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HindiCBSE Class 11 · अक्कमहादेवी – हे भूख! मत मचल, हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर

अक्कमहादेवी के दो वचन: इंद्रिय-निग्रह और अहंकार-नाश

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

पहले वचन में अक्कमहादेवी भूख, प्यास, नींद, क्रोध, मोह, लोभ, मद और ईर्ष्या से प्रेमपूर्वक मनुहार करती हैं कि वे उन्हें न सताएँ, ताकि वे शिव की ओर बढ़ सकें। दूसरे वचन में वे जूही के फूल जैसे ईश्वर से माँगती हैं कि उन्हें भीख भी न मिले और अपना घर भूल जाएँ, ताकि अहंकार पूरी तरह नष्ट हो और वे निस्पृह भाव से ईश्वर में लीन हो सकें।

Understand अक्कमहादेवी के दो वचन: इंद्रिय-निग्रह और अहंकार-नाश

वचन 1: इंद्रिय-निग्रह। कवयित्री एक-एक करके अपनी शारीरिक इच्छाओं और मनोविकारों को संबोधित करती हैं: भूख, प्यास, नींद, क्रोध, मोह, लोभ, मद और ईर्ष्या। वे इन्हें डाँटती नहीं, मनुहार करती हैं। यही इस वचन की विशेषता है: उपदेश नहीं, प्रेम-भरी विनती। अंत में वे चराचर से कहती हैं कि अवसर मत चूको, क्योंकि वे चन्नमल्लिकार्जुन (शिव) का संदेश लेकर आई हैं।

वचन 2: अहंकार-नाश। कवयित्री ईश्वर को जूही के फूल जैसा कहती हैं, यानी कोमल, सुगंधित, शुभ्र। वे चाहती हैं कि ईश्वर उनसे भीख मँगवाए और वे अपना घर पूरी तरह भूल जाएँ। झोली फैलाने पर भीख न मिले; कोई कुछ दे तो वह नीचे गिर जाए; उठाने झुकें तो कोई कुत्ता छीन ले जाए। ये कठोर कामनाएँ इसलिए हैं कि उनका स्व या अहंकार पूरी तरह मिट जाए।

दोनों वचनों का संबंध। पहला वचन मन और इंद्रियों को साधने की बात करता है, दूसरा उससे आगे जाकर अहंकार और भौतिक सहारों के पूर्ण त्याग की कामना करता है।

कवयित्री का परिचय। अक्कमहादेवी 12वीं सदी की कन्नड़ कवयित्री और वीर शैव आंदोलन से जुड़ी संत थीं। उनके आराध्य चन्नमल्लिकार्जुन (शिव) थे। इन वचनों का अनुवाद केदारनाथ सिंह ने किया है। पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ अध्याय-पृष्ठ पर है।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • हे भूख! मत मचल

    कवयित्री: पहले वचन की शुरुआत।

    मनुहार के स्वर में इंद्रियों से विनती।

  • ओ चराचर! मत चूक अवसर

    कवयित्री: पहले वचन का अंत।

    सारे जड़-चेतन जगत को चेतावनी और आह्वान।

  • कि भूल जाऊँ अपना घर पूरी तरह

    कवयित्री: दूसरे वचन में।

    सांसारिक आसक्ति से पूर्ण मुक्ति की इच्छा।

अक्कमहादेवी के दो वचन: इंद्रिय-निग्रह और अहंकार-नाश: key facts

पहले वचन के विकार
  • भूख
  • प्यास
  • नींद
  • क्रोध
  • मोह
  • लोभ
  • मद
  • ईर्ष्या
आठ को क्रम से याद रखें।
स्वर
मनुहार | उपदेश नहीं
पहले वचन की विशेषता।
दूसरे वचन के चरण
  • भीख न मिले
  • दी गई वस्तु गिरे
  • कुत्ता छीन ले
अहंकार-नाश के तीन चित्र।

अक्कमहादेवी के दो वचन: इंद्रिय-निग्रह और अहंकार-नाश in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

व्रत में भूख को मनाना

मान लीजिए कोई विद्यार्थी परीक्षा-तैयारी के लिए रात भर जागने का निश्चय करता है और नींद से कहता है, "अभी मत आओ, काम पूरा करने दो।"

यह कथन वचन के किस स्वर से मिलता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अपने विकार से बातचीत।
  2. डाँट नहीं, प्रेम से विनती।
  3. लक्ष्य के लिए संयम।

Answer: यह पहले वचन के मनुहार वाले स्वर से मिलता है, जहाँ कवयित्री भूख, प्यास और नींद से कठोर होकर नहीं, प्रेम से विनती करती हैं।

Memory hook: डाँटो मत, मनाओ।

Tricks to remember अक्कमहादेवी के दो वचन: इंद्रिय-निग्रह और अहंकार-नाश

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • भू-प्या-नी-क्रो

    भूख, प्यास, नींद, क्रोध, फिर मोह, लोभ, मद, ईर्ष्या।

    Use it when: आठ विकारों का क्रम।

  • भीख-गिरे-कुत्ता

    तीन चित्र दूसरे वचन के।

    Use it when: अहंकार-नाश के प्रश्न में।

अक्कमहादेवी के दो वचन: इंद्रिय-निग्रह और अहंकार-नाश: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: वचन 1 की शुरुआत · 1 mark · MCQBoard level

पहले वचन में कवयित्री सबसे पहले किससे विनती करती हैं?
(क) प्यास (ख) भूख (ग) नींद (घ) क्रोध

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पहली पंक्ति में "हे भूख! मत मचल" है (1 अंक)।

Answer: (ख)

Example 2: मनुहार · 2 marks · Short answerBoard level

पहले वचन को उपदेश के बजाय मनुहार क्यों कहा गया है? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कवयित्री विकारों को प्रेम से संबोधित करती हैं (1)।
  2. आदेश या डाँट का स्वर नहीं है (1)।

Answer: कवयित्री भूख, प्यास, नींद और क्रोध आदि को आदेश नहीं देतीं, बल्कि प्रेम से कहती हैं कि वे उन्हें न सताएँ। इसलिए यह उपदेश नहीं, मनुहार है, जिसमें अपने ही मन के विकारों के प्रति कोमल भाव झलकता है।

Example 3: अहंकार-नाश · 3 marks · Short answerHarder board level

दूसरे वचन में कवयित्री भीख न मिलने की कामना क्यों करती हैं? (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अहंकार मिटाने की इच्छा (1)।
  2. सांसारिक सहारों का त्याग (1)।
  3. भाषा और शब्द-सीमा (1)।

Answer: कवयित्री चाहती हैं कि झोली फैलाने पर भीख न मिले और जो मिले वह गिर जाए या कुत्ता छीन ले। यह कामना इसलिए है कि उनका अहंकार और भौतिक सहारे पूरी तरह मिट जाएँ। तभी वे घर भूलकर निस्पृह भाव से ईश्वर में लीन हो पाएँगी।

Example 4: पदांश · 5 marks · Source-basedHarder board level

वचन के भाव पर आधारित अंश (अपने शब्दों में): कवयित्री भूख से कहती हैं कि वह मचले नहीं, प्यास से कि वह तड़पाए नहीं और नींद से कि वह सताए नहीं। क्रोध से वे कहती हैं कि वह मन में उथल-पुथल न मचाए। वे मोह से कहती हैं कि वह अपने बंधन ढीले कर दे।
(i) कवयित्री का स्वर है
(क) आदेश का (ख) मनुहार का (ग) क्रोध का (घ) हँसी का
(ii) "मोह के बंधन ढीले करने" का आशय है
(क) आसक्ति से मुक्ति (ख) धन की इच्छा (ग) मित्रता (घ) भय
(iii) ये विकार किसकी साधना में बाधक हैं
(क) ईश्वर-प्राप्ति की (ख) खेल की (ग) व्यापार की (घ) पढ़ाई की
(iv) "क्रोध से उथल-पुथल न मचाने" का अर्थ है
(क) मन में अशांति न लाना (ख) शोर करना (ग) घर छोड़ना (घ) भोजन करना
(v) इस अंश का मूल भाव है
(क) इंद्रिय-निग्रह (ख) धनार्जन (ग) यात्रा (घ) शिक्षा

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रत्येक उप-प्रश्न 1 अंक का है।

Answer: (i) (ख); (ii) (क); (iii) (क); (iv) (क); (v) (क)।

Example 5: दोनों वचनों की तुलना · 3 marks · Short answerHOTS / competency

"दोनों वचन एक ही यात्रा के दो चरण हैं।" इस कथन को स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पहला चरण: विकारों पर नियंत्रण (1)।
  2. दूसरा चरण: अहंकार का पूर्ण त्याग (1)।
  3. निष्कर्ष (1)।

Answer: पहला वचन मन और इंद्रियों के विकारों को साधने की बात करता है, जो ईश्वर-मार्ग की शुरुआत है। दूसरा वचन उससे आगे बढ़कर अहंकार और सांसारिक सहारों को पूरी तरह छोड़ने की कामना करता है। दोनों मिलकर पूर्ण समर्पण की यात्रा के दो चरण हैं।

Where students lose marks in अक्कमहादेवी के दो वचन: इंद्रिय-निग्रह और अहंकार-नाश

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: वचन 1 को उपदेश लिखना

    स्वर मनुहार का है।

    Wrong working

    कवयित्री सबको उपदेश देती हैं।

    Right working

    कवयित्री विकारों से प्रेम-भरी मनुहार करती हैं।

    Do this: "मनुहार" शब्द लिखें।

    Usually costs: 1-2 अंक

  • Mistake: विकारों की सूची अधूरी लिखना

    आठ विकार हैं।

    Wrong working

    भूख, प्यास और नींद।

    Right working

    भूख, प्यास, नींद, क्रोध, मोह, लोभ, मद, ईर्ष्या।

    Do this: क्रम से सब लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: भीख न मिलने को निराशा मानना

    यह अहंकार-नाश की कामना है।

    Wrong working

    कवयित्री दुखी हैं।

    Right working

    वे अहंकार मिटाने के लिए ऐसा चाहती हैं।

    Do this: कारण स्पष्ट लिखें।

    Usually costs: 2 अंक

Exam tips

  • वचन 1 में "मनुहार" शब्द और आठ विकार लिखें।
  • वचन 2 में तीन चित्र: भीख न मिलना, वस्तु गिरना, कुत्ते का छीनना।
  • दोनों वचनों का संबंध एक पंक्ति में लिखें।
  • कवयित्री का परिचय (12वीं सदी, कन्नड़, शिव) संक्षेप में लिखें।
  • 40 और 60 शब्दों की सीमा का ध्यान रखें।

Practice questions on अक्कमहादेवी के दो वचन: इंद्रिय-निग्रह और अहंकार-नाश

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    अक्कमहादेवी के आराध्य कौन थे?
    (क) राम (ख) कृष्ण (ग) चन्नमल्लिकार्जुन (शिव) (घ) विष्णु

    Hint

    वचनों में उनका नाम आता है।

    Answer

    (ग)

  2. Q2 · 3 marks · Short answerHarder board level

    "ओ चराचर! मत चूक अवसर" पंक्ति में कवयित्री किसे और क्यों संबोधित करती हैं? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    चराचर का अर्थ जड़-चेतन जगत।

    Answer

    कवयित्री चराचर यानी संपूर्ण जड़-चेतन जगत को संबोधित करती हैं। वे कहती हैं कि यह अवसर मत चूको, क्योंकि वे चन्नमल्लिकार्जुन का संदेश लेकर आई हैं। इसमें आह्वान है कि सब मिलकर ईश्वर-भक्ति का यह अवसर पहचानें।

  3. Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level

    ईश्वर को "जूही के फूल जैसा" कहने का क्या कारण है? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    कोमलता, सुगंध और शुभ्रता।

    Answer

    जूही का फूल कोमल, सुगंधित और शुभ्र होता है। कवयित्री अपने आराध्य को वैसा ही सुंदर, पवित्र और प्रिय मानती हैं। इस उपमा से ईश्वर के प्रति उनका स्नेह और आदर झलकता है, और ईश्वर का रूप कठोर नहीं, कोमल दिखता है।

  4. Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level

    कथन (A): अक्कमहादेवी ने विकारों को डाँटा। कारण (R): वे उपदेश देना चाहती थीं।
    (क) दोनों सही (ख) A गलत, R गलत (ग) A सही, R गलत (घ) A गलत, R सही

    Hint

    वचन 1 का स्वर कैसा है?

    Answer

    (ख)

  5. Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency

    दूसरे वचन की कठोर कामनाओं को आप भक्ति की दृष्टि से कैसे उचित मानेंगे? (लगभग 60 शब्द)

    Hint

    अहंकार और आसक्ति के संदर्भ में सोचें।

    Answer

    ये कामनाएँ कठोर लगती हैं, पर कवयित्री का लक्ष्य अहंकार और आसक्ति का पूर्ण नाश है। उनके अनुसार जब तक व्यक्ति दूसरों से पाने की आशा रखता है, तब तक वह पूरी तरह समर्पित नहीं हो पाता। इसलिए भक्ति की दृष्टि से ये कामनाएँ उचित हैं।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.अक्कमहादेवी किस सदी की कवयित्री थीं?Show answer

    12वीं सदी की।

  2. 2.वे किस भाषा की कवयित्री थीं?Show answer

    कन्नड़ की।

  3. 3.वचनों का अनुवाद किसने किया?Show answer

    केदारनाथ सिंह ने।

  4. 4.उनके आराध्य कौन थे?Show answer

    चन्नमल्लिकार्जुन (शिव)।

  5. 5.वचन 2 में ईश्वर को किसके समान कहा गया है?Show answer

    जूही के फूल के।

अक्कमहादेवी के दो वचन: इंद्रिय-निग्रह और अहंकार-नाश: frequently asked questions

वचन किसे कहते हैं?

वीर शैव संतों की भक्ति-रचनाओं को, जो पाठ में दो रूपों में हैं।

पहले वचन का मूल भाव क्या है?

इंद्रियों और विकारों पर संयम।

दूसरे वचन का मूल भाव क्या है?

अहंकार का पूर्ण त्याग और ईश्वर में लीनता।