मथी
- (ख) संसार माया-मोह और व्यर्थ के कामों में उलझा है, ईश्वर से दूर है
- (ख) दासी; उद्धार
मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: संतों की संगति · 2 marks · Short answerExam level
'संतन ढिग बैठि-बैठि, लोक-लाज खोयी' पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- संतों के पास बार-बार बैठना = सत्संग।
- लोक-लाज खोना = समाज की आलोचना की चिंता छोड़ देना।
Answer: मीरा कहती हैं कि वे बार-बार संतों के पास बैठकर सत्संग करती रहीं। राजघराने की स्त्री के लिए यह मर्यादा के विरुद्ध माना जाता था, पर उन्होंने लोगों की निंदा की परवाह छोड़ दी; भक्ति के आगे उनके लिए लोक-लाज का कोई मूल्य नहीं रहा।
Example 2: मीरा की निर्भीकता · 2 marks · Short answerHarder exam level
पद के आधार पर सिद्ध कीजिए कि मीरा निर्भीक और दृढ़निश्चयी थीं। (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- 'छांड़ि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई?'
- 'दूसरो न कोई': निर्णय अटल।
Answer: मीरा ने कुल की मर्यादा छोड़कर चुनौती दी कि अब कोई उनका क्या कर लेगा। 'दूसरो न कोई' कहकर उन्होंने कृष्ण के प्रति अपना निर्णय अटल बताया। समाज की निंदा के बावजूद संतों की संगति न छोड़ना भी उनके दृढ़ निश्चय का प्रमाण है।
Example 3: घरेलू-ग्रामीण बिंबों का चुनाव · 3 marks · Short answerHarder exam level
मीरा ने अपनी भक्ति-साधना को बेल बोने-सींचने और दही मथने जैसे घरेलू-ग्रामीण कामों के बिंबों से व्यक्त किया है। इन बिंबों के चुनाव से पद को क्या विशेषताएँ मिली हैं? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- बेल: आँसू-जल, प्रेम-बेल, आनंद-फल; साधना का धीमा विकास।
- मथानी: घी = भक्ति का सार, छाछ = मोह; विवेक।
- विशेषता: अमूर्त भाव मूर्त, सरल, आम जन के अनुभव से जुड़ा।
Answer: बेल बोने-सींचने के बिंब से मीरा दिखाती हैं कि विरह के आँसुओं से पली भक्ति धीरे-धीरे फैलकर आनंद का फल देती है। दही मथने के बिंब से वे बताती हैं कि जीवन से भक्ति का सार (घी) लेकर मोह (छाछ) छोड़ना है। ये बिंब हर घर और गाँव के अनुभव से जुड़े हैं, इसलिए कठिन आध्यात्मिक भाव सरल, मूर्त और सबके लिए बोधगम्य बन गए हैं।
Example 4: मीरा की भक्ति की विशेषताएँ · 3 marks · Short answerExam level
इस पद के आधार पर मीरा की भक्ति की तीन विशेषताएँ लिखिए। (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- सगुण, दाम्पत्य भाव: मोर-मुकुटधारी पति।
- अनन्यता और समर्पण: दूसरो न कोई, दासी।
- त्याग और विवेक: कुल-कानि, लोक-लाज, छाछ।
Answer: पहली विशेषता सगुण, दाम्पत्य भाव की भक्ति है: मोर-मुकुटधारी कृष्ण को वे पति मानती हैं। दूसरी, अनन्यता और पूर्ण समर्पण: 'दूसरो न कोई' कहती हैं और अंत में स्वयं को दासी कहकर उद्धार माँगती हैं। तीसरी, त्याग और विवेक: भक्ति के लिए कुल-मर्यादा और लोक-लाज छोड़ देती हैं और संसार के मोह को छाछ की तरह त्याग देती हैं।
Example 5: मीरा और स्त्री-स्वतंत्रता · 3 marks · Short answerHOTS / competency
मीरा को उनके युग में 'स्त्री-मुक्ति की आवाज़' कहा जाता है। इस पद की किन पंक्तियों से यह बात सिद्ध होती है? आज की स्त्री के लिए इसका क्या अर्थ हो सकता है? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पंक्तियाँ: कुल की कानि छोड़ना, 'कहा करिहै कोई', लोक-लाज खोना।
