फ़िराक़ गोरखपुरी – रुबाइयाँ: Class 12 भावार्थ और प्रश्न-उत्तर
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
फ़िराक़ गोरखपुरी की 'रुबाइयाँ' में माँ और नन्हे बच्चे के वात्सल्य के घरेलू चित्र हैं: बच्चे को हवा में उछालना, नहलाना-कपड़े पहनाना, दीवाली पर घरौंदे में दीया जलाना, चाँद माँगने पर दर्पण दिखाना और रक्षाबंधन पर राखी। पाठ्यक्रम में केवल रुबाइयाँ हैं, ग़ज़ल हटा दी गई है।
What फ़िराक़ गोरखपुरी – रुबाइयाँ is about
फ़िराक़ गोरखपुरी (रघुपति सहाय 'फ़िराक़', 1896-1983) उर्दू के प्रसिद्ध शायर थे। 'गुले-नग़मा' के लिए उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला; ज्ञानपीठ पुरस्कार और सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड से भी वे सम्मानित हुए। आरोह के इस पाठ में उनकी रुबाइयाँ और एक ग़ज़ल है, पर 2026-27 के CBSE पाठ्यक्रम से ग़ज़ल हटा दी गई है, इसलिए केवल रुबाइयाँ पढ़नी हैं।
रुबाई उर्दू-फ़ारसी का चार पंक्तियों का छंद है, जिसकी पहली, दूसरी और चौथी पंक्ति में तुक मिलती है और तीसरी स्वच्छंद होती है। इन रुबाइयों की भाषा हिंदी, उर्दू और लोकभाषा का मिला-जुला रूप है ('लोका देना', 'घुटनियों', 'पिन्हाती', 'ज़िदयाया', 'रस की पुतली')। परीक्षा में वात्सल्य के चित्र, 'चाँद के टुकड़े', 'दर्पण में चाँद' और रक्षाबंधन वाली रुबाई पर प्रश्न आते हैं।
Weightage: यह पाठ खंड ग: आरोह भाग 2 एवं वितान भाग 2 का भाग है, जिसके 40 अंक हैं (कुल 80 में से), आरोह भाग 2 और वितान भाग 2 के सभी पाठों के साथ।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27 और प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27
फ़िराक़ गोरखपुरी – रुबाइयाँ: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
पहली रुबाई: माँ आँगन में अपने 'चाँद के टुकड़े' जैसे बच्चे को लिए खड़ी है। वह उसे हाथों पर झुलाती है और बार-बार हवा में हल्का-सा उछालती (लोका देती) है; हर बार बच्चे की खिलखिलाती हँसी गूँज उठती है।
दूसरी रुबाई: माँ बच्चे को साफ़, छलकते जल से नहलाती है, उसके उलझे बालों में कंघी करती है और घुटनों में दबाकर कपड़े पहनाती है। इस बीच बच्चा बड़े प्यार से माँ का मुँह देखता रहता है। यहाँ माँ-बच्चे के आत्मीय संबंध की सहज झलक है।
तीसरी रुबाई: दीवाली की शाम है; घर पुते और सजे हुए हैं, चीनी-मिट्टी के खिलौने जगमगा रहे हैं। माँ के सुंदर मुखड़े पर एक कोमल चमक है और वह बच्चे के बनाए छोटे घरौंदे में भी दीये जलाती है, ताकि बच्चे की खुशी पूरी हो।
चौथी रुबाई: बच्चा आँगन में ठुनक रहा है, ज़िद पर अड़ा है, क्योंकि उसका मन चाँद पर ललचा गया है। माँ उसे दर्पण देकर कहती है कि देखो, आईने में चाँद उतर आया है। माँ की इस युक्ति से बच्चा बहल जाता है।
पाँचवीं रुबाई: रक्षाबंधन की सुबह है। बहन 'रस की पुतली' है, यानी मिठास और प्रेम से भरी। आकाश में हल्की-हल्की घटा छाई है। राखी के चमकते लच्छे बिजली की तरह चमक रहे हैं और बहन भाई की कलाई पर चमकती राखी बाँध रही है। सावन की घटा और बिजली का चित्र भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की खुशी से जुड़ जाता है।
Themes and message
वात्सल्य: माँ और बच्चे का प्रेम
रुबाइयों का केंद्र माँ का अपने शिशु के प्रति प्रेम है: उछालना, नहलाना, कंघी करना, कपड़े पहनाना, ज़िद पर बहलाना। हर दृश्य में माँ का धैर्य और बच्चे की खुशी झलकती है।
From the text: "आँगन में लिए चाँद के टुकड़े को खड़ी"
घरेलू जीवन और त्योहार
फ़िराक़ ने दीवाली और रक्षाबंधन जैसे भारतीय त्योहारों को घर के आत्मीय दृश्यों से जोड़ा है। माँ बच्चे के घरौंदे में दिए जलाती है और बहन भाई को राखी बाँधती है।
From the text: "बच्चे के घरौंदे में जलाती है दिए"
बाल-मनोविज्ञान
बच्चा उछाले जाने पर खिलखिलाता है, नहाते समय माँ को प्यार से देखता है और चाँद के लिए ज़िद करता है। माँ उसके मन को समझकर दर्पण में चाँद दिखा देती है।
From the text: "देख आईने में चाँद उतर आया है"
भाषा की गंगा-जमुनी तहज़ीब
रुबाइयों में हिंदी, उर्दू और लोकभाषा घुल-मिल गई हैं। यह मेल-जोल भारतीय संस्कृति की साझी विरासत का भी प्रतीक है।
From the text: 'लोका देती', 'गेसुओं', 'पिन्हाती', 'ज़िदयाया', 'रस की पुतली'
The speaker and the people in the poem
माँ
रुबाइयों का केंद्रीय पात्र, जो बच्चे का लालन-पालन करती है।
- स्नेहमयी
- धैर्यवान
- चतुर (दर्पण में चाँद दिखाना)
"दर्पण उसे दे के कह रही है माँ"
बच्चा
माँ का प्यारा शिशु, 'चाँद का टुकड़ा'।
- चंचल और खिलखिलाता
- ज़िद्दी
- माँ से गहरा लगाव
"गूँज उठती है खिलखिलाते बच्चे की हँसी"
बहन
रक्षाबंधन वाली रुबाई में भाई को राखी बाँधने वाली 'रस की पुतली'।
- स्नेह से भरी
- उल्लासित
"भाई के है बाँधती चमकती राखी"
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| रूपक | "चाँद के टुकड़े", "रस की पुतली" | बच्चे को चाँद का टुकड़ा और बहन को रस की पुतली कहकर प्रेम और सौंदर्य का भाव। |
| उपमा | "बिजली की तरह चमक रहे हैं लच्छे" | राखी के चमकीले लच्छों का सजीव चित्र। |
| पुनरुक्ति प्रकाश | "रह-रह के", "छलके-छलके", "हलकी-हलकी" | क्रिया की बार-बार आवृत्ति और कोमलता। |
| दृश्य और श्रव्य बिंब | "गूँज उठती है खिलखिलाते बच्चे की हँसी" | दृश्य के साथ बच्चे की हँसी सुनाई देने लगती है। |
| रुबाई छंद, मिली-जुली भाषा | चार पंक्तियाँ; पहली, दूसरी, चौथी में तुक | संक्षिप्त, सघन चित्र; हिंदी-उर्दू-लोकभाषा का मेल। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
आँगन में लिए चाँद के टुकड़े को खड़ी
कवि: पहली रुबाई
माँ के लिए बच्चा चाँद के टुकड़े जैसा प्यारा है; वात्सल्य का चित्र।
किस प्यार से देखता है बच्चा मुँह को
कवि: नहलाने-कपड़े पहनाने का दृश्य
बच्चे का माँ के प्रति प्रेम; दोनों ओर से स्नेह।
देख आईने में चाँद उतर आया है
माँ: चाँद के लिए ज़िद करते बच्चे को बहलाना
