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HindiCBSE Class 11 · मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई

मीरा – मेरे तो गिरधर गोपाल: अनन्य भक्ति, लोक-लाज का त्याग और सार-असार का विवेक

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

मीरा इस पद में मोर-मुकुटधारी गिरधर गोपाल को ही अपना पति मानकर अनन्य भक्ति प्रकट करती हैं। कृष्ण-प्रेम के लिए उन्होंने कुल की मर्यादा और लोक-लाज छोड़ दी, आँसुओं से प्रेम की बेल सींची, और दूध मथकर घी रख लिया तथा छाछ फेंक दी, यानी सार ग्रहण किया और संसार का मोह त्याग दिया। संसार को मोह में उलझा देख वे रो पड़ती हैं।

Understand मीरा का पद: अनन्य भक्ति, लोक-लाज का त्याग और सार-असार का विवेक

अनन्य भक्ति। मीरा कहती हैं कि मेरे तो केवल गिरधर गोपाल हैं, दूसरा कोई नहीं। जिनके सिर पर मोर-मुकुट है, वही मेरे पति हैं। यह दाम्पत्य भाव की भक्ति है, जिसमें आराध्य और भक्त का संबंध पति-पत्नी जैसा निजी और गहरा है।

बंधनों का त्याग। मैंने कुल की मर्यादा छोड़ दी है, अब कोई मेरा क्या कर लेगा। संतों के पास बैठ-बैठकर लोक-लाज भी खो दी है। यह समाज के दबावों के प्रति विद्रोह है और इसीलिए मीरा को स्त्री-मुक्ति की आवाज़ भी कहा गया है।

प्रेम की बेल। मैंने आँसुओं के जल से सींच-सींचकर प्रेम की बेल बोई है। अब वह फैल गई है और उस पर आनंद के फल लगे हैं: विरह के आँसुओं से पोषित प्रेम अब आत्मिक आनंद दे रहा है।

सार-असार का विवेक। दूध की मथानी में दूध बिलोकर दही से घी निकाल लिया और छाछ फेंक दी। भक्ति रूपी सार लिया, सांसारिक मोह रूपी सारहीन अंश त्यागा। अंत में भक्तों को देख मीरा प्रसन्न होती हैं और जगत को माया-मोह में उलझा देख रो पड़ती हैं। वे स्वयं को दासी कहकर प्रार्थना करती हैं कि अब मेरा उद्धार करो। इस वर्ष के पाठ्यक्रम में मीरा का यही एक पद है। पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ अध्याय-पृष्ठ पर है।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई

    मीरा: पद की पहली पंक्ति।

    अनन्य भक्ति का उद्घोष।

  • छांड़ि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई?

    मीरा: कुल-मर्यादा के त्याग पर।

    समाज के बंधनों के प्रति निर्भीक विद्रोह।

  • भगत देखि राजी हुयी, जगत देखि रोयी

    मीरा: पद के अंत में।

    भक्तों से प्रसन्नता, संसार की माया पर दुख।

मीरा का पद: अनन्य भक्ति, लोक-लाज का त्याग और सार-असार का विवेक: key facts

पद के चार भाव
  • अनन्य भक्ति
  • बंधनों का त्याग
  • प्रेम की बेल
  • सार-असार
चार चरण।
रूपक
  • आँसू
  • जल; प्रेम
  • बेल; दूध
  • संसार; घी
  • भक्ति; छाछ
  • मोह
हर प्रतीक का अर्थ।
मनोभाव
प्रसन्नता | दुख
भक्तों को देख प्रसन्न, जगत को देख दुखी।

मीरा का पद: अनन्य भक्ति, लोक-लाज का त्याग और सार-असार का विवेक in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

सार चुनने का विवेक

मान लीजिए एक विद्यार्थी सोशल मीडिया पर घंटों बिताने के बजाय पुस्तक-क्लब चुनता है और कहता है, "बाकी सब शोर है, सार यहाँ है।"

यह कथन पद के किस प्रतीक से मिलता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सार और असार में चयन।
  2. घी बनाम छाछ।
  3. मोह का त्याग।

Answer: यह मीरा के दूध मथकर घी रखने और छाछ फेंकने के रूपक से मिलता है। जो सार है उसे चुनना और सारहीन को त्यागना विवेक है।

Memory hook: घी रखो, छाछ फेंको।

Tricks to remember मीरा का पद: अनन्य भक्ति, लोक-लाज का त्याग और सार-असार का विवेक

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • ग-कु-बे-घी

    गिरधर, कुल की कानि, बेल, घी।

    Use it when: पद के चार प्रतीक।

  • भगत-जगत

    भगत देख राजी, जगत देख रोयी।

    Use it when: अंतिम भाव।

मीरा का पद: अनन्य भक्ति, लोक-लाज का त्याग और सार-असार का विवेक: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: आराध्य · 1 mark · MCQBoard level

मीरा किसे अपना पति मानती हैं?
(क) राम (ख) कृष्ण (ग) शिव (घ) विष्णु

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मोर-मुकुटधारी गिरधर गोपाल, यानी कृष्ण को (1 अंक)।

Answer: (ख)

Example 2: कुल की कानि · 2 marks · Short answerBoard level

"छांड़ि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई?" में मीरा के किस भाव का परिचय मिलता है? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कुल-मर्यादा का त्याग (1)।
  2. निर्भीकता और विद्रोह (1)।

Answer: इस पंक्ति में मीरा कहती हैं कि उन्होंने कुल की मर्यादा छोड़ दी है और अब कोई उनका क्या कर लेगा। इसमें उनकी निर्भीकता, समाज के बंधनों के प्रति विद्रोह और कृष्ण-प्रेम की दृढ़ता झलकती है।

Example 3: प्रेम की बेल · 3 marks · Short answerHarder board level

"अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी" का आशय स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. आँसुओं से सींचना: विरह (1)।
  2. बेल का फैलना और आनंद के फल (1)।
  3. भाषा और शब्द-सीमा (1)।

Answer: मीरा कहती हैं कि उन्होंने विरह के आँसुओं के जल से प्रेम की बेल सींची। अब वह बेल फैल गई है और उस पर आनंद के फल लग गए हैं। इसका आशय है कि कष्ट और विरह से पोषित भक्ति अब आत्मिक आनंद दे रही है।

Example 4: पदांश · 5 marks · Source-basedHarder board level

पद के भाव पर आधारित अंश (अपने शब्दों में): मीरा ने बड़े प्रेम से दूध की मथानी में दूध बिलोया, दही मथकर घी निकाल लिया और छाछ फेंक दी। भक्तों को देखकर वे प्रसन्न होती हैं, पर संसार को माया-मोह में उलझा देखकर रो पड़ती हैं। अंत में वे स्वयं को दासी कहकर प्रार्थना करती हैं।
(i) घी निकाल लेने का प्रतीकार्थ है
(क) भक्ति रूपी सार ग्रहण करना (ख) भोजन बनाना (ग) व्यापार (घ) खेल
(ii) छाछ फेंकने का अर्थ है
(क) मोह रूपी असार त्यागना (ख) भूख (ग) आलस्य (घ) दान
(iii) मीरा जगत को देखकर
(क) रो पड़ती हैं (ख) हँसती हैं (ग) डरती हैं (घ) क्रोध करती हैं
(iv) वे स्वयं को क्या कहती हैं
(क) दासी (ख) रानी (ग) मित्र (घ) बहन
(v) अंश का मूल भाव है
(क) सार-असार का विवेक और भक्ति (ख) हास्य (ग) युद्ध (घ) शिकायत

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रत्येक उप-प्रश्न 1 अंक का है।

Answer: (i) (क); (ii) (क); (iii) (क); (iv) (क); (v) (क)।

Example 5: पद और समाज · 3 marks · Short answerHOTS / competency

मीरा के पद में निजी भक्ति और सामाजिक विद्रोह एक साथ कैसे दिखते हैं? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. निजी भक्ति: गिरधर को पति मानना (1)।
  2. सामाजिक विद्रोह: कुल-मर्यादा और लोक-लाज का त्याग (1)।
  3. निष्कर्ष (1)।

Answer: मीरा कृष्ण को पति मानकर निजी और अनन्य भक्ति करती हैं, और इसी भक्ति के लिए कुल की मर्यादा तथा लोक-लाज छोड़ देती हैं। इस प्रकार भक्ति उनके लिए आत्मिक संबंध भी है और समाज के बंधनों के विरुद्ध खड़ा होने का साहस भी।

Where students lose marks in मीरा का पद: अनन्य भक्ति, लोक-लाज का त्याग और सार-असार का विवेक

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: केवल भक्ति लिखना, विद्रोह भूलना

    पद का सामाजिक पक्ष अंक देता है।

    Wrong working

    मीरा कृष्ण की भक्त हैं।

    Right working

    मीरा कृष्ण की भक्त हैं और कुल-लाज के बंधनों का त्याग करती हैं।

    Do this: दोनों पक्ष लिखें।

    Usually costs: 1-2 अंक

  • Mistake: घी-छाछ का अर्थ उलटा लिखना

    घी सार है, छाछ असार।

    Wrong working

    छाछ भक्ति है।

    Right working

    घी भक्ति (सार), छाछ मोह (असार)।

    Do this: प्रतीक-अर्थ याद रखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: दूसरे पद का उल्लेख

    इस वर्ष एक ही पद है।

    Wrong working

    पग घुँघरू बाँधि मीरा नाची का भावार्थ।

    Right working

    मेरे तो गिरधर गोपाल का भावार्थ।

    Do this: पाठ्यक्रम का पद पढ़ें।

    Usually costs: 2 अंक

Exam tips

  • चार भावों को क्रम से बिंदुओं में लिखें।
  • दूध-घी-छाछ के रूपक का अर्थ अवश्य दें।
  • दाम्पत्य भाव की भक्ति शब्द का प्रयोग करें।
  • अंतिम पंक्ति (भगत-जगत) को याद रखें।
  • 40 और 60 शब्दों की सीमा रखें।

Practice questions on मीरा का पद: अनन्य भक्ति, लोक-लाज का त्याग और सार-असार का विवेक

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    मीरा के गुरु किन्हें माना जाता है?
    (क) कबीर (ख) रैदास (ग) तुलसीदास (घ) सूरदास

    Hint

    कवयित्री-परिचय देखें।

    Answer

    (ख)

  2. Q2 · 3 marks · Short answerHarder board level

    दूध, घी और छाछ के रूपक का अर्थ पद के आधार पर समझाइए। (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    संसार, भक्ति और मोह।

    Answer

    दूध को मथकर घी निकालना और छाछ फेंकना सार ग्रहण करने और असार को त्यागने का रूपक है। संसार रूपी दूध से मीरा ने भक्ति रूपी घी लिया और सांसारिक मोह रूपी छाछ त्याग दी। यह उनके विवेक और वैराग्य को दिखाता है।

  3. Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level

    "भगत देखि राजी हुयी, जगत देखि रोयी" में मीरा के किन दो भावों का वर्णन है? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    प्रसन्नता और दुख।

    Answer

    इस पंक्ति में मीरा के दो भाव हैं: भक्तों को देखकर प्रसन्नता और संसार को माया-मोह तथा व्यर्थ के कामों में उलझा देख दुख। यह भक्ति की ओर आकर्षण और सांसारिकता के प्रति करुणा को दर्शाता है।

  4. Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level

    कथन (A): मीरा ने लोक-लाज की परवाह नहीं की। कारण (R): वे संतों के संग में बैठकर निर्भय हो गई थीं।
    (क) A और R सही, R व्याख्या है (ख) A सही, R गलत (ग) A गलत, R सही (घ) दोनों गलत

    Hint

    संतों के पास बैठकर लोक-लाज खोने की पंक्ति देखें।

    Answer

    (क)

  5. Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency

    मीरा को स्त्री-मुक्ति की आवाज़ कहा गया है। पद के आधार पर यह कथन कितना उचित है? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    कुल की कानि और लोक-लाज की पंक्तियाँ।

    Answer

    पद में मीरा कुल की मर्यादा और लोक-लाज के बंधनों को छोड़ देती हैं और कहती हैं कि अब कोई उनका क्या कर लेगा। इस निर्भीकता से उनका विद्रोही और स्वतंत्र स्वर दिखता है। इसलिए उन्हें स्त्री-मुक्ति की आवाज़ कहना उचित है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.मीरा किसे पति मानती हैं?Show answer

    गिरधर गोपाल (कृष्ण) को।

  2. 2.मीरा के गुरु कौन माने जाते हैं?Show answer

    संत रैदास।

  3. 3.मीरा ने प्रेम की बेल किससे सींची?Show answer

    आँसुओं के जल से।

  4. 4.छाछ का प्रतीकार्थ क्या है?Show answer

    सांसारिक मोह।

  5. 5.मीरा की भाषा क्या है?Show answer

    राजस्थानी, कहीं-कहीं ब्रजभाषा के प्रभाव के साथ।

मीरा का पद: अनन्य भक्ति, लोक-लाज का त्याग और सार-असार का विवेक: frequently asked questions

पद का केंद्रीय भाव क्या है?

अनन्य भक्ति, लोक-लाज का त्याग और वैराग्य।

यह पद कहाँ से लिया गया है?

नरोत्तम दास स्वामी द्वारा संपादित मीराँ मुक्तावली से।

मीरा का दूसरा पद क्यों नहीं पढ़ाया जाता?

वह पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।