रघुवीर सहाय – कैमरे में बंद अपाहिज: Class 12 भावार्थ और प्रश्न
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'कैमरे में बंद अपाहिज' रघुवीर सहाय की व्यंग्य कविता है। इसमें एक टीवी कार्यक्रम का संचालक एक अपाहिज व्यक्ति से उसके दुख के बारे में बेतुके प्रश्न पूछकर उसे और दर्शकों को रुलाना चाहता है, ताकि कार्यक्रम रोचक बने। कविता मीडिया की करुणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता और व्यावसायिकता को उजागर करती है।
What रघुवीर सहाय – कैमरे में बंद अपाहिज is about
'कैमरे में बंद अपाहिज' रघुवीर सहाय (1929-1990) के संग्रह 'लोग भूल गये हैं' से ली गई है। रघुवीर सहाय पत्रकार भी थे, इसलिए वे मीडिया के भीतर की सच्चाई जानते थे। कविता एक टेलीविज़न स्टूडियो का दृश्य है: 'समर्थ शक्तिवान' संचालक एक 'दुर्बल' अपाहिज को बंद कमरे में लाकर उससे उसकी पीड़ा के बारे में बार-बार पूछता है, ताकि उसकी आँखों में आँसू और होंठों पर कसमसाहट कैमरे में कैद हो सके।
कविता की सबसे बड़ी विशेषता कोष्ठक हैं: कोष्ठक में लिखी बातें कैमरे के पीछे की असली मानसिकता बताती हैं। परीक्षा में कोष्ठकों का अर्थ, 'सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम' पर व्यंग्य, 'हम समर्थ शक्तिवान' और 'दुर्बल' का विरोध, और 'परदे पर वक्त की कीमत है' जैसी पंक्तियों पर प्रश्न आ सकते हैं।
Weightage: यह पाठ खंड ग: आरोह भाग 2 एवं वितान भाग 2 का भाग है, जिसके 40 अंक हैं (कुल 80 में से), आरोह भाग 2 और वितान भाग 2 के सभी पाठों के साथ।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27 और प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27
रघुवीर सहाय – कैमरे में बंद अपाहिज: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
कविता संचालक के मुँह से कही गई है। वह कहता है कि हम दूरदर्शन पर बोलेंगे; हम समर्थ और शक्तिशाली हैं; हम एक दुर्बल को बंद कमरे (स्टूडियो) में लाएँगे और उससे पूछेंगे कि क्या आप अपाहिज हैं, आप क्यों अपाहिज हैं, आपका अपाहिजपन आपको दुख देता होगा? साथ ही वह कैमरामैन से कहता है कि इसे बड़ा-बड़ा दिखाओ। वह जल्दी-जल्दी पूछता है कि अपना दुख बताइए, अपाहिज होकर कैसा लगता है; जब अपाहिज बोल नहीं पाता तो संचालक खुद इशारे से बताने को तैयार है कि क्या ऐसा लगता है। उसे डर है कि यह अवसर हाथ से न निकल जाए।
फिर वह दर्शकों से कहता है कि कार्यक्रम रोचक बनाने के लिए हम उसे पूछ-पूछकर रुला देंगे, और आप भी उसके रो पड़ने का इंतज़ार करते हैं—यह प्रश्न दर्शकों से पूछा नहीं जाएगा। फिर परदे पर उसकी फूली हुई आँख की बहुत बड़ी तसवीर और होंठों की कसमसाहट दिखाई जाएगी, जिसे दर्शक उसकी अपंगता की पीड़ा मानेंगे, ऐसी आशा है। संचालक एक और कोशिश करता है और दर्शकों से धीरज रखने को कहता है, क्योंकि उसे अपाहिज और दर्शक दोनों को एक साथ रुलाना है।
पर अपाहिज नहीं रोता। तब कैमरे को बंद करने का आदेश दिया जाता है: बस करो, नहीं हुआ, रहने दो, परदे पर वक्त की कीमत है। अंत में संचालक मुस्कुराकर कहता है कि आप देख रहे थे सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम, और मन में सोचता है कि बस थोड़ी ही कसर रह गई। धन्यवाद। इस तरह कविता बताती है कि 'सामाजिक उद्देश्य' के नाम पर मीडिया दूसरे के दुख को बेचने की वस्तु बना देता है।
Themes and message
मीडिया की संवेदनहीनता और व्यावसायिकता
संचालक को अपाहिज के दुख से सहानुभूति नहीं; उसे केवल कार्यक्रम को रोचक बनाना और दर्शक बटोरना है। वह दुख को बेचने की वस्तु बना देता है। 'परदे पर वक्त की कीमत है' बताता है कि उसके लिए समय और पैसा मनुष्य से ऊपर है।
From the text: "आप जानते हैं कि कार्यक्रम रोचक बनाने के वास्ते / हम पूछ-पूछकर उसको रुला देंगे"
करुणा का मुखौटा: सामाजिक उद्देश्य पर व्यंग्य
कार्यक्रम को 'सामाजिक उद्देश्य से युक्त' कहा जाता है, पर उसका वास्तविक उद्देश्य अपाहिज और दर्शक दोनों को रुलाकर लोकप्रियता पाना है। कवि इसी पाखंड पर तीखा व्यंग्य करता है।
From the text: "आप देख रहे थे सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम"
शक्तिशाली और दुर्बल का संबंध
संचालक स्वयं को 'समर्थ शक्तिवान' और सामने वाले को 'दुर्बल' कहता है। ताकतवर अपनी शक्ति से कमज़ोर की निजता और गरिमा को रौंदता है, उसे बंद कमरे में कैमरे के सामने 'कैद' कर देता है।
From the text: "हम समर्थ शक्तिवान / हम एक दुर्बल को लाएँगे"
दर्शकों की भूमिका
कविता दर्शकों पर भी प्रश्न उठाती है: क्या आप भी उसके रोने का इंतज़ार करते हैं? यह प्रश्न पूछा नहीं जाता, पर कविता दिखाती है कि दर्शकों की ऐसी रुचि ही मीडिया को संवेदनहीन बनाती है।
From the text: "इंतज़ार करते हैं आप भी उसके रो पड़ने का / करते हैं?"
The speaker and the people in the poem
संचालक (वक्ता)
टीवी कार्यक्रम का संचालक, जो अपाहिज से प्रश्न पूछता है।
- संवेदनहीन और व्यावसायिक
- अहंकारी ('हम समर्थ शक्तिवान')
- पाखंडी: करुणा का दिखावा
"हमें दोनों एक संग रुलाने हैं"
अपाहिज व्यक्ति
कैमरे में कैद शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति, जो लगभग चुप रहता है।
- मौन और असहाय
- आत्मसम्मान बचाने वाला: अंत तक नहीं रोता
"बता नहीं पाएगा"; "नहीं हुआ / रहने दो"
दर्शक
कार्यक्रम देखने वाले, जिन्हें भी रुलाना संचालक का लक्ष्य है।
- सनसनी के उपभोक्ता
- अनजाने में भागीदार
"दर्शक / धीरज रखिए"
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| व्यंग्य | "आप देख रहे थे सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम" | कार्यक्रम के घोषित उद्देश्य और असली उद्देश्य के अंतर से तीखा कटाक्ष। |
| कोष्ठकों का नाटकीय प्रयोग | "(कैमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा)", "(बस थोड़ी ही कसर रह गई)" | कैमरे के पीछे की असली सोच और निर्देश सामने आते हैं; कविता नाटक जैसी बनती है। |
