तुलसीदास – कवितावली, लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप: Class 12
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
इस पाठ में तुलसीदास के दो अंश हैं। 'कवितावली' (उत्तर कांड) के कवित्त-सवैये में उनके युग की गरीबी, बेरोज़गारी और 'पेट की आग' का यथार्थ चित्र है। 'रामचरितमानस' के लंका कांड का अंश 'लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप' में शक्ति-बाण से मूर्छित लक्ष्मण के लिए राम का करुण विलाप और हनुमान के लौटने पर हर्ष है।
What तुलसीदास – कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप is about
गोस्वामी तुलसीदास (जन्म 1532 के आसपास, राजापुर, बाँदा) हिंदी के सबसे बड़े भक्त कवियों में हैं। आरोह के इस पाठ में दो भिन्न रंग हैं। 'कवितावली' ब्रजभाषा में लिखी गई है; इसके तीन छंदों में तुलसी अपने समय की आर्थिक विषमता, बेकारी और जातिगत भेदभाव पर बोलते हैं और अंत में अपने स्वाभिमान की घोषणा करते हैं। 'लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप' अवधी में दोहा-चौपाई-सोरठा छंदों में है; इसमें भगवान राम एक साधारण मनुष्य की तरह भाई के लिए विलाप करते हैं।
परीक्षा में 'आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी', 'खेती न किसान को...', 'माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो', 'जथा पंख बिनु खग अति दीना' और 'जिमि करुना मँह बीर रस' जैसी पंक्तियों पर प्रश्न आते हैं।
Weightage: यह पाठ खंड ग: आरोह भाग 2 एवं वितान भाग 2 का भाग है, जिसके 40 अंक हैं (कुल 80 में से), आरोह भाग 2 और वितान भाग 2 के सभी पाठों के साथ।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27 और प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27
तुलसीदास – कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
कवितावली (पहला कवित्त): तुलसी कहते हैं कि मज़दूर, किसान, व्यापारी, भिखारी, भाट, नौकर, चंचल नट, चोर, दूत और बाज़ीगर—सब पेट के लिए ही पढ़ते हैं, अनेक कलाएँ सीखते हैं, पहाड़ों पर चढ़ते हैं और दिन भर शिकार की खोज में घने जंगलों में भटकते हैं। पेट के लिए लोग ऊँचे-नीचे काम और धर्म-अधर्म करते हैं, यहाँ तक कि अपने बेटा-बेटी तक बेच देते हैं। पेट की आग समुद्र की बड़वाग्नि से भी बड़ी है; इसे केवल राम रूपी घनश्याम (बादल) ही बुझा सकता है।
दूसरा कवित्त: उस समय किसान के पास खेती नहीं, भिखारी को भीख नहीं, व्यापारी को व्यापार नहीं और नौकर को नौकरी नहीं है। आजीविका से रहित लोग दुखी और चिंतित होकर एक-दूसरे से पूछते हैं कि कहाँ जाएँ, क्या करें? वेदों-पुराणों में कहा गया है और संसार में भी देखा जाता है कि संकट में राम ही कृपा करते हैं। हे दीनबंधु, दरिद्रता रूपी रावण ने संसार को दबा लिया है; पापों की इस आग को देखकर तुलसी हाहाकार कर रहे हैं।
सवैया: लोग चाहे धूर्त कहें या संन्यासी, राजपूत कहें या जुलाहा, तुलसी को किसी की बेटी से अपने बेटे का ब्याह नहीं करना, न किसी की जाति बिगाड़नी है। वे राम के प्रसिद्ध गुलाम हैं; जिसे जो अच्छा लगे कहे। वे माँगकर खा लेते हैं और मस्जिद में सो जाते हैं; न किसी से एक लेना, न दो देना।
लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप: भरत से विदा लेकर हनुमान राम का प्रताप हृदय में रखकर संजीवनी लेकर चल पड़ते हैं और मन ही मन भरत के बल, शील और प्रभु-प्रेम की सराहना करते हैं। उधर आधी रात बीत जाती है, हनुमान नहीं लौटते। राम मूर्छित लक्ष्मण को उठाकर हृदय से लगाते हैं और मनुष्य की तरह विलाप करते हैं: तुम मुझे कभी दुखी नहीं देख सकते थे; मेरे लिए तुमने माता-पिता छोड़े और वन में सर्दी, धूप, आँधी सही। यदि जानता कि वन में भाई से बिछुड़ना होगा तो पिता का वचन भी न मानता। पुत्र, धन, स्त्री, घर-परिवार संसार में बार-बार मिलते-जाते हैं, पर सगा भाई नहीं मिलता। जैसे पंख के बिना पक्षी, मणि के बिना साँप और सूँड़ के बिना हाथी दीन हो जाते हैं, वैसा ही मेरा जीवन तुम्हारे बिना होगा। मैं कौन-सा मुँह लेकर अयोध्या जाऊँगा कि पत्नी के लिए प्रिय भाई खो दिया? सुमित्रा को क्या उत्तर दूँगा? राम के कमल-नेत्रों से आँसू बहते हैं।
प्रभु का विलाप सुनकर वानर व्याकुल हैं, तभी हनुमान ऐसे आ जाते हैं जैसे करुण रस में वीर रस आ गया हो। राम हर्षित होकर हनुमान से मिलते हैं; वैद्य (सुषेण) उपचार करते हैं और लक्ष्मण हँसते हुए उठ बैठते हैं। यह समाचार सुनकर रावण दुखी होकर कुंभकर्ण को जगाता है, जो काल के समान दिखता है। रावण उसे सीता-हरण और बड़े-बड़े योद्धाओं के मारे जाने की बात बताता है; कुंभकर्ण बिलखकर कहता है कि जगदंबा का हरण करके यह मूर्ख अब कल्याण चाहता है!
Themes and message
आर्थिक विषमता और पेट की आग
तुलसी बताते हैं कि हर वर्ग के लोग पेट भरने के लिए अच्छे-बुरे काम करते हैं, यहाँ तक कि संतान बेचते हैं। बेरोज़गारी से किसान, व्यापारी, नौकर—सब दुखी हैं। यह उनके युग का यथार्थ चित्र है।
From the text: "आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी"
राम-भक्ति ही समाधान
तुलसी के अनुसार पेट की आग और दरिद्रता रूपी रावण से मुक्ति केवल राम की कृपा से संभव है; राम घनश्याम (बादल) हैं जो यह आग बुझाते हैं।
From the text: "‘तुलसी’ बुझाइ एक राम घनस्याम ही तें"
जाति-पाँति का विरोध और स्वाभिमान
सवैये में तुलसी कहते हैं कि उन्हें किसी से बेटी-बेटे का ब्याह नहीं करना, इसलिए जाति की चिंता नहीं। वे राम के गुलाम हैं, माँगकर खाते हैं, मस्जिद में सो जाते हैं—यह सामाजिक बंधनों से ऊपर उठा स्वाभिमान है।
From the text: "माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो"
भ्रातृप्रेम और राम का मानवीय रूप
ईश्वर होते हुए भी राम लक्ष्मण के लिए साधारण मनुष्य की तरह रोते हैं, संसार में सहोदर भाई को सबसे दुर्लभ बताते हैं। तुलसी इसे 'नर गति' कहते हैं: भक्तों के लिए प्रभु का मानवीय लीला दिखाना।
From the text: "मिलइ न जगत सहोदर भ्राता"
The speaker and the people in the poem
तुलसीदास (कवितावली के वक्ता)
अपने युग के समाज को देखने वाले और राम के भक्त कवि।
- सामाजिक यथार्थ के गहरे जानकार
- स्वाभिमानी
- राम के अनन्य भक्त
"तुलसी सरनाम गुलामु है राम को"
राम
मूर्छित भाई के लिए विलाप करने वाले बड़े भाई।
- भ्रातृ-प्रेमी
- भावुक, मनुष्य की तरह विलाप
- कृतज्ञ (हनुमान से मिलकर)
"स्रवत सलिल राजिव दल लोचन"
हनुमान
संजीवनी लेकर लौटने वाले राम-भक्त।
- कर्तव्यनिष्ठ
- भरत के गुणों के प्रशंसक
"आइ गयउ हनुमान जिमि करुना मँह बीर रस"
लक्ष्मण
शक्ति-बाण से मूर्छित भाई, जिसके त्याग को राम याद करते हैं।
- त्यागी
- मृदुल स्वभाव
- भाई के प्रति समर्पित
"मम हित लागि तजेहु पितु माता"
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| रूपक | "राम घनस्याम", "दारिद-दसानन" | राम को बादल और दरिद्रता को रावण मानकर भाव सघन। |
| व्यतिरेक/अतिशयोक्ति | "आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी" | पेट की आग को बड़वाग्नि से भी बड़ा बताकर भूख की भयावहता। |
| उदाहरण/उपमा | "जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना॥" | भाई के बिना राम के जीवन की दीनता के सटीक उदाहरण। |
| उत्प्रेक्षा | "मानहुँ कालु देह धरि बैसा" | कुंभकर्ण की भयंकरता का चित्र। |
| अनुप्रास | "चाकर, चपल नट, चोर, चार, चेटकी" | 'च' वर्ण की आवृत्ति से नाद-सौंदर्य। |
| भाषा और छंद | कवितावली: ब्रजभाषा, कवित्त-सवैया; मानस अंश: अवधी, दोहा-चौपाई-सोरठा | दोनों भाषाओं पर तुलसी का अधिकार। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी
तुलसीदास: कवितावली का पहला कवित्त
भूख की आग समुद्र की आग से भी बड़ी है; गरीबी का यथार्थ।
खेती न किसान को, भिखारी को न भीख
तुलसीदास: दूसरा कवित्त
उस युग की बेरोज़गारी और आर्थिक संकट।
माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो
तुलसीदास: सवैया
जाति-बंधनों से मुक्त, निःस्पृह और स्वाभिमानी जीवन।
मिलइ न जगत सहोदर भ्राता
राम: लक्ष्मण के लिए विलाप
संसार में सब कुछ फिर मिल सकता है, सगा भाई नहीं।
जिमि करुना मँह बीर रस
तुलसीदास (वर्णन): हनुमान का आगमन
शोक के बीच उत्साह का आगमन; करुण में वीर रस।
तुलसीदास – कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
बेरोज़गारी का यथार्थ
मान लीजिए आप अख़बार में पढ़ते हैं कि किसी इलाके में सूखे के कारण किसानों को खेती नहीं मिल रही और मज़दूर काम की तलाश में शहर जा रहे हैं।
इस स्थिति को 'खेती न किसान को, भिखारी को न भीख' से जोड़िए।
Try it first, then show the solutionSolution
- तुलसी के समय भी हर वर्ग की आजीविका छिन गई थी।
- लोग 'कहाँ जाई, का करी?' पूछ रहे थे—आज के पलायन जैसी चिंता।
Answer: चार सौ साल पहले का चित्र आज भी सच लगता है: आजीविका छिनने पर लोग वैसे ही चिंतित होकर पूछते हैं कि कहाँ जाएँ, क्या करें।
Memory hook: तुलसी का युग-सत्य, आज का समाचार।
सहोदर का मूल्य
कल्पना कीजिए कि आपके बड़े भाई ने आपकी पढ़ाई के लिए अपनी इच्छाएँ छोड़कर नौकरी शुरू कर दी और अब वह बीमार है।
राम के विलाप की किन पंक्तियों में आपकी भावना झलकती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- 'मम हित लागि तजेहु पितु माता'—भाई का त्याग।
- 'मिलइ न जगत सहोदर भ्राता'—भाई की दुर्लभता।
Answer: राम की तरह मैं भी भाई के त्याग को याद करूँगा; धन-सुख फिर मिल सकते हैं, पर ऐसा भाई नहीं।
Memory hook: सब मिल जाए, भाई दोबारा न मिले।
जाति-भेद से ऊपर
मान लीजिए किसी समारोह में लोग एक व्यक्ति की जाति पूछकर उसे बैठाने में हिचकते हैं।
तुलसी के सवैये के आधार पर इस व्यवहार पर टिप्पणी कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- तुलसी कहते हैं कि उन्हें किसी की जाति से लेना-देना नहीं।
- वे मस्जिद में भी सो जाते हैं—भेदभाव से परे।
Answer: तुलसी का सवैया सिखाता है कि मनुष्य की पहचान उसकी जाति नहीं; ऐसे भेदभाव को छोड़कर सबके साथ समान व्यवहार करना चाहिए।
Memory hook: माँगकर खाना, मस्जिद में सोना—भेद नहीं, भक्ति।
Topics in this chapter
How the board asks तुलसीदास – कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | कवितावली का कवित्त/सवैया या राम-विलाप की चौपाइयों पर अर्थ, भाव, अलंकार, भाषा-छंद और कथन-कारण। | भाषा-छंद का भेद याद रखें: कवितावली = ब्रज, कवित्त-सवैया; मानस = अवधी, दोहा-चौपाई-सोरठा। |
