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HindiCBSE Class 11 · कृष्णा सोबती – मियाँ नसीरुद्दीन

मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती): हुनर पर गर्व, करके सीखने की सीख और बदलता ज़माना

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

मियाँ नसीरुद्दीन कृष्णा सोबती का शब्दचित्र है, जिसमें मटियामहल के सत्तर वर्षीय खानदानी नानबाई अपने हुनर पर गर्व करते हैं और बताते हैं कि काम करने से आता है, नसीहतों से नहीं। वे तालीम की तालीम को भी बड़ी चीज़ मानते हैं। अंत में उनकी बातों में बीते कद्रदान ज़माने की कसक झलकती है।

Nasiruddin says skill comes from doing each small task step by step, not from advice; the changing times leave him wistful.

Illustration drawn for QuestionBuddy.

Understand मियाँ नसीरुद्दीन: हुनर पर गर्व, करके सीखने की सीख और बदलता ज़माना

पहला परिचय। लेखिका मटियामहल के गढ़ैया मुहल्ले की एक मामूली, अँधेरी दुकान पर रुकती हैं, जहाँ खानदानी नानबाई मियाँ नसीरुद्दीन छप्पन किस्म की रोटियों के लिए प्रसिद्ध हैं। वे चारपाई पर बीड़ी पी रहे थे; चेहरा मौसम की मार से पका था और आँखों में चालाकी भरा भोलापन था।

तेवर और व्यंग्य। सवाल पूछने की बात पर पहले उन्होंने शक किया कि कहीं अखबारवाली तो नहीं, क्योंकि उनकी नज़र में अखबार बनाने और पढ़ने वाले दोनों निठल्ले हैं। यह उनके तेवर और खरेपन को दिखाता है।

खानदानी हुनर। उन्होंने रोटी पकाना किसी दूसरे कारीगर से नहीं, अपने पिता मियाँ बरकत शाही से सीखा। दादा मियाँ कल्लन आला नानबाई थे। पेशे पर गर्व उनके हर शब्द में है।

करके सीखना। नसीहत पर वे कहते हैं कि काम करने से आता है, नसीहतों से नहीं। वे समझाते हैं कि बर्तन धोना, भट्ठी बनाना और आँच देना सीखे बिना कोई सीधे नानबाई नहीं बनता; यानी तालीम की तालीम भी बड़ी चीज़ है।

कसक। बादशाह के लिए बनी ऐसी चीज़ का ज़िक्र, जो न आग से पकी न पानी से बनी, पर बताने से इनकार; बादशाह का नाम पूछने पर खीज; और बेटे-बेटियों के प्रसंग पर चेहरे पर दबे अंधड़ के आसार। बदलते ज़माने की कसक कहानी के अंत में उभरती है। शेष प्रसंग अध्याय-पृष्ठ पर हैं।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • काम करने से आता है, नसीहतों से नहीं।

    मियाँ नसीरुद्दीन: नसीहत के प्रश्न पर।

    अनुभव और अभ्यास ही असली शिक्षा है।

  • कहने का मतलब साहिब यह कि तालीम की तालीम भी बड़ी चीज़ होती है।

    मियाँ नसीरुद्दीन: कारीगरी सीखने के क्रम को समझाते हुए।

    बुनियादी तैयारी का महत्त्व।

  • उतर गए वे ज़माने।

    मियाँ नसीरुद्दीन: बातचीत के अंत में।

    बीते कद्रदान ज़माने की कसक।

मियाँ नसीरुद्दीन: हुनर पर गर्व, करके सीखने की सीख और बदलता ज़माना: key facts

मियाँ के गुण
  • हुनरमंद
  • स्वाभिमानी
  • खरे
  • अनुभवी
हर गुण के साथ संवाद लिखें।
वंश-परंपरा
  • मियाँ कल्लन
  • मियाँ बरकत शाही
  • मियाँ नसीरुद्दीन
तीन पीढ़ियाँ।
सीखने का क्रम
  • बर्तन धोना
  • भट्ठी बनाना
  • आँच देना
  • नानबाई बनना
तालीम की तालीम।

मियाँ नसीरुद्दीन: हुनर पर गर्व, करके सीखने की सीख और बदलता ज़माना in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

दादी का अचार

मान लीजिए एक युवती दादी से अचार बनाना सीखना चाहती है, पर दादी कहती हैं, "पहले बर्नी धोओ, मसाले कूटो, धूप दिखाओ, तब देखना।" कुछ महीनों में वह खुद सीख जाती है।

यह उदाहरण पाठ की किस सीख से मिलता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सीधे कला नहीं मिलती।
  2. पहले बुनियादी काम सीखते हैं।
  3. अभ्यास से हुनर आता है।

