राजस्थान की रजत बूँदें (अनुपम मिश्र): कुंई और पानी के तीन रूप
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
अनुपम मिश्र के पाठ में कुंई छोटे व्यास की गहरी संरचना है, जो रेत के नीचे खड़िया पत्थर की पट्टी के ऊपर की नमी को बूँद-बूँद मीठे पानी में बदलती है। पट्टी वर्षा-जल को खारे भूजल से मिलने से रोकती है। समाज ने पानी के तीन रूप पहचाने हैं: पालरपानी, पातालपानी और रेजाणीपानी। कुंई की खुदाई और चिनाई चेजारो करते हैं।
Notice the khadiya band keeps rain moisture (Rejanipani) above salty Patalpani, so the kunyi can collect sweet water drop by drop.
Illustration drawn for QuestionBuddy.
Understand राजस्थान की रजत बूँदें: कुंई और पानी के तीन रूप
कुंई क्या है। कुंई छोटा-सा कुआँ है: व्यास में छोटी, पर गहराई में कम नहीं। कुआँ भूजल के लिए बनता है, जबकि कुंई वर्षा के जल को अनोखे ढंग से समेटती है। चार-पाँच हाथ व्यास की कुंई तीस से साठ-पैंसठ हाथ गहरी हो सकती है।
खड़िया पत्थर की पट्टी। मरुभूमि में रेत के नीचे कहीं-कहीं खड़िया पत्थर की पट्टी होती है। वह वर्षा-जल को नीचे के खारे भूजल में मिलने से रोकती है, और पानी रेत और पट्टी के बीच नमी के रूप में फैल जाता है। रेत के कण एक-दूसरे से चिपकते नहीं, इसलिए धरती में दरारें नहीं पड़तीं और नमी भाप बनकर नहीं उड़ती। कुंई इस नमी को बूँद-बूँद पानी में बदलती है: खारे पानी के सागर में अमृत जैसा मीठा पानी।
पानी के तीन रूप। पालरपानी वह है जो सीधे बरसात का है और धरातल पर बहता है। पातालपानी भूजल है। रेजाणीपानी धरातल से नीचे उतरा, पर पाताल तक न पहुँचा पानी है। वर्षा भी रेजा से नापी जाती है, यानी धरती में कितनी अंगुल समाई।
चेजारो और चिनाई। चेलवांजी (चेजारो) कुंई की खुदाई और चिनाई (चेजा) के कुशल कारीगर हैं। वे बसौली से खुदाई करते हैं; गहराई की गरमी के कारण ऊपर से मुट्ठी भर रेत फेंकी जाती है ताकि हवा का संचार हो, और सिर बचाने के लिए धातु का टोप पहना जाता है। चिनाई में ईंट, खींप घास का रस्सा और लकड़ी (साँपणी) का प्रयोग होता है। लेखक के अनुसार कुंई सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की कहानी को ज़मीन पर उतारती है।
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
कुआँ पुंलिंग है, कुंई स्त्रीलिंग।
लेखक: कुंई और कुएँ के अंतर में।
आकार में छोटी पर महत्त्व में कम नहीं।
खारे पानी के सागर में अमृत जैसा मीठा पानी।
लेखक: कुंई के जल के लिए।
कुंई का मीठा पानी अत्यंत मूल्यवान है।
चेजो यानी चिनाई का श्रेष्ठतम काम कुंई का प्राण है।
लेखक: चेजारो के कौशल पर।
चिनाई ही कुंई की सफलता है।
राजस्थान की रजत बूँदें: कुंई और पानी के तीन रूप: key facts
- पानी के तीन रूप
- पालरपानी
- पातालपानी
- रेजाणीपानी
- तीनों की परिभाषा याद रखें।
- कुंई की रचना
- रेत
- खड़िया पट्टी
- नमी
- बूँद-बूँद पानी
- कार्य-प्रणाली का क्रम।
- कुंई बनाम कुआँ
- कुंई
- वर्षा-जल की नमी; कुआँ
- भूजल
- मुख्य अंतर।
राजस्थान की रजत बूँदें: कुंई और पानी के तीन रूप in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
छत का वर्षा-जल
मान लीजिए किसी स्कूल की छत का वर्षा-जल पाइपों से नीचे बनी टंकी में जमा किया जाता है और सालभर पौधों को पानी देने में काम आता है, जबकि बोरवेल खारा पानी देता है।
यह उदाहरण पाठ के किस विचार से जुड़ता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- वर्षा-जल को संजोना।
- खारे भूजल से अलग मीठा जल।
- पारंपरिक ज्ञान का आधुनिक रूप।
Answer: यह कुंई के विचार से जुड़ता है, जो वर्षा-जल को अलग संजोकर खारे भूजल से अलग मीठा पानी देती है।
Memory hook: बरसात की बूँद, साल भर का सहारा।
Tricks to remember राजस्थान की रजत बूँदें: कुंई और पानी के तीन रूप
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
पा-पा-रे
पालर, पाताल, रेजाणी।
Use it when: पानी के तीन रूप।
खड़िया = दीवार
खड़िया पट्टी वर्षा-जल को खारे जल से अलग रखती है।
Use it when: कुंई का रहस्य।
राजस्थान की रजत बूँदें: कुंई और पानी के तीन रूप: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: लेखक · 1 mark · MCQBoard level
राजस्थान की रजत बूँदें के लेखक कौन हैं?
(क) अनुपम मिश्र (ख) कुमार गंधर्व (ग) सत्यजित राय (घ) जवाहरलाल नेहरू
Try it first, then show the solutionSolution
- लेखक अनुपम मिश्र हैं (1 अंक)।
Answer: (क)
Example 2: चेजारो · 2 marks · Short answerBoard level
चेजारो कौन हैं और उनका कार्य क्या है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- चेलवांजी/चेजारो: कुशल कारीगर (1)।
- कुंई की खुदाई और चिनाई (1)।
Answer: चेलवांजी या चेजारो कुंई की खुदाई और विशेष चिनाई (चेजा) के कुशल कारीगर हैं। वे गहरी, संकरी कुंई में बसौली से खुदाई करते हैं और ईंट, खींप के रस्से या लकड़ी से चिनाई करते हैं।
Example 3: कुंई और कुआँ · 5 marks · Long answerHarder board level
कुंई और कुएँ में अंतर स्पष्ट कीजिए। (5 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- आकार: कुंई व्यास में छोटी, गहराई में कम नहीं (1)।
- जल का स्रोत: कुआँ भूजल, कुंई वर्षा के जल की नमी (2)।
- खड़िया पट्टी की भूमिका (1)।
- भाषा (1)।
Answer: कुंई व्यास में छोटी होती है पर गहराई में कम नहीं, जबकि कुआँ अपेक्षाकृत चौड़ा होता है। कुआँ भूजल के लिए बनता है, पर कुंई वर्षा के जल को अनोखे ढंग से समेटती है। रेत के नीचे खड़िया पत्थर की पट्टी वर्षा-जल को खारे भूजल में मिलने नहीं देती, और कुंई उस नमी को बूँद-बूँद मीठे पानी में बदलती है। इसी कारण कुंई खारे पानी के सागर में अमृत जैसा मीठा पानी देती है।
Example 4: पानी के तीन रूप · 5 marks · Long answerHarder board level
पाठ में पानी के तीन रूप कौन-से हैं? प्रत्येक का परिचय दीजिए और कुंई का संबंध बताइए। (5 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- पालरपानी (1)।
- पातालपानी (1)।
- रेजाणीपानी (1)।
- कुंई का संबंध रेजाणीपानी से (1.5)।
- भाषा (0.5)।
Answer: पालरपानी वह बरसाती जल है जो सीधे धरातल पर बहता है। पातालपानी भूजल है। रेजाणीपानी वह जल है जो धरातल से नीचे उतरा, पर पाताल तक नहीं पहुँचा; वह रेत और खड़िया पट्टी के बीच नमी के रूप में रहता है। कुंई इसी रेजाणीपानी को बूँद-बूँद एकत्र करती है, इसलिए कुंई का संबंध रेजाणीपानी से है। वर्षा को भी रेजा से नापा जाता है।
Example 5: पारंपरिक ज्ञान · 3 marks · Short answerHOTS / competency
"कुंई मरुभूमि के समाज के पारंपरिक ज्ञान का उदाहरण है।" इस कथन की पुष्टि कीजिए। (3 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- समाज ने पीढ़ियों के अनुभव से पानी का शास्त्र बनाया (1)।
- कुंई की रचना और चेजारो का कौशल (1)।
- निष्कर्ष (1)।
Answer: पाठ के अनुसार मरुभूमि के समाज ने पीढ़ियों के अनुभव से पानी का पूरा शास्त्र विकसित किया है। कुंई की रचना, खड़िया पट्टी का उपयोग और चेजारो की चिनाई इसी ज्ञान के उदाहरण हैं। इसलिए कुंई पारंपरिक जल-ज्ञान का सशक्त प्रमाण है।
Where students lose marks in राजस्थान की रजत बूँदें: कुंई और पानी के तीन रूप
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: कुंई को कुएँ का दूसरा नाम बताना
दोनों अलग हैं।
Wrong working
कुंई और कुआँ एक ही हैं।
Right working
कुंई वर्षा के जल की नमी को समेटती है; कुआँ भूजल पर आधारित है।
Do this: अंतर लिखें।
Usually costs: 2 अंक
Mistake: पानी के तीन रूपों की परिभाषा उलटना
रेजाणी का अर्थ विशेष है।
Wrong working
रेजाणीपानी वही भूजल है।
Right working
रेजाणीपानी धरातल से नीचे उतरा, पर पाताल तक न पहुँचा।
Do this: तीनों परिभाषाएँ याद रखें।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: खड़िया पट्टी का उल्लेख न करना
यह कुंई की मुख्य कुंजी है।
Wrong working
कुंई बारिश का पानी जमा करती है।
Right working
खड़िया पट्टी पानी को खारे भूजल से अलग रखती है।
Do this: पट्टी की भूमिका लिखें।
Usually costs: 2 अंक
Exam tips
- कुंई बनाम कुआँ तालिका बनाकर याद रखें।
- तीनों पानी के रूपों के नाम और परिभाषा लिखें।
- खड़िया पट्टी और रेत की भूमिका अवश्य लिखें।
- चेजारो के कौशल और सम्मान का उल्लेख करें।
- 5 अंक के उत्तर में 4-5 बिंदु और निष्कर्ष दें।
Practice questions on राजस्थान की रजत बूँदें: कुंई और पानी के तीन रूप
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
कुंई की खुदाई में गहराई की गरमी कम करने के लिए क्या किया जाता है?