- उस युग में स्त्री पर पर्दा, कुल-मर्यादा के बंधन।
- आज: अपने विश्वास और चुनाव पर दृढ़ रहने का साहस।
Answer: 'छांड़ि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई?' और 'लोक-लाज खोयी' जैसी पंक्तियों में मीरा उन बंधनों को ठुकराती हैं, जो उस युग में राजघराने की स्त्री को घर और पर्दे में बाँधते थे। उन्होंने अपना मार्ग स्वयं चुना। आज की स्त्री के लिए इसका अर्थ है अपने विश्वास, शिक्षा और जीवन के चुनाव पर समाज के दबाव के बावजूद दृढ़ रहने का साहस।
Example 6: राजी और रोयी · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'भगत देखि राजी हुयी, जगत देखि रोयी'—एक ही पंक्ति में प्रसन्नता और दुख, दोनों क्यों हैं? इससे मीरा के व्यक्तित्व का कौन-सा पक्ष उभरता है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- भक्तों में ईश्वर-प्रेम देखकर प्रसन्नता।
- संसार को मोह में उलझा देखकर करुणा; व्यक्तित्व: करुणामयी, केवल आत्मकेंद्रित नहीं।
Answer: भक्तों में ईश्वर-प्रेम देखकर मीरा प्रसन्न होती हैं, पर संसार को माया-मोह और व्यर्थ के कामों में उलझा देखकर उन्हें दुख होता है। इससे पता चलता है कि उनकी भक्ति केवल अपने लिए नहीं; उसमें सारे संसार के प्रति करुणा भी है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
घरेलू-ग्रामीण बिंबों (बेल, मथानी) का अर्थ और प्रभाव (लगभग 60 शब्द, 3 अंक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रेम-बेल का अर्थ: आँसू-जल, बेल-प्रेम, आनंद-फल | 1 |
| मथानी का अर्थ: घी-भक्ति का सार, छाछ-मोह; और बिंबों से आई सरलता-मूर्तता | 1.5 |
| भाषा और शब्द-सीमा | 0.5 |
'संतन ढिग बैठि-बैठि, लोक-लाज खोयी' का भाव (लगभग 40 शब्द, 2 अंक) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| संतों की संगति (सत्संग) का अर्थ | 1 |
| लोक-लाज खोना: समाज की निंदा की परवाह छोड़ना | 1 |
Where students lose marks in मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: हटाए गए दूसरे पद 'पग घुँघरू बाँधि मीरा नाची' की पंक्तियाँ उत्तरों में मिलाना
2026-27 के पाठ्यक्रम में केवल पहला पद है।
Do this: केवल 'मेरे तो गिरधर गोपाल' पद से उदाहरण दें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 'छोयी' को केवल छाछ लिखना, प्रतीकार्थ न देना
प्रश्न प्रायः प्रतीकार्थ माँगता है: सारहीन अंश, सांसारिक मोह।
Do this: शब्दार्थ + प्रतीकार्थ लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: मीरा के रोने का कारण अपना दुख या विरह बताना
पद में वे 'जगत देखि' रोती हैं, यानी संसार की मोहग्रस्त दशा देखकर।
Do this: भक्तों पर प्रसन्नता और जगत पर करुणा, दोनों साथ लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: मीरा को निर्गुण भक्त लिखना
वे सगुण धारा की कृष्णभक्त हैं, यद्यपि उन पर निर्गुण और सूफ़ी प्रभाव भी मिलता है।
Do this: 'सगुण, कृष्णभक्त, दाम्पत्य भाव' लिखें।
Usually costs: आधा अंक
Practice questions on मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
मीरा के गुरु किन्हें माना जाता है?
(क) कबीर
(ख) रैदास
(ग) तुलसीदास
(घ) सूरदासHint
संत कवि।
Answer
(ख) रैदास
Q2 · 1 mark · Very short answerExam level
'ढिग' और 'कानि' शब्दों के अर्थ लिखिए।
Hint
संतों के पास; कुल की...
Answer
ढिग = पास, साथ; कानि = मर्यादा।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'अब त बेलि फैलि गयी' से मीरा की भक्ति की किस अवस्था का पता चलता है? (लगभग 40 शब्द)
Hint
आरंभ: आँसू; अब: फैलाव और फल।
Answer
आरंभ में प्रेम की बेल आँसुओं से सींची गई थी, यानी साधना कठिन और विरह-भरी थी। अब बेल फैल गई है और आनंद के फल लग रहे हैं; अर्थात् मीरा की भक्ति परिपक्व हो गई है और उन्हें आत्मिक आनंद मिलने लगा है।
Q4 · 1 mark · MCQHarder exam level
कथन (A): मीरा ने दही मथकर घी निकाला और छाछ फेंक दी। कारण (R): मीरा को घर के काम-काज में विशेष रुचि थी।
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
(ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
(ग) A सही (रूपक के रूप में), R गलत
(घ) A गलत, R सहीHint
घी और छाछ के प्रतीक।
Answer
(ग) A सही (रूपक के रूप में), R गलत (यह भक्ति का सार लेने और संसार का मोह छोड़ने का रूपक है, घरेलू रुचि का वर्णन नहीं)
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपको इस पद को विद्यालय की प्रार्थना-सभा में प्रस्तुत करने से पहले दो मिनट में इसका परिचय देना है। परिचय में आप किन तीन बातों पर ज़ोर देंगे? (लगभग 60 शब्द)
Hint
अनन्यता, साहस, सार-असार; भाषा और गेयता।
Answer
पहली बात, यह पद मीरा के कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम का गीत है: 'दूसरो न कोई'। दूसरी, इसमें उस साहस की झलक है, जिससे मीरा ने कुल-मर्यादा और लोक-लाज के बंधन तोड़े। तीसरी, प्रेम-बेल और दूध-मथानी के सुंदर रूपकों से यह सिखाता है कि जीवन से सार ग्रहण करें और व्यर्थ का मोह छोड़ें। सरल राजस्थानी भाषा इसे गाने योग्य बनाती है।
Q6 · 2 marks · Short answerHarder exam level
मीरा ने कृष्ण के लिए 'पति' शब्द का प्रयोग क्यों किया है? इससे उनकी भक्ति का कौन-सा रूप प्रकट होता है? (लगभग 40 शब्द)
Hint
दाम्पत्य भाव, माधुर्य भक्ति।
Answer
मीरा बचपन से कृष्ण को ही अपना पति मानती थीं; 'मेरो पति सोई' कहकर वे पत्नी जैसा पूर्ण समर्पण और निकटता प्रकट करती हैं। इससे उनकी दाम्पत्य (माधुर्य) भाव की सगुण भक्ति प्रकट होती है।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से विलोयी' में 'बड़े प्रेम से' शब्दों का क्या महत्त्व है? (लगभग 40 शब्द)
Hint
साधना बोझ नहीं, आनंद।
Answer
'बड़े प्रेम से' बताता है कि मीरा के लिए भक्ति-साधना कोई बोझ या कठोर तप नहीं थी; उन्होंने जीवन को धैर्य और प्रेम से मथा। इसी प्रेमपूर्ण धैर्य से उन्हें सार (घी) मिल सका।
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1.मीरा का जन्म कहाँ हुआ?Show answer
मारवाड़ रियासत के कुड़की गाँव में (सन् 1498)।
2.मीरा के आराध्य के सिर पर क्या है?Show answer
मोर-मुकुट।
3.मीरा ने प्रेम-बेल किससे सींची?Show answer
आँसुओं के जल से।
4.दही मथकर मीरा ने क्या रखा और क्या फेंका?Show answer
घी रखा, छाछ फेंक दी।
5.मीरा किसे देखकर प्रसन्न होती हैं?Show answer
भक्तों को।
6.अंतिम पंक्ति में मीरा कृष्ण से क्या माँगती हैं?Show answer
अपना उद्धार ('तारो अब मोही')।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप पद का भावार्थ क्रम से लिख सकते हैं?
- क्या आप प्रेम-बेल और दूध-मथानी के प्रतीक बता सकते हैं?
- क्या आप मीरा की निर्भीकता के दो प्रमाण दे सकते हैं?
- क्या आप पद के कठिन शब्दों के अर्थ लिख सकते हैं?
- क्या आप जानते हैं कि मीरा का दूसरा पद इस वर्ष पाठ्यक्रम में नहीं है?
मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई: frequently asked questions
2026-27 में मीरा का कौन-सा पद पढ़ना है?
केवल पहला पद 'मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई'; दूसरा पद 'पग घुँघरू बाँधि मीरा नाची' पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।
'दूसरो न कोई' से मीरा की भक्ति की कौन-सी विशेषता झलकती है?
अनन्यता: मोर-मुकुटधारी गिरधर गोपाल को वे पति मानती हैं (दाम्पत्य भाव) और उनके जीवन में किसी दूसरे के लिए स्थान नहीं है।
मीरा की भाषा कौन-सी है?
मूलतः राजस्थानी, जिसमें कहीं-कहीं ब्रजभाषा का प्रभाव है।
यह पद किस संकलन से लिया गया है?
नरोत्तम दास स्वामी द्वारा संकलित-संपादित 'मीराँ मुक्तावली' से।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) (302) पाठ्यक्रम, कक्षा 11-12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 1 (Reprint 2026-27), पाठ 2: मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई