कबीर – हम तौ एक एक करि जांनां: Class 11 व्याख्या, काव्य-सौंदर्य और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'हम तौ एक एक करि जांनां' कबीर का पद है, जो आरोह भाग 1 के काव्य खंड का पहला पाठ है। कबीर कहते हैं कि ईश्वर एक है और कण-कण में व्याप्त है। एक ही हवा, पानी और ज्योति सबमें है; एक ही कुम्हार ने एक ही मिट्टी से सब बर्तन गढ़े हैं, इसलिए माया पर गर्व व्यर्थ है।
What कबीर – हम तौ एक एक करि जांनां is about
कबीर भक्तिकाल की निर्गुण धारा (ज्ञानाश्रयी शाखा) के प्रतिनिधि कवि हैं। हज़ारी प्रसाद द्विवेदी ने उन्हें 'वाणी का डिक्टेटर' कहा है। वे किताबी ज्ञान के स्थान पर आँखों देखे सत्य और अनुभव को महत्त्व देते थे और जाति, वर्ण तथा संप्रदाय के भेदों के विरोधी थे।
पाठ्यपुस्तक में कबीर के दो पद हैं, पर 2026-27 के पाठ्यक्रम में केवल पहला पद 'हम तौ एक एक करि जांनां' है; दूसरा पद 'संतो देखत जग बौराना' पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है। यह पद जयदेव सिंह और वासुदेव सिंह द्वारा संपादित 'कबीर वाङ्मय, खंड 2 (सबद)' से लिया गया है।
पद के मुख्य विचार:
- ईश्वर एक है; उसे दो मानने वाले नरक के भागी हैं
- एक ही पवन, पानी और ज्योति सबमें; एक ही कुम्हार, एक ही मिट्टी
- बढ़ई लकड़ी काट सकता है, उसमें छिपी आग नहीं: आत्मा अविनाशी है
- माया पर गर्व व्यर्थ है; ईश्वर को जानने वाला निर्भय हो जाता है
कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा में काव्य खंड से पठित काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, लगभग 40 शब्दों के (2 अंक) और लगभग 60 शब्दों के (3 अंक) प्रश्न आते हैं। इस पद से भावार्थ, ईश्वर का स्वरूप, उदाहरणों का अर्थ और काव्य-सौंदर्य पूछे जा सकते हैं।
Weightage: खंड ग (आरोह भाग 1 एवं वितान भाग 1) के 80 में से 40 अंक हैं; काव्य खंड से पठित काव्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5), तीन में से दो प्रश्न लगभग 60 शब्दों में (3×2) और तीन में से दो प्रश्न लगभग 40 शब्दों में (2×2) आते हैं।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27, कक्षा 11 परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम विनिर्देशन
कबीर – हम तौ एक एक करि जांनां: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
प्रसंग: इस पद में कबीर ने परमात्मा को सृष्टि के कण-कण में देखा है, उसे ज्योति-रूप में स्वीकार किया है और उसकी व्याप्ति पूरे चराचर जगत में दिखाई है। वे इस अद्वैत सत्ता को रोज़मर्रा के उदाहरणों से समझाते हैं।
पंक्ति 1 का भाव: कबीर कहते हैं कि हमने तो ईश्वर को एक ही करके जाना है। जो लोग ईश्वर को दो (अलग-अलग) मानते हैं, उन्होंने उसे पहचाना ही नहीं; ऐसे लोग नरक (दोज़ख) के भागी हैं।
पंक्ति 2 का भाव: संसार में एक ही हवा बहती है, एक ही पानी है और सबमें एक ही ज्योति (आत्मा) समाई हुई है। एक ही कुम्हार ने एक ही मिट्टी को सानकर सब बर्तन गढ़े हैं। अर्थात् सब मनुष्यों का निर्माण एक ही तत्त्व से एक ही रचयिता ने किया है; इसलिए ऊँच-नीच और भेदभाव निरर्थक हैं।
पंक्ति 3 का भाव: जैसे बढ़ई लकड़ी को तो काट सकता है, पर लकड़ी में छिपी आग को कोई नहीं काट सकता, वैसे ही शरीर नष्ट हो सकता है, पर उसमें रहने वाला परमात्मा (आत्मा) अविनाशी है। हे ईश्वर, तुम सब शरीरों (घटों) के भीतर व्याप्त हो और तुम्हीं अलग-अलग रूप धारण करते हो।
पंक्ति 4 का भाव: संसार माया को देखकर उस पर लुभा गया है। कबीर पूछते हैं कि हे मनुष्य, तू किस बात पर गर्व करता है? जो इस सत्य को जान लेता है, वह निर्भय हो जाता है; उसे कोई दुख या माया व्याप्त नहीं होती। कबीर कहते हैं कि वे इसी ज्ञान में दीवाने (मस्त) हो गए हैं।
निष्कर्ष: पद अद्वैतवाद, सर्वव्यापक ईश्वर, मानव-समानता और माया-त्याग का संदेश देता है।
Themes and message
ईश्वर की एकता (अद्वैत भाव)
कबीर के अनुसार ईश्वर एक है; उसे अलग-अलग नामों या रूपों में बाँटना अज्ञान है।
From the text: 'हम तौ एक एक करि जांनां।'
सर्वव्यापक ईश्वर
ईश्वर हर प्राणी के भीतर ज्योति के रूप में है और वही अनेक रूप धारण करता है।
From the text: 'सब घटि अंतरि तूँही व्यापक धरै सरूपै सोई॥'
मानव-समानता
एक ही मिट्टी और एक ही कुम्हार से सब बर्तन बने हैं, तो मनुष्यों में ऊँच-नीच का कोई आधार नहीं।
From the text: 'एकै खाक गढ़े सब भांडै़ एकै कोंहरा सांनां॥'
माया और अहंकार का त्याग
संसार माया पर मोहित है, पर उस पर गर्व व्यर्थ है; सत्य को जानने वाला निर्भय हो जाता है।
From the text: 'माया देखि के जगत लुभांनां काहे रे नर गरबांनां।'
The speaker and the people in the poem
कबीर (कवि-वक्ता)
पद के वक्ता, निर्गुण भक्त।
- अनुभव पर आधारित ज्ञान वाले
- निर्भीक और स्पष्टवादी
- भेदभाव के विरोधी, समानता के समर्थक
- ईश्वर-प्रेम में मस्त (दीवाने)
ईश्वर को दो मानने वालों को दोज़ख का भागी कहते हैं और स्वयं को 'दिवांनां' बताते हैं।
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| अनुप्रास और पुनरुक्ति | 'एकै पवन एक ही पानीं एकै जोति समांनां'; 'एक एक' | 'एक' शब्द की बार-बार आवृत्ति से एकता का भाव मन में बैठ जाता है। |
| दृष्टांत (उदाहरण) | कुम्हार-मिट्टी-बर्तन; बढ़ई-लकड़ी-आग | अमूर्त दार्शनिक सत्य को सरल, परिचित दृश्यों से समझाना। |
| प्रश्न शैली | 'काहे रे नर गरबांनां' | पाठक को सीधे संबोधित कर आत्ममंथन के लिए विवश करना। |
| सधुक्कड़ी भाषा | जांनां, पानीं, कोंहरा, दोजग, गरबांनां | अवधी, ब्रज, खड़ी बोली और फ़ारसी शब्दों का मेल; जनसाधारण तक पहुँच। |
| गेयता और तुकांत | जांनां-पहिचांनां-समांनां-सांनां-गरबांनां-दिवांनां | पद संगीतात्मक है; इसे गाया जा सकता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
हम तौ एक एक करि जांनां।
कबीर: पद की पहली पंक्ति।
पद का केंद्रीय भाव: ईश्वर एक है।
एकै पवन एक ही पानीं एकै जोति समांनां।