| युग-यथार्थ (3 अंक) | कवितावली के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि तुलसी को अपने युग की आर्थिक विषमता की समझ थी। | दोनों कवित्तों से दो-दो प्रमाण: पेट के लिए हर काम, संतान बेचना; खेती-भीख-व्यापार-नौकरी का अभाव। |
| भ्रातृप्रेम और करुणा (3 अंक) | राम के विलाप में भ्रातृप्रेम कैसे व्यक्त हुआ है? | लक्ष्मण का त्याग, सहोदर की दुर्लभता, पंख-मणि-सूँड़ के उदाहरण, अयोध्या लौटने की लज्जा। |
| पंक्ति का आशय (2 अंक) | 'जिमि करुना मँह बीर रस', 'माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो', 'दारिद-दसानन दबाई दुनी'। | शब्दार्थ + प्रसंग + भाव। |
Tricks to remember तुलसीदास – कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
दो रचनाएँ, दो भाषाएँ
कवितावली = ब्रज + कवित्त/सवैया; मानस = अवधी + दोहा/चौपाई/सोरठा।
Use it when: भाषा-छंद वाले MCQ में।
राम-विलाप के तीन उदाहरण
पंख-खग, मणि-फनि, कर-करिबर: पक्षी, साँप, हाथी।
Use it when: उपमा/उदाहरण वाले प्रश्नों में।
करुण में वीर
हनुमान का आना = शोक के बीच उत्साह।
Use it when: 'जिमि करुना मँह बीर रस' वाले प्रश्न में।
तुलसीदास – कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: काव्यांश 1: पेट की आग (कवितावली)
किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी, भाट,
चाकर, चपल नट, चोर, चार , चेटकी।
पेटको पढ़त, गुन गढ़त, चढ़त गिरि,
अटत गहन-गन अहन अखेटकी॥
ऊँचे-नीचे करम, धरम-अधरम करि,
पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी।
‘तुलसी’ बुझाइ एक राम घनस्याम ही तें,
आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी॥
(1) · 1 mark · MCQ
काव्यांश के अनुसार लोग पढ़ाई, कलाएँ सीखना और पहाड़ चढ़ना किसके लिए करते हैं?
(क) यश के लिए
(ख) पेट भरने के लिए
(ग) ईश्वर-भक्ति के लिए
(घ) मनोरंजन के लिए(2) · 1 mark · MCQ
'बड़वागि' का अर्थ है—
(क) जंगल की आग
(ख) समुद्र की आग (बड़वाग्नि)
(ग) चूल्हे की आग
(घ) पेट की आग(3) · 1 mark · MCQ
तुलसी के अनुसार पेट की आग कौन बुझा सकता है?
(क) राजा
(ख) राम रूपी घनश्याम (बादल)
(ग) व्यापारी
(घ) वर्षा(4) · 1 mark · MCQ
'चाकर, चपल नट, चोर, चार, चेटकी' में कौन-सा अलंकार है?
(क) अनुप्रास
(ख) यमक
(ग) उपमा
(घ) श्लेष(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): तुलसी को अपने युग की आर्थिक विषमता की गहरी समझ थी।
कारण (R): वे बताते हैं कि पेट के लिए लोग धर्म-अधर्म करते और बेटा-बेटी तक बेच देते हैं।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
Show the answersAnswers
- (ख) पेट भरने के लिए
- (ख) समुद्र की आग (बड़वाग्नि)
- (ख) राम रूपी घनश्याम (बादल)
- (क) अनुप्रास ('च' वर्ण की आवृत्ति)
- (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Extract 2: काव्यांश 2: राम का विलाप
जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना॥
अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही॥
जैहउँ अवध कवन मुहुँ लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई॥
बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं। नारि हानि बिसेष छति नाहीं॥
(1) · 1 mark · MCQ
राम अपने जीवन की तुलना किससे करते हैं?
(क) पंख-रहित पक्षी, मणि-रहित साँप और सूँड़-रहित हाथी से
(ख) सूखी नदी से
(ग) टूटे धनुष से
(घ) बुझे दीपक से(2) · 1 mark · MCQ
'जैहउँ अवध कवन मुहुँ लाई' में राम की कौन-सी चिंता प्रकट होती है?
(क) युद्ध हारने की
(ख) पत्नी के लिए भाई खोकर अयोध्या लौटने की लज्जा
(ग) राज्य छिन जाने की
(घ) वन में रहने की(3) · 1 mark · MCQ
'नारि हानि बिसेष छति नाहीं' का आशय है—
(क) पत्नी की हानि सबसे बड़ी है
(ख) भाई की तुलना में पत्नी की हानि विशेष क्षति नहीं
(ग) राम सीता से प्रेम नहीं करते
(घ) नारी का सम्मान नहीं होना चाहिए(4) · 1 mark · MCQ
काव्यांश की भाषा और छंद हैं—
(क) ब्रजभाषा, कवित्त
(ख) अवधी, चौपाई
(ग) खड़ी बोली, मुक्त छंद
(घ) अवधी, सवैया(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): राम का विलाप एक साधारण मनुष्य जैसा है।
कारण (R): तुलसी के अनुसार प्रभु भक्तों के लिए 'नर गति' यानी मनुष्य जैसी लीला दिखाते हैं।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
Show the answersAnswers
- (क) पंख-रहित पक्षी, मणि-रहित साँप और सूँड़-रहित हाथी से
- (ख) पत्नी के लिए भाई खोकर अयोध्या लौटने की लज्जा
- (ख) भाई की तुलना में पत्नी की हानि विशेष क्षति नहीं (शोक में कहा गया भ्रातृप्रेम का अतिरेक)
- (ख) अवधी, चौपाई
- (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
तुलसीदास – कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: युग की आर्थिक विषमता · 3 marks · Short answerHarder board level
कवितावली के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ थी। (लगभग 60 शब्द)
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- पेट के लिए हर काम।
- आजीविका का अभाव।
- दरिद्रता का रावण।
Answer: तुलसी बताते हैं कि मज़दूर, किसान, व्यापारी, भिखारी, नौकर, नट, चोर—सब पेट के लिए ही पढ़ते, कलाएँ सीखते और ऊँचे-नीचे काम करते हैं; लोग अपने बेटा-बेटी तक बेच देते हैं। किसान के पास खेती नहीं, भिखारी को भीख नहीं, व्यापारी को व्यापार नहीं और नौकर को नौकरी नहीं। दरिद्रता रूपी रावण ने संसार को दबा रखा है। यह उनकी गहरी सामाजिक समझ दिखाता है।
Example 2: पेट की आग · 2 marks · Short answerBoard level
'आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी'—तुलसी ने ऐसा क्यों कहा है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- बड़वाग्नि = समुद्र की आग।
- भूख उससे भी भयानक।
Answer: समुद्र की बड़वाग्नि समुद्र के जल से भी नहीं बुझती, पर भूख की आग उससे भी बड़ी है, क्योंकि उसके लिए मनुष्य धर्म-अधर्म, ऊँच-नीच सब कर डालता है और संतान तक बेच देता है। तुलसी के अनुसार इसे केवल राम की कृपा बुझा सकती है।
Example 3: स्वाभिमान का सवैया · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'धूत कहौ, अवधूत कहौ...' सवैये में तुलसी के किस स्वभाव का पता चलता है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- लोक-निंदा की परवाह नहीं।
- जाति-बंधन से मुक्त; राम का गुलाम।
Answer: तुलसी लोगों की निंदा की परवाह नहीं करते; उन्हें किसी से बेटी-बेटे का ब्याह नहीं करना, इसलिए जाति की चिंता नहीं। वे स्वयं को राम का गुलाम मानते हैं, माँगकर खाते और मस्जिद में सो जाते हैं। यह उनका निःस्पृह, स्वाभिमानी और भेदभाव-मुक्त स्वभाव है।
Example 4: भ्रातृप्रेम · 3 marks · Short answerHarder board level
'लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप' के आधार पर राम के भ्रातृप्रेम पर प्रकाश डालिए। (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- लक्ष्मण का त्याग याद करना।
- सहोदर की दुर्लभता।
- जीवन की दीनता के उदाहरण; अयोध्या की लज्जा।
Answer: राम मूर्छित लक्ष्मण को हृदय से लगाकर याद करते हैं कि उसने उनके लिए माता-पिता छोड़े और वन में सर्दी-धूप-आँधी सही। वे कहते हैं कि पुत्र, धन, स्त्री और घर बार-बार मिल सकते हैं, पर सगा भाई नहीं। भाई के बिना उनका जीवन पंख-रहित पक्षी, मणि-रहित साँप और सूँड़-रहित हाथी जैसा दीन होगा, और वे अयोध्या लौटने तक से लजाते हैं।
Example 5: छंद पहचानिए · 1 mark · MCQHarder board level
'प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए बानर निकर। आइ गयउ हनुमान जिमि करुना मँह बीर रस॥' किस छंद में है?
