धर्मवीर भारती – काले मेघा पानी दे: Class 12 सार और प्रश्न
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'काले मेघा पानी दे' धर्मवीर भारती का संस्मरण है। सूखे में गाँव के लड़कों की इंदर सेना घर-घर पानी माँगती और लोग बचा हुआ पानी उन पर डालते। तर्कशील किशोर लेखक इसे अंधविश्वास और पानी की बरबादी मानता है, जबकि जीजी इसे त्याग और बुवाई बताती हैं। अंत में लेखक देश में त्याग के अभाव पर प्रश्न उठाता है।
What धर्मवीर भारती – काले मेघा पानी दे is about
'काले मेघा पानी दे' धर्मवीर भारती (1926-1997) का संस्मरण है, जिसमें लोक-प्रचलित विश्वास और विज्ञान के द्वंद्व का चित्र है। एक ओर किशोर लेखक है, जिस पर आर्यसमाजी संस्कार हैं और जो 'कुमार-सुधार सभा' का उपमंत्री है; दूसरी ओर उसकी स्नेही जीजी हैं, जो रीति-रिवाजों और पूजा-अनुष्ठानों में विश्वास रखती हैं। पाठ किसी को सही या गलत नहीं ठहराता, पर जीजी के तर्क लेखक को सोचने पर विवश कर देते हैं।
परीक्षा में इंदर सेना और मेढक-मंडली के नाम, जीजी का त्याग-दान का तर्क, बुवाई का उदाहरण, 'यथा प्रजा तथा राजा' और अंतिम अनुच्छेद का प्रश्न ('गगरी फूटी की फूटी') महत्त्वपूर्ण हैं।
Weightage: यह पाठ खंड ग: आरोह भाग 2 एवं वितान भाग 2 का भाग है, जिसके 40 अंक हैं (कुल 80 में से), आरोह भाग 2 और वितान भाग 2 के सभी पाठों के साथ।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27 और प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27
धर्मवीर भारती – काले मेघा पानी दे: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
जेठ और आषाढ़ में जब भयंकर गर्मी पड़ती, कुएँ सूखने लगते, खेतों की मिट्टी फटने लगती और ढोर प्यास से मरने लगते, तब पूजा-पाठ से हारकर लोग अंतिम उपाय के रूप में इंदर सेना पर भरोसा करते। दस-बारह से सोलह-अठारह वर्ष के लड़कों की यह नंग-धड़ंग टोली 'बोल गंगा मैया की जय' का जयकारा लगाकर गली-गली घूमती और 'काले मेघा पानी दे, गगरी फूटी बैल पियासा' गाती। लोग, पानी की कमी के बावजूद, सहेजा हुआ पानी बाल्टी भर-भरकर उन पर डालते। लड़के कीचड़ में लोटते और अगले घर चल पड़ते। उनसे चिढ़ने वाले उन्हें 'मेढक-मंडली' कहते और वे स्वयं को 'इंदर सेना' कहते।
लेखक भी किशोरावस्था में इस टोली के साथ रहता था, पर आर्यसमाजी संस्कारों के कारण इसे अंधविश्वास और पानी की निर्मम बरबादी मानता था। उसे सबसे अधिक स्नेह जीजी से मिलता था, जो हर तीज-त्योहार और पूजा लेखक के हाथों करवातीं ताकि पुण्य उसे मिले। एक बार लेखक ने इंदर सेना पर पानी फेंकने से मना कर दिया और जीजी से रूठ गया।
जीजी ने उसे मठरी खिलाकर समझाया कि यह पानी की बरबादी नहीं, अर्घ्य है; जो चीज़ मनुष्य पाना चाहता है, उसे पहले देनी पड़ती है। ऋषि-मुनियों ने इसलिए दान को ऊँचा स्थान दिया है। पर बिना त्याग के दान नहीं होता: करोड़ों में से दो-चार रुपये देना त्याग नहीं; त्याग वह है जब अपनी ज़रूरत की कम चीज़ भी दूसरे के कल्याण के लिए दी जाए। फिर उन्होंने किसान का उदाहरण दिया: तीस-चालीस मन गेहूँ पाने के लिए किसान पाँच-छह सेर अच्छा गेहूँ ज़मीन में बो देता है; वैसे ही यह पानी गली में बोई गई बुवाई है, जिससे बादलों की फसल आएगी। उन्होंने कहा कि 'यथा राजा तथा प्रजा' ही नहीं, 'यथा प्रजा तथा राजा' भी सच है; यही गांधी जी कहते हैं।
पचास से अधिक वर्ष बाद लेखक सोचता है कि हम आज देश के लिए क्या करते हैं? माँगें बड़ी हैं, पर त्याग का नाम-निशान नहीं; स्वार्थ ही लक्ष्य है। हम दूसरों के भ्रष्टाचार की चटखारे लेकर बात करते हैं, पर अपने स्तर पर उसी का हिस्सा बन जाते हैं। इसलिए बादल बरसते हैं, फिर भी गगरी फूटी की फूटी और बैल प्यासे रह जाते हैं।
Themes and message
लोक-विश्वास बनाम विज्ञान
इंदर सेना पर पानी डालना लोक-विश्वास है; किशोर लेखक इसे विज्ञान और तर्क की दृष्टि से अंधविश्वास और बरबादी मानता है। पाठ दोनों पक्ष दिखाता है और निर्णय पाठक पर छोड़ता है।
From the text: "कैसी निर्मम बरबादी है पानी की।"
त्याग और दान का सही अर्थ
जीजी बताती हैं कि अपने पास अधिक हो तो थोड़ा देना त्याग नहीं; अपनी ज़रूरत की चीज़ भी दूसरे के कल्याण के लिए देना ही सच्चा त्याग और दान है, और उसी का फल मिलता है।
From the text: "देख बिना त्याग के दान नहीं होता।"
पहले देना, फिर पाना (बुवाई का सिद्धांत)
किसान फसल पाने के लिए पहले अच्छा बीज ज़मीन में डालता है। जीजी के अनुसार इंदर सेना पर डाला पानी भी बुवाई है; समाज को कुछ पाने के लिए पहले स्वयं त्याग करना पड़ता है।
From the text: "यह जो सूखे हम अपने घर का पानी इन पर फेंकते हैं वह भी बुवाई है।"
स्वार्थ, भ्रष्टाचार और नागरिक दायित्व
अंत में लेखक देश की स्थिति पर प्रश्न करता है: लोग अधिकार माँगते हैं, त्याग नहीं करते; दूसरों के भ्रष्टाचार की निंदा करते हैं, पर स्वयं उसमें भागीदार हैं। 'यथा प्रजा तथा राजा' का संदेश यहीं प्रासंगिक होता है।
From the text: "माँगें हर क्षेत्र में बड़ी-बड़ी हैं पर त्याग का कहीं नाम-निशान नहीं है।"
Characters
लेखक (किशोरावस्था में)
संस्मरण का वाचक; तर्कशील, आर्यसमाजी संस्कारों वाला किशोर।
- तर्कशील और विज्ञान-प्रिय
- अंधविश्वास-विरोधी
- जीजी से गहरा लगाव
- बड़ा होकर आत्म-चिंतन करने वाला
कुमार-सुधार सभा का उपमंत्री; इंदर सेना पर पानी फेंकने से इनकार।
जीजी
लेखक को सबसे अधिक स्नेह देने वाली बुज़ुर्ग स्त्री।
- आस्थावान और परंपरा-प्रिय
- स्नेहमयी
- व्यावहारिक बुद्धि वाली: बुवाई का तर्क
- गांधी जी की बातों से प्रभावित
"मैंने तो गाँव के मदरसे का भी मुँह नहीं देखा।" फिर भी तर्क से लेखक को निरुत्तर कर देती हैं।
इंदर सेना (मेढक-मंडली)
पानी माँगने वाले गाँव के लड़कों की टोली।
- उत्साही
- लोक-विश्वास के वाहक
"पानी दे मैया, इंदर सेना आई है।"
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| लोकगीत का प्रयोग | "काले मेघा पानी दे / गगरी फूटी बैल पियासा" | लोक-जीवन और सूखे की पीड़ा सजीव होती है; शीर्षक भी यहीं से। |
| संवाद शैली | लेखक और जीजी का तर्क-वितर्क | विचारों का द्वंद्व नाटकीय और रोचक बनता है। |
| दृष्टांत | किसान का पाँच-छह सेर गेहूँ बोना | त्याग के सिद्धांत को सरल, ठोस उदाहरण से समझाना। |
| प्रतीक | "गगरी फूटी की फूटी रह जाती है, बैल पियासे के पियासे" | आज़ादी के बाद भी आम जन की ज़रूरतें अधूरी रहने का प्रतीक। |
| मुहावरे और देशज शब्द | 'मुँह न देखना', 'चटखारे लेना', 'काँदो', 'टेरना' | भाषा सहज और आंचलिक रंग वाली। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
पानी दे मैया, इंदर सेना आई है
इंदर सेना: घर-घर पानी माँगते लड़के
लोक-विश्वास: इंद्र की सेना को जल-दान से वर्षा की आशा।
देख बिना त्याग के दान नहीं होता
जीजी: लेखक को समझाते हुए
सच्चा दान वही है जिसमें अपनी ज़रूरत का भी त्याग हो।
सच यह भी है कि यथा प्रजा तथा राजा
जीजी: आचरण पर बात
जनता के आचरण से ही शासन बनता है; नागरिक दायित्व।
त्याग का कहीं नाम-निशान नहीं है
लेखक: आज के समय पर चिंतन
स्वार्थ और भ्रष्टाचार से भरे समाज की आलोचना।
धर्मवीर भारती – काले मेघा पानी दे in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
सच्चा दान
मान लीजिए आपके पास दो ही पेन हैं और परीक्षा के दिन आपके सहपाठी का पेन खो जाता है।
जीजी की त्याग की परिभाषा से बताइए कि पेन देना सच्चा दान क्यों होगा।
Try it first, then show the solutionSolution
- जीजी कहती हैं: जो चीज़ तेरे पास भी कम हो और तुझे भी ज़रूरत हो, उसे दूसरे के लिए देना त्याग है।
- दो में से एक पेन देना अपनी सुरक्षा कम करके दूसरे की मदद करना है।
Answer: दो में से एक पेन देना सच्चा दान है, क्योंकि इसमें मैं अपनी ज़रूरत पीछे रखकर दूसरे का भला करता हूँ; जीजी के अनुसार इसी का फल मिलता है।
Memory hook: कम में से देना = त्याग।
यथा प्रजा तथा राजा
कल्पना कीजिए कि आपके शहर में लोग सड़क पर कचरा फेंकते हैं और फिर नगर निगम को गंदगी के लिए कोसते हैं।
जीजी की बात 'यथा प्रजा तथा राजा' से इस स्थिति को समझाइए।
Try it first, then show the solutionSolution
- व्यवस्था नागरिकों के आचरण से बनती है।
- जब तक लोग स्वयं सफ़ाई नहीं रखेंगे, केवल शासन को दोष देना व्यर्थ है।
Answer: जैसी प्रजा, वैसा राजा: अगर नागरिक स्वयं कचरा न फैलाएँ तो शहर और व्यवस्था दोनों सुधरेंगे; दोष देने से पहले अपना आचरण बदलना ज़रूरी है।
Memory hook: पहले मैं सुधरूँ, फिर व्यवस्था।
विश्वास और विज्ञान
मान लीजिए आपके गाँव में सूखे के समय कुछ लोग वर्षा के लिए अनुष्ठान करते हैं, जबकि आप वर्षा-जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) की बात करते हैं।
पाठ के आधार पर दोनों दृष्टियों में संतुलन कैसे बनाया जा सकता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- लेखक तर्क और विज्ञान का पक्षधर है; जीजी आस्था के पीछे त्याग का मूल्य देखती हैं।
- वैज्ञानिक उपाय अपनाते हुए भी सामूहिक त्याग और सहयोग का मूल्य बचाया जा सकता है।
Answer: वैज्ञानिक उपाय (जल-संचयन) अपनाएँ, और जीजी के त्याग-सिद्धांत को सामूहिक सहयोग के रूप में लें—जैसे सब मिलकर तालाब की सफ़ाई करें।
Memory hook: विज्ञान का रास्ता, त्याग की भावना।
Topics in this chapter
How the board asks धर्मवीर भारती – काले मेघा पानी दे
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | इंदर सेना, जीजी के तर्क या अंतिम चिंतन वाले अंश पर। | दो पक्ष याद रखें: लेखक = तर्क/विज्ञान; जीजी = आस्था/त्याग; अंत = देश पर प्रश्न। |
| नामों का आधार (2 अंक) | टोली को मेढक-मंडली किसने और क्यों कहा? वह स्वयं को इंदर सेना क्यों कहती थी? | चिढ़ने वाले लोग: नंगे बदन, उछल-कूद, कीचड़ → मेढक-मंडली; इंद्र की सेना बनकर पानी माँगने → इंदर सेना। |
| जीजी का तर्क (3 अंक) | जीजी ने इंदर सेना पर पानी फेंके जाने को किस तरह सही ठहराया? | अर्घ्य/दान, त्याग की परिभाषा, किसान की बुवाई, यथा प्रजा तथा राजा। |
| आज का संदर्भ (3 अंक) | 'गगरी फूटी की फूटी रह जाती है'—लेखक ने यह प्रश्न किस संदर्भ में उठाया है? | स्वार्थ, भ्रष्टाचार, त्याग का अभाव; योजनाएँ बनती हैं पर लाभ आम जन तक नहीं पहुँचता। |
Tricks to remember धर्मवीर भारती – काले मेघा पानी दे
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
दो नाम, दो नज़रिए
चिढ़ने वाले = 'मेढक-मंडली'; टोली स्वयं = 'इंदर सेना'।
Use it when: नामों वाले प्रश्नों में।
जीजी के चार तर्क: 'अर्घ्य-त्याग-बुवाई-प्रजा'
पानी अर्घ्य है → बिना त्याग दान नहीं → किसान की बुवाई → यथा प्रजा तथा राजा।
Use it when: जीजी के तर्क वाले प्रश्नों में।
गगरी-बैल
लोकगीत की 'गगरी फूटी, बैल पियासा' अंत में आज के भारत का प्रश्न बन जाती है।
Use it when: अंतिम अनुच्छेद के प्रश्न में।
धर्मवीर भारती – काले मेघा पानी दे: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: गद्यांश 1: इंदर सेना का आगमन
जिन घरों के कुएँ भी सूखे होते थे, उन घरों से भी सहेज कर रखे हुए पानी में से बाल्टी या घड़े भर-भर कर इन बच्चों को सर से पैर तक तर कर दिया जाता था।
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: लड़कों की टोली गली में किसी दुमहले मकान के सामने रुककर पुकारती—'पानी दे मैया, इंदर सेना आई है।' लेखक बताते हैं कि यह जेठ के अंत और आषाढ़ के आरंभ के सूखे दिनों की बात है।) इंदर सेना किस समय घर-घर पानी माँगने निकलती थी?
(क) सावन-भादो में
(ख) जेठ के अंत और आषाढ़ के आरंभ के सूखे दिनों में
(ग) सर्दियों में
(घ) होली पर(2) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: टोली घरों के सामने पुकारती—'पानी दे मैया, इंदर सेना आई है।') लड़कों की टोली स्वयं को क्या कहती थी?
(क) मेढक-मंडली
(ख) इंदर सेना
(ग) कुमार-सुधार सभा
(घ) गंगा सेना(3) · 1 mark · MCQ
पानी की कमी होने पर भी लोग इंदर सेना पर पानी क्यों डालते थे?
(क) मनोरंजन के लिए
(ख) इस विश्वास से कि इससे इंद्र प्रसन्न होकर वर्षा करेंगे
(ग) लड़कों को सज़ा देने के लिए
(घ) कुएँ भरने के लिए(4) · 1 mark · MCQ
'सर से पैर तक तर कर देना' का अर्थ है—
(क) पूरी तरह भिगो देना
(ख) डाँटना
(ग) सुखा देना
(घ) सजा देना(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): सूखे कुओं वाले घर भी इंदर सेना पर सहेजा पानी डालते थे।
कारण (R): लोगों का विश्वास था कि जल-दान से वर्षा होगी, इसलिए वे अपनी कमी के बावजूद पानी देते थे।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
Show the answersAnswers
- (ख) जेठ के अंत और आषाढ़ के आरंभ के सूखे दिनों में
- (ख) इंदर सेना
- (ख) इस विश्वास से कि इससे इंद्र प्रसन्न होकर वर्षा करेंगे
- (क) पूरी तरह भिगो देना
- (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Extract 2: गद्यांश 2: त्याग और दान
त्याग तो वह होता है कि जो चीज़ तेरे पास भी कम है, जिसकी तुझको भी ज़रूरत है तो अपनी ज़रूरत पीछे रख कर दूसरे के कल्याण के लिए उसे दे तो त्याग तो वह होता है, दान तो वह होता है, उसी का फल मिलता है।
(1) · 1 mark · MCQ
जीजी के अनुसार सच्चा त्याग क्या है?
(क) बहुत धन में से थोड़ा देना
(ख) अपनी ज़रूरत की कम चीज़ भी दूसरे के कल्याण के लिए देना
(ग) कुछ न देना
(घ) केवल पूजा करना(2) · 1 mark · MCQ
जीजी ने यह बात किसे और क्यों कही?
(क) इंदर सेना को, उन्हें डाँटने के लिए
(ख) लेखक को, जो इंदर सेना पर पानी डालने को बरबादी मानता था
(ग) गांधी जी को
(घ) पड़ोसियों को(3) · 1 mark · MCQ
गद्यांश के संदर्भ में सूखे में इंदर सेना पर पानी डालना क्यों 'त्याग' है?
(क) पानी बहुत अधिक था
(ख) पानी की कमी में भी लोग अपना ज़रूरी पानी देते थे
(ग) पानी गंदा था
(घ) पानी मुफ़्त मिलता था(4) · 1 mark · MCQ
'उसी का फल मिलता है' में 'उसी' किसके लिए आया है?
(क) धन के लिए
(ख) त्याग से किए गए दान के लिए
(ग) पूजा के लिए
(घ) वर्षा के लिए(5) · 1 mark · Assertion-reason
(संदर्भ: जीजी पहले कहती हैं कि बिना त्याग के दान नहीं होता, और लाखों-करोड़ों में से दो-चार रुपये दे देना त्याग नहीं है।) कथन (A): करोड़ों में से दो-चार रुपये देना जीजी के अनुसार त्याग नहीं है।
कारण (R): उस दान में देने वाले की अपनी किसी ज़रूरत का त्याग नहीं होता।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
Show the answersAnswers
- (ख) अपनी ज़रूरत की कम चीज़ भी दूसरे के कल्याण के लिए देना
- (ख) लेखक को, जो इंदर सेना पर पानी डालने को बरबादी मानता था
- (ख) पानी की कमी में भी लोग अपना ज़रूरी पानी देते थे
- (ख) त्याग से किए गए दान के लिए
- (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
धर्मवीर भारती – काले मेघा पानी दे: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: मेढक-मंडली · 3 marks · Short answerBoard level
लोगों ने लड़कों की टोली को 'मेढक-मंडली' नाम किस आधार पर दिया? यह टोली अपने आपको 'इंदर सेना' कहकर क्यों बुलाती थी? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- चिढ़ने वालों का नाम।
- टोली का अपना नाम।
Answer: जो लोग लड़कों के नंगे बदन, उछल-कूद, शोर-शराबे और उनके कारण गली में होने वाले कीचड़ से चिढ़ते थे, वे उन्हें मेढक-मंडली कहते थे, क्योंकि वे मेंढकों की तरह पानी में उछलते थे। टोली स्वयं को इंदर सेना कहती थी, क्योंकि वर्षा के स्वामी इंद्र हैं और वे इंद्र की सेना बनकर बादलों से प्यासे गलों और सूखे खेतों के लिए पानी माँगते थे।
Example 2: बुवाई का तर्क · 2 marks · Short answerHarder board level
जीजी ने इंदर सेना पर पानी डालने की तुलना किसान की बुवाई से क्यों की? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- किसान थोड़ा बीज बोकर बहुत फसल पाता है।
- पानी भी बीज की तरह बोया जाता है।
Answer: किसान तीस-चालीस मन गेहूँ पाने के लिए पाँच-छह सेर अच्छा गेहूँ ज़मीन में बो देता है। जीजी के अनुसार इंदर सेना पर डाला गया पानी भी ऐसी ही बुवाई है, जिससे पूरे गाँव-शहर पर पानीवाले बादलों की फसल आएगी।
Example 3: यथा प्रजा तथा राजा · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'यथा राजा तथा प्रजा सिर्फ़ यही सच नहीं है। सच यह भी है कि यथा प्रजा तथा राजा'—आशय स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- केवल शासक का आचरण नहीं, जनता का आचरण भी।
- लोकतंत्र में जनता से शासन बनता है।
Answer: आम धारणा है कि राजा जैसा होता है, प्रजा वैसी बनती है। जीजी कहती हैं कि उलटा भी सच है: जनता का आचरण जैसा होगा, शासन भी वैसा ही होगा। इसलिए हर व्यक्ति को अपना आचरण सुधारना चाहिए; यही गांधी जी भी कहते थे।
Example 4: तथ्य · 1 mark · MCQBoard level
लेखक किस सभा का उपमंत्री बना था?
(क) आर्य सभा
(ख) कुमार-सुधार सभा
(ग) इंदर सभा
(घ) गांधी सभा
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ में आर्यसमाजी संस्कार और कुमार-सुधार सभा का उल्लेख है।
Answer: (ख) कुमार-सुधार सभा
Example 5: अंतिम प्रश्न · 3 marks · Short answerHOTS / competency
'काले मेघा दल के दल उमड़ते हैं, पानी झमाझम बरसता है, पर गगरी फूटी की फूटी रह जाती है'—लेखक ने यह बात किस संदर्भ में कही है? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- आज के समाज का स्वार्थ और भ्रष्टाचार।
- संसाधन हैं, पर लाभ आम जन तक नहीं।
- त्याग का अभाव।
Answer: लेखक आज़ादी के बाद के भारत पर टिप्पणी करता है। देश के पास संसाधन और योजनाएँ हैं, जैसे बादल दल के दल बरसते हैं, फिर भी आम आदमी की ज़रूरतें अधूरी रहती हैं—गगरी फूटी की फूटी और बैल प्यासे। इसका कारण यह है कि हम माँगें तो बड़ी करते हैं पर त्याग नहीं करते, स्वार्थ में डूबे हैं और अपने स्तर पर भ्रष्टाचार के अंग बन जाते हैं।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
जीजी ने इंदर सेना पर पानी फेंके जाने को किस तरह सही ठहराया? (लगभग 60 शब्द) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| पानी बरबादी नहीं, अर्घ्य/दान है; पाने के लिए पहले देना पड़ता है | 1 |
| बिना त्याग के दान नहीं; कमी में से देना ही त्याग | 1 |
| किसान की बुवाई का उदाहरण; यथा प्रजा तथा राजा | 1 |
लोगों ने लड़कों की टोली को 'मेढक-मंडली' नाम किस आधार पर दिया? (लगभग 40 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| नंगे बदन, उछल-कूद, शोर-शराबा | 1 |
| गली में होने वाला कीचड़; चिढ़ने वाले लोग यह नाम देते थे | 1 |
Where students lose marks in धर्मवीर भारती – काले मेघा पानी दे
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: पाठ को अंधविश्वास के पक्ष में लिखा बताना
लेखक कोई निर्णय नहीं देता; वह दोनों पक्ष रखता है और जीजी के तर्क के पीछे त्याग का मूल्य दिखाता है।
Do this: उत्तर में 'विश्वास और विज्ञान का द्वंद्व' लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: मेढक-मंडली और इंदर सेना नामों के स्रोत उलट देना
चिढ़ने वाले लोग मेढक-मंडली कहते थे; टोली स्वयं को इंदर सेना कहती थी।
Do this: नाम के साथ कहने वाले का उल्लेख करें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: किसान वाले उदाहरण की संख्याएँ गलत लिखना
तीस-चालीस मन गेहूँ के लिए पाँच-छह सेर बीज बोया जाता है।
Do this: संख्याएँ ठीक याद रखें या 'थोड़ा बीज बोकर बहुत फसल' लिखें।
Usually costs: आधा अंक
Mistake: अंतिम अनुच्छेद के प्रश्न को केवल वर्षा से जोड़ना
'गगरी फूटी की फूटी' आज के समाज में त्याग के अभाव और भ्रष्टाचार का प्रतीक है।
Do this: प्रतीकार्थ लिखें: संसाधन होते हुए भी आम जन की ज़रूरतें अधूरी।
Usually costs: 1 अंक
Practice questions on धर्मवीर भारती – काले मेघा पानी दे
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
'काले मेघा पानी दे' की विधा क्या है?
(क) कहानी
(ख) संस्मरण
(ग) रिपोर्ताज
(घ) आत्मकथाHint
लेखक की स्मृतियाँ।
Answer
(ख) संस्मरण
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
लेखक को इंदर सेना पर पानी फेंकना क्यों अनुचित लगता था? (लगभग 40 शब्द)
Hint
पानी की कमी, अंधविश्वास।
Answer
भयंकर सूखे में जब लोगों को पीने का पानी भी मुश्किल से मिलता था, तब सहेजा हुआ पानी बाल्टी भर-भरकर लड़कों पर फेंकना लेखक को पानी की निर्मम बरबादी लगता था। आर्यसमाजी संस्कारों के कारण वह इसे अंधविश्वास भी मानता था।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
जीजी के व्यक्तित्व की दो विशेषताएँ पाठ के आधार पर लिखिए। (लगभग 40 शब्द)
Hint
स्नेह और व्यावहारिक बुद्धि।
Answer
जीजी स्नेहमयी हैं: वे सारे पूजा-अनुष्ठान लेखक के हाथों करवातीं ताकि पुण्य उसे मिले, और रूठने पर मठरी खिलाकर मनाती हैं। वे पढ़ी-लिखी न होकर भी व्यावहारिक बुद्धि वाली हैं, जो किसान की बुवाई जैसे उदाहरण से लेखक को निरुत्तर कर देती हैं।
Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHOTS / competency
कथन (A): पाठ में लेखक अंत तक इंदर सेना को केवल अंधविश्वास मानता है।
कारण (R): जीजी के तर्कों से लेखक के तर्कों का किला पस्त होने लगा था।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।Hint
लेखक बाद में त्याग पर सोचने लगता है।
Answer
(घ) कथन गलत है, कारण सही है।
Q5 · 3 marks · Short answerHarder board level
'पाठ लोक-प्रचलित विश्वास और विज्ञान के द्वंद्व का चित्र है'—स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
दो पक्ष, निर्णय नहीं।
Answer
एक ओर इंदर सेना और जीजी हैं, जो मानते हैं कि जल-दान से इंद्र प्रसन्न होकर वर्षा करेंगे; दूसरी ओर किशोर लेखक है, जो तर्क और विज्ञान के आधार पर इसे अंधविश्वास और पानी की बरबादी मानता है। लेखक दोनों पक्ष ईमानदारी से रखता है और कोई अंतिम निर्णय नहीं देता, पर जीजी के तर्कों में छिपे त्याग के मूल्य को स्वीकार करता है।
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
आज के भारत में 'त्याग का कहीं नाम-निशान नहीं है'—लेखक की इस चिंता से आप कहाँ तक सहमत हैं? उदाहरण सहित लिखिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
स्वार्थ के उदाहरण और सकारात्मक अपवाद।
Answer
काफ़ी हद तक सहमत हूँ: लोग टैक्स बचाने, लाइन तोड़ने या छोटे काम के लिए रिश्वत देने जैसी बातों में अपना स्वार्थ देखते हैं और फिर दूसरों के भ्रष्टाचार की शिकायत करते हैं। फिर भी रक्तदान करने वाले, आपदा में स्वयंसेवा करने वाले लोग भी हैं। जीजी के 'यथा प्रजा तथा राजा' के अनुसार बदलाव हर नागरिक के त्याग से ही आएगा।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.इंदर सेना का जयकारा क्या था?Show answer
"बोल गंगा मैया की जय।"
2.टोली में किस उम्र के लड़के होते थे?Show answer
दस-बारह से सोलह-अठारह बरस के।
3.लेखक पर किसके संस्कार थे?Show answer
आर्यसमाजी संस्कार।
4.जीजी ने लेखक को मनाने के लिए क्या खिलाया?Show answer
मठरी।
5.जीजी के अनुसार किसान कितना बीज बोकर कितनी फसल पाता है?Show answer
पाँच-छह सेर बोकर तीस-चालीस मन।
6.जीजी किसकी बातें करती थीं?Show answer
गांधी जी महाराज की।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- लेखक: धर्मवीर भारती (1926-1997); विधा: संस्मरण; विषय: विश्वास बनाम विज्ञान।
- इंदर सेना = पानी माँगने वाले लड़के; चिढ़ने वाले उन्हें मेढक-मंडली कहते।
- लोकगीत: 'काले मेघा पानी दे, गगरी फूटी बैल पियासा, पानी दे, गुड़धानी दे'।
- लेखक: आर्यसमाजी, कुमार-सुधार सभा का उपमंत्री; पानी फेंकना बरबादी लगा।
- जीजी: पानी अर्घ्य है; बिना त्याग दान नहीं; कमी में से देना ही त्याग।
- बुवाई: पाँच-छह सेर बीज → तीस-चालीस मन गेहूँ; पानी भी बुवाई।
- 'यथा प्रजा तथा राजा' (गांधी जी)।
- अंत: माँगें बड़ी, त्याग नहीं; भ्रष्टाचार; गगरी फूटी की फूटी, बैल प्यासे।
धर्मवीर भारती – काले मेघा पानी दे: frequently asked questions
'काले मेघा पानी दे' पाठ का मूल संदेश क्या है?
बिना त्याग के दान नहीं होता और पाने के लिए पहले देना पड़ता है। साथ ही पाठ आज के समाज में त्याग के अभाव, स्वार्थ और भ्रष्टाचार पर प्रश्न उठाता है।
इंदर सेना पर पानी क्यों फेंका जाता था?
लोगों का विश्वास था कि वर्षा के स्वामी इंद्र की सेना को जल-दान करने से इंद्र प्रसन्न होंगे और वर्षा होगी; पूजा-पाठ से हारने के बाद यह अंतिम उपाय था।
जीजी कौन थीं?
जीजी लेखक की रिश्तेदार नहीं थीं, पर उन्होंने लेखक को सबसे अधिक प्यार दिया। वे पूजा-अनुष्ठानों में विश्वास रखती थीं और उनका एक बेटा राष्ट्रीय आंदोलन में पुलिस की लाठी खा चुका था, इसलिए वे गांधी जी की बातें करती थीं।
धर्मवीर भारती का परिचय दीजिए।
धर्मवीर भारती (1926-1997) का जन्म इलाहाबाद में हुआ। गुनाहों का देवता, सूरज का सातवाँ घोड़ा (उपन्यास), अंधा युग (गीतिनाट्य), कनुप्रिया (कविता) और ठेले पर हिमालय (निबंध) उनकी रचनाएँ हैं; उन्हें पद्मश्री और व्यास सम्मान मिला।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) पाठ्यक्रम (302), कक्षा 12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 2 (Reprint 2026-27), धर्मवीर भारती – काले मेघा पानी दे