माँ की युक्ति और बाल-मनोविज्ञान की समझ।
भाई के है बाँधती चमकती राखी
कवि: रक्षाबंधन वाली रुबाई
भाई-बहन के स्नेह का पर्व; सावन की घटा और बिजली के साथ उल्लास।
फ़िराक़ गोरखपुरी – रुबाइयाँ in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
बाल-मनोविज्ञान और युक्ति
मान लीजिए आपका तीन साल का भतीजा आसमान में उड़ता हवाई जहाज़ 'अभी लाकर दो' की ज़िद पर रो रहा है।
माँ की 'दर्पण में चाँद' वाली युक्ति से प्रेरणा लेकर आप उसे कैसे बहलाएँगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- बच्चे की ज़िद को डाँटने के बजाय कल्पना से संतुष्ट करना।
- जैसे कागज़ का हवाई जहाज़ बनाकर उड़ाना और कहना 'देखो, जहाज़ तुम्हारे पास आ गया'।
Answer: मैं कागज़ का जहाज़ बनाकर उड़ाऊँगा, जैसे माँ ने दर्पण में चाँद 'उतार' दिया; बच्चे का मन समझकर उसे कल्पना से बहलाना ही उपाय है।
Memory hook: ज़िद को डाँट नहीं, कल्पना की चाबी।
त्योहार और परिवार
कल्पना कीजिए कि दीवाली पर आपके छोटे भाई ने मिट्टी का घरौंदा बनाया है और वह चाहता है कि उसमें भी दीया जले।
रुबाई के आधार पर बताइए कि माँ क्या करती है और उसका महत्त्व क्या है।
Try it first, then show the solutionSolution
- रुबाई में माँ बच्चे के घरौंदे में भी दिए जलाती है।
- इससे बच्चे की छोटी-सी दुनिया भी त्योहार की रोशनी में शामिल होती है।
Answer: माँ घरौंदे में दीया जलाकर बच्चे की खुशी को बड़ा मानती है; त्योहार का असली आनंद परिवार के छोटे सदस्यों की भावनाओं का सम्मान है।
Memory hook: छोटे घरौंदे में भी बड़ा उजाला।
माँ-बच्चे का परस्पर प्रेम
मान लीजिए आप अपनी माँ के बचपन की तस्वीर देखते हैं जिसमें आपकी नानी उन्हें नहला रही हैं और वे नानी को एकटक देख रही हैं।
इस तस्वीर को दूसरी रुबाई से जोड़िए।
Try it first, then show the solutionSolution
- रुबाई में माँ नहलाती, कंघी करती, कपड़े पहनाती है।
- बच्चा 'किस प्यार से' माँ का मुँह देखता है—प्रेम दोनों ओर से है।
Answer: तस्वीर बिल्कुल रुबाई जैसी है: माँ सेवा करती है और बच्चा प्यार से उसे देखता है; वात्सल्य एकतरफ़ा नहीं, परस्पर है।
Memory hook: माँ नहलाए, बच्चा निहारे।
Topics in this chapter
How the board asks फ़िराक़ गोरखपुरी – रुबाइयाँ
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | किसी एक रुबाई पर शब्दार्थ ('लोका देना', 'गेसू', 'रस की पुतली'), भाव, अलंकार और कथन-कारण। | रुबाई को पहचानें: उछालना, नहलाना, दीवाली, चाँद, राखी—हर एक का एक मुख्य भाव याद रखें। |
| वात्सल्य के चित्र (3 अंक) | रुबाइयों में माँ-बच्चे के संबंध के कौन-से चित्र हैं? | तीन चित्र प्रमाण सहित: उछालना, नहलाना-कपड़े पहनाना, दर्पण में चाँद। |
| भाषा और छंद (2 अंक) | रुबाई छंद की विशेषता; हिंदी-उर्दू-लोकभाषा के मिले-जुले प्रयोग छाँटिए। | चार पंक्ति, तुक 1-2-4; उदाहरण: लोका, गेसुओं, पिन्हाती, ज़िदयाया, पै, हई। |
| त्योहारों का चित्रण (2 अंक) | दीवाली और रक्षाबंधन के दृश्य कैसे चित्रित हैं? | दीवाली: पुते-सजे घर, चीनी के खिलौने, घरौंदे में दीया; रक्षाबंधन: घटा, बिजली जैसे लच्छे, चमकती राखी। |
Tricks to remember फ़िराक़ गोरखपुरी – रुबाइयाँ
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
पाँच रुबाई, पाँच दृश्य: 'उछाल-नहला-दिया-चाँद-राखी'
आँगन में उछालना → नहलाकर कपड़े पहनाना → दीवाली का दीया → आईने में चाँद → रक्षाबंधन की राखी।
Use it when: सार और क्रम वाले प्रश्नों में।
रुबाई = चार पंक्ति, तुक 1-2-4
तीसरी पंक्ति 'आज़ाद'।
Use it when: छंद-परिचय के प्रश्न में।
लोकभाषा के शब्द
लोका, पिन्हाती, घुटनियों, ज़िदयाया, हई, पै—'गाँव की बोली'।
Use it when: भाषा-मिश्रण वाले प्रश्न में।
फ़िराक़ गोरखपुरी – रुबाइयाँ: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: काव्यांश 1: आँगन में चाँद का टुकड़ा
रह-रह के हवा में जो लोका देती है
गूँज उठती है खिलखिलाते बच्चे की हँसी
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: रुबाई की पहली दो पंक्तियों में माँ आँगन में 'चाँद के टुकड़े' को गोद में लिए, हाथों पर झुलाती खड़ी है।) 'चाँद का टुकड़ा' किसे कहा गया है?
(क) चाँद को
(ख) माँ के प्यारे बच्चे को
(ग) दीपक को
(घ) दर्पण को(2) · 1 mark · MCQ
'लोका देना' का अर्थ है—
(क) डाँटना
(ख) बच्चे को हवा में उछालकर फिर पकड़ लेना
(ग) सुला देना
(घ) नहला देना(3) · 1 mark · MCQ
बच्चे की प्रतिक्रिया क्या होती है?
(क) वह रोने लगता है
(ख) वह खिलखिलाकर हँसता है
(ग) वह सो जाता है
(घ) वह डर जाता है(4) · 1 mark · MCQ
'रह-रह के' में कौन-सा अलंकार है?
(क) पुनरुक्ति प्रकाश
(ख) उपमा
(ग) श्लेष
(घ) उत्प्रेक्षा(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): काव्यांश में वात्सल्य रस है।
कारण (R): इसमें माँ के अपने शिशु के प्रति स्नेह का चित्रण है।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
Show the answersAnswers
- (ख) माँ के प्यारे बच्चे को
- (ख) बच्चे को हवा में उछालकर फिर पकड़ लेना
- (ख) वह खिलखिलाकर हँसता है
- (क) पुनरुक्ति प्रकाश
- (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Extract 2: काव्यांश 2: आईने में चाँद
दर्पण उसे दे के कह रही है माँ
देख आईने में चाँद उतर आया है
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: रुबाई की पहली दो पंक्तियों में बालक आँगन में 'ठुनक रहा है'; वह ज़िद पकड़े है, क्योंकि उसका मन चाँद पर ललचाया है।) बालक किस बात की ज़िद कर रहा है?
(क) खिलौने की
(ख) चाँद लेने की
(ग) मिठाई की
(घ) बाहर जाने की(2) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: पिछले प्रश्न का संदर्भ देखें।) 'ठुनक रहा है' का आशय है—
(क) गा रहा है
(ख) मचलते हुए रोने-सा स्वर निकाल रहा है
(ग) सो रहा है
(घ) दौड़ रहा है(3) · 1 mark · MCQ
माँ बच्चे को कैसे बहलाती है?
(क) डाँटकर
(ख) दर्पण में चाँद का प्रतिबिंब दिखाकर
(ग) खिलौना देकर
(घ) सुलाकर(4) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: रुबाई की पहली पंक्ति है—'आँगन में ठुनक रहा है ज़िदयाया है'।) काव्यांश की भाषा की विशेषता है—
(क) शुद्ध संस्कृत
(ख) हिंदी, उर्दू और लोकभाषा का मेल ('ज़िदयाया', 'हई', 'पै')
(ग) केवल अंग्रेज़ी शब्द
(घ) ब्रजभाषा(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): माँ बच्चे की ज़िद को दर्पण से शांत करती है।
कारण (R): माँ बाल-मन को समझती है और उसे कल्पना से बहलाती है।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
Show the answersAnswers
- (ख) चाँद लेने की
- (ख) मचलते हुए रोने-सा स्वर निकाल रहा है
- (ख) दर्पण में चाँद का प्रतिबिंब दिखाकर
- (ख) हिंदी, उर्दू और लोकभाषा का मेल ('ज़िदयाया', 'हई', 'पै')
- (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
फ़िराक़ गोरखपुरी – रुबाइयाँ: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: वात्सल्य के चित्र · 3 marks · Short answerHarder board level
रुबाइयों के आधार पर माँ और बच्चे के संबंध के किन्हीं तीन चित्रों का वर्णन कीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पहला चित्र।
- दूसरा चित्र।
- तीसरा चित्र।
Answer: पहले चित्र में माँ आँगन में अपने 'चाँद के टुकड़े' को हाथों पर झुलाती और हवा में उछालती है, जिससे बच्चा खिलखिलाता है। दूसरे में वह बच्चे को नहलाकर, बालों में कंघी करके घुटनों में दबाकर कपड़े पहनाती है और बच्चा प्यार से उसका मुँह देखता है। तीसरे में चाँद के लिए ज़िद करते बच्चे को वह दर्पण में चाँद दिखाकर बहलाती है।
Example 2: दर्पण में चाँद · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'देख आईने में चाँद उतर आया है'—माँ की इस युक्ति से क्या पता चलता है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- बाल-मन की समझ।
- प्रेम और धैर्य।
Answer: बच्चा चाँद पाने की ज़िद कर रहा है, जो असंभव है। माँ उसे डाँटती नहीं, बल्कि दर्पण में चाँद का प्रतिबिंब दिखाकर उसकी इच्छा कल्पना में पूरी कर देती है। इससे माँ का धैर्य, प्रेम और बाल-मनोविज्ञान की गहरी समझ पता चलती है।
Example 3: रक्षाबंधन का चित्र · 2 marks · Short answerHarder board level
रक्षाबंधन वाली रुबाई में प्रकृति और त्योहार का संबंध कैसे दिखाया गया है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- सावन की हल्की घटा।
- बिजली जैसे चमकते लच्छे।
Answer: रक्षाबंधन सावन में आता है, इसलिए आकाश में हल्की-हल्की घटा छाई है। राखी के चमकीले लच्छे बिजली की तरह चमक रहे हैं। प्रकृति के इस उल्लास के बीच 'रस की पुतली' बहन भाई को चमकती राखी बाँध रही है; प्रकृति और त्योहार एक हो जाते हैं।
Example 4: शब्दार्थ · 1 mark · MCQBoard level
'गेसुओं' का अर्थ है—
(क) गालों
(ख) बालों/केशों
(ग) हाथों
(घ) कपड़ों
Try it first, then show the solutionSolution
- गेसू = बाल (उर्दू)।
Answer: (ख) बालों/केशों
Example 5: भाषा का मेल · 3 marks · Short answerHarder board level
रुबाइयों में हिंदी, उर्दू और लोकभाषा के मिले-जुले प्रयोग के दो-दो उदाहरण दीजिए और इसका प्रभाव बताइए। (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- हिंदी: आँगन, दर्पण, रक्षाबंधन।
- उर्दू: गेसू, ज़िद, आईना।
- लोकभाषा: लोका, पिन्हाती, ज़िदयाया।
Answer: हिंदी के 'आँगन', 'दर्पण' और 'रक्षाबंधन', उर्दू के 'गेसुओं' और 'आईने' तथा लोकभाषा के 'लोका देना', 'पिन्हाती' और 'ज़िदयाया' जैसे शब्द रुबाइयों में साथ आए हैं। इस मेल से भाषा बोलचाल जैसी सहज, मधुर और आत्मीय बन गई है, जो घरेलू दृश्यों के अनुकूल है और हिंदी-उर्दू की साझी संस्कृति को भी दर्शाती है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
फ़िराक़ की रुबाइयों में माँ-बच्चे के वात्सल्य के कौन-से चित्र उभरते हैं? (लगभग 60 शब्द) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| हवा में उछालना और बच्चे की खिलखिलाहट | 1 |
| नहलाना, कंघी, कपड़े पहनाना; बच्चे का प्यार से देखना | 1 |
| घरौंदे में दीया, दर्पण में चाँद—बाल-मन की समझ | 1 |
रुबाई छंद की दो विशेषताएँ लिखिए। (लगभग 40 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| चार पंक्तियों का उर्दू-फ़ारसी छंद | 1 |
| पहली, दूसरी, चौथी पंक्ति में तुक; तीसरी स्वच्छंद | 1 |
Where students lose marks in फ़िराक़ गोरखपुरी – रुबाइयाँ
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: ग़ज़ल पर उत्तर लिखना या उसे पढ़ना
2026-27 पाठ्यक्रम से फ़िराक़ की ग़ज़ल हटा दी गई है; केवल रुबाइयाँ हैं।
Do this: तैयारी केवल रुबाइयों की करें।
Usually costs: समय की बर्बादी
Mistake: 'लोका देना' का अर्थ 'लोरी देना' लिखना
लोका देना = बच्चे को हवा में उछालकर पकड़ना।
Do this: संदर्भ: 'हवा में जो लोका देती है' के बाद बच्चे की हँसी।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: चाँद वाली रुबाई में माँ को झूठ बोलने वाली बताना
यह बाल-मन को बहलाने की स्नेहभरी युक्ति है, छल नहीं।
Do this: 'युक्ति', 'कल्पना से बहलाना' जैसे शब्द लिखें।
Usually costs: आधा अंक
Mistake: रक्षाबंधन वाली रुबाई में 'रस की पुतली' को माँ बताना
रस की पुतली राखी बाँधने वाली बहन है।
Do this: प्रसंग पहचानें: भाई को राखी बाँधती है।
Usually costs: 1 अंक
Practice questions on फ़िराक़ गोरखपुरी – रुबाइयाँ
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
फ़िराक़ गोरखपुरी का मूल नाम क्या था?
(क) रघुपति सहाय
(ख) रघुवीर सहाय
(ग) हरिवंश राय
(घ) उमाशंकरHint
कवि-परिचय।
Answer
(क) रघुपति सहाय
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
दीवाली वाली रुबाई में माँ बच्चे के घरौंदे में दीया क्यों जलाती है? (लगभग 40 शब्द)
Hint
बच्चे की खुशी।
Answer
बच्चे ने अपना छोटा घरौंदा बनाया है और वह चाहता है कि उसका घर भी बड़े घर की तरह जगमगाए। माँ उसकी भावना का सम्मान करती है और घरौंदे में दीये जलाकर उसकी खुशी पूरी करती है; यह वात्सल्य का सुंदर उदाहरण है।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
'किस प्यार से देखता है बच्चा मुँह को' पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)
Hint
प्रेम दोनों ओर से।
Answer
माँ बच्चे को नहलाती, कंघी करती और कपड़े पहनाती है; इस बीच बच्चा बड़े प्यार और भरोसे से माँ का चेहरा निहारता रहता है। इससे पता चलता है कि माँ-बच्चे का प्रेम परस्पर है; बच्चा भी अपनी आँखों से माँ के प्रति स्नेह प्रकट करता है।
Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level
कथन (A): पाठ्यक्रम 2026-27 में फ़िराक़ गोरखपुरी की ग़ज़ल भी शामिल है।
कारण (R): इस पाठ की केवल रुबाइयाँ ही पाठ्यक्रम में हैं।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।Hint
हटाए गए पाठों की सूची।
Answer
(घ) कथन गलत है, कारण सही है: ग़ज़ल हटा दी गई है।
Q5 · 3 marks · Short answerHarder board level
रुबाइयों में चित्रित माँ के व्यक्तित्व की तीन विशेषताएँ प्रमाण सहित लिखिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
स्नेह, धैर्य, चतुराई।
Answer
माँ स्नेहमयी है: वह अपने 'चाँद के टुकड़े' को हाथों पर झुलाती और उछालती है। वह धैर्यवान और सेवाभावी है: बच्चे को नहलाकर, कंघी करके घुटनों में दबाकर कपड़े पहनाती है। वह चतुर और बाल-मन को समझने वाली है: चाँद की ज़िद करते बच्चे को दर्पण में चाँद दिखाकर बहला देती है।
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
आज के एकल परिवारों और व्यस्त माता-पिता के दौर में रुबाइयों में चित्रित वात्सल्य कितना प्रासंगिक है? अपने विचार लिखिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
समय, खेल, भावनात्मक जुड़ाव।
Answer
आज माता-पिता व्यस्त हैं और बच्चे का बहुत-सा समय स्क्रीन के साथ बीतता है। ऐसे में रुबाइयों का संदेश और भी प्रासंगिक है: बच्चे को उछालकर हँसाना, स्वयं नहलाना, त्योहार पर उसके घरौंदे में दीया जलाना और उसकी ज़िद को प्यार से संभालना—ये छोटे-छोटे पल ही गहरा भावनात्मक जुड़ाव बनाते हैं, जिसकी जगह कोई उपकरण नहीं ले सकता।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.माँ आँगन में किसे लिए खड़ी है?Show answer
चाँद के टुकड़े (अपने बच्चे) को।
2.माँ बच्चे को कहाँ दबाकर कपड़े पहनाती है?Show answer
घुटनियों (घुटनों) में।
3.दीवाली पर क्या जगमगा रहे हैं?Show answer
चीनी के खिलौने।
4.बालक किस पर ललचाया है?Show answer
चाँद पर।
5.माँ बच्चे को क्या देती है?Show answer
दर्पण (आईना)।
6.राखी के लच्छे किसकी तरह चमक रहे हैं?Show answer
बिजली की तरह।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- कवि: फ़िराक़ गोरखपुरी (रघुपति सहाय, 1896-1983); गुले-नग़मा, ज्ञानपीठ।
- पाठ्यक्रम में केवल रुबाइयाँ; ग़ज़ल हटा दी गई।
- रुबाई: चार पंक्ति, तुक 1-2-4, तीसरी स्वच्छंद।
- दृश्य: उछालना (लोका) → नहलाना-कंघी-कपड़े → दीवाली, घरौंदे में दीया → आईने में चाँद → रक्षाबंधन।
- माँ: स्नेहमयी, धैर्यवान, बाल-मन की समझ वाली।
- रस की पुतली = बहन; लच्छे बिजली जैसे; हल्की घटा।
- भाषा: हिंदी-उर्दू-लोकभाषा का मेल; रूपक, उपमा, पुनरुक्ति, दृश्य-श्रव्य बिंब।
फ़िराक़ गोरखपुरी – रुबाइयाँ: frequently asked questions
क्या फ़िराक़ गोरखपुरी की ग़ज़ल 2026-27 के पाठ्यक्रम में है?
नहीं। CBSE 2026-27 के हटाए गए पाठों की सूची में 'फ़िराक़ गोरखपुरी – ग़ज़ल' है। केवल रुबाइयाँ पाठ्यक्रम में हैं।
रुबाई किसे कहते हैं?
रुबाई उर्दू-फ़ारसी का चार पंक्तियों का छंद है, जिसकी पहली, दूसरी और चौथी पंक्ति में तुक (काफ़िया) मिलती है और तीसरी पंक्ति स्वच्छंद होती है।
रुबाइयों का मुख्य भाव क्या है?
माँ और शिशु के वात्सल्य, घरेलू जीवन और दीवाली-रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के आत्मीय चित्र।
फ़िराक़ गोरखपुरी को कौन-से सम्मान मिले?
'गुले-नग़मा' के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार और सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) पाठ्यक्रम (302), कक्षा 12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 2 (Reprint 2026-27), फ़िराक़ गोरखपुरी – रुबाइयाँ