नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन: Class 12 तरीका और नमूना लेख
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन' अभिव्यक्ति और माध्यम का पाठ 13 है। यह सिखाता है कि अचानक दिए गए विषय पर रटे हुए निबंध के बजाय अपने मौलिक विचारों को सुसंबद्ध, सुसंगत और आकर्षक लेख में कैसे ढालें। बोर्ड में तीन ऐसे विषयों में से एक पर लगभग 120 शब्दों का लेख 6 अंक का होता है।
What नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन is about
यह पाठ अभिव्यक्ति और माध्यम (NCERT) का पाठ 13 है और बोर्ड परीक्षा के खंड ख का सबसे बड़ा प्रश्न इसी से आता है: 'दिए गए 03 अप्रत्याशित विषयों में से किसी 01 विषय पर आधारित लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेखन' (6 अंक)। इसके अलावा पाठ 3, 4, 5, 11 और 13 पर आधारित 2 अंक (लगभग 40 शब्द) और 4 अंक (लगभग 80 शब्द) वाले प्रश्नों में भी इस पाठ के सिद्धांत (रटंत, सुसंबद्धता, सुसंगति, 'मैं' शैली) पूछे जा सकते हैं।
पाठ का मूल विचार है कि ज़्यादातर लोग लिखित अभिव्यक्ति का अभ्यास ही नहीं करते, क्योंकि वे 'रटंत' पर निर्भर रहते हैं। परंपरागत निबंध-विषयों पर तैयार सामग्री बहुत मिलती है, इसलिए नया सोचने की ज़रूरत नहीं पड़ती। नए और अप्रत्याशित विषय हमें अपने विचारों को स्वयं संगठित करने और भाषा के सहारे सोचने के लिए विवश करते हैं; पाठ के अनुसार यही अभ्यास अभिव्यक्ति के अधिकार का पूरा उपयोग करने की सामर्थ्य देता है।
इस पृष्ठ पर पाठ के सिद्धांत, लिखने का चरणबद्ध तरीका, अंक कटने की आम गलतियाँ और 120-130 शब्दों के कई नमूना लेख दिए गए हैं।
Weightage: यह पाठ खंड ख: अभिव्यक्ति और माध्यम का भाग है, जिसके 22 अंक हैं (कुल 80 में से)। इसमें 120 शब्दों का रचनात्मक लेखन (6 अंक), लगभग 40 शब्दों के 2-2 अंक वाले और लगभग 80 शब्दों के 4-4 अंक वाले प्रश्न आते हैं।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27 और प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
भाषा विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं, स्वयं विचार करने का साधन भी है।
NCERT पाठ: लेखन का आशय
लिखना सोचने का अभ्यास है; इसलिए रटंत से बचना ज़रूरी है।
लिखने का कोई फ़ॉर्मूला आज तक दुनिया में नहीं बना।
NCERT पाठ: ऐसे लेख की तैयारी
रचनात्मकता का संबंध फ़ॉर्मूले के न होने से है; सुझाव केवल मार्गदर्शन हैं।
वस्तुतः सुसंबद्धता किसी भी तरह के लेखन का एक बुनियादी नियम है।
NCERT पाठ: लेख की रूपरेखा
खुले विषय पर लिखते हुए भी बातें आपस में जुड़ी होनी चाहिए।
Key concepts
- अप्रत्याशित विषयों पर लेखन क्या है और क्यों ज़रूरी
अप्रत्याशित विषय वे हैं जिन पर लिखने के लिए पहले से तैयार सामग्री नहीं होती; विषयों की संख्या अपरिमित है: सामने की दीवार, उस पर टँगी घड़ी, बाहर खुलता झरोखा; या थोड़े केंद्रित विषय जैसे 'टी.वी. धारावाहिकों में स्त्री', 'बहुत ज़रूरी है शिक्षा'।
क्यों ज़रूरी:
- 'रटंत' यानी दूसरों की तैयार सामग्री को याद करके ज्यों-का-त्यों लिख देने की कुटेव (बुरी लत) से असली अभ्यास नहीं होता।
- लेखन का अर्थ यांत्रिक हस्तकौशल नहीं, भाषा के सहारे किसी चीज़ पर विचार करना और उसे व्याकरणिक शुद्धता के साथ सुसंगठित रूप में व्यक्त करना है।
- भाषा विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं, स्वयं विचार करने का साधन भी है।
- ऐसे लेख कभी निबंध, कभी संस्मरण, कभी रेखाचित्र या यात्रावृत्तांत जैसे बन सकते हैं; इसलिए पाठ इन्हें सामान्य नाम 'लेख' देता है।
Worked example
'रटंत' किसे कहा गया है और यह लेखन के लिए हानिकारक क्यों है?
Try it first, then show the solutionSolution
- परिभाषा।
- हानि: मौलिक अभ्यास नहीं।
Answer: दूसरों द्वारा तैयार सामग्री को याद करके ज्यों-का-त्यों प्रस्तुत करने की बुरी आदत रटंत है। इससे अपने विचार संगठित करने और लिखने का असली अभ्यास नहीं होता, इसलिए लिखित अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित नहीं हो पाती।
- खुला विषय बनाम केंद्रित विषय
पाठ के अनुसार ऐसा विषय 'दो खंभों के बीच बंधी रस्सी' नहीं, बल्कि 'खुला मैदान' है, जिसमें दौड़ने-कूदने की छूट है: विषय से जुड़े जो भी सार्थक और सुसंगत विचार मन में आएँ, लिखे जा सकते हैं।
- खुला विषय ('दीवाल घड़ी'): सैकड़ों कोणों से सोचा जा सकता है; लेखक पर कोई चौहद्दी नहीं।
- केंद्रित विषय ('टी.वी. धारावाहिकों में स्त्री', 'दीवाल घड़ी की उपयोगिता'): विचार-प्रवाह थोड़ा नियंत्रित रखना पड़ता है; विषय में व्यक्त वस्तुस्थिति की उपेक्षा नहीं की जा सकती; कोण कम होते हैं।
बोर्ड परीक्षा में प्रायः दोनों तरह के विषय आते हैं; विषय की प्रकृति पहचानकर ही शैली चुनें।
- लिखने का तरीका: चरणबद्ध
लिखने का कोई फ़ॉर्मूला नहीं (होता तो कंप्यूटर बेहतर लेखक होता), फिर भी पाठ के सुझाव:
1. दो-तीन मिनट ठहरें: विषय पर मन में आए कई कोणों में से वह कोण चुनें जिसे आप विस्तार दे सकें।
2. आकर्षक शुरुआत सोचें, जो निर्वाह-योग्य भी हो, यानी आगे की बातें उससे जुड़ सकें।
3. मन में रूपरेखा बनाएँ कि बात सिलसिलेवार कैसे आगे बढ़ेगी।
4. सुसंबद्धता: बातें आपस में जुड़ी हों; बिना कारण विषय न बदलें (मौसम की बात करते-करते अचानक राजनीति नहीं)।
5. सुसंगति: बातों में तालमेल हो, एक-दूसरे का खंडन न करें (एक ही दिन का मौसम एक बार खुशगवार, दूसरी बार उबाऊ नहीं)।
6. 'मैं' शैली की छूट: सामान्य निबंधों में वर्जित, पर यहाँ विचारों में आत्मनिष्ठता और व्यक्तित्व की छाप स्वाभाविक है।
7. अंत में एक-दो वाक्यों में निचोड़, जो किसी सामान्य सत्य की ओर इशारा करे।परीक्षा के लिए जोड़ें: विषय के अनुरूप शीर्षक, लगभग 120 शब्द, दो-तीन छोटे अनुच्छेद।
Worked example
सुसंबद्धता और सुसंगति में क्या अंतर है?
Try it first, then show the solutionSolution
- सुसंबद्धता: बातें जुड़ी हों।
- सुसंगति: बातें आपस में विरोधी न हों।
Answer: सुसंबद्धता का अर्थ है लेख की बातें आपस में जुड़ी हों और बिना कारण विषय न बदले; सुसंगति का अर्थ है बातों में तालमेल हो, कोई बात दूसरी बात का खंडन न करे।
- लिखने की शैलियाँ: पाठ के नमूनों से
पाठ 'दीवाल घड़ी' पर तीन नमूने देता है:
1. स्मृति-आधारित: घड़ी देखकर उभरी यादों (फ़िल्म का दृश्य, घर में पहली घड़ी टाँगने की बहस) को तरतीब देना, ताकि वे दिलचस्प लगें और अंत में किसी सामान्य सत्य की ओर इशारा करें।
2. दार्शनिक: रोज़मर्रा की चीज़ से ऊपर उठकर समय, जीवन जैसे गंभीर प्रश्नों की ओर जाना।
3. अवलोकन-आधारित: सामने की घड़ी की खूबसूरती, गति, आवाज़, टँगे होने का अंदाज़; साथ में अपनी राय, ताकि लेख सपाट विवरण न बने।अन्य तरीके:
- ज्वलंत सामाजिक प्रश्न ('जातिवाद का ज़हर'): कल्पना की उड़ान नहीं, तथ्य, ठोस विश्लेषण और स्पष्ट राय।
- किसी जगह का दृश्य ('मेरे मुहल्ले का चौराहा'): कल्पना में दृश्य को उपस्थित मानकर चलते कैमरे की तरह ब्योरे समेटना।
सूत्र: अपनी सुविधा और विषय की माँग के अनुसार तरीका चुनें।
- परीक्षा का प्रारूप और समय-प्रबंधन
प्रश्न: तीन अप्रत्याशित विषय, किसी एक पर लगभग 120 शब्दों का रचनात्मक लेख, 6 अंक।
समय-योजना (लगभग 12-15 मिनट):
- 2 मिनट: तीनों विषय पढ़ें, वह चुनें जिस पर आपके पास अपने अनुभव या ठोस विचार हों; कोण तय करें।
- 1 मिनट: शीर्षक और पहली पंक्ति।
- 8-10 मिनट: तीन अनुच्छेद (शुरुआत, विस्तार, निष्कर्ष)।
- 1-2 मिनट: वर्तनी, विराम-चिह्न, शब्द-सीमा जाँचें।
शब्द-सीमा: 120 के आसपास (लगभग 110-140); बहुत छोटा उत्तर विषयवस्तु के अंक खोता है, बहुत लंबा समय।
नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
रटंत बनाम मौलिक लेखन
मान लीजिए आपके एक मित्र ने परीक्षा से पहले 'पर्यावरण प्रदूषण' पर रटा हुआ निबंध याद कर रखा है और परीक्षा में विषय आता है 'मेरे शहर की हवा'।
पाठ के आधार पर बताइए कि उसे क्या करना चाहिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- रटा हुआ निबंध ज्यों-का-त्यों लिखना विषय से भटकना होगा; यह केंद्रित विषय है।
- अपने शहर के अनुभव (सुबह की धुंध, खाँसते बुज़ुर्ग, ट्रैफ़िक) से शुरुआत करे, फिर कारण और सुझाव 'मैं' शैली में दे।
Answer: उसे रटंत छोड़कर अपने अनुभव और अवलोकन से मौलिक लेख लिखना चाहिए; याद किए तथ्य वहीं काम आएँ जहाँ वे उसके शहर की हवा से जुड़ते हों। यही सुसंबद्ध लेखन है।
Memory hook: रटा हुआ नहीं, देखा हुआ लिखो।
रोज़ के जीवन से विषय
कल्पना कीजिए कि आप रोज़ बस से स्कूल जाते हैं और शिक्षक कहते हैं कि अगले सप्ताह से हर दिन 'आज के सफ़र' पर 100 शब्द लिखकर लाओ।
यह अभ्यास आपकी परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेगा?
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ के अनुसार ऐसे लेखन के विषय अपरिमित हैं; रोज़ का अवलोकन ही अभ्यास है।
- रोज़ लिखने से कोण चुनने, आकर्षक शुरुआत और निचोड़ निकालने की आदत बनेगी।
Answer: रोज़ लिखने से परीक्षा में अप्रत्याशित विषय देखकर घबराहट नहीं होगी; देखी हुई चीज़ों को तरतीब देना और 120 शब्दों में बाँधना सहज हो जाएगा।
Memory hook: रोज़ का सफ़र, रोज़ का लेख।
सुसंगति
मान लीजिए आपने 'सावन की पहली झड़ी' पर लेख में पहले अनुच्छेद में लिखा कि बारिश से मन खिल उठा और तीसरे अनुच्छेद में बिना कारण लिख दिया कि बारिश हमेशा उदास करती है।
इसमें क्या दोष है और कैसे सुधारेंगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- यह असंगति है: दो बातें एक-दूसरे का खंडन करती हैं।
- यदि दोनों भाव दिखाने हैं तो कारण जोड़ें, जैसे 'पर उसी बारिश में सड़क किनारे भीगते रिक्शेवाले को देखकर मन उदास भी हुआ'।
Answer: विरोधी भावों को कारण से जोड़ दिया जाए तो लेख सुसंगत और अधिक गहरा बन जाता है; बिना कारण उलटी बात लिखना पाठक का भरोसा तोड़ता है।
Memory hook: बात बदलो तो कारण बताओ।
Topics in this chapter
How the board asks नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| रचनात्मक लेख (6 अंक, लगभग 120 शब्द, 3 में से 1) | खुले विषय ('झरोखे से बाहर', 'सावन की पहली झड़ी', 'दीया और तूफ़ान', 'मेरा प्रिय टाइमपास') या केंद्रित विषय ('इम्तहान के दिन', 'एक कामकाजी औरत की शाम', 'जातिवाद का ज़हर')। | विषय की प्रकृति पहचानें (स्मृति/अवलोकन/दार्शनिक/विश्लेषण), शीर्षक, आकर्षक शुरुआत, दो-तीन अनुच्छेद, अंत में सामान्य सत्य वाला निचोड़; 'मैं' शैली चल सकती है। |
| सिद्धांत (2 अंक, लगभग 40 शब्द) | रटंत क्या है? सुसंबद्धता/सुसंगति का अर्थ; ऐसे लेखन में 'मैं' शैली क्यों स्वीकार्य; विचार-प्रवाह को नियंत्रित क्यों रखना पड़ता है। | पाठ की परिभाषा अपने शब्दों में + पाठ का उदाहरण (मौसम-राजनीति, खंभों के बीच रस्सी बनाम खुला मैदान)। |
| प्रक्रिया / महत्त्व (4 अंक, लगभग 80 शब्द) | अप्रत्याशित विषयों पर लिखते समय किन बातों का ध्यान रखें? नए विषयों पर लिखने का अभ्यास क्यों ज़रूरी है? | चरणबद्ध बिंदु (कोण चुनना, आकर्षक-निर्वाह-योग्य शुरुआत, रूपरेखा, सुसंबद्धता, सुसंगति) या कारण (रटंत, भाषा = सोचने का साधन, अभिव्यक्ति का अधिकार)। |
Tricks to remember नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
लेख के पाँच कदम: 'ठ-को-शु-रू-नि'
ठहरो (2 मिनट) → कोण चुनो → शुरुआत आकर्षक और निर्वाह-योग्य → रूपरेखा (सुसंबद्ध, सुसंगत) → निचोड़ (सामान्य सत्य)।
Use it when: 6 अंक का लेख लिखते समय और 4 अंक के प्रक्रिया-प्रश्न में।
दो 'सु': सुसंबद्धता और सुसंगति
सुसंबद्धता = बातें जुड़ी हों (मौसम से अचानक राजनीति नहीं); सुसंगति = बातें टकराएँ नहीं (एक ही मौसम खुशगवार भी, उबाऊ भी नहीं)।
Use it when: सिद्धांत वाले 2 अंक के प्रश्न में।
नमूनों के तीन ढंग: 'स्मृ-दा-अव'
स्मृति-आधारित, दार्शनिक, अवलोकन-आधारित; सामाजिक मुद्दा = तथ्य + विश्लेषण; जगह का दृश्य = चलता कैमरा।
Use it when: विषय देखकर शैली चुनने में।
नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: रटंत और नए विषय · 2 marks · Short answerBoard level
परंपरागत निबंध-विषयों के बजाय नए विषयों पर लिखने का अभ्यास क्यों आवश्यक है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- परंपरागत विषयों पर तैयार सामग्री, रटंत।
- नए विषय: मौलिक सोच और अभिव्यक्ति।
Answer: परंपरागत विषयों पर तैयार सामग्री प्रचुर मात्रा में मिलती है, इसलिए हम रटकर लिख देते हैं और नया नहीं सोचते। नए विषयों पर लिखने से अपने विचार संगठित करने का असली अभ्यास होता है और लिखित अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित होती है।
Example 2: 'मैं' शैली · 2 marks · Short answerHarder board level
अप्रत्याशित विषयों पर लेखन में 'मैं' शैली का प्रयोग क्यों स्वीकार्य है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- सामान्य निबंध में वस्तुनिष्ठता, 'मैं' वर्जित।
- यहाँ आत्मनिष्ठता स्वाभाविक।
Answer: सामान्य निबंधों और प्रश्नोत्तरों में वस्तुनिष्ठता के आग्रह से 'मैं' शैली वर्जित मानी जाती है, पर ऐसे लेखन में विचारों में आत्मनिष्ठता और लेखक के व्यक्तित्व की छाप होना स्वाभाविक है, इसलिए 'मैं' बेरोकटोक आ सकता है।
Example 3: नमूना लेख: झरोखे से बाहर · 6 marks · Long answerBoard level
'झरोखे से बाहर' विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- कोण: अवलोकन + अपनी राय (पाठ का तीसरा नमूना-तरीका)।
- आकर्षक शुरुआत, बीच में दृश्य, अंत में सामान्य सत्य।
Answer: झरोखे से बाहर
मेरे कमरे का छोटा-सा झरोखा मेरे लिए दुनिया की खिड़की है। पढ़ाई से ऊबकर जब भी बाहर झाँकता हूँ, एक नई कहानी चल रही होती है।
सुबह सब्ज़ीवाले की आवाज़ के साथ गली जागती है। स्कूल-बस का हॉर्न, दौड़ते बच्चे, और कोने पर बैठी अम्मा, जो रोज़ कबूतरों को दाना डालती हैं। दोपहर में गली ऊँघती है, बस नीम की छाँव में एक कुत्ता करवटें बदलता रहता है। शाम को वही गली क्रिकेट का मैदान बन जाती है और हर चौके पर किसी की खिड़की का शीशा खतरे में आ जाता है।
यह झरोखा मुझे सिखाता है कि ज़िंदगी बड़े दृश्यों से नहीं, छोटे-छोटे क्षणों से बनती है; बस उन्हें देखने वाली आँख चाहिए।
Example 4: नमूना लेख: इम्तहान के दिन · 6 marks · Long answerHarder board level
'इम्तहान के दिन' विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- कोण: स्मृति और अनुभव, थोड़ा हास्य।
- केंद्रित विषय: घर का माहौल, मन की स्थिति, सीख।
Answer: इम्तहान के दिन
इम्तहान आते ही हमारा घर अचानक किसी तपस्या-स्थल में बदल जाता है। टी.वी. पर चादर पड़ जाती है, मेहमानों का आना 'स्थगित' हो जाता है और माँ की चाय की प्याली रात बारह बजे भी तैयार मिलती है।
इन दिनों मेरी मेज़ पर किताबों से ज़्यादा 'टाइम-टेबल' चिपके होते हैं, जिनमें से कोई भी पूरा नहीं होता। सुबह लगता है सब याद है, रात को लगता है कुछ भी नहीं आता। परीक्षा-भवन के बाहर हर कोई एक ही सवाल पूछता है: 'वो वाला अध्याय पढ़ा?'
पर इन्हीं दिनों में मैंने जाना कि घबराहट से ज़्यादा काम आती है नियमितता। इम्तहान के दिन सिखा जाते हैं कि तैयारी केवल किताबों की नहीं, धैर्य की भी होती है।
Example 5: नमूना लेख: दीया और तूफ़ान · 6 marks · Long answerHOTS / competency
'दीया और तूफ़ान' विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- कोण: प्रतीकात्मक/दार्शनिक (पाठ का दूसरा नमूना-तरीका)।
- दीया = साहस/आशा, तूफ़ान = संकट; उदाहरण; निचोड़।
Answer: दीया और तूफ़ान
दीया छोटा-सा होता है, मिट्टी का, एक बाती और थोड़े-से तेल वाला। तूफ़ान विशाल होता है, गरजता हुआ, सब कुछ उड़ा ले जाने को आतुर। फिर भी कहानियाँ प्रायः दीये की जीत की ही कही जाती हैं।
मुझे लगता है, हर इंसान के भीतर एक दीया जलता है: आशा का, साहस का। बीमारी, असफलता, गरीबी जैसे तूफ़ान उसे बुझाने आते हैं। कोई बाढ़ में अपना घर खोकर भी अगले दिन दूसरों के लिए खाना बनाता है; कोई तीसरी बार फ़ेल होकर चौथी बार परीक्षा देता है। ये सब तूफ़ान के सामने टिमटिमाते दीये हैं।
दीया तूफ़ान को हरा नहीं सकता, पर उसके बीतने तक जलता रह सकता है। शायद यही जीत है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
किसी अप्रत्याशित विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख (6 अंक) — सुझाया गया अंक-विभाजन (यह हमारा कार्य-ढाँचा है, 2026-27 की अंक-योजना से उद्धृत नहीं) (6 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| विषय के अनुरूप शीर्षक और आकर्षक, निर्वाह-योग्य भूमिका | 1 |
| विषयवस्तु: मौलिक विचार/अनुभव, सुसंबद्धता और सुसंगति, विषय पर टिके रहना | 3 |
| भाषा: शुद्ध वर्तनी, व्याकरण, प्रवाह, उपयुक्त शब्द-चयन | 1 |
| निष्कर्ष/निचोड़ और शब्द-सीमा के भीतर प्रस्तुति | 1 |
रटंत किसे कहते हैं? (लगभग 40 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| परिभाषा: दूसरों की तैयार सामग्री याद करके ज्यों-का-त्यों लिखना | 1 |
| हानि: मौलिक अभ्यास नहीं, लिखित अभिव्यक्ति विकसित नहीं होती | 1 |
Where students lose marks in नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: अप्रत्याशित विषय पर रटा हुआ निबंध फिट कर देना
विषय से भटका लेख विषयवस्तु के अंक खोता है; पाठ का उद्देश्य ही रटंत से बचकर मौलिक लेखन है।
Do this: पहली पंक्ति से ही दिए गए विषय से जुड़ें; अपने अनुभव और अवलोकन लिखें।
Usually costs: 2-3 अंक
Mistake: शीर्षक न देना या विषय से मेल न खाता शीर्षक देना
शीर्षक लेख की दिशा बताता है; उसके बिना प्रस्तुति अधूरी लगती है।
Do this: दिया गया विषय ही शीर्षक बनाएँ या उससे जुड़ा आकर्षक शीर्षक दें।
Usually costs: आधा अंक
Mistake: 120 की जगह 50-60 या 250 शब्द लिखना
छोटा लेख विचारों का विस्तार नहीं दिखाता; बहुत लंबा लेख समय खाता है और कसाव खोता है।
Do this: तीन अनुच्छेद, हर एक 35-45 शब्द; कुल 110-140।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: लेख को सपाट विवरण या उपदेशों की सूची बना देना
पाठ के अनुसार अवलोकन के साथ अपनी राय और अंत में कोई सामान्य सत्य लेख को सपाट विवरण बनने से बचाते हैं।
Do this: हर अनुच्छेद में एक दृश्य/अनुभव + अपनी प्रतिक्रिया; अंत में एक-दो वाक्य का निचोड़।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: वर्तनी और विराम-चिह्नों की लापरवाही
पाठ लेखन को 'व्याकरणिक शुद्धता के साथ सुसंगठित' अभिव्यक्ति मानता है; भाषा के अंक इसी पर कटते हैं।
Do this: अंत के 1-2 मिनट केवल दोहराने और सुधारने के लिए रखें।
Usually costs: 1 अंक
Practice questions on नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerBoard level
सुसंबद्धता किसे कहते हैं? पाठ के उदाहरण से स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)
Hint
मौसम से अचानक राजनीति।
Answer
लेख की बातों का आपस में जुड़ा होना सुसंबद्धता है। यदि मौसम की चर्चा करते-करते बिना किसी कारण या संबंध के अचानक राजनीति पर लिखने लगें, तो लेख में संबद्धता का अभाव दिखेगा।
Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level
केंद्रित विषयों पर लिखते समय विचार-प्रवाह को नियंत्रित क्यों रखना पड़ता है? (लगभग 40 शब्द)
Hint
वस्तुस्थिति की उपेक्षा नहीं।
Answer
'टी.वी. धारावाहिकों में स्त्री' जैसे विषयों का फ़ोकस स्पष्ट होता है; उन पर लिखते हुए विषय में व्यक्त वस्तुस्थिति की उपेक्षा नहीं की जा सकती, इसलिए विचारों को उसी दायरे में रखना पड़ता है और सोचने के कोण भी कम होते हैं।
Q3 · 4 marks · Short answerBoard level
अप्रत्याशित विषयों पर लेख लिखते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? (लगभग 80 शब्द)
Hint
कोण, शुरुआत, रूपरेखा, सुसंबद्धता, सुसंगति, 'मैं'।
Answer
विषय मिलते ही दो-तीन मिनट ठहरकर तय करें कि मन में आए कई कोणों में से किसे विस्तार दे सकते हैं। फिर एक आकर्षक शुरुआत सोचें, जो निर्वाह-योग्य हो, और मन में रूपरेखा बना लें कि बात सिलसिलेवार कैसे बढ़ेगी। लेख सुसंबद्ध हो, यानी बातें आपस में जुड़ी हों, और सुसंगत हो, यानी कोई बात दूसरी का खंडन न करे। ऐसे लेखन में 'मैं' शैली का प्रयोग किया जा सकता है। अंत में कोई सामान्य सत्य निचोड़ के रूप में रखें।
Q4 · 6 marks · Long answerHarder board level
'मेरे मुहल्ले का चौराहा' विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 अंक)
Hint
चलते कैमरे की तरह दृश्य के ब्योरे; सुबह-शाम का अंतर; निचोड़।
Answer
मेरे मुहल्ले का चौराहा
हमारे मुहल्ले का चौराहा कोई प्रसिद्ध जगह नहीं, फिर भी मुहल्ले की धड़कन यहीं सुनाई देती है। सुबह पाँच बजे दूधवाले की साइकिल की घंटी से यह जागता है। सात बजते-बजते चाय की दुकान पर अखबार की खबरों पर बहस शुरू हो जाती है, जहाँ हर व्यक्ति प्रधानमंत्री से कम सलाह नहीं देता।
दोपहर में चौराहा थककर सुस्ताता है; बस फलवाले की आवाज़ गूँजती है। शाम होते ही यहाँ मेला-सा लग जाता है: गोलगप्पे का ठेला, खेलते बच्चे, सैर से लौटते बुज़ुर्ग, और ट्रैफ़िक में फँसे स्कूटरों के हॉर्न।
यह चौराहा सिखाता है कि अलग-अलग दिशाओं से आने वाले रास्ते भी कहीं न कहीं मिलकर एक जगह बना ही लेते हैं, ठीक मुहल्ले के लोगों की तरह।
Q5 · 6 marks · Long answerHarder board level
'एक कामकाजी औरत की शाम' विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 अंक)
Hint
केंद्रित विषय; संवेदना और यथार्थ; दफ़्तर से घर; सवाल; निचोड़।
Answer
एक कामकाजी औरत की शाम
शाम छह बजे दफ़्तर से निकलती मेरी माँ के लिए दिन खत्म नहीं होता, दूसरा दिन शुरू होता है। बस की भीड़ में खड़े-खड़े वे मन ही मन सब्ज़ी की सूची बनाती हैं और मोबाइल पर मेरे होमवर्क के बारे में पूछती हैं।
घर पहुँचते ही दरवाज़े पर ही सवाल इंतज़ार करते हैं: 'आज खाने में क्या है?', 'मेरी यूनिफ़ॉर्म धुली?' चाय का कप हाथ में आता है, पर पीने का समय नहीं मिलता। रसोई, बच्चों की पढ़ाई और कल की फ़ाइल, सब एक साथ चलते हैं।
मुझे लगता है, कामकाजी औरत की शाम तभी उसकी अपनी होगी जब घर के बाकी लोग काम को 'मदद' नहीं, अपनी बराबर की ज़िम्मेदारी समझेंगे।
Q6 · 6 marks · Long answerHOTS / competency
'मेरा प्रिय टाइमपास' विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 अंक)
Hint
'मैं' शैली, आत्मनिष्ठ, हल्का हास्य; मोबाइल से अलग कुछ मौलिक; निचोड़।
Answer
मेरा प्रिय टाइमपास
लोग सोचते हैं कि आज के किशोर का प्रिय टाइमपास मोबाइल ही होगा, पर मेरा टाइमपास है बालकनी में बैठकर लोगों के जूते देखना। सुनने में अजीब लगता है, पर जूते बहुत कुछ बोलते हैं।
चमचमाते काले जूते जल्दी में किसी दफ़्तर जा रहे होते हैं; धूल-भरी चप्पलें दिन भर की मेहनत के बाद लौट रही होती हैं; स्कूल के सफ़ेद जूतों पर लगी कीचड़ बताती है कि किसी ने आज पोखर में छलाँग लगाई थी। एक बार एक जोड़ी फटे जूतों में किसी को मुसकराते जाते देखा, तो देर तक सोचता रहा।
यह टाइमपास मुझे सिखाता है कि हर व्यक्ति के पीछे एक कहानी होती है; बस उसे पढ़ने का धीरज चाहिए।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.रटंत को पाठ में क्या कहा गया है?Show answer
कुटेव, यानी बुरी लत।
2.पाठ के अनुसार भाषा क्या है?Show answer
विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं, स्वयं विचार करने का साधन भी।
3.अप्रत्याशित विषय की तुलना पाठ में किससे की गई है?Show answer
खंभों के बीच बँधी रस्सी से नहीं, खुले मैदान से।
4.'दीवाल घड़ी' पर दिए तीन नमूने किस-किस प्रकार के हैं?Show answer
स्मृति-आधारित, दार्शनिक, अवलोकन-आधारित।
5.'जातिवाद का ज़हर' जैसे विषय पर कौन-सी शैली अपनानी चाहिए?Show answer
कल्पना की उड़ान नहीं; तथ्य, ठोस विश्लेषण और स्पष्ट राय।
6.बोर्ड में रचनात्मक लेख कितने शब्दों और अंकों का होता है?Show answer
लगभग 120 शब्द, 6 अंक (तीन में से एक विषय)।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- प्रश्न: 3 अप्रत्याशित विषयों में से 1 पर लगभग 120 शब्दों का रचनात्मक लेख, 6 अंक।
- रटंत = तैयार सामग्री याद करके लिखने की कुटेव; इससे लिखित अभिव्यक्ति विकसित नहीं होती।
- भाषा = अभिव्यक्ति का माध्यम + सोचने का साधन; नए विषयों का अभ्यास = अभिव्यक्ति के अधिकार का पूरा उपयोग।
- विषय: खुला (दीवाल घड़ी) = खुला मैदान, कई कोण; केंद्रित (टी.वी. धारावाहिकों में स्त्री) = विचार-प्रवाह नियंत्रित।
- तरीका: ठहरो, कोण चुनो, आकर्षक और निर्वाह-योग्य शुरुआत, रूपरेखा, सुसंबद्धता, सुसंगति, 'मैं' शैली की छूट, अंत में सामान्य सत्य।
- शैलियाँ: स्मृति, दार्शनिक, अवलोकन; सामाजिक मुद्दा = तथ्य और विश्लेषण; जगह = चलता कैमरा।
- परीक्षा: शीर्षक, तीन छोटे अनुच्छेद, 110-140 शब्द, अंत में भाषा जाँच।
नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन: frequently asked questions
बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से क्या पूछा जाता है?
खंड ख में 'दिए गए 03 अप्रत्याशित विषयों में से किसी 01 विषय पर आधारित लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेखन' (6 अंक) आता है; साथ ही पाठ 3, 4, 5, 11 और 13 पर 2 और 4 अंक वाले प्रश्नों में इस पाठ के सिद्धांत पूछे जा सकते हैं।
रचनात्मक लेख में 'मैं' का प्रयोग कर सकते हैं?
हाँ। पाठ के अनुसार ऐसे लेखन में आत्मनिष्ठता और लेखक के व्यक्तित्व की छाप स्वाभाविक है, इसलिए 'मैं' शैली पर कोई प्रतिबंध नहीं।
6 अंक का अंक-विभाजन क्या है?
पाठ्यक्रम 2026-27 में इस प्रश्न के 6 अंकों का कोई विभाजन नहीं दिया गया है। नीचे का विभाजन हमारा सुझाया हुआ तैयारी-ढाँचा है, CBSE का आधिकारिक विभाजन नहीं: शीर्षक-भूमिका 1, विषयवस्तु 3, भाषा 1, निष्कर्ष-प्रस्तुति 1। परीक्षा में जाँच CBSE की अंक-योजना के अनुसार ही होती है।
अप्रत्याशित विषय पर लिखने की तैयारी कैसे करें?
रटने के बजाय रोज़ अपने आसपास की किसी चीज़ (घर से स्कूल का सफ़र, चाय की दुकान, खिड़की से दिखता दृश्य) पर 100-120 शब्द लिखने का अभ्यास करें, जैसा पाठ के अभ्यास-प्रश्न सुझाते हैं।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) पाठ्यक्रम (302), कक्षा 12, 2026-27; NCERT अभिव्यक्ति और माध्यम (Reprint 2025-26), पाठ 13: नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन