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HindiCBSE Class 11 · कबीर – हम तौ एक एक करि जांनां

कबीर – हम तौ एक एक करि जांनां: ईश्वर की एकता, मानव-समानता और माया-त्याग

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

कबीर कहते हैं कि ईश्वर एक है और कण-कण में व्याप्त है। एक ही हवा, पानी और ज्योति सबमें है और एक ही कुम्हार ने एक ही मिट्टी से सब बर्तन गढ़े हैं, इसलिए ऊँच-नीच और माया पर गर्व निरर्थक है। जैसे लकड़ी कटती है, पर उसमें छिपी आग नहीं, वैसे शरीर नष्ट होता है, परमात्मा नहीं। जो यह जान लेता है, वह निर्भय हो जाता है।

Understand कबीर का पद: ईश्वर की एकता, मानव-समानता और माया-त्याग

पंक्ति 1: ईश्वर एक है। कबीर कहते हैं कि हमने तो ईश्वर को एक ही करके जाना है। जो उसे दो मानते हैं, उन्होंने उसे पहचाना ही नहीं; ऐसे लोग नरक के भागी हैं।

पंक्ति 2: एक ही तत्त्व। संसार में एक ही हवा बहती है, एक ही पानी है और सबमें एक ही ज्योति समाई है। एक ही कुम्हार ने एक ही मिट्टी को सानकर सब बर्तन गढ़े हैं। अर्थात् सब मनुष्यों का निर्माण एक ही तत्त्व से हुआ है, इसलिए भेदभाव निरर्थक है।

पंक्ति 3: आत्मा अविनाशी। बढ़ई लकड़ी को काट सकता है, पर लकड़ी में छिपी आग को कोई नहीं काट सकता। उसी तरह शरीर नष्ट हो सकता है, पर उसमें रहने वाला परमात्मा अविनाशी है। हे ईश्वर, तुम सब शरीरों के भीतर व्याप्त हो।

पंक्ति 4: माया और निर्भयता। संसार माया को देखकर उस पर लुभा गया है। कबीर पूछते हैं कि हे मनुष्य, तू किस बात पर गर्व करता है? जो इस सत्य को जान लेता है, वह निर्भय हो जाता है। कबीर इसी ज्ञान में दीवाने हो गए हैं।

कवि-परिचय। कबीर निर्गुण धारा की ज्ञानाश्रयी शाखा के कवि हैं। वे किताबी ज्ञान की जगह अनुभव को और जाति-वर्ण-संप्रदाय के भेद के विरोध को महत्त्व देते हैं। पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ अध्याय-पृष्ठ पर है।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • हम तौ एक एक करि जांनां।

    कबीर: पद की पहली पंक्ति।

    ईश्वर की एकता का उद्घोष।

  • एकै पवन एक ही पानीं एकै जोति समांनां।

    कबीर: सबमें एक तत्त्व बताते हुए।

    सब मनुष्य एक ही तत्त्व से बने हैं।

  • जैसे बाढ़ी काष्ट ही काटै अगिनि न काटै कोई।

    कबीर: आत्मा की अविनाशिता में।

    शरीर नश्वर, परमात्मा अविनाशी।

कबीर का पद: ईश्वर की एकता, मानव-समानता और माया-त्याग: key facts

चार भाव
  • ईश्वर की एकता
  • एक तत्त्व
  • अविनाशी आत्मा
  • माया का त्याग
चार पंक्तियों के चार भाव।
उदाहरण
  • हवा-पानी-ज्योति
  • कुम्हार-मिट्टी
  • बढ़ई-लकड़ी-आग
तीन दृष्टांत।
परिणाम
निर्भयता | भेदभाव का अंत
ज्ञान के फल।

कबीर का पद: ईश्वर की एकता, मानव-समानता और माया-त्याग in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

एक ही मिट्टी के खिलौने

मान लीजिए मेले में बिकने वाले अलग-अलग रंगों और आकार के खिलौने एक ही कुम्हार के हाथ से बने हैं, फिर भी लोग उनमें छोटे-बड़े का भेद करते हैं।

यह उदाहरण पद की किस पंक्ति से जुड़ता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सब एक ही मिट्टी के हैं।
  2. रूप अलग हैं, तत्त्व एक है।
  3. भेदभाव व्यर्थ है।

Answer: यह पंक्ति 2 से जुड़ता है, जहाँ कबीर कहते हैं कि एक ही कुम्हार ने एक ही मिट्टी से सब बर्तन गढ़े हैं। इसलिए ऊँच-नीच का भेद निरर्थक है।