| प्रश्न शैली और आवृत्ति | "सोचिए / बताइए", "कैसा / यानी कैसा लगता है" | प्रश्नों की बौछार से संचालक की क्रूर अधीरता दिखती है। |
| दृश्य बिंब | "फूली हुई आँख की एक बड़ी तसवीर" | कैमरे के क्लोज़-अप का चित्र; दुख का प्रदर्शन। |
| बोलचाल की भाषा, मुक्त छंद | "हाँ तो बताइए आपका दुख क्या है" | टीवी साक्षात्कार की असली भाषा जैसा प्रभाव। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
हम समर्थ शक्तिवान
संचालक: कविता का आरंभ
मीडिया का अहंकार और शक्ति का दंभ।
हम पूछ-पूछकर उसको रुला देंगे
संचालक: कार्यक्रम को रोचक बनाने की योजना
दुख को बेचने की संवेदनहीन मानसिकता।
परदे पर वक्त की कीमत है
संचालक: अपाहिज के न रोने पर कैमरा बंद करने का आदेश
मीडिया के लिए समय और पैसा मनुष्य की भावना से अधिक महत्त्वपूर्ण।
बस थोड़ी ही कसर रह गई
संचालक: कार्यक्रम के अंत में मन की बात
रुलाने में असफल रहने का अफ़सोस; पाखंड का पूर्ण उद्घाटन।
रघुवीर सहाय – कैमरे में बंद अपाहिज in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
मीडिया की संवेदनहीनता
मान लीजिए किसी दुर्घटना के बाद एक रिपोर्टर घायल व्यक्ति के परिवार से बार-बार पूछता है, 'आपको कैसा महसूस हो रहा है?' और कैमरा रोते चेहरे पर ज़ूम करता है।
इस दृश्य की तुलना कविता से कीजिए और बताइए कि रिपोर्टर को कैसा व्यवहार करना चाहिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- कविता में भी संचालक 'कैसा लगता है' पूछकर रुलाना चाहता है और 'कैमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा' कहता है।
- रिपोर्टर को पीड़ित की गरिमा और निजता का सम्मान करना चाहिए, अनुमति लेनी चाहिए और सनसनी से बचना चाहिए।
Answer: यह दृश्य कविता के संचालक जैसा ही संवेदनहीन है; रिपोर्टर को सहानुभूति से, अनुमति लेकर और पीड़ित की गरिमा बचाते हुए बात करनी चाहिए।
Memory hook: ख़बर दिखाओ, दर्द मत बेचो।
दर्शक की ज़िम्मेदारी
कल्पना कीजिए कि आपका परिवार हर शाम ऐसे कार्यक्रम देखता है जिनमें लोगों को रुलाकर टीआरपी बढ़ाई जाती है।
कविता की पंक्ति 'इंतज़ार करते हैं आप भी उसके रो पड़ने का' आपसे क्या प्रश्न करती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- कविता दर्शक को भी भागीदार मानती है।
- दर्शक ऐसे कार्यक्रम न देखकर और शिकायत करके बदलाव ला सकते हैं।
Answer: यह पंक्ति पूछती है कि क्या हम भी किसी के आँसू को मनोरंजन मानते हैं; ऐसे कार्यक्रमों से दूर रहकर हम मीडिया को बदलने में मदद कर सकते हैं।
Memory hook: रिमोट भी जवाबदेह है।
दिव्यांगजन की गरिमा
मान लीजिए आपके विद्यालय में व्हीलचेयर पर चलने वाला एक सहपाठी है और कोई उससे बार-बार पूछता है कि उसे कैसा लगता है।
कविता के आधार पर बताइए कि उससे कैसा व्यवहार होना चाहिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- कविता दिखाती है कि बार-बार दुख पूछना अपमानजनक है।
- उसके साथ बराबरी से, उसकी रुचियों और क्षमताओं के आधार पर व्यवहार होना चाहिए।
Answer: उसे दया का पात्र नहीं, बराबर का साथी मानें; उसकी कमी नहीं, क्षमता और रुचि पर बात करें।
Memory hook: दया नहीं, बराबरी।
Topics in this chapter
How the board asks रघुवीर सहाय – कैमरे में बंद अपाहिज
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | आरंभ ('हम समर्थ शक्तिवान') या अंत ('परदे पर वक्त की कीमत है') के अंश पर व्यंग्य, कोष्ठक और प्रतीक के प्रश्न। | हर प्रश्न में पूछें: यह बात दिखावे की है या असली मंशा की? कोष्ठक प्रायः असली मंशा बताते हैं। |
| कोष्ठकों का प्रयोजन (2-3 अंक) | कविता में कोष्ठकों में दिए गए कथनों की क्या सार्थकता है? | दो-तीन कोष्ठक उद्धृत करें और बताएँ कि वे कैमरामैन के निर्देश, दर्शकों से छिपी बातें या संचालक के मन के भाव हैं। |
| व्यंग्य और संदेश (3 अंक) | कविता में किस पर और कैसे व्यंग्य किया गया है? | मीडिया की व्यावसायिकता, करुणा का मुखौटा और दर्शकों की रुचि—तीनों पर एक-एक प्रमाण। |
| शीर्षक की सार्थकता (2 अंक) | 'कैमरे में बंद अपाहिज' शीर्षक कितना उचित है? | अपाहिज बंद कमरे में कैमरे के सामने कैद है; उसकी निजता और गरिमा भी बंद कर दी गई है। |
Tricks to remember रघुवीर सहाय – कैमरे में बंद अपाहिज
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
कोष्ठक = कैमरे के पीछे
कोष्ठक में लिखी हर बात वह है जो दर्शक नहीं सुनते: निर्देश, मंशा, अफ़सोस।
Use it when: कोष्ठकों के प्रयोजन वाले प्रश्नों में।
कविता का क्रम: 'लाओ-पूछो-ज़ूम-रुलाओ-रुको-मुस्कुराओ'
दुर्बल को लाना → प्रश्न पूछना → आँख का क्लोज़-अप → दोनों को रुलाने की कोशिश → 'बस करो' → 'सामाजिक उद्देश्य' कहकर मुस्कान।
Use it when: सार और क्रम वाले प्रश्नों में।
तीन पात्र, तीन भूमिकाएँ
संचालक = शिकारी, अपाहिज = शिकार, दर्शक = तमाशबीन।
Use it when: पात्रों की भूमिका वाले प्रश्नों में।
रघुवीर सहाय – कैमरे में बंद अपाहिज: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: काव्यांश 1: समर्थ और दुर्बल
हम दूरदर्शन पर बोलेंगे
हम समर्थ शक्तिवान
हम एक दुर्बल को लाएँगे
एक बंद कमरे में
उससे पूछेंगे तो आप क्या अपाहिज हैं?
तो आप क्यों अपाहिज हैं?
(1) · 1 mark · MCQ
'हम समर्थ शक्तिवान' से किसकी मानसिकता प्रकट होती है?
(क) अपाहिज की
(ख) मीडियाकर्मी/संचालक की
(ग) दर्शकों की
(घ) कवि की(2) · 1 mark · MCQ
'बंद कमरा' किसका प्रतीक है?
(क) अस्पताल का
(ख) टीवी स्टूडियो का
(ग) जेल का
(घ) विद्यालय का(3) · 1 mark · MCQ
'तो आप क्यों अपाहिज हैं?' प्रश्न कैसा है?
(क) सहानुभूतिपूर्ण
(ख) संवेदनहीन और बेतुका
(ग) वैज्ञानिक
(घ) प्रेरक(4) · 1 mark · MCQ
काव्यांश में किस पर व्यंग्य है?
(क) अपाहिज व्यक्ति पर
(ख) मीडिया के अहंकार और संवेदनहीनता पर
(ग) सरकार पर
(घ) डॉक्टरों पर(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): संचालक स्वयं को समर्थ और अपाहिज को दुर्बल कहता है।
कारण (R): वह अपनी शक्ति के बल पर एक कमज़ोर व्यक्ति के दुख का प्रदर्शन करना चाहता है।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
Show the answersAnswers
- (ख) मीडियाकर्मी/संचालक की
- (ख) टीवी स्टूडियो का
- (ख) संवेदनहीन और बेतुका
- (ख) मीडिया के अहंकार और संवेदनहीनता पर
- (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Extract 2: काव्यांश 2: परदे पर वक्त की कीमत
(कैमरा
बस करो
नहीं हुआ
रहने दो
परदे पर वक्त की कीमत है)
अब मुसकुराएँगे हम
आप देख रहे थे सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम
(बस थोड़ी ही कसर रह गई)
धन्यवाद।
(1) · 1 mark · MCQ
'नहीं हुआ' से क्या आशय है?
(क) कैमरा खराब हो गया
(ख) अपाहिज रोया नहीं, इसलिए वांछित दृश्य नहीं मिला
(ग) कार्यक्रम रद्द हो गया
(घ) दर्शक चले गए(2) · 1 mark · MCQ
'परदे पर वक्त की कीमत है' से मीडिया की कौन-सी प्रवृत्ति प्रकट होती है?
(क) समय की पाबंदी का आदर
(ख) व्यावसायिकता: समय पैसा है
(ग) दर्शकों का सम्मान
(घ) अपाहिज की चिंता(3) · 1 mark · MCQ
'सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम' में कौन-सा भाव है?
(क) प्रशंसा
(ख) व्यंग्य
(ग) करुणा
(घ) भय(4) · 1 mark · MCQ
'(बस थोड़ी ही कसर रह गई)' से संचालक की कौन-सी मानसिकता प्रकट होती है?
(क) अपाहिज की मदद न कर पाने का दुख
(ख) अपाहिज को रुला न पाने का अफ़सोस
(ग) दर्शकों को धन्यवाद
(घ) कैमरामैन पर क्रोध(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): कविता में कोष्ठक में लिखी बातें दर्शकों को सुनाई नहीं जातीं।
कारण (R): कोष्ठक संचालक के मन की और कैमरे के पीछे की असली बातें दिखाते हैं।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
Show the answersAnswers
- (ख) अपाहिज रोया नहीं, इसलिए वांछित दृश्य नहीं मिला
- (ख) व्यावसायिकता: समय पैसा है
- (ख) व्यंग्य
- (ख) अपाहिज को रुला न पाने का अफ़सोस
- (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
रघुवीर सहाय – कैमरे में बंद अपाहिज: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: करुणा का मुखौटा · 3 marks · Short answerHarder board level
'कैमरे में बंद अपाहिज' को करुणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता की कविता क्यों कहा जाता है? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- ऊपर से सहानुभूति।
- भीतर से रुलाने की योजना।
- अंत में अफ़सोस।
Answer: संचालक कार्यक्रम को 'सामाजिक उद्देश्य से युक्त' बताता है और अपाहिज के दुख के बारे में सहानुभूति भरे प्रश्न पूछता दिखता है। पर उसकी असली मंशा उसे पूछ-पूछकर रुलाना, उसकी फूली आँख का क्लोज़-अप दिखाना और दर्शकों को भी रुलाकर कार्यक्रम रोचक बनाना है। अपाहिज के न रोने पर उसे 'थोड़ी ही कसर' का अफ़सोस होता है। यही करुणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता है।
Example 2: कोष्ठकों का अर्थ · 2 marks · Short answerHarder board level
कविता में कोष्ठक में दिए गए कथनों का क्या प्रयोजन है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- कोष्ठक = परदे के पीछे की बातें।
- उदाहरण।
Answer: कोष्ठकों में कैमरामैन को दिए निर्देश और संचालक के मन की वे बातें हैं जो दर्शकों को नहीं सुनाई जातीं, जैसे '(कैमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा)' और '(बस थोड़ी ही कसर रह गई)'। इनसे मीडिया की असली, संवेदनहीन मंशा उजागर होती है।
Example 3: वक्त की कीमत · 2 marks · Short answerBoard level
'परदे पर वक्त की कीमत है' पंक्ति से कवि ने मीडिया के बारे में क्या कहा है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- टीवी पर हर सेकंड का मूल्य।
- मनुष्य से अधिक महत्त्व व्यापार का।
Answer: टीवी पर हर क्षण विज्ञापन और पैसे से जुड़ा होता है। अपाहिज के न रोने पर संचालक तुरंत कैमरा बंद करवा देता है, क्योंकि उसके लिए किसी की पीड़ा से अधिक कीमती परदे का समय है। यह मीडिया की व्यावसायिकता पर व्यंग्य है।
Example 4: संग्रह पहचानिए · 1 mark · MCQBoard level
'कैमरे में बंद अपाहिज' कविता रघुवीर सहाय के किस संग्रह से ली गई है?
(क) सीढ़ियों पर धूप में
(ख) लोग भूल गये हैं
(ग) आत्महत्या के विरुद्ध
(घ) हँसो-हँसो जल्दी हँसो
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ की भूमिका में संग्रह का नाम दिया गया है।
Answer: (ख) लोग भूल गये हैं
Example 5: दर्शक भी कठघरे में · 3 marks · Short answerHOTS / competency
'इंतज़ार करते हैं आप भी उसके रो पड़ने का / करते हैं? / (यह प्रश्न पूछा नहीं जाएगा)'—इन पंक्तियों का निहितार्थ स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- दर्शक भी दुख को मनोरंजन मानते हैं।
- प्रश्न पूछा नहीं जाएगा, क्योंकि दर्शकों को नाराज़ नहीं करना।
- मीडिया और दर्शक दोनों ज़िम्मेदार।
Answer: संचालक मन ही मन मानता है कि दर्शक भी अपाहिज के रोने का इंतज़ार कर रहे हैं, यानी वे भी दूसरे के आँसुओं को मनोरंजन मानते हैं। यह प्रश्न खुलकर नहीं पूछा जाएगा, क्योंकि दर्शक ही कार्यक्रम का आधार हैं और उन्हें असहज नहीं करना है। इस तरह कवि बताता है कि मीडिया की संवेदनहीनता के लिए दर्शकों की रुचि भी ज़िम्मेदार है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
'कैमरे में बंद अपाहिज' करुणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता की कविता है—स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| मुखौटा: 'सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम', सहानुभूति भरे प्रश्न | 1 |
| क्रूरता: पूछ-पूछकर रुलाना, आँख का क्लोज़-अप, 'दोनों एक संग रुलाने हैं' | 1 |
| निष्कर्ष: व्यावसायिकता और 'थोड़ी ही कसर' का अफ़सोस | 1 |
कविता में कोष्ठकों का प्रयोग क्यों किया गया है? (लगभग 40 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| कोष्ठक कैमरे के पीछे के निर्देश और संचालक की असली मंशा दिखाते हैं | 1 |
| उदाहरण सहित: '(कैमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा)', '(बस थोड़ी ही कसर रह गई)' | 1 |
Where students lose marks in रघुवीर सहाय – कैमरे में बंद अपाहिज
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: कविता को अपाहिज के प्रति सहानुभूति की कविता बताना
कविता व्यंग्य है; इसका निशाना मीडिया की संवेदनहीनता है।
Do this: उत्तर की पहली पंक्ति में लिखें: यह मीडिया पर व्यंग्य है।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: कोष्ठकों को अनदेखा करना
कोष्ठक ही असली मंशा प्रकट करते हैं; उनके बिना व्यंग्य समझ नहीं आता।
Do this: कम-से-कम एक कोष्ठक उद्धृत करें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 'नहीं हुआ' का अर्थ तकनीकी खराबी लिखना
अर्थ है कि अपाहिज नहीं रोया।
Do this: संदर्भ: 'हमें दोनों एक संग रुलाने हैं' के बाद 'नहीं हुआ'।
Usually costs: MCQ में 1 अंक
Mistake: दर्शकों की भूमिका छोड़ देना
कविता दर्शकों को भी प्रश्न के घेरे में लाती है।
Do this: 'इंतज़ार करते हैं आप भी उसके रो पड़ने का' का उल्लेख करें।
Usually costs: 3 अंक के उत्तर में 1 अंक
Practice questions on रघुवीर सहाय – कैमरे में बंद अपाहिज
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
संचालक अपाहिज और दर्शकों—दोनों को एक साथ क्यों रुलाना चाहता है?
(क) अपाहिज की मदद के लिए धन जुटाने
(ख) कार्यक्रम को रोचक और लोकप्रिय बनाने
(ग) दर्शकों को सबक सिखाने
(घ) कैमरे की जाँच करनेHint
'कार्यक्रम रोचक बनाने के वास्ते'।
Answer
(ख) कार्यक्रम को रोचक और लोकप्रिय बनाने
Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level
'कैमरे में बंद अपाहिज' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)
Hint
बंद कमरा, कैमरे की कैद।
Answer
अपाहिज व्यक्ति को बंद कमरे (स्टूडियो) में कैमरे के सामने बिठाया गया है, जहाँ से वह निकल नहीं सकता और उसकी पीड़ा का प्रदर्शन होता है। उसकी निजता और गरिमा भी कैमरे में कैद हो जाती है, इसलिए शीर्षक सार्थक है।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
'हम खुद इशारे से बताएँगे कि क्या ऐसा?' से संचालक की किस प्रवृत्ति का पता चलता है? (लगभग 40 शब्द)
Hint
अपनी मनचाही बात कहलवाना।
Answer
संचालक अपाहिज के उत्तर की प्रतीक्षा नहीं करता, बल्कि इशारे से उसके मुँह में अपनी मनचाही बात डालना चाहता है। इससे उसकी अधीरता, दबाव बनाने की प्रवृत्ति और सच के बजाय मनगढ़ंत दृश्य गढ़ने की मानसिकता प्रकट होती है।
Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHOTS / competency
कथन (A): कविता के अंत में संचालक मुस्कुराता है।
कारण (R): वह अपाहिज को रुलाने में पूरी तरह सफल हो गया है।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।Hint
'बस थोड़ी ही कसर रह गई'।
Answer
(ग) कथन सही है, कारण गलत है: वह असफल रहा, फिर भी कैमरे के लिए बनावटी मुस्कान ओढ़ता है।
Q5 · 2 marks · Short answerBoard level
रघुवीर सहाय की काव्य-भाषा की दो विशेषताएँ इस कविता के आधार पर लिखिए। (लगभग 40 शब्द)
Hint
बोलचाल, नाटकीयता।
Answer
कविता की भाषा टीवी साक्षात्कार जैसी सहज बोलचाल की है, जिसमें प्रश्नों की आवृत्ति ('सोचिए / बताइए') है। कोष्ठकों से नाटकीयता आती है और साधारण-से शब्दों में तीखा व्यंग्य छिपा है।
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
यदि आप उस कार्यक्रम के निर्माता होते तो अपाहिज व्यक्ति पर कार्यक्रम कैसे बनाते? कविता के आधार पर उत्तर दीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
गरिमा, अनुमति, क्षमता, समाधान।
Answer
मैं कार्यक्रम का उद्देश्य दया जगाना नहीं, सम्मान और जानकारी देना रखता। व्यक्ति की अनुमति से उसकी उपलब्धियों, क्षमताओं और उसके सामने आने वाली सामाजिक बाधाओं—जैसे रैंप न होना—पर बात करता। उसे बार-बार 'कैसा लगता है' पूछकर रुलाने के बजाय समाधान और अधिकारों पर चर्चा करता। तभी कार्यक्रम सचमुच 'सामाजिक उद्देश्य से युक्त' होता।
Q7 · 3 marks · Short answerHarder board level
कविता में संचालक द्वारा पूछे गए प्रश्नों की प्रकृति स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
बेतुके, दोहराव, अधीरता।
Answer