Answer: यह मियाँ नसीरुद्दीन की तालीम की तालीम वाली सीख से मिलता है, जहाँ बर्तन धोने और भट्ठी बनाने जैसे आरंभिक काम सीखे बिना नानबाई बनना संभव नहीं।

Memory hook: पहले बुनियाद, फिर हुनर।

Tricks to remember मियाँ नसीरुद्दीन: हुनर पर गर्व, करके सीखने की सीख और बदलता ज़माना

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • ब-भ-आ

    बर्तन, भट्ठी, आँच।

    Use it when: सीखने का क्रम।

  • क-ब-न

    कल्लन, बरकत शाही, नसीरुद्दीन।

    Use it when: तीन पीढ़ियाँ।

मियाँ नसीरुद्दीन: हुनर पर गर्व, करके सीखने की सीख और बदलता ज़माना: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: विधा · 1 mark · MCQBoard level

मियाँ नसीरुद्दीन किस विधा की रचना है?
(क) कहानी (ख) शब्दचित्र (ग) नाटक (घ) जीवनी

Try it first, then show the solutionSolution
  1. यह कहानी नहीं, शब्दचित्र है (1 अंक)।

Answer: (ख)

Example 2: अखबार पर राय · 2 marks · Short answerBoard level

मियाँ ने अखबारवालों के बारे में क्या राय दी? इससे उनके स्वभाव का क्या पता चलता है? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अखबार बनाने-पढ़ने वाले निठल्ले (1)।
  2. स्वभाव: खरापन और तेवर (1)।

Answer: मियाँ ने कहा कि अखबार बनाने और पढ़ने वाले दोनों निठल्ले होते हैं और पूछा कि कहीं वे अखबारनवीस तो नहीं। इससे उनका खरापन, बेबाकी और अपने काम पर गर्व झलकता है।

Example 3: काम करने से आता है · 3 marks · Short answerHarder board level

"काम करने से आता है, नसीहतों से नहीं।" इस कथन का आशय पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अभ्यास का महत्त्व (1)।
  2. बर्तन धोने से आँच देने तक का क्रम (1)।
  3. भाषा और शब्द-सीमा (1)।

Answer: मियाँ का आशय है कि हुनर केवल उपदेश सुनने से नहीं, काम करके सीखा जाता है। वे बताते हैं कि बर्तन धोना, भट्ठी बनाना और आँच देना सीखे बिना कोई सीधे नानबाई नहीं बनता। अनुभव और अभ्यास ही असली तालीम है।

Example 4: संवाद-अंश · 5 marks · Source-basedHarder board level

पाठ के भाव पर आधारित अंश (अपने शब्दों में): मियाँ ने कहा कि रोटी जनाब आँच से पकती है। उन्होंने बताया कि मदरसे की जमातों की तरह काम सीखने के भी दर्जे हैं: पहले बर्तन धोना, फिर भट्ठी बनाना और आँच देना। बिना इनके कोई सीधे नानबाई नहीं बनता।
(i) रोटी पकती है
(क) हाथ से (ख) आँच से (ग) पानी से (घ) हवा से
(ii) "जमातों" का उदाहरण दिया गया है
(क) सीखने के क्रम को समझाने के लिए (ख) खेल के लिए (ग) व्यापार के लिए (घ) यात्रा के लिए
(iii) नानबाई बनने के लिए पहले ज़रूरी है
(क) बर्तन धोना और भट्ठी बनाना (ख) नाम कमाना (ग) दुकान खरीदना (घ) विज्ञापन
(iv) इस कथन में मियाँ का भाव है
(क) अनुभव का महत्त्व (ख) आलस्य (ग) क्रोध (घ) लोभ
(v) अंश का संदेश है
(क) बुनियादी तैयारी का महत्त्व (ख) शिकायत (ग) हँसी (घ) घमंड

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रत्येक उप-प्रश्न 1 अंक का है।

Answer: (i) (ख); (ii) (क); (iii) (क); (iv) (क); (v) (क)।

Example 5: शब्दचित्र की सार्थकता · 3 marks · Short answerHOTS / competency

यदि इस रचना को कहानी की जगह शब्दचित्र कहा जाए, तो उसकी विशेषता क्या होगी? पाठ के आधार पर विचार कीजिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. घटनाएँ कम (1)।
  2. बातचीत से व्यक्तित्व की झलक (1)।
  3. निष्कर्ष (1)।

Answer: शब्दचित्र में घटनाएँ कम और व्यक्तित्व की झलकियाँ अधिक होती हैं। यह रचना एक ही बातचीत से बनी है, जिसमें मियाँ का तेवर, हुनर और कसक दिखती है। इसलिए इसे कहानी नहीं, व्यक्तित्व का चित्र कहना अधिक उचित है।

Where students lose marks in मियाँ नसीरुद्दीन: हुनर पर गर्व, करके सीखने की सीख और बदलता ज़माना

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: पाठ को कहानी बताना

    यह शब्दचित्र है।

    Wrong working

    यह मियाँ की कहानी है।

    Right working

    यह मियाँ नसीरुद्दीन का शब्दचित्र है।

    Do this: विधा सही लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: वंश-परंपरा में नाम बदलना

    नाम की गलती पर अंक कटते हैं।

    Wrong working

    दादा मियाँ बरकत शाही थे।

    Right working

    दादा मियाँ कल्लन, पिता मियाँ बरकत शाही।

    Do this: क्रम याद रखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: केवल प्रशंसा लिखना

    कसक भी पूछी जाती है।

    Wrong working

    मियाँ बहुत सफल कारीगर हैं।

    Right working

    मियाँ हुनरमंद हैं और बीते ज़माने की कसक भी रखते हैं।

    Do this: दोनों पक्ष लिखें।

    Usually costs: 1-2 अंक

Exam tips

  • चरित्र-चित्रण में हुनर, खरापन और कसक तीनों लिखें।
  • तालीम की तालीम का आशय बुनियादी तैयारी लिखें।
  • पाठ की विधा शब्दचित्र है, यह स्पष्ट लिखें।
  • पीढ़ियों के नाम सही क्रम में याद रखें।
  • 40 और 60 शब्दों की सीमा रखें।

Practice questions on मियाँ नसीरुद्दीन: हुनर पर गर्व, करके सीखने की सीख और बदलता ज़माना

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    मियाँ नसीरुद्दीन कितने किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए प्रसिद्ध हैं?
    (क) बीस (ख) छप्पन (ग) सौ (घ) चालीस

    Hint

    पाठ के आरंभ में बताया गया है।

    Answer

    (ख)

  2. Q2 · 3 marks · Short answerHarder board level

    मियाँ अपने बेटे-बेटियों की बात आने पर क्यों गंभीर हो गए? लेखिका ने क्या किया? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    चेहरे पर अंधड़ के आसार।

    Answer

    बेटे-बेटियों का प्रसंग छेड़ने की बात पर मियाँ के चेहरे पर दबे अंधड़ के आसार दिखे। इससे लगता है कि इसमें कोई पीड़ा है। लेखिका ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए यह प्रसंग नहीं छेड़ा, जो उनकी संवेदनशीलता दिखाता है।

  3. Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level

    पाठ में बीते ज़माने की कसक कैसे उभरती है? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    "उतर गए वे ज़माने" को देखें।

    Answer

    पाठ में मियाँ बीते कद्रदान ज़माने को याद करते हैं और कहते हैं कि वे ज़माने उतर गए। बादशाह के लिए बनी चीज़ का ज़िक्र और अपने पेशे पर गर्व भी उस बीते वक्त की याद दिलाते हैं। इसमें हुनर की कद्र घटने की कसक झलकती है।

  4. Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level

    कथन (A): मियाँ नसीरुद्दीन ने रोटी पकाना अपने पिता से सीखा। कारण (R): यह उनका खानदानी पेशा है।
    (क) A और R सही, R व्याख्या है (ख) A सही, R गलत (ग) A गलत, R सही (घ) दोनों गलत

    Hint

    पिता मियाँ बरकत शाही थे।

    Answer

    (क)

  5. Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency

    आज के युग में हुनर की कद्र घटने की चिंता इस पाठ से कैसे जुड़ती है? अपना मत दीजिए। (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    मशीनीकरण, पारंपरिक पेशे और पहचान।

    Answer

    आज कई पारंपरिक पेशे मशीनों और बाज़ार के दबाव में कमज़ोर हो रहे हैं। मियाँ की कसक इसी चिंता से जुड़ती है कि हुनर और कद्रदान दोनों घट रहे हैं। पाठ हमें हाथ के हुनर का सम्मान करने की सीख देता है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.मियाँ नसीरुद्दीन की लेखिका कौन हैं?Show answer

    कृष्णा सोबती।

  2. 2.दुकान किस मुहल्ले में है?Show answer

    मटियामहल के गढ़ैया मुहल्ले में।

  3. 3.मियाँ के पिता का नाम क्या है?Show answer

    मियाँ बरकत शाही।

  4. 4.दादा का नाम क्या है?Show answer

    मियाँ कल्लन।

  5. 5.पाठ किस संग्रह से है?Show answer

    हम-हशमत।

मियाँ नसीरुद्दीन: हुनर पर गर्व, करके सीखने की सीख और बदलता ज़माना: frequently asked questions

पाठ की विधा क्या है?

शब्दचित्र।

तालीम की तालीम का अर्थ क्या है?

काम सीखने की बुनियादी तैयारी का महत्त्व।

मियाँ की मुख्य विशेषता क्या है?

हुनर पर गर्व और खरापन।