कबीर: ईश्वर की एकता के प्रमाण देते हुए।
प्रकृति के तत्त्वों और आत्मा की एकता।
जैसे बाढ़ी काष्ट ही काटै अगिनि न काटै कोई।
कबीर: शरीर और आत्मा का अंतर समझाते हुए।
शरीर नश्वर, उसमें व्याप्त परमात्मा अविनाशी।
निरभै भया कछू नहिं ब्यापै कहै कबीर दिवांनां॥
कबीर: पद का अंतिम चरण।
ईश्वर को जानने से निर्भयता और आत्मिक मस्ती।
कबीर – हम तौ एक एक करि जांनां in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
एक मिट्टी, अनेक बर्तन
मान लीजिए आपकी कक्षा में एक नया छात्र दूसरे राज्य से आया है और कुछ छात्र उसकी भाषा और खान-पान का मज़ाक उड़ाते हैं।
कबीर के पद के आधार पर आप उन्हें क्या समझाएँगे? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- कुम्हार-मिट्टी का उदाहरण: बाहरी आकार अलग, तत्त्व एक।
- भाषा-खान-पान की विविधता बर्तनों के अलग आकार जैसी है।
Answer: मैं कहूँगा कि जैसे एक ही मिट्टी से अलग-अलग आकार के बर्तन बनते हैं, वैसे ही हम सब एक ही तत्त्व से बने हैं; भाषा और खान-पान का अंतर केवल बाहरी आकार है। मज़ाक नहीं, अपनापन चाहिए।
Memory hook: आकार अलग, मिट्टी एक।
अहंकार का त्याग
कल्पना कीजिए कि एक छात्र महँगे मोबाइल और ब्रांडेड कपड़ों के कारण दूसरों को नीचा दिखाता है।
'काहे रे नर गरबांनां' इस स्थिति पर कैसे लागू होता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- मोबाइल, कपड़े = माया; नश्वर और बदलते रहने वाले।
- मनुष्य का मूल्य भीतर की ज्योति (गुणों) से।
Answer: महँगी चीज़ें माया हैं, जो आज हैं कल नहीं; उन पर गर्व करना व्यर्थ है। मनुष्य का मूल्य उसके गुण और व्यवहार से है।
Memory hook: चीज़ें बदलती हैं, गुण टिकते हैं।
अविनाशी आत्मबल
यदि कोई खिलाड़ी चोट लगने से एक सीज़न नहीं खेल पाता, पर उसका हौसला नहीं टूटता, तो इसे कबीर के किस उदाहरण से जोड़ेंगे?
बढ़ई-लकड़ी-आग के उदाहरण से इसे जोड़िए।
Try it first, then show the solutionSolution
- बढ़ई लकड़ी काटता है, आग नहीं।
- चोट शरीर पर है, भीतर का हौसला अछूता।
Answer: चोट शरीर रूपी लकड़ी को लगी है, पर भीतर की लगन रूपी आग को कोई नहीं काट सकता; वही उसे फिर खड़ा करेगी।
Memory hook: लकड़ी कटे, आग नहीं।
Topics in this chapter
How the school exam asks कबीर – हम तौ एक एक करि जांनां
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित काव्यांश (प्रश्न 6, 1×5) | पद के पहले दो या अंतिम दो चरणों पर शब्दार्थ, भावार्थ, प्रतीक, अलंकार और कथन-कारण वाले पाँच बहुविकल्पी प्रश्न। | कठिन शब्दों (दोजग, खाक, कोंहरा, बाढ़ी, घट, निरभै) के अर्थ पक्के रखें; हर उदाहरण का प्रतीकार्थ जानें। |
| लगभग 40 शब्द (प्रश्न 8, 2 अंक) | किसी एक पंक्ति का भाव, माया पर गर्व क्यों व्यर्थ, कुम्हार का उदाहरण, भाषा की विशेषता। | पंक्ति का सरल अर्थ + उसका संदेश, दो वाक्यों में। |
| लगभग 60 शब्द (प्रश्न 7, 3 अंक) | पद का केंद्रीय भाव, काव्य-सौंदर्य (भाव पक्ष और कला पक्ष), आज के समाज में संदेश की प्रासंगिकता। | तीन बिंदु; पद की पंक्ति उद्धृत करके। |
Tricks to remember कबीर – हम तौ एक एक करि जांनां
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
पद के चार चरण: 'ए-त-बा-मा'
एक ईश्वर (दो मानना दोज़ख) → तत्त्व एक (पवन, पानी, ज्योति, मिट्टी, कुम्हार) → बाढ़ी-काष्ट-अगिनि (अविनाशी) → माया पर गर्व नहीं, निर्भय दीवाना।
Use it when: भावार्थ क्रम से लिखने के लिए।
दो उदाहरण, दो सीख
कुम्हार = सब समान; बढ़ई = आत्मा अमर।
Use it when: उदाहरणों के अर्थ वाले प्रश्न।
कठिन शब्द
दोजग = नरक, खाक = मिट्टी, कोंहरा = कुम्हार, सांनां = मिलाया, बाढ़ी = बढ़ई, घट = शरीर, निरभै = निर्भय।
Use it when: बहुविकल्पी शब्दार्थ प्रश्न।
कबीर – हम तौ एक एक करि जांनां: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: काव्यांश 1: एक पवन, एक पानी
हम तौ एक एक करि जांनां।
दोइ कहैं तिनहीं कौं दोजग जिन नाहिंन पहिचांनां ॥
एकै पवन एक ही पानीं एकै जोति समांनां।
एकै खाक गढ़े सब भांडै़ एकै कोंहरा सांनां॥
(1) · 1 mark · MCQ
कवि के अनुसार 'दोजग' (नरक) के भागी कौन हैं?
(क) जो ईश्वर को एक मानते हैं
(ख) जो ईश्वर को दो मानते हैं और उसे पहचान नहीं पाए
(ग) जो कुम्हार का काम करते हैं
(घ) जो माया से दूर हैं(2) · 1 mark · MCQ
'एकै जोति समांनां' में 'जोति' का आशय है:
(क) दीपक की लौ
(ख) सूर्य का प्रकाश
(ग) सबमें समाई परमात्मा की ज्योति (आत्मा)
(घ) आँखों की रोशनी(3) · 1 mark · MCQ
काव्यांश में 'कोंहरा' और 'भांडै़' किसके प्रतीक हैं?
(क) कुम्हार = ईश्वर, बर्तन = प्राणी
(ख) कुम्हार = राजा, बर्तन = प्रजा
(ग) कुम्हार = गुरु, बर्तन = शिष्य
(घ) कुम्हार = कवि, बर्तन = कविताएँ(4) · 1 mark · MCQ
'एकै पवन एक ही पानीं' में कौन-सा अलंकार प्रमुख है?
(क) उपमा
(ख) अनुप्रास
(ग) रूपक
(घ) श्लेष(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): कबीर मनुष्यों के बीच जाति और वर्ण के भेद को निरर्थक मानते हैं। कारण (R): उनके अनुसार सभी प्राणी एक ही मिट्टी से एक ही कुम्हार द्वारा गढ़े गए हैं।
(क) A और R दोनों सही हैं, R, A की सही व्याख्या है
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है
(ग) A सही, R गलत
(घ) A गलत, R सही
Show the answersAnswers
- (ख) जो ईश्वर को दो मानते हैं और उसे पहचान नहीं पाए
- (ग) सबमें समाई परमात्मा की ज्योति (आत्मा)
- (क) कुम्हार = ईश्वर, बर्तन = प्राणी
- (ख) अनुप्रास
- (क) A और R दोनों सही हैं, R, A की सही व्याख्या है
Extract 2: काव्यांश 2: बढ़ई, लकड़ी और आग
जैसे बाढ़ी काष्ट ही काटै अगिनि न काटै कोई।
सब घटि अंतरि तूँही व्यापक धरै सरूपै सोई॥
माया देखि के जगत लुभांनां काहे रे नर गरबांनां।
निरभै भया कछू नहिं ब्यापै कहै कबीर दिवांनां॥
(1) · 1 mark · MCQ
'बाढ़ी' शब्द का अर्थ है:
(क) बाढ़
(ख) बढ़ई
(ग) बगीचा
(घ) बाड़(2) · 1 mark · MCQ
बढ़ई के उदाहरण से कवि क्या समझाना चाहते हैं?
(क) लकड़ी काटना कठिन है
(ख) शरीर नष्ट हो सकता है, पर उसमें व्याप्त आत्मा अविनाशी है
(ग) आग से बचना चाहिए
(घ) बढ़ई सबसे बड़ा कारीगर है(3) · 1 mark · MCQ
'सब घटि अंतरि' में 'घट' का अर्थ है:
(क) घड़ा, यहाँ शरीर
(ख) घटना
(ग) कमी
(घ) घाट(4) · 1 mark · MCQ
कवि मनुष्य से गर्व न करने को क्यों कहते हैं?
(क) क्योंकि मनुष्य कमज़ोर है
(ख) क्योंकि वह नश्वर माया पर लुभाकर गर्व करता है
(ग) क्योंकि गर्व करने से धन घटता है
(घ) क्योंकि राजा नाराज़ होगा(5) · 1 mark · MCQ
'कहै कबीर दिवांनां' में कबीर के 'दीवाना' होने का कारण है:
(क) संसार के सुखों में डूबना
(ख) ईश्वर के सत्य को जानकर निर्भय और मस्त हो जाना
(ग) लोगों का उपहास सहना
(घ) माया को पा लेना
Show the answersAnswers
- (ख) बढ़ई
- (ख) शरीर नष्ट हो सकता है, पर उसमें व्याप्त आत्मा अविनाशी है
- (क) घड़ा, यहाँ शरीर
- (ख) क्योंकि वह नश्वर माया पर लुभाकर गर्व करता है
- (ख) ईश्वर के सत्य को जानकर निर्भय और मस्त हो जाना
कबीर – हम तौ एक एक करि जांनां: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: कुम्हार का उदाहरण · 2 marks · Short answerExam level
'एकै खाक गढ़े सब भांडै़ एकै कोंहरा सांनां' पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)
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- शाब्दिक अर्थ: एक ही कुम्हार ने एक ही मिट्टी सानकर सब बर्तन बनाए।
- भाव: एक ईश्वर ने एक तत्त्व से सब प्राणी रचे; भेदभाव व्यर्थ।
Answer: जैसे एक ही कुम्हार एक ही मिट्टी को सानकर अलग-अलग आकार के बर्तन गढ़ता है, वैसे ही एक ही ईश्वर ने एक ही तत्त्व से सब प्राणियों को बनाया है। इसलिए मनुष्यों में ऊँच-नीच और जाति-धर्म का भेद निरर्थक है।
Example 2: माया पर गर्व · 2 marks · Short answerHarder exam level
कबीर ने मनुष्य के गर्व को व्यर्थ क्यों कहा है? पद के आधार पर उत्तर दीजिए। (लगभग 40 शब्द)
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- संसार माया (धन, रूप, पद) पर लुभाया है; माया नश्वर।
- सब में एक ही ज्योति; कोई किसी से बड़ा नहीं।
Answer: कबीर के अनुसार संसार धन, रूप और पद जैसी माया पर लुभा गया है, जो नश्वर है। जब सबमें एक ही ज्योति है और सब एक ही मिट्टी से बने हैं, तो किसी के पास अपने को दूसरों से बड़ा मानकर गर्व करने का कोई आधार नहीं है।
Example 3: पद का काव्य-सौंदर्य · 3 marks · Short answerExam level
'हम तौ एक एक करि जांनां' पद के भाव पक्ष और कला पक्ष की दो-दो विशेषताएँ लिखिए। (लगभग 60 शब्द)
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- भाव पक्ष: अद्वैत भाव, मानव-समानता, माया-त्याग।
- कला पक्ष: सधुक्कड़ी भाषा, दृष्टांत, अनुप्रास, गेयता।
Answer: भाव पक्ष: पद में ईश्वर की एकता और सर्वव्यापकता का अद्वैत भाव है; साथ ही यह संदेश है कि सब मनुष्य समान हैं और माया पर गर्व व्यर्थ है। कला पक्ष: भाषा सधुक्कड़ी है, जिसमें अवधी, ब्रज और फ़ारसी शब्द मिले हैं; कुम्हार और बढ़ई जैसे दृष्टांत, 'एकै पवन' में अनुप्रास और तुकांत गेयता पद को प्रभावी बनाते हैं।
Example 4: निर्भय होने का रहस्य · 3 marks · Short answerHarder exam level
कबीर के अनुसार ईश्वर की एकता को जान लेने से मनुष्य निर्भय क्यों हो जाता है? अपने तर्क सहित स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द)
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- आत्मा अविनाशी (बढ़ई-आग): मृत्यु का भय मिटता है।
- सबमें एक ज्योति: किसी से शत्रुता या भय का कारण नहीं।
- माया से मोह छूटता है: खोने का डर नहीं।
Answer: बढ़ई के उदाहरण से कबीर बताते हैं कि शरीर कट सकता है, पर भीतर की ज्योति अविनाशी है; यह जानकर मृत्यु का भय मिट जाता है। जब सबमें एक ही ईश्वर दिखता है, तो किसी को पराया या शत्रु मानने का कारण नहीं रहता। माया से मोह छूट जाने पर कुछ खोने का डर भी नहीं रहता; इसलिए ऐसा व्यक्ति निर्भय और मस्त हो जाता है।
Example 5: आज के समाज में संदेश · 3 marks · Short answerHOTS / competency
धर्म, जाति और भाषा के नाम पर होने वाले आज के विवादों के संदर्भ में कबीर के इस पद की प्रासंगिकता पर अपने विचार लिखिए। (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पद का संदेश: एक ईश्वर, एक तत्त्व, एक ज्योति।
- आज: पहचान के आधार पर बँटवारा, घृणा।
- कबीर की दृष्टि: मनुष्य को मनुष्य मानना; सद्भाव।
Answer: आज भी लोग धर्म, जाति और भाषा के नाम पर एक-दूसरे को पराया मानकर विवाद करते हैं। कबीर का पद याद दिलाता है कि सबमें एक ही पवन, पानी और ज्योति है और सबको एक ही कुम्हार ने गढ़ा है। यदि यह दृष्टि अपनाई जाए, तो घृणा का आधार ही समाप्त हो जाता है; इसलिए यह पद आज पहले से भी अधिक प्रासंगिक है।
Example 6: दो मानने वाले दोज़ख के भागी · 2 marks · Short answerHOTS / competency
कबीर ने ईश्वर को दो मानने वालों के लिए 'दोजग' (नरक) जैसा कठोर शब्द क्यों प्रयोग किया? इससे उनके स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- दो मानना = भेद-बुद्धि, जो घृणा और झगड़े की जड़।
- स्वभाव: निर्भीक, दो टूक कहने वाले 'वाणी के डिक्टेटर'।
Answer: ईश्वर को दो मानने की भेद-बुद्धि ही मनुष्यों के बीच झगड़े और घृणा की जड़ है, इसलिए कबीर इसे सबसे बड़ा अज्ञान मानकर दोज़ख से जोड़ते हैं। इससे उनका निर्भीक, दो टूक कहने वाला स्वभाव प्रकट होता है, जिसके कारण उन्हें 'वाणी का डिक्टेटर' कहा गया।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