(क) रेत फेंकी जाती है (ख) पानी डाला जाता है (ग) पंखा चलाया जाता है (घ) बर्फ डाली जाती हैHint
ऊपर खड़े लोग मुट्ठी भर रेत फेंकते हैं।
Answer
(क)
Q2 · 3 marks · Short answerHarder board level
रेत के कणों की क्या विशेषता है, जिससे कुंई को लाभ होता है? (लगभग 60 शब्द)
Hint
चिपकना नहीं, दरारें और भाप।
Answer
रेत के कण एक-दूसरे से चिपकते नहीं। इस कारण धरती में दरारें नहीं पड़तीं और नमी भाप बनकर उड़ती नहीं। नमी रेत और खड़िया पट्टी के बीच सुरक्षित रहती है, जिसे कुंई बूँद-बूँद पानी में बदल देती है। यह रेत की उदारता है।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level
चेजारो की खुदाई में मुट्ठी भर रेत फेंकने और धातु का टोप पहनने का क्या कारण है? (लगभग 60 शब्द)
Hint
हवा और सुरक्षा।
Answer
गहराई में गरमी बढ़ती है, इसलिए ऊपर से मुट्ठी भर रेत फेंकी जाती है। इससे ताज़ी हवा नीचे जाती है और गरम हवा ऊपर आती है। सिर को गिरती रेत और कंकड़ से बचाने के लिए चेजारो धातु का टोप पहनते हैं।
Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level
कथन (A): कुंई वर्षा के जल की नमी को समेटती है। कारण (R): खड़िया पट्टी उसे खारे भूजल में मिलने से रोकती है।
(क) A और R सही, R व्याख्या है (ख) A सही, R गलत (ग) A गलत, R सही (घ) दोनों गलतHint
पट्टी की भूमिका देखें।
Answer
(क)
Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
आज के जल-संकट में कुंई जैसी परंपराओं से हम क्या सीख सकते हैं? अपने विचार लिखिए। (5 अंक)
Hint
वर्षा-जल, स्थानीय ज्ञान और सामूहिक संरक्षण पर विचार करें।
Answer
कुंई सिखाती है कि वर्षा-जल को संजोना, स्थानीय परिस्थिति के अनुसार तकनीक अपनाना और जल को सार्वजनिक संपत्ति मानना ज़रूरी है। मरुभूमि के समाज ने सीमित वर्षा में भी मीठा पानी जुटाना सीखा। आज के जल-संकट में हम भी वर्षा-जल संचयन, खारे और मीठे जल को अलग रखने तथा पारंपरिक ज्ञान के सम्मान से सीख सकते हैं। इस प्रकार प्रकृति के साथ संतुलन ही समाधान है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.पाठ के लेखक कौन हैं?Show answer
अनुपम मिश्र।
2.पाठ किस पुस्तक में है?Show answer
वितान भाग 1।
3.कुंई के कारीगर कौन हैं?Show answer
चेलवांजी (चेजारो)।
4.पानी के तीन रूपों में से सीधे बरसात का जल कौन-सा है?Show answer
पालरपानी।
5.खुदाई का औज़ार क्या है?Show answer
बसौली।
राजस्थान की रजत बूँदें: कुंई और पानी के तीन रूप: frequently asked questions
कुंई क्या है?
वर्षा-जल की नमी को बूँद-बूँद मीठे पानी में बदलने वाला छोटा, गहरा कुआँ।
रेजा क्या है?
धरती में समाई वर्षा को नापने की इकाई, अंगुल के रूप में।
पाठ का संदेश क्या है?
पारंपरिक जल-संरक्षण और मरुभूमि के समाज की सूझ का महत्त्व।