नमक का दारोगा (प्रेमचंद): वंशीधर और अलोपीदीन, धन पर धर्म की जीत
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
नमक का दारोगा में वंशीधर धर्म (ईमानदारी) के और अलोपीदीन धन के प्रतिनिधि हैं। वंशीधर चालीस हज़ार की रिश्वत ठुकराकर अलोपीदीन को पकड़ते हैं, पर अदालत में धन के आगे हार जाते हैं और मुअत्तल होते हैं। अंत में वही अलोपीदीन उनकी ईमानदारी से प्रभावित होकर उन्हें अपना स्थायी मैनेजर बनाते हैं। इस तरह कहानी में धन पर धर्म की जीत दिखाई गई है।
Understand वंशीधर और अलोपीदीन: धन पर धर्म की जीत
वंशीधर का चरित्र। पिता की सीख थी कि नौकरी में ऊपरी आय देखो, क्योंकि मासिक वेतन पूर्णमासी का चाँद है। पर वंशीधर दारोगा बनकर ईमानदारी और कार्यकुशलता से छह महीने में अफ़सरों का विश्वास जीत लेते हैं। जाड़े की रात यमुना के पुल पर वे अलोपीदीन की नमक से लदी गाड़ियाँ पकड़ते हैं और एक हज़ार से चालीस हज़ार तक की रिश्वत पर भी नहीं डिगते। उनके गुण हैं ईमानदारी, निर्भीकता, कर्तव्यनिष्ठा और आत्मसम्मान।
अलोपीदीन का चरित्र। दातागंज के प्रतिष्ठित ज़मींदार अलोपीदीन को धन पर अटूट भरोसा है; वे मानते हैं कि न्याय और नीति लक्ष्मी के खिलौने हैं। अदालत में पैसे के बल पर वे छूट जाते हैं। पर वंशीधर की ईमानदारी देखकर उनका मन बदलता है। वे उन्हें कुलतिलक और धर्मपरायण कहते हैं और कहते हैं कि उन्हें ईमानदार आदमी चाहिए।
टकराव और समाज। कहानी भ्रष्टाचार की सामाजिक स्वीकृति दिखाती है: अदालत और लोग अलोपीदीन के साथ हैं और वंशीधर पर व्यंग्य करते हैं। इसीलिए ईमानदार का अकेलापन कहानी का एक पक्ष है।
अंत और संदेश। पाठ्यपुस्तक इसे आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का उदाहरण बताती है: यथार्थ में धन की ताकत दिखती है, पर अंत में आदर्श जीतता है। वंशीधर नौकरी खोकर भी नैतिक रूप से जीतते हैं। पाठ के अन्य पक्ष (पिता का उपदेश, अदालत का प्रसंग) अध्याय-पृष्ठ पर हैं।
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चाँद है
वंशीधर के पिता: नौकरी की सीख देते हुए।
ऊपरी आय पर पिता का ज़ोर और दुनियादारी की सोच।
न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं
अलोपीदीन: अपने विश्वास के रूप में।
धन की शक्ति पर उनका भरोसा।
धर्म ने धन को पैरों तले कुचल डाला।
कथावाचक: वंशीधर द्वारा रिश्वत ठुकराने और अलोपीदीन को हिरासत में लेने के प्रसंग में।
रिश्वत ठुकराने के क्षण में धर्म की धन पर विजय का संकेत; अंतिम विजय मैनेजर बनाए जाने से पूरी होती है।
वंशीधर और अलोपीदीन: धन पर धर्म की जीत: key facts
- प्रतिनिधित्व
- वंशीधर
- धर्म
- अलोपीदीन
- धन
- दोनों पात्र दो मूल्यों के प्रतीक हैं।
- वंशीधर के गुण
- ईमानदारी
- निर्भीकता
- कर्तव्यनिष्ठा
- आत्मसम्मान
- हर गुण के साथ घटना लिखें।
- कथा का क्रम
- पिता की सीख
- पुल पर गाड़ियाँ
- रिश्वत
- अदालत
- मैनेजर
- पाँच मोड़।
वंशीधर और अलोपीदीन: धन पर धर्म की जीत in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
लालच के सामने ईमानदारी
मान लीजिए एक परीक्षा-निरीक्षक के सामने एक प्रभावशाली व्यक्ति का बेटा नकल करते पकड़ा जाता है और व्यक्ति धन का प्रस्ताव रखता है। निरीक्षक मना करके रिपोर्ट लिख देता है, जबकि कुछ लोग उसे मूर्ख कहते हैं।
यह प्रसंग कहानी के किस पात्र और प्रसंग से मिलता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- निरीक्षक रिश्वत ठुकराता है।
- लोग उसका उपहास करते हैं।
- अंततः उसकी निष्ठा का महत्त्व दिखता है।
Answer: यह वंशीधर के रिश्वत ठुकराने और अदालत में उपहास सहने के प्रसंग से मिलता है। ईमानदारी तुरंत सम्मान न दे, तो भी अंततः उसका मूल्य बना रहता है।
Memory hook: ईमानदारी का फल देर से, पर पक्का।
Tricks to remember वंशीधर और अलोपीदीन: धन पर धर्म की जीत
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
धर्म बनाम धन
व = वंशीधर = धर्म; अ = अलोपीदीन = अन्न-धन।
Use it when: दोनों पात्रों का प्रतीक।
सीख-पुल-रिश्वत-अदालत-मैनेजर
पाँच मोड़ क्रम से याद करें।
Use it when: कथा-क्रम के प्रश्न में।
वंशीधर और अलोपीदीन: धन पर धर्म की जीत: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: वंशीधर का पद · 1 mark · MCQBoard level
वंशीधर किस विभाग में दारोगा बने?
(क) पुलिस (ख) नमक (ग) कर (घ) वन
Try it first, then show the solutionSolution
- वंशीधर नमक विभाग में दारोगा बने (1 अंक)।
Answer: (ख)
Example 2: पिता की सीख · 2 marks · Short answerBoard level
वंशीधर के पिता ने नौकरी के बारे में क्या सलाह दी और क्यों? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- ऊपरी आय वाली नौकरी चुनने की सलाह (1)।
- कारण: घर कर्ज़ में था, वेतन पूर्णमासी का चाँद (1)।
Answer: पिता ने कहा कि ऐसी नौकरी ढूँढ़ो जिसमें ऊपरी आय हो, क्योंकि घर कर्ज़ में डूबा है। उनके अनुसार मासिक वेतन पूर्णमासी के चाँद की तरह घटता जाता है।
Example 3: वंशीधर की निष्ठा · 3 marks · Short answerHarder board level
वंशीधर ने रिश्वत ठुकराकर अपने किन गुणों का परिचय दिया? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा (1)।
- निर्भीकता: एक हज़ार से चालीस हज़ार तक नहीं डिगे (1)।
- भाषा और शब्द-सीमा (1)।
Answer: वंशीधर ने रिश्वत ठुकराकर ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया। अलोपीदीन ने एक हज़ार से चालीस हज़ार तक की पेशकश की, पर वे नहीं डिगे। यह उनकी निर्भीकता और आत्मसम्मान को दिखाता है।
Example 4: गद्यांश · 5 marks · Source-basedHarder board level
पाठ के भाव पर आधारित अंश (अपने शब्दों में): अदालत में अलोपीदीन के धन और प्रभाव के आगे सब झुक गए। वे बरी हुए और वंशीधर पर व्यंग्यबाण बरसे। एक सप्ताह में वंशीधर मुअत्तल कर दिए गए। घर पर पिता ने उन्हें खूब कोसा।
(i) अदालत में निर्णय किसके पक्ष में रहा
(क) वंशीधर (ख) अलोपीदीन (ग) पिता (घ) अफ़सर
(ii) वंशीधर पर व्यंग्य बरसने का कारण था
(क) उनकी बेईमानी (ख) अलोपीदीन का प्रभाव (ग) उनका धन (घ) उनकी नौकरी
(iii) मुअत्तल होने का अर्थ है
(क) पदोन्नति (ख) कुछ समय के लिए पद से हटाना (ग) तबादला (घ) वेतन-वृद्धि
(iv) पिता के कोसने से झलकता है
(क) चिंता और निराशा (ख) संतोष (ग) हँसी (घ) गर्व
(v) यह प्रसंग समाज की किस स्थिति को दिखाता है
(क) ईमानदारी का सम्मान (ख) धन की ताकत और भ्रष्टाचार की स्वीकृति (ग) शिक्षा की प्रगति (घ) एकता
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रत्येक उप-प्रश्न 1 अंक का है।
Answer: (i) (ख); (ii) (ख); (iii) (ख); (iv) (क); (v) (ख)।
Example 5: अंत का औचित्य · 3 marks · Short answerHOTS / competency
"वंशीधर की जीत वास्तविक जीवन में संभव नहीं, केवल आदर्श है।" इस कथन पर अपना मत कहानी के आधार पर लिखिए। (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पक्ष: अदालत में धन की जीत (1)।
- विपक्ष: अलोपीदीन का हृदय-परिवर्तन (1)।
- निष्कर्ष: आदर्शोन्मुख यथार्थवाद (1)।
Answer: कहानी का यथार्थ यह है कि अदालत में धन की जीत हुई और ईमानदार व्यक्ति मुअत्तल हुआ। पर अंत में अलोपीदीन का हृदय-परिवर्तन आदर्श दिखाता है। इसलिए कहानी आदर्शोन्मुख यथार्थवाद की है: समाज की कठोरता मानती है, पर आशा भी बचाती है।
Where students lose marks in वंशीधर और अलोपीदीन: धन पर धर्म की जीत
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: वंशीधर को केवल सख़्त बताना
पाठ में वे विनम्र और कर्तव्यनिष्ठ भी हैं।
Wrong working
वंशीधर कठोर और अहंकारी थे।
Right working
वंशीधर ईमानदार, निर्भीक और आत्मसम्मानी थे।
Do this: गुणों के साथ घटना लिखें।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: अलोपीदीन को केवल खलनायक लिखना
अंत में उनका हृदय-परिवर्तन है।
Wrong working
अलोपीदीन अंत तक भ्रष्ट रहे।
Right working
वे अंत में वंशीधर की निष्ठा का सम्मान करते हैं।
Do this: अंतिम प्रसंग अवश्य लिखें।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: अंत का उल्लेख न करना
धन पर धर्म की जीत अंत से सिद्ध होती है।
Wrong working
वंशीधर नौकरी खोकर हार गए।
Right working
अंत में मैनेजर बनाकर उनकी जीत दिखाई गई।
Do this: अंत लिखकर उत्तर पूरा करें।
Usually costs: 2 अंक
Exam tips
- चरित्र-चित्रण में गुण के साथ एक घटना लिखें।
- धन पर धर्म की जीत को अंतिम प्रसंग से जोड़ें।
- आदर्शोन्मुख यथार्थवाद शब्द का प्रयोग करें।
- 2 अंक के उत्तर में लगभग 40 और 3 अंक में लगभग 60 शब्द लिखें।
- पंक्तियों का आशय बताते समय संदर्भ अवश्य लिखें।
Practice questions on वंशीधर और अलोपीदीन: धन पर धर्म की जीत
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
अलोपीदीन की गाड़ियों में क्या लदा था?
(क) अनाज (ख) नमक (ग) कपड़ा (घ) लकड़ीHint
विभाग के नाम से अनुमान लगाएँ।
Answer
(ख)
Q2 · 3 marks · Short answerHarder board level
अलोपीदीन ने अंत में वंशीधर को क्या प्रस्ताव दिया और क्यों? (लगभग 60 शब्द)
Hint
जायदाद, मैनेजर और ईमानदार आदमी की ज़रूरत।
Answer
अलोपीदीन ने वंशीधर को अपनी सारी जायदाद का स्थायी मैनेजर बनाने का पत्र दिया, जिसमें छह हज़ार वार्षिक वेतन और अनेक सुविधाएँ थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें ईमानदारी चाहिए। वे वंशीधर की निष्ठा से प्रभावित थे और जानते थे कि ऐसा व्यक्ति उनके धन को सुरक्षित रखेगा।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level
"दुनिया सोती थी, पर दुनिया की जीभ जागती थी।" इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
गाड़ियाँ पकड़ने के अगले दिन की चर्चा।
Answer
इस पंक्ति का आशय है कि रात में सब सोए थे, पर बात फैलने में देर नहीं लगी। अगले दिन पूरे शहर में अलोपीदीन के पकड़े जाने की चर्चा होने लगी। यह समाज की निंदा-प्रवृत्ति और खबर के तेज़ी से फैलने को दिखाता है।
Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level
कथन (A): वंशीधर ने रिश्वत ठुकराई। कारण (R): वे कर्तव्य को धन से बड़ा मानते थे।
(क) A और R सही, R, A की सही व्याख्या (ख) A और R सही, R व्याख्या नहीं (ग) A सही, R गलत (घ) A गलत, R सहीHint
कारण से कथन की व्याख्या होती है या नहीं?
Answer
(क)
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
अलोपीदीन को कहानी का नायक कहना उचित है या नहीं? कहानी के प्रमाण सहित तर्क दीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
नायक का मूल्य और अंत में बदलाव देखें।
Answer
अलोपीदीन को पूरी तरह नायक नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वे रिश्वत देते और अदालत को धन से खरीदते हैं। पर अंत में वे वंशीधर की ईमानदारी पहचानकर उसका सम्मान करते हैं। इसलिए वे खलनायक और सुधरे हुए पात्र के बीच रखे जा सकते हैं।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.नमक का दारोगा के लेखक कौन हैं?Show answer
प्रेमचंद।
2.दारोगा का नाम क्या है?Show answer
मुंशी वंशीधर।
3.ज़मींदार का नाम क्या है?Show answer
पंडित अलोपीदीन।
4.रिश्वत कितने तक पहुँची?Show answer
एक हज़ार से चालीस हज़ार तक।
5.अंत में अलोपीदीन ने वंशीधर को क्या बनाया?Show answer
अपनी जायदाद का स्थायी मैनेजर।
वंशीधर और अलोपीदीन: धन पर धर्म की जीत: frequently asked questions
यह कहानी किसका उदाहरण है?
आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का।
कहानी का मूल संदेश क्या है?
धन पर धर्म (ईमानदारी) की जीत।
वंशीधर क्यों मुअत्तल हुए?
अदालत में अलोपीदीन के धन और प्रभाव से वे बरी हो गए और वंशीधर पर कार्रवाई हुई।
पाठ किस पुस्तक में है?
आरोह भाग 1 में।