पद का काव्य-सौंदर्य (लगभग 60 शब्द, 3 अंक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| भाव पक्ष: अद्वैत भाव, समानता, माया-त्याग (कम-से-कम दो) | 1.5 |
| कला पक्ष: भाषा, अलंकार, दृष्टांत, गेयता (कम-से-कम दो) उदाहरण सहित | 1 |
| भाषा और शब्द-सीमा | 0.5 |
कुम्हार वाली पंक्ति का भाव (लगभग 40 शब्द, 2 अंक) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| शाब्दिक अर्थ: एक कुम्हार, एक मिट्टी, सब बर्तन | 1 |
| भाव: एक ईश्वर, सब प्राणी समान, भेदभाव व्यर्थ | 1 |
Where students lose marks in कबीर – हम तौ एक एक करि जांनां
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: पाठ्यक्रम से हटाए गए दूसरे पद 'संतो देखत जग बौराना' की तैयारी में समय लगाना या उत्तरों में उसे मिलाना
2026-27 के पाठ्यक्रम में केवल पहला पद है।
Do this: पहले पद पर ही ध्यान दें।
Usually costs: समय और अंक
Mistake: 'बाढ़ी' का अर्थ 'बाढ़' लिखना
बाढ़ी = बढ़ई (लकड़ी काटने वाला)।
Do this: शब्दार्थ की सूची याद रखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: बढ़ई वाले उदाहरण का केवल शाब्दिक अर्थ लिखना
प्रश्न प्रायः प्रतीकार्थ माँगता है: शरीर नश्वर, आत्मा अविनाशी।
Do this: शाब्दिक अर्थ + प्रतीकार्थ, दोनों लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: कबीर के 'दीवाने' होने को सांसारिक पागलपन समझना
यहाँ दीवानगी ईश्वर-ज्ञान से उपजी निर्भय मस्ती है।
Do this: 'निरभै भया' से जोड़कर लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Practice questions on कबीर – हम तौ एक एक करि जांनां
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
कबीर किस भक्ति-धारा के कवि हैं?
(क) सगुण, रामभक्ति शाखा
(ख) सगुण, कृष्णभक्ति शाखा
(ग) निर्गुण, ज्ञानाश्रयी शाखा
(घ) निर्गुण, प्रेमाश्रयी शाखाHint
ज्ञान और अनुभव पर बल।
Answer
(ग) निर्गुण, ज्ञानाश्रयी शाखा
Q2 · 1 mark · Very short answerExam level
'खाक' और 'कोंहरा' शब्दों के अर्थ लिखिए।
Hint
मिट्टी के बर्तन।
Answer
खाक = मिट्टी; कोंहरा = कुम्हार।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'धरै सरूपै सोई' से कबीर के ईश्वर संबंधी किस विचार का पता चलता है? (लगभग 40 शब्द)
Hint
एक ईश्वर, अनेक रूप।
Answer
इससे पता चलता है कि कबीर के अनुसार ईश्वर एक है, पर वही सब प्राणियों के भीतर रहकर अलग-अलग रूप धारण करता है। रूपों की विविधता ऊपरी है; भीतर की सत्ता एक ही है।
Q4 · 1 mark · MCQHarder exam level
कथन (A): कबीर ने पद में अपने को 'दिवांनां' कहा है। कारण (R): वे माया पर लुभाकर संसार के सुखों में डूब गए थे।
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
(ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
(ग) A सही, R गलत
(घ) A गलत, R सहीHint
माया पर लुभाया कौन है?
Answer
(ग) A सही, R गलत (माया पर जगत लुभाया है; कबीर ईश्वर के ज्ञान में मस्त होकर दीवाने हैं)
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपके विद्यालय के एक कार्यक्रम का विषय है 'हम सब एक हैं'। कबीर के इस पद की किन पंक्तियों और विचारों को आप अपने भाषण का आधार बनाएँगे और क्यों? (लगभग 60 शब्द)
Hint
पवन-पानी-ज्योति; कुम्हार-मिट्टी; गर्व न करना।
Answer
मैं 'एकै पवन एक ही पानीं एकै जोति समांनां' से शुरू करूँगा, क्योंकि यह बताती है कि सब एक ही हवा-पानी से जीते हैं और सबमें एक ही ज्योति है। फिर कुम्हार-मिट्टी वाली पंक्ति से समझाऊँगा कि रंग-रूप अलग होकर भी हम एक ही तत्त्व से बने हैं। अंत में 'काहे रे नर गरबांनां' से अहंकार छोड़ने की अपील करूँगा।
Q6 · 2 marks · Short answerHarder exam level
कबीर की भाषा को 'सधुक्कड़ी' क्यों कहा जाता है? पद से दो उदाहरण दीजिए। (लगभग 40 शब्द)
Hint
कई बोलियों का मेल; साधुओं की भाषा।
Answer
कबीर ने देशाटन और साधु-संगति से भाषा पाई, इसलिए उसमें अवधी, ब्रज, खड़ी बोली, पंजाबी और फ़ारसी शब्द घुले-मिले हैं; साधुओं की ऐसी मिली-जुली भाषा सधुक्कड़ी कहलाती है। उदाहरण: 'दोजग' (फ़ारसी), 'कोंहरा', 'जांनां' (लोकभाषा)।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
कबीर ने अपने विचार समझाने के लिए कुम्हार और बढ़ई जैसे साधारण कारीगरों के उदाहरण ही क्यों चुने? (लगभग 40 शब्द)
Hint
स्वयं जुलाहा; श्रोता जनसाधारण।
Answer
कबीर स्वयं काशी के जुलाहे थे और उनके श्रोता साधारण जन थे। रोज़ दिखने वाले कुम्हार और बढ़ई के काम से कठिन दार्शनिक सत्य तुरंत समझ में आ जाता है; साथ ही इससे श्रम करने वाले लोगों का सम्मान भी झलकता है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.कबीर का जन्म कहाँ माना जाता है?Show answer
वाराणसी (काशी) के पास लहरतारा में।
2.कबीर की रचनाएँ किस ग्रंथ में संकलित हैं?Show answer
'बीजक' में (साखी, सबद, रमैनी)।
3.'दोजग' का अर्थ क्या है?Show answer
नरक (फ़ारसी 'दोज़ख')।
4.पद में किन दो कारीगरों के उदाहरण हैं?Show answer
कुम्हार (कोंहरा) और बढ़ई (बाढ़ी)।
5.जगत किस पर लुभाया हुआ है?Show answer
माया पर।
6.ईश्वर को जानकर कबीर कैसे हो गए?Show answer
निर्भय और (ईश्वर-प्रेम में) दीवाने।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप पद के चारों चरणों का भावार्थ क्रम से लिख सकते हैं?
- क्या आप कुम्हार और बढ़ई के उदाहरणों का प्रतीकार्थ बता सकते हैं?
- क्या आप पद के कठिन शब्दों के अर्थ बता सकते हैं?
- क्या आप पद का भाव पक्ष और कला पक्ष लिख सकते हैं?
- क्या आप जानते हैं कि दूसरा पद इस वर्ष पाठ्यक्रम से बाहर है?
कबीर – हम तौ एक एक करि जांनां: frequently asked questions
2026-27 में कबीर के कितने पद पढ़ने हैं?
केवल पहला पद 'हम तौ एक एक करि जांनां'; दूसरा पद 'संतो देखत जग बौराना' पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।
इस पद का केंद्रीय भाव क्या है?
ईश्वर एक है और सबमें व्याप्त है; इसलिए सब मनुष्य समान हैं, माया पर गर्व व्यर्थ है और ईश्वर को जानने वाला निर्भय हो जाता है।
कबीर को 'वाणी का डिक्टेटर' किसने कहा?
हज़ारी प्रसाद द्विवेदी ने, क्योंकि कबीर अपनी बात साफ़ और दो टूक शब्दों में कहते थे।
यह पद किस ग्रंथ से लिया गया है?
जयदेव सिंह और वासुदेव सिंह द्वारा संपादित 'कबीर वाङ्मय, खंड 2 (सबद)' से।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) (302) पाठ्यक्रम, कक्षा 11-12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 1 (Reprint 2026-27), पाठ 1: हम तौ एक एक करि जांनां