प्रेमचंद – नमक का दारोगा: Class 11 सारांश, चरित्र-चित्रण और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'नमक का दारोगा' प्रेमचंद की कहानी है, जो आरोह भाग 1 का पहला गद्य पाठ है। ईमानदार दारोगा वंशीधर धनी ज़मींदार अलोपीदीन की नमक की गाड़ियाँ पकड़ते हैं और चालीस हज़ार की रिश्वत ठुकरा देते हैं। अदालत में हारकर नौकरी गँवाते हैं, पर अंत में अलोपीदीन ही उनकी ईमानदारी से प्रभावित होकर उन्हें अपनी जायदाद का मैनेजर बनाते हैं।
What प्रेमचंद – नमक का दारोगा is about
नमक का दारोगा प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी है (प्रथम प्रकाशन 1914)। पाठ्यपुस्तक इसे आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का उदाहरण बताती है: कहानी में धन पर धर्म (ईमानदारी) की जीत दिखाई गई है। धन का प्रतिनिधित्व पंडित अलोपीदीन करते हैं और धर्म का मुंशी वंशीधर।
कहानी के मुख्य प्रसंग:
- नमक विभाग का बनना, ऊपरी कमाई का लालच और पिता का 'ऊपरी आय' वाला उपदेश
- वंशीधर का दारोगा बनना और आधी रात को यमुना के पुल पर नमक से लदी गाड़ियाँ पकड़ना
- अलोपीदीन का एक हज़ार से चालीस हज़ार तक की रिश्वत देना और वंशीधर का अटल रहना
- अदालत में पैसे के बल पर अलोपीदीन का छूटना और वंशीधर का मुअत्तल होना
- अलोपीदीन का स्वयं आकर वंशीधर को अपनी सारी जायदाद का स्थायी मैनेजर बनाना
कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा में इस पाठ से पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न, लगभग 40 शब्दों के (2 अंक) और लगभग 60 शब्दों के (3 अंक) प्रश्न आ सकते हैं।
Weightage: खंड ग (आरोह भाग 1 एवं वितान भाग 1) के 80 में से 40 अंक हैं; गद्य खंड से पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (1×5), तीन में से दो प्रश्न लगभग 60 शब्दों में (3×2) और तीन में से दो प्रश्न लगभग 40 शब्दों में (2×2) आते हैं।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27, कक्षा 11 परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम विनिर्देशन
प्रेमचंद – नमक का दारोगा: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
जब नमक का नया विभाग बना और नमक के व्यापार पर रोक लगी, तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे और इस विभाग के अधिकारियों की ऊपरी कमाई खूब होने लगी। मुंशी वंशीधर रोज़गार की खोज में निकले तो उनके अनुभवी पिता ने समझाया कि घर कर्ज़ में डूबा है, इसलिए ऐसी नौकरी ढूँढ़नी चाहिए जिसमें ऊपरी आय हो, क्योंकि वेतन तो पूर्णमासी के चाँद की तरह घटता जाता है।
वंशीधर नमक विभाग में दारोगा बन गए। छह महीने में ही उन्होंने अपनी ईमानदारी और कार्यकुशलता से अफ़सरों का विश्वास जीत लिया। जाड़े की एक रात उन्होंने यमुना के पुल से गुज़रती गाड़ियों की आवाज़ सुनी। जाँच की तो पता चला कि दातागंज के प्रतिष्ठित ज़मींदार पंडित अलोपीदीन की गाड़ियों में नमक के बोरे लदे हैं।
अलोपीदीन को धन पर पूरा भरोसा था। उन्होंने पहले मीठी बातें कीं, फिर एक हज़ार से बढ़ाते-बढ़ाते चालीस हज़ार तक की रिश्वत की पेशकश की, पर वंशीधर नहीं डिगे और उन्हें हिरासत में ले लिया। अगले दिन पूरे शहर में चर्चा हुई। अदालत में अलोपीदीन के धन और प्रभाव के आगे सब झुक गए; वे बरी हो गए और वंशीधर पर व्यंग्यबाण बरसे। एक सप्ताह में ही वंशीधर मुअत्तल कर दिए गए। घर पर पिता ने उन्हें खूब कोसा।
कुछ दिन बाद अलोपीदीन सजे हुए रथ में वंशीधर के घर आए। पिता ने बेटे की शिकायत की, पर अलोपीदीन ने वंशीधर को धर्मपरायण और कुलतिलक कहा। उन्होंने वंशीधर को अपनी सारी जायदाद का स्थायी मैनेजर नियुक्त करने का पत्र दिया, जिसमें छह हज़ार वार्षिक वेतन और अनेक सुविधाएँ थीं। वंशीधर ने स्वयं को अयोग्य बताया तो अलोपीदीन ने कहा कि उन्हें ईमानदारी चाहिए। वंशीधर ने आँखों में आँसू लिए हस्ताक्षर कर दिए।
Themes and message
धन पर धर्म (ईमानदारी) की जीत
चालीस हज़ार की रिश्वत भी वंशीधर को कर्तव्य से नहीं डिगा पाती। अंत में धन का प्रतीक अलोपीदीन स्वयं ईमानदारी के आगे सिर झुकाता है।
From the text: 'धर्म ने धन को पैरों तले कुचल डाला।'
भ्रष्टाचार और उसकी सामाजिक स्वीकृति
ऊपरी कमाई को पिता भी ईश्वर की देन मानते हैं; अदालत, वकील और अमले सब धन के आगे झुकते हैं।
From the text: 'न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं'
ईमानदार व्यक्ति का अकेलापन
सच्चाई पर चलने वाले वंशीधर अदालत में हार जाते हैं, नौकरी चली जाती है और घर वाले भी नाराज़ होते हैं।
From the text: मुअत्तली के बाद पिता, माता और पत्नी सब उनसे रूठ जाते हैं।
आदर्शोन्मुख यथार्थवाद
प्रेमचंद समाज की कड़वी सच्चाई दिखाते हैं, पर कहानी का अंत आशा और सत्य की जीत पर करते हैं।
From the text: अलोपीदीन वंशीधर को स्थायी मैनेजर बनाते हैं।
Characters
मुंशी वंशीधर
नमक विभाग के ईमानदार दारोगा, कहानी के नायक।
- ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ
- निर्भीक: बड़े ज़मींदार को भी हिरासत में लेते हैं
- स्वाभिमानी पर विनम्र
- लोभ से मुक्त
वे कहते हैं, 'एक हज़ार नहीं, एक लाख भी मुझे सच्चे मार्ग से नहीं हटा सकते।'
पंडित अलोपीदीन
दातागंज के धनी और प्रभावशाली ज़मींदार।
- धन की शक्ति पर अटूट विश्वास
- चतुर और व्यवहार-कुशल
- अंत में गुणग्राही और उदार
रिश्वत देने की कोशिश करते हैं, पर अंत में वंशीधर की ईमानदारी का सम्मान कर उन्हें मैनेजर बनाते हैं।
वंशीधर के पिता
वृद्ध और अनुभवी मुंशीजी।
- व्यावहारिक और लोभी सोच
- परिवार की गरीबी से चिंतित
वे बेटे को ऊपरी आय वाली नौकरी ढूँढ़ने की सलाह देते हैं और मुअत्तली पर सिर पीट लेते हैं।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| मुहावरे और लोकोक्तियाँ | 'पौ-बारह होना', 'फूले न समाना', 'सिर पीटना' | भाषा को सजीव और प्रभावशाली बनाते हैं। |
| उपमा | वेतन को 'पूर्णमासी का चाँद' और ऊपरी आय को 'बहता हुआ स्रोत' कहना | पिता की लोभी सोच को चित्रात्मक ढंग से दिखाता है। |
| व्यंग्य | मिलावटी ग्वाले और बिना टिकट सफ़र करने वाले बाबू भी अलोपीदीन की निंदा करते हैं। | समाज के दोहरे चरित्र पर चोट। |
| मानवीकरण | धन और धर्म का 'संग्राम' | रिश्वत के प्रसंग को युद्ध की तरह नाटकीय बनाता है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चाँद है
वंशीधर के पिता: बेटे को नौकरी के बारे में उपदेश देते हुए।
ऊपरी कमाई को उचित मानने वाली सोच दिखाता है।
न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं
लेखक (अलोपीदीन का विश्वास): अलोपीदीन की धन पर आस्था।
धन के प्रभाव पर व्यंग्य।
धर्म ने धन को पैरों तले कुचल डाला।
लेखक: चालीस हज़ार की रिश्वत ठुकराए जाने पर।
कहानी का केंद्रीय भाव।
दुनिया सोती थी, पर दुनिया की जीभ जागती थी।
लेखक: अलोपीदीन की गिरफ़्तारी की खबर फैलने पर।
समाज की निंदा-प्रवृत्ति पर व्यंग्य।
मुझे इस समय एक अयोग्य मनुष्य की ही ज़रूरत है।
पंडित अलोपीदीन: वंशीधर के स्वयं को अयोग्य कहने पर।
योग्यता से बढ़कर ईमानदारी का मूल्य।
प्रेमचंद – नमक का दारोगा in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
रिश्वत का प्रलोभन
मान लीजिए आप किसी प्रतियोगिता के निर्णायक हैं और एक प्रतिभागी के माता-पिता आपको महँगा उपहार देकर अपने बच्चे को जिताने को कहते हैं।
वंशीधर के उदाहरण से आप क्या करेंगे? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- वंशीधर ने चालीस हज़ार भी ठुकरा दिए।
- निर्णय केवल योग्यता पर; उपहार विनम्रता से लौटाना।
Answer: वंशीधर की तरह मैं उपहार विनम्रता से लौटा दूँगा और निर्णय केवल प्रदर्शन के आधार पर दूँगा। ईमानदारी से ही निर्णायक का सम्मान बचता है और सभी प्रतिभागियों के साथ न्याय होता है।
Memory hook: एक हज़ार नहीं, एक लाख भी नहीं।
ईमानदारी का दीर्घकालीन लाभ
कल्पना कीजिए कि एक दुकानदार ने ग्राहक को ज़्यादा लौटाए पैसे वापस कर दिए और ग्राहक हमेशा के लिए उसका नियमित खरीदार बन गया।
इस घटना को कहानी के अंत से जोड़िए।
Try it first, then show the solutionSolution
- अलोपीदीन ने ईमानदारी देखकर वंशीधर पर भरोसा किया।
- ईमानदारी विश्वास पैदा करती है।
Answer: जैसे ईमानदारी ने वंशीधर को अलोपीदीन का भरोसा दिलाया, वैसे ही दुकानदार की ईमानदारी ने स्थायी ग्राहक दिलाया।
Memory hook: ईमानदारी से विश्वास, विश्वास से अवसर।
दोहरे मापदंड
मान लीजिए कक्षा में जो छात्र स्वयं नकल करते हैं, वही किसी दूसरे के पकड़े जाने पर सबसे ज़्यादा निंदा करते हैं।
कहानी का कौन-सा प्रसंग इससे मिलता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- अलोपीदीन की गिरफ़्तारी पर भ्रष्ट लोग भी निंदा कर रहे थे।
- पहले अपने आचरण को सुधारना चाहिए।
Answer: मिलावटी ग्वाले और बिना टिकट वाले बाबुओं का अलोपीदीन की निंदा करना; यह वही दोहरापन है।
Memory hook: दूसरों पर उँगली उठाने से पहले अपने हाथ देखें।
Topics in this chapter
How the school exam asks प्रेमचंद – नमक का दारोगा
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित गद्यांश (प्रश्न 9, 1×5) | पिता का उपदेश, पुल पर गाड़ियाँ पकड़ना, रिश्वत का प्रसंग, अदालत या अंतिम प्रसंग से गद्यांश और पाँच बहुविकल्पी प्रश्न (कथन-कारण सहित)। | गद्यांश को प्रसंग से जोड़ें; मुहावरों और प्रतीकों का अर्थ पहचानें। |
| लगभग 40 शब्द (प्रश्न 11, 2 अंक) | पिता की सलाह, 'पूर्णमासी का चाँद', अलोपीदीन का धन पर विश्वास, अदालत का फ़ैसला। | दो सटीक बिंदु और एक छोटा उद्धरण। |
| लगभग 60 शब्द (प्रश्न 10, 3 अंक) | वंशीधर या अलोपीदीन का चरित्र, कहानी का अंत, धन पर धर्म की जीत, आज के संदर्भ में प्रासंगिकता। | तीन बिंदु, प्रत्येक के साथ घटना का प्रमाण। |
Tricks to remember प्रेमचंद – नमक का दारोगा
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
घटनाक्रम: उपदेश-पुल-रिश्वत-अदालत-मुअत्तली-मैनेजरी
'उ-पु-रि-अ-मु-मै': उपदेश, पुल, रिश्वत, अदालत, मुअत्तली, मैनेजरी।
Use it when: सारांश का क्रम याद रखने के लिए।
रिश्वत की सीढ़ी
1 → 5 → 10 → 15 → 20 → 25 → 30 → 40 हज़ार।
Use it when: रिश्वत वाले गद्यांश के प्रश्न।
धन बनाम धर्म
अलोपीदीन = धन, वंशीधर = धर्म।
Use it when: केंद्रीय भाव के प्रश्न।
प्रेमचंद – नमक का दारोगा: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: गद्यांश 1: पिता का उपदेश
नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान मत देना, यह तो पीर का मज़ार है। निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए। ऐसा काम ढूँढ़ना जहाँ कुछ ऊपरी आय हो। मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चाँद है जो एक दिन दिखाई देता है और घटते-घटते लुप्त हो जाता है।
(1) · 1 mark · MCQ
पिता यह उपदेश किस अवसर पर दे रहे हैं?
(क) बेटे के मुअत्तल होने पर
(ख) बेटे के रोज़गार की खोज में निकलने पर
(ग) अलोपीदीन के घर आने पर
(घ) अदालत के फ़ैसले के बाद(2) · 1 mark · MCQ
'ओहदा पीर का मज़ार है' का आशय है—
(क) ओहदा पूजा के योग्य है
(ख) ओहदे से अधिक महत्त्व उससे होने वाली ऊपरी कमाई का है
(ग) मज़ार पर नौकरी करनी चाहिए
(घ) ओहदा स्थायी होता है(3) · 1 mark · MCQ
'निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए'—यहाँ 'चढ़ावा और चादर' किसके प्रतीक हैं?
(क) धार्मिक श्रद्धा के
(ख) ऊपरी कमाई के
(ग) सरकारी वेतन के
(घ) पद की प्रतिष्ठा के(4) · 1 mark · MCQ
इस उपदेश से पिता की कैसी मानसिकता प्रकट होती है?
(क) ईमानदार
(ख) त्यागी
(ग) लोभी और व्यावहारिक
(घ) धार्मिक(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): पिता बेटे को ऊपरी आय वाली नौकरी ढूँढ़ने को कहते हैं। कारण (R): घर कर्ज़ में डूबा था और उन्हें ऊपरी आय ईश्वर की देन लगती थी।
(क) A और R दोनों सही हैं, R, A की सही व्याख्या है
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है
(ग) A सही, R गलत
(घ) A गलत, R सही
Show the answersAnswers
- (ख) बेटे के रोज़गार की खोज में निकलने पर
- (ख) ओहदे से अधिक महत्त्व उससे होने वाली ऊपरी कमाई का है
- (ख) ऊपरी कमाई के
- (ग) लोभी और व्यावहारिक
- (क) A और R दोनों सही हैं, R, A की सही व्याख्या है
Extract 2: गद्यांश 2: धन और धर्म का संग्राम
वंशीधर ने गरम होकर कहा—एक हज़ार नहीं, एक लाख भी मुझे सच्चे मार्ग से नहीं हटा सकते। धर्म की इस बुद्धिहीन दृढ़ता और देव-दुर्लभ त्याग पर मन बहुत झुँझलाया। अब दोनों शक्तियों में संग्राम होने लगा। धन ने उछल-उछलकर आक्रमण करने शुरू किए। एक से पाँच, पाँच से दस, दस से पंद्रह, और पंद्रह से बीस हज़ार तक नौबत पहुँची, किंतु धर्म अलौकिक वीरता के साथ इस बहुसंख्यक सेना के सम्मुख अकेला पर्वत की भाँति अटल, अविचलित खड़ा था।
(1) · 1 mark · MCQ
'दोनों शक्तियाँ' कौन-सी हैं?
(क) पुलिस और अदालत
(ख) धन और धर्म
(ग) पिता और पुत्र
(घ) ज़मींदार और किसान(2) · 1 mark · MCQ
'धर्म की बुद्धिहीन दृढ़ता' किसकी दृष्टि से कहा गया है?
(क) वंशीधर की
(ख) लेखक की निजी राय
(ग) अलोपीदीन की
(घ) बदलू सिंह की(3) · 1 mark · MCQ
गद्यांश में 'बहुसंख्यक सेना' किसे कहा गया है?
(क) सिपाहियों को
(ख) रिश्वत की लगातार बढ़ती रकम को
(ग) गाड़ीवानों को
(घ) गाँव वालों को(4) · 1 mark · MCQ
'अकेला पर्वत की भाँति अटल' में कौन-सा अलंकार है?
(क) रूपक
(ख) उपमा
(ग) अनुप्रास
(घ) यमक(5) · 1 mark · MCQ
इस प्रसंग से वंशीधर के चरित्र की कौन-सी विशेषता प्रकट होती है?
(क) लालच
(ख) डरपोकपन
(ग) अडिग ईमानदारी
(घ) अहंकार
Show the answersAnswers
- (ख) धन और धर्म
- (ग) अलोपीदीन की
- (ख) रिश्वत की लगातार बढ़ती रकम को
- (ख) उपमा
- (ग) अडिग ईमानदारी
प्रेमचंद – नमक का दारोगा: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: पिता की सलाह · 2 marks · Short answerExam level
नौकरी पर जाते समय वंशीधर को पिता ने क्या सलाह दी? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- ओहदे पर नहीं, ऊपरी आय पर ध्यान।
- वेतन पूर्णमासी का चाँद, ऊपरी आय बहता स्रोत।
Answer: पिता ने कहा कि घर कर्ज़ में डूबा है, इसलिए ओहदे पर ध्यान न देकर ऐसी नौकरी ढूँढ़नी चाहिए जिसमें ऊपरी आय हो। वेतन पूर्णमासी के चाँद की तरह घटता जाता है, जबकि ऊपरी आय बहते स्रोत की तरह सदा प्यास बुझाती है।
Example 2: अलोपीदीन का धन पर विश्वास · 2 marks · Short answerExam level
अलोपीदीन को किस बात पर अटूट विश्वास था? पुल पर उन्होंने उसका प्रयोग कैसे किया? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- लक्ष्मी (धन) पर अखंड विश्वास।
- पहले मीठी बातें, फिर एक हज़ार से चालीस हज़ार तक रिश्वत।
Answer: अलोपीदीन को धन की शक्ति पर अटूट विश्वास था; वे मानते थे कि न्याय और नीति लक्ष्मी के खिलौने हैं। पुल पर उन्होंने पहले मीठी बातें कीं, फिर एक हज़ार से बढ़ाकर चालीस हज़ार रुपये तक की रिश्वत देनी चाही।
Example 3: वंशीधर का चरित्र · 3 marks · Short answerHarder exam level
वंशीधर के चरित्र की तीन विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए। (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- ईमानदार: रिश्वत ठुकराई।
- निर्भीक: बड़े ज़मींदार को हिरासत में लिया।
- विनम्र और स्वाभिमानी: अंत में क्षमा माँगी, पर धर्म नहीं छोड़ा।
Answer: वंशीधर अत्यंत ईमानदार हैं; चालीस हज़ार की रिश्वत भी उन्हें कर्तव्य से नहीं डिगाती। वे निर्भीक हैं, क्योंकि इलाके के सबसे प्रतिष्ठित ज़मींदार को भी हिरासत में ले लेते हैं। वे स्वाभिमानी होकर भी विनम्र हैं; अंत में अलोपीदीन से अपनी अविनय के लिए क्षमा माँगते हैं।
Example 4: अदालत का प्रसंग · 3 marks · Short answerHarder exam level
अदालत में अलोपीदीन कैसे छूट गए और वंशीधर को क्या मिला? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- धन और प्रभाव के आगे वकील, अमले, गवाह सब झुके।
- अलोपीदीन बरी; वंशीधर को लापरवाही की फटकार।
- व्यंग्यबाण, फिर मुअत्तली का परवाना।
Answer: अदालत में अलोपीदीन के धन और प्रभाव के आगे वकील, अमले और गवाह सब झुक गए। उन्हें बरी कर दिया गया और वंशीधर को चेतावनी दी गई कि उनकी अधिक नमकहलाली ने विवेक भ्रष्ट कर दिया। बाहर उन पर व्यंग्यबाण बरसे और एक सप्ताह में मुअत्तली का परवाना आ गया।
Example 5: धन का धर्म के आगे झुकना · 3 marks · Short answerHOTS / competency
कहानी के अंत में धन के प्रतीक अलोपीदीन स्वयं धर्म के प्रतीक वंशीधर के घर जाकर उन्हें मैनेजर बनाते हैं। इस अंत से प्रेमचंद क्या संदेश देना चाहते हैं, और क्या यह अंत विश्वसनीय लगता है? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- हज़ारों अधिकारी खरीदे, पर वंशीधर ने परास्त किया।
- जायदाद के लिए ईमानदार व्यक्ति चाहिए।
- मत: आदर्शोन्मुख अंत; आज भी ईमानदारी का सम्मान होता है।
Answer: अलोपीदीन ने अनेक अधिकारियों को धन से खरीदा था, पर वंशीधर ने उन्हें परास्त कर दिया। वे समझ गए कि अपनी जायदाद के लिए ऐसा ही ईमानदार व्यक्ति चाहिए। संदेश यह है कि अंततः ईमानदारी ही सम्मान पाती है। यह अंत आदर्शवादी है, पर अस्वाभाविक नहीं; व्यापारी भी विश्वसनीय लोगों को ही ज़िम्मेदारी सौंपना चाहते हैं।
Example 6: समाज का दोहरा चरित्र · 2 marks · Short answerHOTS / competency
अलोपीदीन की गिरफ़्तारी पर लोगों की प्रतिक्रिया से समाज की कौन-सी सच्चाई सामने आती है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- मिलावटी ग्वाले, बिना टिकट वाले बाबू, जालसाज़ सेठ भी निंदा करने लगे।
- दूसरों के दोष पर टिप्पणी, अपने दोष अनदेखे।
Answer: पानी को दूध बताकर बेचने वाले ग्वाले, बिना टिकट यात्रा करने वाले बाबू और जाली दस्तावेज़ बनाने वाले सेठ भी अलोपीदीन की निंदा कर रहे थे। इससे समाज का दोहरापन सामने आता है, जो दूसरों के पाप पर टिप्पणी करता है पर अपने भ्रष्टाचार को नहीं देखता।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
वंशीधर के चरित्र की विशेषताएँ (लगभग 60 शब्द, 3 अंक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| तीन विशेषताएँ (ईमानदार, निर्भीक, विनम्र/स्वाभिमानी) | 1.5 |
| प्रत्येक के लिए कहानी से उदाहरण | 1 |
| भाषा और शब्द-सीमा | 0.5 |
पिता की सलाह (लगभग 40 शब्द, 2 अंक) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| ऊपरी आय वाली नौकरी ढूँढ़ने की सलाह | 1 |
| वेतन और ऊपरी आय की तुलना | 1 |
Where students lose marks in प्रेमचंद – नमक का दारोगा
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: अलोपीदीन को केवल खलनायक बताना
अंत में वे गुणग्राही और उदार बनकर वंशीधर का सम्मान करते हैं।
Do this: चरित्र के दोनों पक्ष लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: यह लिखना कि अदालत ने वंशीधर के पक्ष में फ़ैसला दिया
अलोपीदीन बरी हुए और वंशीधर मुअत्तल हुए।
Do this: अदालत में धन की जीत, अंत में धर्म की जीत।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: रिश्वत की राशि गलत लिखना
अंतिम पेशकश चालीस हज़ार की थी।
Do this: रिश्वत की सीढ़ी याद रखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: शब्द-सीमा से बहुत अधिक लिखना
2 अंक के लिए लगभग 40 और 3 अंक के लिए लगभग 60 शब्द अपेक्षित हैं।
Do this: बिंदु तय करके संक्षेप में लिखें।
Usually costs: अभिव्यक्ति के अंक
Practice questions on प्रेमचंद – नमक का दारोगा
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
नमक से लदी गाड़ियाँ कहाँ जा रही थीं?
(क) दातागंज
(ख) कानपुर
(ग) इलाहाबाद
(घ) लखनऊHint
गाड़ीवानों का उत्तर।
Answer
(ख) कानपुर
Q2 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'घर में चाहे अँधेरा हो, मस्जिद में अवश्य दीया जलाएँगे'—यह किसने और क्यों कहा? (लगभग 40 शब्द)
Hint
मुअत्तली के बाद पिता की खीझ।
Answer
यह वंशीधर के पिता ने कहा। उनका आशय था कि घर गरीबी में डूबा है, फिर भी बेटा ईमानदारी दिखाकर दूसरों के सामने आदर्श बन रहा है। वे बेटे की ईमानदारी को घर के हितों के विरुद्ध मूर्खता मानते थे।
Q3 · 1 mark · Very short answerHarder exam level
वंशीधर को अलोपीदीन का प्रस्ताव मिलने पर उनकी आँखों में आँसू क्यों आ गए?
Hint
कृतज्ञता।
Answer
जिसने उन्हें नौकरी से निकलवाया था, वही उनकी ईमानदारी का सम्मान कर इतना ऊँचा पद दे रहा था; यह देखकर वे कृतज्ञता से भर उठे।
Q4 · 1 mark · MCQHarder exam level
कथन (A): अलोपीदीन वंशीधर के घर उन्हें लज्जित करने आए थे। कारण (R): वे वंशीधर को स्थायी मैनेजर बनाने का पत्र लाए थे।
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
(ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
(ग) A गलत, R सही
(घ) दोनों गलतHint
वंशीधर को पहले क्या लगा?
Answer
(ग) A गलत, R सही (वंशीधर को पहले ऐसा लगा था, पर वे सम्मान देने आए थे)
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
'नमक का दारोगा' कहानी आज के समय में कितनी प्रासंगिक है? (लगभग 60 शब्द)
Hint
रिश्वत, ईमानदार अधिकारी, समाज का रवैया।
Answer
आज भी रिश्वत और ऊपरी कमाई को कई लोग सामान्य मानते हैं और ईमानदार अधिकारियों को तबादले या दबाव झेलने पड़ते हैं। यह कहानी बताती है कि ईमानदारी कठिन रास्ता है, पर अंततः उसी का सम्मान होता है। इसलिए यह आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
Q6 · 2 marks · Short answerExam level
पाठ में आए दो मुहावरे लिखकर उनका अर्थ बताइए।
Hint
पौ-बारह, फूले न समाना।
Answer
पौ-बारह होना: खूब लाभ होना (नमक विभाग के अधिकारियों के पौ-बारह थे)। फूले न समाना: बहुत प्रसन्न होना (बेटे की नौकरी की खबर पर पिता फूले न समाए)।
Q7 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
वंशीधर ने अपने पिता की सलाह नहीं मानी। क्या उनका निर्णय सही था? अपने तर्क दीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
कर्तव्य, आत्मसम्मान, परिणाम।
Answer
हाँ, निर्णय सही था। पिता की सलाह गरीबी से उपजी थी, पर वह भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती थी। वंशीधर ने कर्तव्य और आत्मसम्मान को चुना। तत्काल उन्हें नौकरी गँवानी पड़ी, पर अंत में उसी ईमानदारी ने उन्हें सम्मान और बेहतर पद दिलाया।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.कहानी के लेखक कौन हैं?Show answer
प्रेमचंद।
2.अलोपीदीन कहाँ के ज़मींदार थे?Show answer
दातागंज के।
3.वंशीधर के जमादार का नाम क्या था?Show answer
बदलू सिंह।
4.गाड़ियाँ किस नदी के पुल पर पकड़ी गईं?Show answer
यमुना।
5.रिश्वत की अंतिम पेशकश कितनी थी?Show answer
चालीस हज़ार।
6.वंशीधर को कौन-सा पद मिला?Show answer
अलोपीदीन की जायदाद का स्थायी मैनेजर।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप पिता के उपदेश और 'पूर्णमासी का चाँद' का आशय बता सकते हैं?
- क्या आप पुल पर गाड़ियाँ पकड़ने और रिश्वत के प्रसंग का क्रम बता सकते हैं?
- क्या आप अदालत के फ़ैसले और मुअत्तली के बारे में लिख सकते हैं?
- क्या आप वंशीधर और अलोपीदीन का चरित्र-चित्रण कर सकते हैं?
- क्या आप कहानी के अंत का औचित्य समझा सकते हैं?
प्रेमचंद – नमक का दारोगा: frequently asked questions
'नमक का दारोगा' कहानी का मूल भाव क्या है?
धन पर धर्म (ईमानदारी) की जीत। ईमानदार वंशीधर रिश्वत ठुकराते हैं, कष्ट सहते हैं, पर अंत में उनकी ईमानदारी का सम्मान होता है।
कहानी को आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का उदाहरण क्यों कहा जाता है?
क्योंकि इसमें भ्रष्टाचार और ईमानदार व्यक्ति की कठिनाइयों का यथार्थ चित्रण है, पर अंत आदर्श की ओर मुड़ता है जहाँ सत्य की जीत होती है।
वंशीधर को नौकरी से क्यों निकाला गया?
अलोपीदीन अदालत से धन के बल पर बरी हो गए और वंशीधर को उनकी कर्तव्यनिष्ठा के कारण मुअत्तल कर दिया गया।
अलोपीदीन ने वंशीधर को कौन-सा पद और वेतन दिया?
अपनी सारी जायदाद का स्थायी मैनेजर, छह हज़ार वार्षिक वेतन, रोज़ाना खर्च, घोड़े, बंगला और नौकर-चाकर।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) (302) पाठ्यक्रम, कक्षा 11-12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 1 (Reprint 2026-27), पाठ 1: नमक का दारोगा