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HindiCBSE Class 11 · दुष्यंत कुमार – गज़ल

दुष्यंत कुमार की गज़ल (साये में धूप): व्यंग्य और बदलाव की तलाश

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

दुष्यंत कुमार की गज़ल कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए शासन के झूठे वादों, अभाव सहने वाली जनता और कवि की आवाज़ दबाने की कोशिश पर व्यंग्य करती है। सातवें शेर में कवि चाहता है कि वह अपने बगीचे में गुलमोहर के नीचे जिए और मरे तो दूसरों के लिए। पूरी गज़ल का सूत्र है: जो चल रहा है उसे नकारना और बेहतर विकल्प की तलाश।

Understand दुष्यंत कुमार की गज़ल: व्यंग्य और बदलाव की तलाश

शिल्प। गज़ल में हर शेर दो पंक्तियों का, स्वतंत्र और पूरा होता है। पहला शेर मतला है, जिसकी दोनों पंक्तियों में तुक मिलती है। यहाँ हर शेर की दूसरी पंक्ति "...र के लिए" पर समाप्त होती है। गज़ल का शीर्षक नहीं होता। यह संग्रह साये में धूप से ली गई है।

व्यंग्य के शेर। पहला शेर: तय हुआ था कि हर घर के लिए चिराग होगा, पर पूरे शहर के लिए एक भी नहीं; यह वादों और वास्तविकता का अंतर है। दूसरे शेर में पेड़ों की छाया में भी धूप लगती है, यानी जिनसे राहत की आशा थी वही कष्ट देते हैं। तीसरे में जनता कमीज़ न होने पर पाँवों से पेट ढँक लेती है, यानी अभाव को चुपचाप सह लेती है।

आशा और संघर्ष। चौथा शेर: ईश्वर न सही, मनुष्य का सपना तो है। पाँचवें में कवि की बेचैनी है कि उसकी आवाज़ में ऐसा असर हो कि पत्थर भी पिघले। छठे में शासन से कहा जाता है कि राज तुम्हारा है, चाहो तो शायर की ज़ुबान सिल दो; यह अभिव्यक्ति पर पाबंदी पर व्यंग्य है।

सातवाँ शेर। जिएँ तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले और मरें तो दूसरों की गलियों में गुलमोहर के लिए: स्वाभिमान से जिएँ और ऊँचे उद्देश्य के लिए मरें। हर शेर का विस्तृत भावार्थ अध्याय-पृष्ठ पर है।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए,

    कवि: पहला शेर।

    वादे और वास्तविकता के अंतर पर व्यंग्य।

  • मैं बेकरार हूँ आवाज़ में असर के लिए।

    कवि: पाँचवें शेर में।

    कवि की बेचैनी कि उसकी बात असर करे।

  • तेरा निज़ाम है सिल दे ज़ुबान शायर की,

    कवि: छठे शेर में।

    अभिव्यक्ति पर पाबंदी पर तीखा व्यंग्य।

दुष्यंत कुमार की गज़ल: व्यंग्य और बदलाव की तलाश: key facts

शेरों के भाव
  • झूठे वादे
  • अभाव का सहना
  • सपना
  • आवाज़ का असर
  • पाबंदी
  • स्वाभिमान
क्रम से याद रखें।
शिल्प
  • मतला
  • शेर
  • तुक की निरंतरता
गज़ल की बनावट।
केंद्रीय सूत्र
नकार | विकल्प की तलाश
पूरी गज़ल का सार।

दुष्यंत कुमार की गज़ल: व्यंग्य और बदलाव की तलाश in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

खोखला वादा

मान लीजिए किसी मोहल्ले में पोस्टर लगा है कि हर गली में पानी का नल होगा, पर सालों बाद पूरे मोहल्ले में एक ही नल है। लोग चुपचाप बाल्टियाँ लेकर कतार में खड़े रहते हैं।

यह स्थिति गज़ल के किस शेर से मिलती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. वादा हर घर का था।
  2. सुविधा पूरे शहर में एक भी नहीं।
  3. जनता चुप है।

Answer: यह पहले शेर और तीसरे शेर से मिलती है, जहाँ वादे और वास्तविकता में अंतर है और जनता अभाव को चुपचाप सहती है।

Memory hook: वादा घर-घर, हाल शहर भर।

Tricks to remember दुष्यंत कुमार की गज़ल: व्यंग्य और बदलाव की तलाश

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • चिराग-छाया-कमीज़

    पहले तीन शेरों के प्रतीक।

    Use it when: व्यंग्य के शेर।

  • सपना-असर-ज़ुबान-गुलमोहर

    अंतिम चार शेरों का क्रम।

    Use it when: आशा और संघर्ष।

दुष्यंत कुमार की गज़ल: व्यंग्य और बदलाव की तलाश: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: गज़ल का संग्रह · 1 mark · MCQBoard level

यह गज़ल किस संग्रह से ली गई है?
(क) साये में धूप (ख) धरती (ग) बच्चन की मधुशाला (घ) अंधेरे में

Try it first, then show the solutionSolution
  1. यह दुष्यंत कुमार के संग्रह साये में धूप से है (1 अंक)।

Answer: (क)

Example 2: मतला · 2 marks · Short answerBoard level

गज़ल के पहले शेर को क्या कहते हैं और उसकी क्या विशेषता है? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पहले शेर को मतला कहते हैं (1)।
  2. दोनों पंक्तियों में तुक मिलती है (1)।

Answer: गज़ल के पहले शेर को मतला कहते हैं। उसकी विशेषता है कि दोनों पंक्तियों में तुक मिलती है। उसके बाद हर शेर की दूसरी पंक्ति उसी तुक का निर्वाह करती है, जैसे इस गज़ल में "...र के लिए"।

Example 3: तीसरा शेर · 3 marks · Short answerHarder board level

तीसरे शेर में "पाँवों से पेट ढँक लेंगे" का क्या आशय है? कवि का व्यंग्य क्या है? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. आशय: कमीज़ न हो तो अभाव सह लेना (1)।
  2. व्यंग्य: ऐसे लोग शोषण के सफ़र के लिए "उपयुक्त" (1)।
  3. भाषा और शब्द-सीमा (1)।

Answer: इसका आशय है कि लोग कमीज़ न होने पर भी पाँवों से पेट ढँककर अभाव को चुपचाप सह लेते हैं। कवि व्यंग्य करता है कि ऐसे लोग शोषण के इस सफ़र के लिए कितने उपयुक्त हैं, क्योंकि वे शिकायत नहीं करते। व्यंग्य सहने वालों से अधिक व्यवस्था पर है।

Example 4: पदांश · 5 marks · Source-basedHarder board level

गज़ल के भाव पर आधारित अंश (अपने शब्दों में): कवि कहता है कि तय हुआ था कि हर घर में दीपक जलेगा, पर पूरे शहर के लिए एक चिराग भी नहीं है। दूसरी ओर वह कहता है कि पेड़ों की छाया में भी धूप लगती है और इसलिए वह यहाँ से हमेशा के लिए चल देने की बात करता है।
(i) पहला शेर किस पर व्यंग्य है
(क) झूठे वादों पर (ख) प्रकृति पर (ग) मित्रता पर (घ) शिक्षा पर
(ii) "चिरागाँ" से भाव है
(क) दीपों की रोशनी या सुविधाएँ (ख) अंधकार (ग) शोर (घ) जल
(iii) "पेड़ों की छाया में धूप" का अर्थ है
(क) राहत की जगह कष्ट (ख) मौसम (ग) शीतलता (घ) जंगल
(iv) "यहाँ से चलें" में कवि का मनोभाव है
(क) मोहभंग (ख) हर्ष (ग) उत्साह (घ) लोभ
(v) अंश का मूल भाव है
(क) व्यवस्था से मोहभंग (ख) यात्रा का वर्णन (ग) प्रेम (घ) प्रकृति-प्रेम

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रत्येक उप-प्रश्न 1 अंक का है।

Answer: (i) (क); (ii) (क); (iii) (क); (iv) (क); (v) (क)।

Example 5: सातवें शेर का मूल्यांकन · 3 marks · Short answerHOTS / competency

सातवें शेर में जीने और मरने के लिए जो इच्छा है, उसे आप आज के संदर्भ में कैसे देखते हैं? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. जीना: अपने बगीचे में स्वाभिमान से (1)।
  2. मरना: दूसरों के लिए (1)।
  3. आज का संदर्भ (1)।

Answer: कवि चाहता है कि वह अपने बगीचे में स्वाभिमान से जिए और यदि मरना पड़े तो दूसरों के सुख-सौंदर्य या ऊँचे उद्देश्य के लिए मरे। आज भी यह भाव प्रासंगिक है, क्योंकि आत्मसम्मान के साथ समाज के लिए त्याग का विचार नागरिकता को अर्थ देता है।

Where students lose marks in दुष्यंत कुमार की गज़ल: व्यंग्य और बदलाव की तलाश

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: शेर का अर्थ अधूरा लिखना

    संदर्भ और व्यंग्य दोनों चाहिए।

    Wrong working

    पेड़ों की छाया सुखद होती है।

    Right working

    छाया में भी धूप लगना राहत देने वालों से कष्ट मिलना है।

    Do this: प्रतीकार्थ लिखें।

    Usually costs: 1-2 अंक

  • Mistake: गज़ल को शीर्षक वाली कविता लिखना

    गज़ल का शीर्षक नहीं होता।

    Wrong working

    गज़ल का शीर्षक चिरागाँ है।

    Right working

    गज़ल का शीर्षक नहीं होता; पहली पंक्ति से पहचान होती है।

    Do this: शिल्प याद रखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: तीसरे शेर में जनता का उपहास समझना

    व्यंग्य व्यवस्था पर है।

    Wrong working

    कवि जनता को कमज़ोर कहता है।

    Right working

    कवि व्यंग्य से शोषण के ढाँचे की ओर संकेत करता है।

    Do this: पीड़ित के प्रति सहानुभूति दिखाएँ।

    Usually costs: 1-2 अंक

Exam tips

  • हर शेर का प्रतीकार्थ एक पंक्ति में लिखें।
  • मतला और तुक का उल्लेख करें।
  • व्यंग्य किस पर है, यह स्पष्ट लिखें।
  • सातवें शेर में स्वाभिमान और त्याग दोनों बताएँ।
  • 40 और 60 शब्दों की सीमा रखें।

Practice questions on दुष्यंत कुमार की गज़ल: व्यंग्य और बदलाव की तलाश

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    गज़ल की प्रत्येक दूसरी पंक्ति किस पर समाप्त होती है?
    (क) ...र के लिए (ख) ...न के लिए (ग) ...ल के लिए (घ) ...त के लिए

    Hint

    तुक की निरंतरता देखें।

    Answer

    (क)

  2. Q2 · 3 marks · Short answerHarder board level

    पाँचवें शेर में कवि की बेचैनी का कारण क्या है? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    पत्थर और आवाज़ का असर।

    Answer

    सत्ता में बैठे लोग मानते हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता, यानी कठोर व्यवस्था या हृदय नहीं बदलेगा। कवि बेचैन है कि उसकी आवाज़ में ऐसा असर हो कि पत्थर भी पिघल जाए। यह शेर कवि की आशा और बदलाव की इच्छा को दिखाता है।

  3. Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level

    छठे शेर में कवि शासन पर क्या व्यंग्य करता है? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    ज़ुबान सिलना और पाबंदी।

    Answer

    कवि शासन से कहता है कि राज तुम्हारा है, चाहो तो शायर की ज़ुबान सिल दो। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पाबंदी पर तीखा व्यंग्य है। वह दिखाता है कि सत्ता आवाज़ दबाना चाहती है, जबकि कवि का काम सच कहना है।

  4. Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level

    कथन (A): चौथे शेर में कवि मनुष्य के सपने का सहारा लेता है। कारण (R): वह मानता है कि कम-से-कम एक सुंदर दृश्य आँखों के सामने रहे।
    (क) A और R सही, R व्याख्या है (ख) A सही, R गलत (ग) A गलत, R सही (घ) दोनों गलत

    Hint

    ईश्वर न सही, सपना सही।

    Answer

    (क)

  5. Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency

    क्या गज़ल केवल निराशा की रचना है? शेरों के आधार पर अपना मत दीजिए। (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    सपना, असर और गुलमोहर वाले शेर देखें।

    Answer

    गज़ल में व्यंग्य और मोहभंग तो है, पर निराशा ही नहीं है। चौथे शेर में सपने का सहारा, पाँचवें में आवाज़ के असर की बेचैनी और सातवें में गुलमोहर के तले जीने की इच्छा आशा दिखाती है। इसलिए यह बदलाव की तलाश की रचना है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.गज़ल के रचयिता कौन हैं?Show answer

    दुष्यंत कुमार।

  2. 2.गज़ल किस संग्रह से है?Show answer

    साये में धूप।

  3. 3.पहले शेर को क्या कहते हैं?Show answer

    मतला।

  4. 4.पहला शेर किस पर व्यंग्य है?Show answer

    झूठे वादों पर।

  5. 5.सातवें शेर में कौन-सा पेड़ आया है?Show answer

    गुलमोहर।

दुष्यंत कुमार की गज़ल: व्यंग्य और बदलाव की तलाश: frequently asked questions

गज़ल का केंद्रीय सूत्र क्या है?

जो चल रहा है उसे नकारना और बेहतर विकल्प की तलाश।

गज़ल का शीर्षक क्यों नहीं है?

गज़लों में शीर्षक देने का चलन नहीं है।

दुष्यंत कुमार को किसका श्रेय दिया जाता है?

हिंदी में गज़ल विधा को प्रतिष्ठित करने का।