Memory hook: रूप अनेक, मिट्टी एक।

Tricks to remember कबीर का पद: ईश्वर की एकता, मानव-समानता और माया-त्याग

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • ए-क-अ-मा

    एकता, कुम्हार, अग्नि, माया।

    Use it when: चार पंक्तियों के प्रतीक।

  • पवन-पानी-ज्योति

    तीन तत्त्व जो सबमें एक हैं।

    Use it when: पंक्ति 2।

कबीर का पद: ईश्वर की एकता, मानव-समानता और माया-त्याग: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: कबीर की धारा · 1 mark · MCQBoard level

कबीर किस काव्य-धारा के कवि हैं?
(क) सगुण (ख) निर्गुण (ग) रीति (घ) छायावाद

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कबीर निर्गुण धारा की ज्ञानाश्रयी शाखा के कवि हैं (1 अंक)।

Answer: (ख)

Example 2: कुम्हार का उदाहरण · 2 marks · Short answerBoard level

कबीर ने कुम्हार का उदाहरण क्यों दिया? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. एक कुम्हार, एक मिट्टी, अनेक बर्तन (1)।
  2. सब मनुष्य एक तत्त्व से बने, भेदभाव व्यर्थ (1)।

Answer: कबीर कहते हैं कि एक ही कुम्हार ने एक ही मिट्टी को सानकर सब बर्तन गढ़े हैं। इसी तरह सब मनुष्य एक ही रचयिता और तत्त्व से बने हैं। इसलिए ऊँच-नीच या भेदभाव का कोई अर्थ नहीं।

Example 3: बढ़ई और अग्नि · 3 marks · Short answerHarder board level

"जैसे बाढ़ी काष्ट ही काटै अगिनि न काटै कोई" का आशय स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. बढ़ई लकड़ी काटता है, आग नहीं (1)।
  2. शरीर नश्वर, परमात्मा अविनाशी (1)।
  3. भाषा और शब्द-सीमा (1)।

Answer: बढ़ई लकड़ी को काट सकता है, पर उसमें छिपी आग को नहीं काट सकता। इसी तरह शरीर नष्ट हो सकता है, पर उसमें रहने वाला परमात्मा या आत्मा अविनाशी है। कबीर इस दृष्टांत से बताते हैं कि मृत्यु ईश्वर को नहीं मिटा सकती।

Example 4: पदांश · 5 marks · Source-basedHarder board level

पद के भाव पर आधारित अंश (अपने शब्दों में): कबीर कहते हैं कि संसार में एक ही हवा बहती है और एक ही पानी है। सबमें एक ही ज्योति समाई है। एक ही कुम्हार ने एक ही मिट्टी को सानकर सब बर्तन गढ़े हैं। इसलिए जो लोग ईश्वर को दो मानते हैं, वे उसे नहीं पहचानते।
(i) सबमें समाई ज्योति का अर्थ है
(क) आत्मा या परमात्मा (ख) दीपक (ग) सूर्य (घ) अग्नि
(ii) कुम्हार के उदाहरण से भाव है
(क) सृष्टि का एक रचयिता (ख) कला (ग) व्यापार (घ) खेल
(iii) ईश्वर को दो मानने वाले कहे गए हैं
(क) नरक के भागी (ख) मुक्त (ग) धनवान (घ) विद्वान
(iv) पद का मूल भाव है
(क) एकता और समानता (ख) युद्ध (ग) व्यापार (घ) विलास
(v) "एक" से किसका संकेत है
(क) ईश्वर (ख) राजा (ग) धन (घ) गुरु

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रत्येक उप-प्रश्न 1 अंक का है।

Answer: (i) (क); (ii) (क); (iii) (क); (iv) (क); (v) (क)।

Example 5: पद की प्रासंगिकता · 3 marks · Short answerHOTS / competency

"कबीर का पद आज भी भेदभाव के विरुद्ध एक सशक्त संदेश है।" इस कथन का समर्थन कीजिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पद का भेदभाव-विरोध (1)।
  2. आज के संदर्भ में उदाहरण (1)।
  3. निष्कर्ष (1)।

Answer: कबीर कहते हैं कि सबमें एक हवा, एक पानी और एक ज्योति है, इसलिए जाति, वर्ण या संप्रदाय के भेद व्यर्थ हैं। आज भी जब समाज में भेदभाव दिखता है, तब यह संदेश समानता और भाईचारे की प्रेरणा देता है। इसलिए कथन सही है।

Where students lose marks in कबीर का पद: ईश्वर की एकता, मानव-समानता और माया-त्याग

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: पद का अर्थ केवल भक्ति लिखना

    पद का सामाजिक संदेश भी है।

    Wrong working

    कबीर ईश्वर की भक्ति करते हैं।

    Right working

    कबीर ईश्वर की एकता और मानव-समानता का संदेश देते हैं।

    Do this: समानता का उल्लेख करें।

    Usually costs: 1-2 अंक

  • Mistake: दृष्टांतों को गड्डमड्ड करना

    हर दृष्टांत का अलग भाव है।

    Wrong working

    कुम्हार से आत्मा की अविनाशिता।

    Right working

    कुम्हार से समानता; बढ़ई-आग से अविनाशिता।

    Do this: दृष्टांत-भाव जोड़ी याद रखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: दोनों पदों के भाव गड्डमड्ड करना

    दोनों पदों का विषय और भाव अलग है।

    Wrong working

    संतो देखत जग बौराना का भावार्थ।

    Right working

    हम तौ एक एक करि जांनां का भावार्थ।

    Do this: प्रश्न में पूछे गए पद की पहचान करके उसी का भावार्थ लिखें।

    Usually costs: 2 अंक

Exam tips

  • चार पंक्तियों के चार भाव क्रम से लिखें।
  • तीनों दृष्टांतों का भाव अलग-अलग लिखें।
  • पद का सामाजिक संदेश (समानता) अवश्य लिखें।
  • कबीर की ज्ञानाश्रयी शाखा और अनुभव का महत्त्व बताएँ।
  • 40 और 60 शब्दों की सीमा रखें।

Practice questions on कबीर का पद: ईश्वर की एकता, मानव-समानता और माया-त्याग

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    कबीर के अनुसार जो ईश्वर को दो मानते हैं, वे
    (क) सुखी हैं (ख) नरक के भागी हैं (ग) ज्ञानी हैं (घ) भक्त हैं

    Hint

    पंक्ति 1 का भाव याद करें।

    Answer

    (ख)

  2. Q2 · 3 marks · Short answerHarder board level

    "निरभै भया कछू नहिं ब्यापै" का क्या अर्थ है और कबीर निर्भय कब होते हैं? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    ज्ञान और माया।

    Answer

    इसका अर्थ है कि निर्भय हो जाने पर उसे कुछ नहीं व्यापता। कबीर के अनुसार जो इस सत्य को जान लेता है कि ईश्वर एक और सर्वव्यापक है, वह माया और भय से मुक्त हो जाता है। इसी ज्ञान में कबीर स्वयं दीवाने हो गए हैं।

  3. Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level

    माया पर गर्व निरर्थक क्यों है? पद के आधार पर लिखिए। (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    सब एक तत्त्व से बने, शरीर नश्वर।

    Answer

    पद के अनुसार सब मनुष्य एक ही तत्त्व से बने हैं और शरीर नश्वर है, इसलिए धन, पद या रूप का गर्व निरर्थक है। कबीर पूछते हैं कि हे मनुष्य, तू किस बात पर गर्व करता है? माया को देखकर संसार लुभा गया है, पर उसमें सार नहीं।

  4. Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level

    कथन (A): कबीर ने ईश्वर को सृष्टि के कण-कण में देखा है। कारण (R): वे सब में एक ही ज्योति मानते हैं।
    (क) A और R सही, R व्याख्या है (ख) A सही, R गलत (ग) A गलत, R सही (घ) दोनों गलत

    Hint

    एकै जोति समांनां।

    Answer

    (क)

  5. Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency

    कबीर किताबी ज्ञान की जगह अनुभव को महत्त्व देते हैं। इस पद में अनुभव के सहारे बताई गई बातें कौन-सी हैं? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    रोज़मर्रा के उदाहरण देखें।

    Answer

    पद में हवा-पानी, कुम्हार-मिट्टी और बढ़ई-लकड़ी-आग जैसे रोज़ के अनुभव के उदाहरण हैं। इनसे कबीर ईश्वर की एकता और आत्मा की अविनाशिता समझाते हैं। किताबों के बजाय ये उदाहरण सामान्य व्यक्ति को सीधे समझ आते हैं, यही कबीर की शैली है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.कबीर किस धारा के कवि हैं?Show answer

    निर्गुण (ज्ञानाश्रयी) धारा के।

  2. 2.ईश्वर को दो मानने वाले कहाँ जाते हैं?Show answer

    नरक के भागी कहे गए हैं।

  3. 3.सब बर्तन किसने गढ़े हैं?Show answer

    एक ही कुम्हार ने।

  4. 4.लकड़ी में कौन छिपा है?Show answer

    आग।

  5. 5.पद का अंतिम भाव क्या है?Show answer

    निर्भयता और ज्ञान में दीवानगी।

कबीर का पद: ईश्वर की एकता, मानव-समानता और माया-त्याग: frequently asked questions

पद का केंद्रीय भाव क्या है?

ईश्वर की एकता और मानव-समानता।

कबीर को वाणी का डिक्टेटर किसने कहा?

हज़ारी प्रसाद द्विवेदी ने।

कबीर किस धारा और शाखा के कवि हैं?

निर्गुण धारा की ज्ञानाश्रयी शाखा के।