गलता लोहा (शेखर जोशी): मोहन, धनराम और जातीय अभिमान का गलना
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
गलता लोहा में मेधावी पर निर्धन मोहन पढ़-लिखकर बड़ा नहीं बन पाता और गाँव लौटकर धनराम लोहार की भट्ठी पर बैठता है। वह स्वयं हथौड़ा उठाकर लोहे को सुघड़ गोला बना देता है। इस श्रम में मोहन के भीतर का जातीय अभिमान भी लोहे की तरह गल जाता है और कहानी जातिगत विभाजन पर चुपचाप टिप्पणी करती है।
Notice how Mohan's failed dream leads him to the forge, where shared labour makes him and Dhanraj equals and melts caste pride.
Illustration drawn for QuestionBuddy.
Understand गलता लोहा: मोहन, धनराम और जातीय अभिमान का गलना
मोहन। कुशाग्र बुद्धि और मधुर स्वर वाला मोहन मास्टर त्रिलोक सिंह का चहेता और स्कूल का मॉनीटर था। छात्रवृत्ति पाने पर पिता वंशीधर उसे बड़ा आदमी बनाने के सपने देखने लगे। पर लखनऊ में वह घरेलू नौकर जैसा हो गया, तकनीकी स्कूल में भेजा गया और अब कारखानों में नौकरी के चक्कर काटता है। स्वप्नभंग और संकोच उसके व्यक्तित्व के हिस्से हैं।
धनराम। धनराम तेरह का पहाड़ा याद न कर पाने पर पिटा; मास्टर ने ताना मारा कि उसके दिमाग में लोहा भरा है और उसे दराँतियों पर धार लगाने भेज दिया। जातिगत हीनता के कारण उसने कभी मोहन को प्रतिद्वंद्वी नहीं माना। पिता के बाद उसने उनका आफर सँभाल लिया।
अंतिम दृश्य। मोहन कुंद हँसुवा लेकर भट्ठी पर पहुँचता है और हथौड़ा उठाकर लोहे को सुघड़ गोला बना देता है। उसकी आँखों में सर्जक की चमक है। श्रम की गरिमा के सामने ऊँच-नीच का भेद टूट जाता है; यही लोहे का गलना और अभिमान का गलना है।
शैली। कहानी फ़्लैशबैक में चलती है, भाषा सहज है, और शेखर जोशी नई कहानी आंदोलन के प्रगतिशील कथाकार हैं जिनके केंद्र में मेहनतकश लोग हैं। बिरादरी का खोखला भाईचारा भी कहानी का एक पक्ष है। पाठ के शेष प्रसंग अध्याय-पृष्ठ पर हैं।
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है रे! विद्या का ताप कहाँ लगेगा इसमें?
मास्टर त्रिलोक सिंह: धनराम को ताना मारते हुए।
जातिगत पूर्वाग्रह और शिक्षक की कठोरता।
बिरादरी का यही सहारा होता है।
कहानी का पात्र: रमेश के प्रस्ताव के संदर्भ में।
बिरादरी के भाईचारे की सीमा।
उसकी आँखों में एक सर्जक की चमक थी
कथावाचक: मोहन के हथौड़ा चलाने पर।
श्रम से उपजा सृजन का सुख।
गलता लोहा: मोहन, धनराम और जातीय अभिमान का गलना: key facts
- लोहे का गलना
- ताप
- हथौड़ा
- सुघड़ गोला
- अभिमान का गलना
- प्रतीक का क्रम।
- मोहन के चरण
- मेधावी बालक
- छात्रवृत्ति
- लखनऊ
- स्वप्नभंग
- भट्ठी
- जीवन के पाँच मोड़।
- विषय
- जाति-भेद
- गरीबी
- श्रम की गरिमा
- बिरादरी का खोखलापन
- कहानी के चार पक्ष।
गलता लोहा: मोहन, धनराम और जातीय अभिमान का गलना in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
खेल के मैदान में बराबरी
मान लीजिए किसी स्कूल में एक विद्यार्थी अपने को ऊँचा मानता है, पर मिट्टी का घड़ा बनाने की प्रतियोगिता में एक कुम्हार के बेटे से सीखता है और मिलकर बनाता है। उसे अपने अभिमान पर शर्म आती है।
यह प्रसंग कहानी के किस भाव से जुड़ता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- श्रम से मेल होता है।
- भेद की दीवार गिरती है।
- अभिमान पिघलता है।
Answer: यह मोहन के भट्ठी पर बैठकर हथौड़ा उठाने और जातीय अभिमान के गलने से जुड़ता है। साझे श्रम में ऊँच-नीच का भेद टिक नहीं पाता।
Memory hook: श्रम में सब बराबर।
Tricks to remember गलता लोहा: मोहन, धनराम और जातीय अभिमान का गलना
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
लो-हा-थौ-सु
लोहा, हथौड़ा, सुघड़ गोला, सर्जक की चमक।
Use it when: अंतिम दृश्य के प्रतीक।
मो-ध
मोहन = बुद्धि, धनराम = हाथ का कौशल।
Use it when: दोनों पात्रों की तुलना।
गलता लोहा: मोहन, धनराम और जातीय अभिमान का गलना: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: लेखक का परिचय · 1 mark · MCQBoard level
गलता लोहा के लेखक कौन हैं?
(क) शेखर जोशी (ख) प्रेमचंद (ग) कृश्नचंदर (घ) कृष्णा सोबती
Try it first, then show the solutionSolution
- लेखक शेखर जोशी हैं (1 अंक)।
Answer: (क)
Example 2: मास्टर का ताना · 2 marks · Short answerBoard level
मास्टर त्रिलोक सिंह ने धनराम को ताना क्यों मारा? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- धनराम तेरह का पहाड़ा याद न कर सका (1)।
- ताना: दिमाग में लोहा भरा है (1)।
Answer: धनराम तेरह का पहाड़ा याद नहीं कर पाया, तो मास्टर ने ताना मारा कि उसके दिमाग में लोहा भरा है और विद्या का ताप कहाँ लगेगा। इस ताने में जातिगत पूर्वाग्रह भी झलकता है।
Example 3: मोहन का स्वप्नभंग · 3 marks · Short answerHarder board level
मोहन के जीवन में आशा से निराशा तक की यात्रा कैसे हुई? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- छात्रवृत्ति और पिता के सपने (1)।
- लखनऊ में नौकर जैसा जीवन, तकनीकी स्कूल (1)।
- भाषा और शब्द-सीमा (1)।
Answer: मोहन मेधावी था और छात्रवृत्ति पाने पर पिता ने उसे बड़ा आदमी बनाने के सपने देखे। पर लखनऊ में वह घरेलू नौकर जैसा हो गया और अपनी पहचान नहीं बना सका। उसे तकनीकी स्कूल भेजा गया और अब वह कारखानों में नौकरी के चक्कर काटता है।
Example 4: गद्यांश · 5 marks · Source-basedHarder board level
पाठ के भाव पर आधारित अंश (अपने शब्दों में): धनराम लोहे को आकार देने के काम में लगा था। मोहन ने हथौड़ा उठाया और चोट मारकर लोहे को सुंदर गोल आकार दे दिया। उसके चेहरे पर सर्जक की चमक थी।
(i) मोहन ने क्या किया
(क) भट्ठी छोड़ दी (ख) हथौड़ा चलाकर लोहे को आकार दिया (ग) धनराम को डाँटा (घ) कहानी सुनाई
(ii) "सर्जक की चमक" का अर्थ है
(क) रचना का सुख (ख) क्रोध (ग) भय (घ) अहंकार
(iii) इस कार्य से किस भेद पर चोट पड़ती है
(क) जातिगत भेद (ख) शैक्षिक अंतर (ग) आयु का भेद (घ) लिंग-भेद
(iv) धनराम की भूमिका इस दृश्य में है
(क) देखने वाले की (ख) साथी कारीगर की (ग) शत्रु की (घ) अफ़सर की
(v) अंश का मूल भाव है
(क) श्रम की गरिमा और भेदभाव का गलना (ख) लड़ाई (ग) शिकायत (घ) पलायन
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रत्येक उप-प्रश्न 1 अंक का है।
Answer: (i) (ख); (ii) (क); (iii) (क); (iv) (ख); (v) (क)।
Example 5: शीर्षक की सार्थकता · 3 marks · Short answerHOTS / competency
"गलता लोहा" शीर्षक की सार्थकता पाठ के आधार पर तर्क सहित लिखिए। (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- लोहे का शाब्दिक गलना (1)।
- अभिमान का प्रतीकात्मक गलना (1)।
- निष्कर्ष (1)।
Answer: शीर्षक दो स्तरों पर सार्थक है। भट्ठी में लोहा तपकर गलता है, और उसी कार्य में मोहन का जातीय अभिमान भी गल जाता है। इस प्रकार शीर्षक श्रम और जातिगत विभाजन के टूटने का प्रतीक बन जाता है।
Where students lose marks in गलता लोहा: मोहन, धनराम और जातीय अभिमान का गलना
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: कहानी को केवल गरीबी की कथा लिखना
मुख्य विषय जातिगत भेद है।
Wrong working
यह मोहन की गरीबी की कहानी है।
Right working
यह जाति-भेद, गरीबी और श्रम की गरिमा की कहानी है।
Do this: जातीय अभिमान का उल्लेख करें।
Usually costs: 2 अंक
Mistake: धनराम को ऊँची जाति का लिखना
वह लोहार, शिल्पकार टोले का है।
Wrong working
धनराम ब्राह्मण था।
Right working
धनराम लोहार था।
Do this: पात्र-परिचय याद रखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: शीर्षक का एक ही अर्थ लिखना
शीर्षक का प्रतीकात्मक अर्थ भी है।
Wrong working
लोहा भट्ठी में गलता है।
Right working
लोहा गलता है और अभिमान भी गलता है।
Do this: दोनों अर्थ लिखें।
Usually costs: 1-2 अंक
Exam tips
- शीर्षक के प्रश्न में शाब्दिक और प्रतीकात्मक दोनों अर्थ लिखें।
- मोहन और धनराम की तुलना जोड़ी में याद रखें।
- फ़्लैशबैक शिल्प का उल्लेख करें।
- अंतिम दृश्य के बिना उत्तर पूरा न करें।
- 40 और 60 शब्दों की सीमा रखें।
Practice questions on गलता लोहा: मोहन, धनराम और जातीय अभिमान का गलना
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
धनराम किस जाति का कारीगर है?
(क) बढ़ई (ख) लोहार (ग) कुम्हार (घ) दर्ज़ीHint
वह आफर सँभालता है।
Answer
(ख)
Q2 · 3 marks · Short answerHarder board level
मोहन भट्ठी पर क्यों पहुँचता है और वहाँ क्या होता है? (लगभग 60 शब्द)
Hint
कुंद हँसुवा और धार।
Answer
मोहन खेतों की झाड़ियाँ काटने के लिए हँसुवा लेकर निकला, पर उसकी धार कुंद थी। इसलिए वह धनराम की भट्ठी पर पहुँचा। वहाँ बैठकर वे बचपन की याद करते हैं और अंत में मोहन स्वयं हथौड़ा उठाकर लोहे को सुघड़ गोला बना देता है।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level
"बिरादरी का यही सहारा होता है" पंक्ति पर कहानी के आधार पर टिप्पणी कीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
रमेश और लखनऊ का प्रसंग।
Answer
बिरादरी के रमेश ने मोहन को लखनऊ ले जाने का प्रस्ताव दिया, पर वहाँ मोहन घरेलू नौकर जैसा बन गया। इस प्रसंग में बिरादरी का भाईचारा खोखला दिखता है। पंक्ति में व्यंग्य है, क्योंकि सहारे के नाम पर शोषण हुआ।
Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level
कथन (A): धनराम ने कभी मोहन को प्रतिद्वंद्वी नहीं माना। कारण (R): बचपन से उसके मन में जातिगत हीनता बैठा दी गई थी।
(क) A और R सही, R व्याख्या है (ख) A सही, R गलत (ग) A गलत, R सही (घ) दोनों गलतHint
धनराम की सोच का आधार क्या है?
Answer
(क)
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
कहानी में शिक्षा और श्रम की तुलना कीजिए। लेखक किसे अधिक महत्त्व देता प्रतीत होता है? (लगभग 60 शब्द)
Hint
मोहन की शिक्षा बनाम हथौड़े का कौशल।
Answer
मोहन की शिक्षा उसे नौकरी नहीं दिला पाई, जबकि हथौड़े का श्रम उसे सृजन का सुख देता है। लेखक श्रम की गरिमा को महत्त्व देता प्रतीत होता है, पर शिक्षा को पूरी तरह नकारता नहीं। वह बताता है कि शिक्षा का अभिमान श्रम को छोटा नहीं बनाना चाहिए।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.गलता लोहा के लेखक कौन हैं?Show answer
शेखर जोशी।
2.धनराम का पेशा क्या है?Show answer
लोहार का।
3.स्कूल के मास्टर का नाम क्या है?Show answer
त्रिलोक सिंह।
4.मोहन को कौन लखनऊ ले गया?Show answer
बिरादरी का युवक रमेश।
5.कहानी किस शिल्प में है?Show answer
फ़्लैशबैक में।
गलता लोहा: मोहन, धनराम और जातीय अभिमान का गलना: frequently asked questions
कहानी का केंद्रीय संदेश क्या है?
श्रम की गरिमा और जातिगत भेद का मिटना।
मोहन ने अंत में क्या किया?
हथौड़ा उठाकर लोहे को सुघड़ गोला बना दिया।
शेखर जोशी किस आंदोलन के कथाकार हैं?
नई कहानी आंदोलन के।