जैनेंद्र कुमार – बाज़ार दर्शन: Class 12 सार, भगत जी और प्रश्न
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'बाज़ार दर्शन' जैनेंद्र कुमार का विचारात्मक निबंध है। इसमें बताया गया है कि बाज़ार का जादू खाली मन और भरी जेब वालों पर चलता है; वे ज़रूरत नहीं, 'पर्चेज़िंग पावर' के गर्व में खरीदते हैं। चूरन वाले भगत जी जैसे संतोषी लोग, जो जानते हैं कि उन्हें क्या चाहिए, बाज़ार को सार्थकता देते हैं।
What जैनेंद्र कुमार – बाज़ार दर्शन is about
'बाज़ार दर्शन' जैनेंद्र कुमार (1905-1990) का प्रसिद्ध निबंध है, जिसमें वे उपभोक्तावाद और बाज़ारवाद की मूल अंतर्वस्तु को कहानी जैसे रोचक ढंग से समझाते हैं। पाठ में तीन पात्र-प्रसंग हैं: एक मित्र जो पत्नी के साथ बाज़ार जाकर बहुत-सा सामान ले आता है; दूसरा मित्र जो दिन भर बाज़ार में घूमकर भी कुछ नहीं ले पाता; और पड़ोस के चूरन वाले भगत जी, जिन पर बाज़ार का जादू नहीं चलता।
परीक्षा में 'बाज़ार का जादू', 'मन खाली हो तो बाज़ार न जाओ', 'पैसे की व्यंग्य-शक्ति', 'बाज़ारूपन' और भगत जी के चरित्र पर गद्यांश-आधारित MCQ तथा 40-60 शब्दों के प्रश्न आते हैं।
Weightage: यह पाठ खंड ग: आरोह भाग 2 एवं वितान भाग 2 का भाग है, जिसके 40 अंक हैं (कुल 80 में से), आरोह भाग 2 और वितान भाग 2 के सभी पाठों के साथ।Source: CBSE हिंदी (आधार) 302 पाठ्यक्रम 2026-27 और प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2026-27
जैनेंद्र कुमार – बाज़ार दर्शन: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
लेखक का एक मित्र बाज़ार से मामूली चीज़ लेने गया, पर बहुत-से बंडल लेकर लौटा। उसने इसका कारण पत्नी को बताया, पर लेखक के अनुसार असली कारण मनीबैग, यानी पैसे की गर्मी है। पैसा पावर है और लोग उसकी 'पर्चेज़िंग पावर' दिखाने के लिए फ़िजूल सामान खरीदते हैं; कुछ संयमी लोग पैसा जोड़कर ही उसकी शक्ति पर गर्व करते रहते हैं। मित्र का सामान ज़रूरत के हिसाब से नहीं, उसकी खरीदने की शक्ति के अनुपात में आया था।
दूसरा मित्र दोपहर में बाज़ार गया और शाम को खाली हाथ लौटा। उसे सब कुछ लेने का मन था; कुछ लेने का अर्थ बाकी सब छोड़ना था, इसलिए वह कुछ नहीं ले सका। लेखक कहते हैं कि यदि यह पता न हो कि क्या चाहिए, तो सब ओर की चाह घेर लेती है और केवल त्रास मिलता है।
बाज़ार में रूप का जादू है, जो आँखों की राह काम करता है। जैसे चुंबक का जादू लोहे पर ही चलता है, वैसे ही यह जादू तब चलता है जब जेब भरी और मन खाली हो। जादू उतरने पर पता चलता है कि फ़ैंसी चीज़ें आराम नहीं, खलल देती हैं। इससे बचने का उपाय है: मन खाली हो तो बाज़ार न जाओ, जैसे लू में पानी पीकर जाना चाहिए। पर मन को बंद कर देना भी ठीक नहीं; इच्छाओं को पूरी तरह मारना शून्य हो जाना है।
लेखक के पड़ोसी भगत जी चूरन बेचते हैं और रोज़ छह आने से अधिक नहीं कमाते; छह आने होते ही बचा चूरन बच्चों को मुफ़्त बाँट देते हैं। बाज़ार में वे खुली आँखों, संतुष्ट मन से चलते हैं; बड़े-बड़े फ़ैंसी स्टोर छोड़कर पंसारी की दुकान से केवल ज़रूरत का जीरा और काला नमक लेते हैं। उन पर बाज़ार का जादू नहीं चलता और पैसे की व्यंग्य-शक्ति भी उनके आगे हार जाती है। लेखक के अनुसार धन की ओर झुकना निर्बलता है।
अंत में लेखक कहते हैं कि बाज़ार को सार्थकता वही मनुष्य देता है जो जानता है कि वह क्या चाहता है। जो यह नहीं जानते, वे अपनी पर्चेज़िंग पावर के गर्व में बाज़ार को विनाशक, शैतानी, व्यंग्य की शक्ति देते हैं और 'बाज़ारूपन' बढ़ाते हैं, यानी कपट बढ़ता है और सद्भाव घटता है। तब ग्राहक और बेचने वाले एक-दूसरे को ठगने लगते हैं, शोषण होता है। ऐसे बाज़ार का पोषण करने वाला अर्थशास्त्र अनीति-शास्त्र है।
Themes and message
उपभोक्तावाद और बाज़ार का जादू
बाज़ार अपने रूप के आकर्षण से लोगों को ज़रूरत से ज़्यादा खरीदने को उकसाता है। भरी जेब और खाली मन वाले इसके सबसे बड़े शिकार हैं; जादू उतरने पर पता चलता है कि फ़ैंसी चीज़ें आराम नहीं, खलल देती हैं।
From the text: "बाज़ार में एक जादू है। वह जादू आँख की राह काम करता है।"
पैसे की शक्ति और उसका प्रदर्शन
लोग पैसे की 'पर्चेज़िंग पावर' दिखाने के लिए खरीदते हैं; यही पैसे की व्यंग्य-शक्ति दूसरों में हीनता जगाती है, जैसे पैदल चलते लेखक के पास से धूल उड़ाती मोटर गुज़रती है।
From the text: "पैसे की उस ‘पर्चेज़िंग पावर’ के प्रयोग में ही पावर का रस है।"
संतोष और आत्मबल
भगत जी का मन भरा है, इसलिए बाज़ार का जादू उन पर नहीं चलता। वे बाज़ार से नफ़रत नहीं करते, केवल ज़रूरत भर लेते हैं। लेखक इस संतोष को सच्चा बल और धन की ओर झुकाव को निर्बलता मानते हैं।
From the text: "निर्बल ही धन की ओर झुकता है।"
बाज़ार की सार्थकता बनाम बाज़ारूपन
बाज़ार की असली कृतार्थता ज़रूरत के समय काम आना है। जब लोग दिखावे के लिए खरीदते हैं तो बाज़ारूपन—कपट और शोषण—बढ़ता है और मनुष्यों के बीच सद्भाव घटता है।
From the text: "बाज़ार की असली कृतार्थता है आवश्यकता के समय काम आना।"
Characters
भगत जी (चूरन वाले)
लेखक के पड़ोसी, संतोषी जीवन का आदर्श।
- संतोषी: रोज़ छह आने से अधिक नहीं कमाते
- उदार: बचा चूरन बच्चों में मुफ़्त बाँटते हैं
- संयमी पर बाज़ार-विरोधी नहीं: ज़रूरत भर खरीदते हैं
- सबसे स्नेह से मिलने वाले
"माल बिछा रहता है, और उसका मन अडिग रहता है।"
पहला मित्र
मामूली चीज़ लेने जाकर ढेर सामान लाने वाला।
- फ़िजूलखर्च
- पैसे की गर्मी से प्रभावित
"सब उड़ गया, अब जो रेल-टिकट के लिए भी बचा हो!"
दूसरा मित्र
दिन भर बाज़ार घूमकर खाली हाथ लौटने वाला।
- अनिश्चय में पड़ा
- सब कुछ चाहने के कारण कुछ न ले पाने वाला
"पर मैं कुछ भी नहीं छोड़ना चाहता था। इससे मैं कुछ भी नहीं ले सका।"
लेखक
विचारक-वाचक।
- व्यंग्यपूर्ण
- आत्म-स्वीकारी (मोटर देखकर अपने मन की कमज़ोरी मानते हैं)
मोटर वाले प्रसंग में अपने मन की हीनता स्वीकार करना।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| उपमा और दृष्टांत | "जैसे चुंबक का जादू लोहे पर ही चलता है", "लू में जाना हो तो पानी पीकर जाना चाहिए" | कठिन विचार को रोज़मर्रा के उदाहरण से सरल बनाना। |
| व्यंग्य | पत्नी की महिमा पर टिप्पणी; 'पैसे की व्यंग्य-शक्ति' | उपभोक्तावादी मानसिकता पर चुटीला प्रहार। |
| प्रश्न शैली | "जकड़ रेशमी डोरी की हो तो ... क्या वह कम जकड़ होगी?" | पाठक को सोचने पर विवश करना। |
| अंग्रेज़ी-उर्दू शब्दों का स्वाभाविक मेल | 'पर्चेज़िंग पावर', 'मनीबैग', 'फ़ैंसी', 'फ़िजूल' | बोलचाल जैसी जीवंत, विचारप्रधान शैली। |
| कथात्मक निबंध शैली | मित्रों और भगत जी के प्रसंग | दार्शनिक विचार कहानी जैसे रोचक बन जाते हैं। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
बाज़ार में एक जादू है
लेखक: बाज़ार के आकर्षण की व्याख्या
बाज़ार का रूप लोगों को अनावश्यक खरीद के लिए मोहित करता है।
मन खाली हो, तब बाज़ार न जाओ
लेखक: जादू से बचने का उपाय
लक्ष्य और ज़रूरत स्पष्ट हो तो बाज़ार हानि नहीं, आनंद देता है।
निर्बल ही धन की ओर झुकता है
लेखक: भगत जी के आत्मबल की चर्चा
संचय की तृष्णा कमज़ोरी है; संतोष सच्चा बल।
बाज़ार की असली कृतार्थता है आवश्यकता के समय काम आना
लेखक: बाज़ार की सार्थकता पर विचार
बाज़ार का सही उपयोग ज़रूरत पूरी करना है, दिखावा नहीं।
जैनेंद्र कुमार – बाज़ार दर्शन in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
ऑनलाइन सेल और बाज़ार का जादू
मान लीजिए किसी ऑनलाइन सेल में 'केवल आज 70% छूट' देखकर आप ऐसे जूते खरीद लेते हैं जिनकी आपको ज़रूरत नहीं थी।
इस अनुभव को 'बाज़ार दर्शन' के 'जादू' और 'मन खाली' वाले विचार से समझाइए।
Try it first, then show the solutionSolution
- छूट का आकर्षण बाज़ार का 'रूप का जादू' है, जो आँख की राह काम करता है।
- पहले से तय न होने के कारण कि क्या चाहिए (खाली मन), आप जादू में फँस गए।
Answer: यह बाज़ार का जादू था, जो खाली मन पर चला; उपाय है कि खरीदने से पहले सूची बनाएँ—मन भरा हो तो सेल भी 'फैला-का-फैला' रह जाएगी।
Memory hook: सूची साथ, जादू मात।
पैसे की व्यंग्य-शक्ति
कल्पना कीजिए कि आपकी कक्षा में एक सहपाठी हर हफ़्ते नया महँगा फ़ोन दिखाता है और आपको अपने पुराने फ़ोन पर शर्म आने लगती है।
पाठ के मोटर वाले प्रसंग से इसकी तुलना कीजिए। भगत जी इस स्थिति में कैसा महसूस करते?
Try it first, then show the solutionSolution
- लेखक को धूल उड़ाती मोटर देखकर अपने माता-पिता के प्रति भी कृतघ्नता का भाव आया—यह पैसे की व्यंग्य-शक्ति है।
- भगत जी का मन भरा है; उन पर यह व्यंग्य-शक्ति नहीं चलती।
Answer: सहपाठी का फ़ोन वही व्यंग्य-शक्ति है जो मोटर में थी; भगत जी की तरह संतुष्ट रहकर ही इससे बचा जा सकता है।
Memory hook: दूसरे की चमक, अपनी शर्म नहीं।
बाज़ार की सार्थकता
मान लीजिए आपके मोहल्ले का दुकानदार ग्राहकों को सही सामान, सही दाम पर देता है और बेवजह महँगी चीज़ें नहीं थोपता।
पाठ के अनुसार यह दुकान बाज़ार को सार्थकता दे रही है या बाज़ारूपन बढ़ा रही है?
Try it first, then show the solutionSolution
- बाज़ार की कृतार्थता ज़रूरत के समय काम आने में है।
- कपट न होने से सद्भाव बना रहता है; ग्राहक-दुकानदार के बीच भरोसा है।
Answer: यह दुकान बाज़ार को सार्थकता दे रही है, क्योंकि यहाँ ज़रूरतों का ईमानदार आदान-प्रदान है, शोषण नहीं।
Memory hook: ज़रूरत का बाज़ार = सार्थक; दिखावे का बाज़ार = बाज़ारूपन।
Topics in this chapter
How the board asks जैनेंद्र कुमार – बाज़ार दर्शन
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | बाज़ार के जादू, भगत जी, पैसे की व्यंग्य-शक्ति या बाज़ारूपन वाले अंश पर। | मुख्य सूत्र याद रखें: जेब भरी + मन खाली = जादू का असर; मन भरा = जादू बेअसर। |
| भगत जी का चरित्र (3 अंक) | बाज़ार में भगत जी के व्यक्तित्व का कौन-सा पहलू उभरता है? क्या उनका आचरण समाज में शांति ला सकता है? | संतोष, संयम, उदारता; बाज़ार-विरोध नहीं, ज़रूरत भर खरीद; निष्कर्ष में शांति से संबंध। |
| अवधारणा-प्रश्न (2-3 अंक) | 'बाज़ारूपन' क्या है? 'पर्चेज़िंग पावर' का क्या अर्थ है? बाज़ार की सार्थकता किसमें है? | परिभाषा + पाठ का उदाहरण + आज के जीवन से एक संबंध। |
| विचार-विस्तार (3 अंक) | 'मन खाली हो तब बाज़ार न जाओ' या 'निर्बल ही धन की ओर झुकता है'—आशय स्पष्ट कीजिए। | पाठ का दृष्टांत (लू-पानी, चुंबक-लोहा) प्रयोग करें। |
Tricks to remember जैनेंद्र कुमार – बाज़ार दर्शन
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
जेब-मन का सूत्र
भरी जेब + खाली मन = पूरा जादू; खाली जेब + खाली मन = फिर भी जादू; भरा मन = जादू बेकार।
Use it when: जादू वाले MCQ में।
तीन पात्र, तीन सीख
पहला मित्र = पैसे की गर्मी; दूसरा मित्र = अनिश्चय; भगत जी = संतोष।
Use it when: सार और तुलना वाले प्रश्नों में।
भगत जी = छह आने और जीरा-नमक
छह आने की कमाई, बचा चूरन मुफ़्त; बाज़ार में केवल जीरा और काला नमक।
Use it when: भगत जी के तथ्य वाले प्रश्नों में।
जैनेंद्र कुमार – बाज़ार दर्शन: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: गद्यांश 1: बाज़ार का जादू
वह रूप का जादू है पर जैसे चुंबक का जादू लोहे पर ही चलता है, वैसे ही इस जादू की भी मर्यादा है। जेब भरी हो, और मन खाली हो, ऐसी हालत में जादू का असर खूब होता है।
(1) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इससे पहले लेखक कहते हैं कि बाज़ार में एक जादू है, जो आँख की राह काम करता है।) बाज़ार का जादू किस राह से काम करता है?
(क) कान की राह
(ख) आँख की राह
(ग) जेब की राह
(घ) जीभ की राह(2) · 1 mark · MCQ
बाज़ार के जादू का असर सबसे अधिक कब होता है?
(क) जेब खाली और मन भरा हो
(ख) जेब भरी और मन खाली हो
(ग) जेब और मन दोनों भरे हों
(घ) बाज़ार बंद हो(3) · 1 mark · MCQ
लेखक ने बाज़ार के जादू की तुलना किससे की है?
(क) सूरज से
(ख) चुंबक से
(ग) बिजली से
(घ) पानी से(4) · 1 mark · MCQ
'मन खाली होना' का आशय है—
(क) मन में कोई दुख न होना
(ख) यह स्पष्ट न होना कि क्या चाहिए
(ग) मन का शांत होना
(घ) भूख लगना(5) · 1 mark · Assertion-reason
(संदर्भ: लेखक आगे कहते हैं कि जेब खाली हो पर मन भरा न हो, तो भी यह जादू चल जाता है।) कथन (A): जेब खाली होने पर भी बाज़ार का जादू चल सकता है।
कारण (R): यदि मन भरा न हो तो बाज़ार की चीज़ों का निमंत्रण मन तक पहुँच जाता है।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
Show the answersAnswers
- (ख) आँख की राह
- (ख) जेब भरी और मन खाली हो
- (ख) चुंबक से (जो लोहे पर ही चलता है)
- (ख) यह स्पष्ट न होना कि क्या चाहिए
- (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Extract 2: गद्यांश 2: भगत जी और जीरा-नमक
लेकिन अगर उन्हें जीरा और काला नमक चाहिए तो सारे चौक-बाज़ार की सत्ता उनके लिए तभी तक है, तभी तक उपयोगी है, जब तक वहाँ जीरा मिलता है।
(1) · 1 mark · MCQ
भगत जी बाज़ार से क्या लेने जाते हैं?
(क) फ़ैंसी सामान
(ख) जीरा और काला नमक
(ग) कपड़े
(घ) मिठाई(2) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इससे पहले लेखक कहते हैं कि भगत जी में बाज़ार से 'हठपूर्वक विमुखता' नहीं है।) 'हठपूर्वक विमुखता उनमें नहीं है' का आशय है—
(क) वे बाज़ार से घृणा करते हैं
(ख) वे बाज़ार का ज़िद से बहिष्कार नहीं करते
(ग) वे बाज़ार कभी नहीं जाते
(घ) वे बाज़ार में ही रहते हैं(3) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: लेखक आगे बताते हैं कि ज़रूरत-भर जीरा ले लेने के बाद भगत जी के लिए सारे चौक का कोई महत्त्व नहीं रह जाता।) ज़रूरत भर जीरा ले लेने के बाद चौक-बाज़ार भगत जी के लिए कैसा हो जाता है?
(क) बहुत आकर्षक
(ख) नहीं के बराबर
(ग) डरावना
(घ) महँगा(4) · 1 mark · MCQ
गद्यांश से भगत जी के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषता प्रकट होती है?
(क) लालच
(ख) ज़रूरत की स्पष्टता और संयम
(ग) कंजूसी
(घ) अनिश्चय(5) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): भगत जी पर बाज़ार का जादू नहीं चलता।
कारण (R): वे निश्चित रूप से जानते हैं कि उन्हें बाज़ार से क्या चाहिए।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
Show the answersAnswers
- (ख) जीरा और काला नमक
- (ख) वे बाज़ार का ज़िद से बहिष्कार नहीं करते
- (ख) नहीं के बराबर
- (ख) ज़रूरत की स्पष्टता और संयम
- (क) दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
जैनेंद्र कुमार – बाज़ार दर्शन: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: जादू का असर · 2 marks · Short answerBoard level
बाज़ार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर क्या-क्या असर पड़ता है? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- चढ़ना: सब ज़रूरी लगता है।
- उतरना: पछतावा, खलल।
Answer: जादू चढ़ने पर बाज़ार की हर चीज़ ज़रूरी और आराम बढ़ाने वाली लगती है, और व्यक्ति 'यह भी लूँ, वह भी लूँ' करते हुए खरीदता जाता है। जादू उतरने पर पता चलता है कि फ़ैंसी चीज़ों की बहुतायत आराम नहीं देती, बल्कि खलल ही डालती है।
Example 2: भगत जी का व्यक्तित्व · 3 marks · Short answerHarder board level
बाज़ार में भगत जी के व्यक्तित्व का कौन-सा सशक्त पहलू उभरकर आता है? क्या उनका आचरण समाज में शांति स्थापित करने में मददगार हो सकता है? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- संतोष और संयम।
- बाज़ार-विरोध नहीं।
- शांति से संबंध।
Answer: भगत जी संतोषी और संयमी हैं। वे रोज़ छह आने से अधिक नहीं कमाते, बचा चूरन बच्चों में बाँट देते हैं और बाज़ार में खुली आँखों से घूमकर भी केवल ज़रूरत का जीरा-नमक लेते हैं। उन पर बाज़ार का जादू नहीं चलता। ऐसा आचरण लालच, होड़ और कपट को घटाता है; यदि लोग ऐसे बनें तो ईर्ष्या और शोषण कम होंगे और समाज में शांति बढ़ेगी।
Example 3: दूसरा मित्र · 2 marks · Short answerHarder board level
दूसरा मित्र बाज़ार से खाली हाथ क्यों लौटा? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- सब कुछ लेने का मन।
- कुछ लेना = बाकी छोड़ना।
Answer: मित्र को बाज़ार में सब कुछ लेने का मन हो रहा था। कुछ लेने का अर्थ बाकी सब छोड़ना था, पर वह कुछ भी छोड़ना नहीं चाहता था। स्पष्ट न होने के कारण कि उसे क्या चाहिए, वह कुछ भी नहीं ले सका।
Example 4: तथ्य · 1 mark · MCQBoard level
भगत जी एक दिन में चूरन से कितना कमाते हैं?
(क) चार आने
(ख) छह आने
(ग) एक रुपया
(घ) दस आने
Try it first, then show the solutionSolution
- छह आने पूरे होते ही बाकी चूरन मुफ़्त बाँट देते हैं।
Answer: (ख) छह आने
Example 5: निर्बलता और बल · 3 marks · Short answerHOTS / competency
'निर्बल ही धन की ओर झुकता है'—लेखक के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- लेखक का तर्क।
- भगत जी का उदाहरण।
- अपनी राय (संतुलित)।
Answer: लेखक के अनुसार जिसके मन में संतोष और आत्मबल नहीं, वही धन और वैभव से अपनी कमी भरना चाहता है; यह जड़ की चेतन पर विजय है। भगत जी इसका प्रमाण हैं, जिन पर पैसे की व्यंग्य-शक्ति नहीं चलती। मैं इससे काफ़ी हद तक सहमत हूँ, क्योंकि लालच ही व्यक्ति को कमज़ोर बनाता है; हाँ, ज़रूरत भर धन कमाना निर्बलता नहीं, परिश्रम है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
'बाज़ारूपन' से क्या तात्पर्य है? किस प्रकार के व्यक्ति बाज़ार को सार्थकता प्रदान करते हैं? (लगभग 60 शब्द) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| बाज़ारूपन: दिखावे की खरीद से कपट बढ़ना, सद्भाव घटना, शोषण | 1 |
| ऐसे लोग: जो नहीं जानते क्या चाहिए, पर्चेज़िंग पावर के गर्व में खरीदते हैं | 1 |
| सार्थकता देने वाले: जो अपनी ज़रूरत जानते हैं, जैसे भगत जी | 1 |
बाज़ार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर क्या असर पड़ता है? (लगभग 40 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| चढ़ने पर: सब कुछ ज़रूरी लगता है, अनावश्यक खरीद | 1 |
| उतरने पर: पता चलता है कि फ़ैंसी चीज़ें आराम नहीं, खलल देती हैं | 1 |
Where students lose marks in जैनेंद्र कुमार – बाज़ार दर्शन
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: भगत जी को बाज़ार-विरोधी बताना
भगत जी बाज़ार से नफ़रत नहीं करते; खुली आँखों से चलते हैं, पर ज़रूरत भर ही लेते हैं।
Do this: लिखें: 'हठपूर्वक विमुखता नहीं, संयम है।'
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 'मन खाली न हो' को 'मन बंद रखो' समझना
लेखक साफ़ कहते हैं कि मन बंद करना शून्य हो जाना है; इच्छाओं का पूरा निरोध झूठ है।
Do this: मन भरा = लक्ष्य स्पष्ट; मन बंद = इच्छा-शून्य—दोनों में अंतर लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: पहले मित्र के खरीदने का कारण पत्नी बताना
मित्र ने पत्नी की ओट ली, पर लेखक असली कारण मनीबैग, यानी पैसे की गर्मी बताते हैं।
Do this: 'पर्चेज़िंग पावर' का उल्लेख करें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 'बाज़ारूपन' को केवल भीड़-भाड़ समझना
बाज़ारूपन = कपट बढ़ना, सद्भाव घटना, शोषण; दिखावे की खरीद से उपजा।
Do this: परिभाषा में कपट और शोषण शब्द ज़रूर लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Practice questions on जैनेंद्र कुमार – बाज़ार दर्शन
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
'बाज़ार दर्शन' की विधा क्या है?
(क) कहानी
(ख) विचारात्मक निबंध
(ग) संस्मरण
(घ) रिपोर्ताजHint
विचार-प्रधान।
Answer
(ख) विचारात्मक निबंध
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
पहला मित्र बाज़ार से ढेर सारा सामान क्यों ले आया? (लगभग 40 शब्द)
Hint
पत्नी की ओट, असली कारण मनीबैग।
Answer
मित्र ने इसका कारण पत्नी को बताया, पर लेखक के अनुसार असली कारण मनीबैग, यानी पैसे की गर्मी थी। उसका सामान ज़रूरत देखकर नहीं, अपनी 'पर्चेज़िंग पावर' के अनुपात में आया; पैसा होता तो और सामान आता।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
'लू में जाना हो तो पानी पीकर जाना चाहिए'—इस दृष्टांत से लेखक क्या समझाना चाहते हैं? (लगभग 40 शब्द)
Hint
मन भरा हो।
Answer
जैसे भीतर पानी हो तो लू का असर नहीं होता, वैसे ही मन में लक्ष्य और ज़रूरत स्पष्ट हो तो बाज़ार का जादू असर नहीं करता। तब बाज़ार घाव देने के बजाय आनंद देता है और व्यक्ति केवल आवश्यक चीज़ें खरीदता है।
Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHOTS / competency
कथन (A): लेखक के अनुसार इच्छाओं को पूरी तरह मारकर मन बंद कर देना चाहिए।
कारण (R): लेखक कहते हैं कि जो मन बंद हो जाएगा, वह शून्य हो जाएगा।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।Hint
मन खाली न हो, पर बंद भी न हो।
Answer
(घ) कथन गलत है, कारण सही है।
Q5 · 3 marks · Short answerHarder board level
'पैसे की व्यंग्य-शक्ति' से लेखक का क्या आशय है? पाठ के उदाहरण से स्पष्ट कीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
मोटर वाला प्रसंग।
Answer
दूसरों का वैभव देखकर मन में जो हीनता और ईर्ष्या जागती है, वही पैसे की व्यंग्य-शक्ति है। लेखक पैदल चल रहे थे कि धूल उड़ाती मोटर पास से निकल गई; उन्हें लगा जैसे कोई कह रहा हो कि तुम इससे वंचित हो। वे यहाँ तक सोचने लगे कि मोटर वालों के यहाँ जन्म क्यों न हुआ। यह शक्ति व्यक्ति को अपने सगों के प्रति भी कृतघ्न बना सकती है।
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
बाज़ार किसी का लिंग, जाति या धर्म नहीं देखता, केवल क्रय-शक्ति देखता है। क्या इससे बाज़ार सामाजिक समता की रचना करता है? पाठ के आधार पर अपना मत लिखिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
क्रय-शक्ति की असमानता।
Answer
ऊपर से लगता है कि बाज़ार सबको समान मानता है, क्योंकि वह केवल पैसा देखता है। पर वास्तव में वह क्रय-शक्ति के आधार पर नई असमानता रचता है: जिसके पास पैसा है वही सम्मान पाता है और गरीब हीनता झेलता है, जैसा पाठ की मोटर वाली व्यंग्य-शक्ति में दिखता है। बाज़ारूपन कपट और शोषण भी बढ़ाता है, इसलिए यह सच्ची सामाजिक समता नहीं है।
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1.बाज़ार का जादू किस राह काम करता है?Show answer
आँख की राह (रूप का जादू)।
2.जादू से बचने का उपाय क्या है?Show answer
मन खाली हो तो बाज़ार न जाओ।
3.भगत जी क्या बेचते हैं?Show answer
चूरन।
4.भगत जी बाज़ार से क्या खरीदते हैं?Show answer
जीरा और काला नमक।
5.लेखक के अनुसार कौन धन की ओर झुकता है?Show answer
निर्बल।
6.बाज़ार का पोषण करने वाले अर्थशास्त्र को लेखक क्या कहते हैं?Show answer
अनीति-शास्त्र।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- लेखक: जैनेंद्र कुमार (1905-1990); विचारात्मक निबंध।
- पहला मित्र: ढेर सामान; कारण पैसे की गर्मी/पर्चेज़िंग पावर (पत्नी की ओट)।
- दूसरा मित्र: सब चाहिए था, इसलिए कुछ नहीं लिया—अनिश्चय।
- बाज़ार का जादू: आँख की राह; भरी जेब + खाली मन पर सबसे ज़्यादा।
- उपाय: मन खाली हो तो बाज़ार न जाओ (लू में पानी पीकर); पर मन बंद भी न करो।
- भगत जी: छह आने की कमाई, बचा चूरन मुफ़्त; बाज़ार में केवल जीरा-नमक; जादू बेअसर।
- पैसे की व्यंग्य-शक्ति: मोटर का प्रसंग; निर्बल ही धन की ओर झुकता है।
- बाज़ारूपन = कपट, सद्भाव की कमी, शोषण; ऐसा अर्थशास्त्र अनीति-शास्त्र।
जैनेंद्र कुमार – बाज़ार दर्शन: frequently asked questions
'बाज़ार दर्शन' का मूल संदेश क्या है?
बाज़ार का उपयोग ज़रूरत के लिए करना चाहिए, दिखावे के लिए नहीं। जिसका मन भरा है, यानी जो जानता है कि उसे क्या चाहिए, उस पर बाज़ार का जादू नहीं चलता और वही बाज़ार को सार्थकता देता है।
पाठ में 'पर्चेज़िंग पावर' का क्या अर्थ है?
खरीदने की शक्ति, यानी पैसा। लेखक कहते हैं कि लोग इस शक्ति का रस लेने के लिए ज़रूरत से अधिक सामान खरीदते हैं।
भगत जी पर बाज़ार का जादू क्यों नहीं चलता?
क्योंकि उनका मन संतोष से भरा है और वे जानते हैं कि उन्हें क्या चाहिए। वे केवल ज़रूरत का जीरा और काला नमक लेकर लौट आते हैं; बाकी बाज़ार उनके लिए 'नहीं के बराबर' हो जाता है।
जैनेंद्र कुमार का परिचय दीजिए।
जैनेंद्र कुमार (1905-1990) का जन्म अलीगढ़ में हुआ। परख, सुनीता, त्यागपत्र, कल्याणी उनके उपन्यास और पाज़ेब, फाँसी उनके कहानी-संग्रह हैं। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार और पद्मभूषण मिला।
Based on: CBSE हिंदी (आधार) पाठ्यक्रम (302), कक्षा 12, 2026-27; NCERT आरोह भाग 2 (Reprint 2026-27), जैनेंद्र कुमार – बाज़ार दर्शन