संचालक के प्रश्न बेतुके और संवेदनहीन हैं, जैसे 'आप क्या अपाहिज हैं?', 'आप क्यों अपाहिज हैं?' और 'अपाहिज होकर कैसा लगता है'। वह उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना 'सोचिए, बताइए, जल्दी बताइए' कहकर दबाव डालता है और इशारे से उत्तर सुझाता है। इन प्रश्नों का उद्देश्य जानकारी नहीं, अपाहिज को भावनात्मक रूप से तोड़कर रुलाना है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.संचालक स्वयं को क्या कहता है?Show answer
समर्थ शक्तिवान।
2.दुर्बल को कहाँ लाया जाएगा?Show answer
एक बंद कमरे में (स्टूडियो)।
3.परदे पर किसकी बड़ी तसवीर दिखाई जाएगी?Show answer
फूली हुई आँख की।
4.संचालक किन्हें एक संग रुलाना चाहता है?Show answer
अपाहिज और दर्शक, दोनों को।
5.कैमरा क्यों बंद करवाया जाता है?Show answer
अपाहिज नहीं रोया और परदे पर वक्त की कीमत है।
6.कार्यक्रम को अंत में क्या कहा जाता है?Show answer
सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- कवि: रघुवीर सहाय (1929-1990), पत्रकार-कवि; कविता 'लोग भूल गये हैं' संग्रह से।
- विषय: मीडिया की संवेदनहीनता, व्यावसायिकता, करुणा का मुखौटा।
- 'हम समर्थ शक्तिवान' बनाम 'दुर्बल': शक्ति और कमज़ोरी का संबंध।
- बेतुके प्रश्न: क्या/क्यों अपाहिज हैं? कैसा लगता है?
- लक्ष्य: पूछ-पूछकर रुलाना; फूली आँख का क्लोज़-अप; अपाहिज और दर्शक दोनों को रुलाना।
- कोष्ठक = कैमरे के पीछे की असली मंशा।
- अंत: 'परदे पर वक्त की कीमत है', 'सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम', '(बस थोड़ी ही कसर रह गई)'।
- शिल्प: व्यंग्य, नाटकीयता, प्रश्न शैली, बोलचाल की भाषा, मुक्त छंद।
रघुवीर सहाय – कैमरे में बंद अपाहिज: frequently asked questions
'कैमरे में बंद अपाहिज' कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
यह कविता मीडिया की संवेदनहीनता और व्यावसायिकता पर व्यंग्य है, जो 'सामाजिक उद्देश्य' के नाम पर दूसरों के दुख का प्रदर्शन करके दर्शक बटोरता है।
कविता में कोष्ठकों का क्या महत्त्व है?
कोष्ठकों में कैमरे के पीछे के निर्देश और संचालक के मन की असली बातें हैं, जो दर्शकों से छिपाई जाती हैं। इन्हीं से व्यंग्य स्पष्ट होता है।
रघुवीर सहाय की कविता की विशेषता क्या है?
रघुवीर सहाय पत्रकार और कवि थे। उन्होंने रोज़मर्रा की बोलचाल की भाषा में समाज की विडंबनाओं, सत्ता और ताकतवरों के व्यवहार तथा हाशिए के लोगों के अनुभवों पर लिखा।
परीक्षा में इस कविता से क्या पूछा जाता है?
पठित काव्यांश पर पाँच MCQ, कोष्ठकों की सार्थकता और व्यंग्य पर लगभग 40-60 शब्दों के प्रश्न तथा शीर्षक की सार्थकता।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) पाठ्यक्रम (302), कक्षा 12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 2 (Reprint 2026-27), रघुवीर सहाय – कैमरे में बंद अपाहिज