(क) चौपाई
(ख) दोहा
(ग) सोरठा
(घ) सवैया
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ में यह 'सोरठा' शीर्षक के नीचे है; सोरठा में दोहे से उलटा क्रम (11-13 मात्राएँ) होता है।
Answer: (ग) सोरठा
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
कवितावली के छंदों के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ थी। (लगभग 60 शब्द) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| हर वर्ग का पेट के लिए हर काम करना, संतान बेचना | 1 |
| किसान, भिखारी, व्यापारी, नौकर—सबकी आजीविका का अभाव; 'कहाँ जाई, का करी?' | 1 |
| दरिद्रता रूपी रावण; निष्कर्ष | 1 |
'आइ गयउ हनुमान जिमि करुना मँह बीर रस' का आशय स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रसंग: राम के विलाप से सब व्याकुल, करुण वातावरण | 1 |
| हनुमान का आना उत्साह (वीर रस) का संचार; उत्प्रेक्षा/उपमा | 1 |
Where students lose marks in तुलसीदास – कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: कवितावली को अवधी में बताना
कवितावली ब्रजभाषा में है; मानस का अंश अवधी में।
Do this: भाषा-छंद तालिका याद रखें।
Usually costs: MCQ में 1 अंक
Mistake: 'नारि हानि बिसेष छति नाहीं' को नारी-अपमान समझना
यह शोक में व्याकुल राम के भ्रातृप्रेम का अतिरेक है।
Do this: प्रसंग लिखें: भाई के प्रेम की तीव्रता में कहा गया कथन।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 'घनस्याम' का अर्थ केवल कृष्ण लिखना
यहाँ राम को घनश्याम (साँवले बादल) कहा गया है, जो पेट की आग बुझाते हैं।
Do this: रूपक पहचानें: राम = बादल।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: कुंभकर्ण वाला प्रसंग छोड़ देना
पाठ का अंत रावण-कुंभकर्ण संवाद पर है, जिस पर प्रश्न पूछा जा सकता है।
Do this: याद रखें: कुंभकर्ण कहता है कि जगदंबा का हरण करके रावण कल्याण चाहता है।
Usually costs: 1 अंक
Practice questions on तुलसीदास – कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
'कवितावली' किस भाषा में रचित है?
(क) अवधी
(ख) ब्रजभाषा
(ग) खड़ी बोली
(घ) मैथिलीHint
कवित्त-सवैया की भाषा।
Answer
(ख) ब्रजभाषा
Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level
'दारिद-दसानन दबाई दुनी, दीनबंधु!' पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)
Hint
दरिद्रता = रावण।
Answer
तुलसी दरिद्रता को दस मुख वाले रावण के रूप में देखते हैं, जिसने पूरे संसार को दबा रखा है। जैसे राम ने रावण का अंत किया, वैसे ही वे दीनबंधु राम से इस दरिद्रता रूपी रावण से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना करते हैं। यहाँ रूपक अलंकार है।
Q3 · 1 mark · Assertion-reasonHOTS / competency
कथन (A): 'कवितावली' के अंश में तुलसी जातिगत भेदभाव के समर्थक दिखाई देते हैं।
कारण (R): तुलसी कहते हैं कि वे माँगकर खाते हैं और मस्जिद में सो जाते हैं।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।Hint
सवैया क्या कहता है?
Answer
(घ) कथन गलत है, कारण सही है: तुलसी जाति-बंधनों से ऊपर उठे दिखते हैं।
Q4 · 2 marks · Short answerBoard level
कुंभकर्ण ने रावण से क्या कहा? (लगभग 40 शब्द)
Hint
जगदंबा।
Answer
रावण से सीता-हरण और बड़े योद्धाओं के मारे जाने की बात सुनकर कुंभकर्ण बिलखकर बोला कि हे मूर्ख, जगत-जननी (सीता) का हरण करके अब तू अपना कल्याण चाहता है? यानी अधर्म करके भलाई की आशा व्यर्थ है।
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
'पेट की आग का शमन राम-भक्ति रूपी मेघ ही कर सकता है'—क्या तुलसी का यह काव्य-सत्य आज का युग-सत्य भी है? तर्कसंगत उत्तर दीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
भक्ति = नैतिकता, करुणा, परिश्रम और न्यायपूर्ण व्यवस्था।
Answer
आज भूख की समस्या का समाधान केवल प्रार्थना से नहीं, रोज़गार, शिक्षा और न्यायपूर्ण व्यवस्था से होगा। फिर भी तुलसी की बात का गहरा अर्थ आज भी सही है: यदि 'राम-भक्ति' को करुणा, ईमानदारी और नैतिकता माना जाए, तो ऐसे मूल्यों से भरा समाज ही शोषण और लालच मिटाकर सबके पेट की आग बुझा सकता है। इस अर्थ में यह आंशिक रूप से युग-सत्य है।
Q6 · 2 marks · Short answerHarder board level
हनुमान भरत से विदा लेकर मन ही मन किसकी सराहना करते हैं? (लगभग 40 शब्द)
Hint
पहला दोहा।
Answer
हनुमान राम का प्रताप हृदय में रखकर संजीवनी लिए चलते हैं और रास्ते में बार-बार भरत के बाहुबल, शील, गुणों और प्रभु के चरणों में उनके अपार प्रेम की मन ही मन सराहना करते हैं।
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1.पेट की आग किससे बड़ी बताई गई है?Show answer
बड़वाग्नि (समुद्र की आग) से।
2.पेट की आग कौन बुझा सकता है?Show answer
राम रूपी घनश्याम।
3.दरिद्रता को किसके रूप में दिखाया गया है?Show answer
दशानन (रावण) के रूप में।
4.तुलसी कहाँ सोते हैं?Show answer
मसीत (मस्जिद) में।
5.राम के अनुसार संसार में क्या नहीं मिलता?Show answer
सहोदर भाई।
6.हनुमान का आना किसके समान बताया गया है?Show answer
करुण रस में वीर रस के आने के समान।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- तुलसीदास: जन्म 1532 (राजापुर, बाँदा, माना जाता है); रामचरितमानस, कवितावली आदि।
- कवितावली (उत्तर कांड): ब्रजभाषा, कवित्त-सवैया।
- पेट के लिए हर काम; संतान बेचना; पेट की आग > बड़वाग्नि; राम-घनश्याम बुझाते हैं।
- खेती, भीख, व्यापार, नौकरी—सबका अभाव; 'कहाँ जाई, का करी?'; दारिद-दसानन।
- सवैया: जाति की परवाह नहीं, राम का गुलाम, 'माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो'।
- लक्ष्मण-मूर्छा (लंका कांड): अवधी, दोहा-चौपाई-सोरठा; राम का मानवीय विलाप।
- 'मिलइ न जगत सहोदर भ्राता'; पंख-खग, मणि-फनि, कर-करिबर।
- हनुमान आए 'जिमि करुना मँह बीर रस'; लक्ष्मण उठे; रावण ने कुंभकर्ण को जगाया।
तुलसीदास – कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप: frequently asked questions
'कवितावली' का अंश किस कांड से लिया गया है?
पाठ में दिए छंद 'कवितावली' के उत्तर कांड से लिए गए हैं, और 'लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप' रामचरितमानस के लंका कांड का अंश है।
कवितावली के छंदों का मूल भाव क्या है?
तुलसी के युग की गरीबी, बेरोज़गारी और पेट की आग का यथार्थ चित्र, उससे मुक्ति के लिए राम-कृपा का भरोसा और जाति-बंधन से ऊपर उठे स्वाभिमान की घोषणा।
राम के विलाप को 'नर गति' क्यों कहा गया है?
राम ईश्वर हैं, फिर भी भाई के लिए साधारण मनुष्य की तरह रोते हैं। तुलसी कहते हैं कि कृपालु प्रभु भक्तों के लिए मनुष्य जैसी लीला दिखाते हैं; इसे 'नर गति' कहा गया है।
तुलसीदास का परिचय दीजिए।
तुलसीदास का जन्म सन् 1532 में बाँदा ज़िले के राजापुर गाँव में माना जाता है। रामचरितमानस, विनयपत्रिका, गीतावली, कवितावली, दोहावली आदि उनकी रचनाएँ हैं। वे अवधी और ब्रज, दोनों में समान अधिकार से लिखते थे।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) पाठ्यक्रम (302), कक्षा 12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 2 (Reprint 2026-27), तुलसीदास – कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप